Skip to main content

लेखक: space4knews

ढल्केवर-मुजफ्फरपुर प्रसारण लाइन के माध्यम से १६५० मेगावाट विद्युत् निर्यात बढ़ाने पर सहमति

३१ असार, काठमाडौं। नेपाल और भारत के ऊर्जा सचिवस्तरीय संयुक्त निदेशक समिति (जेएससी) ने दो अंतरदेशीय प्रसारण लाइनों के माध्यम से नेपाल से निर्यात होने वाली विद्युत् की मात्रा को १६५० मेगावाट तक बढ़ाने पर सहमति जताई है। पोखरा में बुधवार को आयोजित बैठक की अध्यक्षता नेपाल की ओर से ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय की सचिव सरिता दवाड़ी ने की, जबकि भारत की ओर से विद्युत् मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल ने नेतृत्व किया। वर्तमान में चल रही ढल्केवर–मुजफ्फरपुर ४०० केवी अंतरदेशीय प्रसारण लाइन के माध्यम से एक हजार मेगावाट विद्युत् आयात और एक हजार एक सौ मेगावाट निर्यात हो रहा है।

दोनों देशों की संयुक्त तकनीकी टीम द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, ढल्केवर–मुजफ्फरपुर और ढल्केवर–सीतामढ़ी ४०० केवी प्रसारण लाइनों के माध्यम से विद्युत् निर्यात बढ़ाने की सहमति इस बैठक में दी गई। इस प्रकार इन प्रसारण लाइनों की संयुक्त विद्युत् प्रवाह क्षमता आयात में एक हजार मेगावाट से बढ़ाकर १४०० मेगावाट और निर्यात में एक हजार एक सौ मेगावाट से बढ़ाकर १६५० मेगावाट करने पर सहमति हुई है, जो ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में उल्लेखित है।

सचिवस्तरीय बैठक से पूर्व मंगलवार को पोखरा में दोनों देशों की सहसचिवस्तरीय संयुक्त कार्यदल की बैठक हुई थी। इस बैठक की सहअध्यक्षता नेपाल की ओर से मंत्रालय के सहसचिव संदीपकुमार देव एवं भारत की ओर से विद्युत् मंत्रालय के सहसचिव पंकज कुमार ने की। बैठक में चमेलिया (नेपाल)–जौलजीवी (भारत) के बीच २२९ केवी डबल सर्किट प्रसारण लाइन के विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को भी स्वीकृति दी गई। इस परियोजना को दिसंबर २०२८ तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

नेपाल और भारत के बीच इनरुवा–न्यू पुनिया एवं दोदोधरा (न्यू लम्की)–बरेली ४०० केवी क्षमताओं वाली अंतरदेशीय प्रसारण लाइनों के निर्माण के लिए संयुक्त उपक्रम कंपनी के गठन की प्रक्रिया को भी तीव्र करने पर सहमति हुई। इन दोनों प्रसारण लाइनों के निर्माण हेतु नेपाल विद्युत प्राधिकरण और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के बीच शेयरधारक समझौता (एसएचए) और संयुक्त उपक्रम (जेवी) समझौता संपन्न हो चुका है।

सन् २०१४ में सम्पन्न नेपाल–भारत विद्युत् व्यापार समझौते के अनुच्छेद ५ के अनुसार, समझौते के कार्यान्वयन पक्षों के समन्वय, निर्देशन तथा प्रगति की निगरानी के लिए सचिवस्तरीय समिति, संयुक्त स्टेयरिंग कमिटी एवं सहसचिवस्तरीय कार्यदल का गठन किया गया था। इन दोनों निकायों की बैठकें दो देशों में बारी-बारी से आयोजित करने पर सहमति बनी है।

नेपाललाई दोस्रो अभ्यास एकदिवसीय खेलमा जर्सी द्वारा २८३ रन का लक्ष्य दिया गया

आईसीसी क्रिकेट विश्वकप लिग-२ की तैयारी में अंतिम चरण में मौजूद नेपाली टीम को जर्सी के खिलाफ दूसरे अभ्यास मैच में जीत के लिए २८३ रन का लक्ष्य मिला है। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने वाले जर्सी ने ५० ओवर में ६ विकेट खोकर २८२ रन बनाए, जिसमें पैट्रिक गजले सर्वाधिक ९५ रन जोड़े। नेपाल की ओर से गेंदबाजी में करण केसी और सन्दीप लामिछाने ने दो-दो विकेट लिए जबकि ललित राजवंशी ने एक विकेट हासिल किया।

जर्सी के लिए हैरिसन कारिलोन ने ५६, जैक ट्राइब ने ५०, निक ग्रीनवूड ने ३२ और जोंटी जेनर ने २७ रन बनाए। नेपाल ने पहले मैच में जर्सी को ८१ रन से हराया था। नेपाल टीम इसके बाद नीदरलैंड्स रवाना होगी और वहां नामीबिया समेत लिग २ की त्रिदेशीय श्रृंखला में भाग लेगी, जो २१ जुलाई से शुरू होगी।

कृषिमन्त्री के ‘बिचौलिया खत्म’ के वादे फेल, कीमत न मिलने पर किसानों ने सड़क पर टमाटर फेंक कर किया प्रदर्शन

उत्पादन लागत के उचित दाम न मिलने के कारण काठमांडू के माइतीघर में किसानों ने टमाटर सड़क पर फेंककर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने सरकार से कृषि बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी और बाजार में बिचौलियों को खत्म करने की मांग की है। कालिमाटी बाजार में स्थानीय टमाटर की कीमत प्रति किलो 10 रुपये से कम होने के कारण किसानों ने लागत भी पूरा नहीं कर पाने की शिकायत की। 31 असार, काठमांडू। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे संघीय राजधानी काठमांडू के माइतीघर इलाके की सड़क कृषि उत्पादों से लाल हो गई। इसका कारण था—टमाटर को उचित मूल्य नहीं मिलने से किसान नाराज होकर सड़क पर टमाटर फेंकने लगे। उत्पादन लागत ज़्यादा होने और 10 रुपये प्रति किलो की कीमत पर भी टमाटर न बिकने की वजह से माइतीघर में किसानों ने विरोध स्वरूप टमाटर फेंका। किसानों के लिए खेत में मेहनत करना जितना कठिन है, उससे भी अधिक दुखद है अपनी पैदावार का उचित मूल्य न मिलना। किसान अपनी खून-पसीना से उगाए टमाटर को सड़क पर फेंक कर सरकार की ओर से उचित मूल्य न मिलने पर निराशा और गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। काठमांडू उपत्यका के स्थानीय किसान भूमिहीन होकर टनेल खेती कर रहे हैं और वे सड़क पर उतरे हैं। ‘हमारे पास कोई संघ-संस्था नहीं है, कोई नेतृत्व नहीं है, हम सभी खुद अपने खेतों में मेहनत करने वाले किसान हैं, आज हम कष्ट में हैं और यह आग लेकर सड़कों पर आए हैं,’ आंदोलन में शामिल किसानों ने बताया। माइतीघर में टमाटर पर टिका नारों को जोर-शोर से लगाते किसानों में बम लामा तामांग के चेहरे पर निराशा और गुस्सा साफ नजर आ रहा था। वे और लगभग सौ किसान ‘हरियो क्रान्ति’ लिखा बैनर लेकर नारे लगाते रहे। ‘किसानों को खाने का मौका दो, मूल्य प्रबंधन में सरकार नियंत्रण करे, बिचौलियों को बाजार से हटाओ, किसानों को सस्ते क़र्ज़ दो, कृषि बीमा लागू करो, किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दो, समय पर खाद, बीज और अधिकार सुनिश्चित करो!’ वे नारे लगाते रहे। कृषि, वन तथा पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी के विरुद्ध किसानों का आक्रोश भी दिखा। तामांग के अनुसार, एक किलो टमाटर उगाने में कम से कम 25 रुपये खर्च होता है, लेकिन वर्तमान में 10 रुपये प्रति किलो भी बेच पाना मुश्किल है, जिस वजह से उन्हें सड़क पर आना पड़ा। ‘10 रुपये में बेचकर भी घाटा होता है, यह समस्या कोई नई नहीं, लगभग एक माह से हम इस घाटे के साथ जूझ रहे हैं,’ उन्होंने कहा, ‘टनेल में लोकल टमाटर उगाते हैं जिसमें बहुत निवेश होता है, कैसे टिक पाएगा?’ बिचौलियों के बिना बाजार प्रबंधन न होने से भारतीय टमाटर आसानी से बाजार में आ रहे हैं और स्वदेशी पैदावार को उचित बाजार नहीं मिल पा रहा है, किसानों ने यह गुनाह किया। कालिमाटी फल-फूल और सब्जी बाजार विकास समिति ने भारतीय सब्जियों का कोई तथ्यांक नहीं दिया है और नियंत्रण करने में असफल रही है, यह भी किसानों की चिंता है। ‘हमारी मांग है कि कालिमाटी रोजाना कीमतें न बदले,’ तामांग ने बताया, ‘चाहे टमाटर हो या कोई दूसरी सब्जी, यदि निश्चित मूल्य तय हो तो किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।’ करोड़ों का निवेश और रोज़गार संकट के बीच माइतीघर में प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए यह साधारण खेती नहीं, बल्कि व्यवसायिक खेती है जिसमें वे 80 से 100 टनेल में खेती कर रहे हैं। ‘हर टनेल में 5 से 10 मजदूरों को काम पर रखा है,’ तामांग ने बताया, ‘जमीन का किराया, मजदूरों की तनख्वाह, खाद और बीज के खर्च होते हैं, 10 रुपये में टमाटर बेचकर कैसे खर्च पूरा करें?’ अगले दिन सब्जी लदे वाहन रोक कर भी जब असर नहीं पड़ा तो किसान माइतीघर मंडला पहुंचे और प्रदर्शन किया। आंदोलन में शामिल सभी किसानों ने कहा, ‘खेत में खून-पसीना बहाकर उगाया है, लेकिन मूल्य निर्धारण बिचौलियाओं द्वारा होता है। कौड़ी नहीं मिलने से बेहतर है सड़क पर टमाटर फेंकना।’ यह कोई पहली बार नहीं जब किसान इस तरह सड़क पर अपनी उपज फेंककर विरोध कर रहे हैं। समस्या भी नई नहीं है। कुछ दिन पहले गोरखा के गण्डकी गाउपालिका-8 घ्यालचोक के किसानों ने खेत में उगे भांटा और बोड़ी को सड़क पर फेंकना पड़ा था जब बिचौलियों ने 5 से 12 रुपये की कीमत दी तो निवेश निकालना मुश्किल बताया। माल ढुलाई में 600 से 700 रुपये खर्च होने के बावजूद बेचने पर लागत नहीं निकल पाने की वजह से किसानों को अपनी उपज सड़क पर फेंकनी पड़ी। देश के कई हिस्सों में टमाटर, फूलगोभी, भिंडी, बोड़ी या दूध को सड़क पर फेंककर किसान अपनी समस्याएं दर्ज करा चुके हैं। यह स्थिति राज्य तंत्र की कमजोरी को दर्शाती है, जिसे किसी सरकार ने हल नहीं किया है। कृषिमंत्री चौधरी ने मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाले 100 दिन पूरे होने पर 25 असार को पत्रकार सम्मेलन में बिचौलिया खत्म करने और किसानों को उचित मूल्य दिलाने का वादा किया था। मंत्री चौधरी ने कृषि को देश की मुख्य आर्थिक आधार बनाने का संकल्प व्यक्त किया और बिचौलिया खत्म करने के लिए नीतिगत सुधार का हवाला दिया। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने और किसान-मित्रतापूर्ण बाजार प्रबंधन के लिए सरकार की प्रतिबद्धता जताई। मंत्री ने किसानों की समस्याओं को समझने के लिए मंत्रालय में रात-दिन काम करने और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया। प्रधानमंत्री बालेंदर शाह की सरकार ने भी अपनी 100 दिन की कार्यसूची में कृषि उत्पादों की खरीद के लिए ऋण कारोबार का भुगतान अधिकतम 25 दिनों के भीतर अनिवार्य करने की घोषणा की थी। यदि भुगतान इस अवधि में न हो तो खरीदार को किसानों को ब्याजसहित भुगतान करने का निर्देश भी जारी करना था। लेकिन किसानों का कहना है कि सरकार का यह निर्णय अबतक व्यवहार में नहीं आया है। इस वजह से उन्हें प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा है। वे कहते हैं कि यह सब दावे केवल भाषणों तक सीमित हैं। नीति सुधार के बावजूद कागज पर ही शक्तियां सुनवाई योग्य हैं और असल में बिचौलियाओं का जाल मजबूत है। किसान और उपभोक्ता दोनों पुरानी समस्याओं से जूझ रहे हैं। किसान के उचित मूल्य न मिलने से उपभोक्ता महंगा सामान खरीदने को मजबूर हैं, जैसा कि बुधवार को कालिमाटी फलफूल एवं सब्जी बाजार विकास समिति द्वारा प्रकाशित थोक मूल्य विवरण से स्पष्ट है। समिति के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक छोटे लोकल टमाटर का न्यूनतम थोक मूल्य 8 रुपये और अधिकतम 12 रुपये प्रति किलो है। औसतन किसानों को करीब 9.50 रुपये प्रति किलो मिलता है। टनेल में उगाए छोटे टमाटर का औसत मूल्य 14.60 रुपये है जबकि बड़े नेपाली टमाटर की औसत थोक कीमत 38.75 रुपये प्रति किलो है। लेकिन उपभोक्ताओं तक पहुंचने पर ये टमाटर 50 से 70 रुपये तक बिकते हैं। व्यापारी उपभोक्ताओं को महंगे दाम पर बेचकर यह जताते हैं कि किसानों को बेहतर मूल्य मिला। तरकारी व्यवसायियों ने किसानों के आरोपों को खारिज किया है। नेपाल फलफूल और सब्जी व्यवसायी महासंघ के अध्यक्ष भरतप्रसाद खतिवड़ा ने व्यापारियों को मूल्य न देने या सिंडिकेट बनाने के आरोप अस्वीकार करते हुए इसे अत्यधिक उत्पादन का परिणाम बताया। ‘हर साल टमाटर की कीमतें बाहर से आने की वजह से नहीं घटती, बल्कि देश में उत्पादन अधिक होने से कीमतें कम होती हैं,’ खतिवड़ा ने कहा, ‘मूल्य नियंत्रण को लेकर कोई कार्टेलिंग की शिकायत नहीं है।’ सलाद में उपयोग होने वाले बड़े टमाटर महंगे होते हैं लेकिन तरकारी और अचार के लिए टनेल व लोकल छोटे टमाटर का उत्पादन पर्याप्त होने से कीमतें कम हैं। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को अधिक खर्च करना पड़ता है क्योंकि थोक बाजार और खुदरा बाजार की दूरी है। ‘आम लोग थोक बाजार से दूर हैं, सूर्यविनायक, जोरपाटी, बानेश्वर, लगनखेल जैसे बाहरी बाजार अलग तरीके से संचालित होते हैं,’ खतिवड़ा ने बताया, ‘थोक बाजार में खरीदी पर कीमत 30-35 रुपये के करीब रहती है, लेकिन बाहर खुदरा दुकानों में यह नियंत्रण बाहर होता है।’ उन्होंने कहा कि वर्तमान में थोक बाजार में टमाटर की कीमतें विरोधाभासी रूप से 300 से 400 रुपये तक दर्ज की गई हैं। भारतीय टमाटर के कारण स्थानीय उत्पादन की कीमत न मिलने की बात कही जाती है, लेकिन खतिवड़ा के अनुसार अभी नेपाल में उत्पादन अधिक फसल हो रहा है और भारतीय टमाटर ज्यादा नहीं आया है। कालिमाटी तरकारी बाजार सूची में भारतीय टमाटर शामिल नहीं है। किसान कब तक ऐसा करेंगे? किसानों की मांग बहुत बड़ी नहीं है। वे चाहते हैं—कृषि बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य, सुगम बाज़ार पहुंच और बिचौलियों का नियंत्रण। कृषि प्रधान देश में राज्य समय पर बाजार प्रबंधन न करने से किसान बार-बार अपनी पैदावार सड़क पर फेंककर विरोध कर रहे हैं। यह सरकार की कृषि नीति के प्रति सबसे बड़ी विडंबना है। मंत्री चौधरी के जैसे सचमुच बिचौलिया खत्म करने तथा किसान को अपनी पैदावार सड़क पर फेंकने की मजबूरी से राहत दिलाने के लिए सरकार को तुरंत बाज़ार संरचना में हस्तक्षेप करना होगा, विशेषज्ञ बताते हैं।
तस्वीर: आर्यन धिमाल

चीन में टाइफून के कारण खिड़कियों को भारी नुकसान, तेज बारिश और तूफानी हवाओं का कहर

वीडियो कैप्शन शुरू हो रहा है, टाइफून के कारण खिड़कियों को नुकसान

टाइफून के कारण खिड़कियों को नुकसान

प्रकाशित दिनांक

चीन के ज़ेजियांग प्रांत में टाइफून के कारण भारी बारिश और तूफानी हवाओं से खिड़कियों को व्यापक नुकसान होते हुए देखा गया।

टाइफून बावी ने 145 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज़ हवा उत्पन्न की थी।

ज़ेजियांग प्रांत में 22 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है।

टाइफून आइवार के आने के बाद इसका स्तर कमजोर होकर ‘ट्रॉपिकल स्टॉर्म’ में तब्दील हो गया।

हमारे यूट्यूब चैनल पर भी खबर देखी जा सकती है। कृपया चैनल को सब्सक्राइब करें और प्रकाशित वीडियो देखें यहाँ क्लिक करें। साथ ही फेसबुक, फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर भी हमारे समाचार उपलब्ध हैं। साथ ही बीबीसी नेपाली सेवा के कार्यक्रम सोमवार से शुक्रवार शाम पौने नौ बजे रेडियो पर प्रसारित होते हैं।

नेपाली क्रिकेट के विकास पर एमसीसी और क्यान के अधिकारियों के बीच चर्चा

क्यान के अध्यक्ष चतुरबहादुर चन्द और सचिव पारस खड्काले लार्ड्स में मेरीलेबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में नेपाली क्रिकेट के विकास और दीर्घकालीन सहयोग को बढ़ावा देने के विषय पर दोनों पक्षों के बीच विचार-विमर्श हुआ। क्यान और एमसीसी ने नेपाली क्रिकेट में प्रतिभा उत्पादन और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में संयुक्त कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई है। 31 असार, काठमांडू। नेपाल क्रिकेट संघ (क्यान) के अध्यक्ष चतुरबहादुर चन्द और सचिव पारस खड्काले इंग्लैंड के ऐतिहासिक लार्ड्स क्रिकेट मैदान में एमसीसी के अधिकारियों से मुलाकात की। इस मुलाकात में एमसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव रोब लसन, क्रिकेट एवं संचालन निर्देशक रोब लिन्च तथा एमसीसी फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंगस बेरी शामिल थे। बातचीत के दौरान क्यान और एमसीसी के बीच संबंधों को और मजबूत करने तथा नेपाली क्रिकेट के दीर्घकालीन विकास के लिए सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई, जैसा कि क्यान ने बताया। दोनों पक्षों ने नेपाली क्रिकेट के समग्र विकास, प्रतिभा उत्पादन, तकनीकी सहयोग और भविष्य में सहयोग के नए अवसरों पर सकारात्मक वार्ता की। साथ ही, नेपाल ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी क्रिकेट के विकास के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई, क्यान ने जानकारी दी।

बचत खातों पर २.७५ प्रतिशत से कम ब्याज देने वाले बैंकों को १ माह के लिए स्थायी निक्षेप सुविधा बंद करने का प्रावधान

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात् प्रस्तुत।

  • नेपाल राष्ट्र बैंक ने स्थायी निक्षेप सुविधाओं के नियमों में लचीलापन देते हुए उन बैंकों को, जो बचत खातों में करिडोर की निचली ब्याज दर से कम ब्याज देते हैं, 1 माह के लिए स्थायी निक्षेप सुविधा बंद करने का प्रावधान किया है।
  • केंद्रीय बैंक ने तरलता प्रबंधन हेतु «स्टेरिलाइज्ड इंटरवेंशन» प्रक्रिया लागू करने के लिए विनियमावली में आवश्यक प्रावधान जोड़े हैं, जिनमें विदेशी मुद्रा में भुगतान की व्यवस्था शामिल है।
  • राष्ट्र बैंक ने खुला बाजार लेनदेन के कार्यविधियों में संशोधन कर मौद्रिक उपकरणों के परिचालन, वितरण और विभागीय अधिकारों के नए नियम स्पष्ट किए हैं।

३१ असार, काठमाडौं। नेपाल राष्ट्र बैंक ने स्थायी निक्षेप सुविधाओं के नियमों में संशोधन किया है। अब बैंक तथा वित्तीय संस्थाएं बचत खातों में ब्याज दर करिडोर की निचली सीमा से कम ब्याज दर लागू करती हैं, तो उन्हें एक माह के लिए स्थायी निक्षेप सुविधा नहीं मिलेगी।

केंद्रीय बैंक ने खुला बाजार लेनदेन के नियमावली २०७८ में संशोधन करते हुए उन बैंकों/वित्तीय संस्थाओं को, जो बचत ब्याज दर करिडोर की निचली सीमा से कम ब्याज निर्धारण करते हैं, 1 माह तक स्थायी निक्षेप सुविधा बंद करने का प्रावधान किया है। पहले इस स्थिति में बैंकों को स्थायी निक्षेप सुविधा पूरी तरह बंद करनी पड़ती थी। वर्तमान में ब्याज दर करिडोर की निचली सीमा २.७५ प्रतिशत निर्धारित है।

नेपाल राष्ट्र बैंक ने आगामी वित्तीय वर्ष की मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करते हुए, बैंकों और वित्तीय संस्थाओं की लागत कम करने के लिए स्थायी निक्षेप सुविधा के नियमों में संशोधन किया है।

साथ ही, तरलता प्रबंधन के लिए बैंक द्वारा अपनाई गई नई «स्टेरिलाइज्ड इंटरवेंशन» प्रक्रिया के लिए आवश्यक प्रावधान विनियमावली में जोड़े गए हैं। इसके अनुसार, विदेशी मुद्रा में प्राप्त राशि उसी मुद्रा में भुगतान की जाएगी, जिससे नेपाली रुपये के बाजार में कमी और अत्यधिक तरलता से होने वाली समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

विनियमावली में «मौद्रिक उपकरण» की परिभाषा में तरलता प्रबंधन के लिए जारी किए जाने वाले विभिन्न उपकरणों का उल्लेख है, जैसे स्वदेशी मुद्रा, सरकारी सुरक्षा पत्र, राष्ट्र बैंक ऋणपत्र, रिपो, रिवर्स रिपो, निक्षेप संकलन, सीधे खरीद तथा बिक्री, स्थायी सुविधा या बैंक द्वारा निर्धारित अन्य मौद्रिक उपकरण।

इसके अलावा, रिवर्स रिपो और निक्षेप संकलन जैसे उपकरणों की बोली के मामले में न्यूनतम ब्याज दर को प्राथमिकता दी जाएगी। इस प्रकार आहूत रकम को ब्याज दर करिडोर की निचली सीमा तक की सबसे कम ब्याज दर वाली बोली को विभागीय प्रमुख द्वारा बाँटा जाएगा। इस बाँटफाट की जानकारी खुला बाजार संचालन समिति को शीघ्र दी जाएगी।

राष्ट्र बैंक के मौद्रिक विभाग को खुला बाजार लेनदेन के संचालन के दौरान अपनाए गए प्रक्रिया, बैंकिंग प्रणाली में तरलता के स्तर, औसत ब्याज दर सहित अन्य विषयों पर त्रैमासिक रिपोर्ट तैयार कर समिति को प्रस्तुत करनी होगी। इस रिपोर्ट में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार तथा अर्थव्यवस्था का संक्षिप्त विश्लेषण भी शामिल होगा। समिति आवश्यक संशोधन के बाद इसे गवर्नर के समक्ष पेश करेगी।

यदि विशेष आर्थिक या वित्तीय स्थिति उत्पन्न होती है, तो समिति विभाग के माध्यम से गवर्नर को सूचित करेगी कि कहीं किसी मौद्रिक उपकरण के तहत खुला बाजार लेनदेन करना आवश्यक है या सामान्य से अधिक तरलता प्रवाह करनी होगी।

विभागीय निर्णय के तहत जारी या समाप्त होने वाले नियमित खुला बाजार लेनदेन को छोड़कर, रिपो में ४५ अरब और रिवर्स रिपो तथा निक्षेप संकलन उपकरण सहित दैनिक १५ अरब रुपये तक की सीमा विनियमावली में निर्धारित की गई है।

विभागीय निर्णय के आधार पर बोलीपत्रों को पूर्ण स्वीकृत, अस्वीकृत या आंशिक स्वीकृत करने का अधिकार विभागीय प्रमुख को होगा। विभागीय अधिकार में संपन्न खुले बाजार के लेनदेन की जानकारी शीघ्र समिति को दी जाएगी।

मौद्रिक नीति के अनुसार, ब्याज दर करिडोर की ऊपरी सीमा पर स्थायी तरलता सुविधा, नीतिगत दर पर ओवरनाइट रिपो, और निचली सीमा पर स्थायी निक्षेप सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। वर्तमान में ब्याज दर करिडोर की ऊपरी सीमा ५.७५%, नीतिगत दर ४.२५%, तथा निचली सीमा २.७५% है।

संशोधित विनियमावली में उल्लेख है कि निक्षेप संकलन उपकरण, राष्ट्र बैंक ऋणपत्र तथा ब्याज दर करिडोर के अंतर्गत स्थायी निक्षेप सुविधा में काउंटरपार्टी द्वारा स्थानीय मुद्रा बचत या मुदती निक्षेप पर करिडोर की निचली सीमा से कम ब्याज दर रिपोर्ट किए जाने पर, उस तिथि से एक माह तक उक्त लेनदेन में भाग लेना तथा सुविधा प्राप्त करना मान्य नहीं होगा।

सरकार ने आर्थिक वर्ष २०८३/०८४ को ‘कानून सुधार एवं निर्माण वर्ष’ घोषित कर १६६ विधेयक पेश करने का लक्ष्य रखा

सरकार ने आर्थिक वर्ष २०८३/०८४ को ‘कानून सुधार एवं निर्माण वर्ष’ के रूप में घोषित करते हुए इस अवधि में संघीय संसद में १६६ विधेयक पेश करने का लक्ष् 24 निर्धारित किया है। कानून, न्याय एवं संसदीय मामलामंत्री सोविता गौतम ने बुधवार को प्रतिनिधि सभा की बैठक में विधेयक निर्माण से संबंधित सरकार के लक्ष्यों के बारे में जानकारी दी। प्राप्त विधेयकों की सूची में विशिष्ट व्यक्तियों की सुविधाएँ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, रासायनिक हथियार निषेध कार्यक्रम, सड़क सुरक्षा सहित कई महत्वपूर्ण विषयों के विधेयक शामिल हैं।

मंत्रालयों को जो विधेयक तैयार करने हैं, उनकी पहचान कर प्रत्येक वर्ष की जेठ माह में प्राथमिकता तय कर कानून मंत्रालय को भेजने का प्रावधान है। कानून मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों से चर्चा कर संघीय संसद में पेश किए जाने वाले विधेयकों की प्राथमिकता निर्धारित कर वार्षिक कार्य तालिका तैयार करता है। इस वर्ष की कार्य तालिका में ९७ नए विधेयक तथा ६९ संशोधित विधेयक सम्मिलित हैं, कुल १६६ विधेयक पेश करने का लक्ष्य रखा गया है।

मंत्री गौतम के अनुसार, मंत्रालयों से हुई चर्चा के आधार पर नए आर्थिक वर्ष में संघीय संसद में प्रस्तुत किए जाने वाले विधेयकों की संख्या १६६ तय की जा चुकी है। प्राथमिकताओं के अनुसार ६४ विधेयक पहली प्राथमिकता के, ६५ दूसरी और ५७ तीसरी प्राथमिकता के हैं। इस वर्ष कानून मंत्रालय सबसे अधिक विधेयक तैयार करेगा, जबकि रक्षा मंत्रालय सबसे कम विधेयक प्रस्तुत करेगा।

मंत्री गौतम ने बताया कि आगामी आर्थिक वर्ष को कानून सुधार वर्ष घोषित किए जाने के मद्देनजर कार्य तालिका में उल्लेखित विधेयकों के अलावा और भी विधेयक पेश किए जा सकते हैं। विधेयक अनुगमन प्रणाली शुरू करने की तैयारी चल रही है तथा कानून निर्माण के लिए सुझाव एकत्रित करने हेतु “नो योर लॉ, मेक योर ओन लॉ” नामक सुझाव पोर्टल भी सक्रिय है, जिससे अब तक लगभग ४०० सुझाव प्राप्त हो चुके हैं।

इंग्लैंड और अर्जेंटीना के मैच में फॉकलैंड युद्ध की यादें

सन् 1982 के फॉकलैंड युद्ध में अर्जेंटीना को ब्रिटेन से हार का सामना करना पड़ा था। उस हार की पीड़ा से प्रभावित अर्जेंटीनी लोग अक्सर इसके लिए गोर्खा सैनिकों को जिम्मेदार मानते हैं। गोर्खाली सैनिकों की अटूट बहादुरी और वीरतापूर्ण योगदान ने ब्रिटेन को निर्णायक जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। युद्ध के एक नायक हेमकुमार श्रेष्ठ ने अपने अनुभव साझा करते हुए तत्कालीन कठिन परिस्थितियों और सैन कार्लोस के युद्धभूमि में गोर्खाली फौज की भूमिका को याद किया है।

हेमकुमार श्रेष्ठ, जो युद्ध के बाद अमेरिका में रेस्टोरेंट व्यवसाय कर रहे हैं, फॉकलैंड की यादों को अपने जीवन का गर्वपूर्ण अध्याय मानते हैं। विश्व कप के दौरान अर्जेंटीना और लियोनेल मेसी की चर्चा हो रही है, वहीं फॉकलैंड युद्ध की स्मृति भी विशेष महत्व रखती है। 74 दिन चली इस लड़ाई में अर्जेंटीना को न केवल भारी नुकसान हुआ बल्कि फॉकलैंड द्वीप को कब्जा करने का उसका सपना भी अधूरा रह गया। गोर्खाली सैनिकों के साथ ने ब्रिटेन को अप्रत्याशित रूप से जीत दिलाने का विश्वास जताया जाता है।

हेमकुमार श्रेष्ठ की कहानी संखुवासभा के खाँदबारी से शुरू होती है। वे 2003 साल में जन्मे थे और पांच भाई-बहनों वाले परिवार में पले-बढ़े। उन्होंने पांचवीं कक्षा के ऊपर पढ़ाई नहीं की और पशु चराने का काम करते थे। ब्रिटिश लाहुरे सैनिकों की तत्परता देखकर वे भी लाहुरा बनने का सपना देखने लगे। जब धरान में भर्ती की खबर आई, तो सेखा से धरान आकर पलटन में भर्ती हुए। 18 वर्ष की उम्र में गोर्खा पलटन में समिल्लित हुए।

युद्ध के दौरान गोर्खा पलटन ने अदम्य साहस दिखाते हुए लड़ाई लड़ी। 21 मई 1982 को ब्रिटिश फौज गुजगरिन होकर स्टेनली की ओर बढ़ी। गोर्खा पलटन ने हवाई तथा स्थल हमले से बचाव के लिए ट्रेंच खोदकर ओवरहेड प्रोटेक्शन सहित जोरदार रक्षा किया। युद्ध में गोर्खा सैनिकों ने बड़ी बहादुरी दिखाते हुए अंततः विजय प्राप्त की। 16 जुलाई 1982 को युद्ध खत्म होने के बाद गोर्खा सेना ब्रिटेन लौट गई।

हेमकुमार श्रेष्ठ ने फॉकलैंड युद्ध के अनुभव साझा करते हुए कहा, “जब मैं फॉकलैंड युद्ध की बात करता हूं, तो मुझे ऐसा लगता है कि मैं युद्ध के मैदान में उपस्थित हूं।” उन्होंने अर्जेंटीना के पक्ष में होने के बावजूद इंग्लैंड से मुकाबले में इंग्लैंड को समर्थन देने वाली बात भी कही। विश्व कप के अंतर्गत अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच मुकाबला अभी देखना बाकी है।

एक दशक में सामाजिक सुरक्षा पर सरकार का खर्च ५९२ प्रतिशत बढ़ा

पिछले एक दशक में नेपाल सरकार का सामाजिक सुरक्षा खर्च ५९२ प्रतिशत बढ़कर १ खर्ब १४ अरब ४१ करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। महालेखा परीक्षक के रिपोर्ट में लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि और भत्ता दरों में बदलाव के कारण राज्य की आर्थिक जिम्मेदारी संभालने हेतु सरकार को सुझाव दिया गया है। सरकार ने सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को सतत बनाने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम नागरिकों को भत्ता त्यागने के लिए प्रोत्साहित करते हुए आवश्यकता-आधारित वितरण प्रणाली लागू करने की योजना प्रस्तुत की है। ३१ असार, काठमाडौं।

महालेखा परीक्षक कार्यालय द्वारा किए गए कार्यात्मक लेखा परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक वर्ष २०७२/७३ में सामाजिक सुरक्षा पर सरकार का वार्षिक खर्च १६ अरब ५२ करोड़ २२ लाख ७४ हजार रुपए था। यह खर्च २०८१/८२ में बढ़कर १ खर्ब १४ अरब ४१ करोड़ रुपए हो गया है। दस वर्षों में सामाजिक सुरक्षा भत्ता व्यय में ९७ अरब ८८ करोड़ ८० लाख की वृद्धि हुई है, जो ५९२ प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। नेपाल में वरिष्ठ नागरिक, आर्थिक रूप से पिछड़े, विकलांग और असहाय व्यक्ति, असहाय एकल महिलाएं, विकलांगता वाले, बालक, स्वयं की देखभाल में असमर्थ और लुप्तप्राय समुदाय सामाजिक सुरक्षा भत्ता प्राप्त कर रहे हैं।

आर्थिक वर्ष २०७१/७२ में कुल २२ लाख ६५ हजार ५३५ लाभार्थी थे, जो एक दशक में बढ़कर ३८ लाख ६ हजार ६३४ हो गए हैं। सरकार ने एक दशक पहले कुल बजट का केवल २.७५ प्रतिशत सामाजिक सुरक्षा पर खर्च किया था, जो अब ७.५१ प्रतिशत तक पहुंच गया है। महालेखा के अनुसार, प्रदेश और स्थानीय स्तर पर भी सामाजिक सुरक्षा भत्ता दिया जा रहा है और तीनों शासन स्तरों द्वारा उपलब्ध कराए गए अन्य सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में हुए खर्च को जोड़ने पर यह राशि और भी अधिक होगी।

सरकार के सामाजिक सुरक्षा व्यय में दस वर्ष में ५९२% की वृद्धि

संक्षेप

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • पिछले एक दशक में नेपाल सरकार के सामाजिक सुरक्षा व्यय में ५९२% की वृद्धि हुई है और यह NPR ११.४४ अरब तक पहुँच गया है।
  • ऑडिटर जनरल की रिपोर्ट में लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि और भत्ते की दरों में बदलाव के कारण आर्थिक भार बढ़ने को लेकर सरकार को प्रबंधन में सुधार करने की सलाह दी गई है।
  • सरकार ने सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को स्थायी बनाने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम नागरिकों को स्वेच्छा से भत्ता छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने तथा आवश्यकता आधारित वितरण प्रणाली लागू करने की योजना बनाई है।

जेठ १५, काठमांडू – पिछले दशक में नेपाल सरकार का सामाजिक सुरक्षा व्यय लगभग ५९२ प्रतिशत तक बढ़ा है।

ऑडिटर जनरल कार्यालय की प्रदर्शन लेखा परीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक वर्ष २०७२/७३ में सामाजिक सुरक्षा व्यय NPR १.६५२ अरब था।

आर्थिक वर्ष २०८०/८१ तक यह व्यय NPR ११.४४ अरब तक पहुंच गया है। दस वर्षों में सामाजिक सुरक्षा व्यय NPR ९.७८८ अरब से बढ़कर ५९२ प्रतिशत की वृद्धि हो गई।

नेपाल में सामाजिक सुरक्षा भत्ते आर्थिक रूप से कमजोर समूहों, विकलांग व्यक्तियों, अकेली महिलाओं, बच्चों, स्वयं देखभाल में असमर्थ व्यक्तियों और संकटग्रस्त समुदायों को प्रदान किए जाते हैं।

लाभार्थियों की कुल संख्या आर्थिक वर्ष २०७१/७२ में २,२६५,५३५ से बढ़कर दशक में ३,८०६,६३४ हो गई है।

सरकारी सामाजिक सुरक्षा व्यय कुल बजट का २.७५% से बढ़कर अब ७.५१% हो गया है।

ऑडिटर जनरल की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश और स्थानीय सरकारों द्वारा वितरित व्यय और अन्य संबंधित सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को जोड़ने पर कुल व्यय और भी बढ़ता दिखता है।

रिपोर्ट में वार्षिक लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि, जनसांख्यिक एवं समूहगत बदलाव, भत्ते की दरों में समायोजन और वास्तविक आवश्यकताओं के अनुसार सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं प्रदान करने की कठिनाइयों को आर्थिक भार में वृद्धि की मुख्य चुनौती के रूप में बताया गया है।

सरकार को अपनी क्षमता के अनुरूप इस आर्थिक भार का दीर्घकालीन प्रबंधन करने हेतु उपयुक्त अध्ययन और विश्लेषण करने की सलाह दी गई है।

९० वर्ष का इतिहास, १९९४ से जनता तक विस्तार

नेपाल की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली का इतिहास लगभग नौ दशक पुराना है, जो १९३४ में सैनिक कोष के माध्यम से औपचारिक रूप से शुरू हुई थी। १९४४ में सरकार ने सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों को आर्थिक सहायता देने हेतु ‘सिविल सेवा भविष्य कोष’ की स्थापना की।

सामान्य नागरिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुविधा की शुरुआत १९९४/९५ के बजट के माध्यम से तत्कालीन वित्त मंत्री भरत मोहन अधिकारी ने की थी।

उस वर्ष से ७५ वर्ष से अधिक आयु के वृद्धों को मासिक NPR १०० भत्ता देना शुरू किया गया।

यह कार्यक्रम विस्तार करता गया, और आर्थिक वर्ष २०८०/८१ तक लाभार्थी संख्या ३.८ लाख तक पहुंच गई है।

ऑडिटर जनरल के अनुसार, विभिन्न वर्षों की नीतियों और बजट ने भत्ते की दरों में वृद्धि और पात्रता आयु में बदलाव के जरिए लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने में मदद की, लेकिन आर्थिक वृद्धि और राजस्व स्रोत अनुकूल नहीं होने से संसाधन प्रबंधन में चुनौतियां आई हैं।

नेपाल में सामाजिक सुरक्षा भत्तों का विकास

सामाजिक सुरक्षा भत्ता १९९४/९५ में ७५ वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को प्रारंभ में दिया गया था। १९९६/९७ से विधवा और विकलांग व्यक्तियों को भी भत्ता देना शुरू किया गया। २००८/०९ से अकेली महिलाओं, संकटग्रस्त समुदाय, कर्णाली क्षेत्र के ६० वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध और दलित समुदाय को, तथा २००९/१० से बाल संरक्षण कार्यक्रम के तहत बच्चों को भत्ता दिया जाने लगा।

वर्तमान में सामाजिक सुरक्षा भत्ता कर्णाली प्रदेश के ५ जिलों और अन्य क्षेत्र के २५ नामित जिलों में वितरित हो रहा है। शुरू में मासिक NPR १०० भत्ता ७५ वर्ष से ऊपर के वृद्धों को दिया जाता था, जो आर्थिक वर्ष २०७२/७३ तक NPR १,००० पहुंच चुका था।

पहले, १९९९/२००० में भत्ता NPR १५० था; २००४/०५ में NPR १७५; २००८/०९ में NPR ५००; और २०२१/२२ से मासिक NPR ४,००० किया गया।

२०२२/२३ में पात्रता आयु ७० से घटाकर ६८ करने पर अतिरिक्त ३०५,००० लाभार्थी जुड़े और उसी वर्ष NPR १.३१२ अरब का अतिरिक्त व्यय हुआ।

आर्थिक वर्ष २०८०/८१ में लाभार्थी वर्ग के अनुसार भत्ते का वितरण

वर्तमान वित्तीय वर्ष में ६८ वर्ष से अधिक उम्र के १,७१९,८०० वृद्ध मासिक NPR ४,००० भत्ता प्राप्त करते हैं, जो NPR ७.६८६ अरब के बराबर जिम्मेदारी बनाता है, जो कुल सामाजिक सुरक्षा व्यय का ६७.२३% है।

६० वर्ष से ऊपर के वरिष्ठ दलित वृद्ध मासिक NPR २,६६० भत्ता पाते हैं। इस समूह में १५७,८८७ लाभार्थी हैं, जो NPR ४७७ मिलियन का दायित्व पैदा करते हैं।

६० वर्ष से ऊपर की वरिष्ठ एकल महिलाओं को भी मासिक NPR २,६६० मिलता है। इनकी संख्या १५९,३१० है और दायित्व NPR ६४२ मिलियन है।

नामित वरिष्ठ नागरिक क्षेत्रों के १६,९५० लाभार्थी वार्षिक NPR ५.०८६ मिलियन का दायित्व बनाते हैं। विधवाएं आयु प्रतिबंध के बिना मासिक NPR २,६६० पाती हैं; इस समूह में ४१६,६८७ लाभार्थी हैं और दायित्व NPR १.१२९ अरब है।

पूर्ण अपंग व्यक्ति किसी भी उम्र में मासिक NPR ३,९९० पाते हैं। इस समूह में ६९,९५२ लाभार्थी हैं और मासिक दायित्व NPR ३०४ मिलियन है।

“श्रेणी बी” में गंभीर अपंग परिस्थितियों वाले व्यक्ति मासिक NPR २,२१८ पाते हैं। संख्या १५०,८८३ है और दायित्व NPR ३४२ मिलियन है।

पांच वर्ष से कम उम्र के दलित बच्चों को मासिक पोषण भत्ता NPR ५३२ मिलता है। इस वर्ग में ३३६,७०६ बच्चे हैं और दायित्व NPR २१८ मिलियन है।

नामित क्षेत्रों के पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को भी मासिक NPR ५३२ भत्ता मिलता है। संख्या ७५६,४०९ है और कुल दायित्व NPR ४७५ मिलियन है।

संकटग्रस्त समुदायों के सदस्य २२,०५० हैं जो मासिक NPR ३,९९० पाते हैं, दायित्व NPR १०५ मिलियन है।

सुधार के सुझाव

ऑडिटर जनरल ने सामाजिक सुरक्षा भत्तों को परिवार के खर्च, संपत्ति, गरीबी स्तर, परिवार सुरक्षा, सामाजिक बहिष्कार, रोजगार स्थिति जैसे आधारों पर आवश्यकता आधारित बनाने का सुझाव दिया है ताकि प्रभावशीलता बढ़े।

“श्रेणी ए” और “श्रेणी बी” अपंगता के बीच स्पष्ट मानदंड न होने के कारण गलत वर्गीकरण, प्रशासनिक समस्याएं और प्रमाण पत्र संबंधी चुनौतियां आई हैं। बाल पोषण भत्ते के लिए भी आवश्यकता मूल्यांकन जरूरी बताया गया है।

विधवा भत्ते के संदर्भ में एकल महिलाओं को रोजगार कौशल विकास और सशक्तिकरण कार्यक्रमों में शामिल कर आर्थिक और सामाजिक सुधार के प्रयास करने की सलाह दी गई है।

संकटग्रस्त समुदायों को भत्ता परिवार को तो मदद देता है, लेकिन जनसंख्या घटाव को ध्यान में रखते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार और बाजार पहुंच के क्षेत्र में कार्यक्रम चलाकर सशक्तिकरण आवश्यक बताया गया है।

भत्ता वितरण को केवल उपार्जन तक सीमित न रखकर समृद्धि में योगदान देने वाला बनाना होगा। गरीब और असहाय लाभार्थियों के लिए स्पष्ट मानदंड न होने से खर्च बढ़ा है।

भत्ता वितरण के लिए उम्र और क्षेत्र का ही नहीं, संपत्ति, पारंपरिक पिछड़े क्षेत्र, जाति, परिवार की आय और रोजगार की स्थिति को भी आधार बनाना सुझाया गया है।

सरकार ने वर्तमान में कर्णाली प्रदेश के कैलाली, हुम्ला, जुम्ला, मुगु और डोल्पा जिलों को नामित पिछड़े जिलों में रखा है। हालांकि उन जिलों के बाहर रहने वाले लाभार्थी भी भत्ता पा चुके हैं, जबकि भौगोलिक कठिनाई, गरीबी और अभाव को ध्यान में रखने वाले मानदंड होने चाहिए।

नामित जिलों के भीतर ही भत्ता वितरण हो रहा है या नहीं, इसके लिए नियमित निगरानी और डेटा प्रणाली मजबूत बनाने की सलाह दी गई है।

भत्ता छोड़ने वालों के सम्मान की व्यवस्था

सामाजिक सुरक्षा ऐन २०७५ की धारा १२(ख) के तहत स्वेच्छा से भत्ता न लेने वाले लाभार्थियों को प्रशंसा पत्र के माध्यम से सम्मानित करने की व्यवस्था है। हालांकि अभी तक किसी लाभार्थी को यह सम्मान नहीं मिला है।

भत्ता न लेने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए वैकल्पिक सुविधाओं का उपयोग करना अभी प्रभावी नहीं हुआ है और इसमें सुधार आवश्यक है।

सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम को प्रभावी और स्थायी बनाने के लिए स्वास्थ्य बीमा, आवागमन शुल्क में छूट, सार्वजनिक सेवा सुविधाएं, और आर्थिक रूप से सुरक्षित वृद्ध और सक्रिय आयु के नागरिकों को लक्षित सशक्तिकरण पहलों को लागू करने की रिपोर्ट में सिफारिश की गई है।

नई सरकार ने सामाजिक सुरक्षा में क्या योजना बनाई है?

सरकार आगामी बजट में सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को और अधिक समान और लक्षित बनाने की योजना बना रही है। आर्थिक रूप से सक्षम नागरिकों को स्वेच्छा से भत्ता छोड़ने के लिए राष्ट्रीय अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत “छोड़ सकने वाला छोड़ दे, जरूरतमंद पाए” का नारा दिया जाएगा।

इस तरह की भागीदारी को अंतरपीढ़ी न्याय और राष्ट्रीय एकता का उदाहरण माना जाएगा, हालांकि यह व्यवस्था सामाजिक सुरक्षा कानून में पहले से ही मौजूद है।

देश भर के दलित बच्चों के लिए पोषण भत्ता मासिक NPR ५०० से बढ़ाकर NPR १००० कर दिया गया है। बजट वक्तव्य में मधेस, कर्णाली और सुदूरपश्चिम के मध्यम और गंभीर गरीबी वाले २५ जिलों में बाल पोषण भत्ता कार्यक्रम चलाने का भी उल्लेख किया गया है।

आईसीसी ने एकदिवसीय विश्वकप की संरचना में किया बड़ा बदलाव

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद् (आईसीसी) ने एकदिवसीय विश्वकप प्रतियोगिता की संरचना में उल्लेखनीय बदलाव किए हैं। नई संरचना के तहत विश्वकप में 14 टीमों की भागीदारी होगी और यह तीन चरणों में संपन्न होगा। आईसीसी ने बताया है कि यह नया ढांचा प्रतिस्पर्धा को और अधिक तीव्र तथा रोमांचक बनाने के लिए लागू किया गया है।

नई संरचना के अनुसार, विश्वकप में शामिल 14 टीमों में से 12वें, 13वें और 14वें स्थान पर रहने वाली तीन टीमें ‘सुपर सिरिज’ में हिस्सा लेंगी। राउंड रॉबिन प्रारूप में होने वाले इस चरण में विजेता टीम ही मुख्य समूह चरण में 12वीं टीम के रूप में प्रवेश करेगी। दूसरे चरण में 12 टीमों को दो समूहों में बांटा जाएगा। प्रत्येक समूह में 6-6 टीमें होंगी, और दोनों समूहों की शीर्ष तीन-तीन टीमों के साथ-साथ कुल मिलाकर सर्वश्रेष्ठ एक अतिरिक्त टीम चुनी जाएगी, जो ‘सुपर 7’ चरण में प्रवेश करेगी।

‘सुपर 7’ चरण में सातों टीमें एक-दूसरे के खिलाफ राउंड रॉबिन मैच खेलेंगी। इस चरण की शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। सेमीफाइनल में पहले स्थान वाली टीम चौथे स्थान की टीम से भिड़ेगी, जबकि दूसरे स्थान वाली टीम तीसरे स्थान की टीम से मुकाबला करेगी। इसके पश्चात विजेता टीमें फाइनल में आमने-सामने होंगी। इससे पहले विश्वकप में 14 टीमों को दो समूहों में बांटकर शीर्ष तीन-तीन टीमें ‘सुपर सिक्स’ चरण में जाती थीं।

आईसीसी का कहना है कि नई संरचना से टूर्नामेंट के शुरुआती दौर से ही हर मैच का महत्व बढ़ेगा, प्रतिस्पर्धा कड़ी होगी और विश्वकप खिलाड़ियों तथा समर्थकों के लिए और भी अधिक रोमांचक साबित होगा।

लुम्बिनी प्रादेशिक अस्पताल में सुशासन और सेवा सुधार की मांग, २४ बिंदुओं वाला ज्ञापन प्रस्तुत

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी रुपन्देही ने लुम्बिनी प्रादेशिक अस्पताल में सुशासन और सेवा सुधार के लिए २४ बिंदुओं वाला ज्ञापन प्रस्तुत किया है।
  • जिला सचिव बिरेन्द्र सी ने नागरिकों को सहज, गुणवत्ता युक्त और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवा मिलनी चाहिए बताते हुए अस्पताल प्रशासन को सचेत किया है।
  • ज्ञापन में ओपीडी सेवा को तकनीक-मैत्री बनाने हेतु क्यूआर कोड भुगतान, डिजिटल टोकन और ऑनलाइन पूर्व पंजीकरण प्रणाली लागू करने की मांग की गई है।

३१ असार, बुटवल। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) रुपन्देही ने लुम्बिनी प्रादेशिक अस्पताल में सुशासन और सेवा वितरण से जुड़ी समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए अस्पताल प्रशासन को २४ बिंदुओं का ज्ञापन सौंपा है।

पार्टी के जिला सचिव बिरेन्द्र सी ने अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को संबोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा संविधान द्वारा गारंटीकृत एक मौलिक अधिकार है, इसलिए सरकारी अस्पताल में आने वाले प्रत्येक नागरिक को सहज, त्वरित, गुणवत्तापूर्ण एवं सम्मानजनक इलाज सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

लुम्बिनी प्रदेश तथा आस-पास के जिलों के हजारों नागरिकों का इलाज इस अस्पताल में होता है, जहां से सेवाग्रही लगातार शिकायतें कर रहे हैं। क्षेत्रीय निरीक्षण में भी सेवा प्रवाह में कमियां पाई गई है, जिस कारण सुधार के लिए २४ बिंदुओं की मांग प्रस्तुत की गई है, उन्होंने बताया।

ज्ञापन में अस्पताल की ओपीडी सेवाओं को पूर्ण रूप से तकनीकी रूप से सुधारा जाना आवश्यक बताया गया है। टिकट वितरण प्रणाली को व्यवस्थित करते हुए क्यूआर कोड के माध्यम से शुल्क भुगतान, डिजिटल टोकन प्रणाली, ऑनलाइन पूर्व पंजीकरण और एसएमएस के जरिए क्रम सूचना देने जैसी प्रणालियां लागू करने की मांग की गई है।

 

उषा भण्डारी को अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स की ब्रांड एम्बेसडर नियुक्ति

नेपाल भलिबल लीग की फ्रेंचाइजी टीम अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स ने उषा भण्डारी को तीन साल के लिए ब्रांड एम्बेसडर के रूप में नियुक्त किया है। इस समझौते के अनुसार, भण्डारी टीम के प्रचार के साथ-साथ ग्रासरूट स्तर से नए खिलाड़ियों के विकास और भलिबल के समग्र विकास में सक्रिय भूमिका निभाएंगी। टीम के सह-मालिक सुबोध त्रिपाठी ने कहा कि गण्डकी प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाली इस टीम के साथ यह साझेदारी नेपाली भलिबल की लोकप्रियता बढ़ाने में मदद करेगी। ३१ असार, काठमाडौं।

नेपाल भलिबल लीग (एनवीएल) की फ्रेंचाइजी टीम अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स ने राष्ट्रीय महिला भलिबल टीम की मुख्य खिलाड़ी और चर्चित उषा भण्डारी को अपना ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया है। सुमिरा स्पोर्ट्स वेन्जर की स्वामित्व वाली अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स और स्टार आउटसाइड हिटर उषा भण्डारी के बीच तीन साल का समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत, भण्डारी टीम के प्रचार-प्रसार में सक्रिय रहकर नेपाली भलिबल के ग्रासरूट विकास में भी अहम भूमिका निभाएंगी।

टीम के सह-मालिक सुबोध त्रिपाठी ने कहा, “भण्डारी के साथ यह सहभागिता पुरुष भलिबल फ्रेंचाइजी लीग को और अधिक लोकप्रिय बनाने में सहायक होगी। दर्शकों को कवरड हॉल तक लाने तथा ग्रासरूट स्तर पर भलिबल के विकास में मदद करने के लिए हमने उन्हें यह पद दिया है।” उन्होंने आगे कहा, “भलिबल हमारा राष्ट्रीय खेल है, इसलिए इसके विकास में योगदान देना हमारा उद्देश्य है। गण्डकी प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाली यह टीम होने के कारण यह साझेदारी और भी विशेष हो गई है।”

उषा भण्डारी ने पहली बार भलिबल फ्रेंचाइजी टीम की ब्रांड एम्बेसडर बनने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, “पहले मैं फुटबॉल और क्रिकेट के क्षेत्र से जुड़ी थी। एक भलिबल खिलाड़ी के रूप में इस लीग की ब्रांड एम्बेसडर बनना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है। मैं गण्डकी प्रदेश में जन्मी हूं और अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स से प्रस्ताव आने के बाद यह सहयोग सहज हो गया।” गण्डकी प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाली अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स और तनहुँ में जन्मी भण्डारी के बीच यह साझेदारी क्लब के लिए विशेष और महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस क्षेत्र में भलिबल प्रेमियों की मजबूत संख्या इसे क्लब के ब्रांड विस्तार और नए खिलाड़ियों के विकास के लिए सकारात्मक माना गया है।

भण्डारी ने घरेलू भलिबल प्रतियोगिताओं में नेपाल पुलिस क्लब से खेला है और मालदीव के विभिन्न क्लबों से व्यावसायिक भलिबल भी खेली है। उन्होंने २०१९ में मात्र १४ वर्ष की उम्र में १३वें दक्षिण एशियाई खेलकूद (साग) से राष्ट्रीय टीम में पदार्पण किया था और तब से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करती आ रही हैं। केडिया ग्रुप के आयोजन में पहली बार आयोजित हो रही नेपाल भलिबल लीग में कुल ६ टीमें भाग ले रही हैं। अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स को उम्मीद है कि भण्डारी के साथ यह सहयोग नेपाली भलिबल के कुल विकास और नई प्रतिभाओं के उत्पादन में अहम योगदान देगा।

उषा भण्डारी के अंतरराष्ट्रीय खेल सफर और उपलब्धियां:
२०१९ (१३वें साग): रजत पदक से पदार्पण
२०२२ (एवीसी महिला सीनियर सेंट्रल जोन): स्वर्ण पदक विजेता
२०२३ (कावा महिला चैलेंजर्स लीग): कांस्य पदक
२०२३ (१९वें एशियन गेम्स, चीन): प्रतिभागिता
२०२४ (कावा महिला भलिबल क्लब चैंपियनशिप): चैम्पियन (नेपाल पुलिस क्लब के साथ)
२०२४ (कावा महिला नेशंस लीग): रजत पदक
२०२६ (कावा महिला क्लब चैंपियनशिप): कांस्य पदक
२०२६ (कावा महिला लीग): चौथा स्थान

अन्नपूर्ण स्पाइकर किङ्सकी ब्रान्ड एम्बासडर बनीं उषा भण्डारी

समाचार सारांश

एआई द्वारा तैयार, संपादकीय समीक्षा की गई।

  • नेपाल भलिबल लिग की फ्रैंचाइज़ टीम अन्नपूर्ण स्पाइकर किङ्स ने उषा भण्डारी को तीन वर्षों के लिए ब्रांड एम्बासडर नियुक्त किया है।
  • समझौते के अनुसार, भण्डारी टीम के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ ग्रासरूट से नए खिलाड़ियों के विकास तथा भलिबल के विस्तार में सक्रिय भूमिका निभाएंगी।
  • टीम के सह-मालिक सुबोध त्रिपाठी ने कहा कि गण्डकी प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाली इस टीम के साथ यह सहयोग नेपाली भलिबल को और अधिक लोकप्रिय बनाने में मदद करेगा।

३१ असार, काठमांडू। नेपाल भलिबल लिग (एनवीएल) के अंतर्गत आने वाली फ्रैंचाइज़ टीम अन्नपूर्ण स्पाइकर किङ्स ने राष्ट्रीय महिला भलिबल टीम की प्रमुख खिलाड़ी एवं चर्चित उषा भण्डारी को अपना ब्रांड एम्बासडर नियुक्त किया है।

सुमिरा स्पोर्ट्स वेन्जर के स्वामित्व वाली अन्नपूर्ण स्पाइकर किङ्स और स्टार आउटसाइड हिटर उषा भण्डारी के बीच तीन वर्षों का अनुबंध हुआ है।

समझौते के तहत, भण्डारी टीम के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ अन्नपूर्ण स्पाइकर किङ्स के साथ मिलकर नेपाली भलिबल के ग्रासरूट विकास में भी प्रभावी भूमिका निभाएंगी।

टीम के सह-मालिक सुबोध त्रिपाठी ने कहा, “भण्डारी के साथ इस सहयोग से पुरुष भलिबल की फ्रैंचाइज़ लिग और अधिक लोकप्रिय होगी। हम दर्शकों को कवरडहॉल तक लाने और ग्रासरूट के माध्यम से भलिबल के विकास में उनकी मदद के लिए उन्हें इस पद पर नियुक्त किए हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “भलिबल हमारा राष्ट्रीय खेल है, इसलिए इसका विकास हमारी प्राथमिकता है। चूंकि यह टीम गण्डकी प्रदेश का प्रतिनिधित्व करती है, यह सहयोग और भी खास बन गया है।”

उषा भण्डारी ने पहली बार किसी भलिबल फ्रैंचाइज़ टीम की ब्रांड एम्बासडर बनने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, “पहले मैं फुटबॉल और क्रिकेट के साथ जुड़ी थी। एक भलिबल खिलाड़ी के रूप में इस लिग की ब्रांड एम्बासडर बनकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैं गण्डकी प्रदेश की हूं और अन्नपूर्ण स्पाइकर किङ्स का प्रस्ताव आने के बाद यह सहयोग सहज रूप से हुआ।”

गण्डकी प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाली अन्नपूर्ण स्पाइकर किङ्स और तनहुँ की जन्मी भण्डारी के बीच यह सहयोग क्लब की नजर में खास और महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में भलिबल प्रेमियों का मजबूत आधार होने के कारण यह सहयोग क्लब के ब्रांड विस्तार के साथ-साथ नए खिलाड़ियों के विकास और ग्रासरूट विस्तार में सकारात्मक प्रभाव डालेगा, ऐसा विश्वास जताया गया है।

भण्डारी घरेलू स्तर पर नेपाल पुलिस क्लब से खेलती हैं और मालदीव की कई क्लबों से भी पेशेवर भलिबल खेल चुकी हैं। सन् २०१९ में १३ वर्ष की उम्र में १३वें दक्षिण एशियाई खेलकूद (साग) से राष्ट्रीय टीम में पदार्पण करने वाली उन्होंने तब से निरंतर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

केडिया ग्रुप की मेजबानी में पहली बार आयोजित होने वाली नेपाल भलिबल लिग में कुल ६ टीमें भाग लेंगी। अन्नपूर्ण स्पाइकर किङ्स को विश्वास है कि भण्डारी के साथ सहयोग से नेपाली भलिबल के समग्र विकास और नई प्रतिभाओं के संचार में महत्वपूर्ण योगदान होगा।

उषा भण्डारी की अंतरराष्ट्रीय खेल यात्रा और उपलब्धियां:
२०१९ (१३वीं साग): रजत पदक से डेब्यू
२०२२ (एवीसी महिला सीनियर सेंट्रल जोन): चैंपियन (स्वर्ण पदक)
२०२३ (काव्हा महिला चैलेंजर्स लिग): कांस्य पदक
२०२३ (१९वीं एशियाई खेल, चीन): सहभागिता
२०२४ (काव्हा महिला भलिबल क्लब चैंपियनशिप): चैंपियन (नेपाल पुलिस क्लब से)
२०२४ (काव्हा महिला नेशंस लिग): रजत पदक
२०२६ (काव्हा महिला क्लब चैंपियनशिप): कांस्य पदक
२०२६ (काव्हा महिला लिग): चौथा स्थान

प्रोटोन इमास ५ की बुकिंग हुई शुरू, ग्राहक पूर्वानुमानित मूल्य पर वाहन प्राप्त करेंगे

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार किया गया।

  • जगदम्बा मोटर्स ने प्रोटोन के बहुप्रतीक्षित इलेक्ट्रिक वाहन इमास ५ की बुकिंग आधिकारिक रूप से शुरू की है।
  • कंपनी ने ग्राहक के अनुमानित बाजार मूल्य पर वाहन खरीदने का विशेष अवसर देने वाली योजना की घोषणा की है।
  • यह वाहन हाल ही में ‘इलेक्ट्रिक कॉम्पैक्ट व्हीकल ऑफ द ईयर २०२६’ का खिताब जीत चुका है।

31 असार, काठमाडौं। नेपाल में प्रोटोन वाहन के आधिकारिक वितरक जगदम्बा मोटर्स ने इलेक्ट्रिक कार इमास ५ की बुकिंग शुरू कर दी है, जो कि लंबे समय से प्रतीक्षित है।

आधिकारिक लॉन्च से पहले ही “गेस एंड बुक द ऑल न्यू इमास ५ अट योर प्राइस” नामक विशिष्ट योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना में ग्राहक नई प्रोटोन इमास ५ की आधिकारिक बाजार कीमत का अनुमान लगाकर उसी मूल्य पर वाहन खरीदने का मौका पाएंगे।

कंपनी बुकिंग मूल्य या लॉन्च कीमत के सबसे करीब अनुमान लगाने वाले ग्राहक को उसके अनुमानित मूल्य पर वाहन खरीदने की अनुमति देगी।

इस योजना में भाग लेने के लिए इच्छुक ग्राहक कंपनी के जारी किए गए साइट पर जाकर अपनी पसंद के वेरिएंट का चयन कर ‘प्राइस स्लाइडर’ से अनुमानित मूल्य लॉक कर सकते हैं।

मूल्य अनुमान के लिए इमास ५ प्राइम वेरिएंट की कीमत सीमा 29.99 लाख से 34.99 लाख रुपये तक और ‘प्रिमियम’ वेरिएंट की सीमा 34.99 लाख से 39.99 लाख रुपये निर्धारित की गई है।

कंपनी ने बताया है कि इस योजना के नियमों के तहत प्रत्येक वेरिएंट से ‘लकी ड्रॉ’ के माध्यम से 5 भाग्यशाली विजेता चुने जाएंगे, जिन्हें उनके अनुमानित मूल्य पर प्रोटोन इमास ५ खरीदने का मौका मिलेगा।

तत्काल ही, जगदम्बा मोटर्स ने प्रोटोन इमास ५ की बुकिंग 1 लाख रुपये अग्रिम जमा के साथ शुरू की है। ग्राहक बैंक या ऑनलाइन माध्यम से भुगतान कर भुगतान का प्रमाण सेल्स कंसलटेंट को देकर अपनी बुकिंग प्रक्रिया पूर्ण कर सकते हैं।

या तो यह भी निर्धारित साइट पर जाकर वाउचर अपलोड कर बुकिंग की जा सकती है। इस साइट पर बुकिंग करने वाले ग्राहकों में से लकी विजेता चुने जाएंगे।

प्रोटोन और जिली की साझेदारी में विकसित और निर्मित इस वाहन ने हाल ही में मलेशिया के ‘अलायंस डीएसएफ व्हीकल ऑफ द ईयर अवार्ड्स’ में ‘इलेक्ट्रिक कॉम्पैक्ट व्हीकल ऑफ द ईयर २०२६’ का पुरस्कार प्राप्त किया है।

कंपनी के अनुसार, इमास ५ नेपाल में अपने सेगमेंट का पहला ‘रियर-व्हील-ड्राइव’ इलेक्ट्रिक कॉम्पैक्ट एसयूवी होगा, जो प्रीमियम इलेक्ट्रिक ड्राइविंग अनुभव देने के लिए पाँच मुख्य विशेषताएं प्रदान करता है।