Skip to main content

लेखक: space4knews

आपूर्ति र गुणस्तर सुधार्न के छ सरकारी योजना ? – Online Khabar

सरकारी योजना: रासायनिक मलको गुणस्तर र आपूर्ति सुधारका लागि महत्वपूर्ण कदम

कृषि तथा पशुपन्छी विकास मन्त्रालयले रासायनिक मल नियन्त्रण आदेश २०५५ लाई दोस्रो पटक संशोधित गर्दै मल उत्पादन, आयात तथा बिक्री वितरणमा कडाइ गरेको छ। यस संशोधित आदेशअनुसार मन्त्रालयले मलको गुणस्तर सुनिश्चित गर्न सचिवको अध्यक्षत्वमा रासायनिक मल सल्लाहकार समिति पुनः गठन गरेको छ, जसमा वातावरण मन्त्रालयलाई सदस्यका रुपमा समावेश गरिएको छ। मन्त्रालयले आधिकारिक प्रयोगशालालाई मलको गुणस्तर सर्वेक्षण गर्ने सर्भेयरको अधिकार प्रदान गरेको छ भने गुणस्तरहीन मलमा ‘नन-स्ट्यान्डर्ड’ लेबल प्रयोग अनिवार्य गरिएको छ। ३० वैशाख, काठमाडौं।

संशोधित आदेश अनुसार, यो नियन्त्रण प्रणाली पूर्णरुपले कृषि तथा पशुपन्छी विकास मन्त्रालयको दायित्वमा रहनेछ। पहिले जहाँ ‘कृषि मन्त्रालय’ मात्र उल्लेख थियो, त्यहाँ अब संशोधनले यसको नाम र कार्यक्षेत्र स्पष्ट पारेको छ। उक्त समितिले मल आपूर्ति, मूल्य निर्धारण र गुणस्तर नियन्त्रणको विषयमा सरकारलाई सल्लाह दिनेछ। मन्त्रालयले आफ्ना आधिकारिक प्रयोगशालालाई मलको परिमाण र गुणस्तर सर्वेक्षण गर्ने सर्भेयरको अधिकार पनि प्रदान गरेको छ।

गुणस्तरहीन मलमा ‘नन-स्ट्यान्डर्ड’ लेबल लगाउन अनिवार्यता राखिएको छ। तोकिएको मापदण्डभन्दा कम गुणस्तरको मल भेटिएमा त्यसलाई नष्ट गरिने छ वा विशेष अवस्थामा मात्र बिक्रीमा ल्याउन अनुमति दिइनेछ। यस व्यवस्था अन्तर्गत किसानलाई कम गुणस्तरका मलबाट ठगी हुनबाट जोगाउने विश्वास व्यक्त गरिएको छ। साथै, बजारमा मलको अवैध कारोबार रोक्न कृषि विषयमा स्नातक वा रसायनशास्त्रमा स्नातकोत्तर गरेका दक्ष निरीक्षक परिचालन गरिनेछन्। उनीहरूले गोदाममा प्रवेश गरी नमुना संकलन र आवश्यक कागजात जफत गर्ने अधिकार पाउनेछन्।

बालेन सम्झाउँदै क्षितिज थेबेले ताप्लेजुङ की समस्याएं उठाईं

३० वैशाख, काठमांडू। नेकपा एमाले के सांसद क्षितिज थेबेले प्रतिनिधि सभा में ताप्लेजुङ डायरी प्रस्तुत करते हुए समस्याएं उजागर की हैं। बुधवार की प्रतिनिधि सभा की बैठक में उन्होंने ताप्लेजुङ के लोगों के प्रति हार्दिक सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए वहां की कठिन परिस्थितियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “क्या करें, क्या न करें इस पर उलझन में हैं।”

उन्होंने बताया कि तूफान ने स्कूलों की छतें और घर उड़ाए और ओलावृष्टि (असिना) ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे जनता की समस्याएं गंभीर हो गई हैं। “लोग आघात और संकट में हैं। आज तक राहत नहीं मिली है,” उन्होंने बताया।

पेयजल और सिंचाई की समस्याओं के साथ-साथ कृषक और मजदूरों के विषय, युवाओं की बेरोजगारी और जनसंख्या की गरीबी की स्थिति पर भी उन्होंने जानकारी दी। “महंगाई और मूल्यवृद्धि अभी भी बरकरार है। विकास और निर्माण के विषय अनगिनत हैं,” उन्होंने जोड़ा।

“अब चाहे पेड़ से बांध कर हो, रास्ते पर सुलाकर हो या खोर में रख कर हो, सड़क निर्माण अवश्य करना होगा,” उन्होंने जोर दिया। प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “पाथीभरा सड़क, चुनाव से पहले आप का यात्रा हुआ सड़क है। १० साल गुजर चुके हैं, पर अब तक अधूरा है। तमर कॉरिडोर से होते हुए ओलांगचुँगोला तीप्तोला नाका सड़क, याम्भुजिन होते हुए कंचनजंगाबेस कैप सड़क, मदन भंडारी सड़क, गुफापोखरी सड़क, चुवाभञ्ज्यांग तिम्बुंग पोखरी जाने वाली सड़क, इन सभी सड़कों का निर्माण होना बहुत जरूरी है।”

दक्ष आप्रवासी श्रमिकों के लिए ऑस्ट्रेलिया का बड़ा निवेश

समाचार सारांश

संपादकीय रूप से समीक्षा की गई।

  • ऑस्ट्रेलिया सरकार ने 2026-27 के संघीय बजट में आप्रवासी श्रमिकों के कौशल परीक्षण और परमिट प्रक्रिया को तेज करने के लिए 8 करोड़ 52 लाख डॉलर का बजट आवंटित किया है।
  • सरकार ने स्थायी आव्रजन अंक प्रणाली में व्यापक बदलाव करते हुए उच्च शिक्षित, उच्च कौशल वाले और कम उम्र के आप्रवासियों को प्राथमिकता देने की रणनीति अपनाई है।
  • ऑस्ट्रेलिया ने आप्रवासी कामगारों के शोषण को रोकने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अगले दो वर्षों में 2 करोड़ 70 लाख डॉलर अतिरिक्त बजट जारी किया है।

30 वैशाख, काठमांडू। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने विदेशी दक्ष कामगारों को जल्द से जल्द श्रम बाजार में लाने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च करने की घोषणा की है। 2026-27 के संघीय बजट में सरकार ने आप्रवासी श्रमिकों के कौशल परीक्षण और परमिट प्रक्रिया को तेज करने के लिए 8 करोड़ 52 लाख डॉलर से अधिक बजट आवंटित किया है।

ऑस्ट्रेलिया की अवसंरचना निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना को सफल बनाने के लिए कुशल निर्माण कर्मियों की कमी को दूर करने के लिए यह कदम बजट में उल्लेखित है।

बजट के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया ने ‘स्थायी आव्रजन अंक प्रणाली’ (Permanent Migration Points Test) में भी व्यापक बदलाव करने की घोषणा की है। इस परीक्षण में संशोधन करते हुए अब ऑस्ट्रेलिया उच्च शिक्षित, उच्च कौशल वाले और कम उम्र के आप्रवासियों को प्राथमिकता देगा।

बजट विवरण में कहा गया है, “सरकार स्थायी आव्रजन अंक प्रणाली में सुधार करेगी ताकि ऑस्ट्रेलिया की उत्पादकता और दीर्घकालिक समृद्धि को बढ़ाने वाले आप्रवासियों की पहचान की जा सके।” वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया के दो-तिहाई स्थायी दक्ष आप्रवासियों का चयन इसी अंक परीक्षण के आधार पर होता है।

बजट में ऑस्ट्रेलिया के ‘नेट ओवरसीज माइग्रेशन’ के आंकड़े भी प्रस्तुत किए गए हैं, जिसके अनुसार 2025-26 में आप्रवासियों की संख्या 2 लाख 95 हजार थी। आगामी वित्त वर्ष में यह संख्या 50 हजार कम होने का अनुमान है। अस्थायी वीज़ा धारक कामगार पिछले वर्षों की तुलना में कम संख्या में ऑस्ट्रेलिया छोड़कर लौट रहे हैं, जिससे यह आंकड़ा बजट में कुछ अधिक दिख रहा है।

इसके अलावा सरकार ने आप्रवासी कामगारों के शोषण को रोकने और कार्यस्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अगले दो वर्षों के लिए 2 करोड़ 70 लाख डॉलर अतिरिक्त बजट आवंटित किया है। यह राशि आप्रवासी श्रमिकों को उनके अधिकारों और कानूनी सुरक्षा के प्रति जागरूक करने में सहायक होगी, ऐसा विश्वास व्यक्त किया गया है।

दूसरी खुली जुडो प्रतियोगिता का आयोजन

चैंपियंस जुडो एकेडमी 23 जेठ को दिन दूसरी खुली जुडो प्रतियोगिता का आयोजन कर रही है। पुरुष और महिलाओं के लिए बराबर 2-2 कुल 4 वजन वर्गों में मुकाबले होंगे। प्रथम स्थान पाने वाले को 5 हजार रुपये, दूसरे स्थान को 3 हजार रुपये और तीसरे स्थान को 2 हजार रुपये नकद के साथ गिफ्ट हैम्पर दिया जाएगा।

29 वैशाख को काठमांडू में आयोजित कार्यक्रम में चैंपियंस जुडो एकेडमी के निदेशक सरोज महर्जन ने प्रतियोगिता के बारे में जानकारी दी। पुरुष वर्ग में 73 किलोग्राम से कम और 100 किलोग्राम से कम के वजन वर्ग होंगे, जबकि महिलाओं में 57 किलोग्राम से कम और 78 किलोग्राम से कम के वजन वर्गों में प्रतिस्पर्धा होगी।

प्रतियोगिता में विदेशी खिलाड़ियों की भागीदारी के लिए भी व्यवस्था की गई है। यह एक दिवसीय प्रतियोगिता खुशिबुंस्थित बहुउद्देश्यीय मार्शल आर्ट्स सेंटर (एमएमएसी) के हॉल में आयोजित की जाएगी।

संसद्‍मा रास्वपा–एमाले आमने-सामने – Online Khabar

संसद में रास्वपा और एमाले के बीच विवादित बहस

समाचार सारांश समीक्षा के पश्चात तैयार किया गया। प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) और नेकपा एमाले के सांसदों के बीच बादल द्वारा प्रौद्योगिकी के उपयोग और नेपाली सेना की मौनता पर दिए गए बयानों को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है। रास्वपा के सांसद मनिष खनाल ने बादल के बयानों को संसद रिकॉर्ड से हटाने के लिए सभापति अर्याल से अनुरोध किया था। सभापति ने नियमावली के नियम २१ के खंड ‘घ’ के अनुसार बादल के बयानों को संसद रिकॉर्ड से हटाने हेतु संसद सचिवालय को निर्देश दिया है। ३० वैशाख, काठमाडौं।

प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) और नेकपा एमाले के सांसद आमने-सामने आए। एक-दूसरे के बयानों को लेकर उन्होंने संसद में प्रश्नोत्तर के दौरान बहस की। मंगलवार को प्रतिनिधि सभा के बैठक में बोलते हुए एमाले संसदीय दल के नेता रामबहादुर थापा बादल ने रास्वपा पर चुनाव जीतने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने ‘अराजकों का हुजूम’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया और नेपाली सेना पर देश की संकट में मौन रहने की टिप्पणी भी की। इसी विषय पर मंगलवार को ही रास्वपा के सांसदों ने आपत्ति जताई थी। बुधवार को भी रास्वपा के सांसद मनिष खनाल ने सभापति का ध्यानाकर्षण कराया।

बादल के बयानों को संसद रिकॉर्ड में रखने से भविष्य में गलत रिकॉर्ड बन सकता है, इसलिए इसे हटाने की उनकी मांग थी। मनिष खनाल के बोलते ही एमाले के मुख्य सचेतक ऐन महर ने जवाब देते हुए उठ खड़े हुए। सभापति ने नियमावली के किस नियम के अंतर्गत विवाद है पूछने पर उन्होंने जवाब देने के लिए समय मांगा, लेकिन सभापति ने समय नहीं दिया। इसके विपरीत, सभापति ने मनिष खनाल की मांग अनुसार एमाले नेता बादल के बयानों को हटाने का निर्देश संसद सचिवालय को दिया। सभापति अर्याल ने प्रतिनिधि सभा नियमावली के नियम २१ के खंड ‘घ’ के विपरीत बादल के बोले गए बयानों को संसदीय रिकॉर्ड से हटाने का रूलिंग दिया है।

प्रतिनिधि सभा नियमावली के नियम २१ के अनुसार, चर्चा में भाग लेने वाले सदस्य को पालन करने वाले नियम निर्धारित हैं, जिनमें सभापति की अनुमति लेकर ही बोलना चाहिए। सभापति के पदानुसार किए गए आचरण को प्रस्ताव के चर्चा के अलावा आलोचना करने की अनुमति नहीं है। संविधान के धारा १०५ के तहत विवादित विषयों पर बहस रोकने का प्रावधान है। इसमें अशिष्ट, अश्लील, अपमानजनक तथा आपत्तिजनक शब्दों या सार्वजनिक शिष्टाचार व नैतिकता के उल्लंघन वाले बयानों का प्रयोग, जाति, धर्म, भाषा या लिंग के आधार पर भेदभावपूर्ण टिप्पणियों पर भी रोक है। सदन के कार्य में बाधा पहुंचाने के लिए अधिकार का दुरुपयोग भी नियमावली द्वारा रोका गया है। इसी संदर्भ में, एमाले नेता बादल के बयानों का लगातार बने रहना अनुचित था, जिससे दोनों दलों के सांसदों के बीच प्रत्यक्ष टकराव हुआ। नियमावली के अनुसार सार्वजनिक शिष्टाचार का उल्लंघन करने वाले शब्दों को हटाने हेतु सभापति ने रूलिंग दी है।

ट्रैक्टर दुर्घटना में एक की मौत, चालक गंभीर रूप से घायल

गोरखा के भीमसेनथापा गाउँपालिका-२ रातामाटे में निर्माण सामग्री से लदे ट्रैक्टर की दुर्घटना हो गई। इस दुर्घटना में गाउँपालिका-३ के १३ वर्षीय विक्रम बस्याल की उपचार के दौरान प्रदेश अस्पताल गोरखा में मौत हो गई है। जिला प्रहरी कार्यालय के सूचना अधिकारी राजकुमार श्रेष्ठ के अनुसार, बस्याल की उपचार के दौरान आज सुबह मृत्यु हुई।

दुर्घटना में ट्रैक्टर चालक सिरानचोक गाउँपालिका-८ के २६ वर्षीय राजन परियार गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वे फिलहाल उसी अस्पताल में उपचाराधीन हैं। ३० वैशाख की रात को हुई इस दुर्घटना ने स्थानीय समुदाय में शोक की स्तिथि पैदा कर दी है।

फीफा विश्व कप 2026 के लिए स्वीडन ने 26 सदस्यीय टीम घोषित की

स्वीडन ने फीफा विश्व कप 2026 के लिए 26 सदस्यीय अंतिम टीम की घोषणा की है। टीम में प्रीमियर लीग के विक्टर योकेरेस और अलेक्जेंडर इसाक मुख्य खिलाड़ी हैं। स्वीडन समूह एफ में नीदरलैंड, जापान और ट्यूनीशिया के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करेगा।

30 वैशाख, काठमांडू। फीफा विश्व कप 2026, जो 11 जून से शुरू हो रहा है, के लिए यूरोपीय राष्ट्र स्वीडन ने अपनी टीम का सार्वजनिक घोषणा कर दी है। स्वीडन ने प्रतियोगिता के लिए 26 सदस्यीय अंतिम टीम घोषित की है। प्रीमियर लीग के दो स्टार खिलाड़ी विक्टर योकेरेस और अलेक्जेंडर इसाक को टीम की मुख्य ताकत के रूप में चुना गया है।

डेजान क्लुसेव्स्की, रोनी बर्डघी और विलियट स्वीडवर्ग जैसे खिलाड़ी इस टीम में नहीं हैं, जिसकी घोषणा मुख्य कोच ग्राहम पॉटर ने की है। समूह एफ में स्वीडन नीदरलैंड, जापान और ट्यूनीशिया के खिलाफ मैदान में उतरेगा।

स्वीडन की टीम इस प्रकार है:
गोलकीपर: विक्टर जोहानसन, क्रिस्टोफर नॉर्डफेल्ट, जैकब जैटेरस्ट्रॉम।
डिफेंडर: हाल्मर एक्दाल, गैब्रिअल गुडमुंडसन, इसाक हिएन, एमिल होल्म, गुस्ताफ लागरबिएल्के, विक्टर लिंडेलोफ, एरिक स्मिथ, कार्ल स्टारफेल्ट, एलीट स्ट्राउड, डेनियल स्वेन्सन।
मिडफील्डर: यासिन आयारी, लुकास बर्गवॉल, जे़स्पर कार्लस्ट्रॉम, बेंजामिन नाइग्रेन, केन सिमा, माथिएस स्वानबर्ग, बासफोर्ट जेनेली।
फॉरवर्ड: ताहा अली, अलेक्जेंडर बर्नहार्डसन, एंथनी एलांगा, विक्टर योकेरेस, अलेक्जेंडर इसाक, गुस्ताफ निलसन।

प्रतिनिधि सभा बैठक लाइभ LIVE – Online Khabar

प्रतिनिधि सभा की बैठक प्रत्यक्ष प्रसारण LIVE

समाचार सारांश

OK AI द्वारा निर्माण, सम्पादकीय समीक्षा गरिएको।

  • प्रतिनिधि सभाको बैठक वैशाख ३० गते शुरू हुआ है और अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले सरकार की नीति तथा कार्यक्रम पर उठे प्रश्नों का उत्तर देंगे।
  • प्रधानमंत्री बालेन शाह ने उत्तर नहीं देने की बात कही थी, जिसके कारण अर्थमंत्री वाग्ले उत्तर देने जा रहे हैं।
  • राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने आर्थिक वर्ष २०८३/८४ की नीति तथा कार्यक्रम वैशाख २८ को संसद में प्रस्तुत की थी और आज इसे पारित करने की तैयारी है।

३० वैशाख, काठमाडौं। प्रतिनिधि सभा की बैठक शुरू हो चुकी है। आज की बैठक में नीति तथा कार्यक्रम पर चर्चा समाप्त होने के बाद अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले प्रश्नों का उत्तर देंगे।

पहले प्रधानमंत्री बालेन शाह के उत्तर देने की संभावित सूची बनी थी, लेकिन उन्होंने उत्तर न देने का निर्णय किया था। इसलिए प्रधानमन्त्री की जगह अर्थमंत्री वाग्ले उत्तर देने जा रहे हैं।

राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने आर्थिक वर्ष २०८३/८४ की सरकार की नीति तथा कार्यक्रम इसी वैशाख २८ को संघीय संसद की बैठक में पढ़ी थी।

इसके बाद आज चर्चा शुरू होगी, चर्चा में उठे प्रश्नों के उत्तर दिए जाएंगे, सांसदों द्वारा प्रस्तुत संशोधनों को निर्णय के लिए प्रस्तुत किया जाएगा और आज ही इसे पारित करने की तैयारी संसद सचिवालय ने बताई है।

रवि लामिछाने के नेतृत्व में रास्वप ने महाधिवेशन के लिए मूल आयोजक समिति का गठन किया

३० वैशाख, काठमाडौं। रास्वप ने सभापति रवि लामिछाने के नेतृत्व में महाधिवेशन के मूल आयोजक समिति का गठन किया है। बुधवार सुबह हुई केन्द्रीय समिति की बैठक में असार ७ से ९ गते तक चितवन में पहला महाधिवेशन आयोजित करने का निर्णय लिया गया। संसदीय दल के उपनेता गणेश पराजुली ने बताया कि इसके लिए सभापति के नेतृत्व में मूल आयोजक समिति का गठन किया गया है। ‘पूरी केन्द्रीय समिति ही आयोजक समिति बनी है। महाधिवेशन की तैयारी के लिए विभिन्न उपसमितियां भी बनाई जा चुकी हैं,’ उन्होंने कहा।

रास्वप ने समिति गठन न किए गए वॉर्डों की सभा जेठ २ गते बुलाने का निर्णय लिया है। वैशाख २० गते से पहले वॉर्ड समिति बना चुके स्थानों का वॉर्ड अधिवेशन जेठ ३ गते निर्धारित किया गया है। तदर्थ समिति गठन न किए गए पालिकाओं की सभा जेठ ९ गते के लिए समय तय किया गया है। वैशाख २५ गते से पहले पालिका समिति बनाए गए स्थानों के अधिवेशन का समय जेठ १० गते रखा गया है। जेठ ३ गते तक वॉर्ड समिति बने स्थानों का अधिवेशन जेठ १६ गते आयोजित किया जाएगा। जेठ १० गते से पहले पालिका समिति बनने वालों के लिए पालिका अधिवेशन जेठ १७ गते निर्धारित किया गया है। जेठ २३ और २४ गते जिला अधिवेशन करने का निर्णय पहले ही सचिवालय बैठक द्वारा लिया गया था।

बार्सिलोना फुटबॉल टीम की जीत पर लमिन यमाल ने फहराया फिलीस्तीनी झंडा

बार्सिलोना विजेता बनने के बाद लमिन यमाल ने फिलीस्तीनी झंडा फहराया। 18 वर्षीय बार्सिलोना फुटबॉल खिलाड़ी लमिन यमाल ने अपने क्लब द्वारा स्पेनिश लीग जीतने के बाद आयोजित विजय जुलूस में फिलीस्तीनी झंडा फहराया। बार्सिलोना फुटबॉल क्लब ने रियल मैड्रिड को 2-0 से हराकर 29वीं बार यह खिताब हासिल किया।

मोबाइल अफ गरेर भाग्दै गरेको अवस्थामा सिन्धुलीबाट समातिएका थिए सीईओ पाण्डे

सिन्धुली से मोबाइल बंद कर भाग रहे CEO पाण्डे गिरफ्तार

नेपाल इन्भेष्टमेन्ट मेगा बैंक के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी ज्योतिप्रकाश पाण्डे सिन्धुली से गिरफ्तार हुए हैं। पाण्डे मोबाइल बंद कर भागने की कोशिश कर रहे थे, तभी उन्हें पकड़ा गया और उन्हें काठमाडौं लाया गया है। पाण्डे के खिलाफ ठगी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप में जांच जारी है। ३० वैशाख, काठमाडौं।

प्रहरी केन्द्रीय अनुसन्धान ब्यूरो (सीआईबी) के एसएसपी शिवकुमार श्रेष्ठ के अनुसार पाण्डे को सिन्धुली से गिरफ्तार किया गया है। सीआईबी के स्रोतों ने बताया कि पाण्डे को मोबाइल बंद कर भागते हुए पकड़ा गया था। वह कुछ दिनों से निगरानी में थे और जब पता चला कि वह सिन्धुली में है, तो जिल्ला प्रहरी कार्यालय सिन्धुली के सहयोग से उनकी गिरफ्तारी की गई।

सिन्धुली के कमलामाई नगरपालिका-६ बपार्क के मदन भण्डारी राजमार्ग से रात ८ बजे उन्हें गिरफ्तार कर काठमाडौं लाया गया। काठमाडौं के रक्तकाली ठिकाने से ललितपुर के मानभवन इलाके में रहने वाले ६३ वर्षीय पाण्डे के खिलाफ मु्लुकी अपराध संहिता के तहत ठगी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप में जांच चल रही है, ऐसा सीआईबी के एसएसपी श्रेष्ठ ने बताया। पाण्डे लोन रिकवरी कमिटी के अध्यक्ष भी थे और उसी हैसियत से लिलामी प्रक्रिया में शामिल थे।

दूरसंचार प्राधिकरण जमल से २ वैशाख २०७० में स्मार्ट टेलिकम प्रा.लि. को टेलीफोन सेवा संचालित करने की अनुमति दी गई थी। लेकिन नियमों के अनुसार अनुमति का नवीनीकरण न होने के कारण यह अनुमतिपत्र रद्द कर दिया गया था। दूरसंचार सेवा प्रदाता की सम्पत्ति प्रबंधन नियमावली, २०७९ के नियम १८ के तहत सम्पूर्ण सम्पत्ति, पूर्वाधार, संरचना, प्रणाली और नेटवर्क नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण के नियंत्रण में लेने के बाद नेपाल सरकार की सम्पत्ति को बेईमानीपूर्ण तरीके से नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से उन्होंने काम किया है, ऐसा सीआईबी ने जानकारी दी है।

नेतृत्व के लिए सिटौला और केसी के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • नेपाल यातायात व्यवसायी राष्ट्रिय महासंघ के सातवें महाधिवेशन में 387 संस्थाओं के 1663 प्रतिनिधि नए नेतृत्व के चयन के लिए पोखरा में एकत्रित हुए हैं।
  • वरिष्ठ उपाध्यक्ष पुण्यप्रसाद सिटौला और हरिप्रसाद शरण के बीच अध्यक्ष पद के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा जारी है, जिसमें सिटौला ने ऑनलाइन टिकटिंग, जीपीएस सिस्टम और कैशलेस प्रणाली को प्राथमिकता दी है।
  • महासंघ के 86 सदस्यीय केंद्रीय कार्यसमिति के विभिन्न पदों के लिए मतदान जारी है, जिसमें वरिष्ठ उपाध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष सहित कई पदों पर कई उम्मीदवार प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

29 वैशाख, पोखरा । नेपाल यातायात व्यवसायी राष्ट्रिय महासंघ का चुनावी मुकाबला पोखरा में जारी है। महासंघ के नए नेतृत्व के चयन के लिए 387 संस्थाओं के 1663 प्रतिनिधि पोखरा में जुटे हैं।

27 वैशाख से शुरू हुए सातवें महाधिवेशन के माध्यम से पूरे देश के यातायात व्यवसायी से जुड़े प्रालियों, कंपनियों, समितियों तथा संगठनों के छाता संगठन महासंघ का नया नेतृत्व चुना जाएगा।

नेतृत्व के लिए वरिष्ठ उपाध्यक्ष पुण्यप्रसाद सिटौला (सरोज) और वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरिप्रसाद शरण के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। मंगलवार को कांग्रेस, एमाले और माओवादी ने सिटौला के पक्ष में सहमति बनाने की कोशिश की, लेकिन एक समूह के विरोध के कारण प्रयास असफल रहा।

अध्यक्ष पद के लिए पूर्व अध्यक्ष विजय स्वाँर और योगेन्द्र कर्मचार्य ने अलग-अलग उम्मेदवारी घोषित करने की योजना बनाई थी। लेकिन कांग्रेस से सिटौला का नाम सामने आने के बाद एक समूह असंतुष्ट हो गया और तीन पुराने दलों को एक मंच पर लाने के प्रयास सफल नहीं हो पाए।

सिटौला और हरिशरण के साथ-साथ अध्यक्ष पद के लिए बलेफी गाउँपालिका के पूर्व अध्यक्ष और अरनिको यातायात प्रालि के अध्यक्ष केदार क्षेत्री तथा सानो काजी प्रजापति ने भी अपनी उम्मीदवारी जताई थी। लेकिन मुख्य मुकाबला सिटौला और केसी के बीच ही होने की संभावना है।

पूर्व सरकार के निकट रहकर कई कार्यकारी पदों पर काम कर चुके सिटौला ने अपने अतीत के कार्यों और नेतृत्व क्षमता के कारण खुद को पसंदीदा उम्मीदवार मानते हैं।

सिटौला ने पुराने कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से तकनीकी रूप से उन्नत यातायात क्षेत्र बनाने की योजना बताई है।

उन्होंने कहा, ‘ऑनलाइन टिकटिंग, जीपीएस सिस्टम, और कैशलेस प्रणाली — ये तीन एजेंडाएं मेरी प्राथमिकता हैं। मजदूर से लेकर व्यवसायी तक सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा भी मेरी प्राथमिकताओं में शामिल है।’

सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान होते हुए भी उसका प्रभावी क्रियान्वयन न हो पाने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनका नेतृत्व इस दिशा में काम करेगा।

सिटौला ने बीमा नीति में बड़े मुद्दों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना बीमा प्रणाली क्षतिग्रस्त है और दुर्घटना न्यूनीकरण के लिए यदि राज्य ने बीमा को व्यवस्थित नहीं किया तो काम नहीं चलेगा।

उन्होंने कहा कि वे बीमा नीति को लाने और उसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सक्रिय रहेंगे। दुर्घटना के बाद बीमा कंपनियों के साथ अक्सर झंझट होता है।

सिटौला ने कहा, ‘मैं बीमा कंपनियों के अत्याचारों को रोकूंगा। दुर्घटना के बाद मृतक परिवार को 5 लाख और घायलों को 3 लाख रुपए ही मिल पाता है। घायलों के इलाज में करोड़ों खर्च होते हैं। दुर्घटना में मृतक को पांच लाख दिया जाता है, जबकि सड़क पर 20 लाख की मांग होती है। ऐसे असंगतियों को मैं दूर कराऊंगा।’

सड़क प्रबंधन और आधारभूत संरचना को व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाने के लिए उन्होंने अपनी उम्मीदवारी बताई।

लंबे अनुभव के बावजूद कार्यकारी पदों पर काम करने वालों ने निराश किया है, इसलिए नया नेतृत्व इस व्यवस्था को तोड़ने के लिए काम करेगा, यह कहकर केसी ने अपनी उम्मीदवारी का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि महासंघ में वे लंबे समय से जुड़े हैं लेकिन कार्यकारी भूमिका में नहीं रहे, और कार्यसमिति के काम करने के ढांचे को करीब से देखा है।

केसी ने कहा कि सार्वजनिक यातायात क्षेत्र में बीमा से जुड़ी बड़ी समस्या है और उन्होंने इसे सुधारने की योजना बनाई है। वे वर्तमान सरकार के साथ सहयोग करके यातायात क्षेत्र की समस्याओं को हल करने का प्रयास कर रहे हैं।

महासंघ की सरकार से समन्वय न हो पाने के कारण पुराने कानूनों में ही कार्य करना पड़ा और इसलिए यातायात क्षेत्र की समस्याएं जस की तस बनीं। उन्होंने दुर्घटना में कमी, आयात और रूट परमिट नीतियों में सुधार के लिए प्रतिबद्धता जताई।

केसी ने राजस्थानिकट के समर्थन के साथ पिछली चुनाव की नारा दोहराते हुए ‘चुपचाप, हरिशरण केसी (हुस) को छाप’ का नारा दिया।

महासंघ में 86 सदस्यीय केंद्रीय कार्यसमिति होगी, जिसमें से 84 पदों के लिए ही चुनाव होगा, चुनाव अधिकारी योगेन्द्र केसी ने जानकारी दी।

अध्यक्ष पद पर सिटौला और केसी के बीच प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ अन्य पदों पर भी मतदान जारी है। वरिष्ठ उपाध्यक्ष के लिए 3 पदों पर 6 उम्मीदवार हैं।

वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए पोखरा से 2 उम्मीदवार हैं। पोखरा के ऐनकुमार साई, केदार पौड़े के अलावा गोकर्णप्रसाद पराजुली, सानुकाजी प्रजापति, सुनील कुँवर और राजेन्द्र रिजाल भी इस पद के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

महासचिव पद के लिए डेकनाथ गौतम, शम्भुप्रसाद रिजाल और ज्ञानेन्द्र श्रेष्ठ के बीच मुकाबला है। कोषाध्यक्ष पद के लिए किरणकुमार खड्का, राजेन्द्र आचार्य और राजेशकुमार श्रेष्ठ उम्मीदवार हैं।

7 उपाध्यक्ष पदों के लिए 13, सचिव पद के लिए 6 तथा उपमहासचिव पद के लिए 5 उम्मीदवार हैं। नया नेतृत्व गठित करने के लिए पोखरा इवेंट सेंटर में रामलक्ष्मण इलेक्ट्रॉनिक मशीन से मतदान किया जा रहा है।

बाँदर धपाउन तेह्रथुमको लालीगुराँस नगरपालिकाले दियो सार्वजनिक बिदा

तेह्रथुम के लालीगुराँस नगरपालिका ने बाँदर नियंत्रण के लिए सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की

३० वैशाख, तेह्रथुम । तेह्रथुम के लालीगुराँस नगरपालिका ने बाँदर नियंत्रण हेतु जेठ १ को दिन सार्वजनिक अवकाश देने का निर्णय लिया है। नगरपालिका के अनुसार, बाँदर को सीमाबद्ध करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी आवश्यक होने के कारण यह सार्वजनिक अवकाश आवश्यक माना गया है। नगरपालिका प्रमुख अर्जुन माबोहाङ द्वारा जारी सूचना में कहा गया है, ‘बाँदर को धपाने के लिए बड़ी संख्या में जनशक्ति चाहिए, इसलिए जेठ १, शुक्रवार को अपातकालीन सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी सेवाएं बंद कर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।’

नगरपालिका प्रमुख माबोहाङ ने बताया कि बाँदर की समस्या सतह पर सामान्य प्रतीत हो सकती है, लेकिन इसका प्रभाव कृषक समुदाय पर व्यापक रूप से पड़ा है। बाँदर के कारण कृषि उपज की सुरक्षा के लिए किसानों को दिन-रात खेतों की रक्षा करनी पड़ रही है, जिसकी वजह से कई बच्चे विद्यालय नहीं जा पा रहे हैं। इस समस्या को देखते हुए लालीगुराँस नगरपालिका ने चालू आर्थिक वर्ष २०८२/०८३ के स्वीकृत बजट के तहत ‘कृषि में बाँदर द्वारा हुए नुकसान की कमी’ कार्यक्रम शुरू किया है।

नगरपालिका ने वडा नं ८ के मेघा पुच्छार, वडा नं ६ और ८ के संगमस्थल नागेश्वरी एवं वडा नं ५ के सिंथापा पुच्छार क्षेत्रों में अस्थायी संरचनाओं के साथ बाँदर हेरालुओं को तैनात किया है। विशेषकर जंगल के निकट बसे इलाकों में बाँदर की समस्या गंभीर है। नगरपालिका प्रमुख माबोहाङ ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर दीर्घकालीन समाधान आवश्यक है, लेकिन तत्काल के लिए स्थानीय तह ने अपनी संसाधनों का उपयोग करके किसानों को राहत देने का प्रयास शुरू कर दिया है। बाँदर नियंत्रण और खेती की रक्षा के लिए जेठ १ और २ की तारीखों में ‘बाँदर लखेटी नगरपालिका सीमा काटने’ विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसकी जानकारी लालीगुराँस नगरपालिका-७ के वडाध्यक्ष एवं प्रवक्ता देवेन्द्र खडक ने दी। इस बाँदर लखेटी अभियान में किसान, जनप्रतिनिधि, कर्मचारी और स्थानीय नागरिकों से सक्रिय सहभागिता की अपील की गई है।

सरकार की अतिक्रमण हटाने की योजना ने सुकुमवासी और भूमिहीनों को आंदोलन के लिए मजबूर किया

सरकार ने सिरहा के 17 स्थानीय निकायों में सार्वजनिक भूमियों का रिकॉर्ड अपडेट करके अतिक्रमण हटाने की योजना शुरू की है, जिसके बाद सुकुमवासी और भूमिहीन समुदाय आंदोलन में उतर गए हैं। सिरहा के 9,852 भूमिहीन दलित, सुकुमवासी और अव्यवस्थित आवास परिवार अस्थायी बसावट में हैं। भूमि अधिकार मंच सिरहा ने सुरक्षित आवास सुनिश्चित किए बिना बस्तियों को हटाना अमानवीय बताया है। 30 वैशाख, सिरहा।

धनगढीमाई नगरपालिका-6 के 56 वर्षीय हरि सदाय ने जीवनभर दूसरों के खेत-बाड़े में मजदूरी कर परिवार पाल रखा है। उन्होंने कहा, “दादा-दादी से हम सुकुमवासी हैं। दिन-रात मजदूरी कर बच्चों को पाला। अब उम्र ढलकी, लेकिन छप्पर लगा हुआ जमीन भी हमारा नाम नहीं है।” हरि के साथ अन्य सुकुमवासी भी सरकार के फैसले के खिलाफ आंदोलन में शामिल हुए हैं।

सिरहा के विभिन्न सुकुमवासी बस्तियों में आज एक ही सवाल उठ रहा है, “अब हम कहाँ जाएंगे?” गोलबाजार नगरपालिका-3 की तेतरिया की सोवरन देवी सदाय ने कहा, “कब बेघर किया जाएगा, इस डर से नींद नहीं आती।” मिर्चैया नगरपालिका-6 के भीमबहादुर दमै ने कहा, “हम दलितों को हमेशा वोट बैंक बनाकर इस्तेमाल किया गया। वर्तमान सरकार के नेता दलित समुदाय से माफी मांगते सुनकर उम्मीद जगी थी, लेकिन व्यवहार में गरीबों के घर तोड़ने का काम जारी है।”

सरकार के हालिया निर्णय और देश के विभिन्न हिस्सों में सुकुमवासी बस्तियों में डोजर चलाने की घटनाओं से आक्रोशित सिरहा के भूमिहीन अब आंदोलन में हैं। सोमवार को धनगढीमाई में आयोजित प्रदर्शन में शामिल लोगों ने अपनी पीड़ा और असंतोष सार्वजनिक किया। वे बताते हैं कि यह आंदोलन इच्छा से नहीं मजबूरी से है। रामसौगर देवी सदाय ने कहा, “हम सड़क पर आने की इच्छा नहीं रखते थे। दिन-प्रतिदिन मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। बदलाव की आशा में वोट दिया और जिताया। लेकिन अब हमारे घर तोड़ने की बात हो रही है!”

जिला प्रशासन कार्यालय सिरहा ने 24 वैशाख को जारी आदेश में बताया कि जिले के भूमिहीन, सुकुमवासी और अव्यवस्थित बसे हुए लोगों के बारे में चिंता बढ़ी है। आदेश के अनुसार, जिले के 17 स्थानीय तहों को सार्वजनिक और सरकारी भूमि का रिकॉर्ड अपडेट कर अतिक्रमण हटाने और सुकुमवासी की सही पहचान कर प्रबंधन प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। लेकिन स्थानीय सुकुमवासी ‘प्रबंधन’ के नाम पर विस्थापन की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। भूमि अधिकार मंच सिरहा के अध्यक्ष समस्ती लाल आले ने कहा कि उचित विकल्प नहीं देकर बस्ती हटाने का प्रयास आंदोलन जरूरी बना चुका है।

भूमि समस्या समाधान आयोग के 2081/82 के आंकड़ों के अनुसार सिरहा में अकेले 3,815 भूमिहीन दलित, 2,663 भूमिहीन सुकुमवासी और 3,374 अव्यवस्थित बसे परिवार हैं। कुल 9,852 परिवार ग्रामीण सड़क किनारे, ऐलानी भूमि, वन क्षेत्र और साहुमहाजन की निजी जमीन पर अस्थायी रूप से रहते हैं। सरकार की ओर से अतिक्रमित और ऐलानी भूमि पर बस्तियां हटाने की चेतावनी के कारण वे लगातार भयभीत हैं।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इरान के साथ युद्ध में 29 अरब डॉलर खर्च होने की जानकारी दी

पेंटागन ने इरान के साथ युद्ध में अब तक 29 अरब डॉलर खर्च होने की जानकारी दी है। रक्षा सचिव पिट हेगसेथ ने 29 अप्रैल को 25 अरब डॉलर का अनुमान लगाया था, जो अब 29 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के शांति प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद युद्धविराम को ‘मानव जीवन की सहायता’ बताया है।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने इरान के साथ युद्ध में अब तक 29 अरब डॉलर खर्च होने की पुष्टि की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस संघर्ष और सैन्य तैयारियों के प्रभावों पर बढ़ती जांच का सामना कर रहे हैं, ऐसे समय इस तथ्य का सार्वजनिक होना महत्वपूर्ण है। यह जानकारी बजट सुनवाई के दौरान कैपिटल हिल में रक्षा विभाग द्वारा साझा की गई। यह नया आंकड़ा रक्षा सचिव पिट हेगसेथ द्वारा दो सप्ताह पहले दी गई अनुमानित राशि से लगभग चार अरब डॉलर अधिक है।

हेगसेथ और ‘ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ’ के अध्यक्ष जनरल डनकेन ने पेंटागन के वित्त प्रमुख जूल्स हर्स्ट तृतीय के साथ 2027 के लिए 1.5 ट्रिलियन डॉलर के बजट प्रस्ताव पर बहस के दौरान युद्ध में हुए खर्च को सार्वजनिक करने की आवश्यकता जताई थी। इस विषय पर, हर्स्ट ने सांसदों को बताया, ‘युद्ध के दौरान यह खर्च 25 अरब डॉलर बताई गई थी,’ और हेगसेथ के 29 अप्रैल के अनुमानों का हवाला देते हुए कहा, ‘संयुक्त कर्मचारी और नियंत्रक दल लगातार इस अनुमान की समीक्षा कर रहे हैं, इसलिए अब यह बजट लगभग 29 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।’

कांग्रेस द्वारा युद्ध खर्च का पूरा विवरण कब प्राप्त होगा, इस सवाल पर हेगसेथ ने कहा, ‘प्रशासन ने पेंटागन के मुख्य बजट से अलग “आवश्यकतानुसार अनुरोध” का उल्लेख किया है, लेकिन यह पूरक अनुरोध कब आएगा, यह स्पष्ट नहीं है।’ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान के हालिया शांति प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद युद्धविराम को ‘मानव जीवन के लिए सहारा’ के रूप में वर्णित किया है। हाउस अप्रूपिएशंस कमेटी में शीर्ष डेमोक्रेट रोजा डेलाउरो ने पूछा था, ‘इस युद्ध से हमने क्या हासिल किया है और इसकी लागत क्या रही?’ दूसरी डेमोक्रेट बेट्टी मैककोलम ने पेंटागन पर ‘पारदर्शिता की लगातार कमी’ का आरोप लगाते हुए, प्रशासन से दीर्घकालीन रणनीति स्पष्ट करने को कहा ताकि कांग्रेस को अतिरिक्त निधि देने से पहले समझ हो सके।

पश्चिम एशिया में महीनों से चल रहे भारी मिसाइल और हवाई सुरक्षा अभियान के बाद अमेरिकी हथियार भंडार तेजी से घट रहा है, जिससे युद्ध को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। हेगसेथ ने ‘युद्ध के कारण अमेरिकी युद्ध सामग्री के भंडार खतरनाक रूप से खत्म हो गए’ जैसी चेतावनियों को खारिज किया। उन्होंने कहा, ‘युद्ध सामग्री के विषय को गलत व्याख्या और गैरसहयोगी रूप में बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है, हम जानते हैं कि हमारे पास क्या उपलब्ध है और आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध हैं।’