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लेखक: space4knews

२२ वर्षपछि प्रिमियर लिग जित्ने संघारमा आर्सनल – Online Khabar

२२ साल बाद प्रीमियर लीग जीतने के करीब आर्सनल

आर्सनल ने प्रीमियर लीग में बर्नली को १-० से हराकर ३७ मैचों में ८२ अंकों के साथ शीर्ष स्थान बनाए रखा है। काइ हावर्ट्ज़ के ३७वें मिनट में किए गए गोल ने आर्सनल को महत्वपूर्ण जीत दिलाई। एक मैच बाकी रहते हुए आर्सनल ने मैनचेस्टर सिटी से ५ अंकों की बढ़त बना ली है और चैंपियन बनने की संभावना मजबूत कर ली है। ५ जेठ, काठमांडू।

काइ हावर्ट्ज़ के एकल गोल की बदौलत आर्सनल ने प्रीमियर लीग में बर्नली को १-० से हराकर खिताब की दौड़ में अपनी स्थिति पुख्ता की है। एमिरेट्स स्टेडियम में हुए घरेलू मैच में हावर्ट्ज़ ने ३७वें मिनट में बुकायो साका द्वारा दी गई पेस का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए गोल किया। इस जीत के बाद ३७ मैचों में आर्सनल ने दूसरे स्थान पर मौजूद मैनचेस्टर सिटी से ५ अंकों की बढ़त ले ली है और २२ साल बाद प्रीमियर लीग जीतने की संभावना और बढ़ गई है।

आर्सनल इस समय ८२ अंकों के साथ शीर्ष स्थान पर है और केवल एक मैच बाकी है। यदि आर्सनल आखिरी मैच जीतता है, तो वह सीजन का खिताब अपने नाम करेगा। मैनचेस्टर सिटी ३६ मैचों में ७७ अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है। यदि सिटी मंगलवार को बर्नमाउथ के खिलाफ मैच नहीं जीत पाता या हार जाता है, तो आर्सनल को एक मैच पहले ही चैंपियन घोषित किया जा सकता है। लेकिन अगर सिटी जीतता है, तो आर्सनल को अंतिम मैच तक इंतजार करना होगा। आर्सनल का अगला मुकाबला रविवार को क्रिस्टल पैलेस से होगा।

संघीय संसदीय दोनों सदनों की बैठक आज, वित्त मंत्री प्री-बजट चर्चा में प्रश्नों का जवाब देंगे

फाइल फोटो समाचार सारांश संपादकीय समीक्षा के बाद तैयार किया गया है। संघीय संसदीय दोनों सदनों की बैठक आज ५ जेठ को काठमांडू में आयोजित होगी, जहाँ प्रतिनिधि सभा की बैठक सुबह ११ बजे और राष्ट्रिय सभा की बैठक दोपहर डेढ़ बजे निर्धारित है। इस बैठक में विनियोग विधेयक के सिद्धांत और प्राथमिकताओं पर चर्चा जारी रहेगी और वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले उठाए गए प्रश्नों का उत्तर देंगे। प्री-बजट चर्चा समाप्त होने के बाद, सरकार १५ जेठ को वित्त वर्ष २०८३/०८४ का बजट प्रस्तुत करने की तैयारी में है।

५ जेठ, काठमांडू: संघीय संसदीय दोनों सदनों की बैठक आज आयोजित होगी। प्रतिनिधि सभा की बैठक सुबह ११ बजे तथा राष्ट्रिय सभा की बैठक दोपहर डेढ़ बजे आयोजित होने का कार्यक्रम है। संसद सचिवालय के महासचिव पद्मप्रसाद पाण्डेय ने बताया कि बैठक में विनियोग विधेयक के सिद्धांत और प्राथमिकताओं पर चर्चा (प्री-बजट चर्चा) आज भी जारी रहेगी। इसके साथ ही इस चर्चा में उठाए गए प्रश्नों के जवाब वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले देंगे, जिसका कार्यक्रम भी तय किया गया है। बैठक के प्रारंभ में सभापति डोलप्रसाद अर्याल प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय से प्राप्त कार्यभार वृद्धि संबंधी पत्र का विवरण पढ़कर प्रस्तुत करेंगे। राष्ट्रिय सभा की बैठक में भी इसी प्रकार की कार्यसूची होगी। प्री-बजट चर्चा के बाद सरकार १५ जेठ को वित्त वर्ष २०८३/०८४ का बजट प्रकाशित करने की तैयारी कर रही है।

इरान के साथ शांति समझौता संभव, ट्रम्प ने आक्रमण स्थगित करने की घोषणा की

ट्रम्प

तस्बिर स्रोत, Reuters

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इरान के साथ शांति समझौता होने की उम्मीद जताई है।

उन्होंने कुछ समय पहले “इरान पर किए जाने वाले सैन्य आक्रमण को फिलहाल के लिए स्थगित करने” का ऐलान किया था।

कатар, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के आग्रह पर यह निर्णय लिया गया था, ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट करके जानकारी दी।

उन्होंने बताया, “अभी गंभीर वार्ता शुरू होने वाली है, इसलिए मंगलवार को होने वाला सैन्य आक्रमण फिलहाल के लिए रुकाया गया है।”

शांति समझौते की संभावना बताते हुए ट्रम्प ने तेहरान से परमाणु हथियार विकास के सभी प्रयास रोकने की बात कही।

स्याङ्जा में १२ वर्षीय बालिका के साथ जबरन दुष्कर्म के आरोप में युवक गिरफ्तार

४ जेठ, स्याङ्जा। स्याङ्जा में १२ वर्षीय एक बालिका के साथ जबरन दुष्कर्म करने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। स्याङ्जा के हरिनास गाउँपालिका–६ में हुई इस घटना के बाद पुलिस ने आरोपी को काबू में लेकर जांच शुरू कर दी है। जिला पुलिस कार्यालय स्याङ्जा के अनुसार, गत शुक्रवार रात लगभग ११ बजे हरिनास गाउँपालिका-६ की १२ वर्षीय बालिका के साथ जबरन दुष्कर्म की सूचना मिलते ही तत्काल पुलिस को सक्रिय किया गया था।

घटना के बाद जिला पुलिस कार्यालय स्याङ्जा और इलाका पुलिस कार्यालय चिसापानी की संयुक्त टीम ने आरोपी २८ वर्षीय सन्दीप विक को शनिवार को गिरफ्तार किया, जिसके बारे में सूचना अधिकारी, पुलिस उपरीक्षक प्रसन्न राज चौधरी ने जानकारी दी। उनकी जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार विक भी हरिनास गाउँपालिका–६ के स्थायी निवासी हैं। उन्हें घटना स्थल के नजदीक से हिरासत में लिया गया है और फिलहाल जबरन दुष्कर्म के तहत जांच जारी है।

घटना के बाद पीड़ित बालिका का स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बालिका की स्थिति के बारे में कोई और विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। बाल अधिकार और संवेदनशीलता से जुड़े मामले होने के कारण पुलिस ने बताया कि पीड़ित की पहचान खुलने से संबंधित कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। जिला पुलिस कार्यालय स्याङ्जा के सूचना अधिकारी डिएसपी चौधरी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच जारी होने की जानकारी दी है।

उनके अनुसार, गिरफ्तारी के बाद आरोपी के विरुद्ध जबरन दुष्कर्म से संबंधित मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटना स्थल पर पहुंची। आरोपित को काबू में लेकर स्याङ्जा जिला अदालत से पांच दिन की अवधि के लिए म्याद बढ़ाने की अनुमति प्राप्त की गई है।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘फिलहाल घटना से जुड़े और सबूत एकत्र करने, बयानों और अन्य प्रक्रिया को जारी रखा गया है तथा कानूनी कार्रवाई भी प्रगतिशील है।’’ पुलिस ने रविवार को स्याङ्जा जिला अदालत से पाँच दिन की म्याद बढ़ाने की अनुमति लेकर जांच आगे बढ़ाई है। इसके साथ ही जांच के तहत और भी प्रमाण जुटाने, बयान दर्ज कराने और अन्य कार्रवाई जारी है।

आज केही स्थानों पर हल्की बारिश, पश्चिमी तराई में तापमान में वृद्धि के संकेत

५ जेठ, काठमाडौं। नेपाल के मौसम में वर्तमान में पश्चिमी वायु और स्थानीय वायु का प्रभाव बना हुआ है। इसके कारण कोशी, बागमती और गण्डकी प्रदेश के कुछ हिस्सों में मेघगर्जन और चट्याङ के साथ हल्की से मध्यम तीव्रता की बारिश का अनुमान है। जल तथा मौसम विज्ञान विभाग, मौसम पूर्वानुमान महाशाखा के अनुसार आज दोपहर कोशी प्रदेश के साथ-साथ बागमती और गण्डकी प्रदेश के हिमाली एवं पहाड़ी क्षेत्रों में सामान्यतः बादल छाए रहेंगे।

मधेश प्रदेश और अन्य प्रदेशों के हिमाली तथा पहाड़ी क्षेत्रों में आंशिक बादल रहने का पूर्वानुमान है, वहीं बाकी तराई क्षेत्र सामान्यतः साफ रहेगा। कोशी प्रदेश के हिमाली और पहाड़ी क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में, साथ ही बागमती और गण्डकी प्रदेश के हिमाली और पहाड़ी क्षेत्रों में मध्यम बारिश और हिमपात की संभावना है। मधेस, कोशी, बागमती और गण्डकी प्रदेश के तराई तथा अन्य पहाड़ी व हिमाली क्षेत्रों में एक-दो स्थानों पर मेघगर्जन, चट्याङ के साथ हल्की बारिश और हिमपात होने का जोखिम मौजूद है।

सुदूरपश्चिम और लुम्बिनी प्रदेश के तराई क्षेत्रों में तापमान बढ़ने की संभावना जताई गई है। आज रात कोशी प्रदेश सहित बागमती, गण्डकी और लुम्बिनी प्रदेश के हिमाली तथा पहाड़ी इलाकों में सामान्यतः बादल छाए रहेंगे, जबकि अन्य पहाड़ी और हिमाली इलाकों में आंशिक बादल रहेंगे। बाकी तराई क्षेत्र मुख्यतः स्पष्ट रहेगा। कोशी प्रदेश सहित बागमती, लुम्बिनी और गण्डकी प्रदेश के हिमाली और पहाड़ी क्षेत्रों के एक-दो स्थानों पर मेघगर्जन व चट्याङ के साथ हल्की बारिश और हिमपात की संभावना बनी रहेगी।

परालको आगो हो; परालको आगो होइन ! – Online Khabar

पराल की आग आग: नई फिल्म का विमोचन

नेपाली साहित्य के प्रथम आधुनिक कथाकार गुरुप्रसाद मैनाली के ‘नासो’ कथा संग्रह में सम्मिलित ‘पराल की आग’ कहानी पर आधारित फिल्म का नया संस्करण हाल प्रदर्शन में है। चामे और गौंथली की कथा प्रस्तुत करने वाली यह पारिवारिक फिल्म पति–पत्नी के बीच के द्वंद्व, विवाद, वाद-विवाद और अस्थायी मारपीट को पारंपरिक मान्यता के अनुसार क्षणभंगुर बताती है और जोड़ी को अंततः मेल-मिलाप करने पर जोर देती है। यह कहानी सदियों से चली आ रही कहावत ‘पति-पत्नी के झगड़े पराल की आग की तरह होते हैं’ को स्वीकार करती है। लेकिन क्या पति–पत्नी के संबंध केवल इतना सीमित होते हैं? क्या झगड़े, यातना, शारीरिक हिंसा, गाली-गलौज, अपमान और तिरस्कार के बावजूद वे फिर से प्रेमपूर्ण, स्नेही, कर्तव्यनिष्ठ और समर्पित हो सकते हैं? यह क्या संभव है? आज के दौर में यह प्रश्न नया आयाम ले चुका है।

कथाकार मैनाली ने जब यह कहानी लिखी, उस समय सामाजिक-राजनैतिक परिस्थिति ऐसी थी जहां पति-पत्नी के विवादों को पराल की आग समझा जाता था। वर्तमान स्थिति में देखें तो क्या अभी भी वही स्थिति बनी हुई है? नेपाली वर्ष २०२२ में प्रकाशित ‘नासो’ कथा संग्रह में मैनाली ने ९० के दशक की शुरुआत से लेकर २००७ के बाद लिखी गई ग्यारह कहानियां शामिल की हैं, जिनमें ‘पराल की आग’ भी है। नेपाली वर्ष २०४० में इन्द्रबहादुर राई ने ‘कठपुतली का मन’ नामक कथा संग्रह प्रकाशित किया, जिसमें शीर्षक कथा में चार उप-कथाएँ हैं और उनकी जड़ें कुछ हिस्सों में चामे और गौंथली की कहानियों से मिलती-जुलती दिखती हैं।

इन कहानियों में कुछ पात्रों के संबंधों की असुरक्षा पत्ते की तरह हवा में हिलती दिखाई देती है, जबकि कुछ ने आत्महत्या का प्रयास भी किया है। एक कथा में पंचायती काल में शादी के बाद पत्नी ने आत्महत्या कर ली, तो कहीं किशोरावस्था में विवाह होने और फिर दो बच्चों की मां का रिश्तों से टूट कर जीवन का अंत हो गया। दंपती पात्रों में कुछ प्रमुख और कुछ गौण भूमिका में हैं। कथाकार राई ने अपनी कहानियों में दंपतियों के झगड़ों को केवल पराल की आग नहीं बल्कि उससे कुछ अधिक जटिल प्रमाणित किया है। मैनाली के द्वारा कही गई पुरानी मान्यता ‘पति-पत्नी का झगड़ा पराल की आग है’ को राई ने लगभग चार दशकों बाद चुनौती दी है कि यह केवल पराल की आग नहीं है।

अब दाम्पत्य कलह केवल पराल की आग नहीं बल्कि सामाजिक वास्तविकता को समझने में हमें वर्षों लग गए। नेपाली वर्ष २०४० में प्रकाशित कथाओं ने इस बात को स्पष्ट किया कि वैवाहिक जीवन में केवल पुरुष दोषी नहीं होते, महिलाओं की भी कुछ भूमिका होती है। यद्यपि समय बहुत बदल चुका है, हम अभी भी चामे और गौंथली की वही पुरानी कहानी दोहरा रहे हैं। संवाद ‘पत्नी से जूझना होगा क्या?’ आज के नवयुवकों को अर्थपूर्ण लगता है या नहीं, यह प्रश्न सामने आता है।

‘पराल की आग’ जैसी कहानियां भूतकाल की हैं। क्या आज भी इन्हीं कथाओं और उनके भावनात्मक पक्षों को बिना परिवर्तन स्वीकार करना चाहिए? जब ‘पराल की आग’ फिल्म बनाई गई, तो निर्माता, निर्देशक और कलाकारों ने क्या इन्द्रबहादुर राई की ‘कठपुतली का मन’ कहानी पढ़ी थी या नहीं? इस नवीन कथा को समझने और समीक्षा करने के लिए क्या नई पीढ़ी के पाठक और दर्शक तैयार हो चुके हैं या नहीं?

नेपाल में इबोला का खतरा कितना है और सरकार क्या कर रही है

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में स्वास्थ्यकर्मी और संक्रमित मरीज

तस्वीर स्रोत, Reuters

तस्वीर का कैप्शन, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में 2018 और 2020 के बीच हुए घातक प्रकोप के दौरान लगभग 2,300 लोगों की मौत हुई थी

प्रकाशित

पढ़ने का समय: 4 मिनट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के प्रकोप को अंतर्राष्ट्रीय जनस्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने के बाद नेपाल में भी इसको लेकर सतर्कता बरती जा रही है, यह जानकारी स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय ने दी है।

डब्ल्यूएचओ ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के पूर्वी इतुरी प्रांत में इबोला फैलने के बाद विश्वव्यापी चिंता को देखते हुए रविवार को “विश्व स्वास्थ्य संकट” घोषित किया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि प्रभावित देशों से आने वाले नेपाली और विदेशी यात्रियों की स्क्रीनिंग और जरूरत पड़ने पर क्वारंटाइन का प्रावधान किया गया है।

हालांकि भारत में अब तक इबोला के कोई मामले पुष्टि नहीं हुए हैं, फिर भी स्थलमार्ग पर कोई विशेष तैयारी नहीं है, हालात के अनुसार तैयारी की योजना बनी हुई है।

एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ के अनुसार, वर्तमान में जोखिम कम दिख रहा है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, फिर भी सतर्कता बरतना आवश्यक है।

प्लाटिनमको प्रयोगबिनै सस्तोमा हाइड्रोजन इन्धन उत्पादन गर्ने नयाँ प्रविधि

प्लाटिनमविरही सस्तो हाइड्रोजन इन्धन उत्पादनका लागि नयाँ प्रविधि विकास

वैज्ञानिकहरूले प्लाटिनमविना सस्तो र दीगो क्याथोडबाट स्वच्छ र नवीकरणीय हाइड्रोजन इन्धन उत्पादन गर्ने नयाँ प्रविधि विकास गरेका छन्। नयाँ प्रविधिमा रेनियम फस्फाइड र मोलिब्डेनम फस्फाइडको मिश्रणबाट तयार गरिएको क्याथोडले उच्च विद्युत् घनत्वमा १,००० घण्टासम्म निरन्तर काम गरेको छ। यस प्रविधिले स्वच्छ ऊर्जा लागत घटाउन र औद्योगिक स्तरमा ठूलो मात्रामा हाइड्रोजन उत्पादनमा सहयोग पुर्‍याउने विश्वास गरिएको छ। ५ वैशाख, काठमाडौं।

वैज्ञानिकहरूले महँगो प्लाटिनम धातु बिना स्वच्छ र नवीकरणीय हाइड्रोजन इन्धन उत्पादन गर्ने एउटा सस्तो र टिकाउ प्रविधि पत्ता लगाएका छन्। ‘वासिङ्टन युनिभर्सिटी इन सेन्ट लुइस’ का अनुसन्धानकर्ताहरूले विकास गरेको यस नयाँ प्रविधिले भविष्यमा स्वच्छ ऊर्जाको लागत घटाउन र व्यावसायिक रूपमा ठूलो परिमाणमा उत्पादन गर्न महत्वपूर्ण सहयोग पुर्‍याउने अनुमान गरिएको छ।

सौर्य वा वायु ऊर्जा जस्ता नवीकरणीय स्रोतबाट बिजुली निकालेर पानीलाई हाइड्रोजन र अक्सिजनमा टुक्र्याउने प्रविधिलाई ‘वाटर इलेक्ट्रोलाइजर’ भनिन्छ। यस प्रक्रियाबाट उत्पादित हाइड्रोजन पूर्ण रूपमा प्रदूषणरहित र स्वच्छ इन्धनको रूपमा प्रयोग हुन्छ। तर अहिलेसम्म पानी टुक्र्याउने प्रणालीमा ‘प्लाटिनम’ समूहका अत्यन्त महँगो धातुहरू क्याथोडको रूपमा प्रयोग गर्नुपर्ने भएकाले स्वच्छ हाइड्रोजन इन्धन उत्पादनको लागत निकै उच्च थियो।

म्याकेल्भी स्कूल अफ इन्जिनियरिङका प्राध्यापक गैंग वुको नेतृत्वमा रहेको अनुसन्धान टोलीले प्लाटिनमको सट्टा दुईवटा सस्ता फस्फाइडहरू, ‘रेनियम फस्फाइड’ (Re_2P) र ‘मोलिब्डेनम फस्फाइड’ को मिश्रणबाट नयाँ सम्मिश्रित क्याथोड तयार पारेका छन्। यसमा प्रयोग गरिएको रेनियमले क्याथोडको सतहबाट हाइड्रोजनलाई सजिलै बाँध्न र मुक्त गर्न मद्दत गर्छ भने मोलिब्डेनमले क्षारीय इलेक्ट्रोलाइटमा पानीका अणुहरूलाई तीव्र गतिमा टुक्र्याउने काम गर्छ।

आज की विदेशी मुद्रा विनिमय दर

५ जेठ, काठमांडू । नेपाल राष्ट्र बैंक ने आज के लिए विदेशी मुद्रा विनिमय दर निर्धारित की है। राष्ट्र बैंक के अनुसार अमेरिकी डॉलर की खरीद दर १५३ रुपये ८६ पैसे और बिक्री दर १५४ रुपये ४६ पैसे है। यूरोपीय यूरो की खरीद दर १७८ रुपये ९५ पैसे और बिक्री दर १८९ रुपये ६४ पैसे, यूके पाउंड स्टर्लिंग की खरीद दर २०५ रुपये ४८ पैसे और बिक्री दर २०६ रुपये २८ पैसे, स्विस फ्रैंक्स की खरीद दर १९६ रुपये ६४ पैसे और बिक्री दर १९६ रुपये ४० पैसे निर्धारित की गई है।

ऑस्ट्रेलियन डॉलर की खरीद दर ११० रुपये ३८ पैसे और बिक्री दर ११० रुपये ४५ पैसे, कनाडियाई डॉलर की खरीद दर १११ रुपये ८९ पैसे और बिक्री दर ११२ रुपये ३२ पैसे, सिंगापुर डॉलर की खरीद दर १२० रुपये १८ पैसे और बिक्री दर १२० रुपये ६५ पैसे कायम की गई है। जापानी येन की खरीद दर १० के लिए ९ रुपये ६८ पैसे और बिक्री दर ९ रुपये ७२ पैसे, चीनी युआन की खरीद दर २२ रुपये ६३ पैसे और बिक्री दर २२ रुपये ७१ पैसे, सऊदी अरब रियाल की खरीद दर ४१ रुपये ०० पैसे और बिक्री दर ४१ रुपये १६ पैसे है।

राष्ट्र बैंक के अनुसार थाई भाट की खरीद दर ४ रुपये ७१ पैसे और बिक्री दर ४ रुपये ७२ पैसे, यूएई दिरहम की खरीद दर ४१ रुपये ८९ पैसे और बिक्री दर ४२ रुपये ०६ पैसे, मलेशियन रिंग्गेट की खरीद दर ३८ रुपये ६९ पैसे और बिक्री दर ३८ रुपये ८४ पैसे, साउथ कोरियन वन की खरीद दर १०० के लिए १० रुपये २५ पैसे और बिक्री दर १० रुपये २८ पैसे, स्वीडिश क्रोनर की खरीद दर १६ रुपये ३१ पैसे और बिक्री दर १६ रुपये ३८ पैसे, तथा डेनिश क्रोनर की खरीद दर २३ रुपये ८४ पैसे और बिक्री दर २४ रुपये ०४ पैसे निर्धारित की गई है।

राष्ट्र बैंक ने हांगकांग डॉलर की खरीद दर १९ रुपये ६५ पैसे और बिक्री दर १९ रुपये ७२ पैसे, कुवैती दिनार की खरीद दर ५०१ रुपये ५० पैसे और बिक्री दर ५०३ रुपये ४६ पैसे, बहरीन दिनार की खरीद दर ४०७ रुपये ९५ पैसे और बिक्री दर ४०९ रुपये ५५ पैसे, ओमान रियाल की खरीद दर ३९९ रुपये ६३ पैसे और बिक्री दर ४०१ रुपये १९ पैसे बताई है। भारतीय रुपया १०० के लिए खरीद दर १६० रुपये और बिक्री दर १६० रुपये १५ पैसे निर्धारित की गई है। राष्ट्र बैंक ने बताया है कि यह विनिमय दर आवश्यकतानुसार कभी भी संशोधित की जा सकती है। वाणिज्य बैंक द्वारा निर्धारित विनिमय दर अलग हो सकती है और अपडेटेड विनिमय दर केंद्रीय बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।

राष्ट्रपति रनिङ सिल्ड जेठ २० देखि – Online Khabar

राष्ट्रपति रनिङ सिल्ड जेठ २० देखि काठमाडौंमा आयोजित की जाएगी

राष्ट्रिय खेलकुद परिषद् द्वारा आयोजित १६वीं केन्द्रीय राष्ट्रपति रनिङ सिल्ड जेठ २० से २२ गते तक काठमाडौं में आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता में एथलेटिक्स, भलिबल, कबड्डी, कराते, तेक्वान्दो और उसु खेलों में प्रतिस्पर्धा होगी। ४ जेठ, काठमाडौं। राष्ट्रिय खेलकुद परिषद् (राखेप) के आयोजन में होने वाली १६वीं केन्द्रीय राष्ट्रपति रनिङ सिल्ड जेठ २० से २२ गते तक काठमाडौं में आयोजित की जाएगी। यह निर्णय प्रतियोगिता संचालन एवं व्यवस्थापन समिति के संयोजक और राखेप सदस्य-सचिव रामचरित्र मेहताको अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया है। पहले यह प्रतियोगिता वैशाख ६ से ८ गते तक आयोजित होनी थी, लेकिन निर्धारित तिथि से दो सप्ताह बाद कर दी गई है। प्रतियोगिता में एथलेटिक्स, भलिबल, कबड्डी, कराते, तेक्वान्दो और उसु खेलों में मुकाबले होंगे। बैठक में खेलकुद प्रतियोगिता एवं योजना विभाग के प्रमुख मिनकुमार शर्मा, संबंधित खेलों के राष्ट्रीय संघ के प्रतिनिधि और मुख्य प्रशिक्षकों की उपस्थिति थी। बैठक को सम्बोधित करते हुए सदस्य-सचिव रामचरित्र मेहताले बताया कि प्रतियोगिता को व्यवस्थित, मर्यादित और सहभागितामूलक बनाने पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

नेपाल बार एसोसिएसन का निर्णय: सर्वोच्च प्रशासन द्वारा रिट याचिका दायर न करना अधिकार की सीमा के बाहर कार्य

नेपाल बार एसोसिएसन ने सर्वोच्च अदालत में दायर रिट याचिकाओं को बिना कारण दरपीठ किए बिना दर्ज न करना सर्वोच्च प्रशासन का अधिकार क्षेत्र से बाहर का कार्य माना है। बार एसोसिएसन ने कार्यवाहक प्रधानन्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल के आदेश का पालन न करना प्रशासन की असामान्य और अप्राकृतिक व्यवहार बताया है। बार ने कहा है कि इस प्रकार के प्रशासनिक रवैए को अभिलेखीय बनाए जाने, उसे विस्मृति में न जाने देने वाला ऐतिहासिक त्रुटि तथा प्रचलित कानून को चुनौती देने वाला घटना माना जाना चाहिए। ४ जेठ, काठमांडू।

नेपाल बार एसोसिएसन ने सर्वोच्च अदालत में दायर रिट याचिकाओं को बिना कारण दरपीठ करके दर्ज न करना सर्वोच्च प्रशासन की अधिकार सीमा से बाहर का कार्य घोषित किया है। इस कार्य से न्याय प्रक्रिया में भी बाधा उत्पन्न होती है, यह बार एसोसिएसन ने बताया। सोमवार दोपहर आयोजित बार की आकस्मिक बैठक में कार्यवाहक प्रधानन्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल के आदेश का प्रशासन द्वारा पालन न करने पर आपत्ति जताई गई।

‘सर्वोच्च अदालत में दर्ज किए जाने वाले रिट याचिकाओं को बिना कारण दर्ज न करके यहां रोकना स्पष्ट रूप से प्रशासनिक अधिकार के बाहर का कार्य और न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने वाला कार्य है, ऐसा नेपाल बार एसोसिएसन ठहराता है,’ महासचिव केदारप्रसाद कोइराल द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है। साथ ही, प्रशासन के इस असामान्य और अप्राकृतिक रवैए को अभिलेखीय योग्य, विस्मृति में नहीं जाने वाला ऐतिहासिक त्रुटि एवं प्रचलित कानून को आकर्षित करने वाला घटना बताया गया है।

‘न्याय प्रशासन की अंतिम जिम्मेदारी निभाने वाले कार्यवाहक प्रधानन्यायाधीश के आदेश का पालन न करना प्रशासन की असामान्य और अप्राकृतिक व्यवहार ही नहीं, बल्कि अभिलेखीय योग्य, विस्मृति में नहीं जाने वाला ऐतिहासिक त्रुटि एवं प्रचलित कानून को चुनौती देने वाला घटना भी है, यह हमारी स्पष्ट धारणा है,’ बार ने विज्ञप्ति में उल्लेख किया। कार्यवाहक प्रधानन्यायाधीश मल्ल ने दरपीठ किए गए रिट याचिकाओं को दर्ज करने का निर्देश दिया था, जिसकी प्रशासन द्वारा अवहेलना की गई है, इस विषय पर बार ने ध्यानाकर्षित किया है।

सामान्य विवादमै ज्यान मार्ने अपराध – Online Khabar

सामान्य विवादों में हत्याओं की लगातार बढ़ती घटनाएँ

काठमाडौं के चन्द्रागिरी नगरपालिका–३, थानकोट खरिबोट में २५ वर्षीय जाकिर मन्सुरी को सामान्य विवाद के बाद हत्या कर दी गई। नुवाकोट के म्यागङ गाउँपालिका–४, किम्ताङ में दो भाइयों के सामान्य विवाद में गोली चलाकर हत्या हुई। ललितपुर के पाटन में १५ चैत को सिर्जन नेम्वाङ और सुमित नेम्वाङ भाइयों की सामान्य विवाद में हत्या हुई। ४ जेठ, काठमाडौं। काठमाडौं के चन्द्रागिरी नगरपालिका–३ थानकोट खरिबोट क्षेत्र में २ जेठ की रात महोत्तरी के रहने वाले २५ वर्षीय जाकिर मन्सुरी की हत्या हुई। महोत्तरी के ३८ वर्षीय समी अहमद ने तरकारी काटने वाले चाकू से हमला कर मन्सुरी की हत्या की, पुलिस ने बताया। चाकू के घाव लगने के कारण जाकिर को सतुंगल स्थित मेडपोइंट अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जिल्ला प्रहरी परिसर काठमाडौं के एसपी पवनकुमार भट्टराई के अनुसार यह हत्या सामान्य पारिवारिक विवाद के कारण हुई। पुलिस के अनुसार समी और जाकिर सगे-सम्बन्धी (भिनाजु और सालो) हैं। दादी भिनाजु से हुए विवाद के बाद भिनाजु ने सालो की हत्या की, यह स्पष्ट हुआ। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सामान्य विवाद की वजह से सालो की हत्या हुई। सामान्य विवाद में जान गंवाने वाले जाकिर पहले व्यक्ति नहीं हैं। पिछले एक महीने में ऐसे मामले बढ़े हैं। ००० नुवाकोट के म्यागङ गाउँपालिका–४ किम्ताङ में ३० वैशाख को दो भाइयों के शव मिले। ४३ वर्षीय सोमनाथ तामाङ और उनके ३६ वर्षीय भाई सूर्यमान तामाङ के शव जंगल में पाए गए। शव किम्ताङ खोलामा बड़े पत्थरों से दबाए हुए थे। नुवाकोट के एसपी विपिन रेग्मी के अनुसार सुबह १० बजे सूचना मिलने के बाद खोजी की गई। यह घटना सीमा क्षेत्र में हुई। पुलिस को पता चला कि गोली चलाकर भाइयों की हत्या हुई। परिवार के अनुसार वे दोनों मंगलवार सुबह खेत की नाली बनाने गए थे, इसके बाद संपर्क टूट गया। यह जगह सड़क से लगभग पाँच घंटे पैदल दूरी पर और धादिङ के निकट है। यह हत्या भी सामान्य विवाद के कारण हुई प्रतीत होती है। जांच के दौरान ६ लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से ४ को छोड़ा गया और २ अभी जांच में हैं, जिनमें धनबहादुर और सोमबहादुर तामाङ शामिल हैं। धादिङ से पकड़े गए इन दोनों के बारे में पुलिस ने बताया कि बड़ा विवाद नहीं था। मृतक भाइयों ने गांव में दुकान के ठेके पर काम किया करता था। हत्या के आरोप में पकड़े गए धनबहादुर और सोमबहादुर मजदूर हैं। ठेका किसी और के नाम होने से वे भाइयों ने काम देने से मना किया था, विवाद बढ़ने पर हत्या हुई, पुलिस ने कहा। विवाद के बाद दोनों भाइयों ने मोटरसाइकिल से नदी की ओर गए। रास्ते में धन और सोम बंदूक लिए बैठे थे। रास्ता रोककर भरुवा बंदूक से भाइयों की हत्या की गई, पुलिस का कहना है। ००० नुवाकोट में सामान्य विवाद में भाइयों की हत्या की तरह ललितपुर के पाटन में भी सामान्य विवाद से भाइयों की हत्या हुई। १५ चैत को पाटन के कृष्ण मंदिर परिसर में सिर्जन नेम्वाङ और सुमित नेम्वाङ की हत्या की गई। नेम्वाङ भाइयों ने फोन किया था लेकिन नंबर गलत होकर संजीव नेपाली के मोबाइल पर कॉल गया। पुलिस के अनुसार वे एक-दूसरे को नहीं जानते। अनजान नंबर से फोन आने के बाद बातचीत में विवाद हुआ। ललितपुर के एसएसपी होविंद्र बोगटी के अनुसार तब पाटन में मिलने का बोलकर कृष्ण मंदिर परिसर में मुलाकात हुई। वहां दोनों पक्षों के बीच हाथापाई हुई, जिसमें संजीव ने चाकू से हमला कर भाइयों की हत्या कर दी। हत्या मामले में पुलिस ने संजीव नेपाली के साथ नैवलपरासी के २१ वर्षीय गगन सुनार और झापा के २७ वर्षीय विकास लिम्बु के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। नेपाली को आजीवन कारावास की मांग की गई जबकि दोनों अन्य को मतियार के रूप में मुकदमा चलाया गया। तीनों को नख्खु कारागार भेजा गया। भाइयों की हत्या गलत नंबर पर कॉल जाने से शुरू हुई, जिससे यह विवाद काठमाडौं उपत्यका में ही शाम तक जानलेवा बन गया। ००० २३ वैशाख दोपहर लगभग डेढ़ बजे कीर्तिपुर नगरपालिका–१०, पोडेटोल में गुल्मी के धुर्कोट नगरपालिका–७ के रहने वाले २२ वर्षीय विपिन घिमिरे को हत्या किया गया। धारदार हथियार से हमला होने पर घिमिरे जमीन पर गिर गए और कीर्तिपुर अस्पताल पहुंचाए जाने पर चिकित्सकों ने मृत घोषित किया। हत्या करने वाला और मारा गया दोनों दोस्त थे। विवाद बढ़ने पर धारदार हथियार से हमला किया गया। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में ६ सदस्यों का समूह दिखाई देता है, जिसमें विपिन की हत्या हुई। पुलिस के अनुसार हत्या का मुख्य कारण एक खिल्ली गांजा था। गांजा को लेकर विवाद के बाद समूह ने दिन में ही हथियार से हमला कर विपिन की हत्या की। हत्या के मुख्य आरोपी सुजन शाही को काठमाडौं उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालय की टीम ने कीर्तिपुर चोभार से गोली चलाकर गिरफ्तार किया था। अब तक चार गिरफ्तार हो चुके हैं और एक फरार है। काठमाडौं में दिन में हुए इस हत्या मामले में पुलिस ने कहा कि कोई बड़ा विवाद नहीं था। लागूऔषध विवाद के कारण हत्या हुई। ००० पोखरा में २५ चैत की रात सिर्जना पौडेल केसी की भयानक हत्या हुई। पृथ्वीचोक में जुत्तापसले चलाए जाने वाले पौडेल पर खुकुरी से हमला किया गया, वह गिरते हुए नीचे आ गईं, जहां उनकी मृत्यु हो गई। जेठी पत्नी ने विषाक्त पदार्थ खाकर आत्महत्या की थी। कृष्ण केसी ने चार साल पहले सिर्जन से विवाह किया था। दो साल पहले कृष्ण का भी निधन हो गया था और उनकी तीन साल की बेटी है। विवाह और पति के मौत के बाद बढ़े पारिवारिक कलह और हिस्सेदारी विवाद ने सिर्जना की हत्या कराई। इस मामले में भांजा भी शामिल था, पुलिस ने बताया। ००० ये घटनाएं दर्शाती हैं कि लोगों की सामान्य विवादों में भी आक्रामकता बढ़ने से हत्याओं जैसे जघन्य अपराधों में वृद्धि हो रही है। पुलिस अधिकारी कहते हैं कि विभिन्न तनाव और अवसाद लोगों को आक्रामक बनाते हैं। विशेष रूप से आवेग में समझदारी खो जाने से इस तरह के अपराध होते हैं, मनोचिकित्सक बताते हैं। अचानक आए तीव्र आवेग पर नियंत्रण न होने से व्यक्ति क्रूर हो जाता है, और सामान्य विवाद भी हत्या तक पहुंच जाता है। लोग झगड़े बढ़ते देख स्वयं समाधान खोजने लगते हैं, पर कभी-कभी व्यक्तित्व की समस्याओं से अत्यधिक आवेग नियंत्रण खो बैठता है और बड़ी दुर्घटना हो जाती है, यह तर्क मनोचिकित्सकों ने रखा है। पुलिस ने भी कहा कि आस-पास का समाज, माहौल, संगति और डिजिटल दुनिया मानवीय आक्रामकता को बढ़ावा दे रहे हैं।

प्रस्तावित प्रधानन्यायाधीश डा. मनोज शर्मा के खिलाफ १६ शिकायतें दर्ज

प्रस्तावित प्रधानन्यायाधीश डा. मनोज शर्मा के खिलाफ कुल १६ शिकायतें दर्ज की गई हैं। संसदीय सुनवाई समिति ने शर्मा के विरुद्ध शिकायतें आमंत्रित करने के लिए १० दिन का समय दिया था। ये शिकायतें मंगलवार को सार्वजनिक किए जाने की तैयारी चल रही है। ३ जेठ, काठमाडौं। प्रस्तावित प्रधानन्यायाधीश डा. मनोज शर्मा के खिलाफ कुल १६ शिकायतें दर्ज हुई हैं। शिकायतें मंगलवार को खोली जाएंगी, यह जानकारी प्राप्त हुई है। गत वैशाख २६ को हुई संसदीय सुनवाई समिति की बैठक में शर्मा के खिलाफ शिकायतें आमंत्रित करने के लिए १० दिन का समय प्रदान किया गया था।

प्रधानमन्त्री संसद्‌मा आउँदैनन्, मन्त्री समितिमा जानुपर्दैन

प्रधानमंत्री संसद में मौजूद नहीं होंगे, मंत्रियों को समिति में अनुपस्थित रहने की व्यवस्था प्रस्तावित

समाचार सारांश संपादकीय समीक्षा के पश्चात तैयार किया गया है। श्रम संस्कृति पार्टी के सांसदों ने प्रधानमंत्री शाह को संसदीय मर्यादा याद दिलाते हुए प्लेकार्ड के साथ संसद में विरोध प्रदर्शन किया। प्रतिनिधि सभा नियमावली मसौदा समिति ने मंत्रियों की अनिवार्य उपस्थिति का प्रावधान हटाकर संसदीय समिति की बैठकें संचालित करने का प्रस्ताव रखा है। सांसदों ने प्रधानमंत्री के प्रत्यक्ष प्रश्नोत्तर कार्यक्रम में न होने और नीति तथा कार्यक्रम में उनकी अनुपस्थिति को संसदीय अभ्यास के लिए कमजोर करने वाला बताया है। ४ जेठ, काठमांडू। सोमवार को प्रतिनिधि सभा में श्रम संस्कृति पार्टी के सांसद प्लेकार्ड लेकर उपस्थित हुए। संसद से दूरी बनाए रखने वाले प्रधानमंत्री वलेन्द्र शाह (बालेन) को संसदीय मर्यादा याद दिलाने के लिए उन्होंने कुछ हद तक मर्यादा को चुनौती दी। इस संबंध में पार्टी अध्यक्ष हर्क साम्पाङ ने कहा, ‘सभामुख महोदय, प्लेकार्ड को लेकर सभी में जिज्ञासा होगी। संसद सार्वभौम है या सरकार? सरकार को सार्वभौम संसद के प्रति जवाबदेह बनाने का हमारा प्रयास है।’ राई ने अपने सीने पर प्लेकार्ड चिपकाकर संसद के रोस्टम पर जाकर लिखा, ‘प्रधानमंत्री संसद के प्रति जवाबदेह होना ही होगा, प्रश्न से भागना नहीं चलेगा! जनमत का सम्मान करो। अध्यादेश ला कर बंद करो! संसदीय जिम्मेदारी निभाओ।’

संसद में प्लेकार्ड दिखाकर विरोध करना संसदीय मर्यादा में आता है या नहीं इस पर बहस हो सकती है। इसी बहस में सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) और सरकार की कुछ गतिविधियां भी जुड़ीं। तीन महत्वपूर्ण विषय, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी की सांसद बलावती शर्मा और राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी के सांसद ताहीर अली भाट के अनुसार, वर्तमान संसद में तीन विषय लंबे समय तक ‘नोटिस’ में रहेंगे। पहला: सरकार की नीति तथा कार्यक्रम के आलोचनात्मक मीटिंग में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति। दूसरा: विभागीय मंत्री की उपस्थिति के बिना संसदीय विषयगत समिति की बैठक संचालित करने का प्रस्ताव। तीसरा: संसद में प्रधानमंत्री के साथ प्रत्यक्ष प्रश्नोत्तर कार्यक्रम का अनिश्चित होना। सोमवार की बैठक में मसौदा समिति के अध्यक्ष गणेशप्रसाद पराजुली ने प्रतिनिधि सभा नियमावली मसौदा समिति की रिपोर्ट २०८३ पर विचार के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किया। सैद्धांतिक चर्चा में रास्वपा सांसद भाट ने कहा, ‘प्रधानमंत्री संसद में न आएं, मंत्री संसदीय समिति में भी न जाएं, ऐसे नियम बनाना कैसी विडम्बना है?’

विभागीय मंत्री की अनुपस्थिति की परंपरा जारी रखने की वकालत करते हुए उन्होंने बहुमत के अहंकार से बचने का आग्रह किया। ‘नियमावली के नियम १७८ (४) में बदलाव न करें। पहले जैसा था वैसा ही रहना चाहिए,’ उन्होंने कहा, ‘अब दो तिहाई बहुमत है इसलिए ऐसा करना है, तो इस फैसले का नकारात्मक प्रभाव हो सकता है।’ वर्तमान में संसदीय समिति की बैठक में मंत्री की उपस्थिति अनिवार्य है। नियम १७८ के उपनियम ४ के तहत विधेयकों पर चर्चा के दौरान मंत्री की उपस्थिति अनिवार्य होती है और अन्य कार्यसूची में आवश्यकतानुसार उपस्थित होना पड़ सकता है। लेकिन प्रस्तावित मसौदे में मंत्री के अनुपस्थित रहने पर भी संसदीय समिति की बैठक संचालित करने का प्रावधान रखा गया है।

मसौदा नियमावली के नियम १७८ में संसदीय विषयगत समितियों का काम, कर्तव्य और अधिकार उल्लेखित हैं। उपनियम ४ में विधेयक पर चर्चा के दौरान मंत्री की उपस्थिति अनिवार्य बताई गई है और अन्य मामलों में आवश्यकतानुसार उपस्थित रहने की व्यवस्था है। परम्परा को तोड़ते हुए नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी की सांसद बलावती शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ प्रत्यक्ष प्रश्नोत्तर कार्यक्रम शुरू होना बाकी है। उन्होंने सोमवार की बैठक में कहा, ‘प्रधानमंत्री के साथ प्रत्यक्ष प्रश्नोत्तर व्यवस्था लागू हो। जेठ माह के पहले बैठक में हम प्रधानमंत्री से प्रश्न पूछ सकेंगे, याद दिलाना चाहता हूँ।’

प्रतिनिधि सभा नियमावली के नियम ५६ में प्रधानमंत्री या उनके कार्यक्षेत्र से संबंधित विषयों पर प्रश्न पूछने के लिए सभामुख को हर महीने के पहले सप्ताह के एक दिन की बैठक के पहले एक घंटे का समय अलग रखने का प्रावधान है। ‘सभामुख ऐसा करेंगे’ कहा गया यह अनिवार्य प्रक्रिया है। यदि किसी कारण निर्धारित दिन प्रश्नोत्तर कार्यक्रम नहीं हो पाता है, तो अगले बैठक के पहले घण्टे में भी इसके लिए समय निकालना आवश्यक है। संसदीय व्यवस्था में प्रधानमंत्री को संसद के माध्यम से जनता के हर विषय को सुनना होता है। प्रश्नोत्तर कार्यक्रम का उद्देश्य ही प्रधानमंत्री को संसद के सामने जवाबदेह बनाना है। लेकिन यह कार्यक्रम आगामी असार १५ तक के संसदीय कैलेंडर में नहीं है। संसद में प्रश्नोत्तर कार्यक्रम न होने से यह संविधान के धारा ७६ (१०) का उल्लंघन होगा, सांसद शर्मा ने बताया। संविधान की धारा ७६ के उपधारा १० में कहा गया है, ‘प्रधानमंत्री और मंत्री समूहगत रूप से संघीय संसद के प्रति उत्तरदायी होंगे तथा मंत्री व्यक्तिगत रूप से अपने मंत्रालय और संघीय संसद के प्रति जवाबदेह होंगे।’

नेपाली कांग्रेस के सांसद अर्जुननरसिंह केसी के अनुसार, प्रधानमंत्री शाह ने नीति तथा कार्यक्रम की चर्चा में अनुपस्थिति के साथ एक परंपरा तोड़ी है। केसी कहते हैं, ‘जापान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, भारत जैसी संसदीय व्यवस्थाओं में सरकार की वार्षिक नीति तथा कार्यक्रम की प्रस्तुति और चर्चा स्वयं प्रधानमंत्री संसद में करते हैं और प्रश्नों के उत्तर देते हैं। नेपाल में भी यह प्रक्रिया पहले रही।’ लेकिन इस बार प्रधानमंत्री उपस्थित नहीं हुए और न ही जवाब दिया। ‘२०१७ साल के १८ महीने और २०४७ के बाद संसद में ऐसी अनुपस्थिति नहीं हुई। कोई दिखाए तो मैं मान जाऊंगा,’ वैशाख ३१ को केसी ने सरकार और रास्वपा को चुनौती दी।

संसद का अपमान हो रहा है? सरकार संसदीय कार्यक्रम टालने लगी है, जिसके कारण विपक्षी सांसद संसद में कड़ी आवाज उठा रहे हैं। दो सीट कम दो तिहाई बहुमत वाली एकल सरकार पर संसद कमजोर करने का आरोप लग रहा है। ‘क्या संसद का अपमान हो रहा है?’ श्रम संस्कृति पार्टी के सांसद आरन राई ने संसद में प्रश्न किया, ‘नीति तथा कार्यक्रम की बैठक में प्रधानमंत्री क्यों नहीं आए? मंत्री मिनी संसद में नहीं होकर भी बैठक में कैसे रह सकते हैं? मंत्री संसद के प्रति जवाबदेह होना छोड़ चुके हैं?’ वे और उनका दल संसदीय नियम और प्रक्रिया के तहत सरकार को जवाबदेह बनाना जारी रखेंगे। ‘हम जिन विषयों को उठा रहे हैं वे जनताका मुद्दे हैं, व्यक्तिगत नहीं। जनता की बात सुनने के लिए संसद और मिनी संसद दोनों में मंत्री की उपस्थिति अनिवार्य होनी चाहिए,’ उन्होंने कहा।

संसदीय समितियों की अधिकांश चर्चाएं सरकार से जुड़े विषयों पर होती हैं। मंत्रालय के निर्णय, बजट खर्च, भ्रष्टाचार, नीति कार्यान्वयन और प्रशासनिक कमियों पर गहन चर्चा होती है। मंत्री की अनिवार्य उपस्थिति हटने से संसद की निगरानी क्षमता कमजोर होगी। संसद मौनदर्शक बनती जा रही है। संसदीय व्यवस्था में शासक को नियम में बांधना लोकतंत्र का मूल उद्देश्य है। संसद यही भूमिका निभाती है जिससे वह सरकार की निगरानी का प्रभावी केंद्र बनती है। पूर्व संघीय संसद सचिवालय महासचिव सूर्यकिरण गुरुङ कहते हैं, ‘सरकार की संसद के प्रति जवाबदेही संसदीय लोकतंत्र का आधार है। प्रधानमंत्री और मंत्री संसद में उपस्थित होकर प्रश्नों का प्रत्यक्ष उत्तर देने की परंपरा से ही संसद प्रभावी बनती है।’ लेकिन हाल के घटनाक्रम से चिंता बढ़ी है। जैसे प्रधानमंत्री के साथ नियमित प्रश्नोत्तर की अनिश्चितता, नीति एवं कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति, मंत्री परिषद की अनिवार्य उपस्थिति हटाने के प्रयास आदि। ‘इनसे संसदीय अभ्यास कमजोर होता है और संसद की सीमाएं कमजोर करने का प्रयास होता है,’ गुरुङ कहते हैं, ‘यदि सांसद खुद सरकार को जवाबदेह नहीं रखते तो संसदीय अभ्यास सफल नहीं होगा।’ सभी समितियों के सदस्यों में प्रधानमंत्री भी शामिल होते हैं ताकि आवश्यक होने पर सदस्य आसानी से उनसे मुलाकात कर सकें, लेकिन वर्तमान संसद मंत्री को भी प्रश्नों से मुक्त करने की कोशिश कर रहा है। यदि संसद की भूमिका केवल सरकार के निर्णय मंजूर करने तक सीमित रह गई तो संसदीय लोकतंत्र टिक नहीं पाएगा। ऐसी स्थिति में कार्यपालिका अत्यधिक शक्तिशाली होगी, विपक्ष कमजोर और संसद की भूमिका पर सवाल उठेंगे। इससे समाज में अस्थिरता फैलने की संभावना है। इसलिए संसदीय समितियों में विधेयक चर्चा के साथ-साथ प्रत्येक चर्चा में मंत्री की उपस्थिति आवश्यक है, पूर्व महासचिव गुरुङ सुझाव देते हैं। ‘हर चर्चा किसी न किसी मंत्रालय से जुड़ी होती है। यदि मंत्री उपस्थित नहीं होंगे तो संसदीय समिति का अवमूल्यन होगा,’ उन्होंने काफी जोर दिया।

गुरुङ के अनुसार सांसदों को दो बातें समझनी जरूरी हैं – पहला: संसदीय समिति रास्वपा की समिति नहीं है। दूसरा: रास्वपा हमेशा दो तिहाई बहुमत में नहीं रहेगा। यदि समिति के सवालों से मंत्री को छूट मिली तो समिति की आवश्यकता ही खत्म हो जाएगी। गुरुङ ने दोहराते हुए कहा कि यहां ऐसी प्रवृत्ति खराब परिणाम दे सकती है। रास्वपा सरकार और संसद को एक समझकर केवल सरकार की प्रशंसा समाज में फैलाने की कोशिश कर रही है, जो दीर्घकालीन रूप से नकारात्मक होगा। वे कहते हैं, ‘रास्वपा संसद के अधिकार क्षेत्र के बाहर जाना चाहती है। लेकिन रास्वपा हमेशा बहुमत में नहीं रहेगी, इसे समझना चाहिए।’ सांसदों को इस दिशा में सतर्क रहने की जरूरत है। ‘सरकार के बचाव में संसद को अपने अधिकारों को कम करने का अधिकार नहीं है,’ उन्होंने कहा, ‘सरकारी कार्यों पर संसद को निगरानी करनी चाहिए, यदि वह इससे विमुख हुई तो संसद खुद को नुकसान पहुंचाएगी।’

६० वर्षों बाद लोप हुए माने जाने वाला पौधा अचानक ऑस्ट्रेलिया में मिला

वैज्ञानिकों ने ६० वर्षों बाद ऑस्ट्रेलिया के दूरस्थ क्षेत्र में लुप्तप्राय दुर्लभ पौधा ‘टिलोटस सेनारियस’ मिलने की पुष्टि की है। एरन बिन ने अपने मोबाइल से खींची गई तस्वीर ‘आईन्याचुरिस्ट’ प्लेटफ़ॉर्म पर अपलोड की, जिसके बाद वनस्पति विज्ञानी एंथोनी बिन ने इस पौधे की पहचान की। यह पौधा ‘अत्यंत संकटग्रस्त’ सूची में शामिल किया गया है और इसके संरक्षण के लिए विशेष बजट व योजनाएं बनाने की राह खुली है।

४ वैशाख, काठमांडू। वैज्ञानिकों ने लगभग ६० वर्षों से पूरी तरह विलुप्त समझे जाने वाले एक दुर्लभ पौधे को ऑस्ट्रेलिया के एक दूरस्थ क्षेत्र में पाया है। यह ऐतिहासिक पुनरुद्धार एक पक्षी अध्ययनकर्ता की उस मोबाइल से खींची गई तस्वीर के माध्यम से संभव हुआ, जिसे उन्होंने प्राकृतिक विशेषज्ञता वाली डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ‘आईन्याचुरिस्ट’ पर अपलोड किया था। इस खोज ने आधुनिक जैव विविधता अनुसंधान और संरक्षण में आम जनता और स्मार्टफोन की भूमिका की बढ़ती अहमियत को प्रमाणित किया है।

एरन बिन नामक व्यावसायिक उद्यान विशेषज्ञ ऑस्ट्रेलिया के क्वीन्सलैंड के एक दूरस्थ आउटबैक क्षेत्र में पक्षियों के पैरों में पहचान पट्टा बांधने के कार्य में जुटे थे। इसी दौरान उन्होंने वहां एक विशिष्ट झाड़ी प्रजाति का पौधा देखा और तस्वीर खींची। बाद में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होते ही उन्होंने यह तस्वीर प्रकृति प्रेमियों की वेबसाइट ‘आईन्याचुरिस्ट’ पर साझा की। करोड़ों तस्वीरों के बीच क्वीन्सलैंड हर्बेरियम के वनस्पति विज्ञानी एंथोनी बिन की नजर उस फोटो पर पड़ी और उन्होंने इसे वैज्ञानिक जगत में ‘टिलोटस सेनारियस’ नामक दुर्लभ पौधा बताया।

यह पौधा वर्ष १९६७ से प्रकृति में कहीं नहीं देखा गया था और इसे पूरी तरह से विलुप्त माना गया था। दिलचस्प बात यह है कि वनस्पति वैज्ञानिक एंथोनी बिन ने खुद दस साल पहले पुराने संग्रहों के आधार पर इस प्रजाति का वैज्ञानिक नामकरण और विवरण लिखा था। ‘ऑस्ट्रेलियन जर्नल ऑफ़ बॉटनी’ में प्रकाशित इस पुनरुद्धार विवरण के अनुसार यह पौधा एक छोटा नाजुक झाड़ी है, जिसमें गुलाबी और बैंगनी रंग के फूल खिलते हैं। ये फूल अंतरिक्ष में छोटे आतिशबाजी की तरह दिखते हैं। यह पौधा ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्षेत्र के ‘गल्फ ऑफ कार्पेंटेरिया’ के दुर्गम और चट्टानी भूभाग में ही पाया जाता है।