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लेखक: space4knews

वास्तविक सुकुमवासीको यसरी हुनेछ व्यवस्थापन – Online Khabar

सुकुमवासी समुदाय के समुचित प्रबंधन के लिए सरकार की योजना प्रगति पर

समाचार सारांश सरकार ने काठमांडू उपत्यका की नदियों के किनारे बसने वाले सुकुमवासी लोगों को प्रमाणित कर व्यवस्थित रूप से प्रबंधन करने की योजना आगे बढ़ाई है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने प्रमाणित सुकुमवासियों को शीघ्र ही ज़मीन वितरण प्रक्रिया में आगे बढ़ाने की जानकारी दी है। भूमि समस्या समाधान आयोग ने प्रमाणित सुकुमवासियों को चार आना से साढ़े ६ कठ्ठा तक जमीन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। ११ वैशाख, काठमांडू। सरकार ने काठमांडू उपत्यका के भीतर नदी के किनारे रहने वाले सुकुमवासियों को संगठित ढंग से प्रबंधित करने की योजना शुरू कर दी है। सरकार ने विस्तृत योजना तैयार की है जिसमें ‘प्रमाणीकरण कैंप की स्थापना, फोटो के साथ परिचय पत्र वितरण तथा प्रमाणीकरण ना होने वाले व्यक्तियों को क्रमशः उन स्थानों से हटाने’ का उल्लेख है।

प्रमाणित सुकुमवासियों के लिए क्या प्रावधान होंगे? प्रधानमंत्री बालेन्द्र (बालेन) शाह ने सामाजिक मीडिया फेसबुक पर कहा, ‘देशभर के वास्तविक सुकुमवासियों को यथाशीघ्र प्रक्रिया पूरी कर ज़मीन वितरण किया जाएगा।’ भूमि संबंधित कानून भूमिहीन दलित और भूमिहीन सुकुमवासियों को एक बार ज़मीन उपलब्ध कराने तथा अव्यवस्थित बसे लोगों को व्यवस्थित करने का प्रावधान करता है। इस उद्देश्य के लिए सरकार ने भूमि समस्या समाधान आयोग गठित किया है। नेपाल राज्य में जिनके नाम या परिवार के नाम पर ज़मीन नहीं है एवं जिनका अपनी या परिवार की आय से ज़मीन खरीदना संभव नहीं, उन्हें कानून ‘भूमिहीन सुकुमवासी’ मानता है।

इसी तरह, राष्ट्रीय दलित आयोग सूचीबद्ध जातियों के भूमिहीन सुकुमवासियों को ‘भूमिहीन दलित’ के रूप में वर्गीकृत करता है। सरकारी, ऐलानी या सार्वजनिक वन क्षेत्र होते हुए भी कम से कम १८ वर्षों से घर-बसाये व्यक्ति और परिवार के सदस्यों को ‘अव्यवस्थित बासिन्दा’ कहा जाता है। प्रमाणित सुकुमवासियों को ज़मीन वितरण की प्रक्रिया भूमि समस्या समाधान आयोग के माध्यम से होगी, ऐसा काठमांडू महानगरपालिका के प्रवक्ता नविन मानन्धर ने बताया। उन्होंने कहा, ‘वास्तविक सुकुमवासियों के साथ अन्याय न हो, इसलिए कानून अनुसार ज़मीन वितरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।’

सरकार ने स्थानीय तहों के सहयोग से तथ्यांक संग्रह, प्रविष्टि, जांच और प्रमाणीकरण की व्यवस्था की है। प्रमाणीकरण के आधार पर नक्शा तैयार करने का कार्य भी शुरू होगा। नक्शा बनने के बाद उसका परीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जांच, सूचना प्रकाशन, दस्तुर, स्थानीय तह की सिफारिश, विवरण सार्वजनिक एवं हकदावी प्रक्रियाएं पूर्ण होने पर भूमि समस्या समाधान आयोग जिला स्तर पर निर्णय कर आयोग के केंद्र को भेजेगा। भूमिहीन दलित, भूमिहीन सुकुमवासी एवं अव्यवस्थित बासिंदों को ज़मीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया २०८१ की कार्यविधि अनुसार जिला समिति प्रमाणित ज़मीनधारक प्रमाणपत्र आयोग को सभी विवरण के साथ लिखित रूप में सूचित करेगी, उसके बाद संबंधित ज़मीनधारक को ज़मीन उपलब्ध कराई जाएगी।

सुनिश्चित प्रमाणित सुकुमवासियों को शहर में चार आना और आवास तथा खेती के लिए साढ़े छह कठ्ठा तक ज़मीन देने का प्रावधान भूमि समस्या समाधान आयोग के अध्यक्ष हरिप्रसाद रिजाल ने बताया। अव्यवस्थित बासिंदों के प्रबंधन में आर्थिक स्थिति, आवासीय परिस्थिति, ज़मीन की प्रकृति, क्षेत्रफल, मूल्यांकन, अधिकार अवधि के आधार पर वर्गीकरण कर दस्तुर लेकर ज़मीन के स्वामित्व का हस्तांतरण किया जा सकता है, ऐसा अधिनियम में उल्लेख है। ज़मीन स्वामित्व हस्तांतरण में दस्तुर चुकाने को तैयार होने पर भी २९ रोपनी और १५ धुर से अधिक ज़मीन हस्तांतरण नहीं होगी, आयोग अध्यक्ष रिजाल ने बताया। संभवतः बसे उन्हीं स्थानों पर प्रबंधन किया जाएगा, लेकिन यदि नदी किनारे, वन क्षेत्र, प्राकृतिक जोखिम वाले स्थलों या धनिपुर्जा किसी और के नाम निजी या सार्वजनिक ज़मीन पर बसे लोगों को वहीं ज़मीन नहीं दी जाएगी। ऐसे लोगों के लिए भूमिहीन दलित और भूमिहीन सुकुमवासियों को उपलब्ध कराई जाने वाली ज़मीन स्थानीय, प्रदेश एवं संघीय सरकार संयुक्त रूप से प्रबंधित करेंगे। संबंधित स्थानीय तह से न मिलने पर संबंधित प्रदेश के भीतर ज़मीन उपलब्ध कराने का प्रावधान भी है। मिली ज़मीन को कम से कम १० वर्षों तक बेचने पर रोक रहेगी।

आगामी १० वर्षों में २४,५00 मेगावाट विद्युत उत्पादन की रणनीति जारी

ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय ने आगामी १० वर्षों के भीतर २४,५०० मेगावाट विद्युत उत्पादन करने वाली ‘विद्युत् खपत वृद्धि तथा ऊर्जा निर्यात रणनीति २०८३’ जारी की है। इस रणनीति में सभी घरों को विद्युतीकरण करने के साथ-साथ प्रसारण एवं वितरण प्रणाली में सुधार करते हुए विद्युत निर्यात को बढ़ावा देने की दीर्घकालिक योजना भी शामिल की गई है। सरकार सार्वजनिक परिवहन में विद्युत् वाहन को प्राथमिकता देने, एलपी गैस के उपयोग को कम करने तथा कोयला और पेट्रोलियम आधारित बॉयलरों को विद्युत प्रणाली से बदलने का लक्ष्य रखती है।

११ वैशाख, काठमांडू। ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय ने ‘विद्युत् खपत वृद्धि तथा ऊर्जा निर्यात रणनीति २०८३’ जारी की है। यह रणनीति ऊर्जा क्षेत्र को आर्थिक रूपांतरण के प्रमुख आधार के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। मंत्रालय के सह-सचिव संदीप कुमार देव के संयोजन में गठित समिति ने यह रणनीति बनाई, जिसे ऊर्जा मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ द्वारा अनुमोदित कर सार्वजनिक किया गया।

रणनीति विद्युत की आंतरिक खपत को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने पर जोर देती है एवं बचत हुई विद्युत का निर्यात बढ़ाने के लिए व्यापक दीर्घकालिक मार्गदर्शन प्रदान करती है। शतप्रतिशत घरों का विद्युतीकरण सुनिश्चित करने एवं प्रसारण एवं वितरण प्रणाली में व्यापक सुधार लाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इस योजना के अनुसार आगामी १० वर्षों में २४,५०० मेगावाट विद्युत उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार ने विद्युत घरेलू उपकरणों के उपयोग को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए मिटर और ट्रांसफार्मर क्षमताओं में सुधार किया है, साथ ही एलपी गैस के उपयोग को क्रमशः कम करने की नीति अपनाई है। वर्तमान में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत लगभग ४५० किलोवाट-घंटा है, जिसे अगले १० वर्षों में १,५०० किलोवाट-घंटा तक पहुंचाने का लक्ष्य है, जो इस रणनीति में वर्णित है।

आगामी सप्ताह से वर्षा शुरू होगी, उससे पहले गर्मी की लहर जारी रहेगी

११ वैशाख, काठमाडौं। अब की तेजी से बढ़ी गर्मी से राहत मिलने में अभी कुछ दिन और लगेंगे। जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार आगामी सप्ताह से ही वर्षा की गतिविधि शुरू होगी। उससे पहले तेज गर्म हवा की लहर सक्रिय रहेगी, इसलिए विभाग के मौसम विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी को ध्यान में रखते हुए आज शाम एक विशेष बुलेटिन जारी किया है। पिछले कुछ दिनों से मधेश सहित बागमती, गण्डकी, लुम्बिनी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम प्रदेशों के तराई व उपत्यका क्षेत्रों में तापमान उच्च स्तर पर बना हुआ है। लुम्बिनी और सुदूरपश्चिम प्रदेश के तराई क्षेत्रों में हिट वेव की स्थिति देखी गई है।

विभाग ने आगामी तीन दिनों तक लुम्बिनी और सुदूरपश्चिम प्रदेश के अधिकांश तराई क्षेत्रों में अधिकतम तापमान ४० डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर पहुंचने की चेतावनी दी है। मध्यम स्तर की गर्मी की लहर का खतरा जारी है, इसलिए आम जनता को आवश्यक सतर्कता बरतने की अपील की जा रही है। बुलेटिन के अनुसार कञ्चनपुर, कैलाली, डोटी, बर्दिया, बाँके और सुर्खेत जिलों को ‘सतर्क रहना जरूरी’ श्रेणी में रखा गया है। इसी प्रकार डडेलधुरा, अछाम, दैलेख, सल्यान, रोल्पा, प्युठान, दंग, कपिलवस्तु, रुपन्देही, अर्घाखाँची, पाल्पा और परासी जिलों को भी सतर्क रहने वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है।

विभाग ने बताया है कि अत्यधिक गर्मी स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकती है, इसलिए दोपहर के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पीएं, हल्के कपड़े पहनें और संवेदनशील समूहों जैसे बाल-बच्चे, वृद्ध और बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखें। हालांकि, अगले सप्ताह की शुरुआत से मधेश, बागमती और गण्डकी प्रदेशों के तराई के कुछ इलाकों में वर्षा की गतिविधि शुरू होने से तापमान में थोड़ी कमी आएगी और ठंडक महसूस होगी। विभाग की मौसम विशेषज्ञ बिनु महर्जन ने कहा, “आगामी सप्ताह मध्यम वर्षा होने की संभावना है, जिससे गर्मी में कुछ कमी आएगी।”

कोहली र पडिक्कलको शानदार ब्याटिङमा बेंगलुरुको जित

कोहली और पडिक्कल के शानदार प्रदर्शन से बेंगलुरु ने हासिल की जीत

रोयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने आईपीएल 2026 में गुजरात टाइटन्स को 5 विकेट से हराया है। विराट कोहली ने 81 रन और देवदत्त पडिक्कल ने 55 रन बनाकर आरसीबी की जीत में अहम भूमिका निभाई। इस जीत के साथ आरसीबी ने 7 मैचों में 10 अंक लेकर दूसरे स्थान पर कब्जा किया है, जबकि गुजरात सातवें स्थान पर है।

11 वैशाख, काठमाडौं। विराट कोहली और देवदत्त पडिक्कल की शानदार बल्लेबाजी के दम पर रोयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) ने आईपीएल 2026 में अपनी पांचवीं जीत हासिल की। शुक्रवार रात घरेलू मैदान चिन्नास्वामी स्टेडियम में आयोजित मैच में आरसीबी ने गुजरात टाइटन्स को 5 विकेट से पराजित किया। गुजरात द्वारा दिए गए 206 रन के लक्ष्य को बेंगलुरु ने 7 गेंदें बाकी रहते हुए 5 विकेट खोकर पूरा किया।

कोहली ने 44 गेंदों में 8 चौके और 4 छक्कों की मदद से 81 रन बनाए और आउट हुए। पडिक्कल ने 27 गेंदों में 2 चौके और 6 छक्कों की मदद से 55 रन बनाए और आउट हुए। ओपनर ज्याकब बेथेल 14 रन बनाकर आउट हुए, तब आरसीबी का स्कोर 24-1 था। कोहली और पडिक्कल ने दूसरे विकेट के लिए 117 रन जोड़कर टीम की पारी को मजबूती दी। हालांकि, 141-1 की स्थिति से आरसीबी 173-5 तक पहुंचा, लेकिन क्रुनाल पांड्या ने नाबाद 23 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई।

पहले टॉस हारकर बल्लेबाजी करने उतरी गुजरात ने साइ सुदर्शन के शतक की मदद से 20 ओवर में 3 विकेट खोकर 205 रन बनाए। सुदर्शन ने 58 गेंदों में 11 चौके और 5 छक्के लगाकर 100 रन बनाए। कप्तान शुभमन गिल ने 32 रन और जस बटलर ने 25 रन जोड़े। आरसीबी की ओर से भुवनेश्वर कुमार, जोश हेजलवुड और सुयश शर्मा ने एक-एक विकेट लिया।

नेपाल में होंडा का अत्याधुनिक ‘थ्री एस शोरूम’ उद्घाटन

होंडा नेपाल ने काठमाडौं के त्रिपुरेश्वर में अपना पहला अत्याधुनिक थ्री एस शोरूम शुरू किया है। स्याकार ट्रेडिंग के सर्विस जनरल मैनेजर सीताराम न्यौपाने ने बताया कि यहाँ ग्राहकों को बिक्री, सेवा और स्पेयर पार्ट्स एक ही स्थान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। शोरूम में दैनिक 150 मोटरसाइकिल की सेवा देने की क्षमता है और ग्राहकों को पारदर्शी सेवा प्रदान करने का इंतजाम किया गया है। 11 वैशाख, काठमाडौं।

नेपाल के लिए होंडा के आधिकारिक वितरक स्याकार ट्रेडिंग ने शुक्रवार से त्रिपुरेश्वर में नया थ्री एस (सेल्स, सर्विस, स्पेयर पार्ट्स) शोरूम शुरू किया है। ग्राहक को एक ही छत के नीचे बिक्री, सेवा और जेनुइन स्पेयर पार्ट्स की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नया शोरूम स्थापित किया गया है, ऐसा स्याकार ट्रेडिंग के सर्विस जनरल मैनेजर सीताराम न्यौपाने ने जानकारी दी।

“होंडा केवल बिक्री पर ध्यान नहीं देता, बल्कि बिक्री के बाद की सेवा को प्राथमिकता देता है, और अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा कैसे दी जाए, इस दिशा में वर्तमान में विश्व स्तर पर होंडा ने एक नया अवधारणा विकसित की है,” उन्होंने कहा। शोरूम की मुख्य विशेषता यह है कि यहाँ आने वाले ग्राहक को सर्विस सेंटर साफ-सुथरा, पारदर्शी और आसानी से दिखने वाला होना चाहिए तथा सेवा तेज़ होनी चाहिए, इस विचारधारा के साथ यह पहल की गई है, उन्होंने बताया।

नए शोरूम के उद्घाटन में होंडा मोटर कंपनी के उपाध्यक्ष एवं एशिया और ओशिनिया क्षेत्रीय इकाई प्रमुख एवं एसोसिएटेड रिजन ऑपरेशन्स प्रमुख तोसियो कुवाहारा, होंडा मोटरसाइकिल बिजनेस यूनिट के सेल्स डिविजन के विभागीय प्रबंधक योशिकी कामिओ और मोटरसाइकिल बिजनेस यूनिट के सेल्स डिविजन प्रतिनिधि PIC कोजिरो कामिया नेपाल उपस्थित थे। उन्होंने संयुक्त रूप से शोरूम का उद्घाटन किया।

एनआरएन नागरिकता: सदैव अपूर्ण प्रतिबद्धता

नेपाल में गैर आवासीय नेपाली नागरिकता से संबंधित नीति अस्पष्ट है और इसके कार्यान्वयन में देरी हो रही है। सरकार को ‘एकपटकको नेपाली, सधैंको नेपाली’ की अवधारणा को कानूनी रूप से स्पष्ट करना जरूरी है। गैर आवासीय नेपाली (एनआरएन) निवेश और कौशल के माध्यम से नेपाल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कुछ दशकों पहले विदेशी भूमि का सपना मात्र था, आज नेपाल विश्व के उन किसी भी कोने में ऐसा स्थान नहीं जहाँ नेपाली मौजूद न हों। अध्ययन, अनुसंधान, रोजगार, उद्योग और यात्रा के दौरान नेपाली विश्व भर में फैले हुए हैं। यह प्रवृत्ति लगातार जारी है। विभिन्न देशों में रहने वाले नेपाली अपनी पहल से एकीकृत होकर अर्जित कौशल, तकनीक और पूंजी मातृभूमि नेपाल में निवेश के लिए तत्पर हैं। यही वजह है कि विश्वभर फैले गैर आवासीय नेपाली नेपाल के आर्थिक, सामाजिक और बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में स्थापित हुए हैं।

नेपाल सरकार ने गैर आवासीय नेपाली नागरिकता संबंधी कुछ सकारात्मक पहलें की हैं, लेकिन अभी भी स्पष्टता और दृढ़ता की कमी दिखती है। नेपाल का संविधान २०७२ ने गैर आवासीय नेपाली नागरिकता की व्यवस्था की है और इसने एनआरएन समुदाय के साथ राज्य के औपचारिक संबंधों को पुनः परिभाषित करने का प्रयास किया है। इसके बाद नागरिकता अधिनियम और नियमावली के माध्यम से कार्यान्वयन प्रयास हुए, फिर भी प्रक्रिया जटिल और अस्पष्ट बनी हुई है। इस समय देश में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी की सरकार है, जिसके वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह प्रधानमंत्री हैं। फागुन २१ के मतदान से पहले इस पार्टी ने ‘एकपटकको नेपाली, सधैंको नेपाली’ का संकल्प लेकर चुनावी प्रचार-प्रसार किया था।

‘एकपटकको नेपाली, सधैंको नेपाली’ की नीति ने विश्वभर के नेपालीों के मातृभूमि के प्रति लगाव को पुनर्जीवित किया है और नई आशा जगा दी है। यह नीति एनआरएन समुदाय में गहरी उम्मीद और उत्साह का कारण है। लेकिन व्यवहार में इस नारे की प्रभावशीलता पर कई लोगों के मन में संशय है। पूर्व की सरकारों से बार-बार मिली आश्वासन और उनकी प्रभावहीनता ने निराशा को बढ़ावा दिया है। इसलिए ‘एकपटकको नेपाली, सधैंको नेपाली’ के नारे को स्पष्ट और ठोस नीतियों में रूपांतरित करने का काम सरकार अब तक सफल नहीं कर सकी है।

सरकार ने एनआरएन नागरिकता से जुड़े विषयों में कुछ सकारात्मक कदम उठाए हैं, लेकिन अपेक्षित स्पष्टता और दृढ़ता का अभाव है। इस कारण यह नारा व्यवहारिक रूप नहीं ले पा रहा है और गैर आवासीय नेपाली अभी भी स्पष्ट अधिकार और सुविधाओं से वंचित हैं। गैर आवासीय नेपाली नेपाल में निवेश के भरोसेमंद स्रोत हैं और उनकी भावनात्मक जुड़ाव से दीर्घकालिक तथा विश्वसनीय निवेश की उम्मीद की जाती है।

सरकार को एनआरएन नीति में केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ठोस कार्यान्वयन पर ध्यान देना आवश्यक है। विशेष रूप से ‘एकपटकको नेपाली, सधैंको नेपाली’ अवधारणा को कानूनी रूप से स्पष्ट करना, नागरिकता प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना, निवेशोन्मुख वातावरण सृजित करना और एक-द्वार प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर देना चाहिए। गैर आवासीय नेपाली नेपाल के लिए केवल रेमिटेंस भेजने वाले समूह नहीं, बल्कि विकास के सच्चे साथी हैं।

लेखक: लोकप्रसाद दाहाल (दाहाल गैर आवासीय नेपाली संघ (एनआरएनए) के उपाध्यक्ष हैं)।

लिग टु को दुई महत्वपूर्ण सिरिज खेल्दै नेपाल, घरेलु मैदानमा नतिजा ल्याउने चुनौती

नेपाल घरेलू मैदान पर लिग टू की दो महत्वपूर्ण श्रृंखलाएं खेलेगा, श्रेष्ठ परिणाम दिखाने की चुनौती

नेपाल ने ICC क्रिकेट विश्वकप लिग टू के पिछले चरण में 11 में से 11 मैच जीतकर ODI मान्यता बरकरार रखी थी। वैशाख 12 से 22 तक टीयू मैदान में आयोजित होने वाली लिग टू श्रृंखला में नेपाल, UAE और ओमान दो-दो मैच खेलेंगे। नेपाल ने 20 मैचों में 5 जीत और 12 अंकों के साथ सातवें स्थान पर रहते हुए आगामी घरेलू मैचों में प्रदर्शन सुधारने का लक्ष्य रखा है।

ICC क्रिकेट विश्वकप लिग टू के पिछले चरण में नेपाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 12 में से 11 मैच जीते और एकदिवसीय विश्वकप के अंतिम चयन में स्थान सुरक्षित किया साथ ही एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय (ODI) मान्यता भी निरंतर बनाए रखी। नेपाल ने अंतिम तीन श्रृंखलाओं में से दो अपनी सरजमीं पर खेली थीं और उन दोनों श्रृंखलाओं के सभी 8 मैच जीते थे। नए कोच मोन्टी देसाई के आगमन और युवा कप्तान रोहित पौडेल के नेतृत्व में नेपाली टीम ने बेहतरीन संयोजन पेश किया।

वर्तमान में नेपाल फिर से लिग टू में पहले जैसी स्थिति में नहीं है, बल्कि और भी कठिन परिस्थिति में पहुंचा है। लेकिन नेपाली क्रिकेट में इस बीच कई बदलाव आए हैं। नेपाल ने ICC T20 विश्वकप के लिए चयन पाकर तीसरी बार विश्वकप में हिस्सा लिया है। टीयू अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का स्तर बढ़ा है और अब रंगशाला में फ्लडलाईट भी स्थापित हो चुका है। नेपाल एकदिवसीय और टी-20 दोनों क्रिकेट में अलग-अलग कप्तान और टीम के साथ खेल रहा है।

लिग टू की आगामी दो घरेलू श्रृंखलाओं के माध्यम से नेपाल फिर से ODI मान्यता बनाए रखेगा और एकदिवसीय विश्वकप के अंतिम चयन तक पहुंचकर विश्वकप खेलने का लक्ष्य जारी रखेगा। शनिवार से अपनी ही धरती पर शुरू होने वाली लिग टू श्रृंखला में नेपाल दो साल पहले की तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन दोहराने का लक्ष्य रखता है, जो एक बड़ी चुनौती भी होगी।

‘बचत पासबुक है, लेकिन सहकारी संस्था नहीं है’

समाचार के अनुसार, हमारे पैसिफिक, संध्या और प्रस्पर बचत एवं ऋण सहकारी संस्थाओं के बचतकर्ताओं ने राष्ट्रीय सहकारी नियमन प्राधिकरण को अपनी बचत राशि वापस कराने के लिए आवेदन दिया है। प्राधिकरण ने इन संस्थाओं के पते और संचालकों के संबंध में कोई जानकारी खोजने में विफलता जताई है और बचत राशि वापस मिलने का कोई अनुमान भी नहीं लगा सका है। इन तीन संस्थाओं के बचतकर्ताओं ने लगभग ८ करोड़ से अधिक रकम वापसी की मांग की है, जबकि प्राधिकरण ने मंत्रालय को इन संस्थाओं को समस्या ग्रस्त घोषित करने की सिफारिश भी की थी। ११ वैशाख, काठमांडू।

हमारे पैसिफिक, संध्या और प्रस्पर बचत तथा ऋण सहकारी संस्थाओं के बचतकर्ताओं ने राष्ट्रीय सहकारी नियमन प्राधिकरण में अपनी बचत राशि वापस पाने के लिए आवेदन दिया था। आवेदन प्राप्त होने के बाद प्राधिकरण ने इन संस्थाओं के पते और संपर्क व्यक्तियों की खोज की, लेकिन किसी भी संस्था का सही पता और संचालक का स्पष्ट विवरण नहीं मिल पाया, एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। “संस्था और संचालकों से संबंधित कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं हुई,” उक्त अधिकारी ने बताया।

सहकारी संस्था संचालक बचतकर्ताओं की रकम का दुरुपयोग करते हैं और कर्ज के बदले बचत राशि वापस नहीं करते, यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। परंतु इन तीन संस्थाओं में एक नया प्रकार की ठगी सामने आ रही है। पूर्व सचिव गोपीनाथ मैनाली ने कहा, “संस्था के कुछ न कुछ दस्तावेज तो जरूर होते, जिनके आधार पर सख्त कार्रवाई कर बचतकर्ताओं की रकम वापस दिलाई जा सकती है।” उन्होंने आगे कहा, “संस्था का संचालन छोड़ दिया गया है, इसलिए पूर्व संचालक या अधिकारियों को छोड़ देने से समस्या हल नहीं होगी।”

प्राधिकरण द्वारा केवल निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं होगा, उनका मानना है। कई संस्थाएं पंजीकृत भी नहीं हैं और उनसे संपर्क संभव नहीं है, ऐसे में बचतकर्ताओं को पैसा वापस मिलना उचित नहीं माना जा सकता। कुछ महीने पहले प्राधिकरण ने १६ सहकारी संस्थाओं को समस्या ग्रस्त घोषित करने के लिए भूमि व्यवस्था, सहकारी एवं गरीबी निवारण मंत्रालय को सिफारिश भेजी थी, लेकिन मंत्रालय ने प्रक्रिया पूरी न होने का हवाला देते हुए सिफारिश को वापस कर दिया था।

प्राधिकरण द्वारा मंत्रालय को भेजे गए विवरण के अनुसार, हमारे पैसिफिक बचत एवं ऋण सहकारी संस्था के चार बचतकर्ताओं ने लगभग ४९ लाख ८३ हजार रुपए की रकम वापसी की मांग की है। इसी प्रकार संध्या बचत और ऋण सहकारी संस्था के ४८ बचतकर्ताओं ने २ करोड़ ९८ लाख ६१ हजार रुपए की राशि वापस पाने के लिए प्राधिकरण को आवेदन दिया है। जबकि प्रस्पर बचत और ऋण सहकारी संस्था के १३० बचतकर्ताओं ने ५ करोड़ १४ लाख ४८ हजार रुपए की रकम वापसी के लिए आवेदन किया है।

सिपी गजुरेल का आरोप: सरकार फासीवादी शैली में कार्य कर रही है

क्रान्तिकारी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सिपी गजुरेल ने वर्तमान सरकार पर फासीवादी शैली में काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सुकुमबासी बस्ती में डोजर चलाने और विद्यार्थी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय को फासीवाद के रूप में अस्वीकार किया। गजुरेल का कहना है कि सरकार नेपाली जनता के हित में नहीं है और संकट से उबरने के लिए क्रांतिकारी तथा देशभक्त शक्तियों के बीच सहयोग आवश्यक है। ११ वैशाख, काठमांडू।

गजुरेल ने शुक्रवार को काठमांडू में आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि सरकार की गतिविधियाँ फासीवादी शैली में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने सुकुमबासी बस्ती में डोजर चलाने और विद्यार्थी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के कदमों की निंदा करते हुए कहा कि यह पञ्चायती व्यवस्था में भी नहीं देखा गया था। ‘परिस्थिति बदल चुकी है। आज नेपाल के संदर्भ में देखें तो फासीवाद लागू होता जा रहा है। सरकार बनने के एक महीने से भी कम समय में सुकुमबासी लोगों को वहां से हटाने के लिए डोजर लगाने का निर्णय लिया गया। यह स्पष्ट रूप से फासीवादी प्रक्रिया है। विद्यार्थियों को संगठन खोलने की अनुमति न देना भी फासीवाद ही है,’ उन्होंने कहा।

महासचिव गजुरेल ने यह भी कहा कि सरकार नेपाली जनता के हित में काम नहीं कर रही है। ‘निर्दलीय व्यवस्था में भी विद्यार्थियों को चुनाव में भाग लेने और अन्य अधिकार प्राप्त थे। यह तो पञ्चायत द्वारा दिए गए अधिकारों से भी कम है,’ उन्होंने कहा। साथ ही उन्होंने देश को संकट से बचाने के लिए सभी क्रांतिकारी और देशभक्त शक्तियों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

नेपाल भानुआटुसँग २२ रनले पराजित

रुवान्डामा जारी आईसीसी महिला च्यालेन्ज ट्रफीमा नेपाल भानुआटुसँग २२ रनले पराजित भएको छ। ९८ रनको लक्ष्य पछ्याएको नेपाल १५.३ ओभरमा ७५ रनमा सबै विकेट गुमाएर अलआउट भयो। प्रतियोगितामा चार खेल खेलेको क्रममा यो नेपालको दोस्रो हार हो। ११ वैशाख, काठमाडौं।

रुवान्डामा भइरहेको आईसीसी महिला च्यालेन्ज ट्रफी २०२६ अन्तर्गत आफ्नो चौथो खेलमा नेपाल भानुआटुसँग २२ रनले पराजित भयो। भानुआटुले तोकेको ९८ रनको लक्ष्य पछ्याएको नेपाल १५.३ ओभरमा ७५ रनमा अलआउट भयो। प्रतियोगितामा यो नेपालको दोस्रो हार हो। यसअघि नेपाल अमेरिकासँग पराजित भएको थियो, भने इटली र रुवान्डालाई पराजित गरेको थियो।

नेपालका लागि ओपनर सम्झना खड्काले सर्वाधिक २४ रन बनाइन्, कप्तान ईन्दु बर्माले १३ र कविता कुँवरले १० रन जोडिन्। बाँकी सबै खेलाडीले दोहोरो अंकमा रन बनाउन सकेनन्। नेपालले राम्रो सुरुआत त गर्यो, तर ब्याटिङमा पुनः संघर्ष गर्दा पूरा ओभर खेलेर सम्हाल्न नसकी अलआउट भयो। ४५ रनमा ३ विकेट गुमाएको नेपालले त्यसपछि थप ३० रन जोड्दै बाँकी ६ विकेट गुमायो।

भानुआटुको लागि नासिमाना नभैकाले र भानेसा भिराले समान ३-३ विकेट लिए भने सेलिना सोलमानले २ विकेट लिए। राचेफ आन्द्रेले १ विकेट लिए। टस जितेर पहिले ब्याटिङ गरेको भानुआटुले किगालीस्थित गहंगा अन्तर्राष्ट्रिय क्रिकेट मैदानमा निर्धारित २० ओभरमा ५ विकेट गुमाउँदै ९७ रन बनायो। भानुआटुकी भालेन्टा लाङ्गिएटुले सर्वाधिक ४२ रन बनाइन्। नेपालका लागि रिया शर्माले २ साथै मनिषा उपाध्यक्ष, कविता कुँवर र रचना उपाध्यायले समान १-१ विकेट लिए।

पुरुषतर्फ पुलिस र आर्मी विजयी, रुकुमसँग हार्‍यो एपीएफ – Online Khabar

पुरुष वर्ग में पुलिस और आर्मी की जीत, एपीएफ रुकुम से हार गया

रेडबुल दशौँ पीएम कप एनभीए महिला तथा पुरुष भलिबल लीग २०८३ के दूसरे दिन विभागीय टीमों का प्रदर्शन मिलाजुला रहा। पुरुष वर्ग में नेपाल पुलिस क्लब और त्रिभुवन आर्मी क्लब ने जीत हासिल की जबकि नेपाल एपीएफ क्लब को हार का सामना करना पड़ा। इस लीग में पुरुष वर्ग में ८ तथा महिला वर्ग में ६ टीमें भाग ले रही हैं और ९ दिनों में कुल ४५ मैच खेले जाएंगे। ११ वैशाख, काठमाण्डौ।

शुक्रवार त्रिपुरेश्वर स्थित दशरथ रंगशाला कवरड हल में जारी लीग के पुरुष वर्ग के पहले मैच में पुलिस ने कोशी प्रदेश भलिबल क्लब को ३-१ सेट से हराया। पहले सेट में पुलिस ने २५-२३ से जीत दर्ज की, लेकिन दूसरे सेट में कोशी ने २५-२२ से जीत दर्ज कर स्कोर १-१ बराबर कर दिया। इसके बाद पुलिस ने लगातार दो सेट २५-२० और २५-२२ से जीत कर मैच अपने नाम किया।

इसी तरह, पुरुष वर्ग के तीसरे मैच में आर्मी ने बुढानिलकण्ठ को ३-१ सेट से हराया। आर्मी ने बुढानिलकण्ठ को २५-१९, २०-२५, २५-१४, २५-१५ के स्कोर से हराकर अपनी दूसरी जीत हासिल की। वहीं एपीएफ को रुकुम पश्चिम भलिबल क्लब ने सीधे सेट में मात दी। रुकुम पश्चिम ने एपीएफ को २५-१४, २५-२१, २५-१५ से पराजित किया।

शुक्रवार को महिला वर्ग में भी एपीएफ बुटवल की एवरेस्ट भलिबल क्लब से हार गई थी। एनभीए लीग में शनिवार को पुरुष वर्ग में ३ तथा महिला वर्ग में २ मैच खेले जाएंगे। महिला वर्ग के मैच सुबह ९ बजे नेपाल पुलिस क्लब और सुदूरपश्चिम के बीच तथा सुबह ११ बजे न्यू डायमंड और एवरेस्ट भलिबल क्लब के बीच आयोजित होंगे।

तस्करी जारी, भन्सार असुल्ने बहाने में जनतक पर यातना जारी

सशस्त्र पुलिस ने सीमा नाकों पर घर उपयोग की सामग्री में भी यदि कीमत सौ रुपये से अधिक होती है तो कड़ी भन्सार भुगतान की व्यवस्था लागू कर दी है। सीमावर्ती नागरिकों ने नई भन्सार नीति के खिलाफ विरोध जताते हुए सोशल मीडिया पर गहरा आक्रोश प्रदर्शित किया है। पूर्व मंत्री महन्थ ठाकुर ने संसद में सरकार के खिलाफ विद्रोह की चेतावनी देते हुए नीति में सुधार की मांग की है।

सशस्त्र पुलिस बुर्का पहने एक महिला के हाथ से थैला छीनते हैं। उस थैले में घरेलू उपयोग की सामग्री होती है। कड़ाई से नाराज़ एक महिला कुछ पैकेट चाउचाउ और कुरकुरे जमीन पर फेंक देती है। वह कहती हैं कि वह सामग्री बच्‍चे को लेकर जा रही थी। चेकिंग के दौरान नाराज़ एक वृद्ध कुछ केले मोटरसाइकिल से लटकाते हुए लाते हैं, जिन्हें पुलिस कुचल कर नष्ट कर देती है और केले पुलिस कूड़ेदान में फेंक देती है। यह दृश्य तब बने जब भारत से सामान लाते समय यदि सामग्री की कीमत सौ रुपये से अधिक होती है तो अनिवार्य रूप से भन्सार देना होता है, जिससे नागरिक विरोध कर रहे हैं।

नई सरकार के साथ बदली गई भन्सार और सुरक्षा नीति के प्रति नागरिकों में असंतोष के इन दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। फेसबुक, टिकटक, रिल्स जैसे प्लेटफॉर्म पर पोस्ट न होने के बावजूद सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। घरेलू उपयोग की सामान पर भी भन्सार लगाने की पुलिस की कड़क उपाय के कारण विरोध तेज हुआ है। धनुषा के जटही नाका पर शुक्रवार को मिलीं रामकला देवी ने कहा, ‘समीप की रिश्तेदारियां हैं, मुफ्त में देते थे, घर उपयोग की ऐसी छोटी चीजों पर टैक्स देने के लिए पैसा कहां से लाएं?’

पूर्व मंत्री हृदयेश त्रिपाठी बताते हैं, ‘काठमांडू में बैठे लोग यहाँ (सीमा क्षेत्र) की वास्तविक स्थिति नहीं समझते, ऐसा लगता है जैसे फिर से राजस्व संग्रह बढ़ाने का जुनून छा गया हो। यह जुनून पहले भी कुछ समय दिख चुका है।’ उनका मानना है कि सौ रुपये से ऊपर की सामग्री पर भन्सार लेने की नीति सीमावर्ती लोगों का अपमान है। ‘रसोई में उपयोग होने वाली सब्ज़ियों की कीमत सौ रुपये होती है, लेकिन टूथपेस्ट नहीं आता,’ त्रिपाठी कहते हैं, ‘इस सरकार ने भी इस अव्यवहारिक नीति को समझ नहीं पाया।’

परराष्ट्र मंत्रालय ने इरान में मौजूद नेपाली नागरिकों की स्वदेश वापसी के प्रति इच्छाओं की जानकारी दी

११ वैशाख, काठमाडौं। परराष्ट्र मंत्रालय ने बताया है कि इरान में मौजूद नेपाली नागरिक तत्काल स्वदेश लौटने के लिए इच्छुक नहीं हैं। मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने इजरायल-अमेरिका द्वारा इरान पर हमले के बीच वहां मौजूद नेपाली नागरिकों को स्वदेश वापसी के लिए प्रयास किया था। हालांकि, उन्होंने परराष्ट्र मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल क्षेत्री के अनुसार, स्वदेश लौटने में अनिच्छा व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि वहां मौजूद १० लोगों में से ८ ने स्वदेश लौटने का निर्णय नहीं लिया है। जबकि २ व्यक्ति नेपाल लौटने की प्रक्रिया में हैं। प्रवक्ता क्षेत्री ने बताया कि सरकार द्वारा बार-बार स्वदेश लौटने का आग्रह करने के बावजूद, वे लोग व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए तत्काल लौटने में असमर्थता जता रहे हैं।

‘उन्हें बार-बार स्वदेश लौटने का अनुरोध किया गया है। शुरू में वे लौटने के लिए तैयार थे। लेकिन, कल शाम से वे लौटने में असमर्थ होने की सूचना मिली है,’ प्रवक्ता क्षेत्री ने कहा, ‘यह सुरक्षा या अन्य कारणों से नहीं, बल्कि अपनी स्थिति के अनुसार रोजगार समेत अन्य कारणों से वे वापस नहीं आना चाहते हैं।’ उन्होंने यह भी बताया कि वहां मौजूद सभी नेपाली लोग कतार में स्थित नेपाली दूतावास के संपर्क में हैं। उद्धार और स्वदेश वापसी के लिए नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास के माध्यम से भी प्रयास जारी हैं, मंत्रालय ने बताया।

डेढ़ हजार वर्ष पुराने सामूहिक कब्रिस्तान ने जस्टिनियन प्लेग के रहस्य खोले

दक्षिण फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने लगभग डेढ़ हजार वर्ष पहले ‘जस्टिनियन प्लेग’ महामारी के कारण सैकड़ों लोगों की मृत्यु से जुड़े एक सामूहिक कब्रिस्तान का पता लगाया है। जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजिकल साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन ने भूमध्यसागर क्षेत्र में पहली ब्यूबोनिक प्लेग महामारी की पुष्टि की है। इस शोध ने यह दिखाया है कि महामारी के कारण घुमंतू समुदाय एक स्थान पर इकट्ठा हुए थे और इसे एक सामाजिक घटना भी माना जा सकता है।

११ वैशाख, काठमाडौं। जॉर्डन के प्राचीन शहर जेरास में खोजे गए इस सामूहिक कब्रिस्तान ने पुष्टि की है कि किसी भी महामारी केवल रोग फैलाती नहीं, बल्कि यह समाज की संरचना और पतन को भी पुनःपरिभाषित करती है। दक्षिण फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, लगभग डेढ़ हजार वर्ष पहले ‘जस्टिनियन प्लेग’ महामारी ने एक साथ सैकड़ों लोगों की जान ले ली थी।

जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजिकल साइंसेज में प्रकाशित इस अध्ययन ने भूमध्यसागर क्षेत्र में दर्ज की गई पहली ब्यूबोनिक प्लेग महामारी की पुष्टि की है। शोध टीम के प्रमुख रेज एच.वाई. जियांग के अनुसार यह कब्र सामान्य नहीं, बल्कि कुछ ही दिनों के अंदर सैकड़ों लोगों को एक ही स्थान पर दफनाए जाने की एक विशेष घटना है। यह अध्ययन महामारी के समय लोगों की जीवनशैली और संकट के दौरान शहर की स्थिति के मानवीय पहलू को उजागर करता है।

पुरातात्विक साक्ष्य और जेनेटिक परीक्षणों से पुष्टि हुई है कि यह प्लेग से जुड़ा इतिहास का पहला सामूहिक कब्रिस्तान है। यह अध्ययन एक रोचक तथ्य भी सामने लाया है कि सामान्य परिस्थितियों में अलग-अलग क्षेत्रों में बिखरे हुए घुमंतू समुदाय महामारी के दौरान एक स्थान पर एकत्रित हुए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि बसावट और लोगों की आवाजाही ने महामारी को शहर के विभिन्न कोनों तक फैलाया। दक्षिण फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी विश्वविद्यालय और फ्लोरिडा एटलांटिक विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के साथ मिलकर किया गया यह शोध इस बात का निष्कर्ष निकालता है कि महामारी केवल जैविक घटना नहीं बल्कि एक सामाजिक घटना भी थी, जिसने समाज की कमज़ोरियों को उजागर किया। शोध दल ने चेतावनी दी है कि वर्तमान समय में घनी आबादी और बढ़ती यात्रा के कारण ऐसी महामारियों का जोखिम अभी भी बना हुआ है।

नेपाल ने २२वें IKF विश्व केम्पो चैम्पियनशिप में १७ पदक जीते

नेपाली केम्पो टीम ने तुर्की के अंताल्या में सम्पन्न २२वें IKF विश्व केम्पो चैम्पियनशिप २०२६ में १७ पदक जीतकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। नेपाल केम्पो महासंघ के अध्यक्ष पावेल शाह ने बताया कि नेपाली टीम ने पाँच विभिन्न विधाओं में पदक हासिल किए हैं। प्रतियोगिता में १६ खिलाड़ी और अधिकारी शामिल हैं। ११ वैशाख, काठमांडू।

नेपाल केम्पो टीम ने तुर्की में आयोजित २२वें IKF विश्व केम्पो चैम्पियनशिप २०२६ में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कुल १७ पदक जीते, जो एक प्रभावशाली उपलब्धि है। अंताल्या में हुए इस विश्व केम्पो (मार्शल आर्ट्स) चैम्पियनशिप में नेपाली टीम ने कुल १७ पदक प्राप्त किए।

नेपाल केम्पो महासंघ के अध्यक्ष पावेल शाह ने जानकारी दी कि अब तक नेपाली टीम ने विश्व केम्पो चैम्पियनशिप में पाँच विभिन्न विधाओं में कुल १७ पदक अपने नाम किए हैं। जूनियर काता में मोनालिसा धामी ने स्वर्ण पदक हासिल किया। इसी विधा में क्रिडिक्स विक्रम कुँवर और दिलमान लामाले कांस्य पदक जीते। विपन (हथियार) काता के जूनियर वर्ग में मोनालिसा ने रजत पदक पाया जबकि सुलभ श्रेष्ठ और क्रिडिक्स ने कांस्य पदक पर संतोष करना पड़ा।

१८ वर्ष से ऊपर के काता वर्ग में यमन पांडे ने कांस्य पदक जीता। समूह काता में मोनालिसा और इरा गौतम की जोड़ी ने कांस्य पदक हासिल किया। सेल्फ डिफेंस में सुरेश पराजुली, यमन पांडे, मोनालिसा और शिवहरि राई की टीम ने कांस्य पदक जीता। मिक्स्ड सेल्फ डिफेंस (पुरुष और महिला) में अंजना शाही, यमन पांडे, मोनालिसा और शिवहरि ने रजत पदक प्राप्त किया। साथ ही, सेल्फ डिफेंस में अंजना शाही और मोनालिसा ने कांस्य पदक हासिल किया।

दूसरे दिन की सबमिशन विधा में जूनियर वर्ग में क्रिडिक्स विक्रम ने रजत पदक जीता, जबकि मोनालिसा, सुलभ श्रेष्ठ और आरा गौतम ने कांस्य पदक पर कब्जा किया। महासंघ के अध्यक्ष शाह ने बताया कि यह प्रतियोगिता २६ अप्रैल तक जारी है और उन्हें उम्मीद है कि इसके बाद भी और पदक हासिल होंगे। इस प्रतियोगिता में नेपाल से कुल १६ खिलाड़ी और अधिकारी शामिल हैं। नेपाली टीम की प्रशिक्षक अंजना शाही ने कहा कि नेपाल का झंडा विश्व स्तर पर फहराने में सफल रहे सभी पदक विजेताओं और प्रतिभागी खिलाड़ियों को बधाई।