१० चैत, काठमांडू। फागुन २१ के प्रतिनिधि सभा चुनाव के बाद नेपाली कांग्रेस की केन्द्रीय समिति की बैठक सानेपा स्थित केन्द्रीय कार्यालय में चल रही है। विशेष महाधिवेशन द्वारा गगन थापा के नेतृत्व में चयनित नई केन्द्रीय समिति को शेरबहादुर देउवा के नेतृत्व वाले निवर्तमान केन्द्रीय समिति के कई पदाधिकारी और सदस्य मान्यता नहीं दे रहे हैं।
उस समय बहुसंख्यक जिला कार्यसमिति के सभापति और प्रदेश समितियों ने विशेष महाधिवेशन को स्वीकार नहीं किया था। यद्यपि निर्वाचन आयोग ने विशेष महाधिवेशन से चयनित कार्यसमिति को आधिकारिकता प्रदान की, जिसके साथ गगन थापा ने कांग्रेस को चुनाव में नेतृत्व दिया था। हालांकि, निर्वाचन आयोग के इस निर्णय के विरुद्ध दायर रिट सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
इस परिस्थिति में चुनाव के तुरंत बाद कांग्रेस में विवाद और जटिल होने की संभावना दिखाई दे रही है। विशेष महाधिवेशन से चयनित कार्यसमिति के केन्द्रीय समिति की बैठक के बीच पुरानी नेतृत्व पक्ष और नेता डा. शेखर कोइराला के समर्थक पुरानी कार्यसमिति की बैठक बुलाने की तैयारी कर रहे हैं, इस प्रकार की खबरें आ रही हैं।
इस परिप्रेक्ष्य में पहले पुरानी नेतृत्व के करीब रहे अधिकांश प्रदेश सभापति नई केन्द्रीय समिति के पक्ष में खुले हैं। अब तक सात में से पाँच प्रदेश सभापति नई कार्यसमिति के पक्ष में खुल कर केन्द्रीय समिति की बैठक में भाग लेकर अपने मत प्रकट कर चुके हैं।
किस प्रदेश सभापति ने क्या कहा?
पुरानी नेतृत्व के निकट माने जाने वाले बागमती प्रदेश सभापति इन्द्रबहादुर बानियाँ नई केन्द्रीय समिति की बैठक में भाग लिए हैं। वे बागमती प्रदेश के मुख्यमन्त्री भी हैं।
उन्होंने केन्द्रीय समिति की बैठक में कहा, ‘विशेष महाधिवेशन में हम विपक्ष में थे, लेकिन फागुन २१ के चुनाव में डा. शेखर कोइराला, विमलेन्द्र निधि, प्रकाशशरण महत, मीनेन्द्र रिजाल, किशोरसिंह राठौर जैसे जो विशेष महाधिवेशन के विरोध में थे, उन्हें नई नेतृत्व ने बिना किसी कंजूसी के टिकट दिया।’ चुनाव के बाद विवाद जारी रखने की आवश्यकता नहीं है, उन्होंने स्पष्ट किया।
उन्होंने सभापति थापा से आग्रह किया कि वे विपक्षी पक्ष के साथ संवाद करें। ‘सभापति जी को दूसरे पक्ष से संवाद करके अदालत के मामले को वापस लेने का माहौल बनाना चाहिए। सभी मिलकर १५वें महाधिवेशन की ओर एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा,’ उन्होंने कहा।
सभी को एकजुट करने की जिम्मेदारी अब नई सभापति थापा के कंधों पर आई है, यह बानियाँ का मानना है।
इसी प्रकार पुरानी नेतृत्व के निकट माने जाने वाले मधेस प्रदेश सभापति कृष्णप्रसाद यादव ने कहा कि पूरी मधेस नई सभापति थापा के साथ खड़ी है। उन्होंने केन्द्रीय समिति की बैठक में कहा, ‘जिस उत्साह से विशेष महाधिवेशन हुआ, उसी उत्साह के साथ सभापति को आगे बढ़ना चाहिए। मैं दृढ़ता से आपके साथ खड़ा रहूँगा। पार्टी को नई परिस्थितियों में लेकर जाने के लिए सभी को १५वें महाधिवेशन की ओर एकजुट होना होगा।’
कोशी प्रदेश सभापति उद्धव थापाले हाल की स्थिति में सभापति गगन थापा का इस्तीफा देना उचित नहीं बताया। कुछ दिन पूर्व उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में उन्होने नई कार्यसमिति के नेतृत्व में आगे बढ़ना ही विकल्प बताया था।
‘पार्टी में विवाद होना असामान्य नहीं है, लेकिन नए नेतृत्व का विवाद कर समय बर्बाद करना सही नहीं है,’ कोशी सभापति उद्धव थापा ने कहा था।
गण्डकी प्रदेश सभापति शुक्रराज शर्मा और लुम्बिनी प्रदेश सभापति अमरसिंह पुन भी विशेष महाधिवेशन से ही सभापति थापा के पक्ष में खुले हैं।
पाँच प्रदेश सभापतियों ने नई केन्द्रीय समिति की बैठक में भाग लेकर अपनी राय प्रकट की है, लेकिन कर्णाली प्रदेश सभापति ललितजंग शाही और सुदूरपश्चिम प्रदेश सभापति वीरबहादुर बलाएर बैठक में अनुपस्थित रहे।