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लेखक: space4knews

सहकारी बेथितिका १४ कर्मचारीलाई स्पष्टीकरण, थप अध्ययनका लागि समिति गठन

भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालयले सहकारी क्षेत्रमा देखिएका बेथितिहरूको छानबिन तीव्र बनाएको छ। सहकारी जाँचबुझ आयोगको प्रतिवेदनका आधारमा मन्त्रालयले १४ जना तत्कालीन पदाधिकारी तथा कर्मचारीसँग सात दिनभित्र स्पष्टीकरण माग गरेको छ। आयोगको प्रतिवेदन कार्यान्वयन तथा थप अध्ययनका लागि प्रशासन महाशाखा प्रमुखको संयोजकत्वमा पाँच सदस्यीय समिति गठन गरिएको छ। सहकारी मन्त्री प्रतिभा रावलले सहकारी क्षेत्रको संरचनागत सुधारका लागि ठोस योजनामा काम सुरु भएको बताइन्। १९ जेठ, काठमाडौं।

नेपाल सरकार मन्त्रिपरिषद्को निर्णयअनुसार गठन भएको सहकारी बेथितिजाँचबुझ आयोग, २०८२ ले पेश गरेको प्रतिवेदनमा दिइएका सुझाव र सिफारिसहरू कार्यान्वयन गर्न मन्त्रालय तयार भएको जनाएको छ। मन्त्रिपरिषद्को जेठ ११ गतेको निर्णयअनुसार सार्वजनिक गरिएको उक्त प्रतिवेदनमा सहकारी दर्ता, कार्यक्षेत्र विस्तार, सेवा केन्द्र तथा शाखा कार्यालय स्वीकृति र एकीकरण लगायतका कामहरूमा सहकारीका सिद्धान्त, मूल्य–मान्यता र प्रचलित कानुन विपरीत भूमिका निर्वाह गरेको भन्दै तत्कालीन जिम्मेवार पदाधिकारी र कर्मचारीहरूलाई स्पष्टीकरणको लागि सोधिएको छ।

प्रतिवेदनमा १४ जना तत्कालीन पदाधिकारी तथा कर्मचारीहरूको नाम उल्लेख गरी छानबिन गर्न सिफारिस गरिएको थियो। स्पष्टीकरण सोधिने व्यक्तिहरू शाखा अधिकृतदेखि सहसचिवसम्मका रहेका छन्। मन्त्रालयले सम्बन्धित व्यक्तिहरूलाई पत्राचार गर्दै आफ्नो कार्यकालमा आयोगको प्रतिवेदनमा उल्लिखित अनुचित कार्य गरेको हो कि होइन भन्ने विषयमा आधारसहित सात दिनभित्र लिखित जवाफ माग गरेको छ। तोकिएको अवधिभित्र जवाफ नभएमा प्रचलित कानुनबमोजिम आवश्यक कानुनी प्रक्रिया अगाडि बढाइने मन्त्रालयले जनाएको छ।

थप अध्ययनका लागि मन्त्रालयले प्रशासन महाशाखा प्रमुखको संयोजकत्वमा पाँच सदस्यीय समिति गठन गरेको छ। समितिमा सहकारी नियमन प्राधिकरणका निर्देशक, मन्त्रालयको कानुन महाशाखाका उपसचिव, सहकारी विभागका उपरजिष्टार, र मन्त्रालयको सहकारी प्रवर्द्धन शाखाका उपसचिव सदस्य सचिव रहने व्यवस्था गरिएको छ। समितिलाई आयोगको प्रतिवेदनको विस्तृत अध्ययन गरी तत्कालीन तथा दीर्घकालीन सुधारका सुझाव तयार गर्न, प्राप्त स्पष्टीकरणहरूको विश्लेषण गर्न, नयाँ सहकारी ऐनको मस्यौदा तयार गर्न सहयोग गर्न तथा प्रतिवेदनमा उल्लिखित सहकारी संस्थासम्बन्धी टिप्पणी फाइलहरूको अध्ययन तथा विश्लेषण गर्न कार्यादेश दिइएको छ। विभागीय मन्त्री प्रतिभा रावलले प्रतिवेदन कार्यान्वयनलाई प्राथमिकताका साथ अगाडि बढाइने बताइन् र भनिन्, ‘प्रतिवेदनका सुझावअनुसार सहकारी क्षेत्रको संरचनागत सुधारका लागि ठोस योजनाहरुमा काम सुरु भइसकेको छ।’

सहकारी कानून के विपरीत कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया

सहकारी क्षेत्र में अनियमितताओं की जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय ने १४ तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों से ७ दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांग किया है। आयोग की रिपोर्ट के क्रियान्वयन और विस्तार अध्ययन हेतु मंत्रालय ने प्रशासन महाशाखा प्रमुख के संयोजन में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। विभागीय मंत्री प्रतिभा रावल ने कहा, “रिपोर्ट के सुझावानुसार सहकारी क्षेत्र के संरचनात्मक सुधार के ठोस योजना पर काम शुरू हो चुका है।” १९ जेठ, काठमाडौँ।

भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र में विसंगतियों और अनियमितताओं की जांच को तीव्र कर दिया है। नेपाल सरकार के मंत्रिपरिषद के निर्णयानुसार गठित सहकारी अनियमितता जाँच आयोग, २०८२ द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के सुझावों और सिफारिशों को कार्यान्वित करने में मंत्रालय लगा है।

मंत्रिपरिषद के २०८३ जेठ ११ के निर्णय के अनुसार सार्वजनिक रिपोर्ट में सहकारी रजिस्ट्रेशन, कार्यक्षेत्र विस्तार, सेवा केन्द्र एवं शाखा कार्यालयों की स्वीकृति और एकीकरण जैसे कार्यों में सहकारी सिद्धांत, मूल्य-मान्यता और कानून के विपरीत कार्य करने वाले तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। रिपोर्ट में १४ तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम औपचारिक रूप से उल्लेखित कर उनसे जांच करने का सुझाव दिया गया था। स्पष्टीकरण मांगे गए कर्मियों में शाखा अधिकृत से लेकर सहसचिव तक के पदाधिकारी शामिल हैं। मंत्रालय ने संबंधित व्यक्तियों को पत्राचार कर आयोग की रिपोर्ट में उल्लिखित विषयों पर सात दिनों में आधार सहित लिखित जवाब देने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समयावधि में जवाब न मिलने पर प्रचलित कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

अधिक अध्ययन के लिए समिति का गठन किया गया है। मंत्रालय ने आयोग की रिपोर्ट के कार्यान्वयन और विस्तृत अध्ययन हेतु प्रशासन महाशाखा प्रमुख के संयोजन में पांच सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में सहकारी नियमन प्राधिकरण के निदेशक, मंत्रालय के कानूनी महाशाखा के उपसचिव, सहकारी विभाग के उपरजिस्ट्रार तथा मंत्रालय के सहकारी प्रवर्धन शाखा के उपसचिव सदस्य–सचिव रहेंगे। समिति को आयोग की रिपोर्ट का गहन विश्लेषण कर तत्कालीन एवं दीर्घकालीन सुधार हेतु सुझाव तैयार करने, प्राप्त स्पष्टीकरणों का विश्लेषण करने, नए सहकारी कानून का मसौदा बनाने में सहयोग देने तथा रिपोर्ट में उल्लिखित सहकारी संस्थाओं से संबंधित टिप्पणी फाइलों का अध्ययन एवं विश्लेषण करने का दायित्व सौंपा गया है। विभागीय मंत्री प्रतिभा रावल ने कहा कि रिपोर्ट के क्रियान्वयन को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “रिपोर्ट के सुझावानुसार सहकारी क्षेत्र के संरचनात्मक सुधार की ठोस योजना पर काम शुरू हो चुका है।”

सहकारी कानून के विरुद्ध कार्य करने वाले पदाधिकारी एवं कर्मचारियों से मांगा स्पष्टीकरण

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा गरिएको।

  • सहकारी क्षेत्र की अनियमितताओं की जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर मंत्रालय ने 14 तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों से 7 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण माँगा है।
  • आयोग की रिपोर्ट के क्रियान्वयन और आगे अध्ययन के लिए मंत्रालय ने प्रशासन महाशाखा प्रमुख की संयोजकता में 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है।
  • विभागीय मंत्री प्रतिभा रावल ने कहा, “रिपोर्ट के सुझावों के अनुसार सहकारी क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार की ठोस योजना पर काम शुरू हो चुका है।”

19 ज्येष्ठ, काठमांडू। भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामले तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र में अनियमितताओं की जांच को तीव्र कर दिया है।

नेपाल सरकार के मंत्रिपरिषद् के निर्णय के अनुसार गठित सहकारी क्षेत्र की अनियमितताओं की जांच आयोग, 2082 द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में सुझाए गए सुधारों को लागू किया जा रहा है, मंत्रालय ने यह जानकारी दी।

मंत्रिपरिषद् के 2083 ज्येष्ठ 11 के निर्णय के अनुसार सार्वजनिक की गई रिपोर्ट में सहकारी पंजीकरण, कार्यक्षेत्र विस्तार, सेवा केंद्र एवं शाखा कार्यालय स्वीकृति और एकीकरण जैसे कार्यों में सहकारी सिद्धांतों, मूल्य–मान्यताओं एवं प्रचलित कानूनों के विरुद्ध भूमिका निभाने वाले तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण माँगा गया है।

रिपोर्ट में 14 तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों के नामों को अंकित करते हुए जांच की सिफारिश की गई थी। स्पष्टीकरण मांगे जाने वालों में शाखा अधिकारी से लेकर सहसचिव तक के कर्मचारी शामिल हैं।

मंत्रालय ने संबंधित व्यक्तियों को पत्र भेज कर निर्देश दिया है कि वे अपनी कार्यकाल में आयोग की रिपोर्ट में उल्लिखित कार्यों को किया या नहीं किया, इसका आधार सहित सात दिनों के भीतर लिखित जवाब दें। निर्धारित समय में जवाब न मिलने पर प्रचलित कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

अधिक अध्ययन के लिए समिति का गठन

आयोग की रिपोर्ट के कार्यान्वयन और आगे अध्ययन के लिए मंत्रालय ने प्रशासन महाशाखा प्रमुख की संयोजकता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति में सहकारी नियमन प्राधिकरण के निदेशक, मंत्रालय के कानून महाशाखा के उपसचिव, सहकारी विभाग के उपरजिस्ट्रार और मंत्रालय की सहकारी प्रचार शाखा के उपसचिव सदस्य सचिव होंगे।

समिति को आयोग की रिपोर्ट का व्यापक अध्ययन कर तत्कालीन एवं दीर्घकालीन सुधार के सुझाव तैयार करने, प्राप्त स्पष्टीकरण का विश्लेषण करने, नए सहकारी अधिनियम का प्रारूप तैयार करने में सहायता देने तथा रिपोर्ट में उल्लेखित सहकारी संस्थाओं से संबंधित टिप्पणियों का अध्ययन और विश्लेषण करने का दायित्व सौंपा गया है।

विभागीय मंत्री प्रतिभा रावल ने कहा कि रिपोर्ट के सुझावों को प्राथमिकता देते हुए कार्यान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा, रिपोर्ट के सुझावों के अनुसार सहकारी क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार की ठोस योजना पर काम शुरू हो चुका है।

सरकार ने बिजली का उपयोग कर हरित यूरिया मल उत्पादन की योजना बनाई

सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष के बजट के माध्यम से नेपाल विद्युत् प्राधिकरण और निजी क्षेत्र के सहयोग से हरित यूरिया मल उद्योग संचालित करने की घोषणा की है। हरित यूरिया उत्पादन के लिए विद्युत् प्राधिकरण सहूलियत दर पर बिजली उपलब्ध कराएगा और उत्पादित मल को सरकार खरीदेगी। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि विद्युत् प्राधिकरण का मुख्य कार्य विद्युत सेवा प्रदान करना है, इसलिए इसे मल उत्पादन में शामिल नहीं होना चाहिए। १९ जेठ, काठमांडू। नेपाल में रासायनिक मल की कमी दूर करने के लिए सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष के बजट में एक महत्वाकांक्षी योजना प्रस्तुत की है। सरकार ने नेपाल विद्युत् प्राधिकरण और निजी क्षेत्र की सहकार्य में ‘कंपनी मॉडल’ में ‘हरित यूरिया’ मल उद्योग संचालित करने की घोषणा की है। आगामी वर्ष २०८३/८४ के बजट वक्तव्य के माध्यम से ऊर्जा, जल स्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय ने विद्युत् प्राधिकरण और निजी क्षेत्र के सहयोग से कंपनी मॉडल में हरित यूरिया मल उद्योग संचालन की बात कही है।

सरकार ने निजी क्षेत्र को आकर्षित करने के लिए उत्पादित मल की खरीद गारंटी (पीपीए) करने और सहूलियत दर पर बिजली उपलब्ध कराने की नीति अपनाई है। प्राधिकरण संचालक समिति के सदस्य अम्सुकिरण शाही के अनुसार, हाइड्रोजन को पृथक करके हरित यूरिया बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विश्वभर चर्चा में रहे हरित हाइड्रोजन को नेपाल में भी बजट में शामिल किए जाने के बाद अधिक रुचि दिखी है। सरकार ने इस विषय पर तीन अध्ययन कराए हैं। इन अध्ययनों से पता चला कि नेपाल में हरित यूरिया मल उत्पादन संभव है। इसी आधार पर सरकार ने पहली बार इसे बजट में शामिल किया है।

शुरुआत में उद्योग मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय के सचिवों के बीच चर्चा हुई थी। चर्चा के बाद इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए उदयपुर सीमेंट उद्योग को केंद्र में रखा गया था। सीमेंट उद्योग से निकलने वाले गैस को फ्यूज करके यूरिया मल बनाने की योजना है। हालांकि, वर्तमान में उदयपुर सीमेंट उद्योग बंद है। सरकार इसे पुनः संचालित करने की तैयारी में है। उसी आधार पर उक्त उद्योग से निकलने वाले वेस्ट गैस से हरित यूरिया मल बनाने की योजना है, यह शाही ने बताया।

हरित यूरिया सामान्यत: रासायनिक मल का उत्पादन करते समय प्राकृतिक गैस या कोयले जैसे जीवाश्म ईंधन का उपयोग किया जाता है, जो वातावरण में कार्बन उत्सर्जन बढ़ाता है। फिर भी, नेपाल में कार्यरत प्रचुर जलविद्युत का उपयोग करके पानी से हाइड्रोजन अलग कर बनाया जाने वाला मल ही हरित यूरिया कहलाता है। यह पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल होने के साथ-साथ स्वदेशी कच्चा माल (बिजली और पानी) पर आधारित है, ऐसा शाही ने बताया। हरित यूरिया के उत्पादन के लिए मुख्य तीन कच्चे माल आवश्यकता होती है: विद्युत्, पानी और कार्बनडाईऑक्साइड (CO₂)। पहले बिजली के जरिए पानी (H₂O) को तोड़कर हाइड्रोजन गैस निकाली जाती है। उसके बाद हवा से नाइट्रोजन लेकर निकाले गए हाइड्रोजन के साथ मिलाकर अमोनिया बनाया जाता है। अमोनिया में कार्बनडाईऑक्साइड मिलाने के बाद ठोस यूरिया मल बनता है, शाही ने बताया।

नेपाल में कार्बनडाईऑक्साइड को उदयपुर सीमेंट जैसी उद्योगों से निकलने वाली धुआं (वेस्ट गैस) को ‘कैप्चर’ करके उपयोग करने की योजना प्रस्तावित की गई है। ‘सीमेंट उद्योग से बड़े पैमाने पर CO₂ निकलता है, इसे उपयोग में लाने से प्रदूषण कम होता है और सस्ते में मल उत्पादन संभव होता है,’ शाही ने कहा। बजट में निर्दिष्ट किया गया है कि सरकार निजी क्षेत्र को इस उद्योग में निवेश के लिए विशेष सुविधा प्रदान करेगी। प्राधिकरण सहूलियत दर पर बिजली देगा और इसी आधार पर जल्द से जल्द परीक्षण के रूप में हरित यूरिया मल उत्पादन की योजना को आगे बढ़ाएगा। ‘हम पांच रुपये प्रति यूनिट बिजली देकर नेपाल में बड़ी मात्रा में यूरिया का उत्पादन करने की क्षमता रखते हैं,’ शाही ने कहा।

नेपाल में यह योजना कितनी संभव है? नेपाल में इसका तकनीकी अध्ययन काठमांडू विश्वविद्यालय द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान में साढ़े दो मेगावाट की क्षमता वाला एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है। वर्षा ऋतु में अधिक होने वाली बिजली को मल उत्पादन में उपयोग करके बिजली की बर्बादी रोकी जा सकेगी, शाही ने बताया। जल तथा ऊर्जा आयोग का सचिवालय और वैकल्पिक ऊर्जा प्रचार केंद्र इसे प्राथमिकता देते हुए अध्ययन कर रहे हैं। पड़ोसी भारत में भी विद्युत प्राधिकरण के अंतर्गत ग्रीन हाइड्रोजन विभाग बनाया गया है। संभावनाएं होते हुए भी कुछ कानूनी और तकनीकी चुनौतियां बनी हुई हैं। प्राधिकरण के संचालक सदस्य शाही के अनुसार हाइड्रोजन के गुण जांचने और नियमन करने वाला किसी ‘नियामक निकाय’ की नेपाल में अभी तक व्यवस्था नहीं है। हाइड्रोजन गैस अत्यंत ज्वलनशील होती है, इसलिए इसकी सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण में विशेष सावधानी आवश्यक है।

नेपाल हर साल भारी राशि खर्च करके रासायनिक मल का आयात करता है। सरकार द्वारा बजट में प्रस्तावित हरित यूरिया अवधारणा सफल होने पर न केवल मल उत्पादन में बल्कि जलविद्युत उपयोग में भी नई(dimensoins) उम्मीदें जुड़ेंगी। प्राधिकरण इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। विशेषज्ञों का सवाल – क्या प्राधिकरण विद्युत उत्पादन करे या मल निर्माण? सरकार की इस योजना पर विशेषज्ञों ने आश्चर्य जताया है। उनका तर्क है कि विद्युत प्राधिकरण का कार्य विद्युत उत्पादन, प्रसारण और वितरण है, मल निर्माण में संलग्न नहीं होना चाहिए। विद्युत प्राधिकरण के पूर्व उपकार्यकारी निदेशक प्रबल अधिकारी ने सवाल उठाया कि क्या प्राधिकरण का काम मल बनाना है या यह विद्युत सेवा से संबंधित है। ‘विद्युत प्राधिकरण ने निजी क्षेत्र के साथ मिलकर हरित यूरिया मल बनाने की बात कही है, लेकिन प्राधिकरण का असली काम क्या है? यह विद्युत उत्पादन और सेवा में दक्ष है। उसी पर ध्यान केन्द्रित होना चाहिए और इसे बेहतर बनाने पर काम होना चाहिए,’ उन्होंने कहा, ‘मगर जब मल निर्माण की बात आती है तो यह पुनर्संरचना योजना से मेल नहीं खाती।’ एक तरफ प्राधिकरण को तीन कंपनियों में विभाजित करने की योजना है, वहीं दूसरी ओर मल उत्पादन करने का मुद्दा विरोधाभास लिए हुए है, उन्होंने कहा। ‘पुनर्संरचना के कारण प्राधिकरण के टूटने की स्थिति आएगी, तब मल निर्माण संभव होगा कैसे? क्यों प्राधिकरण मल बनाये? यह काम निजी सेक्टर कर सकता है, तो यह पहल क्यों?’ उन्होंने प्रश्न उठाया। विद्युत सेवा प्रदान करने वाले प्राधिकरण को मल निर्माण का जिम्मा देना, यह विषय उनके मुताबिक विचारणीय एवं गम्भीर है।

रविले भारतीय गृहमंत्री अमित शाह से नई दिल्ली में भेंट की

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने भारतीय गृहमंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस जयशंकर से नई दिल्ली में भेंट की है। भारतीय जनता पार्टी के निमंत्रण पर पांच दिन के दौरे के लिए भारत आए लामिछाने ने आज से राजनीतिक मुलाकातें शुरू की हैं। 19 जेठ, काठमांडू।

लामिछाने और अमित शाह के बीच भेंट कुछ समय पहले ही हुई है। पांच दिन के दौरे पर मौजूद लामिछाने ने आज विभिन्न राजनीतिक मुलाकातों की शुरुआत की है। उन्होंने आज ही विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की। वे भारतीय जनता पार्टी के निमंत्रण पर कल भारत पहुंचे थे।

नारा नया, कार्यक्रम जसका तसिका

१९ जेठ, पोखरा । ४ चैत २०८० मा तीनै तहका सरकार प्रमुखहरूको उपस्थितिमा पोखरालाई पर्यटनको राजधानी घोषणा गरिएको थियो। तर तीनै तहका सरकारले पर्यटकीय राजधानीलाई स्थापित गर्ने र पर्यटक आकर्षित गर्ने कुनै ठोस कार्यक्रम ल्याएनन्। पर्यटकीय राजधानी घोषणा भएपछिको पर्यटक संख्या, गतिविधि, योजना र भ्रमणस्थलको स्पष्ट विवरण कुनै पनि तहले प्रस्तुत गर्न सकेन। गण्डकी प्रदेश सरकारले पर्यटक आगमनको स्पष्ट तथ्यांक प्रस्तुत गर्न सकेको छैन। ५ वर्षभित्र भारत र चीनबाट आउने पर्यटकको संख्या दोब्बर गर्ने लक्ष्यसहित प्रचारमूलक कार्यक्रम घोषणा गरेको छ। पोखरालाई पर्यटनको राजधानीको रूपमा स्थापित गर्ने कार्य चालु आर्थिक वर्षको नीति तथा कार्यक्रममा समावेश गरिएको छ। आगामी वर्षको नीति तथा कार्यक्रममा पोखरालाई ब्राण्डिङ, प्रमुख परियोजना र अन्तर्राष्ट्रिय प्रचारसँग जोड्ने भनिएको छ भने भारत र चीनबाट आउने पर्यटक संख्या पाँच वर्षभित्र दोब्बर बनाउने लक्ष्य राखिएको छ।
गण्डकी प्रदेश सरकारले आर्थिक वर्ष २०८३/८४ का लागि ल्याएको नीति तथा कार्यक्रम वितरण र प्रचारमुखी देखिन्छ, जुन परिणाममुखीभन्दा बढी छ। अघिल्लो वर्षका अधिकांश कार्यक्रमलाई नयाँ नाम, नारा र लक्ष्यसहित पुनः प्रस्तुत गरिएको छ। नयाँ उपलब्धि मापन गर्न सकिने कार्यक्रमहरूको संख्या सीमित देखिन्छ। अघिल्लो वर्षको पर्यटन प्रवर्द्धन कार्यक्रम ‘गण्डकी जाऔँ: प्रकृति र संस्कृतिसँग रमाऔँ’ अभियानमा परिणत गरिएको छ। विद्यालयमा सूचना प्रविधि विस्तारलाई ‘डिजिटल गण्डकीको आधार: विद्यालयमा ICT पूर्वाधार’ को नारा दिइएको छ। युवा लक्षित कार्यक्रमलाई ‘अबको निकास: युवाको विकास’ अभियानको रूपमा प्रस्तुत गरिएको छ। यीमध्ये अधिकांश कार्यक्रम अघिल्लो वर्षकै निरन्तरता रहेको देखिन्छ।
प्रदेश प्रमुख डिल्लीराज भट्टले प्रदेश सभामा नीति तथा कार्यक्रम बुझाउने क्रममा नीति वितरण र प्रचारमुखी देखिएको बताएका छन्। धेरै क्षेत्रमा कार्यक्रमको नाम, नारा र प्रस्तुतीकरण बदलिएको भए पनि आधारभूत नीति र कार्यदिशा उही छ। कृषि, पर्यटन, युवा, शिक्षा र सामाजिक क्षेत्रका कार्यक्रमहरूमा प्रचार र अभियानमुखी भाषाको प्रयोग बढेको छ। कृषि, वन, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पूर्वाधार, खानेपानी, सहकारी, उद्योग, सुशासन र सामाजिक विकासका अधिकांश क्षेत्रहरूमा पुराना कार्यक्रमहरूलाई केही शब्द परिमार्जन, लक्ष्य विस्तार र नयाँ नारासहित पुनः संलग्न गरिएको छ। रैथाने बालीदेखि कृषि क्यारिडोरसम्म कृषि क्षेत्रमा सरकारको प्राथमिकता यथावत् रहेको छ।
रैथाने बाली संरक्षण, ब्राण्डिङ र बजार प्रवर्द्धन, असल कृषि अभ्यास, प्राङ्गारिक कृषि, कृषिजन्य यान्त्रीकरण, उत्पादन आधारित अनुदान, कृषि क्यारिडोर विकास, भूमि बैंक, भूमि उपयोग योजना, सुन्तला, कफी, अलैंची, स्याउ, ओखर लगायत उच्च मूल्यका बालीहरूको प्रवर्द्धन तथा कृषि बीमा कार्यक्रम अघिल्लो वर्षकै निरन्तरता जारी रहनेछ। माटो परीक्षण प्रत्येक वर्षको नीति तथा कार्यक्रममा रहेको भएपनि यस वर्ष ‘माटो स्वास्थ्य प्रमाणपत्र’ कार्यक्रम नयाँ नाममा समेटिएको छ। गाउँ फर्किएका युवालाई कृषि उद्यममा जोड्ने विशेष पहल गरिने जनाएको छ।
पशु स्वास्थ्य, खोप अभियान, पशुजन्य रोग नियन्त्रण, दुग्ध तथा मासु उत्पादन वृद्धि, पशुपन्छीको व्यावसायिकरण र पशु सेवा विस्तारका कार्यक्रमहरूलाई निरन्तरता दिइएको छ। यस वर्ष ‘वान हेल्थ’ नामक नयाँ दृष्टिकोणमार्फत मानव, पशु र वातावरणीय स्वास्थ्यलाई एकीकृत रूपमा हेर्ने नीति अघि सारिएको छ। सडक तथा पूर्वाधार: निरन्तरता नै मुख्य आधार प्रदेश सरकारले नयाँ मेगा पूर्वाधारभन्दा पहिले मूल विकासका रहेका योजनाहरू पूरा गर्ने रणनीति अपनाएको देखिन्छ। यस क्षेत्रमा नयाँ ठूला आयोजनाको घोषणा गर्ने भन्दा पुराना निर्माणाधीन आयोजनाहरू पूरा गर्ने, अधुरा सडक र पुलहरू पुरा गर्ने तथा चलिरहेका योजनाहरूसँग निरन्तरता दिने नीति देखिन्छ। सरकारले नयाँ थप्नुभन्दा पुराना पूरा गर्नेमै ध्यान दिएको छ जुन भविष्यमा बजेट उपलब्ध हुँदा स्पष्ट हुनेछ।
अधुरा सडक, सडक पुल, रणनीतिक सडक, शालग्राम क्यारिडोर, कोराला–पोखरा–त्रिवेणी सडक, ग्रामीण सडक सञ्जाल, बसपार्क स्तरोन्नति र विद्युतीय यात्रामा जोड दिइएको छ। दीर्घकालीन रूपमा निर्माणाधीन सडक र पुलहरू पूरा गर्ने, स्थानीय तह केन्द्रहरू जोड्ने बाँकी सडक कालोपत्रे गर्ने, मुस्ताङ–डोल्पा अन्तरप्रदेश सडक स्तरोन्नति, झोलुङ्गे पुल निर्माण, शालग्राम क्यारिडोर निरन्तरता र कोराला–पोखरा–त्रिवेणी सडक निरन्तरता प्राथमिकतामा राखिएको छ। प्रदेश स्तरमा आर्थिक परिवर्तनमा सहयोग पुर्‍याउने नयाँ मेगा परियोजना, औद्योगिक क्यारिडोर, सुरुङ मार्ग, नयाँ आर्थिक केन्द्र, स्मार्ट सिटी वा ठूला उत्पादनमूलक पूर्वाधारहरूको स्पष्ट रणनीति गण्डकीमा उपलब्ध छैन। नीति तथा कार्यक्रममा नयाँ सडक खोल्नु भन्दा मर्मत-सम्भार, सडक सुरक्षा परीक्षण, सम्पूर्ण सडक कायम राख्ने र अधुरा पुलहरू पूरा गर्ने पक्षलाई प्राथमिकता दिइएको छ, जसले पुराना पूर्वाधारलाई सञ्चालन योग्य बनाउने रणनीति पुष्टि गर्छ।
सार्वजनिक यातायात सुधार, बसपार्क स्तरोन्नति, विद्युतीय सवारी प्रवर्द्धन, राइड सेयरिङ नियमन र यातायात सेवामा डिजिटल प्रणाली विस्तारका कार्यक्रमहरू पनि विगत वर्षहरूदेखि निरन्तरता पाइरहेका छन्। उद्योग स्थापना, स्थानीय कच्चा पदार्थमा आधारित उद्योग प्रवर्द्धन, निर्यात वृद्धि, निजी क्षेत्रसँग साझेदारी, लगानी सम्मेलन, ‘इन्भेस्ट गण्डकी’ अभियान र व्यापार सहजीकरणका कार्यक्रमहरू अघिल्लो वर्षकै निरन्तरतामा छन्। लोकाहा खोला र पुँडीटारमा औद्योगिक क्षेत्र स्थापनाको विषय वर्षेनी निरन्तरता पाउँदै आएको भए पनि अहिलेसम्म सुरुवाती प्रक्रियामै छ।
धार्मिक पर्यटन सर्किट निर्माण, डायलाइसिसमा पालो कुर्न नपर्ने व्यवस्था आगामी वर्षको नीति तथा कार्यक्रममा दामोदरकुण्ड–मुक्तिनाथ–देवघाट–त्रिवेणीधाम धार्मिक पर्यटन सर्किट र लिगलिगकोट–गोरखा–मनकामना धार्मिक पदमार्ग विकासलाई नयाँ प्राथमिकताको रूपमा अघि सारिएको छ। विशेषीकृत स्वास्थ्य सेवा, आयुर्वेद सेवा, नसर्ने रोग नियन्त्रण, मानसिक स्वास्थ्य, जनस्वास्थ्य सेवा विस्तार, स्वास्थ्य जनशक्ति उत्पादन तथा स्वास्थ्य संस्थाको सुदृढीकरणलाई सरकार प्राथमिकतामा राखेको छ। सरकारले डायलाइसिस सेवामा पालो कुर्न नपर्ने व्यवस्था गर्ने घोषणा गरिसकेको छ। रोगको समुदाय स्तरिय स्क्रिनिङ, डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली विस्तार र विशेषज्ञ सेवा सुदृढीकरण जस्ता पुराना कार्यक्रम यस वर्ष पनि प्राथमिकतामा राखिएका छन्।
सूचना प्रविधिमैत्री शिक्षा, विद्यालयमा नवप्रवर्तन, प्राविधिक तथा व्यावसायिक शिक्षा, सीप विकास, गण्डकी विश्वविद्यालयलाई विशिष्टीकृत प्राविधिक विश्वविद्यालय बनाउन नीति तथा शैक्षिक गुणस्तर सुधार कार्यक्रम अघि सारिएको छ। मातृभाषा संरक्षण र प्रवर्द्धनलाई यस वर्ष थप जोड दिइएको छ। आगामी वर्ष एआई, साइबर सुरक्षा, स्टिम ल्याब जस्ता विषयहरूलाई सरकार प्राथमिकतामा राख्ने जनाएको छ। ‘सिक्दै कमाउँदै, कमाउँदै सिक्दै’ कार्यक्रमलाई पनि निरन्तरता दिइएको छ। युवालाई कृषि उद्यममा आकर्षित गर्ने कार्यक्रमलाई यस वर्ष विशेष रूपमा उठाइएको छ। युवासम्बन्धी कार्यक्रममा ‘युवाको विकास र विकासमा युवा’, ‘अबको निकास: युवाको विकास’ जस्ता आकर्षक नाराहरू समावेश गरिएका छन्। ‘एक घर: एक धारा’, ‘नदी किनारका गह्रा: सधैं हराभरा’, ‘एक जिल्ला, एक जलाशय’ जस्ता कार्यक्रमहरू आकर्षक नारा पाएका छन्। घरधुरीमा निजी धारा जडान, सिँचाइ विस्तार र मर्मत-सम्भार कोष स्थापनामा सरकारले जोड दिएको छ। नतिजामूलक अनुगमन, रियल टाइम अनुगमन प्रणाली, कर्मचारी कार्यसम्पादन मूल्यांकन, आयोजना प्रमुखलाई जवाफदेही बनाउने तथा डिजिटल शासन विस्तारजस्ता विषयहरूलाई सुशासनका लागि जोड दिइएको छ।

भीम रावल ने भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया के बाद प्रधानमंत्री से राय व्यक्त करने को कहा

१९ जेठ, काठमाडौं । नेपाली कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के नेता भीम रावल ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) से सीमा समस्या समाधान के संबंध में भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया के बाद स्पष्ट धारणा सार्वजनिक करने का आग्रह किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को नेपाल–भारत सीमा समस्या पर वार्ता में तीसरे पक्ष को शामिल करने के प्रस्ताव को अस्वीकार किया था। इस प्रतिक्रिया के बाद रावल ने प्रधानमंत्री की राय व्यक्त करने की मांग की है।

‘प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने नेपाल के अतिक्रमित भूभाग के विषय में ब्रिटेन सरकार को वार्ता में शामिल करने की बात संसद के प्रतिनिधि सभा में व्यक्त की थी। इसी संदर्भ में भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि भारत और नेपाल के द्विपक्षीय मामलों में तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं हो सकती,’ रावल ने कहा, ‘अब नेपाल की बहुत सी जमीन भारत द्वारा अतिक्रमित किए जाने की झूठी और राष्ट्रहित के विरुद्ध विचार को संसद के प्रतिनिधि सभा में रखने वाली राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी की लगभग दो तिहाई बहुमत वाली सरकार के प्रधानमंत्री के प्रति भारतीय विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया के जवाब की आवश्यकता है।’ उन्होंने कहा कि इस विषय में नेपाली जनता के बीच स्पष्टता लानी होगी।

‘स्मरण रहे, वर्तमान में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के सभापति रवि लामिछाने भारत यात्रा पर हैं,’ रावल ने आगे कहा।

फीफा विश्व कप २०२६ के लिए ४८ देशों की अंतिम टीम सूची जारी

फीफा ने २०२६ के विश्व कप के लिए भाग लेने वाले ४८ देशों के १,२४८ खिलाड़ियों की अंतिम सूची जारी की है। इस बार की प्रतियोगिता में केप वर्डे, क्यूराकाओ, जॉर्डन और उज़्बेकिस्तान ने ऐतिहासिक रूप से पहली बार विश्व कप में डेब्यू किया है। अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी और पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो रिकॉर्ड छठी बार विश्व कप खेलने की तैयारी में हैं। १९ जेठ, काठमांडू – फीफा विश्व कप २०२६ नजदीक है और कौन-कौन से देशों के खिलाड़ी इस大会 में हिस्सा लेंगे, इस बात को लेकर काफी उत्सुकता थी। लेकिन अब जब फीफा ने ४८ देशों की अंतिम टीमों की सूची जारी कर दी है, तो यह जिज्ञासा समाप्त हो गई है। २३वें संस्करण का फीफा विश्व कप ११ जून से अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में आयोजित होगा। विश्व कप शुरू होने में केवल ९ दिन बाकी हैं और सभी ४८ देशों की अंतिम टीमों की सूची जारी की गई है। फीफा के अनुसार, यह सूची प्रतियोगिता के सबसे दिलचस्प माइलस्टोन में से एक का प्रतिनिधित्व करती है।

तीन देशों में पहली बार आयोजित हो रहे इस फीफा विश्व कप में अब तक की सबसे अधिक १०४ मैच होंगे। पहली बार ४८ देश इस विश्व कप में प्रतिस्पर्धा करेंगे और कुल १,२४८ खिलाड़ी अंतिम टीम में चुने गए हैं। फीफा ने कहा है कि यह संस्करण विश्व फुटबॉल के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ होगा और इससे पहले से ज्यादा देशों, खिलाड़ियों और प्रशंसकों के लिए नए अवसर खुलेंगे। ४८ देशों की अंतिम टीम सूची इस प्रतियोगिता की विशालता और स्थायी आकर्षण को मजबूत करेगी। फीफा के अनुसार इस बार कम से कम एक बार विश्व कप खेलने वाले ३५७ खिलाड़ी पुनः इस बार खेलेंगे, जबकि ८९१ खिलाड़ी पहली बार विश्व कप का अनुभव लेने जा रहे हैं।

इस विश्व कप में खिलाड़ियों की उम्र में भी काफी अंतर है। स्कॉटलैंड के क्रेग गॉर्डन (४३ वर्ष १६२ दिन) इस प्रतियोगिता के सबसे वरिष्ठ खिलाड़ी हैं, जबकि मेक्सिको के गिल्बर्टो मोरा (१७ वर्ष २४० दिन) सबसे युवा खिलाड़ी हैं, जिनके बीच लगभग २५ वर्ष का अंतर है। प्रतिस्पर्धा की शुरुआत में २० वर्ष से कम उम्र के २२ खिलाड़ी और ४० वर्ष या उससे अधिक उम्र के ७ खिलाड़ी मैदान पर उतर सकते हैं। इस बार की खिलाड़ी सूची आधुनिक फुटबॉल के वैश्विक स्वरूप को भी स्पष्ट रूप से दर्शाती है। फीफा विश्व कप २०२६ में विश्व के ७१ देशों के ४४९ विभिन्न क्लबों के खिलाड़ी शामिल हैं। इनमें एशिया से १४, अफ्रीका से ६, कंकाकाफ क्षेत्र से ७, कॉनमेबोल से ८, ओशेनिया से १ और यूरोप से ३५ क्लब के खिलाड़ी शामिल हैं।

फुटबॉल की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में स्थापित सितारों के साथ-साथ चार नए देशों ने इस बार विश्व कप में पदार्पण किया है। केप वर्डे, क्यूराकाओ, जॉर्डन और उज़्बेकिस्तान पहली बार फीफा विश्व कप में हिस्सा ले रहे हैं। इस बार मुख्य आकर्षण उज़्बेकिस्तान की विश्व मंच पर ऐतिहासिक पहली उपस्थिति है, जहाँ मैनचेस्टर सिटी के अब्दुकुदिर खुसानोव जैसे प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी देश के सपनों को पूरा कर रहे हैं। अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी, पुर्तगाल के स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो, और मेक्सिको के गोलकीपर गुइलेर्मो ओचोआ भी अपनी रिकॉर्ड छठी फीफा विश्व कप में खेलने के लिए तैयार हैं। मेसी और रोनाल्डो विश्व कप में छठी बार खेलने का विश्व रिकॉर्ड बनाने की चुनौती में हैं।

प्रशिक्षकों के क्षेत्र में, घाना के पुर्तगाली कोच कार्लोस क्वीरोज़ लगातार पाँचवीं बार फीफा विश्व कप में कोच के रूप में भाग ले रहे हैं। उन्होंने २०१० में पुर्तगाल का, और २०१४, २०१८ तथा २०२२ में ईरान का नेतृत्व किया है। फीफा विश्व कप २०२६ खेलने वाले सभी ४८ देशों ने १ जून तक अपनी अंतिम टीम फीफा को सौंप दी थी, जिसके बाद मंगलवार को फीफा ने सभी टीमों की सूची सार्वजनिक की है।

विधायिका को छल गर्दै कर दरों में मनमानी संशोधन

१९ जेठ, काठमाडौं। सरकार की कर नीति और दरों से संबंधित अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज है – आर्थिक विधेयक। इसी विधेयक में उल्लिखित नीति और दरों के अनुसार सरकार ने १५ जेठ से कर वसूली शुरू कर दी है।

लेकिन संसद में १५ गते पेश किए गए आर्थिक विधेयक और अर्थ विभाग ने अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक किए गए आर्थिक विधेयक में कर संबंधी व्यवस्थाओं में व्यापक अंतर है। नेपाल सरकार ने संसद में ४६७ पृष्ठों का आर्थिक विधेयक दर्ता कराया है, जबकि अर्थ विभाग ने एकतरफा चार बार बदलाव कर अपनी साइट पर ४५० पृष्ठों का संशोधित दस्तावेज अपलोड किया है।

संसद सचिवालय के पूर्व सचिव, सोमबहादुर थापा के अनुसार संसद में दर्ता हो चुके विधेयक में कोई भी विषय में सुधार करना हो तो संसद की अनुमति अनिवार्य होती है। उन्होंने कहा, ‘संसद में पेश किए गए आर्थिक विधेयक में संशोधन लाने के लिए पहले संसद में मंजूरी लेना जरूरी है। अर्थ मंत्रालय को स्वयं संशोधन करने का कानूनी अधिकार नहीं है। यदि कर की दरों के विषय पर ही बिना मंजूरी संशोधन किया गया है तो यह एक गंभीर मामला है।’

हालांकि, ऐसा प्रतीत होता है कि अर्थ मंत्रालय ने कर दरों और नीति में मामूली नहीं बल्कि गंभीर बदलाव किए हैं।

एक पूर्व अर्थ सचिव ने कहा, ‘संसद में दर्ता हो चुके आर्थिक विधेयक में इस तरह मनमानी संशोधन होना स्वाभाविक नहीं है। चाहे कितनी भी सामान्य भूल हो, उसे संसद में चर्चा कर ही संशोधित किया जाना चाहिए।’ उन्होंने भले ही अर्थ मंत्री को मामूली संशोधन करने का बयान दिया हो, लेकिन इस विषय को लेकर उन्हें आश्चर्य हुआ है।

पहला– संसद सचिवालय में दर्ता आर्थिक विधेयक की अनुसूची १ में वैट छूट देने वाली वस्तुओं की सूची में ‘गृह उपयोग के लिए ५० यूनिट तक बिजली पर कर छूट’ का प्रावधान था। लेकिन मंत्रालय की वेबसाइट पर संशोधित विधेयक में इस व्यवस्था में बड़ा फर्क है। अब विद्युत व्यवसायी द्वारा बेची गई तथा घरेलू उपयोग के लिए ५० यूनिट तक की बिजली पर कर छूट का प्रावधान है, जिससे विद्युत आयोजना प्रवर्धकों को कर-मुक्ति देने की संभावना है।

पहले के विधेयक के अनुसार ५० यूनिट से कम खपत करने वाले ग्राहकों को छोड़कर सभी पर वैट लागू था। बिजली उत्पादन कंपनी यदि प्राधिकरण को बेचती तो भी वैट लगता। लेकिन संशोधित प्रावधान ने विद्युत आयोजना प्रवर्धकों को कर से अलग छूट दे दी है।

दूसरा– संसद में दर्ता विधेयक में महानगरपालिका और उपमहानगरपालिका के बाहर सिनेमा हॉल संचालित करने पर आयकर में कोई छूट का प्रावधान नहीं था। लेकिन अर्थ मंत्रालय ने आयकर कानून में संशोधन करते हुए ‘महानगरपालिका और उपमहानगरपालिका के बाहर स्थापित सिनेमाघरों को व्यवसाय शुरू करने की तिथि से १० वर्ष तक कर छूट’ प्रदान करने की व्यवस्था जोड़ी है।

चलचित्र क्षेत्र मनोरंजन के लिए है, परोपकार के लिए नहीं। यह छूट विशेष व्यक्तियों को ही लाभ पहुंचाने वाली दिखती है।

तीसरा– संसद में दर्ता विधेयक में व्यक्तियों को अपनी संतान के शिक्षण शुल्क भुगतान पर उस राशि को आयकर योग्य आय से घटाने का प्रावधान नहीं था। लेकिन मंत्रालय ने संशोधित विधेयक में ‘प्राकृतिक व्यक्तियों को संतान की शिक्षा के लिए किए गए भुगतान का २५ प्रतिशत या २५ हजार रुपये तक आय से घटाने’ की व्यवस्था की है।

चौथा– संसद में दर्ता विधेयक में ब्रिफकेस, वॉलेट, और सूटकेस पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी की दर १५ प्रतिशत थी। लेकिन मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर मौजूद संशोधित विधेयक में इसे ३० प्रतिशत बढ़ा दिया है।

पाँचवां– संसद में दर्ता विधेयक के सड़क निर्माण दस्तूर में सभी विद्युत चालित वाहन पर ५ प्रतिशत दस्तूर लगाने का उल्लेख था। लेकिन अर्थ मंत्रालय ने नई छूट व्यवस्था के तहत २० लाख तक मूल्य वाली कुछ मोटर गाड़ियों पर केवल २.५ प्रतिशत दस्तूर लगाने की व्यवस्था की है।

छठा– आर्थिक विधेयक की धारा ११ में विद्युतीय वाहनों पर लगने वाले स्वच्छ पूर्वाधार निवेश शुल्क में संशोधन कर पैठारी बिंदु पर अंतःशुल्क देने वाले वाहनों पर शुल्क न लगने का प्रावधान जोड़ा गया है।

संसद में दर्ता विधेयक में बिना सांसदों को जानकारी दिए सरकार द्वारा संशोधन करना उचित नहीं है, संसद सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा। उन्होंने कहा, ‘त्रुटि सुधारना भी हो तो संसद प्रक्रिया के तहत ही किया जाएगा।’

नाम न छापने की शर्त पर बोले पूर्व अर्थ सचिव ने कहा, ‘हमारे समय में विधेयक में त्रुटि हो तो भी स्वतः संशोधन की अनुमति नहीं होती थी।’

संसद सचिवालय के सहसचिव तथा प्रवक्ता एकराम गिरि ने भी बताया कि आर्थिक और बजट से संबंधित विधेयक पारित और संशोधन की स्पष्ट प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा, ‘पहले विनियोजन विधेयक पर चर्चा होती है, फिर बजट आधारित विधेयकों पर चर्चा और संशोधन होता है। सांसदों को ७२ घंटे का संशोधन समय दिया जाता है।’

बजट आधारित विधेयक केवल मंत्रिपरिषद और राष्ट्रपतीय प्रमाणीकरण के बाद लागू होता है।

चार्टर्ड एकाउंटेंट शेषमणि दाहाल ने कहा है कि कर नीतियों में संशोधन के लिए नियमित संसदीय प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

नेपाल-भारत सीमा विवाद: क्रॉस होल्डिंग या अतिक्रमण?

१९ जेठ, काठमाडौं। प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाह द्वारा सीमा विवाद संबंधित अभिव्यक्ति के बाद नेपाल-भारत सीमा विवाद पुनः गरमाई गया है। प्रधानमंत्री के कथनों को नेपाल और नेपाली को कमजोर करने वाला बताया जा रहा है, जिसके कारण संसद में भी इसका विरोध हो रहा है। सीमावासी भी उनकी इस अभिव्यक्ति से असंतुष्ट हैं।

इसी बीच, नवलपरासी के सुस्ता क्षेत्र में भारतीय सीमा सुरक्षा बल द्वारा नेपाली भूमि पर विवाद छेड़ने की खबर ने सीमावासियों में और आक्रोश बढ़ा दिया है।

सुस्ता बचाओ अभियान के कार्यकर्ता रविंद्र जैसवाल प्रधानमंत्री की अभिव्यक्ति से गुस्से में हैं। वे कहते हैं कि बार-बार भारतीय पक्ष द्वारा समस्या उत्पन्न किए जाने के समय प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी संवेदनशीलता और व्यावहारिकता की दृष्टि से कमजोर है।

‘राष्ट्रप्रमुख की ओर से भारतीय पक्ष के दावों को सत्यापित करना अत्यंत निंदनीय है। यह कूटनीति की बड़ी गलती है,’ उन्होंने कहा।

जैसवाल के अनुसार, प्रधानमंत्री की अभिव्यक्ति के बाद भारतीय मीडिया में इस विषय पर चर्चा तेज हुई है। सुस्ता के निवासी इस बात से चिंतित हैं क्योंकि उन्हें डर है कि भारतीय पक्ष इसे अपने दावे को साबित करने के लिए उपयोग करेगा।

जैसवाल ने बताया कि भारतीय सुरक्षा कर्मी ‘‘विवादित क्षेत्र में काम न करने’’ के लिए रोक लगा रहे हैं।

‘सुस्ता में टेकेन्ड के माध्यम से तटबंध निर्माण परियोजना चल रही है। १३५ मीटर का काम बाकी है। भारतीय पक्ष पूर्वी मार्ग के नजदीक काम करने की अनुमति नहीं दे रहा है और अवरोध उत्पन्न कर रहा है,’ उन्होंने कहा।

यह स्थिति पहली बार नहीं हुई है। हर निर्माण चरण में भारतीय पक्ष विवाद खड़ा करता है। नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल ने भी स्थल का निरीक्षण किया है। जैसवाल ने कहा कि भारतीय डीएम से बातचीत कर काम रोकने नहीं दिया जाएगा।

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१८ वर्षों से सुस्ता के लिए अभियान चला रहे कार्यकर्ता हेमराज दाहाल ने कहा कि यह विषय राष्ट्रीयता और देशभक्ति का मामला है।

‘यह देशभक्ति और राष्ट्रीयता का प्रश्न है। किसी भी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति कौन सा पद संभालते हैं, यह हमारे लिए मुख्य नहीं है,’ उन्होंने कहा, ‘सुस्ता हमारी जिले के बर्दघाट सुस्ता पूर्व एवं पश्चिम क्षेत्र का सामरिक महत्व वाला क्षेत्र है।’

प्रधानमंत्री द्वारा भारत के भूभाग को नेपाल ने मिच लिया जैसा बयान देने पर दाहाल ने आपत्ति जताई। ‘हम इसे निंदनीय और पूरी तरह से खारिज करते हैं,’ उन्होंने कहा, ‘माना जाता है कि यह अभिव्यक्ति रवि लामिछाने के भारत यात्रा से जुड़ी हुई है।’

जब आंदोलन के संस्थापक अध्यक्ष गोपाल गुरुङ की तीसरी पुण्यतिथि मनाई जा रही थी, तब दाहाल ने कहा, ‘यह आंदोलन हमने शुरू किया है, यह किसी भी व्यक्ति विशेष का नहीं है। यदि कोई प्रवक्ता या मीडिया को मैनिपुलेट कर स्वार्थ सिद्ध करने की कोशिश करता है तो हम उसका विरोध करेंगे।’

भूमि विवाद से बढ़कर सुस्तावासियों को गहरा दर्द है। ये समस्याएं बहुआयामी हैं।

नारायणी नदी की कटान से बार-बार जमीन बहती है और बाढ़ घरों को डुबो देती है। इसी तरह भारतीय सीमा सुरक्षा बल के बार-बार हस्तक्षेप से अपनी ही भूमि पर कार्य में बाधा आती है। नेपाल सरकार से लंबे समय से नागरिकता और लालपुर्जा न मिलने की शिकायत भी है।

सुस्ता के स्थानीय निवासी लालपुर्जा, नागरिकता, विद्युत जैसी मूलभूत समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हेमराज दाहाल ने कहा, ‘हम १८ वर्षों से इस भूमि की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं। हम भारत से अपनी भूमि की रक्षा करना चाहते हैं, लेकिन नेपाल के नागरिक नहीं हैं।’

जैसवाल भी नागरिका की कमी और भारतीय पक्ष के दबाव का द्विफोल दर्द साझा करते हैं।

‘नागरिकता नहीं मिलने की वजह से मेरा अधिकार अस्वीकार किया गया है। नेपाल सरकार को नागरिकता देना चाहिए।’ जैसवाल ने बताया कि यह केवल व्यक्तिगत शिकायत नहीं, बल्कि सुस्ता के कई परिवारों का दर्द है। ये परिवार परिचयहीन बनाए गए हैं और वे अपनी भूमि बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

हालांकि दाहाल ने इस मुद्दे को दलों से ऊपर उठाकर एक राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय समस्या है, न कि किसी विशेष पार्टी को बेपत्ता करने का मुद्दा।

‘यह कोई छोटा या बड़ा मामला नहीं है और किसी के पक्ष में या विपक्ष में नहीं है। सभी नेपाली को इस राष्ट्रीय मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए,’ उन्होंने आग्रह किया।

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वरिष्ठ भूगोलविद् डॉ. नरेन्द्रराज खनाल प्रधानमंत्री की अभिव्यक्ति के कारण उत्पन्न विरोधाभास पर ध्यान आकर्षित करते हैं। नेपाल सरकार ने लिपुलेक तक का क्षेत्र शामिल करने वाला आधिकारिक नवीन राजनीतिक एवं प्रशासनिक नक्शा जारी कर दिया है।

‘नेपाल सरकार ने आधिकारिक नक्शा जारी कर दिया है। प्रधानमंत्री की उक्त अभिव्यक्ति विरोधाभासी प्रतीत होती है,’ खनाल ने कहा।

उनके अनुसार, राष्ट्र के कार्यकारी प्रमुख को संसद में संवेदनशील विषयों पर अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि संसद में कहे गए शब्द आधिकारिक अभिव्यक्ति होते हैं और रिकॉर्ड में रहते हैं। इस प्रकार के बयानों का दीर्घकालिक कूटनीतिक असर हो सकता है।

खनाल प्रधानमंत्री द्वारा लिपुलेक, कालापानी और लिम्पियाधुरा विवाद के समाधान के लिए ब्रिटेन के साथ बातचीत को सकारात्मक मानते हैं। वे मानते हैं कि नेपाल-भारत सीमाओं को सीमित रखते हुए चीन और ब्रिटेन को भी वार्ताओं में शामिल करने का प्रयास दीर्घकालिक समाधान की संभावना बढ़ाएगा।

‘ब्रिटेन को वार्ता में शामिल करना सही है। परंतु प्रधानमंत्री को यह जानकारी देनी चाहिए थी कि ब्रिटेन ने इस विषय को कैसे लिया है और आगे की रणनीति क्या होगी,’ उन्होंने जोड़ा।

सिद्धांतों के विपरीत लागू हुई कर नीति, अर्थव्यवस्था पर बढ़ेगा खर्च

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • बजट के माध्यम से आयकर की सीमा 10 लाख रुपए की गई है और अधिकतम कर दर 29 प्रतिशत कर दी गई है।
  • बिजली और राइड शेयरिंग पर 5 प्रतिशत मूल्य अभिवृद्धि कर तथा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में 3 प्रतिशत समता शुल्क जोड़ा गया है।
  • नई कर नीति ने उच्च वर्ग को लाभ दिया है, परंतु निम्न वर्ग को राहत नहीं मिली, यह विश्लेषण वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट शेष मणि दाहाल ने किया है।

अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने बजट के माध्यम से कर नीति और दरों में ‘व्यापक बदलाव’ किए हैं। आयकर सीमा 10 लाख की गई है और अधिकतम दर घटाकर 29 प्रतिशत कर दी गई है। बिजली में 5 प्रतिशत वैट और शिक्षा-स्वास्थ्य में 3 प्रतिशत ‘समता शुल्क’ जोड़ा गया है। बिजली गाड़ियों के आयात पर कर लगाने की विधि भी बदली गई है। आखिरकार सरकार की यह कर नीति किसे लाभ पहुंचा रही है और अर्थव्यवस्था का खर्च बढ़ा रही है या घटा रही है? बजट की नई कर नीति और इसके आम नागरिकों पर प्रभाव के बारे में वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट शेष मणि दाहाल के साथ विश्लेषणात्मक बातचीत :

अर्थमंत्री ने शुरू में कहा कि ‘कर दरों में व्यापक बदलाव किए हैं।’ आर्थिक विधेयक देखने पर सच में कई बदलाव हुए हैं और ऐसे कर भी लगाए गए हैं जो पहले सुनने में नहीं आए थे। आयकर की सीमा 10 लाख रुपए की गई है जिससे कुछ लोग कर भुगतान से छूट पा रहे हैं और अधिकतम दर को 39 प्रतिशत से घटाकर 29 प्रतिशत किया गया है। इससे आम जनजीवन या करों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

आयकर स्लैब में यह बदलाव सभी लोगों को प्रभावित नहीं करता। पहले 6 लाख रुपए तक कर छूट थी, जिसे अब 10 लाख तक बढ़ाया गया है। इससे उच्च मध्यम वर्ग और उच्च वर्ग को विशेष फायदा हुआ है। विशेष रूप से उच्च वर्ग को इससे अद्वितीय लाभ प्राप्त हुआ है।

कर के तीन स्तर होते हैं – निचला, मध्य और उच्च। इस बार तीनों में समायोजन किया गया है। निचले स्तर की सीमा बढ़ाकर 10 लाख की गई है। मध्य स्थितियों के स्लैब भी तब्दील किए गए हैं। अधिकतम कर दर को 39 प्रतिशत से घटाकर 29 प्रतिशत किया गया और कर देने की सीमा को भी बढ़ाया गया है। पहले 20 लाख से ऊपर की आय पर 36 प्रतिशत कर लगता था जिसे अब संशोधित कर 40 लाख से ऊपर की आय पर 29 प्रतिशत कर देना होगा। इससे उच्च मध्यम और उच्च वर्ग को कर बोझ से राहत मिली है।

फायदा यह है कि जब उच्च वर्ग के पास पैसा बचत होता है तो पूंजी निर्माण होता है और उसे देश के विकास में इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन निम्न वर्ग और मध्यम वर्ग को इससे कोई लाभ नहीं हुआ है, वे प्रभावित नहीं हुए हैं। पहले 6 लाख तक कर मुक्त था, तब भी कर देना पड़ता था इसलिए निम्न वर्ग को राहत नहीं मिली।

सबसे कम आय करने वालों (जैसे महीने में 20 हजार या सालाना 3 लाख कमाने वाले) को भी वार्षिक 3 हजार रुपए (1%) कर देना होगा। ‘सामाजिक सुरक्षा कर’ कहे जाने वाला यह कर आयकर की एक विधि है, जो कर के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। धनी वर्ग के लिए 20-30 प्रतिशत कर का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन गरीबों के लिए 1% भी बड़ा बोझ है। यह अवधारणा दुनिया भर में नहीं है, केवल नेपाल में प्रचलित है।

भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश से लेकर अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में निचले वर्ग को कर छूट दी जाती है। लेकिन नेपाल में यह कर निचले वर्ग पर लगना जारी है, जो वैश्विक कर सिद्धांतों से मेल नहीं खाता।

क्या मतलब है कि आयकर स्लैब ने निम्न वर्ग को राहत नहीं दी और केवल उच्च वर्ग को ही संवार दिया?

बिल्कुल यही कहा जा सकता है।

आयकर अधिनियम में किए गए विभिन्न प्रावधानों और छूटों के बारे में बताएं।

पहले कर विवाद या बकाया वाले करदाताओं के लिए नई ‘एमनेस्टी प्रावधान’ आए हैं जिसमें निर्धारित कर और 1% जुर्माना चुकाकर मुकदमे वापस लिए जा सकते हैं। इससे अटके करदाताओं को राहत मिली है। लेकिन जिन लोगों ने कानून का उल्लंघन किया, उन्हें प्रोत्साहन देने के कारण समय पर कर दाताओं को अन्याय भी हुआ है।

मूल्य अभिवृद्धि कर (वैट) में दो दरें लागू करने का निर्णय सही है?

सरकार ने ‘पॉलिसी डिपार्चर’ करते हुए बहु-दर वैट लागू किया है। अभी 13% दर मुख्य है, लेकिन बिजली और राइड शेयरिंग पर 5% दर भी लागू की गई है। इससे कवर बढ़ेगा और समानता आएगी, पर जटिलता और विवाद भी बढ़ेंगे।

बिजली पर 5% वैट लगने से उपभोक्ता मूल्य बढ़ेगा, क्या यह न्यायसंगत है?

यह एक समस्या है। नियमावली जारी न होने के कारण स्पष्ट कहना कठिन है, लेकिन घरेलू उपयोग के लिए 50 यूनिट तक की बिजली पर फिलहाल वैट नहीं लगाया जाता। उद्योग को बिजली बेचने या वितरण में वैट कैसे लगेगा, इसका विवाद अभी बाकी है।

इससे उपभोक्ता मूल्य सीधे बढ़ेगा जो जनसामान्य पर असर डालता है और कर के सिद्धांत से मेल नहीं खाता।

यदि प्राधिकरण उद्योगों को बिजली बेचने पर वैट लौटाएगा नहीं, तो उत्पादन लागत बढ़ेगी?

यह स्थिति नियमावली जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी, क्योंकि यदि उद्योग को दिया गया वैट वापस नहीं मिलता तो उत्पादन लागत बढ़ेगी।

क्या कर सुधार का उद्देश्य अर्थव्यवस्था और करदाता के खर्च को कम करना है, या लागत बढ़ाने वाली कर सुधार मानी जाएगी?

वर्तमान स्थिति में यह चिंता जायज है। सरकार को इसे सुधारने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे।

सेयर बाजार और अचल संपत्ति व्यवसाय में पूंजीगत लाभकर बढ़ाया गया है, लेकिन आय विवरण प्रस्तुत करते ही अंतिम रूप में लागू होगा, तो भेद क्यों है?

सरकार ने व्यवस्था संशोधित की है, लेकिन इससे सभी को समान फायदा नहीं हुआ है, इसलिए सेयर बाजार में उत्साह कम नजर आ रहा है।

अंत:शुल्क से 360 वस्तुओं को हटाने के बाद भी नए कर जोड़े गए हैं, ये नए कर कैसे हैं?

अंत:शुल्क हटने के बदले नई तरह के कर लगाए गए हैं जैसे ‘हरित कर’, ‘आंतरिक उत्पादन प्रोत्साहन शुल्क’, और ‘स्वच्छ अवसंरचना शुल्क’ जो विभिन्न वस्तुओं पर अलग-अलग कर रूप में लगते हैं।

ये नए नाम वाले कर उद्योग लागत पर भी नकारात्मक असर डाल सकते हैं, जिससे समग्र उत्पादन लागत बढ़ेगी।

क्या कर प्रशासकों द्वारा नए कर जोड़ते समय अधिक जानबूझकर गलतियां हुई हैं?

सच में, सरकार कर प्रणाली को सरल और न्यायसंगत बनाने में विफल रही है, जिसके कारण अधिक कर लगना और जटिलताएं बढ़ रही हैं। इससे करदाता और अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में लगाए गए समता शुल्क के बारे में आपके विचार क्या हैं?

यह कर लगाने से सेवाओं की पहुंच पर प्रभाव पड़ सकता है। जब स्वास्थ्य और शिक्षा निजीकरण हो रहे हैं तो इसका भार आम नागरिकों पर पड़ता है। सरकार यदि कर से प्राप्त राशि को सामाजिक सुरक्षा के लिए निर्धारित कर दे तो विवाद कम हो सकता था।

सरकार स्पष्ट कटौती और खर्च प्रतिबद्धता दिखाने में असमर्थ रहने से यह क्षेत्र अनिर्णित है।

सरकार की कर नीति धनवान मित्रवत और गरीब विरोधी प्रतीत होती है?

प्रत्यक्ष कर का हिस्सा अधिक होना चाहिए, लेकिन नेपाल में अप्रत्यक्ष कर का हिस्सा ज्यादा है। इससे गरीबों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

यह बचतशील माहौल पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है और निम्न वर्ग की स्थिति और कमजोर करता है।

सरकार ने बड़ा बजट पेश किया है, क्या कर राजस्व लक्ष्य पूरा होगा?

आयकर में कटौती होने से राजस्व पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। कर संग्रह के मुख्य स्रोत हवाई सीमा शुल्क और अंत:शुल्क हैं, वहां बेहतर प्रबंधन आवश्यक है, अन्यथा चुनौतीपूर्ण होगा।

आयकर अधिनियम की धारा 57 संशोधन क्या निवेश मित्रवत है?

संशोधन ने कुछ कमियां दूर की हैं, लेकिन विदेश से निवेश आकर्षित करने के लिए पर्याप्त सुधार नहीं हुए हैं। दोहरे कराधान की समस्या अभी भी बनी हुई है।

आप समग्र कर नीति को कैसे आंकते हैं?

मुझे यह नीति यथास्थितिवादी लगती है। नई विधि से कुछ नया परिवर्तन नहीं हुआ है। संसद से पूर्ण स्वीकृति लिए बिना कई कर लागू किए गए हैं, जो जनता के प्रति अन्याय हैं। कर प्रशासन और नीति निर्माण प्रक्रिया पारदर्शी और विशेषज्ञ की सलाह सहित होनी चाहिए।

बदलाव और चर्चा की कमी के कारण वर्तमान नीति प्रगतिशील नहीं कही जा सकती। पुराने मॉडल को ही आगे बढ़ाया गया है।

नारायणीहिटी दरबार में पूर्वराज परिवार के सदस्यों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन (तस्वीरें)


१९ जेठ, काठमाडौं। नारायणीहिटी राजदरबार पहुंचने वाले हृदयन्द्र शाह सहित पूर्वराज परिवार के सदस्यों ने मंगलवार को दीप प्रज्ज्वलन किया। दरबार हत्याकांड की २५वीं वर्षगांठ के अवसर पर उन्होंने नारायणीहिटी दरबार में स्थित चतुर्व्युह नारायण मंदिर में दीप प्रज्ज्वलित किए।

उन्होंने वहां राजदरबार हत्याकांड में मारे गए तत्कालीन राजा वीरेन्द्र शाह सहित राजपरिवार के सदस्यों की तस्वीरों के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की।

तस्वीरें :

तस्वीर सौजन्य : पूर्णिका राज्यलक्ष्मी शाह के फेसबुक से

कक्रोच पार्टी के संस्थापक दीपक भारत लौटकर आंदोलन करेंगे, सोनम वांगचुक भी होंगे शामिल

१९ जेठ, काठमाडौँ। भारतीय कक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजित दीपक ने भारत लौटकर आंदोलन करने का ऐलान किया है। उनके साथ रोमन मैगसेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन में भाग लेंगे। वांगचुक ने मंगलवार को दीपक के आंदोलन में शामिल होने की घोषणा की है। वे वर्तमान में भारत के लद्दाख में हैं और शिक्षा तथा पर्यटन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। हाल के समय में लद्दाख में हुए जेनजी आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

दीपक ने बताया कि वे भारत पहुंचकर आगामी शनिवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए दिल्ली के जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेंगे। फिलहाल दीपक अमेरिका में हैं और बोस्टन यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। उनकी इस घोषणा के बाद वांगचुक ने कहा है कि यदि सरकार शुक्रवार तक आवश्यक सुधार नहीं करती है तो वे शनिवार को सीजेपी के कार्यकर्ताओं के साथ आंदोलन में भाग लेंगे। उन्होंने कहा, ‘यदि स्थिति इतनी खराब है तो किसी भी स्वाभिमानी मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए था। लाखों युवाओं के जीवन और भारत के भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव को तो छोड़िए।’

वर्तमान में भारत में नीट और यूजिए परीक्षा के पेपर लीक मामले ने पूरे देश को हिला दिया है। इस मामले को लेकर विपक्षी दल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दीपक ने आंदोलन का आह्वान करते हुए कहा है कि नीट की २४ लाख छात्रों समेत करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खेलवाड़ किया गया है।

धवल शमशेर को राप्रपामा वापसी के लिए अध्यक्ष लिंग्देन का आग्रह


१९ जेठ, काठमाडौं। राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) के अध्यक्ष राजेन्द्र लिंग्देन ने पार्टी छोड़कर नई पार्टी बनाने की तैयारी में जुटे धवल शमशेर राणालाई अपना निर्णय वापस लेने का आग्रह किया है।

धवल शमशेर के नेतृत्व में असंतुष्ट नेताओं की बैठक ने मलमास समाप्त होते ही नई पार्टी बनाने का निर्णय लेने के तुरंत बाद लिंग्देन ने उन्हें पार्टी में लौटने का निमंत्रण दिया है।

‘मैं महामंत्री धवल शमशेर राणालाई पार्टी के पूर्व अध्यक्षों, नेताओं, कार्यकर्ताओं और सभी शुभचिंतकों की भावनाओं और सम्मान को ध्यान में रखते हुए अपना निर्णय वापस लेने और आगामी महाधिवेशन की प्रक्रिया में शामिल होने का आग्रह करता हूँ,’ लिंग्देन ने सोमवार जारी किए गए विज्ञप्ति में कहा।

राप्रपा के महामंत्री राणाले १७ जेठ को पार्टी छोड़कर एक नया अभियान शुरू करने की जानकारी दी थी।

नेपाल-भारत सीमा विवाद: दिल्ली की बात ‘तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं’ का क्या मतलब है?

भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल-भारत सीमा विवाद के संबंध में पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा है कि इस मामले में कोई तीसरा पक्ष सम्मिलित नहीं है। नेपाल के प्रधानमंत्री वलेन्द्र शाह ‘बालेन’ ने पिछले रविवार संसद के प्रतिनिधि सभा के सत्र में यह संकेत दिया था कि ‘नेपाल ने भी भारत की जमीन का अतिक्रमण किया है।’ इस विषय पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने औपचारिक प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री ने संसद में कहा था, “…केवल भारत ही नहीं, नेपाल ने भी भारत की भूमि को कुछ स्थानों पर अतिक्रमित किया है…” प्रधानमंत्री के इस बयान के बीच नेपाल में प्रचंड विरोध हो रहा है, लेकिन भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे खारिज करने का आवश्यक कारण नहीं बताया है, जैसा कि इस विषय पर लंबे समय से टिप्पणी कर रहे पत्रकार युवराज घिमिरे ने बताया। “दोनों देशों ने सिद्धांत रूप में सहमति व्यक्त कर आगे बढ़ने पर सहमति बनाई है इसलिए असहमति होना उचित नहीं है,” पूर्व प्रधान संपादक घिमिरे ने कहा।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने भारतीय जनता पार्टी के निमंत्रण को स्वीकार करते हुए दिल्ली दौरे पर थे। दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय ने सीमा विवाद पर अपनी स्पष्ट राय व्यक्त की। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने बताया कि नेपाल-भारत के बीच के सीमा विवाद द्विपक्षीय संवाद के माध्यम से सुलझाए जाएंगे, इसलिए इस प्रक्रिया में तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। प्रधानमंत्री शाह ने पहली बार संसद में भाषण के दौरान भारत-नेपाल सीमा विवाद के समाधान में युक्ति के संभावित संवाददाताओं की भूमिका हो सकने का संकेत दिया था। हालांकि, इस विवाद को लेकर जारी विदेश मंत्रालय के वक्तव्य में प्रधानमंत्री के बयान को ‘दशगजा क्षेत्र के अतिक्रमण’ और ‘सीमा पार के कब्जे’ से संबंधित बताया गया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने प्रधानमंत्री शाह के सीमा संबंधी बयान का अध्ययन किया है। “भारत-नेपाल सीमा का लगभग ९८ प्रतिशत भाग पहले ही निर्धारित हो चुका है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में समाधान अभी बाकी है,” जयसवाल ने कहा। “गंडकी नदी के प्रवाह में हुए परिवर्तनों के कारण ऐसी स्थितियां उत्पन्न हुई हैं। इसके साथ ही निर्धारित सीमाओं में कब्जा और दशगजा क्षेत्र के अतिक्रमण जैसे मुद्दे हैं, जिन्हें सहमति से नक्शांकन करने की प्रक्रिया चल रही है।” सभी सीमा विवादों को द्विपक्षीय रूप से सुलझाने के लिए संवाद चल रहे हैं और इस मामले में तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है, उन्होंने स्पष्ट किया।

पत्रकार घिमिरे कहते हैं, “सीमा विवाद में पहले से सहमति बनाए गए मामलों में तीसरे पक्ष को शामिल करने की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन इसे सरल बनाने के लिए प्रधानमंत्री के संसद में स्पष्टता देना उपयोगी होगा।” सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सीमा विवाद संबंधी अपने बयान को लेकर आश्चर्य व्यक्त किया है। “प्रधानमंत्रीजी ने कहा है कि यदि नेपाल ने सीमा का अतिक्रमण किया है तो वह खुद भी हैरान हैं,” पोखरेल ने कहा। हालांकि पत्रकार घिमिरे का मानना है कि संवेदनशील विषय होने के कारण प्रधानमंत्री को संसद में स्पष्ट और सटीक सन्देश देना जरूरी है। “प्रधानमंत्री को अपनी बात स्पष्ट करनी चाहिए क्योंकि यह केवल नेपाल का विषय नहीं है, बल्कि नेपाल और भारत के बीच के सीमा संबंधी मुद्दे हैं और समय-समय पर सीमा विवादों को समाप्त करने की प्रतिबद्धता करनी चाहिए,” उन्होंने जोर दिया।

रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने के दिल्ली दौरे के दौरान दोनों देशों के रिश्तों को सकारात्मक दिशा देने की संभावना पर पत्रकार घिमिरे ने यह कहा, “यह एक उपयुक्त मंच है जहां दोनों देशों के विभिन्न संबंधों के पक्षों पर चर्चा हो सकती है। दोनों देशों की सरकारी संस्थाएं नियमित रूप से विवादों का समाधान करती रही हैं।” रवि लामिछाने भारतीय जनता पार्टी के निमंत्रण पर सोमवार को दिल्ली पहुंचे और मंगलवार को भाजपा अध्यक्ष नीतिन गडकरी एवं विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। इस बैठक की जानकारी भाजपा अध्यक्ष नीतिन गडकरी और विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की है। विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि चर्चा दोनों देशों के विकास साझेदारी और जनसंपर्क पर केंद्रित थी, जो दोनों देशों के समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भाजपा अध्यक्ष नीतिन गडकरी ने लामिछाने तथा उनके प्रतिनिधिमंडल का पार्टी मुख्यालय पर स्वागत करते हुए खुशी जताई। “भाजपा और रास्वपा के बीच संबंधों और सहयोग को मजबूत बनाने पर सार्थक चर्चा हुई,” उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा।