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लेखक: space4knews

सुझन लामा के नेतृत्व वाले एनआरएनए को पुर्तगाल में सरकारी मान्यता प्राप्त


२३ जेठ, लिस्बन। पुर्तगाल में स्थापित तीन गैर-आवासीय नेपाली संघ (एनआरएनए) में से सुझन लामा के नेतृत्व वाली कार्यसमिति को सरकारी मान्यता मिल गई है। एक साल पहले तीन समितियाँ बनी थीं और सभी एनआरएनए समानांतर रूप से गतिविधियाँ चला रहे थे।

एक साल पहले सुझन लामाले अपने नेतृत्व वाली समिति को वैधानिक और कानूनी मान्यता दिलाने के लिए पुर्तगाल सरकार को अवगत कराया था। एनआरएनए सचिव सुरज भण्डारी ने शुक्रवार को जारी बयान में बताया कि लामा अध्यक्ष समिति को सरकारी निकाय द्वारा मान्यता दी गई है।

सन् २०२५ के अक्टूबर में पुर्तगाल के न्याय मंत्रालय के अधीन रजिस्ट्रेशन और नोटरी संस्था (आइआरएन) में लामा ने गैर-आवासीय नेपाली संघ राष्ट्रीय समन्वय परिषद, पुर्तगाल को मान्यता एवं सरकारी अभिलेखों में नवीनीकरण हेतु आवेदन दिया था।

उसी आवेदन पर आइआरएन ने शुक्रवार को निर्णय जारी कर लामा नेतृत्व समिति को सरकारी संरचना में अपडेट करते हुए प्रमाणपत्र प्रदान किया। इसके साथ ही लामा नेतृत्व वाली एनआरएनए को पुर्तगाल में आधिकारिकता और कानूनी मान्यता प्राप्त हुई है। ‘आइआरएन से न्यायसंगत निर्णय आया है, हमें आधिकारिकता मिली है,’ लामा ने कहा, ‘हमारी मुख्य चिंता यह सुनिश्चित करना है कि मानव तस्करों और भ्रष्टाचारियों को गैर-आवासीय नेपाली संघ के नाम पर गलत कार्य करने से रोका जाए।’ पुर्तगाल के कानून के अनुसार मान्यता मिलने के बाद अन्य समूहों द्वारा एनआरएनए के नाम पर गतिविधियाँ अवैध होंगी, उन्होंने बताया।

कंपनी तथा संघ संस्थाओं के रजिस्ट्रेशन और विवाद निपटान के सरकारी निकाय आइआरएन द्वारा लामा नेतृत्व समिति को मान्यता मिलने पर अन्य समूहों ने भी आश्चर्य व्यक्त किया है। पुर्तगाल में एनआरएनए के तमाम समूहों में बमबहादुर जिसी और दीपा काफ्ले के अध्यक्षत्व में दो अन्य समितियाँ हैं, जिनकी लेखा जांच करने वाली कंपनी एक ही है।

सन् २०२३ से पुर्तगाल में एनआरएनए की आधिकारिकता विवाद के कारण सरकारी अभिलेखों को अपडेट नहीं किया जा सका था।

सन् २००६ में स्थापित पुर्तगाल की गैर-आवासीय नेपाली संघ २०२३ से विभाजित हो गई थी। रविन अधिकारी के नेतृत्व में शुरू हुए विवाद ने २०२३ में दो समितियाँ बना दीं और २०२५ तक एक और समानांतर समिति जुड़कर कुल तीन एनआरएनए हो गए।

एकता की कोशिशें जारी हैं, यह खबर आई, काफ्ले ने बताया

एनआरएनए पुर्तगाल की अन्य अध्यक्ष दीपा काफ्ले ने बताया कि एकता प्रक्रियाओं के बीच ऐसे समाचार आने पर वे हैरान हैं।

शुक्रवार दोपहर को उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि सोशल मीडिया पर संस्था की आधिकारिकता लामा नेतृत्व वाली समिति के नाम आने की जानकारी मिली है। ‘बमबहादुर दाई और मैं दो समितियों को एकजुट करने के लिए लंबे समय से बातचीत में हैं। वर्तमान समाचार के अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि कागजों पर दो अलग-अलग व्यक्ति के नाम संस्था हैं। इस पर हम अभी भी बातचीत कर रहे हैं,’ काफ्ले ने कहा, ‘जहाँ तक मेरी और बमबहादुर दाई की समिति का सवाल है, दोनों संस्थाओं के खाता परीक्षक एक हैं, हम साथ में काम कर रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि लामा समिति को कैसे कागजात और आइआरएन से मान्यता मिली।’

उन्होंने बताया कि जिसी और मैं सहमत होने पर लामा से एकता का प्रस्ताव रखने को तैयार हूं। काफ्ले ने कहा कि पुर्तगाल के कानून के अनुसार लामा के माध्यम से संस्था का नवीनीकरण हुआ हो सकता है, और अब तक किसी समिति ने आधिकारिकता का दावा नहीं किया था।

इस बारे प्रतिक्रिया मांगने पर जिसी ने संपर्क करने से मना कर दिया।

४६ लाख से अधिक रुपये की गबन का आरोप

एनआरएनए सचिव सुरज भण्डारी ने शुक्रवार को जारी बयान में बताया कि संस्था के बैंक खाते से ४६ लाख से अधिक नेपाली रुपए की चोरी हुई है। सरकारी निकाय द्वारा प्रमाणपत्र मिलने के बाद कुछ ही देर में उन्होंने बैंक विवरण प्राप्त किए, जिनसे पता चला कि अन्य समूह के पदाधिकारियों ने २६,६५७ यूरो का गबन किया है।

सचिव भण्डारी के अनुसार, यह राशि आधिकारिक भुगतान के तहत इकट्ठा कर बैंक खाते में जमा की गई थी, लेकिन वर्तमान में बैंक खाते में केवल ३२४ यूरो ही मौजूद हैं। उन्होंने संस्था के नाम पर संग्रहित धन को संस्था के खाते में रखने का आग्रह किया है।

सभी को मिलाकर आगे बढ़ने का संकल्प: लामा

एनआरएनए पुर्तगाल के अध्यक्ष सुझन लामाले एकता, पारदर्शिता और आपसी सम्मान के साथ आगे बढ़ने का संकल्प जताया है। शुक्रवार शाम संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘लहरें आने पर पहाड़ भी गिर जाते हैं, इसलिए अतीत को छोड़कर सभी के साथ सहयोग कर आगे बढ़ने का प्रयास करूंगा।’

तीन वर्षों से गैर-आवासीय नेपाली संघ को पुर्तगाल में कानूनी मान्यता न मिलने से उत्पन्न भ्रम समाप्त हो गया है और अब समुदाय के लिए उचित तथा विधिसम्मत संरचना तैयार हो गई है। उन्होंने कहा, ‘गैर-आवासीय नेपाली लोगों के हित में बहुत काम करने हैं। इसलिए सरकारी मान्यता मिलने के बाद संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि अधिक जिम्मेदारी के साथ सेवा के लिए तैयार हूं।’

धवलशमशेर राणा और दुर्गा प्रसाई की नई पार्टी राजसंस्थावादियों के लिए ‘रास्वपा’ जैसी प्रभावशाली भूमिका निभा सकती है

“न लौटने की कसम खाकर” राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) से निष्कासित नेता धवलशमशेर राणा ने दुर्गा प्रसाई के साथ मिलकर नई पार्टी बनाने का निर्णय लिया है। नई पार्टी के भविष्य को लेकर कई लोग जिज्ञासु हैं, लेकिन राणा इस बारे में ‘ऐसा होगा या नहीं’ स्पष्ट नहीं कह पा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम जनता, देश और अपने मुद्दों के प्रति भरोसेमंद और ईमानदार बने रहेंगे।”
नेता राणा ने राजसंस्था पुनर्स्थापना के मुद्दे को राप्रपा में आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है और इसके पीछे नेतृत्व के कार्यशैली को मुख्य कारण माना है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राप्रपा अध्यक्ष राजेन्द्र लिङ्देन ने आरोप लगाते हुए कहा, “राणा ने पार्टीहीन लोगों के साथ मिलकर राजसंस्था पुनर्स्थापना के मुद्दे को बदनाम करने का काम किया है।”
उनका इशारा काठमांडू के तिनकुने में साल २०८१ चैत्र १५ को हुई उस घटना की तरफ था, जिसमें दो लोगों की मौत हुई थी। राजावादी समूहों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की घटना में राणा, प्रसाई और रवींद्र मिश्र को गिरफ्तार कर गंभीर आरोप लगाये गए थे। राणा और प्रसाई नई पार्टी गठन के लिए प्रगतिशील हैं। पूर्व उपाध्यक्ष मुकुन्दश्याम गिरी के अनुसार पार्टी नेतृत्व की खराब शैली के कारण “लगभग दुर्घटना का अनुभव रखने वाले और सैद्धांतिक विचारधारा वाले नेतृत्व के कारण नई पार्टी बनाने की आवश्यकता उत्पन्न हुई है।”
युवा नेता रंजन कार्की कहते हैं कि राणा पार्टी अध्यक्ष और प्रसाई वरिष्ठ नेता होंगे। वर्तमान में प्रधानमंत्री बने वालेन्द्र शाह ‘बालेन’ रास्वपा के चुनाव पूर्व वरिष्ठ नेता के रूप में सभापति रवि लामिछाने के साथ काम कर रहे हैं। कार्की बताते हैं, “राप्रपा को पूर्वपंचों की विरासत माना जाता था, जिसे हम पुनर्गठित कर रहे हैं। हम हर स्तर पर ६० प्रतिशत युवा और महिला सहभागिता सुनिश्चित करते हुए तकनीक के अनुकूल पार्टी बना रहे हैं।”
क्या रास्वपा का विकल्प बन सकती है? रास्वपा गठित करते समय पार्टी के चेहरे पुराने दलों जैसे नेपाली कांग्रेस, नेकपा एमाले और नेकपाओं के दीर्घकालीन नेताओं से अलग थे। दल की संरचना में व्यवसाय, विशेषज्ञता, आयु और क्षेत्रीय विविधता को भी शामिल किया गया था। क्या राणा और प्रसाई की नई पार्टी राजसंस्थावादियों के लिए रास्वपा जैसी नई पहचान स्थापित करने का लक्ष्य रखती है?
मुकुन्दश्याम गिरी का मानना है कि रास्वपा देश को आगे ले जाने की कोशिश कर रही है, लेकिन लक्ष्य में असफल रहने से वैकल्पिक राजनीतिक ताकत की आवश्यकता उत्पन्न होती है। हालांकि वे कई बातें बदलने के लिए तैयार हैं। युवा नेता कार्की कहते हैं कि दक्षिणपंथी राजनीतिक ताकत का खाली स्थान है और उनकी नई पार्टी इसे भर देगी, जो रास्वपा जैसा राजसंस्थावादी दल बनेगी। “गणतंत्रवादियों की मजबूत पार्टी रास्वपा है, लेकिन उसे चुनौती देने के लिए राष्ट्रीय दक्षिणपंथी पार्टी का निर्माण हो रहा है,” वे कहते हैं।
“हमारा लक्ष्य धर्म, संस्कृति और इतिहास के संरक्षण के साथ-साथ राजसंस्था और प्रजातंत्र के उत्थान को सुनिश्चित करना है,” राणा कहते हैं। “हम पूरी कोशिश करेंगे, यदि नेपाली जनता समर्थन करेगी तो भविष्य उज्ज्वल होगा, वरना यह संभव नहीं होगा।” राप्रपा नेता राजाराम बर्तौला के अनुसार नई पार्टी के नेतृत्व में धवलशमशेर राणा साफ सुथरे हैं, लेकिन उन्हें राजनीतिक स्थिरता की कमी दिखती है। बर्तौला कहते हैं, “दुर्गा प्रसाई के साथ उनकी साझेदारी कितनी लंबी और संगठित होगी, इस पर चिंता है। इनके बीच उतार-चढ़ाव महत्वपूर्ण पहलू हैं।”
नई पार्टी राजसंस्था और हिन्दूवादी ‘वोट बैंक’ पर ठोस प्रभाव डाल सकती है, इस संभावना से वे इनकार नहीं करते। “लोग नए स्वाद की तलाश में हैं, लेकिन वे कितनी लोकप्रियता हासिल करते हैं यह महत्वपूर्ण है,” उन्होंने कहा। “दुर्गा प्रसाई की एक प्रकार की लोकप्रियता है, उसे प्रभावशाली ताकत बनाने का प्रयास गलत नहीं।”

तिमी, सहारा, चिसो हावाले और अन्य – नई संगीत प्रस्तुतियाँ

गीत भी मनुष्यों की तरह होते हैं। जन्म लेते हैं, बढ़ते हैं और उनकी अपनी यात्रा होती है। उनके अपने उद्देश्य भी होते हैं। आजकल हर सप्ताह कई नए गीत रिलीज़ होते हैं – फिल्मी, बैंड के, स्वतंत्र कलाकारों के। ये सभी गीत उतनी प्रचार नहीं पाते। यहाँ हमारे कुछ नए गीत हैं, जो मुख्य रूप से अपनी यात्रा में हैं और थोड़े प्रचार के साथ आए हैं :

सहारा : श्रावण के श्रेष्ठ
वे नेपाली संगीत की दुनिया में एक नई प्रतिभा हैं। ‘सहारा’ उन शब्द और संगीत का गीत है। गीत के नाम की तरह इसमें अपने प्रेम का सहारा और आशा दर्शाई गई है। यह एक प्रेमी की अपेक्षा और प्रतिज्ञा प्रस्तुत करता है, जो प्रेम की मूर्तता व्यक्त करता है। इस गीत का म्यूजिक वीडियो भी उत्कृष्ट बना है।

चाहना : विपुल महत
यह गीत बहुत ही आनंददायक और दिल को छूने वाला है। फोक, फंक और कंट्री शैली का संगम इस गीत में है, जिसमें प्रेम संबंधों की विभिन्न अपेक्षाएं दर्शाई गई हैं। प्रेमिका अपनी प्रेमी को याद कर सदैव प्यार करने की चाह, छाया की तरह साथ देने की भावना इसमें समाहित है। विपुल ने स्वयं इसके शब्द और संगीत रचे हैं जिससे गीत मनमोहक बन गया है।

ए कान्छी : राएबा और त्रिशला गुरुङ
यह गीत एक मनोरंजक दोहोरी शैली में तैयार किया गया है। प्रेम के विषय पर लड़का और लड़की अपने-अपने तर्क और भावनाएँ प्रकट करते हैं, जो सुनने में आनंददायक लगता है। दोनों प्रेम करते हैं, कुछ विवाद या समस्या है, और वही गीत का केंद्र विषय बना है।

सम्हाल्दै छु : जून
शुद्ध रॉक शैली में निर्मित यह गीत कुछ जगहों पर सुंदर ऑडियो प्रभावों के माध्यम से नई अनुभूति प्रदान करता है। गीत का मूल विचार अलगाव के बाद आने वाली स्थितियाँ और भावनाएं हैं। प्रेम टूटने के बाद व्यक्ति में क्या होता है, क्या महसूस करता है, कैसी प्रतिक्रिया होती है यह सब इसमें समाहित है।

रियागम्यान : डोङ
नेपाली रैप सीन के प्रसिद्ध रैपर डोङ ने वाइल्ड मार्टिन और बुल पी के साथ मिलकर एक दमदार रैप प्रस्तुत किया है। सामाजिक मीडिया की कुरूपताओं, व्यक्तिगत संघर्षों, दोस्ती और व्यक्तित्व जैसे विषयों पर आधारित यह रैप अभद्र भाषा के बिना विभिन्न टेम्पो में पेश किया गया है, जो अलग अनुभव कराता है।

चिसो हावाले : सुभान
सुभान नेपाली संगीत में नई एंट्री लेने वाले कलाकार हैं। लंबे अंतराल के बाद आए इस गीत में प्रेमिल और रोमांटिक भाव प्रभावपूर्ण रूप से व्यक्त हुए हैं। यात्रा के दौरान प्लेलिस्ट में रखा जा सकने वाला यह गीत प्रेमी के साथ खूबसूरत रिश्ते को दर्शाता है।

तिमी : गौरव
अगर आप स्वतंत्र शैली के और कई उपकरणों से सुसज्जित गीत पसंद करते हैं तो यह गीत आपकी नई प्लेलिस्ट में शामिल हो सकता है। प्रेरणादायक शब्दों से भरा यह गीत अकेलेपन या दुःख के समय सांत्वना और उत्साह देता है।

इसके अलावा मनिष अधिकारी का ‘एउटा शब्द’, कमल प्रसाईं का ‘निम्तो’, एड्रिन प्रधान का ‘मे सायर हुँ’, मेलिना राई का ‘टुक्राएर मेरो माया’, ‘कुरा बुझेसी’, एलिना चौहान का ‘दोषी होइन दोषी देखाइस्’, वाङ का ‘सकिनँ’ जैसे गीत भी सुने जा सकते हैं।

राजदूत नियुक्ति के लिए लगभग तीन हजार आवेदन प्राप्त

२२ जेठ, काठमाडौँ। सरकारले पहिलो बार खुल्ला प्रतिस्पर्धाद्वारा राजदूत नियुक्ति प्रक्रिया अघि बढाएपछि लगभग तीन हजार आवेदन प्राप्त भएका छन्। परराष्ट्र मन्त्रालयले जेठ १४ देखि २२ गतेसम्म आवेदन आह्वान गरेको थियो। यस अवधिमा अनलाइन, इमेल तथा भौतिक माध्यमबाट ठूलो संख्यामा आवेदन प्राप्त भएको मन्त्रालयले जनाएको छ। हाल ३४ देशमा नेपाली राजदूतावास सञ्चालनमा रहेका छन्। तीमध्ये १७ देशमा राजनीतिक नियुक्तिको माध्यमबाट र बाँकी १७ देशमा परराष्ट्र मन्त्रालयका कर्मचारी पठाउने गरिन्छ। तीमध्ये १७ देशका राजदूत पदहरू हाल खाली रहेका छन्।

सरकारले १३ देशका लागि नाम तोकेर आवेदन आह्वान गरेको थियो भने इच्छुकले अन्य देशका लागि पनि नाम उल्लेख गरी आवेदन दिन सक्ने व्यवस्था मिलाइएको छ। पूर्व सुशीला कार्की नेतृत्वको सरकारले राजनीतिक नियुक्ति प्राप्त १० देशका राजदूतहरू फिर्ता बोलाएको थियो। त्यसपछि बालेन्द्र शाह नेतृत्वको सरकारले ती राजनीतिक नियुक्ति पाएका व्यक्तिहरूलाई पदमुक्त गरेको थियो। राजदूत पद खाली भएपछि सरकारले पहिलोपटक खुला प्रतिस्पर्धामार्फत आवेदन आह्वान गरेको हो।

मन्त्रालय स्रोतका अनुसार प्राप्त आवेदनमध्ये केही दोहोरिएको र केही व्यक्तिको सिफारिसका कारण आवेदन संख्या बढी देखिएको छ। सबै आवेदनहरूको पुष्टि र प्रमाणीकरणपछि वास्तविक संख्या सार्वजनिक गरिनेछ। आवेदनहरूको निश्चित विवरण तयार भएपछि मन्त्रालय आवश्यक स्क्रिनिङ प्रक्रिया पूरा गरी योग्य उम्मेदवारहरूको सूची मन्त्रिपरिषदमा पठाउने व्यवस्था छ। मन्त्रिपरिषदले सिफारिस गरेका उम्मेदवारको संसदीय सुनुवाइपछि राष्ट्रपतिबाट राजदूतको नियुक्ति हुनेछ। नियुक्तिपछि राजदूतहरूले परराष्ट्र मन्त्रालयसँग कार्यसम्पादन सम्झौता गरी जिम्मेवारी सम्हाल्ने व्यवस्था पनि रहेको छ।

मन्त्रालयले ‘राजदूत नियुक्ति सम्बन्धी निर्देशिका, २०७५’ (संशोधनसहित) अनुसार आवेदन आह्वान गरेको हो। निर्देशिका अनुसार, राजदूत बन्न कम्तीमा ३५ वर्ष उमेर पूरा भएको नेपाली नागरिक हुनु पर्नेछ र मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालयबाट कम्तीमा स्नातक तह उत्तीर्ण गरेको हुनु पर्नेछ। साथै, भ्रष्टाचार वा नैतिक पतन देखिने कुनै फौजदारी अपराधमा सजाय नलिएको, विदेशी राष्ट्रको स्थायी वा अस्थायी आवासीय अनुमति (पीआर वा ग्रिनकार्ड) नलिएको हुनुपर्नेछ। परराष्ट्र नीति, अन्तर्राष्ट्रिय सम्बन्ध वा कूटनीतिक क्षेत्रमा अनुभव भएको र अंग्रेजी भाषामा राम्रो दक्षता भएको योग्यता पनि आवश्यक छ।

मध्यरात्रि हत्या, सुबह मंदिर में प्रायश्चित करने का खुलासा

झापाका दमक नगरपालिका में २१ वर्षीय रमा तिवारी की हत्या के आरोप में पुलिस ने भारतीय नागरिक रमेशकुमार पंडित को गिरफ्तार किया है। लेन-देन के विवाद में हत्या कर शव रतुवा खोला के पुल के नीचे फेंका गया था, तथा सीसी कैमरे की फुटेज के आधार पर आरोपी को पकड़ा गया है। आरोपी पंडित के खिलाफ जबरदस्ती करण और हत्या के मामले में दमक पुलिस स्टेशन द्वारा अनुसंधान चलाया जा रहा है।

२२ जेठ, विराटनगर। झापा के दमक नगरपालिका-८ की २१ वर्षीय रोमा नामक रमा तिवारी की हत्या में संलिप्तता के आरोप में पुलिस ने एक भारतीय नागरिक को गिरफ्तार किया है। १३ जेठ की मध्यरात्रि को हुई मुलाकात के बाद लेनदेन विवाद के कारण तिवारी की हत्या करने का आरोप है। गिरफ्तार आरोपी, ३४ वर्षीय रमेशकुमार पंडित, जो भारत के अररिया जिले के निवासी हैं और दमक में रह रहे हैं, को पुलिस ने दमक नगरपालिका-५ के एक आश्रय स्थल से पकड़ा। उन्होंने हत्या में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है, जिसके बाद पुलिस ने १४ जेठ को मामले का विवरण सार्वजनिक किया।

पुलिस के अनुसार, पंडित के विरुद्ध जबरदस्ती करण और हत्या से जुड़े अपराध में जांच चल रही है, जिसका विवरण झापा पुलिस के सहायक प्रवक्ता, निरीक्षक सुमन भानियाँ ने दिया।

पुलिस ने जानकारी दी कि पंडित दमक में टाइल्स और मार्बल लगाने का ठेका कार्य करते थे। जांच में पता चला है कि घटना से पहले मृतक तिवारी और आरोपी पंडित के बीच मुलाकात हुई थी। आरोपी के आवास के पास विवाद के बाद यह हत्या हुई, पुलिस सूत्र ने कहा।

मध्यरात्रि में हत्या, सुबह मंदिर में पूजा

पुलिस के अनुसार घटना रात के लगभग ११ बजे हुई। घटनास्थल आरोपी के कमरे के निकट है। युवती की हत्या के बाद पंडित ने अपने कमरे से बोरा ला कर शव पैक किया। उसी रात भारतीय नंबर बोर्ड वाली मोटरसाइकिल से शव को दमक नगरपालिका-१० के सेतुमारी क्षेत्र के पुल के नीचे गिरा दिया। मृतिका की चप्पल घटनास्थल के नजदीक मिली।

१३ जेठ को शव फेंका गया था। १६ जेठ को स्थानीय निवासियों ने रतुवा खोला के पुल के नीचे शव देखा और पुलिस को सूचना दी। जांच के दौरान पुलिस ने सीसी कैमरा फुटेज के आधार पर आरोपी युवक को गिरफ्तार किया। पंडित ने बताया कि उनकी मृतका से पुरानी पहचान है। घटना की रात उनकी उनसे मुलाकात हुई थी।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, हत्या करके शव निपटाने के बाद आरोपी सो नहीं पाए। १४ जेठ सुबह दमक के पशुपतिमंदिर में प्रायश्चित करते हुए पूजा की।

‘रात में हल्ला होने पर बदनामी का डर था, इसलिए हत्या की गई। शव को निपटाने के बाद अगले दिन सुबह मंदिर पहुंच कर उन्होंने अपनी गलती के लिए माफी मांगी,’ पुलिस सूत्र ने बताया, ‘शव को हटाने में भारतीय नंबर की मोटरसाइकिल का उपयोग किया गया।’

मृतक की पहचान खुलने पर उनके परिवार वालों ने बताया कि वे किशोरी थीं जिन्हें उनके प्रेमी ने १३ जेठ की रात मिलने बुलाया था, जहां उनकी हत्या हुई। शुरुआत में पुलिस ने प्रेमी पर शक किया था, लेकिन जब संलिप्तता के सबूत नहीं मिले तो जांच को व्यापक बनाया गया और अंततः पंडित तक पहुंचा गया।

इस घटना की जांच इलाका पुलिस कार्यालय दमक के डीएसपी हरिबहादुर बस्नेत की टीम ने की।

आठ विश्वविद्यालयों के उपकुलपतियों की शॉर्टलिस्ट प्रकाशित, कौन-कौन शामिल हैं?

आठ विश्वविद्यालयों के उपकुलपतियों की सिफारिश समिति ने उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्ट सार्वजनिक की है। शॉर्टलिस्ट में शामिल उम्मीदवारों पर 2083 जेठ 25 तक सुझाव और राय दी जा सकती है। 22 जेठ, काठमांडू। आठ सरकारी विश्वविद्यालयों के उपकुलपतियों की शॉर्टलिस्ट जारी की गई है। त्रिभुवन विश्वविद्यालय, पोखरा विश्वविद्यालय, पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय, लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय, कृषि एवं वन विज्ञान विश्वविद्यालय, मध्यपश्चिम विश्वविद्यालय, सुदूर पश्चिम विश्वविद्यालय और राजर्षि जनक विश्वविद्यालय के उपकुलपतियों के उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्ट सार्वजनिक की गई है।

उपकुलपति चयन के लिए गठित सिफारिश समिति ने शुक्रवार को उक्त सूची प्रकाशित की। शॉर्टलिस्ट में शामिल उम्मीदवारों के विषय में 2083 जेठ 25 तक सुझाव और राय देने की व्यवस्था है। त्रिभुवन विश्वविद्यालय के उपकुलपति पद के लिए 50, पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय 38, पोखरा विश्वविद्यालय 38, सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालय 19, मध्यपश्चिम विश्वविद्यालय 20, लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय 11, कृषि एवं वन विज्ञान विश्वविद्यालय 15, और राजर्षि जनक विश्वविद्यालय के लिए 27 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जो कुल 218 हैं।

विशेषज्ञों द्वारा प्रदान किए गए मूल्यांकन अंकों के आधार पर शॉर्टलिस्ट तैयार की गई है। 25 वैशाख को दस दिन का समय देते हुए नए उपकुलपतियों के लिए खुला आवेदन आमंत्रित किया गया था। अध्यादेश के माध्यम से उपकुलपतियों के पद से मुक्त होने के बाद नए उपकुलपति के चयन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। विश्वविद्यालय के कुलपति बालेन शाह ने शिक्षामंत्री सस्मित पोखरेल की अध्यक्षता में उपकुलपतियों के नाम सिफारिश करने के लिए एक सिफारिश समिति गठित की थी। उक्त समिति ने विशेषज्ञ के नेतृत्व में एक उपसमिति का गठन किया और विशेषज्ञों द्वारा दिए गए नंबर के आधार पर शॉर्टलिस्ट तैयार की।

त्रिविको उपकुलपति पदका यी हुन् १० दाबेदार

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा गरिएको।

  • त्रिभुवन विश्वविद्यालय के उपकुलपति चयन के लिए सिफारिश समिति ने ५० आवेदकों में से १० दाबेदारों की शॉर्टलिस्ट जारी की है।
  • शॉर्टलिस्ट में काठमांडू विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति भोला थापा और मध्यमपश्चिम विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति नन्द वहादुर सिंह सहित १० दाबेदार शामिल हैं।
  • इन १० उम्मीदवारों में से एक को त्रिभुवन विश्वविद्यालय का नया उपकुलपति नियुक्त किया जाएगा।

२२ जेष्ठ, काठमांडू। त्रिभुवन विश्वविद्यालय के उपकुलपति के लिए १० दाबेदारों की सूची सार्वजनिक की गई है।

सिफारिश समिति ने शुक्रवार को जारी की गई सूची में अमर प्रसाद यादव, कवि प्रसाद पौडेल, कृष्णराज आचार्य, गोविन्द सुवेदी, टंक नाथ धमला, तारा प्रसाद भुसाल, दुर्गा दत्त पौडेल, नन्द वहादुर सिंह, भोला थापा और राम प्रसाद रेग्मी के नाम शामिल हैं। थापा काठमांडू विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति हैं।

इसी तरह, सिंह मध्यमपश्चिम विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति हैं। त्रिभुवन विश्वविद्यालय के उपकुलपति पद के लिए कुल ५० लोगों ने आवेदन किया था।

उनमें से १० उम्मीदवारों की सूची तैयार की गई है। अब इनमें से एक उम्मीदवार को उपकुलपति बनाया जाएगा।

२७ देशों के ६०० प्रतिनिधियों की भागीदारी में छठा हिमालयन ट्रैवल मार्ट संपन्न

काठमाडौं में २७ देशों के ६०० से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ हिमालयन ट्रैवल मार्ट का छठा संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। पाटा नेपाल चैप्टर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में नेपाल को हिमालय का प्रवेश द्वार तथा पर्यटन सहयोग का प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया गया है। पाटा नेपाल के अध्यक्ष खेम लकाई ने बताया कि इस मार्केट ने पर्यटन विकास और अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ पहुँच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

एचटीएम २०२६ का छठा संस्करण २२ जेठ से २४ जेठ तक काठमाडौं में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में ७५ अंतरराष्ट्रीय खरीदार कंपनियों के प्रतिनिधि, ८० से अधिक विक्रेता और प्रदर्शक संस्थान तथा नेपाल समेत विभिन्न देशों के पर्यटन हितधारक कुल १०० से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों ने भाग लिया। पाटा नेपाल चैप्टर ने नेपाल टूरिज्म बोर्ड, नेपाल एयरलाइंस और विभिन्न साझेदार संस्थाओं के सहयोग से इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न करने की जानकारी दी है।

कार्यक्रम के अन्तर्गत व्यवसाय-से-व्यवसाय (बीटूबी) बैठकें, विचार नेतृत्व सत्र, गंतव्य अनुभव कार्यक्रम, नेटवर्किंग कार्यक्रम और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ शामिल थीं। इन गतिविधियों ने नवाचार, टिकाऊपन, विकासशीलता और सहयोग को नेपाल तथा विश्व पर्यटन विकास के प्रमुख स्तंभों के रूप में प्रस्तुत किया। समापन समारोह में नेपाल टूरिज्म बोर्ड के स्थायी मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिकमत सिंह ऐयर ने नेपाल को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा देने में योगदान देने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि और साझेदारों को आभार व्यक्त किया।

जसपा नेपाल लुम्बिनी के गृहमंत्री और सांसदों से स्पष्टीकरण मांगने को तैयार

सर्वोच्च अदालत द्वारा अशोक राई के नेतृत्व वाली जसपा पार्टी का पंजीकरण रद्द किए जाने के बाद उस पार्टी के जनप्रतिनिधियों की कानूनी स्थिति पर प्रश्न उठे हैं। उपेन्द्र यादव के नेतृत्व वाली जसपा नेपाल ने अशोक राई के समूह से जुड़े लुम्बिनी और कोशी प्रदेश के सांसदों से स्पष्टीकरण मांगने की तैयारी की है। अशोक राई ने अदालत के फैसले को विभिन्न पार्टियों के साथ एकीकृत होकर नए तरीके से आगे बढ़ने का रास्ता खोलने वाला बताया। २२ जैठ, काठमांडू। सर्वोच्च अदालत ने अशोक राई नेतृत्व वाली जसपा पार्टी को मान्यता न देने के बाद इस पार्टी से बने प्रदेश सांसद, मंत्री और स्थानीय प्रतिनिधियों को उपेन्द्र यादव की जसपा नेपाल से स्पष्टीकरण देने को कहा है। निर्वाचन आयोग ने २०८१ में जसपा नेपाल से विभाजित हुई अशोक राई नेतृत्व वाली जसपा को दल के रूप में पंजीकृत किया था। इस निर्णय के खिलाफ उपेन्द्र यादव की पार्टी ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। न्यायाधीश त्रय कुमार रेग्मी, महेश शर्मा पौडेल और श्रीकांत पौडेल की पूर्ण पीठ ने राई नेतृत्व वाली जसपा के पंजीकरण को निरस्त कर दिया, जिससे पार्टी की कानूनी स्थिति समाप्त हो गई।

सर्वोच्च के इस आदेश के बाद राई के पार्टी से बने जनप्रतिनिधियों के दलगत अस्तित्व पर प्रश्न उठे हैं। वे कानूनी तौर पर अब जसपा नेपाल के जनप्रतिनिधि माने जाएंगे। ऐसे जनप्रतिनिधियों के खिलाफ पार्टी विभाजन कर अनुशासन विरुद्ध कार्य करने के आरोप में जसपा नेपाल स्पष्टीकरण मांगेगी। लुम्बिनी के आंतरिक मामला तथा कानून मंत्री आदेश कुमार अग्रवाल भी स्पष्टीकरण के दायरे में हैं। मंत्री अग्रवाल, लुम्बिनी प्रदेश के सांसद भण्डारीलाल अहिर और कोशी प्रदेश की सांसद निर्मला लिम्बु से स्पष्टीकरण मांगे जाने की जानकारी जसपा नेपाल के प्रवक्ता मनिष सुमन ने दी। अग्रवाल, अहिर और लिम्बु वे सांसद हैं जो जसपा नेपाल के विभाजन के बाद अशोक राई के नेतृत्व में बने जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) में शामिल हुए। जसपा नेपाल के प्रवक्ता सुमन के अनुसार, पार्टी छोड़कर अन्य पार्टी में गए सदस्यों के पद रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा, ‘उनसे स्पष्टीकरण लिया जाएगा, उसके बाद कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।’ कोशी प्रदेश सभा सदस्य निर्मला लिम्बु कहती हैं कि उन्हें दलत्याग अधिनियम के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती। ‘मैंने पार्टी नहीं छोड़ी है, न ही दूसरी पार्टी ज्वाइन की है। नेताओं के मतभेद के कारण पार्टी टूटने पर मैंने जसपा नेपाल को चुना है,’ लिम्बु ने कहा। लुम्बिनी प्रदेश के सांसद अहिर ने कहा कि सर्वोच्च के आदेश का पूरा पाठ आने के बाद निर्वाचन आयोग के निर्णय को देख अपनी राह तय करेंगे। ‘हम अभी सलाह-मशविरा कर रहे हैं। आयोग के निर्णय के बाद निष्कर्ष निकालेंगे,’ उन्होंने कहा। विभाजित दल को मान्यता न मिलने पर अशोक राई को जसपा के बजाय नया नाम रखना होगा। जसपा के नेता योगराज लिम्बु ने बताया कि सर्वोच्च के आदेश के बाद पार्टी को मजबूत बनाने पर चर्चा चल रही है। अध्यक्ष राई ने कहा कि इस फैसले से असमंजस में न पड़ें और सक्रिय बने रहें। उन्होंने कहा, ‘इससे विभिन्न पार्टियों के साथ एकीकृत होकर नए तरीके से आगे बढ़ने का रास्ता खुला है।’ राई ने फेसबुक पर लिखा, ‘इसका उपयोग एक अवसर के रूप में करते हुए तत्काल एकजुट पार्टी बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।’

पार्टी दर्ता रद्द होने के बाद लुम्बिनी के मंत्री और सांसदों से JSP नेपाल ने मांगा स्पष्टीकरण

समाचार सारांश

समीक्षा के बाद तैयार किया गया।

  • अशोक राई की नेतृत्व वाली JSP पार्टी के दर्ता को सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है, जिसके बाद उनके प्रतिनिधियों की कानूनी स्थिति पर सवाल उठे हैं।
  • उपेन्द्र यादव की नेतृत्व वाली JSP नेपाल असोक राई समूह से जुड़े लुम्बिनी और कोशी प्रदेश के सांसदों से स्पष्टीकरण मांगने की तैयारी में है।
  • अशोक राई ने अदालत के फैसले को विभिन्न पार्टियों के साथ एकता करके नई दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता बताया है।

बैशाख २२, काठमांडू – सर्वोच्च अदालत ने अशोक राई के नेतृत्व वाली JSP पार्टी को मान्यता न दिए जाने के बाद, उस पार्टी के प्रदेश सांसद, मंत्री और स्थानीय प्रतिनिधियों से उपेन्द्र यादव की नेतृत्व वाली JSP नेपाल ने स्पष्टीकरण मांगना शुरू कर दिया है।

निर्वाचन आयोग ने २०८१ साल (२०२४) में JSP नेपाल से अलग हुए अशोक राई के समूह को पार्टी के रूप में दर्ता किया था। इसके खिलाफ उपेन्द्र यादव की पार्टी ने आयोग के इस निर्णय को र सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी थी। न्यायाधीश कुमार रेग्मी, महेश शर्मा पौडेल और श्रीकांत पौडेल की पूर्ण पीठ ने राई की JSP समूह के दर्ता को रद्द कर कानूनी मान्यता को समाप्त कर दिया।

इस फैसले के बाद, राई समूह के निर्वाचित प्रतिनिधियों की पार्टी एकता को लेकर प्रश्न उठे हैं। कानूनी तौर पर अब वे JSP नेपाल के सदस्य माने जाएंगे। पार्टी ने उन प्रतिनिधियों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्णय लिया है जो पार्टी को भंग कर सक्रिय हैं।

पार्टी प्रवक्ता मनीष सुमन के अनुसार, JSP नेपाल लुम्बिनी के गृह और कानून मंत्री आदेश कुमार अग्रवाल, लुम्बिनी के सांसद भंडारीलाल अहिर और कोशी प्रदेश की सांसद निर्मला लिम्बू से स्पष्टीकरण मांगने की तैयारी कर रही है।

अग्रवाल, अहिर और लिम्बू सभी JSP नेपाल से पार्टी बंटने के बाद अशोक राई के JSP समूह में शामिल हुए थे।

प्रवक्ता सुमन ने कहा कि स्पष्टीकरण मिलने के बाद, पार्टी छोड़ कर अन्य समूह में गए इन सांसदों की संसदीय सीट निरस्त करने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। “पहले स्पष्टीकरण लिया जाएगा फिर कानूनी कार्रवाई की जाएगी,” उन्होंने बताया।

हालांकि, कोशी प्रदेश सभा सदस्य निर्मला लिम्बू ने पार्टी द्रोह कानून के तहत उनके विरुद्ध कार्रवाई न किए जाने का दावा किया है। “मैंने पार्टी नहीं छोड़ी है और न ही दूसरी पार्टी जाई हूं। नेतृत्व विवाद और पार्टी विभाजन के कारण मैंने JSP नेपाल में रहना चुना है,” लिम्बू ने कहा।

लुम्बिनी प्रदेश के सांसद भंडारीलाल अहिर ने कहा कि सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद वे निर्वाचन आयोग के निर्णय की पुन: समीक्षा कर निर्णय लेंगे। “इस समय हम परामर्श कर रहे हैं और आयोग के फैसले की समीक्षा कर निष्कर्ष निकालेंगे,” उन्होंने बताया।

पार्टी समूह ने आधिकारिक मान्यता खोने के बाद अशोक राई को अपनी पार्टी का नाम बदलना पड़ा है। JSP के नेता योगराज लिम्बू ने कहा कि सर्वोच्च के निर्णय के बाद पार्टी को मजबूत करने के लिए चर्चा जारी है।

अध्यक्ष राई ने आशावाद व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय विभिन्न पार्टियों के साथ एकता कर नए तरीके से आगे बढ़ने का रास्ता खोलता है। “यह निर्णय भ्रमित नहीं करना चाहिए, हम सभी से सक्रिय बने रहने का आग्रह करते हैं। इस से विभिन्न पार्टियों के साथ मिलकर नई रूपरेखा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा,” उन्होंने फेसबुक पर लिखा। “इसलिए अब तुरंत एकीकृत पार्टी गठन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए इस अवसर का सदुपयोग किया जा रहा है।”

श्रीलंका चेम्बर और नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के बीच निवेश संबंधी चर्चा

नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ और श्रीलंका के सिलान चेम्बर ऑफ कॉमर्स के बीच व्यावसायिक निवेश को बढ़ावा देने हेतु चर्चा सम्पन्न हुई है। महासंघ के उपाध्यक्ष नरेशलाल श्रेष्ठ ने जलविद्युत् तथा जड़ी-बूटी क्षेत्र में श्रीलंकाई व्यावसायियों से निवेश करने का आग्रह किया। सिलान चेम्बर के डेप्युटी सेक्रेटरी जनरल अलेका परेरा ने नेपाल में पर्यटन अवसंरचना, जलविद्युत् और जड़ी-बूटी उद्योगों में निवेश के लिए तत्परता व्यक्त की। २२ जेठ, काठमांडू। नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ (एफएनसीसीआई) और श्रीलंका के सिलान चेम्बर ऑफ कॉमर्स के बीच बीटूबी बैठक सम्पन्न हुई। महासंघ के वस्तुगत उपाध्यक्ष नरेशलाल श्रेष्ठ के नेतृत्व में आयोजित इस व्यावसायिक भ्रमण के दौरान दोनों देशों के उद्योगियों ने निवेश को प्रोत्साहित करने पर चर्चा की। इस बैठक में सिलान चेम्बर के उद्योगियों ने नेपाल में निवेश के लिए अपनी तत्परता जताई।

कार्यक्रम में नेपाली उद्योग व्यवसायी के प्रतिनिधित्व करते हुए महासंघ के उपाध्यक्ष नरेशलाल श्रेष्ठ ने बताया कि नेपाल में तत्काल ४० हजार मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन की क्षमता है और सरकार इसे खुशी-खुशी स्वीकार कर रही है। नेपाल में अब लगभग दो-तिहाई बहुमत वाली स्थिर सरकार है और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए आसान व्यवस्थाएं की जा रही हैं। साथ ही, सरकार ने विदेशी निवेश के लिए एक द्वार नीति अपनाई है। उन्होंने श्रीलंका की तरह नेपाल में भी जैविक जड़ी-बूटी उद्योग के लिए आवश्यक कच्चा माल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होने की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए श्रीलंकाई उद्योगियों से इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने का आग्रह किया। वर्तमान में नेपाल सस्ते दामों पर जड़ी-बूटी उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल का निर्यात करता है, अब उसका प्रसंस्करण कर वितरण कर लाभ लेने के लिए श्रीलंकाई व्यवसायियों से सहयोग की अपेक्षा की गई।

सरकार द्वारा जलविद्युत क्षेत्र में निवेश बढ़ावा देने के लिए सहज नीतियां बनाई गयी हैं, इसके संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ की ओर से श्रीलंकाई उद्योगियों को नेपाल में सहजता से निवेश करने के लिए सहुलियतें प्रदान की जाएंगी। यदि आप बड़े पैमाने पर निवेश करते हैं तो हम सरकार के साथ समन्वय कर सहजीकरण की कोशिश करेंगे।’ श्रीलंका में स्थित नेपाली दूतावास के फर्स्ट सेक्रेटरी सागर भंडारी ने भी स्थिर सरकार होने के कारण निवेश के लिए अनुकूल वातावरण होने की बात कही और जलविद्युत क्षेत्र में उच्च संभावनाएं देखते हुए निवेश की अपील की। कार्यक्रम में सिलान चेम्बर के डेप्युटी सेक्रेटरी जनरल अलेका परेरा ने नेपाल में पर्यटन पूर्वाधार, जलविद्युत और जड़ी-बूटी उद्योगों में श्रीलंकाई उद्योगियों की निवेश की तत्परता जताई। उन्होंने बताया कि जड़ी-बूटी उद्योग में श्रीलंका अग्रिम है और नेपाल में भी पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध होने के कारण उद्योग स्थापित करने की इच्छा है। इसके अतिरिक्त, नेपाल में श्रीलंका जैसे पर्यटन उद्योग की संभावनाएँ हैं और नेपाल सरकार यदि सहजीकरण करे तो बड़े निवेश की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। इस चर्चा में श्रीलंकाई उद्योगियों ने नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र में भी निवेश में रुचि दिखाई।

शीतलनिवास में युगकवि सिद्धिचरण श्रेष्ठ की 115वीं जयंती, क्षेत्री और शर्मा को सम्मानित किया गया (तस्वीरें)

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के बाद तैयार किया गया।

  • युगकवि सिद्धिचरण श्रेष्ठ की 115वीं जयंती के अवसर पर डॉ. दुबसु क्षेत्री और डॉ. गार्गी शर्मा को युगकवि सिद्धिचरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • शीतलनिवास में आयोजित विशेष समारोह में राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने उन्हें क्रमशः वर्ष 2082 और 2083 का यह पुरस्कार प्रदान किया।
  • समारोह में राष्ट्रपति पौडेल ने नेपाली भाषा, साहित्य और संस्कृति को मौलिक पहचान और गौरव के रूप में वर्णित किया।

22 जेठ, क़ाठमांडू। युगकवि सिद्धिचरण पुरस्कार समारोह में डॉ. दुबसु क्षेत्री और डॉ. गार्गी शर्मा को सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति निवास शीतलनिवास में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उन्हें युगकवि सिद्धिचरण पुरस्कार प्रदान किया गया।

युगकवि सिद्धिचरण श्रेष्ठ की 115वीं जयंती के अवसर पर डॉ. क्षेत्री को वर्ष 2025 (नया संवत 2082) और डॉ. शर्मा को वर्ष 2026 (नया संवत 2083) के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी प्रस्तुत की गईं।

अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने नेपाली भाषा, साहित्य और संस्कृति को हमारी मौलिक पहचान और गर्व का प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा कि साहित्य केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं बल्कि समाज को सचेत, जागरूक और संवेदनशील बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

‘साहित्य हमारे समाज, जनजीवन, लोकतंत्र, रूपांतरण, परिवर्तन, देशभक्ति और सामाजिक न्याय के लिए प्रेरणा प्रदान करता है और एक सभ्य, सुसंस्कृत समाज के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान देता है। यह समुदाय को जोड़ने, जागरूक बनाने और उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर करने की क्षमता रखता है,’ राष्ट्रपति पौडेल ने कहा।

राष्ट्रपति ने नेपाली भाषा, साहित्य, जनचेतना और राष्ट्रीय भावना के विकास में युगकवि सिद्धिचरण श्रेष्ठ के योगदान को भी याद करते हुए सम्मान व्यक्त किया।

राष्ट्रपति पौडेल ने जन्मभूमि के प्रति गहरा प्रेम, राष्ट्र के प्रति आस्था और जनजीवन के प्रति संवेदनशीलता को अभिव्यक्त करने वाली युगकवि सिद्धिचरण श्रेष्ठ की कविता ‘मेरा प्यारा ओखलढुंगा’ को जन्मभूमि के प्रति अगाध प्रेम की एक अविस्मरणीय रचना माना।

फिर से बढ़ा अंडे का दाम, एक क्रेट की कीमत कितनी हुई?

समाचार सारांश

  • नेपाल लेयर्स कुखुरापालक संघ ने शनिवार से लागू होने वाले सभी आकार के अंडों के फार्म सपोर्ट मूल्य में प्रति क्रेट १५ रुपये की बढ़ोतरी की है।
  • नए मूल्य के अनुसार, एक्सएल अंडा प्रति क्रेट ५६०, बड़ा अंडा ५४५ और मीडियम अंडा ५१५ रुपये तय किया गया है।
  • किसानों के फार्म समर्थन मूल्य बढ़ने के बावजूद उपभोक्ताओं को अंडे की खुदरा कीमत प्रति गोटा २५ रुपये ही समान बनी हुई है।

२२ जेष्ठ, काठमांडू। नेपाल लेयर्स कुखुरापालक संघ ने अंडों के फार्म समर्थन मूल्य को फिर से बढ़ा दिया है।

संघ ने पहले १२ जेष्ठ से लागू होने वाले मूल्य निर्धारण को ११ दिनों के अंदर ही संशोधित करते हुए शनिवार से लागू होने वाले नए मूल्य निर्धारित किए हैं।

आज शुक्रवार को काठमांडू में आयोजित उत्पादकों की भौतिक एवं आभासी बैठक में चितवन को आधार मानते हुए अंडों के दाम बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

संघ के नए निर्णय के अनुसार, सभी आकार के अंडों में प्रति क्रेट १५ रुपये की वृद्धि हुई है। एक क्रेट में ३० अंडे होते हैं।

अब फार्म पर ‘एक्सएल’ अंडे की कीमत प्रति क्रेट ५६० रुपये हो गई है, जो पहले ५४५ रुपये थी।

इसी प्रकार, जो बड़ा अंडा पहले प्रति क्रेट ५३० रुपये था, उसकी कीमत बढ़कर ५४५ रुपये हो गई है। मीडियम अंडे की कीमत भी ५०० रुपये से बढ़कर ५१५ रुपये हो गई है।

छोटे अंडों के मामले में पहले प्रति क्रेट ४०० रुपये तय थे, अब इसे सीधे प्रति पेटी ३ हजार रुपये कर दिया गया है।

हालांकि किसानों के फार्म समर्थन मूल्य बढ़े हैं, उपभोक्ताओं के लिए अंडों के खुदरा मूल्य में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। संघ के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य प्रति अंडा २५ रुपये ही बना हुआ है।


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दमक खोलामा बोरा भित्र शव फेला परेपछि अभियुक्त गिरफ्तार

२२ जेठ, काठमाडौं । झापाको दमकमा एक युवतीको हत्या गरी मेटेर बोरा भित्र राखेर खोलामा फालिएको घटनामा प्रहरी टोलीले अभियुक्तलाई गिरफ्तार गरेको छ । जिल्ला प्रहरी कार्यालय झापाले बिहीबार राति अभियुक्त पक्राउ परेको जानकारी दिएका छन् । दमक नगरपालिका–१० अन्तर्गत रतुवामाई खोलाको पुलमुनि जेठ १६ गते सेतो बोरा भित्र शव पोको पारिएको अवस्थामा एक युवतीको शव फेला परेको थियो । यो शव दमक–८ बसन्त टोल की २१ वर्षीय रोमा (रमा) तिवारीको रहेको पुष्टि गरिएको छ । उनको शव आफ्नै बुवा नारायण तिवारीले पनि सनाखत गरेका छन् ।

शव फेला परेपछि कोशी प्रदेश प्रहरी कार्यालय धरान र जिल्ला प्रहरी कार्यालय झापाको संयुक्त टोलीले अनुसन्धान थालेको थियो र अनुसन्धानबाट अभियुक्त पत्ता लागेको छ । प्रहरीले घटनास्थलको सूक्ष्म निगरानी, प्राविधिक विश्लेषण र त्यहाँका सीसीटीभी फुटेजहरूको अध्ययन गरी अभियुक्त पहिचान गरेको जानकारी दिएको छ । सोही अनुसार अभियुक्त भारतको बिहार प्रदेश अररिया जिल्लाका ३४ वर्षीय राकेशकुमार पण्डित रहेको खुलेको छ । उनी दमक नगरपालिका–५ मा डेरा गरी टाइल्स मिस्त्रीको रूपमा कार्यरत रहेको उल्लेख गरिएको छ । बिहीबार राति ११ बजे उनी कोठाबाटै पक्राउ परेका हुन् । प्रारम्भिक अनुसन्धानमा अभियुक्त पण्डितले हत्या गरेको स्वीकार गरेका छन् । उनले पैसा सम्बन्धी विवादपछि झगडा हुँदा हत्या भएको बताएको छ । प्रहरीले मृतक रोमाले लगाएको टी–सर्ट, पाइन्ट, जुत्ता र मृतकलाई लिएर गएको मोटरसाइकल पनि बरामद गरेको छ।

सुलभ और अंकिता ने १८वें इन्डो–नेपाल खुला कराटे प्रतियोगिता में एकल काता में स्वर्ण पदक जीते

१८वें इन्डो–नेपाल खुला कराटे प्रतियोगिता के एकल काता में नेपाल के सुलभ चौधरी और अंकिता पाण्डे ने स्वर्ण पदक प्राप्त किए हैं। मित्रपार्क स्थित टेक्सास कॉलेज में जारी इस प्रतियोगिता में नेपाल और भारत के कुल २५४ खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। नेपाल गोजुकाइ कराटे डो संघ के तकनीकी सहयोग से संचालित इस प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले शनिवार को होंगे। २२ जेठ, काठमांडू।

नेपाल के सुलभ चौधरी और अंकिता पाण्डे ने शुक्रवार को १८वें इन्डो–नेपाल खुला कराटे प्रतियोगिता के एकल काता में क्रमशः पुरुष और महिला वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया है।

मित्रपार्क स्थित आयोजक टेक्सास इंटरनेशनल कॉलेज में सम्पन्न पुरुष वर्ग प्रतियोगिता में भारत के मोहम्मद ताहसिन उद्दिन अन्सारी ने रजत पदक जीता, जबकि नेपाल के निश्चल राई और भारत के दर्शित राठी ने कांस्य पदक प्राप्त किया। महिला वर्ग में नेपाल की अनुज्ञा अधिकारी दूसरे स्थान पर हैं, जबकि भारत की सुहाना शाह और नभोलग्न बरिक तीसरे स्थान पर रहे।

प्रतियोगिता के आयोजक टेक्सास कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. श्यामसुन्दर श्रेष्ठ ने एक कार्यक्रम के माध्यम से उद्घाटन किया था। इस प्रतियोगिता में नेपाल से २३२ और भारत से २२ खिलाड़ी शामिल हैं, जिनकी कुल संख्या २५४ है। पुरुष और महिला वर्ग में एकल काता समेत समान रूप से ११-११ प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं, जानकारी गोजुकाइ कराटे डो संघ के महासचिव एवं प्रतियोगिता संयोजक इन्द्रबहादुर शाही खड्गे ने दी।

प्रतियोगिता के अंतिम दिन शनिवार को सभी स्पर्धाओं के सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले संपन्न होंगे।