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लेखक: space4knews

राष्ट्रीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में नेपल आर्मी का दबदबा कायम

नेपाल आर्मी ने 30वें पुरुष और 11वें महिला राष्ट्रीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में सभी 11 स्वर्ण पदक जीतकर अपना प्रभुत्व बनाए रखा है। त्रिपुरेश्वर में राखेप कवरड हॉल में आयोजित इस प्रतियोगिता में पुरुष वर्ग में 6 और महिला वर्ग में 5 स्वर्ण पदकों के लिए मुकाबला हुआ। 14 असार, काठमांडू।

प्रतियोगिता में पुरुष वर्ग में 55 किग्रा भार वर्ग में प्रेम चौधरी, 60 किग्रा में नितेश नेपाली, 70 किग्रा में गेशकुमार श्रेष्ठ, 80 किग्रा में दीपक श्रेष्ठ, 90 किग्रा से कम में मदन कार्की और 90 किग्रा से ऊपर गणेश प्रधान ने स्वर्ण पदक जीते। महिला वर्ग में 51 किग्रा से कम में आरती भोम्जन, 54 किग्रा में वर्षा श्रेष्ठ, 60 किग्रा में पुनम रावल, 65 किग्रा में चन्द्रकला थापा और 75 किग्रा में निरु गुरुङ ने पहली जगह हासिल की।

विजेताओं को शिक्षा तथा खेलकूद मंत्रालय के प्रमुख सलाहकार सिद्धी व्यंजनकार, सलाहकार राजू सिंह, राखेप कार्यकारी समिति के सदस्य पवन शाही, नेपाल ओलंपिक कमेटी के महासचिव राजीव श्रेष्ठ, आयोजक बॉक्सिंग संघ के अध्यक्ष राम अवाले तथा महासचिव मानबहादुर भण्डारी ने एक समारोह में सम्मानित किया।

सुँगुरको निधनपछि स्नेहा श्रेष्ठद्वारा गरियो सम्मानजनक दाह संस्कार

कुकुर, बिराला, घोडा जस्ता जनावरहरूको निधनपछि सम्मानपूर्वक दाह संस्कार हुने समाचार हामीले सुनिरहेका छौं। तर सम्भवत: नेपालमा पहिलो पटक सुँगुरको निधनपछि सम्मानजनक दाह संस्कार गरिएको छ। काठमाडौंमा बस्ने शाकाहारी र पशु अधिकारकर्मी स्नेहा श्रेष्ठले यो कार्य गरेका हुन्। उनले आफूले पालेको कार्लोट नामक सुँगुरको निधनपछि आइतबार दाह संस्कार गरेकी छन्। स्नेहाले सुँगुरलाई कहिल्यै जनावरको रूपमा नभई आफूमाथि बच्चा जस्तो भएकाले प्रेम गरिन्। उनले सुँगुरलाई छोरीसँग तुलना गर्दै आफू उसको आमा भएको भावना व्यक्त गरेकी छन्।

स्नेहाले यो सुँगुरलाई २०१९ मा एउटा फार्मबाट बचाएर ल्याएकी थिइन्। उनका अनुसार त्यो दिन जीवनकै सबैभन्दा खुसीका दिनहरूमध्ये एक थियो। तर आइतबार कार्लोटको मृत्युले उनलाई संसार अन्धकारमय भएको अनुभूति भएको छ। उनले सामाजिक सञ्जालमा कार्लोटको मृत्युसँग जोडिएका आफ्ना भावनाहरू यसरी व्यक्त गरेकी छन्: ‘मैले कार्लोटलाई ७ वर्षसम्म पालेँ। हरेक बिहान उठेर कार्लोटलाई हेर्ने बानी भएको थियो मलाई। तर आज त्यो ठाउँ खाली भइसकेको छ र त्योले मेरो मन चिराएको छ। धेरैले मलाई गाली गरे—सुँगुर किन पाल्छौ? केहीले यो जात फोहोर जनावर हो, हिलोमै बस्ने भनेर तिरस्कार गरे। तर मेरा लागि त्यो एउटा मात्र जात थियो—मायाको जात। माया गर्न जात, रंग, रूप वा नामले कुनै फरक पार्दैनन्। आज तिम्रो सम्झनामा आँसु बगाउँदै लेख्दा धेरैले हास्छन्, कसैले यति रोएको भनेर टिप्पणी गर्नेछन्। तर मलाई त्यसले कुनै असर गर्दैन,’ उनले लेखेकी छिन्।

कार्लोट उनीका लागि परिवार जस्तो थियो, जसले आफूलाई निःस्वार्थ माया गरेको उनले भनिन्। ‘मसँग तिम्रा हजारौं सम्झना छन्, तिम्रा फोटोहरू छन्, तिम्रो माया र प्रश्रयले भरिएको ७ वर्षको अमूल्य समय छ। तर ती सबै यादहरूले आज मलाई अझ धेरै रुवाइरहेका छन्,’ उनले थपिन्। स्नेहाले अर्को जन्ममा कार्लोट फेरि आफ्नो परिवारमा फर्केर आउने अनुरोध समेत गरेकी छन्।

जोर्डन के खिलाफ मेसी ने बेंच से गोल कर नया रिकॉर्ड बनाया

डी बॉक्स के बाहर जोर्डन के अमीर जामोस ने मेस्सी को धकेला, जिससे रेफरी ने फाउल का संकेत किया। उसी फाउल पर मेसी ने लंबी फ्री-किक लगाई, जो गोल हो गई। १४ असार, काठमांडू। फीफा विश्व कप २०२६ के तहत जोर्डन के खिलाफ मैच में अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी ने बेंच से मैदान में उतरकर गोल किया। मैच के ६०वें मिनट में मैदान में आए अर्जेंटिनी स्टार मेसी ने ८०वें मिनट में फ्री-किक के माध्यम से गोल किया। मेसी के गोल के बाद अर्जेंटीना ने मैच में ३-१ की बढ़त बना ली।

डी बॉक्स के बाहर जोर्डन के अमीर जामोस द्वारा मेसी को धकेलने पर रेफरी ने फाउल दिया था। उसी मौके पर मेसी की लंबी फ्री-किक ने गोल किया। यह जारी विश्व कप में मेसी का छठा गोल है। इससे पहले उन्होंने अल्जीरिया के खिलाफ हैट्रिक और ऑस्ट्रिया के खिलाफ दो गोल किए थे। फीफा विश्व कप में सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड बनाने वाले मेसी ने कुल १९ गोल किए हैं। उन्होंने इस मैच में एक और रिकॉर्ड भी बनाया। वे विश्व कप में लगातार ७ मैचों में गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बने। उन्होंने कतार विश्व कप में लगातार चार और इस विश्व कप में लगातार तीन मैचों में गोल किए हैं।

अर्घाखाँची में चार प्रजातियों के दुर्लभ गिद्धों का सफल प्रजनन, 33 बच्‍चे उड़ने में कामयाब

अर्घाखाँची जिले में इस वर्ष चार प्रजातियों के 33 गिद्धों के बच्‍चों ने सफलतापूर्वक पनपकर उड़ना शुरू किया है। गिद्ध विशेषज्ञ कृष्ण भुसाल के अनुसार, डंगर गिद्ध का सफल प्रजनन न केवल नेपाल में बल्कि वैश्विक संरक्षण अभियान के लिये भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। डिवीजन वन कार्यालय के सूचना अधिकारी केशव खड़कलें ने बताया कि पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए गिद्धों के संरक्षण को उच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

अर्घाखाँची जिला विश्व में दुर्लभ और संकटापन्न गिद्धों के संरक्षित आवास के रूप में विकसित हो रहा है। इस वर्ष के प्रजनन सत्र में यहां चार प्रजातियों के गिद्धों ने सफलता के साथ अपने बीजारोपण किये। अब तक 33 बच्‍चे सुरक्षित रूप से घोंसलों से उड़ने में सक्षम हुए हैं, यह जानकारी गिद्ध विशेषज्ञ कृष्ण भुसाल ने दी। जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों और चट्टानी पहाड़ी क्षेत्रों में बने घोंसलों में इस साल जोड़े उत्साहपूर्वक गिद्धों के बच्‍चे उगकर उड़ गए हैं।

विशेष रूप से, छत्रदेव गाउँपालिका के वन क्षेत्र में संकटापन्न डंगर गिद्ध ने सल्ला के पेड़ों पर 23 घोंसले बनाए, जिनमें से 15 घोंसलों से बच्‍चों ने सफल उड़ान भरी। ‘‘डंगर गिद्ध का इस तरह का सफल प्रजनन न केवल नेपाल में बल्कि विश्वव्यापी संरक्षण प्रयास के लिए भी महत्वपूर्ण है,’’ भुसाल ने कहा। इसके अलावा, मालारानी गाउँपालिका के घेराभिर में हिमाली गिद्ध ने 22 जबकि हाडफोर गिद्ध ने 3 घोंसले बनाए थे।

गिद्ध एक वर्ष में केवल एक अंडा देते हैं, इसलिए एक बच्‍चे का पालन-पोषण लंबा समय लेता है। सामान्यतः असोज–कार्तिक से प्रारंभ होकर प्रजनन चक्र वैशाख–जेठ तक चलता है, इसलिए इस दौरान प्रजनन दर में सुधार होना स्वाभाविक और बड़ी सफलता है,’ भुसाल ने बताया। ‘ऐसे समय में केवल एक वर्ष में 33 बच्‍चों का उड़ान भरना संरक्षण के दृष्टिकोण से अत्यंत सकारात्मक संकेत है।’ विश्व में दुर्लभ और संकटापन्न सेतो गिद्ध ने सन्धिखर्क, भूमिकास्थान, मालारानी और शितगंगा नगरपालिका के विभिन्न स्थानों पर घोंसले बनाए हैं और वर्तमान में बच्‍चों को पाल रहा है।

प्राकृतिक वातावरण के संतुलन में गिद्धों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। मृत जीवों के मांस को खाने वाले गिद्धों को प्रकृति का ‘सफाईकर्मी’ भी कहा जाता है। गिद्धों की संख्या में कमी से पर्यावरणीय प्रदूषण, रोग फैलने का खतरा और जैविक संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए इसके संरक्षण को उच्च प्राथमिकता दी जा रही है, यह जानकारी डिवीजन वन कार्यालय अर्घाखाँची के सूचना अधिकारी केशव खड़कलें ने दी। इस वर्ष चार प्रजातियों के गिद्धों के सफल प्रजनन और 33 बच्‍चों की उड़ान ने जिले की जैविक विविधता संरक्षण में नेपाल के संरक्षण अभियान के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

गाँजा सेवन करने वाले किशोरों में गंभीर मानसिक समस्याओं का जोखिम दोगुना

किशोरावस्था में गाँजा सेवन करने पर युवावस्था में साइकोटिक और बाइपोलर डिसऑर्डर जैसे गंभीर मानसिक रोगों का खतरा दोगुना हो जाता है, ऐसा एक अध्ययन में पाया गया है। क्यालिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने 4,63,396 किशोरों पर 26 वर्षों तक किए गए अध्ययन से गाँजे की लत और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध साबित किया है। अध्ययन की लेखिका डॉ. केली योङ-वुल्फ ने अभिभावकों और बच्चों को गाँजे के हानिकारक प्रभावों के बारे में तथ्यात्मक जानकारी देना आवश्यक बताया है। 14 असार, काठमांडू।

किशोरावस्था में गाँजा (कैनाबिस) का सेवन युवावस्था में गंभीर मानसिक रोगों के जोखिम को बढ़ाता है, यह बात एक अध्ययन में सामने आई है। ‘जामा हेल्थ फोरम’ जर्नल में प्रकाशित इस शोध ने प्रदर्शित किया कि गाँजा सेवन करने वाले किशोरों में मानसिक असंतुलन (साइकोटिक डिसऑर्डर) और ‘बाइपोलर डिसऑर्डर’ जैसी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम लगभग दोगुना हो जाता है। कैजर पर्मोनेन्टे पब्लिक हेल्थ इंस्टिट्यूट के ‘गेटिंग इट राइट फ्रॉम द स्टार्ट’ कार्यक्रम, क्यालिफोर्निया विश्वविद्यालय सान फ्रांसिस्को और क्यालिफोर्निया साउथर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने संयुक्त रूप से यह अध्ययन किया है।

इस अध्ययन में 13 से 17 वर्ष आयु समूह में शामिल 4,63,396 किशोरों के स्वास्थ्य की 26 वर्षों तक गंभीरता से निगरानी की गई। यह शोध नेशनल इंस्टिट्यूट ऑन ड्रग एब्यूज के वित्तीय सहयोग से 2016 से 2023 तक के बाल स्वास्थ्य परीक्षणों के इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्डों के विश्लेषण के माध्यम से तैयार किया गया है। शोध के दौरान गाँजा सेवन की सूचना मिलने पर औसतन 1.7 से 2.3 वर्ष बाद किशोरों में मानसिक रोग के लक्षण प्रकट होने लगे। यह दीर्घकालीन अध्ययन किशोरावस्था में गाँजा उपयोग से बाद में मानसिक रोगों के विकसित होने का ठोस प्रमाण प्रदान करता है।

नेदरल्यान्ड्स में होने वाले स्ट्रिट फुटबॉल विश्वकप के लिए एक्सट्रीम फुटबॉल फेवर थ्री भी थ्री चयन प्रतियोगिता आयोजित

लीग-कम नॉकआउट प्रणाली के तहत संचालित इस प्रतियोगिता में लीग चरण के मैचों के बाद प्रत्येक समूह के विजेता, उपविजेता तथा श्रेष्ठ तीसरे स्थान प्राप्त टीम सहित कुल 18 टीमें नॉकआउट चरण में प्रवेश करेंगी, जिससे कुल 64 टीमें नॉकआउट चरण में पहुंचेंगी। नेदरल्यान्ड्स में आयोजित होने वाले ISFA स्ट्रिट फुटबॉल विश्वकप के लिए नेपाल में चयन प्रतियोगिता 1 जुलाई से 8 जुलाई तक आयोजित की जाएगी। इस प्रतियोगिता में 95 टीमें हिस्सा लेंगी और विजेता टीम आगामी सितंबर में विश्वकप में नेपाल का प्रतिनिधित्व करेगी। प्रतियोगिता के मैच काठमाडौं के पाँच ऐतिहासिक स्थलों पर फ्लडलाइट व्यवस्था के साथ लीग-कम नॉकआउट के आधार पर खेले जाएंगे। १४ असार, काठमाडौं।

नेपाल में स्ट्रिट फुटबॉल के समृद्ध इतिहास को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से एक्सट्रीम फुटबॉल फेवर थ्री भी थ्री ISFA स्ट्रिट फुटबॉल विश्वकप के लिए चयन प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। एलपीएस मैनेजमेंट, एथलीट इनहांसमेंट सेंटर (AIC) और ट्रिपल टू प्रोड्क्शंस के संयुक्त आयोजन में यह प्रतियोगिता 1 से 8 जुलाई (असार १७ से २४) तक उपत्यका के विभिन्न स्थानों पर आयोजित की जाएगी।

प्रतियोगिता पूरी तरह से एक्सट्रीम फुटबॉल के सहयोग से होगी और आयोजकों ने बताया कि इसमें 95 टीमें भाग लेंगी। इन टीमों को 23 समूहों में विभाजित किया गया है। लीग-कम नॉकआउट के आधार पर संचालित इस प्रतियोगिता में लीग चरण के बाद प्रत्येक समूह के विजेता, उपविजेता और श्रेष्ठ तीसरे स्थान पर रहने वाली 18 टीमें नॉकआउट चरण में प्रवेश करेंगी, जिसमें कुल 64 टीमें होंगी। इसके बाद के चरणों में राउंड ऑफ 64, 32, 16, क्वार्टरफाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल मैच आयोजित किए जाएंगे।

प्रतियोगिता विजेता टीम आगामी 2 से 6 सितंबर तक नेदरलैंड्स के यूट्रेक्ट में आयोजित होने वाले ISFA स्ट्रिट फुटबॉल विश्वकप में भाग लेगी, यह जानकारी एलपीएस मैनेजमेंट के सीईओ एवं ISFA कंट्री हेड बिकल्प खरेल ने दी। विश्वकप में नेपाल का प्रतिनिधित्व करने के लिए 4 खिलाड़ी, 1 व्यवस्थापक और 1 प्रशिक्षक सहित कुल 6 सदस्यों की टीम जाएगी, जिसके लिए प्रायोजकों से सहयोग मिलेगा, खरेल ने बताया।

प्रतियोगिता के मैच ISFA के थ्री भी थ्री स्ट्रिट फुटबॉल नियमों के अनुसार आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक मैच 10 मिनट का होगा और साइज 4 के फूटसल बॉल का उपयोग किया जाएगा। काठमाडौं की मौलिक संस्कृति और स्ट्रिट फुटबॉल के वास्तविक रोमांचक वातावरण के सृजन के लिए समूह चरण के मैच पाँच ऐतिहासिक स्थानों पर आयोजित किए जाएंगे। ब्राजील की प्रसिद्ध सांबा स्ट्रिट फुटबॉल शैली से मेल खाने और स्थानीय संस्कृति को जोड़ने हेतु कुमा नानी, टेकु, तबाहल, लगन, ओमबहाल और तेबहाल संकट क्षेत्रों में ये मैच होंगे।

मैच दोपहर 3 बजे से शाम 8 बजे तक फ्लडलाइट की रोशनी में खेले जाएंगे और मैच अवधि में विशेष संगीत और मनोरंजक प्रस्तुतियां भी होंगी, आयोजकों ने बताया। वर्ष 2023 में स्थापित इंटरनेशनल स्ट्रिट फुटबॉल एसोसिएशन (ISFA) विश्व के स्ट्रिट फुटबॉल खिलाड़ियों को एक ही छत के नीचे लाने का लक्ष्य रखता है। पिछले वर्ष नेपाल ने लात्विया में हुए ISFA स्ट्रिट फुटबॉल विश्वकप में भाग लिया था।

जुआ खेलते २१ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया

काठमांडू के सोल्टीमोड और चितवन के भरतपुर में जुआ खेलते हुए पुलिस ने २१ लोगों को गिरफ्तार किया है। सोल्टीमोड से गिरफ्तार १० लोगों के साथ दो लाख तेइस हजार पांच रुपये और २२ पत्ते बरामद किए गए हैं। चितवन के पुलचोक से ११ लोगों को ८० हजार चार सौ पैंसठ रुपये और चार पत्तों के साथ हिरासत में लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

नेपाल पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर जुआ खेलते हुए २१ लोगों को गिरफ्तार किया है। काठमांडू महानगरपालिका-१३ सोल्टीमोड में दरेगरी बसने वाले सिन्धुपाल्चोक के दिनेश लामाको कमरे में जुआ खेलते हुए शनिवार शाम पुलिस ने १० लोगों को पकड़ लिया। पुलिस ने उनसे दो लाख तेइस हजार पाँच रुपये नकद और २२ पत्तों के साथ उन्हें हिरासत में लिया है, जिसमें जिला पुलिस परिसर काठमांडू भी शामिल है।

इसी तरह, चितवन के भरतपुर महानगरपालिका-३ पुलचोक में जुआ खेलते हुए ११ लोगों को गिरफ्तार किया गया। वड्डा पुलिस कार्यालय नारायणगढ से आए दल ने उन्हें ८० हजार चार सौ पैंसठ रुपये नकद और चार पत्तों के साथ पकड़ा। पुलिस ने कहा है कि इस संबंध में आवश्यक जांच जारी है।

फ्रांस के टोम्ब्लेन में जहाज दुर्घटना, ११ की मौत

समाचार सारांश

OK AI द्वारा निर्मित। सम्पादकीय समीक्षा गरिएको।

  • पूर्वी फ्रांस के टोम्ब्लेन में स्काइडाइविंग करने वाले लोगों को लेकर जा रहा जहाज दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें पायलट समेत 11 लोगों की मौत हुई।
  • दुर्घटना में फंसे जहाज का संबंध पैराशूट प्रशिक्षण स्कूल से था और यह नैंसी-एसे एयरफील्ड से उड़ान भर रहा था।
  • पुलिस ने स्थानीय लोगों से हवाईअड्डे के आसपास के इलाक़े से दूर रहने का आग्रह किया है, जबकि गृह मंत्री घटनास्थल की ओर रवाना हो चुके हैं।

पूर्वी फ्रांस के टोम्ब्लेन शहर में स्काइडाइवर्स को लेकर जा रहे एक जहाज के दुर्घटनाग्रस्त होने की जानकारी मिली है।

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस दुर्घटना में पायलट सहित 11 लोगों की मौत हुई है।

स्थानीय मीडिया ने बताया कि यह विमान एक पैराशूटिंग स्कूल का था और नैंसी-एसे एयरफील्ड से उड़ान भरने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हुआ।

पुलिस ने म्यूरथे-एट-मोसेल जिले के हवाईअड्डे के आसपास के क्षेत्र से स्थानीय लोगों को दूर रहने का आग्रह किया है।

फ्रांस के गृहमंत्रालय ने पुष्टि की है कि गृह मंत्री घटनास्थल की ओर रवाना हो गए हैं।

अर्जेन्टिना बिना पराजय नकआउट चरण में पहुंचा

डालास स्टेडियम में रविवार सुबह हुए समूह चरण के अंतिम मैच में अर्जेन्टिना ने जोर्डन को ३-१ से हराकर नकआउट चरण में प्रवेश किया। पिछले विजेता अर्जेन्टिना फीफा विश्वकप २०२६ के नकआउट चरण में बिना पराजय के पहुंचे हैं। समूह चरण के अंतिम मैच में अर्जेन्टिना ने जोर्डन को ३-१ के अंतर से हराया।

मैच में अर्जेन्टिना के लिए जियोवानी लो सेल्सो, लाउटारो मार्टिनेज और लियोनेल मेसी ने एक-एक गोल किए। जोर्डन के मूसा अल-तमारी ने सांत्वना स्पर्श गोल किया। मैच के १९वें मिनट में जियोवानी ने फ्रीकिक से गोल कर अर्जेन्टिना को पहली बढ़त दिलाई। ३१वें मिनट में मार्टिनेज ने पेनाल्टी से गोल कर अर्जेन्टिना की बढ़त दुगनी कर दी।

५५वें मिनट में जोर्डन के अल-तमारी ने गोल कर वापसी की कोशिश की। लेकिन दूसरे हाफ में मैदान में उतरे कप्तान मेसी ने ८०वें मिनट में गोल कर अल-तमारी की कोशिश को निरस्त कर दिया। समूह ‘जे’ में अर्जेन्टिना ने ३ मैचों से ९ अंक हासिल किए। समान ४ अंक वाली अल्जीरिया और ऑस्ट्रिया नकआउट चरण के लिए दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। जोर्डन बगैर अंक के रह गया।

विद्या भण्डारी: नेपाल के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी प्रणाली उपयुक्त नहीं है

पूर्व राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी ने नेपाल की शासन प्रणाली में प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी प्रणाली उपयुक्त नहीं होने का निष्कर्ष व्यक्त किया है। मदन भण्डारी की जन्मजयन्ती कार्यक्रम में संबोधन के दौरान उन्होंने संविधान संशोधन के संदर्भ में यह दृष्टिकोण जाहिर किया। उन्होंने कहा, “प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी हमारी देश के लिए उपयुक्त नहीं है, यह मेरा निष्कर्ष है।” १४ असार, काठमांडू।

विद्यादेवी भण्डारी ने नेपाल के लिए प्रत्यक्ष कार्यकारी निर्वाचित प्रणाली उपयुक्त न होने की बात कही। मदन भण्डारी की जन्मजयन्ती के अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में उन्होंने यह बात व्यक्त की। संविधान संशोधन के विषय में चर्चा करते हुए उन्होंने आगे कहा, “प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी हमारी देश के लिए उपयुक्त नहीं है, यह मेरा निष्कर्ष है।”

विश्व कप के फाइनल में ट्रंप द्वारा ट्रॉफी सौंपने को लेकर आलोचना शुरू

फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फान्टिनो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विश्व कप के फाइनल मैच में भाग लेकर विजेता को ट्रॉफी सौंपने की संभावना जताई है। फीफा और ट्रंप के करीबी संबंधों ने खेल की राजनीतिक तटस्थता की अवधारणा पर सवाल उठाए हैं, जिससे विश्लेषकों और पूर्व अधिकारियों ने इसे आचार संहिता के गंभीर उल्लंघन के रूप में बताया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने 2026 के विश्व कप और ओलंपिक को सॉफ्ट पावर के रूप में उपयोग करते हुए अपनी कूटनीतिक पकड़ बढ़ाने की रणनीति बनाई है।

१४ आसार, काठमांडू। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप विश्व कप के फाइनल मैच में भाग लेकर ट्रॉफी सौंप सकते हैं, ऐसा फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फान्टिनो ने कहा है। ट्रंप अब तक इस विश्व कप के किसी भी मैच को सीधे देखने नहीं आए हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में १९ जुलाई को होने वाले फाइनल से पहले वे मैदान पर मौजूद हो सकते हैं।

११ जून को शुरू हुए फीफा विश्व कप २०२६ अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में आयोजित हो रहा है। इन्फान्टिनो ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘‘हम राष्ट्रपतिजी के साथ फाइनल मैच का आनंद लेंगे और विजेताओं को ट्रॉफी सौंपेंगे।’’ जब उनसे पूछा गया कि क्या वे ट्रंप के साथ ट्रॉफी देंगे, तो उन्होंने कहा, ‘‘बिल्कुल, हम हमेशा साथ रहेंगे।’’

इस प्रतियोगिता के १०४ मैचों में से ७८ अमेरिकामें आयोजित किए जा रहे हैं, बाकी मेक्सिको और कनाडा में हैं। व्हाइट हाउस के विश्व कप कार्यदल के कार्यकारी निदेशक एंड्रयू जुलियानी ने ‘द टेलीग्राफ’ को बताया है कि ट्रंप ‘‘लोगों की जिज्ञासा बढ़ाने में रुचि रखते हैं’’ और अपनी व्यस्तता के कारण अब तक किसी भी मैच में नहीं पहुंचे हैं।

ट्रम्प पिछले सप्ताह व्हाइट हाउस में हुए UFC कार्यक्रम में भाग ले रहे थे। हाल ही में वे न्यूयॉर्क में NBA फाइनल मैच देखने गए, जहां वे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे। उस खेल में दर्शकों ने उन्हें हूटिंग की थी। इस तीसरे मैच में सान एंटोनियो स्पर्स ने न्यूयॉर्क निक्स को ११५-१११ से हराया था।

पिछले वर्ष गर्मियों में भी मेटलाइफ स्टेडियम में चेल्सी के कप्तान रिस जेम्स को क्लब विश्व कप ट्रॉफी सौंपते हुए ट्रंप विजेता पोडियम पर थे। उनके व्यवहार से कुछ खिलाड़ियों को असमंजस हुआ था। चाहे ईरान युद्ध जैसे मामले हों या उनकी सार्वजनिक आलोचना, वे कूटनीतिक रूप से हार्ड पावर में विश्वास रखते हैं, लेकिन खेल के माध्यम से अपने ‘मागा’ अभियान का प्रदर्शन कर इसे सॉफ्ट पावर के रूप में भी इस्तेमाल करना चाहते हैं।

ट्रम्प का विश्व कप एजेंडा अमेरिका की विदेश नीति में नई दिशा लेकर आया है। पोलिटिको के विश्लेषकों के अनुसार, ‘‘अमेरिकी विदेश मंत्रालय को अब खुद को ‘स्पोर्ट्स मंत्रालय’ कहना पड़ेगा।’’ पोलिटिको को प्राप्त सरकारी दस्तावेज़ और अधिकारियों के साथ बातचीत से पता चलता है कि विश्व कप को विदेश विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना गया है। इन दस्तावेजों में ‘स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी प्लेबुक’ भी शामिल है, जिसमें विश्व कप और ओलंपिक जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में अमेरिका की सॉफ्ट पावर और विदेशी निवेश बढ़ाने की योजना है। साथ ही, ट्रंप की कई सामाजिक नीतियों को आगे बढ़ाने की भी योजना है।

पिछले दिसंबर में विदेश मंत्रालय के कर्मचारियों को ९ पृष्ठों की ‘स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी प्लेबुक’ वितरित की गई थी, जिसमें ‘खेल दशक’ अवधारणा का कैसे उपयोग किया जाए, इसका निर्देश था। इस अवधारणा में २०२६ विश्व कप, २०२८ और २०३४ ओलंपिक समेत अनेक बड़े खेल आयोजनों का अमेरिका में आयोजन शामिल है।

ट्रम्प ने २०१६ के अपने प्रथम कार्यकाल से ही फीफा के साथ निकट संबंध बनाए हैं। उस समय फीफा भ्रष्टाचार के सबसे गंभीर आरोपों में फंसा था। वरिष्ठ फुटबॉल अधिकारी २० करोड़ डॉलर से अधिक घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार हुए थे। सेप ब्लाटर के इस्तीफा देने के बाद इन्फान्टिनो फीफा के अध्यक्ष बने। एफबीआई ने फीफा को अंतरराष्ट्रीय अपराध का उदाहरण माना था, और ट्रंप ने २०२६ के विश्व कप के आयोजन में समझौते के माध्यम से सक्रिय सहयोग किया। ट्रंप ने खुले तौर पर कहा था कि विश्व कप शब्द सुनते ही वे इस अभियान में शामिल होना चाहते थे।

इस विश्व कप और ट्रंप को लेकर व्यापक बहस और आलोचना हो रही है। फीफा के इतिहास और तटस्थता के सिद्धांत के विपरीत यह कदम खेल विश्लेषक, पत्रकारों और खिलाड़ियों में असंतोष का कारण बन रहा है। खेल विशेषज्ञ इसे फीफा की राजनीतिक तटस्थता की नीति का उल्लंघन और शक्ति के सामने झुकने का कृत्य मानते हैं।

प्रसिद्ध खेल इतिहासकार और फुटबॉल विश्लेषक डेविड गोल्डब्लाट ने इन्फान्टिनो के अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने के प्रयासों की आलोचना करते हुए ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ से कहा, ‘‘इन्फान्टिनो जानता है कि एक संकीर्ण, आत्मकेंद्रित और प्रतिशोधी नेता को कैसे नियंत्रित किया जाए। वे चमक-दमक और चापलूसी के मेल से ऐसे नेताओं को प्रभावित करने में विश्वास रखते हैं।’’

फीफा सुशासन समिति के पूर्व अध्यक्ष मिगुएल मादुरो ने भी फीफा की आंतरिक स्वतंत्रता और तटस्थ छवि पर संकट आने की बात कही है। मादुरो ने कहा, ‘‘फीफा नेतृत्व ने संस्थान की तटस्थ छवि बनाये रखने का दबाव महसूस करना बंद कर दिया है।’’ इससे पहले भी मादुरो ने ट्रंप और इन्फान्टिनो के कदमों की आलोचना की थी। उन्होंने इन्फान्टिनो के इस कदम को फीफा आचार संहिता के अनुच्छेद १५ का स्पष्ट उल्लंघन माना, जो फीफा और इसके अधिकारियों को राजनीतिक मामलों में पूरी तटस्थता बनाए रखने का निर्देश देता है।

मेसी और रोनाल्डो के बीच ‘ड्रीम मैच’ जल्द नहीं होगा, केवल फाइनल में ही संभव

फीफा विश्व कप 2026 में लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो के बीच अपेक्षित मुकाबले की संभावना बहुत कम नजर आ रही है। पोर्चुगल समूह चरण में उपविजेता बनने के कारण ये दोनों टीमें अलग-अलग समूहों में आ गई हैं। अब मेसी और रोनाल्डो के बीच मुकाबला केवल फाइनल में हो सकता है, जिसके लिए दोनों टीमों को नकआउट के चार मैच जीतने होंगे।

काठमांडू। फीफा विश्व कप 2026 में लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो के बीच प्रतिस्पर्धा होगी या नहीं, इस पर फुटबॉल प्रेमियों में काफी उत्सुकता थी। उत्तर अमेरिका में हो रहे इस विश्व कप में छठी बार हिस्सा ले रही अर्जेंटीना की कप्तान मेसी और पुर्तगाल के रोनाल्डो के बीच भिड़ंत देखने के लिए कई समर्थक उत्साहित थे। यदि अर्जेंटीना और पुर्तगाल दोनों अपने-अपने समूह के विजेता बनते, तो क्वार्टर फाइनल में इन दोनों टीमों का मुकाबला संभव था।

इसी वजह से मेसी और रोनाल्डो का मैच कई फुटबॉल प्रेमियों के लिए ‘ड्रीम गेम’ जैसा माना जा रहा था। लेकिन पुर्तगाल ने हालिया मुकाबले में कोलंबिया के साथ ड्रॉ खेला, जिससे अर्जेंटीना और पुर्तगाल के बीच जल्दी मुकाबले की संभावना कम हो गई है। मेसी की अर्जेंटीना ने समूह J का विजेता बनते हुए क्वालीफाई किया है, जबकि रोनाल्डो की पुर्तगाल समूह H की उपविजेता रही। इसका अर्थ है कि दोनों टीमें अलग-अलग समूह से आगे बढ़ेंगी। यदि दोनों टीमें जीतती रहीं, तभी फाइनल में मेसी और रोनाल्डो का मुकाबला संभव होगा। इसके लिए अर्जेंटीना और पुर्तगाल को नकआउट चरण में चार-चार मैच जीतने होंगे।

उपत्यका और काभ्रे में बर्डफ्लू तीव्र, काग मुख्य संक्रमण फैलाने वाला कारक

समाचार सारांश

समीक्षित।

  • काठमांडू उपत्यका और काभ्रेपलाञ्चोक में बर्डफ्लू संक्रमण तेजी से फैलने के कारण पशु सेवा विभाग ने ५७ स्थानों पर रोग के संक्रमण की पुष्टि की है।
  • पशु सेवा विभाग ने बर्डफ्लू नियंत्रण के लिए पूरे देश में ६ लाख से अधिक मुर्गियाँ, १० लाख अंडे और लगभग दो लाख किलो चारा नष्ट किया है।
  • सरकार ने संक्रमित पक्षियों के प्रबंधन के लिए ५२ करोड़ रुपए का राहत कोष बनाया है और उपभोक्ताओं को मांस को अच्छी तरह पकाकर खाने की सलाह दी है।

१४ असार, काठमांडू। हाल के दिनों में काठमांडू उपत्यका और काभ्रेपलाञ्चोक में बर्डफ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) का संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है। पशु सेवा विभाग ने उपत्यका के तीन जिलों—काठमांडू, ललितपुर, भक्तपुर और काभ्रेपलाञ्चोक में रोजाना संक्रमण की जानकारी दी है।

स्थानीय और छोटे स्तर पर पाले गए मुर्गियों में रोग देखे जाने से नियंत्रण में चुनौती बढ़ गई है।

पशु सेवा विभाग के अनुसार १० असार तक इन चार जिलों के ४० स्थानों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी, जबकि गुरुवार से शनिवार तक तीन और दिनों में १७ स्थानों पर संक्रमण देखा गया है। अब कुल ५७ स्थानों पर बर्डफ्लू फैल चुका है।

विभाग के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. मुकुल उपाध्याय के मुताबिक भक्तपुर जिले में यह रोग सबसे अधिक पाया गया है। भक्तपुर में केवल २५ स्थानों पर संक्रमण की पुष्टि हुई है और चांगुनारायण क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित है।

इसी प्रकार सूर्यविनायक, मध्यपुर थिमी जैसे क्षेत्रों में छोटे फार्मों में भी बर्डफ्लू फैला है। काठमांडू के कीर्तिपुर, टोखा, कागेश्वरी मनोहरा और बूढानीलकण्ठ में १५ स्थानों पर संक्रमण देखा गया, जबकि ललितपुर के गोदावरी, महालक्ष्मी और सुनाकोठी में १२ स्थानों पर संक्रमण फैला है। उपत्यका के बाहर काभ्रेपलाञ्चोक के पनौती और बनेपा क्षेत्र के पांच व्यावसायिक फार्मों में भी संक्रमण की पुष्टि हुई है। १० असार तक काभ्रेपलाञ्चोक में केवल दो स्थानों पर संक्रमण पाया गया था।

‘मरे हुई मुर्गियों को यूं फेंकने पर मनुष्यों को संक्रमण का खतरा’

वर्तमान में संक्रमण को नियंत्रित करना कठिन बताया गया है, डॉ. उपाध्याय ने कहा कि “पहले बड़े व्यावसायिक फार्मों में रोकथाम आसान थी, लेकिन अब काठमांडू में स्थानीय स्तर पर पाली गई मुर्गियों में संक्रमण फैल रहा है, जहां रोग पहचानना मुश्किल है।”

उन्होंने बताया, “काठमांडू उपत्यका में ‘काग’ वायरस फैलाने वाले मुख्य संवाहक बन गए हैं। किसान मरी हुई मुर्गियों को बोरे या झोले में रखकर कठिन स्थानों पर फेंक देते हैं, जिससे काग ये संक्रमित मुर्गियों के अंग-प्रत्यंग खाकर संक्रमण को अन्य स्थानों तक फैला रहे हैं।”

डॉ. उपाध्याय के अनुसार संक्रमित मुर्गियों का मांस खाने वाले काग उड़कर नए स्थान पर पहुंचते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता है। इसलिए किसानों से अपील की गई है कि वे मरी हुई मुर्गियों को बेवजह न फेंकें, बल्कि गड्ढे में दफनाएं। संक्रमण नियंत्रण में नाकामी पर वायरस में नई प्रकारें सामने आ सकती हैं, जिससे मनुष्यों तक संक्रमण का उच्च खतरा रहेगा।

उन्होंने कहा, “कागों के नए स्थानों पर जाकर घास तोड़ना, दाना खाना और अन्य पक्षियों से संपर्क में आना संक्रमण को तेजी से फैलाता है। कागों की गतिविधि और उड़ान ने उपत्यका में बर्डफ्लू का तीव्र प्रसार किया है।”

६ लाख से ज्यादा मुर्गियाँ और लाखों अंडे नष्ट

सरकार ने संक्रमण रोकने के लिए बड़े पैमाने पर मुर्गियों और पक्षियों से जुड़ी वस्तुओं को नष्ट किया है। डॉ. उपाध्याय के अनुसार अब तक पूरे देश में ६ लाख ६७,५०० से अधिक मुर्गियाँ नष्ट की जा चुकी हैं। केवल उपत्यका के तीन जिलों में करीब १ लाख ४८ हजार मुर्गियाँ मारी गई हैं।

देश में लगभग ९ लाख ९४ हजार ६ सय ४९ अंडे और १ लाख ९५ हजार ५ सय ९५ किलो चारा भी नष्ट किया गया है। संक्रमित क्षेत्रों में स्थानीय तह, जिला, प्रदेश एवं संघीय सरकारों की समन्वय से रैपिड रिस्पांस टीम सक्रिय होकर मुर्गियाँ नष्ट करने और खोरों की सफाई कर रही है।

राहत के लिए ५२ करोड़ रुपये का प्रबंध

कुखुरा नष्ट हुए किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने ५२ करोड़ रुपये का कोष बनाया है। यह राशि अर्थ मंत्रालय से पशु सेवा विभाग को भेज दी गई है।

डॉ. उपाध्याय ने बताया, “शुरुआत में राहत कोष में केवल २ करोड़ रुपये थे, बाद में और राशि जोड़कर कुल ५२ करोड़ रुपये कर दिए गए हैं।” उनके अनुसार देश भर में बर्डफ्लू से लगभग ५७ करोड़ रुपये का प्रारंभिक नुकसान हुआ है। सरकार नुकसान का ७५ फीसदी हिस्सा ही राहत के रूप में देगी, इसलिए ५२ करोड़ रुपये से उपत्यका और कोशी प्रदेश के किसानों को यह राहत अब तक मिल पाएगी।

डेढ़ महीने पहले कोशी प्रदेश के किसानों से राहत के लिए आवश्यक दस्तावेज मांगे जा चुके हैं और उपत्यका के किसानों को जल्द ही राहत वितरण किया जाएगा। अतिरिक्त राशि अगली वित्तीय वर्ष के बजट से होगी।

४ चैत २०८२ को कोशी प्रदेश के मोरङ जिले के सुंदरहरैंचा-४ और उर्लाबारी-८ में पहला बर्डफ्लू मामला पाया गया था, जिसके बाद यह देश के अन्य भागों में फैल गया।

विभाग के अनुसार ४ चैत से अब तक ११ जिलों में संक्रमण फैला है। काठमांडू, ललितपुर, भक्तपुर, काभ्रे के अलावा चितवन, झापा, मोरङ, सुनसरी, नवलपरासी पश्चिम, बारा और महोत्तरी में संक्रमण पर नियंत्रण पाया जा चुका है।

चितवन में ५७,०६३ मुर्गियाँ, २,९५,५०० अंडे और १२,००० किलो चारा नष्ट किया गया है। झापा में २०,०९० मुर्गियाँ, ९७,४५० अंडे और १०,४६५ किलो चारा, मोरङ में १,०१,८६० मुर्गियाँ, ९८,०३२ अंडे और २३,८१० किलो चारा नष्ट हुआ है।

सुनसरी में २,८५,५६४ मुर्गियाँ, ४,२७,५८० अंडे और १,२०,२२५ किलो चारा नष्ट हुआ। नवलपरासी पश्चिम में २८० मुर्गियाँ और १०० किलो चारा, बारा में २,८६५ मुर्गियाँ, ४,११२ अंडे और ३,१२५ किलो चारा तथा महोत्तरी में ७८ मुर्गियाँ नष्ट की गई हैं।

सरकार अभी राहत वितरण कर रही है, लेकिन संक्रमण पूर्ण रूप से नियंत्रित न होने के कारण किसानों और पोल्ट्री क्षेत्र में महत्वपूर्ण आर्थिक नुकसान हो रहा है।

विभाग के महानिदेशक डॉ. उमेश दाहाल के अनुसार, रोग नियंत्रण में सुधार हो रहा है, लेकिन पूरी तरह नियंत्रण करना अभी भी चुनौतीपूर्ण है। “विशेष रूप से बायोसेक्युरिटी न रखने वाले और स्थानीय स्तर पर पाले गए मुर्गियों में संक्रमण अधिक देखा गया है। बर्डफ्लू वायरस कोविड-19 से भी तेज़ी से फैल सकता है।” उन्होंने कहा।

भक्तपुर के चांगुनारायण और सूर्यविनायक अब बर्डफ्लू के मुख्य ‘हॉटस्पॉट’ बन गए हैं और वहां नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं।

रात १२ बजे तक ‘रिस्पांस टीम’ सक्रिय

विभाग ने कहा कि बर्डफ्लू नियंत्रण में प्रभावकारी उपचार और टीका नहीं हैं, इसलिए रोग के पाए जाने वाले स्थानों पर संक्रमित पक्षियों को नष्ट करना ही एकमात्र विकल्प है।

डॉ. दाहाल ने कहा, “इस रोग का कोई इलाज या प्रभावी टीका नहीं है। जहां संक्रमण पाया गया वहां से वायरस के फैलने से रोकने के लिए पक्षियों को नष्ट करना आवश्यक है। हमारी टीम रात ११ से १२ बजे तक सक्रिय रहती है और तीव्र प्रतिक्रिया करती है।”

बर्डफ्लू के डर से मुर्गे के मांस का व्यवसाय प्रभावित

बर्डफ्लू संक्रमण फैलने से उपभोक्ताओं में भय बढ़ा है, जिससे मुर्गे के मांस की बिक्री और उपभोग में महत्वपूर्ण गिरावट आई है।

राष्ट्रीय कुखुरा बिक्री व्यवसायी संघ के अनुसार उपत्यका में मुर्गे के मांस की बिक्री २० से ३० प्रतिशत तक घट गई है।

संघ के अध्यक्ष जंगबहादुर बीसी ने कहा, “सामान्य रूप से काठमांडू में रोजाना ३ लाख किलो मांस की मांग होती है, जो अब घटकर लगभग २ लाख से २ लाख ४० हजार किलो रह गई है।”

इससे राजधानी में दैनिक मांस की खपत लगभग ६० हजार किलो कम हुई है और मांस के दाम भी कम हो गए हैं।

आइकालु मीट सेंटर के संचालक कृष्णराम खड्की ने बताया कि उनके दुकान पर मुर्गे के मांस की बिक्री ७० प्रतिशत तक घट गई है।

मुर्गे के मांस की खपत में कमी के कारण उपभोक्ताओं का झुकाव बकरी के मांस की ओर हो गया है। खड्की के अनुसार बकरी के मांस का व्यापार २० से २५ प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन जिंदा बकरी की कमी है और मांग के अनुसार उपलब्ध नहीं है।

“बाजार में जिंदा बकरी की कमी है, मांग बढ़ने से कीमतें महंगी हुई हैं। पहले प्रति किलो ७७५ रुपये में बिकने वाला मांस अब ८०० से ८५० रुपये तक पहुंच गया है,” उन्होंने कहा।

खड्की के मुताबिक पहले बाजार में १४०० रुपये प्रति किलो था बकरी का मांस, जो अब १५०० रुपये हो गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च तापमान पर बर्डफ्लू वायरस नष्ट हो जाता है, इसलिए उपभोक्ता आवश्यक सावधानी बरतकर मांस और अंडे का सेवन कर सकते हैं।

पशु सेवा विभाग ने मांस या अंडे को कम से कम ७० डिग्री सेल्सियस तापमान पर पकाकर खाना सलाह दी है। साथ ही मांस काटने के चाकू, आंचल, बर्तन और रसोई की सफाई पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया गया है।

विभाग का अनुरोध

विभाग ने पक्षी पालकों से उच्च सतर्कता बरतने, फार्मों में बायोसेक्युरिटी का सख्ती से पालन करने, पक्षियों में कोई असामान्य लक्षण दिखने या मौत होने पर निकटतम पशु सेवा केंद्र को तुरंत सूचित करने का आग्रह किया है।

फार्म परिसर में जैविक सुरक्षा के नियमों का पालन सख्ती से करने, पुराने कागजी अंडा बक्से पुनः प्रयोग न करने और फार्म क्षेत्र में प्रवेश से पहले परिवहन साधन की निर्जीवनिका (डिसइंफेक्शन) आवश्यक रूप से करने की सलाह दी गई है।

इसके साथ ही काग और जंगली पक्षियों से घरेलू पक्षियों को बचाने के लिए जैविक सुरक्षा मानकों को लागू करने, पक्षिजन्य उत्पादों के परिवहन के दौरान पशु स्वास्थ्य प्रमाणपत्र साथ लेकर चलने की चेतावनी दी गई है।

सरकारी पशु सेवा संस्थान से कहा गया है कि वे कोरोना संक्रमण नियंत्रण सहयोग के साथ फार्म या पक्षी बिक्री स्थानों पर बीमार या मृत पक्षी पाए जाने पर तुरंत सूचना देने के लिए सभी संबंधित पक्षकारों को आग्रह करें।

दिल्ली में सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू

सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने NIT UG पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जनता रामंतर पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया है। काकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजित दीपक ने दिल्ली पुलिस पर वांगचुक को पानी और सफाई की सुविधाएँ उपलब्ध न कराकर असहयोग करने का आरोप लगाया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने तक वांगचुक का अनशन जारी रहेगा, सीजेपी ने स्पष्ट किया है।

सोनम वांगचुक का आमरण अनशन NIT UG पेपर लीक के खिलाफ विरोध स्वरूप किया गया है। सीजेपी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने की मांग को लेकर वांगचुक के अनशन जारी रहने की बात कही है। वांगचुक के आमरण अनशन शुरू करने के बाद अभिजित दीपक ने सोशल मीडिया इंस्टाग्राम पर दिल्ली पुलिस पर सहयोग न करने का आरोप लगाया।

दीपक ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, ‘सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल की घोषणा करने के बाद, दिल्ली पुलिस ने जनता रामंतर में सफाई सेवा बंद कर दी है। वहां पानी की व्यवस्था भी नहीं है और सफाई सुविधाएं अनुपस्थित हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘वांगचुक के स्वास्थ्य संबंधी बार-बार की गई अपील और चिंताओं के बावजूद पुलिस सहयोग नहीं कर रही है। हमें डर है कि अन्य बुनियादी सुविधाएं भी बंद कर दी जाएंगी। पुलिस क्या योजना बना रही है?’

समूह चरण से बाहर हुए १६ टीम, उरुग्वे बिना जीत के हुआ बाहर

दो बार के चैंपियन उरुग्वे भी समूह चरण में बिना जीत के बाहर हो गया है। फीफा विश्व कप २०२६ के समूह चरण के मुकाबले समाप्त होने के बाद नॉकआउट चरण में पहुंचने वाली ३२ टीमों का निर्धारण हो चुका है। इस बार विश्व कप में टीमों की संख्या ४८ तक पहुंचाई गई है, और १२ समूहों से श्रेष्ठ टीमों ने नॉकआउट चरण में प्रवेश किया है।

काठमांडू। फीफा विश्व कप २०२६ के समूह चरण के सभी ७२ मैचों के बाद नॉकआउट चरण में प्रवेश करने वाली ३२ टीमों की अंतिम सूची तैयार हो गई है, जबकि १६ टीमें समूह चरण में ही बाहर हो गई हैं। इनमें से दो बार की पूर्व विजेता उरुग्वे भी बिना कोई जीत हासिल किए समूह चरण से ही बाहर हो गई है। इस बार ४८ टीमों की व्यवस्था में समूह विजेता और उपविजेता के साथ-साथ तीसरे स्थान पर रहने वाली सर्वश्रेष्ठ ८ टीमों को भी नॉकआउट चरण के लिए मौका दिया गया था, लेकिन उरुग्वे इसमें सफल नहीं हो सका।

१२ समूहों में बांटकर समूह चरण के मैच आयोजित किए गए थे। प्रत्येक समूह में चौथे स्थान पर रहने वाली १२ टीमें और तीसरे स्थान पर रहते हुए श्रेष्ठ ८ टीमों में जगह न बना पाने वाली ४ टीमें, कुल मिलाकर १६ टीमों की विश्व कप यात्रा समूह चरण में समाप्त हो गई। तीसरे स्थान पर रहने के बावजूद क्वालीफाई न कर पाने वाली टीमों में उरुग्वे, दक्षिण कोरिया, ईरान और स्कॉटलैंड शामिल हैं। वहीं, प्रत्येक समूह में अंतिम स्थान पर रहने वाली टीमों में चेक गणराज्य, कतर, हाइती, तुर्की, कुरासाओ, ट्यूनीशिया, न्यूजीलैंड, सऊदी अरब, ईरान, जॉर्डन, उज्बेकिस्तान और पनामा हैं।