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लेखक: space4knews

‘नेपाल में खपत पूरी होने पर ही बची हुई विद्युत् अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचें’

समाचार संक्षेप सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरराष्ट्रीय विद्युत् व्यापार करते समय स्वदेशी खपत में कटौती न करने के लिए सरकार को कड़ा निर्देश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने नेपाल और भारत के बीच हुए दीर्घकालिक विद्युत् खरीद-बिक्री समझौते को प्राकृतिक संसाधन वितरण न होने के कारण संघीय संसद की मंजूरी अनिवार्य नहीं बताई है। अदालत ने कहा है कि समझौते के कार्यान्वयन के दौरान स्वदेशी खपत पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े, इसके लिए ही विद्युत् की बिक्री होनी चाहिए और सभी समझौतों को सरकारी राजपत्र में प्रकाशित किया जाना चाहिए। २७ वैशाख, काठमाडौं। सर्वोच्च अदालत ने अंतरराष्ट्रीय विद्युत् व्यापार में नेपाल की खपत में कटौती न करने का स्पष्ट आदेश दिया है। नेपाल और भारत के बीच दो साल पहले हुए विद्युत् खरीद-बिक्री समझौते के विरुद्ध दायर मामले पर बुधवार को फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि नेपाल में पर्याप्त खपत बाद ही अप्रयुक्त विद्युत् अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिक्री की जा सकती है। २० कार्तिक २०८१ के इस फैसले में सर्वोच्च ने कहा, ‘स्वदेशी खपत में कोई कटौती या नकारात्मक असर न हो, ऐसे ही विद्युत् की बिक्री करें।’

नेपाल और भारत के इस विद्युत् खरीद समझौते को प्राकृतिक संसाधन वितरण से संबंधित नहीं माना गया है, इसलिए इसे संघीय संसद के दो-तिहाई मत से पारित करने की आवश्यकता नहीं है। इस विवाद में सूर्यनाथ उपाध्याय समेत अन्य लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने इस याचिका को खारिज करते हुए सरकार को कुछ निर्देशात्मक आदेश जारी किए हैं। आदेशों में कहा गया है कि पहले नेपाल में विद्युत् की मांग पूरी होनी चाहिए उसके बाद ही अतिरिक्त विद्युत् की बिक्री की अनुमति दी जाए।

१९ पुस २०८० को हुए दीर्घकालिक विद्युत् खरीद-बिक्री समझौते ने प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल के नेतृत्व में नेपाल और भारत के बीच विद्युत् के व्यापार को संभव बनाया था। हालांकि जलाशय आधारित परियोजनाएं संचालन में हों, नेपाल को कोई प्रत्यक्ष लाभ न होने और ट्रांसमिशन पूर्वाधार भारत के नियंत्रण में रहे इस व्यवस्था के विरोध में याचिका दायर की गई थी। इस समझौते को अस्थायी बताया गया और इसे नेपाल के हित के खिलाफ मानते हुए संसद की मंजूरी आवश्यक होने का दावा किया गया था। नेपाल की आर्थिक उन्नति के लिए विद्युत् खपत २० वर्षों में ५० हजार मेगावॉट तक पहुंचने की संभावना को उजागर करते हुए इस समझौते की आलोचना की गई थी।

विद्युत् खरीद-बिक्री समझौते में संविधान की धारा २७९ के तहत मंजूरी की आवश्यकता है या नहीं, इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला दिया है। प्रधान न्यायाधीश प्रकाशमान सिंह राउत, न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल और महेश शर्मा पौडेल की पीठ ने यह निर्णय सुनाया। धारा २७९ के तहत शांति, मैत्री, सुरक्षा, सामरिक संबंध, सीमा एवं प्राकृतिक संसाधन वितरण से जुड़े समझौतों के लिए संघीय संसद की दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। हालांकि अदालत ने कहा, ‘यह समझौता जल संसाधन वितरण से संबंधित नहीं है, केवल जलविद्युत् व्यापार से जुड़ा है, इसलिए इसे प्राकृतिक संसाधन वितरण का समझौता नहीं माना जा सकता।’

सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, विद्युत् खरीद-बिक्री समझौता प्राकृतिक संसाधन वितरण से जोड़ना गलत होगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक विद्युत् व्यापार को बढ़ावा देने के लिए है। अदालत ने बताया कि यह व्यापार जलविद्युत् विकास और उपयोग के आधार पर किया जाता है। ‘विद्युत् पानी से बनती है लेकिन यह प्राकृतिक संसाधन नहीं है,’ अदालत ने कहा, ‘यदि विद्युत् को प्राकृतिक संसाधन माना गया तो भू-आधारित अन्न भी प्राकृतिक संसाधन होगा और उसके निर्यात पर प्रतिबंध लगना पड़ेगा।’ इसलिए, इस समझौते के लिए संघीय संसद की मंजूरी आवश्यक नहीं है। सरकार ने ऊर्जा सचिव को यह समझौता करने के लिए अधिकार दिया था।

समझौते में विद्युत् व्यापार, पूर्वाधार विकास और निवेश प्रोत्साहन शामिल है। अदालत ने कहा, ‘नेपाल में खपत पूरी हो जाने के बाद अतिरिक्त विद्युत् भारत को १० हजार मेगावॉट तक बेची जा सकती है।’ अदालत ने याचिका खारिज करते हुए सरकार को निर्देश दिया है कि स्वीकृत समझौतों की जानकारी संघीय संसद को उपलब्ध कराई जाएं और उन्हें सरकारी राजपत्र में प्रकाशित किया जाए।

विद्युत् व्यापार, ग्रिड कनेक्शन और प्रसारण पूर्वाधार के विस्तार में राष्ट्रीय हित और स्वदेशी खपत को नकारात्मक प्रभाव से बचाने के लिए भी सर्वोच्च ने अंतरराष्ट्रीय समन्वय की आवश्यकता बताई है। निर्देशात्मक आदेश में कहा गया है, ‘यदि समझौते के क्रियान्वयन में प्राकृतिक संसाधन वितरण संबंधी स्थिति उत्पन्न होती है तो संविधान के अनुसार संसद की मंजूरी जरूरी होगी।’

रास्वपाले पार्टी के हित के खिलाफ काम करने वाले 15 सदस्यों की सदस्यता समाप्त की

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) ने पार्टी के हित के खिलाफ काम करने के आरोप में 15 सदस्यों की सदस्यता समाप्त कर दी है। रविवार को संपन्न पार्टी की केंद्रीय सचिवालय बैठक में इन सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने का निर्णय लिया गया, जिसकी जानकारी पार्टी प्रवक्ता मनिष झाले ने दी। रास्वपाने सदस्यता समाप्त सदस्य सदस्यों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। 27 वैशाख, काठमांडू। रास्वपाने पार्टी हित के विरुद्ध व्यवहार करने वाले 15 सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने की खबर दी है। पार्टी की केंद्रीय सचिवालय बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसकी पुष्टि प्रवक्ता मनिष झाले ने की। हालांकि, किन सदस्यों की सदस्यता समाप्त की गई है इसका कोई विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

एक महिनामै नतिजा – Online Khabar

एक माह के अंदर एसईई परिणाम सार्वजनिक करने का निर्णय

राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड ने २०८२ साल के माध्यमिक शिक्षा परीक्षा (एसईई) का परिणाम एक माह के अंदर सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है। परीक्षा केंद्र पर ही उत्तरपुस्तिकाओं की जांच चल रही है, जिससे परिणाम जल्दी आने की संभावना है और बोर्ड त्रुटि रहित परिणाम प्रकाशन की तैयारी कर रहा है। इस वर्ष ५ लाख १२ हजार ४२१ विद्यार्थियों ने फॉर्म भरे हैं और परिणाम एसएमएस, आईवीआर तथा वेबसाइट के माध्यम से देखे जा सकेंगे।

२७ वैशाख, काठमांडू – ‘यदि प्रयास किया जाए तो संभव है।’ माध्यमिक शिक्षा परीक्षा (एसईई) का परिणाम एक माह के अंदर सार्वजनिक करने के निर्णय के बाद सोशल मीडिया पर यह प्रतिक्रिया आम है। पिछले वर्षों में परिणाम प्रकाशित होने में लगभग ३ महीने का समय लग जाता था। राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड के कैलेंडर के अनुसार सामान्यतः परिणाम असार के दूसरे सप्ताह में प्रकाशित होता था।

लेकिन, बालेन शाह नेतृत्व वाली सरकार ने नया निर्णय लेकर परिणाम एक माह के अंदर आने का प्रावधान किया है। इसी के तहत बोर्ड ने २०८२ साल के एसईई परिणाम अगले दो दिनों के भीतर प्रकाशित करने की योजना बनाई है। बोर्ड डेटा एंट्री कार्य पूरा कर त्रुटि मुक्त परिणाम देने के लिए प्रयासरत है।

परीक्षा नियंत्रक टुकराज अधिकारी ने कहा, ‘परिणाम प्रकाशित करने का समय नजदीक है। यह परसों तक आ जाएगा। आईटी विभाग काम कर रहा है। हम त्रुटि रहित परिणाम सार्वजनिक करेंगे।’ इस बार परीक्षा केंद्र पर ही उत्तरपुस्तिका जांच होने के कारण परिणाम एक माह के भीतर आ पाना संभव हुआ है।

उन्होंने आगे कहा, ‘शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी रही। परीक्षा केंद्र पर ही उत्तरपुस्तिका जांच हुई। रणनीति में बदलाव करने से परिणाम जल्दी प्रकाशित करना संभव हुआ।’ आईटी विभाग का कार्य पूरा होने के बाद बोर्ड की बैठक बुलाकर परिणाम घोषित किया जाएगा। ‘आईटी कार्य पूरा होने के बाद बोर्ड की बैठक होगी,’ उन्होंने बताया।

परिणाम समय पर प्रकाशित करने के लिए ३० से अधिक कर्मचारी लगाये गए हैं। परीक्षा नियंत्रण कार्यालय के अनुसार सार्वजनिक अवकाश के दिन भी कर्मियों ने कार्य किया है। परिणाम देर से आने से विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव होता था तथा ब्रिज कोर्स चलाने से अनावश्यक तनाव उत्पन्न होता था।

शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने कहा, ‘विद्यार्थियों को मानसिक तनाव न हो, इसलिए अब परिणाम एक माह के भीतर प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया है।’ सरकार ने एसईई के बाद ब्रिज कोर्स कार्यक्रम को भी बंद कर दिया है। अब सरकार विद्यार्थियों को उनकी रुचि के अनुसार खेलकूद या संगीत सीखने का अवसर प्रदान करना चाहती है।

परिणाम पाने के लिए तीन माह तक इंतजार करने की बाध्यता हटने से शिक्षक और विद्यार्थी दोनों उत्साहित हैं। प्रिंसिपल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुदाम गौतम ने कहा, ‘विद्यार्थियों को परिणाम पाने के लिए अधिक समय इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ब्रिज कोर्स में भी नहीं जाना पड़ेगा। शिक्षक और विद्यार्थी दोनों उत्साहित हैं। परिणाम जल्दी आने से कक्षा भी जल्दी शुरू करनी होगी। समय पर परिणाम और समय पर कक्षा होने से अच्छा संदेश जाएगा।’

इस वर्ष एसईई गत चैत १९ से २९ तक आयोजित हुई। परीक्षा समाप्ति के बाद काठमांडू के गोकर्णेश्वर के कृतक पौडेल फ्रेस होने के लिए ट्रेकिंग पर गए। दूसरे सप्ताह वे गोसाइंकुण्ड ट्रेकिंग पर भी गए। कृतक ने कहा, ‘सरकार ने ब्रिज कोर्स भी बंद कर दिया। एसईई के बाद तुरंत पढ़ाई करनी नहीं पड़ती। इसलिए मैं ट्रेकिंग पर गया। कोई तनाव महसूस नहीं हुआ।’

उन्होंने कहा, ‘पहले तो तीन माह इंतजार करना पड़ता था। उस समय क्या करना यह सोचते थे। इस बार परिणाम एक माह में आने से समय बर्बाद नहीं होगा। परिणाम आने के बाद मैं कंप्यूटर विषय पढ़ने की योजना बना रहा हूं।’

इसी प्रकार भक्तपुर के शान न्यौपाने ने भी एक माह में नतीजा आने पर कहा कि ‘बोर’ हो गया। वे भी परीक्षा समाप्ति के बाद काफी समय घुमने-फिरने में बिताए। उन्होंने कहा, ‘एक माह में तो बोरियत हो गई। तीन माह इंतजार होता तो ज्यादा मुश्किल होती। एसईई के बाद भक्तपुर, झापा घूमे, खेला, फिल्म देखी। एसईई जैसा दबाव नहीं था।’ अब वे विज्ञान विषय पढ़ने की तैयारी कर रहे हैं।

कृतक और शान ही नहीं, बड़ी संख्या में विद्यार्थी जल्दी परिणाम आने से उत्साहित हैं। इस वर्ष परीक्षा के लिए ५ लाख १२ हजार ४२१ विद्यार्थियों ने फॉर्म भरे जिनमें नियमित तर्फ ४ लाख ४१ हजार ५६६ और ग्रेड सुधार तर्फ ७० हजार ८५५ विद्यार्थी शामिल हैं। छात्राएं २ लाख ५७ हजार ६१३, छात्र २ लाख ५४ हजार ८०१ और अन्य ७ विद्यार्थी हैं। राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड ने परिणाम एसएमएस, आईवीआर और वेबसाइट के माध्यम से देखने की सुविधा प्रदान की है।

बजट में न्यूनतम आयकर सीमा १० लाख करने का सुझाव

समाचार सारांश

  • नेपाल उद्योग परिसंघ ने आगामी बजट में न्यूनतम आयकर सीमा १० लाख बनाने का अर्थ मंत्रालय को सुझाव दिया है।
  • परिसंघ ने निजी क्षेत्र को विकास का इंजन मानते हुए उद्योग व निवेश वृद्धि के लिए नीति सुधार की आवश्यकता जताई है।
  • अर्थमंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने निजी क्षेत्र की पूंजी विकास हेतु आवश्यक कदम और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाना आवश्यक बताया।

२७ वैशाख, काठमाडौं। आगामी बजट में न्यूनतम आयकर सीमा १० लाख करने के लिए नेपाल उद्योग परिसंघ (CNI) ने अर्थ मंत्रालय को सुझाव दिया है।

वर्तमान में अविवाहित व्यक्तियों के लिए न्यूनतम आयकर सीमा ५ लाख और विवाहितों के लिए ६ लाख रखी गई है। परिसंघ ने इस सीमा को १० लाख करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे कम आय वाले कई आम लोगों को लाभ पहुंचने की उम्मीद है।

वर्तमान में वार्षिक आय के स्लैब के अनुसार पहले स्लैब में सामाजिक सुरक्षा कर १ प्रतिशत लगता है, जो अविवाहितों को ५ लाख और विवाहितों को ६ लाख तक की आय पर लागू होता है। इसके बाद आय स्लैब के अनुसार क्रमशः १०, २०, ३०, ३६ और उच्च आय पर ३९ प्रतिशत कर लागू होता है।

नेपाल उद्योग परिसंघ ने आर्थिक वर्ष २०८३/८४ के बजट के लिए अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले को सुझाव प्रस्तुत किए हैं। परिसंघ ने निजी क्षेत्र को विकास का इंजन मानते हुए उद्योग और निवेश वृद्धि हेतु नीतिगत सुधार की आवश्यकता बताई है।

कच्चे माल और तैयार उत्पादों में कम से कम दो स्तर की सीमा शुल्क दर निर्धारित करने, औद्योगिक कच्चे माल पर लगने वाले सीमा शुल्क की वापसी या समायोजन प्रणाली लागू करने, तथा कम से कम ४० प्रतिशत स्वदेशी कच्चे माल उपयोग करने वाले उद्योगों को शेष कच्चे माल के आयात में कर छूट देकर स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहित करने की भी सिफारिश की गई है।

परिसंघ के अध्यक्ष वीरेन्द्रराज पांडे ने आय अर्जन और संपत्ति सृजन को सहायता देने वाली बजट लाने पर जोर दिया। उन्होंने आर्थिक वर्ष २०८३/८४ के बजट कार्यान्वयन से अर्थव्यवस्था के विस्तार, रोजगार सृजन और निवेश वृद्धि में महत्वपूर्ण सुधार की उम्मीद व्यक्त की।

परिसंघ ने उद्योग, निवेश, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, कर नीति, सीमा शुल्क, पर्यटन, कृषि, जड़ी-बूटी, ऊर्जा, सूचना तकनीक, बैंकिंग, बीमा, सहकारी, पूंजी बाजार, स्वदेशी उत्पादन प्रोत्साहन, बुनियादी संरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा, कर राजस्व चुहावट सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए सरकार को सुझाव दिए हैं।

उद्योग को प्राथमिकता देते हुए नीतिगत सुधार करें ताकि कम से कम १० वर्षों की स्थिरता सुनिश्चित हो सके, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता वाले वस्तुओं पर केंद्रित औद्योगिक विकास रणनीति बनाएं, और रोजगार, उत्पादन तथा आयात प्रतिस्थापन के मद्देनजर बजट प्रस्तुत करें, यह भी परिसंघ की मांग है।

कर प्रणाली को सरल, एकीकृत और सीमित बनाने, वैट, आयकर और अंतःशुल्क में स्पष्ट व्याख्या के साथ सुधार करने तथा व्यक्तिगत आयकर की न्यूनतम सीमा १० लाख करने और कर दर घटाने की मांग परिसंघ ने की है।

जोखिम आधारित ऑडिट प्रणाली लागू करने, कर विवाद समाधान, एडवांस रूलिंग और कर प्रशासन को डिजिटल बनाने की सिफारिश की गई है। चोरी-तस्करी नियंत्रण के लिए विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय मजबूत करने, न्यूनतम गुणवत्ता मानक लागू करने और परीक्षण तथा प्रमाणन प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने का सुझाव भी दिया गया है।

सरकारी खरीद प्रक्रिया में स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देना, डिजिटल पोर्टल के माध्यम से स्वदेशी उत्पादों की पहचान और खरीद प्रणाली लागू करना, प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नीति सरलीकरण तथा उत्पादन, रोजगार और निर्यात आधारित अनुदान व्यवस्था लागू करने की भी मांग की गई है।

कर कानून को सरल, स्पष्ट और निवेश-सुलभ बनाने, आयकर कानून के दोहरे कर संबंधी प्रावधानों को हटाने, आर्थिक अपराध पर दंडात्मक व्यवस्था लागू करने और औद्योगिक सुविधाओं को संरक्षित रखते हुए उत्पादक उद्योगों को स्थानीय स्तर पर कर छूट देने का सुझाव दिया गया है।

बड़ा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निजी क्षेत्र को आकर्षित करने के लिए नीतियां बनाने, उद्योग के स्वीकृत परियोजनाओं के लिए आवश्यक जमीन पर प्रतिबंध न लगाकर अतिरिक्त जमीन को गिरवी रखने और उद्योग को जमीन बेचने की सुविधा देने की भी सिफारिश की गई है। इसके साथ ही सरकार और उद्योग के बीच वित्तीय समन्वय नीति अपनाने का आग्रह किया गया है।

अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने निजी क्षेत्र की पूंजी विकास की आवश्यकता बताते हुए बुनियादी ढांचे में निजी क्षेत्र के निवेश बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कानूनी सुधार और कर प्रणाली सुधार की भी आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के निवेश के बिना विकास संभव नहीं है और सरकार निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर नेपाल उद्योग परिसंघ के अध्यक्ष राजेशकुमार अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष हरिभक्त शर्मा, विष्णुकुमार अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष निर्वाण चौधरी, उपाध्यक्ष हेम राज ढकाल, भीम घिमिरे, गोकुल भंडारी, गवर्निंग काउंसिल सदस्य शशिकांत अग्रवाल, सदस्य सन्दीप शारदा, महानिर्देशक डॉ. घनश्याम ओझा एवं विभिन्न समितियों के सभापतियों सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।

राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टीद्वारा केन्द्रीय समिति बैठकको आयोजना

२७ वैशाख, काठमाडौं । राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ले केन्द्रीय समिति बैठक आयोजना गरेको छ । आइतबार सम्पन्न पार्टी केन्द्रीय सचिवालयको बैठकमा केन्द्रीय समिति बैठक बोलाउने निर्णय गरिएको जानकारी पार्टीका प्रवक्ता मनिष ज्ञालुले दिएका छन् । उनले बताएका छन् कि बैठक यही वैशाख ३० गते बस्ने गरी आह्वान गरिएको छ । तर, बैठकको स्थान र समय अहिलेसम्म सुनिश्चित गरिएको छैन ।

महाधिवेशनमा जुट्यो रास्वपा, कसरी चयन हुन्छ नेतृत्व ?

राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी के महाधिवेशन में नेतृत्व चयन प्रक्रिया

राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी ने अपने पहले महाधिवेशन को केंद्र में रखते हुए जेठ माह में दो चरणों में वडा और पालिका अधिवेशन आयोजित करने का निर्णय लिया है। विधान के अनुसार केन्द्रीय समिति का आकार १२९ सदस्यों का होगा और ३३ प्रतिशत महिला प्रतिनिधि अनिवार्य रूप से शामिल किए जाएंगे। महाधिवेशन के माध्यम से केन्द्रीय, प्रदेश, जिला, निर्वाचन क्षेत्र, पालिका और वडा के छह स्तरों पर निर्वाचित समितियाँ गठित करने की तैयारी चल रही है। २७ वैशाख, काठमांडू। राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) अपने पहले महाधिवेशन पर केंद्रित है। फागुन में होने वाला महाधिवेशन चुनाव के कारण स्थगित हो गया था, जिसके बाद पार्टी ने अब नई तिथि घोषित कर संरचना परिचालन कर रही है। वडा और पालिका अधिवेशन दो चरणों में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। महाधिवेशन केंद्रित होकर समिति गठन नहीं हुए वडाओं का भेला जेठ २ को बुलाया गया है। पार्टी प्रवक्ता मनिष झाकाक के अनुसार, वैशाख २० से पहले समिति गठित हुए वडाओं का अधिवेशन जेठ ३ को तय किया गया है। सचिवालय की बैठक में निर्णय लिया गया कि वैशाख २५ से पहले गठित पालिकाओं का अधिवेशन जेठ १० को होगा। जेठ ३ से पहले गठित बाकी वडा समितियों को उसी माह के १६ तक वडा अधिवेशन करना होगा। जेठ १० से पहले गठित बाकी पालिकाओं के अधिवेशन जेठ १७ को निर्धारित किए गए हैं। जेठ २३ और २४ को जिला अधिवेशन होने हैं, लेकिन प्रदेश और केन्द्रीय महाधिवेशन की तारीख अभी तय नहीं हुई है। विधान के तहत महाधिवेशन के लिए कम से कम छह महीने का समय देना आवश्यक है। निर्वाचन समिति केन्द्रीय समिति को महाधिवेशन के लिए सिफारिश करने के बाद ही केन्द्रीय समिति तारीख तय कर सकती है। नेतागण इस महाधिवेशन को भदौ या असोज महीने में कराने की तैयारी कर रहे हैं। चुनाव के छठे महीने के बाद महाधिवेशन करने का निर्णय सौराहा की विस्तारित बैठक में लिया गया था। इस निर्णय के अनुसार भदौ में पहला महाधिवेशन होगा। वडा अधिवेशन शुरू होने के बाद केन्द्रीय महाधिवेशन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। चुनाव से पहले वडा अधिवेशन शुरू हो गया था, लेकिन चुनाव ने कार्यतालिका को प्रभावित किया था। निर्वाचन आयोग के अनुसार चुनाव से पहले ४५२ वडाओं और ६२ पालिकाओं के अधिवेशन हो चुके थे। चुनाव के बाद २०० से अधिक वडा अधिवेशन जारी हैं, आयोग के सचिव भूमिनन्द बराल ने जानकारी दी। उनके अनुसार वडा स्तर के अधिवेशन तेजी से हो रहे हैं और अगले तीन सप्ताह में इसे पूरा करने का लक्ष्य है। बारा जिले को छोड़कर अन्य जिलों में अधिवेशन जारी हैं। उच्च स्तर के अधिवेशन के लिए निचले स्तर के अधिवेशन संपन्न होना आवश्यक है। यदि निचले स्तर के अधिवेशन नहीं होंगे तो विधान के अनुसार केन्द्रीय समिति के पास उन उच्च स्तर के अधिवेशन कराने का अधिकार है। विधान की इसी व्यवस्था के तहत बिना अधिवेशन वाले संरचनाओं का अधिवेशन स्थगित रखकर भी केन्द्रीय महाधिवेशन की तैयारी चल रही है। पार्टी नेता बताते हैं कि केन्द्रीय महाधिवेशन को फास्ट ट्रैक पर कराने के लिए कार्य तेज़ किया जा रहा है। तदर्थ समितियाँ बनाकर तल्लो स्तर पर अधिवेशन कर पार्टी संरचना परिचालन कराई जा रही है। संगठन विभाग के सदस्य बताते हैं कि प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाह के पक्ष को भी संगठन में शामिल करने के लिए कई जगह संरचनाएँ भंग कर तदर्थ समिति बनाई गई है। संगठन विभाग के सदस्यों का कहना है, “जिला समितियाँ भंग कर दोनों पक्षों के लिए तदर्थ समिति बनाई जा रही है और जल्दी अधिवेशन कराने की तैयारी है।” केन्द्रीय स्तर पर प्रधानमन्त्री शाह पक्ष शामिल हो चुका है, लेकिन निचली संरचना में समावेशन का काम जारी है।

महाधिवेशन में कितने प्रतिनिधि होंगे?
राष्ट्रिय महाधिवेशन में केन्द्रीय समिति के सदस्य स्वतः प्रतिनिधि होंगे। केन्द्रीय सल्लाहकार परिषद, अनुशासन आयोग, लेखा आयोग, निर्वाचन आयोग के पदाधिकारी सदस्य महाधिवेशन में भाग लेंगे। केन्द्रीय विभाग से प्रमुख सहित ११ सदस्यों में ३३ प्रतिशत महिला प्रतिनिधि चयन करना अनिवार्य है। संघीय संसद के दोनों सदनों और प्रदेश सभाओं के सदस्य भी स्वतः महाधिवेशन के प्रतिनिधि होंगे। राष्ट्रिय सभा एवं प्रदेश सभा में रास्वपा के जनप्रतिनिधि न होने के कारण प्रतिनिधि सभा के सदस्य महाधिवेशन के प्रतिनिधि होंगे। संशोधित विधान के अनुसार केन्द्रीय समिति का आकार १२९ सदस्यीय निर्धारित है, जबकि वर्तमान में यह संख्या ९२ सदस्य है। ये सदस्य स्वतः महाधिवेशन के प्रतिनिधि हैं। प्रदेश समिति तथा उससे संबंधित अनुशासन, लेखा, निर्वाचन समितियों के पदाधिकारी प्रतिनिधि होंगे। प्रदेश विभाग से तीन प्रतिनिधि चुना जाएगा जिसमें एक महिला अनिवार्य है। जिला समिति से पाँच सदस्यों में एक महिला अनिवार्य होगी। जिला काठमांडू सम्पर्क विभाग के प्रमुख महाधिवेशन के प्रतिनिधि होंगे। संघीय प्रतिनिधि सभा क्षेत्र समिति के अंतर्गत निर्वाचन क्षेत्र संयोजक और उपसंयोजक भी प्रतिनिधि बनेंगे। प्रवास नेपाली सम्पर्क विभाग के विभिन्न देशों की शाखाओं से अधिकतम ११ प्रतिनिधि होंगे। पालिका स्तर से पालिका सभापति प्रतिनिधि बनेंगे। पालिका अधिवेशन सदस्यों की संख्या के आधार पर २०१ से अधिक सदस्य वाले गाउँपालिकाएं से १ प्रतिनिधि, ४०१ से अधिक सदस्य वाले नगर पालिकाओं से २ प्रतिनिधि, ५०१ से अधिक सदस्य वाली उपमहानगर पालिकाओं से ३ तथा ७०१ से अधिक सदस्य वाली महानगर पालिकाओं से ४ प्रतिनिधि चुनने का विधान है। पालिका प्रमुख एवं उपप्रमुख स्वचालित रूप से महाधिवेशन प्रतिनिधि होंगे। केन्द्रीय स्तर पर विपत, राहत और उद्धार के लिए गठित र्याट के संयोजक सहित पाँच प्रतिनिधि महाधिवेशन के लिए होंगे।

निर्वाचित समिति संरचना
महाधिवेशन से केन्द्रीय, प्रदेश, जिला, निर्वाचन क्षेत्र, पालिका और वडा के छह स्तरों पर निर्वाचित समितियाँ बनाए जाएंगी। प्रत्येक स्तर के सभापतियों को ५० प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त करना होगा। केन्द्रीय पदाधिकारियों की संख्या १३ सदस्यीय होगी, जिसमें सभापति, उपसभापति (३ में महिला सहित), महामन्त्री एक, सहमहामन्त्री तीन (पुरुष एवं महिला दोनों), कोषाध्यक्ष, सहकोषाध्यक्ष, प्रवक्ता और सहप्रवक्ताएँ शामिल होंगे। वर्तमान में रास्वपा में वरिष्ठ नेता सहित एक और उपसभापति तथा महामन्त्री दो-दो हैं। केन्द्रीय पदाधिकारी महाधिवेशन में निर्वाचित होंगे। सभापति कोषाध्यक्ष, सहकोषाध्यक्ष, प्रवक्ता और सहप्रवक्ता मनोनीत करेंगे। २५ सदस्यीय सचिवालय के सदस्य भी सभापति द्वारा मनोनीत होंगे। १२९ सदस्यीय केन्द्रीय समिति में एक तिहाई महिला और युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रदेश समिति में सभापति, उपसभापति, महामन्त्री, कोषाध्यक्ष और प्रवक्ता सहित ७ सदस्यीय टीम होगी। सात प्रदेश समितियों का आकार अलग-अलग होगा (कोशी ६१, मधेस ५९, बागमती ६५, गण्डकी ४७, लुम्बिनी ५७, कर्णाली ४१ और सुदूरपश्चिम ४३ सदस्यीय)। प्रदेश सभापति की सिफारिश पर कोषाध्यक्ष और प्रवक्ता मनोनीत होंगे। जिला समिति में सभापति, उपसभापति, सचिव, सहसचिव, समावेशी सदस्य और प्रत्येक प्रतिनिधि सभा क्षेत्र से एक-एक सदस्य जिला अधिवेशन द्वारा निर्वाचित होंगे। जिला सभापति एक कोषाध्यक्ष मनोनीत कर सकता है। प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में सात सदस्यीय समिति होगी, जिसमें संयोजक, प्रदेश सभाका दो क्षेत्रों से एक-एक उपसंयोजक, सचिव और सदस्य होंगे।

पालिका स्तर पर गांवपालिका में ११, नगरपालिका में १५, उपमहानगरपालिका में २१ और महानगरपालिका में २५ सदस्यीय निर्वाचित समिती बनेगी। पालिका स्तर पर भी कोषाध्यक्ष पालिका सभापति की सिफारिश पर मनोनीत होगा। पालिका पदाधिकारियों में सभापति, उपसभापति, सचिव, सहसचिव और कोषाध्यक्ष प्रत्येक एक-एक होंगे तथा बालिका सदस्य भी रहेंगे। वडा समिति में न्यूनतम ३ और अधिकतम ११ सदस्यों तक समिति बनाई जा सकेगी। वडा समिति में सभापति, उपसभापति, सचिव एक-एक होंगे और ६ सदस्य प्रतिनिधियों द्वारा निर्वाचित किए जाएँगे। निर्वाचित वडा समिति को पार्टी सदस्य दो सदस्यों को मनोनीत करने का अधिकार विधान द्वारा दिया गया है। ११ सदस्यीय पूर्ण समिति में ४ महिलाएँ (जिनमें कम से कम एक दलित महिला हो) अनिवार्य होंगी।

ऊर्जा उत्पादकों ने आगामी बजट के लिए ५३ बिंदुओं पर सुझाव प्रस्तुत किए

स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादकों के संगठन नेपाल (इप्पान) ने आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ के बजट के लिए अर्थ मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले को ५३ बिंदुओं पर सुझाव प्रस्तुत किए हैं। इप्पान के अध्यक्ष गणेश कार्की ने निजी क्षेत्र को विद्युत खरीद समझौते खोलने और प्रसारण लाइन में भागीदारी देने के संदर्भ में सरकार से आग्रह किया है। अर्थ मंत्री डॉ. वाग्ले ने ऊर्जा क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता देते हुए निजी क्षेत्र को सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। २७ वैशाख, काठमांडू।

इप्पान के अध्यक्ष गणेश कार्की ने अर्थ मंत्री से मिलने के दौरान कहा, “सरकार यदि ऊर्जा क्षेत्र के विकास हेतु नीति एवं कार्यक्रम बनाकर निवेश करती है, तो आने वाले १० वर्षों में ३०,००० मेगावाट विद्युत उत्पादन का सरकारी लक्ष्य पूरा करने के लिए निजी क्षेत्र पूरी तरह तैयार है।” उन्होंने विद्युत खरीद समझौते (पीपीए) को खोलने, निजी क्षेत्र को विद्युत व्यापार एवं प्रसारण लाइन में सम्मिलित करने, और धितोपत्र बोर्ड द्वारा समयनिष्ठ आईपीओ जारी करने जैसे विषयों पर नीतिगत एवं कानूनी प्रोत्साहन की आवश्यकता बताई।

अर्थ मंत्री डॉ. वाग्ले ने कहा, “सरकार ऊर्जा क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ेगी, इससे अर्थव्यवस्था में योगदान बढ़ेगा।” उन्होंने निवेशकों को सरकार का पूर्ण समर्थन मिलने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि व्यवसायिकता एवं ईमानदारी के साथ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश हो रहा है, जिसे और प्रोत्साहित करना चाहिए।

प्रस्ताव में नेपाल ने ऊर्जा विकास एवं उपभोग वृद्धि का दशक घोषित करते हुए आगामी १० वर्षों में ३०,००० मेगावाट विद्युत क्षमता के लक्ष्य को पूरा करने के लिए विद्युत खरीद-विक्रय के वैकल्पिक उपाय लागू न होने तक आंतरिक एवं अंतर्देशीय विद्युत बाजार की मांग के अनुसार पीपीए जारी करने की आवश्यकता भी रेखांकित की है।

रास्वपाले बारा जिल्ला समिति विघटन करने का निर्णय लिया

राष्ट्रिय स्वतन्त्र जनता पार्टी (रास्वपा) ने प्रदेश समिति की सिफारिश के अनुरूप बारा जिला समिति को विघटित करने का निर्णय लिया है। पार्टी के केंद्रीय सचिवालय की रविवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया और बारा में जिला अधिवेशन की तैयारी करने का भी निर्णय किया गया। प्रवक्ता मनिष ने बताया कि उक्त बैठक ने बारा जिला समिति के विघटन के साथ-साथ जिला अधिवेशन की तैयारी करने का निर्णय लिया है। २७ वैशाख, काठमांडू।

सत्तामा पुग्नुमात्रै होइन राजनीति – Online Khabar

नेपाल की राजनीति: विचारधारा की कमी और दीर्घकालीन स्थिरता के लिए चुनौती

नेपाल में राजनीतिक विचारधारा और सिद्धांतों की कमी ने दीर्घकालीन राजनीतिक स्थिरता और सामाजिक परिवर्तन में चुनौतियां पैदा की हैं। पुराने दल अपने वैचारिक सिद्धांतों को व्यवहार में लागू नहीं कर सके, जबकि नई राजनीतिक शक्तियाँ स्पष्ट वैचारिक आधार स्थापित करने में असफल रही हैं। केवल तब नेपाल की राजनीति स्थायी बन सकती है जब नई राजनीतिक शक्तियाँ स्पष्ट वैचारिक जिम्मेदारी और संस्थागत संस्कार विकसित करें।

प्रदीप गिरि राजनीतिक विचारधारा और दर्शन पर चर्चा करते थे। उनकी बात सुनने वालों को आकर्षित करने की क्षमता थी। कुछ लोग ध्यान से सुनते थे, जबकि कुछ आमतौर पर एक कान से सुनकर दूसरे कान से उड़ा देते थे। आज दर्शन संबंधी विचारों को आगे बढ़ाने वाले एक नेता घनश्याम भूसाल हैं। उनका दर्शन है कि राजनीति मूल रूप से सिद्धांतों से निर्देशित होनी चाहिए। उनका मानना है कि केवल वैचारिक आधार पर राजनीति करनी चाहिए, लेकिन ऐसे विचार के बावजूद वे अपना उदय करने वाली पार्टी एमाले में अच्छा सम्मान नहीं पा सके।

जनता ने दशकों तक विभिन्न राजनीतिक आंदोलनों में भाग लेकर बलिदान दिया, शासन व्यवस्था बदली, संविधान बनाया, राजतंत्र समाप्त किया और गणतंत्र स्थापित किया; लेकिन इतने सारे परिवर्तनों के बावजूद सामान्य जनजीवन में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं दिख रहा है, यह आज सबसे बड़ा सवाल है। इन सवालों के जवाब न मिलने से एक गंभीर प्रश्न उभरा है – क्या सिद्धांत से भूख मिटती है? इसी निराशा के कारण अब पुराने राजनीतिक दलों के प्रति वितृष्णा और नई राजनीतिक शक्तियों के प्रति असाधारण आकर्षण उत्पन्न हुआ है।

नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ ने मूल्य पारदर्शिता सप्ताह को पूर्ण समर्थन दिया

नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ ने सरकार द्वारा घोषित मूल्य पारदर्शिता सप्ताह को पूर्ण समर्थन करते हुए देशभर के उद्योगी-व्यापारियों से इसमें भाग लेने का आग्रह किया है। उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय ने वैशाख 28 से जेठ 3 तक मूल्य पारदर्शिता सप्ताह मनाने का निर्णय लिया है। महासंघ ने सदस्य संघों से मूल्य सूची अनिवार्य रूप से रखने और जिला संघों को जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेने का अनुरोध किया है। 27 वैशाख, काठमाडौं।

नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ ने सरकार द्वारा घोषित मूल्य पारदर्शिता सप्ताह का पूर्ण समर्थन करते हुए देशभर के उद्योगी-व्यापारियों से इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया है। उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय द्वारा वैशाख 28 से जेठ 3 तक देशव्यापी रूप से ‘मूल्य पारदर्शिता सप्ताह’ मनाने के निर्णय के साथ महासंघ ने एकजुटता व्यक्त की है।

रविवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में महासंघ ने बाजार में वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतों में समानता लाने और स्वच्छ व्यावसायिक वातावरण बनाने के लिए इस अभियान को प्रभावशाली मानते हुए विश्वास व्यक्त किया है। महासंघ ने मंत्रालय के निर्देशानुसार अपने सदस्य उद्योग वाणिज्य संघों, वस्तुगत संघों तथा संबंधित व्यवसायियों से अनुरोध किया है कि वे उद्योगी, थोक विक्रेता, आपूर्तिकर्ता और खुदरा विक्रेताओं के लिए अपने उत्पादों और सेवाओं की अद्यतित मूल्य सूची अनिवार्य एवं स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें।

महासंघ ने जिला तथा नगर उद्योग वाणिज्य संघों से अपने-अपने क्षेत्रों के बाजारों में मूल्य सूची के प्रदर्शित होने की पुष्टि करने और जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेकर इस अभियान को सफल बनाने के लिए देशभर के सभी उद्योगी-व्यापारियों से सक्रिय सहयोग का भी आग्रह किया है।

रास्वपाले वडा तथा पालिका अधिवेशन दुई चरणों में करने का निर्णय किया

२७ वैशाख, काठमांडू। रास्वपाले वडा और पालिका स्तर पर होने वाले अधिवेशन को दो चरणों में संपन्न करने का निर्णय लिया है। रविवार को सम्पन्न सचिवालय की बैठक में वडा अधिवेशन के लिए जेठ ३ और १६ तारीख को दो चरणों में आयोजित करने की तिथि तय की गई जबकि पालिका अधिवेशन जेठ १० और १७ तारीख को आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

वैशाख २० से पहले समितियां गठित होने वाले वडाओं में जेठ ३ को अधिवेशन होगा, वहीं जेठ ३ तक समितियां गठित होने वाले वडाओं में दूसरा चरण का अधिवेशन जेठ १६ को आयोजित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, वैशाख २५ से पहले समितियां गठित होने वाले पालिकाओं में जेठ १० को पालिका अधिवेशन होगा और जेठ १० तक समिति गठन न होने वाले शेष पालिकाओं में अधिवेशन जेठ १७ को आयोजित किया जाएगा।

सचिवालय ने जेठ २३ और २४ को जिला अधिवेशन आयोजित करने का भी निर्णय लिया है। साथ ही, जेठ २ को समिति गठन न होने वाले वडाओं की बैठक और जेठ ९ को समिति गठन न होने वाले पालिकाओं की बैठक बुलाने का भी निर्णय किया गया है।

पद खोज्ने सांसदलाई रविले सम्झाए- नेताका टाउकोको मूल्य तोकिएको इतिहास

रवि ने सांसदों को समझाया – नेताओं के सिर का मूल्य इतिहास तय करता है

रास्वपा ने शनिवार और रविवार को पार्टी, सरकार और सांसदों की भूमिका पर दूसरे चरण का प्रशिक्षण जवालाखेल स्थित स्टाफ कॉलेज में प्रदान किया है। पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने सांसदों को कहा कि “सरकारी गाड़ी में बैठकर झंडा लहराना सफलता नहीं है” और उन्होंने ‘यू-टर्न’ लेने का आग्रह किया। उन्होंने पुराने दलों के नेताओं के संघर्ष और त्याग की याद दिलाते हुए सांसदों को विधेयक और कानून निर्माण में विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया।

२७ वैशाख, काठमांडू। सत्ता पक्ष दल रास्वपा ने शनिवार और रविवार को पार्टी, सरकार और सांसदों की भूमिकाओं पर प्रशिक्षण दिया। चुनाव के बाद पहला प्रशिक्षण पाँचतारे रॉयल ट्यूलिप होटल में सम्पन्न हुआ था, जबकि दूसरा प्रशिक्षण जवालाखेल स्थित स्टाफ कॉलेज में आयोजित किया गया। पहले प्रशिक्षण में शामिल न होने वाले बालेन्द्र शाह इस बार भी दूसरे चरण में भाग नहीं ले रहे हैं। संसदीय दल के नेता होते हुए भी वे सांसदों के प्रशिक्षण में अनुपस्थित हैं।

पहले प्रशिक्षण की तरह इस बार भी पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने सांसदों को यह समझाने का प्रयास किया कि मुख्य लक्ष्य क्या है। उन्होंने संसद की विधिक प्रक्रियाओं, संसदीय राजनीति तथा रास्वपा के उदय से लेकर वर्तमान स्थिति तक विस्तार से व्याख्या की। इससे रास्वपा दल के अंदर बढ़ती मानसिकता का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि जिस दिशा में यह दल बढ़ रहा है, उस रास्ते पर न जाने के लिए ही यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

चुनाव के बाद सरकार बनने की प्रक्रिया में कई नेता मंत्री बनने की कोशिश कर रहे थे। खासकर पूर्वसांसद अपनी अनुभव के आधार पर दावेदारी करते थे। लेकिन पूर्वसांसद प्राथमिकता न मिलने के कारण रास्वपा सांसदों में अलग सोच विकसित हो रही है। इस विषय पर रवि ने रविवार को स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने कहा, “सरकारी गाड़ी में बैठकर झंडा लहराते हुए चलना और इसे सफलता का पैमाना मानना बड़ी भूल है। अगर आप इसे ही सफलता का संकेत मानेंगे, तो हम गलत दिशा में हैं। गलत रास्ता किसी भी स्थिति तक नहीं पहुंचाता। इसलिए कृपया ‘यू-टर्न’ लें।”

सांसद रूप में दिखने वाले व्यक्ति पार्टी या संसद के अन्य पदों के लिए भी आकांक्षा रखते हैं। इसलिए रास्वपा में शिकायत करने वाले समूह भी बढ़ रहे हैं, उन्होंने बताया। पद के लिए कई लोग मांग करते रहे हैं। उन्होंने कहा, “कभी-कभी साथी कहते हैं — ‘सभापतिजी, मैं तो शुरू से ही लगा हुआ आदमी हूँ, मेरा योगदान इतना है’ और अपने योगदान का मूल्य मांगने के लिए द्वार खटखटाते हैं। ऐसा सुनकर मुझे दुख होता है। साथी लोगों, इस पार्टी में योगदान के मूल्य की मांग करने का समय मेरा भी नहीं है, तो आपका कैसे हो सकता है? मैंने भी योगदान दिया है, लेकिन अभी मूल्य मांगने का समय नहीं है, बल्कि और अधिक योगदान देने का समय है,” रवि ने यह संबोधन दिया।

चर्की कीमतों में इज़ाफ़ा और निर्माण सामग्री की कमी से नागढुंगा-मुग्लिन सड़क विस्तार ठहरा

चर्की कीमतों में वृद्धि और निर्माण सामग्री की कमी के कारण नागढुंगा-मुग्लिन सड़क विस्तार का कार्य रुका हुआ है। पूर्वी खंड के पहले भाग में ८५ प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है जबकि दूसरे भाग में ५७.१ प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है। पश्चिमी खंड में ४३.९६ प्रतिशत काम हुआ है और विद्युत पोल को स्थानांतरित करने का काम अभी बाकी है। २७ वैशाख, चितवन। राजधानी काठमाडौं की मुख्य ‘लाइफलाइन’ मानी जाने वाली नागढुंगा-मुग्लिन सड़क का विस्तार रोक दिया गया है। निर्माण कंपनी ने कीमतों में तीव्र वृद्धि और निर्माण सामग्री की कमी को काम रोकने का कारण बताया है। तीन खंडों में सड़क के विस्तार के काम के रुके रहने के कारण बरसात के मौसम में और भी परेशानी पैदा होने का अनुमान है।

नागढुंगा से मुग्लिन तक ९५ किलोमीटर लंबी सड़क को पूर्वी और पश्चिमी खंड में विभाजित करके २०७९ मध्य से यह सड़क विस्तार का कार्य शुरू किया गया था। नागढुंगा से मुग्लिन तक सड़क के बड़े बाजार क्षेत्रों में ६ लेन, छोटे बाजारों में ४ लेन और अन्य स्थानों पर ३ लेन सड़क बनाने की योजना है। कठिन भूगोल और भूस्खलन के अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष रूप से समर्पित २ लेन सड़क का विस्तार किया जाएगा। नौबिसेस से नागढुंगा तक मालवाहक वाहनों के लिए अलग ‘क्लाइम्बिंग’ लेन का निर्माण होगा।

नागढुंगा से नौबिसेस तक ४.७ किलोमीटर और नौबिसेस से मलेखुस तक १७.५ किलोमीटर स्वदेशी क्लाइम्बिंग लेन बनाया जाएगा। तीन लेन वाली जगहों में एक लेन क्लाइम्बिंग लेन होगी। इस क्लाइम्बिंग लेन पर अलग निशान होंगे और केवल मालवाहक वाहनों को ही इसके उपयोग की अनुमति दी जाएगी। इस खंड में बनाए जाने वाले २१ नए पुल सभी चार लेन के होंगे। प्रतिदिन लगभग १२ हजार वाहन इस सड़क से गुजरते हैं और इसे विश्व बैंक के सहुलियत वाले ऋण से विस्तारित किया जा रहा है। सड़क के विस्तार के बाद राजधानी काठमाडौं सहित आसपास के क्षेत्रों में आवागमन में आसानी होने की उम्मीद है।

राष्ट्रिय समाजवादी पार्टीले मिलन पाण्डेलाई शिक्षाविभाग प्रमुख नियुक्त गर्‍यो

राष्ट्रिय समाजवादी पार्टीले केन्द्रीय शिक्षा विभागको प्रमुखमा मिलन पाण्डेलाई नियुक्त गरेको छ। पार्टीको सचिवालय बैठकले पाण्डेलाई शिक्षा विभाग प्रमुखको रूपमा नियुक्त गरेको कुरा प्रवक्ता मनिष झाले जानकारी दिएका छन्।

त्यसैगरी, पार्टीले डा. प्रभात अधिकारीलाई स्टार्ट-अप विभाग प्रमुखको रूपमा नियुक्त गरेको छ। र्‍यापिड एक्सन टिमको केन्द्रीय विभाग प्रमुखमा वैकुण्ठ थापा र उपप्रमुखमा पूर्व डीआईजी विदुर खड्कालाई नियुक्त गरिएको छ।

यो निर्णय २७ वैशाख, काठमाडौंमा भएको सचिवालय बैठकमा गरिएको हो।

प्रधानमन्त्री कार्यालयमा पनि लेखिँदै छ बजेट ?   – Online Khabar

क्या प्रधानमंत्री कार्यालय में भी बजट लेखन का काम हो रहा है?

समाचार सारांश

संकलित और संपादकीय समीक्षा की गई।

  • प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के सचिवालय ने आगामी वित्तीय वर्ष २०८३/८४ के नीति, कार्यक्रम एवं बजट सुझावों के लिए एक पोर्टल लॉन्च किया है।
  • अर्थ मंत्रालय ने बजट लेखन के लिए बनाए गए कोर टीम में बदलाव करते हुए नए सहसचिवों को शामिल किया है।
  • प्रधानमंत्री शाह ने सातों प्रदेशों के सांसदों के साथ बजट केंद्रित चर्चा कर सुझाव मांगे हैं, लेकिन संसद में प्री-बजट चर्चा कम हुई है।

२७ वैशाख, काठमांडू – शनिवार को प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के सचिवालय ने प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय के नाम पर एक नया पोर्टल लिंक सार्वजनिक किया।

इस पोर्टल के माध्यम से आगामी वित्तीय वर्ष २०८३/८४ के लिए सरकारी नीति तथा कार्यक्रम और बजट के संबंध में सुझाव मांगे गए हैं।

‘नेपाल सरकार, प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय सुझाव संकलन पोर्टल’ नामक इस पोर्टल पर लिखा है, ‘नेपाल के जनसाधारण की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को शामिल करते हुए बजट, नीति और कार्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया को पारदर्शी, प्रभावी और सहभागितापूर्ण बनाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से सुझाव संकलन पोर्टल जारी किया गया है।’

यह पोर्टल प्रकाशित होने का समय नीति तथा कार्यक्रम लेखन लगभग पूरा हो चुका है। क्योंकि नीति तथा कार्यक्रम अगले सोमवार को राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल द्वारा जारी किया जाना है। इसलिए नागरिकों से प्राप्त सुझावों को नीति तथा कार्यक्रम में शामिल करने की संभावना कम है।

सरकारी छुट्टी के दिनों शनिवार और रविवार को इस पोर्टल पर नागरिकों की भागीदारी अच्छी रही। रविवार शाम तक साढ़े चार बजे तक कुल ६,७०५ सुझाव मिले, जिनमें से ३,३०५ नीति सम्बन्धी और २,२४५ बजट सम्बन्धी सुझाव थे। इससे स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय का यह पोर्टल बजट सुझाव संकलन पर अधिक केंद्रित है।

नीति तथा कार्यक्रम बनाने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय की होती है, जबकि बजट तैयार करने का कार्य अर्थ मंत्रालय करता है, जिसके लिए बजट लेखन के लिए एक समर्पित टीम बनाई जाती है।

प्रधानमंत्री कार्यालय भवन

बजट संबंधी सुझाव संकलन, बजट पूर्व चर्चा और सुझावों के संग्रह में अर्थ मंत्री स्वयं सक्रिय होते हैं। वर्तमान अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले भी इस प्रक्रिया में सीधे जुड़े हुए हैं।

पहले जहां सरकार बजट के लिए नागरिकों से सुझाव मांगती थी, वह कार्य केवल अर्थ मंत्रालय तक सीमित था। लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा बजट लक्षित सुझाव संकलन की यह पहल पहली बार देखने को मिली है। यह संकेत करता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय बजट लेखन में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

कई अर्थ मंत्रालय के अधिकारी भी इस पहल को लेकर असमंजस में हैं। मंत्रालय के एक अनाम अधिकारी ने कहा, ‘अभी भी अर्थ मंत्रालय सुझाव ले रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय के बजट सुझाव संकलन की खबर देखकर पता चला। संभवतः इन सुझावों को एक साथ अर्थ मंत्रालय को भेजा जाएगा।’

सरकारी हलकों में लंबे समय से कहा जाता रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय बजट तैयारी का समानांतर काम कर रहा है। हालांकि अर्थ मंत्रालय के बाहर बजट लेखन का कोई प्रचलन नहीं था, इसलिए इसे अफवाह ही माना जाता था। लेकिन प्रमुख सचिव ने बजट सुझाव मांगने के बाद यह आशंका और मजबूत हुई है।

‘प्रधानमंत्री कार्यालय बजट वक्तव्य लेखन नहीं करता, लेकिन योजना बनाने, नीतिगत निर्णय लेने जैसे कई कार्यों में सक्रिय दिखाई देता है,’ एक संबंधित स्रोत ने बताया।

अर्थमंत्री के निकट एक सूत्र के अनुसार, पोर्टल प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी किए जाने के बावजूद, इसमें आने वाले सुझावों को अर्थमंत्री भी देख सकते हैं।

बजट लेखन और सभी संबंधित प्रक्रियाएं अर्थमंत्री के नेतृत्व में ही हो रही हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। ‘बहुत अच्छा बजट बन रहा है, जो मंत्री जी के नेतृत्व में तैयार हो रहा है,’ अर्थमंत्री के निकट एक स्रोत ने कहा।

उन्होंने इस पहल को सरकार द्वारा जनता से सुझाव लेने का एक नया दृष्टिकोण बताया।

बजट लेखन टीम में बदलाव

एक महीने पहले गठित हुई अर्थ मंत्रालय की कोर टीम में पुनः बदलाव किया गया है। मंत्रिपरिषद ने सहसचिवों का तबादला किया, जिससे टीम के सदस्य भी बदल गए। नई टीम का पुनः गठन कर काम जारी है।

अर्थ मंत्रालय भवन

पहले सहसचिव उत्तरकुमार खत्री, डॉ. सुमन दाहाल, डॉ. धनिराम शर्मा, महेश भट्टराई और सेवन्तक पोखरेल को बजट लेखन टीम में रखा गया था। भट्टराई और पोखरेल के प्रदेशों में स्थानांतरण के बाद उनकी जगह सहसचिव अमृत लम्साल और टंकप्रसाद पाण्डेय को टीम में जोड़ा गया है।

सरकार की जल्दबाजी में कोर टीम के सदस्यों का तबादला करने से बजट लेखन में समन्वय की कमी हो सकती है, ऐसा मंत्री के समीप एक अधिकारी ने बताया।

सांसदों से भी प्रधानमंत्री ने मांगे बजट सुझाव

संविधान के अनुसार, संघीय सरकार को १५ जेठ तक आगामी वित्तीय वर्ष का बजट पेश करना होता है। बजट की तैयारी मंसिर माह से शुरू होती है। मध्यकालीन खर्च संरचना और राष्ट्रीय स्रोत अनुमान समिति माघ के अंत तक बजट सीमा निर्धारित करती है।

फिर औपचारिक बजट लेखन शुरू होता है। राष्ट्रीय योजना आयोग ७ फागुन तक योजना और स्रोत पर मार्गदर्शन अर्थमंत्री को देता है। जनवरी में अर्थ मंत्रालय बजट सीमांकन और तर्जुमा संबंधी निर्देश अन्य विभागों को भेजता है।

इसके अलावा राजस्व समिति राजस्व नीति और दर संबंधी सुझाव इकट्ठा करती रहती है। संसद की अर्थ समिति भी बजट सुझाव के लिए प्री-बजट चर्चा आयोजित करती है।

लेकिन इस बार माहौल अलग है। प्रधानमंत्री शाह ने पिछले चैत के तीसरे सप्ताह से सिंहदरबार में सातों प्रदेशों के सांसदों के साथ बजट केंद्रित चर्चा की और नीति तथा कार्यक्रम में शामिल करने के लिए सुझाव मांगे।

उसी चर्चा के आधार पर सरकार १०० बिंदुओं वाले विवरण को लागू करना और बजट निर्माण को केंद्रित करना चाहती है। प्रधानमंत्री शाह के सचिवालय ने भी इसी समय इसे सार्वजनिक किया था।

‘सरकार के बजट में प्रधानमंत्री की रुचि और नीति निर्देशन होना स्वाभाविक है, इसलिए सचिवालय ने सुझाव मांगा होगा। लेकिन इसे बजट लेखन में समानांतर कार्य समझना गलत होगा,’ अर्थ मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा।

सांसदों के साथ संसद में प्री-बजट चर्चा कम हुई

पहले संसद में प्री-बजट चर्चा को प्रतिनिधि अधिक महत्व देते थे, लेकिन इस बार बड़े दल और मजबूत सरकार के कारण प्री-बजट चर्चा को कम तवज्जो मिली है। सरकार ने चर्चा कम करके बजट अधिवेशन बुलाया है।

सांसदों की शिकायतें भी कम हैं। इसके बजाय मंत्री सांसदों के समूह से चर्चा कर रहे हैं।

अर्थमंत्री डॉ. वाग्ले, भौतिक पूर्वाधार मंत्री सुनिल लम्साल, पर्यटन मंत्री खड्गराज पौडेल, संचार तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. विक्रम तिमिल्सिना ने राष्ट्रीय जनता पार्टी के सांसदों से प्री-बजट चर्चा की हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड की सरकार ने २०७९ फागुन में आर्थिक कार्यविधि और वित्तीय उत्तरदायित्व अधिनियम २०७६ में संशोधन कर प्री-बजट चर्चा फागुन के महीने में संसद में प्रस्तुत करने की व्यवस्था की थी।

लेकिन केपी शर्मा ओली की सरकार ने इसे वापस ले लिया और बजट प्रकाशित होने से १५ दिन पहले प्रस्तुत करने की व्यवस्था की। इस बार भी वैसा ही होगा।