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लेखक: space4knews

ओमान गए हुए भिजिट वीजा वाले नेपाली ठगी के शिकार

ओमान पहुंचे नेपालीों के साथ भिजिट वीजा पर काम दिलाने का झांसा देकर ठगी बढ़ रही है, यह बात दूतावास ने बताई है। दूतावास ने स्पष्ट किया है कि भिजिट वीजा पर आए हुए व्यक्तियों का वीजा काम करने वाले वीजा में परिवर्तित नहीं होगा और ओवरस्टे करने पर जुर्माना लगेगा। ओमान जाने वाले नेपालीों को काम के लिए भिजिट वीजा का उपयोग न करने तथा किसी भी अनियमितता या ठगी की स्थिति में दूतावास से संपर्क करने का आग्रह किया गया है। २५ चैत्र, काठमांडू।

भिजिट वीजा के जरिए ओमान पहुंचे नेपालीों के साथ ठगी की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। दूतावास के अनुसार, ओमान पहुंचे लोगों को काम दिलाने का लालच देकर ठगी करने वाले तेजी से बढ़ रहे हैं। कई बार बड़े पैमाने पर जमा की गई रकम लेकर भिजिट वीजा पर ओमान भेजने और बेहतर नौकरी का वादा करके ठगी की जाती है।

इस समय ओमान में फंसे कई नेपाली दूतावास से संपर्क कर रहे हैं। अधिकतर ने बड़ी राशि चुकाई है, लेकिन उनके पास कोई दस्तावेज नहीं है और उन्हें बेहतर वेतन व सुविधाओं वाली नौकरी का आश्वासन देकर धोखा दिया गया है, ऐसा दूतावास ने बताया है। दूतावास ने स्पष्ट किया है कि भिजिट वीजा लेकर ओमान पहुंचकर उसे काम करने वाले वीजा में बदला नहीं जा सकता। साथ ही भिजिट वीजा की अवधि के बाद ओवरस्टे करने पर बचाव में मुश्किल पड़ सकती है और दिन के हिसाब से १० ओमानी रियाल का जुर्माना देना होगा।

ओमान जाने वाले नेपालीों से आग्रह किया गया है कि वे काम के लिए भिजिट वीजा का उपयोग न करें और यदि किसी भी तरह की समस्या या ठगी का सामना हो तो तुरंत दूतावास से संपर्क करें।

अधिक आठ जना जेनजी शहीद परिवारका सदस्यलाई रोजगारी दिने निर्णय

नेपाल विद्युत् प्राधिकरण सञ्चालक समितिले थप आठ जना जेनजी शहीद परिवारका सदस्यलाई रोजगारी दिने निर्णय गरेको छ। ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिँचाइ मन्त्री विराजभक्त श्रेष्ठको अध्यक्षतामा बसेको बैठकले छुटेका शहीद परिवारका सदस्यलाई रोजगारी दिने निर्णय गरेको हो। प्राधिकरणले यसअघि २७ जना शहीद परिवारलाई रोजगारी दिने प्रक्रिया अगाडि बढाइसकेको थियो। २५ चैत, काठमाडौं।

बुधबारको बैठकमा काठमाडौं वनस्थलीका रोजित श्रेष्ठ, उदयपुरका अम्बिका विश्वकर्मा, सिन्धुपाल्चोककी सुमित्रा महत र शितल पौडेल, संखुवासभाका मौसम कुलुङ, सर्लाहीकी पार्वती अधिकारी, बाजाङकी हेमन्ती विष्ट र लमजुङकी मञ्जु पौडेललाई रोजगारी दिने निर्णय भएको बताइएको छ। साथै, प्राधिकरणका कार्यकारी निर्देशक हितेन्द्रदेव शाक्यले आफ्नो कार्यसम्पादन मूल्यांकनबारे सञ्चालक समितिलाई जानकारी दिएका थिए।

रवि भन्थे– सिंहदरबार खोलौं, बालेनले गरे थप कडाइ – Online Khabar

रवि लामिछाने ने सिंहदरबार सभी के लिए खुला करने का प्रस्ताव रखा, बालेन ने कड़ी पाबंदी लगाई

रास्वपा के सभापति रवि लामिछाने ने २०८१ जेठ में सिंहदरबार सभी के लिए खुला करने का प्रस्ताव रखा था। प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में कार्यरत सरकार ने सिंहदरबार प्रवेश पर कड़ी पाबंदी लगाते हुए पत्रकारों और कानूनी व्यवसायियों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। नेपाल बार एसोसिएशन और पत्रकार महासंघ ने सिंहदरबार प्रवेश में लगाई गई रोक के विरोध में इसे आसान बनाने की मांग की है। २५ चैत, काठमांडू।

गृहमंत्री के रूप में कार्यरत रवि लामिछाने ने सिंहदरबार सभी के लिए खोलने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा था, ‘सिंहदरबार में अब किसी को पहचानने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल पहचाने जाने के आधार पर पास लेकर काम करने और अपने लोगों के फोन पर ही अंदर जाने की स्थिति को समाप्त करने का प्रयास है।’ तत्कालीन गृहमंत्री लामिछाने के २०८१ जेठ के इस घोषणा को अभी तक लागू नहीं किया गया है, बल्कि आसानी से जाने योग्य जगहों पर विभिन्न बहानों से रोक लगाने के उदाहरण सामने आए हैं।

बुधवार को नेकपा एमाले के सांसद सुहाङ नेम्वाङ ने प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय पहुंचकर सिंहदरबार प्रवेश के लिए लगाए गए नए नियमों पर असंतोष जताया। उन्होंने कानून व्यवसायियों के प्रवेश पर लगी पाबंदी हटाने की मांग की। मंगलवार को प्रशासकीय अदालत ने कानूनी व्यवसायियों को नागरिक एप के जरिए अनुमति लेने का निर्देश दिया था। इससे पहले वे नेपाल बार काउंसिल और नेपाल बार एसोसिएशन द्वारा जारी परिचय पत्र दिखाकर प्रवेश पाते थे।

नेपाल बार एसोसिएशन ने एक विज्ञप्ति जारी कर इसका विरोध किया है। महासचिव केदारप्रसाद कोइराला द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘सिंहदरबार परिसर के भीतर प्रशासकीय अदालत समेत कानूनी व्यवसायियों के प्रवेश में कुछ दिनों से बाधा आ रही है, जिसे लेकर बार एसोसिएशन ने संबंधित निकायों को मौखिक रूप से कई बार सचेत किया, पर कोई सुनवाई नहीं हुई।’ नेपाल पत्रकार महासंघ की अध्यक्ष निर्मला शर्मा ने कहा है कि सरकार पत्रकारों को प्रवेश नहीं देकर संविधान द्वारा प्रदत्त लोकतंत्र और जनता के सूचना प्राप्ति के अधिकार का हनन कर रही है।

प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय के प्रवक्ता हेमराज अर्याल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री कार्यालय जाना पास व्यवस्था से है, कड़ी पाबंदी से नहीं।’ रास्वपा के सहप्रवक्ता रमेश प्रसाईं ने बताया कि पहुंच रोकने या सूचना छिपाने की कोई नीति नहीं है। नेपाल बार ने कानूनी व्यवसायियों के परिचय पत्र के आधार पर सिंहदरबार के भीतर निर्बाध प्रवेश की व्यवस्था करने की मांग की है।

पत्रकारों ही नहीं बल्कि सभी नागरिकों के लिए सिंहदरबार खुला होना चाहिए, इस बात पर महासंघ की अध्यक्ष शर्मा ने जोर दिया है। राष्ट्रीय सूचना आयोग ने वर्ष २०१६ (२०७३ साल) में संविधान और कानून के अनुरूप सिंहदरबार में स्थित सार्वजनिक निकायों को नागरिकों की सूचना पहुंच को सरल और सुगम बनाने का निर्देश दिया था।

संविधान संशोधन प्रस्ताव पर एमाले की प्रतिक्रिया – अध्यक्ष हिरासत में होने के कारण एजेंडा स्पष्ट नहीं कहा जा सकता

नेकपा एमाले ने बताया है कि पार्टी अध्यक्ष केपी शर्मा ओली पुलिस हिरासत में होने के कारण संविधान संशोधन के एजेंडा पर चर्चा नहीं हो सकी है। सरकार द्वारा असिम शाह के नेतृत्व में गठित समिति की बैठक में एमाले के केंद्रीय सदस्य डा. भिष्म अधिकारी ने कहा है कि अध्यक्ष की रिहाई के बाद ही एजेंडा तैयार किया जाएगा। उन्होंने संविधान संशोधन के मुद्दे को खुला छोड़ना सही नहीं माना और कहा कि सभी पक्षों के साथ गहन चर्चा और सहमति आवश्यक है। २५ चैत, काठमाडौं।

नेकपा एमाले ने स्पष्ट किया है कि उनके पार्टी अध्यक्ष केपी शर्मा ओली पुलिस हिरासत में होने की वजह से संविधान संशोधन के एजेंडा पर चर्चा नहीं हुई है। संविधान संशोधन के लिए बहस प्रस्ताव तैयार करने के उद्देश्य से सरकार ने असिम शाह के नेतृत्व में समिति बनाई थी, जिसमें एमाले के प्रतिनिधि ने यह जवाब दिया। ‘हमारे पार्टी अध्यक्ष को पुलिस हिरासत में रखा गया है। तब तक वे बाहर नहीं आएंगे, संविधान संशोधन पर चर्चा नहीं हो रही है,’ केंद्रीय सदस्य डा. भिष्म अधिकारी ने बैठक में कहा, ‘जब वे बाहर आएंगे, तब हमारी बैठक होगी और हम एजेंडा तैयार करेंगे, फिलहाल हम कुछ नहीं कह सकते।’

संविधान संशोधन के ठोस एजेंडा पर पार्टी के निर्णय की बात करते हुए अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह संविधान के खिलाफ नहीं है। ‘संविधान संशोधन के विषय को केवल खुला छोड़ देना पर्याप्त नहीं है, सभी पक्षों के साथ चर्चा करनी होगी और सहमति लेनी होगी,’ उन्होंने कहा। उन्होंने जोर दिया कि प्रान्तीय एवं स्थानीय सरकारों, विशेषज्ञों और संबंधित हितधारकों के साथ गहन चर्चा के बाद ही संविधान संशोधन किया जाना चाहिए।

आक्रमण रोकने की अपील के साथ कतार ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम का स्वागत किया

कतार की मंत्रिपरिषद् ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम का स्वागत करते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर बल दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के १० बिंदु प्रस्ताव को आधार मानते हुए दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की है। ईरान ने अपने आणविक कार्यक्रम से जुड़ी पाबंदियों को हटाने, आर्थिक राहत, वित्तीय क्षतिपूर्ति और अमेरिकी लड़ाकू सेनाओं की वापसी की मांग की है। २५ चैत, काठमाडौं।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में बुधवार सुबह जल्दी घोषित अमेरिका-ईरान युद्धविराम का कतार की मंत्रिपरिषद् ने स्वागत किया है। मंत्रिपरिषद् ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा, ‘‘क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करने वाले सभी प्रकार के शत्रुतापूर्ण कार्य और गतिविधियां तत्काल रोकनी होंगी, राज्य की सार्वभौम सत्ता का सम्मान किया जाना आवश्यक है, और समुद्री मार्ग की सुरक्षा, जलयात्रा की स्वतंत्रता तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।’’

युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटे बाद भी बुधवार को बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत के खिलाफ हमले जारी थे, इसी बीच कतार की यह विज्ञप्ति आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के १० बिंदु प्रस्ताव को आधार मानते हुए दो सप्ताह के लिए युद्धविराम की घोषणा की तथा ईरान पर चल रहे बमबारी और आक्रमण अभियानों को फिलहाल स्थगित कर दिया।

ईरान के जारी १० बिंदु प्रस्ताव में विश्व के महत्वपूर्ण तेल निर्यात मार्गों में से एक माना जाने वाला हर्मुज जलसंधि में अमेरिकी हस्तक्षेप के बिना ईरान के निरंतर नियंत्रण को शर्त के रूप में रखा गया है। ईरान के प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु उसका आणविक कार्यक्रम है, जो लंबे समय से दोनों देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच विवाद का केंद्र बना हुआ है। तेहरान ने अपने आणविक कार्यक्रम को लेकर लगाए गए सभी प्रतिबंध हटाने और तत्काल आर्थिक राहत देने की मांग की है। वर्षों पुराने अमेरिकी प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाला है। इसी तरह, संघर्ष के दौरान हुए नुकसान की पूर्ति के लिए अमेरिका से वित्तीय क्षतिपूर्ति की भी ईरान ने मांग की है। साथ ही, अपने क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू सेनाओं की पूर्ण वापसी और लेबनान सहित मध्य पूर्व के क्षेत्रों में जारी युद्ध समाप्त करने की भी शर्त ईरान ने रखी है।

संविधान संशोधनको बहस, दलहरूले राखे पहिलो बैठकमै अडान

संविधान संशोधन बहस में दलों ने पहली बैठक में टिकाए अपने प्रस्ताव

२५ चैत, काठमांडू। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह द्वारा राजनीतिक सल्लाहकार असिम शाह के नेतृत्व में गठित संविधान संशोधन बहसपत्र कार्यदल ने अपनी चर्चाएं शुरू कर दी हैं। प्रतिनिधि सभा और राष्ट्रिय सभा में प्रतिनिधित्व करने वाले दलों के प्रतिनिधियों को प्रधानमंत्री कार्यालय सिंहदरबार में बुलाकर कार्यदल ने चर्चा आरंभ की है। ‘पहले दिन होने के कारण आज की बैठक परिचयात्मक स्वरूप की थी,’ रास्वपाका नेता मोहनलाल आचार्य ने कहा। वे रास्वपाका की ओर से कार्यदल की बैठक में शामिल थे। पहली बैठक होने के कारण कार्यदल के संयोजक शाह ने बताया कि ६० दिनों के अंदर संविधान संशोधन बहसपत्र तैयार करना अनिवार्य है। ‘७ दिनों के भीतर बहसपत्र तैयार करना है और उस पर चर्चा कर ६० दिनों के अंदर कार्य पूर्ण करना होगा,’ शाह ने बताया। इसके बाद संविधान में संशोधन की संभावनाओं व प्रतिबंधों पर विस्तृत जानकारी दी गई। प्रधानमंत्री कार्यालय के कानूनी सचिव पुष्कर सापकोटा और कानून मंत्रालय की सचिव इंदिरा दाहाल ने ब्रीफिंग दी और तत्पश्चात दलों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। रास्वपाका के आचार्य ने कहा कि संविधान संशोधन पर यह बहस उनकी पार्टी के वचनपत्र के अनुरूप है और वे कार्यदल का समर्थन करते हैं। ‘कार्यदल आवश्यक उपसमितियां बनाए और सभी संबंधित पक्षों से सुझाव ले,’ उन्होंने कहा।

एमाले के प्रतिनिधि डॉ. भिष्म अधिकारी ने कहा कि संविधान संशोधन के प्रस्ताव पर असहमति नहीं है, लेकिन अपने अध्यक्ष की पुलिस हिरासत के कारण जटिलता हो रही है। ‘हमारे पार्टी अध्यक्ष पुलिस हिरासत में हैं। उनकी गैरमौजूदगी में संविधान संशोधन पर कोई चर्चा नहीं हो सकी,’ अधिकारी ने बताया, ‘वे बाहर आएंगे तब बैठक होगी और हम एजेंडा तैयार करेंगे, अभी कुछ कह पाना कठिन है।’ हालांकि, उन्होंने यह सुझाव दिया कि संविधान संशोधन एक जटिल विषय है जिसे पर्याप्त चर्चा के बाद ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए। ‘संविधान संशोधन को केवल खुला छोड़ना पर्याप्त नहीं है, सभी पक्षों से चर्चा और सहमति जरूरी है,’ उन्होंने कहा। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के देव गुरूङ ने भी अपने दल का समर्थन व्यक्त किया और कहा कि संविधान संशोधन संभव है, लेकिन सभी के लिए स्वीकार्य बनाना अत्यंत आवश्यक है। ‘उन्होंने प्रक्रियागत पहलुओं पर विस्तार किया और कहा कि संविधान संशोधन पर असहमत नहीं है,’ एक बैठक सूत्र ने बताया। श्रम संस्कृति पार्टी, राप्रपा, जसपा, लोसपा और राष्ट्रिय जनमोर्चा के प्रतिनिधियों ने भी संविधान संशोधन के एजेंडे प्रस्तुत किए। ‘उन्होंने अपने-अपने दलों की ओर से एजेंडा रखा,’ बैठक सूत्र ने कहा। श्रम संस्कृतिका सांसद ध्रुवराज राई ने भ्रष्टाचार नियंत्रण, माटो-अनुकूल राष्ट्रीय नीति और राष्ट्रीयता पर गहन चर्चा जरूरी बताते हुए कहा, ‘भ्रष्टाचार खत्म करने के उपाय स्पष्ट किए जाने चाहिए। माटो-अनुकूल नीतियों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।’ राप्रपाका ज्ञानेन्द्र शाही ने हिन्दू राज्य और राजसंस्था का मुद्दा उठाया। ‘उन्होंने हिन्दू राज्य और राजसंस्था के प्रश्न उठाए,’ सूत्र ने बताया। मधेशवादी दलों के प्रतिनिधियों ने वर्तमान संविधान के प्रति पारंपरिक असहमति का स्मरण दिलाया। जसपा के सुरेन्द्रकुमार झा और लोसपा के आभास लाभ ने संविधान जारी होने के समय से ही असहमति होने की बात कही। राष्ट्रिय जनमोर्चा की दुर्गा पौडेल ने संघीयता समाप्ति का विषय भी उठाया। प्रदेशों को समाप्त करने के एजेंडे में पौडेल को राप्रपाका शाही का समर्थन भी मिला। ‘प्रदेश खारिज करने हेतु संविधान संशोधन की आवश्यकता पर वे सहमत हैं,’ बैठक सूत्र ने बताया। कांग्रेस की ओर से इस बैठक में कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। नेताओं के अनुसार प्रतिनिधि चयन में देरी के कारण कांग्रेस के प्रतिनिधि बैठक में सम्मिलित नहीं हो पाए।

लेखा परीक्षक से विपरीत या अस्वीकृत राय प्राप्त कंपनी को आईपीओ की अनुमति न देने का निर्णय

नेपाल धितोपत्र बोर्ड ने लेखा परीक्षक से विपरीत या अस्वीकृत राय प्राप्त कंपनी को आईपीओ अनुमति न देने के लिए मापदंड २०८२ जारी किया है। आईपीओ के लिए ड्यू डिलिजेंस प्रमाणपत्र सहित वित्तीय विवरणों की पुनः समीक्षा हेतु लेखा विशेषज्ञ नियुक्त करने के लिए बोर्ड की स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। लेखा विशेषज्ञ को ३० दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट बोर्ड में प्रस्तुत करनी होगी और आवश्यक सहयोग धितोपत्र निष्कासन तथा बिक्री प्रबंधक एवं संबंधित संस्थान द्वारा प्रदान किया जाएगा, यह मापदंडों में स्पष्ट किया गया है। २५ चैत, काठमांडू।

नेपाल धितोपत्र बोर्ड ने लेखा परीक्षक द्वारा वित्तीय विवरणों में विपरीत या अस्वीकृत राय प्राप्त करने वाली कंपनियों को साधारण शेयर निष्कासन (आईपीओ) की अनुमति न देने का निर्णय लिया है। बोर्ड ने प्रारंभिक सार्वजनिक निष्कासन की वित्तीय विवरण पुनरावलोकन संबंधी मापदंड २०८२ जारी करते हुए इस व्यवस्था को लागू किया है। बोर्ड के मापदंड के अनुसार, आईपीओ निष्कासन हेतु आवेदन करने वाली संस्थाओं को नवीनतम आर्थिक वर्ष के लेखा परीक्षित वित्तीय विवरणों में यदि लेखा परीक्षक से विपरीत या अस्वीकार राय मिली होगी तो वे आईपीओ के लिए अयोग्य माने जाएंगे।

इसके साथ ही, वित्तीय विवरणों की पुनरावलोकन या जाँचबुझ की जिम्मेदारी धितोपत्र निष्कासन तथा बिक्री प्रबंधक की अधिक होगी, ऐसा बोर्ड द्वारा बनाए गए मापदंड में उल्लेख है। सार्वजनिक निष्कासन हेतु आवेदन करते समय ड्यू डिलिजेंस प्रमाणपत्र के साथ तोकित मापदंडों के आधार पर कंपनी के वित्तीय स्थिति का बिंदुवार परीक्षण कर विवरण प्रमाणित कर बिक्री प्रबंधक को बोर्ड में प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

यदि धितोपत्र निष्कासन तथा बिक्री प्रबंधक से ड्यू डिलिजेंस प्रमाणपत्र सहित कंपनी के वित्तीय विवरणों की पुनरावलोकन या जाँचबुझ करने की आवश्यकता हो, तो बोर्ड की स्वीकृति लेकर नेपाल चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान की सूची में शामिल लेखा विशेषज्ञ को नियुक्त करना होगा। लेखा विशेषज्ञ नियुक्ति हेतु बिक्री प्रबंधक तीन लेखा विशेषज्ञों के नाम प्रस्तावित कर बोर्ड को आवेदन देंगे। बोर्ड मापदंडों के अनुसार योग्यता, कार्यक्षेत्र एवं सेवा शर्तों के आधार पर इनमें से एक विशेषज्ञ को नियुक्त करेगा।

बोर्ड की स्वीकृति मिलने की तारीख से संबंधित संस्था के वित्तीय विवरण की पुनरावलोकन या जाँचबुझ के लिए नियुक्त लेखा विशेषज्ञ को ३० दिनों के भीतर रिपोर्ट स्वयं बोर्ड में प्रस्तुत करनी होगी। यदि ३० दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत न करना संभव हो तो समय सीमा में देरी से पहले बोर्ड को सूचित कर अधिकतम १० दिनों का अतिरिक्त समय प्राप्त करना आवश्यक होगा। लेखा विशेषज्ञ के पारिश्रमिक एवं अन्य खर्च संस्था स्वयं वहन करेगी। लेखा विशेषज्ञ को वित्तीय विवरण पुनरावलोकन या जाँचबुझ के दौरान आवश्यक कागजात, विवरण, स्थल निरीक्षण आदि कार्यों हेतु धितोपत्र निष्कासन तथा बिक्री प्रबंधक एवं संबंधित संस्था से पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, यह भी मापदंड में उल्लेखित है।

ठेक्का ऑनलाइन प्रणाली के विवरण में छेड़छाड़ के आरोप में 6 गिरफ्तार

सरकारी ऑनलाइन प्रणाली में अनधिकृत पहुँच प्राप्त कर विभिन्न परियोजनाओं के ठेक्कों के विवरण में छेड़छाड़ करने के आरोप में 6 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में दिवाकर देउजा, भरत धामी, संजय भट्ट, भाष्करराज अर्याल, सागर कटुवाल और जीवनकुमार दास शामिल हैं। पुलिस प्रधान कार्यालय, साइबर ब्यूरो और केंद्रीय जांच ब्यूरो की संयुक्त टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर संगठित अपराध निवारण अधिनियम २०७० के तहत जांच शुरू की है। २५ चैत्र, काठमांडू।

विभिन्न परियोजनाओं के ठेक्कों के ऑनलाइन प्रणाली के विवरण में छेड़छाड़ करने के आरोप में 6 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। सार्वजनिक खरीद निगरानी कार्यालय की ऑनलाइन प्रणाली में अनधिकृत पहुँच प्राप्त कर विभिन्न ठेक्कों के विवरण में छेड़छाड़ के मामले की शिकायत के आधार पर 6 व्यक्तियों की गिरफ्तारी हुई है। गिरफ्तार व्यक्तियों में दिवाकर देउजा, भरत धामी, संजय भट्ट, भाष्करराज अर्याल, सागर कटुवाल और जीवनकुमार दास शामिल हैं। इन्हें पुलिस प्रधान कार्यालय, साइबर ब्यूरो और केंद्रीय जांच ब्यूरो की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया है। इनके विरुद्ध संगठित अपराध निवारण अधिनियम २०७० के तहत और जांच जारी है, पुलिस सूत्रों ने जानकारी दी है।

युद्धविरामपछि ट्रम्पले इरानलाई सैन्य सहयोग गर्ने राष्ट्रहरूमा ५० प्रतिशत कर लगाउने घोषणा गरे

२५ चैत, काठमाडौं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्पले इरानलाई सैन्य सहयोग गर्ने देशहरूमा ५० प्रतिशत कर (ट्यारिफ) लगाउने घोषणा गरेका छन्। इरानसँग भएको युद्धविराम सम्झौतापछि बुधबार सामाजिक सञ्जाल ट्रूथमार्फत अभिव्यक्ति दिँदा ट्रम्पले इरानका सहयोगी देशहरूलाई यस्तो चेतावनी दिएका छन्।

‘इरानलाई सैन्य हतियार आपूर्ति गर्ने देशले अमेरिकामा बिक्री हुने सबै वस्तुहरूमा ५० प्रतिशत ट्यारिफ तिर्नुपर्नेछ,’ ट्रम्पले लेखेका छन्, ‘यो व्यवस्था तत्काल लागू हुनेछ र यसमा कुनै छुट दिइने छैन।’

कहिले नियुक्त हुन्छन् अर्का डेपुटी गभर्नर ?  – Online Khabar

अर्का डेपुटी गवर्नर कब नियुक्त किए जाएंगे?

सरकार ने मंगलवार नेपाल राष्ट्र बैंक में कार्यकारी निर्देशक किरन पंडित को डेपुटी गवर्नर के रूप में नियुक्त किया है। केंद्रीय बैंक में दो डेपुटी गवर्नर होने का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान में केवल एक पद खाली है। पंडित ने राष्ट्र बैंक में लगभग 20 वर्षों का अनुभव अर्जित किया है और बैंक सुपरिवेंशन तथा विदेशी विनिमय विभाग में काम किया है।

२५ चैत, काठमांडू। सरकार ने मंगलवार को नेपाल राष्ट्र बैंक में एक डेपुटी गवर्नर के रूप में किरन पंडित को नियुक्त किया। केंद्रीय बैंक में दो डेपुटी गवर्नर होने की व्यवस्था होने के बावजूद सरकार ने एक पद ही भरा है और दूसरा पद रिक्त रखा है। राष्ट्र बैंक के 18 कार्यकारी निदेशकों में से दो को डेपुटी गवर्नर बनाया जाना था, लेकिन सरकार ने फिलहाल केवल एक की नियुक्ति की है।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, सरकार ने राजनीतिक झुकाव के बिना प्रतिस्पर्धात्मक और सक्षम उम्मीदवार के रूप में पंडित को चुना है। डॉ. युवराज खतिवड़ा के नेतृत्व में रविंद्र पांडे को डेपुटी गवर्नर बनाने से इनकार करने के कारण यह पद रिक्त था। इसके बाद से केंद्रीय बैंक की डेपुटी गवर्नर की नियुक्ति एक साथ करने की परंपरा चली आ रही है।

सूत्रों के अनुसार, “पूर्व गवर्नर खतिवड़ा द्वारा की गई गलती को सुधारा गया है। तत्काल आवश्यक पद भरने के लिए डेपुटी गवर्नर में केवल एक ही नियुक्ति की गई है।” पूर्व प्रथा के अनुसार, जब एक डेपुटी गवर्नर नियुक्त होता था तो कुछ समय बाद दूसरे की नियुक्ति होती थी।

सूत्र ने आगे कहा, “राष्ट्र बैंक ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि गवर्नर की छुट्टी या अवकाश के दौरान भी नेतृत्व में कोई समस्या न हो, पहले डेपुटी गवर्नर को नियुक्त किया है। दूसरा डेपुटी गवर्नर आगामी एक से तीन महीनों के भीतर नियुक्त किया जाएगा। वह नियुक्ति कार्यकारी निदेशकों द्वारा सिफारिश किए गए योग्य और प्रतिस्पर्धी व्यक्तियों में से होगी।”

अभी कार्यकारी निदेशकों में कई अपने आपको डेपुटी गवर्नर बनवाने का प्रयास कर रहे हैं। आने वाले समय में डेपुटी गवर्नर कौन होगा, यह कार्य प्रदर्शन के आधार पर तय होगा। सरकार के पास दो तिहाई जनादेश होने के बावजूद नियामक निकायों में नियुक्त लोगों को तत्काल बदलने की योजना नहीं है, सूत्र ने बताया।

दूसरे डेपुटी गवर्नर की नियुक्ति के समय वर्तमान निदेशकों के इंतजार की रणनीति केंद्रीय बैंक के भीतर देखी जा रही है। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कुछ समय में कार्यकारी निर्देशक बनेंगे और उसके बाद डेपुटी गवर्नर बनने का क्रम होगा।

नवनियुक्त डेपुटी गवर्नर पंडित ने लगभग दो दशक से राष्ट्र बैंक में काम किया है। उन्होंने बैंक सुपरिवेक्षण, वित्तीय संस्थाओं का नियमन, भुगतान प्रणाली और विदेशी विनिमय विभाग में अनुभव प्राप्त किया है। 20 फागुन 2081 को राष्ट्र बैंक के कार्यकारी निर्देशक बने पंडित ने पेमेंट सिस्टम विभाग का नेतृत्व किया था और गत कार्तिक में उन्हें विदेशी विनिमय प्रबंधन विभाग में स्थानांतरित किया गया था।

निदेशक के रूप में रहते हुए उन्होंने राष्ट्र बैंक के 69वें वार्षिकोत्सव के दौरान उत्कृष्ट कर्मचारी के रूप में सम्मान प्राप्त किया। पब्लिक यूथ कैंपस से बीबीएस उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने त्रिभुवन विश्वविद्यालय में अपनी बैच में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने त्रिचंद्र कैंपस से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर भी किया है।

विश्व बैंक का अनुमान: नेपाल में आर्थिक वृद्धि दर 2.3 प्रतिशत तक सीमित रहेगी

विश्व बैंक ने चालू आर्थिक वर्ष 2082/83 में नेपाल की आर्थिक वृद्धि दर 2.3 प्रतिशत तक सीमित रहने का अनुमान प्रस्तुत किया है। विश्व बैंक के निदेशक डेविड सिस ने कहा है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और भाद्र मास की हड़तालों का नेपाल की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि नेपाल को व्यावसायिक माहौल सुधारने, आधारभूत संरचना के विकास और कृषि को प्राथमिकता देनी चाहिए।

25 चैत, काठमांडू। विश्व बैंक नेपाल कार्यालय ने अपने अर्धवार्षिक अनुमान “नेपाल डेवलपमेंट अपडेट अप्रैल 2026” जारी करते हुए यह प्रक्षेपण प्रस्तुत किया है। कृषि उत्पादन में गिरावट और खाड़ी देशों में जारी युद्ध के प्रभाव से नेपाल की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। हालांकि, नए सरकार के गठन और आर्थिक सुधार प्रयासों से भविष्य में सुधार की उम्मीद जताई गई है।

पिछले वर्ष नेपाल की आर्थिक वृद्धि दर 4.6 प्रतिशत थी। पुनर्निर्माण, जलविद्युत विस्तार और स्थानीय एवं प्रदेश स्तर के चुनावों को ध्यान में रखते हुए आगामी आर्थिक वर्ष में वृद्धि दर 4.4 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। राष्ट्रीय तथ्यांक कार्यालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वर्ष की दूसरी तिमाही में 4.05 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार ने चालू वर्ष के लिए 6.5 प्रतिशत की वृद्धि लक्ष्यित की है।

विश्व बैंक ने आज पत्रकार वार्ता में जारी ‘नेपाल डेवलपमेंट अपडेट’ में बताया है कि वर्ष 2026 में सेवा क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होगा। विशेषतः पर्यटन क्षेत्र में जटिलताएं, परिवहन लागत में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने का अनुमान है। रिपोर्ट में मध्य पूर्व संघर्ष के लंबे समय तक जारी रहने पर पर्यटन आगमन में कमी, रेमिटेंस में गिरावट और अर्थव्यवस्था की सुस्ती संभव होने की बात कही गई है। हालांकि, राजनीतिक स्थिरता और संरचनात्मक सुधारों से निजी निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ने की संभावना भी जताई गई है।

४० प्रतिशत नागरिक नवीकरण में असफल, २५ अरब रुपये बकाया दबाव में

समाचार सारांश

समीक्षा किया गया।

  • स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम ने २५ चैत २०७२ से १० वर्ष पूरे कर लिए हैं और वर्तमान में लगभग ९८ लाख नागरिक इसमें शामिल हैं।
  • कार्यक्रम में लगभग ४० प्रतिशत पॉलिसीधारक नवीकरण नहीं कर पाए हैं और प्रीमियम कुल खर्च के लगभग २५ प्रतिशत ही वहन करता है।
  • स्वास्थ्य बीमा बोर्ड ने डिजिटल तकनीक विस्तार, दावा भुगतान प्रक्रिया को तेज बनाने और एकद्वार प्रणाली लागू करने की योजना प्रस्तुत की है।

२५ चैत, काठमाडौं। बिना आर्थिक कठिनाइ के सभी नागरिकों को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम ने १० वर्ष पूरे कर लिए हैं। फिर भी इस दशक में यह कार्यक्रम लक्षित सभी नागरिकों को शामिल नहीं कर सका और स्वास्थ्य सेवा में सर्वव्यापी पहुँच का लक्ष्य अभी भी अधूरा है।

नागरिकों को चिकित्सा खर्च से राहत देने के उद्देश्य से प्रारंभ इस कार्यक्रम में नवीकरण दर में गिरावट चिंता का विषय बन गई है।

१०वें स्वास्थ्य बीमा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य बीमा बोर्ड के कार्यकारी निदेशक डॉ. कृष्णप्रसाद पौडेल ने बताया कि कार्यक्रम के विस्तार में कुछ प्रगति हुई है लेकिन अभी भी कई चुनौतियां बाकी हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी, तकनीकी रूप से उन्नत व नागरिक अनुकूल बनाना आवश्यक है।

कार्यक्रम में श्रम मंत्री दीपककुमार साह, स्वास्थ्य सचिव, अतिरिक्त स्वास्थ्य सचिव, विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि, स्वास्थ्य सेवा विभाग के महानिदेशक, बोर्ड के सदस्य, विभिन्न अस्पतालों के प्रमुख और स्वास्थ्य साझेदार संस्थान के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

सामाजिक स्वास्थ्य सुरक्षा विकास समिति की संकल्पना के अनुसार २०७२ चैत २५ को कैलाली से शुरू हुआ स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम देशव्यापी फैल चुका है। वर्तमान में लगभग ४२५ सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थान सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

डॉ. पौडेल के अनुसार अब तक लगभग ९८ लाख नेपाली नागरिक स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम के सदस्य हैं, जिनमें से केवल ५९ लाख सक्रिय पॉलिसीधारक हैं।

सामाजिक स्वास्थ्य सुरक्षा विकास समिति की संकल्पना के अनुसार २०७२ चैत २५ से शुरू हुआ यह कार्यक्रम देशभर फैल चुका है।

‘कुल पॉलिसीधारकों में से लगभग ६० प्रतिशत ही सक्रिय हैं। ४० प्रतिशत ने नवीकरण नहीं किया है, जो कार्यक्रम की स्थिरता पर प्रश्न चिन्ह लगाता है,’ उन्होंने कहा। डॉ. पौडेल के अनुसार देश की लगभग एक तिहाई आबादी ही बीमा कार्यक्रम में शामिल है।

कार्यक्रम में सेवा उपयोग दर उच्च होने के बावजूद जमा किए गए प्रीमियम खर्च के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने बताया कि संकलित प्रीमियम कुल खर्च का लगभग २५ प्रतिशत ही पूरा कर पाता है।

सेवा प्रदायक अस्पतालों को समय पर भुगतान न कर पाना भी एक बड़ी चुनौती है। इस वित्तीय वर्ष के अंत तक बकाया भुगतान और खर्च मिलाकर बोर्ड की जिम्मेदारी लगभग २५ अरब रुपये तक पहुँचने का अनुमान है।

अब एक परिवार को वार्षिक ३,५०० रुपये प्रीमियम देनी होती है, लेकिन यह राशि वास्तविक उपचार लागत को पूरा नहीं करती। बोर्ड का निष्कर्ष है कि यह योगदान कुल खर्च का लगभग २५ प्रतिशत ही वहन करता है।

डॉ. पौडेल के अनुसार प्रतिदिन औसतन ८ करोड़ रुपये के दावे आ रहे हैं, जबकि मासिक लगभग ढाई अरब रुपये के दावे होते हैं।

‘अनेक सेवा प्रदाता लंबे समय से भुगतान नहीं पा रहे हैं, कुछ अस्पतालों ने बीमा सेवा बंद करने की स्थिति भी उत्पन्न कर दी है,’ उन्होंने कहा, ‘मौजूदा प्रीमियम दर अपर्याप्त है और इसे एक्चुरियल विश्लेषण के आधार पर संशोधित करने की आवश्यकता है।’

स्वास्थ्य बीमा अधिनियम का मूल उद्देश्य आर्थिक अभाव के कारण किसी भी नेपाली नागरिक को स्वास्थ्य सेवा से वंचित न होने देना है। इसके लिए सरकार, सेवा प्रदाताओं और लाभार्थियों की साझा जिम्मेदारी आवश्यक है।

कई सेवा प्रदाताओं को भुगतान नहीं मिलने के कारण कुछ अस्पतालों ने बीमा सेवा बंद कर दी है।

डॉ. पौडेल के अनुसार भविष्य में सामाजिक स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों को एकद्वार प्रणाली में लाने, संस्थागत शासन मजबूत करने, डिजिटल तकनीक का बढ़ावा देने और दावा भुगतान प्रक्रिया को तेज करने की योजना बोर्ड द्वारा प्रस्तुत की गई है।

उन्होंने माना कि कुछ अस्पतालों में बीमा सेवा बंद होने की शिकायतें आ रही हैं।

‘बीमा दिवस मनाने के दौरान भी कुछ अस्पतालों में सेवा बंद होने या सेवा न मिलने की शिकायतें मिली हैं। इन समस्याओं का समाधान सभी पक्षों के सहयोग से ही संभव है,’ उन्होंने कहा।

सेवा के दुरुपयोग से बचने के लिए लाभार्थी और सेवा प्रदाता दोनों को जागरूक होना होगा। उन्होंने कहा कि बीमा कार्यक्रम में डिजिटल तकनीक का विस्तार, राष्ट्रीय पहचान पत्र से प्रणाली को जोड़ना और स्वयं पंजीकरण (सेल्फ इनरोलमेंट) प्रणाली अपनाने की तैयारी चल रही है।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य बीमा संबंधी जन जागरण के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से चलाए गए वीडियो और रील अभियान में भाग लेने वाले लगभग ६० लोगों में से तीन उत्कृष्ट प्रतिभागियों को बोर्ड द्वारा पुरस्कृत भी किया गया।

‘समस्याएं और चुनौतियां हैं, लेकिन वे अप्राप्य नहीं हैं,’ डॉ. पौडेल ने कहा, ‘सभी पक्ष मिलकर काम करें तो स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम को और मजबूत बनाकर नेपाली नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा सकती है।’

समुद्री वातावरण संरक्षण के लिए ऑयस्टर रीफ पुनर्निर्माण अनिवार्य: शोध

मैक्वेरी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ऑयस्टर रीफ पुनर्जीवन का सरल और प्रभावी उपाय खोजा है। उन्होंने सिडनी के ऑयस्टर रीफ की थ्री-डी ज्यामितीय संरचना को देखा, जो छोटे ऑयस्टरों के जीवन और मृत्यु को निर्धारित करती है। कंक्रीट की 16 प्रकार की टाइलों में प्राकृतिक रीफ जैसे सुरक्षित छोटे स्थान बना देने से ऑयस्टर के बच्चे अधिक जीवित रहने में सफल पाए गए हैं। 25 चैत्र, काठमांडू।

वैज्ञानिकों ने समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के मेरुदंड माने जाने वाले ऑयस्टर रीफ को पुनः सक्रिय करने का सहज और प्रभावी उपाय पहचाना है। मैक्वेरी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने प्रकृति द्वारा बनाए गए ‘रीफ डिज़ाइन’ का रहस्य उजागर किया है। इससे विश्वभर में नष्ट हो रहे समुद्री चट्टानों के संरक्षण में मदद मिलेगी। यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल ‘नेचर’ में प्रकाशित हुआ है।

अब तक ऑयस्टर रीफ को केवल शंखकिरा जैसे जीवों के अनियंत्रित जमाव के रूप में माना जाता था। नए शोध ने इसे सुव्यवस्थित ‘थ्री-डी प्रणाली’ सिद्ध किया है। शोधकर्ताओं ने सिडनी के ऑयस्टर रीफ की उच्च-रिज़ॉल्यूशन थ्री-डी फोटो लेकर अध्ययन किया, जिससे उनकी ज्यामितीय संरचना छोटे ऑयस्टरों के जीवन और मृत्यु को निर्धारित करती है। अध्ययन में यह पाया गया है कि ऑयस्टर के बच्चों को पालने के लिए बड़े और जटिल संरचनाओं की तुलना में छोटे और सुरक्षित छिद्र अधिक प्रभावी हैं।

हत्याकाे अभियाेगमा १९ वर्ष कारावास सजाय पाएका व्यक्ति २९ वर्षपछि पक्राउ

हत्या के दोषी को १९ साल कैद की सजा, २९ साल बाद गिरफ्तार

२५ चैत, स्याङ्जा। लगभग तीन दशक पूर्व हुई हत्या के एक मामले में दोषी करार दिए गए आरोपी २९ साल बाद गिरफ्तार किए गए हैं। भीरकोट नगरपालिका–२ के ६३ वर्षीय हेमबहादुर केसी (जोगी) को पुलिस ने २९ साल फरार रहने के बाद बुधवार को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, २०५३ साल कात्तिक ३ को तत्कालीन वालिङ गाविस–३ सिद्धार्थ राजमार्ग क्षेत्र में उसी गाविस–६ के रणबहादुर सारु की हत्या हुई थी। इस मामले की याचिका सर्वोच्च अदालत तक पहुंची और केसी को १९ साल ७ महीने २१ दिन की कैद की सजा सुनाई गई। इसके बाद से वह फरार था। जिल्ला प्रहरी कार्यालय स्याङ्जा ने विशेष सूचना के आधार पर भीरकोट–२ भारथान लुवाडाँड से केसी को गिरफ्तार करने की जानकारी दी। गिरफ्तारी के बाद उन्हें उसी दिन स्याङ्जा जिला अदालत में पेश किया गया और जिला कारागार भेज दिया गया, जिसे जिला प्रहरी कार्यालय स्याङ्जा के सूचना अधिकारी, प्रहरी नायब उपरीक्षक (डीएसपी) प्रसन्नराज चौधरी ने बताया। उनकी जानकारी के अनुसार, जेल से बचने के लिए केसी ने अपनी पहचान भी बदल ली थी और अलग थर से नागरिकता भी बनवाई थी, जिसे पुलिस ने पुष्टि की है।

महोत्तरी में बैंकिंग अपराध में एक व्यक्ति गिरफ्तार

महोत्तरी पुलिस ने बैंकिंग अपराध में एक करोड़ ३० लाख की बिगो रकम के साथ पूर्वमठाधीश मानमहन्थ जगन्नाथ दास वैष्णव को मठिहानी नगरपालिका-७ से गिरफ्तार किया है। २५ चैत्र, जनकपुरधाम। एक करोड़ ३० लाख की बिगो रकम के साथ बैंकिंग अपराध में मानमहन्थ जगन्नाथ दास वैष्णव पकड़े गए हैं। महोत्तरी के मठिहानी मठ के पूर्वमठाधीश दास को महोत्तरी पुलिस ने बैंकिंग अपराध के आरोप में गिरफ्तार किया है। जिला पुलिस कार्यालय के सूचना अधिकारी, पुलिस निरीक्षक विशम्भरनाथ साह के अनुसार, उन्हें मठिहानी नगरपालिका-७ से पकड़ कर आवश्यक जांच पड़ताल जारी है।