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लेखक: space4knews

अधिकार के 18 वर्ष और कर्तव्य की प्रतिबद्धता

समाचार सारांश

प्रस्तुत किया गया। संपादकीय समीक्षा की गई।

  • मुलुकी देवानी संहिता, २०७४ के अनुसार, 18 वर्ष पूर्ण होने तक नाबालिग की देखभाल, संरक्षण और शिक्षा की पहली ज़िम्मेदारी माता-पिता पर है।

संतान प्राप्त करने की इच्छा पूरी होने से पहले प्रत्येक दंपती के जीवन में एक अनोखा खालीपन और बेचैनी होती है। अस्पतालों और चिकित्सकों के क्लिनिक के चक्कर काटते हुए दंपती मठ-मंदिर और तीर्थस्थलों की ओर आशा लेकर जाते हैं। संतान मिल जाने के बाद भी यह दौड़ जारी रहती है। बच्चे की एक प्यारी मुस्कान उनके संसार की सबसे बड़ी खुशी बन जाती है और इसके लिए निरंतर प्रयास करते हैं।

संतान की सुख-समृद्धि के लिए अपनी सारी इच्छाओं, चाहतों और अरमानों को छोड़ देते हैं। अपने आधे पेट के बावजूद बच्चे के होंठों तक दूध पहुँचाने की कोशिश करते हैं।

पुराने कपड़े पहनकर, दिन-रात भूखे और निंदरहित आंखों के साथ मेहनत करते हैं। लेकिन संतान को नया कपड़ा, पोषक भोजन और आरामदायक बिस्तर देने में कभी मितव्ययी नहीं होते। वे अपनी वर्तमान परिस्थिति को छुपाकर बच्चे का उज्जवल भविष्य बनाते हैं।

यह कोई नई कहानी नहीं है। पूर्वीय दर्शन और सनातन संस्कारों ने हजारों वर्षों से यह जुड़ी हुई सच्चाई को संरक्षित किया है। शास्त्रों में लिखा है,

‘उपाध्यायान्दशाचार्य आचार्याणां शतं पिता ।
सहस्रं तु पितककन्माता गौरवेणातिरिच्यते ।।’

अर्थात दस शिक्षक से एक आचार्य श्रेष्ठ होता है, सौ आचार्यों में एक पिता श्रेष्ठ होता है, और हजारों पिता में एक माँ का सम्मान सर्वोच्च होता है। लेकिन विडंबना यह है कि आज का आधुनिक समाज, कानून और प्रशासन इस त्याग तथा इस महिमा को नजरअंदाज करते दिख रहे हैं।

‘18 साल’ की उम्र सीमा और कानून की विरोधाभास

हर पल माता-पिता को अपने संतान की चिंता रहती है। समाज में कुछ अपवाद हो सकते हैं, पर सच्चाई यही है। माता-पिता का प्रेम और चिंता कभी खत्म नहीं होती। नेपाल के कानून के अनुसार, 18 वर्ष पूरा होने तक बच्चे के संरक्षक के रूप में माता-पिता को पहला अधिकार और दायित्व मिला है। मुलुकी देवानी संहिता, २०७४ की धारा 116 के अनुसार नाबालिग की देखभाल, संरक्षण और शिक्षा की पहली जिम्मेदारी माता-पिता की ही है।

पर सवाल उठता है, क्या 18 वर्ष की उम्र पूरी होते ही कभी परमेश्वर समान माता-पिता अचानक संतान के शत्रु बन सकते हैं? क्या 18 साल की उम्र पर माता-पिता का प्रेम, दायित्व और जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या 18 साल की उम्र में संतान द्वारा लिए गए सभी निर्णय परिपक्व और सही होते हैं? इसकी गारंटी कैसे दी जा सकती है?

वैज्ञानिक अनुसंधान के अनुसार, मानव मस्तिष्क का ‘प्रिफ्रंटल कॉर्टेक्स’ धीरे-धीरे विकसित होता है और लगभग 25 वर्ष की उम्र तक विकसित होता रहता है। यह कोर्टेक्स सही-गलत का निर्णय, दूरगामी सोच और आवेग नियंत्रण का काम करता है। इसका मतलब यह नहीं कि 18 वर्ष की उम्र के बाद सभी व्यक्ति असमर्थ होते हैं, बल्कि निर्णय क्षमता अनुभव और परिपक्वता के साथ धीरे-धीरे विकसित होती है। लेकिन हमारा कानून 18 वर्ष को ही ज्ञान और परिपक्वता का अंतिम मापदंड मानता है। इसीलिए सभी व्यक्तियों के एक निश्चित उम्र में परिपक्व होने की गारंटी नहीं होती।

तात्कालिक निर्णय और अदालत की जटिलताएं

हमारे समाज में एक प्रवृत्ति है कि जल्दी निर्णय लेने के बाद पछतावा करते हैं। आज के दौर में सोशल मीडिया, वर्चुअल दुनिया के भ्रम और हार्मोनल उतार-चढ़ाव की वजह से युवा प्रेम को जीवन की अंतिम सच्चाई मान लेते हैं। नेपाल में विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया भी बहुत सरल है। आवश्यक दस्तावेजों के पूरा होने पर तुरंत विवाह पंजीकृत हो जाता है और कानूनी मान्यता प्राप्त होती है।

लेकिन कई बार इसी हड़बड़ी में लिए गए निर्णय कुछ ही महीनों में असफल हो जा रहे हैं। यदि संबंध तोड़ने (तलाक) के लिए अदालत जाना हो तो प्रक्रिया धीमी होती है। मुलुकी देवानी संहिता, २०७४ की धारा 99 के अनुसार पति-पत्नी दोनो की सहमति के बिना एकतरफा मुकदमा दायर करने पर भी अदालत तुरंत तलाक नहीं देती। इसके लिए एक साल की ‘कूलिंग पीरियड’ निर्धारित है, जिसमें मेल-मिलाप की कोशिश की जाती है।

यहाँ एक विरोधाभास नजर आता है। तलाक के लिए सोच-विचार का समय दिया जाता है, तो विवाह पंजीकरण से पहले परामर्श या मध्यस्थता क्यों अनिवार्य नहीं है? समाज में तलाक के मुख्य कारण आर्थिक असमानता, सामाजिक मेलजोल की कमी और हड़बड़ी में किए गए विवाह हैं। वहीं आर्थिक स्तर समान होने और दीर्घकालीन सोच से किए गए प्रेम विवाह अधिकतर सफल साबित हुए हैं।

एक प्रतिनिधि कथा

कुछ वर्षों पहले की एक वास्तविक घटना याद करना आवश्यक है। प्रिया (नाम परिवर्तित) मध्यम वर्गीय परिवार की बेटी हैं। उनके पिता ने पूरी कमाई बेटी को एक प्रतिष्ठित कॉलेज में पढ़ाने में लगाई। पिता चाहते थे कि बेटी डॉक्टर या इंजीनियर बने।

कॉलेज में पढ़ाई कर रही 20 वर्षीय प्रिया एक लड़के के प्रेम में पड़ गई। वह लड़का स्थिर आय नहीं रखता था और उसका सामाजिक पृष्ठभूमि भी अच्छी नहीं थी। दोनों के धर्म और संस्कार ही नहीं, दृष्टिकोण भी अलग था। माता-पिता ने रो-रोकर समझाया, घुटनों पर गिरकर विनती की,

‘बेटी, कम से कम पढ़ाई पूरी कर, लड़के को अपने पैरों पर खड़ा होने दे, जल्दबाजी मत कर।’

पर प्रिया को माता-पिता की यह गुहार उसकी स्वतंत्रता में हस्तक्षेप जैसा लगा। वह घर छोड़कर चली गई। कुछ अधिकारवादी संगठनों ने उसे आश्रय दिया। मीडिया और गैर-सरकारी संगठनों के लिए वह क्रांतिकारी बन गई। कानून ने उम्र देखते हुए 20 वर्ष की लड़की के निर्णय को अधिकार माना और विवाह वैध घोषित कर दिया। दशकों से बेटी के लिए तपती पसीने बहाने वाले पिता एक दिन में समाज और कानून में खलनायक बन गए।

पर कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। विवाह के छह महीने के भीतर ही ‘रोमांस’ खत्म हो गया, आर्थिक समस्याएं शुरू हुईं और विवाद बढ़ा। लड़के की आय न होना, धार्मिक और सांस्कृतिक भिन्नता के कारण घरेलू कलह और मानसिक उत्पीड़न प्रिया के लिए असहनीय बन गया।

आधिकारवादी संस्थान आर्थिक या दीर्घकालीन सुरक्षा नहीं दे सके। अंततः एक साल के भीतर प्रिया तलाक के कागजात लेकर रोती हुई माता-पिता के पास शरण मांगने पहुंच गई। प्रेम विवाह या अंतरधार्मिक विवाह स्वयं में समस्या नहीं हैं। समस्या है अनियोजित, आर्थिक आत्मनिर्भरता और दीर्घकालीन सोच के बिना लिए गए हड़बड़ी वाले निर्णय।

संस्थागत जटिलताएं और संबंध प्रबंधन

कुछ एनजीओ, अंतरराष्ट्रीय एनजीओ और अधिकारकर्मी इस विषय को अधिकारों के व्यापार के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश करते हैं। माता-पिता और संतान के संबंध को भावनात्मक स्तर से मध्यस्थता कर परिवार जोड़ने का प्रयास जरूरी है। ऐसी संस्थाएं भी हैं। पर कई मामलों में संस्थागत हस्तक्षेप परिवार के पुनर्मिलन की बजाय व्यक्तिगत अधिकारों को प्राथमिकता देता दिखता है।

व्यक्तिगत अधिकारों के पक्ष में वकालत करने वाली कई संस्थाएं युवाओं को विद्रोही बनने के लिए प्रेरित करती हैं, पर लंबे समय में इससे उत्पन्न होने वाली मानसिक, सामाजिक और आर्थिक समस्याओं में उनका साथ नहीं होता।

यह निश्चित है कि सभी माता-पिता के निर्णय सही नहीं होते। कभी-कभी जातिगत पूर्वाग्रह, धार्मिक संकीर्णता, आर्थिक अभिमान या सामाजिक दबाव के चलते अभिभावक बच्चे के हित के विरुद्ध निर्णय भी लेते हैं। इसलिए समाधान अंध समर्थन या विद्रोह में नहीं बल्कि संवाद और समझदारी में खोजा जाना चाहिए। इस प्रक्रिया में मध्यस्थता और संस्थानों की भूमिका अत्यंत आवश्यक है। लेकिन अंततः किसी तीसरे पक्ष के पास माता-पिता जैसा नि:स्वार्थ छत्र और संकट में ढाल बनने की क्षमता नहीं होती।

संवाद और संतुलन की आवश्यकता

परिवर्तन और आधुनिकता के नाम पर सामाजिक आधार को तोड़ना समझदारी नहीं है। समाज में सुधार होना चाहिए, जातीय और धार्मिक संकीर्णताएं हटनी चाहिए, लेकिन यह आधार जल्दबाजी, अनिश्चितता और क्षणिक बहकावे पर आधारित नहीं होना चाहिए।

राज्य को कानून बनाते समय व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखने की व्यवस्था करनी चाहिए। पूर्वीय समाज की मजबूत नींव परिवार है। इसलिए विवाह पंजीकरण जैसे गंभीर सामाजिक और कानूनी निर्णय से पहले अनिवार्य पारिवारिक परामर्श या निश्चित अवधि की समीक्षा की कानूनी व्यवस्था होना आवश्यक है।

युवा पीढ़ी को भी माता-पिता के अनुभव और चेतना को अपनी स्वतंत्रता का अवरोध न मानकर सुरक्षा कवच की तरह समझना चाहिए। हड़बड़ी में निर्णय लेने से बेहतर है कि अधिकार की 18 वर्ष पूर्ण होने पर कर्तव्य की प्रतिबद्धता भी स्वीकार की जाए, तभी अधिक समझदारी होगी।

गृहमंत्री गुरूङ ने सभी फाइलें खोलने की घोषणा की

२६ जेठ, काठमाडौं। गृह मंत्री सुधन गुरूङ ने अब सभी फाइलें खोलने का ऐलान किया है। दूसरी बार गृह मंत्री नियुक्त होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में गुरूङ ने बताया कि जांच के अंतर्गत फाइलों को जल्द ही निष्कर्ष पर पहुंचाएंगे। ‘वर्तमान में जांच प्रक्रियाधीन फाइलों को शीघ्र निर्णय में लाने के निर्देश दिए जाएंगे,’ गृह मंत्री गुरूङ ने कहा।

मंत्रालय में पदभार ग्रहण करने के बाद लिए गए फैसलों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि अब सभी फाइलें सार्वजनिक की जाएंगी। ‘अब सभी फाइलें खुलेंगी, थैंक यू सो मच,’ उन्होंने कहा।

नेपाल में बर्ड फ्लू: जिला स्तर पर फैले वायरस से जुड़ी जानकारियां जो जरूर जाननी चाहिए

पशु सेवा विभाग ने बताया है कि काठमांडू उपत्यका समेत १० जिलों में फैल चुके बर्ड फ्लू संक्रमण के कारण करीब पांच लाख घरपालू पक्षियों को नष्ट किया गया है। उन जिलों में से सात जिलों के चार प्रदेशों में बर्ड फ्लू के पाए जाने के बाद अधिकारियों ने खासकर चिकन पालन और पक्षीजन्य उत्पादों के आवागमन में विशेष सतर्कता बरतने का आग्रह किया है। बर्ड फ्लू लाने वाले सभी प्रकार के इन्फ्लूएंजा वायरस रोगजनक नहीं होते। नेपाल में तीन प्रकार के इन्फ्लूएंजा वायरस में से दो प्रकार ही बर्ड फ्लू की परिभाषा में शामिल हैं।

नेपाल में वर्तमान में ‘उच्च पैथोजेनिक’ यानी उच्च रोगजनक क्षमता वाले H5N1 वायरस के कारण बर्ड फ्लू फैला है। पशु सेवा विभाग के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. नवराज श्रेष्ठ के अनुसार H5N1 और H7N1 वायरस ही नेपाल में बर्ड फ्लू की परिभाषा में आते हैं। कम रोगजनक क्षमता वाला H9N1 वायरस के खिलाफ नेपाल में वैक्सीन उपलब्ध है, इसलिए इसे बर्ड फ्लू के रूप में नहीं माना जाता, उन्होंने जानकारी दी। विशेषज्ञों के अनुसार उच्च रोगजनक वायरस के प्रति सबसे ज्यादा सावधानी जरूरी है। राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक शिशिर भंडारी ने बताया, “H9N1 में पक्षियों में मृत्यु दर कम होती है और मनुष्यों में संक्रमण का जोखिम भी कम होता है।”

कम रोगजनक वायरस के लिए नेपाल में वैक्सीन उपलब्ध है। जबकि उच्च रोगजनक वायरस के लिए भारत में वैक्सीन उपलब्ध होने के बावजूद नेपाल में वैक्सीन की अनुमति नहीं है, विभाग ने स्पष्ट किया है। इस वजह से वैक्सीन के बिना ही नियंत्रण पर प्राथमिकता दी जा रही है। मनुष्यों में संक्रमण का जोखिम कितना है? करीब तीन दशक पहले पहली बार मनुष्यों में H5N1 संक्रमण देखा गया था। वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. श्रेष्ठ ने बताया कि कुकुर के मैदे को अच्छी तरह पकाकर खाने से संक्रमण का खतरा कम होता है। नेपाल में 2019 में बर्ड फ्लू की वजह से एक युवक की मौत हुई थी। अधिकारीयों के अनुसार वह युवक मुर्गा परिवहन करने वाली गाड़ी चलाता था। “मनुष्यों में संक्रमण होने पर मृत्यु दर 48 से 50 प्रतिशत तक पहुंचती है,” डॉ. श्रेष्ठ ने बताया। “सबसे ज्यादा जोखिम फार्म कामगारों को होता है। उन्हें कम से कम मास्क, दस्ताने और जूते पहनना जरूरी है और बाहर आने के बाद हाथ-मुंह धोने पर संक्रमण का जोखिम काफी घट जाता है।”

पशु सेवा विभाग के अनुसार, अब तक बर्ड फ्लू सबसे अधिक सुनसरी जिले में पुष्ट हुआ है। कोशी प्रदेश के अन्य दो जिले मोरंग और झापा में भी यह संक्रमण पाया गया है। इसके अलावा काठमांडू, भक्तपुर और ललितपुर समेत बागमती प्रदेश के चितवन में भी बर्ड फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। मधेश प्रदेश के बारा और महोत्तरी, तथा लुम्बिनी प्रदेश के नवलपरासी पश्चिम जिले में भी बर्ड फ्लू देखी गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इन 10 जिलों के 72 से अधिक कृषि फार्मों में लगभग पांच लाख पक्षियों का निवारण किया गया है। काठमांडू उपत्यका में संक्रमण मुख्य तौर पर ब्रोयलर चिकन की तुलना में स्थानीय नस्ल और लेयर समूह के मुर्गों में देखा गया है। संक्रमित अंडों के क्रेट को पुनः उपयोग करना और अव्यवस्थित पक्षी पालन इसके मुख्य कारण हैं, डॉ. श्रेष्ठ ने बताया।

नेशनल स्पोर्ट क्लाइम्बिंग चैंपियनशिप शनिवार को आयोजित होगी

समाचार सारांश

तैयार, संपादकीय समीक्षा की गई।

  • नेपाल क्लाइम्बिंग स्पोर्ट संघ द्वारा आयोजित नेशनल स्पोर्ट क्लाइम्बिंग चैंपियनशिप २०२६ आगामी जेठ ३० तारीख को काठमाडौं में शुरू होगी।
  • बॉल्डरिंग विधा आधारित इस प्रतियोगिता में सातों प्रदेशों के १७ वर्ष से ऊपर के खिलाड़ी भाग ले सकेंगे।
  • यह प्रतियोगिता लगभग २५ लाख रुपये के बजट में आयोजित की जाएगी, विजेताओं को क्रमशः ३० हजार, २० हजार और १० हजार रुपये पुरस्कार दिए जाएंगे।

२६ जेठ, काठमाडौं। नेपाल क्लाइम्बिंग स्पोर्ट संघ के आयोजन में ‘नेशनल स्पोर्ट क्लाइम्बिंग चैंपियनशिप २०२६’ आगामी शनिवार को काठमांडू में आयोजित होने जा रही है।

संघ ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह प्रतियोगिता जेठ ३० गते (जून १३, २०२६) कालधारा, ठमेल स्थित काठमांडू स्पोर्ट क्लाइम्बिंग सेंटर में आयोजित की जाएगी।

बॉल्डरिंग विधा पर आधारित यह प्रतियोगिता अंतरराष्ट्रीय क्लाइम्बिंग महासंघ के नियम और मानकों के अनुसार संचालित होगी। एक दिवसीय इस प्रतियोगिता में सातों प्रदेश के १७ वर्ष से ऊपर के खिलाड़ी भाग ले सकेंगे।

प्रतियोगिता प्रातः ८ बजे से शुरू होगी। उद्घाटन समारोह राष्ट्रीय खेलकूद परिषद के सदस्य-सचिव रामचरित्र मेहताजी द्वारा किया जाएगा।

शुरुआत में खिलाड़ियों को प्रतियोगिता की संरचना और नियमों के बारे में जानकारी दी जाएगी, इसके बाद पूरे दिन क्वालिफिकेशन और फाइनल राउंड के मैच खेले जाएंगे। क्वालिफिकेशन से महिला और पुरुष दोनों वर्गों में ८-८ फाइनलिस्ट चुने जाएंगे।

फाइनल मुकाबलों में सर्वश्रेष्ठ महिला और पुरुष खिलाड़ियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थानों पर पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। प्रतियोगिता शाम ५ बजे मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह के साथ खत्म होगी।

संघ के सचिव सुजित कँडेल ने बताया कि अब तक २५ खिलाड़ियों ने पंजीकरण करा लिया है और पंजीकरण प्रक्रिया ११ जून तक खुली रहेगी। उन्होंने लगभग ५० खिलाड़ियों के भाग लेने की उम्मीद व्यक्त की।

संघ के अध्यक्ष रमेश पौडेल ने कहा कि क्लाइम्बिंग खेल खेल पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ देश की अर्थव्यवस्था में योगदान कर सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि नेपाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का आयोजन संभव होने के कारण इस दिशा में ध्यान दिया जाना चाहिए।

संघ के महासचिव सन्तोष मादेन ने बताया कि प्रतियोगिता का अनुमानित बजट २५ लाख रुपये है। विजेताओं को नकद पुरस्कार, मेडल और प्रमाणपत्र भी दिए जाएंगे। पुरुष और महिला दोनों वर्गों में प्रथम को ३० हजार, द्वितीय को २० हजार एवं तृतीय को १० हजार रुपये पुरस्कार दिया जाएगा।

प्रतियोगिता को सफल बनाने के लिए राष्ट्रीय खेलकूद परिषद, नेपाल ओलम्पिक समिति, पर्यटन क्षेत्र की विभिन्न संस्थाएं और निजी कंपनियां सहयोग करेंगी। साथ ही, प्रतिभागी खिलाड़ियों और तकनीशियनों के लिए भी मैडीकल बीमा का प्रबंध किया जाएगा।

अदालत के लेटरपेड और न्यायाधीश के हस्ताक्षर की नकल करने वाले युवक को गिरफ्तार

२६ जेठ, काठमांडू। अदालत के लेटरपेड और आधिकारिक व्यक्ति के हस्ताक्षर की नकल करने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार युवक गोरखा के आरुघाट गाउँपालिका–७ के रहने वाले २६ वर्षीय विवश अधिकारी हैं। उन्हें पुलिस के केंद्रीय अनुसन्धान ब्यूरो (सीआईबी) ने गिरफ्तार किया है।
पिछले १५ चैत को विवश अधिकारी के नाम पर एक मुकदमा दर्ज करने तथा पुन: प्रमाणीकरण संबंधी सूचना देने वाला पत्र नकल बनाये जाने का खुलासा हुआ है। मुकदमे के अंतिम निर्णय के बाद विवश अधिकारी के बैंक खाते में एक करोड़ २३ लाख रुपये जमा होने वाले थे और २४ चैत को सेवा शुल्क भुगतान संबंधी झूठे लिखत तैयार करके उन्हें अदालत से एक लाख ६ हजार ५०० रुपये प्रदान करने का आदेश देने वाली नक्कली पत्रावली बनाई गई थी, ऐसा सीआईबी ने बताया है। काठमांडू जिला अदालत के लेटरपेड पर न्यायाधीश, श्रेस्तेदार तथा अधिकारी के हस्ताक्षर भी नकल पाए जाने के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया है, सीआईबी ने जानकारी दी है।

आधा सिलेंडर गैस कब तक? योजना अभाव रोकने की या गंभीर समस्या पैदा करने का कदम

गैस विक्रेता के सामने भीड़

तस्वीर स्रोत, EPA/Shutterstock

तस्वीर कैप्शन, तीन महीने से नेपाल में सिर्फ आधा सिलेंडर गैस बिक रही है

नेपाल आयल निगम ने आधा सिलेंडर गैस बेचने का निर्देश दिए हुए तीन महीने हो चुके हैं। बाजार में खाना पकाने वाली गैस की कमी थोड़ी कम दिखी है, लेकिन उपभोक्ता, विक्रेता और उद्योगियों ने विभिन्न प्रतिकूल प्रभावों की शिकायत की है।

सगरमाथा के प्रवेश द्वार के रूप में प्रसिद्ध नाम्चे बाजार में रेस्टोरेंट चलाने वाले पासांग शेर्पा ने बताया कि इसका कारण उपभोक्ताओं को बड़ा नुकसान हो रहा है।

“ढुलाई की कठिनाई के कारण यहां एक सिलेंडर गैस का मूल्य 6 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। आधा सिलेंडर होने के बावजूद ढुलाई खर्च उतना ही लगता है। मैंने थोड़ा स्टॉक रखा है, इसलिए अब तक ज्यादा असर नहीं पड़ा है, लेकिन अब समस्या बढ़ेगी,” शेर्पा ने कहा।

इसी तरह, दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले और व्यवसाय करने वालों के लिए केवल आधा सिलेंडर गैस उपलब्ध होने से बहुत घाटा हुआ है।

सामान्य शहरी उपभोक्ताओं के लिए भी यह स्थिति असहज हो गई है।

नेपाली ह्याण्डबल टोली ढाकातर्फ प्रस्थान

साउथ एसियन जोन आईएचएफ ट्रफी २०२६ में भाग लेने के लिए नेपाली राष्ट्रीय ह्याण्डबल टीम बांग्लादेश की राजधानी ढाका के लिए प्रस्थान कर चुकी है। यह प्रतियोगिता जेठ २७ से ३१ तारीख तक आयोजित होगी। टीम को राष्ट्रीय खेलकूद परिषद् (राखेप) के सदस्य-सचिव रामचन्द्र मेहताले विदाई दी है। नेपाल इस प्रतियोगिता में यू–१८ जूनियर और यू–२० यूथ दो वर्गों में प्रतिस्पर्धा करेगा, यह जानकारी नेपाल ह्याण्डबल संघ ने दी है। २६ जेठ, काठमांडू।

अंतरराष्ट्रीय ह्याण्डबल महासंघ (आईएचएफ) की वार्षिक प्रतियोगिता साउथ एसियन जोन आईएचएफ ट्रफी २०२६ में भाग लेने हेतु नेपाली राष्ट्रीय ह्याण्डबल टीम मंगलवार को बांग्लादेश की राजधानी ढाका के लिए रवाना हुई है। इस प्रतियोगिता में नेपाल यू–१८ जूनियर और यू–२० यूथ के दो वर्गों में प्रतिस्पर्धा करेगा, यह जानकारी नेपाल ह्याण्डबल संघ के महासचिव केशव पाठक ने दी है।

ढाका प्रस्थान से पूर्व, राखेप के सदस्य-सचिव रामचन्द्र मेहताले नेपाली टीम को सफलता की शुभकामनाएं देते हुए औपचारिक रूप से विदाई दी। उन्होंने खिलाड़ियों को राष्ट्र के सम्मान और गौरव को ऊंचा रखने के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस प्रतियोगिता में आयोजक बांग्लादेश के साथ नेपाल, भारत, मालदीव, अफगानिस्तान और यमन की टीमें भाग लेंगी।

यू–२० नेपाली टीम में रोशन बिक, हबिन छन्त्याल, विश्वास गायक, सुदीप घले, केविन गुरुङ, निरज गुरुङ, ऋतिक परियार, सुन्दर फगामी, निशान पुन, विकल पुन, मिशन पुन, रिजन श्रेष्ठ, शोनिश तामाङ और विवेक थापा शामिल हैं। टीम के प्रशिक्षक के रूप में नेपाली राष्ट्रीय ह्याण्डबल खिलाड़ी दिनेश श्रेष्ठ नियुक्त हैं। यू–१८ टीम में अनिश विक, अल्बिन गुरुङ, सुजल गुरुङ, दिव्य गुरुङ, सुबिन गुरुङ, सितल गुरुङ, निशान गुरुङ, अदिश फगामी, प्रज्वल पौडेल, संस्कार पुन, कुशल पुन, सुमित पुन, अनमोल श्रेष्ठ और सुशन थापा शामिल हैं। इस टीम का नेतृत्व प्रशिक्षक एवं नेपाली राष्ट्रीय टीम के कप्तान विशाल बस्नेत कर रहे हैं।

प्रस्थान से पहले प्रशिक्षक विशाल बस्नेत ने बताया कि दोनों टीमों ने पोखरा में लगभग दो महीने तक लगातार और कड़ी ट्रेनिंग ली है। उन्होंने कहा है कि वे पदक जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेंगे। उन्होंने कहा, “खिलाड़ियों ने अथक मेहनत और अनुशासन के साथ तैयारियां की हैं। हम पूर्ण विश्वास करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में अपनी क्षमता प्रदर्शन कर नेपाल का गौरव बढ़ाएंगे। हमारा लक्ष्य उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ पदक जीतना है।” दोनों नेपाली टीम असार १ को स्वदेश लौटने की योजना बना चुकी हैं।

नेपाली ह्याण्डबल टीम ढाका के लिए प्रस्थान

समाचार सारांश

AI द्वारा तैयार। संपादकीय समीक्षा की गई।

  • साउथ एसियन जोन आईएचएफ ट्रॉफी 2026 में भाग लेने के लिए नेपाली राष्ट्रीय ह्याण्डबल टीम बांग्लादेश प्रस्थान कर चुकी है।
  • 27 से 31 जेठ तक आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता के लिए टीम को राखेप सदस्य-सचिव रामचंद्र मेहता ने विदाई दी।
  • प्रतियोगिता में नेपाल यू-18 जूनियर और यू-20 यूथ दो वर्गों में प्रतिस्पर्धा करेगा, नेपाल ह्याण्डबल संघ ने जानकारी दी।

26 जेठ, काठमाडौं। अंतरराष्ट्रीय ह्याण्डबल महासंघ (IHF) की वार्षिक प्रतियोगिता साउथ एसियन जोन IHF ट्रॉफी 2026 में हिस्सा लेने के लिए नेपाली राष्ट्रीय ह्याण्डबल टीम मंगलवार को बांग्लादेश की राजधानी ढाका के लिए रवाना हो गई।

27 से 31 जेठ तक आयोजित इस प्रतियोगिता में नेपाल यू-18 जूनियर और यू-20 यूथ दो वर्गों में प्रतिस्पर्धा करेगा, यह जानकारी नेपाल ह्याण्डबल संघ के महासचिव केशव पाठक ने दी।

ढाका प्रस्थान से पूर्व, राष्ट्रीय खेल परिषद (राखेप) के सदस्य-सचिव रामचंद्र मेहता ने नेपाली टीम को सफलता की शुभकामना देते हुए औपचारिक रूप से विदाई दी। उन्होंने खिलाड़ियों को राष्ट्र के सम्मान और गौरव को सर्वोच्च रखते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस प्रतियोगिता में आयोजक बांग्लादेश के अलावा नेपाल, भारत, मालदीव, अफगानिस्तान और यमन की टीमें भाग लेंगी। अंतरराष्ट्रीय ह्याण्डबल महासंघ अपनी वार्षिक कॅलेंडर के अनुसार इस प्रतियोगिता का नियमित आयोजन करता है।

यू-20 नेपाली टीम में रोशन बिक, हबिन छन्त्याल, विश्वास गायक, सुदीप घले, केविन गुरुङ, निरज गुरुङ, ऋतिक परियार, सुंदर फगामी, निशान पुन, विकल पुन, मिसन पुन, रिजन श्रेष्ठ, शोनिश तामाङ और विवेक थापा शामिल हैं। टीम के प्रशिक्षक के रूप में नेपाली राष्ट्रीय ह्याण्डबल खिलाड़ी दिनेश श्रेष्ठ जिम्मेदार हैं।

इसी तरह यू-18 टीम में अनिश विक, अल्बिन गुरुङ, सुजल गुरुङ, दिव्य गुरुङ, सुबिन गुरुङ, सितल गुरुङ, निशान गुरुङ, अदिश फगामी, प्रज्वल पौडेल, संस्कार पुन, कुशल पुन, सुमित पुन, अनमोल श्रेष्ठ और सुशन थापा शामिल हैं। इस टीम का नेतृत्व प्रशिक्षक और नेपाली राष्ट्रीय टीम के कप्तान विशाल बस्नेत कर रहे हैं।

रवाना प्रस्थान से पहले प्रशिक्षक विशाल बस्नेत ने बताया कि दोनों टीमें पोखरा में करीब दो महीने लगातार और कड़ी तैयारी कर चुकी हैं और पदक जीतने के लक्ष्य के साथ प्रतियोगिता में उतर रही हैं। उन्होंने कहा, “खिलाड़ियों ने अथक मेहनत और अनुशासन के साथ तैयारी की है। हम पूर्ण विश्वास रखते हैं कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अपनी क्षमता प्रदर्शित कर नेपाल का गौरव बढ़ाएंगे। हमारा लक्ष्य शानदार प्रदर्शन के साथ पदक जीतना है।”

दक्षिण एशियाई देशों के बीच होने वाली इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में नेपाली टीमों से उम्मीद जताई जा रही है कि वे देश का नाम गौरवान्वित करेंगी। दोनों नेपाली टीमें असार 1 को स्वदेश लौटने का कार्यक्रम तय किया गया है।

गूगल नोटबुकएलएम में जेमिनी ३.५ का अपडेट, एआई अब इंटरनेट से दस्तावेज़ और चार्ट बना सकता है

गूगल ने अपने एआई शोध एवं नोट लेखन उपकरण ‘नोटबुकएलएम’ को नए अपडेट के साथ ‘जेमिनी ३.५’ संस्करण में उपलब्ध करा दिया है। इस नए संस्करण में उपयोगकर्ता बिना कोई फाइल अपलोड किए सीधे चैट के माध्यम से संवाद कर सकते हैं और विभिन्न प्रारूपों में कंटेंट डाउनलोड करने की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा फिलहाल ‘गूगल एआई अल्ट्रा’ और वर्कस्पेस बिजनेस ग्राहकों के लिए उपलब्ध है।

यह अपडेट गूगल की ‘एन्टिग्रेविटी’ तकनीक पर आधारित सॉफ़्टवेयर क्षमता को और अधिक मजबूत बनाता है। इससे उपयोगकर्ताओं को गहन और विस्तृत शोध करने में मदद मिलेगी तथा वे विभिन्न स्वरूपों में फाइलें तैयार कर पाएंगे। उपयोगकर्ता किसी नए प्रोजेक्ट से संबंधित जानकारी एप के साथ सीधे चैट में साझा कर सकते हैं, जो गूगल सर्च और शोध क्षमताओं का उपयोग करते हुए आवश्यक डेटा खोजने के लिए विभिन्न स्रोतों का सुझाव देगा।

यह नई सुविधा उपयोगकर्ताओं को विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध प्राथमिक स्रोतों की पहचान करने और संबंधित लेखकों की नई सामग्री को आसानी से खोजने में सहायक साबित होगी। पहले नोटबुकएलएम का उपयोग करते समय उपयोगकर्ताओं को दस्तावेज़ या स्रोत अपलोड करना पड़ता था, लेकिन अब वे विस्तृत निर्देशों के माध्यम से मनचाहे प्रारूप में आवश्यक सामग्री उत्पन्न कर सकेंगे।

नोटबुकएलएम अब विभिन्न प्रकार की फाइलों को एक्सपोर्ट करने की भी क्षमता प्रदान करता है। इनमें PNG, SVG, PDF, DOCX, Markdown, Text फाइलें के साथ-साथ CSV, JSON, माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल और पावरपॉइंट फाइलें भी शामिल हैं। गूगल के अनुसार ये सुविधाएं ‘गूगल एआई अल्ट्रा’ उपयोगकर्ता और एआई अल्ट्रा तथा एआई एक्सपैंडेड तक पहुँच रखने वाले वर्कस्पेस बिजनेस ग्राहकों के लिए उपलब्ध हैं। निकट भविष्य में इस सेवा को अन्य सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए भी क्रमबद्ध रूप से जारी करने की योजना है।

गृह तथा विज्ञान एवं प्रविधि मंत्री आज शपथ ग्रहण करेंगे

प्रधानमंत्री बालेन शाह की सिफारिश पर गृह मंत्री सुधन गुरुङ एवं विज्ञान मंत्री महावीर पुन आज शपथ ग्रहण करेंगे। शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, सभामुख, राष्ट्रिय सभा अध्यक्ष एवं अन्य मंत्रियों की उपस्थिति रहेगी। समारोह के दौरान शीतल निवास क्षेत्र में भारी वर्षा हो रही है।

२६ जेठ, काठमाडौं। राष्ट्रपति कार्यालय शीतल निवास में आज दो मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित है। प्रधानमंत्री बालेन शाह की सिफारिशानुसार, गृह मंत्रालय के लिए सुधन गुरुङ तथा विज्ञान, प्रविधि और नवप्रवर्तन मंत्री के रूप में प्रतिनिधि सभा सदस्य महावीर पुन शपथ लेंगे। समारोह के दौरान तेज वर्षा हो रही है। इस अवसर पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, सभामुख, राष्ट्रिय सभा अध्यक्ष, मंत्री तथा सांसद उपस्थित हैं।

ट्रम्प और नेतन्याहु के बीच तनाव और सैन्य टकराव का संकट

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की इच्छा के बावजूद, मध्यपूर्व में अमेरिका के लिए एक बड़े सैन्य संघर्ष में फंसने का खतरा बढ़ता जा रहा है। पिछले २४ घंटों में राष्ट्रपति ट्रम्प ने इज़राइल और ईरान को एक बड़े युद्ध से कुछ समय के लिए पीछे हटने पर सफल किया, लेकिन यह शांति कब तक बनी रहेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है। युद्ध शुरू होने के १०० दिन बीत जाने के बाद भी ट्रम्प कोई ठोस समझौता करने में असमर्थ रहे हैं। ऐसी स्थिति में ट्रम्प एक बड़ी द्विधा में हैं। एक तरफ उन्हें ईरानी मिसाइल हमलों का तत्काल जवाब न देने की आवश्यकता है, लेकिन उनके प्रमुख सहयोगी, इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहु के लिए यह संभव नहीं दिखता। दूसरी ओर, वे इस प्रतिक्रिया के चक्र से एक पूर्ण युद्ध के जन्म लेने की आशंका से चिंतित हैं।

‘एक्सिओस’ के साथ एक फोन इंटरव्यू में ट्रम्प ने नेतन्याहु को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वे फिर से ईरान के साथ युद्ध में शामिल होते हैं, तो इज़राइल को अकेले ही इस लड़ाई का सामना करना पड़ सकता है। यह तनाव रविवार सुबह उस समय शुरू हुआ जब इज़राइल ने बेरुत में हिज़बुल्लाह के सैन्य अड्डे पर हमला किया। इज़रायली सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड को इस बारे में पूर्व सूचना थी, लेकिन व्हाइट हाउस को जानकारी नहीं दी गई थी। कुछ दिन पहले ही ट्रम्प ने फोन करके इस योजना को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन इस हमले ने उन्हें बेहद असंतुष्ट कर दिया। इज़राइल के बेरुत पर हमले के बाद ईरान ने जवाब में मिसाइल हमला किया। इसके बाद व्हाइट हाउस ने गुप्त और तीव्र कूटनीतिक प्रयास शुरू किए।

रविवार शाम ट्रम्प ने नेतन्याहु को फोन कर कहा कि वे और जवाबी कार्रवाई न करें। उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों में ईरान के साथ समझौता संभव है और सैन्य टकराव आवश्यक नहीं होगा, अन्यथा वे स्वयं ईरान पर आक्रमण की अगुवाई करेंगे। कुछ दिन पहले ट्रम्प ने नेतन्याहु को ‘पागल’ कहा था, लेकिन अधिकारियों के अनुसार यह वार्ता अपेक्षाकृत शांत और सभ्य रही। हालांकि नेतन्याहु ने कहा कि जवाबी कदम न लेने से इजरायल और अमेरिका की बातचीत को नुकसान होगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के खिलाफ कड़ा कदम न उठाने पर ईरान और मजबूत होगा और अमेरिका तथा इज़राइल को डर पैदा होगा।

ओमान के तट के पास अमेरिकी कार्रवाई में टैंकर से 24 भारतीय नाविकों का बचाव

ओमान के समीप समुद्र में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई के दौरान एक टैंकर में आग लगने पर चालक दल के 24 सदस्य बचा लिए गए हैं। भारतीय अधिकारियों ने बताया कि बचाए गए सभी भारतीय नागरिक हैं। यह घटना सोमवार की है। चालक दल ने टैंकर में आग फैलने और पानी में डूबने की आशंका जताते हुए बचाव का अनुरोध करते हुए संदेश भेजा था। उक्त टैंकर में कोई माल नहीं था।

यह खाड़ी क्षेत्र के समुद्र में व्यापारिक जहाजों के लिए ताजा खतरा है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल के युद्ध की शुरुआत के बाद खाड़ी के समुद्री मार्गों में जोखिम बढ़ गया है। ओमान की खाड़ी और हॉरमुज की संधि जलमार्ग अवरुद्ध होने के कारण सैन्य गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। भारत के बंदरगाह तथा जलमार्ग मंत्रालय के अधिकारी ओपेशकुमार शर्मा के अनुसार, एमटी मावेरिक्स नामक टैंकर में सोमवार स्थानीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे आग लगी थी। बचाए गए सभी भारतीय सुरक्षित हैं और उनकी सुरक्षा के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

भारतीय मीडिया के अनुसार, उक्त टैंकर के सभी चालक दल को ओमान के हेलीकॉप्टर द्वारा बचाकर मसिराह द्वीप ले जाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि मावेरिक्स पर पहले प्रतिबंध लगाया गया था क्योंकि यह ईरान से संबंधित था, जो रोयटर्स द्वारा प्रकाशित खबर में बताया गया। भारतीय व्यावसायिक नाविक संघ – ऑल इंडिया सीफरर्स यूनियन के अनुसार, आग लगने के बाद बचाव के लिए संदेश प्राप्त हुआ और तत्पश्चात बचाव कार्य के दौरान उनका संपर्क बना रहा।

अमेरिकी सेन्ट्रल कमांड ने 8 जून को एक विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैनिकों ने “एक माल रहित तेल टैंकर को निष्क्रिय किया है”। इस जहाज ने ईरान के एक बंदरगाह पर जाने का प्रयास किया था और ईरान के खिलाफ चल रही नाकाबंदी का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की गयी। “जब चालक दल ने अमेरिकी सेना के निर्देश का पालन नहीं किया, तो यूएसएस अब्राहम लिंकन (CVN 72) से उड़ान भरने वाले एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान ने जहाज के इंजीनियरिंग और स्टीयरिंग कक्ष को निशाना बनाकर मिसाइल हमले किए,” विज्ञप्ति में कहा गया।

फिफा विश्वकप २०२६ में ‘धनाढ्य वर्ग का प्रभाव’

विश्वकप २०२६ ने आधुनिक खेल को अब केवल आम जनता के मनोरंजन के साधन के रूप में ही नहीं, बल्कि अभिजात वर्ग की मानसिक शांति खरीदने वाले महंगे बाज़ार के रूप में भी पेश किया है। फिफा विश्वकप २०२६ के टिकट, होटल और परिवहन की कीमतें इतिहास में अपनी उच्चतम स्तर पर पहुँच गई हैं। मैचों की संख्या बढ़ने और अमेरिकी उपभोक्ताओं की अधिक खरीद क्षमता के कारण विश्वकप के बाज़ार मूल्य में अत्यधिक वृद्धि हुई है। अत्यधिक महंगाई ने अभिजात वर्ग की उपस्थिति बढ़ा दी है, जबकि श्रमजीवी वर्ग के वास्तविक खेल प्रेमियों को स्टेडियम के बाहर धकेले जाने की चिंता बढ़ गई है। २६ जेठ, काठमाडौँ।

फिफा विश्वकप २०२६ की पूर्व संध्या पर टिकट, होटल और यातायात की कीमतें इतिहास में सबसे ऊँचे स्तर पर पहुंच गई हैं। पारंपरिक बाजार अर्थशास्त्र इसे ४८ टीमों की नई संरचना और मैचों की संख्या बढ़ने से जोड़ता है, लेकिन इसका असली कारण उपभोक्ता मनोविज्ञान और अमेरिकी समाज की उच्च खरीद शक्ति के बीच अंतर्संबंध में छिपा है। स्पोर्ट्स मैनेजमेंट की दृष्टि से १०४ मैच आयोजित करना मांग और आपूर्ति में असंतुलन लाता है, यह निश्चित है। फिर भी, इस महंगाई का मुख्य कारण मानवीय मनोविज्ञान है—विशेषकर तनावमुक्ति और मानसिक ताजगी पाने की तीव्र इच्छा।

व्यावसायिक व्यस्तताओं से दूर मानसिक शांति की तलाश करने वाली मानवीय कमजोरी को बाज़ार ने पूंजीकृत कर लिया है। यहां अमेरिका की वित्तीय वास्तविकता दिखती है, जहां उच्च आर्थिक स्थिति वाले वर्ग की भारी उपस्थिति है। हाल ही में टेलर स्विफ्ट के ‘एरेना टूर’ के टिकटों पर मची भगदड़ या ‘सुपर बाउल’ के बढ़े हुए दामों को देखें, तो वह प्रवृत्ति यहां भी दोहराई गई है। आज के स्टेडियम केवल खेल देखने का स्थल नहीं, बल्कि संपन्न लोगों का सामाजिक दर्जा और ‘क्लास’ दिखाने का बड़ा मंच बन चुके हैं। ये अभिजात दर्शक खेल के प्रति वास्तविक प्रेम या जुनून के लिए वहां नहीं जाते; बल्कि वे क्षणिक डोपामिन की खुशी पाने और अपनी विलासी जीवनशैली को इंस्टाग्राम पर “पिक्चर परफेक्ट” फोटो के जरिए प्रदर्शित करने के लिए आते हैं।

यह आधुनिक अभिजात वर्ग का कभी न खत्म होने वाला सुखवादी चक्र है, जहां रोज़मर्रा की नीरसता दूर करने के लिए बड़े-बड़े खेलों को सामाजिक मीडिया की ट्रॉफी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इस धनी वर्ग के लिए विश्वकप केवल फुटबॉल प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि जीवन का विशेष उत्सव और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदर्शित करने का माध्यम बन गया है। मनोरंजन और आत्मसंतुष्टि के लिए इस स्तर की खर्च करने वाली उनकी मानसिकता ने बाजार में तीव्र प्रतिस्पर्धा पैदा कर दी है। परिणामस्वरूप, डॉलर की वर्षा ने फुटबॉल की वास्तविक भावना, यानी आम जनता के जुनून को दबा दिया है। इस महंगाई ने श्रमजीवी वर्ग को न केवल स्टेडियम के बाहर धकेल दिया है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सच्ची खेल-प्रेम की भावना को भी अंदर से विलीन कर रही है। असली फैन कल्चर अब इंटरनेट के ‘डिजिटल फैन बेस’ को पसंद करने वाले नकली, कॉर्पोरेट फैशन द्वारा ग्रहण किया जा रहा है। जब बाज़ार पूंजी और आम समर्थकों के भावनाओं में संघर्ष होता है, तब कॉर्पोरेट विलासिता विजयी होती है।

फीफा विश्व कप 2026 में ‘धनी वर्ग का प्रभाव’

विश्व कप 2026 ने आधुनिक खेल को केवल आम जनता का मनोरंजन ही नहीं, बल्कि उच्च वर्ग की मानसिक ताजगी खरीदने वाला एक महंगा बाजार बनता हुआ दिखाया है।

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के बाद तैयार।

  • फीफा विश्व कप 2026 के टिकट, होटल और यातायात की कीमतें इतिहास में सबसे ऊँची हो गई हैं।
  • खेलों की संख्या में वृद्धि और अमेरिकी उपभोक्ताओं की अधिक क्रय शक्ति के कारण विश्व कप का बाजार मूल्य अत्यधिक बढ़ा है।
  • महंगाई बढ़ने से उच्च वर्ग की उपस्थिति तो बढ़ी है, लेकिन मजदूर और सच्चे खेल प्रेमी स्टेडियम से बाहर होते जा रहे हैं, जिससे चिंता बढ़ रही है।

26 मई, काठमांडू। फीफा विश्व कप 2026 के पहले ही टिकट, होटल और यात्रा की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी हैं।

परंपरागत आर्थिक सिद्धांत इन बढ़ती कीमतों को 48 टीमों की नई संरचना और अधिक मैचों से जोडता है, लेकिन सच्चाई उपभोक्ता मनोविज्ञान और अमेरिकी समाज की उच्च क्रयशक्ति के बीच अन्तर्सम्बंध में निहित है।

खेल प्रबंधन की दृष्टि से 104 मैचों के आयोजन से मांग और आपूर्ति में असंतुलन होना निश्चित है, परंतु इस वृद्धि की मुख्य वजह मानव मनोविज्ञान है—विशेषकर तनाव मुक्त होने और मानसिक ताजगी प्राप्त करने की तीव्र इच्छा।

व्यावसायिक व्यस्तताओं से दूर रहकर मानसिक ताजगी पाने की मानव कमजोरी को बाजार ने पूंजी बनाकर व्यापारिक रूप दे दिया है। यहाँ अमेरिका की आर्थिक वास्तविकता दिखती है, जहां उच्च आय वाले वर्ग की बड़ी उपस्थिति होती है।

हाल ही में टेलर स्विफ्ट के ‘एरेनाज टूर’ टिकटों की होड़ और ‘सुपर बाउल’ में बढ़े हुए दामों की बात करें, तो यह प्रवृत्ति यहां भी नजर आती है। आज का स्टेडियम केवल खेल देखने की जगह नहीं रह गया है, बल्कि अमीरों की सामाजिक प्रतिष्ठा और ‘क्लास’ दिखाने का मंच बन चुका है।

ये उच्च वर्ग के दर्शक खेल के प्रति सच्चे प्रेम या जुनून के कारण नहीं आते; वे तो पल के डोपामाइन उत्सर्जन और अपनी भव्य जीवनशैली की ‘पिक्चर पर्फेक्ट’ तस्वीर के लिए इंस्टाग्राम पर आते हैं।

यह आधुनिक उच्च वर्ग एक कभी समाप्त न होने वाला सुखवादी चक्र है, जहां रोजमर्रा की नीरसता को दूर करने के लिए बड़े खेलों को सोशल मीडिया की ट्रॉफी की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

इस धनी वर्ग के लिए विश्व कप केवल फुटबॉल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि जीवन भर का एक अनोखा उत्सव और सामाजिक सम्मान दिखाने का साधन बन गया है। मनोरंजन और आत्मसंतुष्टि के लिए जो खर्च वे करते हैं, उसकी मानसिकता ने बाजार में तीव्र प्रतिस्पर्धा पैदा कर दी है।

इसका परिणाम यह है कि इस महंगाई ने फुटबॉल की वास्तविक भावना, अर्थात् आम लोगों के जुनून को हाशिए पर डाल दिया है। यह उच्च कीमतें मजदूर वर्ग को स्टेडियम से बाहर धकेलती ही नहीं, बल्कि दशकों से चले आ रहे सच्चे खेल प्रेम को भीतर ही भीतर खत्म कर रही हैं।

सच्चे फैन कल्चर की जगह अब इंटरनेट पर ‘डिजिटल फैन बेस’ को पसंद करने वाला कृत्रिम, कॉर्पोरेट फैशन ले रहा है। जब बाजार पूंजी और असली प्रशंसकों की भावनाएं टकराती हैं, तो कॉर्पोरेट विलासिता जीतती है।

विश्व कप 2026 ने आधुनिक खेल अब केवल सर्वसाधारण मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि उच्च वर्ग की मानसिक ताजगी खरीदने वाला एक महंगा बाजार बन गया है, यह सच्चाई उजागर की है।

रुद्रशक्ति ट्राभल्स ने वासरूम सहित अत्याधुनिक बस सेवा शुरू की

रुद्रशक्ति ट्राभल्स ने पूर्वी नेपाल में पहली बार शौचालय सुविधा सहित अत्याधुनिक बस सेवा का शुभारंभ किया है। कंपनी ने काठमांडू–विराटनगर और काठमांडू–काकड़भिट्टा मार्गों पर दैनिक दोतरफा बस सेवा संचालित करने की घोषणा की है। इन बसों में नि:शुल्क वाईफाई, वासरूम, एयर कंडीशनिंग, मोबाइल चार्जिंग और सोफा सीट जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। २७ जेठ, काठमांडू।

लंबी दूरी के यात्रियों को ध्यान में रखते हुए रुद्रशक्ति ट्राभल्स ने पूर्वी क्षेत्र में पहली बार वासरूम सुविधा सहित अत्याधुनिक बस सेवा शुरू की है। कंपनी ने काठमांडू–विराटनगर–काठमांडू तथा काठमांडू–काकड़भिट्टा–काठमांडू मार्गों पर रोजाना दोतरफा बस सेवा देने की योजना बनाई है। यात्रियों की सुविधा और आराम को प्राथमिकता देते हुए इस बस में शौचालय की व्यवस्था की गई है। विशेष रूप से महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, विकलांगजन एवं लंबी दूरी के यात्री इस सेवा का लाभ उठाएंगे, ऐसा कंपनी का विश्वास है।

बस में यात्रियों का स्वागत रसुवा पानी और वेलकम स्नैक्स से किया जाएगा। इसके साथ ही नि:शुल्क वाईफाई, एयर कंडीशनिंग, मोबाइल चार्जिंग की सुविधा, दो-दो सोफा सीट और कंबल की व्यवस्था भी की गई है। रुद्रशक्ति ट्राभल्स के काठमांडू प्रबंधक उमेशराज भण्डारी ने बताया कि यात्रियों को सुरक्षित, सुलभ और सुविधाजनक यात्रा अनुभव प्रदान करना कंपनी का मुख्य उद्देश्य है। कंपनी के दूसरे प्रबंधक श्याम थापा ने बताया कि आधुनिक सुविधाओं और गुणवत्ता युक्त सेवा के माध्यम से यात्रियों का विश्वास जीतकर सेवा का विस्तार किया जा रहा है।

रुद्रशक्ति ट्राभल्स ने यात्रियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नेपाली परिवहन क्षेत्र में नई पहल शुरू की है। वासरूम सहित बस सेवा विशेष रूप से लंबी दूरी के यात्रियों को और अधिक सहज और आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करने की उम्मीद है। बस टिकट जोरपाटी, गौशाला, कोटेश्वर, कलंकी सहित रुद्रशक्ति यातायात प्रा. लि. के आधिकारिक टिकट काउंटरों से बुक की जा सकती है, कंपनी ने जानकारी दी है।