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लेखक: space4knews

लंका प्रीमियर लीग में ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम लागू होगा

समाचार संक्षेप

समीक्षा पश्चात तैयार।

  • श्रीलंका की लंका प्रीमियर लीग 2026 में पहली बार ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ और कम से कम एक 23 साल से कम उम्र के खिलाड़ी को मैदान में उतारने का नियम लागू होगा।
  • सोमवार को संपन्न लंका प्रीमियर लीग के ड्राफ्ट में नेपाली खिलाड़ी संदीप लामिछाने, दीपेन्द्रसिंह ऐरी और कुशल भुर्तेल विभिन्न टीमों के लिए अनुबंधित हुए हैं।
  • आगामी प्रतियोगिता में लंका प्रीमियर लीग की पांच में से चार टीमें नए मालिकों और कोचों के साथ नए नामों से मैदान में उतरेंगी।

19 जेठ, काठमांडू। श्रीलंका की लंका प्रीमियर लीग (एलपीएल) 2026 में पहली बार ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम लागू किया जाएगा। साथ ही प्रत्येक टीम को पूरे मैच में कम से कम एक 23 वर्ष से कम उम्र के खिलाड़ी को मैदान में उतारना अनिवार्य होगा।

इम्पैक्ट प्लेयर नियम भारत की इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में पहले से लागू है। इस नियम के तहत टीम एक खिलाड़ी को बदलकर दूसरे खिलाड़ी को उतार सकती है।

सोमवार को कोलंबो में हुए एलपीएल ड्राफ्ट में ये दोनों नियम टीम चयन के मुख्य मुद्दे रहे। अब इम्पैक्ट प्लेयर के इस्तेमाल के बाद भी टीम में एक 23 वर्ष से कम उम्र का खिलाड़ी अनिवार्य रूप से मैदान में होगा।

इसके कारण फ्रैंचाइजी को टीम बनाते समय अनुभवी और युवा खिलाड़ियों के बीच संतुलन बनाना होगा। श्रीलंका के कई यू-19 खिलाड़ी जुलाई में भारत के खिलाफ श्रृंखला के कारण उपलब्ध नहीं होंगे, जिससे युवा खिलाड़ियों के विकल्प सीमित होंगे।

ड्राफ्ट में तीन नेपाली खिलाड़ी भी अनुबंधित हुए हैं। संदीप लामिछाने और दीपेन्द्रसिंह ऐरी एससी जफना किंग्स के लिए और कुशल भुर्तेल कोलंबो कैप्स में शामिल हुए हैं।

ड्राफ्ट के दौरान श्रीलंका के ओपनर पथुम निसान्का और तेज़ गेंदबाज मथिसा पथिराना चोटिल होने की जानकारी भी सामने आई।

एलपीएल की पांच टीमों में से चार टीम नए मालिकों और कोचों के साथ निम्न नामों से प्रतिस्पर्धा करेंगी: जाफना अब एससी जाफना किंग्स, गाले टीम गाले गैलेन्ट्स, कैंडी कैंडीड रॉयल्स और कोलंबो टीम कोलंबो कैप्स। दंबुला सिक्सर्स पुराना नाम बनाए रखेगी।

ड्राफ्ट में प्रत्येक टीम में कम से कम 18 खिलाड़ी शामिल करने का नियम था, और जरूरत पड़ने पर दो अतिरिक्त खिलाड़ियों को शामिल करने का विकल्प भी दिया गया था।

चीन के साथ तनाव के बीच ताइवान ने दक्षिण चीन सागर में रोबोटिक कुत्ते परिचालन की घोषणा की

ताइवान की सरकारी स्वामित्व वाली सैन्य इकाई ने चीन के साथ विवादित द्वीप समूहों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए तीन रोबोट गश्ती कुत्ते प्रस्तुत किए हैं। अमेरिकी कंपनी ‘घोस्ट रोबोटिक्स’ द्वारा बनाए गए ये रोबोट जासूसी, निगरानी और हमला करने वाले तीन अलग-अलग संस्करणों में उपलब्ध हैं। ताइवान के मरीन और कोस्ट गार्ड ने दक्षिण चीन सागर के द्वीपों पर गश्ती के लिए इस तरह के रोबोट की तत्काल आवश्यकता जताई है।

19 जेठ, काठमांडू। ताइवान की सैन्य हथियार विकास की सर्वोच्च एजेंसी ने मंगलवार को तीन रोबोट गश्ती कुत्ते जारी किए। चीन के साथ विवादित दक्षिण चीन सागर के द्वीपों में सुरक्षा प्रदान करने के लिए इन रोबोटों का उपयोग किया जा सकता है, सैन्य अधिकारियों ने बताया। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र के रूप में दावा करता है, ऐसे में ताइवान संभावित चीनी आक्रमण को रोकने के लिए अपनी सेना को आधुनिक बना रहा है।

ताइवान के रक्षा मंत्रालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकारी स्वामित्व वाली ‘नेशनल चुङ-सान इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ ने इन चार पैरों वाले रोबोटिक कुत्तों का प्रदर्शन किया। ये रोबोट अमेरिकी सैन्य आपूर्ति कंपनी ‘घोस्ट रोबोटिक्स’ द्वारा निर्मित हैं, जिनमें ताइवानी संस्थान की घरेलू तकनीक भी शामिल है। प्रदर्शित रोबोट जासूसी, निगरानी और हमला करने वाले तीन अलग-अलग संस्करणों में उपलब्ध हैं।

हमला करने वाले संस्करण के रोबोट की पीठ पर एक बंदूक भी लगी हुई है। संस्थान के मिसाइल एवं रॉकेट सिस्टम अनुसंधान विभाग के उपप्रधान, जेन कुओ-कुआंग के अनुसार, भले ही ताइवानी सेना ने इस प्रकार की अत्याधुनिक उपकरणों की जरूरत महसूस की है, लेकिन अभी तक आधिकारिक खरीद आदेश जारी नहीं हुआ है। हालांकि, ताइवान के मरीन और कोस्ट गार्ड ने स्प्राटली (नानसा) और प्राटास (डोंगसा) द्वीपों के तटीय क्षेत्र में गश्ती और निरीक्षण के लिए इन रोबोटों की तुरंत आवश्यकता जताई है।

भक्तपुर से गोली और नशीली दवाओं के साथ एक युवक गिरफ्तार

भक्तपुर के सूर्यविनायक नगरपालिका–६ सुन्दरबस्ती से पुलिस ने 2 राउंड गोली और नशीली दवाओं के साथ 23 वर्षीय निरज खत्री को गिरफ्तार किया है। जगाती पुलिस चौकी के अनुसार खत्री के पास से एसएलआर की 2 राउंड गोली, ट्रामाडोल टैबलेट और 1 खुकड़ी बरामद हुई है। गिरफ्तार निरज खत्री के खिलाफ आगे की जांच जारी है।

गिरफ्तार निरज खत्री भक्तपुर सूर्यविनायक नगरपालिका–8 सिपाडोल के निवासी हैं। भक्तपुर के पुलिस उपरीक्षक प्रकाश जबेगुले ने बताया कि पुलिस टीम ने मंगलवार को सूर्यविनायक नगरपालिका–6 सुन्दरबस्ती से उन्हें गिरफ्तार किया। जबेगुले के अनुसार उनके पास से एसएलआर की 2 राउंड गोली, ट्रामाडोल टैबलेट और 1 खुकड़ी बरामद की गई है। पुलिस ने बताया कि निरज खत्री के खिलाफ आगे की जांच जारी है।

संयुक्त राष्ट्र के दबाव और ट्रम्प की टेलीफोन वार्ता से लेबनान में तनाव बढ़ा?

समाचार सारांश

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजरायली प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतान्याहू को टेलीफोन पर बुलाकर बेरूत में बमबारी की योजना रोकने की चेतावनी दी।
  • संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन सुरक्षा परिषद की बैठक में कूटनीतिज्ञों ने इजरायल से दक्षिणी लेबनान से सैनिक वापस बुलाने और हमलों को रोकने का आग्रह किया।
  • इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के रणनीतिक ‘बोफोर्ट’ किले पर कब्जा कर पिछले 25 वर्षों में सबसे गहरा सैन्य हस्तक्षेप किया है।

19 जेठ, काठमांडू। अमेरिका और ईरान के बीच मध्यपूर्व में शांति स्थापना और युद्धविराम के लिए उच्चस्तरीय कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन इसके बावजूद इजरायल लेबनान और हिज़्बुल्लाह पर अपने सैन्य हमले जारी रखे हुए है।

अमेरिका और ईरान के बीच अप्रैल से शुरू हुए युद्धविराम को लेकर दोनों पक्षों की समझ में अंतर देखा जा रहा है। ईरान का मानना है कि किसी भी समझौते में लेबनान और हिज़्बुल्लाह को भी शामिल किया जाना चाहिए।

वहीं, इजरायल और अमेरिका इस समझौते को केवल ईरान-अमेरिका संघर्ष, हरमूज जलमार्ग खोलने और ईरान के परमाणु मुद्दों तक सीमित रखना चाहते हैं।

संयुक्त राष्ट्र में ईरानी मिशन की जारी बयान में कहा गया है, ‘हम अमेरिका से स्पष्ट हैं कि कोई भी शांति समझौता पूर्ण और दीर्घकालीन तभी होगा जब वह लेबनान और हिज़्बुल्लाह के खिलाफ इजरायली हमलों को भी समाप्त करे। लेबनान को बाहर रखकर बनाया गया समझौता ईरान के लिए स्वीकार्य नहीं है।’

हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह वार्ता क्षेत्रीय नहीं बल्कि द्विपक्षीय सुरक्षा केंद्रित है।

इसी कूटनीतिक तनाव के बीच रविवार को इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में गहराई तक जाकर ‘बोफोर्ट’ किले पर कब्जा किया।

यह किला 1982 से 2000 तक लेबनान पर इजरायली सैन्य अधीनता का प्रमुख केंद्र था। अब इस किले पर इजरायल का नीला और सफेद झंडा फहराया गया है।

इजरायली सेना के दक्षिणी लेबनान के भीतर पहुंचने से वहां सैन्य कब्जे का भय फैल गया है। इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में हमले की धमकी दी, जिससे हजारों नागरिक अपने-अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। आम जनता में भय व्याप्त है।

इसी संदर्भ में सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक हुई। फ्रांस के अनुरोध पर बुलाई गई इस बैठक में लेबनान में जारी अशांति पर चर्चा हुई।

बैठक में कूटनीतिज्ञों ने इजरायल से आक्रमण बंद कर दक्षिणी लेबनान से सैनिक वापस लेने का आग्रह किया, जिसमें अमेरिका अकेला अपवाद था।

सुरक्षा परिषद में फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और चीन ने इजरायल की कार्रवाई की कड़ी निंदा की, जबकि अमेरिकी बयान ने ईरान और हिज़्बुल्लाह को दोषी ठहराने पर जोर दिया। बहरीन, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, पाकिस्तान, डेनमार्क और कोलम्बिया ने तुरंत तनाव कम करने के लिए इजरायल से आग्रह किया।

संयुक्त राष्ट्र की वरिष्ठ अधिकारी मार्था आमा अक्या पोबी ने कहा, ‘ब्लू लाइन के उत्तर में इजरायल की मौजूदगी लेबनान की संप्रभुता और भौगोलिक अखंडता का स्पष्ट उल्लंघन है। यह तनाव पूरे क्षेत्र में फैल गया है।’

‘ब्लू लाइन’ इजरायल, लेबनान और गोलान हाइट्स को विभाजित करती है।

लेबनानी राजदूत अहमद अरफा ने बार-बार हमले रोकने में इजरायल की विफलता पर सुरक्षा परिषद की आलोचना की और कहा कि इस उदारता से अपराधी सक्षम होते हैं अपराध दोहराने में।

सोमवार की टेलीफोन वार्ता में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अत्यंत कठोर और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल कर इजरायली प्रधानमंत्री नेतान्याहू को अपमानित किया। ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता बिगड़ने के खतरे के बीच ट्रम्प ने नेतान्याहू को कड़ी चेतावनी दी।

ट्रम्प ने नेतान्याहू को पागल बताया और कृतघ्नता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार मामले में उनके समर्थन से नेतान्याहू जेल से बचे हैं।

ट्रम्प ने कहा, ‘तुम पूरी तरह पागल हो, जब मैं नहीं था तब तुम जेल में हो, मैं तुम्हारी रक्षा कर रहा हूं, लेकिन इस कदम के बाद सभी तुम्हें और इजरायल को नफरत करने लगे हैं।’

ट्रम्प ने लेबनान के बेरूत में बमबारी योजना तुरंत बंद करने का आदेश दिया और चेतावनी दी कि ऐसा करने पर इजरायल अकेला पड़ जाएगा। अंतरराष्ट्रीय खबरों के अनुसार, ट्रम्प के आदेश के बाद इजरायल ने लेबनान पर हमला नहीं किया।

ट्रम्प ने नेतान्याहू से बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर कहा कि इजरायली सेना बेरूत नहीं जाएगी और लौट आई है। हिज़्बुल्लाह ने सभी हमलों को रोकने के लिए सहमति जताई है।

नेतान्याहू ने ट्रम्प के साथ बातचीत स्वीकार की लेकिन कहा कि अगर हिज़्बुल्लाह हमले बंद नहीं करता है तो इजरायल बेरूत के लक्ष्यों पर हमला करेगा।

इसी बीच, इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाइयां जारी रखने की घोषणा की है। हिज़्बुल्लाह की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

त्यहीं, लेबनानी अधिकारियों ने बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की पेशकश पर हिज़्बुल्लाह ने सहमति दी है।

इस प्रस्ताव में इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हमला नहीं करने और हिज़्बुल्लाह ने उत्तर इजरायल को निशाना न बनाने की बात शामिल है।

ट्रम्प ने दोनों पक्षों से संयम बरतने का आह्वान किया, लेकिन कुछ समय बाद इजरायल ने लेबनान की तरफ से मिसाइल हमलों का पता लगाया। इजरायल ने अपने उत्तरी क्षेत्र के नागरिकों को सुरक्षित जगहों पर जाने की चेतावनी दी।

यह बयान उस समय सार्वजनिक हुआ, जब इजरायली सरकार ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में आक्रमण के आदेश दिए और हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इजरायल में रॉकेट हमले किए थे।

अप्रैल से दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम लागू था, लेकिन इजरायल के हमलों के बाद हिज़्बुल्लाह ने फिर से प्रतिक्रिया शुरू कर दी है। इजरायल इसे आत्मरक्षा का कदम बता रहा है।

यह संघर्ष ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते में बाधा डाल रहा है। तेहरान चाहता है कि लेबनान को भी समझौते में शामिल किया जाए।

ईरानी सशस्त्र बलों ने उत्तर इजरायल के निवासियों को चेतावनी दी है कि अगर इजरायल ने बेरूत पर हमला किया तो उन्हें वहां से चले जाना होगा।

दूसरी ओर, इजराइल ने ईरान के साथ वार्ता बंद करते हुए लेबनान के साथ प्रत्यक्ष संवाद बढ़ाया है। इजरायल की मुख्य मांग हिज़्बुल्लाह का पूर्ण निरस्त्रीकरण और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 1701 लागू करना है।

यह प्रस्ताव दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह की हथियारबंद उपस्थिति को रोकता है। इजरायली प्रधानमंत्री नेतान्याहू इस मामले में काफी सख्त हैं।

इजरायली सेना ने हाल के दिनों में दक्षिणी लेबनान में पिछले 25 वर्षों में सबसे गहरा सैन्य हस्तक्षेप किया है, जिसमें ‘बोफोर्ट’ किला समेत रणनीतिक स्थानों पर कब्जा किया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल इस समझौते से पहले खुद को भू-राजनैतिक रूप से सशक्त बनाना चाहता है।

लेबनानी वार्ताकार जो पूर्ण युद्धविराम चाहते हैं, वे वाशिंगटन में आगामी वार्ता में इजरायल से हमले की सीमा को और विस्तृत करने की उम्मीद कर रहे हैं।

रामारोशन स्काई रन असार ३ गते आयोजित होगा

नेपाल एड्वेंचर रनिंग फेडरेशन के आयोजन में आगामी असार ३ गते सुदूरपश्चिम के पर्यटकिय रामारोशन क्षेत्र में ‘रामारोशन स्काई रन २०२६’ का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता में २८ किलोमीटर की मुख्य स्काई रनिंग और स्थानीय युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ५ किलोमीटर की सामुदायिक दौड़ शामिल है। कुल ४० लाख रुपए का अनुमानित बजट होने वाले इस प्रतिस्पर्धा में विभिन्न विधाओं के विजेताओं को कुल ७ लाख ५२ हजार रुपए पुरस्कार दिया जाएगा।

फेडरेशन ने मंगलवार को काठमाडौं में पत्रकार सम्मेलन के जरिए अपनी पहली आधिकारिक स्काई रनिंग प्रतियोगिता रामारोशन स्काई रन आयोजित करने की जानकारी दी। यह प्रतिस्पर्धा सुदूरपश्चिम प्रदेश के पर्यटकिय और प्राकृतिक संपदा समृद्ध रामारोशन क्षेत्र में आयोजित की जाएगी। सुदूरपश्चिम प्रदेश खेलकूद परिषद, सुदूरपश्चिम प्रदेश सामाजिक विकास मंत्रालय, रामारोशन गाउँपालिका एवं साँफेबगर नगरपालिक के सहयोग से यह प्रतियोगिता आयोजित होगी, जानकारी फेडरेशन ने दी।

प्रतिस्पर्धा में २८ किलोमीटर स्काई रनिंग चैलेंज में पुरुष एवं महिला खुला वर्ग में प्रतिस्पर्धा होगी। स्थानीय युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए २० वर्ष से कम उम्र के प्रतिभागियों के लिए ५ किलोमीटर की सामुदायिक दौड़ भी आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता के संयोजक निरुपमध्वज कार्की ने कहा, “पहले भी अन्य दौड़ें हुई हैं लेकिन यह फेडरेशन की पहली आधिकारिक स्काई रन प्रतियोगिता है।” २८ किलोमीटर का स्काई रन मार्ग रामेखण्ड से शुरू होकर प्रमुख प्राकृतिक स्थलों को पार करते हुए पुनः रामेखण्ड पर समाप्त होगा।

प्रतियोगिता का उद्देश्य सुदूरपश्चिम नेपाल की प्राकृतिक सुंदरता, साहसिक खेल, पर्यटन और स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना है। प्रतियोगिता में अधिकतम १०० प्रतिभागी शामिल होंगे और पंजीकरण १९ जेठ से शुरू होगा। पंजीकरण शुल्क प्रति प्रतिभागी दो हजार पांच सौ रुपए निर्धारित है जबकि स्थानीय प्रतिभागियों के लिए पंजीकरण नि:शुल्क रहेगा। सभी प्रतिभागियों को भागीदारी प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे तथा २८ किलोमीटर मार्ग पूरा करने वाले धावकों को फिनिशर मेडल प्रदान किया जाएगा।

कांग्रेस ने संसदीय समितियों की बैठकों का बहिष्कार करने का फैसला किया

प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह द्वारा माफी न मांगने तक नेपाली कांग्रेस ने २५ जेठ तक संसदीय समितियों की बैठकों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री शाह ने प्रतिनिधि सभा में “नेपाल ने भी भारत की भूमि पर अतिक्रमण किया है” जैसी अभिव्यक्ति देने के बाद कांग्रेस ने इसका विरोध किया है। सांसदों को कानून से ऊपर रखकर जबरन प्रतिनिधि सभा नियमावली पारित किए जाने पर नेपाली कांग्रेस ने आपत्ति जताई है।

काठमांडू। नेपाली कांग्रेस ने संसद में अवरोध जारी रखते हुए संसदीय समितियों की बैठकों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह (बालेन) ने संसद में माफी न मांगने तक कांग्रेस २५ जेठ तक सभी संसदीय समितियों की बैठकों में भाग नहीं लेगी, ऐसा दल के नेता भीष्मराज आङ्देम्बे ने बताया। रविवार को प्रतिनिधि सभा के प्रश्नोत्तर सत्र में प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह के ‘‘नेपाल ने भी भारत की भूमि पर अतिक्रमण किया है’’ कहने के बाद कांग्रेस ने माफी मांगने की मांग करते हुए सदन का अवरोध जारी रखा है। सांसदों को कानून से ऊपर रखकर जबरन प्रतिनिधि सभा नियमावली पारित करने के कारण कांग्रेस ने असंतोष व्यक्त किया है। विरोध के रूप में कांग्रेस ने संसदीय समितियों की बैठकों का बहिष्कार करने की रणनीति अपनाई है।

गलत बयान देने के खिलाफ मामला दायर

१९ जेठ, काठमाडौं । भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में प्रतिकूल बयान देने के आरोप में अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने नवलपरासी त्रिवेणी गाउँपालिका–७ के ईश्वरीप्रसाद गौतम के खिलाफ विशेष अदालत में मामला दायर किया है। ऋण उपलब्ध कराने वाले लाभार्थी से ५० लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में चन्द्रबहादुर अधिकारी के खिलाफ मामला विशेष अदालत में सुनवाई चल रही है। इस मामले में गवाह के रूप में उपस्थित गौतम ने प्रतिकूल बयान दिया था, ऐसा आयोग का दावा है। आयोग के प्रवक्ता सुरेश न्यौपाने के अनुसार, गलत बयान देने वाले गौतम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की आवश्यकता को लेकर विशेष अदालत में मामला दायर किया गया है।

फीफा विश्व कप 2026 में टूटने वाले पांच रिकॉर्ड

तीन देशों के संयुक्त आयोजन में होने वाले 2026 के फीफा विश्व कप में पहली बार 48 टीमें भाग लेंगी और 104 मैच खेले जाएंगे। अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी और पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो मैदान पर उतरेंगे और विश्व कप में अपनी छठी बार भाग लेने का रिकॉर्ड बनाएंगे। जर्मनी के मिरोसलाव क्लोज का सर्वाधिक 16 गोल और 17 मैच जीतने का रिकॉर्ड आगामी विश्व कप में मेसी द्वारा तोड़ा जा सकता है। 19 जून, काठमांडू।

फीफा विश्व कप 2026 शुरू होने से पहले ही कुछ रिकॉर्ड स्थापित हो चुके हैं। विश्व फुटबॉल का यह सबसे बड़ा महाकुंभ विश्व का सबसे बड़ा टूर्नामेंट बनने जा रहा है। यह पहली बार है कि तीन देशों ने मिलकर आयोजन किया है और कुल 48 देशों की भागीदारी होगी, जिसमें 104 मैच खेले जाएंगे। इस संस्करण में अब तक के सबसे अधिक मैच होंगे। विश्व कप शुरू होते ही कुछ नए रिकॉर्ड भी बनेंगे।

उदाहरण के लिए, मेक्सिको का एज्टेका स्टेडियम विश्व कप तीन बार आयोजित करने वाला पहला स्टेडियम बनेगा। साथ ही, मेक्सिको तीन बार विश्व कप आयोजित करने वाला पहला देश भी होगा। इसके अलावा, विश्व कप के दौरान विभिन्न प्रकार के रिकॉर्ड बन सकते हैं। इनमें से कुछ रिकॉर्ड इस विश्व कप में टूटने की संभावनाएं अधिक हैं। फीफा विश्व कप 2026 में टूटने वाले इन पांच रिकॉर्ड्स पर नीचे चर्चा की गई है।

  1. सर्वाधिक गोल: इस विश्व कप में टीमों और मैचों की संख्या बढ़ने से गोल करने का रिकॉर्ड कायम होने की संभावना है। पहले कतर विश्व कप में 64 मैचों में 172 गोल हुए थे, लेकिन इस बार 104 मैच होने के कारण गोल की संख्या बढ़ सकती है। कतर विश्व कप में प्रति मैच औसत गोल 2.69 था। अब 40 मैच अधिक होने से गोल संख्या 200 से भी अधिक हो सकती है।
  2. अधिक बार विश्व कप खेलने का रिकॉर्ड: फीफा विश्व कप के 96 वर्षों के इतिहास में कई खिलाड़ियों ने विश्व कप खेला है। लगातार विश्व कप खेलना भी एक महान रिकॉर्ड है। अब तक पुरुष विश्व कप में पांच खिलाड़ियों ने पांच-वार खेलने का रिकॉर्ड बनाया है: मेक्सिको के एंटोनियो कार्बाजल और राफेल मार्क्वेज, जर्मनी के लोथार मॅथ्यूस, अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी और पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो। मेसी और रोनाल्डो 2026 में अपनी छठी बार भाग लेकर नया रिकॉर्ड बनाएंगे। 2022 में मेसी ने विश्व कप जीता था, जबकि रोनाल्डो के लिए यह अंतिम मौका होगा। इन खिलाड़ियों ने मैचों में गोल और असिस्ट कर इतिहास लिखा है और छठे विश्व कप में खेलने वाले पहले खिलाड़ी बनेंगे।
  3. सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी का रिकॉर्ड: विश्व कप में सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड जर्मनी के मिरोसलाव क्लोज के नाम है, जिन्होंने 16 गोल किए थे। इस रिकॉर्ड को अर्जेंटीना के मेसी और फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे चुनौती दे रहे हैं। मेसी ने 13 गोल किए हैं और 2026 में चार और गोल कर रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं। एम्बाप्पे ने दो विश्व कप में 12 गोल किए हैं। उन्होंने 2018 में 4 और 2022 में 8 गोल करते हुए गोल्डन बूट जीता था और फाइनल में अर्जेंटीना के खिलाफ हैट्रिक की थी।
  4. अधिकतम मैच जीतने वाले खिलाड़ी का रिकॉर्ड: जर्मनी के मिरोसलाव क्लोज ने अब तक विश्व कप में 17 मैच जीतकर सर्वाधिक जीतने वाला खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड बनाया है। मेसी 16 मैच जीत चुके हैं और 2026 में एक मैच जीतने से क्लोज के बराबर पहुंच जाएंगे। दो मैच जीतने पर मेसी सर्वाधिक जीतने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। मेसी पहले से सर्वाधिक मैच खेलने के रिकॉर्ड के भी धारक हैं और इस विश्व कप में और अधिक गोल तथा जीत हासिल कर सफल इतिहास रच सकते हैं।
  5. प्रशिक्षक के रूप में अधिकतम जीत का रिकॉर्ड: विश्व कप में सर्वाधिक मैच जीतने वाले प्रशिक्षक पश्चिम जर्मनी के हेलमट स्कोन्स हैं, जिन्होंने 16 मैच जीते हैं। फ्रांस के डिडिएर डे चैंप्स इस रिकॉर्ड को तोड़ने की संभावना रखते हैं। उन्होंने 2018 में फ्रांस को विश्व कप जिताया है और अब तक प्रशिक्षक के रूप में 14 मैच जीते हैं। यदि फ्रांस 2026 में दो मैच जीते तो डे चैंप्स हेलमट के साथ संयुक्त सबसे अधिक जीतने वाले प्रशिक्षक बनेंगे, और तीन मैच जीतने पर विश्व कप इतिहास के सर्वाधिक जीतने वाले प्रशिक्षक बन जाएंगे।

सर्वोच्च अदालत ने मेयर को गायों की निर्मम पिटाई न करने का निर्देश दिया

१९ जेठ, काठमाडौं। सर्वोच्च अदालत के फैसला कार्यान्वयन निर्देशनालय ने बुटवल उपमहानगरपालिका को सड़क पर मौजूद गाय-गोरुओं को गैरकानूनी और निर्ममतापूर्ण तरीके से पिटने से रोकने का निर्देश दिया है। निर्देशनालय ने २०८३ असार १८ गते उपमहानगरपालिका को पत्र भेजकर यह निर्देश दिया। पत्र में नगर प्रमुख के निर्देशन में नगर कर्मचारी और नगर पुलिस द्वारा सड़क पर गाय-गोरुओं की पिटाई किए जाने को सर्वोच्च अदालत के २०७६ वैशाख ८ गते के परमादेश के विपरीत बताया गया है। स्नेहा केयर की अध्यक्ष स्नेहा श्रेष्ठ ने कुछ दिन पूर्व बुटवल में हुई इस घटना की शिकायत करते हुए निर्देशनालय को निवेदन किया था। निवेदन में नगर प्रमुख की सक्रिय भूमिका में जानबूझकर गाय-गोरुओं पर पिटाई किए जाने का आरोप लगाया गया था।

सर्वोच्च अदालत ने २०७६ वैशाख ८ गते दिये गए अपने परमादेश में गाय को राष्ट्रीय पशु के रूप में संरक्षण देने, बेवारिस गाय-गोरुओं के उचित प्रबंधन की व्यवस्था करने तथा पिटाई या हत्या जैसे कार्यों में संलिप्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का प्रावधान किया है। अदालत के फैसले में उल्लेख है कि गाय-गोरुओं की हत्या, अकाल मृत्यु या संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने वालों की नियत, लापरवाही या उपेक्षा के कारण होने वाले क्षति पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। कार्यान्वयन के लिए निर्देशनालय ने बुटवल उपमहानगरपालिका को ऐसी गतिविधियों को तत्काल बंद करने और अदालत के आदेश का पूर्ण पालन करने का निर्देश दिया है। पत्र की प्रति नगर पुलिस को भी भेजी गई है। नेपाल के संविधान ने गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा प्रदान किया है। सर्वोच्च अदालत ने स्थानीय प्रशासन को पशु प्रबंधन, संरक्षण केंद्र स्थापना, पशु बीमा और वैज्ञानिक चरागाह प्रबंधन के उपाय अपनाने का भी निर्देश दिया था।

नारायणी नदी में तैरने के दौरान एक बच्चा डूबकर लापता

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा पश्चात तैयार।

  • नवलपरासी के गैँडाकोट स्थित नारायणी नदी में १९ जेठ को तैरते समय एक बच्चा लापता हुआ, जबकि एक अन्य को बचा लिया गया।
  • नदी के किनारे मिले कपड़ों के आधार पर बच्चे चितवन के नारायणघाट स्थित बालकुमारी कन्या माध्यमिक विद्यालय के छात्र हो सकते हैं।
  • इलाका पुलिस कार्यालय गैँडाकोट के प्रमुख लक्ष्मण गिरी के अनुसार लापता बच्चे की तलाश जारी है।

१९ जेठ, नवलपुर (नवलपरासी)। नवलपरासी (बर्दघाट–सुस्तापूर्व) के गैँडाकोट–२ में स्थित नारायणी नदी में तैरते समय एक बच्चा डूबकर लापता हो गया।

इलाका पुलिस कार्यालय गैँडाकोट के प्रमुख पुलिस निरीक्षक लक्ष्मण गिरी ने बताया कि आज नदी में तैरने के दौरान एक बच्चा लापता हो गया है।

‘नारायणी नदी में दो बच्चे तैरने गए थे, जिनमें से एक लापता हुआ जबकि दूसरे बच्चे को बचाकर अस्पताल ले जाया गया,’ उन्होंने कहा, ‘लापता बच्चे की खोज जारी है।’

पुलिस ने यह भी बताया कि लापता और बचाए गए दोनों बच्चों की पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।

नदी में तैरने से पहले किनारे रखे गए कपड़ों के आधार पर पुलिस का अनुमान है कि ये बच्चे चितवन के नारायणघाट में बालकुमारी कन्या माध्यमिक विद्यालय के छात्र हो सकते हैं।

लामिन यमाल को नहीं मिली 10 नंबर जर्सी, पहनेंगे 19 नंबर जर्सी

फीफा विश्व कप 2026 के लिए स्पेन टीम के जर्सी नंबरों का घोषणा कर दी गई है। युवा स्टार लामिन यमाल को 10 नंबर जर्सी नहीं मिली है, वे 19 नंबर जर्सी पहनेंगे। बार्सिलोना से इस सीजन से 10 नंबर जर्सी पहनने वाले यमाल राष्ट्रीय स्पेन टीम में अपनी परिचित 19 नंबर जर्सी ही पहनेंगे। दो साल पहले उन्होंने स्पेन को यूरोपियन चैंपियन बनाने में भी 19 नंबर की जर्सी में योगदान दिया था।

स्पेन की प्रतिष्ठित 10 नंबर जर्सी को डानी ओल्मो पहनेंगे। टीम घोषित होने के बाद ओल्मो ने सोशल मीडिया के जरिए इस बारे में संकेत भी दिया था। वहीं, गावी को 9 नंबर जर्सी दी गई है। करीब एक साल बाद राष्ट्रीय टीम में लौटे गावी को उनकी पुरानी जर्सी संख्या फिर से मिली है।

स्पेन समूह ‘एच’ में है और 15 जून को केप वर्डे के खिलाफ अपना विश्व कप सफर शुरू करेगा। इसके बाद वह सऊदी अरब और उरुग्वे के खिलाफ मुकाबला करेगा। 2010 में पहली बार विश्व कप टाइटल जीतने वाली स्पेन की नजर दूसरी बार विश्व कप जीतने पर है।

सभामुख से सांसदों ने संसद संचालन को लेकर प्रश्नोत्तर किया

प्रधानमंत्री द्वारा नेपाल-भारत सीमा विवाद पर व्यक्त की गई अभिव्यक्ति के विरोध स्वरूप विपक्षी दल के सांसदों ने प्रतिनिधि सभा की बैठक में वेल घेराव कर नारेबाजी की। विपक्षी अवरोध के बीच सभामुख अर्याल ने राष्ट्रपति कार्यालय से प्राप्त विधेयक प्रमाणीकरण संबंधित पत्र पढ़कर सदन को जानकारी दी। विपक्षी नारेबाजी के कारण बैठक के बाकी कार्यसूची को आगे नहीं बढ़ाया गया और प्रतिनिधि सभा की अगली बैठक आगामी २५ जेठ को तीसरे बार स्थगित कर दी गई है। १९ जेठ, काठमांडू। विपक्षी दल के सांसदों ने जबरदस्ती संसद् चलाए जाने की बात कहते हुए सभामुख से प्रश्नोत्तर किया। विपक्षी वेल घेराव और नारेबाजी के कारण कुछ समय तक बैठक प्रभावित रही। मंगलवार को सभामुख के साथ विपक्षी सांसदों का सवाल-जवाब हुआ। दोपहर एक बजे बुलायी गई बैठक दो बजकर दो मिनट पहले शुरू की गई थी। कानूनी रूप से निर्धारित समय से दो घंटे देरी होने पर बैठक स्वतः स्थगित हो जाती है, इसलिए दो मिनट पहले घंटी बजाकर बैठक शुरू की गई थी। सभामुख ने “प्रतिनिधि सभा बैठक की कार्यवाही प्रारंभ होती है” कहते ही विपक्षी सांसद उठ खड़े हुए। सभामुख अर्याल ने याद दिलाया कि विपक्षी सांसद पिछले दो-तीन दिन से उठे हुए हैं और बजट पर चर्चा के कार्यसूची को आगे बढ़ाने में सहयोग करने का अनुरोध किया। पर विपक्षी दल ने इसे अस्वीकार कर दिया। सभामुख ने बताया कि कल भी यह विषय रखा गया था और आज अनौपचारिक चर्चा में है, अतः इसे कार्यसूची में शामिल करने का आग्रह किया। आकस्मिक समय में अपनी बातें रखने का अवसर देने का प्रयास किया, लेकिन विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री की सीमा विवाद संबंधी अभिव्यक्ति संसद में स्पष्ट की जानी चाहिए कहा। विपक्षी सांसदों के उठते ही सभामुख ने कांग्रेस प्रमुख सचेतक बसना थापा को बोलने का समय दिया, लेकिन कांग्रेस ने शुरुआत में अभिषेक प्रताप साह को बोलाने का प्रस्ताव रखा। साह ने प्रधानमंत्री बालेन द्वारा नेपाल द्वारा भी भारत की जमीन मिचे जाने के बयान को तथ्यहीन बताते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है और सरकार को जवाब देना चाहिए। साह ने कहा, ‘प्रधानमंत्री को या तो यह अभिव्यक्ति वापस लेनी चाहिए या माफी मांगनी चाहिए, नहीं तो संसद का संचालन संभव नहीं होगा।’ पिछले रविवार को हुई प्रतिनिधि सभा की बैठक में प्रधानमंत्री बालेन ने नेपाल–भारत सीमा विवाद को कूटनीतिक वार्ता से सुलझाने का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था, ‘शायद आप समझें, मुझे प्रधानमंत्री बनने के बाद पता चला कि केवल भारत ही नहीं, नेपाल ने भी कई स्थानों पर भारत की जमीन मिचाई है।’ इस अभिव्यक्ति के प्रति विपक्षी दल लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध के बावजूद प्रतिनिधि सभा की बैठक संचालन जारी है। विपक्षी विरोध के बावजूद प्रतिनिधि सभा ने नियमावली और निर्वाचन संबंधित विधेयकों को पारित कर दिया है। विपक्षी का विरोध जारी रहने के बावजूद सभा संचालन जारी है, जिसके कारण विपक्षी सांसदों ने सभामुख से भी प्रश्न किया। सभामुख और सांसदों के बीच उसी समय प्रश्नोत्तर हुआ। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख सचेतक युवराज दुलाल ने बताया कि विपक्षी का दृष्टिकोण सदन को सहज रूप से चलाने का है। सांसद दुलाल ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि सदन को सहजता से संचालन करके बजट पर चर्चा कर इसे पारित करें। कानून निर्माण की जिम्मेदारी नेपाली जनता ने दी है, इसलिए सदन बिना विघ्न के चलना चाहिए, हम विघ्न डालने के पक्ष में नहीं हैं।’ दुलाल ने सभामुख को विपक्ष द्वारा उठाए गए सीमा विवाद और प्रधानमंत्री के बयान के प्रश्न भी दिए। उन्होंने कहा, ‘साउन १ से लागू होने वाले नए आर्थिक वर्ष के बजट से भी अधिक संवेदनशील विषय देश की सीमा है। इसे लेकर उच्चस्तरीय राजनीतिक चर्चा और सभामुख की पहल तुरंत आवश्यक है।’ सभामुख ने जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए विषय से ज्यादा बजट गम्भीर विषय है ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं। ‘मैंने यह नहीं कहा कि यह मामला गम्भीर नहीं है। लेकिन हम कार्यसूची में जिन विषयों को शामिल किया गया है, उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास करें। आपके द्वारा उठाए गए विषय पर सरकार ध्यान दे रही है और संवाद जारी है।’ सभामुख ने स्पष्ट किया। राप्रपा की प्रमुख सचेतक खुश्बू ओली ने भी सभामुख से आग्रह किया कि वे दबाव बनाने वाले तरीके से सदन संचालित करने से बचें। ओली ने कहा, ‘मैं आपसे निवेदन करती हूं कि आज फिर दबाव डालने की बजाय सभी दलों के शीर्ष नेताओं और सांसदों को बुलाकर चर्चा करें। हमें इस विषय को राष्ट्र की गरिमा से जोड़कर देखना होगा।’ सभामुख अर्याल ने जवाब देते हुए कहा कि हमारी ओर से संवाद जारी है, इसलिए आप आश्वस्त रहें। उन्होंने कहा, ‘सम्मानित सदस्यों द्वारा उठाए गए विषयों पर मेरा ध्यान गया है। सरकार ने भी इसे गंभीरता से लिया है। सरकार इसका समाधान पेश करेगी और मैं विपक्षी दल के नेताओं के साथ नियमित संवाद करता रहता हूं।’ हालांकि संसद संचालन संबंधी प्रश्नोत्तर के बावजूद सहमति नहीं बनी। सभामुख ने आकस्मिक वक्तृत्व के लिए मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के नेता भीष्मराज आङदाम्बे लाई भी समय दिया। विपक्षी के विरोध के बीच सभामुख ने राष्ट्रपति से प्राप्त प्रमाणीकरण वाले विधेयक संबंधी पत्र पढ़कर सुनाया। प्रतिनिधि सभा निर्वाचन अधिनियम संशोधन विधेयक और मतदाता नामावली अधिनियम संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति द्वारा प्रमाणित किया गया है। इसके पश्चात विपक्षी सांसदों के वेल घेराव के कारण सभामुख ने राष्ट्रपति कार्यालय का पत्र पढ़कर सदन को जानकारी दी। तत्पश्चात बैठक का बाकी कार्यसूची आगे नहीं बढ़ा और अगली बैठक २५ जेठ के लिए स्थगित कर दी गई।

शिक्षक महासंघ की मांगें और शिकायतें

फाइल तस्वीर


समाचार सारांश

संपादकीय रूप से समीक्षा किया गया।

  • शिक्षक महासंघ ने प्रारंभिक बालशिक्षा के शिक्षकों और विद्यालय कर्मचारियों की पारिश्रमिक समस्याओं को सरकार द्वारा बजट में नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।
  • कुल बजट का 20 प्रतिशत शिक्षा क्षेत्र में निवेश करने की मांग के विपरीत, सरकार ने केवल 10.27 प्रतिशत बजट का आवंटन किया है, महासंघ ने यह जानकारी दी।
  • महासंघ ने 2082 वैशाख 17 को सरकार के साथ हुए 9 बिंदुओं के समझौते को तत्काल लागू करने और विद्यालय शिक्षा अधिनियम जारी करने की मांग की है।

19 वैशाख, काठमांडू। शिक्षक महासंघ ने बताया है कि सरकार ने प्रारंभिक बालशिक्षा के शिक्षकों एवं विद्यालय कर्मचारियों की परेशानियों का समाधान नहीं किया है।

महासंघ ने अपनी विज्ञप्ति में कहा है, ‘बजट ने लंबे समय से न्यूनतम वेतन पर काम कर रहे प्रारंभिक बालशिक्षा के शिक्षकों और विद्यालय कर्मचारियों की समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया है, साथ ही विद्यालयों में कार्यरत शिक्षण अनुदान प्राप्त शिक्षकों के लिए महंगाई भत्ता भी सुनिश्चित नहीं किया गया है।’

महासंघ ने प्रारंभिक बालशिक्षा के शिक्षकों और विद्यालय कर्मचारियों के पद और स्तर निर्धारित कर वेतन-वृद्धि और अन्य सेवा सुविधाएँ प्रदान करने तथा सभी शिक्षण अनुदान प्राप्त शिक्षकों को महंगाई भत्ता देने की मांग की है।

बजट में शिक्षक और पेशेवर वर्ग की पारिश्रमिक वृद्धि सकारात्मक है, लेकिन शिक्षा क्षेत्र में उचित निवेश नहीं हुआ है, महासंघ ने कहा।

‘कुल बजट का 20 प्रतिशत शिक्षा क्षेत्र में निवेश करने की लगातार मांग के बावजूद इस वर्ष केवल 10.27 प्रतिशत बजट आवंटित होना यह दर्शाता है कि शिक्षा क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता में नहीं है,’ विज्ञप्ति में कहा गया है।

50 यूनिट से अधिक विद्युत खपत पर 5 प्रतिशत वैट लगाने के प्रावधान से लगातार आर्थिक तंगी झेल रहे सामुदायिक विद्यालयों और नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, महासंघ ने चिंता जताई है।

2082 वैशाख 17 को सरकार के साथ हुए 9 बिंदुओं के समझौते को तुरंत लागू कर विद्यालय शिक्षा अधिनियम जारी करने की महासंघ ने फिर से मांग की है।

प्रतिनिधि सभा नियमावली 2083: संसद में क्यों उठा विवाद और तनाव?

प्रतिनिधि सभा में प्रस्तावित नियमावली का विरोध करते हुए विपक्षी दल के सांसद

तस्वीर स्रोत, Nepal Photo Library

तस्वीर का कैप्शन, नियमावली पारित करते समय प्रतिनिधि सभा में तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई थी

विपक्षी सांसदों ने कड़ी असंतोष जताई, बावजूद इसके रविवार रात प्रतिनिधि सभा ने नई नियमावली पारित कर दी। पारित करते समय संसद के कार्यस्थल पर नाटकीय दृश्यों का सामना करना पड़ा।

विपक्षी दलों का रोष अभी शांत नहीं हुआ है। उनसे बातचीत में दो मुख्य मदों पर सबसे अधिक असहमति देखने को मिली।

उनका मानना है कि नई नियमावली के धारा 140(11) और धारा 259 विवाद के प्रमुख कारण हैं।

विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए धाराएँ क्या हैं?

धारा 140(11) संविधान संशोधन विधेयक की कार्यप्रणाली से संबंध रखती है, जबकि धारा 259 नियमावली को सांसदों के विशेषाधिकार से जोड़ती है।

विपक्षी दल दावा करते हैं कि सत्तारूढ़ दल ने बहुमत के बल पर संविधान का उल्लंघन करते हुए नियमावली को आगे बढ़ाया है, वहीं राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के सांसद इस आरोप को अस्वीकार करते हुए तर्क देते हैं कि संविधान का उल्लंघन नहीं हुआ है।

संसदीय नियमावली २०८३ ने संसद में क्यों उत्पन्न किया विवाद और टकराव?

प्रतिनिधि सभा में प्रस्तावित नियमावली के खिलाफ प्रदर्शन करते विपक्षी सांसद

फोटो स्रोत, नेपाल फोटो लाइब्रेरी

क्याप्शन, प्रतिनिधि सभा में नियमावली पारित करने पर तनाव बढ़ा

विपक्षी सांसदों के तीव्र विरोध के बावजूद, प्रतिनिधि सभाने रविवार रात देर से नई नियमावली पारित कर दी। संसद कक्ष में नाटकीय दृश्य देखने को मिले।

विपक्षी दलों में क्रोध अभी भी शांत नहीं हुआ है। सांसदों के बातचीत से विवाद के दो मुख्य बिंदु सामने आए हैं।

विपक्ष ने नई नियमावली के धारा १४० (११) और २५९ को विवाद के केंद्र में बताया है।

विपक्ष द्वारा उठाए गए मुख्य प्रावधान क्या हैं?

धारा १४० (११) संविधान संशोधन विधेयक से जुड़े प्रक्रिया का वर्णन करता है जबकि धारा २५९ नियमावली में संसदीय विशेषाधिकार संबंधी है।

विपक्षी दलों का कहना है कि बहुमत का लाभ उठाते हुए सरकार ने नियमावली को संविधान उल्लंघन करते हुए लागू किया है। वहीं राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के सांसद इसे संविधान उल्लंघन से इनकार करते हैं।