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लेखक: space4knews

इप्पान ने बाढ़ पीड़ितों के लिए 5 करोड़ रुपये सहायता का निर्णय लिया

इप्पान ने प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप उद्धार कोष में बाढ़ पीड़ितों के लिए 5 करोड़ 5 लाख 50 हजार रुपये सहायता देने का निर्णय लिया है। भोटेकोशी नदी की भीषण आकस्मिक बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट, धादिङ, गोरखा, चितवन और तनहुँ जिलों में जान-माल की भारी क्षति पहुँचाई है, जिनके प्रति इप्पान ने श्रद्धांजलि व्यक्त की है। इप्पान ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त और निर्माणाधीन विद्युत परियोजनाओं के पुनर्निर्माण तथा पुनर्स्थापन के लिए सरकार के साथ समन्वय कर सहायता करने का भी निर्णय किया है। 11 भदौ, काठमाडौं। स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संस्था नेपाल (इप्पान) ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 5 करोड़ 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। आज आयोजित कार्यसमिति की 206वीं आकस्मिक बैठक एवं सलाहकार समिति की संयुक्त बैठक में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण रसुवा, नुवाकोट, धादिङ, गोरखा, चितवन तथा तनहुँ जिलों में जान-माल की क्षति पर शोक व्यक्त किया गया है। शोकाकुल परिवारों के प्रति सहानुभूति जताते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई है।

साथ ही, इप्पान तथा संबद्ध जलविद्युत कम्पनी कैं ने प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप उद्धार कोष में 5 करोड़ 5 लाख 50 हजार रुपये आर्थिक सहयोग देने का निर्णय किया है। इप्पान अध्यक्ष मोहन कुमार डाँगी के अनुसार, ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ की मौजूदगी में उपयुक्त अवसर पर उक्त सहयोग राशि का चेक हस्तांतरण किया जाएगा। बैठक में बाढ़ से संचालित और निर्माणाधीन कई विद्युत परियोजनाओं को हुए नुकसान पर दुःख व्यक्त किया गया और जान गंवाने वाले कर्मचारियों एवं मजदूरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घायलों के शीघ्र स्वास्थ्यलाभ की कामना की गई है।

अध्यक्ष डाँगी ने कहा, ‘ऊर्जा क्षेत्र न केवल नेपाल के समृद्धि से जुड़ा है बल्कि नेपाली जनता के सुख-दुख से भी गहरा संबंध रखता है। विपद के समय जब सभी सदस्य कंपनियाँ एकजुट होती हैं, तो यह पीड़ित परिवारों के जीवन में बड़ी राहत और आशा का संदेश दे सकता है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘इस मानवीय अभियान में इप्पान के सभी सदस्य कंपनियों की सक्रिय और उदार सहायता आवश्यक है।’

ला लिगा में बार्सिलोना की लगातार दूसरी जीत

समाचार सारांश

OK AI द्वारा तयार पारिएको। सम्पादकीय रूपमा समीक्षा गरिएको।

  • बार्सिलोना ने गुरुवार रात स्पेनिश ला लीगा में एथलेटिक बिल्बाओ को २–० से हराया।
  • बार्सिलोना ने लगातार दूसरा मैच जीतकर ६ अंक हासिल कर शीर्ष स्थान पर कब्ज़ा किया है।
  • बार्सिलोना के लिए राफिन्हा और फर्मिन लोपेज ने क्रमशः ३७वें और ८२वें मिनट में गोल किए।

काठमांडू। बार्सिलोना ने स्पेनिश ला लीगा में गुरुवार रात एथलेटिक बिल्बाओ को २-० से हराया।

नए सत्र में बार्सिलोना ने यह लगातार दूसरी जीत हासिल की है। लगातार दूसरी जीत के बाद बार्सिलोना ६ अंक लेकर शीर्ष स्थान पर आ पहुंचा है। बार्सिलोना ने दो मैचों में जीत हासिल कर रियल मैड्रिड, सेविल्ला और रियल बेटिस को लक्ष्य अंतर में पीछे छोड़ दिया है।

घर में नोउ कैंप मैदान पर खेले गए मैच में बार्सिलोना के लिए राफिन्हा और फर्मिन लोपेज ने एक-एक गोल किया।

राफिन्हा ने ३७वें मिनट में गोल कर टीम को बढ़त दिलाई। लोपेज ने ८२वें मिनट में गोल कर बार्सिलोना की जीत सुनिश्चित की।

इस मैच से रोड्री ने भी बार्सिलोना में डेब्यू किया। फीफा विश्व कप २०२६ के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी स्पेन के कप्तान पेड्री इस सत्र से पहले इंग्लिश क्लब मैनचेस्टर सिटी से बार्सिलोना में शामिल हुए थे।

बार्सिलोना और बिल्बाओ के बीच मैच से पहले नेपाल के बोतेकोशी में आई बाढ़ प्रभावितों की याद में मौन धारण किया गया।

गुरुवार को ही एक अन्य मैच में ओसासुना ने सेल्टा विगो को २–१ से हराया।

प्रधानमंत्री राहत कोष के माध्यम से बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत संग्रहण हेतु एक-खिड़की प्रणाली लागू

भोतेकोशी में आई बाढ़ के बाद सरकार ने प्रधानमंत्री प्रकोप उद्धार कोष के द्वारा राहत संग्रहण और वितरण के लिए एक-खिड़की प्रणाली अपनाने का आग्रह किया है। १२ भदौ, काठमांडू। विनाशकारी भोतेकोशी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जन-धन क्षति पहुंचाई है, जिसके बाद राहत और उद्धार कार्यों को तीव्रता से चलाया जा रहा है। सरकार, निजी क्षेत्र, संघ-संस्था और विदेशों में रहने वाले नेपाली सभी राहत जुटाने में लगे हुए हैं। वित्त मंत्रालय ने भी राहत संग्रहण के लिए ‘एक-खिड़की प्रणाली’ अपनाने का सुझाव दिया है, जो संग्रहित सहायता को वास्तविक पीड़ित तक व्यवस्थित, पारदर्शी और समान रूप से पहुंचाने में मदद करती है।

सरकार ने प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के कार्यालय के अंतर्गत आने वाले प्रधानमंत्री प्रकोप उद्धार कोष को राहत संग्रहण और परिचालन का आधिकारिक माध्यम बनाया है। मंत्रालय के अनुसार इस प्रणाली के माध्यम से एकत्रित आर्थिक सहायता को प्राथमिकता के आधार पर उद्धार, उपचार, राहत, पुनर्स्थापना और क्षतिग्रस्त पूर्वाधार के पुनर्निर्माण में उपयोग किया जाएगा। पूर्व वित्त मंत्री रमेश्वर खनाल के अनुसार राहत संग्रहण और वितरण के लिए सरकार की एक-खिड़की प्रणाली सबसे उपयुक्त व्यवस्था है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि राहत वितरण के दौरान किसी एक व्यक्ति या परिवार को बार-बार विभिन्न स्रोतों से राहत न मिले और अन्य पीड़ितों को उचित सहायता प्रदान हो सके।

वित्त मंत्रालय के सहसचिव अमृत लम्साल के अनुसार विदेशों में रहने वाले नेपाली, अंतरराष्ट्रीय दाता निकाय एवं संघटनाएं भी प्रधानमंत्री राहत कोष में आसानी से आर्थिक सहायता कर सकते हैं। लम्साल ने बताया कि विदेशी बैंक से स्विफ्ट कोड का उपयोग करके प्रधानमंत्री राहत कोष के खाते में धनराशि भेजी जा सकती है। राहत संग्रहण के नाम पर धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ने के कारण सरकार ने आम जनता को सचेत किया है। कुछ व्यक्तियों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से ‘प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप उद्धार कोष’ या ‘प्रधानमंत्री राहत कोष’ के नाम पर व्यक्तिगत बैंक खाता या ई-वॉलेट में धन भेजने का आग्रह किया जा रहा है।

सरकार ने सहायता देने से पहले संबंधित विवरण आधिकारिक है या नहीं, इसकी पुष्टि करने को आवश्यक माना है। प्रधानमंत्री प्रकोप उद्धार कोष के नाम पर सहायता मांगी जाने की स्थिति में सरकार की आधिकारिक वेबसाइट या प्रमाणित सोशल मीडिया पेज पर प्रकाशित विवरण से तुलना करके ही धनराशि भेजने का आग्रह किया गया है। प्राकृतिक आपदा के समय सहायता का भाव महत्वपूर्ण होता है, लेकिन यह सहायता सही व्यक्ति तक, सही समय पर और समान रूप से पहुंचना और भी अधिक आवश्यक है।

डोनाल्ड ट्रम्प ने रसुवा बाढ़ प्रभावित नेपाल के लिए आवश्यक मदद प्रदान करने की घोषणा की

रसुवामा आए विनाशकारी बाढ़ के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नेपाल को आवश्यक सभी प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने के लिए अमेरिका की तत्परता व्यक्त की है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने राहत एवं उद्धार कार्यों में सहयोग के लिए आपदा प्रतिक्रिया विशेषज्ञों को नेपाल भेजा है और ५ लाख अमेरिकी डॉलर के बराबर आपातकालीन सहायता की घोषणा की है। ट्रम्प ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में ५० से ६० अमेरिकी नागरिक प्रभावित होने की संभावना जताई है, जबकि सीएनएन ने ९० अमेरिकी नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी है।

१२ भदौ, काठमाडौं। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और आपदा के दौरान आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। ह्वाइट हाउस में गुरुवार को आयोजित एक कार्यक्रम में संवाददाताओं से संक्षिप्त बातचीत के दौरान उन्होंने नेपाल को सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “हमने नेपाल को फोन कर आवश्यक हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है।”

ट्रम्प ने नेपाल में आई बाढ़ से हुए नुकसान को ‘‘असाधारण’’ बताया तथा बताया कि शक्तिशाली कीचड़ और पानी की तेज धार ने मजबूत और पक्के भवनों को भी ‘टुथपिक की तरह’ आसानी से बहा दिया है। उन्होंने अनुमान लगाया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लगभग ५० से ६० अमेरिकी नागरिक प्रभावित हो सकते हैं और कहा, “अभी तक प्रभावित अमेरिकी नागरिकों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है।” अमेरिकी मीडिया सीएनएन ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय के हवाले से बताया कि बाढ़ के बाद नेपाल में ९० अमेरिकी नागरिक लापता हैं।

पूर्व ह्वाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि नेपाल में रहने वाले अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा अमेरिकी प्रशासन की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सरकार ने नेपाल को मदद का प्रस्ताव पहले ही दिया है और राष्ट्रपति ट्रम्प तथा विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नेपाल में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के उद्धार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बाढ़ की तत्काल स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए रखी है। अमेरिका ने काथोलिक रिलीफ सर्विसेज के माध्यम से ५ लाख अमेरिकी डॉलर के बराबर आपातकालीन सहायता प्रदान करने का संकल्प लिया है।

भोटेकोशी पीड़ितों को निसर्ग अस्पताल ने दिया 11 लाख 11 हजार 111 रुपये का सहायता राशि, इस बार तीज कार्यक्रम नहीं करने का फैसला

धनगढी स्थित निसर्ग अस्पताल ने भोटेकोशी बाढ़ पीड़ितों के राहत एवं पुनर्स्थापन के लिए 11 लाख 11 हजार 111 रुपये सहायता प्रदान की है। अस्पताल ने अपने वार्षिक तीज कार्यक्रम को न करने का निर्णय लिया और उक्त कार्यक्रम के लिए निर्धारित राशि भी राहत में समर्पित की है। संकलित राशि प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप उद्धार कोष के ग्लोबल आइएमई बैंक खाते में जमा की गई है, अस्पताल ने यह जानकारी दी है।

भोटेकोशी बाढ़ पीड़ितों की राहत तथा पुनर्स्थापन में कैलाली के धनगढी स्थित निसर्ग अस्पताल ने 11 लाख 11 हजार 111 रुपये सहयोग प्रदान किया है। बाढ़ से बड़े पैमाने पर जन-धन को क्षति पहुँची और कई परिवार प्रभावित हुए, ऐसी स्थिति में अस्पताल ने अपने वार्षिक तीज कार्यक्रम को न करने का फैसला कर उस कार्यक्रम के लिए निर्धारित राशि राहत में समर्पित करने की घोषणा की।

निसर्ग अस्पताल के कर्मचारी, स्टाफ नर्स, चिकित्सक तथा शेयर सदस्य द्वारा कम से कम एक दिन के वेतन/सुविधा के बराबर सहयोग देने का निर्णय लिया गया, और तीज कार्यक्रम के लिए दी गई राशि को जोड़कर कुल 11 लाख 11 हजार 111 रुपये भोटेकोशी बाढ़ पीड़ितों के लिए सहायता के तौर पर अस्पताल द्वारा प्रदान किए गए, अस्पताल के अध्यक्ष तीर्थराज पंत ने बताया।

अस्पताल हर साल महिला कर्मचारियों और चिकित्सकों के लिए तीज कार्यक्रम आयोजित करता था, किन्तु इस वर्ष भोटेकोशी में आए विनाशकारी बाढ़ के कारण भारी जन-धन की क्षति हुई, इसलिए तीज कार्यक्रम को स्थगित कर उस हेतु निर्धारित राशि राहत एवं पुनर्स्थापन कार्य में लगाने का निर्णय लिया गया। निसर्ग अस्पताल के कर्मचारियों, स्टाफ नर्स, चिकित्सकों और संस्थान की ओर से संकलित यह राशि नेपाल सरकार के ‘प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप उद्धार कोष’ अंतर्गत ग्लोबल आइएमई बैंक के आधिकारिक बैंक खाते संख्या 880040101000005788 में जमा कराई गई है।

अस्पताल के अध्यक्ष पंत ने कहा, “हमारा सहयोग बाढ़ से हुए सम्पूर्ण नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन प्रभावित परिवारों को यह भरोसा दे सकता है कि हम उनके साथ खड़े हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि पर्वों की खुशियाँ कुछ समय के लिए स्थगित कर विपत्ति में पड़े परिवारों के साथ खड़ा होना सामाजिक जिम्मेदारी है। निसर्ग अस्पताल सामाजिक जिम्मेदारी के तहत विभिन्न मानवीय एवं सामाजिक सहायता कार्यक्रमों का संचालन करता रहा है।

नुवाकोट और रसुवामा वैकल्पिक विद्युत् सेवा के लिए ५०० सोलार पावर बैंक हस्तांतरित

ऊर्जा मंत्रालय ने बाढ़ और आपदा से प्रभावित नुवाकोट और रसुवा में वैकल्पिक विद्युत् सेवा उपलब्ध कराने के लिए ५०० सोलार पावर बैंक हस्तांतरित किए हैं। मंत्रालय ने वैकल्पिक ऊर्जा संवर्धन केंद्र के माध्यम से ऐसे पावर बैंक प्रदान किए हैं जिनसे मोबाइल चार्ज किया जा सकता है और चार-पांच बल्ब जलाए जा सकते हैं। यह पहल आपदा के कारण विद्युत् सेवा बाधित हुए नागरिकों को संचार और प्रकाश सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है, मंत्रालय ने इस बात की जानकारी दी है।

११ भदौ, काठमांडू। ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय ने बाढ़ तथा आपदा से प्रभावित नुवाकोट और रसुवा जिलों में वैकल्पिक विद्युत् सेवा प्रदान करने के लिए ५०० सोलार पावर बैंक हस्तांतरित किए हैं। मंत्रालय ने वैकल्पिक ऊर्जा संवर्धन केंद्र के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल विद्युत् आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सोलार पावर बैंक उपलब्ध कराए हैं।

विद्युत् आपूर्ति बाधित क्षेत्रों में उपयोगी इन पावर बैंक से मोबाइल फोन चार्ज करने के साथ-साथ लगभग चार-पांच बल्ब जलाने की क्षमता मौजूद है। आपदा के कारण नियमित विद्युत् सेवा प्रभावित हुए नागरिकों को आवश्यक संचार और प्रकाश सुविधा प्रदान करने के लिए सोलार पावर बैंक उपयोगी साबित होंगे, मंत्रालय ने जानकारी दी है।

प्राकृतिक आपदा के समय प्रभावित नागरिकों के दैनिक जीवन को सहज बनाने और तत्काल वैकल्पिक ऊर्जा सेवा प्रदान कर विद्युत् पहुँच को जारी रखने के उद्देश्य से यह पहल की गई है, मंत्रालय ने बताया।

रेडबुल ने प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 2 करोड़ रुपये का सहयोग दिया

रसुवामा आई बाढ़ से प्रभावित नागरिकों के तत्काल राहत और पुनर्स्थापन के लिए रेडबुल ने प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 2 करोड़ रुपये का सहयोग दिया है। सरस बेवरेज के प्रबंध निर्देशक सुरेन्द्र सिलवाल ने गुरुवार को अर्थव्यवस्था मंत्री डा. स्वर्णिम वाग्ले को उक्त सहयोग राशि हस्तांतरित की। कंपनी ने बाढ़ के कारण हुए मानवीय और भौतिक क्षति पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति सहानुभूति जाहिर की है। ११ भदौ, काठमाडौं। रसुवा बाढ़ से प्रभावित नागरिकों की तत्काल राहत और पुनर्स्थापन में सहायता के उद्देश्य से रेडबुल ने 2 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। रेडबुल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 2 करोड़ रुपये का योगदान दिया। रेडबुल के उत्पादक कंपनी सरस बेवरेज के प्रबंध निर्देशक सुरेन्द्र सिलवाल ने अर्थमंत्री डा. स्वर्णिम वाग्ले को उक्त राशि हस्तांतरित की। कंपनी ने बाढ़ के कारण हुई मानवीय और भौतिक क्षति पर गहरा दुःख प्रकट किया है और प्रभावित परिवारों के प्रति सहानुभूति भी व्यक्त की है।

बिदा के दिनों में भी बैंकिंग सेवाएं लगातार रखने का निर्देश, नेपाल राष्ट्र बैंक

नेपाल राष्ट्र बैंक ने रसुवा बाढ़ पीड़ितों को राहत और बचाव में सहायता के उद्देश्य से शुक्रवार से रविवार तक बैंक एवं वित्तीय सेवाओं को निरंतर संचालित रखने का निर्देश दिया है। केन्द्रीय बैंक ने आवश्यक बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर प्रभावितों को राहत वितरण एवं बचाव कार्य में सहयोग करने को कहा है। बैंक अपनी सेवा निरंतरता का सूचना आम जनता तक पहुँचाने के लिए राष्ट्र बैंक ने अनुरोध भी किया है। ११ भदौ, काठमाडौं।

बैंक एवं वित्तीय संस्थाएं शुक्रवार से रविवार तक लगातार वित्तीय सेवा प्रदान करेंगी। नेपाल राष्ट्र बैंक ने रसुवा बाढ़ पीड़ितों को राहत और बचाव में सहायता के लिए सेवा निरंतर बनाए रखने का निर्देश दिया है। केन्द्रीय बैंक के अनुसार, रसुवा में आई बाढ़ से प्रभावित जनता को राहत वितरण एवं बचाव कार्य में सहयोग करने हेतु आवश्यक बैंकिंग सेवा जारी रखी जाएगी। साथ ही, राष्ट्र बैंक ने कहा है कि बैंक अपने सेवा निरंतरता की जानकारी जनता तक पहुंचाएं।

रसुवामा सडक सम्पर्क विछिन्न, ३५ वटा पुल बगाइयो

रसुवा जिल्लामा बुधवार आएको भीषण बाढीले १३ वटा पुलसहित ४१ वटा पुलहरूमा क्षति पुऱ्याएको छ। भोटेकोशी बाढीले ४० किलोमिटर सडकलाई पूर्ण रूपमा नष्ट बनाउँदा जिल्लाको सडक सम्पर्क विछिन्न भएको छ। पूर्वाधार विकास मन्त्रालयले रसुवालाई सडक सञ्जालमा पुनः जोड्न बेत्रावतीमा बेलिब्रिज राख्ने तयारी गरिरहेको छ। मन्त्रालयका अनुसार सरकारले ५० मिटर लम्बाइका ७ वटा बेलिब्रिज मात्र उपलब्ध गराएको छ, तर भारत र चीनबाट थप बेलिब्रिज प्राप्त गर्ने प्रतिबद्धता पाइसकेको छ।

रसुवाको बेत्रावतीदेखि मैलुङ हुँदै स्याफ्रुभेँसी-रसुवागढी जोड्ने सडक पूर्णरूपमा क्षतिग्रस्त भएको छ। पृथ्वी राजमार्गको १३ किलोमिटर खण्ड लेदोले पुरिएको छ। बेत्रावतीसम्म सडक सञ्चालन नभएसम्म धुन्चे हुँदै स्याफ्रुभेँसीसम्म पुग्न सम्भव छैन। बाढीले मितेरी पुलदेखि मुग्लिनको पुरानो सस्पेन्सन पुलसम्मका पुलहरूमा ठूलो क्षति पुऱ्याएको छ।

रसुवामा रहेका अन्य पुलहरूमध्ये चिलिमे पक्की पुल, हाइड्रोपावर बेलिब्रिज र त्रिशूली नदीका विभिन्न पुलहरू पनि बाढीको चपेटामा परेका छन्। धादिङ र चितवनका केही पुल भने सुरक्षित रहेका छन्। सरकारले सडक पुनः खोल्नको लागि हाल २० वटा उपकरण परिचालित गरेको छ। क्षतिग्रस्त सडक र पुलहरूको पुनर्निर्माण तथा यातायात सञ्चालनलाई प्राथमिकता दिइएको छ।

उत्तरी नाकों पर प्राकृतिक आपदा, आपूर्ति प्रणाली में अवरोध

समाचार सारांश

  • रसुवागढी सीमा शुल्क यार्ड में भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने सैकड़ों कंटेनर, मालवाहक ट्रक और बुनियादी ढांचे को बहा दिया, जिससे व्यापक मानवीय तथा आर्थिक क्षति हुई है।
  • रसुवागढी और तातोपानी नाकों के अवरुद्ध होने से व्यापारी मुस्ताङ के कोरला नाके को विकल्प के रूप में देख रहे हैं, हालांकि इसके कारण ढुलाई लागत और समय में वृद्धि की संभावना है।
  • त्योहारों के निकट आयात प्रभावित होने के कारण, व्यापारी और अर्थशास्त्रियों ने तत्काल राहत, पुनःस्थापना और सुविधा व्यवस्था के लिए सरकार से आह्वान किया है, ताकि आवश्यक वस्तुओं की कमी और मूल्य वृद्धि से बचा जा सके।

काठमांडू, 11 भदौ। नेपाली लोगों के प्रमुख त्योहार तीज, दसैं, तिहार और छठ जल्द शुरू होने वाले हैं। देश के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र काठमांडू के न्यूरोड, भोटाहिटी और रंजना गली सहित कई इलाकों में व्यापारियों के चेहरे पर गहरी चिंता दिखाई दे रही है।

इसका मुख्य कारण है- चीन के साथ मुख्य व्यापारिक नाका रसुवागढी पर असामान्य प्राकृतिक आपदा।

त्योहारों के लिए ऋण लेकर मारे गए अरबों रुपये के मूल्यवान कपड़े, जूते, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, लहसुन, प्याज़, अदरक एवं फल-फूल वाले सैकड़ों कंटेनर भोटेकोशी नदी की बाढ़ से बह गए हैं।

इस विनाशकारी बाढ़ ने रसुवागढी सीमा शुल्क यार्ड को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। साथ ही, सिन्धुपाल्चोक के तातोपानी नाके में भू-स्खलन से सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण एक महीने से अधिक समय से माल ढुलाई ठप है।

रसुवागढी नाके से सामान ले जाने वाले सीमा शुल्क कर्मचारी, एजेंट और चालक संपर्क में नहीं हैं, जिससे न केवल आर्थिक बल्कि गंभीर मानवीय त्रासदी उत्पन्न हुई है।

सिर्फ भौतिक पूर्वाधार ही नहीं, महत्वपूर्ण मानवीय क्षति भी हुई है। रसुवागढी सूखा बंदरगाह और सीमा शुल्क यार्ड अब पूरी तरह विघटित हालत में हैं। यहाँ पार्किंग किये गए सैकड़ों मालवाहक कंटेनर और महंगे इलेक्ट्रिक वाहन बाढ़ की भयानक आपदा में डूब गए हैं।

व्यापारी इस वक्त गंभीर मानसिक और आर्थिक संकट में हैं।

नेपाल समुद्रपार निकासी पैठारी संघ के महासचिव जयन्तकुमार अग्रवाल ने कहा कि सीमा क्षेत्र में पूर्वाधार न होने से मानवीय स्थिति अत्यंत संवेदनशील हो जाती है।

महासचिव अग्रवाल के अनुसार, “रसुवा और तातोपानी नाका खुलने के कोई संभावना फिलहाल नहीं हैं। वह क्षेत्र पूर्वाधार विहीन और पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। सीमा शुल्क के 14 कर्मचारी सुरक्षित हैं या नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है। कई कंटेनर और खाली ट्रक बाढ़ में बह चुके हैं।”

उन्होंने चेतावनी दी कि इस स्थिति में व्यापारी तर्कपूर्ण निर्णय लेने में असमर्थ हैं, और सरकार को तुरंत राहत और पुनःस्थापना के कार्य करने होंगे।

न्यूरोड स्थित आरबी कॉम्प्लेक्स व्यवसायी संघ के अध्यक्ष परशुराम दाहाल ने भी आपूर्ति व्यवस्था में अड़चन और संचार बाधा की बात कही है।

“ड्राइवर और उनके सहायक फोन बंद हैं। उनकी सामान्य स्थिति का पता लगाना मुश्किल है।” दाहाल ने कहा, “त्योहारों के लिए भेजे गए सामान यार्ड में तो पहुंचे हैं लेकिन बाढ़ और भूस्खलन से अधिकांश नष्ट हो गए हैं। सीसीटीवी फुटेज गोदाम और आसपास के क्षेत्र की गंभीर क्षति दिखाता है, जो बड़ा आर्थिक नुकसान संकेत है।”

सिन्धुपाल्चोक के तातोपानी नाका खोलने के लिए सरकार प्रयासरत है, मगर वहां की स्थिति निराशाजनक बनी हुई है। नेपाली पक्ष ने सड़क से भूस्खलन हटाकर अस्थायी मार्ग बना लिया है, परन्तु चीनी पक्ष कंटेनर तालिका को मंजूरी नहीं दे रहा।

तातोपानी सीमा शुल्क कार्यालय के प्रमुख सीमा शुल्क अधिकारी दीपेन्द्रप्रकाश गिरी के अनुसार, “चीनी पक्ष पूर्व सहमति के अनुसार कंटेनर ढुलाई पर असमति जता रहा है। सड़क निर्माण में चार दिन और लग सकते हैं, इसलिए नेपाल की ओर से वाहन आ तो रहे हैं लेकिन वापस नहीं जा पा रहे, नाका लगभग ठप है।”

पहले कार्यालय में आमना-सामना करके पता चलता था, अब दोनों पक्ष केवल संदेशों के जरिए बात कर रहे हैं।

चीनी सीमा शुल्क कर्मचारी लिपिंग क्षेत्र और आसपास के भूस्खलन के कारण अन्यत्र स्थानांतरित हो गए हैं।

मुस्ताङ कोरला नाका पर बढ़ा दबाव

तातोपानी और रसुवागढी नाकों में समस्या आई तो सीमा शुल्क विभाग ने व्यापारियों को मुस्ताङ के कोरला नाके को वैकल्पिक रूप से उपयोग करने की सलाह दी है।

समतल क्षेत्र में स्थित कोरला नाका में भूस्खलन का खतरा कम है, फिर भी व्यापारी इसे मजबूरी समझते हैं। इस नाके में रसुवा और तातोपानी जैसा सीमा शुल्क पूर्वाधार, चौड़ी सड़क और बड़े मालवाहक ट्रक के संचालन की अच्छी व्यवस्था नहीं है।

मुस्ताङ सीमा शुल्क कार्यालय के प्रमुख सीमा शुल्क अधिकारी विदुर चुडाल बताते हैं कि कोरला नाके से नियमित रूप से मालवाहक वाहनों का आवागमन हो रहा है। यद्यपि चीनी पक्ष के पास अत्याधुनिक पूर्वाधार नहीं है, वह उपलब्ध संसाधन और साधनों से काम चला रहे हैं।

“हम सीमा से 14 किलोमीटर दूर सामान्य पूर्वाधार में काम कर रहे हैं। चीनी तरफ जैसी सुविधाएं नहीं हैं, लेकिन नाका खुला है और वाहन आ रहे हैं।”

इलेक्ट्रिक वाहनों के आयात में बढ़ती रुचि दिखाई दे रही है, हाल ही में 100 यूनिट BYD और 63 फोटोन कंपनी के इलेक्ट्रिक वाहन इसी नाके से आयातित हुए हैं। अन्य कंपनियों के वाहन भी आ रहे हैं।

कोरला नाके से रेडीमेड कपड़े, जूते, बैग और कपड़े के रोल आयात हो रहे हैं। रसुवागढी नाके पर दबाव बढ़ने से व्यापारी कोरला को प्राथमिकता दे रहे हैं।

“पहले रोजाना एक-दो कंटेनर आते थे, अब रोज 8-10 कंटेनर आ रहे हैं,” चुडाल ने जानकारी दी।

खाद्य पदार्थ और जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं के आयात में क्वारंटीन सुविधा की कमी समस्या है। फल, सब्जियां और अनाज आयात नहीं हो पा रहे हैं।

“क्वारंटीन सुविधा नहीं होने तक इस तरह के सामान नहीं लाया जा सकता, इसलिए अभी तातोपानी या अन्य नाकों का उपयोग करना पड़ेगा।” मुस्ताङ सीमा शुल्क कार्यालय में 18 पद होते हुए भी वर्तमान में मात्र 10 कर्मचारी कार्यरत हैं।

आरबी कॉम्प्लेक्स व्यवसायी संघ के अध्यक्ष दाहाल के अनुसार, कोरला नाका से माल लाना वर्तमान परिस्थितियों में “न होना बेहतर है” जैसा है।

उनका कहना है, “इस नाके से माल लाने में ढुलाई खर्च और समय दोनों बढ़ेंगे, लेकिन कोई अन्य विकल्प नहीं है तो यहां से माल लाना ही होगा।”

नेपाल हिमालय सीमापार वाणिज्य संघ के महासचिव रामचन्द्र पराजुली के अनुसार, रसुवा-केरुंग नाका से जुड़ी चीन की सड़क लगभग 50 से 60 किलोमीटर के क्षेत्र में पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।

“रसुवा नाके के भौतिक ढांचे को नुकसान हुआ है, सड़क पूर्वाधार पुनर्निर्माण के लिए राष्ट्रीय बजट और चीनी पक्ष की सक्रियता आवश्यक है।”

रसुवा नाके के अनिश्चित होने के कारण कोरला की ओर मार्ग बदलने से ढुलाई भाड़ा काफी बढ़ने की संभावना है। “कोरला से काठमांडू आने में लगभग दो दिन लगते हैं, मार्ग परिवर्तन से ढुलाई खर्च भारी बढ़ने का अनुमान है। इससे बाजार में वस्तुओं की कीमत आधा से ज्यादा बढ़ सकती है।”

स्थानीय नाकों के बंद होने से भारत के कोलकाता होते हुए समुद्री मार्ग से माल लाने का विकल्प भी है, लेकिन यह महंगा, जटिल और लंबा होने के कारण दसैं के मौसम में बाजार संभालना मुश्किल करेगा।

नेपाल समुद्रपार निकासी पैठारी संघ के महासचिव जयन्त अग्रवाल के अनुसार, “अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक कारणों से समुद्री मार्ग प्रभावित है। कोलकाता से माल आने में बहुत समय लगता है और शुल्क भी बढ़ा है।”

वे कहते हैं, “चीन के किसी पोर्ट से कोलकाता पहुंचने में डेढ़ महीने और वहां से नेपाल पहुंचने में 20-25 दिन और लगते हैं। इस मार्ग से माल आने पर बैंक ब्याज बढ़ता है, जिससे व्यापारियों पर भारी दबाव बनता है, और सर्दियों के मौसम के पहले समय पर माल पहुंचाना मुश्किल होता है।”

इस आपदा ने नेपाल के छोटे और मध्यम व्यापार वर्ग को तहस-नहस कर दिया है।

ऋण और एलसी के माध्यम से माल मंगवाने वाले हजारों व्यापारी अपनी पूंजी जोखिम में देख रहे हैं। पराजुली कहते हैं, “बाढ़ ने कंपनियों का माल और पूर्वाधार ही नहीं बल्कि पूंजी भी जोखिम में डाली है। कई व्यापारी पूंजी खत्म होने के बाद कारोबार छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।”

नई पूंजी जुटाना कठिन हो रहा है और आयातित माल की क्षति से बाजार में गंभीर कमी आ सकती है। व्यापारी चीनी सरकार से हवाई या जलमार्ग से माल लाने के लिए मार्ग पर फेरबदल करने में मदद मांग रहे हैं।

चीन के नाकों पर ऐसी विपदा पहली बार नहीं आई है। 2014 के जुरे भूस्खलन, 2015 के महाभूकंप और अन्‍य वार्षिक मानसूनी आपदाओं का सामना यह क्षेत्र कर चुका है।

2017 की 30 अगस्त को चीन ने रसुवागढी-केरुङ नाके को आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा घोषणा की थी, लेकिन सड़क की स्थिति अब भी प्रमुख ग्रामीण सड़क जैसी बनी हुई है।

हर साल भदौ-असोज के महीने में बाढ़ और भूस्खलन के कारण सड़क बाधित हो जाती है, अरबों के माल फंस जाते हैं और भारी नुकसान होता है। इसने व्यापारियों को करोड़ों का आर्थिक संकट में डाला है।

वर्तमान आर्थिक वर्ष 2083/84 के पहले माह सावन में ही चीन से 31 अरब 74 करोड़ रुपये मूल्य के माल का आयात हुआ था। पिछले आर्थिक वर्ष में चीन से 4 खरब रुपये से अधिक माल आयातित हुआ था।

व्यापार एवं वाणिज्य विशेषज्ञ रविशंकर सैंजू ने कहा कि त्योहारों के दौरान आवश्यक वस्तुओं की कमी न होने देने के लिए सरकार को विशेष पहल करनी चाहिए।

उनका मानना है कि मुस्ताङ के कोरला को विकल्प के रूप में स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन इसकी ढुलाई लागत काफी ज्यादा हो सकती है।

“कोरला नाके से माल आना विकल्प है, पर केरुङ या तातोपानी की तुलना में इसकी ढुलाई लागत लगभग दोगुनी है।”

सैंजू ने कहा, “रसुवा के मुकाबले कोरला द्वारा डिलीवरी महंगी पड़ेगी, जिसका असर अंतिम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।”

भोटेकोशी की बाढ़ ने रसुवागढी क्षेत्र में लगभग 200 से 300 कंटेनर मलवा बहा दिया है, जो व्यापारियों को अरबों रुपये से अधिक नकद नुकसान और मनोबल हानि पहुंचा रहा है।

“कंटेनर चालक और व्यापारी भी संपर्क में नहीं हैं या लापता हैं। ऐसी स्थिति में अन्य नाके से माल लाने में व्यापारियों को हिम्मत जुटाना मुश्किल है।”

रसुवागढी नाका अवरुद्ध होने के बाद कोरला या समुद्री/हवाई मार्ग की ओर जाने की संभावना बढ़ी है। लेकिन त्योहार के वक्त ऐसा होना दुर्भाग्यपूर्ण है।

सैंजू ने इसे “आपातकालीन” स्थिति बताते हुए कहा कि सरकार को तुरंत आवश्यक उपाय करने होंगे। “त्योहार के दौरान कृत्रिम कमी और महंगाई रोकने के लिए युद्धस्तर पर समन्वय जरूरी है।”

उन्होंने कहा कि राज्य को वैकल्पिक मार्गों पर लगने वाले अतिरिक्त खर्चों में राहत देनी चाहिए, जिससे उपभोक्ताओं की बचत हो सके।

अर्थशास्त्री डॉ. दिलीराजखनाल ने इस आपदा को देश के समग्र विकास के लिए बड़ा झटका बताया।

“मानवीय क्षति के साथ-साथ सड़क, पुल और बिजली उत्पादन में अरबों का नुकसान अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल रहा है।”

खनाल ने कहा, “रसुवागढी आपदा ने विदेशी व्यापार और व्यापारियों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।”

भारतीय और अन्य वैकल्पिक मार्ग से आपूर्ति महंगी होने की संभावना है, इसलिए सरकार को राहत या अनुदान व्यवस्था करनी चाहिए।

प्रकोप के बाद पुनःस्थापन हेतु सभी राजनीतिक दल, निजी क्षेत्र और दानदाताओं के साथ तालमेल कर समयबद्ध और व्यापक योजना बनानी होगी।

“आपदा प्रबंधन को युद्धस्तर पर आगे बढ़ाना होगा। विश्व बैंक से मिलने वाला 25 अरब रुपया तथा भारत, चीन समेत अन्य देशों की सहायता को प्रभावी बनाना आवश्यक है।”

सरकार को बाजार में वस्तु की कमी और महंगाई पर तुरंत नियंत्रण हेतु प्रभावी आपदा प्रबंधन प्रणाली लागू करनी होगी।

त्योहार के समय देश की मुख्य आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से इसका असर उपभोक्ताओं की रसोई और दिग्गजों तक पहुंचेगा। मूल्य वृद्धि निम्न और मध्यम वर्ग के परिवारों के रोज़मर्रा खर्च से लेकर समग्र अर्थव्यवस्था में “चेन इफेक्ट” लाएगी।

‘फिल्ड में उद्धार और शव प्रबंधन के लिए जनशक्ति की कमी’

समाचार सारांश: विदुर नगरपालिका की उपमेयर प्रभा बोगटी ने भोटेकोशी बाढ़ के बाद उद्धार और शव प्रबंधन के लिए फिल्ड में जनशक्ति की कमी होने की बात कही है। उनके अनुसार नदी में शव बहकर आए हैं और बेलकोटगढ़ी क्षेत्र में कई शव मिलने की जानकारी मिली है। उद्धार के लिए हेलिकॉप्टर और खाद्यान्न उपलब्ध हैं, लेकिन नदी किनारे प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में सड़क अवरोध समस्या पैदा कर रहे हैं।

भोटेकोशी में बुधवार को आई बाढ़ से प्रभावित नुवाकोट की विदुर नगरपालिका की उपमेयर प्रभा बोगटी ने उद्धार और शव प्रबंधन में फिल्ड में काम करने वाले जनशक्ति की कमी होने की बात कही है। उनके अनुसार नदी ने शव बहा कर लाए हैं। उपमेयर बोगटी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, “बाढ़ ने पिछले दिन अकथनीय क्षति पहुँचाई। इसके बाद लगातार उद्धार प्रयास जारी हैं। घायलों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है और उद्धार किया जा रहा है।”

उपमेयर बोगटी ने आगे जानकारी देते हुए कहा, “हेलिकॉप्टर और खाद्यान्न पहुँच चुके हैं, लेकिन प्रभावित क्षेत्र तक सामग्री पहुँचाने में कठिनाइयां हो रही हैं।” उन्होंने कहा, “यहां उद्धार कार्य अत्यंत जटिल स्थिति में चल रहा है।”

उपमेयर ने कहा, “हमें तत्काल सुरक्षित सुरक्षाकर्मी, अन्य जनशक्ति और स्वयंसेवकों की आवश्यकता है, जो तुरंत फिल्ड में जा सकें।” स्वास्थ्य उपचार के लिए टीमों की स्थिति बताते हुए उन्होंने कहा, “त्रिशूली अस्पताल दो तरफ से पहुँचा जा सकता है।”

उद्धार तथा सर्वेक्षण के लिए ड्रोन पायलटों को एक स्थान पर इकट्ठा होने का आग्रह

फाइल फोटो, समाचार संक्षेप, संपादकीय समीक्षा के बाद तैयार किया गया। रसुवा भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद खोज और उद्धार कार्य को तेज करने के लिए ड्रोन पायलटों को ड्रोन रैपिड रेस्पॉन्स टीम में शामिल होने का आह्वान किया गया है। ११ भदौ, काठमांडू। रसुवा भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में खोज और उद्धार को तेजी से करने के लिए ड्रोन पायलटों को एक ही स्थान पर एकत्र होने का अनुरोध किया गया है। रोबोटिक्स एसोसिएशन ऑफ नेपाल (र्यान) ने ड्रोन रैपिड रेस्पॉन्स टीम (DRRT) के गठन के लिए यह आह्वान किया है। प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद के कार्यालय की टीम के साथ सीधे समन्वय करते हुए उद्धार और राहत कार्यों में DRRT सहयोग करेगा। दौड़-धूप से पहुंचना संभव न हो सकने वाले नदी किनारे के क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने, अल्पसंख्यक समुदायों और लापता व्यक्तियों की हवाई तकनीक के माध्यम से पहचान करने में DRRT की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसी प्रकार, बह चुके पुलों, टूटे हुए सड़कों और जोखिमपूर्ण बस्तियों की वास्तविक स्थितियों का मूल्यांकन करने तथा उद्धार और राहत परिचालन टीमों को उच्च गति में रीयलटाइम फोटो तथा वीडियो उपलब्ध कराने में भी DRRT सहायता प्रदान करेगा। इच्छुक पायलट यहां क्लिक कर DRRT में भाग ले सकते हैं।

धादिङ के 27 तीर्थयात्रियों और बस चालक बाढ़ के बाद लापता, गांव में पसरा सन्नाटा

रसुवा के गोसाइं कुण्ड तीर्थयात्रा में गए धादिङ के 27 तीर्थयात्रियों और बस चालक बुधवार से भीषण बाढ़ के बाद संपर्क विहीन हो गए हैं। बाढ़ से पहले चालक छविलाल श्रेष्ठ ने अंतिम बार कहा था कि “बाढ़ ने गाड़ी बहा दी है, हम छत पर हैं।” यह खबर उनके परिवार को प्राप्त हुई थी। सालबोटे और गैरी टोल के परिचित खोज और बचाव कार्य के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन अभी तक कोई भरोसेमंद सूचना नहीं मिली है। 11 भदौ, धादिङ।

रसुवा के गोसाइं कुण्ड तीर्थयात्रा के लिए निकले धादिङ के एक ही क्षेत्र के 27 तीर्थयात्री और बस चालक भीषण बाढ़ के बाद संपर्क विहीन हो गए हैं। वे बुधवार सुबह से संपर्कहीन हैं, जिससे नीलकण्ठ नगरपालिका-9 के सालबोटे और वडा नम्बर 12 के गैरी टोल में गहरा सन्नाटा छाया हुआ है। धादिङबेसी से तीर्थयात्री लेकर रसुवा की ओर जा रही बा 5 ख 1250 नंबर की बस और उसमें सवार चालक और यात्री नुवाकोट के बेत्रावती पहुंचने के बाद संपर्क टूट गया।

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, बस बुधवार सुबह करीब 9:15 बजे बेत्रावती पहुंची थी। फिर तिब्बती क्षेत्र से भोटेकोसी नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण सड़क, पुल और संचार संपर्क बाधित हो जाने के बाद उनसे संपर्क टूटा। अंतिम फोन कॉल में यात्री प्रकाश लम्साल ने कहा था, “बाढ़ ने गाड़ी बहा दी है, हम घर की छत पर हैं।” इसके कुछ समय बाद फोन का सम्पर्क पूरी तरह कट गया।

स्थानीय प्रकाश खनाल के अनुसार, खोज और बचाव के लिए सभी संसाधन और पहुँच का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “अभी तक कहीं से भी विश्वसनीय सूचना नहीं मिली है।” संपर्कहीन तीर्थयात्रियों में नीलकण्ठ नगरपालिका-12 के छविलाल श्रेष्ठ (बस चालक), दयाराम लम्साल, सीता लम्साल, ठाकुर लम्साल, शारदा लम्साल, प्रकाश लम्साल और इंदिरा लम्साल, नीलकण्ठ नगरपालिका-9 के राम लम्साल, जानुका लम्साल, कृष्णप्रसाद खनाल, राधिका खनाल, रामचन्द्र खनाल, भगवती खनाल, शिवहरि लम्साल, गायत्री लम्साल, नारायणप्रसाद लम्साल, सीता लम्साल, राजन लम्साल, न्याउरी लम्साल, सिद्धलेक गाउँपालिका-1 के हरिप्रसाद सिलवाल, बिन्दा सिलवाल, घनश्याम भट्ट, कल्पना भट्ट, नीलकण्ठ नगरपालिका-3 की सीता तिवारी, तुलसी तिमल्सिना और ईश्वरी तिमल्सिना शामिल हैं।

रसुवास्थित भोटेकोशी बाढीमा पहिचानविहीन शवहरूको सूची अब क्युआर स्क्यानमार्फत उपलब्ध

रसुवामा गएको भोटेकोशी बाढीमा ज्यान गुमाएका व्यक्तिहरूका पहिचान नभएका शवहरूको सूची नेपाल प्रहरीले अनुहार र हुलिया सहित तयार पारेको छ। ११ भदौ, काठमाडौं। बाढीमा परेर मृत्यु भएका व्यक्तिहरूका शवहरू संकलन गरी प्रहरीले उक्त सूची तयार गरेको हो।

शवहरूको पहिचान सहज होस् भन्ने उद्देश्यले प्रत्येक शवको अनुहार र हुलिया दर्शाउने तस्वीरहरू सूचीमा समावेश गरिएका छन्। यो सूची क्युआर (QR) कोड स्क्यान गरेर सजिलै हेर्न सकिन्छ। प्रहरीले आफ्नो फेसबुक पेजमा उक्त क्युआर कोड सार्वजनिक गरेको छ जसका माध्यमबाट क्युआर स्क्यान गरेपछि पहिचान नभएका शवहरूको सूचीमा पहुँच गरी हेर्न सकिने व्यवस्था गरिएको छ।

पशु उद्धार के लिए २४ घंटे हटलाइन सेवा शुरू

रसुवा, नुवाकोट, धादिङ सहित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशु उद्धार एवं उपचार के लिए नेपाल वेटेरिनरी एसोसिएशन ने ११५९ हटलाइन सेवा चालू की है। ११ भदौ, काठमांडू। रसुवा, नुवाकोट, धादिङ समेत जिलों में हाल ही आई बाढ़ से प्रभावित पशुपालन वाले क्षेत्रों में पशुओं के उद्धार एवं उपचार के उद्देश्य से नेपाल वेटेरिनरी एसोसिएशन ने २४ घंटे सक्रिय हटलाइन सेवा शुरू की है। एसोसिएशन के महासचिव डॉ. शंकर न्यौपाने के अनुसार, प्रभावित पशुपालक किसान इस हटलाइन ११५९ पर संपर्क कर पशुपक्षियों के स्वास्थ्य स्थिति, उपचार और उद्धार संबंधी तकनीकी सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

हटलाइन के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर क्षेत्र में तैनात पशु चिकित्सक और उद्धार एवं उपचार टीम के साथ समन्वय कर तत्काल आवश्यकतानुसार टीम भेजी जाएगी।

आज सुबह ही एसोसिएशन ने डॉ. प्रवेश शर्मा, डॉ. निशान्त शर्मा गेलाल, डॉ. सुदीप रेग्मी, डॉ. दिनेश अर्याल और डॉ. केशव खरेल की टीम को बाढ़ प्रभावित इलाकों में रवाना किया है।

बाढ़ के बाद संभावित संक्रामक रोगों और महामारी के फैलाव के खतरे को ध्यान में रखते हुए एसोसिएशन पशु सेवा विभाग और अन्य सरकारी निकायों के साथ मिलकर रोग निगरानी एवं रोकथाम के कार्य में जुटा हुआ है।

संपर्क और सहजीकरण के लिए जारी मुफ्त हटलाइन नंबर ११५९ है। इसके अलावा डॉ. शंकर न्यौपाने (९८४५४४०४०४), डॉ. विशाल पोखरेल (९८४३३९७५८७) और डॉ. दिनेश अर्याल (९८४००१७०७६) से भी संपर्क किया जा सकता है, ऐसा एसोसिएशन ने जानकारी दी है।