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लेखक: space4knews

क्यान्सरको जीवनरक्षक औषधि हाहाकार, बिरामीको अवस्था गम्भीर

कैंसर के जीवनरक्षक दवाओं की कमी से मरीजों की स्थिति गंभीर होती जा रही है

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • देशभर के अस्पतालों में कैंसर उपचार के लिए अनिवार्य दवाएं कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन की कमी के कारण उपचार सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
  • सरकारी मूल्य नियंत्रण नीति और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण दवा आयात में समस्या आ रही है, ऐसा दवा आयातकों ने बताया है।
  • स्वास्थ्य मंत्रालय में दवा की कमी दूर करने के लिए चर्चा हो रही है और मूल्य समायोजन के लिए प्रयास जारी हैं, विभाग ने जानकारी दी है।

८ वैशाख, काठमांडू। कैंसर उपचार में आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं की कमी के कारण देशभर के अस्पतालों में उपचार सेवा प्रभावित हो रही है। किमीथेरापी में उपयोग होने वाली ‘कार्बोप्लाटिन’ और ‘सिस्प्लाटिन’ दवाओं की कमी से मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, चिकित्सकों ने बताया है।

वीर अस्पताल की कैंसर विशेषज्ञ डॉ. संध्या चापागाईं ने बताया कि इन दवाओं की कमी ने कैंसर रोगियों के जीवन को संकट में डाल दिया है।

सिस्प्लाटिन और कार्बोप्लाटिन अधिकांश कैंसर प्रकारों में अनिवार्य किमीथेरापी दवाएं हैं। ये दवाएं नेपाल में निर्मित नहीं होतीं, इसलिए पूरी तरह विदेशी आयात पर निर्भर हैं।

डॉ. चापागाईं ने कहा, ‘ये दवाएं सभी प्रकार के कैंसर उपचार के लिए आवश्यक हैं और इनका कोई विकल्प नहीं है। कैंसर ठीक करने वाले उपचार में ये दवाएं जीवनरक्षक हैं।’

वीर अस्पताल में रोजाना लगभग ४५ मरीजों को ये दवाएं चाहिए, लेकिन नियमित उपलब्ध न होने की वजह से कैंसर रोग तेजी से फैलने का खतरा बढ़ा है, चिकित्सकों ने बताया।

डॉ. चापागाईं कहती हैं, ‘यह समस्या केवल वीर अस्पताल की नहीं है, देश के सभी क्षेत्रों के कैंसर मरीज प्रभावित हो रहे हैं। समय पर किमीथेरापी न मिलने से कैंसर तेजी से फैलता है।’

पाटन अस्पताल के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अरुण शाही ने भी कहा कि किमीथेरापी में अत्यधिक प्रयोग होने वाली इन दवाओं की आपूर्ति में समस्या के कारण मरीजों की स्थिति जटिल होती जा रही है।

डॉ. शाही कहते हैं, ‘लगभग ६० प्रतिशत से अधिक कैंसर मरीजों को ये दवाएं जरूरी होती हैं। अस्पताल में दो हफ्तों से कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन की कमी बनी हुई है।’

प्लैटिनम समूह की ये दवाएं फेफड़े, अंडाशय, पेट, स्तन, बड़ी और छोटी आंत सहित विभिन्न कैंसर उपचारों में अत्यंत आवश्यक हैं, उन्होंने बताया।

चिकित्सकों का कहना है कि थोड़ी अवधि के लिए भी ये दवाएं न मिलने पर रोग बढ़ जाता है और जीवन को खतरा होता है। कमी के कारण उन्हें वैकल्पिक दवाएं उपयोग करने पर मजबूर होना पड़ा है, डॉ. शाही ने बताया।

‘कैंसर के प्रकार के अनुसार अन्य दवाओं के संयोजन से उपचार कर रहे हैं, लेकिन इसकी प्रभावशीलता सुनिश्चित नहीं है,’ वे कहते हैं, ‘यह उस स्थिति में है कि कुछ न करने से कुछ करना बेहतर है।’

वीर अस्पताल की कैंसर विशेषज्ञ डॉ. रामिला शिल्पकार डंगोल ने सोशल मीडिया के माध्यम से चेतावनी दी है, ‘नेपाल में कैंसर की दवाएं कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन की कमी ने गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट उत्पन्न कर दिया है। कुछ मामलों में ठीक हो सकने वाले मरीज उपचार से वंचित हो रहे हैं। यह केवल आपूर्ति समस्या नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु का प्रश्न है।’

भक्तपुर कैंसर अस्पताल के निदेशक डॉ. उज्ज्वल चालिसे के अनुसार ये दवाएं दशक दशकों से प्रभावशाली और सस्ती दवाओं में शामिल हैं।

‘कैंसर किमीथेरापी केवल एक दवा से संभव नहीं है, इसे दो-तीन प्रकार की दवाओं के मिश्रण से देना पड़ता है। प्लैटिनम समूह की दवाएं कई उपचारों में अनिवार्य हैं। बिना इनके कैंसर उपचार अधूरा होता है,’ उन्होंने कहा।

चालिसे के अनुसार सिस्प्लाटिन और कार्बोप्लाटिन लगभग पांच दशक से उपयोग हो रही पुरानी, लेकिन अत्यंत प्रभावी दवाएं हैं, जो पुराने तकनीक आधारित होने के कारण तुलनात्मक रूप से सस्ती भी हैं।

भक्तपुर कैंसर अस्पताल में रोजाना ८० मरीज किमीथेरापी सेवा लेने आते हैं, जिनमें से ५० को प्लैटिनम समूह की दवाएं चाहिए होती हैं।

उनके अनुसार, दवा की कमी का असर सीधे उपचार पर पड़ेगा। ‘यदि ये दवाएं न मिलीं तो उपचार रुक जाएगा और काला बाजार, अवैध आयात और धोखाधड़ी के खतरे बढ़ेंगे। मरीज का परिवार हर हाल में दवाएं खोजने को मजबूर होगा।’

चिकित्सकों के मुताबिक इन दवाओं के मूल्य अन्य कैंसर दवाओं की तुलना में काफी कम हैं। ‘सिस्प्लाटिन की मात्रा के अनुसार कीमत कुछ सौ से डेढ़ हजार रुपये तक होती है जबकि कार्बोप्लाटिन दो से चार हजार रुपये तक मिलती है,’ डॉ. चालिसे ने बताया।

‘सस्ती होने के बावजूद इसका प्रभावी होना इसे खास बनाता है, इसलिए दवा की कमी कैंसर उपचार प्रणाली को गंभीर रुप से प्रभावित कर सकती है।’

आयात क्यों रुका?

दवा आयातकों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र के तनाव एवं कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण उत्पादन लागत बढ़ गई है, जिससे आपूर्ति में समस्या आई है। प्लैटिनम की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बाद कंपनियां उत्पादन लागत में वृद्धि का हवाला देते हुए मूल्य समायोजन चाहती हैं। भारत में भी कुछ उत्पादकों ने कच्चे माल महंगे होने के कारण दवा उत्पादन छोड़ दिया है।

इसका प्रभाव नेपाल पर भी पड़ा है। लेकिन नेपाल के आयातकों का दावा है कि २०७२ साल से सरकारी मूल्य नियंत्रण सूची में दवाएं होने के कारण मूल्य बढ़ाने की अनुमति नहीं मिली और इसलिए आयात और आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

दवा आयात संघ के अध्यक्ष पवन आचार्य ने बताया कि कीमत नियंत्रण नीति प्रमुख कारण है।

संघ के अध्यक्ष पवन आचार्य ने स्वीकार किया कि कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन समेत प्लैटिनम समूह की दवा आयात में समस्या है क्योंकि २०७२ से मूल्य समायोजन नहीं हुआ।

उन्होंने बताया कि सरकार ने २०७२ में ९६ प्रकार की दवाओं का मूल्य समायोजन किया था, लेकिन उसके बाद ११ वर्षों में कोई पुन: समायोजन नहीं हुआ जिससे आयातक दबाव में हैं।

‘प्लैटिनम समूह की दवाएं सिल्वर समेत कच्चे पदार्थों से बनती हैं। इनकी अंतरराष्ट्रीय कीमतें काफी बढ़ गई हैं,’ आचार्य ने कहा, ‘२०७२ की तुलना में सिल्वर की कीमत चार गुना बढ़ चुकी है।’

नेपाल दवाओं के मूल्य निर्धारण में भारत के मूल्य को आधार मानता है और भारत हर वर्ष मूल्य समायोजन करता है जबकि नेपाल इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में असफल रहा है, उन्होंने याद दिलाया।

‘भारत में बनने वाली दवाओं के मूल्य से कम पर नेपाल में बेचना पड़ता है। भारत हर साल मूल्य बढ़ाता है, लेकिन नेपाल सरकार ११ साल से यह प्रक्रिया जारी नहीं रख सकी।’

औषधि व्यवस्था विभाग

आचार्य ने आरोप लगाया कि मूल्य समायोजन को लेकर आलोचना का डर सरकारी संस्थानों को निर्णय लेने से रोकता है।

‘दवा उपलब्ध कराने की बजाय मूल्य बढ़ने पर आलोचना हो सकती है, यह सोचकर वे निर्णय से बचते हैं, जिस कारण समस्या और गहरी हो गई है।’

देशभर दवा की कमी बढ़ने के कारण शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्रालय में इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है।

औषधि व्यवस्था विभाग के सूचना अधिकारी किरणसुन्दर बज्राचार्य ने बताया कि विभाग में दवा अभाव की शिकायतें आ रही हैं और समाधान के लिए प्रयास जारी हैं।

बज्राचार्य के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दवाओं की कीमत बढ़ने के कारण नेपाल में निर्धारित कीमत समायोजन नहीं होने तक आयातक दवाएं लाने में असमर्थ हैं।

‘नेपाल में प्रकाशित मूल्य पुराने हैं, लेकिन विश्व बाजार में कीमतें बढ़ चुकी हैं,’ बज्राचार्य ने कहा, ‘इसलिए आयातक दवाएं लाने में असमर्थ हैं। विभाग स्वास्थ्य मंत्रालय को मूल्य समायोजन के लिए पत्राचार कर रहा है।’

राहदानीको लागि ३० मिनेटमै आवेदन दिन सकिने, भोलिपल्टै राहदानी उपलब्ध गराइने

परराष्ट्र मन्त्रालयले राहदानी आवेदन प्रक्रिया ३० मिनेटभित्रै पूरा गर्न सकिने व्यवस्था गरेको दाबी गरेको छ। राहदानी विभागले आवेदन दिएको भोलिपल्टै राहदानी जारी गर्ने योजना ल्याएको छ। विभागले नयाँ ‘मोफा मित्र’ एप्लिकेशन जेठ १२ गते सार्वजनिक गर्ने तयारी गरेको छ। ८ जेठ, काठमाडौं।

आज पत्रकार सम्मेलनमा मन्त्रालयका प्रवक्ता लोकबहादुर पौडेल क्षेत्रीले ३० मिनेटभित्र आवेदन दिन सकिने व्यवस्था मिलाइएको जानकारी दिए। हाल राहदानी सेवा सरल रहेको उल्लेख गर्दै मन्त्रालयले सेवाग्राहीहरूलाई तोकिएको समयमा आवश्यक कागजातसहित उपस्थित हुन आग्रह गरेको छ। कागजातसहित उपस्थित भएपछि ३० मिनेटभित्र आवेदन दिने सेवा प्रवक्ता पौडेलले बताए।

जिल्ला तथा इलाका प्रशासन कार्यालय र विदेशस्थित नेपाली नियोगमा आवेदन दिएको ७ देखि १२ दिनभित्र राहदानी छपाइ गरी पठाउने व्यवस्था मिलाइएको उनले बताए। निजी ठेगानामा राहदानी पुर्‍याउन हुलाक सेवा विभागसँग समन्वय भइरहेको पनि उनले जनाए। राहदानी विभागमा नयाँ प्रणाली लागू गर्ने कार्य अन्तिम चरणमा पुगेको जनाइएको छ।

वर्तमान आपूर्तिकर्ताबाट प्राप्त २ लाख ७ हजार ५ सय ९३ थान राहदानीमध्ये २ लाख ७ सय ३७ थान साधारण राहदानी मौज्दात रहेको मन्त्रालयले जनाएको छ। आगामी पुस मसान्तसम्म राहदानी आवश्यक पर्ने सेवाग्राहीलाई सकभर जेठ मसान्तभित्रै आवेदन दिने परराष्ट्र मन्त्रालयले अनुरोध गरेको छ। नयाँ आपूर्तिकर्ताले २ लाख ५० हजार थान राहदानी उपलब्ध गराएको र वैयक्तिकरण परीक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न गरिएको पनि मन्त्रालयले जानकारी दिएको छ।

रास्वपा महामन्त्री बालेन्द्र शाहको समर्थनमा: केवल संसद्‌मा बोलेर नतिजा नआउने

८ जेठ, पर्वत । राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टीका महामन्त्री कविन्द्र बुर्लाकोटीले आफ्नो पार्टीले जनतालाई निराश नबनाउने दाबी गरेका छन्। पर्वत सदरमुकाम कुश्माबजारमा शुक्रबार सम्पन्न कार्यकर्ता भेटघाट कार्यक्रममा उनले यस्तै बताएका छन्। महामन्त्री बुर्लाकोटीले भने कि नागरिकले चाहेअनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा सुशासनका क्षेत्रमा सरकारले प्रभावकारी काम गरिरहेको छ। उनले देशभर रहेका विकृति र विसंगतिका जालहरू भत्काउन नेपाली जनताले रास्वपालाई करिब दुई तिहाइ मत दिएको उल्लेख गरे। विपक्षी दलहरूले जतिसुकै विरोध गरे पनि ती जालहरू भत्काउने काम उनीहरूले गर्ने बताए।

अर्को प्रसङ्गमा उनले जनताको निराशालाई आशामा परिवर्तन गर्न काम गरेर देखाउनुपर्ने र त्यसैले संसद्मा प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाह समयमै उपस्थित नभएको बताए। ‘काम गर्ने बेला फोन उठाएर र संसद्मा मात्र बोल्नेले नतिजा निकाल्न सक्दैन,’ उनले भने, ‘काम गरेर देखाउनुपर्छ। त्यसैले कम्तीमा छ महिना पर्खनुहोस्।’ –रासस

बाराका दुई विद्यालयमा मेकर स्पेस र टेक ल्याब स्थापना

बाराका के दो विद्यालयों में मेकर स्पेस और टेक लैब का उद्घाटन

८ जेठ, काठमाडौं । बाराका दो विद्यालयों में मेकर स्पेस और टेक लैब का उद्घाटन किया गया है। महागढीमाई स्थित भोला माध्यमिक विद्यालय और जनसमुदायिक माध्यमिक विद्यालय में स्थापित मेकर स्पेस और टेक लैब को एक इंटरैक्टिव सीखने के केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, कला और गणित से जुड़े विषयों को व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से सीखने का अवसर प्रदान करने के लिए कोरिया अंतर्राष्ट्रीय सहयोग नियोग (कोइका) के सहयोग से संचालित इन्स्पायर परियोजना के तहत सेव द चिल्ड्रेन ने यह लैब स्थापित की है।
‘यह स्थान विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, कला और गणित विषयों को डिजिटल सीखने के साथ सीधे जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं,’ कोइका के निदेशक मुहयुन कोंग ने कहा, ‘यह उन्हें प्रौद्योगिकी के उपयोग और सीखने की प्रक्रिया में डिजिटल उपकरणों की भूमिका समझने में मदद करता है।’
विद्यार्थियों और प्रौद्योगिकी संबंधित संस्थाओं की भागीदारी में प्रौद्योगिकी प्रदर्शन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में सरल रोबोट से लेकर डिजिटल डिजाइन तक विभिन्न व्यावहारिक परियोजनाएं प्रदर्शित की गईं। इंटरैक्टिव प्रौद्योगिकी प्रदर्शन कार्यक्रम में सात विद्यालयों के सैंकड़ों छात्रों ने रोबोटिक्स एसोसिएशन ऑफ नेपाल, कारखाना समूह, स्मार्ट चेली सहित अन्य संस्थाओं के साथ संवाद किया।
कार्यक्रम में रोबोट, सर्किट मॉडल, होलोग्राम कला, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, कला और गणित से संबंधित सीखने के किट तथा ड्रोन प्रदर्शित किए गए और विशेषज्ञों के साथ सीखने के आदान-प्रदान सत्र भी आयोजित किया गया। सेव द चिल्ड्रेन के कार्यक्रम विकास, गुणवत्ता और प्रभाव निदेशक आयुष श्रेष्ठ जोशी ने बताया कि मेकर और टेक स्पेस प्रौद्योगिकी और नवीन सोच के माध्यम से बालकों को विद्यालय, घर, समुदाय और देश की चुनौतियों का समाधान खोजने में सक्षम बनाएंगे।

सार्वजनिक परिवहन पंजीकरण में ‘इमरजेंसी ब्रेक’ लागू, संबंधित पक्षों में असमंजस

समाचार सारांश

AI द्वारा तैयार, संपादकीय समीक्षा की गई।

  • सरकार ने सार्वजनिक परिवहन पंजीकरण पर अनिश्चितकाल के लिए ‘इमरजेंसी ब्रेक’ लगाया है और सभी प्रदेश मंत्रालायों तथा स्थानीय निकायों को पंजीकरण रोकने का पत्र भेजा है।
  • नेपाल यातायात व्यवसायी राष्ट्रीय महासंघ के अध्यक्ष सरोज सीटौल ने इस निर्णय को बिना पूर्व चर्चा और तैयारी के बताया, और वर्तमान परिस्थिति में इसे सकारात्मक दृष्टिकोण से लेने की बात कही।
  • नेपाल चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने पंजीकरण रोकने के फैसले को व्यवसायियों के लिए आर्थिक जोखिम बताते हुए तत्काल पुनर्विचार करने की सरकार से अपील की है।

८ जेठ, काठमांडू। सरकार ने सार्वजनिक परिवहन के पंजीकरण में ‘इमरजेंसी ब्रेक’ लगा दिया है।

यातायात व्यवस्था विभाग ने गुरुवार को सभी प्रदेश मंत्रालयों और स्थानीय निकायों को पत्र भेजकर परिवहन पंजीकरण रोकने का निर्देश दिया है।

विभाग के अनुसार, सवारी तथा यातायात व्यवस्था ऐन २०४९ के तहत, पर्यावरण प्रदूषण, वाहन आवागमन की अधिकता, सड़क की स्थिति, आवागमन में कठिनाई या अन्य सार्वजनिक हित के कारण किसी भी प्रकार के वाहन पंजीकरण को रोकने का विभाग को अधिकार प्राप्त है।

विभाग के निदेशक मणिराम भुसाल द्वारा लिखे पत्र में दो मुख्य कारण बताए गए हैं। पहला, ‘सार्वजनिक परिवहन का वैज्ञानिक प्रबंधन न हो पाने के कारण अत्यधिक वायु प्रदूषण, वाहन जाम और ट्रैफिक जाम बढ़ने से आवागमन में दिक्कतें उत्पन्न होना।’

दूसरा, ‘ईंधन के दामों में वृद्धि से सार्वजनिक परिवहन को हुई असुविधा और समस्याओं को सुलझाने के लिए सार्वजनिक परिवहन की उचित व्यवस्था आवश्यक होना।’

सरकार ने ईंधन की कीमत वृद्धि को आधार बनाकर स्वदेशी विद्युत से चलने वाले वाहनों समेत सभी वाहनों के पंजीकरण को रोक दिया है, हालांकि इस विषय में अधिक स्पष्टता नहीं दी गई है।

पूर्वाधार विकास मंत्रालय के प्रवक्ता रामहरि पोखरेल ने कहा कि यह निर्णय विभाग की ओर से लिया गया है, पर उन्हें आधिकारिक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। विभाग के उच्च अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका है।

नेपाल यातायात व्यवसायी राष्ट्रीय महासंघ के अध्यक्ष सरोज सीटौल ने कहा कि यह निर्णय बिना पूर्व चर्चा और तैयारी के अचानक लिया गया है। उन्होंने इसे ‘इमरजेंसी ब्रेक’ के समान बताया।

‘सार्वजनिक परिवहन में कई समस्याएं हैं और सुधार जरूरी है, इस पर प्रधानमंत्री कार्यालय और यातायात मंत्रालय के साथ विभिन्न दौर की चर्चा चल रही थी, लेकिन अचानक पंजीकरण रोकने का नोटिस आ गया,’ उन्होंने कहा, ‘फिलहाल हम इसे सकारात्मक रूप से लेकर सरकार के अगले कदम का इंतजार करेंगे।’

विभाग ने अनिश्चितकाल के लिए पंजीकरण रोकने का आदेश दिया है और अगली सूचना तक यह लागू होगा।

‘हजारों बसें पाइपलाइन में हैं, कई गेराज में निर्माणाधीन हैं, तथा कुछ आयात के रास्ते में हैं,’ उन्होंने कहा, ‘यदि पंजीकरण लंबी अवधि के लिए रोका गया तो इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।’

हालांकि, इस कदम से सार्वजनिक परिवहन में व्याप्त बुराइयों को खत्म करने में मदद मिलेगी, इसलिए व्यवसायी इस निर्णय का पूर्ण समर्थन करते हैं।

‘लाल नंबर प्लेट वाले वाहन भी मनमानी कर रहे थे, सार्वजनिक परिवहन में सामान ले जाया जा रहा था,’ उन्होंने कहा, ‘किस वाहन का पंजीकरण किस उद्देश्य से हुआ है, इसका डेटा न होने के कारण कुछ समय के लिए पंजीकरण रोकना सकारात्मक कदम है।’

सही आंकड़े न होने से नियंत्रण में दिक्कतें आने की बात करते हुए उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन को व्यवस्थित करने की आवश्यकता बताई।

‘देश भर में कितने वाहन हैं और वे किस उद्देश्य से चल रहे हैं, इसका विभाग के पास भी कोई डेटा नहीं है, बिना व्यवस्थित किए यातायात प्रबंधन संभव नहीं है,’ उन्होंने कहा।

चेम्बर का विरोध

नेपाल चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने सार्वजनिक वाहन पंजीकरण रोकने के निर्णय पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

चेम्बर ने शुक्रवार को जारी विज्ञप्ति में कहा कि यातायात व्यवस्था विभाग ने वैज्ञानिक प्रबंधन के उद्देश्य से अगले आदेश तक सभी सार्वजनिक वाहनों (विद्युत वाहन सहित) की पंजीकरण प्रक्रिया रोकी है, जिससे ऑटोमोबाइल व्यवसायी गंभीर आर्थिक जोखिम में पड़े हैं।

चेम्बर के अनुसार, सार्वजनिक परिवहन को वैज्ञानिक, व्यवस्थित और दीर्घकालीन बनाने की सरकार की नीति स्वागत योग्य है, लेकिन बिना पूर्व सूचना, चर्चा या समन्वय के पंजीकरण रोकना व्यावहारिक नहीं है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि विभिन्न बैंक और वित्तीय संस्थानों से ऋण लेकर एलसी के तहत आयात किए गए सैकड़ों वाहन भन्सार प्रक्रिया पूरी कर पंजीकरण की प्रतीक्षा में हैं, कुछ ट्रांजिट में हैं और कुछ निर्माता कंपनियों से आदेश के अनुसार निर्मित तथा डिस्पैच हो चुके हैं, अचानक पंजीकरण रोकने से निवेश जोखिम में पड़ गया है।

चेम्बर ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक परिवहन के लिए आयात किए गए ऐसे वाहन अन्य क्षेत्रों में बेचना या उपयोग करना संभव नहीं है, जिससे व्यवसायी गंभीर आर्थिक संकट में पड़ सकते हैं।

यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय निर्माता कंपनियों के साथ नेपाली व्यवसायियों की विश्वसनीयता पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार द्वारा अचानक वाहन आयात रोकने से नेपाली व्यवसायियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी नुकसान हुआ था, वर्तमान निर्णय भी नेपाल के व्यापारिक माहौल के लिए नकारात्मक संदेश दे सकता है, चेम्बर ने चिंता जताई है।

चेम्बर ने सार्वजनिक परिवहन सेवा, रोजगार, ऑटोमोबाइल व्यवसाय, बैंकिंग क्षेत्र की निवेश और सरकारी राजस्व संग्रहण पर भी इस निर्णय के नकारात्मक प्रभाव की चेतावनी देते हुए तत्काल पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

चेम्बर अध्यक्ष कमलेश कुमार अग्रवाल ने पंजीकरण प्रक्रिया में चल रहे, ट्रांजिट में मौजूद और पूर्व स्वीकृत प्रक्रियाओं के तहत आयात किए गए वाहनों के पंजीकरण और संचालन में सहूलियत देने की मांग की है।

साथ ही निजी क्षेत्र और संबंधित पक्षों के साथ समन्वय एवं परामर्श कर व्यावहारिक, वैज्ञानिक और दीर्घकालीन नीति अपनाने का आह्वान किया है।

रूपन्देही में नकली नोट छापने में उपयोग किए गए प्रिंटर और कंप्यूटर सहित दो गिरफ्तार

८ जेठ, काठमांडू। रूपन्देही में नकली नोट छापने के अपराध में संलिप्त दो व्यक्तियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। लुम्बिनी सांस्कृतिक नगरपालिका में नकली नोट छापने के लिए उपयोग किए गए कंप्यूटर और प्रिंटर सहित इन दोनों को बीते गुरुवार गिरफ्तार किया गया, रूपन्देही पुलिस ने जानकारी दी है।

गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में भारत के ककरहवा, सिद्धार्थनगर, नौगढ के ३८ वर्षीय अब्दुल हमिद और लुम्बिनी सांस्कृतिक नगरपालिका–११ मसिनाका के २२ वर्षीय अनिल पासी शामिल हैं। अनिल पासी को ‘बिक्की’ के नाम से भी जाना जाता है। इनके पास से बड़ी मात्रा में नकली १००, ५०० और १००० नेपाली नोट, कंप्यूटर, प्रिंटर तथा अन्य सामग्री बरामद हुई है, पुलिस ने बताया।

नेपाल ने अमेरिका को हराकर शीर्ष स्थान की चुनौती पार की

नेपाल ने आईसीसी क्रिकेट विश्वकप लीग–2 के घरेलू श्रृंखला के अंतिम मैच में शीर्ष स्थान पर काबिज अमेरिका को शानदार जीत से हराया। नेपाल ने 318 रन का लक्ष्य रखा, जिसमें स्पिनर सन्दीप लामिछाने ने 10 ओवर में 3 विकेट लेकर अमेरिका को 195 रन पर समेट दिया। नेपाल ने स्कॉटलैंड और अमेरिका के खिलाफ श्रृंखला में 4 में से 3 मैच जीते हैं और 24 अंक के साथ पांचवें स्थान पर है। 8 जेठ, काठमांडू।

आईसीसी क्रिकेट विश्वकप लीग–2 की घरेलू श्रृंखला के अंतिम मैच में नेपाल ने शीर्ष स्थान पर चल रहे अमेरिका को शानदार जीत से पराजित किया। टॉप ऑर्डर की बल्लेबाजी के चलते नेपाल ने घरेलू मैदान पर हुए इस वनडे मैच में सर्वाधिक स्कोर बनाया। पिछले 2 मैचों में अच्छे ओपनिंग करने वाले कुशल भुर्तेल और आसिफ शेख ने इस मैच में भी निरंतरता दिखाई। कुशल और आसिफ ने पहले विकेट के लिए 12 ओवर 5 गेंदों में 69 रन की साझेदारी की। कुशल ने 39 गेंदों में 29 और आसिफ ने 57 गेंदों में 43 रन बनाकर पवेलियन लौटे।

शुभ शुरुआत के बाद आए बल्लेबाजों को भी आक्रामक खेलने का मौका मिला। तीसरे विकेट के लिए इशान पाण्डे और कप्तान रोहित पौडेल ने लगातार दूसरे मैच में शतकीय साझेदारी की। अमेरिका के खिलाफ उन्होंने 110 रन की साझेदारी करते हुए नेपाल को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। इशान ने लगातार दूसरे मैच में अर्धशतक लगाया। इस मैच में उन्होंने 83 गेंदों में 84 रन बनाए। रोहित ने 59 गेंदों में 46 रन जोड़े। इसके बाद उपकप्तान दीपेन्द्रसिंह ऐरी ने आक्रामक अंदाज में अर्धशतक जमाया और नेपाल ने 300 से ऊपर का स्कोर खड़ा किया। दीपेन्द्र ने 36 गेंदों में 59 रन बनाए।

गुलसन झा 15, सोमपाल कामी 5 और नंदन यादव 1 रन पर आउट हुए, वहीं आरिफ शेख 18 रनों अजेय रहे। गेंदबाजी में अमेरिका के शुभम रत्नजे ने 2, मिलिंद कुमार और रुशिल उगर्कर ने एक-एक विकेट लिए। गेंदबाजों में स्पिनरों ने कमाल दिखाया और नेपाल ने अपना घरेलू रिकॉर्ड कायम करते हुए अमेरिका को सस्ते में रोक दिया। नेपाल द्वारा दिया गया 318 रनों का लक्ष्य पीछा करते हुए अमेरिका 41.2 ओवर में 195 रन पर ढेर हो गया। बेहतरीन फॉर्म में चल रहे सन्दीप लामिछाने ने इस मैच में भी प्रदर्शन बरकरार रखा। उन्होंने अमेरिका के खिलाफ 10 ओवर में 30 रन देकर 3 विकेट लिए। अन्य स्पिनर ललित राजवंशी और दीपेन्द्रसिंह ऐरी ने समान 2-2 विकेट लिए। तेज गेंदबाज गुलसन झा ने 2 और सोमपाल कामी ने 1 विकेट अपने नाम किया।

सोमपाल ने पहले ओवर में ओपनर स्मित पटेल को आउट कर अमेरिका को शुरुआती झटका दिया। स्मित बिना कोई रन जोड़े पवेलियन लौटे। इसके बाद शायन जहांगीर और शेहान जयसूर्या ने अमेरिका के बल्लेबाजी संभाली। उनकी अर्धशतकीय साझेदारी को सन्दीप ने 11वें ओवर में तोड़ा। शायन 27 और शेहान 26 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद अमेरिका ने लगातार विकेट गंवाए। कप्तान सायतेजा मुक्कामल्ला 22, मिलिंद कुमार 12 और शुभम रत्नजे 2 रन पर आउट हुए। हर्मित सिंह बिना कुछ बने पवेलियन लौटे। अमेरिका के मध्यक्रम के बल्लेबाज संजय कृष्णमूर्ति ने संयमित बल्लेबाजी की, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। नेपाल के स्पिनर हावी रहे और अमेरिका ने 95 रन तक 7 विकेट गंवा दिए।

आठवें विकेट के लिए संजय ने नोस्थुश केन्जिगेस के साथ 70 रन की साझेदारी की। संजय 56 और नोस्थुश 29 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद शौरभ नेत्रभल्कर 10 रन बनाकर गुलसन के शिकार बने और अमेरिका 195 रन पर समेट गया। इस जीत के साथ नेपाल ने स्कॉटलैंड और अमेरिका के खिलाफ 4 मैचों की श्रृंखला में 3 मुकाबले जीते। घरेलू श्रृंखला समाप्ति के बाद नेपाल 28 मैचों में 11 जीत के साथ 24 अंक लेकर पाँचवें स्थान पर है।

फेरि पाँच सेटको खेल, फेरि नेपाल घरेलु कोर्टमा भारतसँग स्तब्ध

नेपाल फिर भारत के हाथों पांच सेट के रोमांचक मुकाबले में हारा, घर के मैदान में निराशा

नेपाल ने दशरथ रंगशाला के कवरड हाल में भारत के साथ कई प्रतिस्पर्धात्मक मैच खेले हैं। वहीं मैदान पर ही नेपाल ने पहली बार भारत को हराया था। काठमांडू में आयोजित काभा महिला वॉलीबॉल चैंपियनशिप के पहले मैच में नेपाल ३-२ सेट से भारत से हार गया। प्रशिक्षक जगदीश भट्ट ने बताया कि पाँचवें सेट में ५-५ की बराबरी के दौर में दो गलतियों के कारण हार हुई। नेपाल ने बाकी कीर्गिस्तान और मालदीव्स के खिलाफ जीत हासिल कर सेमीफाइनल में पहुंचने का लक्ष्य रखा है। ८ जेठ, काठमांडू। २०२४ में काठमांडू में आयोजित काभा महिला वॉलीबॉल नेशन्स लीग में नेपाल फाइनल मुकाबले में भारत के खिलाफ पांच सेट के रोमांचक संघर्ष में पीछे रह गया और ट्रॉफी जीतने से चूक गया। इस प्रतियोगिता के लीग स्टेज में नेपाल ने भारत के खिलाफ पांच सेट तक जाकर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। लेकिन निर्णायक मैच में नेपाल पिछड़ गया था। फाइनल मैच के बाद शुक्रवार को नेपाल और भारत की राष्ट्रीय महिला वॉलीबॉल टीमें फिर त्रिपुरेश्वर की दशरथ रंगशाला कवरड हाल में आमने-सामने थीं तो नतीजा वैसा ही रहा। काभा महिला वॉलीबॉल चैंपियनशिप में पहले मैच में नेपाल ने भारत के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा की। इस बार भी मैच पांच सेट तक पहुंचा लेकिन घरेलू टीम नेपाल इसे अपने पक्ष में नहीं कर सकी। भारत ने ३-२ के सेट स्कोर से जीत दर्ज कर शानदार शुरुआत की। कवरड हाल में नेपाली दर्शकों के उत्साहपूर्ण जयकारों और समर्थन के बावजूद भारत विजेता रहा। दशरथ रंगशाला के इस कवरड हाल में नेपाल ने कई प्रतिस्पर्धात्मक मैच खेले हैं, जहां पहली बार नेपाल ने भारत को हराया था। अब तक चार बार इन दोनों टीमों के बीच मैच पाँच सेट तक गए हैं और इस बार भी ऐसा ही हुआ। मुख्य कोच जगदीश भट्ट ने कहा कि अधिकांश मैचों का परिणाम पांच सेट तक जाने के कारण नेपाल के लिए हार में परिवर्तित हुआ है। ‘आज भी ऐसा ही हुआ। पहले सेट हम जीते, लेकिन फिर दो सेट चिपकने में दिक्कत हुई। चौथा सेट जीत कर मैच पाँचवें सेट तक गया। वहां ५–५ बराबरी थी। खेल किसी भी टीम के पक्ष में जा सकता था। लेकिन हमने दो गलतियां की, जो निर्णायक बन गईं।’ २०१९ में नेपाल में आयोजित १३वें दक्षिण एशियाई खेल (साग) के फाइनल में नेपाल ने भारत को कड़ी चुनौती दी थी, पर ३-२ सेट से हार कर स्वर्ण पदक नहीं जीत सका था। २०२४ के काभा नेशन्स लीग में लीग चरण और फाइनल दोनों मैच पांच सेट तक गए, जिसमें नेपाल और भारत ने एक-एक मैच जीते। २०२३ में चीन के हान्झौ में आयोजित १९वें एशियाई खेल और काठमांडू में उसी वर्ष आयोजित काभा महिला चैलेंज कप में भी नेपाल ३-१ सेट से भारत से हार चुका है। दशरथ रंगशाला के कवरड हाल में भले ही पांच सेट तक मुकाबला हुआ, लेकिन छोटे मैदान ने नेपाल में वॉलीबॉल के महत्व और दर्शकों के उत्साह को दर्शाया। पहले सेट में घरेलू टीम ने २५-२१ से बढ़त बनाई। भारत ने शुरुआत में ३-० की बढ़त बनाई थी, लेकिन समर्थकों के उत्साह के साथ नेपाल ने १३-१३ की बराबरी कर सेट अंततः अपने नाम किया। लेकिन सुधार कायम नहीं रहा। दूसरे सेट में भारत ने २५-२० से सेट जीत वापस बराबरी बनाई। इस सेट में नेपाल की रिसीव और डिफेंस कमजोर नजर आई। तीसरे सेट में भी भारत ने २५-१९ से जीत दर्ज कर २-१ की बढ़त बनाई। नेपाल अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया और भारत शुरुआत से ही आगे रहा। चौथे सेट में नेपाल ने वापसी की और शुरू में बढ़त बनाए रखकर २५-२१ से सेट जीत मैच को पांचवें सेट में पहुंचाया। निर्णायक सेट में दोनों टीमों ने बारी-बारी अंक जोड़े और ५-५ पर बराबरी बनी। उसके बाद भारत ने दो अंक जोड़कर १५-९ से सेट और मैच जीत लिया। इस मैच में नेपाल की नई कप्तान निरुता थगुनना के नेतृत्व में पहला मैच था। टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का मिश्रण था। कोच भट्ट के अनुसार यह अनुभव टीम को भविष्य के मैचों में मजबूत बनाएगा। उन्होंने कहा कि टीम का प्रदर्शन संतोषजनक रहा, चाहे परिणाम कुछ भी हो। ‘मैं अच्छी प्रतिस्पर्धा देखकर खुश हूं। युवा खिलाड़ियों ने अच्छा खेला। विपक्षी ने अपनी ऊँचाई का फायदा उठाया,’ उन्होंने कहा। इस मैच में पहली बार राष्ट्रीय टीम में शामिल हुए खिलाड़ियों ने पदार्पण किया। मिडल ब्लॉकर सुनिता खतरी पूरे मैच मैदान में रहीं। युवा ऑउटसाइड हिटर मीना सुनार ने भी अच्छा प्रभाव छोड़ा। इसके साथ ही सलिना बुड़ा मगर, जसना महतो और बसंती साउद ने भी डेब्यू किया। कोच भट्ट ने सभी खिलाड़ियों को खेलने का मौका दिया और भारतीय टीम के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करवाई। कप्तान निरुता थगुनना का कप्तानी में पदार्पण सहज नहीं हुआ। वे अधिक वक्त कोर्ट के बाहर रहीं और मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक हो गईं। भारत के अजरबैजानी कोच कुलान जाना ने नेपाल की टीम को कड़ी प्रतिस्पर्धात्मक टीम बताया। नेपाल ने पहले मैच में हार के बावजूद १ अंक हासिल किया है, जबकि भारत ने २ अंक जोड़े हैं। उसी दिन कीर्गिस्तान ने मालदीव को हराकर ३ अंक जोड़े। नेपाल शनिवार और रविवार को कीर्गिस्तान और मालदीव के खिलाफ मुकाबला करेगा। सेमीफाइनल तक पहुंचने के लिए टीम को बाकी दोनों मैच जीतने जरूरी हैं। कोच भट्ट ने भी बाकी मैच जीत कर आगे बढ़ने का लक्ष्य स्पष्ट किया। ‘अब हमारा लक्ष्य बाकी दोनों मैच जीतकर सेमीफाइनल में पहुंचना और फिर फाइनल खेलना है,’ उन्होंने कहा। नेपाल शनिवार शाम ५ बजे कीर्गिस्तान के खिलाफ दूसरा मैच खेलेगा।

सरकार देश के भीतर सुरक्षित रोजगार और विदेश में काम करने वाले श्रमिकों तक सेवाएं पहुंचाए

समाचार सारांश

  • सरकार को आगामी वित्त वर्ष के बजट में विदेश में काम करने वाले नेपाली श्रमिकों की समस्याओं के समाधान और रोजगार क्षेत्र को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है, ऐसा संबंधित पक्षों ने कहा है।
  • श्रम मंत्रालय का बजट पिछले वर्ष की तुलना में घटा है, इसलिए विशेषज्ञों ने बजट बढ़ाकर बिना दस्तावेज़ के काम करने वाले श्रमिकों के संरक्षण, मताधिकार और पुनः एकीकरण पर ध्यान देने का सुझाव दिया है।
  • श्रम मंत्री रामजी यादव ने वैदेशिक रोजगार में ठगी नियंत्रित करने के लिए ‘जिरो टोलरेंस’ नीति अपनाने और शिकायतों को जल्दी निपटाने के लिए सॉफ्टवेयर प्रणाली विकसित करने की योजना साझा की है।

8 जेठ, काठमांडू। विदेश में काम करने वाले नेपाली श्रमिकों की समस्याओं का निकटता से समाधान करने योग्य आगामी वित्त वर्ष का बजट आना चाहिए, यह संबंधित पक्षों की मांग है।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में गठित सरकार का यह पहला बजट है जिसे देश और विदेश में रह रहे नागरिक बड़ी उम्मीद के साथ देख रहे हैं।

लगभग 40 लाख के आसपास नेपाली विदेश में काम कर रहे हैं और स्वदेश में पर्याप्त रोजगार न मिलने के कारण सरकार युवाओं, श्रम और रोजगार क्षेत्र के लिए कैसा बजट लाएगी इस पर भी ध्यान केंद्रित है।

सरकार ने नीति और कार्यक्रमों में नई राष्ट्रीय रोजगार नीति विकसित करने, कौशल, शिक्षा, श्रम बाजार सूचना, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सेवा प्रणाली को एकीकृत करने की बात कही है।

सरकार ने ‘सिकाई कमाई’ अवधारणा पर आधारित राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम चलाने की योजना भी बताई है।

साथ ही, नेपाल में रहकर विदेशी नियोक्ताओं के लिए काम किए जाने वाले ‘रिमोट वर्क नीति’ को कानूनी ढांचे में लाने, विदेश में लौटे युवाओं के कौशल को डिजिटल ‘स्किल पासपोर्ट’ के माध्यम से अभिलेखित कर अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन प्रदान करने की भी योजना है।

इसके साथ ही श्रमिकों के लिए कानूनी सहायता, डिजिटल श्रम निरीक्षण, कार्यस्थल पर व्यावसायिक सुरक्षा व स्वास्थ्य की गारंटी, बाल श्रम निषेध को सख्ती से लागू करना और वैदेशिक रोजगार को सुरक्षित, व्यवस्थित तथा लाभकारी बनाना नीति में शामिल हैं।

श्रम मंत्रालय बजट तैयार करते समय संबंधित पक्षों ने बजट में वृद्धि और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है। इस आर्थिक वर्ष श्रम मंत्रालय का बजट 4 अरब 28 करोड़ था, जबकि पिछले वर्ष 2081/82 में यह 8 अरब 10 करोड़ था।

वर्तमान वर्ष में पिछले वर्ष के तुलना में 47 प्रतिशत बजट में कटौती हुई थी। अब नए सरकार के बजट में इस क्षेत्र को प्राथमिकता मिलेगी या नहीं, यह देखना बाकी है।

बजट वृद्धि और प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेषज्ञों का जोर

श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री रामजी यादव से परामर्श के बाद श्रम एवं प्रवासन विशेषज्ञ रामेश्वर नेपाल ने बजट में बिना दस्तावेज के काम करने वाले श्रमिकों के संरक्षण से लेकर विदेश में रहने वाले नेपाली मताधिकार तक को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने बताया कि सरकार विदेश में बिना दस्तावेज के फंसे नेपाली श्रमिकों की उपेक्षा कर रही है, इसलिए उनके लिए समर्थन तंत्र जरूरी है। उन्होंने खानपान, आवास और स्वदेश लौटने के टिकट खर्च के प्रावधान बजट में होने का सुझाव भी दिया।

“वे अन्य नागरिकों की तरह राज्य के दायित्व में आते हैं, इसलिए उन्हें शामिल करने वाला बजट और कानून आवश्यक है,” उन्होंने कहा।

विदेश में रहने वाले नेपाली मताधिकार को नीति में बार-बार शामिल किया गया है, लेकिन बजट की कमी के कारण लागू नहीं हो पाया है। उन्होंने आगामी चुनाव तक मतदान की सुनिश्चितता के लिए इस वर्ष से योजना और आवश्यक संसाधन आवंटित करने का सुझाव दिया।

उन्होंने वैदेशिक रोजगार विभाग और विदेश में नेपाली दूतावासों को संसाधन, कर्मचारी और जनशक्ति से लैस करने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा, “दूतावास और विभाग में अनुसंधान करने वाले कर्मचारियों और बजट को बढ़ाना चाहिए। मौजूदा कर्मचारियों को भी कामगारों की समस्याओं को समझने और समाधान करने के लिए प्रशिक्षण देना जरूरी है, जो बजट में शामिल होना चाहिए।”

स्वदेश लौटे कामगारों को पुनः एकीकृत कर उनके कौशल और अनुभव को देश में उपयोग करने के लिए ठोस योजनाएं बजट में आवश्यक हैं। केवल नारों से काम नहीं चलेगा, उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए सुविधाएं और निवेश अनुकूल वातावरण बनाना होगा, यह भी उन्होंने कहा।

विदेशी रोजगार से जुड़ी शिकायतों और सेवाओं को केवल काठमांडू तक सीमित न रखकर जिले (सीडीओ कार्यालय) तक पहुंचाना आवश्यक है।

इसके अलावा, मैनपावर कंपनियों के निगरानी को ‘छापा मारने’ के तरीके से बदलकर विधिपूर्ण और संस्थागत बनाना आवश्यक है, इसके लिए विधि और बजट व्यवस्था करनी होगी, उन्होंने सुझाव दिया।

उन्होंने बताया कि मंत्री ‘डिजिटलीकरण’ और ‘सुधार’ को प्राथमिकता दे रहे हैं। यदि ये बातें बजट में शामिल होती हैं तो वैदेशिक रोजगार क्षेत्र में बड़ा सुधार होगा, उनका मानना है।

एक और श्रम तथा प्रवासन विशेषज्ञ डॉ. जीवन बानियाँ ने श्रम मंत्रालय के बजट और प्राथमिकताओं में व्यापक बदलाव करने का सुझाव दिया है।

देश की अर्थव्यवस्था जो रेमिटेंस पर निर्भर है, उसके बावजूद श्रम मंत्रालय को हमेशा कम बजट मिलने से वे बेचैन हैं, इसलिए इस बार बजट बढ़ाकर उत्पादनक्षम क्षेत्र में खर्च करने का आग्रह किया।

बजट के दायरे और क्रियाविधि में बदलाव जरूरी

पूर्व में श्रम मंत्रालय का बजट प्रशासनिक खर्च पर केंद्रित होता था, लेकिन डॉ. बानियाँ ने इसे उत्पादनमुखी और श्रमिक हित में केंद्रित करने की आवश्यकता बताई।

“रेमिटेंस ने देश को संभाला है, पर श्रमिकों के लिए काम करने वाली मंत्रालय हमेशा उपेक्षित रही है, अब बजट मात्र नहीं, उसका उद्देश्य भी बदलना चाहिए,” उन्होंने कहा।

सरकार की ‘डिजिटलीकरण’ नीति को सार्थक बनाने के लिए सूचना प्रबंधन प्रणाली में बड़ा निवेश जरूरी है। श्रम स्वीकृति प्रक्रिया ऑनलाइन सरल और सहज बनाने, और श्रमिक परिवारों को भी प्रणाली में जोड़ने की सलाह दी।

काठमांडू-केंद्रित सेवाओं को विकेंद्रीकृत कर स्थानीय स्तर तक सूचना प्रणाली पहुंचाने के लिए बजट को प्राथमिकता देनी चाहिए, Dr. बानियाँ ने कहा।

नेपाली श्रमिकों को कौशलवान बनाकर वैदेशिक रोजगार भेजने और स्वदेश में रोजगार सृजन करने के लिए कौशल विकास में बड़े पैमाने पर निवेश आवश्यक है, उन्होंने जोड़ा।

उन्होंने कहा कि भैंसेपाटी में सीमित प्रशिक्षण केंद्र को प्रदेश और स्थानीय स्तर तक विस्तार करना चाहिए और बाज़ार की मांगों के अनुसार पाठ्यक्रम संशोधन हेतु अनुसंधान में निवेश आवश्यक है।

आंतरिक श्रम बाजार में बाल श्रम को कम करने, कार्यस्थल सुरक्षा और शिकायत प्रबंधन के लिए श्रम निरीक्षकों की संख्या बढ़ाना जरूरी है, Dr. बानियाँ ने कहा। उन्होंने प्रदेश स्तर पर स्थित श्रम कार्यालयों को संसाधनों से लैस करने पर भी जोर दिया।

वैदेशिक रोजगार बोर्ड को केवल कल्याणकारी कार्यों पर केंद्रित करने और अध्ययन-अनुसंधान तथा कौशल कार्यक्रमों के लिए मंत्रालय के तहत अलग इकाई बनाने की सलाह दी। उन्होंने मौजूदा बोर्ड संरचना से अपेक्षित परिणाम न मिलने की बात कही।

वैदेशिक रोजगार संबंधित मामलों को शीघ्र निपटाने के लिए वैदेशिक रोजगार न्यायाधीकरण शाखा को प्रदेश स्तर तक विस्तार करने और विभाग की जांच प्रक्रिया को चुस्त करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने स्वीकार किया कि श्रम मंत्रालय अकेले रोजगार सृजन नहीं कर सकता, इसलिए अन्य मंत्रालयों के साथ समन्वय और सुविधा प्रदान करने की भूमिका निभानी होगी। आगामी बजट इन मुद्दों को समेटेगा तो श्रम क्षेत्र में गुणात्मक बदलाव संभव होगा, उनका विश्वास है।

सरकार की प्राथमिकता: वैदेशिक रोजगार में ठगी के प्रति शून्य सहनशीलता

श्रम मंत्री रामजी यादव ने वैदेशिक रोजगार में ठगी, शोषण और अनियमितताओं को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने ‘जिरो टोलरेंस’ नीति अपनाई है।

उन्होंने बुधवार को प्रतिनिधि सभा में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वैदेशिक रोजगार को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाना तथा आंतरिक रोजगार सृजन करना सरकार की पहली प्राथमिकता है।

ठगी नियंत्रण और सॉफ्टवेयर प्रणाली

मंत्री यादव ने बताया कि पिछले लगभग 40 हजार शिकायतों को वर्गीकृत कर समय सीमा के भीतर समाधान करने की योजना चल रही है।

“आगामी सावन से वैदेशिक रोजगार संबंधित मुद्दों और जांच को पूरी तरह से सॉफ्टवेयर प्रणाली द्वारा संचालित किया जाएगा और तकनीक को विकास किया जा रहा है,” उन्होंने कहा।

मंत्री यादव ने बताया कि स्वदेश में रोजगार व कौशल विकास कार्यक्रमों को प्राथमिकता देकर युवाओं के विदेश पलायन को रोका जाएगा और उन्हें देश में पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

सेवा का विकेंद्रीकरण करते हुए लोगों के घर-घर तक सेवाएं पहुंचाने के प्रधानमंत्री के संकल्प के अनुरूप मंत्रालय भी कार्यरत है, उन्होंने बताया।

वैदेशिक रोजगार विभाग ने अनधिकृत अनुगमन के संबंध में चेतावनी जारी की

८ जेठ, काठमाडौं । वैदेशिक रोजगार विभाग ने वैदेशिक रोजगार क्षेत्र में हो रही ठगी को नियंत्रित करने के लिए म्यानपावर कम्पनी और संबंधित संस्थानों का नियमित अनुगमन कर रहा है। विभाग द्वारा जारी सूचना में बताया गया है कि अनुगमन के लिए भेजे जाने वाले कर्मचारी विभाग के आधिकारिक पत्र के साथ ही होंगे और वे केवल परिचय पत्र दिखाकर ही अनुगमन कर सकेंगे। विभाग ने अनधिकृत रूप से अनुगमन करने, विभाग के नाम पर फोन द्वारा धमकी देने या दबाव बनाने वाले व्यक्तियों से सतर्क रहने का आग्रह किया है। ऐसे किसी गतिविधि के देखने पर तुरंत विभाग को सूचित करने का भी निवेदन किया गया है।

विभाग ने महानिर्देशक, उपमहानिर्देशक और अनुगमन एवं जीटुजी सहजीकरण शाखा के निर्देशक के संपर्क नंबर सार्वजनिक करते हुए संदिग्ध गतिविधि देखने पर तत्काल संपर्क करने का आग्रह किया है। हाल के दिनों में विभाग ने म्यानपावर व्यवसायियों पर अनुगमन और नियमन कड़ा कर दिया है। सरकार के निर्देश के अनुसार, विभाग वैदेशिक रोजगार में हो रही ठगी को रोकने और ठगी का शिकार हुए श्रमिकों को शीघ्र न्याय दिलाने के उद्देश्य से इन गतिविधियों को तेज कर रहा है।

वर्तमान सरकार ने लागू कानूनों के पालन में गैरकानूनी कार्यों के प्रति शून्य सहिष्णुता अपनाई है और कानून विरुद्ध किए गए कृत्यों को बर्दाश्त न करने का स्पष्ट संदेश दिया है। विभाग तथा युवा, श्रम तथा रोजगार मंत्रालय द्वारा नियमित एवं आकस्मिक अनुगमन शुरू होने के बाद म्यानपावर व्यवसायी चिंतित हो गए हैं। वे विभाग और मंत्रालय द्वारा अनावश्यक परेशानी और दिक्कतें प्रदान किए जाने का आरोप लगा रहे हैं। व्यवसायियों की इन शिकायतों के बाद विभाग ने पुनः स्पष्ट किया है कि नियमित अनुगमन जारी है और किसी भी अनधिकृत गतिविधि की सूचना मिलने पर तत्काल विभाग से संपर्क करने का आग्रह किया है।

भुवन नगरकोटी ने सूर्य नेपाल चैलेंज का खिताब जीता

सूर्य नेपाल गोल्फ टूर २०२५-२६ के अंतर्गत सूर्य नेपाल चैलेंज का खिताब भुवन नगरकोटी ने जीता। भुवन ने ११-अंडर २६१ स्कोर करते हुए दिनेश प्रजापति और राहुल विश्वकर्मा को २ स्ट्रोक से हराया। प्रतियोगिता में कुल ५२ खिलाड़ी शामिल थे और पुरस्कार राशि ७ लाख १० हजार रुपये थी।

आज की प्रतियोगिता में भुवन ने इवेन-पार ६८ का स्कोर बनाते हुए कुल ११-अंडर २६१ के साथ दिनेश प्रजापति और एमेच्योर राहुल विश्वकर्मा को हराकर इस सीजन का चौथा और अपने करियर का १५वां खिताब अपने नाम किया। इस उपाधि के साथ भुवन को १ लाख ३० हजार रुपये नगद पुरस्कार भी मिला। एमेच्योर राहुल और प्रो दिनेश ने समान ४-अंडर ६४ के गेंदबाजी के साथ कुल मिलाकर ९-अंडर २६३ स्कोर बनाकर संयुक्त रूप से दूसरा स्थान हासिल किया।

दूसरे स्थान पर रहे दिनेश ने ९० हजार रुपये जीते। चौथे स्थान पर बने शुक्र बहादुर राई ने ८-अंडर २६४ के कुल स्कोर के साथ ७० हजार रुपये प्राप्त किए। निरज ने ७-अंडर २६५ के स्कोर के साथ पांचवां स्थान हासिल किया और ५५ हजार रुपये नगद पुरस्कार प्राप्त किया। प्रतियोगिता के विजेताओं को सूर्य नेपाल प्रा. लि. के ब्रांड मैनेजर विदुरराज अधिकारी, नेपाल गोल्फ संघ के अध्यक्ष टासी घले और पीजीए नेपाल के अध्यक्ष रविंद्रमन श्रेष्ठ ने पुरस्कार वितरण किया।

सरकारी कर्मचारीको तलब बढाउने तयारी, ३५ देखि एक लाख २१ हजार बनाउन सिफारिस

सरकारी कर्मचारियों के वेतन वृद्धि की तैयारी, 35 हजार से 1 लाख 21 हजार तक वेतन की सिफारिश

आर्थिक वर्ष २०७९-०८० में निजामती कर्मचारी और शिक्षकों का वेतन 15 प्रतिशत से बढ़ाया गया था, लेकिन पिछले तीन वर्षों में वेतन वृद्धि नहीं हो सकी। वेतन भत्ता पुनरावलोकन समिति ने कार्यालय सहयोगी का मासिक वेतन 35 हजार और मुख्य सचिव का वेतन 1 लाख 21 हजार रुपये निर्धारित करने की सिफारिश की है। सरकार आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन कर वेतन वृद्धि का निर्णय लेगी वहीं निजामती कर्मचारी संगठन ने आधारभूत वेतन 38,862 रुपये करने की मांग की है।

8 जेठ, काठमांडू। आर्थिक वर्ष २०७९-०८० के बजट वक्तव्य में अर्थमंत्री जनार्दन शर्माले निजामती कर्मचारी और शिक्षकों के वेतन में 15 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की थी। हालांकि, आर्थिक वर्ष २०८०/०८१, २०८१/०८२ और २०८२/०८३ में वेतन वृद्धि नहीं की गई। निजामती सेवा अधिनियम के अनुसार वेतन भत्ता पुनरावलोकन समिति प्रत्येक तीन वर्ष में राजस्व वृद्धि दर, कुल दरबंदी संख्या और पिछले तीन वर्षों की मूल्य सूची के आधार पर महंगाई भत्ता पुनरावलोकन करती है।

पुनरावलोकन समिति की सिफारिश के अनुसार वेतन वृद्धि होने पर सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों का वेतन लगभग 27 प्रतिशत और मुख्य सचिव का वेतन 56.71 प्रतिशत बढ़ेगा। सामान्य प्रशासन मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, समिति ने वेतन वृद्धि के लिए सिफारिश कर दी है, लेकिन वृद्धि की दर का निर्णय सरकार आर्थिक स्थिति के अनुसार करेगी।

निजामती कर्मचारी संगठन ने आधारभूत वेतनमान 38,862 रुपये करने की मांग रखी है। कर्मचारियों ने सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, पेंशन, आवास और व्यावसायिक सुरक्षा सहित अन्य सुविधाओं की मांग भी की है। सरकार ने कर्मचारियों के वेतन, भत्ता और सुविधाओं की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय वेतन सुविधा आयोग गठित किया था, जिसके आधार पर समिति ने वेतन वृद्धि की सिफारिश की है।

सहकारी ठगी में इच्छाराज को जेल, जीबी और छवी को क्यों मिली छूट?

विशेष अदालत ने संविधानसभा सदस्य इच्छाराज तामाङ को सहकारी ठगी तथा सम्पत्ति शुद्धीकरण का दोषी मानते हुए ३ वर्ष कैद और ३ अरब ३१ करोड रुपए जुर्माना लगाया है। जिल्ला अदालत कास्की ने रवि लामिछाने, जीबी राई और छवी जोशी के सम्पत्ति शुद्धीकरण और संगठित अपराध के मामले को वापस लेने का निर्णय भी मंजूर किया है। जीबी राई समूह के खिलाफ २१ अरब रुपैयाँ से अधिक जनता बचत के अपचलन का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया गया था, जिसमें बताया गया है कि वे फरार हैं जबकि कुछ सदस्य जेल में हैं। ८ जेठ, काठमाण्डौँ। २१ माघ २०८० को संविधानसभा सदस्य एवं सिविल सहकारी के तत्कालीन अध्यक्ष इच्छाराज तामाङ को सहकारी ठगी सहित सम्पत्ति शुद्धीकरण के आरोप में विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था। विशेष अदालत के तत्कालीन अध्यक्ष टेकनारायण कुँवर तथा सदस्यों तेजनारायण सिंह राई और मुरारीबाबु श्रेष्ठ की तीन सदस्यीय इजलास ने इच्छाराज सहित तीन व्यक्तियों को सम्पत्ति शुद्धीकरण में दोषी पाया था। विशेष अदालत ने इच्छाराज को ३ वर्ष कैद, बिगो तथा ३ अरब ३१ करोड रुपए जुर्माना करने का फैसला सुनाया है।

उनके और उनके परिवार के नाम पर मौजूद सम्पत्ति को जब्त करने का आदेश भी दिया गया है। सहकारी ठगी एवं सम्पत्ति शुद्धीकरण के अपराध में वे वर्तमान में जेल में हैं। इसी प्रकार, शिवशिखर सहकारी के पूर्व अध्यक्ष केदारनाथ शर्मासमेत पर सहकारी ठगी सहित ३३ अरब रुपए सम्पत्ति शुद्धीकरण का आरोप अदालत में चल रहा मामला है। अदालत ने सहकारी ठगी में उन्हें ६ वर्ष कैद की सजा दी थी; शर्माके फरार होने पर पुलिस ने पुनः उन्हें गिरफ्तार कर जेल में रखा है। सम्पत्ति शुद्धीकरण विभाग ने उनके खिलाफ २ अरब ६८ करोड ५१ लाख १६ हजार रुपए बिगो, बराबर की जुर्माने और १० वर्ष कैद की मांग के साथ मामला दायर किया है। ये कुछ प्रमुख मामले हैं। सहकारी ठगी के मुख्य आरोपितों पर एक या उससे अधिक अपराधों में सम्पत्ति शुद्धीकरण तथा संगठित अपराध के मामले प्रायः दर्ज होते हैं। लेकिन चुनावी सरकार ने चयन प्रक्रिया के तहत सहकारी ठगी में संलग्न जीबी राई, रवि लामिछाने, छवी जोशी समेत अन्य पर लगे सम्पत्ति शुद्धीकरण और संगठित अपराध के मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया था, जिसे जिल्ला अदालत ने भी अनुमोदित कर दिया है।

महोत्तरी में चार बालिकाओं की डूबने से मौत

८ जेठ, जलेश्वर (महोत्तरी) । महोत्तरी जिले में डूबने से चार बालिकाओं की मौत हुई है। जिला प्रहरी कार्यालय के अनुसार शुक्रवार को मनरासिस्वा नगरपालिका–७ सरपल्लो गाँव की नदी में तीन बालिकाओं तथा गौशाला नगरपालिका–४ रजखोर गाँव में एक बालिका की डूबने से मौत होने की सूचना मिली है। मनरासिस्वा–७ सरपल्लो की निवासी वीरेन्द्र भंडारी की बेटियां १२ वर्षीय स्नेहाकुमारी और ६ वर्षीय शिवानीकुमारी, साथ ही अजिज नदाफ की १२ वर्षीय बेटी अफसाना खातुन की डूबने से मृत्यु हुई है।

सरपल्लो गाँव की ये तीनों बालिकाएं आज दोपहर अंकुशी और जंघा नदी के दोभान में नहाने गई थीं। नहाते समय पैर फिसलने से वे नदी में डूब गईं। पुलिस के अनुसार एक अन्य घटना में गौशाला–४ रजखोर गाँव निवासी नरेश महतो की दो वर्षीया बेटी दीपिका कुमारी अपने ही घर के नजदीक स्थित खेत में जमा पानी में डूब गई और उसकी मौत हो गई। मृत चारों बालिकाओं के शव परीक्षण के लिए प्रादेशिक अस्पताल जलेश्वर भेजे गए हैं। –रासस

कक्रोच जनता पार्टी द्वारा बेंगलुरु में प्रदर्शन का आह्वान, पुलिस ने भीड़ न जुटाने की चेतावनी दी

८ जेठ, काठमाडौं । भारत के बेंगलुरु नगर पुलिस ने रविवार को टाउन हाल क्षेत्र में किसी भी प्रकार के जमावड़े से आम जनता को दूर रहने की अपील की है। कक्रोच जनता पार्टी के नाम पर टाउन हाल में कार्यक्रम आयोजित किए जाने के आह्वान के बीच सोशल मीडिया पर यह खबर फैलने पर पुलिस ने यह चेतावनी जारी की है। कक्रोच जनता पार्टी ने कर्नाटक की ओर से रविवार को टाउन हाल में एक ‘शांतिपूर्ण मानव साङ्लो’ कार्यक्रम बनाने का आह्वान किया है। नगर पुलिस ने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए कोई आधिकारिक अनुमति प्राप्त नहीं हुई है।

साथ ही, ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी से भी इस कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं ली गई है, ऐसा पुलिस का दावा है। पुलिस ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा है, ‘शहर के भीतर किसी भी प्रकार का प्रदर्शन या कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं दी गई है। सभी प्रकार के विरोध सभाओं के लिए स्वतंत्र पार्क (फ्रीडम पार्क) उपलब्ध कराया गया है।’ पुलिस ने टाउन हाल के आसपास इकट्ठा होकर प्रदर्शन करने की गतिविधि को अदालत के आदेश का उल्लंघन बताया है और इस बात के लिए सतर्क रहने को कहा है। ‘जनता से अनुरोध है कि जानबूझ कर या अनजाने में फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया पर ऐसे संदेशों को शेयर या प्रसारित न करें और टाउन हाल के आसपास न जाएँ,’ पुलिस ने स्पष्ट किया है।