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लेखक: space4knews

छ दिन सगरमाथा क्षेत्रमा हराएपछि दावा शेर्पा कैसे बचाए गए?

‘बाँच्ने संभावना बहुत कम लग रही थी’: सगरमाथा पर छ दिन तक संपर्कहीन रहने के बाद मिले दावा शेर्पा से बातचीत। सातवें दिन मार्गदर्शक दावा शेर्पा सगरमाथा पर संपर्क में नहीं थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने जीने की उम्मीद लगभग खो दी थी, फिर भी चॉकलेट और हिम से जीवन बनाए रखने में सफल रहे। गुरुवार को हेलीकॉप्टर से उन्हें बचाकर काठमांडू के एक अस्पताल में ले जाया गया। शुक्रवार को अस्पताल पहुँचकर शेर्पा और उनकी पत्नी से मिली गई इस वीडियो बातचीत देखिए।

एथलेटिक्स में बागमती ने सर्वाधिक ११ स्वर्ण पदक जीते

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा किया गया।

  • १६वें केंद्रीय राष्ट्रपति रनिंग शील्ड खेलकूद के अंतर्गत एथलेटिक्स में बागमती प्रदेश ने सर्वाधिक ११ स्वर्ण पदक जीते।
  • इस प्रतियोगिता में एथलेटिक्स के २ व्यक्तिगत और १ टीम इवेंट में कुल ३ नए जूनियर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए गए हैं।
  • बागमती की भगवती खड़का ने रिकॉर्डधारी दौड़ सहित सर्वाधिक ४ स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।

२२ जेठ, काठमांडू। बागमती प्रदेश ने १६वें केंद्रीय राष्ट्रपति रनिंग शील्ड खेलकूद प्रतियोगिता के अंतिम दिन शुक्रवार को एथलेटिक्स में सबसे ज्यादा ११ स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इसके साथ ही बागमती ने ७ रजत और ५ कांस्य पदक भी जीते।

एथलेटिक्स में २६ विभिन्न स्पर्धाएं आयोजित की गई थीं। सुदूरपश्चिम प्रदेश ने ८ स्वर्ण, ३ रजत और ४ कांस्य, लुम्बिनी प्रदेश ने ५ स्वर्ण, ९ रजत और ५ कांस्य, गण्डकी प्रदेश ने २ स्वर्ण, २ रजत और ७ कांस्य, कर्णाली प्रदेश ने १ स्वर्ण, २ रजत और ३ कांस्य पदक जीते। स्वर्ण पदक रहित कोशी प्रदेश ने २-२ रजत और कांस्य पदक हासिल किए, जबकि मधेश प्रदेश बिना किसी पदक के रहा।

त्रिपुरेश्वर स्थित दशरथ रंगशाला में अंतिम दिन ८ स्पर्धाओं के फाइनल हुए। छात्र २०० मीटर दौड़ में लुम्बिनी के भगवानदास लोहार पहले स्थान पर रहे। उन्होंने २२.६४ सेकंड में निर्धारित दूरी पूरी की। वहीं छात्रा वर्ग में लुम्बिनी की गरिमा चौधरी ने २७.३७ सेकंड में दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक जीता।

छात्र ३००० मीटर दौड़ में कर्णाली के अनिल शाही ने ९ मिनट २०.१ सेकंड में दौड़ समाप्त कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। छात्रा वर्ग में लुम्बिनी की अन्जुली मल्ल ने ११ मिनट ०३.६ सेकंड में दूरी पूरी कर स्वर्ण पदक जीता।

छात्र ट्रिपल जंप में सुदूरपश्चिम के विक्रमनाथ ने १३.५५ मीटर कूद कर पहला स्थान हासिल किया। छात्रा वर्ग में बागमती की अनिशा थारू ने ११.१० मीटर की छलांग लगाकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। ४x१०० मीटर रिले दौड़ में छात्रा वर्ग में बागमती और छात्र वर्ग में लुम्बिनी प्रदेश शीर्ष स्थान पर रहे।

एथलेटिक्स में २ व्यक्तिगत और १ टीम इवेंट में कुल ३ जूनियर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बने। छात्र हाईजंप में बागमती के अविनाश सुनार ने १.८६ मीटर की छलांग लगाकर नया रिकॉर्ड बनाया।

छात्रा ४०० मीटर दौड़ में बागमती की भगवती खड़का ने हिट राउंड में ५८.९४ सेकंड में दौड़ पूरी कर रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने कुल ४ स्वर्ण पदक जीते जो ४०० मीटर दौड़, ८०० मीटर दौड़, ४x१०० मीटर रिले और ४x४०० मीटर रिले में हासिल किए।

छात्रा ४x४०० मीटर रिले में गण्डकी की टीम के अतित थापा, आर्यन राना मगर, अंकित रानाभाट और सुदिप भंडारी ने ३ मिनट २७.९ सेकंड में दौड़ पूरी कर नया रिकॉर्ड स्थापित किया।

सातदोबाटो स्थित नेपाल तेक्वांडो एकेडेमी में हुए तेक्वांडो प्रतियोगिता में बागमती ने ५ स्वर्ण पदक जीते। १२ स्वर्ण पदकों के लिए हुए मुकाबले में सुदूरपश्चिम और मधेश प्रदेश ने समान रूप से २-२ स्वर्ण पदक हासिल किए। कर्णाली प्रदेश स्वर्ण पदक रहित रहा, जबकि कोशी, गण्डकी और लुम्बिनी ने प्रत्येक ने १-१ स्वर्ण जीता।

कीर्तिपुर स्थित कवरडहाल में हुए कराटे प्रतियोगिता में कोशी प्रदेश ने सबसे ज्यादा ३ स्वर्ण, ३ रजत और ३ कांस्य पदक अपने नाम किए। लुम्बिनी ने ३ स्वर्ण और ५ कांस्य, सुदूरपश्चिम ने ३ स्वर्ण और ४ कांस्य पदक जीते। बागमती ने २ और मधेस ने १ स्वर्ण पदक हासिल किए। इस प्रतियोगिता में १२ स्वर्ण पदकों के लिए प्रतिस्पर्धा हुई थी।

देश निर्माण के लिए नेपाली के मन में दर्द होना अनिवार्य है

देश निर्माण करने के लिए नेपाली के मन में देश के प्रति दुख होना आवश्यक है। प्रत्येक नेपाली के हृदय में देश का पीड़ा महसूस होनी चाहिए। पहले हिमालों की भूमि थी, फिर किसी का वस्त्र। पहले पहाड़ों की भूमि थी, फिर किसी का पोशाक। पहले तराई की भूमि थी, फिर किसी का पहनावा। यदि देश ही न होता तो आखिरकार किसका क्या रहता? नेपालीों के रक्त में देश को प्रवाहित होना ही चाहिए। इसलिए प्रत्येक के दिल में देश का पीड़ा महसूस होना आवश्यक है। हर भाषा-भाषी और पहनावे के बीच एकता में आधारित रहना चाहिए। सभी धर्मों और संस्कृतियों में विशिष्टता कायम रहनी चाहिए।

देश न होने पर आखिरकार किसका क्या बचता? नेपाली की आँखों में देश का खिलना ही चाहिए। इसलिए नेपाली के हृदय में देश का दुख होना अनिवार्य है। नेपाल सभी का फूलों की माला जैसा बनना चाहिए। हम सभी इसके माली बनना चाहिए। देश न होने पर कोई सत्ता और सुविधाओं का कोई अर्थ नहीं रहता। इसलिए सबके हाथ में देश का उठना ही चाहिए। देश निर्माण के लिए नेपाली के मन में देश का दर्द होना अत्यंत आवश्यक है।

गुल्मी में रास्वपा सांसदों की सवार गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त

गुल्मी के रेसुङ्गा नगरपालिका-४ रैदी में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के सांसद सागर ढकाल और सुशांत वैदिक की सवार गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। सांसद ढकाल के अनुसार, दुर्घटना में सांसद ढकाल, वैदिक और आरपी महतो सभी सुरक्षित हैं और गाड़ी को मामूली क्षति हुई है।

२२ जेठ, गुल्मी। रास्वपा पार्टी के सांसदों की सवार गाड़ी गुल्मी में दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। गुल्मी के रेसुङ्गा नगरपालिका-४ रैदी स्थित तम्घास–बुर्तिबाङ सड़क खण्ड में शुक्रवार शाम सांसद सागर ढकाल और सुशांत वैदिक की सवार गाड़ी दुर्घटना का शिकार हुई जिसके बारे में सांसद ढकाल ने घोषणा की है। उन्होंने बताया कि तीनों सांसद सुरक्षित हैं और गाड़ी को मामूली नुकसान पहुंचा है।

जिला पुलिस कार्यालय गुल्मी के अनुसार, बागलुङ से तम्घास की ओर आ रही बा.प्र.-०१-०२९ च ७३४३ नंबर की कार शुक्रवार शाम लगभग ५:४० बजे दुर्घटनाग्रस्त हुई है।

कैंसर उपचार की दवाओं की कमी समाधान के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?

कैंसर रोग के उपचार में आवश्यक कुछ दवाओं की कमी की समस्या का तात्कालिक और दीर्घकालिक रूप से समाधान कैसे किया जा सकता है, इस विषय पर स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा मंत्रालय लगातार चर्चा कर रहा है। अस्पतालों में उपचार देने वाले चिकित्सकों से लेकर कैंसर क्षेत्र में काम करने वाले संस्थान आजकल बाजार में दवाओं की कमी की समस्या काफी गंभीर होने की बात कर रहे हैं। सरकार ने 11 वर्ष पहले निर्धारित की गई दवाओं की कीमत बनाये रखने का उल्लेख करते हुए बताया कि दवा मूल्यों में वृद्धि न होने के कारण व्यवसायी आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। सरकार ने वर्ष २०७२ साल जेठ 21 को इन दवाओं के लिए मूल्य निर्धारण किया था। वर्तमान में कमी देखी जा रही कार्बोप्लाटिन 450 एमजी की कीमत 4,131 रुपये, सिस्प्लाटिन 50 एमजी की 532 रुपये तथा ऑक्सालिप्लाटिन 50 एमजी की 4,036 रुपये निर्धारित की गई थी। लेकिन प्लाटिन और अन्य कच्चे माल की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण मूल्य समायोजन न होने पर आपूर्तिकर्ता दवाओं को लाने में असमर्थता जता रहे हैं।

इस समस्या को लेकर बात करते हुए वीर अस्पताल की वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. संध्या चापागाईं ने बताया कि लगभग डेढ़ महीने से मरीजों को कैंसर के उपचार में आवश्यक दवाओं की कमी की बढ़ती समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “मुख्य समस्या वर्तमान में कार्बोप्लाटिन, सिस्प्लाटिन और ऑक्सालिप्लाटिन जैसी दवाओं की कमी की है, जो ठीक होने वाले कैंसर के उपचार के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।” डॉ. चापागाईं ने आगे कहा, “ठीक होने वाले कैंसर की दवाओं की कमी के कारण उपचार न होने से मरीजों को कितनी पीड़ा होती है? क्योंकि व्यक्ति को खाने की इच्छा होती है लेकिन ऐसा लगता है जैसे उसे केवल पानी पीने को कहा गया हो।”

उपचार के लिए आवश्यक दवाएं खोजने के लिए मरीजों के परिजन विभिन्न दवा दुकानों पर धावा बोल रहे हैं, लेकिन हाल के दिनों में उपलब्धता कम होने की जानकारी डॉ. चापागाईं ने दी। नेपाल अर्बुद रोग निवारण संस्थान ने भी हाल ही में कार्यालय में सहायता के लिए आने वाले कैंसर मरीजों के परिजनों की संख्या तेजी से बढ़ने की बात कही है। संस्थान के महासचिव दीपेन्द्र बान्तवा ने कहा, “मरीजों ने दवाओं की कमी के कारण भारत जाना पड़ा रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “सरकार इस क्षेत्र में कोई पहल करता हुआ नहीं दिख रहा है, मरीज भारत जाने को मजबूर हैं, और कुछ टिकट में छूट करने जैसी मांगें भी कर रहे हैं।”

दवा निर्माण में आवश्यक कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि होने के कारण दवाओं की कीमतें बढ़ी हैं, इसलिए सरकार से मूल्य समायोजन करने का सुझाव डॉ. चापागाईं ने दिया है। इस मामले में मंत्रालय में भी व्यवसायियों की ओर से विभिन्न शिकायतें आने के बाद समस्या समाधान के लिए दैनिक चर्चा जारी है, स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा मंत्रालय ने बताया। मंत्रालय के सह प्रवक्ता डॉ. समीअर कुमार अधिकारी ने कहा, “कच्चे माल की कीमतें बढ़ी हैं, और व्यवसायी तय न्यूनतम मूल्य पर दवाएं बाजार में लाने में असमर्थ हैं, इसके अलावा विदेशी मुद्रा विनिमय दर में भी उतार-चढ़ाव है।”

“हम विभिन्न पक्षों के विचार लेकर न केवल मूल्य निर्धारण कर रहे हैं बल्कि अन्य विकल्पों के माध्यम से भी दवा प्रबंधन विभाग और अन्य संबंधित निकायों के साथ चर्चा कर रहे हैं।” पहले भी दवाओं की कमी पर मंत्रालय ने व्यवसायियों को कम मुनाफे पर उपलब्ध कराने को कहा था, लेकिन उस समय लंबे समय तक टिक नहीं सकने के कारण अब फिर से कमी दिखाई दे रही है। इसलिए मरीजों को सुविधाजनक पहुँच दिलाने के लिए कैंसर क्षेत्र में काम करने वाले राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं एवं मित्र देशों के साथ सहयोग के विकल्पों की खोज हो रही है, सह प्रवक्ता अधिकारी ने बताया। “मित्र देशों के साथ दवा मूल्य निर्धारण और आपूर्ति में सहजता प्रदान करने के विषय में भी चर्चा चल रही है,” उन्होंने कहा। “तात्कालिक निर्णय के बजाय दीर्घकालिक समाधान की ओर ध्यान देते हुए काम किया जा रहा है।” नेपाल में कैंसर उपचार की दवाएं अधिकांशतः भारत और उसके बाद बांग्लादेश से आयात की जाती हैं, अधिकारीयों ने बताया।

विश्व कप में पहली बार सभी 26 खिलाड़ी राष्ट्रीय गान कार्यक्रम में भाग लेंगे

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा भइसकेका।

  • फीफा ने 2026 विश्व कप के लिए नियम बनाया है कि खेल से पहले राष्ट्रीय गान बजते समय सभी 26 खिलाड़ी मैदान पर उपस्थित होंगे।
  • नए नियम के अनुसार खिलाड़ी और मैच अधिकारी दर्शकों की ओर नहीं मुड़ेंगे बल्कि वे सेंट्रल सर्कल के आसपास एक-दूसरे की ओर होंगे।
  • फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फान्टिनो ने कहा कि यह बदलाव खिलाड़ियों और समर्थकों दोनों के लिए खास पल पैदा करेगा।

22 जून, काठमांडू। फीफा ने 2026 के विश्व कप के लिए खेल शुरू होने से पहले के औपचारिक कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। अब प्रत्येक मैच में टीम के सभी 26 खिलाड़ी राष्ट्रीय गान के दौरान मैदान में मौजूद रहेंगे।

पहले राष्ट्रीय गान के दौरान केवल शुरुआत के 11 खिलाड़ी मैदान पर खड़े होते थे और बेंच पर बैठे खिलाड़ी प्रशिक्षक और अधिकारियों के पास डगआउट क्षेत्र में रहते थे। लेकिन अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में होने वाले 2026 विश्व कप से टीम के सभी खिलाड़ी मैदान पर उपस्थित होंगे।

नए नियम के अनुसार खेल से पहले सभी खिलाड़ी सेंट्रल सर्कल के चारों ओर इकट्ठा होंगे। शुरुआत के 11 खिलाड़ियों के साथ-साथ सभी वैकल्पिक खिलाड़ी भी राष्ट्रीय गान समारोह में शामिल होंगे।

फीफा ने टीम के खड़े होने के अंदाज में भी बदलाव किया है। अब खिलाड़ी और मैच अधिकारी दर्शकों की ओर नहीं मुड़ेंगे बल्कि वे सेंट्रल सर्कल के आसपास एक-दूसरे के तरफ खड़े होंगे। इस बदलाव से खेल से पहले की एकता, भावुकता और खास माहौल पैदा होगा, यह फीफा का विश्वास है।

फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फान्टिनो ने बताया कि यह बदलाव खिलाड़ियों और समर्थकों दोनों के अनुभव को और खास बनाने की कोशिश का हिस्सा है।

उन्होंने कहा, ‘विश्व कप का विस्तार होने के साथ हम प्रतियोगिता के अनुभव को नया रूप दे रहे हैं। राष्ट्रीय गान के दौरान सभी खिलाड़ी और रेफरी सेंट्रल सर्कल में एक-दूसरे की ओर होकर खड़े होंगे, जिससे एकता, गर्व और भावनाओं का खास पल बनेगा।’

इन्फान्टिनो के अनुसार, विश्व कप हर खिलाड़ी और समर्थक की प्रतियोगिता है, इसलिए नए समारोह से यह प्रतिबिंबित होगा।

प्रदीप परियार की पुस्तक ‘सियोधागो’ का लोकार्पण

काठमाडौं। सामाजिक अभियन्ता प्रदिप परियार की पुस्तक ‘सियोधागो’ का लोकार्पण बिहीबार शाम काठमाडौं में आयोजित किया गया। जातीय मुद्दों को उजागर करने वाले दलित लाइभ्स म्याटर के अभियन्ता प्रदिप परियार समावेशी नेतृत्व, सहभागितामूलक सुशासन और उत्तरदायी समाज निर्माण के कुशल रणनीतिकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। वे विश्व आर्थिक मंच के यंग ग्लोबल लीडर २०२० भी रह चुके हैं और नेपाल के युवाओं के लिए युथ विजन २०२५ के निर्माण में नेतृत्वकारी भूमिका निभा चुके हैं।

प्रदीप परियार ने अपनी पुस्तक ‘सियोधागो’ के माध्यम से दक्षिण एशिया के लगभग २६ करोड़ दलितों द्वारा सदियों से सहे जा रहे जातीय विभेद और उसके खिलाफ जारी अदम्य संघर्ष को अपने व्यक्तिगत अनुभवों से जोड़ते हुए एक सामूहिक कथा प्रस्तुत की है। उन्होंने कहा, ‘यह कृति सीमांतित जीवन के अभी तक अनकहे सच का दस्तावेज है। यह आंसू, अन्याय और अपमान के बीच उठे आशा और विद्रोह की आवाज़ है।’

इस पुस्तक में नेपाल के दूरदराज़ के गाँवों से लेकर विश्व मंच तक की यात्रा के दौरान देखी और जेली गई वास्तविकताएं, युवाओं की जीवंत अनुभूतियां, रुकुम सोती नरसंहार, बलात्कारित और हत्यारों गई बेटियों के दुःख, हिरासत में अपने पुत्र खो चुकी माताओं के अनंत संघर्ष शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘यह पुस्तक केवल दुःख की कथा नहीं है, यह चेतना की ज्वाला है। अन्याय के खिलाफ उद्घोषणा है।’

सुधन गुरुङ पर हिरासत में मौजूद जेनजी युवाओं को धमकी देने का आरोप

समाचार के अनुसार, सीमा विवाद के विरोध में भारतीय दूतावास क्षेत्र से हिरासत में लिए गए जेनजी युवाओं को पुलिस वृत्त सोह्रखुट्टे में रखा गया है। राष्ट्रीय जेनजी नागरिक अभियान ने पूर्व गृहमंत्री एवं सांसद सुधन गुरुङ पर हिरासत स्थल पहुंचकर युवाओं को धमकी देने का आरोप लगाया है। जिला प्रहरी परिसर काठमाडौं के प्रवक्ता पवनकुमार भट्टराई ने सांसद गुरुङ द्वारा हिरासत में मौजूद युवाओं से मिलने के लिए सोह्रखुट्टे वृत्त आने की पुष्टि की है। २२ जेठ, काठमाडौं।

सीमा विवाद के मुद्दे पर आंदोलन करते हुए भारतीय दूतावास घेरने पहुंचे कुछ युवाओं को २० जेठ को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। लैनचौर स्थित दूतावास क्षेत्र से पकड़े गए युवाओं को पुलिस वृत्त सोह्रखुट्टे में रखा गया। वहीं हिरासत में रखे गए जेनजी युवाओं ने आरोप लगाया कि पूर्व गृहमंत्री एवं राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के सांसद सुधन गुरुङ उनके पास आकर धमकी देने वाले व्यवहार में लिप्त हुए। राष्ट्रीय जेनजी नागरिक अभियान ने गुरुवार एक विज्ञप्ति जारी कर हिरासत में सुधन द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने का दावा किया है।

‘शांतिपूर्ण तरीके से पम्पलेट प्रदर्शन का उद्देश्य लेकर हम भारतीय दूतावास के निकट पहुंचे थे। लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही पुलिस ने बल प्रयोग कर चार जेनजी कार्यकर्ताओं—अजय सोडारी, प्रकाश बम, सुजन पौडेल और स्तुल जेम्स नेपाली—को गिरफ्तार कर सोह्रखुट्टे में रखा। हिरासत में रखे जाने के एक घंटे बाद सुधन गुरुङ अपने दल बल के साथ थुनुवा कक्ष में आए और हमारे साथ अनुशासित व्यवहार के बजाय अस्वाभाविक व अमर्यादित दबावकारी व्यवहार किया,’ विज्ञप्ति में कहा गया है।

जेनजी ने कहा कि उन्होंने अतिरिक्त धमकियां भी दी थीं। ‘आप लोग किसके निर्देश में काम कर रहे हैं, यह अंतिम मौका है। अब अगर सरकार और पुलिस ने आपको पकड़ा तो छोड़ेंगे नहीं। सरकार के खिलाफ बोलना बंद करें,’ कहकर मानसिक दबाव और भय उत्पन्न करने का प्रयास किया गया, ऐसा दावा किया गया है। पुलिस हिरासत में मौजूद व्यक्तियों को अनधिकृत व्यक्ति द्वारा धमकाना एक गंभीर मामला है और इस घटना की जांच होनी चाहिए, ऐसा भी मांग की गई है।

जिला प्रहरी परिसर काठमाडौं के एसपी एवं प्रवक्ता पवनकुमार भट्टराई ने सुधन गुरुङ के वहाँ होने की पुष्टि की है। ‘उन्हें (सुधन गुरुङ) उस स्थान पर जाना पड़ा। जेनजी भाइयों को वहीं रखा गया है, इसलिए वे उनसे मिलने गए थे,’ एसपी भट्टराई ने कहा। पुलिस वृत्त सोह्रखुट्टे में सुधन गुरुङ के पहुंचने की पुष्टि के बावजूद वहां जाकर उन्होंने जेनजी को धमकी दी या नहीं, इस बारे में पुलिस ने औपचारिक बयान नहीं दिया है।

सूत्रों के अनुसार, सुधन ने जेनजी से मुलाकात कर कुछ समय बिताया था, लेकिन धमकी देने के विषय में कोई जानकारी नहीं है। पूर्व मंत्री सुधन से संपर्क कर जानने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। पुलिस का कहना है कि उन्होंने जेनजी से मिलने के लिए हिरासत केंद्र जाकर कुछ समय बातचीत की पुष्टि की है।

क्या सुधन गुरुङ की हिरासत में जाकर जनजी युवाओं को दी धमकी?

समाचार सारांश

संपादकीय रूपमा समीक्षा गरिएको।

  • सीमा विवाद के विरोध में भारतीय दूतावास क्षेत्र से पकड़े गए जनजी युवा को सोह्रखुट्टे पुलिस थाने में रखा गया।
  • राष्ट्रीय जनजी नागरिक अभियान ने पूर्व गृहमंत्री एवं सांसद सुधन गुरुङ पर हिरासत में जाकर युवाओं को धमकी देने का आरोप लगाया है।
  • जिला पुलिस परिसर काठमांडू के प्रवक्ता पवनकुमार भट्टराई ने सांसद गुरुङ के हिरासत में युवाओं से मिलने सोह्रखुट्टे पुलिस थाने पहुंचने की पुष्टि की है।

२२ जेठ, काठमांडू। सीमा विवाद के कारण प्रदर्शन करते हुए भारतीय दूतावास घेरने गए कुछ युवाओं को २० जेठ को पुलिस ने गिरफ्तार किया। लैनचौर के दूतावास क्षेत्र से पकड़े गए युवाओं को सोह्रखुट्टे पुलिस थाने में रखा गया।

हालांकि, हिरासत में रखे गए जनजी युवाओं का आरोप है कि पूर्व गृह मंत्री और राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के सांसद सुधन गुरुङ ने वहां जाकर उन्हें धमकी दी। राष्ट्रीय जनजी नागरिक अभियान ने गुरुवार को एक विज्ञप्ति जारी कर हिरासत में सुधन द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने का दावा किया।

‘शांतिपूर्ण तरीके से पंपलेट प्रदर्शन करने के उद्देश्य से हम भारतीय दूतावास के पास पहुंचे थे। लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही पुलिस ने बल प्रयोग कर चार जनजी कार्यकर्ताओं—अजय सोडारी, प्रकाश बम, सुजन पौडेल और स्तुल जेम्स नेपाली को गिरफ्तार कर सोह्रखुट्टे थाने में रखा। हिरासत में एक घंटे बाद सुधन गुरुङ दल बल के साथ थाने की हिरासत कक्ष में प्रवेश कर हमारे साथ अनुचित, अमर्यादित और दबावपूर्ण व्यवहार किए,’ विज्ञप्ति में कहा गया।

सिर्फ इतना ही नहीं, उन्हें और भी धमकी दी गई। ‘आप किसके द्वारा परिचालित हैं? यह अंतिम मौका है। अब सरकार और पुलिस ने पकड़ लिया तो छोड़ेंगे नहीं। सरकार के खिलाफ बोलना बंद करें,’ जैसी मानसिक दबाव और डराने-धमकाने की कोशिशें की गईं,’ विज्ञप्ति में उल्लेख है।

पुलिस हिरासत में पकड़े गए लोगों को अनधिकृत व्यक्ति द्वारा धमकाना एक गंभीर समस्या है और इस घटना की जांच की मांग भी की गई है।

अनधिकृत व्यक्ति का पुलिस हिरासत में बंद व्यक्ति को धमकाना गैरजिम्मेदाराना कृत्य है। राष्ट्रीय जनजी नागरिक अभियान के अनुसार सुधन गुरुङ ने पुलिस हिरासत पहुंचकर युवाओं को धमकाया या नहीं, इसकी जांच हो रही है।

पुलिस ने पुलिस थाने में मौजूद जनजी युवाओं को हिरासत में लिया था और उस दौरान सुधन गुरुङ के सोह्रखुट्टे पुलिस थाने पहुंचने की पुष्टि हो चुकी है।

जिला पुलिस परिसर काठमांडू के एसपी एवं प्रवक्ता पवनकुमार भट्टराई ने सुधन गुरुङ के वहां जाने की पुष्टि की। ‘वे (सुधन गुरुङ) वहां पहुंचे। जब उन्हें बताया गया कि जनजी युवाओं को वहां रखा गया है तो वे उनसे मिलने गए,’ उन्होंने कहा।

हालांकि, पुलिस थाने में सुधन ने युवाओं को धमकाया या नहीं, इस बारे में पुलिस ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

एसपी भट्टराई ने बताया कि वे सुधन से मिले, लेकिन उनकी बातों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

कुछ समय के लिए मुलाकात के बाद सुधन वहां से बाहर निकले, लेकिन युवाओं का दावा है कि उन्होंने धमकी दी।

इस मामले में पुलिस सोह्रखुट्टे थाने से भी जानकारी जुटाने की कोशिश में है। सोह्रखुट्टे पुलिस ने कहा है कि सुधन आए और कुछ देर मुलाकात की, लेकिन धमकी के बारे में कुछ कह नहीं सकते। ‘वे आए थे। उनसे मिले थे, लेकिन वहां हुई बातचीत के बारे में हमें जानकारी नहीं है,’ स्रोत ने बताया।

विशेष पुलिस कार्यालय में अपने काम के लिए जाना सामान्य माना जाता है, लेकिन सुधन कोई व्यक्तिगत समस्या लेकर या कोई शिकायत लेकर नहीं गए थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक वे सिर्फ हिरासत में मौजूद जनजी युवाओं से मिलने गए थे।

पूर्व मंत्री सुधन से इस बारे में संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली।

फिर भी, पुलिस के अनुसार उन्होंने अपने निजी काम से नहीं बल्कि जनजी युवाओं से मिलने हिरासत में जाकर कुछ समय बात की यह पुष्टि हुई है।

कक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक दिपके ने विमानस्थल पर इकट्ठा न होने का किया अपील

२२ जेठ, काठमांडू। कक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अमेरिका से भारत वापसी से पहले अपनी पूर्व योजना में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी किए गए एक वीडियो संदेश में अपने समर्थकों और विद्यार्थियों से ६ जून को दिल्ली विमानस्थल पर भीड़भाड़ से बचने का विशेष अनुरोध किया है। पहले वे अपने समर्थकों से विमानस्थल पर उपस्थित होने का आह्वान कर चुके थे। लेकिन आंदोलन को उम्मीद से अधिक जनसमर्थन मिलने और विमानस्थल पर भारी भीड़ जमा होने के कारण आम जनता एवं सुरक्षा कर्मियों को होने वाली असुविधा को मद्देनज़र रखते हुए उन्होंने यह अपील वापस ले ली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अशांति और अव्यवस्था फैलने से रोकने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

दिपके ने यह भी बताया कि विमानस्थल पर उतरने के बाद वे जन्तर मंतर पर शांति पूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए संसद मार्ग पुलिस चौकी जाकर आधिकारिक अनुमति लेंगे। उन्होंने कहा, ‘हम कानून पालन करने वाले जिम्मेदार नागरिक हैं, इसलिए जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।’ पार्टी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए सौरभ दास, विजेता दहिया और आशुतोष रांक को आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त किया है। उन्होंने दिल्ली में पार्टी का पहला प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अपनी मांगें सार्वजनिक की हैं। ६ जून को जन्तर मंतर पर होने वाले सीजेपी के प्रदर्शन में प्रसिद्ध शिक्षाविद् सोनम वांगचुक भी शामिल हो सकते हैं। प्रेस वार्ता के माध्यम से पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की पुनः मांग की है। सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने सीबीएसई अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता के स्थानांतरण को केवल दिखावा बताया है। उन्होंने बताया कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही संस्थापित करनी होगी और केवल स्थानांतरण से समस्या हल नहीं होगी।

नेपाल का मौसम: लगातार चौथे वर्ष अत्यधिक तापमान और चौथी गर्मी की लहर के लिए जारी चेतावनी

महिलाएं सूरज के आगे छाता लेकर चल रही हैं

छवि स्रोत, Getty Images

नेपाल में इस वर्ष लगातार चौथे वर्ष के रूप में उच्चतम तापमान औसत से ऊपर रहने की उम्मीद है। सरकार ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में गर्मी की लहर के संभावित फैलाव के संदर्भ में चेतावनियां जारी की हैं।

हाइड्रोलॉजी और मौसम पूर्वानुमान विभाग ने बताया कि शुक्रवार से अगले तीन दिनों के लिए कोशी, मधेश, बागमती, गण्डकी, लुम्बिनी और सुदूरपश्चिम प्रदेश के कुछ तराई क्षेत्रों में गर्मी की लहर फैलने की संभावना है।

विभाग के अनुसार, इन क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होने की उम्मीद है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, गर्मी की लहर को समतल क्षेत्रों में 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक और पहाड़ी क्षेत्रों में 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक अधिकतम तापमान के रूप में परिभाषित किया गया है।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय के केन्द्रीय जलविज्ञान एवं मौसम विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर मदन सिग्देल के अनुसार, नेपाल में लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक का अधिकतम तापमान गर्मी की लहर की प्रमुख पहचान माना जाता है।

पाकिस्तान में बन रहा फीफा विश्वकप खेल में इस्तेमाल होने वाला गेंद, जानिए ‘ट्रिओन्डा’ संस्करण की खासियत

समाचार सारांश

संपादकीय रूप से जांचा गया।

  • अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में आयोजित होने वाले फीफा विश्वकप 2026 की आधिकारिक गेंद ‘ट्रिओन्डा’ पाकिस्तान के सियालकोट में स्थित फरवार्ड स्पोर्ट्स कंपनी द्वारा निर्मित है।
  • एडिडास द्वारा डिजाइन की गई इस गेंद में आयोजक तीन देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले सितारे, मेपल का पत्ता और चील का प्रतीक शामिल है।
  • इस अत्याधुनिक गेंद में वीडियो असिस्टेंट रेफरी को वास्तविक समय में डेटा भेजने के लिए 500 हर्ट्ज़ के मोशन सेंसर चिप भी लगी है।

22 जून, काठमांडू। पाकिस्तान अब तक फीफा विश्वकप में क्वालीफाई नहीं कर पाया है। लेकिन पिछले फुटबॉल विश्वकप संस्करणों में पाकिस्तान का नाम हमेशा जुड़ता रहा है। हर बार विश्वकप के दौरान वहां के लोगों के सपने भी जुड़े होते हैं।

फीफा विश्वकप 2026 11 जून से उत्तर अमेरिका के तीन देशों – अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में आयोजित होने वाला है। पाकिस्तान इसमें चुना नहीं गया है। एशियाई क्वालीफिकेशन के पहले चरण में पाकिस्तान ने कंबोडिया को हराया था, लेकिन दूसरे चरण में ग्रुप जी में छह मैचों में पराजित होकर बाहर हो गया।

यहां चर्चा का विषय पाकिस्तान की फुटबॉल टीम नहीं है, बल्कि फीफा विश्वकप से जुड़ा ऐसा पहलू है जो किसी न किसी रूप में पाकिस्तान से जुड़ा है।

वह है फीफा विश्वकप में इस्तेमाल होने वाली गेंद।

विश्वकप में खेली जाने वाली गेंद वहीं पाकिस्तान में बनती है, यह सुनकर कई लोग हैरान हो सकते हैं, लेकिन यह सच्चाई है। 11 जून से शुरू हो रहे 23वें फीफा विश्वकप में भी पाकिस्तान में निर्मित गेंद का उपयोग होगा।

अब तक के सबसे बड़े विश्वकप में कुल 104 मैच होंगे और उन मैचों में पाकिस्तान में बने गेंद ही उपयोग किए जाएंगे। विश्व के श्रेष्ठ खिलाड़ी और उभरते सितारे इसी गेंद से खेलेंगे।

फीफा विश्वकप 2026 में इस्तेमाल होने वाली आधिकारिक गेंद ‘ट्रिओन्डा’ एडिडास द्वारा डिज़ाइन की गई है, लेकिन शायद बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि यह गेंद पाकिस्तान के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के छोटे शहर सियालकोट में बनाई जाती है।

यह गेंद अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। फीफा विश्वकप में इस्तेमाल होने वाली गेंद कैसी होती है, इसके बारे में चर्चा करने से पहले यह जानना जरूरी है कि यह गेंद कहां और कैसे बनाई जाती है।

यह गेंद पाकिस्तान के सियालकोट में स्थित ‘फरवार्ड स्पोर्ट्स’ कंपनी द्वारा निर्मित होती है।

फरवार्ड स्पोर्ट्स की स्थापना 1991 में पंजाब के सियालकोट शहर में हुई थी। यह कंपनी प्रमुख रूप से फुटबॉल का उत्पादन करती है और विश्व विख्यात ब्रांड एडिडास सहित कई कंपनियों के लिए गेंद बनाती है।

1994 से फरवार्ड स्पोर्ट्स एडिडास के साथ मिलकर कई प्रतियोगिताओं के लिए गेंद बनाती आ रही है। पिछले चार विश्वकप संस्करणों में भी इस कंपनी ने गेंद का उत्पादन किया है, साथ ही UEFA चैंपियंस लीग के लिए भी गेंद बनाती है।

इस कंपनी ने विभिन्न यूरोपीय चैंपियंस लीग संस्करणों के लिए भी गेंद बनाना जारी रखा है और 2014 से लेकर अब तक हर फीफा विश्वकप में गेंद का उत्पादन किया है।

फरवार्ड स्पोर्ट्स ने 2014 विश्वकप के लिए ब्राजुका गेंद, 2018 के लिए टेलस्टारा 18, 2022 के लिए अल रीह्ला और अब 2026 के लिए ट्रिओन्डा नामक गेंद बनाई है।

यह कंपनी फुटबॉल के अलावा हैंडबॉल, बीच वॉलीबॉल, इनडोर गेंद, गोलकीपिंग ग्लव्स, और स्पोर्ट्स बैग्स भी बनाती है।

विश्व के प्रमुख फुटबॉल उत्पादक कंपनियों में से एक फरवार्ड स्पोर्ट्स तीन दशकों के अनुभव और अत्याधुनिक तकनीक के साथ प्रति वर्ष 20 मिलियन से अधिक फुटबॉल बनाती है।

फीफा विश्वकप के आधिकारिक मैच गेंद सहित दुनिया की सभी प्रमुख लीग प्रतिस्पर्धाओं के लिए कंपनी हर गेंद में सटीकता, उच्च गुणवत्ता और नवीनता सुनिश्चित करती है।

विश्व में निर्मित उच्च गुणवत्ता वाली और हाथ से सिली गई फुटबॉलों में लगभग 70% गेंदें पाकिस्तान में बनती हैं। वार्षिक अनुमानित 40 से 60 मिलियन गेंदें इस उद्योग से उत्पादित होती हैं, जो वहां के 1000 से अधिक कारखानों में लगभग 60,000 लोगों को रोजगार देती हैं।

फरवार्ड स्पोर्ट्स के इंजीनियर और डिजाइनर पहले गेंद का डिज़ाइन और डिजिटल मॉडलिंग तैयार करते हैं।

गेंद की हवा में संतुलन और हवा में रुकावट जैसी चीजों का सूक्ष्म परीक्षण किया जाता है। फिर कच्चे माल का चयन कर स्तरबद्ध निर्माण होता है। विश्वकप गेंद में पारंपरिक चमड़े के बजाय उच्च गुणवत्ता वाली सिंथेटिक सामग्री का उपयोग किया जाता है, जो पानी को अवशोषित नहीं करती।

बॉल के अंदर ब्लूटाइल रबर की बेहतर गुणवत्ता वाली ब्लडर होती है जो हवा के दबाव को लंबे समय तक बनाए रखती है। बाहरी हिस्से पर ब्लडर के ऊपर सिंथेटिक लेयर और ईवीए फोम लगाया जाता है, जो गेंद को लचीलापन और उछाल देता है।

इसके बाद पैनल काटना, छपाई, संयोजन और थर्मल बाइंडिंग होती है। फिर एम्बोसिंग और टेक्सचरिंग कर गेंद तैयार हो जाती है, जिसके बाद गुणवत्ता परीक्षण होकर बाहर भेजी जाती है।

फीफा विश्वकप 2026 की आधिकारिक गेंद ट्रिओन्डा

फीफा विश्वकप 2026 में इस्तेमाल होने वाली आधिकारिक मैच गेंद का नाम ‘ट्रिओन्डा’ है। यह विश्व प्रसिद्ध खेल सामग्री और जर्सी निर्माता एडिडास द्वारा डिज़ाइन की गई है।

स्पेनिश भाषा में ट्रिओन्डा का अर्थ ‘थ्री वेव्स’ यानी ‘तीन तरंगे’ है। ‘ट्री’ का मतलब तीन और ‘ओन्डा’ का मतलब तरंग होता है।

इतिहास में पहली बार तीन राष्ट्रों के संयुक्त आयोजन वाले फीफा विश्वकप 2026 के अवसर पर इस गेंद में तीन आयोजक देशों के रंग और प्रतीक शामिल हैं।

गेंद पर अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको के प्रतिनिधित्व वाले चिन्ह हैं, जैसे कनाडा के लिए मेपल का पत्ता, मैक्सिको के लिए चील और अमेरिका के लिए सितारा।

गेंद के डिजाइन में लाल, हरा और नीला रंग संयोजित किए गए हैं, जो आयोजक तीन देशों के सम्मान को दर्शाते हैं।

यह गेंद नई तकनीक और नवीनतम निर्माण प्रक्रियाओं से बनाई गई है। यह अब तक की सबसे कम, सिर्फ 4 पैनल वाली गेंद है। इसकी गहरी सिलाई हवा में गेंद की गति संतुलन और स्थिरता प्रदान करती है।

फीफा के अनुसार चार पैनल गेंद के केंद्र में मिलकर त्रिकोण बनाते हैं, जो तीन आयोजक देशों की ऐतिहासिक एकता को दर्शाता है।

इसके अतिरिक्त, फीफा विश्वकप ट्रॉफी के सम्मान में सुनहरे रंग का प्रयोग किया गया है, जो इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की गरिमा को दर्शाता है।

ट्रिओन्डा में कई प्रमुख और नवीन तकनीकें शामिल हैं। इसके चार पैनलों में गहरे सिलाई के कारण हवा में समान और पर्याप्त बाधा उत्पन्न होती है, जिससे गेंद की स्थिरता बढ़ती है।

बाहर की सतह पर नज़दीक से दिखने वाले उभरे हुए चिन्ह गेंद को गीले या बरसात वाले मौसम में भी मारने या ड्रिब्लिंग करते समय खिलाड़ियों को अच्छा पकड़ प्रदान करते हैं।

फीफा विश्वकप की आधिकारिक मैच गेंद में ‘कनेक्टेड बॉल टेक्नोलॉजी’ भी लागू है। गेंद के अंदर अत्याधुनिक 500 हर्ट्ज़ की मोशन सेंसर चिप लगी है, जो गेंद की हर गतिविधि की विस्तार से जानकारी देती है।

यह तकनीक वीडियो असिस्टेंट रेफरी को वास्तविक समय में डेटा भेजती है, जिससे ऑफसाइड और अन्य जटिल फैसले तेज़ और सही तरीके से लिए जा सकें।

हुम्ला में आग लगने से तीन मंजिला मकान राखी खरबार हुआ

प्रतीकात्मक तस्वीर


समाचार सारांश

OK AI द्वारा तयार पारिएको। सम्पादकीय समीक्षा गरिएको।

  • हुम्ला के सिमकोट गाउँपालिका-7 में बीती रात स्थानीय महेन्द्रबहादुर शाही के तीन मंजिला मकान में आग लग गई जिससे मकान पूरी तरह जलकर राख हो गया।
  • आग से तीन तोला सोना, सौ तोला चाँदी और दो लाख नकद समेत कुल 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
  • हुम्ला के पुलिस उपरीक्षक शंकर खड्का ने बताया कि आग में सात कमरों वाला भवन और वहां रखे सभी सामान नष्ट हो गए हैं।

२२ जेठ, हुम्ला । हुम्ला के सिमकोट गाउँपालिका-7 में आग लगने से एक मकान पूरी तरह जलकर राख हो गया है।

बीती रात स्थानीय महेन्द्रबहादुर शाही के तीन मंजिला मकान में लगी आग से मकान पूरी तरह से जलकर नष्ट हो गया, पुलिस ने बताया।

हुम्ला के पुलिस उपरीक्षक शंकर खड्का के अनुसार, आग लगने से शाही का सात कमरों वाला भवन जलकर नष्ट हो गया है।

उन्होंने बताया कि आग से तीन तोला सोना, सौ तोला चाँदी और दो लाख रुपये नकद सहित कुल 20 लाख रुपये का आर्थिक क्षति हुई है।

सप्तरी में मोटरसाइकिल दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत

सप्तरी के विष्णुपुर गाउँपालिका–५ कट्टी में दो मोटरसाइकिल आपस में टकराने से राजविराज के २३ वर्षीय छोटेलाल यादव की मृत्यु हो गई है। पुलिस के अनुसार, दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल यादव का राजविराज स्थित छिन्नमस्ता अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। २२ जेठ, काठमांडु।

दुर्घटना में घायल दूसरी मोटरसाइकिल चालक का भी उसी अस्पताल में उपचार जारी है। बीआर ५०–०६२८८ नंबर की मोटरसाइकिल और ना. २२ प ३२८५ नंबर की मोटरसाइकिल के टकराने से यह दुर्घटना हुई थी। मृत्यु वाले छोटेलाल यादव राजबिराज नगरपालिका–१२, सिंगियौन के निवासी थे। नेपाल पुलिस ने इस घटना की जानकारी प्रदान की है।

ट्रम्प और पुतिन के बीच मोदी का दिल जीतने की होड़

समाचार सारांश समीक्षा के बाद तैयार किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, ‘हमें एक समझौते पर पहुंचना है क्योंकि मैं प्रधानमंत्री मोदी को बहुत पसंद करता हूं’। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिकी दबाव से भारत को प्रभावित न होने और दोनों देशों के बीच साझेदारी को मजबूत बनाए रखने का दावा किया। सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति पुतिन के भारत आने पक्के हैं। २२ जेठ, काठमांडू। दुनिया की दो बड़ी शक्तियां अमेरिका और रूस ने भारत को अपनी ओर आकर्षित करने की होड़ शुरू कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुलेआम भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए अपने स्वार्थ और साझेदारी को मजबूत बनाने के संकेत दिए हैं।

अमेरिकी रुचि: मोदी से दोस्ती और व्यापार समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि जल्द ही अमेरिका और भारत के बीच बड़ा व्यापार समझौता हो सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना ‘बहुत अच्छा दोस्त’ बताया और दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों पर जोर दिया। ट्रम्प ने कहा कि पिछले समय में भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार में ऊंचे टैरिफ के चलते फायदा उठाया जबकि अमेरिका को इसके समय ज्यादा लाभ नहीं मिला। हालांकि, वर्तमान स्थिति में परिवर्तन हुआ है और अमेरिका भारत के साथ व्यापार से अच्छा आमदनी कमा रहा है, उनका दावा है। ट्रम्प ने आगे कहा, ‘हमें एक समझौते पर जरूर पहुंचना होगा क्योंकि मैं प्रधानमंत्री मोदी को बहुत पसंद करता हूं।’

ट्रम्प की प्रशंसा के बीच ही अमेरिका ने भारत सहित ५४ देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा भी की है। यह कदम जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए उठाया गया है। रूसी दावा: अमेरिकी दबाव का भारत पर प्रभाव नहीं पड़ेगा रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने ४ जून को सेंट पीटर्सबर्ग में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों से बात करते हुए भारत तथा प्रधानमंत्री मोदी की खुलेआम प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत पर दबाव डालने की कोशिश करेगा, लेकिन इसका रूस-भारत संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और भारत इसका विरोध करेगा। पुतिन ने भारत को ‘महान देश और लोकतंत्र’ बताया और रूस ने भारत को अपना विश्वसनीय साझेदार माना है।

वे कहते हैं कि भारत अपनी राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है इसलिए अमेरिकी संबंधों में बढ़ोतरी से भारत-रूस संबंध कमजोर नहीं होंगे। पश्चिमी देशों द्वारा रूस से संबंध कम करने के दबाव के चलते भारत पर दबाव देना अंतरराष्ट्रीय रिश्तों के लिए हानिकारक होगा, पुतिन ने उल्लेख किया। पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और नीति कार्यान्वयन में लगातार मेहनत के कारण भारत को विश्व के सबसे बड़े और तेज़ विकास दर वाले देशों में सफल बताया। भविष्य में भारत-रूस व्यापार १०० अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद व्यक्त की।

आगामी दौरा और भारत-रूस समझौते भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। १२ और १३ सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पुतिन भाग लेने के लिए भारत आने वाले हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस वर्ष रूस का दौरा करने की योजना बनाई है। इससे पहले ४ दिसंबर २०१५ को २३वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पुतिन भारत आए थे। यह उनका युक्रेन युद्ध के बाद पहला दौरा था और २०२१ के बाद दूसरा। दिल्ली पहुंचने पर पुतिन और मोदी एक साथ टोयोटा एसयूवी में प्रधान मंत्री निवास गृह की ओर गए थे। दिसंबर २०१५ में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए थे। जिनमें रूस ने भारत को निरंतर और बिना बाधा ईंधन आपूर्ति करने का वचन दिया था। भारतीय कंपनियों ने रूस की एक कंपनी के साथ मिलकर रूस में यूरिया संयंत्र स्थापित करने का समझौता किया था।

इसके अलावा भारत के एफएसएसएआई और रूस की उपभोक्ता संरक्षण एजेंसी के बीच औपचारिक समझौता हुआ था ताकि खाद्य सुरक्षा मानकों को मजबूत किया जा सके। चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौता पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए थे। बंदरगाह और शिपिंग संचालन में सहयोग की दिशा में भी सहमति बनी थी। दोनों देशों ने लोगों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने और आव्रजन प्रक्रियाओं को सरल करने के लिए आंतरिक समझौते किए थे।