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लेखक: space4knews

परराष्ट्र मंत्रालय ने इरान में मौजूद नेपाली नागरिकों की स्वदेश वापसी के प्रति इच्छाओं की जानकारी दी

११ वैशाख, काठमाडौं। परराष्ट्र मंत्रालय ने बताया है कि इरान में मौजूद नेपाली नागरिक तत्काल स्वदेश लौटने के लिए इच्छुक नहीं हैं। मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने इजरायल-अमेरिका द्वारा इरान पर हमले के बीच वहां मौजूद नेपाली नागरिकों को स्वदेश वापसी के लिए प्रयास किया था। हालांकि, उन्होंने परराष्ट्र मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल क्षेत्री के अनुसार, स्वदेश लौटने में अनिच्छा व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि वहां मौजूद १० लोगों में से ८ ने स्वदेश लौटने का निर्णय नहीं लिया है। जबकि २ व्यक्ति नेपाल लौटने की प्रक्रिया में हैं। प्रवक्ता क्षेत्री ने बताया कि सरकार द्वारा बार-बार स्वदेश लौटने का आग्रह करने के बावजूद, वे लोग व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए तत्काल लौटने में असमर्थता जता रहे हैं।

‘उन्हें बार-बार स्वदेश लौटने का अनुरोध किया गया है। शुरू में वे लौटने के लिए तैयार थे। लेकिन, कल शाम से वे लौटने में असमर्थ होने की सूचना मिली है,’ प्रवक्ता क्षेत्री ने कहा, ‘यह सुरक्षा या अन्य कारणों से नहीं, बल्कि अपनी स्थिति के अनुसार रोजगार समेत अन्य कारणों से वे वापस नहीं आना चाहते हैं।’ उन्होंने यह भी बताया कि वहां मौजूद सभी नेपाली लोग कतार में स्थित नेपाली दूतावास के संपर्क में हैं। उद्धार और स्वदेश वापसी के लिए नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास के माध्यम से भी प्रयास जारी हैं, मंत्रालय ने बताया।

डेढ़ हजार वर्ष पुराने सामूहिक कब्रिस्तान ने जस्टिनियन प्लेग के रहस्य खोले

दक्षिण फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने लगभग डेढ़ हजार वर्ष पहले ‘जस्टिनियन प्लेग’ महामारी के कारण सैकड़ों लोगों की मृत्यु से जुड़े एक सामूहिक कब्रिस्तान का पता लगाया है। जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजिकल साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन ने भूमध्यसागर क्षेत्र में पहली ब्यूबोनिक प्लेग महामारी की पुष्टि की है। इस शोध ने यह दिखाया है कि महामारी के कारण घुमंतू समुदाय एक स्थान पर इकट्ठा हुए थे और इसे एक सामाजिक घटना भी माना जा सकता है।

११ वैशाख, काठमाडौं। जॉर्डन के प्राचीन शहर जेरास में खोजे गए इस सामूहिक कब्रिस्तान ने पुष्टि की है कि किसी भी महामारी केवल रोग फैलाती नहीं, बल्कि यह समाज की संरचना और पतन को भी पुनःपरिभाषित करती है। दक्षिण फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, लगभग डेढ़ हजार वर्ष पहले ‘जस्टिनियन प्लेग’ महामारी ने एक साथ सैकड़ों लोगों की जान ले ली थी।

जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजिकल साइंसेज में प्रकाशित इस अध्ययन ने भूमध्यसागर क्षेत्र में दर्ज की गई पहली ब्यूबोनिक प्लेग महामारी की पुष्टि की है। शोध टीम के प्रमुख रेज एच.वाई. जियांग के अनुसार यह कब्र सामान्य नहीं, बल्कि कुछ ही दिनों के अंदर सैकड़ों लोगों को एक ही स्थान पर दफनाए जाने की एक विशेष घटना है। यह अध्ययन महामारी के समय लोगों की जीवनशैली और संकट के दौरान शहर की स्थिति के मानवीय पहलू को उजागर करता है।

पुरातात्विक साक्ष्य और जेनेटिक परीक्षणों से पुष्टि हुई है कि यह प्लेग से जुड़ा इतिहास का पहला सामूहिक कब्रिस्तान है। यह अध्ययन एक रोचक तथ्य भी सामने लाया है कि सामान्य परिस्थितियों में अलग-अलग क्षेत्रों में बिखरे हुए घुमंतू समुदाय महामारी के दौरान एक स्थान पर एकत्रित हुए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि बसावट और लोगों की आवाजाही ने महामारी को शहर के विभिन्न कोनों तक फैलाया। दक्षिण फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी विश्वविद्यालय और फ्लोरिडा एटलांटिक विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के साथ मिलकर किया गया यह शोध इस बात का निष्कर्ष निकालता है कि महामारी केवल जैविक घटना नहीं बल्कि एक सामाजिक घटना भी थी, जिसने समाज की कमज़ोरियों को उजागर किया। शोध दल ने चेतावनी दी है कि वर्तमान समय में घनी आबादी और बढ़ती यात्रा के कारण ऐसी महामारियों का जोखिम अभी भी बना हुआ है।

नेपाल ने २२वें IKF विश्व केम्पो चैम्पियनशिप में १७ पदक जीते

नेपाली केम्पो टीम ने तुर्की के अंताल्या में सम्पन्न २२वें IKF विश्व केम्पो चैम्पियनशिप २०२६ में १७ पदक जीतकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। नेपाल केम्पो महासंघ के अध्यक्ष पावेल शाह ने बताया कि नेपाली टीम ने पाँच विभिन्न विधाओं में पदक हासिल किए हैं। प्रतियोगिता में १६ खिलाड़ी और अधिकारी शामिल हैं। ११ वैशाख, काठमांडू।

नेपाल केम्पो टीम ने तुर्की में आयोजित २२वें IKF विश्व केम्पो चैम्पियनशिप २०२६ में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कुल १७ पदक जीते, जो एक प्रभावशाली उपलब्धि है। अंताल्या में हुए इस विश्व केम्पो (मार्शल आर्ट्स) चैम्पियनशिप में नेपाली टीम ने कुल १७ पदक प्राप्त किए।

नेपाल केम्पो महासंघ के अध्यक्ष पावेल शाह ने जानकारी दी कि अब तक नेपाली टीम ने विश्व केम्पो चैम्पियनशिप में पाँच विभिन्न विधाओं में कुल १७ पदक अपने नाम किए हैं। जूनियर काता में मोनालिसा धामी ने स्वर्ण पदक हासिल किया। इसी विधा में क्रिडिक्स विक्रम कुँवर और दिलमान लामाले कांस्य पदक जीते। विपन (हथियार) काता के जूनियर वर्ग में मोनालिसा ने रजत पदक पाया जबकि सुलभ श्रेष्ठ और क्रिडिक्स ने कांस्य पदक पर संतोष करना पड़ा।

१८ वर्ष से ऊपर के काता वर्ग में यमन पांडे ने कांस्य पदक जीता। समूह काता में मोनालिसा और इरा गौतम की जोड़ी ने कांस्य पदक हासिल किया। सेल्फ डिफेंस में सुरेश पराजुली, यमन पांडे, मोनालिसा और शिवहरि राई की टीम ने कांस्य पदक जीता। मिक्स्ड सेल्फ डिफेंस (पुरुष और महिला) में अंजना शाही, यमन पांडे, मोनालिसा और शिवहरि ने रजत पदक प्राप्त किया। साथ ही, सेल्फ डिफेंस में अंजना शाही और मोनालिसा ने कांस्य पदक हासिल किया।

दूसरे दिन की सबमिशन विधा में जूनियर वर्ग में क्रिडिक्स विक्रम ने रजत पदक जीता, जबकि मोनालिसा, सुलभ श्रेष्ठ और आरा गौतम ने कांस्य पदक पर कब्जा किया। महासंघ के अध्यक्ष शाह ने बताया कि यह प्रतियोगिता २६ अप्रैल तक जारी है और उन्हें उम्मीद है कि इसके बाद भी और पदक हासिल होंगे। इस प्रतियोगिता में नेपाल से कुल १६ खिलाड़ी और अधिकारी शामिल हैं। नेपाली टीम की प्रशिक्षक अंजना शाही ने कहा कि नेपाल का झंडा विश्व स्तर पर फहराने में सफल रहे सभी पदक विजेताओं और प्रतिभागी खिलाड़ियों को बधाई।

कर्मचारीको उमेरहद ६० वर्ष प्रस्तावित, अन्य के छ नयाँ व्यवस्था ?

कर्मचारी की उम्र सीमा 60 वर्ष करने प्रस्ताव सहित अन्य नई व्यवस्थाएँ

10 वैशाख, काठमांडू। संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय ने निजामती कर्मचारियों की उम्र सीमा 60 वर्ष करने के प्रस्ताव के साथ संघीय निजामती विधेयक का मसौदा तैयार किया है। मंत्रालय की टीम द्वारा तैयार यह मसौदा सुझाव के लिए सार्वजनिक करने की तैयारी में है। संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्री प्रतिभा रावल ने बताया कि निजामती कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 60 वर्ष तक रखने के लिए विधेयक तैयार किया गया है। उनके अनुसार, विधेयक संघीय संसद से पारित होने के बाद पहले वर्ष में 59 वर्ष और दूसरे वर्ष से 60 वर्ष की उम्र सीमा लागू होगी। उन्होंने कहा, “हमने मंत्रालय के कर्मचारियों और विशेषज्ञों के साथ विधेयक पर विस्तार से चर्चा कर ली है, लेकिन सामाजिक मीडिया पर चल रहे अफवाहें और हल्ले विधेयक में शामिल नहीं हैं,” उन्होंने कहा, “डिजिटल सेवा-प्रणालीमुखी बनाने और कर्मचारियों की क्षमता तथा दक्षता के आधार पर प्रोत्साहन की नीति को प्राथमिकता देते हुए विधेयक तैयार किया गया है।”

मंत्रालय द्वारा तैयार विधेयक के अनुसार, निजामती कर्मचारियों की उम्र सीमा 60 वर्ष निर्धारित की जाएगी और इसे दो चरणों में लागू किया जाएगा। प्रमुख सचिव (चौदहवें स्तर) की पद अवधि दो वर्ष की करने का प्रस्ताव है, जबकि वर्तमान में यह तीन वर्ष है। सचिव (तेरहवें स्तर) की पद अवधि भी दो वर्ष रहेगी, लेकिन आवश्यक होने पर सरकार इसे एक वर्ष और बढ़ा सकती है। सामाजिक मीडिया पर सहसचिवों की अधिकतम सेवा अवधि और अलग उम्र सीमा होने की अफवाहें फैली हैं, लेकिन सहसचिवों की सेवा अवधि और उम्र सीमा में कोई बदलाव नहीं होगा। सहसचिव सचिव पद पर पदोन्नत होने तक 60 वर्ष तक सेवा कर सकेंगे और पदोन्नति के बाद सचिव की निर्धारित अवधि के अनुसार सेवानिवृत्त होंगे। अन्य निम्न स्तर के कर्मचारियों की सेवा अवधि और उम्र सीमा यथावत रहेगी।

प्रवेश की उम्र सीमा और कूलिंग पीरियड में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। नए प्रस्ताव के अनुसार, पुरुषों के लिए यह 32 वर्ष के भीतर निजामती सेवा में प्रवेश आवश्यक होगा, जबकि महिलाओं के लिए सीमा 35 वर्ष और विकलांग व्यक्तियों के लिए 39 वर्ष निर्धारित है। इससे पहले पुरुषों की उम्र सीमा 35 वर्ष और महिलाओं की 40 वर्ष थी। विधेयक में सेवा निवृत्ति के बाद कम से कम दो वर्षों तक किसी भी प्रकार की नियुक्ति न मिलने का प्रावधान है। इसके अलावा, इस अवधि में चुनावी उम्मीदवार बनने या निर्वाचित होने पर भी रोक लगेगी। पिछली बार राज्यव्यवस्था समिति में कूलिंग पीरियड विषय पर विवाद हुआ था, लेकिन कोई निष्कर्ष पर पहुंचा नहीं था।

विधेयक में सचिव स्तर के कार्यकारी पद का भी प्रावधान है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के योग्य व्यक्ति निश्चित परीक्षण या प्रतिस्पर्धा के माध्यम से सीधे नियुक्त किए जा सकेंगे। उनकी पद अवधि निजामती सेवा के सचिव या चौदहवें स्तर के कर्मचारियों की तरह दो वर्ष की होगी और एक वर्ष विस्तार का विकल्प भी मौजूद होगा।

स्वार्थ द्वंद्व संबंधी व्यवस्था भी विधेयक में शामिल की गई है, जिसके अनुसार निजामती कर्मचारियों को अपने स्वार्थ संबन्धी मामलों का खुलासा कर अभिलेख रखना होगा और ऐसी स्थिति में वे निर्णय नहीं ले सकेंगे। स्वार्थ द्वंद्व में फंसे कर्मचारियों द्वारा निर्णय लेने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साल 2079 में कानून मंत्रालय ने इस संबंध में दो मसौदे तैयार किए थे, लेकिन उनका कार्यान्वयन नहीं हो सका। निजामती सेवा में प्रवेश की तैयारी के लिए आयोजित परीक्षात्मक और तैयारी कक्षाओं में वर्तमान निजामती कर्मचारी शामिल न हों, इस प्रस्ताव को भी इसमें शामिल किया गया है।

स्थानीय स्तर पर प्रमुख प्रशासनिक अधिकृत की व्यवस्था को लेकर लंबे समय से चर्चा चली आ रही है। विधेयक में संघीय स्तर से सीधे प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रमुख प्रशासनिक अधिकृत नियुक्त करने का प्रस्ताव है। अब तक नियुक्त प्रमुख प्रशासनिक अधिकृतों को मुख्यमंत्री कार्यालय के माध्यम से प्रत्येक स्थानीय तह में भेजा जाएगा। ऐसे अधिकृतों की सेवा अवधि कानून लागू होने के बाद पांच वर्ष होगी। प्रदेश स्तर पर भी अलग-अलग पदसंख्या निर्धारित कर कुछ कर्मचारियों को संघीय स्तर से स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है। दो स्थानीय तह में सहमति होने पर कर्मचारियों का तबादला किया जाएगा, लेकिन तबादले वाले कर्मचारियों की पूरी जिम्मेदारी स्थानीय सरकार द्वारा ली जाएगी। प्रदेश सेवा के कर्मचारियों के लिए भी समान व्यवस्था होगी।

भन्सार छलीबाट बरामद २२ थान इलेक्ट्रिक स्कुटर

११ वैशाख, वीरगञ्ज । सशस्त्र प्रहरीले अवैध रूपमा भारतबाट भन्सार छली गरी भित्र्याइएका २२ थान इलेक्ट्रिक स्कुटर नियन्त्रणमा लिएको छ । सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल नम्बर १३ गण हेडक्वाटर पर्साका सूचना अधिकारी सशस्त्र प्रहरी नायब उपरीक्षक मोहन निरौलाले बिहीबार पर्साका विभिन्न स्थानबाट करिब १७ लाख ३० हजार रुपैयाँ मूल्य पर्ने २२ थान इलेक्ट्रिक स्कुटर नियन्त्रणमा लिएको जानकारी दिएका छन्।
उनका अनुसार वीरगञ्ज महानगर–१६ स्थित मुख्य भन्सार नाकाबाट १४ थान, सिर्सियानाकाबाट सात थान र विन्दवासिनी गाउँपालिका–५ स्थित प्रसौनीभाठाबाट एक थान गरी जम्मा २२ थान इलेक्ट्रिक स्कुटर नियन्त्रणमा लिइएको हो। –रासस

इरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची आज रात पाकिस्तान पहुंचेंगे

११ वैशाख, काठमाडौं। इरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची आज रात पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचने वाले हैं। इरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, वह आज इस्लामाबाद, ओमान की राजधानी मस्कट और रूस की राजधानी मास्को के लिए इरान से यात्रा शुरू करने की योजना बना रहे हैं। इससे पहले पाकिस्तान के सरकारी स्रोतों के हवाले से बताया गया था कि अराघची आज रात इस्लामाबाद पहुंचेंगे।

उनके इस्लामाबाद दौरे का उद्देश्य द्विपक्षीय संवाद और अमेरिका तथा इज़राइल के साथ जारी युद्धविराम की स्थिति पर चर्चा करना बताया गया है। इस्लामाबाद में ही अमेरिका की एक सुरक्षा टीम भी शांति वार्ता के अगले चरण के लिए मौजूद है। पाकिस्तान दोनों पक्षों के साथ निरंतर संवाद कर रहा है। अमेरिका और इरान के बीच पहले चरण की शांति वार्ता विफल हो जाने के बाद अगले चरण के लिए पाकिस्तान फिर से वार्ता कराने का प्रयास कर रहा है।

राष्ट्रीय पुरुष क्रिकेट टीम व्यवस्थापक समेत ६ पदों के लिए आवेदन आमंत्रित

नेपाल क्रिकेट संघ ने राष्ट्रीय पुरुष क्रिकेट टीम के व्यवस्थापक समेत ६ विभिन्न पदों के लिए आवेदन खुलवाए हैं। आवेदन देने की अंतिम तिथि वैशाख २७ निर्धारित की गई है। व्यवस्थापक पद के लिए उम्मीदवार के पास आधुनिक क्रिकेट की संरचना और नियमों का गहन ज्ञान होना आवश्यक है और इस पद के लिए पहले किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई में शामिल नहीं होना चाहिए, जिसे क्यान ने स्पष्ट किया है।

शुक्रवार को क्यान ने इन ६ पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की है। खुले पदों में फ्रंट डेस्क ऑफिसर, इन्वेंट्री ऑफिसर, प्रोक्योरमेंट ऑफिसर, जूनियर ऑफिसर (फाइनेंस), महिला क्रिकेट विकास अधिकारी और राष्ट्रीय पुरुष क्रिकेट टीम व्यवस्थापक शामिल हैं। इच्छुक उम्मीदवार २५ वैशाख तक आवेदन कर सकते हैं।

राष्ट्रीय टीम व्यवस्थापक पद के लिए क्यान ने बताया है कि उम्मीदवार को आधुनिक क्रिकेट संरचना और परंपरागत अभ्यास का अच्छा अनुभव होना चाहिए। इसके साथ ही, उम्मीदवार चुनाव क्षेत्र में किसी सक्रिय कोचिंग पद पर नहीं होना चाहिए, पिछले पाँच वर्षों में किसी स्वार्थ विवाद या अनुशासनात्मक कार्रवाई में शामिल नहीं होना चाहिए। आवश्यकतानुसार देश के भीतर यात्रा करने की क्षमता भी अनिवार्य होगी। क्यान के अनुसार, प्रतिभा पहचान, प्रदर्शन विश्लेषण और चयन समिति में अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

अमृत झाको रिहाइबारे परराष्ट्र मन्त्रालयले फेरि भन्यो- प्रक्रियामै छ

अमृत झाको रिहाई प्रक्रिया जारी रहेको परराष्ट्र मन्त्रालयले जनाएको

११ वैशाख, काठमाडौं। स्ट्रेट अफ होर्मुजबाट इरानले पक्राउ गरेका नेपाली नागरिक अमृत झाको रिहाई प्रक्रिया अझै चलिरहेको छ भनी सरकारले जानकारी दिएको छ। परराष्ट्र मन्त्रालयले शुक्रबार आयोजित पत्रकार सम्मेलनमा प्रवक्ता लोकबहादुर पौडेल क्षेत्रीले झाको रिहाई प्रक्रिया निरन्तर जारी रहेको तथ्य सार्वजनिक गरेका छन्। यसअघि परराष्ट्रमन्त्री शिशिर खनालले झाको रिहाई भइसकेको सामाजिक संजालमा घोषणा गर्नुभएको थियो, तर उनको अहिले पनि इरानकै जेलमा रहेका तथ्य प्रकाशमा आएसँगै व्यापक आलोचना भईरहेको थियो।

‘द्वन्द्व सुरु हुनु अघि पक्राउ परेका र इरानको बन्दर अब्बासमा हिरासतमा रहेका नेपाली नागरिक अमृत झासँग सम्बन्धित पानीजहाज मुद्दामा त्यहाँको स्थानीय अदालतले एक तहको फैसला प्रस्तुत गरिसकेको छ। यसमा संलग्न ७ मध्ये ४ जनालाई पहिले नै रिहा गरिएको छ। बाँकी व्यक्तिहरूको रिहाई प्रक्रिया पनि अघि बढिरहेको छ,’ प्रवक्ता क्षेत्रीले बताए। उनले थपे, इरानको वर्तमान जटिल परिस्थिति र त्यहाँको न्यायिक प्रणालीका कारण केही कानुनी प्रक्रियाहरू बाँकी रहेकोले तिनीहरू पूरा हुनका लागि अझ केही दिन लाग्नेछ। झाको रिहाईका लागि सरकारले विभिन्न तहमा निरन्तर पहल गरेको कुरा पनि प्रष्ट पारे। रिहाईको सम्पूर्ण प्रक्रिया जारी भएकाले मन्त्री खनालले रिहाई भइसकेको भन्नु भएको विषयलाई मन्त्रालयले यसै आधारमा बचाउ गरेको छ।

सुकुमवासी बस्ती हटाने सरकार के फैसले से स्थानीय लोगों में फैली डर की लहर

सरकार ने काठमाडौं के थापाथली स्थित सुकुमवासी बस्ती हटाने के लिए अल्टीमेटम दिए जाने के बाद स्थानीय लोग अपने सामान को हटाने लगे हैं। उन्होंने बस्ती हटाने के फैसले के बारे में स्पष्ट जानकारी न मिलने पर चिंता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री शाह ने सुकुमवासी और अतिक्रमणकारियों को अलग करने तथा वास्तविक सुकुमवासियों को जमीन वितरण करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया है। ११ वैशाख, काठमाडौं।

कुछ लोग सामान पोको में पैक कर रहे हैं। कुछ बोलेरो में सामान लोड कर रहे हैं। कुछ अपनी ताकत से सामान लेकर जा रहे हैं। शुक्रवार सुबह थापाथली में स्थित सुकुमवासी बस्ती में पहुंचने पर स्थानीय लोग असमंजस और भयभीत नजर आए। सरकार द्वारा बस्ती से सामान निकालने के निर्देश जारी किए जाने के बाद वे शांति से नहीं थे। गुरुवार शाम को ही सुरक्षा बलों ने बस्ती छोड़ने के लिए माइकिंग की थी। पिछले रात पुलिस दल ने बस्ती पर छापा मारा था, जबकि अगले दिन शुक्रवार शाम ७ बजे तक सामान हटाने का आदेश दिया गया था।

सामान हटाने का प्रयास कर रहे लोगों का मन अन्य लोगों से बात करने का नहीं था। बल्कि अपनी संपत्ति को किसी भी तरह से बचाना उनके लिए बड़ा मुद्दा था। ‘कल ये सभी संपत्तियां भी नष्ट कर दी जाएंगी। पहले महानगर पुलिस आने पर नेपाल पुलिस रोकती थी, अब तो वही लोग आते हैं,’ सामान हटा रही गीता लामा ने चिंता जताई, ‘अब किसी की कोई सूनवाई नहीं होती यहाँ। हमारा भाग्य ही ऐसा है।’ इस तरह सुकुमवासी लोग आक्रोशित थे क्योंकि उन्होंने स्पष्ट सूचना नहीं पाई थी। सरकार का अचानक बस्ती हटाने की प्रक्रिया तेज करने का निर्णय उनके मन में कई तरह के सवाल खड़े कर रहा था।

सुकुमवासी बस्ती में इस तरह के नारे लग रहे थे। प्रदर्शन के दौरान सरकार में जाने से पहले रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने के दिए गए बयान याद आ गए, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर बस्ती में डोजर चलाया गया तो वे सीना ठोंकने जाएंगे। साथ ही लामिछाने को बस्ती में आने और छाती ठोंकने के लिए आमंत्रित भी किया गया था। बस्ती के गेट पर नारेबाजी चल रही थी और आने वालों की भीड़ बढ़ रही थी। स्थानीय लोगों का कहना था, ‘अब अलग-अलग स्वार्थ समूह आएंगे। ये लोग राजनीति करते हैं, लेकिन नुकसान हमें ही होता है।’

इस प्रकार सुकुमवासियों के असमंजस में रहने के बीच शुक्रवार दोपहर पुलिस की गतिविधि ने उनकी चिंता और बढ़ा दी। पुलिस ने थापाथली की सुकुमवासी बस्ती के नजदीक सड़क किनारे सीसीटीवी कैमरा लगाने का कार्य शुरू किया, जिससे स्थानीय लोगों में और शक उत्पन्न हो गया। प्रधानमंत्री शाह ने कहा है, ‘हम सरकार में हैं और अतिक्रमणकारियों और सुकुमवासियों को अलग करने का काम करेंगे। पूरे देश के वास्तविक सुकुमवासियों के लिए प्रक्रिया पूरी करके जल्द से जल्द जमीन वितरण किया जाएगा।’

आफ्नै भराएको बन्दुकको छर्रा लागेर वडासदस्यको मृत्यु

११ वैशाख, बैतडी। बैतडीमा भरुवा बन्दुक पड्किँदा छर्रा लागेर घाइते भएका सुर्नया गाउँपालिका–२ का ४५ वर्षीय वडासदस्य दानबहादुर ऐरीको निधन भएको छ। आफैले भरेको बन्दुकको छर्रा घाँटीमा लागेर बुधबार साँझ घाइते भएका ऐरीलाई जिल्ला अस्पताल बैतडीमा सामान्य उपचारपछि धनगढी रिफर गरिएको थियो। धनगढीस्थित माया मेट्रो अस्पतालमा उपचारपछि घर फर्काउने क्रममा शुक्रबार दिउँसो करिब ३ बजे बाटोमै उनको निधन भएको जिल्ला प्रहरी कार्यालय बैतडीका प्रवक्ता इन्स्पेक्टर बलदेव बडूले जानकारी दिएका छन्। मृतक ऐरीको शव पोस्टमार्टमका लागि जिल्ला अस्पताल बैतडीमा राखिएको प्रहरीले जनाएको छ।

वैज्ञानिकों ने ‘सुपरएजर्स’ का रहस्य खोजा

नर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने यह पुष्टि की है कि ८० वर्ष से अधिक उम्र के सुपरएजर्स नामक समूह के लोग ५० से ६० वर्ष के युवाओं जितना ही तेज दिमाग रखते हैं। सुपरएजर्स के मस्तिष्क की कॉर्टेक्स परत युवाओं जैसी मोटी और कुछ मामलों में पूर्व सिन्गुलेट कॉर्टेक्स तो युवाओं से भी घनी पाई गई है। इनके मस्तिष्क में अल्जाइमर रोग उत्पन्न करने वाले प्रोटीन या तो नहीं पाए गए या पाए जाने के बावजूद इसने स्मृति को प्रभावित नहीं किया है, एवं इनके सामाजिक जीवन भी सक्रिय हैं। ११ वैशाख, Kathmandu। वृद्धावस्था में स्मरण शक्ति कमजोर होना सामान्य माना जाता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने ८० वर्ष की उम्र पार करने वाले ऐसे व्यक्तियों का एक विशेष समूह खोजा है जिनका दिमाग ५० से ६० वर्ष के युवा जैसा तीव्र है। नर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय के शोधकर्ता पिछले २५ वर्षों से ऐसे व्यक्तियों को ‘सुपरएजर्स’ के नाम से अध्ययन कर रहे हैं। हाल ही में प्रकाशित ‘अल्जाइमर्स एंड डिमेंशिया’ जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ये व्यक्ति उम्र से होने वाली मानसिक गिरावट के पारंपरिक दृष्टिकोण को चुनौती देते हैं। स्मृति परीक्षण में जहाँ शब्द याद रखने की चुनौती होती है, इसमें ये लोग अपनी आयु से ३० वर्ष छोटे व्यक्तियों के समान प्रदर्शन करते हैं।

मस्तिष्क की अनोखी जैविक संरचना वैज्ञानिकों के लिए सबसे आकर्षक पहलू है। सामान्यतः वृद्धावस्था के साथ मस्तिष्क की बाहरी परत यानी ‘कोर्टेक्स’ पतली होती जाती है, लेकिन इन व्यक्तियों के मस्तिष्क में यह परत युवा लोगों की तरह मोटी और शक्तिशाली नजर आती है। और भी चौंकाने वाली बात यह है कि निर्णय और भावनाओं से संबंधित ‘एंटीरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स’ क्षेत्र कुछ मामलों में युवाओं से भी अधिक घना पाया गया है। इसके अलावा, इनके मस्तिष्क में सामाजिक व्यवहार और स्मृति सक्रियता से जुड़े न्यूरॉन्स (वोनों इकोनोमो और एंटोरहाइनल न्यूरॉन्स) की संख्या स्वस्थ स्थिति में अधिक पाई गई है।

अध्ययन के दौरान ७७ सुपरएजर्स के मृत्युपरांत मस्तिष्क दान करके किए गए विश्लेषण ने दो महत्वपूर्ण तथ्य उजागर किए हैं। पहला, ‘प्रतिरोध’ नामक प्रक्रिया जहाँ इन सुपरएजर्स के मस्तिष्क में अल्जाइमर्स रोग उत्पन्न करने वाले हानिकारक प्रोटीन प्लाक्स और टैंगल्स पूरी तरह अनुपस्थित पाए गए हैं। दूसरा, ‘लचीलापन’ नामक प्रक्रिया जिसमें कुछ में हानिकारक प्रोटीन पाए गए, लेकिन इससे स्मृति प्रभावित नहीं हुई। इसका मतलब है कि सुपरएजर्स का मस्तिष्क इन रोगों को सहन करने या उनका मुकाबला करने की विशेष क्षमता विकसित कर चुका है।

जैविक संरचना के अलावा सुपरएजर्स की जीवनशैली भी गौरतलब है। वे सामाजिक, मिलनसार और बाहरी लोगों के साथ घुलने-मिलने में रुचि रखते हैं। व्यायाम और खान-पान के विविधता के बावजूद, मजबूत सामाजिक संबंध और सक्रिय भागीदारी ने उनके मस्तिष्क को स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। डॉ. सान्ड्रा वेनट्रब के अनुसार, ये खोजें डिमेंशिया और अल्जाइमर्स जैसे रोगों को रोकने या उनकी प्रगति को धीमा करने के लिए नए उपचार और रणनीतियों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

धमाधम बस्ती खाली गराउँदैछन् सुकुमवासी (तस्वीरहरू)

काठमाडौं उपत्यका के अत्यधिक आबादी वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विस्थापन शुरू (तस्वीरें)

समाचार सारांश

एआई द्वारा तैयार, संपादकीय समीक्षा सहित।

  • सरकार ने कल सुबह से काठमाडौँ उपत्यका के प्रमुख अधिक आबादी वाले क्षेत्रों को खाली करने की तैयारी शुरू कर दी है।
  • सुरक्षा एजेंसियां प्रधानमंत्री बालेन शाह के निर्देशानुसार खाली करने के कार्य में लगी हैं।
  • प्रधानमंत्री शाह ने मौजूदा सरकार द्वारा अधिक आबादी वाले क्षेत्रों की समस्या का समाधान करने एवं वास्तविक आवासहीनों को उचित पुनर्वास प्रदान करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

२४ अप्रैल, काठमाडौँ – सरकार काठमाडौँ उपत्यका के प्रमुख अधिक आबादी वाले इलाकों को कल (शनिवार) सुबह से खाली करने की तैयारी में जुटी है।

प्रधानमंत्री बालेन शाह के निर्देशानुसार सुरक्षा संस्थान खाली कराने में तेजी ला रहे हैं।

स्थानीय निवासियों को आज शाम ७ बजे तक अपने घर खाली करने की सूचना दी गई थी, जिसके मद्देनजर कई लोग शुक्रवार सुबह से अपना सामान स्थानांतरित करने लगे हैं।

शुक्रवार शाम थपाथली क्षेत्र में स्थानीय लोग सक्रिय रूप से अपने सामान और घरों को स्थानांतरित करते हुए देखे गए।

इस बीच प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि वर्तमान सरकार अधिक आबादी वाले इलाकों की समस्या को हल करने और वास्तविक आवासहीनों को पुनर्वास के लिए आवश्यक सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।

तस्वीरें:

 

चीनी स्टार्टअप डिपसिक ने नया एआई मॉडल ‘भी ४’ किया सार्वजनिक

चीनी स्टार्टअप डिपसिक ने अपना नया मॉडल ‘डिपसिक-भी ४’ जारी किया है, जिसमें कम लागत में उच्च क्षमता वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल है। डिपसिक-भी ४ में 10 लाख शब्दों तक की अल्ट्रा-लॉन्ग कॉन्टेक्स्ट क्षमता है और यह दो संस्करणों ‘भी ४-प्रो’ और ‘भी ४-फ्लैश’ में उपलब्ध है।

कम लागत में उच्च क्षमताओं वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विकसित कर दुनिया को चौंकाने वाला चीनी स्टार्टअप ‘डिपसिक’ ने शुक्रवार को अपना नया मॉडल ‘डिपसिक-भी ४’ लॉन्च किया। 2025 की शुरुआत में अमेरिकी कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देने में सफल इस कंपनी ने नए संस्करण में उत्पादन लागत और कंप्यूटिंग खर्च को तुलनात्मक रूप से कम करने का दावा किया है।

यह नया मॉडल ‘भी ४-प्रो’ और ‘भी ४-फ्लैश’ के दो संस्करणों में उपलब्ध कराया गया है। कंपनी के अनुसार ‘डिपसिक-भी ४’ में 10 लाख शब्दों तक की ‘अल्ट्रा-लॉन्ग कॉन्टेक्स्ट’ क्षमता है, जो इसे एक साथ कई जानकारियों को समेटकर जटिल कार्यों को पूरा करने में सक्षम बनाती है। भी ४-प्रो संस्करण में 1.6 ट्रिलियन पैरामीटर हैं और कम लागत व तेज़ी से काम करने वाले भी ४-फ्लैश में 284 बिलियन पैरामीटर मौजूद हैं।

‘वर्ल्ड नॉलेज बेंचमार्क्स’ में इस मॉडल ने गूगल के ‘जेमिनी-प्रो-३.१’ के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा करते हुए अन्य ओपन-सोर्स मॉडल्स को पीछे छोड़ने का दावा किया है। तकनीकी विश्लेषकों ने इसे उद्योग के लिए एक “मॉडल” के रूप में देखा है। इसके चलते महंगे अनुसंधान प्रयोगशालाओं तक सीमित रहे एआई संसाधन व्यावसायिक एवं आम जनता की पहुँच में लाने की उम्मीद है।

डिपसिक ने अपने मॉडल को ‘ओपन सोर्स’ बनाए रखा है, जिसके कारण चीन के नगरपालिकाएं, स्वास्थ्य संस्थान और वित्तीय क्षेत्र में इसका उपयोग तीव्र गति से बढ़ रहा है। हालांकि, डिपसिक की सफलता के साथ सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं। व्हाइट हाउस ने चीनी कंपनियों पर अमेरिकी एआई तकनीक की ‘चोरी’ करने का बड़ा अभियान चलाने का आरोप लगाया है। ट्रम्प प्रशासन के विज्ञान व प्रौद्योगिकी सलाहकार माइकल क्राट्सियोस का दावा है कि चीनी संस्थाएं अमेरिकी एआई मॉडल से ‘डिस्टिलेशन’ तकनीक के माध्यम से डेटा इकट्ठा कर रही हैं। वहीं, डिपसिक के चैटबॉट ने तियानमेन स्क्वायर जैसे संवेदनशील राजनीतिक विषयों पर जवाब देने से इंकार किया है, जिससे सेंसरशिप की आलोचनाएं भी सामने आई हैं। अगले महीने बीजिंग में होने वाली डोनाल्ड ट्रम्प और शी जिनपिंग की शिखर बैठक से पहले एआई प्रतिस्पर्धा ने दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ा दिया है।

खेलकूद मंत्रालय कुमार बेनका भाई सिद्धि व्यञ्जनकार द्वारा संचालित

मंत्री सस्मित पोखरेल ने प्रधानमंत्री के मुख्य सलाहकार कुमार बेनका के भाई सिद्धि व्यञ्जनकार को खेलकूद मंत्रालय का प्रमुख सलाहकार नियुक्त किया है। वही सलाहकार खेलकूद से संबंधित कार्य मंत्री के समकक्ष ही संभाल रहे हैं।

समाचार सारांश

स्रोत की समीक्षा की गई।

  • सिद्धि व्यञ्जनकार सहित की टीम ने खेलकूद मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय खेलकूद परिषद (राखेप) में ‘राष्ट्रीय टीम तैयारी’ का निरीक्षण किया।
  • राखेप ने बजट की कमी के कारण रुके हुए एशियाई खेल तैयारी प्रशिक्षण को पुनः शुरू करने का निर्देश दिया।
  • खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल ने खेलकूद में कम समय बिताने का उल्लेख किया और सचिवालय के सलाहकार सिद्धि के मंत्रालय के काम आगे बढ़ाने की बात कही।

११ वैशाख, काठमाडौं। सिद्धि व्यञ्जनकार सहित की टीम गत सोमवार राष्ट्रीय खेलकूद परिषद (राखेप) के ‘‘राष्ट्रीय टीम तैयारी’’ कार्यक्रम के निरीक्षण के लिए पहुंची थी। शिक्षा, विज्ञान, युवा तथा खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल के अनुपस्थित रहने पर टीम खेलकूद मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करते हुए इस निरीक्षण में शामिल हुई।

आगामी असोज ३ से जापान में आयोजित हो रहे २०वें एशियाई खेलों की तैयारी के लिए राखेप ने २०८० माघ १५ से शुरू किया गया मिशन–२०२६ कार्यक्रम बजट की कमी के कारण माघ के अंत से रोक दिया है।

निरीक्षण टीम ने रुके हुए काम को लेकर अनजानगी जताई तो राखेप सदस्य सचिव रामचरित्र मेहताल से इस विषय में सवाल किया और तुरंत प्रशिक्षण पुनः शुरू करने का निर्देश दिया। टीम में सिद्धि व्यञ्जनकार और राजु सिंह भी शामिल थे।

मंत्री के सचिवालय ने बताया कि मंत्री पोखरेल ने सिद्धि व्यञ्जनकार को प्रमुख सलाहकार के रूप में नियुक्त किया है। सिद्धि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के प्रमुख राजनीतिक सलाहकार कुमार बेनका के भाई हैं। इसी तरह निशम महर्जन मुख्य निजी सहायक और राजु सिंह युवा विकास, अनुगमन एवं मूल्यांकन सलाहकार के रूप में नियुक्त हैं।

खेलकूद मंत्रालय में गुरुवार दोपहर पहुंचे तो मंत्री का कार्यालय खाली था, जबकि प्रमुख सलाहकार सिद्धि और टीम सचिवालय के कार्यालय में नजर आए।

खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल होने के बावजूद निरीक्षण से लेकर दिशा-निर्देश तक के कार्यों का नेतृत्व सिद्धि व्यञ्जनकार कर रहे हैं। बजट आवंटन से लेकर खिलाड़ियों की विदाई तक के कार्यों में सिद्धि मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके अनुसार मंत्रालय के भीतर ‘सस्मित ने मुझे शिक्षा देखो कहा है, खेलकूद कार्य मुझे देखना है’।

खेलकूद में आने वाली समस्याओं की जानकारी प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह कुमार बेनका को देते हैं और कुमार अपने भाई सिद्धि को निर्देश देते हैं। इस प्रकार सिद्धि जिम्मेदारी लेकर खेलकूद मंत्रालय के काम आगे बढ़ा रहे हैं।

कर्मचारियों को निर्देश देना और खेलकूद में आई समस्याओं का पूरा लेखा-जोखा सिद्धि ही कर रहे हैं। सलाहकार की भूमिका सलाह देने तक सीमित नहीं है, इस पर सिद्धि ने कहा, ‘‘अब खेलकूद की स्थिति जो है, उसी के बारे में संवाद करते रहेंगे।’’

सिद्धि ने कहा कि उन्हें आवश्यकता पड़ने पर ही मंत्रालय जाना पड़ता है और फिलहाल मंत्रालय का कामकाज कैसा चल रहा है, इस पर वे कोई साफ प्रतिक्रिया नहीं दे रहे। वहीं राजु सिंह ने कहा, ‘‘हम ही खेलकूद में काम कर रहे हैं। मंत्री को हमने काम में शामिल नहीं किया है। मुख्य बात बजट है, उसके अलावा कुछ भी नहीं। मिशन हम ही चला रहे हैं।’’

राजु सिंह ने बताया कि टीम सुबह ७ बजे से रात ११-१२ बजे तक मंत्रालय में काम कर रही है।

आमतौर पर मंत्री सलाहकारों को सलाह देने के उद्देश्य से नियुक्त करते हैं, लेकिन खेलकूद क्षेत्र में सिद्धि व्यञ्जनकार मंत्री समकक्ष काम कर रहे हैं, ऐसा खेलकूदकर्मी कहते हैं।

राखेप सदस्य सचिव रामचरित्र मेहताले सिद्धि के निर्देश स्वीकार किए हैं और मंत्रालय के काम में सहयोग के उद्देश्यों से कार्य आगे बढ़ रहा है।

खेलकूद में मंत्री का न्यूनतम ध्यान

लगभग एक महीने नियुक्ति मिलने के बाद खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल धनगढी के फाप्ला क्रिकेट मैदान में जाकर केवल बैटिंग ही कर पाए हैं। राष्ट्रीय खेलकूद परिषद के निरीक्षण में भी उन्होंने अधिक समय शिक्षा संबंधित विषयों पर दिया।

उनकी एक महीने की उपलब्धि में राखेप निरीक्षण, एशियन बीच गेम्स में कबड्डी और कुश्ती टीम को विदाई देना आदि शामिल हैं, इसके अलावा फाप्ला मैदान में प्रर्दशन सीमित है।

शिक्षा मंत्रालय के नजदीक होने के कारण वह अधिकतर समय खेलकूद से अधिक शिक्षा मंत्रालय में व्यस्त दिखते हैं। उनके सोशल मीडिया पोस्ट भी इसे प्रमाणित करते हैं।

एसईई परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को शुभकामना देने और परीक्षा समाप्ति के बाद बधाई देने के अलावा मंत्री पोखरेल कराटे वन प्रीमियर लीग २०२६ में रजत पदक जीतने वाली एरिका गुरुङ को सम्मानित करने की तैयारी कर रहे हैं।

खेलकूद मंत्रालय में सरकार का समय कम होने के कारण एक कर्मचारी ने कहा, ‘‘नियमित गतिविधि ही हो रही है, कोई विशेष बात नहीं है। जब वे काठमांडू में रहते हैं तब मंत्रालय में केवल १-२ घंटे आते हैं।’’

अधिकांश लोगों का मानना है कि मंत्री शिक्षा मंत्रालय पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और खेलकूद को नजरअंदाज कर रहे हैं। राखेप के एक बोर्ड सदस्य ने कहा, ‘‘वर्तमान खेलकूद मंत्री ने खेलकूद के लिए पाँच मिनट भी समर्पित नहीं किया है।’’

पुटिन ने आर्मेनियाई नरसंहार को 20वीं सदी की सबसे भयानक त्रासदी बताया

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आर्मेनियाई नरसंहार को 20वीं सदी की सबसे भयानक त्रासदी बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है। पुतिन ने कहा कि जातीय और धार्मिक घृणा, राष्ट्रवाद और जेनोफोबिया ने तत्कालीन सभ्य दुनिया को स्तब्ध कर दिया था। वर्ष 1915 से 1923 तक ऑटोमन साम्राज्य द्वारा 10 लाख से 15 लाख आर्मेनियाई लोगों की सुनियोजित सामूहिक हत्या की गई थी। 11 वैशाख, काठमाण्डू।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आर्मेनियाई नरसंहार के 111वें स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में एक विशेष संदेश के माध्यम से इस घटना को 20वीं सदी की सबसे भयावह त्रासदी के रूप में वर्णित किया है। शुक्रवार को जारी संदेश में पुतिन ने नरसंहार के हजारों पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए निर्दोष लोगों की सामूहिक ह्त्या और देश निकाला की कड़ी निंदा की है।

अपने संदेश में पुतिन ने जातीय और धार्मिक घृणा, राष्ट्रवाद एवं जेनोफोबिया से उत्पन्न खतरनाक परिणामों ने तत्कालीन पूरी सभ्य दुनिया को चकित कर दिया था, उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि सन 1915 में रूस, ब्रिटेन और फ्रांस ने संयुक्त रूप से इसे मानवता के खिलाफ अपराध के रूप में निंदा की थी और रूस का रुख हमेशा सजीव एवं स्पष्ट रहा है।

आर्मेनियाई नरसंहार प्रथम विश्व युद्ध के दौरान (1915 से 1923) ऑटोमन साम्राज्य (आज के तुर्की) द्वारा अपने अधीनस्थ अल्पसंख्यक आर्मेनियाई नागरिकों पर की गई सुनियोजित और व्यवस्थित सामूहिक हत्या तथा जातीय सफाई थी। इस दुखद घटना में अनुमानित 10 लाख से 15 लाख आर्मेनियाई लोगों की हत्या कर दी गई।