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लेखक: space4knews

पर्यटन भिसा में आने वाले विदेशी खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धा में शामिल न कराने हेतु एन्फा को अध्यागमन विभाग का पत्र

समाचार सारांश

संपादकीय रूप में समीक्षा किया गया ।

  • अध्यागमन विभाग ने पर्यटक वीजा पर रह रहे विदेशी खिलाड़ियों को खेलों में भाग लेने से रोकने के लिए अखिल नेपाल फुटबॉल संघ को पत्र भेजा है।
  • निदेशक टिकाराम ढकाल ने कहा कि विदेशी खिलाड़ियों को नियमानुसार कार्य अनुमति और श्रम स्वीकृति लेकर ही खेलों में भाग लेने दिया जाएगा।
  • विभाग ने पर्यटक वीजा पर आए खिलाड़ियों के खेल में भाग लेने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है और युवा तथा खेलकूद मंत्रालय को भी पत्र भेजा है।

५ चैत, काठमांडू । अध्यागमन विभाग ने पर्यटक वीजा पर रह रहे विदेशी खिलाड़ियों को अखिल नेपाल फुटबॉल संघ (एन्फा) के माध्यम से खेल में भाग लेने से रोकने के लिए पत्र जारी किया है।

विभाग के निदेशक टिकाराम ढकाल ने कहा है कि यदि विदेशी खिलाड़ियों को खेलों में शामिल करना है तो यह केवल नियमानुसार कार्य सहमति और श्रम स्वीकृति प्राप्त कराकर ही संभव होगा।

अध्यागमन नियमावली, २०५१ की नियमावली संख्या २० के अनुसार, वीजा प्राप्त विदेशी केवल उसी उद्देश्य के लिए कार्य कर सकते हैं जो उनके वीजा में उल्लिखित है; अन्य किसी भी प्रकार का कार्य प्रतिबंधित है। इसके बावजूद एन्फा ने पर्यटक वीजा पर आए खिलाड़ियों को खेलों में शामिल करने की अनुमति दी, जिसके कारण विभाग ने यह पत्र भेजा है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना स्वीकृति प्राप्त विदेशी खिलाड़ियों को वीजा के उद्देश्य के विपरीत खेल में भाग लेते पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इससे पहले, राखेप (राष्ट्रिय खेलकूद परिषद) ने भी विदेशी खिलाड़ियों के विषय में एन्फा को जानकारी देने के लिए पत्र लिखा था।

निदेशक ढकाल ने स्पष्ट किया कि पर्यटक वीजा पर आए व्यक्ति खिलाड़ियों के रूप में खेल नहीं सकते।

‘प्रारंभिक सूचना के अनुसार, कुछ विदेशी खिलाड़ी खेलते पाए गए हैं। पर्यटक के तौर पर आए व्यक्ति को खिलाड़ी बना कर खेलाना और उसे भुगतान करना हमारे अध्यागमन विभाग के नियमों का उल्लंघन है और इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी,’ उन्होंने कहा।

निदेशक ढकाल ने कहा कि श्रम स्वीकृति प्राप्त करने में कोई समस्या नहीं है। विभाग ने यह पत्र युवा तथा खेलकूद मंत्रालय और राष्ट्रिय खेलकूद परिषद को भी भेजा है।

नेपाल चुनाव २०८२ प्रतिनिधि सभा: मत परिणाम सांख्यिकी और नक्शे में

नेपाल चुनाव २०८२

    • लेखक, केशव कोइराला
    • भूमिका, बिबिसी न्यूज नेपाली
  • पढ़ने का समय: १ मिनट

निर्वाचन आयोग ने प्रतिनिधि सभा चुनाव का अंतिम मत परिणाम घोषित किया है। इस चुनाव के लिए पिछली फागुन २१ तारीख़, गुरुवार को मतदान सम्पन्न हुआ था।

‘पहला आता है वही निर्वाचित होता है’ यानी प्रत्यक्ष निर्वाचक प्रणाली के तहत १६५ सीटों में से राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी ने १२५ सीटें जीती हैं। समानुपातिक प्रणाली के अंतर्गत, इस पार्टी ने ११० सीटों में से ५७ सीटें प्राप्त की हैं, जिसे निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को सार्वजनिक किया है।

आयोग के अनुसार कुल १,८९,०३,८६९ मतदाताओं में से प्रत्यक्ष मतदान में १,११,६८,०३२ और समानुपातिक मत में १,१२,८०,६१७ लोगों ने मतदान किया। यद्यपि, प्रत्यक्ष मतदान में ९४.५५% और समानुपातिक मत में ९६.०५% मत ही मान्य घोषित किए गए हैं।

नेपाल चुनाव २०८२

प्रत्यक्ष











समानुपातिक











समानुपातिक प्रणाली के अंतर्गत, कुल मान्य मतों का कम से कम तीन प्रतिशत वोट प्राप्त करने वाले रास्वपा, नेपाली कांग्रेस, नेकपा एमाले, नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी, श्रम संस्कृति पार्टी और राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी ने समानुपातिक प्रणाली में सीटें प्राप्त की हैं।

प्रत्यक्ष परिणाम सार्वजनिक होने के बाद संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में ही मतगणना सार्वजनिक करने का प्रावधान है।

एमाले परिवर्तन की पतन के जोखिम पर

समाचार संक्षेप

समीक्षा पश्चात तैयार किया गया।

  • नेकपा एमाले के नेता सुरेन्द्र पाण्डे ने चेतावनी दी है कि पार्टी यदि सही दिशा नहीं लेती है तो पतन के कगार पर पहुँच सकती है।
  • पाण्डे ने कहा कि पार्टी के सभी संरचनाओं और कार्यशैली में परिवर्तन करने से ही संकट से उबरना संभव होगा।
  • ऊर्जावान नेतृत्व को अपनी कमजोरियाँ स्वीकार कर परिवर्तन के लिए तैयार होना चाहिए, उन्होंने बताया।

७ चैत्र, बुटवल। नेकपा एमाले के नेता सुरेन्द्र पाण्डे ने कहा है कि यदि पार्टी सही दिशा नहीं लेती है तो उसे गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और वह पतन के कगार पर पहुँच सकती है। शनिवार को बुटवल में आयोजित इंटरैक्शन में उन्होंने कहा कि पार्टी की सभी संरचनाओं और कार्यशैली में बदलाव किए बिना संकट से बाहर निकलना संभव नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि जनता के पास संसद तक की शक्ति है पर पार्टी अध्यक्ष केपी ओली द्वारा संसद के दो बार विघटन के बाद पार्टी का पतन शुरू हो गया।

संविधान में एक व्यक्ति को पार्टी अध्यक्ष बनने का प्रावधान होने के बावजूद, वर्तमान गंभीर स्थिति में एमाले इतनी बुरी स्थिति में नहीं होती, यदि अध्यक्ष एक बार बनने के बाद पूरी शक्ति लेकर नेतृत्व छोड़ने से मना न करता। उन्होंने कहा कि सामूहिक नेतृत्व और टीम के रूप में काम करने की निश्चित प्रणाली न होने से पार्टी कमजोर हो रही है।

उन्होंने देशभर के पार्टी सदस्यों से अपील की कि वे अपने सार्वभौमिक अधिकार का प्रयोग करते हुए पार्टी को पुनः संरचित कर पूर्व स्थिति में लाएँ।

उन्होंने कहा कि संघीय चुनाव के प्रभाव प्रदेश और स्थानीय तह तक पहुंचेगा, इसलिए पार्टी की हार की जिम्मेदारी नेतृत्व द्वारा ली जानी चाहिए। ‘नेतृत्व को जिम्मेदारी लेकर अपनी कमजोरियों को स्वीकार कर बदलाव के लिए तैयार होना जरूरी है’, उन्होंने कहा, ‘पार्टी अब निर्णायक मोड़ पर है, अब सुधरेगी या गिर जाएगी।’

उन्होंने कहा कि यह सुधरने का अंतिम मौका है, मगर इसे विलंबित किया जा रहा है क्योंकि समस्या सतही नहीं बल्कि संरचनात्मक है। ‘महोत्तरी और धनुषा के पार्टी सदस्यों और मतों की संख्या ने दिखाया है कि यह सेवा प्रदान करने की समस्या नहीं है, बल्कि एक संरचनात्मक समस्या है जिसे पूरी तरह से बदलना होगा,’ उन्होंने कहा, ‘यदि ऐसा नहीं किया गया तो पार्टी का पतन निश्चित है।’

उन्होंने जोर दिया कि हर वार्ड में पार्टी सदस्यों की संख्या और प्राप्त मतों की तुलना कर कार्यकर्ता स्तर पर जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय तह, प्रदेश और संघीय चुनावों के लिए उम्मीदवारों के टिकट पार्टी समितियां तय करें तो पार्टी संगठन स्थानीय तह तक विकेंद्रीकृत और सशक्त होगा।

इस चुनाव में सामाजिक संजाल और सूचना प्रौद्योगिकी के प्रभाव को उन्होंने स्वीकार किया।

उन्होंने कहा कि युवा से लेकर वरिष्ठ मतदाता तक दूरी बढ़ गई है। लगभग ३० वर्ष से कम उम्र के अधिकांश युवाओं ने एमालेल को नहीं वोट दिया और ६० वर्ष से ऊपर के मतदाताओं ने भी वोट नहीं दिया। उन्होंने चेताया कि एमाले यदि संरचनात्मक बदलाव नहीं करता तो अगली चुनाव में वह बड़े वाहन की बजाय छोटे स्कूटर में सिमट कर सीट जीत पाएगा।

‘२०७४ में लगभग १७४ सीट जीतकर बड़ी सफलता मिली थी, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। पहले कम्युनिस्ट कई बसों में आते थे, ७९ के चुनाव में एक बस में आए, अब माइक्रोबस बनी है, अगली बार स्कूटर में सिमटने वाली सीटें ही मिलेगी,‘ पाण्डे ने कहा, ‘अगर हम सही रास्ता नहीं चुनेंगे तो यही होगा। इसलिए हम जोखिम में हैं। लेकिन सभी को संकल्प लेकर आगे बढ़ना होगा, पूरी कार्यशैली बदलनी होगी।’

पाण्डे ने चेतावनी दी कि केवल कमजोरियों का निर्भीकता से सामना करने पर ही सही दिशा तय की जा सकेगी अन्यथा सामूहिक पतन का दिन बहुत नजदीक है।

इरान चाहता है युद्धविराम नहीं, युद्ध का स्थायी अंत

समाचार सारांश

एआई द्वारा बनाया गया, सम्पादकीय समीक्षा के साथ।

  • इरान ने युद्धविराम की मांग से इनकार किया है।
  • अरागची ने कहा, ‘इरान युद्धविराम नहीं चाहता, बल्कि युद्ध का पूर्ण, व्यापक और स्थायी अंत चाहता है।’
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इरान के साथ युद्ध जल्द समाप्त होने की उम्मीद जताई है।

7 चैत्र, काठमांडू । इरान ने अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्धविराम को अस्वीकार किया है।

विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने जापानी मीडिया संस्था ‘क्योडो न्यूज’ से बातचीत में कहा कि इरान युद्धविराम नहीं चाहता बल्कि युद्ध का स्थायी अंत चाहता है।

अरागची ने स्पष्ट किया, ‘इरान युद्धविराम नहीं चाहता। बल्कि युद्ध का पूर्ण, व्यापक और स्थायी अंत चाहता है।’

उन्होंने कहा कि वे युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने वाली किसी भी पहल का स्वागत करते हैं और बताया कि इरान पर अन्यायपूर्ण संघर्ष थोप दिया गया है।

अरागची ने यह भी कहा कि वे युद्ध विराम के प्रस्तावों को सुनने और विचार करने को तैयार हैं।

‘कुछ देश मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का समाधान खोज रहे हैं,’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन ऐसा नहीं लगता कि अमेरिका अपनी आक्रामकता रोकने के लिए तैयार है।’

इसके पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट के समान ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि इरान के साथ युद्ध जल्द खत्म हो जाएगा। उन्होंने लिखा था, ‘हम अपने लक्ष्य के काफी करीब हैं।’

‘कर्मचारी इन्जिन हुन्, ड्राइभिङ सिटमा बस्नेले कसरी कुदाउने ख्याल हुनुपर्छ’

‘कर्मचारी इंजन हैं, ड्राइविंग सीट पर बैठने वाले को उन्हें कैसे चलाना है पर ध्यान देना चाहिए’

समाचार सारांश

  • चुनाव के बाद स्पष्ट बहुमत के साथ नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और मंत्रियों के चयन एवं मंत्रालयों के आवंटन पर ध्यान केंद्रित है।
  • पूर्व सचिव गोविंद कुसुम ने कहा कि प्रधानमंत्री को कार्ययोजना बनाकर पांच वर्षों की प्राथमिकताओं के साथ सक्षम और जवाबदेह मंत्रिमंडल बनाना चाहिए।
  • सरकार को सुशासन, पारदर्शिता और क्रियान्वयन-केंद्रित प्रणाली विकसित करके पिछले कमियों को दोहराने से बचना होगा, जो अवसर और चुनौती दोनों है।

चुनाव के बाद स्पष्ट बहुमत के साथ नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ध्यान मुख्य रूप से मंत्री चयन और मंत्रालयों के आवंटन पर केंद्रित है। आगामी सरकार को मजबूत जनादेश मिलने के कारण नेतृत्व पर स्पष्ट दृष्टि के साथ सक्षम, जवाबदेह और परिणाम-केंद्रित टीम बनाने का दबाव है। सुशासन, पारदर्शिता और क्रियान्वयन-केंद्रित प्रणाली विकसित करके पिछली कमियों को पुनः न दोहराना सरकार के लिए अवसर और चुनौती दोनों होगी। इसी संदर्भ में पूर्व सचिव गोविंद कुसुम से बातचीत इस प्रकार है :

अभी चुनाव के बाद नई सरकार गठन की प्रक्रिया जारी है। मंत्री चयन और मंत्रालयों का आवंटन कैसे किया जाना चाहिए?

हम संसदीय प्रणाली के अनुसार सरकार बनाते हैं, इसलिए मंत्रालयों के आवंटन के आरंभिक चरण में कुछ खींचतान देखी जा रही है। पहले गठबंधन सरकार के समय ऐसा होता था। कई बार व्यक्तिगत लाभ के कारण ‘मैं यह मंत्रालय लूंगा’ जैसी प्रवृत्ति होती थी।

लेकिन अब जो सरकार बनने जा रही है उसके पास ‘लैंडस्लाइड विजय’ है, यानी अत्यधिक बहुमत है। इस स्थिति में सबसे बड़ी जरूरत है कि नेतृत्व, खासकर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार, देश को कैसे आगे ले जाना है यह स्पष्ट करें। प्रधानमंत्री को अपनी दृष्टि प्रस्तुत करनी होगी क्योंकि वर्तमान संसद से बनने वाली सरकार के लिए पिछली गलतियों को दोहराने की कोई गुंजाइश नहीं है।

गलतियाँ न दोहराने के लिए शुरुआती कदम क्या होने चाहिए?

सबसे पहले एक व्यवस्थित प्रणाली विकसित करनी होगी। एक कार्यात्मक ‘शासन संस्कृति’ स्थापित करनी होगी जिसमें मूल्य और मान्यताएँ हों। शासन प्रणाली की परंपरा की स्थापना प्रारंभ से होनी चाहिए। अब किसी को भी ‘मैं यह मंत्रालय लूंगा’ का रवैया नहीं अपनाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो यह चिंता का विषय है।

प्रधानमंत्री को किस प्रकार का मंत्रिमंडल बनाना चाहिए?

प्रधानमंत्री को अपनी टीम में संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल करके एक सक्षम टीम बनानी चाहिए। पहले की तरह प्रधानमंत्री के निर्देशों की अनदेखी कर आगे बढ़ने की प्रवृत्ति अब स्वीकार्य नहीं है। प्रधानमंत्री को स्पष्ट कार्ययोजना बनानी चाहिए कि प्रशासन, आर्थिक, उद्योग, कृषि और सामाजिक विकास क्षेत्रों में क्या काम कैसे किए जाएंगे।

कार्यक्रमों के लिए ‘समय सीमा’ निर्धारित करनी होगी। किन कार्यों को तुरंत करना है, किन्हें एक वर्ष या पांच वर्ष के भीतर पूरा करना है इसकी प्राथमिकता तय करनी होगी। पांच वर्षों की रूपरेखा निर्धारित और पारदर्शी होनी चाहिए। कामों की प्रगति के बारे में आम जनता को भी जानकारी मिलने के लिए व्यवस्था होनी चाहिए।

सेवा प्रदान में कई समस्याएं हैं, इन्हें सुधारने के लिए क्या किया जाना चाहिए?

सरकार को सभी सार्वजनिक सेवा क्षेत्रों में तेज और प्रभावी सेवा प्रवाह प्रणाली विकसित करनी चाहिए। सेवा प्रदाता कर्मचारियों को सशक्त बनाकर उनका मनोबल बढ़ाना आवश्यक है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि सरकार जनता की आशा लेकर बनी है, इसलिए सफलता के लिए सभी को सहयोग करना होगा।

सेवाग्राही के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करनी होगी। इसके लिए प्रशासनिक क्षेत्र के नौकरशाहों तथा तकनीकी कर्मियों का विश्वास जीतना सरकार का काम है।

अक्सर कर्मचारियों के काम न करने की शिकायत होती है, इसका समाधान क्या हो सकता है?

कर्मचारी इंजन हैं; ड्राइविंग सीट पर बैठा व्यक्ति सरकार है। इंजन को कैसे स्टार्ट करके दौड़ाना है, यह जिम्मेदारी ड्राइविंग सीट पर बैठे व्यक्ति की होती है। जब जाम लगे या अन्य समस्या आए तो उन्हें हल करना भी सरकार व नेतृत्व का कार्य है। मंत्री या प्रधानमंत्री द्वारा ‘इस सचिव को लूंगा या हटाऊंगा’ कहने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि सक्षम कर्मचारी से बेहतर परिणाम लाने और उस पर भरोसा करने की व्यवस्था हो।

मंत्रालयों की संख्या अधिक हो गई है ऐसी आवाजें हैं, इसे कैसे प्रबंधित किया जाए?

मंत्रालयों की संख्या कानूनी सीमा से अधिक न हो इसका ख्याल रखना चाहिए, फिर भी छोटे और चुस्त मंत्रालय बेहतर होते हैं। प्रधानमंत्री और मंत्रालय नीतिगत दिशा देते हैं, काम करने वाले कर्मचारी हैं। बहुत अधिक मंत्री और मंत्रालय की आवश्यकता नहीं है। एक मंत्री दो मंत्रालय भी संभाल सकता है।

केंद्र सरकार को स्थानीय सरकारों के काम करने का अनुकूल माहौल बनाने पर भी विचार करना चाहिए। स्थानीय सरकार को सुविधाजनक माहौल, संसाधन और विश्वास के साथ काम करने देना चाहिए। स्थानीय सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो, विवाद उत्पन्न करने वाला माहौल नहीं बनाना चाहिए क्योंकि इससे विकास और वादों की पूर्ति में बाधा आती है।

सरकार अब पहले की तरह ‘मैं करूंगा’ की सोच में नहीं रहनी चाहिए, खुद क्षेत्र में जाकर कार्य का दायित्व उठाना चाहिए। स्थानीय स्तर की योजनाओं और शिकायतों को सुनने तथा प्रबंधित करने के लिए अलग प्रणाली बनानी होगी। मंत्रालय के अंदर अलग इकाई बनाकर तत्काल समस्याओं का समाधान और जनसाधारण को जवाबदेही प्रदान करनी होगी।

सांसद भी अपनी विशेषज्ञता के अनुसार मंत्रालय चाहते हैं, इस बार इसमें क्या बदलाव होगा?

मुख्य बात ड्राइविंग सीट पर बैठे व्यक्ति की दृष्टि पर निर्भर करती है। प्रधानमंत्री नियुक्ति का अधिकार रखते हैं। सांसदों की क्षमता और उनकी कार्यक्षमता को आंका कर मंत्रालय प्रदान करना प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है।

केवल विषय पढ़ने से कोई सक्षम नहीं माना जा सकता। अध्ययन और कार्य कौशल अलग होता है। व्यावहारिक ज्ञान का अभाव भी हो सकता है। लोक सेवा के स्तर पर कौन काम कर सकता है और किस प्रकार मिलकर काम करना है, यह प्रधानमंत्री को समझना चाहिए। नेतृत्व क्षमता विकसित करना आवश्यक है। अच्छी टीम बनानी है और उसके कार्य का निरंतर निरीक्षण करना होगा।

सरकार और प्रधानमंत्री को बड़े दिल और व्यापक दृष्टिकोण वाला होना चाहिए। पद प्राप्त करना और कार्यान्वयन करना अलग बातें हैं। हमें अतीत की तुलना में अब कार्य करने पर केंद्रित होना चाहिए।

आंतरिक सुरक्षा, विकास, आर्थिक और सामाजिक पहलुओं के साथ जातीय, भौगोलिक तथा लैंगिक विवादों का प्रबंधन भी करना होगा।

विदेश नीति और भू-राजनीतिक संवेदनशीलता को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। जिम्मेदार व्यक्ति को संवेदनशील और संयमित होना चाहिए। ज्यादा बोलने से बेहतर है कार्य कर दिखाना।

जनादेश सुशासन श्रृंखला–

काभा महिला नेसन्स वॉलीबॉल लीग जेठ के दूसरे सप्ताह से काठमांडू में शुरू होगी

समाचार सारांश

संपादकीय रूप में समीक्षा की गई।

  • काभा महिला नेसन्स वॉलीबॉल लीग आगामी जेठ ८ तारीख से १६ तारीख तक त्रिपुरेश्वर स्थित कवर हॉल में आयोजित होगी।
  • नेपाल वॉलीबॉल संघ के महासचिव रोशन श्रेष्ठ ने आठ देशों की भागीदारी के साथ लीग संचालित होने की जानकारी दी।
  • लीग के लिए नेपाल ने २० खिलाड़ियों को क्लोज कैंप में बुलाकर प्रशिक्षण शुरू कर दिया है।

५ चैत, काठमांडू। काभा महिला नेसन्स वॉलीबॉल लीग आगामी जेठ ८ तारीख से शुरू होगी। नेपाल वॉलीबॉल संघ के महासचिव रोशन श्रेष्ठ ने बताया कि पहले स्थगित की गई लीग अब जेठ ८ से १६ तक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

पहले यह लीग पिछले नवंबर में काठमांडू के खुले मैदान में आयोजित करने की योजना थी, लेकिन भाद्र २३ और २४ को हुए जन-जी आंदोलन के कारण उस समय इसे आयोजित नहीं किया जा सका।

इस बार लीग त्रिपुरेश्वर स्थित कवर हॉल में आयोजित होगी, इसकी जानकारी महासचिव श्रेष्ठ ने दी।

काभा महिला नेसन्स लीग में आठ देशों की टीमें भाग लेंगी। महासचिव श्रेष्ठ के अनुसार नेपाल ने लीग की तैयारी शुरू कर दी है।

प्रशिक्षण के लिए २० खिलाड़ियों को क्लोज कैंप में शामिल किया गया है।

कपिलवस्तु के महाराजगंज वर्गदवा में अनिश्चितकालीन निषेधाज्ञा घोषित

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • कपिलवस्तु के महाराजगंज वर्गदवा में दो समुदायों के बीच झड़प रोकने के लिए जिला प्रशासन ने अनिश्चितकालीन निषेधाज्ञा जारी की है।
  • झड़प राम नवमी और ईद के अवसर पर माइक की आवाज अधिक होने के कारण हुई थी, जिससे 5 लोग मामूली रूप से घायल हुए।
  • निषेधाज्ञा पूर्व में वर्गदी पुल से लेकर दक्षिण में हर्दौनासम्म लागू कर दी गई है और स्थिति नियंत्रण में है, प्रशासन ने बताया।

7 चैत, बुटवल। कपिलवस्तु के महाराजगंज वर्गदवा में दो समुदायों के बीच झड़प रोकने के लिए जिला प्रशासन ने अनिश्चितकालीन निषेधाज्ञा जारी कर दी है।

आज सुबह मंदिर में भजन गाने के दौरान तोड़फोड़ की घटना के कारण हिंदू और मुस्लिम समुदाय के युवाओं के बीच तनाव बढ़ गया। संभावित झड़प को रोकने के लिए जिला प्रशासन कार्यालय ने आज दोपहर 2 बजे से अगले आदेश तक किसी भी प्रकार की सभा, जुलूस या भेंट-मुलाकात पर प्रतिबंध लगा दिया है।

प्रशासन ने बताया कि पूर्वी दिशा में वर्गदी पुल, पश्चिम में बहादुरगंज चौक, उत्तर में महाराजगंज बाजार और दक्षिण में हर्दौनासम तक निषेधाज्ञा लागू की गई है।

आज राम नवमी के अवसर पर हिंदू धर्मावलंबियों ने मंदिर में पूजा-अर्चना की, वहीं ईद के मौके पर मुस्लिम समुदाय ने मस्जिद में नमाज़ पढ़ी। दोनों तरफ से माइक की आवाज अधिक होने के कारण विवाद और झड़प हुई।

झड़प के दौरान पत्थर फेंके गए और 5 लोग मामूली रूप से घायल हुए, यह जानकारी मुख्य जिला अधिकारी भविश्वर घिमिरे ने दी। उन्होंने कहा, “निषेधाज्ञा जारी करने के बाद स्थिति नियंत्रण में आ गई है।”

इस्लामी सत्ता के केंद्र में बैठकर कान्ट के दर्शन का अध्ययन करने वाले व्यक्ति

समाचार सारांश

OK AI द्वारा तैयार किया गया। संपादकीय समीक्षा की गई।

  • ईरानी सरकारी संचार माध्यम ने सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान के सबसे शक्तिशाली अली लारीजानी की मृत्यु की पुष्टि की है।
  • इज़राइली रक्षा मंत्री ने अमेरिका-इज़राइल युद्ध के दौरान लारीजानी की मौत का दावा किया था और ईरान ने इसे स्वीकार किया है।
  • लारीजानी ने पश्चिमी दर्शन में स्नातकोत्तर किया था और इमैनुएल कांट पर पुस्तकें लिखीं, साथ ही ईरान की राजनीतिक और दार्शनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

7 चैत्र, काठमांडू। ईरानी सरकारी संचार माध्यम के अनुसार, सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान के सबसे शक्तिशाली व्यक्तित्व के रूप में उभरे अली लारीजानी की मृत्यु हो गई है।

इजरायली रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज ने ईरान पर अमेरिका-इज़राइल युद्ध के दौरान रातभर की छापेमारी में 67 वर्षीय लारीजानी की मौत का दावा किया था, जिसके बाद मंगलवार को ईरान ने इसे स्वीकार किया।

इसी तरह, ईरान की बासिज अर्धसैनिक बल के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल गुलामरेजा सोलैमानी भी एक हमले में मारे गए, जैसा कि ईरानी सरकारी संचार माध्यम ने मंगलवार को बताया। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव लारीजानी को आखिरी बार राजधानी तेहरान में आयोजित अल-कुद्स दिवस की परेड में सार्वजनिक रूप में देखा गया था। 28 फरवरी को युद्ध के पहले दिन मारे गए खामेनेई के बाद लारीजानी इज़राइल द्वारा मारे गए ईरान के सबसे उच्च पदस्थ अधिकारी हैं।

कई दशकों तक, लारीजानी को ईरानी सत्ता का एक शांत और व्यावहारिक चेहरा माना जाता था। उन्होंने 18वीं सदी के जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट पर पुस्तक लिखी थी और पश्चिमी देशों के साथ परमाणु समझौतों के लिए बातचीत की थी। लेकिन 1 मार्च को सुरक्षा प्रमुखों में अप्रत्याशित बदलाव देखा गया।

अमेरिकी और इजरायली हवाई हमले में खामेनेई और रिवोल्यूशनरी गॉर्ड कॉर्प्स के कमांडर मोहम्मद पाकपुर की हत्या के 24 घंटे बाद सरकारी टेलीविजन पर दिखते हुए लारीजानी ने आक्रामक संदेश दिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, “अमेरिका और ज़ायोनी शासन (इज़राइल) ने ईरानी राष्ट्र के दिल में आग लगा दी है। हम उनके दिलों को जलाएंगे। हम उन ज़ायोनिस्ट अपराधियों और बेहया अमेरिकियों को उनके कर्मों के लिए पछतावा कराएंगे।”

उन्होंने कहा, “बहादुर सैनिक और ईरान का महान राष्ट्र उन नरक के अंतरराष्ट्रीय अत्याचारीयों को कभी न भूलने वाला सबक सिखाएगा।”

लारीजानी ने समय-समय पर डोनाल्ड ट्रम्प पर इज़राइल के जाल में फंसने का आरोप लगाया था। खामेनेई की हत्या के बाद ईरान द्वारा संचालित तीन सदस्यीय अस्थायी परिषद में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ईरानी केनेडी

ईरान के आमोल शहर के एक सम्पन्न परिवार में 3 जून 1958 को ईराक के निज़ाफ में जन्मे लारीजानी को 2009 में टाइम मैगजीन ने “ईरान के केनेडी” के रूप में वर्णित किया था।

उनके पिता मिर्जा हासेम आमोली एक प्रसिद्ध धार्मिक विद्वान थे। लारीजानी की तरह उनके भाइयों ने भी ईरान की न्यायपालिका और विशेषज्ञों की सभा जैसे अत्यंत शक्तिशाली संस्थानों में उच्च पद संभाले हैं। यह विशेषज्ञ सभा सर्वोच्च नेता के चयन और निगरानी के अधिकार वाले विद्वानों की एक परिषद है।

लारीजानी का 1979 के बाद ईरानी क्रांति के अभिजात वर्ग के साथ भी गहरा व्यक्तिगत संबंध था। 20 वर्ष की आयु में उन्होंने फरिदेह मोताहारी से विवाह किया, जो इस्लामिक गणतंत्र ईरान के संस्थापक रुहोल्लाह खोमेनी के निकट और भरोसेमंद मोर्तेजा मोताहारी की बेटी थीं।

हालांकि उनका परिवार कट्टरपंथी धार्मिक पृष्ठभूमि वाला था, उनके बच्चों का जीवन अत्यंत विविध रह रहा था। उनकी बेटी फातेमेह ने तेहरान विश्वविद्यालय से चिकित्सा में स्नातक किया और फिर अमेरिका के ओहायो स्थित क्लिवलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी से विशेषज्ञता पूरी की थी।

गणितज्ञ दार्शनिक

अधिकांश सहकर्मी जो केवल धार्मिक मदरसों से थे, उनके विपरीत, लारीजानी की धर्मनिरपेक्ष शैक्षिक पृष्ठभूमि थी। 1979 में उन्होंने शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से गणित और कंप्यूटर विज्ञान में स्नातक किया। बाद में उन्होंने तेहरान विश्वविद्यालय से पश्चिमी दर्शन में स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की डिग्री पूरी की, जहां उन्होंने इमैनुएल कांट पर अपना शोधपत्र लिखा था।

अपने राजनीतिक जीवन के साथ-साथ, लारीजानी दर्शनशास्त्र में भी निरंतर संलग्न रहे। विशेष रूप से इमैनुएल कांट के विचारों पर आधारित कृतियों की श्रृंखला के माध्यम से उन्होंने विज्ञान, गणित और धार्मिक ज्ञान के ज्ञानमीमांसीय आधारों की खोज की है।

उनके इस बौद्धिक पक्ष ने उन्हें समकालीन विश्व के उन कुछ राजनीतिक व्यक्तित्वों में खड़ा किया, जिन्होंने सक्रिय राज्य नेतृत्व और गंभीर दार्शनिक अनुसंधान दोनों को एक साथ आगे बढ़ाया।

अली लारीजानी की दार्शनिक रुचि ने समकालीन ईरानी बौद्धिक जीवन में एक असाधारण स्थान बनाया है। उनकी दार्शनिक लगन उनके अनुसंधान की दिशा से उत्पन्न होती है।

ऐसे देश में जहां मुख्य बौद्धिक धाराएँ अधिकतर पश्चिमी आधुनिकता की आलोचना या शास्त्रीय इस्लामिक दर्शन के पुनरुद्धार के इर्द-गिर्द घूमती हैं, वहाँ लारीजानी ने आधुनिक पश्चिमी विचार के प्रमुख संवाहक इमैनुएल कांट से गहरा बौद्धिक जुड़ाव चुना।

बीसवीं सदी के मध्य से ईरानी दार्शनिक बहसें दो मुख्य प्रभावशाली धाराओं में विकसित हुई हैं। एक धार मार्टिन हाइडेगर से प्रेरित है, जो पश्चिमी सभ्यता की अस्तित्ववादी आलोचना के इर्द-गिर्द घूमती है, जो विशेष रूप से अहमद फर्दिद की बौद्धिक परंपरा से जुड़ी है। यह धारा आधुनिक पश्चिमी तर्कसंगतता को आध्यात्मिक रूप से शून्य और ऐतिहासिक रूप से थका माना करती है और एक मौलिक तथा आध्यात्मिक क्षितिज की वकालत करती है।

दूसरी धारा ‘हिकमत अल-मुताअलियाह’ अर्थात् ‘ट्रांसेंडेंट फिलॉसफी’ के नाम से जानी जाती है, जो इस्लामी पारलौकिक दर्शन के पुनरुत्थान पर केंद्रित है। यह मुख्य रूप से मुहम्मद हुसैन तबताबाई से जुड़ी है और मुल्ला सद्रा के दार्शनिक संश्लेषण पर आधारित है।

यह परंपरा तर्कसंगत दर्शन और रहस्यमय अंतर्ज्ञान के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करती है। यह ज्ञान को तर्क और आध्यात्मिक अनुभव दोनों की उपज के रूप में प्रस्तुत करती है।

इस पृष्ठभूमि में, कांट के साथ लारीजानी की संलिप्तता एक रोचक बौद्धिक परिवर्तन का प्रतीक है। कांट सामान्यत: उन दार्शनिकों में से नहीं हैं जो पश्चिमी आधुनिकता के आलोचकों को आकर्षित करते हैं।

इसके विपरीत, कांट आधुनिक दार्शनिक तर्कवाद की ठोस नींव पर खड़े हैं। उनके दर्शन ने आधुनिक ज्ञानमीमांसा, नैतिकता और विज्ञान की दार्शनिक समझ को आकार दिया। हालांकि, कांट की परियोजना आधुनिक बौद्धिक व्यवस्था में धर्म की भूमिका को पुनः परिभाषित करने का एक गहरा प्रयास थी।

लारीजानी का दार्शनिक कार्य कांट की इस परियोजना के प्रति गहरा लगाव दर्शाता है। उन्होंने खासतौर से कांट के दर्शन पर तीन पुस्तकें लिखी हैं।

उनकी पहली पुस्तक ‘रवेश-ए रियाजी’ (गणितीय विधि) कांट के गणितीय दर्शन की खोज करती है। इस कृति में लारीजानी ने कांट के विचारों में गणितीय ज्ञान के ज्ञानमीमांसीय आधारों का अध्ययन किया है।

विशेष रूप से गणितीय प्रस्ताव केवल अनुभवजन्य सामान्यीकरण नहीं बल्कि मानव समझ की संरचना में आधारित एक विशेष मान्यता की स्थिति रखते हैं, इस धारणा को उन्होंने व्याख्यायित किया है।

उनकी दूसरी पुस्तक ‘मेटाफिजिक्स या उलूम-ए दकिदेह’ (मेटाफिजिक्स और विज्ञान) पारलौकिक ज्ञान और वैज्ञानिक ज्ञान के बीच अन्तर को संबोधित करती है।

तीसरी पुस्तक ‘शुहूद या कजाया-ए तालिफी-ए मा-तकाद्दोम’ (इंट्यूशन एंड सिंथेटिक ए प्रायोरी प्रपोजीशंस) सिंथेटिक ए प्रायोरी अवधारणा और मानव संज्ञान में अंतर्ज्ञान की भूमिका पर केंद्रित है। कांट के दर्शन में, सिंथेटिक ए प्रायोरी गणित और प्राकृतिक विज्ञान की आधारशिला बनाते हैं क्योंकि वे ऐसे ज्ञान व्यक्त करते हैं जो आवश्यकीय रूप से सत्य हैं, लेकिन अनुभवजन्य अवलोकन से प्राप्त नहीं होते।

कांट की ज्ञानमीमांसा के अनुसार, कुछ ज्ञान के स्वरूप अनुभव से अधिक मानव संज्ञान संरचना से उत्पन्न होते हैं। कांट का एक प्रसिद्ध उदाहरण गणितीय प्रस्ताव 5 + 7 = 12 है।

यह प्रस्ताव केवल अवलोकन से सीखा नहीं गया है; बल्कि यह जन्मजात संरचना से उत्पन्न होता है, जिसके द्वारा मानव मस्तिष्क अनुभवों को व्यवस्थित करता है। कांट ने इसे ‘सिंथेटिक ए प्रायोरी’ कहा, क्योंकि यह ज्ञान का विस्तार करता है और अनुभवजन्य पुष्टि से स्वतंत्र रहता है।

लारीजानी के तर्क के अनुसार, यह एपिस्टेमोलॉजिकल सिद्धांत गणित और विज्ञान से परे व्यापक क्षेत्र में फैलता है।

यदि वैज्ञानिक और गणितीय ज्ञान का आधार पूर्व-अनुभवात्मक संज्ञानात्मक अंतर्ज्ञान है, तो धार्मिक ज्ञान में आधारित अंतर्ज्ञान को सहज ही अतार्किक या नीच नहीं माना जा सकता।

उनकी व्याख्या में, वैज्ञानिक और धार्मिक ज्ञान अंततः मौलिक अंतर्ज्ञान पर आधारित हैं। वे अलग-अलग क्षेत्र और विधि वाले हैं, लेकिन किसी भी श्रेणी में पूर्ण ज्ञानमीमांसीय श्रेष्ठता नहीं है।

यह लारीजानी को एक रोचक दार्शनिक स्थिति में लाता है। उनके अनुसार वैज्ञानिक, गणितीय और धार्मिक ज्ञान विरोधी नहीं हैं, बल्कि मानव संज्ञान के विभिन्न अंतर्ज्ञानों में आधारित विशिष्ट स्वरूप हैं।

वैज्ञानिक तर्क ‘सिंथेटिक ए प्रायोरी’ संरचना पर निर्भर करता है, जो गणित और भौतिक विज्ञान संभव बनाता है। इसके विपरीत, धार्मिक और पारलौकिक ज्ञान अस्तित्ववादी या आध्यात्मिक अंतर्ज्ञान पर आधारित होता है। ये दोनों ज्ञान के स्वरूप ऐसे आधारों पर टिके हैं जिन्हें अनुभवजन्य पद्धतियों से प्रमाणित नहीं किया जा सकता।

लारीजानी की दार्शनिक परियोजना को आधुनिक ज्ञानमीमांसा के ढांचे में धार्मिक ज्ञान की वैधता को बनाए रखने के लिए कांट की पुनः व्याख्या के प्रयास के रूप में समझा जा सकता है। कांट ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘Religion within the Limits of Reason Alone’ में धर्म को पुनः परिभाषित करने का ऐसा ही प्रयास किया था।

कांट के दार्शनिक सिस्टम में सैद्धांतिक और व्यावहारिक तर्क के बीच महत्वपूर्ण विभाजन है। अपनी पुस्तक ‘Critique of Pure Reason’ में कांट ने सैद्धांतिक तर्क के माध्यम से ईश्वर के अस्तित्व या आत्मा की अमरता को साबित करने की संभावना को अस्वीकार किया था। उनका तर्क था कि पारंपरिक पारलौकिक प्रमाण मानव संज्ञान की सीमा से बाहर हैं।

लेकिन ‘Critique of Practical Reason’ में कांट ने ईश्वर, स्वतंत्रता और अमरता को नैतिक तर्क की आवश्यक और मूलभूत मान्यताएं माना। ये सैद्धांतिक निष्कर्ष नहीं बल्कि नैतिक जीवन की संरचना से उत्पन्न आवश्यकताएं हैं।

कांट के दर्शन के ये दो आयाम—सैद्धांतिक तर्क की सीमाएं और नैतिक विश्वास की पुष्टि के बीच तनाव—आधुनिक दर्शन का निर्णायक मुद्दा बन गए। बाद की परंपराएँ आमतौर पर इन्हीं विभाजनों की प्रतिक्रिया के रूप में विकसित हुईं।

कुछ विचारकों ने कांट की नैतिक पारलौकिकता को छोड़कर उनकी आलोचनात्मक ज्ञानमीमांसा को स्वीकार किया, जिससे कठोर वैज्ञानिक तर्कवाद की नींव पड़ी। जबकि अन्य ने कांट के दर्शन के नैतिक पक्ष पर ज़ोर दिया।

तीसरी परंपरा ने तर्क और ऐतिहासिक अस्तित्व के बीच गहरा एकता खोजने का प्रयास किया, जो कांट के द्वैतवाद को पार करती है, और इसका उत्कर्ष हegel और Marx के द्वंद्वात्मक दर्शनों में हुआ।

लारीजानी कांट की व्याख्या को अस्तित्ववादी पक्ष के करीब लाते हैं, लेकिन एक विशिष्ट तरीके से। वे तर्कसंगतता को अस्वीकार नहीं करते, बल्कि ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों के साझा आधार के रूप में ‘अंतर्ज्ञान’ अवधारणा का विस्तार करने का प्रयास करते हैं।

लेकिन उनका कैरियर मुख्य रूप से उनके राजनीतिक रुख पर आधारित रहा।

1980 के दशक की शुरुआत में वे इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़ गए। इसके बाद सरकारी सेवा में शामिल होकर 1994 से 1997 तक राष्ट्रपति अकबर हासेमी रफसांजानी के कार्यकाल में संस्कृति मंत्री और 1994 से 2004 तक सरकारी प्रसारण संस्था (IRIB) के प्रमुख बने।

IRIB में रहते हुए उन्हें सुधारवादियों की कड़ी आलोचना सहनी पड़ी, जिन्होंने उनकी सख्त नीतियों की वजह से ईरानी युवाओं के विदेशी संचार माध्यमों की ओर जाने का आरोप लगाया।

2008 से 2020 तक लगातार तीन कार्यकाल संसद (मजलिस) के सभाध्यक्ष रहे, जहां उन्होंने आंतरिक और बाहरी नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सुरक्षा क्षेत्र में वापसी

लारीजानी ने 2005 में राष्ट्रपतीय चुनाव में कट्टरपंथी उम्मीदवार के रूप में भाग लिया लेकिन दूसरे दौर तक नहीं पहुंच पाए। उसी वर्ष वे सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और देश के मुख्य परमाणु वार्ताकार बने।

तत्कालीन राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की परमाणु नीति से असहमति के कारण 2007 में पद छोड़ दिया।

2008 में धार्मिक केंद्र कूम से सदस्यता लेकर संसद में प्रवेश किया और सभाध्यक्ष बने। इससे उन्हें परमाणु मुद्दों पर प्रभाव बढ़ाने में मदद मिली।

2015 में ईरान और विश्व शक्तिशाली देशों के साथ हुए ‘जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन’ (JCPOA) परमाणु समझौते की संसदीय मंजूरी में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। 2020 में सभाध्यक्ष और सांसद पद छोड़ने के बाद 2021 के राष्ट्रपति चुनाव में दूसरी बार उम्मीदवार बने, लेकिन गार्जियन काउंसिल ने उन्हें अस्वीकृत कर दिया। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में भी उन्हें अयोग्य घोषित किया गया।

हालांकि परिषद ने स्पष्ट कारण नहीं बताया, विश्लेषक इसे कट्टरपंथी इब्राहिम रायसी के लिए रास्ता खोलने की रणनीति मानते हैं, जो बाद में चुनाव जीत गए। लारीजानी ने अपनी अयोग्यता को “अस्पष्ट” बताते हुए आलोचना की थी।

फिर भी अगस्त 2025 में राष्ट्रपति मसूद पेजेस्कियन ने उन्हें पुनः सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का सचिव नियुक्त किया, जिससे वे प्रभावशाली पद पर लौटे।

पद संभालते ही उनका रुख कठिन होता गया। अक्टूबर 2025 में सामने आए रिपोर्ट के अनुसार, लारीजानी ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सहयोग समझौते रद्द कर दिए और एजेंसी की रिपोर्टों को “अप्रभावी” घोषित किया।

(एजेंसियों के सहयोग से)

पूर्वप्रधानमन्त्री देउवा सिंगापुरबाट हङकङ प्रस्थान

पूर्वप्रधानमंत्री देउवा सिंगापुर से हांगकांग के लिए रवाना


७ चैत्र, काठमांडू। नेपाली कांग्रेस के निवर्तमान सभापति एवं पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा सिंगापुर से हांगकांग के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। नियमित उपचार पूरा होने के बाद वे स्वास्थ्य सम्बंधित अतिरिक्त उपचार और पारिवारिक कार्यक्रम में भाग लेने हांगकांग गए हैं।

उनके सचिवालय के अनुसार, हांगकांग में आवश्यक अतिरिक्त चिकित्सकीय उपचार और पारिवारिक कार्यक्रम पूरा करने के बाद देउवा स्वदेश लौटने की योजना बना रहे हैं।

देउवा फागुन १३ की रात नेपाल से सिंगापुर प्रस्थान किए थे।

राशिद और भुर्तेल के अर्धशतकीय प्रदर्शन से पुलिस क्लब ने जय ट्रॉफी क्रिकेट में उपाधि की रक्षा की

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • नेपाल पुलिस क्लब ने जय ट्रॉफी क्रिकेट के फाइनल में त्रिभुवन आर्मी क्लब को ४ विकेट से हराकर लगातार दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की।
  • पुलिस ने आर्मी द्वारा दिए गए २२७ रनों के लक्ष्य को तीसरे दिन के तीसरे सत्र में ६ विकेट पर पूरा किया।
  • राशिद खान ने पुलिस के लिए सबसे अधिक ८१ रन बनाए जबकि सागर ढकाल ने ४ विकेट लिए। आर्मी के पवन कार्की और शाहब आलम ने २-२ विकेट लिए।

५ चैत, काठमांडू। नेपाल पुलिस क्लब ने जय ट्रॉफी क्रिकेट की उपाधि की रक्षा की है। फाइनल में त्रिभुवन आर्मी क्लब को ४ विकेट से मात देते हुए पुलिस ने लगातार दूसरी बार यह ट्रॉफी जीती।

आर्मी द्वारा निर्धारित २२७ रनों के लक्ष्य को पुलिस ने तीसरे दिन के तीसरे सत्र में ६ विकेट खोकर पूरा किया। पुलिस के लिए राशिद खान ने सर्वाधिक ८१ रन बनाये, जबकि कुशल भुर्तेल ने ५१ रन की अच्छी पारी खेली।

आर्मी की ओर से पवन कार्की और शाहब आलम ने २-२ विकेट लिए, जबकि आकाश चन्द और भीम सार्की को एक-एक विकेट मिला।

दूसरे दिन के अंत तक १७८ रनों की बढ़त रखने वाली आर्मी ने तीसरे दिन अतिरिक्त ४८ रन जोड़े। अंतिम विकेट के लिए आकाश चन्द ने ४९ रन साझेदारी की।

आर्मी ने पहली पारी में २२१ रन बनाकर पुलिस के स्कोर का पीछा किया, जो पुलिस ने भी २२१ रन बनाकर किया, इसके बाद आर्मी ने दूसरी पारी में २२६ रन बनाकर आलआउट हुई।

आर्मी के आकाश चन्द ने ३७, कुशल मल्ल ने ३६, शाहब आलम ने ३३ और भीम सार्की ने ३२ रन बनाए। सोमपाल कामी बेअसर २३ रन पर रहें, तृतराज दास ने २० और इमरान शेख ने १५ रन बनाए।

पुलिस के लिए सागर ढकाल ने ४ विकेट लिए, जबकि करण केसी और ललित राजवंशी ने ३-३ विकेट हासिल किए।

पहली पारी में पुलिस ने ६१.४ ओवर खेलते हुए २२१ रन बनाये और आलआउट हुई। आर्मी भी पहली पारी में २२१ रन बनाकर गंभीर मुकाबला किया।

पुलिस के नौवें नंबर बल्लेबाज करण केसी ने नाबाद ७२ रन बनाते हुए १०९ गेंद खेलीं जिसमें २ चौके और १ छक्का शामिल था। उन्होंने ललित राजवंशी के साथ नवें विकेट के लिए ६२ रन की साझेदारी की। कप्तान आरिफ शेख ने ४४ रन बनाए। ललित राजवंशी ने २०, कुशल भुर्तेल १८ और दिनेश खरेल ने १७ रन जोड़े।

आर्मी के सोमपाल कामी ने १७ ओवर में ७२ रन देकर ५ विकेट लिए, आकाश चन्द को २ विकेट मिले, जबकि शाहब आलम, पवन कार्की और नरेन साउद को एक-एक विकेट मिला।

आर्मी ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी की थी। पहली पारी में ५८.२ ओवर खेलकर २२१ रन बनाकर सभी विकेट गंवा दिए। आर्मी के ओपनर इमरान शेख ने सबसे अधिक ५० रन बनाए जबकि भीम सार्की ने ३९, कुशल मल्ल ने ३८, तृतराज दास ३२ और बसिर अहमद ने ३० रन किए।

पुलिस के राशिद खान ने ४ विकेट लिए, करण केसी और ललित राजवंशी को ३-३ विकेट प्राप्त हुए।

पुलिस ने पिछले संस्करण के फाइनल में भी आर्मी को मात दे कर ट्रॉफी अपने नाम की थी।

ललित राजवंशी बने जय ट्रफी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी, इशान पांडे घोषित उत्कृष्ट बल्लेबाज

समाचार सारांश

  • जय ट्रफी क्रिकेट का खिताब नेपाल पुलिस क्लब ने जीता है।
  • नेपाल पुलिस क्लब के गेंदबाज ललित राजवंशी को प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया है।
  • इशान पांडे को उत्कृष्ट बल्लेबाज घोषित किया गया, जिन्होंने फाइनल में त्रिभुवन आर्मी क्लब को हराया था।

५ चैत, काठमाडौं। जय ट्रफी क्रिकेट टूर्नामेंट का खिताब विजेता नेपाल पुलिस क्लब के गेंदबाज ललित राजवंशी को प्रतियोगिता के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में चुना गया है।

नेपाल पुलिस क्लब को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले ललित को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार मिला है। उन्होंने प्रतियोगिता के चार मैचों में कुल ८ पारियों में २६ विकेट लिए, जिससे वे उत्कृष्ट गेंदबाज भी घोषित हुए।

सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने जाने के बाद ललित ने खुशी व्यक्त की, ‘‘मैं बहुत खुश हूं, लगातार चैंपियन भी बने हैं। इस क्षण का आनंद ले रहा हूं।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘यह व्यक्तिगत उपलब्धि मेरे लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मेरी प्रदर्शन मेरी उम्मीदों के अनुसार नहीं था। अब मैं इसी लय को आगे बढ़ाना चाहूंगा।’’

फाइनल मैच से पहले किसी तरह का दबाव महसूस न होने और अपनी क्षमता पर भरोसा रखने को सफलता का कारण बताते हुए ललित ने कहा, ‘‘दबाव कम था, यह चुनौती थी। हम योजना के अनुसार प्रदर्शन करने में सफल रहे और इसलिए हम विजयी हुए।’’

वहीं, बागमती प्रदेश के बल्लेबाज इशान पांडे को प्रतियोगिता का उत्कृष्ट बल्लेबाज घोषित किया गया। उन्होंने प्रतियोगिता के ६ पारियों में ६६ की औसत से ३३१ रन बनाए।

गुरुवार को सम्पन्न फाइनल में त्रिभुवन आर्मी क्लब को हराकर नेपाल पुलिस क्लब ने चैंपियन बनकर अपनी छाप छोड़ी।

भुवन नगरकोटी ने एक स्ट्रोक की बढ़त के साथ चौथे दिन शीर्ष स्थान हासिल किया

समाचार सारांश

  • सूर्य नेपाल गल्फ टूर २०२५–२६ के अंतर्गत सूर्य नेपाल वेस्टर्न ओपन के दूसरे दिन भुवन नगरकोटी ने ३-अंडर कुल १३५ स्कोर के साथ शीर्ष स्थान संभाला।
  • शुक्र बहादुर राई २-अंडर कुल १३६ स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि जयराम श्रेष्ठ तीसरे नंबर पर हैं।
  • प्रतियोगिता में २६ प्रोफेशनल और १६ एमेच्योर खिलाड़ी शामिल हैं, विजेता को १ लाख ७० हजार रुपए नकद पुरस्कार मिलेगा।

५ चैत, पोखरा। सूर्य नेपाल गल्फ टूर २०२५–२६ के तहत पांचवीं प्रतियोगिता और २६ वें संस्करण सूर्य नेपाल वेस्टर्न ओपन के दूसरे दिन भुवन नगरकोटी ने एक स्ट्रोक की बढ़त के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया है।

आज उन्होंने ३-अंडर ६६ का स्कोर बनाकर कुल मिलाकर ३-अंडर १३५ का स्कोर बनाया और शुक्र बहादुर राई को एक स्ट्रोक से पीछे छोड़ दिया। शुक्र ने २-अंडर ६७ खेलते हुए कुल २-अंडर १३६ के साथ दूसरे स्थान पर कब्जा किया है।

जयराम श्रेष्ठ ने १-ओवर ७० का स्कोर बनाया और कुल १-ओवर १३९ के साथ तीसरे स्थान पर हैं, जबकि सञ्जय लामा २-ओवर १४० के स्कोर के साथ चौथे स्थान पर हैं।

सञ्जय ने लगातार दूसरे दिन भी १-ओवर ७० का स्कोर बनाया। पहले दिन के संयुक्त लीडर भुबहादुर गुरुङ ने आज ५-ओवर ७४ का प्रदर्शन किया और कुल ५-ओवर १४३ के साथ पांचवें स्थान पर आ गए हैं।

रमेश अधिकारी ने कुल ६-ओवर १४४ का स्कोर बनाकर दूसरे दिन का खेल ४-ओवर ७३ पर खत्म किया और वे छठे स्थान पर हैं। सुरेश तामाङ और भुवन कुमार रोक्का ने समान ७-ओवर १४५ का स्कोर बनाकर सातवें स्थान साझा किया है।

आज सुरेश ने २-ओवर ७१ तथा भुवन ने ४-ओवर ७३ का स्कोर बनाया। रवि खड्काले आज ४-ओवर ७३ खेलते हुए कुल ८-ओवर १४६ के साथ नौवें स्थान पर रहे, जबकि नेपाल के नंबर एक गल्फर निरज तामाङ ४-ओवर ७३ के स्कोर के बाद कुल ९-ओवर १४७ के साथ दसवें स्थान पर हैं।

लगातार दो प्रतियोगिताएं जीतने वाले भुवन ने एकल बढ़त के साथ फ्रंट नाइन २-अंडर ३२ पर पूरा किया। उन्होंने तीसरे, चौथे, पांचवें और नौवें होल में बर्डी की सफलता के साथ खेल जारी रखा। पांचवें पारी के छठे होल में डबल बोगी झेली, दसवें और तेरहवें होल में शॉट बचाए और ग्यारहवें होल पर बोगी के बाद बैक नाइन १-अंडर ३४ पर खत्म किया।

शुक्र ने फ्रंट नाइन १-ओवर ३५ पूरा किया, जिसमें पहले, तीसरे और सातवें होल पर बोगी झेली। उन्होंने दूसरे और छठे होल पर एक-एक शॉट बचाया। बैक नाइन में संभालकर ३-अंडर ३२ का स्कोर बनाया और दसवें, पंद्रहवें और सत्रहवें होल में बर्डी की।

जयराम ने तीसरे होल पर बर्डी की, लेकिन दूसरे और चौथे होल पर बोगी खेलते हुए फ्रंट नाइन १-ओवर ३५ पर पूरा किया। बाद में दसवें होल पर बर्डी और अठारहवें होल पर बोगी करते हुए बैक नाइन इवन-पार ३५ पर समाप्त किया।

एमेच्योर श्रेणी में राहुल विश्वकर्मा ८ स्ट्रोक की बढ़त के साथ शीर्ष पर हैं। उन्होंने आज ३-ओवर ७२ खेलकर कुल ३-ओवर १४१ का स्कोर बनाया। पहले दिन संयुक्त पहले स्थान पर रहने वाले राहुल कुल मिलाकर पांचवें स्थान पर आ गए हैं।

किशन परियार ने ३-ओवर ७२ के साथ दूसरे दिन का खेल पूरा किया और कुल ११-ओवर १४९ का स्कोर जोड़ा। एमेच्योर श्रेणी में केवल ये दोनों ही कट पास कर पाए हैं।

कुल मिलाकर १२-ओवर १५० के स्कोर पर कट लागू हुआ है, जिसके बाद १८ प्रो और २ एमेच्योर कुल २० खिलाड़ियों ने अंतिम दिन के लिए जगह बनाई है। प्रो खिलाड़ियों में तोरण विक्रम शाही, रामे मगर, वसन्त राज गुरुङ, प्रदीप कुमार लामा, सुमन परियार, शिव कुमार माझी, दिनेश प्रजापति, और दिपक मगर कट पास करने वालों में शामिल हैं।

नेपाल प्रोफेशनल गल्फर्स एसोसिएशन (एनपिजीए) द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में २६ प्रोफेशनल और १६ एमेच्योर खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।

सूर्य नेपाल प्रा. लि. द्वारा प्रायोजित इस बार के टूर्नामेंट में कुल पुरस्कार राशि बढ़ा कर १० लाख ५० हजार रुपए कर दी गई है, जिसमें विजेता को १ लाख ७० हजार रुपए नकद पुरस्कार दिया जाएगा।

दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाले खिलाड़ी क्रमशः १ लाख २५ हजार और १ लाख रुपए नकद पुरस्कार प्राप्त करेंगे। शीर्ष १८ स्थान हासिल करने वाले अन्य प्रोफेशनल खिलाड़ियों को भी नकद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

एचजेएनबीएल में टाइम्स की चौथी जीत

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • टाइम्स इंटरनेशनल ने हिमालयन जावा नेशनल बास्केटबाल लीग २०२६ में प्लेबक्स एरेना को ८५-७३ से हराकर चौथी जीत हासिल की।
  • आर्मी ने रोएल को १०३-७५ से हराते हुए पांच मैचों में ९ अंकों के साथ शीर्ष स्थान बरकरार रखा है।
  • एचजेएनबीएल में ८ टीमें प्रतिस्पर्धा कर रही हैं और शीर्ष चार टीम प्लेऑफ में पहुंचेंगी।

५ चैत, काठमांडू। हिमालयन जावा नेशनल बास्केटबाल लीग (एचजेएनबीएल) २०२६ में टाइम्स इंटरनेशनल क्लब ने अपनी चौथी जीत दर्ज की है।

त्रिपुरेश्वर स्थित दशरथ रंगशाला के कवरड हॉल में गुरुवार को खेले गए मैच में टाइम्स ने प्लेबक्स एरेना को ८५-७३ से हराया।

टाइम्स ने पहले क्वार्टर में २६-१६ की बढ़त ली। दूसरे क्वार्टर में १६-१५ से अपने पक्ष में करते हुए टाइम्स हाफटाइम तक ४२-३१ से आगे रहा।

टाइम्स ने तीसरे क्वार्टर में भी २३-१७ से बढ़त बनाए रखी। चौथे क्वार्टर में प्लेबक्स ने २५-२० से बढ़त बनाई, लेकिन यह जीत के लिए पर्याप्त नहीं था।

टाइम्स के कमल थापा को प्लेयर ऑफ द मैच घोषित किया गया।

पांच मैचों में चौथी जीत के साथ टाइम्स के अंक ९ हो गए हैं। अंक तालिका में आर्मी भी समान ९ अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है, लेकिन अंक अंतर के कारण।

बुधवार रात को हुए मैच में आर्मी ने रोएल को १०३-७५ से हराया।

लिग में आर्मी के पांच में से यह चौथा मैच जीता है। ९ अंकों के साथ आर्मी टेबल में शीर्ष पर काबिज है। रोएल के पांच मैचों में ६ अंक हैं और यह उसकी तीसरी हार है।

नेपाल बास्केटबाल संघ (नेबा) द्वारा आयोजित हो रहे एचजेएनबीएल के दूसरे संस्करण में ८ टीमें हिस्सा ले रही हैं।

डबल राउंड रॉबिन प्रणाली में चलने वाली इस लिग में कुल ५६ मैच होंगे। लीग चरण के बाद शीर्ष चार टीमें प्लेऑफ में जगह बनाएंगी।

प्लेऑफ में पहले और दूसरे स्थान वाली टीमों के बीच पहला क्वालिफायर मैच होगा, जबकि तीसरे और चौथे स्थान की टीमों के बीच एलिमिनेटर मैच खेले जाएंगे।

पहले क्वालिफायर में हारने वाली टीम और एलिमिनेटर में जीतने वाली टीम के बीच दूसरा क्वालिफायर मैच होगा। पहले और दूसरे क्वालिफायर के विजेताओं के बीच फाइनल मुकाबला होगा।

प्रतियोगिता के विजेता को नगद ४ लाख पुरस्कार मिलेगा, जबकि उपविजेता को २ लाख और तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को १ लाख रुपए पुरस्कार मिलेगा।

प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले मोस्ट वैल्युएबल प्लेयर (एमवीपी) को भी आकर्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा, नेबा ने बताया।

आठवें संस्करण का ‘इंटरटेनमेंट टेबलटेनिस प्रतियोगिता’ शनिवार आयोजित होगा

समाचार सारांश

संपादकीय रूप से समीक्षा की गई।

  • आठवें संस्करण की इंटरटेनमेंट टेबलटेनिस प्रतियोगिता 6 चैत शनिवार को ललितपुर के नख्खु बुल्स हेल्थ क्लब में सुबह 9 बजे से आयोजित की जाएगी।
  • प्रतियोगिता में महिला और पुरुष सहित 96 खिलाड़ी भाग लेंगे, यह जानकारी ईटीटी के अध्यक्ष सुमन खड्गी ने दी है।
  • प्रतियोगिता के विजेता को विदेश यात्रा, उपविजेता को पोखरा यात्रा और तीसरे स्थान पर आए खिलाड़ी को मोबाइल उपहार दिया जाएगा, आयोजकों ने बताया।

6 चैत, काठमांडू। आठवें संस्करण का ‘इंटरटेनमेंट टेबलटेनिस टूर्नामेंट’ शनिवार को आयोजित किया जाएगा। यह टूर्नामेंट ईटीटी के आयोजन में ललितपुर के नख्खु स्थित बुल्स हेल्थ क्लब में सुबह 9 बजे से शुरू होगा।

“टेबलटेनिस राष्ट्र के लिए, स्वास्थ्य के लिए” के नारे के साथ आयोजित इस प्रतियोगिता में महिला और पुरुष मिलाकर 96 खिलाड़ियों की भागीदारी होगी, यह जानकारी ईटीटी अध्यक्ष एवं अखिल नेपाल टेबलटेनिस संघ के उपाध्यक्ष सुमन खड्गी ने दी है।

प्रतियोगिता के लिए पंजीकरण शुल्क 2 हजार रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि राष्ट्रीय खिलाड़ी और 16 वर्ष से कम उम्र के खिलाड़ियों को प्रवेश शुल्क नहीं देना होगा, आयोजक सुनील शाक्य ने बताया।

प्रत्येक खिलाड़ी को ‘स्टैग’ ब्रांड की टीशर्ट भी प्रदान की जाएगी। प्रतियोगिता के विजेता को विदेश यात्रा, उपविजेता को पोखरा यात्रा और तीसरे स्थान पर आने वाले खिलाड़ी को मोबाइल उपहार दिया जाएगा, यह जानकारी आयोजकों ने साझा की है।

भुवन नगरकोटी ने जीती सूर्य नेपाल वेस्टर्न ओपन की उपाधि

समाचार सारांश

समीक्षित।

  • सूर्य नेपाल गल्फ टूर २०२५-२६ के तहत पाँचवीं प्रतियोगिता सूर्य नेपाल वेस्टर्न ओपन की उपाधि भुवन नगरकोटी ने जीती।
  • भुवन ने ३-अंडर २ सय ४ के स्कोर के साथ संजय लामालाई एक स्ट्रोक से हराकर करियर की १४वीं उपाधि हासिल की।
  • प्रतियोगिता में २६ प्रोफेशनल और १६ एमेच्योर खिलाड़ियों ने भाग लिया, कुल १० लाख ५० हजार नकद पुरस्कार वितरित किया गया।

६ चैत्र, पोखरा। सूर्य नेपाल गल्फ टूर २०२५-२६ की पांचवीं प्रतिस्पर्धा तथा २६वें संस्करण की सूर्य नेपाल वेस्टर्न ओपन की उपाधि भुवन नगरकोटी ने अपने नाम कर ली है।

शुक्रवार को उन्होंने इवन-पार ६९ खेलते हुए कुल स्कोर ३-अंडर २ सय ४ बनाया और संजय लामालाई एक स्ट्रोक से पीछे छोड़कर उपाधि जीती। इस प्रकार भुवन ने अपने करियर में १४वीं उपाधि हासिल की।

इस उपाधि के साथ उन्हें नकद १ लाख ७० हजार पुरस्कार भी मिला। इस सत्र में इससे पहले उन्होंने सूर्य नेपाल एनपीजीए टूर चैंपियनशिप और सूर्य नेपाल काठमांडू ओपन की उपाधि भी जीती थी।

संजय लामाले ४-अंडर ६५ की उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल स्कोर २-अंडर २ सय ५ के साथ दूसरे स्थान पर रहे और नकद १ लाख २५ हजार प्राप्त किए।

एमेच्योर खिलाड़ी राहुल विश्वकर्मा ने भी शानदार खेल दिखाते हुए ४-अंडर ६५ निकाला और कुल स्कोर १-अंडर २ सय ६ के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

धरान के गोल्फर शुक्र बहादुर राई ने अंतिम दिन ४-ओवर ७३ का स्कोर बनाया और कुल २-ओवर २ सय ९ के साथ चौथा स्थान हासिल किया। उन्हें प्रोफेशनल वर्ग में तीसरा स्थान और नकद १ लाख मिला। जयराम श्रेष्ठ ने अंतिम दिन ६-ओवर ७५ की खेल क्षमताएं दिखाते हुए कुल ७-ओवर २ सय १४ बनाकर पांचवा स्थान प्राप्त किया और उन्हें नकद ८२ हजार प्राप्त हुए।

पोखरा के स्थानीय गोल्फर भुबहादुर गुरुङ छठे स्थान पर रहे। उन्होंने कुल ८-ओवर २ सय १५ बना कर आज की खेप ३-ओवर ७२ में पूरी की एवं नकद ७२ हजार पुरस्कार हासिल किया।

भुवन कुमार रोक्का और दिनेश प्रजापति ने संयुक्त रूप से सातवां स्थान साझा किया। भुवन ने ३-ओवर ७२ और दिनेश ने २-अंडर ६७ के स्कोर बनाए और दोनों को समान रूप से ६५ हजार नकद पुरस्कार मिले।

कुल मिलाकर १२-ओवर २ सय १९ के स्कोर के साथ तोरण विक्रम शाही नवें स्थान पर रहे और उन्हें ५१ हजार नकद पुरस्कार मिला। १३-ओवर २ सय २० के स्कोर के साथ रमेश अधिकारी और सुरेश तामांग ने संयुक्त रूप से दसवें स्थान को बांटा। आज रमेश ने ७-ओवर ७६ और सुरेश ने ६-ओवर ७५ का अच्छा खेल दिखाया और दोनों ने ४४ हजार नकद पुरस्कार प्राप्त किया।

आखिरी १८ होल खत्म होने पर भुवन के पास केवल एक स्ट्रोक की बढ़त थी। शुरुआती होल से ही शुक्र और जयराम ने खेल खराब किया, जिससे भुवन के लिए स्थिति आसान हो गई। छठे होल पर वो बोगी खेलने के बाद आठवें होल पर बर्डी लगाते हुए फ्रंट नाइन इवन-पार ३४ पर समाप्त किया। बाकी नौ होलों में शुक्र और जयराम चुनौती नहीं दे पाए, हालांकि संजय लामाले मुकाबला कड़ा किया। लेकिन भुवन ने बैक नाइन भी इवन-पार ३५ में पूरा कर एक स्ट्रोक की बढ़त बनाए रखी और उपाधि जीत ली। उन्होंने १०वें और १३वें होल पर बर्डी मारी और १२वें तथा १७वें होल पर एक-एक शॉट गंवाए।

संजय ने फ्रंट नाइन १-अंडर ३३ खेलते हुए पहले, सातवें और आठवें होल पर बर्डी जोड़े। दूसरी और छठे होल पर शॉट गवाए। बैक नाइन में उन्होंने पाँच बर्डी मारी जिनमें १०वें, १४वें से १७वें होल तक लगातार चार बर्डी शामिल हैं। हालांकि, १२वें और १८वें होल पर बोगी खेला और बैक नाइन ३-अंडर ३२ में समाप्त किया।

एमेच्योर राहुल ने सातवें होल पर बोगी के विपरीत पहले और पांचवें होल पर एक-एक शॉट बचाए। फ्रंट नाइन १-अंडर ३३ खेलते हुए १३वें होल पर इगल भी किया। १६वें और १७वें होल पर बर्डी जोड़ी, मगर १८वें होल पर बोगी खेलने के बाद एमेच्योर वर्ग की उपाधि अपने नाम की। उन्होंने किशन परियार को २२ स्ट्रोक से हराकर पहला स्थान हासिल किया। किशन दूसरे स्थान पर रहे और कुल २१-ओवर २ सय २८ के स्कोर के साथ प्रतियोगिता पूरी की।

विजेता भुवन को सूर्य नेपाल प्रालि के डिप्टी जनरल मैनेजर केशव प्रधान और नेपाल गोल्फ संघ के अध्यक्ष टासी घले ने पुरस्कार प्रदान किए।

नेपाल प्रोफेशनल गोल्फर्स एसोसिएशन (एनपीजीए) द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में २६ प्रोफेशनल और १६ एमेच्योर खिलाड़ी शामिल हुए थे।

सूर्य नेपाल प्रालि द्वारा प्रायोजित इस टूर्नामेंट में कुल पुरस्कार राशि बढ़ाकर १० लाख ५० हजार रुपये उपलब्ध कराई गई थी। शीर्ष १८ स्थान प्राप्त प्रोफेशनल खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार दिया गया।