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लेखक: space4knews

मन्त्रालयको संख्या घटाइँदै, सचिवहरूको व्यवस्थापन कसरी होला ?

मंत्रालयों की संख्या घटाई जा रही है, सचिवों का प्रबंधन कैसे होगा?

समाचार सारांश: प्रधानमंत्री बालेन शाह ने मंत्री परिषद् के सदस्यों की संख्या २२ से घटाकर १७ करने की योजना बनाई है। इसी क्रम में, सरकार सचिवालय की पदसंख्या में भी कटौती करने की तैयारी में है। पुनर्संरचना व्यवस्थापन सचिवालय की स्थापना कर कर्मचारी प्रबंधन और सेवा की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए संक्रमण मार्गचित्र बनाने की योजना है। २३ चैत्र, काठमांडू। प्रधानमंत्री पद ग्रहण के बाद लगभग डेढ़ सप्ताह पहले बालेन शाह ने १५ सदस्यीय मंत्रिपरिषद् का गठन किया था। वर्तमान में मंत्रालयों की संख्या २२ है, जिसमें सरकार कुछ मंत्रियों को विपरीत क्षेत्रों से जुड़े दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी देकर पुनर्गठन कर रही है। मंत्रिपरिषद् गठन के कुछ समय बाद ही १०० बिंदुओं वाली कार्ययोजना तैयार की गई थी, जिसमें ‘प्रशासन सुधार, पुनर्संरचना और मितव्ययिता’ के तहत मंत्रालयों की संख्या घटाकर १७ करने का लक्ष्य रखा गया है।

उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय और प्रधानमंत्री तथा मंत्री परिषद् कार्यालय को मंत्रालय जैसी भूमिका दी गई है, जिससे ये मंत्रालय मिलाकर मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। एक महीने के भीतर मंत्रालयों की संख्या घटाने की योजना के साथ पदसंख्या में भी प्रबंधन किया जाएगा। इसके लिए पुनर्संरचना व्यवस्थापन सचिवालय का गठन होगा। प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद् कार्यालय में स्थित यह सचिवालय दो मुख्य कार्य करेगा: एक, सेवा में किसी भी बाधा को रोकने के लिए कर्मचारियों के प्रमोशन का प्रबंधन; दो, सेवा की निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु संक्रमण मार्गचित्र तैयार करना। मंत्रालयों की संख्या कम करने की योजना के साथ ही सचिवों की संख्या में भी बड़ी कटौती होने की संभावना है। वर्तमान में प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद् कार्यालय में मुख्य सचिव के अलावा चार सचिव कार्यरत हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय से सम्बद्ध नेपाल ट्रस्ट, सार्वजनिक खरीद अनुश्रवण कार्यालय, सतर्कता केंद्र जैसे छोटे क्षेत्र वाले निकायों में भी सचिव पद निर्धारित हैं। अर्थ मंत्रालय के पास अर्थ और राजस्व संभालने हेतु दो सचिव हैं, जबकि महालेखा नियंत्रक कार्यालय के पास भी अलग सचिव पद है। स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य और प्रशासन की जिम्मेदारी के अनुसार सचिव व्यवस्था है। मंत्रालयों के अलावा विभिन्न आयोग, निकाय और संवैधानिक अंगों में भी एक से अधिक सचिवों की व्यवस्था है। जल तथा ऊर्जा आयोग, अक्षर, निर्वाचन आयोग, लोक सेवा आयोग जैसे निकायों के पास सचिव पद निर्धारित हैं। महालेखा परीक्षक कार्यालय, महान्यायाधिवक्ता कार्यालय और संघीय संसद सचिवालय में चार-चार सचिव हैं। इन निकायों की तुलना में कार्यपालिका अन्तर्गत निकायों के सचिवों की संख्या पुनः समीक्षा के प्राथमिकता में होगी, प्रधानमंत्री कार्यालय के एक उप सचिव ने बताया। अब पदसंख्या कटौती के दौरान विलय किए गए मंत्रालयों से केवल एक सचिव ही रहेगा। जिन मंत्रालयों में दो या अधिक सचिव हैं, उनकी संख्या भी घटेगी। जिन निकायों के लिए सचिव पद आवश्यक नहीं होगा, उनके पद भी पुनः समीक्षा के दायरे में आएंगे।

प्रधानमंत्री बालेन शाह के नीति, प्रशासन और सुशासन सलाहकार सुदिप ढकाल ने मंत्रालयों की संख्या घटाने हेतु समिति गठित होने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा, ‘समिति बन चुकी है और काम कर रही होगी। अभी तक अतिरिक्त जानकारी नहीं मिली है।’ मंत्रालयों की संख्या घटाई जा रही है: ७ मंसिर २०७८ को सरकार ने कार्यविभाजन नियमावली संशोधित करते हुए २२ मंत्रालय बनाए थे, जिनमें सभी में सचिव पद थे। पाँच मंत्रालय घटाने के बाद कम से कम पाँच सचिव स्वतः हट जाएंगे। प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद् कार्यालय के एक स्रोत के अनुसार फिलहाल तत्काल सचिवों की संख्या में कटौती नहीं की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, आगामी असार माह के अंत तक चार सचिव सेवानिवृत्त होंगे। सचिवों की संख्या घटाने की रणनीति के अनुसार, पद खाली होने पर नई नियुक्ति नहीं होगी। सचिव पद के लिए बढ़ोत्तरी की प्रतीक्षा कर रहे सहसचिवों पर कुछ समय तक इसका असर पड़ेगा और कई सहसचिव ५८ वर्ष की आयु सीमा तक पहुंचकर सचिव बने बिना ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

संरचना में संभावित परिवर्तन: संघीय स्तर पर वर्तमान में ६३ और सात प्रदेशों में प्रमुख सचिव सहित कुल ७० सचिव पद हैं। प्रदेशों में तैनात प्रमुख सचिव भी संघीय निजामती सेवा के अंतर्गत आते हैं। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सचिव के समकक्ष १२वें स्तर पर चार अधिकृत हैं। सहसचिवों की संख्या लगभग ६५० है। अब तक सरकार ने मुख्य सचिव से सचिव तक की पदसंख्या निर्धारित नहीं की है। १०० बिंदुओं वाली कार्ययोजना के अनुसार पुनर्संरचना व्यवस्थापन सचिवालय शेष रूपरेखा तैयार करेगा। कुछ महीनों के भीतर संघीय संसद में पेश किया जाने वाला नियामक विधेयक कर्मचारी प्रबंधन के विभिन्न रूप और मानदंड निर्धारित करेगा।

पूर्व की रिपोर्ट उपयोगी हो सकती है: संघीय निजामती सेवा में कर्मचारी संख्या आवश्यकता से अधिक होने का प्रश्न बार-बार उठता रहा है। इसके अतिरिक्त, सचिव पद बढ़ाने में निजी स्वार्थ भी शामिल होने की शिकायतें हैं। तीन वर्ष पहले भी सचिवों की संख्या को लेकर यही प्रश्न उठे थे, जिसके बाद सरकार ने पुनः समीक्षा हेतु समिति बनाई थी। प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद् कार्यालय के तत्कालीन सचिव लक्ष्मण अर्याल की अध्यक्षता में बनी समिति ने २०७९ में सचिवों की संख्या घटाने और कुछ जगहों पर सचिव और सहसचिव के व्यापक प्रबंधन के सुझाव दिए थे। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, जिन मंत्रालयों में दो सचिव हैं वहां संख्या घटनी चाहिए। उद्योग, कृषि एवं पशुपालन, स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान प्रौद्योगिकी और ऊर्जा मंत्रालयों में वर्तमान में दो-दो सचिव हैं। समिति ने सचिवों की संख्या को ५० तक सीमित करने, अतिरिक्त सचिव पद बनाए रखने और सहसचिवों की संख्या को ६२८ तक सीमित करने की सिफारिश की थी। साथ ही कुछ आयोगों के अनावश्यक सचिव पद काटकर अतिरिक्त सचिव बनाए रखने का सुझाव भी दिया गया था। इसके अलावा, एक से अधिक सहसचिव वाले मंत्रालयों को छोड़कर अन्य निकायों में अतिरिक्त सचिव पदों का प्रावधान करने की सिफारिश की गई थी। इसी प्रकार संवैधानिक निकायों और दो से अधिक सहसचिव वाले निकायों में भी अतिरिक्त सचिव पद की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया था। सचिवों के पदोन्नति के लिए ५० वर्ष की उम्र पूरी करने वाले, कोई दंडात्मक कार्रवाई न होने वाले और स्वच्छ छवि वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता देने के लिए कानूनी व नीतिगत व्यवस्था करने की बात भी कही गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था, ‘राजपत्रांकित प्रथम श्रेणी या इसके समकक्ष कर्मचारियों को क्लस्टर पद्धति के अनुसार तैनात करना, प्रदेश मंत्रालयों की संख्या निर्धारित करना आदि सुधार आवश्यक हैं।’

प्रकाशचन्द्र लोहनी का अध्यक्ष पद से इस्तीफा राजेन्द्र लिङ्देन ने किया स्वीकृत

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के निर्देशक समिति के अध्यक्ष पद से डॉ. प्रकाशचन्द्र लोहनी ने चैत ८ गते दिया गया इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष राजेन्द्र लिङ्देन द्वारा स्वीकृत किया गया है। लोहनी ने प्रतिनिधि सभा चुनाव के नतीजों से स्तब्ध होकर पार्टी महाधिवेशन आयोजित करने का आग्रह किया था और इसके बाद ही पद पर बने रहने की बात कही थी। उन्होंने अपने इस्तीफे के पत्र में पार्टी नेतृत्व के पदाधिकारियों को तुरंत रास्ता खोलने की बात भी लिखी थी। २४ चैत, काठमाडौँ।

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) के निर्देशक समिति के अध्यक्ष पद से डॉ. प्रकाशचन्द्र लोहनी का इस्तीफा स्वीकृत हुआ है। लोहनी ने इसी चैत ८ गते दिया गया इस्तीफा आज मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष राजेन्द्र लिङ्देन ने मंजूर किया है। ‘चैत ८ गते निर्देशक समिति के अध्यक्ष पद से उन्होंने दिया गया इस्तीफा आज पार्टी अध्यक्ष ने स्वीकृत किया है,’ राप्रपा सूत्रों ने जानकारी दी है।

लोहनी ने हाल ही में सम्पन्न हुई प्रतिनिधि सभा चुनाव के परिणाम से स्तब्ध होकर तदर्थ समिति के माध्यम से पार्टी महाधिवेशन कराना आवश्यक बताया था। उन्होंने महाधिवेशन के पश्चात ही पद पर बने रहने का स्पष्ट उल्लेख किया था। पार्टी नेतृत्व के पदाधिकारियों को तुरंत प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा गया था, जिसे उन्होंने अपने इस्तीफे के पत्र में लिखा था।

आईपीएलमा राजस्थान रोयल्सको लगातार तेस्रो जित – Online Khabar

आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स ने लगातार तीसरी जीत दर्ज की

राजस्थान रॉयल्स ने आईपीएल क्रिकेट में लगातार तीसरी जीत हासिल करते हुए मुंबई को 27 रनों से हराया। बारिश के कारण मैच 11 ओवरों में सीमित किया गया था और राजस्थान ने 151 रनों का लक्ष्य निर्धारित किया था। राजस्थान ने 3 मैचों में 6 अंक हासिल कर शीर्ष स्थान पर कब्जा किया है, जबकि मुंबई 2 अंकों के साथ सातवें स्थान पर है। 25 चैत्र, काठमांडू।

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) क्रिकेट में राजस्थान रॉयल्स ने लगातार तीसरी जीत निकालते हुए मंगलवार रात देर से शुरू होकर मध्यरात्रि के बाद संपन्न हुए मैच में मुंबई को 27 रनों से हराया। बारिश के कारण टॉस समय पर नहीं हो पाया और मैच 11 ओवरों के लिए सीमित कर दिया गया। 11 ओवर के खेल में राजस्थान द्वारा दिए गए 151 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए मुंबई ने 9 विकेट खोकर केवल 123 रन बनाए। नमन धीर और शेरफन रदरफोर्ड ने समान रूप से सर्वाधिक 25-25 रन बनाए। तिलक वर्मा ने 14 रन जोड़े जबकि अन्य खिलाड़ियों ने डीगिंग अंक में रन नहीं बनाए।

राजस्थान के लिए नान्द्रे बर्गर, रवि विष्णोई और संदीप शर्मा ने 2-2 विकेट लिए जबकि जोफ्रा आर्चर और तुषार देशपांडे ने 1-1 विकेट हासिल किया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने का मौका पाई राजस्थान ने निर्धारित 11 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 150 रन बनाए। ओपनर यशस्वी जैसवाल और वैभव सूर्यवंशी ने शानदार शुरुआत की। जैसवाल 32 गेंदों में नाबाद 79 रन पर रहे, जिसमें 10 चौके और 4 छक्के शामिल थे। वैभव ने 14 गेंदों में 39 रन बनाए और आउट हुए। कप्तान रियान पराग ने 20 रन जोड़े। मुंबई के अलाह गजनफर ने 2 विकेट लिए जबकि शार्दुल ठाकुर ने 1 विकेट। लगातार तीसरी जीत के साथ राजस्थान ने 3 मैचों में 6 अंक लेकर शीर्ष स्थान हासिल किया है। मुंबई ने 3 मैचों में 2 अंक बनाए हैं और वह सातवें स्थान पर है।

ब्रिटेन में पढ़ रहे ४७५ नेपाली छात्रों ने एक वर्ष में शरण की मांग की

२४ चैत, लन्दन। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष ब्रिटेन में शरण का दावा करने वाले नेपालीों की संख्या ४७५ है। २०२५ के दिसंबर अंत तक ब्रिटेन में कुल १ लाख ६२५ लोगों ने शरण का दावा किया था, जिनमें से ४७५ नेपाली हैं। आंकड़ों के मुताबिक, तीन लोग छोटे डिंगा में सवार होकर अवैध रूप से ब्रिटेन पहुँचे और ४७२ ने वहां पहुंचने के बाद शरणार्थी का दावा किया। आवेदकों में ३२८ पुरुष और १४७ महिलाएं हैं। मुख्य आवेदक ४४८ और आश्रित (निर्भर) २७ लोग हैं। आयु वर्ग के अनुसार, १८ वर्ष से कम उम्र के ११, १८ से २९ वर्ष के अंतर्गत ४०६ (८५%), ३० से ४९ वर्ष के ५२ (११%) और ५० से ६९ वर्ष के ६ (१%) लोग शामिल हैं। १८ से २९ वर्ष के आयु वर्ग में ८५ प्रतिशत आवेदक छात्र हैं।

पिछले पाँच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो, २०२० में १०४, २०२१ में १८२, कोविड महामारी के समय २०२२ में सबसे अधिक १२६३, २०२३ में ७०४ और २०२४ में ७१८ लोगों ने ‘असाइलम’ आवेदन किए थे। पिछले वर्ष ब्रिटेन में शरण का दावा करने वालों की संख्या घटी है, लेकिन २०२१ की तुलना में अधिक है। २०२५ दिसंबर तक के आंकड़ों के अनुसार कुल १ लाख ६२५ लोगों ने शरण का दावा किया, जो २०२४ दिसंबर की तुलना में ४ प्रतिशत कम है परन्तु २०१९ दिसंबर के मुकाबले दोगुना है। पिछले वर्ष कुल आवेदकों में १२ हजार ५७८ छात्र थे।

इसी तरह, १३ हजार ५५७ लोग वर्क वीजा पर ब्रिटेन आए थे और ७ हजार ५२१ लोग वीजिट वीजा पर आए थे। पिछले वर्ष शरण का दावा करने वाले शीर्ष १० देशों में पाकिस्तान, इरिट्रिया, ईरान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, सूडान, भारत, सोमालिया, नाइजीरिया और वियतनाम के नागरिक शामिल हैं। सरकार ने पिछले मार्च २ से नया नियम लागू किया है जिसके तहत शरण का दावा करने वालों को स्थायी निवास स्थान नहीं मिलेगा, केवल अस्थायी निवास दिया जाएगा। नए नियम के अनुसार, सभी वयस्क शरणार्थी आवेदकों की हर ३० महीने में समीक्षा की जाएगी।

गोल्डेनगेट र टाइम्सले दोस्रो क्वालिफायर खेल्ने, हाउण्ड्स बाहिरियो – Online Khabar

गोल्डेनगेट और टाइम्स दूसरे क्वालिफायर में आमने-सामने, हाउण्ड्स बाहर

टाइम्स बास्केटबाल क्लब ने केभीसी हाउण्ड्स को ७६-६८ से हराकर एचजेएनबीएल के दूसरे क्वालिफायर में अपनी जगह पक्की कर ली है। गुरुवार को टाइम्स, गोल्डेनगेट बास्केटबाल क्लब के खिलाफ फाइनल के लिए मुकाबला करेगा। टाइम्स के श्रेयस बहादुर थापा ने २३ अंक बनाए, जबकि मनिष केसी को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया।

२४ चैत, काठमाडौं। हिमालयन जावा नेशनल बास्केटबाल लीग (एचजेएनबीएल) २०२६ के अंतर्गत मंगलवार को हुए एलिमिनेटर मैच में टाइम्स बास्केटबाल क्लब ने केभीसी हाउण्ड्स को ७६-६८ से पराजित करते हुए दूसरे क्वालिफायर के लिए अपना स्थान निश्चित किया। त्रिपुरेश्वर के दशरथ रंगशाला कवरहल में हुए इस मुकाबले में टाइम्स ने हाउण्ड्स को हराया।

अब टाइम्स गुरुवार को दूसरे क्वालिफायर में फाइनल में पहुंचने के लिए गोल्डेनगेट बास्केटबाल क्लब से मुकाबला करेगा। पहले क्वालिफायर में त्रिभुवन आर्मी क्लब से हारने वाला गोल्डेनगेट को फाइनल में पहुंचने का दूसरा मौका मिला है। वहीं, हाउण्ड्स इस लीग से बाहर हो चुका है।

मैच के पहले क्वार्टर में टाइम्स ने २४-१८ की बढ़त लेकर मजबूत शुरुआत की। दूसरे क्वार्टर में हाउण्ड्स ने १८-१२ की बढ़त बनाकर हाफटाइम तक स्कोर ३६-३६ की बराबरी पर पहुंचाया। इसके बाद तीसरे क्वार्टर में टाइम्स ने २१-१२ का स्कोर दर्ज कर चौथे क्वार्टर से पहले ५७-४८ की बढ़त ले ली। चौथे और अंतिम क्वार्टर में हाउण्ड्स ने २०-१९ की बढ़त बनाई, लेकिन टाइम्स को जीत से रोक नहीं पाया। लीग चरण में टाइम्स तीसरे और हाउण्ड्स चौथे स्थान पर थे। दोनों टीमों ने लीग में एक-दूसरे के खिलाफ दो मैच खेले, जिनमें एक-एक जीत दोनों के नाम रही।

प्लास्टिक प्रतिबंध पुनः लागू, पातले झोलों के उत्पादन व बिक्री पूरी तरह से रोकी गई

सरकार ने 40 माइक्रोन से पतले प्लास्टिक झोलों के उत्पादन, आयात, बिक्री, वितरण और उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है और इस प्रतिबंध को कड़ाई से लागू करने का आदेश भी दिया है। वाणिज्य, आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने १७ माघ २०७८ को मन्त्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित ‘प्लास्टिक झोला प्रतिबंध संबंधी कार्ययोजना २०७८’ के कार्यान्वयन को जारी रखने की याद दिलाई है।

यह प्रतिबंध १ मंसिर २०८२ से लागू होगा, जिसका उद्देश्य पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करना है। चूंकि बाजार में प्लास्टिक झोलों के उपयोग में पूर्णता नहीं दिखी है, सरकार ने पुनः यह सूचना जारी की है। मंगलवार को जारी इस सार्वजनिक सूचना में 40 माइक्रोन से पतले प्लास्टिक झोलों के उत्पादन, आयात, बिक्री, वितरण और उपयोग पर कड़ी रोक लगाई गई है।

विभाग ने प्रतिबंधित प्लास्टिक झोलों के उत्पादन, आयात, बिक्री, वितरण तथा दैनिक उपयोग में न लाने का पुनः आग्रह संबंधित पक्षों को किया है। प्रारंभ में प्रतिबंध लागू होने के बावजूद बाजार में इनके उपयोग में पूरी रुकावट नहीं देखने को मिली, इसलिए सरकार को पुनः इस सूचना के माध्यम से सभी हितधारकों को सचेत करना पड़ा है।

१ करोड़ ७० लाख पाठ्यपुस्तक छपाई पूरी

जनक शिक्षा सामग्री केंद्र ने नए शैक्षिक सत्र के लिए १ करोड़ ७० लाख पाठ्यपुस्तकें छपाई पूरी कर ली है। सरकार ने १५ वैशाख से शैक्षिक सत्र शुरू करने का निर्णय लेते हुए उस अवधि तक पुस्तकों को विद्यार्थियों तक वितरित करने की योजना बनाई है। केंद्र के प्रबंधक यदुनाथ पौडेल के अनुसार, प्रदेश कार्यालय से १२६० आधिकारिक विक्रेता संबंधित पालिकाओं में पुस्तक वितरण करेंगे। २४ चैत्र, काठमांडू।

यदुनाथ पौडेल ने जानकारी देते हुए कहा, “विद्यार्थी संख्या के आधार पर प्रादेशिक कार्यालय में पर्याप्त पुस्तकें पहुँच चुकी हैं। १४-१५ लाख की दर से पुस्तकों का प्रदेश-प्रशासित रूप से वितरण किया जा चुका है।” उन्होंने यह भी बताया कि २१ फागुन के चुनाव का पाठ्यपुस्तक छपाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। केंद्र कक्षा १, २, और ४ के अलावा अन्य कक्षाओं की पुस्तकें छापता है वहीं इन कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकें निजी क्षेत्र द्वारा छापी जाती हैं। पौडेल ने कहा, “कक्षा संचालन के समय छात्रों के हाथ में पुस्तकें पहुंच जाएंगी। किसी भी प्रकार की कमी नहीं होगी।”

हर्क साम्पाङको पहलमा पुल बन्न लागेको महाकालीमै हो ?

महाकाली नदी पर पुल निर्माण को लेकर हर्क साम्पाङ की पहल की सच्चाई क्या है?

२४ चैत, काठमाडौं। श्रम संस्कृति पार्टी के अध्यक्ष एवं प्रतिनिधि सभा सदस्य हर्क साम्पाङ द्वारा दार्चुला में झोलुङ्गे तुइन के विस्थापन हेतु दान संकलन करने की घोषणा के बाद कई लोगों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अकेला पुल बनाने पर आपत्ति जताई है। दार्चुला से निर्वाचित प्रतिनिधि सभा सदस्य गणेश ठगुन्ना ने साम्पाङ की पहल को ‘स्टंटबाजी और हवा-हवाई बातें’ बताते हुए आलोचना की है। नेपाल सरकार के पूर्व सचिव भीम उपाध्याय ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय नदियों पर पुल निर्माण करते समय कूटनीति, सीमा सुरक्षा तथा भूगोल जैसे विषयों का ध्यान रखना आवश्यक है। उपाध्याय ने फेसबुक पर लिखा, “ऐसे असंभव कार्यों में भी बिना सोचे-समझे दौड़ना, और अन्य लोग भावुक होकर उनका अनुसरण करते देख रहा हूँ।”

मंगलवार को दार्चुला पहुंचकर साम्पाङ ने झोलुङ्गे पुल कि शिलान्यास की है। दार्चुला के प्रमुख जिल्ला अधिकारी अनिल पौडेल ने बताया, “माननीय ने ब्यास गाउँपालिकाको वडा नम्बर २ स्थित दुम्लिङकाठामा पुल शिलान्यास किया है, जो नेपाल-भारत की सीमा नदी नहीं है।” महाकाली नदी में न होकर घट्टे खोलामा पुल बनने की जानकारी ब्यास गाउँपालिका के अध्यक्ष मंगलसिंह धामी ने दी है। ब्यास गाउँपालिका-१ के वडा अध्यक्ष अशोक ब्यासी ने कहा, “स्थानीय भूगोल को न जानने वाले लोग महाकाली नदी पर पुल बनेगा ऐसा गलत अफवाह फैला रहे हैं।”

दार्चुला के सांसद ठगुन्ना ने कहा कि वहां झोलुङ्गे पुल की आवश्यकता जरूर है, लेकिन साम्पाङ अनावश्यक प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “उनका प्रयास सकारात्मक है। देश-विदेश में रह रहे नेपालीजनों को महाकाली नदी में पुल बनाने तथा तुइन विस्थापित करने का आश्वासन देना केवल स्टंटबाजी है।” श्रम संस्कृति पार्टी के महासचिव आरेन राई ने कहा कि दार्चुला के लोगों की सुविधा के लिए स्वैच्छिक सहयोग से झोलुङ्गे पुल बनाने की योजना है। साम्पाङ ने भी अपने किसी राजनीतिक स्वार्थ की बात से इनकार किया। उन्होंने फेसबुक में लिखा, “दार्चुला के पुल के निर्माण में मेरा कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है।”

लगभग १२० मीटर लंबे पुल के निर्माण में अनुमानतः एक करोड़ रुपैयाँ खर्च आने का अनुमान ब्यास गाउँपालिका के निप्तित प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत कृष्णानन्द बडुले दिया है। बडुले बताया कि साम्पाङ ने पुल निर्माण हेतु पालिका से अनुमति भी प्राप्त कर ली है।

इनड्राइभ ने नेपाल के चालक कर्मचारियों को 22 लाख रुपये मूल्य के ईंधन सहायता देने की घोषणा की

इनड्राइभ ने अपने पार्टनर चालकों को 22 लाख रुपये के बराबर ईंधन सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। कंपनी ने बताया कि यह ईंधन सहायता योजना वैशाख २ (15 अप्रैल) से शुरू होगी। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण चालकों की संचालन लागत में वृद्धि हुई है और इसका उनके आय पर प्रभाव पड़ा है, कंपनी ने यह भी कहा।

कंपनी के बयान में कहा गया है, ‘इनड्राइभ का पियर–टू–पियर मॉडल यात्रियों और चालकों दोनों को किराए का निर्धारण सीधे करने की सुविधा देता है। यह वास्तविक बाजार स्थितियों और संचालन लागत को देखकर उचित किराया निर्धारित करने में मदद करता है।’ इस पहल के माध्यम से कंपनी चालकों के आर्थिक दबाव को कम करने और उनकी आय को स्थिर बनाए रखने का लक्ष्य रखती है।

नेपाल में राइड-हेलिंग सेवा के विस्तार ने कई चालकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। यात्री भी सुविधाजनक और किफायती परिवहन सेवा का लाभ उठा रहे हैं। लेकिन हाल ही में ईंधन कीमतों में निरंतर वृद्धि ने चालकों की संचालन लागत बढ़ा दी है, जिसके कारण उनकी दैनिक आय पर सीधे प्रभाव पड़ा है।

कंपनी ने चालकों के समुदाय की चिंताओं और शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए इस क्षेत्र की संरचनात्मक समस्याओं के समाधान के लिए हो रही पहलों का समर्थन किया है।

अखिल नेपाल टेबल टेनिस संघका उपाध्यक्ष सुमन खड्गीले दिए राजीनामा

अखिल नेपाल टेबल टेनिस संघ के उपाध्यक्ष सुमन खड्गी ने पद से दिया इस्तीफा

अखिल नेपाल टेबल टेनिस संघ के उपाध्यक्ष सुमन खड्गी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने फेसबुक पर एक स्टेटस लिखकर बताया कि सिद्धांतगत कारणों से वे अपने कार्यकर्ता पद से हट रहे हैं। खड्गी ने गुटीय प्रभाव और अनौपचारिक प्रथाओं के बढ़ने का आरोप लगाया है। २४ चैत्र, काठमांडू।

खड्गी ने मंगलवार को फेसबुक पर लिखा कि संगठन में बढ़ती खराब सुशासन की समस्या, पारदर्शिता की कमी और प्रक्रियात्मक कमजोरियों के प्रति वे असंतुष्ट हैं और इसीलिए सिद्धांतगत कारणों से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि संस्थागत निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी और सहभागी होनी चाहिए, लेकिन गुटीय प्रभाव और अनौपचारिक प्रथाओं में वृद्धि होने पर चुप नहीं रह सकता। खड्गी ने यह भी विश्वास जताया कि संगठन व्यक्ति से ऊपर है और इसमें सुधार संभव है।

सरकार ने जोरबिजोर प्रणाली से इंधन संकट समाधान का प्रयास शुरू किया

सरकार ने पश्चिम एशिया में संघर्ष और डॉलर भंडार पर पड़े प्रभाव के कारण इंधन की खपत को नियंत्रित करने के लिए जोरबिजोर प्रणाली और सार्वजनिक छुट्टियाँ देने का निर्णय लिया है। मंत्रिपरिषद ने पेट्रोलियम पदार्थों पर कस्टम ड्यूटी और आधारभूत विकास कर में ५० प्रतिशत छूट देने का भी फैसला किया है। नेपाल यातायात व्यवसायी महासंघ ने जोरबिजोर प्रणाली को पहले चरण में निजी वाहनों पर लागू करने और सार्वजनिक यातायात को प्रभावित न करने का सुझाव दिया है। २४ चैत्र, काठमांडू।

पश्चिम एशिया में बढ़े संघर्ष, बढ़ती आयात मांग और डॉलर भंडार पर पड़े प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इंधन की खपत नियंत्रण के लिए कई रणनीतियाँ अपनाई हैं। इंधन बिक्री और वितरण का एकाधिकार रखने वाली संस्था नेपाल आयल निगम ने पश्चिम एशिया में युद्ध बढ़ने के बाद पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ने पर सरकार के समक्ष उपयुक्त विकल्प प्रस्तुत किए थे। वित्तीय घाटा बढ़ने के कारण निगम ने जनता से औपचारिक रूप से इंधन की कम खपत करने (मितव्ययिता अपनाने) का आग्रह किया है।

जब घाटा वहन करने में असमर्थ स्थिति आ गई तो निगम ने पेट्रोलियम पदार्थों की खपत घटाने के लिए सरकार को विकल्प सुझाए थे। निगम ने सवारी वाहनों पर जोरबिजोर प्रणाली लागू करने, कार्यालयों में सप्ताह में दो दिन सार्वजनिक छुट्टियाँ देने, स्कूल-कॉलेज बंद करने और कोटा प्रणाली (राशन प्रणाली) लागू करने के प्रस्ताव सरकार को दिए हैं। खपत घटाने के अतिरिक्त आर्थिक प्रबंधन के लिए सरकार को करों में भी छूट देने की मांग निगम की ओर से आई है।

मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद निर्णय सार्वजनिक करते हुए मंत्री रावल ने बताया कि इंधन संकट प्रबंधन के लिए सरकार ने विभिन्न विकल्प प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने कहा, ‘पेट्रोलियम पदार्थों की खपत नियंत्रण के लिए हमने कुछ कदम उठा लिए हैं,’ और जोड़ा, ‘इसके बावजूद यदि स्थिति नियंत्रित नहीं होती है तो आवश्यक होने पर सरकार सार्वजनिक यातायात में भी जोरबिजोर प्रणाली लागू करेगी।’

डेप्युटी गवर्नर किरण पण्डित ने पद और गोपनीयता की शपथ ली

नेपाल राष्ट्र बैंक के नवनियुक्त डेप्युटी गवर्नर किरण पण्डित ने २४ चैत्र, काठमांडू में गवर्नर प्रा. डा. विश्वनाथ पौडेल के समक्ष पद और गोपनीयता की शपथ ली। मंत्रिपरिषद की बैठक ने पण्डित को डेप्युटी गवर्नर पद पर नियुक्त किया था। शपथ ग्रहण समारोह में गवर्नर पौडेल ने सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।

पण्डित ने २ माघ २०६२ में सहायक निर्देशक के रूप में सेवा शुरू की थी। उन्होंने २०६८ में उप-निदेशक, २०७४ में निर्देशक और १ फागुन २०८१ में कार्यकारी निर्देशक के पद पर पदोन्नति प्राप्त की। कार्यकारी निर्देशक रहते हुए उन्होंने भुगतान प्रणाली विभाग और विदेशी विनिमय प्रबंधन विभाग का नेतृत्व किया। कुछ समय के लिए उन्होंने राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी संभाली।

प्रदीप अधिकारीको अनुसन्धान ‘राडार’ मा नवीनराज बस्नेत

प्रदीप अधिकारी की जांच में नवीनराज बस्नेत भी ‘राडार’ पर आये


२४ चैत्र, काठमांडू। अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने १७ मंसिर को नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (क्यान) के महानिदेशक प्रदीप अधिकारी को गिरफ्तार किया।

भक्तपुर के नलिञ्चोक में हेलिपोर्ट निर्माण में अनियमितता के आरोप में गिरफ्तारी के बाद अधिकारी को २१ मंसिर को डिल्लीबजार जेल में पुर्पक्ष के लिए भेजा गया। नलिञ्चोक हेलिपोर्ट मामले में गिरफ्तार अधिकारी के खिलाफ पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में भ्रष्टाचार का मामला भी दायर हुआ।

नलिञ्चोक हेलिपोर्ट और पोखरा हवाई अड्डे के भ्रष्टाचार के मामले में जेल में बंद अधिकारी पर अब काठमांडू जिला पुलिस परिसर तीन अलग-अलग मामलों की जांच कर रहा है। जिनमें हत्या का प्रयास, संगठित अपराध और संपत्ति शुद्धिकरण के अपराध शामिल हैं।

जांच के दौरान अधिकारी के संबंध नवीनराज बस्नेत नाम के एक व्यक्ति से होने की जानकारी सामने आई है।

मामले की गति धीमी कर मामले सुलझाने की कोशिश में बस्नेत

अख्तियार ने लंबे समय से अधिकारी से जुड़े नलिञ्चोक हेलिपोर्ट और पोखरा विमानस्थल के भ्रष्टाचार मामलों की जांच कर रहा था। प्रभाव जमाकर जांच रोकने की प्रयास में अधिकारी सफल नहीं हो पाए।

पहले से परिचित नवीनराज बस्नेत के माध्यम से अधिकारी अख्तियार को समझाने की कोशिश करते रहे हैं, जैसा कि जांच में सामने आया है।

बस्नेत वही व्यक्ति हैं जिन्होंने तीन साल पहले भैरहवा स्थित गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टॅक्सीवे और एप्रॉन के ठेके का काम किया था। यह ठेका आशिष–क्षमादेवी–बुद्ध हिमाली जेवी को मिला था। बस्नेत उस वक्त क्षमादेवी में थे।

अधिकारी और बस्नेत के व्हाट्सएप चैट से अख्तियार को समझाने के स्पष्ट संवाद मिले हैं, जहां बस्नेत ने राजेश बज्राचार्य के जरिए अधिकारियों को भ्रष्टाचार के मामलों को सुलझाने का आश्वासन दिया।

पोखरा विमानस्थल भ्रष्टाचार में भी फंसे प्रदीप अधिकारी
प्रदीप अधिकारी

प्रदीप अधिकारी ने २३ नवम्बर २०२५ को रात ११:०७ बजे राजेश से बातचीत करते हुए नवीन बस्नेत को संदेश भेजा, जिसमें लिखा था कि बस्नेत ने ११:१० पर प्रतिक्रिया दी, और कहा कि वह इंतजार कर रहे हैं।

उन्होंने आगे संदेश भेजा कि वे राजेश से भी मिलेंगे। अधिकारी ने २२ नवम्बर को पूछा कि कोई प्रगति हुई क्या, तो बस्नेत ने जवाब दिया कि ‘बा’ को ही करना पड़ा।

१७ नवम्बर को बस्नेत ने लिखा कि इतना दबाव क्यों, लगाम लगाओ, निश्चिंत रहो। बस्नेत ने अधिकारी को आश्वासन दिया कि अख्तियार में चल रहे मामले रुकेगा।

प्रदीप ने नवीन को ४ नवम्बर को कई संदेश भेजे, जिसमें उन्होंने बताया कि अख्तियार से यह पत्र आया है और बातचीत के दौरान १ मिनट ३८ सेकंड तक ऑडियो कॉलबातचीत हुई।

नवीनराज बस्नेत

नवीन ने जवाब में पूछा कि कौन सा पत्र आया। पांच दिन बाद २५ नवम्बर की रात ११:१० बजे बस्नेत ने अधिकारी को संदेश भेजा “धीमी गति से भी करूँगा, चिंता मत करो।”

अधिकारी ने इसका जवाब ‘हस’ देकर दिया। मामला सुलझाने की बात बस्नेत और राजेश बज्राचार्य के घर पर हुई, जो भक्तपुर सूर्यविनायक–२ में पड़ोसी हैं।

हालांकि जांच में अभी तक यह साबित नहीं हुआ कि बस्नेत ने ‘बा’ तक पहुंच बनाई। एक जांच अधिकारी ने कहा कि बस्नेत ने उच्च पदस्थ लोगों का नाम लेकर अधिकारी को भरोसा दिलाया, लेकिन जांच में यह साबित नहीं हुआ कि उसने वहां तक पहुंच बनाई हो।

बस्नेत से दिए गए व्हाट्सएप संवाद को लेकर पूछताछ में उन्होंने कई बातें अस्वीकार कीं। बस्नेत ने कहा, ‘मैं जो करता हूं वह साफ-सुथरा है, मेरे काम अभी भी भैरहवा में चल रहे हैं, जैसा कि कहा गया है वैसा नहीं है।’

उग्रवादी संगठन बनाकर हत्या की धमकी

अख्तियार को प्रभावित कर जांच रोकने के प्रयास विफल होने पर नवीनराज बस्नेत की विभिन्न गतिविधियां सामने आई हैं, जिनमें उग्रवादी संगठन बनाकर हत्या की धमकी देना, अख्तियार प्रमुख प्रेम राई से इस्तीफा लेना और तांत्रिक उपाय करना शामिल हैं।

उन्होंने उग्रवादी संगठन का लेटर पैड भी बनाया, जो बस्नेत के फोन नंबर ९७०७७७७… से व्हाट्सएप द्वारा भेजा गया था, डिजिटल फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट में यह जानकारी मिली।

लेटर ऑरिजिनल पीडीएफ फाइल में था, बाद में जेपीजी इमेज में बदला गया। पुलिस के बयान में बस्नेत ने कहा कि उन्हें उस लेटर पैड के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

लेटर हेड के ज़रिए प्रकाश पाठक ने अख्तियार प्रमुख समेत १० लोगों को जान से मारने की धमकी दी थी। अगर तत्काल इस्तीफा नहीं दिया गया तो वीडियो के जरिए भी धमकी दी गई।

धमकी देने के लिए पाठक को २ करोड़ की सुपारी देने की पुष्टि हुई, पहले १० करोड़ में सौदा हुआ था, बाद में २ करोड़ पर बातचीत पूरी हुई।

पाठक और अधिकारी पूर्व परिचित हैं। पाठक फिलिपींस में था और अधिकारी ने पैसों के लिए एक चीनी नागरिक का इस्तेमाल किया, जिसने हुंडी से रकम भेजी। पाठक ने १ करोड़ ६० लाख रुपये में फिलिपींस में एक अपार्टमेंट भी खरीदा।

पैसे के लालच में फंसे पाठक ने कहा कि उन्हें बस्नेत और अधिकारी ने फंसाया। पाठक को गिरफ्तार करने के लिए इंटरपोल रेड नोटिस जारी किया गया था और उन्हें पकड़ कर २८ माघ को नेपाल लाया गया। जांच जारी है।

ताजा जांच में पुलिस ने बस्नेत का बयान भी लिया। उन्होंने कहा कि उनका प्रकाश पाठक से कोई परिचय नहीं है।

प्रदीप अधिकारी से उनकी जान पहचान है और व्हाट्सएप पर बात होती है, लेकिन आरोपों और चैट के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है, बस्नेत का दावा है।

तांत्रिक तरीकों का उपयोग

तरीके विफल होने पर अधिकारी ने तांत्रिक उपाय अपनाए। भारत के असम के गुवाहाटी में कामाख्या देवी मंदिर के ४३ वर्षीय तांत्रिक बाबा सरया किन्नेरा (जय जगदम्बे) को इस काम के लिए लाया गया।

उन्होंने अख्तियार प्रमुख राई की तस्वीर भेजकर तांत्रिक क्रियाएं करवाईं। तांत्रिक ने राई की प्रतिमा बनाकर मंत्र-मंत्रणा करते हुए अंगुलियों से घोंपकर जलाने का वीडियो अधिकारी को भेजा।

बस्नेत ने पुलिस में कहा कि अधिकारी को नुकसान न पहुंचे इसलिए तांत्रिक बाबा से पूजा-पाठ करवाई गई। उन्होंने बताया, ‘अख्तियार की जांच की सूचना मुझे अधिकारी से मिली, इसलिए मैंने गुरु को फोन कर पूजा कराने को कहा।’

जब उनसे संपर्क किया गया, तो बस्नेत ने तांत्रिक बाबा को अधिकारी से परिचित कराने से इंकार किया। उन्होंने कहा, ‘मैंने तांत्रिक बाबा को अधिकारी से नहीं मिलवाया।’

अख्तियार प्रमुख राई को नुकसान पहुँचाने के लिए नेपाल से जय जगदम्बे को लाया गया था, और विमानस्थल पर अधिकारी एवं बस्नेत ने उनका स्वागत किया था।

७ महीनों में बस्नेत ने बदले ६ मोबाइल फोन

अब बस्नेत के खिलाफ पुलिस की जांच तेज हो गई है। उनकी संदिग्ध गतिविधियों पर तकनीकी जांच में मोबाइल फोन के उपयोग के तथ्य सामने आए हैं।

७ महीनों में बस्नेत ने ६ मोबाइल फोन बदले। २० जून २०२५ को उन्होंने ए३२९७ मॉडल का आईफोन १६ प्रो मैक्स इस्तेमाल किया, फिर ३० सितम्बर को ए३५२६ मॉडल का आईफोन १७ प्रो मैक्स। १७ नवम्बर २०२५ को भी यही फोन इस्तेमाल हुआ।

२४ जनवरी २०२६ को ए२८९४ मॉडल के आईफोन १४ प्रो मैक्स पर और २५ जनवरी को फिर ए३५२६ के आईफोन १७ प्रो मैक्स पर स्विच किया। ५ दिन बाद, ३० जनवरी को ए३५२५ के आईफोन १७ प्रो मैक्स इस्तेमाल हुआ।

एक जांच अधिकारी ने कहा, ‘फोन बार-बार बदलना गंभीर आरोपों को पुष्ट करने के सबूत हैं। पांच दिनों में फोन बदलना सामान्य व्यवहार नहीं, बल्कि संदिग्ध है।’

इन सब तथ्यों के कारण बस्नेत भी जांच के घेरे में आ चुके हैं। उनका बयान पुलिस ने दर्ज कर लिया है।

सरकार की ईंधन कर कटौती: उपभोक्ताओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले सीमा शुल्क और अवसंरचना विकास कर में 50 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय लिया है।
  • पेट्रोल पर 17 रुपये और डीजल पर 11 रुपये कर भार कम होगा, लेकिन निगम का घाटा अभी भी बना रहेगा।
  • सरकार की कर छूट नेपाल आयल निगम को 1 अरब 49 करोड़ रुपये की राहत देगी, लेकिन कीमतों में तत्काल समायोजन संभव नहीं है।

24 चैत्र, काठमांडू। सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के दामों में वृद्धि के विपरीत जनता पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए सीमा शुल्क और अवसंरचना विकास कर में 50 प्रतिशत तक छूट देने का निर्णय किया है।

मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक के निर्णय की घोषणा करते हुए संघीय मामलों और सामान्य प्रशासन मंत्री प्रतिभा रावल ने ईंधन क्षेत्र में बढ़ते घाटे और संकट प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा कर में छूट से लेकर खपत नियंत्रण तक महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की जानकारी दी।

मंत्री रावल ने बताया कि हाल के समय में ईंधन आयात के दौरान सरकार को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। वर्तमान मूल्य संरचना में ईंधन की बिक्री पर नेपाल आयल निगम को 15 दिनों में 11 अरब 72 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।

‘यह मामूली राशि नहीं है,’ मंत्री रावल ने कहा, ‘इसलिए समस्या केवल मूल्य की नहीं, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला, कर, लागत, खपत और प्रबंधन की संयुक्त समस्या है, इसलिए सरकार ने इस पर कुछ निर्णय लेकर आगे बढ़ा है।’

पिछले 15 दिनों में न्यूनतम खपत में केवल 34 हजार किलोलीटर पेट्रोल, 83 हजार किलोलीटर डीजल, 865 किलोलीटर मट्टितेल, 2 हजार 615 किलोलीटर आंतरिक हवाई ईंधन, 5 हजार 892 किलोलीटर बाहरी हवाई ईंधन तथा 15 लाख 22 हजार 444 सिलेंडर एलपी गैस की बिक्री हुई है, उन्होंने आंकड़ों के साथ जानकारी दी।

क्या उपभोक्ता सस्ते ईंधन पाएंगे?

सरकार द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों के आयात पर लगाए जाने वाले करों में 50 प्रतिशत कटौती के निर्णय के बाद यह चर्चा बढ़ गई है कि किस ईंधन पर कितनी कर कटौती होगी।

मंत्रिपरिषद के निर्णय के साथ ही पेट्रोल और डीजल पर लगने वाला प्रति लीटर 10 रुपये का पूर्वाधार विकास कर आधा होकर 5 रुपये रह जाएगा। इससे प्रति लीटर कर बोझ 5 रुपये कम होगा।

इसके अलावा सरकार ने सीमा शुल्क पर भी आधी छूट दी है। वर्तमान प्रणाली के तहत पेट्रोल पर प्रति लीटर 25 रुपये और डीजल पर 12 रुपये सीमा शुल्क लगता है।

खाना पकाने वाली एलपी गैस के आयात पर लगने वाला कर भी 90 रुपये प्रति सिलेंडर से घटाकर 45 रुपये कर दिया जाएगा।

किस ईंधन पर कितनी कर कटौती होगी?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद पेट्रोल पर कुल कर में 17 रुपये की कटौती होगी (सीमा शुल्क 12 और पूर्वाधार कर 5 रुपये)।

डीजल पर सीमा शुल्क 6 रुपये और पूर्वाधार कर 5 रुपये की कटौती के साथ कुल 11 रुपये कर भार कम होगा। गैस पर 90 रुपये का आयात शुल्क घटकर 45 रुपये होगा।

हालांकि, ये निर्णय तात्कालिक रूप से लागू नहीं हुए हैं। निगम के प्रवक्ता मनोज ठाकुर ने कहा, ‘मंत्रिपरिषद का निर्णय राजपत्र में प्रकाशित होने और निर्देश मिलने के बाद ही कर कटौती का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाएगा।’

‘हमने सरकार के कर छूट के फैसले के बारे में समाचारों से सुना है, लेकिन किस वस्तु पर कितनी छूट होगी और कब लागू होगी, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी नहीं मिली है,’ उन्होंने जोड़ा।

बाजार मूल्यों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

कर दर में भारी कटौती के बावजूद उपभोक्ता पेट्रोल की कीमत में तुरंत कमी की संभावना कम है। निगम के अनुसार, विश्व बाजार में मूल्य वृद्धि और अन्य कारणों से निगम को पेट्रोल पर प्रति लीटर 34 रुपये और डीजल पर 120 रुपये का घाटा हो रहा है।

सरकार की कर छूट के बाद भी निगम को पेट्रोल पर प्रति लीटर 17 रुपये और डीजल पर 119 रुपये का घाटा होगा। गैस पर प्रति सिलेंडर 416 रुपये का नुकसान है, इसलिए केवल कर कटौती से निगम को लाभ नहीं होगा।

घटौती से निगम को कुछ राहत तो मिलेगी लेकिन मूल्य समायोजन करना अभी भी कठिन है, निगम के एक अधिकारी ने बताया।

‘घाटे की गहराई बहुत अधिक है, इसलिए कर कटौती के बाद तत्काल कीमत कम करना संभव नहीं है,’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन निगम की संचालक समिति या प्रधानमंत्री और आपूर्ति सचिव के आदेश से ही ईंधन सस्ते में उपलब्ध होगा।’

घाटे में पड़े निगम को कितनी राहत मिलेगी?

सरकार के सीमा शुल्क और पूर्वाधार कर में 50 प्रतिशत की छूट से निगम को लगभग 1 अरब 49 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी। लेकिन निगम का कुल घाटा 10 अरब 23 करोड़ से अधिक बना रहेगा।

निगम ने भारी घाटा होने के बावजूद पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सुगम बनाए रखी है। प्रवक्ता ठाकुर ने आपूर्ति में कोई समस्या नहीं होने की बात कही।

नेपाल आयल निगम भवन

‘हम नियमित मात्रा में ईंधन निरंतर प्राप्त कर रहे हैं,’ उन्होंने कहा, ‘घाटा होने के बावजूद आपूर्ति को सुर-linked गति पर बनाए रखने में सफल रहे हैं।’

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में हुई वृद्धि से उत्पन्न संकट को कम करने के लिए सरकार कर समायोजन कर आपूर्ति में सहजता लाने का प्रयास कर रही है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए खपत कम करना और मितव्ययिता अपनाना सर्वोत्तम विकल्प है, निगम का कहना है।

कर कटौती स्वागत योग्य, उपभोक्ताओं को शीघ्र लाभ देना चाहिए

उपभोक्ता अधिकारकर्मी माधव तिमलसिना ने पेट्रोलियम उत्पादों पर कर कटौती के निर्णय का स्वागत करते हुए सरकार से इस लाभ को तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि निगम को घाटे को बहाना बनाकर कीमतों में देरी नहीं करनी चाहिए और मंत्रिपरिषद के निर्णय को तुरंत लागू किया जाना चाहिए।

‘यह उपभोक्ताओं की लंबी मांग पूरी करने जैसा कदम है, क्योंकि करों की अधिकता के कारण दाम असामान्य रूप से बढ़ गए थे,’ तिमलसिना ने कहा, ‘सरकार के फैसले के बाद निगम को तुरंत डीजल और पेट्रोल की कीमतें घटाकर उपभोक्ताओं को राहत देना चाहिए।’

‘अगर निगम घाटे का बहाना बनाकर कीमत कम करने में देरी करता है, तब भी उसे सरकारी निर्णय मानना पड़ेगा,’ उन्होंने जोड़ा।

‘मंत्रिपरिषद का फैसला अंतिम होता है और इसे अगले दिन ही राजपत्र में प्रकाशित कर लागू करना आवश्यक है,’ तिमलसिना ने निष्कर्ष दिया।

सरकार की कर छूट मूल्य वृद्धि रोकने में मदद करेगी

पूर्व वाणिज्य सचिव पुरुषोत्तम ओझा ने सरकार की कर कटौती को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि भले ही कीमतें तुरंत घटने की संभावना कम हो, यह कदम मूल्य स्थिरीकरण और निगम को राहत देने में सहायक होगा।

नेपाल आयल निगम डिपो

उनके विश्लेषण के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, और निगम घाटे में ईंधन बेच रहा है। इसके बावजूद सरकार द्वारा दी गई कर छूट मूल्य वृद्धि को रोकने और निगम को राहत देने में मदद करेगी।

‘निगम अभी भी भारी घाटे में है, इसलिए कर छूट तुरंत कीमत घटाने के लिए नहीं, बल्कि घाटा कम करने में सहायक होगी,’ ओझा ने कहा, ‘इसलिए जल्द कीमत कम होने की उम्मीद उचित नहीं है, परंतु यह मूल्य वृद्धि को स्थिर रखने में मदद करेगा।’

सरकार का यह कदम उपभोक्ता पर अतिरिक्त बोझ न डालने के उद्देश्य से एक सकारात्मक प्रयास है, इसलिए इसे सकारात्मक नजरिये से देखना चाहिए, उनका सुझाव है।

वर्तमान में उपभोक्ता कितना कर देते हैं?

वर्तमान में उपभोक्ता प्रत्येक लीटर पेट्रोल खरीदने पर लगभग 67 रुपये (66.98 रुपये) विभिन्न करों के रूप में देते हैं, जिसमें सीमा शुल्क, सड़क रखरखाव, प्रदूषण नियंत्रण, अवसंरचना विकास और मूल्य अभिवृद्धि कर (VAT) प्रमुख हैं।

इसी प्रकार, डीजल पर प्रति लीटर 49.28 रुपये का कर लगता है।

सरकार ने मूल्य समायोजन आवश्यक होने की बात स्पष्ट की है। मंत्री रावल ने कहा, ‘मूल्य समायोजन करना आवश्यक है, सरकार इसे छिपाएगी नहीं।’

ईंधन संकट की इस स्थिति में सरकार ने जनता का साथ मांगा है, मंत्री रावल ने कहा।

‘नेपाल सरकार सभी को बताना चाहती है कि सरकार पारदर्शी है, सच्चाई नहीं छुपाती, लेकिन जनता की पीड़ा को समझती है,’ उन्होंने कहा, ‘आइए ऊर्जा बचाएं, संयम करें और एक साथ खड़े हों।’

पहिरा गिरने से बेनिघाट-आरुघाट-लार्के सड़क बंद

धार्चे गाउँपालिका–३ दोभान के निकट कालाभिर में चट्टानों सहित बड़ा पहिरा गिरने के कारण बेनिघाट-आरुघाट-लार्के सड़क मंगलवार सुबह से बंद है। नेपाली सेना ने स्थल पर अध्ययन के लिए सड़क निर्माण कार्यदल के प्राविधिकों को भेजा है और उनकी रिपोर्ट के बाद सड़क की स्थिति का निर्धारण किया जाएगा। सड़क बंद होने से वाहन आवागमन व सामान ढुलाई में कठिनाई हुई है, जबकि पालिका ने पदमार्ग का उपयोग करने का आग्रह किया है। २४ चैत्र, गोरखा।

चट्टानों सहित पहिरा गिरने से बेनिघाट-आरुघाट-लार्के सड़क अवरुद्ध हो गई है। धार्चे गाउँपालिका–३ दोभान के पास कालाभिर में ऊपर से भारी चट्टान समेत सूखा पहिरा गिरने के कारण मंगलवार सुबह से सड़क बाधित है। पालिका अध्यक्ष लक्ष्मण गुरुङ ने बताया, ‘कल भी ऊपर से पत्थर गिरने के कारण सड़क कुछ समय के लिए बंद हुई थी, जिसे डोजर लगाकर हटाया गया। लेकिन आज सुबह सड़क पूरी तरह टूटने की स्थिति में ऊपर से बड़ा चट्टान सहित पहिरा गिरा।’

नेपाली सेना ने सड़क निर्माण कार्यदल के प्राविधिकों को मामले की स्थल जांच के लिए भेजा है। रुद्रध्वज गण के गणपति विरोध रिजाल ने कहा, ‘हमने निर्माण कार्यदल के प्राविधिक भेजे हैं, वे पहुंचकर रिपोर्ट देंगे, उसके बाद सड़क की स्थिति तय होगी।’ सड़क बंद होने के कारण इलाके में वाहन यातायात पूरी तरह ठप है। स्थानीय लोगों ने बताया कि सामान ढुलाई में भी दिक्कतें आई हैं।

मनास्लु क्षेत्र की ओर जाने वाले पर्यटकों का यह मार्ग काफी व्यस्त है। इस सड़क का निर्माण कार्य पिछले सात वर्षों से जारी है। बेनिघाट से चीन की सीमा लार्के भन्ज्याङ तक कुल १५४ किलोमीटर की दूरी में से ९७ किलोमीटर सड़क खुल चुकी है और वाहन यातायात चालू है। हावाडाँडा से लेकर चुमनुव्री गाउँपालिका के पाङसिङ तक भी अब सड़कों पर वाहन चलने लगे हैं।

इस सड़क का निर्माण कार्य सन् १९९५ (२०५२ साल) में शुरू हुआ था, तथा आर्थिक वर्ष २०६३-६४ में बेनिघाट-आरुघाट-लार्के भञ्ज्याङ सड़क नाम दिया गया और सड़क विभाग को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन, हावाडाँडा से लगभग १ किलोमीटर क्षेत्र में कठोर चट्टानी भिर के होने के कारण करीब पांच वर्षों तक ट्रैक खोलने का काम आगे नहीं बढ़ पाया था।