Skip to main content

लेखक: space4knews

स्थानीय र वैदेशिक रोजगारमा रहेकालाई कालंगा हाइड्रोको आईपीओ खुल्यो

स्थानीय और विदेशी रोजगार में लगे लोगों के लिए कालंगा हाइड्रोपावर का आईपीओ जारी

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के बाद।

  • कालंगा हाइड्रोपावर ने जनता के लिए 1 अरब 40 करोड़ रुपये के बराबर 35 प्रतिशत शेयर जारी किए हैं।
  • आयोजना प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय निवासी 24 चैत्र से 9 वैशाख तक आवेदन कर सकते हैं, जबकि विदेशी रोजगार में लगे लोग 15 चैत्र तक आवेदन कर सकेंगे।
  • कंपनी ने 15.33 मेगावाट क्षमता वाला कालंगागाड परियोजना विकसित किया है और बीबी प्लस क्रेडिट रेटिंग प्राप्त की है, जो मध्यम जोखिम की ओर संकेत करता है।

10 चैत्र, काठमाडौं। परियोजना प्रभावित क्षेत्र के स्थानीय और विदेशी रोजगार में लगे नेपाली लोगों के लिए कालंगा हाइड्रोपावर का आईपीओ जारी कर दिया गया है।

कंपनी ने जनता के लिए कुल 1 अरब 40 करोड़ रुपये के अंतर्गत 35 प्रतिशत शेयर यानी 49 करोड़ रुपये के बराबर 49 लाख शेयर जारी किए हैं। इसमें से 14 लाख शेयर परियोजना प्रभावित क्षेत्र के स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित किए गए हैं। बिक्री प्रबंधक का कार्य सैनिमा कैपिटल को दिया गया है।

परियोजना प्रभावित क्षेत्र में बझाङ जिले के केदारस्यूं गाउँपालिका वार्ड नं 4 और 5, बित्थडचिर गाउँपालिका वार्ड नं 6 और 8, बंगाल नगरपालिका के वार्ड नं 3, 4, 5, 6 और 8, बैतडी जिले के डिलासैनी गाउँपालिका वार्ड नं 1 और 2, तथा दार्चुला जिले के शैलेशिखर नगरपालिका वार्ड नं 1 शामिल हैं।

परियोजना प्रभावित स्थानीय लोगों के लिए आवेदन की अवधि 24 चैत्र से शुरू होकर 9 वैशाख तक है। वहीं विदेशी रोजगार में लगे व्यक्तियों के लिए 3 लाख 50 हजार शेयर आरक्षित हैं और वे 15 चैत्र तक आवेदन कर सकते हैं।

न्यूनतम 10 और अधिकतम 20 हजार शेयर तक आवेदन करने की सुविधा उपलब्ध है। कंपनी ने केयर रेटिंग से बीबी प्लस क्रेडिट रेटिंग प्राप्त की है, जो मध्यम जोखिम को दर्शाती है। बझाङ में कंपनी ने 15.33 मेगावाट क्षमता वाला कालंगागाड परियोजना बनाया है, जिसकी कुल लागत 4 अरब 33 करोड़ रुपये है और प्रति मेगावाट लागत 28.30 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।

बाह्रबिसे–कोदारी सडक स्तरोन्नति का काम शुरू, ३ वर्ष के अंदर पूरा करने का लक्ष्य

फाइल फोटो



काठमाडौं। अरनिको राजमार्ग के अंतर्गत आने वाली बाह्रबिसे–कोदारी सड़क का स्तरोन्नति कार्य शुरू कर दिया गया है। सड़क विभाग ने वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हुए इस मार्ग की स्तरोन्नतिका लिए अर्थ मंत्रालय से २ अर्ब ३७ करोड रुपैयाँ की स्रोत सहमति प्राप्त कर काम आगे बढ़ाया है।

अर्थ मंत्रालय की स्रोत सहमति मिलने के बाद सड़क डिवीजन चरिकोट ने ठेक्का प्रक्रिया पूरी कर पिछले मंसिर में निर्माण कंपनी एमएस एनएस गाल्वा जे.भी. के साथ समझौता ज्ञापन किया और निर्माण कार्य शुरू किया है। १ अर्ब ३४ करोड का ठेक्का लेकर कार्य प्रारंभ हुआ है,यह जानकारी सड़क डिवीजन चरिकोट के प्रमुख (सिडिई) नारायणदत्त भण्डारी ने दी है।

सड़क स्तरोन्नति के अंतर्गत बाह्रबिसे से कोदारी तक २६ किलोमीटर सड़क दो लेन में बनायी जाएगी, भण्डारी ने बताया।

डबल लेन स्तरोन्नति के लिए आवश्यक संरचनाओं का निर्माण तीव्र गति से जारी है। भण्डारी ने बताया कि पहिये जोखिम वाले क्षेत्रों में आवश्यक ज्ञानिविन वाल और प्वाम्ट के कार्य हो रहे हैं। अब तक की भौतिक प्रगति ७ प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

निर्माण कार्य की जिम्मेदारी प्राप्त एमएस एनएस गाल्वा जेभी के संचालक गौरी उप्रेती ने बताया कि निर्माण में यदि कोई बाधा नहीं आई तो समयानुसार कार्य पूर्ण किया जाएगा।

निर्माण कंपनी ने २०८२ मंसिर १ गते ठेका समझौता किया और मंसिर २० गते से साइट पर काम शुरू किया गया है, उप्रेती ने बताया। इस समय संरचना निर्माण का काम जोरो से जारी है।

निर्माण सामग्री तथा परियोजना में कोई बाधा न होने पर समय पर निर्माण कार्य पूरा करने की योजना है, उप्रेती ने कहा।

इजरायली प्रधानमन्त्री ने कहा – समझौते से युद्ध के लक्ष्य हासिल करने का मौका मिलेगा


१० चैत, काठमाडौँ। इजरायल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा है कि समझौते के जरिए युद्ध के उद्देश्य पूरे करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि यह समझौता इजरायल के आवश्यक हितों की रक्षा करेगा।

एक्स पर जारी किए गए इस वीडियो संदेश में नेतन्याहू ने कहा, ‘अमेरिकी सैन्य सहयोग से मिली बड़ी सफलता का उपयोग करते हुए हम समझौते के माध्यम से युद्ध के लक्ष्य हासिल करने का मौका पा रहे हैं। यह समझौता हमारे राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा।’

उन्होंने इस बात की प्रतिबद्धता भी जताई कि किसी भी स्थिति में वे अपने आवश्यक हितों की रक्षा करेंगे।

नेतन्याहू ने बताया कि इरान और लेबनान दोनों ही स्थानों में आक्रमण जारी है। उन्होंने कहा, ‘हम इरान और लेबनान दोनों जगहों पर हमले जारी रखे हुए हैं। हम इरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं और हिज़बुल्लाह पर लगातार बड़े हमले कर रहे हैं।’

उनके मुताबिक कुछ दिन पहले ही इरान के दो परमाणु वैज्ञानिक मारे गए हैं।

गत फरवरी के अंत में इजरायल और अमेरिका द्वारा इरान में किए गए हमले में सर्वोच्च नेता अली खामेनी सहित कई नेता मारे गए थे।

ट्रम्प का दावा, ईरान के साथ बातचीत जारी; ईरानी अधिकारियों का कहना ‘भ्रामक समाचार’

डोनल्ड ट्रम्प

तस्बिर स्रोत, EPA

पढ़ने का समय: ३ मिनट

संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच जारी युद्ध समाप्ति को लेकर बातचीत को लेकर विभिन्न मत प्रकट किए गए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि मध्य पूर्व में दोनों देशों के बीच “शत्रुता को पूरी तरह से समाप्त करने” के लिए वार्ता हो रही है। लेकिन ईरानी संसद के अध्यक्ष ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे “भ्रामक समाचार” बताया है।

ट्रम्प ने तेहरान के साथ “उत्पादक वार्ता” होने का दावा करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट में बताया कि ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर संभावित हमले को पांच दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है।

ट्रम्प ने कहा है कि यह बातचीत पूरे सप्ताह लगातार जारी रहेगी।

“इन गहन, विस्तृत और रचनात्मक वार्तालाप की भावना और शैली के आधार पर, जो पूरे सप्ताह जारी रहेगी, मैंने युद्ध नियंत्रण इकाई को ईरान के विद्युत केंद्रों और ऊर्जा के अवसंरचनाओं पर पांच दिनों के लिए सैन्य कार्रवाई स्थगित करने का निर्देश दिया है, जो इन चल रही बैठकों और वार्ताओं पर निर्भर रहेगा,” ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा।

महावीर पुन – Online Khabar

महावीर पुन: भ्रष्टाचारियों के खिलाफ पहले दिन से सख्त कार्रवाई आवश्यक

१० चैत, काठमांडू। पूर्व शिक्षा मंत्री महावीर पुन ने कहा है कि आने वाली सरकार को पहले दिन से ही भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी ताकि कोई भी नियमों का उल्लंघन कर सका।

म्याग्दी से प्रतिनिधि सभा के निर्वाचित सदस्य पुन ने मंगलवार सुबह फेसबुक पर लिखा कि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई में यदि नियम बाधक बने तो तत्काल नए नियम बनाना आवश्यक होगा। उन्होंने कहा, ‘अब आने वाली रास्वपा सरकार को पहले दिन से ही भ्रष्टाचारियों को ऐसा दंड देना चाहिए जिससे वे दोबारा कभी सामने न आ सकें। यदि नियम रुकावट बनें तो तुरंत नए नियम बनाए जाने चाहिए।’

सरकार यदि भ्रष्टाचार नियंत्रण में असफल रही तो जनता को बड़ा धोखा सहना पड़ेगा, यह बताते हुए पुन ने कहा कि राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) भी अंततः समाप्त हो जाएगी। ‘तीन महीने के भीतर जनता को सुशासन की अनुभूति होनी चाहिए,’ उन्होंने कहा, ‘भ्रष्टाचार और कुशासन दूर करने में मैं सरकार को पूरा सहयोग दूंगा।’

आज चैती छठ पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है


१० चैत्र, जनकपुरधाम। जनकपुरधाम सहित मधेश में आज चैती छठ का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। चैती छठ की मूल विधि के अनुसार आज अस्त होते सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाता है। कल सुबह उगते सूर्यदेव अर्थात् दिनानाथ को अर्घ्य देने के साथ ही चैती छठ विधिवत् समाप्त होगा।

जनकपुरधाम के गंगासागर और अर्गजासर स्थल पर यह पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार भी चैती छठ के लिए गंगासागर और अर्गजासर को दुल्हन की तरह सजा दिया गया है।

चैती छठ मनाने से हर मनोकामना पूरी होती है और छालाजन्य रोग नहीं लगने का जनविश्वास प्रचलित है।

चार दिन तक अत्यंत नियम और श्रद्धा के साथ मनाए जाने वाले चैती छठ का पहला दिन ‘नहाय–खाय’ होता है, जबकि दूसरे दिन दिनभर उपवास रखा जाता है और रात को केवल पकाए हुए खीर का सेवन किया जाता है। तीसरे दिन अर्थात् षष्ठी तिथि को निर्जला उपवास रखकर शाम को अस्त होते सूर्य को जलाशय में स्नान करके खड़े होकर अर्घ्य दिया जाता है।

आज सूर्यास्त से एक घंटा पहले से ही व्रतधारी जलाशय में प्रवेश कर षष्ठी माता का ध्यान करते हुए दिनानाथ को अर्घ्य देते हैं। अर्घ्य में ठेकुवा, भुसुवा, मूला, उखु, भंटा, केला, नारियल सहित अन्य सामग्री प्रसाद के रूप में चढाई जाती है।

व्रतधारी जागरण में रहते हुए अगले दिन चैत्र शुक्ल सप्तमी को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस पर्व का समापन करते हैं।

कात्तिक में मनाए जाने वाले छठ पर्व जितनी बड़ी संख्या में चैती छठ नहीं मनाई जाती, फिर भी वर्ष दर वर्ष इसकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है।

ईरान ने कहा– इजरायल के कारण युद्ध लंबा हुआ, मसलों का निपटारा किए बिना हम आक्रमण बंद नहीं करेंगे


१० चैत्र, काठमांडू । ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष में पीछे हटने से साफ इनकार किया है। अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले की क्षतिपूर्ति मिले बिना युद्ध जारी रहेगा, यह ईरान का दृढ़ मत है।

यह रुख सार्वजनिक होते ही काफी चर्चा शुरू हो गयी है, जो उस समय आया जब ट्रम्प ने ईरान पर पाँच दिनों के लिए हमले को स्थगित करने की घोषणा की थी।

ईरान के सर्वोच्च नेता मोज़तबा खुमैनी के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसिन रज़ाई ने एक टेलीविजन साक्षात्कार में कहा कि युद्ध की क्षतिपूर्ति नहीं होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

उन्होंने बताया कि ईरान पर लगाए गए सभी आर्थिक प्रतिबंध तत्काल हटा दिए जाने चाहिए और भविष्य में अमेरिका की किसी भी तरह की दखलअंदाजी के विरुद्ध स्पष्ट गारंटी चाहिए।

रज़ाई ने बताया कि ईरानी सेना पूरी क्षमता के साथ लड़ रही है और नए सर्वोच्च नेता मोज़तबा खुमैनी के नेतृत्व में देश मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

‘इजरायल के कारण युद्ध लंबा हुआ’

रज़ाई ने कहा कि यह युद्ध एक सप्ताह के अंदर खत्म हो सकता था लेकिन इजरायल के कारण यह लंबित हो गया। उन्होंने टिप्पणी की – ‘अमेरिका युद्धविराम के लिए तैयार था और संघर्ष को खत्म करने की पहल कर रहा था। परंतु इजरायल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू ने आक्रमण जारी रखने की सलाह दी, जिससे युद्ध लंबा हुआ।’

रज़ाई के अनुसार युद्ध के १५वें दिन के बाद अमेरिका ने भी इस संघर्ष में जीतने की संभावना कम होती देख ली थी।

ईरान में नए राजनीतिक व्यवस्था विकल्प पर काम हो रहा है: ट्रम्प

इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ईरान में नई राजनीतिक संरचना के विकल्पों पर काम कर रहा है।

फ्लोरिडा में संवाददाताओं से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा – ‘जैसे वेनेजुएला में नया नेतृत्व लाया गया, वैसा यहां भी किया जा सकता है, या अमेरिका के साथ सहयोग करके संयुक्त नेतृत्व भी स्वीकृत किया जा सकता है।’

ट्रम्प ने अपनी उत्सुकता जाहिर करते हुए कहा कि वे जल्द ही ईरान के साथ समझौता करना चाहते हैं और इसी कारण पाँच दिनों के लिए हमले को स्थगित किया है।

उन्होंने कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं पर एक विशेष व्यक्ति से बातचीत भी जारी है। हालांकि ईरान ने ट्रम्प के इस दावे को पहले ही खारिज कर दिया है।

बालेनले पार गर्नुपर्ने राजनीतिका ५ घुम्ती – Online Khabar

बालेन के सामने राजनीति के ५ अहम मोड़

समाचार सारांश

संपादकीय रूप से समीक्षा किया गया।

  • राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह ३५ वर्ष की उम्र में प्रधान मंत्री बनने के लिए निश्चित हैं।
  • रास्वपा ने प्रतिनिधि सभा सदस्य चुनाव में लगभग दो तिहाई बहुमत हासिल कर आगामी पांच वर्षों के लिए सरकार चलाने का अधिकार प्राप्त किया है।
  • बालेन को पाँच मुख्य परीक्षाओं का सामना करना होगा जिनमें मंत्रिपरिषद गठन, सुशासन, कर्मचारी प्रशासन सुधार, स्थानीय सरकारों के साथ संबंध और विदेश नीति शामिल हैं।

नेपाल की राजनीति एक नए ऐतिहासिक मोड़ पर है। ३५ वर्ष की युवा उम्र में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह (बालेन) प्रधान मंत्री बनने की तैयारी में हैं। पिछले २१ फागुन को संपन्न प्रतिनिधि सभा सदस्य चुनाव में रास्वपा ने लगभग दो तिहाई बहुमत हासिल कर बालेन की सत्ता संभालने की संभावना सुनिश्चित कर दी है। चुनाव से पहले कीट्ठाण्ठौर के मेयर थे बालेन और रास्वपा के बीच सात बिंदु समझौता हुआ था जिसमें बालेन को आगामी प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में सामने लाया गया था। रास्वपा ने आश्चर्यजनक जीत दर्ज कर आगामी पाँच वर्षों के लिए जनता की सरकार चलाने का मंत्रालय हासिल किया है।

रास्वपा की यह चुनाव जीत केवल नेपाल की राजनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव नहीं है, बल्कि नेपाली जनता द्वारा बदलाव की एक सशक्त अभिलाषा का प्रतीक माना जा सकता है। सत्ता में बैठे दलों की मौजूदा कार्यशैली से निराश होकर नेपाली जनता ने नई और प्रभावशाली नेतृत्व के माध्यम से सरकारी प्रणाली में सुधार की उम्मीद जताई है।

हाल की जनमत से प्रतीत होता है कि आगामी पाँच वर्षों तक सिंहदरबार का संचालन बालेन और उनके पार्टी के सक्षम नेतृत्वकर्ता के तौर पर चुना गया है। रास्वपा को प्राप्त बहुमत नेपाल के लिए असंभव माना जाता था क्योंकि संविधान के अनुसार कई दलों को विपक्ष में बहुमत पाना भी कठिन था। चुनाव में प्राप्त जनादेश परिवर्तन की शुरुआती निशानी है, लेकिन सफलता की गारंटी नहीं। इस जनादेश को सफल शासन में बदलने के लिए बालेन को पाँच महत्वपूर्ण परीक्षाएं उत्तीर्ण करनी होंगी, जिनका विस्तार से इस लेख में उल्लेख है।

१. सरकार चलाने वाली टीम

बालेन के पाँच वर्ष के कार्यकाल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे जिस मंत्रिपरिषद और विशेषज्ञ सलाहकार टीम का गठन करते हैं, वे कैसा योगदान देंगे। टीम निर्माण में वे स्वयं नेतृत्व कर सकते हैं या रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने के साथ मिलकर काम कर सकते हैं। दोनों विकल्पों में जोखिम हैं। पार्टी निष्ठा पर आधारित मंत्रिमंडल बने तो पारंपरिक राजनीतिक शैली दोहराई जा सकती है, जबकि केवल तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करने पर स्थानीय और राष्ट्रीय वास्तविकता की समझ कमजोर हो सकती है।

बालेन को यह शासन ढांचा शीघ्र तैयार करना आवश्यक है, क्योंकि परिस्थितियां उनका इंतजार नहीं करेंगी।

सरकार के सलाहकार और मंत्री देश की समस्याओं से परिचित होने चाहिए तथा पार्टी द्वारा घोषित नीतियों और कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से लागू करने में सक्षम होने चाहिए। क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीतिक संरचनाओं में आए परिवर्तन और उनके भू-राष्ट्रीय प्रभाव को भी बालेन की टीम को स्पष्ट रूप से समझना होगा। इसीलिए टीम चयन में गलती से न केवल शुरुआती कमजोरी बल्कि पूरे कार्यकाल में बड़ा नुकसान हो सकता है।

२. समझदारी से लिए गए निर्णय

बालेन तीन महत्वपूर्ण मांगों को साथ लेकर प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं: सुशासन, सार्वजनिक सेवा सुधार, और रोजगार सृजन। नई सरकार के शुरुआती महीनों में इन क्षेत्रों में आम जनता को स्पष्ट सुधार की उम्मीद है।

साथ ही भदौ २३ और २४ को युवा प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और तबाही के जिम्मेदारों को जवाबदेह बनाने का दबाव है। दशकों से चले आ रहे भ्रष्टाचार की गंभीर जांच और दोषियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत लाना चाहिए, ऐसी आम अपेक्षा है। ये मांगें मजबूत और कानूनी हैं, लेकिन सावधानी न बरती गई तो राजनीतिक रूप से विस्फोटक भी बन सकती हैं।

सरकार चलाने के प्रयास में इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर आक्रामक कदम उठाने से संसद और सड़कों पर विपक्षी ताकतों के साथ संघर्ष का खतरा हो सकता है। बालेन को इन विषयों में प्राथमिकता तय करने और कड़ी कार्यनीति बनाने की आवश्यकता है, जो उनके नेतृत्व की प्रभावशीलता के लिए निर्णायक होगी।

३. कर्मचारी प्रशासन पर पकड़ और सुधार

नेपाल की कर्मचारी प्रशासन और सुरक्षा निकाय बालेन के लक्ष्यों के लिए या तो ‘इंजन’ बन सकती हैं या ‘ब्रेक’। यह विषय सतह से कहीं अधिक जटिल है। शक्ति और संसाधनों का स्थानीय और तकनीकी स्तर पर हस्तांतरण सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि राज्य शक्ति के संतुलन, अधिकार पुनर्वितरण और शासन की वास्तविक प्रकृति से जुड़ा राजनीतिक निर्णय है।

बालेन की सफलता केवल निर्णय क्षमता और नेतृत्व पर निर्भर नहीं, बल्कि कर्मचारी प्रशासन के साथ समझदारीपूर्ण गठजोड़, रणनीतिक संयोजन और दीर्घकालीन दृष्टिकोण की भी आवश्यकता है। नेपाल के संविधान ने निजामती सेवा को विकास और सेवा प्रवाह की रीढ़ माना है, पर दशकों से केंद्रित सोच ने इसे दुर्बल किया है, जिससे निर्णयाधिकार उच्च स्तर तक सीमित रह गया है।

प्रभावी कर्मचारी प्रशासन सुधार के बिना सरकारी नीतियां कुशलतापूर्वक लागू नहीं हो सकतीं। सुरक्षा और स्थिरता अत्यावश्यक प्राथमिकताएं हैं, जिन्हें स्वाभाविक रूप से प्रबंधित नहीं किया जा सकता। ये विकास, व्यावसायिक माहौल और सामाजिक सद्भाव के आधार हैं। बालेन को इन संस्थाओं के साथ मिलकर काम करते हुए राजनीतिक अस्थिरता से बचते हुए अर्थपूर्ण सुधार लाने के लिए दबाव बनाना होगा।

४. स्थानीय और प्रादेशिक सरकारों के साथ संबंध

सरकार चलाने के लिए आरामदायक बहुमत पाना राजनीतिक रूप से कठिन है, लेकिन जनता की अपेक्षा के अनुसार सरकार संचालित करना उससे भी चुनौतीपूर्ण है।

यह सबसे कम चर्चा वाला, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण चुनौती हो सकती है। भदौ २३-२४ की घटनाओं में लगभग ३०० स्थानीय सरकारों को नुकसान पहुंचा था, साथ ही क्षेत्रीय राजधानी और उनकी व्यवस्थाओं को भी क्षति हुई। कई प्रादेशिक सरकारें मजबूत बनने के लिए संघर्ष कर रही हैं। ये स्थानीय और प्रादेशिक संस्थाएं जनता तक स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और प्रशासनिक सेवाएं पहुंचाती हैं। यदि बालेन की सरकार इन्हें नजरअंदाज करती है तो संघीय स्तर पर बने नीतियां और कार्यक्रम जनता तक नहीं पहुंच पाएंगे।

काठमांडू, पहाड़ और हिमालय के कठिन इलाकों के बीच दूरी न केवल भौगोलिक है बल्कि संस्थागत भी है। अब संघीय सरकार के लिए स्थानीय और प्रादेशिक सरकार की क्षमता बढ़ाने में प्राथमिकता और निवेश का समय है, इसे टालना उचित नहीं होगा।

५. पड़ोसी और मित्र देशों के साथ संबंध

विश्व के दो बड़े शक्ति राष्ट्र भारत और चीन के बीच स्थित नेपाल के लिए आवश्यक है कि वह इन दोनों के साथ-साथ पश्चिमी साझेदारों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे। बालेन को इस विरासत में संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी मिली है। किसी भी एक पक्ष की ओर झुकाव देश के अंदर आलोचना और विपक्षी समर्थन बढ़ा सकता है।

रास्वपा पार्टी में भी विदेश नीति के विषय में विचार अलग-अलग हैं। संवैधानिक, सुव्यवस्थित और निष्पक्ष विदेश नीति न केवल कूटनीतिक समझदारी है बल्कि पार्टी को टूटने से बचाने और विदेश नीति को आंतरिक विवाद का विषय बनने से रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

उत्साह ही पर्याप्त नहीं है

पाँचवीं परीक्षा अन्य सभी से जुड़ी है। बदलाव की इच्छा रखना और उसे सफलतापूर्वक लागू करना अलग बातें हैं। कई असफल सरकारें इसी कारण विफल हुई हैं। बालेन के पास राजनीतिक व्यवस्था के बाहर से मिली उम्मीदों के साथ-साथ व्यवस्था के अंदर भ्रमित जनता का भरोसा भी है। यदि वे केवल ऊर्जा और उत्साह को कार्यक्षमता में परिवर्तित नहीं कर पाए तो वह भरोसा जल्दी ही खो सकता है।

अंत में, नेपाल एक छोटा, भूमि से घिरा देश है, जो संवेदनशील भू-राजनीतिक पड़ोसियों के बीच स्थित है और आंतरिक चुनौतियां भी गंभीर हैं। इसे सही तरीके से प्रबंधित करने के लिए न केवल दृष्टिकोण बल्कि व्यावहारिक योजना, सहयोगी, कार्यान्वयन योग्य सरकारी संरचना और सतर्क नेतृत्व की आवश्यकता है। बालेन को इस आधार को जल्दी तैयार करना होगा क्योंकि परिस्थितियां उनका इंतजार नहीं करेंगी।

आने वाले पाँच वर्ष नेपाल के लिए दुर्लभ अवसर हो सकते हैं अगर बालेन अपनी बहुमत को केवल सत्ता बनाए रखने का साधन नहीं बल्कि बदलाव लाने के औजार के रूप में इस्तेमाल करें। पिछली सरकारों द्वारा अधूरा छोड़ा गया कर्मचारी प्रशासन सुधार, सेवाओं को उपभोक्ता-केंद्रित बनाना, वास्तविक जवाबदेही की संस्कृति स्थापित करना और राष्ट्रीय हित मध्य रखकर संतुलित विदेश नीति अपनाने के काम शुरू हो सकते हैं।

यदि ये कार्य सफलतापूर्वक हुए तो यह अवधि केवल सरकार बदलने की कहानी नहीं बनेगी, बल्कि राज्य संचालन की संस्कृति बदलने वाला मोड़ साबित होगी। हालांकि यह अपने आप नहीं होगा, सही निर्णय और प्रतिबद्धता से ही संभव होगा। बालेन और उनकी टीम को जिम्मेदारी की गहराई समझते हुए नेतृत्व करना होगा और यह भ्रम दूर करना होगा कि “चुनाव जीतना सबसे कठिन काम था”। चुनाव जीतना मुश्किल नहीं था, सरकार चलाना अधिक चुनौतीपूर्ण है। जनता नेतृत्व में सिर्फ नये चेहरे ही नहीं बल्कि जीवन में वास्तविक बदलाव चाहती है। यह असली परीक्षा अभी से शुरू हो गई है।

(लेखक भट्टराई अमेरिकी विश्वविद्यालय नोट्रे डाम के क्रोक इंस्टिट्यूट फॉर इंटरनेशनल पीस स्टडीज के विजिटिंग रिसर्च फेलो हैं। वे नेपाल की राजनीति, शांतिप्रक्रिया, सुशासन और सामाजिक नीतियों के अध्ययन और शोध में रुचि रखते हैं।)

झापामा सिटी सफारी की ठोकर से मोटरसाइकिल चालक की मौत


१० चैत, झापा । कचनकवल गाउँपालिका–४ में एक वाहन (सिटी सफारी) की ठोकर से मोटरसाइकिल चालक ५० वर्षीय शुकदेव गणेश की मौत हो गई है।

जिला पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता खगेन्द्रबहादुर खड़का के अनुसार सोमवार रात बनियानी से लोधाबारी की ओर जा रही बीआर–११सी–३०७१ नंबर की मोटरसाइकिल और विपरीत दिशा से आ रही प्र–१–०१–००२बी ६४११ नंबर की सिटी सफारी की भिड़ंत हुई थी। इस दुर्घटना में चालक गणेश गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

उन्हें इलाज के लिए भद्रपुर स्थित ओम साई पाथीभरा अस्पताल भेजा गया था और अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया, पुलिस ने बताया।

पुलिस ने सिटी सफारी चालक, स्थानीय १९ वर्षीय सैजन मियाँ को हिरासत में लेकर इस घटना की विस्तृत जांच कर रही है।

कुवैत और बहरीन में ईरानी हमले की चेतावनी जारी


१० चैत्र, काठमांडू। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच खाड़ी क्षेत्र के विभिन्न देशों ने एक के बाद एक कर हमले की चेतावनी जारी की है। हाल के दिनों में कुवैत और बहरीन ने भी ईरानी हमले की संभावना जताते हुए अपने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने का निर्देश दिया है।

बहरीन के गृह मंत्रालय ने बहरीन के नागरिकों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी की है, जिसका विवरण बीबीसी ने दिया है। गृह मंत्रालय ने कुछ समय पहले ’एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा है, ‘सायरन बज उठे हैं। नागरिकों से शांत रहने और नजदीकी सुरक्षित स्थान पर जाने का अनुरोध किया गया है।’

इसी क्रम में, गृह मंत्रालय ने नागरिकों से आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने का भी आग्रह किया है।

बीबीसी के अनुसार, कुवैत सशस्त्र बलों ने सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक ’एक्स’ के माध्यम से देश में कई बार मिसाइल और ड्रोन हमलों की जानकारी दी है।

सैनिक बलों ने ’एक्स’ पर कुछ समय पहले प्रकाशित एक संदेश में कहा है, ‘कुवैती वायु रक्षा वर्तमान में शत्रु के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रही है।’

सशस्त्र बलों ने सभी नागरिकों से सुरक्षा के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी किए जाने वाले निर्देशों का विशेष रूप से पालन करने का अनुरोध किया है।

पर्वतमा जिप दुर्घटना हुँदा चालकको मृत्यु – Online Khabar

पर्वत में जीप दुर्घटना, चालक की मौत


१० चैत, पर्वत । कालीगण्डकी लोकमार्ग के अंतर्गत फलेवास नगरपालिका-४ मुडिकुवा में स्थित कुश्मा-फलेवास सड़क के कालीगण्डकी किनारे हुई जीप दुर्घटना में चालक सज्जन परियार की मृत्यु हो गई है।

जिला मुख्यालय कुश्माबजार से यूरिया खाद लेकर फलेवास नगरपालिका की ओर जा रही ग१ज ८०२९ नंबर की जीप, सोमवार शाम लगभग ३० मीटर नीचे सड़क से गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।

जिला पुलिस कार्यालय के पुलिस निरीक्षक दिनेश पौडेल के अनुसार, जीप में ३५ वर्षीय चालक एकल थे। चालक परियार को बचाकर प्रदेश अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई, जानकारी प्राप्त हुई है।

पुलिस ने बताया कि बारिश के कारण ऊपरी रास्ता फिसलन भरा होने के चलते यह दुर्घटना हुई हो सकती है। सशस्त्र प्रहरी बल चण्डिका गण और जिला पुलिस कार्यालय से निकली टीम ने कठिन परिस्थितियों में बचाव कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया है, ऐसा सशस्त्र प्रहरी बल उपरीक्षक क्षितिज क्षेत्री ने बताया है।

खाड़ी देशों ने इरान पर सीधे हमले क्यों नहीं किए?

इरान ने अमेरिका और इज़राइल पर हमले के जवाब में खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए हमले जारी रखे हैं। हालांकि, खाड़ी के देश प्रत्यक्ष हमले करने के बजाय अपनी रक्षा प्रणालियों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और कई मिसाइलें हवा में ही मार गिराईं गई हैं। क्षेत्रीय युद्ध के संभावित खतरे, आर्थिक स्थिरता, कूटनीतिक संयम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए इन देशों ने इरान पर सीधे हमले से परहेज किया है, ऐसा विशेषज्ञों का मानना है। १० चैत्र, काठमांडू।

अमेरिका और इज़राइल द्वारा इरान पर हमले के बाद इरान ने भी खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। इरान के निशाने पर बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब, कतर, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देश हैं। इन देशों के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाते हुए हवाई अड्डे, ऊर्जा बुनियादी संरचना, होटल और आवासीय क्षेत्रों को चोट पहुंचाने की खबरें मिली हैं। हाल ही में, इज़राइल ने इरान के साउथ पार्स नामक विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस क्षेत्र पर हमला किया था, जिसके जवाब में इरान ने कतर के रास लफान ऊर्जा केंद्र पर हमला कर व्यापक नुकसान पहुँचाया था।

खाड़ी देशों द्वारा इरान पर सीधे हमले से बचने के पीछे कई मुख्य रणनीतिक और राजनीतिक कारण हैं। क्षेत्रीय शांति और युद्ध की संभावनाओं, आर्थिक विकास योजनाओं की रक्षा, कूटनीतिक संयम और मध्यस्थता प्रयास तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की संवेदनशीलता ये वे प्रमुख कारण हैं जिनकी वजह से ये देश सीधे हमले से परहेज कर रहे हैं। यूएई के हवाई अड्डे पर भी इरान के हमले की खबरें आई हैं, लेकिन कई खाड़ी देश अपनी सेना के दम पर इरान पर सशस्त्र हमले के बजाय अपनी सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इस समय संयुक्त अरब अमीरात समेत २२ देशों ने मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की गई है। लंदन स्थित किंग्स कॉलेज के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के प्रोफेसर रॉब जाइस्ट पिनफोल्ड का कहना है कि हालांकि खाड़ी देश इरान के व्यवहार को ‘आतंकवादी गतिविधि’ के तौर पर निंदनीय मानते हैं, फिर भी वे संयम बरत रहे हैं ताकि अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक भविष्य और क्षेत्र के विनाश से बचा जा सके।

लिपुलेक विवाद: भारत चीन के साथ व्यापार शुरू करने की तैयारी कर रहा है, नेपाल क्या कर रहा है?

ब्रिक्स समिट के अवसर पर चीनी राष्ट्रपति सी जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच रूस के कजान में अक्टूबर 2024 में हुई मुलाकात

तस्बिर स्रोत, Reuters

पढ़ने का समय: ६ मिनट

उत्तराखंड सरकार के अधिकारियों ने बताया है कि छह वर्षों के बाद इस वर्ष से भारत और चीन लिपुलेक नाका के माध्यम से सीमा व्यापार शुरू करने की योजना बना रहे हैं, जिसके बाद नेपाल सरकार ने इस विषय पर अध्ययन शुरू कर दिया है और उचित प्रतिक्रिया देने की तैयारी में है।

शुक्रवार को भारत की न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) ने पिथौरागढ़ के जिला मजिस्ट्रेट का हवाला देते हुए बताया कि भारत सरकार के निर्देशानुसार जून से सितंबर तक संचालित होने वाले इस व्यापार के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है।

नेपाल के विदेश मंत्री बालानंद शर्मा ने इस विषय पर चर्चा जारी होने की पुष्टि की है और बताया कि नेपाल सरकार उपयुक्त प्रतिक्रिया देने की योजना बना रही है।

लिपुलेक क्षेत्र को नेपाल और भारत दोनों अपने क्षेत्र का हिस्सा मानते हैं, जबकि हाल के समय में त्रि-देशीय सीमाविन्दु तक चीन द्वारा की गई गतिविधियों को नेपाल असंतुष्टता के साथ देख रहा है।

पिछले अगस्त में चीनी विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने लिपुलेक नाका से फिर से व्यापार शुरू करने पर सहमति जताई थी। उस समय नेपाल ने लिपुलेक को अपना अभिन्न भूभाग बताया था और उस व्यापार मार्ग के उपयोग से सावधान किया था।

रोल्पामा पहिलोपटक भूतपूर्व सैनिक सम्मेलन हुँदै – Online Khabar

रोल्पा में पहली बार पूर्व सैनिक सम्मेलन आयोजित होगा

१० चैत, रोल्पा । रोल्पा में पहली बार पूर्व सैनिक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह भूतपूर्व नेपाली सेना के सदस्य और एकल महिलाएं जिनके पास निवृत्तिभरण है, उन्हें लक्षित करते हुए भूतपूर्व सैनिक सम्मेलन-२०८२ का आयोजन किया जा रहा है।

नेपाली सेना के जंगी अड्डे की व्यवस्थापना तथा नेपाली सेना कल्याणकारी बोर्ड के संयोजन में रोल्पा के सूर्य दलगण लिबाङ जेल में इसी चैत २२ गते सम्मेलन करने की तैयारी है, जो सूर्य दल गण रोल्पा के प्रमुख सेनानी ईश्वर थापा ने जानकारी दी।

‘सम्मेलन में भाग लेने के लिए हमने चैत १ से १७ गते तक इस गण में पंजीकरण डेस्क स्थापित किया है,’ सेनानी थापा ने कहा, ‘हर दिन सुबह १० बजे से शाम ५ बजे तक पंजीकरण प्रक्रिया संचालित की जा रही है।’

रोल्पा जिले में कुल ११० पूर्व सैनिक हैं, यह जानकारी भूतपूर्व सैनिक संघ रोल्पा के अध्यक्ष खिमविक्रम केसी ने दी। उन्होंने कहा, ‘रोल्पा में अब तक एकल महिलाओं की संख्या १० है। कुछ लोग अन्य जिलों में निवास करते हैं, लेकिन हमारी मान्यता है कि सभी को उपस्थित होना चाहिए और उपस्थित लोगों की संख्या अभी देखी जानी बाकी है।’

अन्य जिलों में भी सम्मेलन होगा

मध्यपश्चिम पृतना हेडक्वाटर के अंतर्गत २०८२ चैत २२ गते पूर्व सैनिक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, यह जानकारी नेपाली सेना के केंद्रीय कार्यालय ने दी है।

सम्मेलन में रुपन्देही, कपिलवस्तु, नवलपरासी-पश्चिम और नवलपरासी-पूर्व जिलों के निवासियों के लिए मुख्य केंद्र योगीकुटी बैरक, बुटवल निर्धारित किया गया है।

इसी प्रकार दांग, प्युठान, रोल्पा, रुकुम पश्चिम, रुकुम पूर्व, सल्यान, अर्घाखाँची, गुल्मी और पाल्पा जिलों के निवासियों के लिए संबंधित जिलों के नेपाली सेना के यूनिटों में उपस्थित उपकेंद्रों में पूर्व सैनिक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

पश्चिम पृतना हेडक्वाटर के अंतर्गत २०८२ चैत २५ गते, मध्य पूर्वी पृतना हेडक्वाटर, बर्दिबास सैनिक शिविर, महोत्तरी में २०८३ वैशाख ३ गते और खड्गदल गण, रामेछाप बैरक, रामेछाप में २०८३ वैशाख ४ गते सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।

दूतावास के नाम पर ठगी में वृद्धि, स्कैम करने वालों के निशाने पर नेपाली

९ चैत, काठमाडौं। पश्चिम एशिया में इज़रायल, ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच हुए तनाव के कारण सुरक्षा चिंताएं और साइबर ठगी की घटनाएं तीव्रता से बढ़ी हैं। इस द्वंद्व के बीच वहाँ रह रहे नेपाली लोगों को निशाना बनाकर स्कैमर्स सक्रिय हो गए हैं।

हाल के दिनों में इज़रायल, कतर, यूएई समेत अन्य देशों में रह रहे नेपाली लोगों के व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर उनके संपर्क सूची में मौजूद रिश्तेदार और परिचितों को फोन करके OTP कोड मांग कर धन की ठगी करने की घटनाएं बढ़ी हैं। स्कैमर्स अक्सर कहते हैं, “नेपाल दूतावास से बोल रहा हूँ,” और आपातकालीन उद्धार या सहायता का बहाना बनाकर पैसे मांगते हैं।

इज़रायल में रहने वाले नेपाली लोगों के व्हाट्सएप हैक कर ठगी करने वाले गिरोह सक्रिय हैं। विभिन्न नंबरों से Nepal दूतावास का कॉल होने का दिखावा करते हुए ठगी का प्रयास बढ़ रहा है।

स्कैमर्स फोन पर कोड भेजते हैं, फिर फोन करके कोड मांगते हैं, और वह कोड मिलते ही व्हाट्सएप हैक कर लेते हैं।

एनआरएनए इज़रायल के अधिकारियों ने इस तरह की घटनाएं व्यापक रूप से बढ़ रही हैं बताते हुए जागरूक रहने की अपील की है। अजनबी व्यक्ति से फोन पर कोड मांगने पर उसे न देने तथा उन व्यक्तियों को तुरंत ब्लॉक करने की सलाह दी गई है।

ऐसे ठगी प्रयास कतर, यूएई, सऊदी अरब, कुवेत सहित अन्य खाड़ी देशों में भी देखने को मिले हैं। विदेश में रोजगाररत नेपाली लोगों को लक्षित करके सोशल मीडिया और मैसेंजर एप के माध्यम से ठगी हो रही है इसलिए सावधान रहने का आग्रह किया गया है।

सम्बंधित देशों के नेपाली दूतावास और नेपाल परराष्ट्र मंत्रालय ने भी सतर्क रहने का आह्वान जारी किया है।

किसी भी दूतावास या सरकारी संस्था द्वारा फोन या संदेश के माध्यम से OTP कोड या गोपनीय जानकारी नहीं मांगी जाती, यह स्पष्ट किया गया है। अपरिचित नंबर से आने वाले कॉल या संदेश पर भरोसा न करें तथा आर्थिक लेन-देन से पहले आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें।

नेपाल पुलिस ने भी साइबर ठगी की घटनाओं में बढ़ोतरी को लेकर लोगों से OTP, पासवर्ड और व्यक्तिगत विवरण किसी को न देने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने तथा अज्ञात संदेशों के प्रति सतर्क रहने का बार-बार आग्रह किया है। यदि अकाउंट हैक होने का संशय हो तो तुरंत रिकवर करें और संबंधित प्राधिकारी को शिकायत करें।

नेपाल पुलिस के साइबर ब्यूरो ने भी व्हाट्सएप हैक कर “मैं समस्या/मुश्किल में हूँ, तुरंत पैसा भेज दें” या “मेरे बैंकिंग एप में समस्या है, आप इस QR कोड पर पैसा भेजें” जैसे संदेश अपने करीबी दोस्तों या रिश्तेदारों को भेज कर ठगी की घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए सावधान रहने की अपील की है।

अत्यावश्यक परिस्थितियों में भी ऐसे संदेशों पर तुरंत विश्वास न करें, संभव हो तो सीधे फोन करके पुष्टि करें तथा संदेहास्पद लिंक, कोड या फाइल डाउनलोड न करें।

टू-स्टेप वेरिफिकेशन अवश्य उपयोग करें, अपने OTP/वेरिफिकेशन कोड किसी को न दें और व्हाट्सएप वेब का उपयोग करने के बाद लॉगआउट करना न भूलें, साइबर ब्यूरो ने इस बात पर भी जोर दिया है।

द्वंद्वग्रस्त क्षेत्रों में रह रहे नेपाली लोग मानसिक तनाव और असुरक्षा के बीच जीवन यापन कर रहे हैं, ऐसे समय में इस प्रकार की ठगी की घटनाएं और भी बड़ी समस्या बन रही हैं, जिसे दूतावासों ने उजागर किया है। आपातकालीन और असमंजस की स्थिति का फायदा उठाकर स्कैमर्स भावनात्मक दवाब बनाकर ठगी करते हैं।