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लेखक: space4knews

काँकडभिट्टा–लौकही सड़क निर्माण कार्य में देरी

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण बिटुमिन की कमी के चलते काँकडभिट्टा–लौकही सड़क निर्माण में देरी आई है। नेपाल आयल निगम द्वारा डिजल पर लगाए गए कोटा प्रणाली के कारण परियोजना के लिए आवश्यक डिजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। काँकडभिट्टा–लौकही सड़क का पूर्वी खंड 45 किलोमीटर लंबा है और 10 अरब 6 करोड़ 94 लाख रुपैयाँ की लागत से स्तरोन्नति की जा रही है। (28 चैत्र, काठमांडू)

पेट्रोलियम पदार्थों की कमी के कारण निर्माणाधीन काँकडभिट्टा–लौकही सड़क निर्माण में सुस्ती आई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने बिटुमिन की कमी पैदा की है, जिससे सड़क कालोपत्र (फ्रिक्शन लेयर) में समस्या उत्पन्न हुई है, यह जानकारी निर्माण कंपनी इभ्रास्कन कालिका जे.भी. के प्रोजेक्ट मैनेजर उज्वल प्रसाईं ने दी। काँकडभिट्टा–लौकही सड़क खंड के पूर्वी भाग में इभ्रास्कन कालिका जे.भी. स्तरोन्नति का कार्य कर रही है।

मुख्य कालोपत्र सीजन में, कंपनी के पास उपलब्ध बिटुमिन स्टॉक से केवल 10–15 दिनों का कार्य संभव है। प्रथम स्तर की कालोपत्र के लिए 22 किलोमीटर सड़क पर बेस तैयार किया जा चुका है, जबकि बिटुमिन महंगी कीमतों पर खरीदा गया है, फिर भी उपलब्धता पर्याप्त नहीं है, प्रोजेक्ट मैनेजर प्रसाईं ने बताया। नेपाल आयल निगम द्वारा डिजल पर कोटा प्रणाली लागू किए जाने के कारण आवश्यक डिजल उपलब्ध न होने से निर्माण कार्य में बाधा आ रही है, ऐसा भी गुनासा किया गया है।

काँकडभिट्टा–लौकही सड़क परियोजना के पूर्वी खंड के प्रमुख सीडीई सुनिलबाबु पंत ने बताया कि बिटुमिन के भंडारण से ही कालोपत्र संभव है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे कार्य करना कठिन हो गया है, और निर्माण पक्ष ने इस बारे में जानकारी दी है। निर्माण व्यवसायी बिटुमिन आयात के लिए खुली एलसी को भी वापस कर चुके हैं, यह सूचना परियोजना प्रबंधन तक पहुंची है। यदि पश्चिम एशियाई संकट का समाधान नहीं होता है, तो यह सड़क परियोजना अगले हफ्ते दस दिनों के अंदर ही ठप हो सकती है, पंत ने कहा।

नयाँ ‘एक्सपेरिमेन्टल’ च्यानल र फिचर कन्ट्रोलको सुविधा – Online Khabar

नया ‘एक्सपेरिमेंटल’ चैनल और फीचर कंट्रोल सुविधा सार्वजनिक

कहिरा। माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज की गुणवत्ता सुधारने की प्रतिबद्धता के तहत ‘विंडोज इनसाइडर प्रोग्राम’ में महत्वपूर्ण परिवर्तन लागू करने की घोषणा की है। सार्वजनिक बीटा परीक्षण प्रणाली को और अधिक व्यवस्थित और पूर्वानुमान योग्य बनाने के लिए कंपनी ने परीक्षण चैनलों का पुनर्गठन किया है। गुरुवार को माइक्रोसॉफ्ट के प्रिंसिपल ग्रुप प्रोडक्ट मैनेजर, एलिक ओट ने नई योजना को सार्वजनिक करते हुए बताया कि पुराने ‘कैनरी’ और ‘डेव’ चैनलों को मिलाकर नया ‘एक्सपेरिमेंटल’ चैनल बनाया गया है। इस चैनल के माध्यम से नए फीचर्स सबसे पहले उपलब्ध होंगे और उपयोगकर्ता की प्रतिक्रिया सीधे विकास प्रक्रिया को प्रभावित करेगी।

नई प्रणाली की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं: चैनल पुनर्गठन: नई प्रणाली में ‘एक्सपेरिमेंटल’ और ‘बीटा’ मुख्य चैनल रहेंगे। ‘रिलीज प्रिव्यू’ चैनल को ‘एडवांस्ड’ विकल्प के रूप में छिपाया गया है, जो मुख्यतः आईटी विशेषज्ञों के लिए लक्षित है। फीचर फ्लैग पेज: अब उपयोगकर्ता नए फीचर्स को स्वयं आसानी से सक्षम या अक्षम कर सकेंगे। पहले ‘वाइब्र टूल’ जैसे सॉफ्टवेयर का उपयोग करके यह किया जाता था, लेकिन अब विंडोज सेटिंग्स में ही इसे सेट करना संभव होगा।

निचले चैनल तक सहज पहुंच: अब इनसाइडर प्रोग्राम से बाहर आने या दूसरे चैनल में जाने के लिए विंडोज को पूरी तरह से ‘वाइप’ कर पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता समाप्त हो गई है। ‘इन-प्लेस अपडेट’ सुविधा के जरिए उपयोगकर्ता का डेटा सुरक्षित रखते हुए चैनल परिवर्तन किया जा सकेगा। CFR (कंट्रोल्ड फीचर रोलआउट) का अंत: बीटा चैनल में कंट्रोल्ड फीचर रोलआउट पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि ब्लॉग में किसी नए फीचर की जानकारी प्रकाशित होने और उस संस्करण को इंस्टॉल करने के बाद, सिस्टम पुनः चालू होते ही फीचर तुरंत प्रदर्शित होने लगेंगे। ये बदलाव कुछ ही सप्ताह में लागू कर दिए जाएंगे।

वर्तमान में कैनरी और देव चैनल में मौजूद उपयोगकर्ता स्वचालित रूप से वे विंडोज संस्करण (जैसे 25H2 या 26H1) के अनुसार नए चैनल में स्थानांतरित हो जाएंगे, जिन्हें वे उपयोग कर रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट के इस प्रयास से विंडोज उपयोगकर्ताओं में भ्रम कम होने और सॉफ़्टवेयर की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार की उम्मीद है।

वैज्ञानिकों ने ‘रक्त जमने’ की समस्या का कारण खोज सुरक्षित टीका विकास का मार्ग प्रशस्त किया

काठमाडौँ। वैज्ञानिकों ने कोविड-19 के खिलाफ उपयोग किए गए कुछ टीकों के बाद अत्यंत दुर्लभ दिखाई देने वाली “रक्त जमने” (ब्लड क्लॉट्स) की समस्या के मुख्य कारण का पता लगाया है। ‘फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी’ और जर्मनी की ‘ग्रिफ्सवाल्ड यूनिवर्सिटी’ के शोधकर्ताओं के अंतरराष्ट्रीय दल ने वर्षों से पहेली बनी इस स्थिति के आण्विक कारण का खुलासा किया है। इस सफलता के साथ भविष्य में और भी सुरक्षित टीकों के विकास के मार्ग खुले हैं।

प्रतिरोधी प्रणाली में हुई ग़लत प्रतिक्रिया के अध्ययन के अनुसार, मानवीय प्रतिरक्षा प्रणाली एडेनोवायरस आधारित टीका या प्राकृतिक संक्रमण के बाद गंभीर गलती कर देती है। शरीर वायरस प्रोटीन और रक्त में पाए जाने वाले ‘प्लेटलेट फैक्टर 4’ नामक प्रोटीन के बीच फर्क को नहीं पहचान पाता, जिससे समस्या शुरू होती है। टीका लगने के बाद शरीर वायरस पर हमला करता है, लेकिन गलती से अपने ही रक्त के प्रोटीन के खिलाफ एंटीबॉडी बनाता है, जो रक्त जमने (क्लॉटिंग) की प्रक्रिया प्रारंभ कर देती है। हालांकि यह प्रतिक्रिया अत्यंत दुर्लभ है, फिर भी यह पहले ‘एस्ट्राजेनेका’ टीका लेने वाले कुछ व्यक्तियों में देखी गई थी, जिसे चिकित्सकीय रूप से वीआईटीटी (VITT) कहा जाता है।

आण्विक शोध में मिली इस सफलता के बारे में फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता डॉ. जिंग जिंग वांग ने बताया कि टीम ने ‘मास स्पेक्ट्रोमेट्री सिक्वेंसिंग’ जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर वायरस प्रोटीन और रक्त प्रोटीन के बीच समानता का पता लगाया। उन्होंने इसे “मिसिंग लिंक” (कमी को जोड़ने वाला कड़ी) कहा है। इससे सामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया कैसे अत्यंत दुर्लभ मामलों में हानिकारक प्रभाव डाल सकती है, इसका वैज्ञानिक स्पष्टीकरण प्राप्त हुआ। टीम के प्रमुख प्रोफेसर टॉम गॉर्डन ने इस खोज को “वैश्विक सहयोग की उत्कृष्ट उपलब्धि” करार दिया।

भविष्य में बनने वाले टीके और अधिक सुरक्षित होंगे – सबसे सकारात्मक बात यह है कि अब टीका उत्पादक एडेनोवायरस प्रोटीन की संरचना में छोटे संशोधन करके इस जोखिम को पूरी तरह समाप्त कर सकते हैं। वायरस के ‘pVII’ प्रोटीन को संशोधित करने पर टीका की प्रभावशीलता पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जबकि रक्त जमने का खतरा समाप्त हो जाएगा, ऐसा वैज्ञानिकों का दावा है। मेलबर्न विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेम्स मैक्लुस्की ने इस खोज को विज्ञान की बड़ी उपलब्धि बताते हुए टीकों के प्रति विश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताया। इस खोज से खासकर विकासशील देशों में, जहां एडेनोवायरस आधारित टीकों का अधिक प्रयोग होता है, सुरक्षित टीका वितरण में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

के कार्की आयोग प्रतिवेदनले न्यायपालिकाको हुर्मत लिएको छ ?

कार्की आयोग की रिपोर्ट ने न्यायपालिका की छवि खराब की है?

भाद्र २३ और २४ की घटनाओं की जांच के लिए गठित आयोग २०८२ (कार्की आयोग) की रिपोर्ट आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं हुई है। लेकिन ऑनलाइनखबर और अन्य संचार माध्यमों से सार्वजनिक हुई रिपोर्ट को सही मानते हुए कानून व्यवसायी/वकीलों के छत्र संगठन नेपाल बार एसोसिएशन और कुछ प्रतिष्ठित वकीलों ने आयोग द्वारा न्यायपालिका के संबंध में की गई टिप्पणियों पर कड़ा विरोध प्रदर्शित किया है। उनकी नज़र में न्यायपालिका ऐसी थी जैसे दूध की तरह साफ़ थी और इतनी निष्कलंक थी कि कोई भी उस पर शक नहीं कर सकता था, जिसमें शामिल न्यायाधीश, वकील और समग्र कर्मचारी जैसे कर्ता शामिल थे। लेकिन कार्की आयोग की रिपोर्ट ने इस ध्रुवीय सत्य पर दाग लगाकर इसकी प्रतिष्ठा को नष्ट किया है, जिस कारण वे अत्यंत नाराज हैं।

भाद्र २३ और २४ को काठमाडौँ सहित देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन के दौरान हुई भौतिक और मानवीय क्षति की वस्तुनिष्ठ जांच, घटनाओं के कारणों की पहचान करते हुए सुझावों सहित रिपोर्ट तैयार करने और भविष्य में ऐसे घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक उपायों की सिफारिश करने का दायित्व आयोग को दिया गया था। इसलिए आयोग को यह जांच करनी थी कि आखिर सर्वोच्च अदालत सहित कई अन्य अदालतें क्यों नष्ट हुईं? क्यों न्यायपालिका विशेष रूप से अदालतें जनजातीय जनअधिकार (जेनजी) आन्दोलन के क्रोध से प्रभावित हुईं और २३ अदालतों को क्षति क्यों पहुँची?

उक्त जेनजी आन्दोलन को दबाने वाली तत्कालीन सरकार में नेकपा एमाले और नेपाली कांग्रेस दोनों शामिल थे, और उनके नेतृत्व पर भी जांच होना आवश्यक था। इसी जांच प्रक्रिया में न्यायपालिका के भीतर पाई गई विभिन्न विकृतियां, विसंगतियां और अनियमितताएं रिपोर्ट में शामिल की गईं तथा तत्कालीन नेतृत्व को दोषी ठहराया गया, जिसके कारण न्यायपालिका के सभी सरोकारवालों के बीच तीव्र आक्रोश पैदा होना स्वाभाविक है। विशेष रूप से उन दलों के निकट रहे, उनके प्रतिनिधि रहे और उनके हितों में काम करने वाले वकीलों के समूह ने इस पर गंभीर आपत्ति जताई है।

माधव नेपाल ने एक सप्ताह के भीतर पार्टी एकीकरण का शेष कार्य पूरा करने की योजना का किया खुलासा

२८ चैत्र, काठमांडू। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के सहसंयोजक और पूर्व प्रधानमंत्री माधवकुमार नेपाल ने पार्टी के संगठनात्मक एकीकरण का शेष कार्य एक सप्ताह के भीतर पूरा करने की योजना साझा की है। उन्होंने यह बात अखिल नेपाल महिला संघ (क्रांतिकारी) के संपर्क समन्वय प्रदेश समिति द्वारा नववर्ष के अवसर पर आयोजित कैलेंडर विमोचन कार्यक्रम में कही।

नेपाल ने हाल ही संपन्न चुनाव के परिणाम अपेक्षित से भिन्न आने को स्वीकार करते हुए कहा कि इसकी गंभीर समीक्षा आवश्यक है। उन्होंने चुनाव में कार्यकर्ताओं की सक्रियता और ईमानदारी पर प्रश्न उठाते हुए सभी से आत्ममंथन करने का आग्रह किया। ‘केंद्रीय संयोजन समिति में ४५ सदस्य हैं। ये सदस्य सात दिनों के भीतर बैठक कर विभिन्न विषयों पर चर्चा कर रहे हैं,’ उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रीय समस्याएं, देश के सामने मौजूद चुनौतियां, राजनीतिक संकट, कम्युनिस्ट आंदोलन और लोकतांत्रिक संघर्ष की जटिलताओं पर अपनी राय प्रस्तुत कर चुके हैं। हम सभी विचारों का मनन कर निष्कर्ष निकालने का प्रयास कर रहे हैं।’

नेपाल ने कम्युनिस्टों द्वारा सन् २००७ साल से राष्ट्रीय राजनीति में निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका का स्मरण कराते हुए, कम्युनिस्टों को सच्चे देशभक्त के रूप में प्रस्तुत किया। ‘हम राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अब हमें एकता की भावना लेकर एकीकृत पार्टी के रूप में आगे बढ़ना होगा। फिलहाल २६ विभिन्न घटक हैं, जिनमें विभिन्न स्तरों की महिलाएं भी शामिल हैं,’ नेपाल ने कहा।

जनस्वास्थ्य प्रशासक र स्वास्थ्य बीमा बोर्डका निर्देशकलाई मन्त्रालयले सोध्यो स्पष्टीकरण

स्वास्थ्य मन्त्रालय ने प्रमुख जनस्वास्थ्य प्रशासक और स्वास्थ्य बीमा बोर्ड के निदेशक से स्पष्टीकरण मांगा

२८ चैत, काठमाडौं। स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मन्त्रालय ने प्रमुख जनस्वास्थ्य प्रशासक डा. भीमप्रसाद सापकोटा और स्वास्थ्य बीमा बोर्ड के कार्यकारी निदेशक डा. कृष्णप्रसाद पौडेल से स्पष्टीकरण मांगा है। मंत्रालय ने उन्हें स्वास्थ्य बीमा बोर्ड के सदस्य नियुक्ति से संबंधित मामले में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा है। स्वास्थ्य बीमा बोर्ड की सदस्य नियुक्ति और बैठक में उपस्थिति के विषय में मीडिया में प्रकाशित खबरों के संदर्भ में मंत्रालय ने प्रमुख जनस्वास्थ्य प्रशासक सापकोटा और कार्यकारी निदेशक पौडेल को तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।

मीडिया में स्वास्थ्य बीमा बोर्ड की सदस्य नियुक्ति, मिनट संबंधित मामलों, निर्णय और उपस्थिति से संबंधित दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया में कर्मचारियों की संलिप्तता के विषय में जानकारी सार्वजनिक हुई थी। मंत्रालय के कर्मचारी प्रशासन शाखा के शाखा अधिकारी दीपेन्द्र दहाल द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में सापकोटा और पौडेल से इस विषय में उनकी संलिप्तता और भूमिका रही है या नहीं तथा समस्या क्यों उत्पन्न हुई, इस पर तीन दिनों के भीतर जवाब मंत्रालय में जमा करने को कहा गया है। निष्क्रिय रहे बोर्ड सदस्य जुनु श्रेष्ठ को पुनः बैठक में शामिल कराने के बाद विवाद उत्पन्न हुआ था। श्रेष्ठ हाल ही में पदमुक्त हुए मंत्री दीपक साह की पत्नी हैं। मंत्री साह पर पद के सम्मान का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी को लंबे समय से निष्क्रिय स्वास्थ्य बीमा बोर्ड सदस्य के रूप में नियमित कार्य में संलग्न कराने का आरोप लगाते हुए राप्रपा ने उन्हें वापस बुलाया है।

चितवन में मोटरसाइकिल और स्कूटर की टक्कर से एक व्यक्ति की मौत

चितवन में मोटरसाइकिल और स्कूटर की टक्कर के कारण 27 वर्षीय जय श्रीराम राय की मृत्यु हो गई है। यह दुर्घटना भरतपुर महानगरपालिका–5, सापकोटा चौक स्थित सड़क पर शनिवार दोपहर हुई थी। स्कूटर चालक को हिरासत में लिया गया है और घायल एक अन्य व्यक्ति का इलाज चल रहा है।

28 चैत्र, काठमाडौं। चितवन में मोटरसाइकिल और स्कूटर की टक्कर से एक व्यक्ति की मौत हुई है। भरतपुर महानगरपालिका–5, सापकोटा चौक में प्र.2–03–001 प 6810 नंबर की मोटरसाइकिल और प्र.3–03–001 प 1413 नंबर के स्कूटर की भिड़ंत हुई थी। शनिवार दोपहर हुई इस दुर्घटना में मोटरसाइकिल चालक, वही महानगरपालिका–5, शान्ति चौक निवासी, बाराकी 27 वर्षीय जय श्रीराम राय की मृत्यु हो गई। नेपाल पुलिस के केंद्रीय समाचार कक्ष के अनुसार, गंभीर रूप से घायल उन्हें भरतपुर सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।

दुर्घटना में घायल स्कूटर सवार एक व्यक्ति का भी उसी अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने बताया कि स्कूटर चालक को नियंत्रण में लिया गया है और आगे जांच जारी है।

बेनी बजारमा झर मायालु … – Online Khabar

बेनी बजार में झर मायालु: तातोपानी के प्राकृतिक संसाधन और इसका महत्व

समाचार सारांश म्याग्दी के तातोपानी प्राकृतिक तातोपानी कुण्ड में वार्षिक २४ हजार से अधिक लोग उपचार के लिए आते हैं और प्रतिदिन ६०० से ८०० लोगों की उपस्थिति रहती है। तातोपानी कुण्ड की आय से २०० परिवारों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है और स्थानीय विद्यालय, पुलिस चौकी और स्वास्थ्य चौकी को आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। तातोपानी कुण्ड में धार्मिक स्थल का निर्माण किया गया है और व्यवसायिकरण कर इस आय को राज्य, नगरपालिका और समुदाय में वितरण की व्यवस्था की गई है। म्याग्दी के परिचय में म्यागासेसे पुरस्कार विजेता, पूर्वमंत्री एवं हाल ही में निर्वाचित सांसद महावीर पुन भी हैं। यहाँ घोरेपानी, पुनहिल और अन्नपूर्ण आरोहण के पदमार्ग और बेसकैंप हैं, जहाँ से मोरिस हरजोग ने सन १९५० के जून में प्रथम अन्नपूर्ण शिखर आरोहण किया था। भुरुङ तातोपानी भी यहीं स्थित है। २०३१ साल में शिक्षक सोमनाथ प्यासी ने कम्युनिस्ट विचारों का प्रचार किया था, जिसके बाद लोक द्वारा बनाये गए आधार इलाका और दमन की कहानी गाँव दोवा में भी मिलती है। भीमप्रसाद गौचन द्वारा किये गए अत्याचारों की भी कथा यहाँ मौजूद हैं। पर्वत राज्य की राजधानी बेनी भी यहीं है। धौलागिरी हिमालय भी यहीं स्थित है। सदियों से सिंगा तातोपानी के उपयोग द्वारा रोगों से लड़ने की परंपरा चली आ रही है। इसके पूर्व कुछ पृष्ठभूमि आवश्यक है। तुलु राजा, सुब्बा नरसिंह मल्ल और पाखापानी मेरे साथ हैं चंद्रप्रकाश बानियाँ के उपन्यास ‘तुलु राजा’ और कामरेड मोहनविक्रम सिंह के ‘जलजला’। म्याग्दी की पहली पढ़ाई तुलु राजा की कहानी सुनाते हुए अच्छी लगी। तुलु राजा की कहानी में वि.सं. १८९७ में म्याग्दी पाखापानी में हुए ऐतिहासिक वर्ग संघर्ष, राज्य-विरोधी किसानों के विद्रोह और दमन का चित्रण है। यह पर्वत को गोर्खाओं ने अधीन बनाया था। उस वक्त नेपाल दरबार में थापाओं का शासन कमजोर हो रहा था और पांडे आ गए थे। पाल्पा गौंडा के प्रशासन में बागलुङ और पर्वत थे। नरसिंह मल्ल, पाल्पा गौंडा के मुख्तियार रणदल पांडे के विश्वास को जीतकर बेनी के मुख्य प्रशासक थे। स्थानीय थकाली दल किसानों की जमीन हड़पते थे। गोर्खाली शासन में तामाखानी ठेकेदार नियुक्त किए गए। न्यूनतम ज wages देकर टामा खनाने वाले स्थानीय श्रमिक थे। किसानों को कम मजदूरी दी जाती थी और ठेकेदार उन्हें ठगते थे। पुलिस चौकी दबाव बनाकर किसानों से उनकी जमीन छीनती थी। पाखापानी के बुधे पाइजा के छोटे बेटे तुले ने मुखिया को मनाकर किसानों को ऋणमुक्त कराया, अनिकाल से बचाया और साहू और ठेकेदारों के दमन के खिलाफ लड़ाई लड़ी। लेकिन नरसिंह मल्ल ने तुलु को दमन किया। परिणामस्वरूप तुलु और कई किसान मारे गए। लाटी नामक युवती जिसे नरसिंह मल्ल तीसरी पत्नी बनाना चाहता था, उसने तुलु से विवाह किया लेकिन नरसिंह ने उसका बलात्कार किया। जब वह गर्भवती हुई तो उसने आत्महत्या कर ली। पाखापानी गांव में तुलु राजा और लाटी रानी की कहानी सजीव है। नेपाल के आधिकारिक इतिहास में ये घटनाएँ दर्ज नहीं हैं, लेकिन तत्कालीन सरकारी दस्तावेजों में इनके नाम लिखे हैं। यह गोर्खाली राजाओं के शासनकाल में स्थानीय वर्ग संघर्ष का महत्वपूर्ण अध्याय है। लेखक ने मार्क्सवादी दृष्टिकोण से इतिहास का चित्रण किया है। इसी प्रकार म्याग्दी के नए चिन्ह चंद्रप्रकाश म्याग्दी को ‘महारानी’ उपन्यास के लिए प्राप्त मदन पुरस्कार ने उनकी लेखनी को प्रोत्साहित किया है।

जहाँ प्यार, वहीं नजर… बचपन के वनपाख में गाया गया गीत: बेनी का बाजार, जहाँ प्यार वहीं नजर, किरेमिरे जाले रुमाल! आज वहीं उम्र में लौट कर वह कहता है: हे… बेनी बाजार में झर मायालु… मेरा प्यार है भर मायालु, आओ तो फोन कर मायालु… (मैं जब नाचने की कोशिश करता हूँ तो आँगन तुरंत टेढ़ा हो जाता है, नहीं तो मुझे भी गीत पर नाचने का मन होता है।)

तातोपानी जाने के लिए म्याग्दी नदी के उत्तर तट से ८ किलोमीटर पश्चिम की ओर जाना होता है इसलिए पहले बेनी की चर्चा जरूरी है। बेनी बाजार कालीगण्डकी नदी और म्याग्दी नदी द्वारा घिरा हुआ है। यह क्षेत्र पर्वत मल्ल राज्य की शीतकालीन राजधानी था और दशकों तक साल्ट रूट की भूमिका निभाई। रवाण के पूर्वज पुलस्त्य ऋषि के तपस्या स्थल के रूप में कथित स्थान भी यहीं है। यहाँ म्याग्दी मगरों के आगमन का इतिहास लगभग ११०० वर्ष पुराना है। उनका आदिम ठिकाना सम्भवत: तिब्बत के खाम क्षेत्र में था। पहले यह क्षेत्र जुम्ली खस राज्य का हिस्सा था, बाद में थापा और मल्ल राजाओं ने अपने-अपने राज्य बनाए। वर्तमान में बेनी जिला सदरमुकाम और विभिन्न व्यवसायों का केंद्र बन गया है। हम चैत्र महीने के प्रथम दिन शाम ५ बजे लक्ष्मीजी के साथ लगभग १० घंटे की यात्रा के बाद बेनी पहुँचे। बारिश होने से टैक्सी ने तल्लो तातोपानी बाजार के लिए अधिक किराया मांगा, जिससे कुछ समस्या हुई, फिर भी वहीं गए।

तातोपानी उपचार का अर्थ–राजनीति जब झूठी अफवाहें फैलती हैं, तो लोग उपचार की तलाश में यहाँ आते हैं। नसों के दबाव, जोड़ों के दर्द, चोट, बाथ, और जटिल रोगों से मुक्ति पाने के विश्वास में प्रतिदिन ६०० से ८०० लोग यहाँ आते हैं। म्याग्दी के आदिवासी सदियों से प्राकृतिक उपचार के रूप में इसका उपयोग करते आए हैं। होटलों और होमस्टे ने गाँव के ऊपर और नीचे बाजार को पूरी तरह भर दिया है। सुविधानुसार यहाँ अनेक विकल्प उपलब्ध हैं। यहाँ का दैनिक कारोबार लाखों में है, जिससे २०० से अधिक परिवारों को रोजगार मिला है। जनप्रतिनिधि इस धनराशि से विद्यालय, पुलिस और स्वास्थ्य चौकियों को योगदान दे रहे हैं। तातोपानी प्राकृतिक स्रोत का एक उदाहरण है जो व्यवसायिक रूप से विकसित हो रहा है। कुण्ड की व्यापार, सेवा और पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिल रहा है।

गरीब लोगों की अपनी अपनी कहानी- ७ स्थानीय निवासी और आगंतुकों की कहानियाँ प्रस्तुत की गई हैं जो तातोपानी क्षेत्र में निवास और इतिहास के पहलुओं को दर्शाती हैं। उन्होंने तातोपानी के लाभ और उपचार अनुभव साझा किए हैं। कुछ भारत, जापान और दिल्ली में रहकर भी अपनी जीवन कहानी सुनाते हैं। वृद्ध होते हुए लोग उपचार के लिए तातोपानी आ रहे हैं। सामूहिक रूप से लोग तातोपानी जलाशय को पर्यटन का प्रमुख केंद्र बना रहे हैं और धार्मिक व व्यवसायिक प्रसार भी कर रहे हैं। तीन युगों के गठबंधन से यहाँ जलकुण्डलेश्वर महादेव और जलदेवी भगवती की मूर्ति स्थापित कर धार्मिक स्थल विकसित किया गया है, जिससे व्यवसायीकरण भी हुआ है। भक्तजन दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं। यह प्राकृतिक स्रोत और धार्मिक विश्वास का अद्भुत संगम है। कई लोग इसकी आय को राज्य, नगरपालिका और समुदाय में वितरित करने की व्यवस्था करने के कारण सार्वजनिक हित में संचालित मानते हैं। इसके लाभ को स्थानीय स्तर पर न्यायसंगत तरीके से वितरण करना आवश्यक है। समुदाय की यह कोशिश सराहनीय है और इससे लाभ दीर्घकालिक बने।

अंत में, स्थानीय समुदाय, कुण्ड प्रबंधन समिति के अध्यक्ष कृष्ण खड्का और सचिव कुमार केसी, तथा होटल थापा के परिवार को हार्दिक धन्यवाद। (नोट: भेंट हाल ही में निर्वाचित हरिकृष्ण श्रेष्ठ, एमाले म्याग्दी अध्यक्ष बालकृष्ण सुवेदी और अन्य राजनीतिक व्यक्तित्वों से भी हुई है। इसका विस्तृत लेख बाद में प्रस्तुत किया जाएगा।)

राप्रपा महामन्त्रीका अनुसार उपसभामुख पदमा उम्मेदवारी विवादास्पद

राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टीका महामन्त्री धवल शमशेर राणाले उपसभामुख पदमा पार्टीको आधिकारिक निर्णयबिना उम्मेदवारी पेश गरिएको विषयमा ध्यान दिन आग्रह गरेका छन्। उपसभामुख पदको मतदानमा राप्रपाले मात्र ५ मत प्राप्त गरेको छ र यस विषयले पार्टीभित्र विवाद उत्पन्न गरेको छ। राणाले आफू गणतन्त्र विरोधी आन्दोलनमा रहेको र कुनैपनि जिम्मेवारीहरूमा भाग नलिने स्पष्ट पारेका छन्। २८ चैत, काठमाडौं।

महामन्त्री राणाले उपसभामुख पदको उम्मेदवारीप्रत्ये ध्यानाकर्षण गर्दै भने, “पार्टीको संस्थागत निर्णयबिना नै उपसभामुख पदमा उम्मेदवारी दिएको छ।” हिजो (शुक्रबार) उपसभामुख पदका लागि मतदान सम्पन्न भएको थियो। राप्रपाले सांसद सरस्वती लामालाई पार्टीको तर्फबाट उम्मेदवार बनाएको थियो। तर, निर्वाचनमा राप्रपाले केवल ५ मत प्राप्त गर्‍यो।

यस विषयमा पार्टीभित्र विवाद उत्पन्न भएको छ। राणाले भने, “पार्टीको संस्थागत निर्णयविना उपसभामुख पदको उम्मेदवारीको विषय महत्वपूर्ण छ र मेरो गम्भीर ध्यानाकर्षण छ।” उनले स्पष्ट पारेका छन् कि गणतन्त्रमा संविधानको पूर्ण पालना, संरक्षण र कार्यान्वयनको मुख्य जिम्मेवारी भएकाले कुनै पनि जिम्मेवारी लिनु उचित नहुनेछ। उनले पद्धतिलाई चुनौती दिने कुनै पनि निर्णयमा आफ्नो सहमति नहुने र भविष्यमा पनि नहुने उल्लेख गरेका छन्।

ट्रम्पको आह्वान- अमेरिकासँग धेरै र गुणस्तरीय तेल छ, छिटो आउनुस्

ट्रम्प का आग्रह: अमेरिका के पास है दुनिया का सबसे अधिक और उच्च गुणवत्ता वाला तेल, जल्द आइए

२८ चैत्र, काठमांडू। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका के पास दुनिया के सबसे बड़े दो तेल उत्पादन वाले अर्थव्यवस्थाओं से भी अधिक तेल उपलब्ध है। शनिवार को उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक बड़ी संख्या में तेल टैंकरों के अमेरिका की ओर बढ़ने की जानकारी दी। ट्रम्प ने कहा, ‘बड़ी संख्या में खाली तेल टैंकर अमेरिका की ओर बढ़ रहे हैं ताकि दुनिया के सबसे उच्च गुणवत्ता वाले तेल और गैस का भंडारण किया जा सके।’

‘विश्व के भविष्य के सबसे बड़े तेल उत्पादन वाले अर्थव्यवस्थाओं को मिलाकर जितना तेल होता है, उससे भी अधिक तेल अमेरिका के पास है,’ उन्होंने आगे कहा, ‘और उस तेल की गुणवत्ता भी अत्यंत उच्च स्तर की है।’ ट्रम्प ने तेल खरीदारों से भी अमेरिका आने का आग्रह किया। ‘हम आपका इंतजार कर रहे हैं, जल्द आएं,’ ट्रम्प ने कहा। इस बीच, ट्रम्प के इस बयान के दौरान पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इरानी वार्ताकारों के साथ शांति वार्ता कर रहा है।

बाँकेमा बोलेरोले साइकलयात्रीलाई ठक्कर दिँदा मृत्यु

बाँकेमा बोलेरोले साइकलयात्री अधिस थारूलाई ठक्कर दिँदा गम्भीर घाइते भएका उनको उपचारको क्रममा मृत्यु भएको छ। उक्त ठक्कर क.प्र.०२–००१ च १५७२ नम्बरको बोलेरोले जेठिनाला गाउँपालिका–३ मा दिएकाे हो। नेपाल प्रहरीले जनाएको छ कि, ठक्करबाट साइकलयात्री, सोही गाउँपालिका–३, नौवस्ता बस्ने २६ वर्षका अधिस थारू शनिबार बिहान निधन भएका हुन्। उनी गम्भीर घाइते भएर कोहलपुरस्थित मेडिकल कलेजमा उपचाररत थिए जहाँ उनको मृत्यु भयो। प्रहरीले बोलेरो चालकलाई नियन्त्रणमा लिएर थप अनुसन्धान गरिरहेको छ।

करण केसीको अभिव्यक्तिप्रति अम्पायर्स संघको आपत्ति

नेपाल क्रिकेट अम्पायर संघ ने करण केसी की अभिव्यक्ति पर जताई आपत्ति

नेपाल क्रिकेट अम्पायर एवं स्कोरर संघ ने खिलाड़ी करण केसी द्वारा सोशल मीडिया पर अम्पायरों के खिलाफ की गई अभिव्यक्ति पर आपत्ति जताई है। संघ का मानना है कि ये अभिव्यक्ति अम्पायरों की पेशेवर सुरक्षा को क्षति पहुंचाती है और इस पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। करण केसी ने ट्रोल क्रिकेट नेपाल के विवादित पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा था, ‘अम्पायर को गलती से मारने पर क्या कार्रवाई होती है?’

नेपाल क्रिकेट अम्पायर एवं स्कोरर संघ की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘संघ ने आकस्मिक बैठक कर नेपाल पुलिस क्लब और राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ी करण केसी द्वारा सोशल मीडिया पर अम्पायर के निर्णयों पर की गई अभिव्यक्ति पर गंभीर ध्यान दिया है और इस तरह के निंदनीय व्यवहार की कड़ी निंदा करता है।’ यह बयान संघ के अध्यक्ष मोहम्मद शफिक द्वारा जारी किया गया था।

संघ ने इन अभिव्यक्तियों को अम्पायरों की पेशेवर सुरक्षा और सम्मान के लिए बड़ा आघात बताया है। ऐसे कृत्यों को रोकने के लिए क्यान के समक्ष कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई गई है। इससे पहले करण केसी ने ट्रोल क्रिकेट नेपाल के विवादास्पद पोस्ट पर सवाल उठाए थे, ‘‘अम्पायर को गलती से मारने पर क्या कार्रवाई होती है?’’ मधेश प्रदेश में चल रहे पीएम कप क्रिकेट में अम्पायर के निर्णयों को लेकर खिलाड़ियों में असंतोष देखा गया है। मैदान पर तो यह विवाद कुछ समय के लिए सीमित था, लेकिन इस तरह की तीव्र अभिव्यक्तियां सार्वजनिक होना पहली बार है।

सार्वजनिक जीवन में सभी की संपत्ति की जांच अनिवार्य है: नेता वर्षमान पुन

नेकपा नेता वर्षमान पुन ने काले धन को वैध बनाने की प्रक्रिया को अपराध बताते हुए इसे रोकने के लिए सरकार की नियमित जिम्मेदारी होने पर जोर दिया है। उन्होंने २०४८ साल के बाद सार्वजनिक पदों पर रहे सभी उच्चस्तरीय व्यक्तियों की संपत्ति की जांच के लिए उच्चस्तरीय आयोग बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। २८ चैत्र, काठमाडौं।

नेता पुन ने शनिवार को पार्टी केन्द्रीय कार्यालय पेरिसडाँडा में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, “मैं स्वयं अर्थमंत्री रहते हुए कानून बनवा चुका हूँ, काले धन को वैध बनाना अवैध है, मनी लांड्रिंग की अनुमति नहीं है। सरकार ने इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया तैयार कर ली है।” उन्होंने कहा कि संपत्ति नियंत्रण और नियमन के लिए एक विभाग मौजूद है और इसका क्रियान्वयन सरकार का नियमित कार्य है, इसलिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने आगे कहा, “संपत्ति की जांच के बाद हमें २०४८ साल के बाद सार्वजनिक जीवन में रहे सभी उच्चस्तरीय व्यक्तियों की संपत्ति की छानबीन करनी चाहिए। आरोप लगाने से पहले यह जानना आवश्यक है कि कौन व्यक्ति है और कौन काले धन को सफेद बना रहा है। इसलिए यह छानबीन अनिवार्य है।”

विवादित बन्यो राष्ट्रिय अपांग महासंघको महाधिवेशन

राष्ट्रिय अपांग महासंघ के महाधिवेशन में विवाद

२८ चैत, बुटवल। राष्ट्रिय अपांग महासंघ नेपाल का १०वां राष्ट्रिय महाधिवेशन विवादपूर्ण साबित हुआ है। महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामबहादुर कार्की और महासचिव सुगम भट्टराई सहित उनके पक्ष ने विधान के विपरीत और अदालत के निर्देशों की अवहेलना करते हुए जबरदस्ती चुनाव कराने के आरोप लगाते हुए चुनाव का बहिष्कार किया है। असंतुष्ट पक्ष ने महासंघ के विधान के खिलाफ वितरित सदस्य संस्थाओं की जांच की मांग की, लेकिन सुनवाई न होने पर सदस्यता वितरण और उसके आधार पर आए प्रतिनिधियों के सहभागिता में हुए महाधिवेशन को विधान के विरुद्ध बताया है।

पाटन उच्च न्यायालय ने महाधिवेशन से जुड़ी विवाद की सुनवाई के दौरान २६ चैत को आदेश दिया था कि २०८३ वैशाख ३ को दोनों पक्षों को विवाद समाधान के लिए बुलाया जाएगा। इसके बावजूद अदालत के मानहानी के रुप में महाधिवेशन और चुनाव अनधिकृत तरीके से कराए जाने का आरोप वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामबहादुर कार्की ने लगाया है। उन्होंने कहा कि महाधिवेशन प्रतिनिधियों पर पुलिस दमन किया गया और गैरकानूनी तौर पर चुनाव कराए जाने के खिलाफ कानूनी कदम उठाएंगे।

महाधिवेशन प्रतिनिधियों को प्रतारणा और जालसाजी का आरोप लगाते हुए असंतुष्ट पक्ष ने विरोध किया, जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच कुछ समय के लिए झड़प हुई और कुछ प्रतिनिधियों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया, ऐसा महासंग के केन्द्रीय सदस्य सावित्रा घिमिरे ने बताया। महासंघ में दो वर्षों से आर्थिक अनियमितता, असमावेशिता और नेतृत्व की निरंकुशता के खिलाफ जांच की मांग की जा रही है, लेकिन नेतृत्व ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है, घिमिरे ने कहा।

निर्वाचन कराने के लिए गठित वरिष्ठ अधिवक्ता शालिकराम बञ्जाडे की अध्यक्षता वाली निर्वाचन समिति ने महासंघ में विवादों और पाटन उच्च न्यायालय के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए चुनाव कराना उचित न समझ कर इस्तीफा दे दिया था। हालांकि महासंघ के अध्यक्ष देविदत्त आचार्य के पक्ष ने विवादों के बीच अचानक अधिवक्ता जोखबहादुर खत्री की अध्यक्षता में एक नई निर्वाचन समिति गठित कर बहुमत प्रतिनिधियों के बहिष्कार के बावजूद चुनाव कराने को गैरकानूनी बताया महासचिव सुगम भट्टराई ने। वहीं महासंघ के अध्यक्ष आचार्य ने बहुमत से पारित करके महाधिवेशन और चुनाव कराए जाने का दावा किया है।

धनकुटा में १३ फीट लंबे विषैला किंग कोबरा सांप का बचाव

२८ चैत, धनकुटा। धनकुटा नगरपालिका–३ और ६ की सीमा पर स्थित कागते क्षेत्र में लगभग १३ फीट लंबे विषैले किंग कोबरा (राजगोमन) सांप का सफलतापूर्वक बचाव किया गया है। पहाड़ी क्षेत्र में दुर्लभ पाए जाने वाले इस सांप के बचाव से स्थानीय लोगों में चिंता और उत्सुकता दोनों बढ़ गई हैं। शनिवार को धनकुटा की महालक्ष्मी नगरपालिका–५ के लेगुवा निवासी सर्प बचावकर्मी प्रदीप श्रेष्ठ ने इस सांप को सुरक्षित ढंग से काबू में लिया। समुद्र तल से लगभग १,३०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित कागते के बोधप्रसाद वाग्ले के गोठ में यह सांप तीन दिनों से उपस्थित था।

स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंचे श्रेष्ठ ने जोखिम उठाकर सांप को नियंत्रण में लिया। बचाए गए किंग कोबरा को डिविजन वन कार्यालय धनकुटा के साथ समन्वय करके सुरक्षित रूप से इसके प्राकृतिक आवास (वन क्षेत्र) में पुनर्स्थापित करने की तैयारी धनकुटा नगरपालिका–३ के वडाध्यक्ष विकास घिमिरे ने जानकारी दी। बचावकर्मी श्रेष्ठ के अनुसार किंग कोबरा अत्यंत विषैला सांप है, जिसका टोका गंभीर स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न कर सकता है और यहां तक कि जान भी ले सकता है। ‘‘यह सांप सामान्य हालात में हमला नहीं करता, लेकिन असंतुलित या खतरा महसूस होने पर आक्रामक हो जाता है,’’ उन्होंने बताया।

श्रेष्ठ ने कहा कि वे पिछले ९ वर्षों से सर्प बचाव कार्य में सक्रिय हैं और पिछले दो वर्षों के दौरान धनकुटा के महालक्ष्मी, पाख्रीबास समेत अन्य जगहों से पांच किंग कोबरा सांपों को नियंत्रण में लेकर सुरक्षित जंगलों में छोड़ चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण पहाड़ी और ठंडे इलाकों में भी ऐसे विषैले सांपों की उपस्थिति बढ़ रही है, जो मानव बस्तियों के लिए खतरा बढ़ाने का संकेत है।