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लेखक: space4knews

विवाहमा खर्च घटाउने ५ स्मार्ट तरिका – Online Khabar

विवाह में खर्च कम करने के ५ स्मार्ट उपाय

समाचार संक्षेप संपादकीय समीक्षा किया गया है। नेपाली विवाह अत्यंत महंगे होते जा रहे हैं, जो सामान्य परिवार की वर्षों से बचाई गई पूंजी को समाप्त कर सकते हैं या कर्ज़ के बोझ को बढ़ा सकते हैं। विवाह की योजना बनाते समय कुल बजट निर्धारित करना और उसे विभिन्न श्रेणियों में बांटना आवश्यक होता है। आजकल नेपाली विवाह अत्यधिक महंगे होते जा रहे हैं। बड़े पार्टी पैलेस, महंगी लाइटिंग, विदेशी सजावट, कई कार्यक्रम और सैकड़ों मेहमानों के कारण एक सामान्य परिवार की सारी बचत एक बार में खर्च हो सकती है। बचत न होने पर वर्षों का कर्ज बढ़ जाता है। लेकिन विवाह जीवन का एक सुंदर अध्याय है, यह दिखावे की प्रतिस्पर्धा का विषय नहीं है। विवाह में अनावश्यक खर्च कटौती कर नई ज़िन्दगी के लिए कुछ बचत की जा सकती है। दूसरों की दिखावा और भड़कीली शैली की चाह स्वाभाविक है, पर विवाह को बहुत भव्य बनाने की कोशिश करने पर आर्थिक समस्याएं हो सकती हैं। खर्च घटाने का मतलब उत्सव न मनाना नहीं है। सही योजना से विवाह को आनंददायक, यादगार और किफायती बनाया जा सकता है।

१. बजट पहले से स्पष्ट रूप से निर्धारित करें: विवाह योजना शुरू करने से पहले कुल बजट निर्धारित करना चाहिए। उदाहरण के लिए ५ लाख, ७ लाख या ८ लाख रुपये हो सकते हैं। उस राशि को भोज, कपड़े, आभूषण, फोटोग्राफी, परिवहन आदि श्रेणियों में विभाजित करें। बजट तय करने के बाद सभी निर्णय उसी सीमा के भीतर होना चाहिए। पार्टी पैलेस से बात करते समय अपनी बजट सीमा पहले बताएं और पूछें, ‘इस राशि में क्या-क्या संभव है?’ इससे महंगे विकल्पों से बचा जा सकता है। बजट बनाते समय दोनों परिवार और अभिभावकों से चर्चा जरूरी है ताकि बाद में आर्थिक तनाव न हो।

२. विवेकपूर्ण स्थल चयन: बड़े पार्टी पैलेस में प्रति प्लेट १५०० से ३५०० रुपये तक खर्च हो सकता है। इसके बजाय उपत्यका में बजट फ्रेंडली पार्टी पैलेस, सामुदायिक हॉल, गुठी हॉल या हेरिटेज स्थल चुनें। ऐसे स्थानों में आधारभूत सजावट, लाइटिंग और पार्किंग सुविधाएं पैकेज में शामिल होती हैं। ये स्थल प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण होते हैं और महंगी सजावट की जरूरत नहीं पड़ती।

३. डेस्टिनेशन विवाह – अच्छा और सस्ता विकल्प: डेस्टिनेशन विवाह महंगा होता है यह धारणा गलत है। पोखरा के फेवा ताल के किनारे, नगरकोट के हिमालयी मनोरम दृश्य, चितवन जंगल सफारी, ढोरपाटन या इलाम जैसे स्थानों पर छोटा और सुंदर विवाह किया जा सकता है। डेस्टिनेशन विवाह के फायदे भी हैं। सभी मेहमानों को एक ही रिसोर्ट या होटल में व्यवस्थित किया जा सकता है। यात्रा, आवास और भोजन व्यय को मिलाकर कुल खर्च ३०-४५ प्रतिशत तक घटाया जा सकता है। प्राकृतिक वातावरण डेकोरेशन खर्च को भी बचाता है।

४. मेनू में सोच-समझकर चयन: खाने में सबसे अधिक खर्च होता है। महंगे स्टार्टर, चाट काउंटर और विदेशी व्यंजनों से बचें। नेपाली पारंपरिक मेनू जैसे दाल भात, विभिन्न तरकारियाँ, मासु, अचार, साग, रोटी को प्राथमिकता दें। यह स्वादिष्ट और बजट अनुकूल दोनों होता है। भारतीय या महंगी मिठाइ की जगह स्थानीय मिठाई जैसे सेलरोटी, खजूर, लड्डू, काजू बर्फी का उपयोग करें। स्टार्टर और चाट की संख्या कम करें। इससे २०-३० प्रतिशत खर्च में कटौती होती है।

५. अन्य महत्वपूर्ण खर्च कटौती के उपाय: अतिथियों की सूची सीमित करें: नजदीकी रिश्तेदार और परिचित को ही निमंत्रण दें। अतिथि संख्या १५०-२०० तक सीमित रखने से अच्छी बचत होती है। सजावट और लाइटिंग: सरल लेकिन सुंदर सजावट चुनें। स्थानीय फूल, कपड़े और एलईडी लाइट का प्रयोग करें। महंगी फ्लोरल डेकोरेशन से बचें। समारोहों की संख्या कम करें: सगाई, मेहंदी, सगुन, कन्यादान और रिसेप्शन जैसे कार्यक्रमों को अलग-अलग करने की बजाय २-३ मुख्य कार्यक्रमों पर ध्यान दें। दोनों परिवार सहमत हों तो एक बड़ा कार्यक्रम भी हो सकता है। फोटो-वीडियो: महंगे स्टूडियो के बजाय अच्छे लेकिन बजट फ्रेंडली फोटोग्राफर चुनें। प्र-वेडिंग सत्र छोटा और सरल रखें। ध्यान रहे कि विवाह दो लोगों का प्रेम और दो परिवारों का मेल है, यह दिखावा या प्रतिस्पर्धा का विषय नहीं है। इसलिए महंगे विवाह नहीं, खुशहाल, समझदार और यादगार विवाह चुनें। सही योजना से सीमित खर्च में भी अत्यंत सुंदर, मजेदार और भावनात्मक रूप से सम्पन्न विवाह किया जा सकता है। बचत की गई रकम से हनीमून की शानदार यात्रा, नए घर की सजावट या भविष्य में निवेश किया जा सकता है।

संघीयता सबलीकरण समिति अन्तर्गत तीन उपसमितिहरूको पुनर्गठन

७ वैशाख, काठमाडौं। राष्ट्रिय सभाभित्रको संघीयता सबलीकरण तथा राष्ट्रिय सरोकार समितिले सोमबार तीनवटा संसदीय उपसमितिहरूको पुनर्गठन गरेको छ। सिंहदरबारमा आयोजित समितिको बैठकले संघीयता सबलीकरण, अन्तर्राष्ट्रिय सम्बन्ध तथा राष्ट्रिय सुरक्षा र सामाजिक न्यायसम्बन्धी तीनवटा उपसमितिहरू पुनर्गठित गरेको जानकारी जिल्ला सभापति जयन्तीदेवी राईले दिइन्।

उनका अनुसार संघीयता सबलीकरण उपसमितिको संयोजकको जिम्मेवारी श्रीकृष्णप्रसाद अधिकारीलाई दिइएको छ। उक्त समितिका सदस्यहरूमा उदय बोहरा, किरणबाबु श्रेष्ठ र सोनाम गेल्जेन शेर्पा रहेका छन्। अन्तर्राष्ट्रिय सम्बन्ध तथा राष्ट्रिय सुरक्षा उपसमितिको संयोजकमा विष्णुकुमारी सापकोटा चयन भएकी छिन्। यस उपसमितिका सदस्यहरू नारायणदत्त मिश्र, ललितजंग शाही र दुर्गाकुमारी गुरुङ रहेका छन्।

सभापति राईले सामाजिक न्याय उपसमितिको संयोजकमा रोशनी मेचेलाई चयन गरिएको जानकारी दिइन्। उक्त उपसमितिका सदस्यहरू धर्मेन्द्र पासवान र मनरुपा शर्मालाई नियुक्त गरिएको छ। सभापति राईले भनिन्, ‘हामीले अहिले तीनवटा संसदीय उपसमितिहरू पुनर्गठन गरेका छौं। हामीलाई संघीयता सबलीकरण र राष्ट्रिय सरोकारसँग सम्बन्धित विभिन्न कार्यक्षेत्रहरूमा अध्ययन गर्नुपर्नेछ। यी सबै क्षेत्रहरूमा हाम्रा उपसमितिहरूले काम गर्ने छन्।’

सभापति राईका अनुसार पुनर्गठित संसदीय उपसमितिहरू संघीयता सबलीकरण तथा राष्ट्रिय सरोकारसँग सम्बन्धित विभिन्न क्षेत्रहरूको अध्ययन गरी प्रतिवेदन तयार गर्नेछन्।

रूसी दावा: यूक्रेनी समाज में निराशा और हथियार की उपलब्धता से आतंकवादी घटनाओं में वृद्धि संभव

रूसी विदेश मंत्रालय के विशेष दूत रोडियन मिरोश्निक ने यूक्रेनी समाज में निराशा और प्रशासनिक अभद्रता के कारण आतंकवादी हमलों में बढ़ोतरी की चेतावनी दी है। गत 18 अप्रैल को कियाव में हुई गोलीकांड में चार लोगों की हत्या और बंधक बनाने की घटना में यूक्रेनी विशेष बलों ने हमलावर को मार गिराया था। मिरोश्निक ने ज़ेलेन्स्की नेतृत्व वाली सरकार पर जनता के साथ किए गए वादे पूरे न करने और भ्रष्टाचार के कारण लोगों को युद्ध के बीच में छोड़ने का आरोप लगाया है।

मिरोश्निक के अनुसार, यूक्रेनी समाज में गहरी निराशा, आम जनता के पास अत्यधिक हथियार और प्रशासनिक स्वेच्छाचारिता के चलते आने वाले समय में आतंकवादी घटनाओं की संख्या बढ़ सकती है। उन्होंने रूसी समाचार एजेंसी के साथ बातचीत में कहा कि यूक्रेनी शासन की अन्यायपूर्ण नीतियों और मानसिक तनाव के शिकार व्यक्ति अपना गुस्सा निहत्थे नागरिकों पर निकाल रहे हैं।

उन्होंने व्लादिमीर ज़ेलेन्स्की की सरकार पर सामाजिक प्रतिबद्धताओं को पूरा न करने और दमनकारी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। मिरोश्निक ने कहा कि ज़ेलेन्स्की और उनके करीबी भ्रष्टाचार के जरिए समृद्ध हो रहे हैं, वहीं आम जनता न्याय के बिना युद्ध के बीच में पीड़ित बनी हुई है।

18 अप्रैल को यूक्रेन की राजधानी कियाव के मुख्य इलाके में एक सशस्त्र व्यक्ति ने राइफल का इस्तेमाल कर कम से कम चार लोगों की हत्या की थी। इसके बाद इस हमलावर ने एक सुपरमार्केट में दाखिल होकर आम लोगों को बंधक बना लिया था। यूक्रेनी विशेष बलों ने हमला करने वाले को मार गिराया, लेकिन इससे पहले उसने एक बंधक की हत्या कर दी थी। इस घटना में और 14 लोग घायल हुए थे, जिनमें से एक की अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। यूक्रेनी सरकारी वकील कार्यालय ने इस घटना को ‘आतंकवादी हमला’ करार देते हुए जांच शुरू की है। मिरोश्निक का दावा है कि ऐसी घटनाएं यूक्रेनी व्यवस्था की विफलता का स्पष्ट संकेत हैं।

गृहमन्त्री गुरुङमाथि लागेका आरोपको छानबिन गर्न कांग्रेसको माग

गृहमन्त्री गुरुङमाथि लागेको आरोपहरूको छानबिन गर्न कांग्रेसको आग्रह

नेपाली कांग्रेसले गृहमन्त्री सुधन गुरुङमाथि लागेको आरोपहरूको स्वतन्त्र, निष्पक्ष र उच्चस्तरीय छानबिन तुरुन्तै सुरु गर्न सरकारसँग माग गरेको छ। कांग्रेसले आरोपहरू ढाकछोप भएमा जनविश्वासमा गम्भीर चोट पुग्ने बताउँदै छानबिन प्रक्रियामा ढिलाइ वा बाह्य प्रभाव नपुग्न विशेष अनुरोध समेत गरेको छ। ७ वैशाख, काठमाडौं।

कांग्रेसले सोमबार एक प्रेस विज्ञप्ति जारी गर्दै गृहमन्त्री गुरुङमाथि लागेको आरोपहरूलाई छल्याउन खोज्दा जनविश्वासमा गम्भीर संकट उत्पन्न हुने चेतावनी दिएको छ। पार्टी प्रवक्ता देवराज चालिसेले भने, ‘गृहमन्त्रीसँग सम्बन्धित सम्पूर्ण आरोपहरूको स्वतन्त्र, निष्पक्ष र उच्चस्तरीय छानबिन प्रक्रिया तुरुन्तै सुरु गरियोस्।’

कांग्रेसको मतानुसार, पारदर्शिता र जवाफदेहिता लोकतन्त्रका मूल स्तम्भ हुन् र त्यसैले यी प्रश्नहरूको विश्वसनीय, निष्पक्ष र तथ्यमा आधारित छानबिन अत्यावश्यक छ। गृहमन्त्री गुरुङसँग सम्बन्धित पछिल्लो प्रकरणले राजनीतिक नैतिकता र पारदर्शितासँग जोडिएका गम्भीर प्रश्नहरू उठाएको पार्टीले जनाएको छ।

‘शिक्षा हेतु विश्वव्यापी कार्यसप्ताह’ की शुरुआत, शिक्षा निवेश वृद्धि और बजट कटौती को लेकर चिंता

नेपाल में शिक्षा क्षेत्र में पर्याप्त निवेश सुनिश्चित करने के लिए ‘शिक्षा हेतु विश्वव्यापी कार्यसप्ताह’ की शुरुआत हुई है। राष्ट्रीय अभियान नेपाल (एनसीई) ने शिक्षा क्षेत्र में बजट कटौती हो रहे और अधिक चालू खर्च के कारण पूर्वाधार विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की जानकारी दी है। इस अभियान ने शिक्षा क्षेत्र के कुल बजट का १५–२० प्रतिशत निवेश और अनुदान बढ़ाने की सरकार से मांग की है।

यह कार्यसप्ताह विश्वव्यापी स्तर पर मनाया जा रहा है और नेपाल में ‘शिक्षा वित्त पोषण के लिए अभियान की ज्योति जलाए रखें’ के नारे के साथ चल रहा है। एनसीई ने आज से २७ अप्रैल तक विभिन्न जागरुकता कार्यक्रमों के माध्यम से इस अभियान को आगे बढ़ाया है। संविधान ने आधारभूत और माध्यमिक शिक्षा को निःशुल्क और अनिवार्य बनाया है, लेकिन इसके प्रभावी लागू करने के लिए पर्याप्त बजट आवंटित नहीं किया गया है, ऐसा बताया गया है।

पिछले वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में बजट कटौती को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। वित्तीय वर्ष २०६७/६८ में कुल राष्ट्रीय बजट का १७ प्रतिशत से अधिक शिक्षा क्षेत्र को दिया गया था, जबकि अब यह लगभग १०.७५ प्रतिशत तक सीमित हो चुका है। प्रदेश और स्थानीय स्तर पर भी शिक्षा क्षेत्र में अपेक्षित निवेश न होने के आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं।

एनसीई के अध्यक्ष लबराज ओली ने विदेशी सहायता में कमी और ऋण बोझ में वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में शिक्षा क्षेत्र में और भी चुनौतियां उत्पन्न होंगी। अभियान के तहत केंद्रीय, प्रदेश और स्थानीय स्तर पर संवाद, चर्चा, नागरिक सभाएँ, रेडियो संदेश और सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की जानकारी दी गई है।

नेपाल-यूएई क्रिकेट श्रृंखला की प्रमुख विशेषताएँ

नेपाल और यूएई के बीच सोमवार और मंगलवार को होने वाली ‘अंडर लाइट्स टी-२० क्रिकेट’ श्रृंखला नेपाल के लिए तीन महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करती है। पहला, दो वर्षों बाद नेपाल में पुनः अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन होगा। दूसरा, कीर्तिपुर रंगशाला में कृत्रिम प्रकाश के तहत यह पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता होगी। तीसरा, ऑस्ट्रेलियाई कोच स्टुअर्ट ल के तहत नेपाली राष्ट्रीय पुरुष टीम घरेलू मैदान पर पहली बार ऐसी प्रतियोगिता आयोजित करेगी। दीपेन्द्र सिंह ऐरी की कप्तानी में आज शाम ५ बजे से मैच शुरू होगा और टिकट की कीमत ७५० रुपये निर्धारित की गई है। श्रृंखला का मुख्य आकर्षण नेपाल और यूएई के बीच प्रतिद्वंद्विता ही है, जो दर्शकों में हमेशा से उत्सुकता का विषय रही है।

कई लोगों को याद होगा कि नेपाल और यूएई की पिछली भिड़ंत टी-२० विश्व कप क्वालीफायर २०२६ के लिए ओमान में हुई थी। उस रोमांचक मुकाबले में नेपाल ने अंतिम ओवर की अंतिम गेंद पर यूएई को १ रन से हराकर विश्व कप का टिकट हासिल किया था। दीपेन्द्र सिंह ऐरी की कप्तानी में नेपाली टीम पहली बार टी-२० शैली में मैदान पर उतरेगी, जो कि एक नया और रोमांचक पहलू है।

नेपाल सरकार ने कीर्तिपुर क्रिकेट मैदान को जल्दबाजी में तैयार कराया था। जब ठेकेदार कंपनी समय पर कार्य पूरा नहीं कर सकी, तब लाखों रुपये की জরिमाना भरने के बाद नेपाल की पहली फ्लड लाइट सहित अंतरराष्ट्रीय रंगशाला का उद्घाटन हुआ। नेपाल ने २०२४ के जून महीने में टी-२० विश्वकप अमेरिका और वेस्ट इंडीज में खेला था, जबकि इसी वर्ष फरवरी में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भी एक और विश्व कप मुकाबला खेला गया था।

ऑस्ट्रेलिया के स्टुअर्ट ल को एक कुशल कोच माना जाता है। उन्होंने प्रतियोगिता से पहले दो राष्ट्रीय टीमें बनाकर एकदिवसीय और टी-२० आई शैली के अनुसार अलग रणनीति अपनाने के संकेत दे दिए हैं। उन्होंने दीपेन्द्र सिंह ऐरी को टी-२० टीम का नेतृत्व सौंपा है, जबकि रोहित पौडेल सहित वरिष्ठ खिलाड़ियों को विश्राम देते हुए टीम की संरचना में बदलाव किया है। अब उन्हें पांच हफ्तों के अंदर लीग-२ के आठ मैचों में सकारात्मक परिणाम देने का दबाव है।

कालिन्चोक हाइड्रोपावरको आईपीओ बाँडफाँट – Online Khabar

कालिन्चोक हाइड्रोपावर के आईपीओ का आवंटन सम्पन्न

कालिन्चोक हाइड्रोपावर के प्राथमिक शेयर (आईपीओ) का आवंटन पूरा हो चुका है। बिक्री प्रबंधक आरबिबी मर्चैंट बैंकिंग ने एक औपचारिक कार्यक्रम के माध्यम से शेयरों का आवंटन किया। इसके अनुसार, कंपनी के 68,475 लोगों को 10 शेयरों की दर से शेयर प्राप्त हुए हैं। गत चैत्र 22 से 25 तारीख तक प्रति शेयर 100 रुपये की दर से 6,84,750 शेयर आम जनता के लिए जारी किए गए थे। कुल 27,84,519 लोगों ने शेयरों के लिए आवेदन किया था, जिनमें से 26,35,634 आवेदन स्वीकृत हुए।

इस कंपनी ने दोलखा जिले में बहने वाली सांगुखोला नदी से 5 मेगावाट क्षमता का सार्वजनिक जलविद्युत परियोजना का निर्माण किया है। इस परियोजना के निर्माण पर कुल 120 करोड़ रुपये की लागत आई है, जबकि प्रति मेगावाट लागत 24 करोड़ 14 लाख रुपये है। सामान्य निवेश वापसी अवधि 9.19 वर्ष है, जबकि छूट निवेश वापसी अवधि 15.36 वर्ष है।

नेपाल बिस्कुट उत्पादक संघ ने सीमा नाका पर सख्ती के सरकारी कदम का स्वागत किया

७ वैशाख, काठमाडौं। अवैध भन्सार छलेर होने वाले आयात को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा सीमा नाकाओं पर सख्ती किए जाने पर नेपाल बिस्कुट उत्पादक संघ ने स्वागत किया है। संघ द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस कदम से स्वदेशी उद्योगों की रक्षा होगी, बंद पड़ी कंपनियां पुनः चालू होंगी और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में मजबूती आएगी। संघ के द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, नेपाल में वर्तमान में ४० बिस्कुट उद्योग स्थापित हैं। परन्तु विदेशी बिस्कुट के अवैध आयात के कारण स्वदेशी उद्योग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से २३ पूरी तरह बंद हैं और केवल १७ ही संचालन में हैं।

स्वदेशी बिस्कुट उद्योग का वार्षिक कुल कारोबार लगभग १५०० करोड़ (१५ अरब) रुपैयाँ से अधिक है। फिर भी, सीमा नाकाओं से कर बिना वार्षिक ६०० करोड़ (६ अरब) रुपैयाँ से अधिक बिस्कुट अवैध रूप से नेपाल में लाया जा रहा है, जिसे संघ ने अनुमानित किया है। ‘‘कच्चा माल तो विदेश से कर देकर लाना पड़ता है, लेकिन तैयार बिस्कुट का भन्सार छल कर आना स्वदेशी उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है,’’ संघ की विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘ऐसे में सीमा प्रबंधन सख्त होना, कर चोरी कम होना और नियमों के अनुसार ही सामग्री का प्रवेश होना उद्योग, रोजगार और राजस्व के सभी पक्षों के लिए सकारात्मक कदम है।’’

राजस्व और रोजगार में वृद्धि की संभावना जताते हुए उत्पादकों ने कहा है कि अगर सरकार सीमा नाकाओं पर कड़ाई कर अवैध आयात पूरी तरह रोकती है तो राज्य का राजस्व और घरेलू रोजगार दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। संघ के अनुसार, वर्तमान में नेपाली बिस्कुट उद्योग सीधे तौर पर १०,००० और अप्रत्यक्ष रूप से १,००,००० लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं, साथ ही इस क्षेत्र से जुड़े १,५०,००० किसान हैं। यदि अवैध आयात बंद हो जाता है तो उद्योगों द्वारा अब तक भरे जा रहे २०० करोड़ के सीधे कर में वृद्धि होकर यह ३०० करोड़ तक पहुंच सकता है तथा ५,००० से अधिक युवाओं के लिए नए रोजगार सृजित होंगे, ऐसा संघ ने जानकारी दी है।

पूर्व में इसी तरह की सख्तियों के दौरान बिस्कुट की मांग में बढ़ोतरी हुई थी और बंद उद्योग पुनः संचालन में आए थे, यह अनुभव संघ ने याद दिलाते हुए सरकार से अनुरोध किया है कि यह नीति अस्थायी न होकर दीर्घकालीन होनी चाहिए। साथ ही विदेश से आयातित वस्तुओं पर अधिकतम खुदरा मूल्य अंकित करना और बिल-रसीद अनिवार्य करने वाले नियमों का संघ ने भी हार्दिक स्वागत किया है। ‘‘पहला विकल्प नेपाली उत्पादन’’ के नारे के साथ संघ ने उपभोक्ताओं और व्यापारियों से स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। खुदरा विक्रेताओं से भी कहा गया है कि वे पहले स्वदेशी सामान रखें और फिर करों का भुगतान कर कानूनी तरीकों से आयातित वस्तुएं स्टॉक करें। ‘‘नेपाली उत्पादन खरीदना केवल सामान खरीदना नहीं है; यह रोजगार बचाने, किसानों को प्रोत्साहित करने, उद्योग चलाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने का कदम है,’’ विज्ञप्ति में अन्त में कहा गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के तीन विकल्प छोड़ ट्रंप ने नाकाबंदी क्यों चुनी?

इरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पूर्ण रूप से खुलने की घोषणा की है, बावजूद इसके अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने नाकाबंदी जारी रखने का फैसला किया है। इरानी सेनाओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपना नियंत्रण पुनः स्थापित करते हुए अमेरिका की नाकाबंदी के जवाब में जलडमरूमध्य को बंद रखा है। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक अभियान के लिए नेटो और एशियाई देशों के साथ गठबंधन बनाने में विफल रहने के कारण उन्होंने अकेले कार्रवाई की है। ७ वैशाख, काठमांडू। शुक्रवार को इरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से युद्धविराम अवधि के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्ण रूप से खुलने की जानकारी दी थी। लेकिन इस घोषणा के कुछ ही घंटे बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज में अमेरिका की नाकाबंदी जारी रहेगी।

इरान पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि अगर अमेरिका अपनी नाकाबंदी बंदरगाहों पर जारी रखता है तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देगा। शनिवार को इरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, सेना ने होर्मुज में अपना नियंत्रण पुनः शुरू कर दिया है। अमेरिकी नाकाबंदी के जवाब में इरान ने रविवार को भी होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रखा। अब अमेरिका के पास इस स्थिति में कई विकल्प थे। पहला विकल्प था शांति वार्ता और परेशानियों का शांतिपूर्ण समाधान निकालना, लेकिन प्राथमिक वार्ता असफल होने पर यह विकल्प जल्दी छोड़ दिया गया। दूसरा विकल्प था कड़क कार्रवाई करना, जिसका मतलब था इरान के तेल ढांचे को नष्ट करना, जिससे तनाव काफी बढ़ जाता और संघर्ष की संभावना खत्म हो जाती। तीसरा विकल्प था युद्धपूर्व स्थिति को पुनर्स्थापित करना, अर्थात् होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खुलवाना, लेकिन यह आसान काम नहीं था।

ट्रंप ने अपनाया चौथा विकल्प: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौथा विकल्प चुना है। होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक अभियान के लिए अमेरिका ने नेटो सहयोगी देशों को तैयार नहीं कर पाया और प्रभावित एशियाई देशों के साथ गठबंधन बनाने की कोशिश भी असफल रही। इसलिए अमेरिका को अकेले ही कार्रवाई करनी पड़ी, हालांकि संसाधन पर्याप्त थे, पर परिणाम उम्मीद के अनुरूप नहीं आए। इरान के खिलाफ अभियान की शुरुआत में अमेरिका ने पश्चिम एशिया में बड़ी नौसैनिक ताकत तैनात की, जिसमें विनाशक जहाज (डिस्ट्रॉयर), गश्ती जहाज और अन्य अवसंरचनाएँ शामिल थीं।

हालाँकि, इन सभी नौसैनिक संसाधनों में से केवल सीमित हिस्से को ही होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रभावी रूप से संचालित किया जा सकता है। ट्रंप द्वारा अपनाया गया चौथा विकल्प तर्कसंगत नजर आता है। यदि इरान होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रखता है तो उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। अभी कुछ संभावना और आशा बाकी है, लेकिन इरान के आने वाले दिन बेहद कठिन और अनिश्चित दिखाई देते हैं। तकनीकी रूप से यह संभव है कि ओमान की खाड़ी और अरब सागर के उन जहाजों को रोका जाए जो इरान के तटीय क्षेत्र से दूर जाकर छिप-छिप कर आते हैं, जिससे अमेरिकी जहाज सुरक्षित रह सकते हैं। इस प्रकार की नाकाबंदी के लिए अभी पर्याप्त नौसैनिक शक्ति उपलब्ध है।

डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, ‘इस क्षेत्र में अतिरिक्त बल भी भेजे जा रहे हैं।’ इजरायली सैन्य विशेषज्ञ डेविड जेंडेलमैन लिखते हैं, ‘जब मुझसे पूछा जाता है कि क्या अमेरिका सैन्य बल इस्तेमाल करके होर्मुज जलडमरूमध्य खोल सकता है, तो मैं हमेशा कहता हूँ—इरान के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करना दूसरों के लिए इसे खोलने से आसान है। अमेरिका इस स्थिति को समझ चुका है।’ लेकिन ट्रंप के इस फैसले से सिर्फ इरान ही नहीं, बल्कि अन्य देशों को भी नुकसान होगा। सैन्य अभियान की शुरुआत के बाद से ही होर्मुज जलडमरूमध्य जहाजों के लिए जोखिमपूर्ण बन चुका है, और अमेरिका इसे खोलने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रहा है। अमेरिकी नाकाबंदी को केवल सख्त करते जा रहे हैं।

इरानी बारूदी सुरंग और मिसाइलों से भरा यह जलीय मार्ग पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य को खतरनाक बना चुका है। होर्मुज का निकास द्वार पर अमेरिकी डिस्ट्रॉयर से सामना होने पर खतरा और दोगुना हो जाता है। खाड़ी देशों के व्यापारिक साझेदारों को सीधे आर्थिक नुकसान पहुंचा है। सप्लाई चेन बाधित होने से वैश्विक तेल के दाम फिर से बढ़ गए हैं। वर्तमान में यह अनिश्चित है कि चीन, जिसके पास विशाल नौसेना है और जिसका जिबूती में सैन्य अड्डा है, इस नाकाबंदी पर कैसे प्रतिक्रिया देगा। इस बीच, अमेरिकी सहयोगी देशों के लिए कोई बड़ा आशावाद देखने को नहीं मिल रहा। इनमें से कई देश भले युद्ध में शामिल न हों, लेकिन वे इसके परिणाम भुगत रहे हैं।

बालेन र रास्वपाले जोगाउनुपर्ने तीन उपलब्धि – Online Khabar

बालेन र रास्वपाले जोगाउनुपर्ने तीन महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ

नेपाल में राजनीतिक दलों और सरकार के प्रति आम जनमानस की असंतुष्टि भ्रष्टाचार, दंडहीनता तथा पार्टीगत संरचनाओं के दुरुपयोग के कारण तीव्र रूप से बढ़ रही है। हाल ही में सम्पन्न आम चुनाव में पॉपुलिस्ट पार्टी रास्वपा ने दो-तिहाई से अधिक सीटें जीतकर एक नए राजनीतिक युग का संकेत दिया है। समाजशास्त्री मिश्र ने नेपाल में पारंपरिक राजनीतिक दलों के पतन और नए पॉपुलिस्ट नेतृत्व के उदय को वैश्विक राजनीतिक परिवेश से जोड़कर विश्लेषित किया है। जेनजी आंदोलन और नेपाल के संदर्भ में मिश्र द्वारा लिखा यह विस्तृत आलेख तीन भागों में प्रकाशित हुआ है। प्राध्यापक मिश्र नेपाल में समाजशास्त्र के औपचारिक अध्यापन करने वाली प्रथम पीढ़ी के विद्वान हैं। उनके पुस्तक-संग्रह में ‘पूँजीवाद और नेपाल’, ‘बदलती नेपाली समाज’, ‘एसेज ऑन द सोसियोलॉजी ऑफ नेपाल’, ‘लोकतंत्र और आज का मार्क्सवाद’ शामिल हैं। मिश्र ने ‘बदलती नेपाली समाज’ को शैक्षणिक दृष्टिकोण से विवेचित करते हुए युवाओं द्वारा तकनीक के माध्यम से की गई विद्रोह और उसके परिणामों का सूक्ष्म विश्लेषण इस आलेख श्रृंखला में प्रस्तुत किया है।

दल और सरकार के प्रति असंतोष एवं आक्रोश नेपाल में जेनजी की लहर और हालिया घटनाक्रमों के कारण राजनीतिक दलों की व्यापक उपस्थिति और तीव्र जनआक्रोश का परिचायक हैं। आमतौर पर सरकारों को अकुशल, भ्रष्ट और दंडहीनता के संरक्षक के रूप में देखा जाने लगा है। राजनीतिक दल नागरिक जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास करते हैं, जिससे नागरिकता की मूल भावना कमजोर पड़ती है। पार्टी के ‘भ्रातृ संगठन’ पार्टी के संगठनात्मक स्तम्भ के रूप में कार्य करते हैं और मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं, जिससे नागरिक और सरकार के बीच संवाद का अभाव होता है। इन संगठनों के कार्यकर्ता ठेकेदार और व्यापारी भी बन जाते हैं, सरकारी पहुंच के लिए लाइन में धक्कामुक्की करते हैं और प्रायः सरकारी या सामाजिक कार्यक्रमों में अवैध वर्चस्व स्थापित करते हैं। ये संगठन मंत्रालयों, संघ-संगठनों, व्यावसायिक और व्यवसायिक क्षेत्रों में व्यापक विस्तार पाते हैं।

देश के लगभग सभी पुराने राजनीतिक दलों ने किसान, कर्मचारी, मजदूर, शिक्षक, चिकित्सक, विद्यार्थी, और समुदाय समूहों में विभिन्न स्तरों पर संगठन दलगत आधार पर स्थापित किए हैं। इन संस्थाओं में चुनाव पूरी तरह से पार्टीगत तौर पर लड़े जाते हैं। इसी के माध्यम से दल लाखों कार्यकर्ता तैयार करते हैं और बड़ी संख्या होने पर गर्व महसूस करते हैं, जिससे नागरिकता की सच्ची भावना कमजोर होती है। यही कार्यकर्ता संसाधनों और प्रभाव के जरिये संभावित लाभों को नियंत्रित करते हैं तथा कुछ सदस्य अपनी बारी आने तक प्रभावशाली और लाभार्थी बनने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार के दलगत कार्यकर्ता सरकारी नौकरियों और संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करने में अग्रिम भूमिका निभाते हैं।

सरकारी नियुक्ति, न्यायालय तथा भ्रष्टाचार नियंत्रण एजेंसियों में दलों का प्रभाव देखा जा सकता है, जो सार्वजनिक मंच पर निष्पक्षता को चुनौती देता है। नेपाल की राजनीतिक व्यवस्था अत्यधिक अतिरंजित और दलों के कारण नागरिक स्वतंत्रता कमजोर हुई तथा कार्यक्षमता में कमी आई। भ्रष्टाचार और दंडहीनता के बढ़ने से सरकार के खिलाफ जनआक्रोश में वृद्धि हुई है। चुनावों में असंतोष और पारंपरिक दलों की भ्रष्टताओं के बजाय दंडहीनता मुख्य कारण बनी है। युवा और विद्वान राजनीतिक दलों और सरकारों द्वारा नागरिक अधिकारों की कटौती को लेकर चिंतित हैं।

दल लोकतंत्र को हानि पहुंचाते हुए अपने नेताओं और सरकार को संवेदनाहीन बना चुके हैं। नागरिक असंतोष के संबंध विधानमंडल और न्यायपालिका की कार्यप्रणाली से भी हैं। सांसद अक्सर जिम्मेदार नहीं होते और संसद की बैठकों में अनुपस्थित रहते हैं तथा सामूहिक निर्णयों की अनदेखी करते हैं। न्यायाधीशों की नियुक्ति में राजनीतिक दलों का प्रभाव अदालत की वैधता को कम करता है। इससे सरकार के प्रति सार्वजनिक विश्वास गिरा है और राजनीतिक प्रणाली में अनुशासनहीनता तथा भ्रष्टाचार बढ़ा है। पुराने दलों के समर्थक पूरी तरह गलत नहीं हैं, पर वे तीव्र परिवर्तनों वाले वैश्विक राजनीतिक परिवेश को समझने और समायोजित करने में विफल रहे हैं।

पुराने दलों के लिए फिर से अपना प्रभाव बढ़ाने की इच्छाएं कम नहीं हैं, और नए दल भी शीघ्र अपना आकार बढ़ाने का प्रयास करेंगे। परन्तु पुरानी राजनीतिक संस्कृति में फंसने से इतिहास दोहराने का खतरा होगा। जेनजी, पॉपुलिज्म, और इतिहास के सन्दर्भ में नेपाल के हालिया आम चुनाव ने गहन अध्ययन का अवसर प्रदान किया है। राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ने लगभग दो-तिहाई सीटें जीती हैं, जिसका नेतृत्व बालेन्द्र शाह (बालेन) कर रहे हैं। पॉपुलिज्म मात्र नेपाल में ही नहीं, बल्कि विश्वव्यापी घटना है। इतिहास में मैग्नाकार्टा, अमेरिकी स्वतंत्रता आंदोलन और फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रीय शासन संरचनाए स्थापित की थीं। सोवियत और चीनी क्रांतियों ने विश्व को दो भिन्न राजनीतिक ध्रुवों में विभाजित किया, जिसने दीर्घकालीन राजनीतिक भाष्य प्रदान किया। शीत युद्ध के अंत के पश्चात ‘इतिहास का अंत’ घोषित किया गया था, लेकिन यह धारणा गलत साबित हुई।

पूंजीवादी सत्ता की विजय और कम्युनिस्टों की हार के बाद नए राजनीतिक दर्शन का उदय हुआ। अल्पकालीन और मध्यकालीन राजनीतिक विचारों के विकास के साथ पॉपुलिज्म उभरा है। नेपाल के पुराने कम्युनिष्ट दल अपने अतीत को पुनः नामित करने की योजना बना रहे हैं, जबकि अमेरिका से ब्रिटेन तक विकसित देशों में दीर्घकालीन राजनीतिक भाष्य कमजोर हो रहा है। अल्पकालीन राजनीतिक सोच अधिक व्यवहार्य प्रतीत होती है। युवा भविष्य को अपरिचित देखकर छोटे अवधिक योजनाओं पर विश्वास करते हैं। नए युवा नेता राजनीतिक उतार-चढ़ाव को सहजता से स्वीकार कर जनविश्वास बनाए रखने में सक्षम हैं। वे ‘विश्व के अंदर नेपाल’ के नजरिए से सोचने की इच्छा रखते हैं, जिससे नेपाल और दुनिया को पारस्परिक दृष्टि से देखा जाता है।

विश्व में असमानता, विभाजन और पहचान संघर्ष तीव्र हो रहा है, लेकिन राज्य नागरिक स्वतंत्रता और कल्याण के क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। नेपाल में कृषि और स्थानीय समुदायों का पुनरुद्धार प्राथमिकता होनी चाहिए। इससे घरेलू खाद्य सुरक्षा, रोजगार और आमदनी का सृजन संभव होगा तथा गरीबी से उभरने में मदद मिलेगी। पुराने दल और नेताओं को पूर्व में प्राप्त उपलब्धियों का सम्मान करते हुए उसी आधार पर विस्तार करना चाहिए। राजनीति में शालीनता और कृतज्ञता सफलता का मूल आधार हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महामारी, युद्ध और आर्थिक मंदी के कारण विदेश रोजगार में काम कर रहे नेपाली श्रमिक स्वदेश लौट सकते हैं। इन श्रमिकों को ग्रामीण कृषि क्षेत्रों में पुनः स्थापित करने के लिए कानूनी एवं नीतिगत कदम आवश्यक हैं।

निष्कर्ष: वर्तमान से भविष्य की ओर बढ़ते हुए पुराने दलों को जनविश्वास पुनः हासिल करने में समय लगेगा, पर उन्हें अपनी उपलब्धियों का आदर करते हुए नए युग में आगे बढ़ना चाहिए। राजनीति में शालीनता और कृतज्ञता सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र हैं। बालेन-रास्वपा गठबंधन को तीन महत्वपूर्ण उपलब्धियों की रक्षा करनी होगी। पहली गणतंत्रात्मक लोकतंत्र, जो राजतंत्र के समाप्ति का प्रतीक है। सभी नेपाली राष्ट्राध्यक्ष के पद पर पहुँच के लिए समान अवसर होने चाहिए। राजतंत्र और लोकतंत्र विरोधाभासी अवधारणाएँ हैं। राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रणालियों में कोई जन्मसिद्ध अधिकार या विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए। सामाजिक-सांस्कृतिक संबोधन और शिष्टाचार नागरिकता के सम्मान को कम नहीं कर सकते। दूसरी धर्मनिरपेक्षता है। राजनीति और सार्वजनिक जीवन को धार्मिक विश्वास या शक्ति से ऊपर रखना चाहिए। राज्य सभी धर्मों को वैध और समान मानते हुए, सार्वजनिक जीवन में धर्म के हस्तक्षेप को रोकना चाहिए। नेपाल एक बहुसांस्कृतिक देश है और धर्मनिरपेक्षता इससे सभी सांस्कृतिक समृद्धि की रक्षा करती है। टोनी हागन ने नेपाल को ‘जातीय मिलनबिंदु’ कहा है, जहाँ मुस्लिम, हिन्दू, बौद्ध, आदिवासी सहित विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक पहचानें एक दूसरे से प्रवाहित होकर समृद्ध होती हैं। धर्मनिरपेक्षता इन्हीं विरासतों की सुरक्षा करती है। बालेन ने मधेश और पहाड़ के बीच सामंजस्य स्थापित कर राष्ट्रीय एकता मजबूत की है और साम्प्रदायिक पहचान को कमजोर किया है। उन्हें सामाजिक वर्गीय पहचान, जातिवाद, छुआछूत और सांस्कृतिक विभाजन को अवैध बनाने में सहायता करनी होगी। जेनजी आंदोलन को भी सार्वजनिक प्रदर्शनों में धार्मिक या जातीय प्रतीकों के प्रयोग से परहेज करना चाहिए। राजनीतिक नेता भक्त या साधु के रूप में प्रस्तुत नहीं होना चाहिए। तीसरी उपलब्धि सामाजिक लोकतंत्र है, जो संविधान में स्पष्ट है तथा समानता और न्याय के सिद्धांतों पर आधारित शासन प्रणाली है। अब तक उसका पूर्ण कार्यान्वयन पुराने दलों द्वारा नहीं हो पाया है। उत्पादन से पहले वितरण संभव नहीं है; वितरण सामाजिक निवेश है और भावी जिम्मेदार नागरिकों के विकास के लिए आवश्यक है। नेपाल विश्व पूंजीवादी प्रणाली का हिस्सा बनकर ही समृद्धि हासिल कर सकता है। भुखमरी, गरीबी, शिक्षा और स्वास्थ्य की चुनौतियों का समाधान जरूरी है। राजनीतिक, सांस्कृतिक, कानूनी और प्रशासनिक सुधार आवश्यक हैं। राज्य सभी नागरिकों की साझा संपत्ति है और सामाजिक लोकतंत्र सभी नागरिकों को उत्कृष्ट कार्यकारी भूमिका निभाने में सक्षम बनाता है।

प्रदीप ज्ञवाली ने विद्यार्थी संगठन की गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्णय का कड़ा विरोध किया

नेकपा एमाले के नेता प्रदीप ज्ञवाली ने विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी संगठनों की गतिविधियों और उपस्थिति पर रोक लगाने के निर्णय को अत्यंत अलोकतांत्रिक कदम बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। ज्ञवाली ने विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा इकाई स्थापित करने की तैयारी को शैक्षणिक स्वायत्तता पर सीधा हस्तक्षेप बताया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी आंदोलन की कमियों को सुधारने के लिए संवाद और रचनात्मक सहयोग आवश्यक है, निषेध से समस्या का समाधान नहीं होगा। ७ वैशाख, काठमाडौं।

ज्ञवाली ने सोमवार को फेसबुक पर अपने विचार साझा करते हुए स्वतंत्र विद्यार्थी यूनियन (स्ववियु) के अधिकारों को छीने जाने के प्रयास को चरम अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने विश्वविद्यालयों में सुरक्षा इकाई स्थापना की योजना पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे शैक्षणिक स्वायत्तता में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप करार दिया। साथ ही, इस खतरनाक निर्णय पर विश्वविद्यालय के उपकुलपतियों द्वारा हस्ताक्षर कैसे हुए, यह प्रश्न उठाया, जो उन्होंने पंचायती निरंकुशता में भी सरकार नहीं करा पाई थी।

‘संवाद और रूपांतरण आवश्यक हैं, निषेध नहीं,’ नेता ज्ञवाली ने कहा कि विद्यार्थी आंदोलन में कुछ कमियां और कमजोरियां हैं, जिसे वे स्वीकारते हैं। उनका मानना है कि विद्यार्थी आंदोलन को आम छात्रों के हित, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार और सकारात्मक वातावरण के निर्माण में उत्प्रेरक की भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन कभी-कभी वे मूल मुद्दों से विचलित हो जाते हैं। हालांकि, कमियों को आधार बनाकर विद्यार्थियों के संगठनों पर रोक लगाना समस्या का समाधान नहीं है।

‘समाधान है उनके साथ संवाद करना, रचनात्मक सहयोग करना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विद्यार्थी आंदोलन का रुपांतरण,’ ज्ञवाली ने लिखा। विद्यार्थी आंदोलन की कमियों को सुधारने की बजाय उनके अस्तित्व को मिटाने का प्रयास किए जाने पर उन्होंने सरकार के कदम पर प्रतीकात्मक प्रश्न भी उठाए, ‘क्या आपको सिर पर छाया पड़ने पर उसे ही चुपचाप काट देना चाहिए?’

पश्चिम बंगाल में मोदी ने स्वादिष्ट झालमुड़ी का आनंद लिया

७ वैशाख, काठमांडू। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पश्चिम बंगाल में झालमुड़ी (चटपटे) खाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर जोरदार चर्चा में है। रविवार को पश्चिम बंगाल के चुनावी सभा के बाद उन्होंने स्थानीय सड़क खाद्य पदार्थ सहित झालमुड़ी का स्वाद लिया। उन्होंने रविवार शाम अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) खाते पर वीडियो और फोटो पोस्ट करते हुए लिखा, ‘व्यस्त रविवार के चार सभाओं के बीच झारग्राम में स्वादिष्ट झालमुड़ी खाने का आनंद मिला।’ वीडियो को ११ मिलियन से अधिक और फोटो को ६ मिलियन से अधिक प्रतिक्रियाएं मिली हैं। अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर भी मोदी की झालमुड़ी खाते हुए तस्वीरें काफी चर्चित हैं।

मोदी और विक्रेता के बीच हुए मजेदार संवाद में उन्होंने विक्रेता से कहा, ‘भाई, हमें अपनी झालमुड़ी चखाओ।’ जब कीमत पुछी गई तो मोदी ने पूछा, ‘अच्छी झालमुड़ी की कीमत क्या है?’ विक्रेता ने जवाब दिया, ‘१० या २० रुपये, बस इतना ही।’ मोदी मुस्कुराते हुए बोले, ‘जो भी हो, बना दीजिए।’ मोदी अपनी जेब से पैसा निकाल कर विक्रेता को देने लगे, शुरू में विक्रेता ने भुगतान लेने से मना किया, लेकिन मोदी के पुनः आग्रह पर उन्होंने पैसा स्वीकार किया। इस मजेदार संवाद में जब विक्रेता ने पूछा कि प्याज डालना है या नहीं, तो मोदी ने कहा, ‘हां, खाएं, बस दिमाग मत खराब करें।’

हालांकि झालमुड़ी नेपाल में लोकप्रिय चटपटे जैसी ही एक स्नैक मानी जाती है, यह भारत में विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में प्रचलित है। इसका मुख्य आधार भुजा है, जिसमें भुने हुए बादाम, टमाटर, उबले आलू, ककड़ी, प्याज, चाट मसाला, जीरा और नींबू का रस जैसे मसाले मिलाए जाते हैं। आमतौर पर इसे कागज की कोन में रखकर बेचा जाता है।

डोजर आतंक र प्रहरी दमन बन्द गर – Online Khabar

नेपाल जेनजी फ्रन्ट ने डोजर आतंक और पुलिस दमन रोकने की अपील की

नेपाल जेनजी फ्रन्ट ने अनधिकृत संरचनाएँ खाली कराने के दौरान राज्य द्वारा किए गए क्रूर और अमानवीय दमन की कड़ी निंदा की है। फ्रन्ट ने विस्थापित नागरिकों के लिए उचित विकल्प और वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित करने की सरकार से मांग की है। संरचनाओं की तोड़फोड़ के दौरान हुई अमानवीय बर्ताव के प्रति कड़ी आपत्ति जताते हुए सुरक्षा तंत्र को मानवता संबंधी प्रशिक्षण देने का आह्वान किया है। ७ वैशाख, काठमांडू।

नेपाल जेनजी फ्रन्ट ने अनधिकृत संरचना खाली कराने के नाम पर नागरिकों के आवास और जीवन पर राज्य द्वारा किए गए क्रूर और अमानवीय दमन की कड़ी निंदा की है। सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में फ्रन्ट ने बिना किसी ठोस विकल्प या पुनर्वास की व्यवस्था किए गरीब नागरिकों के आवास और व्यवसायों पर जबरन डोजर चलाना गैरजिम्मेदारी की चरम सीमा बताया है।

दशकों से छोटे व्यवसायों से जीवनयापन कर रहे कम आय वाले आम लोगों को सड़क पर छोड़ना राज्य की योजना और मंशा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है, यह फ्रन्ट का कहना है। विज्ञप्ति में सरकार से पूछा गया है, ‘क्या सरकार ने विस्थापित नागरिकों के भविष्य और आर्थिक प्रबंधन के बारे में कोई योजना बनाई है?’

फ्रन्ट ने किसी भी संरचना को हटाने से पहले वहां आश्रित नागरिकों के लिए उचित विकल्प और वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित करने की जोरदार मांग की है। “सुरक्षा कर्मियों को मानवता का प्रशिक्षण दें” कहते हुए संरचनाएँ हटाने के दौरान विकलांग और आम जनता पर संघीय और स्थानीय पुलिस द्वारा किए गए क्रूर और अमानवीय व्यवहार पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की गई है। विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘ऐसे कार्यों में शामिल सभी को कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए और सभी सुरक्षा तंत्रों को न्यूनतम मानवता के बारे में प्रभावी प्रशिक्षण देने की हम अपील करते हैं।’’

दुजाङ शेर्पा नेविसंघ के विधान उपलब्ध कराने की मांग के साथ नेपाली कांग्रेस से आग्रह करते हुए

७ वैशाख, काठमाडौं। नेपाल विद्यार्थी संघ (नेविसंघ) के अध्यक्ष दुजाङ शेर्पा ने मातृ पार्टी नेपाली कांग्रेस से संगठन का विधान उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। नेविसंघ स्थापना दिवस के अवसर पर जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से संगठन का विधान उपलब्ध कराने का निवेदन किया है। अध्यक्ष शेर्पा ने बताया कि विधान के अभाव में नेविसंघ का १२वां महाधिवेशन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। यदि विधान जारी नहीं किया जा सकता तो वर्तमान केंद्रिय कार्यसमिति को भंग करने का भी आग्रह किया है।
“विधान न होने के कारण हम १२वें महाधिवेशन के लक्ष्य तक नहीं पहुँच पा रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए पार्टी से अनुरोध करता हूँ,” उन्होंने कहा। “विद्यार्थी आन्दोलन को आगे बढ़ाने और महाधिवेशन सम्पन्न करने के लिए हम जो प्रस्तावित एजेंडा लेकर आए हैं, उस पर चर्चा करके विधान प्रदान करें,” शेर्पा ने बल देते हुए कहा, “यदि यह संभव नहीं है तो हमारी केंद्रिय कार्यसमिति को भंग कर निकास का मार्ग प्रदान करें, यह मैं मांग करता हूँ।”
नेविसंघ के सिनेट द्वारा पार्टी को प्रस्तावित एजेंडा पर पार्टी को गंभीर चर्चा कर पारित करना चाहिए, यह अध्यक्ष शेर्पा की मांग है। “एक महीने से नेविसंघ के सिनेट बैठक द्वारा पार्टी को प्रस्तुत एजेंडों पर गम्भीर चर्चा कर पारित किया जाना आवश्यक है, इसके लिए पार्टी नेतृत्व के समक्ष जोरदार निवेदन करता हूँ,” उन्होंने कहा।
अध्यक्ष शेर्पा ने सरकार के विद्यार्थी संगठन खारिज करने के निर्णय पर पार्टी नेतृत्व से आधिकारिक धारणा जारी करने का भी आग्रह किया है। उन्होंने कहा, “सरकार के अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक निर्णय पर पार्टी की अभी तक कोई प्रतिक्रिया न देने से चिंता और दुःख हुआ है।” “मैं पार्टी नेतृत्व से कहना चाहता हूँ कि उन्हीं झंडे और मशाल अंकित कलम के आन्दोलन के कारण आज वह पार्टी नेतृत्व में हैं। विद्यार्थी आन्दोलन पर हमले के समय नेपाली कांग्रेस को शीघ्र धारणा जारी कर सार्वभौम संसद में इस विषय को प्रभावी ढंग से उठाना आवश्यक है,” अध्यक्ष शेर्पा ने निष्कर्ष निकाला।

काठमाडौं आइपुगे अमेरिकी सहायक विदेशमन्त्री समीर पल कपुर

अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री समीर पल कपुर काठमाडौं पहुँचे

७ वैशाख, काठमाडौं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री समीर पल कपुर आज सुबह सवा ६ बजे त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुँचे हैं। भारतीय मूल के कपुर नई बालेन शाह नेतृत्व वाली सरकार के साथ संबंधों को व्यापक बनाने के उद्देश्य से काठमाडौं आए हैं।

कपुर अपनी यहाँ की यात्रा के दौरान उच्चस्तरीय बैठकें करेंगे और सरकार के कई मंत्रियों से भी मुलाकात करने की योजना है। पिछले वर्ष अक्टूबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दक्षिण एशियाई सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ के रूप में उन्हें दक्षिण एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री के पद पर नियुक्त किया गया था। इस पद पर इससे पहले डोनाल्ड लुले कार्य किया था। कपुर की यह यात्रा तीन दिन की होगी और वे बुधवार को वापस लौटेंगे। बालेन शाह नेतृत्व वाली सरकार के गठन के बाद काठमाडौं आने वाले वे सबसे वरिष्ठ विदेशी कूटनीतिज्ञ हैं।