१० वैशाख, काठमाडौं । सम्पत्ति शुद्धीकरण अनुसन्धान विभाग के महानिदेशक गजेन्द्रकुमार ठाकुर को अर्थ मंत्रालय में स्थानांतरित किया गया है। गुरुवार को अर्थमंत्री के स्तर के निर्णय के माध्यम से उन्हें विभाग से मंत्रालय में तबादला किया गया, ऐसा सूत्रों ने जानकारी दी है। विवादित व्यवसायी दीपक भट्ट से जुड़ी जांच जारी होने के बीच महानिदेशक ठाकुर के मंत्रालय की ओर स्थानांतरण को गंभीरता से देखा जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में ठाकुर को सम्पत्ति शुद्धीकरण अनुसन्धान विभाग के नेतृत्व के लिए नियुक्त किया गया था।
फाइल फोटो समाचार सारांश एवं संपादकीय समीक्षा उपरांत। मंत्रिपरिषद ने महाराजगंज स्थित पुलिस अकादमी की जमीन राष्ट्रपति कार्यालय को न देते हुए पूर्ववत रूप से पुलिस प्रशिक्षण प्रतिष्ठान के उपयोग में रहने का निर्णय लिया है। पनौती में कागजातों के घोटाले के कारण अटकी पुलिस अकादमी की जमीन को सरकारीकृत किया गया था और घोटाले में संलिप्तों के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया था। महाराजगंज की पुलिस अकादमी पनौती नहीं गई, लेकिन वहां नए प्रशिक्षण प्रतिष्ठान के भवन का निर्माण हो रहा है।
१० वैशाख, काठमाडौं। राष्ट्रपति के लिए अतिरिक्त सुविधाएं सुनिश्चित करने के मकसद से काभ्रे के पनौती में स्थित नेपाल पुलिस प्रशिक्षण प्रतिष्ठान को महाराजगंज से स्थानांतरित करने के प्रयास असफल रहे। गुरुवार की मंत्रिपरिषद बैठक में महाराजगंज की पुलिस अकादमी की जमीन राष्ट्रपति कार्यालय को न देने का निर्णय पुनः लिया गया है। २१ भदौ २०७५ को मंत्रिपरिषद ने उक्त प्रतिष्ठान की ११४ रोपनी ३ आना जमीन राष्ट्रपति कार्यालय को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया था, लेकिन गुरुवार को कहा गया, ‘‘राष्ट्रीय पुलिस प्रशिक्षण प्रतिष्ठान की सम्पूर्ण जमीन राष्ट्रपति के नाम हस्तांतरित करने की बजाय पूर्ववत प्रतिष्ठान के ही उपयोग में रहेगी।’’
राष्ट्रपति कार्यालय स्थित शीतल निवास की जगह सीमित होने तथा राष्ट्रपति के अन्यत्र जाने में कठिनाई होने के कारण हेलीकॉप्टर सुविधा सहित पुलिस अकादमी को पनौती स्थानांतरित करने का योजना बनाया गया था। लेकिन पूर्व पुलिस अधिकारियों ने ऐतिहासिक महत्व की इस अकादमी के स्थानांतरण के विषय में सरकार को अवगत कराए जाने के बाद दीर्घकालीन निर्णय स्थगित रहा और अब सरकार ने नया निर्णय लिया है।
पनौती में नया अकादमी निर्माणाधीन है। हालांकि पनौती की सरकारी जमीन के झूठे दस्तावेजों के कारण कुछ स्थानीय लोगों ने अपनी नामांतरण कर योजना को बाधित किया था। बाद में सरकार ने इन झूठे फैसलों की जांच कर जमीन को सरकारीकृत किया और झूठे कामों में संलिप्तों के खिलाफ मुकदमा चलाया। तत्कालीन सरकार ने १५ साउन २०५२ को काभ्रे सुनथान वनक्षेत्र में आने वाली जमीन राष्ट्रीय पुलिस प्रशिक्षण प्रतिष्ठान को देने का निर्णय लिया था। नामांतरण न होने के कारण वह जमीन केवल उपयोग के लिए दी गई।
इसके बाद स्थानीय पुस्करबहादुर बस्नेत ने अपनी नामांतरण की कोशिश की, जिसके चलते मुकदमा चला और झूठे कागजात मामले में उन्हें २७ मंसिर २०८० को अभियुक्त बनाया गया था। माघ २०८१ में बस्नेत दोषी ठहराए गए, जबकि सर्वोच्च अदालत ने २३ माघ २०८० को उनके खिलाफ मामले को खारिज कर दिया था। पनौती-११ के संतोष सापकोटा समेत ७ लोगों ने अपनी जमीन पुलिस प्रशिक्षण प्रतिष्ठान को नामांतरण के आधार पर बेचने का मामला दायर किया था, जिसमें जिला एवं पुनरावेदन अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। हालांकि सर्वोच्च अदालत ने ९ असोज २०८० को यह जमीन पुलिस प्रशिक्षण प्रतिष्ठान की ही रहने का निर्णय सुनाया।
इसी प्रकार, व्यक्तियों के नाम से की गई जमीन सरकारीकृत किए जाने के कारण तत्कालीन सरकार ने वहां महाराजगंज की पुलिस अकादमी स्थानांतरित कर महाराजगंज की जमीन राष्ट्रपति कार्यालय को देने का निर्णय लिया था। हालांकि महाराजगंज की अकादमी पनौती नहीं गई है, पर वहां नए प्रशिक्षण प्रतिष्ठान के भवन एवं संरचना का निर्माण जारी है। गुरुवार के निर्णय के अनुसार महाराजगंज में पूर्ववत रूप से नेपाल पुलिस प्रशिक्षण प्रतिष्ठान रहेगा और पनौती में नया प्रशिक्षण प्रतिष्ठान बनेगा।
नेपाल में वैशाख १५ से १९ तक काठमांडू से लुम्बिनी तक ‘टूर डे लुम्बिनी : पैडल फॉर पीस २०२६’ नामक साइकिल यात्रा आयोजित की जाएगी। इस अभियान का लक्ष्य शांति, सह-अस्तित्व और पुनर्निर्माण का संदेश विश्वभर में फैलाना है। संस्थापक मेघ आले ने कहा, ‘रूस–यूक्रेन युद्ध और अमेरिका–ईरान तनाव ने शांति अभियानों के महत्व को बढ़ा दिया है।’ १० वैशाख, काठमांडू।
नेपाल में शांति का संदेश फैलाने की मंशा से ‘टूर डे लुम्बिनी : पैडल फॉर पीस २०२६’ का आयोजन किया जा रहा है। टूर डे लुम्बिनी के संस्थापक मेघ आले के अनुसार इसी वैशাখ १५ से १९ तक काठमांडू से लुम्बिनी तक साइकिल यात्रा होगी। इस यात्रा में नेपाल और विदेशों के साइकिल यात्री, युवा, कॉर्पोरेट क्षेत्र के प्रतिनिधि तथा पत्रकार सक्रिय भागीदारी करेंगे।
यह अभियान सन् २०१२ से निरंतर चलते आ रहा है और इसका उद्देश्य शांति, सह-अस्तित्व और पुनर्निर्माण के संदेश को आम जनता तक पहुँचाना है। गौतम बुद्ध के जन्मस्थान लुम्बिनी से विश्व भर में शांति का संदेश फैलाने के मकसद से यह अभियान नेपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘शांति केंद्र’ के रूप में स्थापित करने का दीर्घकालीन लक्ष्य रखता है।
संस्थापक आले ने बताया कि नेपाल भारत और चीन जैसे दो बड़े अर्थतंत्रों के बीच स्थित होने के कारण विश्व शांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की संभावना रखता है। इस वर्ष का संस्करण खासतौर पर युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर केंद्रित होगा। पत्रकार सम्मेलन में बोलते हुए आले ने कहा, ‘विश्व स्तर पर रूस–यूक्रेन युद्ध और अमेरिका–ईरान तनाव जैसी घटनाओं के कारण बढ़े अस्थिरता के संदर्भ में इस प्रकार के शांति अभियानों का महत्व और बढ़ गया है।’
सरकार ने भूमिहीन दलित–सुकुमवासी तथा अव्यवस्थित बसोबासियों को बस्ती से हटाने का निर्णय लिया है। इसके विरोध में वैशाख 10 तारीख को सुबह 10 बजे थापाथली से माइतीघर मण्डल तक रैली समेत प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने वैशाख 9 को सुरक्षा निकायों के प्रमुखों को सुकुमवासी बस्ती खाली कराने के निर्देश दिए थे।
भूमिहीन दलित–सुकुमवासी और अव्यवस्थित बसोबासियों को बस्ती से हटाने के सरकारी निर्णय के विरोध में रैली सहित प्रदर्शन किया जाएगा। शुक्रवार सुबह 10 बजे थापाथली बस्ती से शुरू होकर माइतीघर मण्डल तक रैली निर्धारित की गई है। सरकार ने थापाथली, शंखमूल, शान्तिनगर और मनोहरा क्षेत्रों में स्थित बस्तियों को खाली कराने के लिए गुरुवार शाम से ही माइकिंग शुरू कर दी है।
वैशाख 12 से सुबह डोजर चलाने की भी तैयारियां हो रही हैं। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने वैशाख 9 को सुरक्षा निकायों के प्रमुखों को बुलाकर सुकुमवासी बस्ती खाली करने के निर्देश दिए थे। देशभर में लगभग 12 लाख भूमिहीन दलित, भूमिहीन सुकुमवासी और अव्यवस्थित बसोबासी निवास करते हैं। सुकुमवासी बस्ती खाली कराने के प्रयास से बस्ती के स्थानीय निवासी चिंतित हैं।
१० वैशाख, काठमाडौं। असम, केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और एक केन्द्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। सभी राज्यों में आज (२३ अप्रैल) और अंतिम चरण २९ अप्रैल को मतदान होगा।
इन चार राज्यों में सबसे ज्यादा ध्यान इस बार पश्चिम बंगाल पर है। पहले पश्चिम बंगाल में ६ से ८ चरणों में मतदान होता था, लेकिन इस बार चुनाव कार्यक्रम काफी छोटा रखा गया है।
पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्ट गढ़ को तोड़कर १५ साल शासन कर चुकी ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच इस बार कड़ी प्रतिस्पर्धा है, इसलिए यहां का चुनाव सबसे रोचक माना जा रहा है। भारतीय मीडिया, टेलीविजन और समाचार माध्यम इस चुनाव को व्यापक रूप से कवर कर रहे हैं।
चुनावी माहौल
पहला चरण गुरुवार सुबह ७ बजे से शुरू हुआ मतदान शाम ५ बजे तक लगभग ९० प्रतिशत वोटिंग हुई, जिसे भारतीय मीडिया ने बताया है।
इस चरण में १६ जिलों के १५२ निर्वाचन क्षेत्रों में ३.६ करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। जिसमें १४७८ उम्मीदवार हैं, जिनमें १६७ महिला उम्मीदवार शामिल हैं। चुनाव को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए आयोग ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। २४५० कंपनियों के केंद्रीय अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं।
रानीनगर क्षेत्र में मतदान के लिए लाइन में लगी महिला मतदाता। तस्वीर सौजन्य: द इंडियन एक्सप्रेस
हिंसात्मक घटनाएँ
मतदान के दौरान कुछ जगहों पर हिंसात्मक घटनाएँ हुई हैं। मुर्शिदाबाद के नाउदा में तनाव उत्पन्न हुआ, जहां आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं क़बीर के आने पर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। मुर्शिदाबाद के डोमकल में कुछ मतदाताओं ने धमकियों और दहशत का आरोप लगाया है।
बीजेपी उम्मीदवार अग्निमित्रा पौल की गाड़ी पर आसनसोल दक्षिण में पत्थर फेंके गए। कुमारगंज के बीजेपी उम्मीदवार सुभेंदु सरकार ने भी तृणमूल कार्यकर्ताओं द्वारा हमला होने का दावा किया है। ये घटनाएं वहां चुनावी हिंसा की परंपरा को दर्शाती हैं।
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले, दौरान और बाद में राजनीतिक हिंसा आम बानी है। आंकड़े भी चुनाव के दौरान होने वाले राजनीतिक हमलों में सबसे अधिक मौतें पश्चिम बंगाल में ही होने को सत्यापित करते हैं। ग्रामीण इलाकों में हारने वाले दल के समर्थकों और कार्यकर्ताओं को उनके घरों से निकाल कर महीनों तक कहीं और रहना पड़ता है, जिसे सामान्य माना जाता है।
यह चुनाव क्यों महत्वपूर्ण है?
इस चुनाव को भारतीय राजनीति के निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रीय राजनीतिक दृष्टिकोण से यह बीजेपी की दक्षिण और पूर्व भारत में विस्तार की दीर्घकालीन रणनीति की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होगा। बीजेपी लंबे समय से पश्चिम बंगाल को अपनी मुख्य राजनीतिक आधार बनाने का प्रयास कर रही है। इस चुनाव से निर्धारित होगा कि वह कितनी सफलता पा पाती है।
ममता बनर्जी
यह चुनाव केवल हार-जीत का विषय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियों के बीच कड़ा संघर्ष है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस खुद को बंगाली संस्कृति और क्षेत्रीय अस्मिता की प्रमुख रक्षक के रूप में प्रस्तुत कर रही है। वहीं बीजेपी राष्ट्रीय एकता, हिंदुत्व और विकास के एजेंडे के जरिये ममता के क्षेत्रीय राजनीतिक किले को तोड़ने का प्रयास कर रही है।
भारतीय राजनीतिक विश्लेषक इस चुनाव को 2029 के लोकसभा चुनाव के ‘सेमीफाइनल’ के रूप में देख रहे हैं। पश्चिम बंगाल में ४२ लोकसभा सीटें हैं, जो केंद्र सरकार के सत्ता समीकरण को प्रभावित करती हैं। यही कारण है कि दिल्ली की सत्ता के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है।
पश्चिम बंगाल में १५ साल मुख्यमंत्री के रूप में शासन कर चुकी ममता के लिए यह चुनाव यह साबित करने का मौका भी है कि उनका किला सुरक्षित है या नहीं। तृणमूल कांग्रेस लगातार तीन बार वहां सत्ता में रही है। अगर चौथी बार भी सत्ता में आती हैं तो ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाली Powerful बनने वाली हैं।
प्रतिस्पर्धा कैसी है?
मुख्यमंत्री बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने अपना पुराना नारा “माँ, माटी, मानुष” को चुनावी अभियान का केंद्र बनाया है।
पार्टी ने खासकर महिलाओं के लिए लाए गए नकद हस्तांतरण योजना, युवाओं के लिए रोजगार कार्यक्रम और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मुख्य चुनावी एजेंडा बनाया है।
ममता की पकड़ इतनी मजबूत है कि वर्षों की कोशिशों के बावजूद बीजेपी पश्चिम बंगाल में उनके विकल्प के रूप में कोई विश्वसनीय चेहरा पेश नहीं कर पाई है। तृणमूल सरकार पर प्रशासनिक विफलता और भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे हैं, लेकिन ममता की व्यक्तिगत लोकप्रियता में विशेष कमी नहीं आई है।
मोदी की बीजेपी खुद को वहाँ परिवर्तन का वाहक प्रस्तुत कर रही है। मोदी ने चुनावी सभाओं में दावा किया है कि इस बार बंगाल की जनता परिवर्तन का जनादेश देगी। बीजेपी ने सुवेंदु अधिकारी, दिलीप घोष और अग्निमित्रा पौल जैसे प्रभावशाली नेताओं को मैदान में उतारकर सुशासन, कानून-व्यवस्था सुधार और घुसपैठ रोकने को प्रमुख मुद्दा बनाया है।
2014 से लगातार केंद्र में बहुमत वाली सरकार होने के बावजूद बीजेपी ममता की लोकप्रियता के सामने पश्चिम बंगाल में विस्तार नहीं कर पाई है। 2021 के विधानसभा चुनाव में अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में २०० से अधिक सीट जीतने का लक्ष्य रखा था, लेकिन मात्र ७७ सीटों पर सीमित रही।
उस चुनाव में बिना सीट हासिल किए वामपंथी दल और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपनी खोई प्रतिष्ठा वापस पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर से चुनावी मोर्चे पर हैं जबकि वाम मोर्चा हर परिवार को स्थायी रोजगार देने का वादा कर रहा है।
चुनावी इतिहास
भारत के स्वतंत्र होने के बाद पश्चिम बंगाल में ३० वर्षों तक कुछ कमजोर गठबंधन सरकारों को छोड़कर अधिकांश भाग राष्ट्रीय कांग्रेस के शासन में रहा। 1977 के चुनाव में पश्चिम बंगाल पहली बार वाम मोर्चे के कब्जे में आया।
इसके बाद ३४ वर्षों तक कम्युनिस्टों ने लाल किले की तरह पकड़ बनाई रही। 2011 में बदलाव के नारे के साथ ममता बनर्जी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ गठबंधन करके कम्युनिस्टों का किला तोड़ दिया। उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस गठबंधन ने २९४ सीटों में से २२५ सीटें जीत लीं, जबकि वाम मोर्चा केवल ६२ सीटों तक सीमित रहा और बीजेपी ने मात्र २ सीटों पर जीत हासिल की।
2016 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने अकेले २११ सीटों पर जीत हासिल कर अपनी मजबूत स्थिति बनाई। भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद जनता ने ममता को ही चुना। बीजेपी ने वोट प्रतिशत 10.17 तक बढ़ाया।
2021 में बीजेपी ने ‘अबकी बार, 200 पार’ का नारा लगाया लेकिन सफलता नहीं मिली। तृणमूल ने 215 सीटें जीतीं और बीजेपी ने वोट प्रतिशत 38.13 तक पहुंचाया, परंतु सीट संख्या 77 ही रही।
2021 के नतीजों में सबसे चौंकाने वाला था भारतीय कांग्रेस और वामपंथी दल का शून्य सीट पर आना, जो लंबे समय तक राज्य सरकार का नेतृत्व करते आए थे।
सर्वेक्षण क्या कहते हैं?
इस बार भी तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर है, विभिन्न सर्वेक्षणों में देखा गया है। अधिकतर सर्वेक्षणों में तृणमूल कांग्रेस को बढ़त मिलती दिख रही है।
‘मॅट्राइज’ अनुमान के अनुसार तृणमूल कांग्रेस को ४३ प्रतिशत और बीजेपी गठबंधन को ४१ प्रतिशत वोट मिलेंगे। ‘सी-भोटर’ सर्वेक्षण के मुताबिक तृणमूल को ४४ प्रतिशत और बीजेपी को ४० प्रतिशत वोट प्राप्त होंगे।
बीजेपी के नेता सुवेंदु अधिकारी और तृणमूल कांग्रेस के नेता एवं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
‘वोट भाइब’ और ‘सीएनएन–न्यूज़ १८’ के सर्वेक्षणों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस १८४ से १९४ सीटें हासिल कर आरामदायक बहुमत पा सकती है, जबकि बीजेपी ९८ से १०८ सीटें जीतने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री पद के लिए अभी भी ममता बनर्जी मतदाताओं की पहली पसंद हैं, सर्वेक्षण दिखाते हैं। लगभग ४८.५ प्रतिशत मतदाताओं ने ममता का समर्थन किया जबकि ३३.४ प्रतिशत ने बीजेपी के नेता सुवेंदु अधिकारी को चुना। यह दर्शाता है कि ममता प्रदेश में अभी भी लोकप्रिय हैं।
चेन्नई सुपर किंग्स ने आईपीएल क्रिकेट में मुंबई इंडियंस को 103 रन से हराया। चेन्नई के सन्जु सामसन ने नाबाद 101 रन की शतकीय पारी खेली जबकि अकिल होसेन ने 4 विकेट लेकर मुंबई की पारी को धराशायी कर दिया। 10 वैशाख, काठमाडौं।
सन्जु सामसन की शानदार बल्लेबाजी और अकिल होसेन की प्रभावशाली गेंदबाजी की मदद से चेन्नई सुपर किंग्स ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) क्रिकेट में मुंबई इंडियंस पर बड़ी जीत हासिल की है। गुरुवार को वानखेड़े स्टेडियम में हुए मुकाबले में चेन्नई ने मुंबई को 103 रन से हराया। चेन्नई द्वारा दिए गए 208 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए मुंबई 19 ओवरों में मात्र 104 रन पर ऑल आउट हो गया।
मुंबई के तिलक वर्मा ने सर्वाधिक 37 रन बनाए जबकि सूर्यकुमार यादव ने 36 रन का योगदान दिया। अन्य बल्लेबाज दोहरे अंक तक पहुंच नहीं सके। मुंबई की पारी को कमजोर बनाने में चेन्नई के अकिल होसेन ने 4 ओवर में सिर्फ 17 रन खर्च करते हुए 4 विकेट हासिल किए। नूर अहमद ने 2 विकेट लिए जबकि मुकेश चौधरी, अंशुल कम्बोज, जैमी ओवरटन और गुरजपनीत सिंह ने 1-1 विकेट अपने नाम किए।
पहले टॉस हारकर बल्लेबाजी करने उतरी चेन्नई ने 6 विकेट खोकर 207 रन बनाए। ओपनर सन्जु सामसन ने 54 गेंदों में 10 चौके और 6 छक्के लगाते हुए नाबाद 101 रन की शतकीय पारी खेली। उन्होंने अंतिम गेंद पर चौका लगाकर शतक पूरा किया। यह सत्र में सामसन का दूसरा शतक है। उन्होंने इससे पहले दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ भी शतक लगाया था। कप्तान रुतुराज गायकवाड़ ने 22, देवडर ब्रेविस ने 21, कार्तिक शर्मा ने 18 और जैमी ओवरटन ने 15 रन बनाए। मुंबई के अलाह गजनफर और अश्वनी कुमार ने 2-2 विकेट लिए जबकि जसप्रीत बुमराह और मिशेल सैंटनर ने 1-1 विकेट झटोला। इस जीत के साथ चेन्नई ने 7 मैचों में अपनी तीसरी जीत दर्ज की और 6 अंक लेकर पांचवें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि मुंबई आठवें मैच में हार का सामना कर रहा है।
नेपाल राष्ट्र बैंक के नव नियुक्त डेपुटी गवर्नर किरण पण्डित ने लगभग साढ़े ३ करोड़ रुपये की जमीन खरीदी है। उन्होंने जमीन खरीद के लिए अपनी आय, पत्नी की आय और बैंक ऋण से निवेश किया है। राष्ट्र बैंक ने ६० दिनों के भीतर जमा करनी वाली संपत्ति विवरणिका सार्वजनिक की है। १० बैसाख, काठमांडू।
पण्डित द्वारा सार्वजनिक की गई संपत्ति विवरणिका के अनुसार, जमीन खरीद में किरण पण्डित और उनकी पत्नी दोनों की आय और ऋण स्रोत का योगदान रहा है। उन्होंने काठमांडू के टोखा नगरपालिका स्थित प्लॉट को पत्नी के नाम पर २ करोड़ २० लाख रुपये में खरीदा है। इस निवेश का स्रोत स्वयं और पत्नी की आय के साथ कुछ बैंक ऋण भी बताया गया है।
काठमांडू के तारकेश्वर में पत्नी के नाम पर लगभग ६९ लाख रुपये मूल्य की जमीन है, जबकि कैलाली के धनगढी में पण्डित के नाम पर लगभग १० लाख रुपये की जमीन सूचीबद्ध है। इसके अतिरिक्त, भाइ के साथ संयुक्त निवेश में रुपन्देही में ४० लाख रुपये की जमीन भी संपत्ति विवरणिका में दर्ज है। पारिवारिक संपत्ति के रूप में पिता के नाम तनहुँ, दमौली में ११ रोपनी जमीन और मां के नाम काठमांडू में ६ आना जमीन शामिल हैं।
डेपुटी गवर्नर पण्डित के पास २० तोला सोना, २५० तोला चांदी और लगभग २ लाख रुपये मूल्य के हीरे हैं। विवाह, पास्नी और व्यक्तिगत आय से यह संपत्ति जुटाई गई है। राष्ट्र बैंक, कर्मचारी संचय कोष और विभिन्न बैंकों में उनकी २ करोड़ २० लाख रुपये से अधिक की बचत है। इसके साथ ही, विभिन्न कंपनियों में ७ सौ से अधिक शेयर निवेश का विवरण भी सार्वजनिक किया गया है।
१० वैशाख, पाल्पा । पाल्पा के तानसेन नगरपालिका–९ स्थित दमकड़ा नमूना माध्यमिक विद्यालय में नमूना युवा संसद अभ्यास सम्पन्न हुआ है। दमकड़ा मावि और टोनी हागन फाउंडेशन के आयोजन में इस संसद के अभ्यास का आयोजन किया गया। विद्यार्थीओं को संसद की बैठकों की प्रक्रिया से अवगत कराने, उनकी तर्क क्षमता विकास करने तथा लोकतंत्र के अभ्यास हेतु यह कार्यक्रम आयोजित किया गया, इसकी जानकारी वडाध्यक्ष राजेशकुमार अर्याल ने दी।
फाउंडेशन के सचिव एवं प्रतिनिधि सभा के पूर्व सांसद फटिक थापा के संयोजन में सम्पन्न नमूना संसद बैठक में ‘‘समाज में लागुपदार्थ के बढ़ते प्रयोग से व्यक्ति, परिवार, समाज और समग्र राष्ट्र को गंभीर क्षति पहुँच रही है। समाज में लागु औषधि उपयोग के विरुद्ध जागरूकता बढ़ाने के लिए दूरदर्शिता, उद्देश्य और लक्ष्य लेकर विद्यालय एवं समुदाय स्तर पर जन जागरूकता हेतु युवा परिचालन के माध्यम से कार्यक्रम संचालित करने की नीति बनायी जाए’’ विषय पर संकल्प प्रस्ताव पर चर्चा हुई।
विद्यार्थी प्रतिभागियों ने सभामुख, मंत्री, सांसद, मर्यादापालक, संसद सचिवालय के कर्मचारी और पत्रकार की भूमिकाएँ निभाईं। नमूना संसद में रोशनी पांडेय द्वारा प्रस्तावित संकल्प पर मोहित कोइराला, खुसी सारू, पवन बस्याल, अनिश्चित पांडेय, प्रासना ढुङगाना, रीज़न अधिकारी समेत कई ने भाग लेकर चर्चा की। प्रमुख युवा सांसदों द्वारा उठाए गए प्रश्नों के उत्तर गृहमंत्री सदीक्षा पराजुली ने दिए।
कार्यक्रम की सभामुख ओजस्वी आचार्य ने संकल्प प्रस्ताव के बहुमत से पारित होने की घोषणा की। इससे पहले शून्य समय में सेजल बस्याल, रक्षा बस्याल, आयुष्मा पौड्याल, गुन्जन बस्याल, स्नेहा पांडे, रक्षा पांडे, मोनिका उचै, सुभेच्छा कार्की, प्रज्ञा न्यौपाने, मनिषा गाहा, अनु शर्मा, समज्ञ घिमिरे, दर्शन पुरी, बबिता ढकाल, रोजिन थापा, मेनुमा डिसुवा, लेखादेवी अधिकारी, पवी भट्टराई आदि ने समाज में व्याप्त गंभीर समस्याओं पर सरकार का ध्यानाकर्षण कराया।
नमूना संसद सचिवालय के कर्मचारी के रूप में बोनु काफ्ले, कृष्ण घिमिरे और दीपिका बस्याल कार्यरत थे, जबकि प्रमिला चिदी, संगिता दर्लामी, धीरज खाम्चा, श्रीधर कूंवर, गृष्मा रेश्मी एवं मीनबहादुर खान्गाह ने मर्यादापालक की भूमिका निभाई। पत्रकार की भूमिका में विद्यार्थी ईशा अधिकारी, रंजना थापा और सुप्रिया बस्याल शामिल थे। मुख्य अतिथि के रूप में तानसेन नगरपालिकाकी उपप्रमुख प्रतीक्षा गाहा सिंजाली तथा विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष व वडाध्यक्ष राजेशकुमार अर्याल ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए। प्रमुख अतिथियों ने विद्यालय में होने वाले इस नमूना संसद अभ्यास की निरंतरता की आवश्यकता पर बल दिया और बताया कि यह कार्यक्रम इस विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए नया अनुभव है।
१० वैशाख, काठमाडौं । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को इरान के संबंध में तीन अलग-अलग महत्वपूर्ण बयान दिए हैं। स्ट्रेट ऑफ हार्मुज, इरान की आंतरिक राजनीति और वर्तमान शांति प्रयासों से जुड़ी ये अभिव्यक्तियाँ विभिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं। पहले बयान में ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी नौसेना को हार्मुज स्ट्रेट में किसी भी बारूदी सुरंग लगाने वाले जहाज पर तुरंत हमला करने का निर्देश दिया है। ‘मैंने अमेरिकी नौसेना को आदेश दिया है — हार्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंग बिछाने वाले किसी भी जहाज पर तुरंत हमला करें,’ ट्रम्प ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, ‘इसमें कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।’ उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी माइन स्वीपर्स इस समय हार्मुज स्ट्रेट को खतरा मुक्त कर रहे हैं।
इसी तरह, दूसरे ट्रूथ सोशल पोस्ट में ट्रम्प ने हार्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण होने का दावा किया है। उसी पोस्ट में उन्होंने कहा कि इरान का असली ‘नेता’ कौन है, यह वहां की जनता भी नहीं जान पा रही है। ‘देश के अंदर कट्टरपंथी और उदारवादी के बीच तीव्र संघर्ष चल रहा है,’ उन्होंने लिखा, ‘कट्टरपंथी युद्ध के मैदान में पराजित हो रहे हैं और उदारवादी उतने उदार भी नहीं हैं। फिर भी उन्हें सम्मान मिल रहा है, जो आश्चर्यजनक है।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि हार्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी सेना का पूर्ण नियंत्रण है और वहां अमेरिकी नौसेना की अनुमति के बिना कोई जहाज आवागमन नहीं कर सकता।
तीसरे बयान में ट्रम्प ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा कि उनका किए गए उपायों ने अच्छी प्रतिक्रिया दी है। ‘विपक्षी पक्ष (इरान) समझौता करने के लिए उत्साहित हो रहा है। इसलिए मैं जो कह रहा हूं और कर रहा हूं, उसका सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है,’ उन्होंने कहा। इरान के साथ युद्ध अमेरिका के लिए जटिल होगा और ऐसे युद्ध में नेटो सदस्य देशों को भी शामिल होना पड़ेगा, उन्होंने बताया। अमेरिका हमेशा ब्रिटेन और नेटो के समर्थन में रहा है, यह भी उन्होंने स्पष्ट किया।
इलाम गोल्डकप के सेमीफाइनल में न्युरोड टीम (एनआरटी) ने रोलिंग क्लब धुलाबारी झापा को टाइब्रेकर में ४-३ के अंतर से परास्त कर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। निर्धारित समय में खेल १-१ से बराबरी पर समाप्त हुआ था, जबकि टाइब्रेकर में एनआरटी के आशिष गुरुङ, सोनाम एस लिम्बु, आदित्य शाक्य और शिशिर लेखी ने गोल किए। फाइनल मुकाबला न्युरोड टीम और मच्छिन्द्र फुटबॉल क्लब, काठमांडू के बीच होगा, जिसमें विजेता को १० लाख रुपए पुरस्कार राशि मिलेगी। १० वैशाख, इलाम।
तीसरे एनआरएनए इलाम गोल्डकप के अंतिम सेमीफाइनल मुकाबले में एनआरटी ने रोलिंग क्लब धुलाबारी झापा को पराजित कर फाइनल में प्रवेश कर स्थानीय दर्शकों का उत्साह बढ़ाया। निर्धारित समय में १-१ से बराबरी होने के कारण, निर्णायक नतीजा टाइब्रेकर के जरिए तय हुआ, जिसमें एनआरटी ने ४-३ से जीत हासिल की।
पहले हाफ के अतिरिक्त समय में एनआरटी के लक्षु थापामगर द्वारा दी गई लंबी पास को विज्ञान खड्काले लो क्रॉस के रूप में खूबसूरती से गोल में तब्दील किया। खेल के ८१वें मिनट में रोलिंग के फागुराम चौधरी ने वन टच शूटिंग से गोल किया। मैच के अंत तक कोई अतिरिक्त गोल नहीं हुआ, जिसके कारण टाइब्रेकर में फैसला हुआ। टाइब्रेकर में एनआरटी के कप्तान आशिष गुरुङ, सोनाम एस लिम्बु, आदित्य शाक्य, और शिशिर लेखी ने गोल किए, जबकि रोलिंग के पूजन थापा, प्रतापसिंह राई और निंग्मा घिसिङ ने गोल दागे।
रोलिंग के रामबहादुर शाह के खिलाफ एनआरटी के विशाल सुनुवार ने शानदार बचाव प्रदर्शन किया। रोलिंग के फागुराम चौधरी और एनआरटी के विज्ञान खड्काने खेल के दौरान की गई गोल प्रयास गेंद पोस्ट के ऊपर से बाहर चली गईं। निर्धारित समय में गोल करने वाले खिलाड़ी चौधरी और खड्का थे। टाइब्रेकर में उत्कृष्ट बचाव प्रदर्शन करने वाले एनआरटी के गोलकीपर विशाल सुनुवार को ‘मैन ऑफ द मैच’ घोषित किया गया। प्रतियोगिता का फाइनल मैच १२ वैशाख, शनिवार को न्युरोड टीम (एनआरटी) और मच्छिन्द्र फुटबॉल क्लब, काठमांडू के बीच खेला जाएगा। उपाधि हेट्रिक करने के लक्ष्य के साथ एनआरटी ने पिछले दो संस्करणों में इलाम गोल्डकप जीता है। रेड हॉर्स फुटबॉल क्लब, इलाम द्वारा आयोजित एनआरएनए इलाम गोल्डकप में विजेता टीम को १० लाख और उपविजेता टीम को ५ लाख रुपए नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
नेपाल आयल निगम ने मूल्य वृद्धि से पहले पेट्रोल पंपों को दैनिक औसत के लगभग दोगुना तेल वितरण करने के आंकड़े सार्वजनिक किए हैं। १ चैत को पेट्रोल में १५ और डिजेल में १० रुपये की मूल्य वृद्धि के बाद ईंधन की बिक्री में गिरावट आई, बावजूद इसके डीलरों ने बड़ी मात्रा में तेल खरीदा। उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता माधव तिमल्सिनाले निगम की अनियमितता की जांच के लिए सार्वजनिक लेखा समिति और भ्रष्टाचार अनुसन्धान आयोग से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
१० वैशाख, काठमांडू। सामान्यतया नेपाल आयल निगम प्रतिदिन पेट्रोल पंपों को २० से २५ लाख लीटर पेट्रोल और ४५ से ५० लाख लीटर डिजेल वितरित करता है। लेकिन, २८ फागुन २०८२ को निगम ने ३० लाख ५५ हजार लीटर पेट्रोल तथा ८३ लाख ४५ हजार लीटर डिजेल दिया। २९ फागुन को पेट्रोल पंपों ने ४२ लाख ५२ हजार लीटर पेट्रोल और ९६ लाख ६५ हजार लीटर डिजेल उठाए। ३० फागुन शनिवार होने के कारण ईंधन बिक्री नहीं हुई। १ चैत को ४८ लाख ६ हजार लीटर पेट्रोल और ९० लाख ९० हजार लीटर डिजेल बिक्री हुई।
तीन दिन लगातार निगम ने औसत से दोगुना तेल वितरण किया, जिसके बाद १ चैत की रात को पेट्रोल और डिजेल के दाम में भारी वृद्धि की गई। निगम का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक आई कीमत वृद्धि तथा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) द्वारा मूल्य बढ़ाए जाने की वजह थी। लेकिन, व्यापारियों और निगम के कर्मचारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के दामों की जानकारी होते हुए भी तीन दिनों में डीलरों ने अनुचित मात्रा में तेल जमा किया। यह तथ्यांक निगम को करोड़ों का घाटा होने की पुष्टि करता है।
निगम ने १ चैत को मूल्य वृद्धि के बाद वित्तीय विवरण जारी किया था जिसमें बताया गया कि कीमत बढ़ने के बावजूद संस्थान को १५ दिनों में ३ अरब ९३ करोड़ रुपये का घाटा होना पड़ेगा। आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि घाटा सिर्फ अंतरराष्ट्रीय दामों के कारण नहीं, बल्कि मूल्य वृद्धि के पूर्व डीलरों ने ‘इनसाइडर ट्रेडिंग’ कर गैरकानूनी लाभ कमाया, जिससे निगम को अतिरिक्त करोड़ों का नुकसान हुआ।
निगम का तर्क है कि “शनिवार अवकाश होने के कारण शुक्रवार और रविवार को तेल की मांग अधिक होती है।” लेकिन आंकड़े बताते हैं कि मूल्य बढ़ने से पहले डीलरों ने औसत से दोगुना तेल उठाया था और मूल्य वृद्धि के बाद बिक्री कम हो गई। १ चैत को मूल्य बढ़ने के बाद पेट्रोल की बिक्री १६ लाख १४ हजार लीटर और डिजेल ५५ लाख लीटर पर गिर गई। ३ चैत को पेट्रोल २३ लाख ४५ हजार और डिजेल ५१ लाख ७० हजार लीटर रही, जबकि ४ चैत को पेट्रोल १३ लाख ७८ हजार और डिजेल ४२ लाख १० हजार लीटर तक सीमित हुई।
ऐसा क्यों हुआ? सरल उत्तरः डीलरों ने मूल्य वृद्धि से पहले सस्ते दाम १५४ रुपये प्रति लीटर में तेल खरीदकर महंगे १७२ रुपये में बेचकर बड़ा मुनाफा कमाया। इससे निगम का पैसा फिजूल खर्च हुआ। बाद के दिनों में तेल की बिक्री सामान्य स्थिति में वापस आ गई। ५ चैत को पेट्रोल २२ लाख २६ हजार और डिजेल ५४ लाख ९३ हजार लीटर, जबकि ६ चैत को पेट्रोल २४ लाख ९० हजार और डिजेल ६६ लाख ४० हजार लीटर बिक्री हुई।
निगम आमतौर पर हर अंग्रेजी महीने के १ और १६ तारीख को IOC से मूल्य सूची मिलने पर नेपाल में मूल्य समायोजन करता है। १ चैत को मूल्य वृद्धि के बाद ११ चैत को दोबारा मूल्य बढ़ा दिया गया और यह सूचनाएं व्यापारियों को पहले से लीक हुईं लगती हैं। १० चैत को डिजेल की बिक्री ६० लाख लीटर से अधिक हुई, जबकि ११ को ६१ लाख लीटर जुटा। उसी दिन शाम निगम ने पेट्रोल और डिजेल दोनों पर १५-१५ रुपये की वृद्धि लागू की और अगले दिन से ईंधन बिक्री सामान्य हुई। अब निगम का “शुक्रवार को अधिक बिक्री” का तर्क लागू नहीं होता।
१३ चैत, शुक्रवार होने के बावजूद मूल्य पहले से बढ़ जाने की वजह से व्यापारियों ने तेल जमा नहीं किया और बिक्री गिर कर पेट्रोल १२ लाख ३७ हजार तथा डिजेल २३ लाख ३० हजार लीटर रह गई। १४ चैत को शनिवार आंशिक खुला था, केवल एक लाख लीटर के आसपास तेल की बिक्री हुई। चैत के मध्य में फिर एक बार गैर सामान्य खेलखिलाड़ी शुरू हुए। १५ चैत, रविवार को पेट्रोल ३७ लाख ३६ हजार और डिजेल ९७ लाख ३० हजार लीटर की असामान्य बिक्री हुई। १६ चैत सोमवार को भी बिक्री अधिक रही (पेट्रोल २९ लाख, डिजेल ७५ लाख लीटर), १७ चैत मंगलवार को हवाई ईंधन की कीमत बढ़ने पर पेट्रोल ३१ लाख ७४ हजार और डिजेल ६८ लाख ५० हजार लीटर वितरण हुआ।
१८ चैत बुधवार को बिक्री घट कर पेट्रोल मात्र ९ लाख ५५ हजार और डिजेल ३६ लाख २५ हजार लीटर रही। १९ चैत, गुरुवार को १५ रुपये मूल्य वृद्धि वाले दिन पेट्रोल २१ लाख १४ हजार और डिजेल ५८ लाख लीटर बिका, जबकि २० चैत शुक्रवार को क्रमशः २० लाख ८६ हजार और ४९ लाख लीटर की बिक्री हुई। २१ चैत शनिवार के अवकाश के बाद २२ चैत रविवार को पेट्रोल २६ लाख ७२ हजार और डिजेल ६५ लाख ७ हजार लीटर की बिक्री हुई।
२३ से २५ चैत तक दैनिक बिक्री क्रमशः घटती गई, पेट्रोल २१ लाख से १४ लाख लीटर और डिजेल ४९ लाख से ३२ लाख लीटर रह गई। नए साल की शुरुआत में डिजेल में ३० रुपये की मूल्य खेलबाड़ २ वैशाख को स्पष्ट हुई। नवीन वर्ष १ वैशाख की छुट्टी के बाद २ वैशाख को निगम ने पेट्रोल का मूल्य स्थिर रखते हुए केवल डिजेल में ३० रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की। मूल्य वृद्धि से पहले उसी दिन पेट्रोल की बिक्री ३४ लाख ६ हजार और डिजेल ६२ लाख ६८ हजार लीटर थी। इससे बाद ३ वैशाख को डिजेल की बिक्री गिरकर ४२ लाख ८२ हजार और पेट्रोल २५ लाख ५८ हजार लीटर रह गई।
निगम का ‘ERP’ सॉफ्टवेयर साफ तौर पर बताता है कि किस पंप की कितनी भंडारण क्षमता है और दैनिक औसत कितनी बिक्री होती है। आंकड़े दर्शाते हैं कि सामान्य दिनों में बिक्री सामान्य होती है, लेकिन मूल्य वृद्धि से पहले पंप पर असामान्य मांग होती है और निगम के कर्मचारी मिलकर उतनी मात्रा उपलब्ध कराते हैं। निगम मूल्य वृद्धि से पहले इस असामान्य बिक्री को रोकने के लिए ‘औसत कोटा प्रणाली’ सख्ती से लागू नहीं करता। इस प्रकार सूचना लीक कर सस्ते में तेल खरीदकर महंगे दाम पर बेचने से व्यापारियों को करोड़ों का लाभ होता है और निगम को भारी घाटा उठाना पड़ता है।
उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि निगम घाटा वहन कराते हुए आम जनता को महंगे ईंधन के जाल में फंसाया जा रहा है। माधव तिमल्सिनाले मूल्य वृद्धि से पहले अनियमित तेल वितरण को ‘गंभीर अपराध’ मानते हुए संसद की सार्वजनिक लेखा समिति, उपसमिति, भ्रष्टाचार निवारण आयोग और प्रधानमंत्री कार्यालय से जांच और कार्रवाई का दबाव बनाया है। उनके अनुसार ‘राज्य और उपभोक्ताओं को घाटा पहुंचाकर कुछ निजी व्यक्तियों को फायदा पहुंचाना तेल वितरण के विरोधाभासी कार्य का हिस्सा है, इसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।’
उन्होंने बताया कि उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय के सचिव तथा निगम के संचालक समिति के अध्यक्ष समेत शीर्ष नेतृत्व जिम्मेदार हैं। निगम द्वारा मूल्य वृद्धि से पहले कितनी मात्रा में तेल वितरित किया गया और सामान्य दिनों में मांग कितनी थी, इस पर जांच आवश्यक है।
नेपाल आयल निगम के कार्यकारी निदेशक डा. चंडिका प्रसाद भट्ट ने प्रारंभ में कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी, लेकिन अगर मूल्य वृद्धि से पहले पंपों को अत्यधिक तेल वितरण पाया गया तो संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए कहा कि वे तुरंत आंकड़े देख कर जांच करेंगे।
डा. भट्ट ने कहा, ‘मुझे ऐसा नहीं लगा, लेकिन मैं डिपो के रिकॉर्ड देखूंगा और अगर पाया गया तो जांच कर कड़ी कार्रवाई करेंगे।’ उन्होंने दावा किया कि निगम ईंधन वितरण में नियंत्रण और कटौती भी कर रहा है। वे बताते हैं, ‘हम बिक्री में कटौती कर रहे हैं और पिछले वित्त वर्ष की तुलना में २० प्रतिशत कम तेल वितरण करने के निर्देश प्राप्त हुए हैं।’
डा. भट्ट ने बताया कि मूल्य वृद्धि से पहले डीलरों द्वारा बड़ी मात्रा में तेल खरीदने के मामले में डिपो रिकॉर्ड मांग कर जांच करने का निर्णय लिया है।
यातायात व्यवस्था विभाग ने बताया है कि मालवाहक वाहनों द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक भार ढोने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने कहा है कि आयातित वाहनों को भन्सार कार्यालय परिसर के अंदर उनकी क्षमता के अनुसार ही भार समायोजित करके ही चलाना होगा। मालवाहकों को प्रस्थान, मध्य और गंतव्य के निकट तीन बार वजन माप कर लोड सीट सहित भार सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। जरूरत से अधिक माल हटाने के बाद ही वाहन को चलाने की अनुमति दी जाएगी।
१० वैशाख, काठमांडू। मालवाहक वाहनों द्वारा निर्धारित भार से अधिक वस्तुएं ले जाने पर कारवाई की जाएगी। यातायात व्यवस्था विभाग ने मालवाहक वाहनों के भारनियमन संबंधी निर्देशिका २०७४ के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित सीमा से अधिक भार लेकर वाहन न चलाने की चेतावनी दी है। विभाग के अनुसार आयातित वाहन ढुलाई के लिए भन्सार कार्यालय परिसर के भीतर उनकी क्षमता के अनुसार ही भार सेट कर संचालित किए जाने चाहिए।
मालवाहक वाहनों को प्रस्थान स्थल के करीब, मध्य बिंदु और गंतव्य के समीप वजन पुल पर अनिवार्य रूप से तीन बार वजन करवाकर लोड सीट सहित सामान सजाने होंगे। निर्धारित सीमा से अधिक भार पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी और अधिक माल हटाने के बाद ही वाहन चलाने की अनुमति दी जाएगी। विभाग ने साफ किया है कि सीमा से अधिक माल प्रबंधन की जिम्मेदारी वाहन मालिक की ही होगी।
नेपाली टोली २२वीं वाटा ओपन अन्तर्राष्ट्रीय तेक्वांडो चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए जापान प्रस्थान कर चुका है। यह प्रतियोगिता २४ से २६ अप्रैल २०२६ तक जापान के ओसाका शहर के ओहामा एरिना में आयोजित की जाएगी, जिसमें चार खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करेंगे। टीम का नेपाली घर से विदाई समारोह नेपाल तेक्वांडो संघ के महासचिव हेमन्त डाँगी और राष्ट्रीय खेलकूद परिषद के बोर्ड सदस्य कुमार लामा घिसिंग द्वारा एक विशेष कार्यक्रम के माध्यम से कराया गया।
चैंपियनशिप में नेपाल से लिटल बड स्कूल की आरावी ग्यावाली अंडर ९ वर्ष, व्यक्तिगत पुम्से (महिला) श्रेणी में प्रतियोगिता करेंगी। होग आउ तेक्वांडो डोजांग के विशेष चन्द्र गामी अंडर ११ वर्ष, व्यक्तिगत पुम्से (पुरुष) वर्ग में, गोंगबु तेक्वांडो डोजांग के श्रेयान कार्की अंडर ११ वर्ष, व्यक्तिगत पुम्से (पुरुष) में, और आयुषा कार्की -४९ किलोग्राम, क्योरुगी (महिला) वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी। टीम के मुख्य प्रशिक्षक सरोज तामांग (गोंगबु तेक्वांडो डोजांग) हैं, जो लिटल बड स्कूल कीर्तिपुर, त्याङलाफाँट, शाङ्ग्रिला स्कूल इमाडोल, ललितपुर में भी संलग्न हैं। टीम प्रबंधक के रूप में रुश्मा सुबेदी कार्यरत रहेंगी।
१० वैशाख, काठमाडौं। जेनजी अभियन्ता रक्षा बम ने काठमाडौं की सुकुमवासी बस्तियों में सरकार द्वारा डोजर चलाने की तैयारी के विषय में राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के सभापति रवि लामिछाने से सवाल पूछा है। इससे पहले रास्वपा सभापति लामिछाने ने चुनावी अभियान के दौरान सुकुमवासी बस्ती में सरकार के डोजर चलाने आने पर कहा था कि वे छाती ठोकने के लिए स्वयं वहां आएंगे। उन्हीं बातों को उजागर करते हुए रक्षा ने फेसबुक पर सुकुमवासी बस्ती की तस्वीर साझा कर लामिछाने से सवाल किया, ‘आदरणीय रवि लामिछाने जी, क्या आप कल छाती ठोकने यहां आएंगे?’
रक्षा ने लिखा, ‘आपकी पार्टी को वोट देना ही गलती थी, ऐसा बहुतों का मत है। वर्षों से सुकुमवासी बसे हुए इलाकों को सिर्फ वोट बैंक बनाने वाले दलों से आप अलग नहीं हैं,’ और आगे कहा, ‘आज सुकुमवासी बस्ती आतंकित है।’ उन्होंने रास्वपा सभापति से पूछा, ‘कभी सीधे सुकुमवासी से बात कब करेंगे?’ और जोड़ते हुए कहा, ‘कल जरूर आइएगा।’
यह पहले बुधवार शाम का विषय है जब प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) ने सुरक्षा निकायों के प्रमुखों को बुलाकर सुकुमवासी बस्ती खाली कराने का आदेश दिया था। इस आदेश के अनुसार कल और परसों काठमाडौं उपत्यका के चार स्थानों की सुकुमवासी बस्तियों को खाली कराने की सरकार की योजना है। पुलिस ने वहां जाकर माइकिंग भी कर चुकी है।
पूर्वगृहमंत्री सुधन गुरुङ ने स्टार माइक्रोइंश्योरेंस और लिबर्टी माइक्रो लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के संस्थापक शेयर प्रति शेयर १५० रुपए की दर से खरीदे हैं। उन्होंने निजी ऋण लेकर ये शेयर खरीदे, जिससे संबंधित प्रक्रिया सार्वजनिक हुई है। गुरुङ ने अपनी संपत्ति विवरण में इन २५ हजार-२५ हजार शेयरों का उल्लेख नहीं किया है, जो ऋण स्रोत को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। १० वैशाख, काठमांडू।
गुरुङ ने दोनों कंपनियों के प्रति शेयर १०० रुपए मूल्यांकन वाले शेयर ५० रुपए ज्यादा कीमत पर खरीदने का विवरण तमसुक (फॉर्म) में दिया है। उन्होंने ऋण लेकर शेयर खरीदे थे, और जब शेयर से जुड़ी जानकारी छुपाई गई तो प्रश्न उठे हैं। सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा, “मैंने निवेश के लिए ली गई राशि ऋण से जुटाई है।” हालांकि, ऋण लेने के लिए प्रस्तुत तमसुक के दस्तावेज संदिग्ध नजर आ रहे हैं।
काठमांडू महानगरपालिका–५ के वार्ड सचिव विमल ज्ञवाली के अनुसार उक्त तमसुक प्रमाणित किया गया है। वार्ड अध्यक्ष बिजेन्द्र प्रजापति ने कहा, “आवेदन में उल्लिखित राशि और चेक विवरण तमसुक में होने के कारण इसे प्रमाणित किया गया है।” गुरुङ ने विजयकुमार श्रेष्ठ से ३७ लाख ५० हजार रुपए ऋण लेकर उन दोनों कंपनियों के २५ हजार-२५ हजार शेयर खरीदे थे।
गुरुङ ने दोनों कंपनियों के शेयर प्री-आईपीओ अवधि में खरीदे हैं, जिसे नेपाल धितोपत्र बोर्ड ने गैरकानूनी घोषित किया है। धितोपत्र अधिनियम के अनुसार ५० से अधिक शेयरधारकों को शेयर बेचते समय सार्वजनिक निर्गम करना अनिवार्य होता है। पूर्व कार्यकारी निर्देशक निरज गिरी ने कहा कि संस्थापक शेयरों के कारोबार में प्रीमियम मूल्य पर कानूनी व्यवस्था मौजूद नहीं है।