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लेखक: space4knews

काठमाडौंको कपन क्षेत्रमा १४ वर्षीय बालक बेपत्ता

काठमाडौंको कपन क्षेत्रबाट गत चैत ३० गते दिउँसो साढे तीन बजेदेखि युवराज कार्की नामका बालक सम्पर्कविहीन भएका छन्। उनका बुवा सन्तोष कार्कीले प्रहरी प्रभाग कपनमा छोराको खोजतलासका लागि निवेदन दिएका छन्। प्रहरीले बालकलाई अन्तिम पटक महांकाल ओरालोमा देखिएको उल्लेख गर्दै फेला पार्न नजिकैको प्रहरी चौकी वा दिइएका नम्बरमा सम्पर्क गर्न अनुरोध गरेको छ। ८ वैशाख, काठमाडौं।

काठमाडौंको कपन (मुस्कानचोक) क्षेत्रबाट १४ वर्षीय एक बालक बेपत्ता भएका छन्। उनी गत चैत ३० गते दिउँसो साढे तीन बजेदेखि सम्पर्कविहीन रहेको उनका परिवारले बताएका छन्। युवराज कार्की नाम गरेका करिब ५ फिट उचाइ भएका, कालो कपाल र कालो टी-शर्ट लगाएका ती बालक सम्पर्कविहीन भएका छन्।

उनका बुवा सन्तोष कार्कीले प्रहरी प्रभाग कपनमा छोराको खोजका लागि निवेदन दिएका छन्। मातहतका प्रहरी कार्यालयहरूमा खोजी गराउन सर्कुलर पनि गरिएको कपन प्रहरी प्रभागले जनाएको छ। परिवारका अनुसार, बालक कक्षा ८ मा अध्ययनरत थिए। उनलाई अन्तिम पटक महांकाल ओरालो क्षेत्रमा देखिएको प्रहरी जनाएको छ।

उक्त बालकलाई फेला पार्नेले नजिकैको प्रहरी चौकी वा ९८४९११५५२२, ९८५१२४५५२२, ९८४९०६९५५५ मा सम्पर्क गर्न अनुरोध गरिएको छ।

चीन ने युरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता कायम रखी, इरान युद्ध का प्रभाव नहीं पड़ा

चीन ने अपने विशाल कोयला भंडार का उपयोग करते हुए विश्वव्यापी युरिया उत्पादन में ७८ प्रतिशत हिस्सा कोयला आधारित कर लिया है। सन् २०२६ की शुरुआत में पश्चिम एशिया में हुए युद्ध ने होर्मुज स्ट्रेट के व्यापारिक मार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिसके कारण युरिया की कीमत में ७० प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। चीन ने अपनी ५० से ८० प्रतिशत तक की मल निर्यात पर प्रतिबंध लगा कर आंतरिक खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, जिससे विश्व बाजार में मल की कमी और बढ़ गई है।

दुनियाभर युरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस को प्रमुख स्रोत माना जाता है, जबकि चीन ने अपने विशाल कोयला संसाधनों का सदुपयोग कर इस क्षेत्र में अभूतपूर्व आत्मनिर्भरता प्राप्त की है। चीन के कुल युरिया उत्पादन का लगभग ७८ प्रतिशत कोयले से होता है। इसने कतार, रूस और सऊदी अरब जैसे प्राकृतिक गैस पर निर्भर देशों की तुलना में चीन के उत्पादन मॉडल को भिन्न और काफी सुरक्षित बना दिया है।

सन् २०२६ की शुरुआत में पश्चिम एशिया में शुरू हुए युद्ध ने होर्मुज स्ट्रेट को, जो विश्व के उर्वरक व्यापार का ३० प्रतिशत हिस्सा संभालता है, बंद कर दिया। इसके परिणामस्वरूप युरिया की कीमतों में ७० प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई। लेकिन चीन की कोयला आधारित उत्पादन प्रणाली और आंतरिक ऊर्जा स्रोतों के कारण वह बाजार में पर्याप्त सुरक्षित भंडारण बनाए रखने में सफल रहा। रॉयटर्स के अनुसार, चीन में युरिया की कीमतें इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में लगभग एक तिहाई हैं।

चीन ने पिछले वर्ष १३ अरब डॉलर से अधिक मूल्य का उर्वरक निर्यात किया था, जिसका अधिकांश हिस्सा मलेशिया, वियतनाम, इंडोनेशिया और न्यूजीलैंड जाता था। मलेशिया अपने कुल उर्वरक आयात का ६७ प्रतिशत और इंडोनेशिया ४४ प्रतिशत हिस्सा चीन से प्राप्त करता था। लेकिन युद्ध के कारण उत्पन्न कमी और आंतरिक खाद्य सुरक्षा की प्राथमिकता की वजह से चीन ने अपनी ५० से ८० प्रतिशत तक की मल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसने विश्व बाजार में मल की कमी को और बढ़ा दिया है।

मथुरा थापाको ‘कोमल अभिभावकत्व’ पुस्तक सार्वजनिक – Online Khabar

मथुरा थापाको पुस्तक ‘कोमल अभिभावकत्व’ सार्वजनिक

समाचार सारांश

समीक्षित र प्रस्तुत।

  • मथुरा थापाको ‘कोमल अभिभावकत्व’ पुस्तक में महिलाओं की गर्भावस्था से लेकर 18 वर्ष तक बच्चों की पालन-पोषण की प्रक्रियाओं और कौशलों पर चर्चा की गई है।
  • यह पुस्तक बाल मनोविज्ञान, आयु के अनुसार विकास के चरण, खेल, आहार और व्यवहार प्रबंधन को सरल एवं व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करती है।
  • प्रोफेसर डॉ. विदुर चालिसे ने इस पुस्तक को अभिभावकों, गृहिणियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए एक मार्गदर्शक कृति बताया है।

काठमांडू। मथुरा थापाको पुस्तक ‘कोमल अभिभावकत्व’ हाल ही में सार्वजनिक हुआ है।

यह पुस्तक महिलाओं की गर्भावस्था से लेकर बच्चों को 18 वर्ष तक पालन-पोषण की समस्त प्रक्रिया को केंद्रित करते हुए माता-पिता द्वारा अपनाए जाने वाले व्यवहार, सोच और कौशल पर आधारित है।

शिक्षा के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक सक्रिय लेखिका मथुरा थापाको इस पुस्तक में अभिभावकत्व को केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक संवेदनशील कला और दीर्घकालिक सामाजिक निवेश के रूप में स्थापित किया गया है।

७४ अध्यायों में विभाजित इस कृति में बच्चे की आदतों के विकास से लेकर एक अच्छे अभिभावक के माध्यम से सुगठित समाज निर्माण तक के विषय सरल एवं व्यावहारिक तरीके से प्रस्तुत किए गए हैं। बाल मनोविज्ञान आधारित सुझाव, उम्र के अनुसार विकास के चरण, खेल, आहार, व्यवहार और सीखने के तरीके संतुलित ढंग से शामिल किए गए हैं। यह पुस्तक अभिभावकों को केवल जानकारी ही नहीं, बल्कि व्यवहार में लागू करने योग्य मार्गदर्शन प्रदान करती है।

पुस्तक के प्राध्यापक डॉ. विदुर चालिसे ने इसे नेपाली समाज के अभिभावकों, गृहिणियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बाल पालन करने वाले सभी के लिए एक दिशानिर्देशक कृति बताया है। उनका कहना है कि बाल विकास के लिए खिलौने के चयन, पोषणयुक्त आहार, प्राथमिक पांच वर्षों का महत्व, उम्र अनुसार खेल और व्यवहार प्रबंधन पर पुस्तक विशेष ध्यान देती है। साथ ही बालों में दिखाई देने वाले सामान्य व्यवहार जैसे पैरों को जमीन पर मारना या जिद्दी प्रवृत्ति के मनोवैज्ञानिक कारण और उनके दीर्घकालिक प्रभावों का भी गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

लेखिका ने स्पष्ट किया है कि बच्चे जन्म से ही अच्छे या बुरे नहीं होते; उनका व्यक्तित्व निर्माण अभिभावक, शिक्षक और समाज के व्यवहार, वातावरण और संस्कार के साथ होता है। अभिभावक की बोली, व्यवहार और जीवनशैली से बच्चे तेज़ी से प्रभावित होते हैं, इसलिए जागरूक अभिभावकत्व अत्यावश्यक है।

२१ वर्षों के शिक्षण अनुभव पर आधारित, लेखिका ने विभिन्न स्वभाव और पृष्ठभूमि वाले बच्चों और अभिभावकों के साथ अपने संवाद से प्राप्त ज्ञान इस पुस्तक में समेटा है।

अभिभावकों की सामान्य इच्छा अपने बच्चों को अच्छे और सफल बनाना होती है, लेकिन आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल की कमी दिखाई देती है, जिसे यह पुस्तक संबोधित करती है।

पुस्तक में गर्भावस्था से किशोरावस्था तक के विभिन्न चरणों में अभिभावकों द्वारा अपनाए जाने वाले व्यवहारों की विस्तृत चर्चा है। गर्भधारण के समय से ही बच्चे का मानसिक और भावनात्मक विकास शुरू होता है, इसलिए उस समय माता-पिता की सोच, व्यवहार और वातावरण का प्रभाव स्पष्ट किया गया है। नवजात शिशु की देखभाल से लेकर पूर्वबाल्यावस्था और किशोरावस्था के चुनौतियों की सरल भाषा में व्याख्या की गई है।

२७२ पृष्ठों वाली इस पुस्तक का आवरण वाशु क्षितिज द्वारा डिजाइन किया गया है और संपादन प्राडा डॉ. विदुर चालिसे द्वारा किया गया है।

बाल अधिकार संरक्षण में निरंतर सतर्कता अनिवार्य

८ वैशाख, काठमाडौं। बाल अधिकार संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए सरकार, संचार माध्यम और नागरिक समाज को लगातार सतर्क रहने की आवश्यकता पर समाजिक हितधारकों ने ज़ोर दिया है। बालबालिका शान्तिक्षेत्र राष्ट्रीय अभियान (सिजप) द्वारा सोमवार आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने बाल अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ लगातार आवाज़ उठाने का आह्वान किया। बाल विवाह, बाल श्रम समाप्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और पोषण जैसे विषयों पर सतर्क रहना आवश्यक बताया गया।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय पत्रकारिता तथा आम संचार विभाग के प्रमुख प्रा.डा. कुंदन अर्याल ने बाल अधिकार विषयक कार्यपत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि विश्वस्तर पर १९९० से बाल अधिकारों के लिए आवाज़ उठनी शुरू हुई है, “इस क्षेत्र में निरंतर प्रयासों के कारण कुछ अच्छे अभ्यास सामने आए हैं, परन्तु केवल एक या एक दशक की पहल से बाल अधिकारों का प्रचार संभव नहीं है।” अर्याल ने कहा कि हमेशा वकालत करनी होगी, लिखना होगा और नियोजित तरीके से राज्य पर दबाव डालना होगा।

उनके अनुसार, नेपाल ने वर्ष २०३० तक बाल विवाह समाप्त करने की नीति बनाई है, फिर भी बाल विवाह अभी भी न्यूनीकरण के स्तर पर है। आगामी चार वर्षों में बाल विवाह समाप्त होने का व्यापक विश्वास नहीं है। सभी बाल बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और जन्मदर्ता जैसे अधिकार प्रदान करने के लिए पर्याप्त कार्यक्रमों और बजट की कमी है, उन्होंने जानकारी दी।

बालबालिका शान्तिक्षेत्र अभियान के अध्यक्ष तिलोत्तम पौडेल ने कहा कि बालक-बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण में निर्भीक होकर जीने, पढ़ने, खेलने और विकसित होने के अधिकार सुनिश्चित करना सभी पक्षों का दायित्व है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के अधिकार सुरक्षित करने में नागरिक समाज, संचार माध्यम, स्थानीय तह और सरकार की भूमिका पर विचार व्यक्त किए।

पौडेल ने बालक-बालिकाओं से संबंधित विभिन्न कानूनों को एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बाल अधिकार सम्बन्धी कानून, बाल श्रम सम्बन्धी कानून और अन्य कानूनों में असामंजस्य की वजह से क्रियान्वयन में बाधाएँ आती हैं और इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है। साथ ही, लैंगिक और यौन अल्पसंख्यक, अंतरलिंगी बालबालिकाओं एवं आवश्यक संरक्षण के लिए एक अलग आयोग या उच्च स्तरीय निकाय बनाना आवश्यक है, जिसमें वे मजबूती से विश्वास करते हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद को संसाधन-सम्पन्न बनाने और स्थानीय तहों में बच्चों के लिए अलग बजट सहित आवश्यक संरचनाएँ स्थापित करने के लिए संचार माध्यम से निगरानी की भूमिका निभाने पर भी ज़ोर दिया। कार्यक्रम में इन्सेक नेपाल के सूचना अधिकारी कृष्ण गौतम, पत्रकार प्रकाश सिलवाल, संचारकर्मी पुष्पा अधिकारी, सफलता भंडारी, संतोष पौडेल, देवी सापकोटा और प्लान इंटरनेशनल नेपाल के नीति पैरवी प्रबंधक इर्साद अन्सारी ने भी अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए।

बन्दीपुर गाँव पर्यटन के आकर्षक गंतव्य में बदल रहा है

समाचार सारांश के अनुसार, बन्दीपुर प्राचीन व्यापारिक नाके से पर्यटकीय गंतव्य में रूपांतरण के लिए वैशाख १८ और १९ तारीख को गाँव पर्यटन मेला आयोजित करने वाला है। नेपाल पर्यटन बोर्ड, गण्डकी प्रदेश कार्यालय और बन्दीपुर गाउँपालिका ने संयुक्त रूप से प्रथम प्रदेश स्तरीय गाँव पर्यटन मेला आयोजित करने की तैयारी की है। बन्दीपुर में वर्ष २०८५ में ६ लाख २५ हजार पर्यटक आए थे और २०८६ में ७ लाख पर्यटक आने का लक्ष्य रखा गया है। ८ वैशाख, गण्डकी। प्राचीन काल में व्यापारिक नाके के रूप में प्रसिद्ध बन्दीपुर आज पर्यटकीय गंतव्य के रूप में विकसित हो रहा है।

बन्दीपुर पूर्व में मोटर मार्ग की सुविधा न होने के कारण पश्चिम पहाड़ के तनहुँ, कास्की, लमजुङ, गोरखा और मनाङ से सामान लाकर बेचने का प्रमुख व्यापारिक नाका था। वर्ष २०२५ में दमौली में सदरमुकाम स्थानांतरित होने के बाद बन्दीपुर का व्यापारिक नाके के रूप में पहचान बदलकर पर्यटकीय गंतव्य बन गया। यहाँ की सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक सौन्दर्य ने पर्यटकीय महत्व को और बढ़ाया है।

बन्दीपुर का दृश्य तत्कालीन राजा महेन्द्र को भी आकर्षित करता था। उन्होंने यहाँ ‘पहाड़ों की रानी’ की उपाधि दी थी। यहाँ के प्राचीन शैली के मकान और खूबसूरत दृश्य, खड्गदेवी माई, टुँडिखेल आदि बन्दीपुर के आकर्षण बढ़ाते हैं। मर्स्याङ्दी नदी पार करके बन्दीपुर जाने वाली ऊँची सड़क को लेकर मबिबि शाह ने लिखा और तारादेवी ने गाया गया गीत ‘बन्दीपुरे उकाली लामो, मर्स्याङ्दी डुङ्गाले तरेर…’ अभी भी प्रसिद्ध है।

बन्दीपुर की महिमा और गरिमा को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में विभिन्न पहलें चल रही हैं। गाँव पर्यटन का नमूना गंतव्य माने जाने वाले बन्दीपुर में नेपाल पर्यटन बोर्ड, गण्डकी प्रदेश कार्यालय और बन्दीपुर गाउँपालिका की संयुक्त आयोजन तथा गाउँ पर्यटन प्रवर्द्धन मञ्च नेपाल (भिटोफ) गण्डकी के सहयोग से यही वैशाख १८ और १९ को गाँव पर्यटन मेला आयोजित किया जाएगा। यह बन्दीपुर में पहली बार होने वाला प्रदेश स्तरीय ‘गाँव पर्यटन मेला २०८३’ है, जिसकी जानकारी नेपाल पर्यटन बोर्ड गण्डकी प्रदेश के प्रमुख मणिराज लामिछाने ने दी है।

बन्दीपुर गाउँपालिकाने ‘बन्दीपुर गाउँ पर्यटन भ्रमण वर्ष’ की भी घोषणा की है, इसी संदर्भ में मेला आयोजित किया जा रहा है। ‘मेलाका मुख्य उद्देश्य गाँव के छोटे पर्यटन व्यवसायियों और सामुदायिक होमस्टे को सीधे शहरी बाजार और बड़े एजेंसियों से जोड़ने का प्लेटफॉर्म बनाना है’, उन्होंने कहा, ‘मेलाके जरिए होमस्टे और वहाँ उपलब्ध सेवाओं को बाजार से जोड़ना, गाँव पर्यटन में निजी और सरकारी निवेश को बढ़ाना लक्ष्य है।’

मेलामें प्रदेश के ११ जिलों का प्रतिनिधित्व करना सुनिश्चित किया जा रहा है। सिर्फ पोखरा में नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य स्थानों में भी पर्यटन कार्यक्रम पहुँचाने की योजना है। मेला में बन्दीपुर के पर्यटन विषय पर सामूहिक चर्चा होगी, यह जानकारी बन्दीपुर गाउँपालिकाके अध्यक्ष सुरेन्द्रबहादुर थापाले दी। ‘गाँव पर्यटन से समृद्धि यात्रा, विभिन्न जातीय सांस्कृतिक प्रस्तुति और प्रचार-प्रसार, सामुदायिक होमस्टे तथा पर्यटन व्यवसायियों के प्रचारात्मक कक्षाएँ मेला में स्थापित की जाएंगी’, उन्होंने कहा, ‘इस दौरान स्थानीय पर्यटन सूचनात्मक और प्रचार सामग्री वितरण के साथ ही पर्यटकीय आकर्षण के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया जाएगा।’

बन्दीपुर और व्यास नगरपालिका को जोड़कर ‘होमस्टे सर्किट निर्माण’ की प्रक्रिया जारी है। अध्यक्ष थापाके अनुसार इस सर्किट में बन्दीपुर–२ मोहोरिया, रामकोट, व्यास–१४ कुलुङ, केशवटार, रुम्सी, बन्दीपुर–६ धरमपानी, व्यास–१२ कमलाबारी, बन्दीपुर–५ कोरिखा, बन्दीपुर सामुदायिक होमस्टे, धरमपानी होमस्टे, ऐतिहासिक हुस्लाङकोट गढ़ी, कमलाबारी, कोरिखा तथा सामुदायिक होमस्टे शामिल हैं।

बन्दीपुर के पर्यटन क्षेत्र में ८ अरब रुपैयाँ से अधिक निवेश है। अध्यक्ष थापाले बताया कि भ्रमण वर्ष २०८५ में यहाँ स्वदेशी तथा विदेशी कुल ६ लाख २५ हजार पर्यटक आए। इसी वर्ष, ग्रामीण पर्यटन बन्दीपुर भ्रमण वर्ष २०८६ में ७ लाख पर्यटक आने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। रामकोट, धरमपानी और कोरिखा होमस्टे को नमूना पर्यटकीय गाँव के रूप में विकसित करने की योजना है, अध्यक्ष थापाले जानकारी दी।

बन्दीपुर क्षेत्र में केवल सात व्यावसायिक होमस्टे संचालित हैं। मेलाके साथ यहाँ की जैविक भोजन, पारंपरिक अनाज, सांस्कृतिक कला-परंपराओं की संरक्षण और प्रचार की उम्मीद स्थानीय लोगों को है। मेला के माध्यम से पूरे गण्डकी प्रदेश के गाँव पर्यटन के प्रचार-प्रसार और विकास का लक्ष्य रखा गया है, यह जानकारी गाउँ पर्यटन प्रवर्द्धन मञ्च (भिटोफ) गण्डकी प्रदेश के अध्यक्ष शोभा सापकोटाले दी। गण्डकी प्रदेश में ५० से अधिक होमस्टे संचालित हैं। ऐसे कार्यक्रमों से होमस्टे के बीच पर्यटन साझेदारी को लाभ पहुंचेगा।

‘कार्यक्रम से होमस्टे के बीच अनुभव साझा करने और व्यावसायिक साझेदारी में महत्वपूर्ण सहयोग की उम्मीद है’, उन्होंने कहा, ‘सरकार द्वारा सप्ताह में दो दिन छुट्टी व्यवस्था होने की वजह से गाँव पर्यटन को सहयोग मिलेगा।’ गाउँ पर्यटन प्रवर्द्धन मञ्च (भिटोफ) गण्डकी प्रदेश ने लंबे समय से यहाँ के संभावनाशील होमस्टे का प्रचार-प्रसार किया है, यह जानकारी भिटोफ गण्डकी के संस्थापक अध्यक्ष और पोखरा पर्यटन परिषद् के अध्यक्ष तारानाथ पहारी ने दी। गण्डकी प्रदेश के हर गाँव को पर्यटकीय गंतव्य बनाकर विकसित करना आवश्यक है, उन्होंने बताया।

अल्काराज और सबालेन्का ने जीता लाउरेस पुरस्कार

स्पेन के टेनिस स्टार कार्लोस अल्काराज ने फ्रेंच ओपन और यूएस ओपन जीतकर लाउरेस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवॉर्ड में वर्ष के श्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में नामांकित हुए हैं। बेलारूस की टेनिस खिलाड़ी आर्यना सबालेन्का ने २०२५ में यूएस ओपन खिताब बचाते हुए वर्ष की श्रेष्ठ खिलाड़ी का अवॉर्ड हासिल किया। पेरिस सेंट-जर्मेन को वर्ष की श्रेष्ठ टीम घोषित किया गया वहीं लैंडो नॉरिस और रॉरी मैकइलरॉय को विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ८ वैशाख, काठमाडौँ।

विश्व खेलकूद के क्षेत्र में प्रतिष्ठित माने जाने वाले लाउरेस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवॉर्ड में स्पेन के टेनिस स्टार कार्लोस अल्काराज तथा बेलारूस की टेनिस खिलाड़ी आर्यना सबालेन्का को वर्ष के श्रेष्ठ खिलाड़ी के तौर पर चुना गया। २२ वर्ष के अल्काराज ने फ्रेंच ओपन और यूएस ओपन जीतकर विश्व नंबर १ का स्थान फिर से हासिल किया, जिसके बदौलत उन्होंने यह पुरस्कार जीता। उन्होंने इस उपलब्धि को अपने लिए बड़ा सम्मान बताया।

वहीं, सबालेन्का ने २०२५ भर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यूएस ओपन खिताब बरकरार रखा और इस अवॉर्ड को अपने नाम किया। उन्होंने इस सफलता को सिर्फ जीत नहीं बल्कि कड़ी मेहनत, दबाव और दैनिक संघर्ष का परिणाम बताया। इसी श्रृंखला में पेरिस सेंट-जर्मेन को वर्ष की श्रेष्ठ टीम घोषित किया गया, लैंडो नॉरिस को ‘ब्रेकथ्रू ऑफ द ईयर’ और गोल्फ खिलाड़ी रॉरी मैकइलरॉय को ‘कमबैक ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड से नवाजा गया। इसके अलावा लामिन यमाल समेत उभरते खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया।

हर्क साम्पाङ – Online Khabar

हर्क साम्पाङ: अध्यक्ष राई ने स्वकीय सचिव न लेने की घोषणा की

श्रम संस्कृति पार्टी के अध्यक्ष हर्कराज राई ने स्वयं के लिए स्वकीय सचिव न लेने की घोषणा की है। राई ने अन्य सांसदों को भी स्वकीय सचिव न लेने का सुझाव दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि अन्य सांसद भी स्वकीय सचिव की सुविधा न लेने का निर्णय लेंगे। ८ वैशाख, काठमांडू।

मंगलवार को सिंहदरबार में संवाददाताओं से बात करते हुए राई ने कहा, ‘मैं स्वकीय सचिव नहीं लूँगा। मैंने घोषणा कर दी है, मैं नहीं लूँगा। मैंने न लेने की बात कही है।’ उन्होंने कहा कि इस निर्णय से सांसदों के कार्यशैली पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

जिराफ के ९ रोचक तथ्य: संसार का सबसे ऊंचा जानवर

जिराफ अफ्रीका के सवाना क्षेत्रों में रहते हैं और नेपाल में प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते। यह पृथ्वी का सबसे ऊंचा जानवर है, जिसकी गर्दन २ मीटर लंबी होती है। जिराफ पृथ्वी के सबसे अनोखे, सुंदर और आकर्षक जीवों में से एक हैं। उनकी लंबी गर्दन, ऊंचा शरीर और धब्बेदार त्वचा के साथ-साथ उनका शांत स्वभाव हमेशा लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। नेपाल में जिराफ प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते। वे मुख्य रूप से अफ्रीका के सवाना क्षेत्रों में ही मिलते हैं। अफ्रीका के खुले मैदानों में जिराफ की असली सुंदरता देखी जा सकती है। जिराफ न केवल सुंदर हैं बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे ऊंचे पेड़ों के पत्ते खाते हैं और वनस्पति की वृद्धि को नियंत्रित करते हैं तथा दूर से किसी खतरे को देख कर अन्य जानवरों को भी सतर्क करते हैं।

१. अफ्रीका के सवाना क्षेत्रों में निवास: जिराफ मुख्यतः अफ्रीका के शुष्क सवाना, खुले मैदान और हल्की जंगलों में रहते हैं। इन क्षेत्रों में एकेसिया पेड़ और झाड़ियाँ प्रचुर मात्रा में होती हैं, जो उनके मुख्य भोजन और आश्रय का स्रोत हैं। नेपाल या अन्य एशियाई देशों में जिराफ प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते। वे अफ्रीका के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों (जैसे केन्या, तंजानिया, बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका) में अधिक देखे जाते हैं। खुले वातावरण से उन्हें दूर तक देखने और शिकारी से बचने में आसानी होती है। मौसम के अनुसार वे अपने आवास को भी बदलते हैं।

२. दुनिया का सबसे ऊँचा जानवर: जिराफ पृथ्वी पर सबसे ऊंचे जानवर हैं। एक नर जिराफ की ऊंचाई ५.५ मीटर (१८ फीट) तक हो सकती है, जिसमें गर्दन अकेले २ मीटर लंबी होती है। रोचक बात यह है कि उनकी गर्दन में हड्डियों की संख्या इंसानों के समान ७ होती है, लेकिन हर हड्डी अत्यंत लंबी और मजबूत होती है। इस ऊंचाई से वे पेड़ों की ऊपरी पत्तियां आसानी से खा पाते हैं। जिराफ की ऊंचाई ही उनकी प्रमुख सुरक्षा प्रणाली है। वे दूर से शेर, हाइना या अन्य शिकारी देख सकते हैं। उनकी दृष्टि बहुत तेज होती है और खतरा देख कर ५० किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ सकते हैं। मजबूत पैरों से वे शिकारी को चोट पहुँचा सकते हैं।

३. बड़ी मात्रा में भोजन करने वाले जीव: जिराफ पूर्ण शाकाहारी हैं। उनका मुख्य आहार एकेसिया पेड़ के पत्ते और कोपिला होता है। ५० सेंटीमीटर लंबी जीभ से वे ऊंचे स्थान के पत्ते आराम से तोड़ लेते हैं। वे दिन का आधा से ज्यादा समय भोजन में बिताते हैं। प्रतिदिन वे ४५ किलो तक पत्तियां खा सकते हैं। अधिक भोजन खाने के बावजूद उनका विशेष पाचन तंत्र इसे आसानी से पचा लेता है और आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है जिससे उनका शरीर बड़ा और मजबूत रहता है। जिराफ की जीभ गाढ़े काले या बैंगनी रंग की होती है क्योंकि इसमें मेलानिन प्रचुर मात्रा में होता है, जो तेज धूप के विकिरण से जीभ को जलने से बचाता है।

४. कम पानी से जीवित रहने की क्षमता: जिराफों को अधिक पानी पीने की जरूरत नहीं होती। उनका आवश्यक पानी का अधिकांश हिस्सा पत्तियों से ही प्राप्त होता है। वे कई दिन पानी न पिए बिना भी आराम से जीवित रह सकते हैं, जो शुष्क सवाना क्षेत्रों में जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

५. सामाजिक और समूह में रहने वाले: जिराफ सामाजिक स्वभाव के होते हैं। उनके समूह को ‘टावर’ कहा जाता है। प्रत्येक टावर में आमतौर पर १० से २० सदस्य होते हैं, जिसमें मादा और छोटे बच्चे अधिक होते हैं। समूह में रहने से वे एक-दूसरे को खतरों के बारे में सूचित करते हैं।

६. ‘नेकिंग’ नामक अनोखी लड़ाई: नर जिराफों के बीच शक्ति और प्रजनन अधिकार के लिए ‘नेकिंग’ नामक लड़ाई होती है। वे अपनी लंबी गर्दन और सिर से एक-दूसरे पर जोर से वार करते हैं। यह लड़ाई आमतौर पर घातक नहीं होती, और हारने वाला जिराफ पीछे हट जाता है। मजबूत नर मादा पर नियंत्रण रखते हुए अपनी जोड़ी बनाते हैं।

७. जोड़ी बनाना और प्रजनन प्रक्रिया: जिराफों की प्रजनन प्रक्रिया बहुत ही अनोखी और रोचक होती है। प्रजनन का मौसम निश्चित नहीं होता और वे वर्ष भर जोड़ी बना सकते हैं। नर जिराफ मादा के प्रजनन संकेत जानने के लिए उसके पास जाकर घुटने टेक कर मूत्र पिलाते हैं। जब मादा मूत्र करती है तब नर उसकी जीभ से चखता है और ‘फ्लेमेन रेस्पॉन्स’ दिखाता है, जिसमें सिर उठाकर ऊपर के होंठ को घुमाता है। इससे मूत्र में मौजूद हार्मोन और रासायनिक संकेतों से पता चलता है कि मादा प्रजनन योग्य है या नहीं। यह जिराफ की मेटिंग प्रक्रिया में सबसे अनोखी बात होती है। घोड़ा, शेर और हाथी जैसे अन्य जानवरों में भी फ्लेमेन रेस्पॉन्स देखा जाता है, लेकिन जिराफ में मूत्र चखने का व्यवहार विशेष है।

८. जन्म प्रक्रिया भी अनोखी: मादा जिराफ खड़े होकर बच्चे को जन्म देती हैं। नवजात की ऊंचाई लगभग १.५ से २ मीटर होती है और वजन लगभग १०० किलो होता है। जन्म के समय बच्चा लगभग १.५ मीटर की ऊंचाई से गिरता है। कुछ घंटों के भीतर बच्चा उठकर चलना और मां का दूध पीना सीख जाता है, जो शिकारी से जल्दी बचने में मदद करता है।

९. जीवनकाल, दीर्घायु और संरक्षण: जंगली परिस्थितियों में जिराफ की औसत आयु २५ वर्ष होती है जबकि चिड़ियाघर में वे ४० वर्ष तक जीवित रह सकते हैं। हाल के वर्षों में वनों की कटाई, शिकार और जलवायु परिवर्तन के कारण जिराफों की संख्या कम हुई है। विश्वभर में लगभग १ लाख ४० हजार जिराफ बचे हैं और कुछ प्रजातियां संकट में हैं। संरक्षण प्रयास से कुछ क्षेत्रों में उनकी संख्या बढ़ रही है।

धनकुटा की दो नगरपालिकाओं में छात्र नामांकन अभियान शुरू

धनकुटा के महालक्ष्मी नगरपालिक ने संघीय सरकार द्वारा दिए गए दो दिन के सार्वजनिक अवकाश के निर्णय की अवहेलना करते हुए 15 वैशाख से रविवार को भी शिक्षण कार्य संचालित करने का निर्णय लिया है। पाख्रिबास नगरपालिक ने 4 वैशाख से छात्र नामांकन अभियान शुरू कर दिया है और 15 वैशाख से नियमित कक्षाओं का संचालन करने का निर्णय लिया है। संघीय सरकार ने 22 चैत्र को शैक्षिक सत्र 2083 के लिए 15 वैशाख से नामांकन और 21 वैशाख से शिक्षण प्रारंभ करने तथा सप्ताह में दो दिन अवकाश रखने का निर्णय लिया था।

धनकुटा की महालक्ष्मी नगरपालिक ने 15 वैशाख से नए शैक्षिक सत्र के प्रारंभ और सप्ताह में दो दिन अवकाश रखने के संघीय सरकार के आदेश की अनदेखी करते हुए रविवार को भी शिक्षण कार्य जारी रखने का निर्णय लिया है। नगरपालिका ने शैक्षिक सत्र को समायोजित करने के लिए नया निर्णय लिया है। महालक्ष्मी नगरपालिकाध्यक्ष ध्रुवराज राय ने 7 वैशाख से छात्र नामांकन अभियान शुरू कर 15 वैशाख से नियमित शिक्षण प्रारंभ करने का अनुरोध किया है।

पाख्रिबास नगरपालिक में छात्र नामांकन अभियान 4 वैशाख से शुरू हो चुका है और 15 वैशाख से नियमित कक्षाओं का संचालन होगा। नगरपालिका शिक्षा समिति, विद्यालय प्रबंधन समिति तथा प्राचार्यों की संयुक्त बैठक से प्राप्त सुझावों के आधार पर यह निर्णय लिया गया है, जानकारी पाख्रिबास नगरपालिकाध्यक्ष ज्ञानबहादुर गुरुङ ने दी। संघीय सरकार के निर्देशानुसार कक्षा 21 वैशाख से प्रारंभ करनी थीं, लेकिन अध्ययन की गुणवत्ता में कमी और पर्याप्त शैक्षिक दिन न होने की संभावना को देखते हुए नगरपालिका ने पहले कक्षा प्रारंभ करने का फैसला किया है।

नेपाली फुटबल संकट में, साफ चैंपियनशिप में भागीदारी अनिश्चित

क्या नेपाली फुटबल हमेशा ऐसे ही अन्योल की स्थिति में रहेगा? कौन बचाएगा नेपाली फुटबल को और इसे आगे बढ़ाने योग्य व्यक्ति कौन होगा? ये सवाल अब नेपाली फुटबल के भविष्य से जुड़े सबसे चर्चित विषय बन गए हैं। वर्तमान में नेपाली फुटबल राखेप के निलंबन और एन्फा के आंतरिक विवाद के कारण गम्भीर संकट से गुजर रहा है। यदि फीफा निलंबन वापस नहीं लेता है तो नेपाल साफ महिला चैंपियनशिप में भाग नहीं ले पाएगा। स्थगित राष्ट्रीय लिग और शहीद स्मारक महिला लिग का भविष्य अनिश्चित है और खिलाड़ी असमंजस में हैं। ७ वैशाख, काठमांडू।

नेपाली फुटबल का भविष्य क्या होगा? क्या फीफा नेपाल को निलंबित करने के निर्णय को बनाए रखेगा? या राखेप एन्फा द्वारा लगाया गया निलंबन वापस लेकर एन्फा के चुनाव को आगे बढ़ाने के लिए सहमति देगा? स्थगित राष्ट्रीय लिग फिर से शुरू होगा? केवल चार मैच खेलने के बाद स्थगित हुई शहीद स्मारक महिला लिग का भविष्य क्या होगा? क्या नेपाल आगामी साफ महिला चैंपियनशिप में भाग ले पाएगा? क्या नेपाली फुटबल लगातार ऐसे ही अन्योल में रहेगा?

सच कहें तो, नेपाली फुटबल फिलहाल बेहद अनिश्चित और उलझन भरे हालात में है। इसमें सभी पक्ष दोषी हैं – एन्फा की नेतृत्व से लेकर सदस्य जिला क्लब संघ और फुटबल से जुड़े सभी हितधारकों तक। खिलाड़ी अबोध बने हुए हैं। वे मैदान में विपक्षी को गोल करने और आक्रमण रोकने में सक्षम हैं, लेकिन इसके अलावा वे कुछ नहीं कर सकते। एन्फा द्वारा जल्द चुनाव करने की घोषणा के बाद शुरू हुई आंतरिक विवाद, राष्ट्रीय खेलकूद परिषद् (राखेप) का निलंबन और फीफा द्वारा जारी चेतावनी ने संकट को और गहरा कर दिया है।

राखेप के निलंबन के कारण एन्फा खुद को ‘निलंबित संघ’ कहकर बचा रहा है, जबकि राखेप साफ चैंपियनशिप की तैयारी में कोई पहल नहीं कर रहा है जिससे खिलाड़ियों की भागीदारी प्रभावित हो रही है। फीफा ने तृतीय पक्ष के हस्तक्षेप को अस्वीकार कर दिया है और निलंबन वापस नहीं लेने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। फीफा निलंबन जारी रहने तक नेपाल किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सकता।

नेपाल लाइफ इन्स्योरेन्सले विलम्ब शुल्कमा दियो विशेष छुट

नेपाल लाइफ इन्स्योरेन्स ने विलंब शुल्क में विशेष छूट की घोषणा

नेपाल लाइफ इन्स्योरेन्स ने अपने २५वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर अव्यवस्थित बीमालेखों की पुनः सक्रियता सुनिश्चित करने के लिए विलंब शुल्क में १०० प्रतिशत तक छूट देने की योजना जारी की है। यह योजना वैशाख ७ से जेठ ५ तक लागू रहेगी और इसका उद्देश्य बीमितों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत बनाना है। कंपनी ने यह पहली बार इतना बड़ा ब्याज छूट योजना प्रस्तुत किया है और वर्तमान में लगभग ३० प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी कंपनी के पास है।

८ वैशाख, काठमांडू। नेपाल लाइफ इन्स्योरेन्स ने अपने २५वें वार्षिकोत्सव के सुअवसर पर अव्यक्त बीमालेखों को पुनर्जीवित करने के लिए विलंब शुल्क में विशेष छूट देने की योजना घोषित की है। मौजूदा आर्थिक बाधाओं के कारण कई बीमालेख अव्यवस्थित हो रहे हैं, ऐसे में सुविधाजनक नवीनीकरण भुगतान द्वारा इन बीमालेखों को पुनः सक्रिय कर बीमितों को आर्थिक सुरक्षा देना इस योजना का उद्देश्य बताया गया है।

वैशाख ७ से प्रभावी यह योजना जेठ ५ तक जारी रहेगी। इस अवधि में अव्यवस्थित बीमालेख पुनः सक्रिय करने पर विलंब शुल्क में १०० प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी, जो २०८२/८३ के पुनर्जागरण योजना के अंतर्गत लागू है। कंपनी का कहना है, ‘रजत जयंती के अवसर पर पहली बार इतनी बड़ी विशेष छूट योजना लाई गई है।’ साथ ही यह भी कहा गया कि ‘३० दिन की इस सुविधा का लाभ सभी अव्यवस्थित बीमालेख वाले बीमित उठा सकते हैं।’ देश की प्रमुख जीवन बीमा कंपनी नेपाल लाइफ लगभग ३० प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ अग्रणी बनी हुई है।

२४ घंटे में ३,५०१ वाहन चालकों के खिलाफ ट्रैफिक नियम उल्लंघन पर कार्रवाई

काठमांडू उपत्यका में पिछले २४ घंटों में ट्रैफिक पुलिस ने तीन हजार ५०१ वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की है। कार्रवाई में नशे में ड्राइविंग करने वाले ७७, रेड लाइट उल्लंघन करने वाले १५८ और तेज गति से वाहन चलाने वाले ८९ चालक शामिल हैं। उपत्यका ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता नरेशराज सुवेदी ने बताया कि इन कार्यवाहियों से २५ लाख १५ हजार ५०१ रुपये का राजस्व संग्रहित हुआ है।

आज सुबह तक नशे में ड्राइविंग पर ७७, खराब स्थिति में वाहन चलाने पर ६९, रेड लाइट उल्लंघन पर १५८, तेज गति से वाहन चलाने पर ८९, लेन अनुशासन का उल्लंघन करने पर १७२, वाहन के दरवाजे खुले रखने पर ५७, नो हर्न नियम का उल्लंघन करने पर ७७, वृहद चढ़ाई करने और यात्रियों को अवैध रूप से चढ़ाने पर ५५ तथा अन्य उल्लंघनों पर २ हजार ७४७ लोगों सहित कुल तीन हजार ५०१ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उपत्यका ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता एवं पुलिस उपरीक्षक नरेशराज सुवेदी ने जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘‘विभिन्न उल्लंघनों के कारण पिछले २४ घंटे में कुल तीन हजार ५०१ लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। इससे २५ लाख १५ हजार ५०१ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।’’

नेपाल केम्पो टीम २२वें विश्व केम्पो चैम्पियनशिप में भाग लेने के लिए तुर्की रवाना

नेपाल केम्पो टीम १६ सदस्यीय दल के साथ ८ वैशाख को तुर्की के अंतालिया में आयोजित होने वाली २२वीं विश्व के्पो चैम्पियनशिप में भाग लेने के लिए रवाना हुई है। महिलाओं की ओर से अंजना शाही, प्रिशा राज्यलक्ष्मी शाह, ईरा गौतम और मोनालिशा धामी सेमी केम्पो में प्रतिस्पर्धा करेंगी जबकि पुरुषों की तरफ ६ खिलाड़ी विभिन्न विधाओं में हिस्सा लेंगे। नेपाल केम्पो खुकुरी फेडरेशन के अध्यक्ष पावेल शाह ने खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पदक जीतने की उम्मीद जताई है। ८ वैशाख, काठमांडू।

तुर्की के अंतालिया में आयोजित होने वाली २२वीं विश्व केम्पो चैम्पियनशिप में भाग लेने के लिए नेपाली केम्पो टीम रवाना हो गई है। यह प्रतियोगिता २६ अप्रैल तक चलेगी और नेपाल से १६ सदस्यीय टीम इसमें हिस्सा लेगी। नेपाल केम्पो खुकुरी फेडरेशन के अध्यक्ष पावेल शाह के नेतृत्व में गई इस टीम में ६ पुरुष और ४ महिला खिलाड़ी शामिल हैं, साथ ही अन्य सदस्य अधिकारी और अभिभावक हैं।

महिला टीम में अंजना शाही (५० किलोग्राम), प्रिशा राज्यलक्ष्मी शाह (२२ किलोग्राम), ईरा गौतम (२५ किलोग्राम) और मोनालिशा धामी (६० किलोग्राम) सेमी केम्पो में प्रतिस्पर्धा करेंगी। अंजना शाही काता और सेल्फ डिफेन्स में भी चुनौती प्रस्तुत करेंगी, वहीं ईरा गौतम काता में प्रतिस्पर्धा करेंगी। पुरुषों में सुरेश पराजुली (६५ किलोग्राम), सुलभ श्रेष्ठ (३० किलोग्राम) और कृदिक्स विक्रम कुँवर (२५ किलोग्राम) सेमी केम्पो में भाग लेंगे। दिलमान लामा फुल केम्पो, काता और सेल्फ डिफेन्स विधाओं में प्रतिस्पर्धा करेंगे। यमन पांडे फुल केम्पो, सेमी केम्पो, सबमिशन, सेल्फ डिफेन्स और काता समेत पांच विधाओं में मुकाबला करेंगे, जबकि शिवहरी राई सेमी और फुल केम्पो के साथ-साथ काता और सबमिशन में भी चुनौती पेश करेंगे।

टीम के प्रस्थान के समय अध्यक्ष पावेल शाह ने कहा कि खिलाड़ी बेहतरीन प्रदर्शन कर पदक जीतेंगे। खिलाड़ियों ने भी देश का नाम ऊँचा रखने का संकल्प व्यक्त किया है।

‘पहाड’ को विशेष शोमा सेलिब्रेटी प्रतिक्रिया कस्तो छ ?

फिल्म ‘पहाड़’ के विशेष प्रदर्शन पर सेलिब्रिटीज़ की प्रतिक्रियाएं

तुलसी घिमीरे द्वारा निर्देशित फिल्म ‘पहाड़’ देश की वर्तमान स्थिति को प्रस्तुत करते हुए युवाओं को अपने देश लौटने की प्रेरणा देती है। फिल्म विकास बोर्ड के अध्यक्ष दिनेश डीसी ने इस फिल्म को देश की समग्र स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाने वाला बताया और उसके संदेश की प्रशंसा की। फिल्म में बेरोजगारी, मानवीय समर्थन से वंचित पहाड़ और पानी की कमी जैसे विषयों को शामिल किया गया है, और दर्शकों की प्रतिक्रिया ने टीम को उत्साहित किया है।
काठमांडू में सोमबार की शाम आयोजित विशेष प्रदर्शन कार्यक्रम में सेलिब्रिटीज़ ने बताया कि फिल्म ने देश की समग्र समस्याओं को उभार कर प्रस्तुत किया है। संगीतकार शम्भुजीत बास्कोटा ने कहा कि इस फिल्म के संदेश को राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘पहाड़ खाली हो रहा है। रोजगार नहीं है, हरे-भरे पहाड़ सूखते जा रहे हैं। फिल्म का उठाया गया संदेश राष्ट्र के लिए गंभीर विषय है। यह युवाओं को देश लौटने और सामूहिक प्रयास से समस्याओं का समाधान करने की प्रेरणा देता है। फिल्म उत्कृष्ट है।’
फिल्म विकास बोर्ड के अध्यक्ष दिनेश डीसी ने कहा कि तुलसी घिमीरे के पूर्व के काम मनोरंजन के साथ-साथ गहरा संदेश भी देते हैं। उन्होंने कहा, ‘तुलसी दाइ ने फिल्म के माध्यम से जो संदेश दिया है वह प्रशंसनीय है। अभिनय सहित फिल्म ने देश की समग्र स्थिति को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया है। कथा पहाड़ की है लेकिन फिल्म में राष्ट्र की तस्वीर भी है। यह फिल्म युवाओं को अपने देश, गांव और पहाड़ लौटने के लिए प्रेरित करती है।’ निर्देशक तुलसी घिमीरे, कलाकार विपिन कार्की, रवींद्रसिंह बानियाँ, रेणुनाथ योगी, पंचमी घिमीरे सहित अन्य ने फिल्म को मिली प्रतिक्रिया पर जानकारी दी।
९ वर्षों के बाद निर्देशन में लौटे तुलसी घिमीरे दर्शकों की प्रतिक्रियाओं से अत्यंत उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, ‘हमने फिल्म के माध्यम से जो संदेश देना चाहा था वह दर्शकों ने अच्छी तरह समझा है। कई लोगों ने इसे अपनी ही कहानी माना है। मेरा दिया संदेश सफलतापूर्वक पहुंचा है। फिल्म देखने वाले संतुष्ट होकर लौटे हैं।’ उन्होंने बताया कि बेरोजगारी, मानवीय समर्थन से वंचित पहाड़ और पानी की कमी जैसी समसामयिक समस्याओं को फिल्म ने पर्दे पर स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है।
विपिन कार्की ने कहा, ‘दर्शकों की प्रतिक्रिया से टीम उत्साहित हुई है। यह फिल्म नेपाली मिट्टी की मौलिक कहानी पेश करती है। भविष्य में दर्शकों की संख्या और भी बढ़ेगी, मुझे इसकी पूरी उम्मीद है। जिन्होंने फिल्म देखी हैं वे दूसरों को भी इसे देखने की सलाह देंगे।’ अभिनेता रवींद्रसिंह बानियाँ ने कहा कि निर्देशक तुलसी घिमीरे के साथ काम करना उनके लिए गर्व की बात है। फिल्म में मदन कृष्ण श्रेष्ठ, उमा गिरी, अरुण क्षेत्री भी अभिनयरत हैं। फिल्म में युवा पलायन के कारण खाली होते पहाड़ी क्षेत्रों तथा उससे उत्पन्न सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को दर्शाया गया है। निर्देशक घिमीरे ने फिल्म में पहले ‘बलिदान’ में काम करने वाले मदन कृष्ण श्रेष्ठ और ‘चिनो’ की छायांकन करने वाले शिव श्रेष्ठ तथा सुनिल थापा को भी प्रस्तुत किया है। फिल्म के छायांकन प्रमोद प्रधान ने किए हैं। भाग्यरत्न फिल्म्स प्रा.लि. के बैनर तले बनी इस फिल्म में निर्देशक घिमीरे की सबसे छोटी बेटी पंचमी ने अभिनेत्री के रूप में डेब्यू किया है, जबकि उनकी बड़ी बेटी भावना ने प्रोडक्शन डिजाइन की जिम्मेदारी संभाली है।

कञ्चनपुर में विवाह समारोह में युवक पर धारदार हथियार से हमला कर हत्या, दो गिरफ्तार

८ वैशाख, धनगढी । कञ्चनपुर में विवाह समारोह में मौजूद १८ वर्ष के युवक उज्वल सायर पर धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई है। यह घटना पुनर्वास नगरपालिका–५, भानुबस्ती में हुई है और पुलिस ने इसकी जानकारी दी है। जिला पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता, पुलिस उपनिरीक्षक (डीएसपी) हेमबहादुर शाही के अनुसार, पिछली रात लगभग साढे १ बजे विवाह समारोह में शामिल होने के दौरान विवाद के बाद उज्वल पर धारदार हथियार से हमला किया गया था।

उज्वल को तत्काल उपचार के लिए धनगढी के माया मेट्रो अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई, डीएसपी शाही ने बताया। घटना में उज्वल के सीने पर धारदार हथियार से चोट लगी थी।

इस घटना में शामिल होने के आरोप में पुलिस ने दो व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।