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लेखक: space4knews

इरान के साथ युद्धविराम ‘लाइफ़ सपोर्ट’ पर ट्रम्प की टिप्पणी

२९ वैशाख, काठमांडू। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका और इरान के बीच एक महीने से जारी युद्धविराम को फिलहाल ‘लाइफ़ सपोर्ट’ पर बताया है। सोमवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा युद्धविराम बेहद कमजोर स्थिति में है। राष्ट्रपति ट्रम्प के बयान से यह संकेत मिलता है कि यह युद्धविराम औपचारिक रूप से तो बना हुआ है, लेकिन किसी भी समय टूट सकता है।

ट्रम्प के हालिया बयान के बाद इरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद गलीबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘ईरान की सेना किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है।’ गुरुवार को ईरान ने अमेरिका को एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें युद्ध समाप्ति और होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने की शर्त रखी गई थी। ट्रम्प ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। ईरान के प्रस्ताव में तत्काल सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने और लेबनान में हो रही इजरायली हमलों को रोकने की मांग की गई थी। साथ ही अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करने और ईरान पर भविष्य में कोई हमला न होने की गारंटी भी मांगी गई थी।

नर्गिस मोहम्मदी: नोबेल पुरस्कार विजेता जो कई वर्षों तक जेल में रहीं

नोबेल पुरस्कार समारोह के दौरान नर्गिस मोहम्मदी की तस्वीर ओस्लो के ग्रैंड होटल के सामने रखी गई थी।

तस्वीर स्रोत, Reuters

नर्वे की राजधानी ओस्लो में 10 दिसंबर 2023 को 17 वर्ष की जुड़वां बहनों ने नोबेल शांति पुरस्कार सुनहरा शेअर कर एक खाली कुर्सी पर रखा।

नोबेल पुरस्कार स्वीकारते हुए नर्गिस की बेटी ने अपनी मां के बिना किशोरावस्था में हुए संघर्षों का उल्लेख किया, विशेष रूप से ईरानी महिलाओं के मानवाधिकारों के लिए उनकी मां के संघर्ष पर गर्व व्यक्त किया।

जब वह आठ साल की थीं तो वे अपनी मां से अलग होकर यूरोप आ गईं।

उस समय उनकी मां जेल में थीं और वह अब भी ईरानी जेल में हैं।

जब जुड़वां दो साल के थे, ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी थी: “तुम छोटे बच्चे लेकर हो, इसलिए जेल से बचने की उम्मीद मत रखना, बच्चों समेत जेल जाना होगा।”

नेपाल ए क्रिकेट टीम उत्तराखण्ड में प्रतियोगिता में भाग लेगी

नेपाल ए क्रिकेट टीम भारत के उत्तराखण्ड में आयोजित हो रहे उत्तराखण्ड गोल्डकप प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जा रही है। प्रशिक्षक राजु बस्न्यात ने गोवा और पंजाब की रणजी टीमों के खिलाफ नेपाल ए के खेल की जानकारी दी है। नेपाल ए पहले ही स्कॉटलैंड और अमेरिका के खिलाफ दो-दो अभ्यास एकदिवसीय मैच जीत चुका है। २८ वैशाख, काठमांडू। नेपाल ए क्रिकेट टीम भारत के उत्तराखण्ड पहुंचने के बाद उसी क्षेत्र में आयोजित उत्तराखण्ड गोल्डकप प्रतियोगिता में भाग लेगी। नेपाल ए के प्रशिक्षक राजु बस्न्यात ने टीम के वहाँ जाकर प्रतियोगिता में खेलने की पुष्टि की है। ‘सबसे जल्द आयोजित कार्यक्रम में हम उत्तराखण्ड जाकर खेलना चाहते हैं,’ प्रशिक्षक बस्न्यात ने पत्रकारों से बातचीत में बताया। उन्होंने कहा, ‘गोवा और पंजाब जैसी टीमें हमारे समूह में हैं और हम बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बाद भी ए टीम को लगातार खेल में सक्रिय बनाए रखने की योजना है।’ नेपाल ए ने इससे पहले स्कॉटलैंड और अमेरिका के खिलाफ दो-दो अभ्यास एकदिवसीय मैचों में जीत हासिल की है।

फिफा विश्वकपका लागि अर्जेन्टिनाको प्रारम्भिक टोली घोषणा

फीफा विश्वकप 2026 के लिए अर्जेंटीना की प्रारंभिक टीम घोषित

अर्जेंटिना फुटबॉल संघ ने फीफा विश्वकप 2026 के लिए 55 खिलाड़ियों की प्रारंभिक टीम का आह्वान किया है। टीम में 6 गोलकीपर, 18 डिफेंडर, 15 मिडफील्डर और 16 फॉरवर्ड शामिल हैं। पाब्लो डिबाला इस प्रारंभिक सूची में नहीं हैं, जबकि लियोनेल मेस्सी फॉरवर्ड में मौजूद हैं।

यह फीफा विश्वकप जून 11 से तीन उत्तर अमेरिकी देशों के संयुक्त मेजबानी में आयोजित होने जा रहा है, इसके मद्देनजर अर्जेंटीना ने अपनी प्रारंभिक टीम सार्वजनिक की है। इस सूची में गोलकीपरों के रूप में एमिलियानो मार्टिनेज, गेरोनिमो रुली, जुआन मुसो, वाल्टर बेनिटेज, फाकुंडो काम्बेसस और सैंटियागो बेल्ट्रान शामिल हैं।

डिफेंडरों में अगस्टिन जियाय, गोंजालो मोंटियल, नाहुएल मोलीना, निकोलस कपाल्डो, केविन मैक एलिस्टर, लुकास मार्टिनेज क्वार्ता, मार्कोस सेनेसी, लिसान्द्रो मार्टिनेज, निकोलस ओतामेंडी, लियोनार्डो बालेरदी, क्रिस्ट्रियन रोमेरै, जर्मन पेघेला, लाउतारो डी लोलो, जाइद रोमेरै, फाकुंडो मेडीना, मार्कोस अकुना और निकोलस टैग्लियेफिको हैं।

मिडफील्डरों में मैक्सिमो पेरोने, लियेंड्रो पडेस, गुइडो रोड्रिगेज, अनिबाल मोरेनो, मिल्टन डेलगाडो, एलन वरेला, एसेकियेल फर्नांडीज, रोड्रिगो डे पाउल, एसेकियेल पलासियोस, एन्जो फर्नांडीज, एलेक्सिस मैक एलिस्टर, जियोवानी लो सेल्सो, निकोलस डोमिंगेज, एमिलियानो बुयेन्डिया और वेलेंटिन बार्को शामिल हैं। फॉरवर्ड्स में लियोनेल मेस्सी, निकोलस पाज़, फ्रांको मास्टान्टुओनो, थियागो आल्मादा, टोमस अरांडा, निकोलस गोंजालेज, अलेजांद्रो गार्नाचो, जिउलिआनो सिमोनी, माटीऐस सोल, क्लाउडियो एचेबरी, जियानलुका प्रेस्टियानी, सैंटियागो कास्त्रो, लाउतारो मार्टिनेज, जोस मैनुएल लोपेज, जूलियन अल्वारेज और माटेओ पेलग्रिनो शामिल हैं।

कान्सेलो बने यूरोप के चार देशों की लीग जीतने वाले पहले खिलाड़ी

पुर्तगाली फुटबॉलर जोआओ कान्सेलो ने यूरोप के चार अलग-अलग देशों की लीग जीतने का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने 2019 में युबेन्ट्स के साथ सिरी ए, 2021 और 2022 में मैनचेस्टर सिटी के साथ प्रीमियर लीग, और 2023 में बायर्न म्यूनिख के साथ बुंदेसलीगा खिताब जीत चुके हैं। इस सत्र में बार्सिलोना से स्पेनिश ला लीगा जीतकर कान्सेलो ने इटली, इंग्लैंड, जर्मनी और स्पेन की लीग जीतने का इतिहास रच दिया है।

28 वैशाख, काठमांडू। पुर्तगाली खिलाड़ी जोआओ कान्सेलो ने यूरोप के चार अलग-अलग देशों की लीग जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया है। इस सत्र में बार्सिलोना के साथ स्पेनिश ला लीगा का खिताब जीतने के बाद 31 वर्षीय डिफेंडर कान्सेलो ने यह खास उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने यूरोप की शीर्ष 5 लीगों में से इटली, इंग्लैंड, जर्मनी और स्पेन के क्लबों के साथ लीग खिताब जीतने में सफल रहे हैं। कान्सेलो ने 2019 में युबेन्ट्स के साथ इटालियन सिरी ए जीता था। इसके बाद 2021 और 2022 में मैनचेस्टर सिटी के साथ प्रीमियर लीग और 2023 में बायर्न म्यूनिख के साथ बुंदेसलीगा खिताब अपने नाम किया।

३४ जना घाइतेलाई काठमाडौं ल्याइयो – Online Khabar

धादिङको बैरेनीमा सवारी दुर्घटनामा ३४ जना घाइतेलाई काठमाडौं ल्याइयो

फोटो क्रेडिट : केशव अधिकारी/फेसबुक २९ वैशाख, काठमाडौं । पृथ्वी राजमार्गअन्तर्गत धादिङ जिल्लाको गल्छी गाउँपालिका–६ स्थित बैरेनी क्षेत्रमा तीनवटा सवारी साधन ठोक्किँदा ३७ जना घाइते भएका छन्। गत राति साढे ११ बजे काठमाडौंबाट चितवनतर्फ गइरहेको बागमती प्रदेश ०३–००१–००६ नम्बरको ट्रकलाई बागलुङतर्फ जाँदै गरेको बागमती प्रदेश ०१–००६ ख ७४९९ नम्बरको बसले पछाडि ठक्कर दिएको थियो। त्यसपछि सो बसलाई वीरगञ्जतर्फ गइरहेको अर्को बसले पछि ठक्कर दिएको थियो।

तीनवटा सवारी साधनमा रहेका जम्मा ६८ यात्रुमध्ये ३७ जनामा घाइते भएका छन् भनि जिल्ला प्रहरी कार्यालय धादिङका सूचना अधिकारी तथा डीएसपी प्रकाश दाहालले जानकारी दिएका छन्। बैरेनी अस्पताल र स्मारिका मेडिकल हलमा उपचार गराइएकामा तीन जनालाई डिस्चार्ज गरिएको छ भने बाँकी ३४ जनाको काठमाडौंका विभिन्न अस्पतालहरूमा उपचार भइरहेको छ। गत राति नै तीमध्ये १९ जनालाई काठमाडौंको राष्ट्रिय ट्रमासेंटरमा र ९ जनालाई त्रिवि शिक्षण अस्पताल महाराजगञ्जमा लगिएको थियो। स्थानीय अस्पतालमा उपचारका लागि लगेका थप ६ जनालाई पनि पछि काठमाडौं ल्याइएको छ। प्रहरीले दुर्घटनामा संलग्न दुईवटा बस र ट्रक चालकहरूलाई नियन्त्रणमा लिएको छ।

विपक्षी दल राष्ट्रीय सभाबाट सरकारले ल्याएका अध्यादेशहरू रोक्न तयार

नेपाली कांग्रेस, नेकपा र एमालेले राष्ट्रिय सभाबाट सरकारले प्रस्तावित अध्यादेशहरू रोक्न लगभग सहमति व्यक्त गरेका छन्। संवैधानिक परिषद् सम्बन्धी अध्यादेशले शक्ति सन्तुलनमा बाधा पुर्‍याउने भएपछि तीनौं दलले राष्ट्रिय सभाबाट यसको पारितिलाई अस्वीकार गर्ने प्रतिबद्धता जनाएका छन्। संविधान अनुसार, यदि अध्यादेशलाई दुवै सदनबाट स्वीकृति नदिइएमा त्यो स्वतः निष्क्रिय हुन्छ र विपक्षी दलहरूले यसलाई लागू हुन नदिने प्रयास गरिरहेका छन्। २८ वैशाख, काठमाडौं। सरकारले ल्याएका अध्यादेशलाई राष्ट्रिय सभाबाट रोक्न विपक्षी दलहरूले तयारी अगाडि बढाएका छन्। नेताहरूका अनुसार राष्ट्रिय सभाका मुख्य तीन दल नेपाली कांग्रेस, नेकपा र एमालेबीच यस विषयमा लगभग सहमति बनेको छ। तथापि सबै अध्यादेश रोक्ने वा केहि विशिष्ट अध्यादेश मात्र रोक्ने विषयमा अझै टुंगो लागेको छैन। तथापि, प्रक्रियागत दृष्टिले सबै अध्यादेशप्रति असहमति जनाउनुपर्ने कुरामा नेताहरू सहमत छन्, तर कतिपय अध्यादेशका प्रावधान र तिनले लाभ पुर्‍याउने पक्षहरूको पनि विचार गर्नुपर्ने आवश्यकता देखिएको छ।

संवैधानिक परिषद् सुधार गर्ने अध्यादेशलाई राष्ट्रिय सभामा रोक्न तीनै दलले सहमति जनाएका छन्। कांग्रेसका राष्ट्रिय सभा सचेतक पदमबहादुर विश्वकर्माले भने, ‘राम्रो निर्णयको समर्थन गर्छौं, तर लोकतन्त्रलाई अवहेलना गर्ने र गरीबलाई अन्याय गर्ने विषयको कडा बिरोध गर्नुपर्छ।’ संवैधानिक परिषद् सम्बन्धी अध्यादेशले राज्यको शक्ति सन्तुलन र लोकतान्त्रिक अभ्यासलाई नकारात्मक प्रभाव पार्ने भएकाले विपक्षी दलहरूले यसलाई राष्ट्रिय सभाबाट पारित हुन नदिन सहमती जनाएका हुन्।

राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेलले पहिलो पटक यो अध्यादेश फिर्ता पठाइसकेका थिए। तर दोस्रो पटक सरकारले यही अध्यादेश पुन: पेश गर्दा प्रमाणीकरण गरिएको छ। प्रमाणीकरण गरिएको अध्यादेशमा अध्यक्ष र कम्तिमा तीनजना सदस्य हुँदा गुणात्मक संख्या पुग्ने व्यवस्था गरिएछ। यसअघि प्रधानमन्त्री, सभामुख, प्रधानन्यायाधीश, राष्ट्रिय सभाका अध्यक्ष, उपसभामुख तथा विपक्षी दलका नेताहरू सदस्य रहने संवैधानिक परिषद् अध्यक्ष र कम्तिमा चारजना सदस्य हुँदा गुणात्मक संख्या पूरा हुने व्यवस्था थियो। विपक्षी दलका नेताहरूको समावेशी शक्ति सन्तुलन कायम गर्ने व्यवस्था हटाइएको अध्यादेश राष्ट्रिय सभाबाट पारित हुन नदिने सहमति सबै विपक्षी दलले जनाएको छ।

एमालेका राष्ट्रिय सभा संसदीय दलका नेता डा. प्रेमप्रसाद दंगालले भने, ‘हामी बीच पटक-पटक छलफल भइसकेको छ। जसपा र लोसपाको पनि समर्थन छ।’ नेकपाका नेताहरू पनि संवैधानिक परिषद् सम्बन्धी अध्यादेश पारित हुन नदिन सहमत भएका छन्। स्रोतका अनुसार नेकपाका संयोजक एवं संसदीय दल नेता पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड आफैं विपक्षी दलका शीर्ष नेताहरूसँग यसबारे छलफल गरिरहेका छन्। औपचारिक भेटवार्ता नभए पनि प्रचण्डले कांग्रेस सभापति गगन थापा, एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली लगायत शीर्ष नेताहरूलाई फोनमार्फत सम्पर्कमा छन्। थापा र ओलीले पनि राष्ट्रिय सभाबाट अध्यादेशहरू पारित हुन नदिने सहमति व्यक्त गरेका छन्। तथापि कुन-कुन अध्यादेश रोक्ने भन्ने विषय अझै स्पष्ट छैन।

डा. दंगालले भने, ‘प्रक्रियागत रूपमा सबै अध्यादेशलाई अस्वीकृत गर्नुपर्छ, तर सेलेक्टिभ हुने वा नहुने विषयमा छलफल भइरहेको छ।’ कांग्रेसले संवैधानिक परिषद् सम्बन्धी अध्यादेश र विश्वविद्यालयसम्बन्धी नेपाल ऐन संशोधन गर्ने अध्यादेश-०८३ लाई रोक्नुपर्ने प्रस्ताव राखेको छ। विश्वविद्यालयसम्बन्धी अध्यादेशले कुलपतिलाई अत्यधिक शक्तिशाली बनाएको भन्दै कांग्रेसले विरोध जनाएको छ। प्रधानमन्त्री नै कुलपति हुने व्यवस्था हटाउनुपर्ने बहस भइरहेका बेला उक्त अध्यादेशले कुलपतिको अधिकार क्षेत्र बढाएको आरोप कांग्रेसले लगाएको छ।

अर्कोतर्फ, एमाले सार्वजनिक पदाधिकारी पदमुक्ति सम्बन्धी अध्यादेशको बिरुद्ध छ। यद्यपि पदका लागि चुनाव लड्ने सन्देश जाने हुँदा कांग्रेस त्यस्तो कट्टनी अडानमा नरहेको बुझिएको छ। प्रतिनिधिसभामा दुई तिहाइ जितेपछि पनि राष्ट्रिय सभामा दुई पार्टी र अन्य दलको जम्मा करिब ५४ सिट मात्र छ। कांग्रेससँग २४, नेकपासँग १७, एमालेसँग १०, जसपा २, लोसपा र जनमोर्चासँग १-१ सिट छ।

संविधानअनुसार दुवै सदनबाट अनिवार्य स्वीकृत हुनुपर्ने अध्यादेशको व्यवस्था छ। सरकार संसद अधिवेशन नभएको अवस्थामा आवश्यक परेमा मन्त्रिपरिषद्को सिफारिसमा राष्ट्रपतिले अध्यादेश जारी गर्नसक्छ। यस्ता अध्यादेश ऐनसरह मान्य हुने र तुरुन्तै लागू हुने व्यवस्था छ। तर संसदको पहिलो बैठकमा सम्बन्धित मन्त्रीले अध्यादेश पेश गर्नुपर्छ र दुवै सदनले स्वीकृति दिनुपर्ने हुन्छ। अस्वीकृत गर्न आग्रह गर्ने सांसदहरूले पनि सूचना दिन सक्ने व्यवस्था छ। यससम्बन्धि प्रक्रिया प्रतिनिधिसभा नियमावलीको नियम ९५ र राष्ट्रिय सभा नियमावलीको नियम ८९ मा उल्लेख गरिएको छ।

‘अध्यादेश अस्वीकृत गर्न प्रस्ताव गर्ने सदस्यले दुई दिन भित्र महासचिव वा सचिवलाई सूचना दिनुपर्छ,’ प्रतिनिधिसभा नियमावलीको नियम ९५ को उपनियम १ मा भनिएको छ। अस्वीकृतिका कारण समेत सूचित गर्नुपर्नेछ। दुवै सदनले अस्वीकृत गरेपछि मात्र बाँकी प्रक्रिया अघि बढ्छ। संविधानको धारा ११४ को उपधारा २ (क) अनुसार, ‘संघीय संसद्को दुवै सदनमा पेश गरिनेछ र दुवै सदनले स्वीकार नगरेमा स्वतः निष्क्रिय हुनेछ।’ अध्यादेश दुवै सदनबाट स्वीकृत भए पनि ६० दिनभित्र प्रतिस्थापन विधेयक दुवै सदनबाट पारित गराएर राष्ट्रपतिबाट प्रमाणिकरण गराउनुपर्छ, नभए अध्यादेश स्वतः निष्क्रिय हुन्छ।

मलेशिया गए पिता का मिर्गौलों की समस्या से निधन, ऋण चुकाने रूस गए पुत्र युक्रेन में युद्धबंदी

मिर्गौलों की समस्या के कारण वैदेशिक रोजगार से लौटे अपने पिता के इलाज के दौरान निधन हो जाने पर ऋण चुकाने के सपने के साथ रोल्पा के रुन्टीहढी गाउँपालिका निवासी प्रतीक पुन तीन साल पहले रूस गए थे। उनकी माता तीलकुमारी ने ऋण के ऊपर अतिरिक्त ऋण लेकर बेटे से “बड़े देश” न जाने की विनती की। “हम दुखी और गरीब आदमी बड़े देश देखने नहीं आते। कमाने जाना हो तो मलेशिया जाओ” कहते हुए भी पता नहीं वे कहां-कहां गए,” उन्होंने सोमवार को फोन पर बताया। उनके मामा ने कोरियाई भाषा सीखकर कोरिया जाने का सुझाव दिया था। लेकिन भाषा परीक्षा पास करने में अधिक समय लगने के कारण उन्होंने विकल्प न चुना। पुर्तगाल जाने की योजना बनाने वाले अकेले बेटे प्रतीक कैसे रूस पहुंच गए, यह उनकी मां तीलकुमारी को ज्ञात नहीं है। उन्हें बस बेटे के जाते वक्त का लगभग ‘१३ लाख का ऋण’ याद है।

रूस पहुंचने के बाद प्रतीक ने अपनी मां को बताया था कि वे छात्र वीजा पर वहां गए हैं। कुछ समय बाद उन्होंने रूसी सेना में भर्ती होने की सूचना मां को दी। कुछ दिनों बाद ५ लाख रुपये भेजने का आश्वासन देने के बाद प्रतीक सम्पर्क विहीन हो गए, तीलकुमारी ने बताया। रूस पहुंचने के कुछ महीने बाद, वर्ष २०८० मंसिर में, युक्रेनी सेना ने प्रतीक को गिरफ्तार कर युद्धबंदी बनाया। परराष्ट्र मंत्रालय ने पुस ४ को रोल्पा के प्रतीक पुन के साथ बर्दिया के विवेक खत्री, काभ्रेपलान्चोक के सिद्धार्थ ढकाल और मोरङ के विकास राई के युक्रेन में बंदी होने की पुष्टि की। चितवन, खोटाङ और गोरखा समेत अन्य जिलों से रूस जाकर वहां की सेना में भर्ती हुए नेपाली भी युक्रेन में युद्धबंदी हैं, मंत्रालय ने जानकारी दी। इनमें प्रतीक सहित पांच लोग वर्ष २०२३ से युक्रेन में युद्धबंदी हैं।

मलेशिया में ११ वर्ष काम कर चुके प्रतीक के पिता की मिर्गौलों में समस्या थी। इसके बाद तीन वर्षों तक नेपाल में डायलासिस कराया गया और चार साल पहले उनका निधन हो गया, तीलकुमारी ने बताया। वर्ष २०२४ के मार्च में युक्रेन ने पांच नेपाली नागरिकों सहित युद्धबंदियों का वीडियो जारी कर नेपाल सहित अन्य देशों से रूसी सेना में नागरिक भर्ती न करने की अपील की। युक्रेनी अधिकारियों द्वारा कब्जे में लिए रूसी सैनिकों में भर्ती विदेशी नागरिकों के वीडियो में प्रतीक भी दिखाई दिए। रूसी सेना में भर्ती १२५ से अधिक नेपाली युवाओं की मृत्यु के बाद भी उनके बेटे का सुरक्षित वीडियो देखकर तीलकुमारी को थोड़ी राहत मिली। बेटे ने पत्र में खुद को ठीक बताया है, लेकिन वह पत्र देखे बिना मां का मन शांत नहीं था। प्रतीक जब सुरक्षित नेपाल वापस आएंगे, तब मां तीलकुमारी का दृढ़ संकल्प है कि वे मजदूरी करके ऋण चुका देंगी।

“जितना संभव हो लोग आ जाते हैं, झोपड़ी में या सड़क पर बैठकर भी हाथ-पैर हों तो जीवन चलाना पड़ेगा, और क्या है,” उन्होंने कहा। फरवरी २०२२ में शुरू हुए रूस-युक्रेन युद्ध के दौरान नेपाली भी रूसी सेना में भर्ती हो रहे हैं। परराष्ट्र मंत्रालय के अनुसार रूसी सेना में भर्ती होकर लापता हुए नेपाली लोगों की संख्या १२५ हो चुकी है। प्रतीक हर तीन महीने में युक्रेन की जेल से मां को पत्र भेजते रहे हैं। युक्रेन से आए पत्र दाङ के तुलसीपुर उपमहानगरपालिका बिजौरी में पहुंचता है, जहाँ सालों से रोल्पा से शिफ्ट हुई उनकी मां मजदूरी करती हैं। “उन्होंने पत्र में लिखा रहता है मैं अकेला नहीं हूं, मम्मी। हम छह-सात लोग हैं, चिंता मत करना,” मां तीलकुमारी कहती हैं। “फिर भी तनाव होता है, एक ही बेटे का मामला है।”

सरकारले ‘देवभूमि नेपाल’ अभियान चलाउने, ‘तीर्थ कूटनीति’मार्फत् धार्मिक क्षेत्र प्रवर्द्धन गर्ने

सरकार ‘देवभूमि नेपाल’ अभियान शुरू करेगी, ‘तीर्थ कूटनीति’ के माध्यम से धार्मिक क्षेत्रों का प्रमोशन करेगी

२९ वैशाख, काठमाडौँ। सरकार ने नेपाल को विश्व के आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए ‘देवभूमि नेपाल’ नामक राष्ट्रीय अभियान चलाने का निर्णय लिया है। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने सोमवार को संघीय संसद में प्रस्तुत आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ के नीति तथा कार्यक्रम में इस विषय पर स्पष्ट उल्लेख किया है।

इस अभियान के तहत पशुपतिनाथ, लुम्बिनी, जनकपुरधाम और मुक्तिनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों का प्रवर्द्धन किया जाएगा। ‘तीर्थ कूटनीति’ के माध्यम से नेपाल के महत्वपूर्ण धार्मिक क्षेत्रों के पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना नीति तथा कार्यक्रम में शामिल की गई है। इसे धार्मिक, सांस्कृतिक, स्वास्थ्य, अध्ययन, फिल्मांकन, आध्यात्मिक और अवकाश पर्यटन के रूप में विकसित कर एक उभरती हुई पर्यटन गंतव्य बनाने को प्राथमिकता दी जाएगी।

होमस्टे के माध्यम से रोजगार सृजन किया जाएगा। समुदाय संचालित होमस्टे, स्थानीय कला, संस्कृति और परंपराओं को पर्यटन से जोड़कर सीमांत और दलित समुदायों की आय वृद्धि तथा रोजगार के अवसर प्रदान करने की व्यवस्था भी की गई है। जीवित संग्रहालय अवधारणा को कार्यान्वित करते हुए कम से कम पाँच हजार नए होमस्टे को ‘नेपाल होमस्टे’ ब्रांडिंग के साथ बुकिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, जिसका प्रबंध नीति तथा कार्यक्रम में सम्मिलित है।

संसद में अशोभनीय घटना पर बालेन के सलाहकार की सफाई के बाद पोस्ट हटाया गया

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद की विशेष बैठक में स्वास्थ्य समस्या के कारण नीति तथा कार्यक्रम पढ़ते हुए बीच में उठकर चले जाने के मामले में सलाहकार असिम शाह ने सफाई दी है। असिम शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री को स्वास्थ्य समस्या के कारण कुछ समय विश्राम लेना पड़ा और बाद में वह फिर से कार्यक्रम में उपस्थित हुए, लेकिन आलोचना के बाद यह पोस्ट हटा ली गई है। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने नीति तथा कार्यक्रम पढ़ते समय प्रधानमंत्री के बैठक छोड़कर चले जाने को संसदीय मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए आलोचना की है। २८ वैशाख, काठमांडू।

प्रधानमंत्री बालेन शाह के संसद की विशेष बैठक के बीच में उठकर चले जाने की घटना पर राजनीतिक सलाहकार असिम शाह ने स्वास्थ्य समस्या बताकर स्पष्टीकरण दिया है। सोमवार शाम असिम शाह ने फेसबुक पर प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए बताया कि संसद में मौजूद रहते हुए स्वास्थ्य में समस्या उत्पन्न होने के कारण नीति तथा कार्यक्रम पढ़ते समय बैठक छोड़नी पड़ी। उन्होंने लिखा, ‘प्रधानमंत्रीज्यू को स्वास्थ्य में असहजता हुई थी इसलिए नीति तथा कार्यक्रम प्रस्तुत करते वक्त कुछ समय के लिए विश्राम लेना पड़ा था,’ और ‘इसके बाद वे पुनः कार्यक्रम में शामिल हुए, उनकी स्वास्थ्य स्थिति सामान्य है यह जानकारी दी जाती है।’

हालांकि कुछ ही मिनटों में आई सैंकड़ों आलोचनाओं के कारण शाह ने उक्त पोस्ट हटा दी। आज हुई संघीय संसद की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल नीति तथा कार्यक्रम पढ़ रहे थे जब प्रधानमंत्री शाह बीच में उठकर चले गए थे। राष्ट्रपति के दौरान बैठक छोड़कर निकलने के कारण प्रधानमंत्री शाह की आलोचना हो रही है। व्यापक आलोचना के बीच बालेन शाह के सचिवालय सदस्य शाह ने स्वास्थ्य समस्या का हवाला दिया लेकिन सोशल मीडिया पर पोस्ट कुछ ही मिनटों के भीतर हटा लिया गया।

आज संसद की राज्यव्यवस्था समिति की बैठक में प्रधानमंत्री शाह के अनुपस्थित रहने पर विपक्षी कांग्रेस ने बहिष्कार किया था, जिसे रास्वपा ने भी सफाई देने की कोशिश की। सांसद हरि ढकाल ने बैठक बुलाए जाने की बात खारिज की है। लेकिन कांग्रेस संसदीय दल के नेता भीष्मराज आङदेम्बे ने बैठक बहिष्कार का कारण बताकर प्रधानमंत्री की गैरजिम्मेदारिता की आलोचना की है। अपनी ही सरकार द्वारा तैयार किए गए नीति तथा कार्यक्रम को राष्ट्रप्रमुख जब पेश कर रहे हों तब प्रधानमंत्री का बैठक छोड़ कर निकलना संसदीय अभ्यास के लंबे समय से जुड़े नियमों के दृष्टिकोण से असहनीय अशोभनीय घटना मानी गई।

‘मैंने लगभग ४० साल संसद सेवा में बिताए हैं, लेकिन ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा,’ संसद सचिवालय के पूर्वमहासचिव मनोहरप्रसाद भट्टराई ने कहा, ‘संसद वह स्थान है जहां मर्यादा और शिष्टाचार का पालन आवश्यक होता है। यदि इसका महत्व न समझा गया तो संसद की गरिमा बनी नहीं रह सकती।’ संविधान के अनुसार राष्ट्रपति संसद में उपस्थित होकर सरकार का नीति तथा कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। हर वर्ष नीति तथा कार्यक्रम संसद में राष्ट्रपति द्वारा पढ़ा जाता है। राष्ट्रपति द्वारा पढ़े जाने वाले नीति तथा कार्यक्रम की तैयारी से लेकर संबोधन का समय तक सरकार के निर्णय पर निर्भर करता है। राष्ट्रपति के संसद में आने का विशेष समय प्रधानमंत्री निर्धारित करते हैं। इसी परंपरा के तहत जब संयुक्त सदन में राष्ट्रपति संबोधन के लिए आए, प्रधानमंत्री ने उन्हें उचित सम्मान देना उचित नहीं समझा। सलाहकार टीम ने बालेन की सफाई करने का प्रयास किया लेकिन अब वे पीछे हट गए हैं।

धादिङको बैरेनीमा दुई बस ठोक्किए, १२ जना घाइते – Online Khabar

धादिङको बैरेनीमा दुई बस ठोक्किँदा १२ जना घाइते

फोटो क्रेडिट : केशव अधिकारी / फेसबुक २९ वैशाख, काठमाडौं । पृथ्वी राजमार्गअन्तर्गत धादिङ जिल्लाको बैरेनी क्षेत्रमा दुई वटा बस ठोक्किँदा १२ जना घाइते भएका छन् । घाइतेमध्ये ३ जनाको अवस्था गम्भीर रहेको छ । काठमाडौंबाट पोखरा र वीरगञ्ज तर्फ गइरहेका ती बसहरु गएराति ठोक्किएका हुन् । घाइतेहरुलाई प्रहरीले रातिचै उद्धार गरी अस्पताल पुर्याएको छ । ठोक्किएका बसहरु र घाइतेहरुको विस्तृत विवरण अझै सार्वजनिक भइसकेको छैन ।

प्रधानमंत्री की मुस्कुराहट का दृश्य संसदीय अभिलेख से हटाने की मांग | एमाले की याचिका

समाचार सारांश: नेकपा एमाले ने सांसदों से प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह द्वारा संसद में दिखाई गई मुस्कुराहट के दृश्य को संसदीय अभिलेख से हटाने की मांग की है। एमाले सांसद गुरुप्रसाद बराल ने कहा कि प्रधानमंत्री का साइड टॉक करना संसदीय नियम का उल्लंघन है। बराल ने प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय पोशाक संबंधी विषय पर भी सभामुख के माध्यम से रूलिंग की मांग की है।

28 वैशाख, काठमाडौं। नेकपा एमाले ने संसद में प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) की मुस्कुराहट के दृश्यों को संसदीय अभिलेख से हटाने की मांग की है। सोमवार को संघीय संसद के संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने सरकार की नीति तथा कार्यक्रम प्रस्तुत की। इसी दौरान प्रधानमंत्री द्वारा साइड टॉक किए जाने पर एमाले सांसद गुरुप्रसाद बराल ने विरोध जताया।

‘राष्ट्रपति के पूरे संबोधन के लगभग 15 मिनट फ्रंट लाइन में बैठे प्रधानमंत्री क्या संवाद कर रहे थे? क्या चर्चा हो रही थी? यह संसदीय मर्यादा के अनुसार उचित नहीं है और असभ्य प्रतीत होता है। इसलिए इसे अभिलेख से हटाना चाहिए ताकि भविष्य के लिए अच्छा उदाहरण स्थापित हो,’ सांसद बराल ने कहा।

नीति तथा कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले राष्ट्रपति पौडेल को धन्यवाद देने के लिए आयोजित प्रतिनिधि सभा की बैठक में सांसद बराल ने उक्त प्रतिक्रिया दी। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री बालेन की पोशाक संबंधी विषय पर भी सवाल उठाए।

‘प्रधानमंत्री को क्या दो राष्ट्रीय महत्व की बैठकों, संयुक्त सदन में भी राष्ट्रीय पोशाक पहनने की आवश्यकता नहीं है?’ उन्होंने प्रश्न करते हुए कहा, ‘इस प्रकार की कौन सी परंपरा चलेगी और कौन सी नहीं? हम देश में किस प्रकार की संस्कार स्थापित करना चाहते हैं? मैं इस विषय पर सभामुख महोदय के माध्यम से स्पष्ट रूलिंग की मांग करता हूँ।’

सरकारको नीति तथा कार्यक्रममा खुम्चियो खेलकुद – Online Khabar

सरकार के नीति और कार्यक्रम में खेलकूद का सीमित स्थान

सरकार ने अपनी सौ बिंदुओं वाली नीति और कार्यक्रम में खेलकूद को केवल एक बिंदु में सम्मिलित किया है। खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल ने विद्यालय पाठ्यक्रम में खेलकूद शामिल करने की योजना प्रस्तुत की थी, लेकिन इसे नीति कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया है। सरकार ने खेलकूद को राष्ट्रीय एकता, स्वास्थ्य, पर्यटन और अर्थव्यवस्था से जोड़ने का घोषणा किया है। नीति कार्यक्रम में खिलाड़ियों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रावधान है, फिर भी यह अब तक लागू नहीं हो पाया है।

28 वैशाख, काठमांडू। खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल ने बार-बार जो बात दोहराई है, वह थी – खेलकूद को विद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। नीति और कानूनी रूप से खेलकूद को शिक्षा से जोड़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई, फिर भी आगामी आर्थिक वर्ष के लिए प्रस्तुत नीति और कार्यक्रम में इसे शामिल नहीं किया गया है। शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री भी रहे पोखरेल ने नेपाल के खेलकूद क्षेत्र के विकास के लिए विद्यालयों में खेलकूद को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की योजना बताई।

हालांकि, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा सोमवार को प्रस्तुत नीति और कार्यक्रम में खेलकूद को शिक्षा से जोड़ने की पहल शामिल नहीं थी। इसके बजाय सरकार ने खेलकूद को राष्ट्रीय एकता, स्वास्थ्य, पर्यटन और अर्थव्यवस्था से जोड़ने का उद्घोष किया है। नीति कार्यक्रम में विद्यालय स्तर से प्रतिभा पहचान करने वाले कार्यक्रम चलाने की योजना है। साथ ही खेल क्षेत्र के व्यवसायीकरण, निजी क्षेत्र की भागीदारी और खिलाड़ियों की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को भी इसमें शामिल किया गया है।

नई सरकार बनने के बाद शासकीय सुधार समिति द्वारा तैयार की गई सौ कार्यसूची में खेलकूद को शामिल नहीं किया जा सका था, जबकि बालेन नेतृत्व वाली सरकार ने भी नीति और कार्यक्रम में खेलकूद को अधिक प्राथमिकता नहीं दी है।

आगामी आर्थिक वर्ष की नीति एवं कार्यक्रम इस प्रकार निर्धारित

२८ वैशाख, काठमांडू । सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष के लिए नीति तथा कार्यक्रम जारी किया है। संघीय संसद के संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने नीति तथा कार्यक्रम पढ़कर प्रस्तुत किया। नीति तथा कार्यक्रम का पूर्ण पाठ इस प्रकार है:   

पहिले अध्यादेशको विरोध गर्‍यो, अहिले आफैं ल्यायो – Online Khabar

कोशी प्रदेश सरकार ने अध्यादेश जारी करने का निर्णय लिया

कोशी प्रदेश सरकार ने बजट अधिवेशन से पहले अध्यादेश जारी करने का निर्णय लिया है। प्रदेश खेलकुद अधिनियम के प्रथम संशोधन का अध्यादेश २०८३ जारी करने की तैयारी चल रही है। प्रदेश प्रमुख सरकार की सिफारिश के अनुसार अध्यादेश जारी करेंगे और सदस्य सचिव की नियुक्ति प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। स्थान: विराटनगर, तारीख: २८ वैशाख।

सोमवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में बजट अधिवेशन के नजदीक आने के कारण संसद आह्वान के समय के निकट होने के कारण यह निर्णय लिया गया। सरकार ने प्रदेश खेलकुद अधिनियम में पहला संशोधन करते हुए अध्यादेश २०८३ जारी करने का निर्णय किया है। पूर्व में बालेन शाह के नेतृत्व वाली संघीय सरकार ने संसद अधिवेशन रुकवाते हुए अध्यादेश जारी किया था, जिस पर कोशी प्रदेश के मुख्यमंत्री हिक्मत कुमार कार्की ने विरोध जताया था। लेकिन वर्तमान में हिक्मत के नेतृत्व में सोमवारी मंत्रिपरिषद बैठक ने अध्यादेश लाने का निर्णय लिया।

प्रदेश सरकार के प्रवक्ता एवं आंतरिक मामले तथा कानून मंत्री इन्द्रमणि पराजुली के अनुसार, सरकार के कामकाज को प्रभावी बनाने के लिए अध्यादेश जारी करने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश खेलकुद बोर्ड के सदस्य सचिव पद पर गत कात्तिक से रिक्त था। रिक्त पद पर नए सदस्य सचिव की नियुक्ति प्रक्रिया तथा बजट व्यय को सुगम बनाने हेतु अध्यादेश लाने का निर्णय सूत्रों ने बताया।

सोमवार की बैठक में विपद् खोज, उद्धार तथा राहत वितरण संबंधी कार्यविधि २०८३, कृषि क्षेत्र विकास के लिए प्रदेश बीज-बीजन नियमावली २०८३, तथा प्रदेश जीवनाशक विषाधि प्रबंधन नियमावली २०८३ को भी स्वीकृति दी गई। साथ ही बैठक ने उद्योग, कृषि तथा सहकारी मंत्रालय के अधीन निकायों के लिए अस्थायी दरबंदी को स्वीकृत किया तथा विस्तृत विराट क्षेत्र विकास समिति के मुख्य कार्यकारी निर्देशक के चयन के लिए सिफारिश समिति गठित करने का निर्णय भी लिया।