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लेखक: space4knews

परराष्ट्रमंत्री शिशिर खनाल ने औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया

समाचार सारांश

समीक्षा गरिएको छ।

  • नवनियुक्त परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल ने १३ चैत्र को राष्ट्रपति भवन शितल निवास में शपथ ग्रहण के बाद पदभार संभाला।
  • खनाल ने सिंहदरबार स्थित परराष्ट्र मंत्रालय कार्यालय पहुँचकर औपचारिक तौर पर पदभार ग्रहण किया।
  • राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी (रास्वपा) के परराष्ट्र विभाग प्रमुख भी रहे खनाल को पार्टी के एकल सरकार द्वारा परराष्ट्र मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

१३ चैत्र, काठमांडू। नवनियुक्त परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल ने पदभार ग्रहण किया है।

शुक्रवार दोपहर को राष्ट्रपति भवन शितल निवास में शपथ लेने के बाद, खनाल उसी दिन सिंहदरबार स्थित परराष्ट्र मंत्रालय के कार्यालय पहुँचे और पदभार संभाला।

राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी के परराष्ट्र विभाग प्रमुख भी रह चुके खनाल को पार्टी की एकल सरकार ने परराष्ट्र मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी है।

विराजभक्तलाई ऊर्जा मन्त्रालयको जिम्मेवारी – Online Khabar

विराजभक्त श्रेष्ठ को ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय की जिम्मेदारी

समाचार सारांश

  • विराजभक्त श्रेष्ठ ने बालेन्द्र साह के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद में ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली है।
  • श्रेष्ठ ने काठमांडू क्षेत्र संख्या ८ से 24,592 वोट लेकर सुमन सायमी को हराया था।
  • श्रेष्ठ ने 2079 के चुनाव में भी उसी क्षेत्र से जीत हासिल कर संघीय सरकार में युवा और खेलकूद मंत्री के रूप में काम किया था।

13 चैत, काठमांडू। ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय की जिम्मेदारी विराजभक्त श्रेष्ठ को सौंपी गई है।

बालेन्द्र साह के नेतृत्व में आज बने मंत्रिपरिषद में काठमांडू क्षेत्र संख्या 8 से निर्वाचित 44 वर्षीय श्रेष्ठ ऊर्जा मंत्री बने हैं।

नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के सुमन सायमी को 21,375 मतों के अंतर से पराजित करने वाले श्रेष्ठ ने 24,592 वोट प्राप्त किए जबकि सायमी को केवल 3,217 मत मिले।

श्रेष्ठ ने 2079 के चुनाव में भी उसी निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की थी, जिसमें उन्होंने पुनः सायमी को पराजित किया था।

विवेकशील साझ से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर बागमती प्रदेश सभा सदस्य के रूप में था, इसके बाद वे संघीय सरकार में युवा तथा खेलकूद मंत्री भी रह चुके हैं।

“बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन” में स्नातक श्रेष्ठ ने अपना करियर होटल-रेस्टोरेंट प्रबंधन और विभिन्न परियोजनाओं में कर्मचारी के तौर पर शुरू किया था। उनकी सार्वजनिक छवि 2072 साल के भूकंप के बाद बदल गई।

उस समय उन्होंने नेतृत्व किया था स्वयंसेवक दल का, जिसने राहत संकलन, वितरण के साथ-साथ मुस्ताङ से बर्दीवास तक के गरीब समुदायों के लिए स्वास्थ्य शिविर चलाए थे।

पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्होंने ‘फोर्स नेपाल’ नाम की संस्था खोली और ‘वान ट्री–मेरो जिम्मेवारी’ जैसे अभियान चलाए, जो उन्हें जनता से जोड़ने में मददगार साबित हुए।

श्रेष्ठ 2074 के चुनाव से पहले उज्ज्वल थापा के साथ विवेकशील साझ के अभियान में शामिल हुए थे और समानुपातिक सूची से बागमती प्रदेश सभा सदस्य बने थे, जहां अपनी कार्यशैली से सबका ध्यान उन्होंने आकर्षित किया।

श्रेष्ठ उन нем्न नेताओं में से हैं जो हर वर्ष अपने काम की रिपोर्ट सार्वजनिक करते हैं। उन्होंने नेपाल भाषा और तामाङ भाषा को बागमती प्रदेश के सरकारी कार्यों की भाषा बनाने के लिए कानूनी पहल की।

जब संघीय सरकार ने गुठी विधेयक लाया, तो श्रेष्ठ ने सड़क और सदन दोनों मोर्चों से उसका कड़ा विरोध किया और नेवा: समुदाय की भावनाओं का प्रतिनिधित्व किया।

विवेकशील साझ के पूर्व अध्यक्ष रविन्द्र मिश्रा के ‘‘राजावादी’’ दस्तावेज जारी करने के बाद वैचारिक मतभेद के कारण श्रेष्ठ उस पार्टी से अलग हो गए थे।

2079 के चुनाव में रास्वपा के टिकट पर काठमांडू-8 से चुनाव लड़ते हुए श्रेष्ठ ने 10,112 वोट प्राप्त कर विजयी हुए, जबकि हमारा नेपाली पार्टी के उम्मीदवार सुमन सायमी को 6,179 मत मिले।

संघीय संसद सदस्य रहते हुए श्रेष्ठ ने सुशासन और खेलकूद क्षेत्र में सुधार के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। युवा तथा खेलकूद मंत्री के रूप में उनका छोटा कार्यकाल भी खेल क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने और खिलाड़ियों के मनोबल बढ़ाने के लिए सार्थक रहा, जिससे वे “काम कर सकने वाले युवा” के रूप में स्थापित हुए।

महेश बस्नेत ने बालेन्द्र शाह को बधाई देते हुए कहा- हर कदम जिम्मेदारी के साथ उठाएं

नेकपा एमाले के सचिव महेश बस्नेत ने नव-निर्वाचित प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को नई सोच और युवा नेतृत्व के लिए हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने कहा कि अब मंत्रिपरिषद की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है और अनुभव की कमी को सीखने के जरिये पूरा करने का सुझाव दिया है। बस्नेत ने सरकार से स्थिरता, विकास और समृद्धि के एजेंडे को पूरा करने के लिए प्रभावी निर्णय लेने का आह्वान किया और सकारात्मक निर्णयों में सहायक भूमिका निभाने का भी भरोसा जताया। १३ चैत, काठमांडू।

बस्नेत ने आज के दिन को आशा और परीक्षा दोनों का अवसर बताते हुए कहा, ‘नव गठित सरकार के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह सहित उनकी अगुआई वाले मंत्रिमंडल को हार्दिक बधाई और सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं। नई सोच और युवा नेतृत्व स्वागतयोग्य है। आज का दिन युवा मंत्रिमंडल के लिए आशा और परीक्षा दोनों है। देश ने अवसर दिया है, अब इसे साबित करने की जिम्मेदारी आपके कंधों पर है।’

उन्होंने अवसरों के साथ-साथ चुनौतियों की भी बात करते हुए अनुभव की कमी को सीखने और समझदारी से लिए गए निर्णयों से पूरा करने का सुझाव दिया। ‘अवसर जितने महत्वपूर्ण हैं, उतनी ही गंभीर चुनौतियां भी हैं। अनुभव की कमी को सीखने और परिपक्व निर्णय से पूरा करते हुए हर कदम जिम्मेदारी से उठाएं,’ उन्होंने कहा।

बस्नेत ने सत्ता अवसर नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व के महत्व को समझते हुए आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने गौरव के साथ कहा, ‘हम जिम्मेदारी की गहराई जानते हैं। संयम और दृढ़ता के साथ संतुलन बनाकर, सत्ता को अवसर नहीं बल्कि उत्तरदायित्व समझकर आगे बढ़ें। जब अनुभव और ऊर्जा मिलकर सभी पक्षों के साथ सहयोग करेंगें, तभी जनता का भरोसा और मजबूत होगा।’ उन्होंने सकारात्मक निर्णयों और पहलों के लिए सहयोगी भूमिका निभाने का वचन भी दिया। ‘सकारात्मक निर्णयों और पहलों के लिए सावधानीपूर्वक साथ और सहयोगी भूमिका निभाएंगे, हार्दिक शुभकामनाएं,’ उन्होंने कहा।

इरान के खतरे खत्म होने के बाद हर्मुज जलसंधि पुनः संचालित होगी: अमेरिकी विदेश मंत्री की टिप्पणी

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि इरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलयान पर खतरा उत्पन्न करने से रोक लगने के बाद हर्मुज जलसंधि फिर से चालू हो सकती है। रुबियो ने कहा, “अगर इरान विश्वव्यापी परिवहन में बाधा डालना बंद कर देता है, तो यह जलसंधि कल ही खुल सकती है।” इरान ने अमेरिका और इज़राइल से संबंधित जहाजों के लिए हर्मुज जलसंधि बंद करने का निर्णय लिया था, और वर्तमान में रूस, चीन, भारत, इराक तथा पाकिस्तान के जहाजों को ही इस मार्ग से आवागमन की अनुमति दे रहा है।

गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा, “यदि इरान विश्वव्यापी परिवहन में विघ्न डालना बंद कर देगा तो यह जलसंधि कल ही खुल सकती है।” हालांकि इस क्षेत्र में नौवहन पुनर्स्थापित करने के लिए क्या अमेरिका स्थल में सैन्य कार्रवाई करेगा या नहीं, इस सवाल पर उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से इंकार किया।

28 फरवरी से अमेरिका और इज़राइल द्वारा इरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान के कारण मध्य पूर्व में गंभीर युद्ध जारी है। इसके जवाब में इरान ने अमेरिका और इज़राइल से जुड़े जहाजों के लिए हर्मुज जलसंधि बंद करने का निर्णय लिया था। हाल ही में इरान ने रूस, चीन, भारत, इराक और पाकिस्तान जैसे ‘मित्र राष्ट्रों’ के जहाजों को ही इस मार्ग से आवागमन की अनुमति दी है। यह जलमार्ग विश्व की कुल तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा संभालता है, और इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट उत्पन्न हुआ है।

नेपाल में नई सरकार: 43वें प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने ली शपथ, नए मंत्रियों की सूची

नवनियुक्त प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ‘बालेन’ को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शीतलनिवास में आयोजित विशेष समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी है। प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के रिकॉर्ड के अनुसार शाह आधुनिक नेपाल के 43वें प्रधानमंत्री हैं। राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के वरिष्ठ नेता शाह पिछले महीने हुए संसदीय चुनाव में प्रतिनिधिसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। राष्ट्रपति पौडेल ने शुक्रवार सुबह नेपाल के संविधान की धारा 76 की उपधारा 1 के तहत शाह को प्रधानमंत्री नियुक्त किया।

इस व्यवस्था के अनुसार राष्ट्रपति प्रतिनिधिसभा में बहुमत प्राप्त दल के संसदीय दल के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं और उनकी अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद का गठन होता है। प्रधानमंत्री की शपथ के बाद राष्ट्रपति पौडेल ने नव नियुक्त मंत्रियों को भी पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी। शपथग्रहण समारोह की शुरुआत शंखनाद से हुई थी, जबकि 108 बटुकों ने स्वास्तिवाचन और 108 बौद्ध लामा ने मंगलपाठ किया। इस समारोह में उपराष्ट्रपति, अंतरिम प्रधानमंत्री, प्रधान न्यायाधीश, राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष सहित वरिष्ठ पदाधिकारी और विभिन्न कूटनीतिक मिशनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

36 वर्षीय शाह नेपाल के लोकतांत्रिक इतिहास में निर्वाचित कार्यकारी प्रमुख बनने वाले सबसे युवा व्यक्ति हैं। प्रतिनिधिसभा में रास्वपा 182 सांसदों के साथ सबसे बड़ा दल है। काठमांडू महानगरपालिका के मेयर बालेन्द्र शाह ‘बालेन’ रैप गायक के रूप में भी जाने जाते थे। पेशे से वह संरचनात्मक इंजीनियर हैं। झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए शाह चुनाव से कुछ सप्ताह पहले ही रास्वपा में शामिल हुए थे।

मंत्रिपरिषद के गठन में प्रधानमंत्री शाह ने रक्षा तथा उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय अपने पास रखा है। अन्य मंत्रियों में अर्थ मंत्री: स्वर्णीम बाग्ले, गृह मंत्री: सुधन गुरुङ, विदेश मंत्री: शिशिर खनाल, भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात मंत्री: सुनिल लम्साल, ऊर्जा, जल स्रोत तथा सिंचाई मंत्री: विराजभक्त श्रेष्ठ, संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्री: खड़क राज पौडेल, शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, युवा तथा खेलकूद मंत्री: सस्मित पोखरेल, स्वास्थ्य तथा जनसंख्या, पेयजल मंत्री: निशा मेहता, संचार तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री: विक्रम तिमिल्सिना, संघीय मामला तथा सामान्य प्रशासन, भूमिव्यवस्था, सहकारिता तथा गरीबी निवारण मंत्री: प्रतिभा रावल, कानून, न्याय तथा संसदीय मामला मंत्री: सोबिता गौतम, कृषि तथा पशुपालन विकास, वन तथा पर्यावरण मंत्री: गीता चौधरी, श्रम, रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा मंत्री: दीपक कुमार साह, महिला, बालबालिका तथा वरिष्ठ नागरिक मंत्री: सीता वादी शामिल हैं।

प्रधानमन्त्री बालेनको शपथ समारोहमा ५ पूर्वसरकार प्रमुख सहभागी, ओली अनुपस्थित

प्रधानमंत्री बालेन के शपथ ग्रहण समारोह में 5 पूर्व प्रधान मंत्री हुए शामिल, ओली अनुपस्थित

समाचार सारांश

  • प्रधानमंत्री बालेन के शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल प्रचंड, माधव कुमार नेपाल, झलनाथ खनाल और बाबुराम भट्टarai शामिल हैं।
  • पूर्व प्रधानमंत्री और नेकपा एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली समारोह में उपस्थित नहीं हैं।
  • पूर्व सभापति शेरबहादुर देउवा विदेश यात्रा पर होने के कारण समारोह में अनुपस्थित हैं।

१३ चैत्र, काठमाडौँ। प्रधानमंत्री बालेन के शपथ ग्रहण समारोह में पांच पूर्व प्रधान मंत्री शामिल हुए हैं।

राष्ट्रपति कार्यालय शीतल निवास में आयोजित विशेष शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल प्रचंड, माधव कुमार नेपाल, झलनाथ खनाल और बाबुराम भट्टराई मौजूद हैं।

साथ ही, अन्तरिम सरकार के प्रमुख और सर्वोच्च अदालत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश खिलराज रेग्मी भी समारोह में उपस्थित हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री एवं नेकपा एमाले के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली समारोह में अनुपस्थित हैं। पूर्व सभापति और नेपाली कांग्रेस के नेता शेरबहादुर देउवा विदेश भ्रमण पर होने के कारण उपस्थित नहीं हो सके।

बालेन सरकार को संविधान जनादेश और सुशासन की जिम्मेदारी निभाएगा

समाचार सारांश

समीक्षा के उपरांत प्रकाशित।

  • रास्वपा वरिष्ठ नेता बालेन शाह आज सिंहदरबार में प्रवेश कर नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं।
  • बालेन के पास दो-तिहाई के करीब बहुमत है और उन्होंने संविधान की भावना के अनुसार सुशासन व विकास की नींव मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाली है।
  • रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने ने बालेन को वरिष्ठ नेता और भावी प्रधानमंत्री के तौर पर उभारा था, दोनों के बीच सहयोग बनाए रखने की चुनौती है।

नेपाल के इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्रियों में से एक रास्वपा वरिष्ठ नेता बालेन शाह आज सिंहदरबार में प्रवेश कर रहे हैं। देश की प्रमुख कार्यकारी कुर्सी और उनकी व्यक्तिगत छवि इतनी नजदीक होने के कारण जनता की उनसे बड़ी उम्मीदें हैं।

21 फागुन के चुनाव से प्राप्त देश के ऐतिहासिक जनादेश और पुराने बड़े संघर्ष तथा आंदोलनों द्वारा सुनिश्चित संविधान के जनादेश को समन्वित करते हुए आगे बढ़ना नए प्रधानमंत्री बालेन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

उनके पास दो-तिहाई के करीब बहुमत है, जिसके कारण उन्हें संविधान की मूल भावना के अनुरूप सुशासन और विकास के बुनियादी स्तंभ स्थापित करने की जवाबदेही सजग होकर निभानी होगी। यह संविधान न केवल पिछले नेताओं के कठोर प्रभावों से मुक्त है जिन्हें चुनाव ने पराजित किया है, बल्कि उन लोगों की परछाई भी दिखाती है जो लंबे समय तक बहिष्कृत और वंचित रहे।

मजबूत जनादेश संघीय संविधान की समावेशी भावना को उजागर करता है। चुनाव का मतादेश सुशासन, रोजगार और आर्थिक अवसर सृजन की आवश्यकता को याद दिलाता है। रास्वपा के घोषणा पत्र की प्रतिज्ञाएँ आने वाले दिनों में किस तरह प्रभावी होती हैं, यह सभी की निगाहों में है। संविधान और चुनाव जनादेश दोनों का सम्मान बालेन सरकार द्वारा निरंतर आत्मसात करना आवश्यक है।

संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र नेपाल के संविधान की भरोसेमंद कार्यान्वयन और समयानुकूल संशोधन आवश्यक है, जो इस समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।

एक कलाकार के रूप में बालेन ने विगत में वंचित वर्गों के पक्ष में गीत और कविताएं रची हैं। जेनजी आंदोलन के दौरान भी उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देखा गया था, पर वे उस समय मेयर के पद पर होने के कारण नेतृत्व लेने में अनिच्छुक थे। इसके बाद पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की प्रधानमंत्री बनी थीं।

संविधान के कार्यान्वयन में संदेह और विवाद भी रहे। उस समय विश्लेषण यह था कि शक्तिशाली नागरिक सरकार का गठन और चुनाव ही इसे सुरक्षित कर सकते हैं।

चुनावों के बाद वे आलोचक भी संसद में आए हैं और शपथ ग्रहण के बाद संविधान को प्रभावी बनाने के लिए फिर से मजबूत किया गया है। संविधान की रक्षा और उन्नयन प्रतिनिधि सभा और संघीय संसद का मुख्य दायित्व होगा।

बालेन ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान नेपाल के विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का भ्रमण कर सम्मान प्रकट किया। मधेशी समुदाय से पहले प्रधानमंत्री बनने के नाते जनकपुर में उन्होंने सुंदर मैथिली भाषण दिया। उन्हें संघीय संविधान की भावना के अनुरूप कार्य करने की उम्मीद है।

जिन समूहों को आवाज़हीन माना जाता था, उन तक संगीत और शब्दों के माध्यम से आवाज़ पहुंचाने वाले ये नेता अब संविधान और कानून के मुख्य कार्यान्वयन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर सभी की उत्सुकता और आशाएं हैं।

प्रधानमंत्री और मंत्रियों की नियुक्ति व शपथ ग्रहण की तैयारियां आज पूरी हो रही हैं। इसमें योग्य और जिम्मेदार व्यक्तियों को स्थान मिलने की उम्मीद है। युवा देश में नई जेनजी विद्रोह की आकांक्षाओं को पूरा करने वाली चुस्त और सक्षम मंत्रिमंडल बनने की शुभकामनाएं।

बालेन ने औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरीकों से जनता के साथ संवाद कायम किया है। वे सेलिब्रिटी प्रतिभा वाले हैं और सार्वजनिक जीवन में कम बोलने की शैली अपनाते दिखे हैं। लेकिन अब प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें जनता के प्रति जवाबदेही और संवाद के लिए नियमित प्रेस ब्रिफिंग एवं संसद में उपस्थित होने जैसे माध्यमों को अपनाना होगा।

रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने के साथ सहयोग वर्तमान में महत्वपूर्ण है। जब वे काठमांडू के मेयर थे, तो बालेन का नारा था: “आज तक दलों ने किया, अब बदलने वाले करें।” रवि ने अपनी लोकप्रियता का उपयोग कर रास्वपा को संसद की चौथी शक्ति बनाया था। बालेन भी इस गठबंधन में शामिल हैं।

उम्मीदवार चयन के दौरान रवि लामिछाने ने बालेन समेत अप्रयुक्त नेताओं को वरिष्ठ नेता और भावी प्रधानमंत्री के रूप में परियोजना किया था। अब इन दोनों के बीच सहयोग बनाए रखने की चुनौती है। इससे राजनीतिक व्यवहारिकता और पुरानी गलत आदतों को सुलझाने में जनता को उम्मीद मिली है।

अतीत में शीर्ष नेताओं के स्वार्थ संघर्ष और व्यक्तित्व द्वंद्व ने राजनीति और देश के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। केपी शर्मा ओली और पुष्पकमल दाहाल के टकराव से लेकर गिरिजाप्रसाद कोइराला और शेरबहादुर देउवाओं के विवादों ने राष्ट्रीय राजनीति को ध्रुवीकृत किया। इस बार ऐसा नहीं हो यह उम्मीद है। नए पीढ़ी के नेता रवि और बालेन इस स्वार्थ प्रबंधन में सफलता हासिल करेंगे।

अंत में यह ज़ोर देना आवश्यक है कि संविधान किसी भी नेता का नहीं, बल्कि नागरिकों का है, जिसका प्रतिनिधित्व बालेन प्रतिनिधि सभा में शपथ ग्रहण करके कर रहे हैं। उनके द्वारा जारी “जय महाकाली” गीत के शब्द और वीडियो ने समीक्षकों में बहस को जन्म दिया है, जिसे एक कलाकार की अभिव्यक्ति स्वतंत्रता के रूप में सम्मानित किया जाना चाहिए। किसी भी पार्टी या सरकार के लिए गीत नीति नहीं होता, बयाना और घोषणापत्र प्रमुख होते हैं। संघीय संविधान आधुनिक नेपाल की साझा आधारशिला है, जिसे सभी को स्वीकार करना आवश्यक है।

नए प्रधानमंत्री बालेन शाह और रास्वपा को पांच वर्ष के जनादेश के साथ बधाई। यह जिम्मेदारी उन्हें और अधिक विनम्र और जवाबदेह बनाएगी, ऐसी आशा है। शासक नहीं, सेवक सरकार की आकांक्षा पूरी हो। सरकार को जनता द्वारा मिले बड़े जनमत के फलस्वरूप लगातार सुझावों और जागरूकता की आवश्यकता बनी रहे, यह कामना की जाती है। नेपाली पाठकों के विश्वासपात्र मुख्य समाचार माध्यम के रूप में यह दायित्व निरंतर निभाएगा।

इरानी विदेशमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव से की वार्ता

इरानी विदेशमंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से आक्रामक देशों को कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाने का आग्रह किया है। अराघची ने अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और महासभा से कड़ी निंदा करने की मांग की।

इरान ने हर्मुज जलसंधि में अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आक्रामक पक्ष से संबंधित जहाजों की आवागमन रोकने का कानूनी अधिकार होने का दावा किया है। १३ फाल्गुन, काठमाडौं। अराघची ने महासचिव गुटेरेस से संयुक्त राष्ट्र की चैप्टर 7 के तहत आक्रामक पक्ष को जवाबदेह ठहराने की अपील की है।

विदेशमंत्री अराघची ने मध्य पूर्व और हर्मुज जलसंधि में उत्पन्न अस्थिरता के लिए अमेरिका और इजरायल की सैन्य हस्तक्षेप को मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि एक तटीय राष्ट्र के रूप में, इरान को ‘आक्रामक’ पक्ष से जुड़ी जहाजों की आवागमन रोकने का कानूनी अधिकार प्राप्त है ताकि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

फरवरी 28 से जारी इस तीव्र युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव डाला है।

इन्जिनियर बालेनलाई शासनसत्ताको बागडोर – Online Khabar

इंजीनियर बालेन्द्र शाह ने प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी संभाली

राष्ट्रपति रामचंद्र पौड़ेल ने १३ चैत को बालेन्द्र शाह को प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। बालेन्द्र शाह झापा ५ से निर्वाचित सांसद हैं और पहली बार संसद पहुंचे ही प्रधानमंत्री बने हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत काठमांडू महानगरपालिका के मेयर पद से की थी और अब लगभग दो-तिहाई बहुमत वाली सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। १३ चैत, काठमांडू। राष्ट्रपति रामचंद्र पौड़ेल द्वारा प्रधानमंत्री नामित बालेन्द्र शाह शीघ्र ही शपथ ग्रहण करने जा रहे हैं। इसके साथ ही वे औपचारिक रूप से नेपाल की शासन व्यवस्था की अगुवाई कर रहे हैं।

फागुन २१ को संपन्न प्रतिनिधि सभा चुनाव में झापा ५ से निर्वाचित होकर वे अपने पहले ही संसदीय कार्यकाल में प्रधानमंत्री बने हैं। युवा वर्ग में लोकप्रिय बालेन्द्र ने नेपाल के राजनीतिक इतिहास में दुर्लभ उपलब्धि हासिल करते हुए लगभग दो-तिहाई बहुमत वाली सरकार का नेतृत्व किया है। संविधान के अनुच्छेद ७६(१) के अनुसार बहुमत प्राप्त पार्टी के नेता के रूप में उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। ३६ वर्षीय बालेन्द्र पेशे से इंजीनियर हैं। चार वर्ष पूर्व तक वे रैपर के रूप में नई पीढ़ी में चर्चित थे, और काठमांडू महानगरपालिका के मेयर बनने के साथ ही राजनीति में एक मुख्य शख्सियत के रूप में उभरे हैं।

२०७२ के महाभूकंप के बाद उन्होंने बचाव और राहत कार्यों में सक्रिय भागीदारी दिखाई और समाजसेवी के रूप में भी पहचाने गए। नई पीढ़ी द्वारा पसंद किए जाने वाले पेशेवर, रैपर तथा कवि-लेखक शाह की राजनीतिक पहचान सोशल मीडिया और वर्चुअल माध्यमों में खास लोकप्रिय रही है। विकास के ‘विजन’ को चुनाव जीतने के लिए सिर्फ वोट नहीं, बल्कि लोगों का दिल जीतना जरूरी समझते हुए शाह ने अपने चुनावी घोषणापत्र में डिजिटल सरकार से लेकर आइडिया बैंक तक की योजनाएं प्रस्तावित की हैं। मेयर के उम्मीदवार के रूप में उन्होंने डिग्री से अधिक कौशल आधारित रोजगार के अवसर सृजित करने का संकल्प जताया था।

फिफा और एएफसी से चर्चा के बाद एन्फा के चुनाव स्थगित

संपादकीय सारांश

समीक्षा के बाद तैयार।

  • राष्ट्रीय खेलकूद परिषद द्वारा अखिल नेपाल फुटबल संघ को निलंबित करने के बाद एन्फा के अर्ली चुनाव स्थगित किए गए हैं।
  • एन्फा के महासचिव किरण राई ने फिफा और एएफसी से चर्चा के बाद चुनाव स्थगित करने का निर्णय लिया गया बताया।
  • राई ने कहा कि राष्ट्रीय खेलकूद परिषद को फुटबॉल की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और एशियन कप चयन मुकाबलों के लिए अनुमति देनी होगी।

१३ चैत्र, काठमांडू। राष्ट्रीय खेलकूद परिषद (राखेप) द्वारा निलंबित किए जाने के बाद अखिल नेपाल फुटबल संघ (एन्फा) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि फिफा और एएफसी से चर्चा के बाद चुनाव स्थगित किया गया है।

एन्फा ने आज के लिए निर्धारित早 चुनाव को गुरुवार को स्थगित कर दिया। चुनाव स्थगित होने के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एन्फा के महासचिव किरण राई ने कहा कि राष्ट्रीय खेलकूद परिषद द्वारा निलंबन के बाद फिफा और एएफसी से बातचीत कर चुनाव स्थगित करने का निर्णय लिया गया।

“चुनाव के लिए एएफसी और फिफा के प्रतिनिधि आए हुए थे। राखेप द्वारा निलंबन के कारण प्रतिनिधियों से चर्चा के बाद चुनाव स्थगित करने का निर्णय लिया गया,” राई ने कहा।

उन्होंने कहा कि यदि वे हट जाएं और इससे नेपाली फुटबॉल की स्थिति सुधरती है तो वे हटने को तैयार हैं, लेकिन फिलहाल हटने से नेपाली फुटबॉल संकट में पड़ जाएगा।

“हमने हटने से इनकार नहीं किया है। हम नेपाली फुटबॉल की भलाई चाहते हैं, इसके लिए हमने लंबे समय से मेहनत की है। हम फिफा के निलंबन से बचने के लिए ही चुनाव करना चाहते थे,” राई ने कहा।

राई ने स्पष्ट किया कि वे नेपाल के कानून का पालन करते हैं और विवाद से बचने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब राष्ट्रीय खेलकूद परिषद को फुटबॉल की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

“अब नेपाली फुटबॉल में शून्यावस्था है। इसका जिम्मा राखेप को लेना होगा,” राई ने कहा। उन्होंने कहा कि इस शून्यावस्था को बनाए नहीं रखा जा सकता और अब नेपाली फुटबॉल के निकास के लिए जिम्मेदारी लेनी होगी।

उन्होंने कहा कि एशियन कप चयन के तहत लाओस के खिलाफ होने वाले मैच के संबंध में भी राखेप को जिम्मेदारी लेनी होगी। “एएफसी ने चैत ८ को ही लाओस के खिलाफ खेलने के लिए राखेप से अनुमति लेने के लिए पत्र भेजा था। हमने निलंबन से पहले ही अनुमति के लिए पत्र भेजा था और हम चाहते हैं कि लाओस के खिलाफ मैच के लिए नेपाली टीम को भेजा जाए।”

राई ने कहा कि वे अराजकता फैलाने वाले नहीं हैं। “हम अराजक नहीं हैं, हम नेपाल के कानून मानते हैं, राज्य के साथ हमारा कोई विवाद नहीं है,” उन्होंने कहा।

राई ने आरोप लगाया कि ए डिविजन लीग को ना कराने के लिए सांठगांठ की गई है।

नेपाली नए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह बालेन और नई सरकार के तीन मुख्य चुनौतियाँ

रास्वपा संसदीय दलका नेता बालेन्द्र शाह बालेन

तस्बिर स्रोत, Getty Images

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता और संसदीय दल के नेता बालेन्द्र शाह ‘बालेन’ को नेपाल के संविधान की धारा ७६ की उपधारा १ के अनुसार प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है, यह राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया।

बालेन के नेतृत्व में बनने वाली सरकार को अभूतपूर्व जनादेश मिला है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार उसे जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप परिणाम देने के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

एक पूर्व मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार को शुरुआत में जनता से सीधे जुड़े मुद्दों पर फोकस करना चाहिए, उन्होंने कहा, “बहुत सी चीजें बिगड़ी हुई हैं इसलिए सुधार के लिए काफी अवसर हैं।”

एक राजनेता ने बताया कि बड़ी जनादेश के साथ निर्वाचित नई सरकार से मतदाताओं की बहुत उम्मीदें हैं और नागरिकों का विश्वास टूटने से रोकना सरकार की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला करने के बाद मध्य पूर्व में तनाव के बीच, विशेषज्ञों के अनुसार सरकार को आप्रवास, रेमिटेंस, ईंधन आपूर्ति और महंगाई जैसे मुद्दों पर तुरंत कदम उठाने की स्थिति में है।

सोविता गौतम को कानून मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई

समाचार सारांश

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  • प्रधानमंत्री बालेन शाह ने मंत्रिपरिषद का विस्तार करते हुए कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी सोविता गौतम को सौंपी है।
  • गृह मंत्रालय में सुधन गुरुङ, परराष्ट्र मंत्रालय में शिशिर खनाल, ऊर्जा मंत्रालय में विराजभक्त श्रेष्ठ नियुक्त हुए हैं।
  • उद्योग मंत्रालय में अमरेश कुमार सिंह और सामान्य प्रशासन मंत्रालय में प्रतिभा रावल को नामित किया गया है।

13 चैत्र, काठमांडू। कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी सोविता गौतम को दी गई है।

प्रधानमंत्री नियुक्त बालेन शाह ने आज ही मंत्रिपरिषद का विस्तार किया है। उन्होंने मंत्रियों के नाम तय किए हैं।

उसके अनुसार, कानून मंत्रालय की जिम्मेदारी गौतम को सौंपा गया है।

इसके अलावा, गृह मंत्रालय में सुधन गुरुङ, परराष्ट्र मंत्रालय में शिशिर खनाल, ऊर्जा मंत्रालय में विराजभक्त श्रेष्ठ, उद्योग मंत्रालय में अमरेश कुमार सिंह और सामान्य प्रशासन मंत्रालय में प्रतिभा रावल को नियुक्त किया गया है।

बालेन नेतृत्व वाली सरकार में कितने मंत्रालय होंगे?

समाचार सारांश

  • नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के सचिवालय मंत्रालयों की संख्या १५ से १८ के बीच रखने की तैयारी कर रहा है।
  • संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय को प्रधानमंत्री कार्यालय में समाहित करने की योजना भी चर्चा में है।
  • सूत्रों के अनुसार, खानेपानी, युवा एवं खेलकूद, शहरी विकास जैसे मंत्रालयों के नाम समेटने का गृहकार्य चल रहा है।

१३ चैत, काठमांडू। नए प्रधानमंत्री नियुक्ति के बाद सरकार ने मंत्रालयों की संख्या कम करने की तैयारी शुरू कर दी है। आज प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले बालेन शाह के निकट सचिवालय ने कुछ मंत्रालयों को मिलाने की योजना बनाई है।

सरकार ने १० साउन २०७५ को जारी की गई कार्यविभाजन नियमावली के अनुसार वर्तमान में २१ मंत्रालय हैं। मंत्रालय स्तर की संरचना सहित प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय मिलाने पर यह संख्या २२ हो जाती है।

लेकिन अब सरकार मंत्रालयों की संख्या १५ से १८ के बीच सीमित करने की योजना बना रही है। रास्वपा के घोषणा पत्र में मंत्रालयों की संख्या अधिकतम १८ से अधिक न होने का उल्लेख है। इसलिए वर्तमान में कम से कम ५ मंत्रालयों को अन्य मंत्रालयों में समाहित करना होगा।

बालेन के सचिवालय के निकट सूत्रों के अनुसार मंत्रालयों की संख्या कम करने के उद्देश्य से गृहकार्य चल रहा है और इस पर ध्यान दिया जा रहा है।

इस प्रक्रिया में प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय ने सुविधा के लिए कुछ पुराने रिपोर्ट व दस्तावेज बालेन की टीम को उपलब्ध कराए हैं। उसके अनुसार बालेन और रास्वपा के कुछ सीमित नेताओं की टीम मंत्रालय पुनर्गठन का गृहकार्य कर रही है।

सूत्रों ने बताया कि खानेपानी, युवा एवं खेलकूद, और शहरी विकास मंत्रालयों को अन्य मंत्रालयों में समाहित करने पर चर्चा हो रही है।

सामान्य प्रशासन मंत्रालय हटाने पर भी चर्चा

संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय हटाने को लेकर भी चर्चा जारी है। कर्मचारी प्रशासन देखरेख करने वाले सामान्य प्रशासन मंत्रालय को प्रधानमंत्री कार्यालय के अन्तर्गत लाकर संघीय मामिला को कानून मंत्रालय में समाहित करने की योजना गृहकार्य में है।

पिछले कई अध्ययन सुझाव दे चुके हैं कि जनशक्ति प्रबंधन से संबंधित सामान्य प्रशासन मंत्रालय को प्रधानमंत्री कार्यालय के अन्तर्गत एक विभाग के माध्यम से प्रबंधित किया जा सकता है।

पूर्वाधार निर्माण से जुड़े भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात मंत्रालय में शहरी विकास और खानेपानी मंत्रालय को समाहित करने के विकल्प पर गृहकार्य चल रहा है। युवा एवं खेलकूद मंत्रालय और महिला, बालबालिका तथा ज्येष्ठ नागरिक मंत्रालय को भी मिलाकर एक मंत्रालय बनाने की संभावना पर भी चर्चा जारी है।

सुशीला कार्की नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद कुछ मंत्रालयों को घटाने का गृहकार्य किया जा चुका था, लेकिन चुनाव कराने के लिए गठित सरकार ने अन्य कामों पर ध्यान देने के कारण मंत्रालय कटौती योजना को स्थगित कर दिया था।

अब बनने वाली बालेन सरकार को मंत्रालय कटौती का निर्णय मंत्रिपरिषद् की बैठक से ही लेना होगा। मंत्रिपरिषद् द्वारा नेपाल सरकार के कार्यविभाजन नियमावली में संशोधन के बाद ही मंत्रालयों की संख्या तथा जिम्मेदारियां निश्चित होंगी।

रास्वपाले टुंग्याउन थाल्यो मन्त्री, अर्थमा स्वर्णिम, परराष्ट्रमा शिशिर

रास्वपा के मंत्री पदों के नाम तय, अर्थ विभाग में स्वर्णिम, विदेश विभाग में शिशिर


१३ चैत, काठमाडौं । रास्वपा ने प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल मंत्रियों के नाम निर्धारित करना शुरू कर दिया है।

अर्थ मंत्री के लिए डा. स्वर्णिम वाग्ले और विदेश मंत्री के लिए शिशिर खनाल के नाम पक्के हुए हैं, सूत्रों ने बताया।

इसी प्रकार, कानून मंत्री पद के लिए सोविता गौतम का नाम पक्का हो चुका है।

रास्वपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘स्वर्णिम, शिशिर और सोविता के मंत्रालयों का निर्धारण हो चुका है। अन्य का भी लगभग तय हो चुका है।’

संभावित मंत्रियों की सूची में सुदन गुरुङ, बिराजभक्त श्रेष्ठ, सस्मित पोखरेल, गनेश पौडेल, विक्रम खनाल, निशा डाँगी, गीता चौधरी, सीता बादी आदि के नाम शामिल हैं। हालांकि इसे अभी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं मिली है।

मंत्रियों के चयन की जानकारी सभापति रवि लामिछाने, बालेन शाह और उनके सचिवालय के सदस्यों ने फोन और एसएमएस के माध्यम से दी है, स्रोत ने बताया।

आज दोपहर साढे १२ बजे बालेन शाह प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। उसके बाद मंत्रियों का शपथ ग्रहण कार्यक्रम है।

सभामुख पद के लिए डीपी अर्याल का नाम तय किया गया है।

ट्रम्प ने तेहरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की समयसीमा 10 दिन बढ़ाई: ‘वार्ता जारी है’

ट्रम्प

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इरानी ऊर्जा केंद्रों पर हमले की समयसीमा १० दिन बढ़ाते हुए तेहरान के साथ बातचीत “जारी” होने और उसमें “काफी अच्छी प्रगति” होने की बात कही है।

ट्रम्प ने सोमवार को शुरू में पांच दिन तक ऐसे हमले नहीं करने की घोषणा की थी, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक हालिया पोस्ट में लिखा: “इरानी सरकार के अनुरोध पर… मैं ऊर्जा संयंत्रों पर विनाश करने की अवधि सोमवार, ६ अप्रैल २०२६, रात ८ बजे तक के लिए १० दिन के लिए स्थगित करता हूं।”

यह खबर आने के बाद गुरुवार को तेल के दाम में कुछ कमी आई थी। इससे पहले मंत्रिमंडल की बैठक में ट्रम्प ने कहा था कि अगर अमेरिका और इरान के बीच शांति योजना पर सहमति नहीं हुई, तो यह “सबसे बुरा दुःस्वप्न” होगा।

उसी बैठक में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने पुष्टि की कि अमेरिका ने इरान को १५ बिंदुओं वाली शांति योजना भेजी है।

उस प्रस्ताव पर एक इरानी अधिकारियों ने सरकारी मीडिया से कहा था कि तेहरान के पास होर्मुज जल मार्ग को नियंत्रित करने का “प्राकृतिक और कानूनी अधिकार” है।