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लेखक: space4knews

नेपाल और स्पेन के बीच कृषि सहयोग विस्तार पर चर्चा

समाचार सारांश

संपादकीय रूप से समीक्षा किया हुआ।

  • कृषि, वन और वातावरण मंत्री गीता चौधरी और स्पेन के गैर-आवासीय राजदूत जुआन एंटोनियो मार्च पुजोल के बीच कृषि आधुनिकीकरण और द्विपक्षीय सहयोग विस्तार पर चर्चा हुई।
  • राजदूत पुजोल ने बताया कि 2027 में होने वाले एफएओ महानिदेशक के चुनाव में नेपाल सरकार के सकारात्मक समर्थन की अपेक्षा है।
  • मंत्री चौधरी ने नेपाल में कृषि डिजिटलाइजेशन, भौगोलिक संकेत पंजीकरण और जलवायु-सहिष्णु कृषि प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया।

8 जेठ, काठमांडू। कृषि, वन और वातावरण मंत्री गीता चौधरी से नेपाल के लिए स्पेन के गैर-आवासीय राजदूत जुआन एंटोनियो मार्च पुजोल के बीच शिष्टाचार भेंटवार्ता हुई।

भेंट में कृषि आधुनिकीकरण, कृषि डिजिटलाइजेशन, गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पाद, जल प्रबंधन, जलवायु अनुकूल कृषि और द्विपक्षीय सहयोग विस्तार के विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

राजदूत पुजोल ने बताया कि 2027 में संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के महानिदेशक पद के चुनाव में नेपाल सरकार के सकारात्मक समर्थन की अपेक्षा है। मंत्री चौधरी ने कहा कि इस बारे में विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय कर आगे बढ़ा जाएगा।

राजदूत पुजोल ने कहा कि स्पेन गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पाद, कृषि ट्रेसिबिलिटी प्रणाली, कृषि निवेश और तकनीकी आदान-प्रदान में सहयोग करने के इच्छुक है।

उन्होंने स्पेन के ज्वालामुखीय क्षेत्रों में विकसित वाइन उत्पादन, जैतून तेल की ट्रेसिबिलिटी प्रणाली, संतरों, साइट्रस और अंगूर की खेती के अभ्यास, साथ ही जल संकट वाले द्वीप क्षेत्रों में रात के समय पानी उठाने की तकनीक से अवगत कराया।

उन्होंने बताया कि स्पेन में आयोजित कृषि प्रदर्शनियों और निवेश सम्मेलनों में उत्पादकों, निवेशकों और संबंधित पक्षों की महत्वपूर्ण भागीदारी रहती है और नेपाल को भी इन अवसरों में भाग लेने का आग्रह किया।

मंत्री चौधरी ने बताया कि नेपाल सरकार कृषि डिजिटलाइजेशन, युवा सशक्तिकरण और कृषि नवाचार को प्राथमिकता दे रही है।

उन्होंने कहा कि नेपाल में भौगोलिक संकेत (जीआई) पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की गई है और संतरों व कीवी के लिए पायलट कार्यक्रम चल रहा है।

मंत्री चौधरी ने कहा कि नेपाल में प्राकृतिक संसाधनों की भरपूर संभावनाएँ हैं, लेकिन तकनीकी और जलवायु-सहिष्णु कृषि प्रणालियों की आवश्यकता है तथा पारंपरिक कृषि को बाजार से जोड़ना आवश्यक है।

साथ ही वन संरक्षण प्रयासों के बीच नेपाल जलवायु परिवर्तन के उच्च जोखिम में है, इसलिए स्पेन के अनुभव और विशेषज्ञता से सीखने की इच्छा है।

भेंट में नेपाल- स्पेन के बीच कृषि, तकनीक, जल प्रबंधन और सतत कृषि विकास के क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर सकारात्मक चर्चा हुई।

सोनमा गाउँपालिकाका प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत ७२ हजार रुपैयाँ घुससहित पक्राउ

८ जेठ, जनकपुरधाम। महोत्तरी जिल्लाको सोनमा गाउँपालिकाका प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत श्रीदेव यादवलाई ७२ हजार रुपैयाँ घुससहित पक्राउ गरिएको छ। उनी एक उपभोक्ता समितिको अध्यक्षसँग घुस लिँदै गरेको अवस्थामा अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोगको कार्यालय बर्दिबासले नियन्त्रणमा लिएको हो। अख्तियारले जानकारी दिएको छ कि यादवलाई औरही सडक क्षेत्रमा पक्राउ गरिएको हो र उनीसँग थप रकम पनि रहेको आशंका गरिएको छ।

एमाले बैठकमा ओलीलाई गुरुङको प्रश्न- पार्टी तपाईंको प्राइभेट कम्पनी हो ?

एमाले बैठक में ओली को गुरुङ का सवाल: ‘क्या पार्टी आपकी निजी कंपनी है?’

समाचार संक्षेप
एमाले उपाध्यक्ष पृथ्वी सुब्बा गुरुङ ने अध्यक्ष केपी शर्मा ओली से पूछा है, ‘पार्टी क्या आपकी निजी कंपनी है?’ अध्यक्ष ओली द्वारा अन्य नेताओं को धमकी दिए जाने पर उपाध्यक्ष गुरुङ ने पार्टी को सुधारने की आवश्यकता जताई है। एमाले सचिवालय की बैठक में अध्यक्ष ओली की कड़ी भाषा पर चार उपाध्यक्षों ने आपत्ति जताई थी, जिसके कारण बैठक स्थगित कर दी गई थी। ८ जेठ, काठमाडौं।

एमाले उपाध्यक्ष पृथ्वी सुब्बा गुरुङ ने अध्यक्ष केपी शर्मा ओली से ‘‘पार्टी क्या आपकी निजी कंपनी है?’’ पूछते हुए सवाल किया है। अध्यक्ष ओली द्वारा अराजक होने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की धमकी देने पर उपाध्यक्ष गुरुङ ने इसका विरोध किया है। सचिवालय की बैठक में चार उपाध्यक्षों ने अध्यक्ष ओली की नेतृत्व शैली पर आपत्ति जताई थी।

‘आज की बैठक में काफी तकरार हुई। अध्यक्ष ने अंत में थोड़ी कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया। इसका जवाब देते हुए पृथ्वी सुब्बा गुरुङ ने भी कड़ा प्रतिवाद करते हुए कहा – क्या यह पार्टी आपकी निजी कंपनी है? क्या आपको अपने सहयोगी नेताओं से सम्मानजनक बातचीत करना नहीं आता?’ एक नेता ने बताया। ओली ने पार्टी की लाइन के खिलाफ जाने वालों को कार्य विभाजन में शामिल नहीं करने का संकेत दिया था, जिस पर गुरुङ ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में पार्टी को सुधारा जाना चाहिए। धमकियों के बढ़ने पर उन्होंने असंतोष व्यक्त किया था। तीखी बहस के बाद बैठक स्थगित कर दी गई थी।

ट्रिप टर्बो और अगोडा के बीच रणनीतिक साझेदारी, नेपाली यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय होटल बुकिंग और भी सरल

नेपाल का सबसे अधिक डाउनलोड किया गया ट्रैवल एप ट्रिप टर्बो ने वैश्विक डिजिटल ट्रैवल प्लेटफॉर्म अगोडा के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। इस साझेदारी के बाद नेपाली यात्री अगोडा के वैश्विक होटल नेटवर्क में नेपाली मुद्रा में सीधे बुकिंग कर सकेंगे। ट्रिप टर्बो ने 2024 सितंबर में मोबाइल एप लॉन्च किया है और इसके पांच लाख से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं।

इस सहयोग के माध्यम से नेपाली यात्रियों के लिए अब पूरे विश्व भर के अंतरराष्ट्रीय होटल सीधे नेपाली मुद्रा में सरलता से बुक करना संभव होगा। ट्रिप टर्बो उपयोगकर्ता अगोडा के व्यापक होटल नेटवर्क का लाभ उठा सकेंगे, जिसमें लाखों होटल और आवास सेवाएं उपलब्ध हैं। ट्रिप टर्बो के संस्थापक शिखर प्रसाई ने कहा, “यह रणनीतिक साझेदारी विदेश भ्रमण के लिए जाने वाले नेपाली लोगों के लिए अत्यंत सुविधाजनक है, जहाँ वे नेपाली मुद्रा में ही होटल बुक कर सकते हैं।”

साझेदारी पर ट्रिप टर्बो की ओर से संस्थापक प्रसाई और अगोडा के प्रमुख व्यवसायिक अधिकारी डेमियन फिर्स्च ने हस्ताक्षर किए हैं। अगोडा की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और ट्रिप टर्बो की नेपाली बाजार की गहरी समझ को मिलाकर यात्रियों को सहज, सुरक्षित और भरोसेमंद बुकिंग अनुभव प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। ट्रिप टर्बो नेपाल का सबसे बड़ा ऑनलाइन ट्रैवल मार्केटप्लेस है।

महिला मन्त्रालय के बजट में वृद्धि की मांग रास्वपा सांसदों ने की

प्रतिनिधि सभा के सदस्यों ने महिला, बालबालिका, लैंगिक एवं यौनिक अल्पसंख्यक और सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय के बजट में वृद्धि के लिए सरकार पर दबाव डाला है। सांसद रिमा विश्वकर्मा ने महिला मंत्रालय को कुल बजट का एक प्रतिशत से कम मिलना दुखद बताया और बजट बढ़ाना आवश्यक बताई। सांसद शोभा खनाल ने ऑटिज्म और बलात्कार पीड़ित बाल बच्चों के लिए अलग बजट आवंटित करने का सुझाव सरकार को दिया। ८ जेठ, काठमाडौं।

प्रतिनिधि सभा के सांसदों ने महिला, बालबालिका, लैंगिक तथा यौनिक अल्पसंख्यक एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय के बजट बढ़ाने की मांग की है। शुक्रवार को संघीय संसद प्रतिनिधि सभा के महिला तथा सामाजिक मामले समिति की बैठक में सांसदों ने यह मांग रखी। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी से सांसद रिमा विश्वकर्मी, शोभा खनाल समेत अन्य ने महिला मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए आगामी आर्थिक वर्ष में बजट वृद्धि का आग्रह किया।

सांसद विश्वकर्मा ने कहा कि ५१ प्रतिशत जनसंख्या को जिम्मेदारी सौंपे महिला मंत्रालय को कुल बजट का एक प्रतिशत से कम मिलना बेहद दुखद है। उन्होंने बताया कि महिला हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए सरकार को महिला मंत्रालय के बजट में वृद्धि करना अतिदरकार है। ‘जनसांख्यिकी के अनुसार महिलाएं ५१ प्रतिशत हैं, फिर भी हमें ३३ प्रतिशत बजट पर संतोष क्यों करना पड़ता है? यह सोच मेरे लिए समझना कठिन है। इस मुद्दे पर हमें बहस करनी चाहिए। मैंने देखा कि राष्ट्र बजट का महिला मंत्रालय को एक प्रतिशत से कम बजट मिले है, जो हमारे जनसंख्या प्रतिनिधित्व से मेल नहीं खाता,’ उन्होंने कहा।

सांसद शोभा खनाल ने ऑटिज्म और बलात्कार पीड़ित बालबालिकाओं के लिए अलग बजट आवंटित करने की आवश्यकता बताई। ‘ऑटिज्म और बलात्कार पीड़ित बालकों के लिए अलग बजट मिलने से ऐसे कार्यक्रम प्रभावी होंगे और गर्भवती महिलाओं के उद्धार कार्यक्रम को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी,’ उन्होंने कहा। कांग्रेस सांसद रीना उप्रेती ने वृद्धाश्रम के प्रावधान को वॉर्ड स्तर तक विस्तारित करने की मांग सरकार से की। उन्होंने तर्क दिया कि नई पीढ़ी के अनुभव साझा करने के लिए स्थानीय तहों में वृद्धाश्रम की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। ‘वृद्धाश्रम का स्थापना वॉर्ड स्तर पर हो ताकि हर वॉर्ड में इसका प्रबंध हो सके। समावेशी कानून बनाकर महिलाओं को पीड़ित होने से बचाना भी जरूरी है,’ उन्होंने कहा।

रकम फिर्ता गर्दैमा उन्मुक्ति मिल्छ ? – Online Khabar

गैरकानूनी उपचार खर्च लौटाने पर फ्लैग ऑफ इम्म्यूनिटी मिलता है?

समाचार के सारांश की समीक्षा के बाद यह तैयार किया गया है। नेकपा एमाले ने केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा गैरकानूनी तरीके से वितरित किए गए उपचार खर्च को राज्यकोष में वापस किया है। पूर्वराष्ट्रपति रामवरण यादव, पूर्वप्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और झलनाथ खनाल द्वारा उपचार खर्च लौटाने के बाद अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग द्वारा भ्रष्टाचार की जांच में विराम लगने के संकेत मिले हैं। अख्तियार ने उच्च पदस्थ व्यक्तियों द्वारा की गई भ्रष्टाचार राशि की वापसी पर उजागर किए जाने के बजाय उन्हें माफी देने का निर्णय लेने पर पूर्वसचिव शारदाप्रसाद त्रिताल ने आपत्ति जताई है। ८ जेठ, काठमांडू। नेकपा एमाले ने पार्टी अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा गैरकानूनी रूप से वितरित किए गए उपचार खर्च की राशि पिछले सप्ताह राज्यकोष में वापस की है। पूर्वराष्ट्रपति डॉ. रामवरण यादव, पूर्वप्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और झलनाथ खनाल ने लगभग चार करोड़ रुपये के उपचार खर्च वापस किए, जिसके बाद अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग, जो उनकी शिकायतों की जांच कर रहा था, ने जांच रोकने के संकेत दिए हैं। समाचार पहली बार प्रकाशित होने के बाद कई लोगों ने सार्वजनिक रूप से विरोध जताया है। उच्च पदस्थ व्यक्तियों द्वारा गैरकानूनी सुविधाएं प्राप्त करने के बाद समस्या उत्पन्न होने पर रकम लौटाकर माफी मिलने की स्थिति में अन्य लोगों को ऐसी सुविधाएं क्यों न मिलें, इस पर सवाल उठ रहे हैं। पूर्वमंत्री विष्णु पौडेल के पुत्र नवीन पौडेल और तत्कालीन अधिवक्ता द्वारा ललिता निवास की जमीन सरकार को वापस किए जाने के बाद उनके खिलाफ कोई मामला न चलाने के निर्णय के सन्दर्भ में, विशेष व्यक्तियों और आम जनता के बीच राज्य के कानून के अस्पष्ट तथा भेदभावपूर्ण प्रवर्तन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उद्योग वाणिज्य महासंघ में ६ केन्द्रीय सदस्यों का मनोनयन

नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के अध्यक्ष अन्जन श्रेष्ठ ने दो महिलाओं समेत ६ केन्द्रीय सदस्यों का मनोनयन किया है। मनोनीत सदस्यों में शिवप्रसाद घिमिरे, मनीषलाल प्रधान, नवीन रिजाल, गोकर्ण कार्की, दर्शना श्रेष्ठ और सहारा जोशी शामिल हैं। महासंघ के विधान के अनुसार कम से कम दो महिला सदस्यों सहित कुल ७ सदस्यों को मनोनीत करने का प्रावधान है।

अध्यक्ष श्रेष्ठ ने निजी क्षेत्र के हित और देश के आर्थिक विकास के लिए सभी को एकजुट होने पर जोर दिया। विधान के अनुसार एक सदस्य पद का मनोनयन अभी बाकी है। आज ही महासंघ के चुनाव में वरिष्ठ उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष पदों के लिए भी पदाधिकारी चुने गए हैं। नव निर्वाचित तथा मनोनीत पदाधिकारियों और सदस्यों को अध्यक्ष श्रेष्ठ ने पद तथा गोपनीयता की शपथ भी दिलाई।

इस अवसर पर अध्यक्ष श्रेष्ठ ने कहा कि निजी क्षेत्र के व्यवसायिक हित और देश के आर्थिक विकास के लिए सभी को मिलकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने देश भर के उद्योगियों और व्यवसायियों की मांगों को पूरा करते हुए आर्थिक समृद्धि और विकास के लिए महासंघ सक्रिय रहेगा, यह विश्वास व्यक्त किया। महासंघ की ६०वीं वार्षिक साधारण सभा और चुनाव वैशाख २१ और २२ को सम्पन्न होने के बाद अन्जन श्रेष्ठ महासंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं।

पहले एमाले के खिलाफ जसपा का साथ दिया, अब मुख्यमन्त्री यादव ने एमाले को पन्छाकर जसपा को किया बर्खास्त


८ जेठ, जनकपुरधाम। मधेश प्रदेश के मुख्यमन्त्री कृष्णप्रसाद यादव ने गुरुवार जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) नेपाल के तीन मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया है। साथ ही, नेकपा एमाले के मोहम्मद समिर को बिना विभाग का मंत्री बनाकर सरकार में शामिल किया है।

जसपा नेपाल से बर्खास्त किए गए मंत्रियों में भौतिक पूर्वाधार मंत्री राजकुमार गुप्ता, श्रम और यातायात मंत्री मनिष सुमन तथा शिक्षा और संस्कृति मंत्री रानीकुमारी तिवारी शामिल हैं।

मुख्यमन्त्री यादव ने कुछ समय पहले मंत्रियों को इस्तीफा देने का निर्देश दिया था, लेकिन जसपा के मंत्रियों ने आदेश का पालन नहीं किया। इसके बाद उन्होंने बर्खास्तगी का निर्णय लिया।

जसपा नेपाल वह पार्टी है जिसने आठ माह पहले कांग्रेस के कृष्णप्रसाद यादव को कंधा देकर मुख्यमन्त्री बनाया था, परन्तु उन्हें इस्तीफा देकर अपनी सरकार बनाने से बचा था।

जनमत पार्टी के सतीश कुमार सिंह की सरकार गिरने के बाद लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी (लोसपा) नेपाल के जितेन्द्र सोनल मुख्यमन्त्री बने। कात्तिक २२ को विश्वासमत के दौरान कांग्रेस और एमाले विपक्ष में थे।

तत्कालीन नेकपा माओवादी केन्द्र के प्रदेश सांसद रहबर अन्सारी ने विद्रोह किया और जनमत के सांसद सतीश सिंह तथा त्रिभुवन साह संसद में अनुपस्थित रहे। इस वजह से मुख्यमन्त्री सोनल को विश्वासमत नहीं मिल पाया और उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

फिर प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी एमाले ने सरकार में सत्ता संघर्ष शुरू किया। प्रदेश प्रमुख का उपयोग करते हुए संविधान की धारा १६८(३) के तहत कात्तिक २३ की रात को एमाले के सरोजकुमार यादव को मुख्यमन्त्री नियुक्त किया गया। शपथ अगले दिन होटल में दिलाई गई, जिससे मधेश में बड़ा राजनीतिक तनाव उत्पन्न हुआ।

इसके बाद कांग्रेस, जसपा नेपाल सहित छह दलों ने गठबंधन बनाकर आंदोलन शुरू किया, जिसने मधेश में एमाले को अलग-थलग कर दिया।

उस घटना के बाद कर्मचारियों पर हमला और तोड़फोड़ हुई, मामला सर्वोच्च अदालत तक गया।

प्रदेशसभा की बैठक खुलने के बाद लगभग एक महीना प्रदेश अशांत रहा। इसके बाद एमाले की सरकार गिर गई।

एमाले की सरकार गिरने के बाद जसपा नेपाल और लोसपा समेत मधेश केंद्रित दलों ने सरकार बनाने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस के शामिल होने और आंदोलन करने के कारण सभी ने कांग्रेस के यादव को मुख्यमन्त्री बनाने पर सहमति जताई।

मंसिर १९ को कांग्रेस के यादव मुख्यमन्त्री बनाए गए और उन्होंने २२ कांग्रेस, १८ जसपा नेपाल, १३ जनमत, ९ माओवादी केन्द्र, ८ लोसपा और ७ नेकपा एकीकृत समाजवादी के सांसदों का समर्थन हासिल किया था। एमाले अकेले विपक्ष में रह गया था।

लेकिन अब फिर से मधेश की राजनीतिक स्थिति बदली है। आठ माह पहले कंधा थामकर सत्ता दिलाने वाले दल को किनारे करते हुए मुख्यमन्त्री यादव ने अब एमाले के साथ मिलकर सरकार को जारी रखा है।

मुख्यमन्त्री यादव ने जसपा नेपाल के मंत्रियों को बर्खास्त करने से पहले गुरुवार दोपहर जसपा ने मुख्यमन्त्री यादव को विश्वासमत देने का निर्णय लिया था, लेकिन कुछ घंटों में राजनीतिक उथल-पुथल ने परिस्थितियों को बदल दिया।

गुरुवार को जसपा नेपाल और लोसपा संसदीय दल की संयुक्त बैठक हुई, जिसमें सरोजकुमार यादव को दल का नेता चुना गया और सरकार को जारी रखने का निर्णय भी लिया गया। लेकिन मुख्यमन्त्री यादव के समर्थन छोड़ने के बाद जसपा ने शुक्रवार को फैसला वापस लेकर विश्वासमत नहीं दिया।

मंत्री से बर्खास्त किए गए जसपा सांसद मनिष सुमन ने कहा कि मुख्यमन्त्री ने उन्हें इस्तीफा देने का मौका तक नहीं दिया।

‘मुख्यमन्त्री ने छल करके एमाले जैसी पार्टी के साथ गठबंधन किया है,’ उन्होंने कहा, ‘जब सरोज यादव मुख्यमन्त्री थे, तब हम सड़क से लेकर सर्वोच्च अदालत तक उनका समर्थन कर रहे थे। आज ऐसी स्थिति आ गई है, यह घोर अनुरूपता की चरम सीमा है।’

जसपा नेपाल की सांसद रूपा यादव ने कांग्रेस पर धोखा देने का आरोप लगाया। ‘कांग्रेस के मुख्यमन्त्री द्वारा उठाया गया यह कदम आपत्तिजनक है। यह धोखाधड़ी है। इसके बारे में हम अपने विचार बना कर आगे बढ़ेंगे,’ उन्होंने कहा।

मधेश में कांग्रेस, एमाले और नेकपा के बीच त्रिदलीय समीकरण बन गया है। सरकार बनाने के लिए ५४ वोट आवश्यक हैं, जबकि मधेश प्रदेश सभा में एमाले के २४, कांग्रेस के २२ और नेकपा के १५ सीटें मिलाकर कुल ६१ सीटें हैं।

शुक्रवार मुख्यमन्त्री यादव ने संसद में विश्वासमत हासिल किया, जिसमें ६२ मत उनके पक्ष में और ३६ विपक्ष में पड़े।

सातै प्रदेशमा कस्तो बन्दैछ संगठन ? – Online Khabar

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के संगठन विस्तार में महत्वपूर्ण प्रगति

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने असार ७ से ९ तारीख तक अपना पहला महाधिवेशन आयोजित करने की तारीख तय की है। इस क्रम में संगठन विस्तार के लिए तहगत अधिवेशनों को तीव्रता प्रदान की गई है। प्रदेशगत रूप से पार्टी का संगठन बागमती और गण्डकी प्रदेश में अधिक मजबूत है, जबकि मधेस प्रदेश के बारामा संगठनगत गतिरोध देखने को मिला है। कर्णाली प्रदेश में पार्टी ने ५०० से अधिक वडाओं में अधिवेशन सम्पन्न कर स्थानीय तह में पहली पार्टी बनने का लक्ष्य रखा है।

सत्तारूढ़ दल के रूप में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने चुनाव के बाद संगठन विस्तार पर जोर दिया है। असार ७ से ९ तारीख तक हो रहे महाधिवेशन की तैयारी के तहत तहगत अधिवेशनों को तीव्र किया जा रहा है। तदर्थ समिति गठित किए गए स्थानों में वडा अधिवेशन संपन्न होने वाले हैं, जबकि जहां संगठन नहीं है वहां भेला बुलाया गया है। उन वडाओं जहां तदर्थ समिति गठित नहीं हुई, वहां के लिए भेला जेठ २ को बुलाया गया था, जबकि जो पालिका संरचना निर्मित नहीं हुई हैं, वहां की भेला भोलि (जेठ ९) को आयोजित होगी।

कोशी प्रदेश के झापा जिले में पार्टी ने संगठनात्मक रूप से मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, जबकि धनकुटा, ताप्लेजुङ, सोलुखुम्बु और खोटाङ जिलों में संगठन कमजोर बना हुआ है। मधेस प्रदेश में बारामा संगठन में गतिरोध के बावजूद अन्य जिलों में गतिविधियां तीव्र हैं। बागमती प्रदेश में चितवन और रसुवा जिलों में संगठन विस्तार तेजी से हो रहा है और बागमती के १०२१ से अधिक वडाओं में अधिवेशन आयोजित करने की तैयारी चल रही है।

गण्डकी प्रदेश में मनाङ और मुस्ताङ में अधिवेशन नहीं होंगे, वहीं कर्णाली प्रदेश में ५०० से अधिक वडाओं में अधिवेशन सफलतापूर्वक सम्पन्न हो चुके हैं। सुदूरपश्चिम के ९ जिलों में जिला स्तरीय अधिवेशन आयोजित होने की खबर है। पार्टी के नेताओं ने संगठन विस्तार में उल्लेखनीय प्रगति होने की जानकारी दी है और आगे भी अधिवेशन आयोजित करने की तैयारी में लगे रहने का विश्वास व्यक्त किया है।

पश्चिम एशियामा नेपालीहरूको सुरक्षा र हित प्रति सरकार सतर्क

परराष्ट्र मन्त्रालयले पश्चिम एशियामा रहेका नेपाली नागरिकहरूको सुरक्षा र हित प्रति सरकार अत्यन्तै सतर्क रहेको जनाएको छ। मन्त्रालयले स्ट्रेट अफ होर्मुजमा भएको अवरोध चाँडै खुल्ने र बजार मूल्यहरू सामान्यीकरणतर्फ उन्मुख हुने अपेक्षा व्यक्त गरेको छ। पश्चिम एशियामा रहेका नेपालीहरूले मन्त्रालयको अनलाइन पोर्टलमा ८७ हजार ८ सय ६३ जनाले आफ्नो जानकारी दर्ता गराइसकेका छन्। (८ जेठ, काठमाडौं)

परराष्ट्र मन्त्रालयले पश्चिम एशियाको पछिल्लो अवस्था नजिकबाट निगरानी गरिरहेको उल्लेख गर्दै त्यहाँ रहेका नेपालीहरूको सुरक्षा र हितप्रति सरकार सजग रहेको जनाएको छ। मन्त्रालयले आयोजित पत्रकार सम्मेलनमा प्रवक्ता लोकबहादुर पौडेल क्षेत्रीले पश्चिम एशियामा तनाव भए तापनि सार्थक वार्ताका सम्भावना निकै बलियो रहेको र मे महिनादेखि परिस्थिति क्रमशः सुधारोन्मुख रहेको बताएका छन्। उनले शान्ति कायम राख्न कूटनीतिक प्रयासहरू सफल तुल्याउनु, ‘स्ट्रेट अफ होर्मुज’ को अवरोध हटाउनु र उक्त क्षेत्रमा दिगो शान्ति स्थापित गर्नु अहिलेको मुख्य आवश्यकता रहेको बताए।

नेपालले ‘स्ट्रेट अफ होर्मुज’ अवरोध खुलाउन भइरहेका द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय प्रयासहरूलाई सहयोग गर्ने उल्लेख पनि उनले गरेका छन्। मन्त्रालयले अवरोध चाँडै हट्ने र त्यसले प्रभावित आपूर्ति शृङ्खला तथा आकाशिएको बजार मूल्य क्रमशः सामान्यीकरणतर्फ जाने अपेक्षा व्यक्त गरेको छ। प्रवक्ता क्षेत्रीका अनुसार पश्चिम एशियामा रहेका नेपालीहरूको अवस्था अहिले सामान्य रहेको बताउँदै उनीहरूको सुरक्षा र हितसँग सम्बन्धित विषयहरूमा निरन्तर सक्रिय रहेको जानकारी दिए। मन्त्रालयमा स्थापना गरिएको ‘इमर्जेन्सी कन्ट्रोल रूम’, कन्सुलर सेवा विभागको अनलाइन दर्ता प्रणाली तथा सम्बन्धित नेपाली नियोगका हटलाइन सेवा प्रवाह भईरहेको छ।

अब उक्त कन्ट्रोल रूम २४ घण्टाको सट्टा बिहान ९ बजेदेखि राति ९ बजेसम्म सञ्चालन गरिने उनको भनाइ छ। हालसम्म कन्ट्रोल रूममा १६० भन्दा बढी फोन, ५० भन्दा बढी इमेल तथा ११० भन्दा बढी अनलाइन माध्यमबाट सम्पर्क भएको छ भने १० भन्दा बढी व्यक्तिहरू भौतिक रुपमा उपस्थित भएर कुल ३३० भन्दा बढी पटक सम्पर्क गरेको र पछिल्लो ४८ घण्टामा मात्र दुई पटक सम्पर्क भएको पनि मन्त्रालयले जनाएको छ। त्यस्तै, कन्सुलर सेवा विभागले सञ्चालन गरेको अनलाइन पोर्टलमा हालसम्म ८७ हजार ८ सय ६३ जनाले विवरण दर्ता गराइसकेका छन् भने पछिल्लो १४ दिनमा मात्र १२ जनाले नयाँ दर्ता गरेका छन्। मन्त्रालयले पश्चिम एशियामा रहेका नेपाली नागरिकलाई कुनै समस्या परेमा नजिकको नेपाली नियोगमा सम्पर्क गर्न, स्थानीय सुरक्षा नियमहरू पालना गर्न र साइबर कानुन अन्तर्गत लागू हुने कुनै पनि निषेधित गतिविधिमा संलग्न नहुन अनुरोध गरेको छ।

सुदूरपश्चिम और लुम्बिनी में गर्मी और बढ़ेगी, घर से बाहर न निकलने की सलाह जारी

८ जेठ, काठमाडौं। सुदूरपश्चिम और लुम्बिनी प्रदेश के जिलों में आने वाले दिनों में गर्मी और अधिक बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। वर्तमान में गर्मी का असर जनजीवन पर देखने को मिल रहा है। जल तथा मौसम विज्ञान विभाग की मौसम पूर्वानुमान महाशाखा ने आगामी दिनों में तापमान में वृद्धि की संभावना जाहिर की है। इसी को लेकर महाशाखा ने आज शाम मौसम संबंधी विशेष सूचना जारी करते हुए सभी को सतर्क रहने का आग्रह किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार कञ्चनपुर, कैलाली, डोटी, बर्दिया, बाँके और दाङ जैसे जिलों में अन्य जिलों की तुलना में अत्यधिक गर्मी होगी, इसलिए वहां के निवासियों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

इसी तरह बैतडी, डडेलधुरा, अछाम, सुर्खेत, सल्यान, रोल्पा, प्युठान, पाल्पा, अर्घाखाँची, रुपन्देही और कपिलवस्तु में भी तापमान में वृद्धि होने के कारण वहां के स्थानीय लोगों को तापमान की स्थिति पर नियमित नजर रखने और सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। महाशाखा के अनुसार सुदूरपश्चिम प्रदेश के पहाड़ी एवं तराई क्षेत्रों तथा लुम्बिनी प्रदेश के तराई के कुछ इलाकों में ६ जेठ से ही अधिकतम तापमान ४० डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक मापा जा रहा है। वहीं, सुदूरपश्चिम और लुम्बिनी के कुछ पहाड़ी एवं तराई क्षेत्रों में अधिकतम तापमान ३८ डिग्री सेल्सियस से ऊपर है।

देशभर तापमान के निरीक्षण के आधार पर यह देखा गया है कि अगले तीन दिनों तक लुम्बिनी और सुदूरपश्चिम प्रदेश के पहाड़ी तथा तराई क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर अधिकतम तापमान ३८ डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहेगा। कुछ क्षेत्रों में ४० डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान के कारण अत्यधिक गर्मी के जोखिम की संभावना है, जिसे विशेष सूचना में भी उल्लेख किया गया है। गर्मी बढ़ने के कारण इससे बचाव के लिए उचित तैयारी और सतर्कता अपनाने का महाशाखा ने सभी से अनुरोध किया है। “लुम्बिनी और सुदूरपश्चिम प्रदेश के तराई क्षेत्रों में आगामी तीन दिनों तक मध्यम स्तर की गर्मी लहर और पहाड़ी क्षेत्रों में उच्च तापमान रहने की संभावना है, अतः इसके प्रभाव से बचाव के लिए सावधानी बरतने का विनम्र आग्रह है,” महाशाखा की जारी विशेष सूचना में लिखा है।

गर्मी से बचाव के उपायों के संबंध में जनरल फिजिशियन डॉ. देवेन्द्र आचार्य ने बताया कि गर्म हवा और लहर से थकान, कमजोरी, अत्यधिक प्यास लगना, सिर दर्द, पैर बैसना, चक्कर आना, बेहोशी, मांसपेशियों में दर्द और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गर्मी से बचने के लिए ठंडी और छायादार जगह पर रहने, अत्यावश्यक न हो तो धूप में न निकलने, घर से बाहर निकलना हो तो टोपी पहनने और हल्के एवं ढकने वाले कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही जूस, सूप और साधा पानी नियमित रूप से पीना चाहिए। इन सभी उपायों के बावजूद यदि स्वास्थ्य संबंधी समस्या उत्पन्न हो तो चिकित्सक से तुरंत परामर्श लेने की सलाह दी गई है।

विष्णु पौडेलले केपी ओलीलाई भने- ‘तपाईंबाट पार्टी चल्दैन’

विष्णु पौडेल ने केपी ओली से कहा- ‘आपसे पार्टी नहीं चलेगी’

एमाले के उपाध्यक्ष विष्णु पौडेल ने अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को ७० वर्ष की आयु सीमा और दो कार्यकाल की व्यवस्था हटाने को एक बड़ी भूल बताते हुए पद छोड़ने का प्रस्ताव रखा है। उपाध्यक्ष पौडेल सहित चार उपाध्यक्षों ने कहा है कि ओली के नेतृत्व में पार्टी आगे नहीं बढ़ सकती और पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा है। जब ओली ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाने वालों को दंडित करने की धमकी दी, तब उपाध्यक्ष पृथ्वी सुब्बा गुरुङ ने कहा, ‘पार्टी आपकी निजी कंपनी नहीं है’ और सवाल उठाए। ८ जेठ, काठमाडौँ।

जेनजी आन्दोलन के बाद सत्ता से बाहर हुए एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली अब चुनाव में शर्मनाक हार के कारण पार्टी में भी संकट में हैं। पिछले महाधिवेशन में खुद को जिताने में मदद करने वाले नेतागण भी अब उनसे पार्टी नहीं चलाए जाने का निष्कर्ष निकाल कर पद छोड़ने पर आमादा हैं। इस प्रस्ताव को पार्टी की बैठक में औपचारिक रूप से रखा गया है। शुक्रवार को सचिवालय की बैठक में उपाध्यक्ष विष्णु पौडेल ने अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को ७० वर्ष की आयु सीमा और दो कार्यकाल की प्रावधान को हटाना गलती बताया और पार्टी के लिए नई राह खोलने का प्रस्ताव रखा।

उपाध्यक्ष पौडेल ने कहा कि वर्तमान स्थिति में पार्टी का नेतृत्व करना उनके लिए संभव नहीं है और उन्हें अपना रास्ता छोड़ देना चाहिए। चुनाव में पार्टी की शर्मनाक हार के बाद यह प्रस्ताव सचिवालय की बैठक में औपचारिक तौर पर पेश किया गया। अब इस विचार के समर्थन में चार उपाध्यक्ष खड़े हैं। पौडेल, जो उपाध्यक्षों में दूसरे नंबर पर हैं, ने नेतृत्व बदलने की स्पष्ट धारणा व्यक्त करते हुए पार्टी को दो विभिन्न गुटों में बांट दिया है।

“अब आपके नेतृत्व में पार्टी आगे नहीं बढ़ सकती, निचले स्तर के कार्यकर्ताओं में गहरा निराशा है,” यह विचार उपाध्यक्ष पौडेल, पृथ्वी सुब्बा गुरुङ, रघुजी पन्त और गोकर्ण बिष्ट का था। जब उन्होंने अध्यक्ष के विकल्प की बातें कीं तब उपाध्यक्ष रामबहादुर थापा बादल ने इसका विरोध किया। थापाले कहा कि पार्टी संकट में है और इस समय नेतृत्व का बचाव करना जरूरी है। जब अन्य उपाध्यक्षों ने नेतृत्व पर सवाल उठाए, तब ओली ने कहा कि थापा का कथन ही पार्टी की आधिकारिक पंक्ति है।

अध्यक्ष ओली द्वारा अराजकता के आरोप लगाने पर उपाध्यक्ष पृथ्वी सुब्बा गुरुङ ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा, “आज बैठक में कड़ी बहस हुई। अध्यक्ष ने अंतिम क्षणों में कठोर भाषा का इस्तेमाल किया। इसका जवाब देते हुए मैंने भी कठोर प्रतिक्रिया दी और पूछा- क्या यह पार्टी आपकी निजी कंपनी है? क्या आपको अपने साथियों से सम्मानजनक तरीके से बात करने का तरीका नहीं आता?” बैठक में पौडेल ने पार्टी की हार की समीक्षा करने और उसकी जिम्मेदारी नेतृत्व को लेने की मांग की।

पौडेल ने कहा, “असफलता की जिम्मेदारी लेकर आपको मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। ७० वर्ष की उम्र सीमा और दो कार्यकाल की व्यवस्था को लेकर पार्टी में लोकतंत्रीकरण का जो मुद्दा उठाया गया था, उसमें हमने समर्थन किया था, लेकिन बाद में आपने वह प्रावधान हटा दिया और हम मान गए। यह मानना हमारी गलती थी। अब ७० वर्ष की आयु सीमा और दो कार्यकाल की व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए।” जब बैठक में दो गुट स्पष्ट हुए कि एक गुट ओली का समर्थन करता है और दूसरा उनका विरोध, तब अध्यक्ष ओली ने व्यंग्य करते हुए कहा कि ‘अध्यक्ष हटाने की मांग विष्णु पौडेल कर रहे हैं, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व रामबहादुर थापा कर रहे हैं।’

कर्णाली टूरिज्म मीट-२०६३: भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से शुरुआत

कर्णाली टूरिज्म मीट-२०६३ वीरेन्द्रनगर में शुरू हुआ है, जिसका उद्देश्य कर्णाली को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार से जोड़ना है। कर्णाली प्रदेश के मंत्री सुरेश अधिकारी ने कर्णाली को विश्व के उत्कृष्ट पर्यटन स्थलों में से एक बताया और कहा कि इसकी पर्यटन विकास से नेपाल की आर्थिक समृद्धि में योगदान मिलेगा। पर्यटन सचिव मुकुन्दप्रसाद निरौला ने कर्णाली को नेपाली सभ्यता, हिमालयी संस्कृति और जैव विविधता का जीवंत संग्रहालय बताया।

‘अन द लैप ऑफ नेचर एंड कल्चर’ अर्थात् ‘संस्कृति और प्रकृति की गोद में’ यह कार्यक्रम इसी नारे के तहत शुरू किया गया है। नेपाल पर्यटन बोर्ड और वीरेन्द्रनगर नगरपालिक के आयोजन तथा होटल व्यवसायी महासंघ सुर्खेत, दुल्लु नगरपालिका और गुराँस गाउँपालिका के समन्वय में बीते गुरुवार वीरेन्द्रनगर में इस सम्मेलन में कर्णाली की पर्यटन संभावनाओं, सांस्कृतिक वैभव और सतत पर्यटन विकास पर चर्चा की गई।

कर्णाली प्रदेश सरकार के उद्योग, पर्यटन, वन तथा वातावरण मंत्री सुरेश अधिकारी ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव मुकुन्दप्रसाद निरौला, पर्यटन बोर्ड के कार्यवाहक प्रमुख हिकमतसिंह ऐर, वीरेन्द्रनगर नगरपालिकाध्यक्ष मोहनमाया ढकाल, गुराँस गाउँपालिका अध्यक्ष टोपबहादुर बीसी, सुर्खेत के मुख्य जिला अधिकारी जगदीश्वर उपाध्याय, नेपाल एसोसिएशन फॉर टूर एण्ड ट्रैवल एजेंट्स (नाट्टा) बाँके शाखा प्रमुख तथा प्रतिनिधि, कर्णाली और लुम्बिनी प्रदेश के पर्यटन व्यवसायी, भारतीय पर्यटन व्यवसायी, निजी क्षेत्र के उद्यमी एवं पर्यटनकर्मी उपस्थित थे।

मंत्री अधिकारी ने कहा कि कर्णाली को भौगोलिक दृष्टि से पिछड़ा माना जाता रहा है, लेकिन अब इसके पर्यटन विकास से पूरे नेपाल की आर्थिक समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान होने वाला है। उन्होंने कर्णाली के रारा, शे फोक्सुंडो, काँक्रेविहार, गुराँसे, हुम्ला और डोल्पा जैसे स्थलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांडिंग करने की आवश्यकता पर बल दिया। पर्यटन सचिव निरौला ने बताया कि कर्णाली केवल नेपाल का पश्चिमी भूभाग ही नहीं है, बल्कि यह नेपाली सभ्यता, हिमालयी संस्कृति, जैव विविधता और मौलिक जीवनशैली का जीवंत संग्रहालय है।

बोर्ड के कार्यवाहक प्रमुख ऐर ने कहा कि भारत नेपाल के लिए विशाल पर्यटन बाजार है और कर्णाली प्रदेश वर्तमान में भारतीय पर्यटकों के लिए अत्यंत उपयुक्त पर्यटन स्थल है। वीरेन्द्रनगर नगरपालिकाध्यक्ष ढकाल ने कहा कि कर्णाली में अपार पर्यटन संभावनाएं हैं, लेकिन इसका प्रभावी प्रचार-प्रसार नहीं हो पा रहा है। यह कार्यक्रम १० जेठ को समाप्त होगा।

ईरान में बंदी अमृत झा की रिहाई प्रक्रिया जारी

८ जेष्ठ, काठमाण्डौ । ईरान में पानीजहाज सहित गिरफ्तार नेपाली नागरिक अमृत झा अब तक हिरासत में हैं। ईरान के बंदर अब्बास स्थित जेल में बंद झा की रिहाई के लिए नेपाल सरकार कूटनीतिक प्रयास जारी रखे हुए है। परराष्ट्र मन्त्रालय के अनुसार झा से सम्बन्धित मामला वर्तमान में ईरानी स्थानीय अदालत में विचाराधीन है और निर्णय ईरानी कानून के अनुसार होगा। मन्त्रालय के प्रवक्ता लोकबहादुर पौडेल क्षेत्री ने बताया कि झा की निष्पक्ष सुनवाई और रिहाई के लिए सभी उपलब्ध माध्यमों से लगातार पहल हो रही है।

उनके अनुसार अदालत ने ‘एक्सपोर्ट रिपोर्ट’ तैयार करने का निर्देश दिया था। इसके तहत एक विशेषज्ञ टीम गठित करके प्रतिवेदन तैयार करने का कार्य अंतिम चरण में है। यह रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत होने के पश्चात स्थानीय कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी। प्रवक्ता पौडेल ने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद अदालत आवश्यक निर्णय लेगी। ‘हम अपने नागरिक के पक्ष में आवश्यक कदम उठा रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला वहां के कानून के अनुसार होगा,’ उन्होंने कहा।

‘एक्सपोर्ट रिपोर्ट’ से तात्पर्य किसी जहाज, सामान या संबंधित घटना के गिरफ्तारी, जांच और परीक्षण के क्रम में संग्रहित सभी विवरणों को समेटे हुए तकनीकी तथा कानूनी प्रतिवेदन से है। अमृत झा के मामले में यह रिपोर्ट विशेष रूप से जहाज की गिरफ्तारी की स्थिति, जहाज का विवरण, सुरक्षा बल और पुलिस द्वारा की गई जांच, संग्रहित सबूत, तकनीकी परीक्षण के परिणाम, तथा घटना से जुड़े कानूनी निष्कर्ष शामिल है। ईरानी अदालत ने इसी रिपोर्ट को मांगा था जिस पर एक विशेषज्ञ टीम बनाई गई और रिपोर्ट तैयार की गई।

यह रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत होने के बाद अदालत इसके आधार पर आगे सुनवाई और निर्णय प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। रिपोर्ट तैयार करने की लागत भी नेपाल सरकार द्वारा चुकाई जा चुकी है। रिपोर्ट अदालत में जमा होने के बाद और आदेश आएं या ना आएं, इसके लिए कितना समय लगेगा, यह अभी निश्चित नहीं है। इससे पूर्व, परराष्ट्र मंत्री ने सामाजिक मीडिया पर झा की रिहाई की बात कही थी, लेकिन वास्तविकता अलग पाए जाने पर व्यापक आलोचना के बाद परराष्ट्र मन्त्रालय ने माफी मांगी थी।

मन्त्रालय ने स्थानीय अदालत में मामला विचाराधीन रहने और झा हिरासत में होने के बावजूद अनौपचारिक सूचना के आधार पर रिहाई का समाचार फैलाए जाने की स्वीकारोक्ति करते हुए गलती पर खेद व्यक्त किया है। २०२४ की जुलाई में वैदेशिक रोजगार के लिए यूएई गए उदयपुर, गाइघाट के ३३ वर्षीय झा ‘अल लुलु मरीन सर्विसेस एलएलसी’ के पानी जहाज पर ‘सीमैन’ के रूप में काम कर रहे थे। वर्तमान सरकार के आने से पहले ही अमृत झा सहित ७ लोग सवार एक पानी जहाज पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के आरोप में ईरान के हर्मुज क्षेत्र के बंदर अब्बास बंदरगाह से ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा फारसी खाड़ी के होर्मुज स्ट्रेट से पकड़ लिया गया था। पानी जहाज सहित ७ लोगों को गिरफ्तार कर अदालत में मामला दर्ज किया गया था। अदालत के आदेशानुसार जहाज में सवार ७ में से ४ लोग रिहा हो चुके हैं जबकि झा सहित ३ लोग रिहा होना बाकी हैं। उनकी रिहाई की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है, परराष्ट्र मन्त्रालय ने यह जानकारी दी है।

क्यान्सरको जीवनरक्षक औषधि हाहाकार, बिरामीको अवस्था गम्भीर

कैंसर के जीवनरक्षक दवाओं की कमी से मरीजों की स्थिति गंभीर होती जा रही है

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • देशभर के अस्पतालों में कैंसर उपचार के लिए अनिवार्य दवाएं कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन की कमी के कारण उपचार सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
  • सरकारी मूल्य नियंत्रण नीति और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण दवा आयात में समस्या आ रही है, ऐसा दवा आयातकों ने बताया है।
  • स्वास्थ्य मंत्रालय में दवा की कमी दूर करने के लिए चर्चा हो रही है और मूल्य समायोजन के लिए प्रयास जारी हैं, विभाग ने जानकारी दी है।

८ वैशाख, काठमांडू। कैंसर उपचार में आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं की कमी के कारण देशभर के अस्पतालों में उपचार सेवा प्रभावित हो रही है। किमीथेरापी में उपयोग होने वाली ‘कार्बोप्लाटिन’ और ‘सिस्प्लाटिन’ दवाओं की कमी से मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, चिकित्सकों ने बताया है।

वीर अस्पताल की कैंसर विशेषज्ञ डॉ. संध्या चापागाईं ने बताया कि इन दवाओं की कमी ने कैंसर रोगियों के जीवन को संकट में डाल दिया है।

सिस्प्लाटिन और कार्बोप्लाटिन अधिकांश कैंसर प्रकारों में अनिवार्य किमीथेरापी दवाएं हैं। ये दवाएं नेपाल में निर्मित नहीं होतीं, इसलिए पूरी तरह विदेशी आयात पर निर्भर हैं।

डॉ. चापागाईं ने कहा, ‘ये दवाएं सभी प्रकार के कैंसर उपचार के लिए आवश्यक हैं और इनका कोई विकल्प नहीं है। कैंसर ठीक करने वाले उपचार में ये दवाएं जीवनरक्षक हैं।’

वीर अस्पताल में रोजाना लगभग ४५ मरीजों को ये दवाएं चाहिए, लेकिन नियमित उपलब्ध न होने की वजह से कैंसर रोग तेजी से फैलने का खतरा बढ़ा है, चिकित्सकों ने बताया।

डॉ. चापागाईं कहती हैं, ‘यह समस्या केवल वीर अस्पताल की नहीं है, देश के सभी क्षेत्रों के कैंसर मरीज प्रभावित हो रहे हैं। समय पर किमीथेरापी न मिलने से कैंसर तेजी से फैलता है।’

पाटन अस्पताल के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अरुण शाही ने भी कहा कि किमीथेरापी में अत्यधिक प्रयोग होने वाली इन दवाओं की आपूर्ति में समस्या के कारण मरीजों की स्थिति जटिल होती जा रही है।

डॉ. शाही कहते हैं, ‘लगभग ६० प्रतिशत से अधिक कैंसर मरीजों को ये दवाएं जरूरी होती हैं। अस्पताल में दो हफ्तों से कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन की कमी बनी हुई है।’

प्लैटिनम समूह की ये दवाएं फेफड़े, अंडाशय, पेट, स्तन, बड़ी और छोटी आंत सहित विभिन्न कैंसर उपचारों में अत्यंत आवश्यक हैं, उन्होंने बताया।

चिकित्सकों का कहना है कि थोड़ी अवधि के लिए भी ये दवाएं न मिलने पर रोग बढ़ जाता है और जीवन को खतरा होता है। कमी के कारण उन्हें वैकल्पिक दवाएं उपयोग करने पर मजबूर होना पड़ा है, डॉ. शाही ने बताया।

‘कैंसर के प्रकार के अनुसार अन्य दवाओं के संयोजन से उपचार कर रहे हैं, लेकिन इसकी प्रभावशीलता सुनिश्चित नहीं है,’ वे कहते हैं, ‘यह उस स्थिति में है कि कुछ न करने से कुछ करना बेहतर है।’

वीर अस्पताल की कैंसर विशेषज्ञ डॉ. रामिला शिल्पकार डंगोल ने सोशल मीडिया के माध्यम से चेतावनी दी है, ‘नेपाल में कैंसर की दवाएं कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन की कमी ने गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट उत्पन्न कर दिया है। कुछ मामलों में ठीक हो सकने वाले मरीज उपचार से वंचित हो रहे हैं। यह केवल आपूर्ति समस्या नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु का प्रश्न है।’

भक्तपुर कैंसर अस्पताल के निदेशक डॉ. उज्ज्वल चालिसे के अनुसार ये दवाएं दशक दशकों से प्रभावशाली और सस्ती दवाओं में शामिल हैं।

‘कैंसर किमीथेरापी केवल एक दवा से संभव नहीं है, इसे दो-तीन प्रकार की दवाओं के मिश्रण से देना पड़ता है। प्लैटिनम समूह की दवाएं कई उपचारों में अनिवार्य हैं। बिना इनके कैंसर उपचार अधूरा होता है,’ उन्होंने कहा।

चालिसे के अनुसार सिस्प्लाटिन और कार्बोप्लाटिन लगभग पांच दशक से उपयोग हो रही पुरानी, लेकिन अत्यंत प्रभावी दवाएं हैं, जो पुराने तकनीक आधारित होने के कारण तुलनात्मक रूप से सस्ती भी हैं।

भक्तपुर कैंसर अस्पताल में रोजाना ८० मरीज किमीथेरापी सेवा लेने आते हैं, जिनमें से ५० को प्लैटिनम समूह की दवाएं चाहिए होती हैं।

उनके अनुसार, दवा की कमी का असर सीधे उपचार पर पड़ेगा। ‘यदि ये दवाएं न मिलीं तो उपचार रुक जाएगा और काला बाजार, अवैध आयात और धोखाधड़ी के खतरे बढ़ेंगे। मरीज का परिवार हर हाल में दवाएं खोजने को मजबूर होगा।’

चिकित्सकों के मुताबिक इन दवाओं के मूल्य अन्य कैंसर दवाओं की तुलना में काफी कम हैं। ‘सिस्प्लाटिन की मात्रा के अनुसार कीमत कुछ सौ से डेढ़ हजार रुपये तक होती है जबकि कार्बोप्लाटिन दो से चार हजार रुपये तक मिलती है,’ डॉ. चालिसे ने बताया।

‘सस्ती होने के बावजूद इसका प्रभावी होना इसे खास बनाता है, इसलिए दवा की कमी कैंसर उपचार प्रणाली को गंभीर रुप से प्रभावित कर सकती है।’

आयात क्यों रुका?

दवा आयातकों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र के तनाव एवं कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण उत्पादन लागत बढ़ गई है, जिससे आपूर्ति में समस्या आई है। प्लैटिनम की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बाद कंपनियां उत्पादन लागत में वृद्धि का हवाला देते हुए मूल्य समायोजन चाहती हैं। भारत में भी कुछ उत्पादकों ने कच्चे माल महंगे होने के कारण दवा उत्पादन छोड़ दिया है।

इसका प्रभाव नेपाल पर भी पड़ा है। लेकिन नेपाल के आयातकों का दावा है कि २०७२ साल से सरकारी मूल्य नियंत्रण सूची में दवाएं होने के कारण मूल्य बढ़ाने की अनुमति नहीं मिली और इसलिए आयात और आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

दवा आयात संघ के अध्यक्ष पवन आचार्य ने बताया कि कीमत नियंत्रण नीति प्रमुख कारण है।

संघ के अध्यक्ष पवन आचार्य ने स्वीकार किया कि कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन समेत प्लैटिनम समूह की दवा आयात में समस्या है क्योंकि २०७२ से मूल्य समायोजन नहीं हुआ।

उन्होंने बताया कि सरकार ने २०७२ में ९६ प्रकार की दवाओं का मूल्य समायोजन किया था, लेकिन उसके बाद ११ वर्षों में कोई पुन: समायोजन नहीं हुआ जिससे आयातक दबाव में हैं।

‘प्लैटिनम समूह की दवाएं सिल्वर समेत कच्चे पदार्थों से बनती हैं। इनकी अंतरराष्ट्रीय कीमतें काफी बढ़ गई हैं,’ आचार्य ने कहा, ‘२०७२ की तुलना में सिल्वर की कीमत चार गुना बढ़ चुकी है।’

नेपाल दवाओं के मूल्य निर्धारण में भारत के मूल्य को आधार मानता है और भारत हर वर्ष मूल्य समायोजन करता है जबकि नेपाल इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में असफल रहा है, उन्होंने याद दिलाया।

‘भारत में बनने वाली दवाओं के मूल्य से कम पर नेपाल में बेचना पड़ता है। भारत हर साल मूल्य बढ़ाता है, लेकिन नेपाल सरकार ११ साल से यह प्रक्रिया जारी नहीं रख सकी।’

औषधि व्यवस्था विभाग

आचार्य ने आरोप लगाया कि मूल्य समायोजन को लेकर आलोचना का डर सरकारी संस्थानों को निर्णय लेने से रोकता है।

‘दवा उपलब्ध कराने की बजाय मूल्य बढ़ने पर आलोचना हो सकती है, यह सोचकर वे निर्णय से बचते हैं, जिस कारण समस्या और गहरी हो गई है।’

देशभर दवा की कमी बढ़ने के कारण शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्रालय में इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है।

औषधि व्यवस्था विभाग के सूचना अधिकारी किरणसुन्दर बज्राचार्य ने बताया कि विभाग में दवा अभाव की शिकायतें आ रही हैं और समाधान के लिए प्रयास जारी हैं।

बज्राचार्य के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दवाओं की कीमत बढ़ने के कारण नेपाल में निर्धारित कीमत समायोजन नहीं होने तक आयातक दवाएं लाने में असमर्थ हैं।

‘नेपाल में प्रकाशित मूल्य पुराने हैं, लेकिन विश्व बाजार में कीमतें बढ़ चुकी हैं,’ बज्राचार्य ने कहा, ‘इसलिए आयातक दवाएं लाने में असमर्थ हैं। विभाग स्वास्थ्य मंत्रालय को मूल्य समायोजन के लिए पत्राचार कर रहा है।’