नेपाली कांग्रेसका नेता डा. शेखर कोइरालाले आफ्ना नजिकका नेताहरूलाई छलफलका लागि आह्वान गरिन्। सभापति गगन थापाले सोमबार विशेष महाधिवेशनमा भाग नलिएका १९ जना नेताहरूलाई केन्द्रीय सदस्यमा मनोनित गरेका छन्। कोइरालाको कार्यालयमा जारी छलफलमा मनोनित नेताहरू जीवन परियार, डा. गोविन्दराज पोखरेल, दिनेश कोइराला तथा उर्मिला थपलिया सहभागी छन्। २९ वैशाख, काठमाडौं।
कोइरालाले आफ्ना नजिकका नेताहरूसँग बोलाएको यस बैठक विशेष महाधिवेशनमा अनुपस्थित रहेका नेताहरूको मनोनयन पश्चात आयोजना गरिएको हो। कोइरालाको विशालनगरस्थित सम्पर्क कार्यालयमा जारी छलफलमा १४ औं महाधिवेशनबाट निर्वाचित पदाधिकारी र केन्द्रीय सदस्यहरू पनि सहभागी रहेको जनाइएको छ। छलफलका स्रोतहरूका अनुसार, बैठकमा केन्द्रीय सदस्यमा मनोनित नेताहरू जीवन परियार, डा. गोविन्दराज पोखरेल, दिनेश कोइराला र उर्मिला थपलिया पनि उपस्थित थिए। स्रोतहरूले बताएका छन् कि उनीहरूले केन्द्रीय सदस्यमा मनोनयनसम्बन्धी निर्णयबारे आफूहरूसँग कुनै परामर्श नभएको कुरा कोइरालालाई बताएका छन्। सभापति थापाले मनोनयन गरेका १९ जनामध्ये सात जना कोइराला समूहका नेताहरू रहेका छन्।
इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने सन् 2027 से 2031 के बीच नेपाल के खिलाफ संक्षिप्त टी–20 अंतर्राष्ट्रीय श्रृंखला आयोजित करने पर चर्चा शुरू की है। नेपाल क्रिकेट संघ के सचिव पारस खड़का ने बताया कि नेपाली क्रिकेट को बड़े टीमों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का अवसर अनिवार्य है। नेपाल के कप्तान रोहित पौडेल ने कहा कि इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया जैसे टीमों का नेपाल आना नेपाली क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। 28 वैशाख, काठमांडू।
इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने पुरुष टीम के पहले नेपाल दौरे पर चर्चा शुरू की है। सन् 2027 से 2031 की अंतर्राष्ट्रीय खेल तालिका में नेपाल के साथ संक्षिप्त टी–20 अंतर्राष्ट्रीय श्रृंखला आयोजित करने की संभावना पर बातचीत हो रही है, जिसकी जानकारी क्रिकइन्फो में प्रकाशित लेख ने दी है। यदि यह योजना सफल हुई तो इंग्लैंड नेपाल दौरा करने वाला सबसे बड़ा टेस्ट राष्ट्र बन जाएगा। अब तक किसी भी टेस्ट राष्ट्र ने नेपाल में औपचारिक अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला नहीं खेली है।
हाल के वर्षों में नेपाली क्रिकेट ने उल्लेखनीय प्रगति की है। पिछले वर्ष नेपाल ने वेस्ट इंडीज को पराजित करते हुए पहली बार पूर्ण सदस्य राष्ट्र के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला जीती थी। इसके अलावा, आयरलैंड भी सन् 2026–27 में नेपाल दौरा करने की तैयारी कर रहा है। इस वर्ष के टी–20 विश्व कप में नेपाल और इंग्लैंड पहली बार आमने-सामने हुए थे, जहां रोमांचक मैच अंतिम गेंद तक गया लेकिन इंग्लैंड विजयी रहा।
बाद के दिनों में भारत में नेपाल क्रिकेट संघ के सचिव और पूर्व कप्तान पारस खड़का ने इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों से भेट की। नेपाल के कप्तान रोहित पौडेल ने कहा कि बड़े टीमों का नेपाल आना नेपाली क्रिकेट को विश्व स्तर पर उजागर करने में मदद करेगा। उनके अनुसार इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया जैसे टीमों का नेपाल दौरा नेपाली क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। पारस खड़का ने भी कहा कि नेपाली क्रिकेट को वर्तमान में सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय अवसरों और बड़े टीमों के साथ खेलने का मौका चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे दौरे नई पीढ़ी को प्रेरित करेंगे।
२९वैशाख, तनहुँ। रोजाना घासफूस करना, हर गली-गली में पालतू जानवरों द्वारा किए गए मल-गंध और बिजली की अनुपस्थिति में जागरूकता का अभाव था। लगभग १० साल पहले तनहुँ के बन्दीपुर-३ के रामकोट गाँव और वहां के निवासियों की स्थिति ऐसी ही थी। लेकिन बीते एक दशक में रामकोट ने अपने भूलने लायक उन बीते कल से अलग होकर समृद्धि के मार्ग पर कदम बढ़ाया है।
मगर समुदाय की अधिक आबादी और पत्थरों से बनी हुई घरों वाला रामकोट, जहाँ २०७५ साल में होमस्टे की शुरुआत ने यहाँ की पहचान ही बदल दी है। होमस्टे से आय में वृद्धि के बाद स्थानीय लोग आत्मनिर्भर बनने लगे हैं।
उत्तर में दिखने वाले सुंदर हिमालय के निकट स्थित रामकोट चुली (डंकने डाँडा) स्थानीय लोगों द्वारा अनुभव किए गए कष्ट और जीवनशैली में हुए परिवर्तन का प्रत्यक्ष साक्षी बना है।
घास-दौरा और मेलापात जैसे कामों में व्यस्त यहाँ की महिलाएँ अब मगर परिधान में सुसज्जित होकर पर्यटकों का ‘‘झोर्ले’’ की आवाज़ में स्वागत करने और सत्कार में लगी हैं। रामकोट आने वाले पर्यटकों को ये महिलाएँ सफेद अक्षता लगाकर सम्मानित करती हैं।
गले में फूलों की माला और स्टील के गिलास में ‘‘सगुन’’ (स्थानीय शराब) परोसा जाता है। पर्यटक गुन्द्रुक के साथ ‘‘पलेटी’’ लगाकर इसका स्वाद लेते हैं। शाम होते ही झ्याउरे, कौरा और चुट्का गीत-संगीत का मज़ा शुरू होता है, जो नृत्य गान के साथ माहौल को और भी जीवंत बनाता है।
रामकोट गाँव
शाम को स्थानीय ऑर्गैनिक भोजन जैसे कोदो और फापर की ढिंढो, गुन्द्रुक का अचार, स्थानीय मुर्गी के मांस सहित आगंतुकों का स्वागत करने वाली महिला दिदीबहनों को पुरुष सहायता प्रदान करते हैं। पर्यटक एक साथ भोजन करते हैं लेकिन अलग-अलग घरों में सोने जाते हैं।
सुबह कोदो की सेलरोटी, सब्ज़ी, अचार और चाय का सेवन किया जाता है। विदा होते समय भी पर्यटकों को सफेद अक्षता और फूलों की माला दी जाती है।
रामकोट में प्रति दिन १० से १५ पर्यटक और छुट्टियों में समूहों में पर्यटक आते हैं। रोजाना ३ से ४ विदेशी पर्यटक भी आते हैं, जिनमें से कई सुबह आकर शाम को लौट जाते हैं।
९५ घरों में से ४८ घर होमस्टे के सदस्य हैं, लेकिन केवल १५ घरों में ही होमस्टे का संचालन होता है। यहां एक बार में ३० लोग रह सकते हैं, और एक रात का किराया प्रति व्यक्ति १२०० रुपये है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त ३००० रुपये लिए जाते हैं।
पर्यटकों के आगमन से गाँव में आय में वृद्धि हुई है। पहले घर चलाना मुश्किल होता था, पुरुषों की कमाई पर निर्भर महिलाएँ अब केवल पर्यटक स्वागत से खुश नहीं हैं, वे आय अर्जित कर आत्मनिर्भर भी बन गई हैं।
पर्यटकों के स्वागत में कतारबद्ध स्थानीय महिलाएँ
४४ वर्षीय कृष्णमाया थापा पहले की कठिनाइयां याद करती हैं और अब की सुविधाओं की प्रशंसा करती हैं। ‘‘पहले हम अच्छी तरह बोल भी नहीं पाते थे, नए लोगों से डरते थे, कठिन दिन थे,’’ थापा ने कहा, ‘‘अब हम आत्मनिर्भर हैं, जीवन उज्जवल लगने लगा है।’’
रामकोट की गलियाँ पत्थर से बनी और साफ हैं। घरों के आँगनों में लगे मकई के सूखे तनों और पत्थर गाँव को सुंदर बनाते हैं। होमस्टे के साथ कुखुरों, बकरियों और सुअरों का पालन होता है, सब्जियां भी उगाई जाती हैं और स्थानीय शराब बनाकर भी आय हो रही है।
नियमित आय से छोटी-छोटी आर्थिक समस्याओं का समाधान होना आसान हो गया है, स्थानीय महिलाएं बताती हैं।
होमस्टे ने महिलाओं में बचत की आदत भी विकसित की है। मगर संस्कृति के संरक्षण के साथ स्थानीय आय बढ़ाने के उद्देश्य में सफलता देखकर सभी आश्चर्यचकित हैं।
गाँव में ही भविष्य देख रहे युवा
विदेश जाने वाले युवा अब गाँव में रहकर भविष्य बनाने का सोच रहे हैं। ऐसे युवाओं में रामकोट सामुदायिक होमस्टे के अध्यक्ष निरकाजी आले भी हैं।
मलेशिया से लौटे आले होमस्टे के विकास, प्रचार-प्रसार, अभिमुखीकरण और जनजागरूकता फैलाने में सक्रिय हैं। ‘‘कुछ युवा सोचते हैं कि गाँव में कुछ किया जा सकता है। होमस्टे न होने पर रामकोट को अन्य गाँवों जैसी कठिनाइयाँ झेलनी पड़तीं,’’ वे कहते हैं।
पहले ग्रामीण पर्यटन न होने के कारण अधिकांश युवा विदेश जाते थे, अब अधिकांश युवा गाँव में ही हैं।
रामकोट में पर्यटकों का स्वागत करते स्थानीय लोग
होमस्टे सचिव सावित्री थापा बताती हैं कि परंपरागत कृषि और घासफूस में लगे महिलाएं आज आय अर्जन और कौशल आधारित प्रशिक्षणों के माध्यम से अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं। घर चलाने से जीवन शैली में बड़ा बदलाव आया है और स्वरोजगार भी बढ़ रहा है।
रामकोट कैसे पहुंचें?
बंदीपुर बाजार से ८ किलोमीटर पश्चिम स्थित यह गाँव मगर समुदाय का सांस्कृतिक केंद्र है। समुद्र तल से लगभग १००० मीटर ऊंचा होने के कारण यहाँ से हिमश्रृंखला देखी जा सकती है जो पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण है।
विशाल सुकौराफाँट और सदियों पुराने मगर गाँव पर्यटकों का आकर्षण बन रहे हैं।
घुमाएँ घर
रामकोट में लगभग एक शताब्दी पुराना ‘‘घुमाएँ घर’’ अभी भी सुरक्षित है।
बंदीपुर से मुछुक होते हुए ५.५ किलोमीटर, बन्दीपुर से सेराटार होते हुए ८ किलोमीटर और पृथ्वीराजमार्ग के छिर्का से ७ किलोमीटर पार करके रामकोट पहुँच सकते हैं।
रामकोट सामुदायिक होमस्टे के अध्यक्ष निरकाजी आले ने स्थानीय और विदेशी पर्यटकों को स्थानीय आतिथ्य के कारण यहाँ आकर्षित होने की बात कही है।
रामकोट सामुदायिक होमस्टे के अध्यक्ष निरकाजी आले
बंदीपुर में शुरू हुए विलेज सफारी ने भी रामकोट में पर्यटकों की संख्या बढ़ाई है। वसन्त पौडेल ने माघ से शुरू हुए इस सफारी द्वारा गाँव-गाँव की पहचान कराई है।
चितवन भरतपुर के सुजन पोखरेल ने पहली बार जाकर रामकोट की सत्कार, सम्मान और खानपान से खूब आनंदित होने की बात कही। विज्ञान पौडेल ने मगर जाति की कला, संस्कृति और सामूहिकता के अध्ययन के लिए रामकोट फिर आने की सलाह दी।
चुनौतियाँ और आवश्यकताएँ अब भी मौजूद
रामकोट में अभी भी पानी की पर्याप्त मात्रा नहीं है। गाँव के आठ स्रोत सामूहिक रूप से उपयोग में हैं, लेकिन घर-परिवारों तक पहुँचाने का कार्य चल रहा है।
पानी की कमी के कारण कृषि उत्पादन अपेक्षा अनुसार नहीं हो पाया है और पशुपालन में भी जल संकट सामने आया है।
बंदीपुर से रामकोट तक सड़क कच्ची होने के कारण पर्यटकों की आवाजाही में मुश्किलें हैं, इसका दुख अध्यक्ष आले व्यकत करते हैं। सड़क पक्की होने पर पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की उम्मीद है।
सांस्कृतिक भवन और संग्रहालय स्थापना की आवश्यकता भी है। होमस्टे संचालनों में आर्थिक संकट के कारण सभी घर संचालन नहीं कर पा रहे हैं। उत्पादक गतिविधियों में शामिल करने की पहल की जा रही है। कूड़ा प्रबंधन के लिए भी अधोसंरचना आवश्यक है, उन्होंने बताया।
रामकोट में पर्यटक
अध्यक्ष आले ने बताया कि अगले एक वर्ष के भीतर २०० व्यक्तियों के एक साथ रुकने के लिए पूर्वाधार निर्माण की योजना है। युवाओं को जागरूक कर गाँव की ठेठ भाषा और मारुनी नृत्य के संरक्षण का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘यहाँ बसाई-सराई कम है और अधिकांश लोग यहीं रहते हैं। गाँव में आय अर्जित करने से छोड़कर जाने की स्थिति ना बने, इस उद्देश्य से कार्यरत हूँ।’’
होमस्टे न होता तो लोग गाँव छोड़ देते, लेकिन अब यह स्थान जितना सुंदर है, सोशल मीडिया के माध्यम से देश-विदेश तक इसकी पहचान करने का कार्य बाकी है।
विदेश में कमाई को गाँव में निवेश करने के लिए युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए भी चर्चा हो रही है, अध्यक्ष आले ने बताया।
पृथ्वी राजमार्ग के छिर्का से रामकोट होते हुए बन्दीपुर और वहाँ से रामकोट होते हुए छिर्का मार्ग निर्धारण का भी प्रयास चल रहा है। सड़क पूर्वाधार होने से बाहरी पर्यटकों को लाना आसान होगा।
पूर्वाधार का विकास हो रहा है
गण्डकी प्रदेश सरकार और बन्दीपुर गाउँपालिका होमस्टे संचालन के साथ पूर्वाधार विकास में भी रामकोट के लिए सहयोग कर रही हैं। आवश्यक प्रशिक्षण, पत्थर लगाना, पेयजल और बिजली की सुविधा में भी सुधार लाया गया है।
चुली डाँडा की गोद में रामकोट गाँव
बन्दीपुर गाउँपालिकाके अध्यक्ष सुरेन्द्रबहादुर थापा ने बताया कि २०८१ साल में गलियों में पत्थर लगाने का कार्य पूरा हो चुका है और सभी घरों में पत्थर लगाने एवं पानी की निकासी का काम जारी है। मेट्रेस, चादर और तकिये जैसी सामग्री भी खरीदी गई है और वितरण में है।
होमस्टे के लिए बन्दीपुर और ब्यास नगरपालिका के स्थानों को होमस्टे सर्किट में जोड़कर रामकोट में एक रात के ठहरने की योजना बनाई जा रही है, उन्होंने बताया।
गाउँपालिका प्रचार-प्रसार, वीडियोग्राफी निर्माण और साइकिल यात्रा जैसे कार्यक्रमों में भी सहयोग कर रही है। सेराटार मार्ग का इस वर्ष ७ सौ मीटर सडक पक्की किया जाएगा और बाकी के लिए प्रदेश एवं केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है।
२९ वैशाख, काठमाण्डू । राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ने केन्द्रीय समिति की बैठक के लिये आह्वान किया है। प्रवक्ता मनिष झाका के अनुसार, रास्वपाले वैशाख ३० गते बुधवार के लिये केन्द्रीय समिति की बैठक बुलाई है। यह बैठक सुबह ९ बजे वनस्थली स्थित केन्द्रीय कार्यालय में आयोजित की जाएगी। प्रवक्ता झाका ने बताया कि पार्टी के प्रथम राष्ट्रीय महाधिवेशन और विभिन्न विषयों पर चर्चा करने का कार्यसूची निर्धारित है।
नेपाल ए क्रिकेट टोलीले अमेरिकासँगको अभ्यास एकदिवसीय खेलमा ७ रनको रोमाञ्चक जित हासिल गरेको छ। सोमबार माथिल्लो मुलपानी क्रिकेट मैदानमा सम्पन्न खेलमा नेपाल ए ले २६५ रनको लक्ष्य पछ्याएको अमेरिका ४९.१ ओभरमा २५७ रनमा अलआउट भयो। सन्दीप जोराले ११५ बलमा ९ चौका र ४ छक्कासहित १११ रन बनाएर शतक प्रहार गरे। शेहान जयसूर्याले ७१ रन बनाए भने शुभम रन्जानेले ४७ र शयान जहांगिरले ४१ रन जोडे। अन्तिम ओभरमा अमेरिकालाई ९ रन आवश्यक थियो र अन्तिम विकेट मात्र बाँकी थियो।
नेपालका लागि शेर मल्लले ७.१ ओभरमा ३० रन दिएर ४ विकेट लिए। बसिर अहमदले ३ तथा शाहब आलम र पवन सर्राफले १-१ विकेट लिए। नेपाल ए ले ४९.५ ओभरमा २६४ रनमा अलआउट भएको थियो। सन्दीप जोराले ९९ रनको साझेदारी गर्दै टोलीलाई बलियो स्थिति दिए। अमेरिकाका लागि सौरभ नेत्रभल्करले ८ ओभरमा २१ रन मात्र दिएर ३ विकेट लिए। नेपाल ए ले स्कटल्याण्ड र अमेरिकालाई पराजित गर्दै जारी शृंखलामा क्लिन स्वीप गरेको छ।
सन्दीप जोराले नेपाल ए मा उत्कृष्ट लय देखाएका छन्। उनले स्कटल्याण्डसँगको खेलमा पनि ८३ रनको अविजित स्कोर बनाएका थिए। आज उनले त्यो राम्रो लय दोहोर्याउँदै शतक प्रहार गरे। जोराले टोलीका लागि योगदान दिन पाउँदा खुसी लागेको बताए। ‘रन लागिरहेको छ, सबैले राम्रो खेलिरहेका छन्। योगदान दिन पाउँदा खुसी छु,’ उनले भने। नेपाल ए ले जारी शृंखलामा स्कटल्याण्ड र अमेरिका दुवैलाई पराजित गर्दै क्लिन स्वीप गरेको छ।
२९ वैशाख, काठमांडू। आज संघीय संसद के अधीन आठ संसदीय समितियों की बैठकें आयोजित की जाएंगी। सुबह १० बजे अर्थ समिति की बैठक में अर्थ मंत्रालय के कार्य संचालन और आगामी कार्य योजना पर चर्चा होगी। चालू आर्थिक वर्ष २०८२/८३ के बजट कार्यान्वयन की स्थिति और आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ के बजट की तैयारी संबंधी भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
सुबह साढ़े १० बजे उद्योग, वाणिज्य तथा श्रम एवं उपभोक्ता हित समिति की बैठक में विषयगत उपसमिति गठन को लेकर वार्ता होगी। सुबह १० बजे पूर्वाधार विकास समिति की बैठक में सड़क सुरक्षा और मानसून के दौरान वाहन प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। सुबह ११ बजे महिला तथा सामाजिक मामलों की समिति में मधेसी आयोग के पदाधिकारियों से बातचीत होगी।
सुबह १० बजे शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सूचना प्रौद्योगिकी समिति की बैठक होगी, जहां शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय की वर्तमान स्थिति एवं भावी योजनाओं पर विचार किया जाएगा। सुबह ११ बजे सार्वजनिक लेखा समिति की बैठक में समिति संबंधी प्रस्तुतीकरण की व्यवस्था है। दोपहर १ बजे सार्वजनिक नीति तथा प्रत्यायोजित विधायी समिति की बैठक में भूमिहीन नागरिकों के लिए अस्थायी रूप से बनाए गए होल्डिंग सेंटर की निगरानी पर चर्चा होगी। सुबह ११ बजे संघीयता सशक्तिकरण एवं राष्ट्रीय सरोकार समिति की बैठक में गण्डकी प्रदेश में किए गए स्थलगत अनुगमन और अंतःक्रिया कार्यक्रम की रिपोर्ट के मसौदे पर विचार-मंथन होगा।
नीति तथा कार्यक्रम में भूमिहीन सुकुम्बासी समस्या का समाधान, सहकारी पीड़ितों की रकम वापसी, और दो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का संचालन जैसे विषय शामिल किए गए हैं। २८ वैशाख, काठमाडौं। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल द्वारा संसद में प्रस्तुत आगामी आर्थिक वर्ष की नीति तथा कार्यक्रम में रास्वपाने चुनाव पूर्व सार्वजनिक किया गया वाचापत्र तथा सरकार द्वारा लाए गए शासकीय सुधारों को समाहित किया गया है। रास्वपाके वाचापत्र एवं सरकार के शासकीय सुधार कार्यों में संविधान संशोधन बहसपत्र, सुकुम्बासी एवं भूमिहीन समस्या समाधान, सहकारी पीड़ितों की रकम वापसी, दो अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों का संचालन, और सार्वजनिक संस्थानों के सुधार जैसे मुद्दे नीति तथा कार्यक्रम में शामिल किए गए हैं।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नियुक्ति दिवस ही सरकार द्वारा पारित किए गए शासकीय सुधारों की एक सौ कार्यसूची में ‘संविधान संशोधन बहसपत्र’ तैयार करने हेतु कार्यदल गठन का उल्लेख था। सरकारी कार्यसूची के अनुसार प्रधानमंत्री शाह के राजनीतिक सलाहकार के नेतृत्व में बहसपत्र कार्यदल का गठन किया गया है। यह कार्यदल विभिन्न पक्षों के साथ लगातार संवाद कर रहा है। शासकीय सुधार की सौ कार्यसूची के चौथे बिंदु में देश के दीर्घकालिक राजनीतिक एवं संस्थागत सुधार, निर्वाचन प्रणाली सहित अन्य विषयों पर बहस करने हेतु कार्यदल बनाने का उल्लेख था।
‘संविधान संशोधन हेतु राष्ट्रीय सहमति बनाने के लिए प्रधानमंत्री एवं मन्त्रिपरिषद् कार्यालय ने सात दिनों के भीतर ‘संविधान संशोधन बहसपत्र’ तैयार करने हेतु कार्यदल गठित करने तथा बहस की प्रक्रिया को सहभागी, पारदर्शी और तथ्य-आधारित बनाने का उल्लेख सरकार की शासकीय सुधार कार्यसूची में किया गया था। रास्वपाने चुनाव से पहले जारी अपने वाचापत्र में सरकार संभालने के तीन महीनों के भीतर राष्ट्रीय सहमति स्थापित करने के उद्देश्य से संविधान संशोधन प्रस्तावों पर ‘बहसपत्र’ तैयार करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी।
२९ वैशाख, काठमांडू। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका और इरान के बीच एक महीने से जारी युद्धविराम को फिलहाल ‘लाइफ़ सपोर्ट’ पर बताया है। सोमवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा युद्धविराम बेहद कमजोर स्थिति में है। राष्ट्रपति ट्रम्प के बयान से यह संकेत मिलता है कि यह युद्धविराम औपचारिक रूप से तो बना हुआ है, लेकिन किसी भी समय टूट सकता है।
ट्रम्प के हालिया बयान के बाद इरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद गलीबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘ईरान की सेना किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है।’ गुरुवार को ईरान ने अमेरिका को एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें युद्ध समाप्ति और होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने की शर्त रखी गई थी। ट्रम्प ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। ईरान के प्रस्ताव में तत्काल सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने और लेबनान में हो रही इजरायली हमलों को रोकने की मांग की गई थी। साथ ही अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करने और ईरान पर भविष्य में कोई हमला न होने की गारंटी भी मांगी गई थी।
नर्वे की राजधानी ओस्लो में 10 दिसंबर 2023 को 17 वर्ष की जुड़वां बहनों ने नोबेल शांति पुरस्कार सुनहरा शेअर कर एक खाली कुर्सी पर रखा।
नोबेल पुरस्कार स्वीकारते हुए नर्गिस की बेटी ने अपनी मां के बिना किशोरावस्था में हुए संघर्षों का उल्लेख किया, विशेष रूप से ईरानी महिलाओं के मानवाधिकारों के लिए उनकी मां के संघर्ष पर गर्व व्यक्त किया।
जब वह आठ साल की थीं तो वे अपनी मां से अलग होकर यूरोप आ गईं।
उस समय उनकी मां जेल में थीं और वह अब भी ईरानी जेल में हैं।
जब जुड़वां दो साल के थे, ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी थी: “तुम छोटे बच्चे लेकर हो, इसलिए जेल से बचने की उम्मीद मत रखना, बच्चों समेत जेल जाना होगा।”
“तुम्हें तेहरान छोड़ना होगा।”
लेकिन नर्गिस ने तेहरान नहीं छोड़ा और मानवाधिकार प्रचार में सक्रिय रहीं। इसलिए वह नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली दो ईरानी महिलाओं में एक बनीं।
तस्वीर स्रोत, Anadolu via Getty Images
तस्वीर की कैप्शन, मोहम्मदी के बच्चे अपनी मां के लिए नोबेल शांति पुरस्कार एक खाली कुर्सी पर रखकर उपस्थित थे।
नोबेल फाउंडेशन के अनुसार, उन्हें अब तक 14 से अधिक बार गिरफ्तार किया गया है, 31 वर्ष जेल में बिताई हैं और 154 बार यातना सहनी पड़ी है।
गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद, उन्होंने पिछले दो दशकों में जेल से जेल तक यातनाएं सहते हुए बिताया है, परिवार और कार्यकर्ताओं ने बताया। जेल में पूछताछ, गिरफ्तारी और सुनवाई के दौरान उन्हें हिजाब न पहनने के कारण शारीरिक और मानसिक यातना दी गई।
10 मई 2026 को रविवार को गंभीर स्वास्थ्य कारणों से उन्हें जेल से तेहरान अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है।
ईरानी अधिकारियों ने बड़ी रकम जमानत पर जेल की सजा स्थगित करने की घोषणा की थी। फिलहाल उनका स्थानीय मेडिकल टीम द्वारा तेहरान पार्स अस्पताल में इलाज चल रहा है।
उनके वकील चिरिन अर्दाकानी के अनुसार, उन्हें उत्तरी ईरान के जनजन शहर में दिल का दौरा पड़ने का संदेह है और वे पिछले 10 दिन से ICU में हैं।
पिछले चार महीनों में उनका वजन 20 किलो कम हुआ है और उन्हें सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता है।
नर्वे में रहने वाले उनके भाई हम्दिरेजा ने कहा, “कोई संदेह नहीं कि ईरानी सत्ता नर्गिस और ऐसे कार्यकर्ताओं से छुटकारा पाना चाहता है।”
राजनीतिक सक्रियता
मोहम्मदी एक राजनीतिक परिवार से हैं। वह जनजन में पैदा हुई हैं और 21 अप्रैल 1972 को उनके परिवार के कई सदस्य राजनीतिक हत्या के शिकार हुए।
उत्तरी-मध्य ईरान के कराज और पश्चिमी कुर्दिस्तान प्रांत में पली-बढ़ी, उन्होंने विश्वविद्यालय में एप्लाइड फिजिक्स की पढ़ाई के दौरान राजनीतिक सक्रियता शुरू की।
1997 में मोहम्मदी पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद खतामी के चुनाव प्रचार में सक्रिय रहीं।
1999 के संसदीय चुनाव में क्षेत्रीय राष्ट्रवादी अभियान में काम किया, जो इस्लामिक सिद्धांत और धर्मनिरपेक्ष ईरानी राष्ट्रवाद के मिश्रण का समर्थन करता था।
यही वर्ष उन्होंने धार्मिक राष्ट्रवादी राजनीतिक कार्यकर्ता ताघी रहमानी से शादी की, जिन्होंने 1980 के दशक में और फिर 14 वर्ष जेल बिताए।
उनके जुड़वां बच्चे कियाना और अली रहमानी 28 नवंबर 2006 को पैदा हुए।
तस्वीर स्रोत, AFP via Getty Images
तस्वीर की कैप्शन, 2024 में मोहम्मदी के पति और उनके दो बच्चे नोबेल पीस सम्मेलन और “वुमन, लाइफ, फ्रिडम” फेस्टिवल में शामिल हुए थे।
मोहम्मदी का नाम 2010 में प्रसिद्ध हुआ जब वे मानव अधिकार संस्था DARC की उपाध्यक्ष थीं और अधिकारियों ने छापेमारी शुरू की।
तुरंत उन्हें उनके घर से गिरफ्तार कर सख्त पूछताछ की गई।
उनकी करीबी सहयोगी शिरिन एबादी, जो पहले क्रांतिकारी न्यायाधीश और वकील रहीं और 2003 में नोबेल पुरस्कार पाने वाली पहली ईरानी महिला हैं, उनके साथ मिलकर 2001 में बंदियों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संगठन स्थापित किया।
तस्वीर स्रोत, AFP
तस्वीर की कैप्शन, ईरान में महिलाओं के समान अधिकारों के लिए अगस्त 2007 में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोहम्मदी और शिरिन एबादी
इसके बाद मोहम्मदी ने संरचनात्मक सुधार का समर्थन करते हुए इस्लामी रिपब्लिक सरकार की कड़ी आलोचना शुरू की।
ईरान के मई 2017 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने तेहरान की एवन जेल से मतदान किया था।
2017 और 2018 के सरकारी विरोधी प्रदर्शनों में, जब सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, मोहम्मदी और 14 अन्य कार्यकर्ताओं ने धर्मनिरपेक्ष सरकार की मांग के लिए जनमत संग्रह की मांग की।
जेल के भीतर से उन्होंने पुलिस हिरासत में मृत मासा अमिनी की पहली पुण्यतिथि 16 सितंबर 2022 को “धार्मिक निरंकुश सरकार द्वारा महिलाओं पर किए दमन का दिन” घोषित किया।
नारेबाजी करते हुए
नोबेल पुरस्कार पाने से पहले मोहम्मदी ने सोशल मीडिया क्लबहाउस में बताया था कि उनका जीवन मानवाधिकारों के सार्वभौमिक घोषणा पत्र के 30 बिंदुओं के क्रियान्वयन के लिए समर्पित है।
12 दिसंबर 2025 को उनकी एक तस्वीर प्रकाशित हुई थी; तब उन्हें जेल से अस्थायी रूप से दवा उपचार के लिए रिहा किया गया था और वे वकील खोस्रो अली स्कोर्डिको के श्राद्ध समारोह में एक कार की छत से नारा लगा रही थीं।
उन्होंने इस्लामी रिपब्लिक अदालत की वैधता नहीं मानी और इसलिए सुरक्षा बलों ने उन्हें गिरफ्तार किया तथा सात साल से अधिक की जेल सजा सुनाई गई, साथ ही आंतरिक निर्वासन भी हुआ।
अदालत सुनवाई सार्वजनिक न होने तक वे उपस्थित नहीं होंगी और उपस्थित होने पर अपनी पसंद के वस्त्र पहनेंगी, ऐसा उन्होंने कहा था।
तस्वीर स्रोत, Mohammadi family handout via Reuters
तस्वीर की कैप्शन, उन्होंने अदालत में आने पर अपनी पसंदीदा पोशाक पहनने की बात कही थी।
जून 2025 के बाद अमेरिका और इज़राइल के बीच युद्ध शुरू होने पर मोहम्मदी, एबादी और अन्य पांच ईरानी कार्यकर्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र से तत्काल निर्णायक कार्रवाई करने का आग्रह किया ताकि इस्लामी रिपब्लिक यूरेनियम संवर्धन बंद करे और दोनों पक्षों को सैनिक कार्रवाई से रोका जाए।
वे और 16 अन्य ने जनवरी 2026 के सड़कों पर प्रदर्शन का समर्थन किया और इस्लामी स्टेट द्वारा शांति समझौते की दिशा में बाधा हटाने की मांग की।
जेल में मिली यातना और दुर्व्यवहार का विवरण देते हुए, वे सार्वजनिक रूप से जीवन प्रेमी और संघर्षशील व्यक्तित्व के रूप में सामने आईं।
जेल से प्रकाशित तस्वीरें, वीडियो और मृतकों की याद में आयोजित कार्यक्रमों में अक्सर उन्हें अन्य महिला संघर्षकर्ताओं के साथ गीत गाते या नाचते हुए देखा जाता है।
नेपाल ए क्रिकेट टीम भारत के उत्तराखण्ड में आयोजित हो रहे उत्तराखण्ड गोल्डकप प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जा रही है। प्रशिक्षक राजु बस्न्यात ने गोवा और पंजाब की रणजी टीमों के खिलाफ नेपाल ए के खेल की जानकारी दी है। नेपाल ए पहले ही स्कॉटलैंड और अमेरिका के खिलाफ दो-दो अभ्यास एकदिवसीय मैच जीत चुका है। २८ वैशाख, काठमांडू। नेपाल ए क्रिकेट टीम भारत के उत्तराखण्ड पहुंचने के बाद उसी क्षेत्र में आयोजित उत्तराखण्ड गोल्डकप प्रतियोगिता में भाग लेगी। नेपाल ए के प्रशिक्षक राजु बस्न्यात ने टीम के वहाँ जाकर प्रतियोगिता में खेलने की पुष्टि की है। ‘सबसे जल्द आयोजित कार्यक्रम में हम उत्तराखण्ड जाकर खेलना चाहते हैं,’ प्रशिक्षक बस्न्यात ने पत्रकारों से बातचीत में बताया। उन्होंने कहा, ‘गोवा और पंजाब जैसी टीमें हमारे समूह में हैं और हम बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बाद भी ए टीम को लगातार खेल में सक्रिय बनाए रखने की योजना है।’ नेपाल ए ने इससे पहले स्कॉटलैंड और अमेरिका के खिलाफ दो-दो अभ्यास एकदिवसीय मैचों में जीत हासिल की है।
अर्जेंटिना फुटबॉल संघ ने फीफा विश्वकप 2026 के लिए 55 खिलाड़ियों की प्रारंभिक टीम का आह्वान किया है। टीम में 6 गोलकीपर, 18 डिफेंडर, 15 मिडफील्डर और 16 फॉरवर्ड शामिल हैं। पाब्लो डिबाला इस प्रारंभिक सूची में नहीं हैं, जबकि लियोनेल मेस्सी फॉरवर्ड में मौजूद हैं।
यह फीफा विश्वकप जून 11 से तीन उत्तर अमेरिकी देशों के संयुक्त मेजबानी में आयोजित होने जा रहा है, इसके मद्देनजर अर्जेंटीना ने अपनी प्रारंभिक टीम सार्वजनिक की है। इस सूची में गोलकीपरों के रूप में एमिलियानो मार्टिनेज, गेरोनिमो रुली, जुआन मुसो, वाल्टर बेनिटेज, फाकुंडो काम्बेसस और सैंटियागो बेल्ट्रान शामिल हैं।
पुर्तगाली फुटबॉलर जोआओ कान्सेलो ने यूरोप के चार अलग-अलग देशों की लीग जीतने का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने 2019 में युबेन्ट्स के साथ सिरी ए, 2021 और 2022 में मैनचेस्टर सिटी के साथ प्रीमियर लीग, और 2023 में बायर्न म्यूनिख के साथ बुंदेसलीगा खिताब जीत चुके हैं। इस सत्र में बार्सिलोना से स्पेनिश ला लीगा जीतकर कान्सेलो ने इटली, इंग्लैंड, जर्मनी और स्पेन की लीग जीतने का इतिहास रच दिया है।
28 वैशाख, काठमांडू। पुर्तगाली खिलाड़ी जोआओ कान्सेलो ने यूरोप के चार अलग-अलग देशों की लीग जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया है। इस सत्र में बार्सिलोना के साथ स्पेनिश ला लीगा का खिताब जीतने के बाद 31 वर्षीय डिफेंडर कान्सेलो ने यह खास उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने यूरोप की शीर्ष 5 लीगों में से इटली, इंग्लैंड, जर्मनी और स्पेन के क्लबों के साथ लीग खिताब जीतने में सफल रहे हैं। कान्सेलो ने 2019 में युबेन्ट्स के साथ इटालियन सिरी ए जीता था। इसके बाद 2021 और 2022 में मैनचेस्टर सिटी के साथ प्रीमियर लीग और 2023 में बायर्न म्यूनिख के साथ बुंदेसलीगा खिताब अपने नाम किया।
फोटो क्रेडिट : केशव अधिकारी/फेसबुक २९ वैशाख, काठमाडौं । पृथ्वी राजमार्गअन्तर्गत धादिङ जिल्लाको गल्छी गाउँपालिका–६ स्थित बैरेनी क्षेत्रमा तीनवटा सवारी साधन ठोक्किँदा ३७ जना घाइते भएका छन्। गत राति साढे ११ बजे काठमाडौंबाट चितवनतर्फ गइरहेको बागमती प्रदेश ०३–००१–००६ नम्बरको ट्रकलाई बागलुङतर्फ जाँदै गरेको बागमती प्रदेश ०१–००६ ख ७४९९ नम्बरको बसले पछाडि ठक्कर दिएको थियो। त्यसपछि सो बसलाई वीरगञ्जतर्फ गइरहेको अर्को बसले पछि ठक्कर दिएको थियो।
तीनवटा सवारी साधनमा रहेका जम्मा ६८ यात्रुमध्ये ३७ जनामा घाइते भएका छन् भनि जिल्ला प्रहरी कार्यालय धादिङका सूचना अधिकारी तथा डीएसपी प्रकाश दाहालले जानकारी दिएका छन्। बैरेनी अस्पताल र स्मारिका मेडिकल हलमा उपचार गराइएकामा तीन जनालाई डिस्चार्ज गरिएको छ भने बाँकी ३४ जनाको काठमाडौंका विभिन्न अस्पतालहरूमा उपचार भइरहेको छ। गत राति नै तीमध्ये १९ जनालाई काठमाडौंको राष्ट्रिय ट्रमासेंटरमा र ९ जनालाई त्रिवि शिक्षण अस्पताल महाराजगञ्जमा लगिएको थियो। स्थानीय अस्पतालमा उपचारका लागि लगेका थप ६ जनालाई पनि पछि काठमाडौं ल्याइएको छ। प्रहरीले दुर्घटनामा संलग्न दुईवटा बस र ट्रक चालकहरूलाई नियन्त्रणमा लिएको छ।
नेपाली कांग्रेस, नेकपा र एमालेले राष्ट्रिय सभाबाट सरकारले प्रस्तावित अध्यादेशहरू रोक्न लगभग सहमति व्यक्त गरेका छन्। संवैधानिक परिषद् सम्बन्धी अध्यादेशले शक्ति सन्तुलनमा बाधा पुर्याउने भएपछि तीनौं दलले राष्ट्रिय सभाबाट यसको पारितिलाई अस्वीकार गर्ने प्रतिबद्धता जनाएका छन्। संविधान अनुसार, यदि अध्यादेशलाई दुवै सदनबाट स्वीकृति नदिइएमा त्यो स्वतः निष्क्रिय हुन्छ र विपक्षी दलहरूले यसलाई लागू हुन नदिने प्रयास गरिरहेका छन्। २८ वैशाख, काठमाडौं। सरकारले ल्याएका अध्यादेशलाई राष्ट्रिय सभाबाट रोक्न विपक्षी दलहरूले तयारी अगाडि बढाएका छन्। नेताहरूका अनुसार राष्ट्रिय सभाका मुख्य तीन दल नेपाली कांग्रेस, नेकपा र एमालेबीच यस विषयमा लगभग सहमति बनेको छ। तथापि सबै अध्यादेश रोक्ने वा केहि विशिष्ट अध्यादेश मात्र रोक्ने विषयमा अझै टुंगो लागेको छैन। तथापि, प्रक्रियागत दृष्टिले सबै अध्यादेशप्रति असहमति जनाउनुपर्ने कुरामा नेताहरू सहमत छन्, तर कतिपय अध्यादेशका प्रावधान र तिनले लाभ पुर्याउने पक्षहरूको पनि विचार गर्नुपर्ने आवश्यकता देखिएको छ।
संवैधानिक परिषद् सुधार गर्ने अध्यादेशलाई राष्ट्रिय सभामा रोक्न तीनै दलले सहमति जनाएका छन्। कांग्रेसका राष्ट्रिय सभा सचेतक पदमबहादुर विश्वकर्माले भने, ‘राम्रो निर्णयको समर्थन गर्छौं, तर लोकतन्त्रलाई अवहेलना गर्ने र गरीबलाई अन्याय गर्ने विषयको कडा बिरोध गर्नुपर्छ।’ संवैधानिक परिषद् सम्बन्धी अध्यादेशले राज्यको शक्ति सन्तुलन र लोकतान्त्रिक अभ्यासलाई नकारात्मक प्रभाव पार्ने भएकाले विपक्षी दलहरूले यसलाई राष्ट्रिय सभाबाट पारित हुन नदिन सहमती जनाएका हुन्।
राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेलले पहिलो पटक यो अध्यादेश फिर्ता पठाइसकेका थिए। तर दोस्रो पटक सरकारले यही अध्यादेश पुन: पेश गर्दा प्रमाणीकरण गरिएको छ। प्रमाणीकरण गरिएको अध्यादेशमा अध्यक्ष र कम्तिमा तीनजना सदस्य हुँदा गुणात्मक संख्या पुग्ने व्यवस्था गरिएछ। यसअघि प्रधानमन्त्री, सभामुख, प्रधानन्यायाधीश, राष्ट्रिय सभाका अध्यक्ष, उपसभामुख तथा विपक्षी दलका नेताहरू सदस्य रहने संवैधानिक परिषद् अध्यक्ष र कम्तिमा चारजना सदस्य हुँदा गुणात्मक संख्या पूरा हुने व्यवस्था थियो। विपक्षी दलका नेताहरूको समावेशी शक्ति सन्तुलन कायम गर्ने व्यवस्था हटाइएको अध्यादेश राष्ट्रिय सभाबाट पारित हुन नदिने सहमति सबै विपक्षी दलले जनाएको छ।
एमालेका राष्ट्रिय सभा संसदीय दलका नेता डा. प्रेमप्रसाद दंगालले भने, ‘हामी बीच पटक-पटक छलफल भइसकेको छ। जसपा र लोसपाको पनि समर्थन छ।’ नेकपाका नेताहरू पनि संवैधानिक परिषद् सम्बन्धी अध्यादेश पारित हुन नदिन सहमत भएका छन्। स्रोतका अनुसार नेकपाका संयोजक एवं संसदीय दल नेता पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड आफैं विपक्षी दलका शीर्ष नेताहरूसँग यसबारे छलफल गरिरहेका छन्। औपचारिक भेटवार्ता नभए पनि प्रचण्डले कांग्रेस सभापति गगन थापा, एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली लगायत शीर्ष नेताहरूलाई फोनमार्फत सम्पर्कमा छन्। थापा र ओलीले पनि राष्ट्रिय सभाबाट अध्यादेशहरू पारित हुन नदिने सहमति व्यक्त गरेका छन्। तथापि कुन-कुन अध्यादेश रोक्ने भन्ने विषय अझै स्पष्ट छैन।
डा. दंगालले भने, ‘प्रक्रियागत रूपमा सबै अध्यादेशलाई अस्वीकृत गर्नुपर्छ, तर सेलेक्टिभ हुने वा नहुने विषयमा छलफल भइरहेको छ।’ कांग्रेसले संवैधानिक परिषद् सम्बन्धी अध्यादेश र विश्वविद्यालयसम्बन्धी नेपाल ऐन संशोधन गर्ने अध्यादेश-०८३ लाई रोक्नुपर्ने प्रस्ताव राखेको छ। विश्वविद्यालयसम्बन्धी अध्यादेशले कुलपतिलाई अत्यधिक शक्तिशाली बनाएको भन्दै कांग्रेसले विरोध जनाएको छ। प्रधानमन्त्री नै कुलपति हुने व्यवस्था हटाउनुपर्ने बहस भइरहेका बेला उक्त अध्यादेशले कुलपतिको अधिकार क्षेत्र बढाएको आरोप कांग्रेसले लगाएको छ।
अर्कोतर्फ, एमाले सार्वजनिक पदाधिकारी पदमुक्ति सम्बन्धी अध्यादेशको बिरुद्ध छ। यद्यपि पदका लागि चुनाव लड्ने सन्देश जाने हुँदा कांग्रेस त्यस्तो कट्टनी अडानमा नरहेको बुझिएको छ। प्रतिनिधिसभामा दुई तिहाइ जितेपछि पनि राष्ट्रिय सभामा दुई पार्टी र अन्य दलको जम्मा करिब ५४ सिट मात्र छ। कांग्रेससँग २४, नेकपासँग १७, एमालेसँग १०, जसपा २, लोसपा र जनमोर्चासँग १-१ सिट छ।
संविधानअनुसार दुवै सदनबाट अनिवार्य स्वीकृत हुनुपर्ने अध्यादेशको व्यवस्था छ। सरकार संसद अधिवेशन नभएको अवस्थामा आवश्यक परेमा मन्त्रिपरिषद्को सिफारिसमा राष्ट्रपतिले अध्यादेश जारी गर्नसक्छ। यस्ता अध्यादेश ऐनसरह मान्य हुने र तुरुन्तै लागू हुने व्यवस्था छ। तर संसदको पहिलो बैठकमा सम्बन्धित मन्त्रीले अध्यादेश पेश गर्नुपर्छ र दुवै सदनले स्वीकृति दिनुपर्ने हुन्छ। अस्वीकृत गर्न आग्रह गर्ने सांसदहरूले पनि सूचना दिन सक्ने व्यवस्था छ। यससम्बन्धि प्रक्रिया प्रतिनिधिसभा नियमावलीको नियम ९५ र राष्ट्रिय सभा नियमावलीको नियम ८९ मा उल्लेख गरिएको छ।
‘अध्यादेश अस्वीकृत गर्न प्रस्ताव गर्ने सदस्यले दुई दिन भित्र महासचिव वा सचिवलाई सूचना दिनुपर्छ,’ प्रतिनिधिसभा नियमावलीको नियम ९५ को उपनियम १ मा भनिएको छ। अस्वीकृतिका कारण समेत सूचित गर्नुपर्नेछ। दुवै सदनले अस्वीकृत गरेपछि मात्र बाँकी प्रक्रिया अघि बढ्छ। संविधानको धारा ११४ को उपधारा २ (क) अनुसार, ‘संघीय संसद्को दुवै सदनमा पेश गरिनेछ र दुवै सदनले स्वीकार नगरेमा स्वतः निष्क्रिय हुनेछ।’ अध्यादेश दुवै सदनबाट स्वीकृत भए पनि ६० दिनभित्र प्रतिस्थापन विधेयक दुवै सदनबाट पारित गराएर राष्ट्रपतिबाट प्रमाणिकरण गराउनुपर्छ, नभए अध्यादेश स्वतः निष्क्रिय हुन्छ।
मिर्गौलों की समस्या के कारण वैदेशिक रोजगार से लौटे अपने पिता के इलाज के दौरान निधन हो जाने पर ऋण चुकाने के सपने के साथ रोल्पा के रुन्टीहढी गाउँपालिका निवासी प्रतीक पुन तीन साल पहले रूस गए थे। उनकी माता तीलकुमारी ने ऋण के ऊपर अतिरिक्त ऋण लेकर बेटे से “बड़े देश” न जाने की विनती की। “हम दुखी और गरीब आदमी बड़े देश देखने नहीं आते। कमाने जाना हो तो मलेशिया जाओ” कहते हुए भी पता नहीं वे कहां-कहां गए,” उन्होंने सोमवार को फोन पर बताया। उनके मामा ने कोरियाई भाषा सीखकर कोरिया जाने का सुझाव दिया था। लेकिन भाषा परीक्षा पास करने में अधिक समय लगने के कारण उन्होंने विकल्प न चुना। पुर्तगाल जाने की योजना बनाने वाले अकेले बेटे प्रतीक कैसे रूस पहुंच गए, यह उनकी मां तीलकुमारी को ज्ञात नहीं है। उन्हें बस बेटे के जाते वक्त का लगभग ‘१३ लाख का ऋण’ याद है।
रूस पहुंचने के बाद प्रतीक ने अपनी मां को बताया था कि वे छात्र वीजा पर वहां गए हैं। कुछ समय बाद उन्होंने रूसी सेना में भर्ती होने की सूचना मां को दी। कुछ दिनों बाद ५ लाख रुपये भेजने का आश्वासन देने के बाद प्रतीक सम्पर्क विहीन हो गए, तीलकुमारी ने बताया। रूस पहुंचने के कुछ महीने बाद, वर्ष २०८० मंसिर में, युक्रेनी सेना ने प्रतीक को गिरफ्तार कर युद्धबंदी बनाया। परराष्ट्र मंत्रालय ने पुस ४ को रोल्पा के प्रतीक पुन के साथ बर्दिया के विवेक खत्री, काभ्रेपलान्चोक के सिद्धार्थ ढकाल और मोरङ के विकास राई के युक्रेन में बंदी होने की पुष्टि की। चितवन, खोटाङ और गोरखा समेत अन्य जिलों से रूस जाकर वहां की सेना में भर्ती हुए नेपाली भी युक्रेन में युद्धबंदी हैं, मंत्रालय ने जानकारी दी। इनमें प्रतीक सहित पांच लोग वर्ष २०२३ से युक्रेन में युद्धबंदी हैं।
मलेशिया में ११ वर्ष काम कर चुके प्रतीक के पिता की मिर्गौलों में समस्या थी। इसके बाद तीन वर्षों तक नेपाल में डायलासिस कराया गया और चार साल पहले उनका निधन हो गया, तीलकुमारी ने बताया। वर्ष २०२४ के मार्च में युक्रेन ने पांच नेपाली नागरिकों सहित युद्धबंदियों का वीडियो जारी कर नेपाल सहित अन्य देशों से रूसी सेना में नागरिक भर्ती न करने की अपील की। युक्रेनी अधिकारियों द्वारा कब्जे में लिए रूसी सैनिकों में भर्ती विदेशी नागरिकों के वीडियो में प्रतीक भी दिखाई दिए। रूसी सेना में भर्ती १२५ से अधिक नेपाली युवाओं की मृत्यु के बाद भी उनके बेटे का सुरक्षित वीडियो देखकर तीलकुमारी को थोड़ी राहत मिली। बेटे ने पत्र में खुद को ठीक बताया है, लेकिन वह पत्र देखे बिना मां का मन शांत नहीं था। प्रतीक जब सुरक्षित नेपाल वापस आएंगे, तब मां तीलकुमारी का दृढ़ संकल्प है कि वे मजदूरी करके ऋण चुका देंगी।
“जितना संभव हो लोग आ जाते हैं, झोपड़ी में या सड़क पर बैठकर भी हाथ-पैर हों तो जीवन चलाना पड़ेगा, और क्या है,” उन्होंने कहा। फरवरी २०२२ में शुरू हुए रूस-युक्रेन युद्ध के दौरान नेपाली भी रूसी सेना में भर्ती हो रहे हैं। परराष्ट्र मंत्रालय के अनुसार रूसी सेना में भर्ती होकर लापता हुए नेपाली लोगों की संख्या १२५ हो चुकी है। प्रतीक हर तीन महीने में युक्रेन की जेल से मां को पत्र भेजते रहे हैं। युक्रेन से आए पत्र दाङ के तुलसीपुर उपमहानगरपालिका बिजौरी में पहुंचता है, जहाँ सालों से रोल्पा से शिफ्ट हुई उनकी मां मजदूरी करती हैं। “उन्होंने पत्र में लिखा रहता है मैं अकेला नहीं हूं, मम्मी। हम छह-सात लोग हैं, चिंता मत करना,” मां तीलकुमारी कहती हैं। “फिर भी तनाव होता है, एक ही बेटे का मामला है।”