Skip to main content

लेखक: space4knews

सुपारी और केराउ के बाद तरबूजे के बीज तस्करी का संदेह, 3 अरब की आयात कहां गई?

११ असार, काठमांडू। पिछले वर्षों में तीसरे देशों से सुपारी, केराउ, मिर्च और छोकड़ा आयात कर भारत की ओर तस्करी करने में दलालों का गठजोड़ चलता था।

सरकार ने इन वस्तुओं के आयात पर कोटा प्रणाली लागू करने के बाद तस्करी के रास्ते लगभग बंद हो गए। लेकिन अब फिर से दलालों ने रातोंरात करोड़ों कमाने के लिए एक नई वस्तु को अपना हथियार बना लिया है, ‘खरबूजा-तरबूजे के बीज।’

नेपाल में व्यावसायिक रूप से तरबूजे की खेती कितनी होती है? सरकार के पास इसका कोई खास आंकड़ा नहीं है। राष्ट्रीय आलू, तरकारी तथा मसला विकास केंद्र के अनुसार नेपाल में लगभग २५०० हेक्टेयर क्षेत्र में केवल तरबूजे की खेती होती है और प्रति हेक्टेयर ३० से ४० टन तक उत्पादन होता है।

लेकिन, सीमा शुल्क विभाग के आंकड़े देखें तो चालू आर्थिक वर्ष के ११ महीनों में ‘मेलन सीड’ के नाम पर ३ अरब रुपये से अधिक के लगभग १९ हजार टन खरबूजा-तरबूजे के बीज आयात हुए हैं, जबकि पिछले वर्ष २०८१/८२ की समान अवधि में मात्र १४ करोड़ रुपये से अधिक का ही आयात था।

मसला विकास केंद्र के प्रमुख पदम अधिकारी बताते हैं कि इस समय इस बीज की मांग कम है। नेपाल में खरबूजा-तरबूजे के बीज मुख्यतः विदेश से ही आते हैं। ‘नेपाल में लगभग ९ मीट्रिक टन बीज की खपत होती है, हाइब्रिड बीज लगाने पर ७ मीट्रिक टन काफी होता है,’ अधिकारी ने कहा, ‘अन्यथा ९ मीट्रिक टन तक जरूरत होती है।’

करोड़ों के तरबूजे के बीज आयात में सीमा शुल्‍क छली (कस्टम स्कैम) की बड़ी भूमिका है, सरकारी अधिकारी स्वयं पुष्टि करते हैं। तारे होटल के खाने, बेकरी, मिठाई, तरकारी के ग्रेवी और पोषक खाद्य पदार्थों में उपयोग के लिए बोरे में रखे बीज (जिसे बाज़ार में मगज या दिउल कहा जाता है) को व्यापारी ‘कृषि बीज’ के नाम से कस्टम पासिंग करा रहे हैं।

रोपाई के लिए तो दूर, खाने के लिए भी नेपाल में इतनी अधिक तरबूजे के बीज की खपत संभव नहीं है। तो फिर अफ़्रीका और मध्य पूर्व के देशों से ये बीज नेपाल क्यों लाए जा रहे हैं?

साफ जवाब है – भारत की तरफ तस्करी।

भारत सरकार ने स्वदेशी उत्पादन की सुरक्षा के लिए विदेशों से आने वाले खरबूजा बीज पर कड़ी पाबंदी लगाई है। इस कारण दलाल नेपाल की खुली सीमा और लचीली कस्टम प्रणाली का फ़ायदा उठा रहे हैं, क्षेत्र के जानकार बताते हैं।

‘कस्टम आंकड़ों में दिखाए गए बीज खेती करने के लिए या खाने के लिए इतने नहीं आते, बोरे से हटाए गए मगज को व्यापारी खेती के बीज बताकर ला रहे हैं,’ एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘कृषि बीज कहने पर कस्टम ड्यूटी केवल करीब १% लगती है, लगभग फ्री ही होती है। लेकिन अगर इसे खाद्य पदार्थ बताकर लाए तो वैट, कृषि सुधार शुल्क और अन्य कर लगते हैं। व्यवसायी कर से बचने के लिए कस्टम में धोखाधड़ी करते हैं, जिससे आंकड़े भ्रामक दिखते हैं।’

आयात में कितना वृद्धि हुई?

सीमा शुल्क विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष के ११ महीनों में नेपाल ने ५९५.२२ टन (५ लाख ९५ हजार २२२ किलो) खरबूजा-तरबूजे के बीज का आयात किया था, जिसकी राशि केवल १४ करोड़ ३ लाख ४६ हजार रुपये थी।

लेकिन चालू वित्तीय वर्ष के समान अवधि में यह आयात असामान्य रूप से बढ़कर १८,८१३ टन (१ करोड़ ८८ लाख १३ हजार ८ सय ४७ किलो) तक पहुंच गया, जिसका कुल मूल्य ३ अरब ६ करोड़ ५३ लाख ३८ हजार रुपये के करीब है।

पिछले साल के ५९५ हजार किलो से बढ़कर इस साल १ करोड़ ८८ लाख किलो होना मात्रा के आधार पर ३१.६ गुना वृद्धि है। वहीं, मूल्य के आधार पर पिछले साल के १४ करोड़ रुपये का आयात अचानक बढ़कर ३ अरब ६ करोड़ रुपये तक पहुंचने का मतलब २१.८ गुना वृद्धि है।

आयात का मार्ग और गंतव्य भी बदला

इस साल आयात का मार्ग और गंतव्य भी पूरी तरह बदल गए हैं। पिछले वर्ष भारत, ईरान और पाकिस्तान से बीज आते थे, लेकिन इस साल ईरान और पाकिस्तान से आयात शून्य रहा, और भारत से आयात घटकर केवल ५,९०३ किलो रह गया है।

पिछले वर्ष अफगानिस्तान से मात्र २,०४,४०० किलो (३ करोड़ ८४ हजार रुपये) का बीज आया था, जबकि इस साल ६,४४,९४,८२४ किलो (१ अरब ७ करोड़ ६४ लाख ६१ हजार रुपये) की भारी मात्रा में बीज आयात हुआ है।

पिछले वर्ष यूएई से आयात मात्र ७१,७०० किलो था जिसकी कीमत १ करोड़ २७ लाख ८ हजार रुपये थी, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में यह मात्रा तेजी से बढ़कर २५,५१,६०४ किलो हो गई है, जिसका मूल्य ४१ करोड़ ६२ लाख ७६ हजार रुपये के करीब है।

यही नहीं, यूएई से इस साल २४ लाख ७९ हजार ९०४ किलो अतिरिक्त बीज लाया गया, जो ४० करोड़ ३५ लाख ६८ हजार रुपये अधिक है।

सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा अफ्रीकी देशों का है। पिछले वर्ष नाइजीरिया और सूडान से कोई तरबूजे का बीज नेपाल नहीं आया था, लेकिन इस वर्ष ये दोनों देश दूसरे और तीसरे सबसे बड़े आयातक बन गए हैं।

चालू वित्तीय वर्ष में नाइजीरिया से ५८ लाख ११ हजार ७२० किलो बीज, जिसकी कीमत ९३ करोड़ १७ लाख ९१ हजार रुपये है, आयात हुआ है।

इसी तरह पिछले वर्ष शून्य आयात वाला सूडान भी इस वर्ष ३४ लाख ७२ हजार ४५३ किलो बीज के साथ ५२ करोड़ ४३ लाख २४ हजार रुपये का मूल्य लेकर आया है। तुर्की से भी इस वर्ष ३,०१,७५० किलो बीज (६ करोड़ ५७ लाख ७७ हजार रुपये) का आयात किया गया है।

चीन और उज्बेकिस्तान में मामूली उतार-चढ़ाव

चीन और उज्बेकिस्तान से आयात में खास बदलाव नहीं हुआ है। पिछले वर्ष चीन से १,२०,०१० किलो बीज आया था, जिसकी कीमत ५ करोड़ ५ लाख ३३ हजार रुपये थी। इस वर्ष मात्रा थोड़ी बढ़कर १,२४,९३५ किलो हुई, लेकिन आयात मूल्य घटकर २ करोड़ ९३ लाख २८ हजार रुपये रह गया है।

उसी तरह उज्बेकिस्तान से पिछले वर्ष ६९,३५० किलो (१ करोड़ २४ लाख ६० हजार रुपये) का आयात हुआ था, जो इस वर्ष बढ़कर ९६,००० किलो (१ करोड़ ६९ लाख २५ हजार रुपये) हो गया है।

आयात बढ़ने में भारत का कनेक्शन

नेपाल में कम खपत होने वाले बीज अफ्रीका, नाइजीरिया और अफगानिस्तान से लाए जाने का मुख्य कारण भारतीय बाजार है। भारत में मिठाई और ड्राई फ्रूट्स के रूप में खरबूजा-तरबूजे के बीज की भारी मांग है। यहां लगभग ६५ हजार टन वार्षिक खपत होती है, जबकि आंतरिक उत्पादन केवल ४० हजार टन ही है।

सस्ती कीमत पर अफ्रीका और चीन से बीज आने पर भारतीय किसान प्रभावित हुए। इसके बाद भारत के विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने आयात पर प्रतिबंध लगाना शुरू किया।

भारतीय मीडिया के अनुसार भारत ने जून २०२३ से खरबूजा बीज आयात पर मात्रात्मक प्रतिबंध लगाया। पहले उद्योगों को ३५ हजार टन अप्रशोधित मगज लाने की अनुमति दी गई थी, बाद में दो महीने के लिए ही सीमित आयात खुला। लेकिन इसके बाद भारत ने पूरी तरह उद्योगों के लिए भी आयात बंद कर दिया।

नए नियमों के तहत ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण’ से लाइसेंसधारी और अपनी प्रोसेसिंग इकाई वाले ही कोटा के भीतर आयात कर सकेंगे।

भारतीय बंदरगाहों पर आयात पर सख्ती के कारण तस्करों ने नेपाल के रास्ते को चुना है, जानकार बताते हैं। मुम्बई के ‘न्हावा शेवा पोर्ट’ पर अप्रैल २०२३ में राजस्व गुप्तचर निदेशालय (DRI) के एक ऑपरेशन में अफ्रीका से ‘रहर की दाल’ बताकर १.३९ अरब रुपये के २,७१० टन तरबूजे के बीज जब्त किए गए थे। भारत में सीधे पहुंचाना संभव न होने पर नेपाल की खुली सीमा तस्करों के लिए आसान मार्ग बनी है।

पुलिस की लगातार गिरफ्तारी अभियान

नेपाल में आए तरबूजे के बीज की भारत तस्करी की असलियत सीमावर्ती जिलों में पुलिस द्वारा बरामदगी से भी साबित होती है।

चार दिन पहले ८ असार को जिला पुलिस कार्यालय कलैया बारा ने सिमरौनगढ़ नगरपालिका-६ से एक ट्रक से १२,५६० किलो (३१४ बोरे) खरबूजा बीज जब्त किया, जिसकी अनुमानित कीमत २३ लाख रुपये थी। चालक ने सीमा शुल्क बिल नहीं दिखाया, इसलिए पुलिस ने ट्रक जब्त कर लिया।

उससे पहले २७ जेठ को रुपन्देहीं पुलिस ने भैरहवा में एक व्यापारी के गोदाम से कस्टम छली कर लाए गए ३५ बोरे तरबूजा के बीज, जिसकी कीमत २३ लाख ३२ हजार रुपये थी, बरामद किए।

यही दिन रौतहट सीमा क्षेत्र में तस्करी का एक बड़ा खेप पकड़ने के लिए पुलिस ने ६ राउंड आंसू गैस छोड़ी। तनावपूर्ण ऑपरेशन के बाद १२,८८० किलो कद्दू के बीज के नाम पर जब्त बीज बाद में तरबूजे के मगज निकले।

२२ असोज २०८२ को रुपन्देहीं से मिनी ट्रक के जरिए भारत ले जाने के लिए १२५ बोरे बीज भी जब्त हुए थे।

देश की आवश्यकताओं से कई गुना अधिक असभ्य आयात होने के बावजूद सरकारी नियामक संस्थाएं कानूनी छिद्र दिखाकर कोई कार्रवाई नहीं करतीं।

नेपाल में खरबूजा बीज का पंजीकरण नहीं

नेपाल में खरबूजा बीज की कोई जाति पंजीकृत नहीं है। बीज बिजन गुणवत्ता नियंत्रण केंद्र के सूचना अधिकारी प्रकाश आचार्य ने बताया कि खरबूजा बीज फिलहाल परीक्षण के दौर में है।

उनके अनुसार तरबूजे की दो-तीन जातियां पंजीकृत हैं, और बीज बाहर से लाए जाते हैं। सीमा शुल्क विभाग में आयातित बीज का HS कोड फल के एक ही कोड के साथ रखा जाता है, इसलिए बीज और फल को अलग करना मुश्किल होता है।

नेपाल में बीज आयात के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। राष्ट्रीय बीज बिजन समिति की सूची में शामिल होने और राजपत्र में सूचना प्रकाशित होने के बाद ही व्यावसायिक खेती की अनुमति मिलती है।

आयातकर्ता को दस्तावेज के साथ अनुमति के लिए केंद्र से सिफारिश लेनी होती है। इसके बाद ही प्लांट क्वारंटीन और कीटनाशक प्रबंधन केंद्र फाइटो-सैनिटरी आवश्यकताओं के आधार पर प्रवेश अनुमति देता है।

आचार्य के अनुसार अनुमति के बिना इतनी बड़ी मात्रा में आयात संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि नेपाल से बीज निर्यात के लिए भी अब तक किसी ने सिफारिश नहीं ली है।

‘आयात ही नहीं, निर्यात के लिए भी हमें सिफारिश देनी होती है,’ उन्होंने कहा, ‘अब तक किसी ने नहीं ली।’ सीमा शुल्क विभाग खरबूजा और तरबूजा को अलग नहीं करता और दोनों को ‘मेलन सीड’ के अंतर्गत दर्ज करता है, जिससे आंकड़ों में और भ्रम की स्थिति बनती है, केंद्र ने बताया।

आयातित बीज को सीमा शुल्क पर रोक लगाने की मांग उठती रही है, लेकिन कृषि मंत्रालय के अधिकारी कहते हैं कि बाजार और तस्करी नियंत्रण उनकी जिम्मेदारी नहीं है।

कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, मंत्रालय के अधीन प्लांट क्वारंटीन केवल बीमारी और कीड़ों की जांच करता है, न कि बीज का उपयोग।

‘हम केवल आज़माते हैं कि वस्तु सुरक्षित है या नहीं, और उस में कोई बाहरी जीवाणु-कीट है या नहीं,’ वे कहते हैं, ‘बीज माती में जाएगा और जैविक जोखिम ज्यादा होगा, उस पर कड़ाई करते हैं, लेकिन जब व्यापारी कस्टम में कहते हैं कि ये बीज खेती के लिए नहीं, व्यावसायिक या खाद्य प्रयोजन के लिए हैं तो हम रोक नहीं सकते।’

बीज का उपयोग, भंडारण, बिक्री और तस्करी की निगरानी और नियंत्रण उद्योग वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय और बाजार निरीक्षण एजेंसियों का कर्तव्य है।

इतनी बड़ी मात्रा में असामान्य आयात जारी रहने पर ‘मार्केट इंटेलिजेंस’ और वाणिज्य प्रशासन चुप नहीं रह सकते, जानकार कहते हैं। जैसे सुपारी, छोकड़ा और केराउ के असामान्य आयात पर वाणिज्य मंत्रालय ने कोटा तय किया था, वैसे ही खरबूजा-तरबूजे के बीज पर नीति बनानी पड़ सकती है।

चार वर्षों का खरबूजा बीज आयात डेटा

पिछले चार वर्षों के आंकड़ों के विश्लेषण में खरबूजा-तरबूजे के आयात मात्रा और इसके लिए खर्च की गई राशि दोनों में वृद्धि देखी गई है।

आर्थिक वर्ष २०७८/७९ में आयात सिर्फ ९९ टन थी और मूल्य था २ करोड़ ३ लाख रुपये।

अगले वर्ष २०७९/८० में आयात बढ़कर १२७ टन हुई और खर्चा २ करोड़ १४ लाख रुपये रहा।

इसके बाद के वर्षों में आयात तेजी से बढ़ा। वित्तीय वर्ष २०८०/८१ में ५०२ टन का आयात हुआ, जिसकी कीमत ९ करोड़ १३ लाख रुपये थी।

पिछले वर्ष २०८१/८२ में आयात १२८६ टन तक पहुंच गई, और इस पर २५ करोड़ ७० लाख रुपये खर्च हुए।

१५ वर्ष पहले सऊदी में हुई दुर्घटना ने मृगेन्द्र को देश वापसी से रोका

११ आसार, काठमांडू। विमानस्थल पर प्रवेश कर देश वापस लौटने वाली उड़ान में बैठ पाना विदेश रोजगार गए श्रमिकों के लिए खुशी का अवसर होता है। सऊदी अरब पहुंचे सप्तरी के सुरूंगा नगरपालिका-४ के मृगेन्द्र कुमार मंडल के लिए भी वह खुशी का दिन करीब था। दो साल की कड़ी मेहनत के बाद परिवार से मिलने की उम्मीद उन्हें काफी थी। लेकिन, जब विमानस्थल के काउंटर पर उनके पासपोर्ट का स्कैन किया गया, तो कर्मचारी की एक बात ने उनकी उम्मीदों को ठेस पहुंचाई। ‘‘आप पर यात्रा प्रतिबंध है, नेपाल नहीं जा सकते,’’ विमानस्थल के कर्मचारी की यह बात सुनकर उनका स्वदेश लौटने और परिवार के साथ खुशी बांटने का सपना अधूरा रह गया। अब उनका जीवन ही बदल चुका है। कुछ समय वे सड़क पर, तो कुछ समय मस्जिद के कोनों में बिताते हैं।

वह दुर्घटना जिसने १५ वर्षों बाद उनके जीवन को उलट दिया १५ साल पहले मृगेन्द्र सऊदी में जेल गए थे। चालक के रूप में काम करने वाले वे सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे थे। लेकिन एक दिन वे एक सड़क दुर्घटना के शिकार हो गए। दुर्भाग्यवश इस दुर्घटना में एक जॉर्डन नागरिक की मृत्यु हो गई। सऊदी स्थित रफा अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए ६ साल की जेल सजा सुनाई। ६ साल की कैद पूरी करने के बाद कंपनी ने उनका ‘फाइनल एक्जिट’ टिकट जारी किया और वे २०१८ में नेपाल लौटे। नेपाल लौट कर ५-६ वर्ष तक गांव में मजदूरी की। लेकिन गरीबी फिर उन्हें परेशान करने लगी। कर्ज और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण उन्हें फिर विदेश जाना पड़ा।

साल २०२३ मई में वह फिर सऊदी गए। इस बार नई कंपनी में दो साल ईमानदारी से ड्राइवर का कार्य किया। कंपनी के साथ समझौते के पूरा होने पर खुशी-खुशी अपना सामान लेकर विमानस्थल पहुंचे लेकिन पासपोर्ट सौंपते ही झटका लगा। सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोकते हुए कहा, ‘‘आप पर यात्रा प्रतिबंध है, नेपाल नहीं जा सकते।’’ १५ साल पुराने दुर्घटना की सजा मृगेन्द्र पहले पूरी कर चुके थे। लेकिन अदालत ने उक्त मामले को पुनर्जीवित करते हुए उन्हें ३ लाख ३० हजार सऊदी रियाल (करीब १ करोड़ ३३ लाख नेपाली रुपए) ‘ब्लड मनी’ (क्षतिपूर्ति) की जरिमाना लगाई है। यह रकम न चुकाने तक वे Nepal लौट नहीं सकते और सऊदी से बाहर नहीं जा सकते।

प्रतिबंध की जानकारी मिलने पर मृगेन्द्र न्याय और उद्धार की उम्मीद लेकर नेपाली दूतावास पहुंचे। दूतावास से सहयोग की उम्मीद थी, लेकिन अपेक्षित सहायता न मिलने पर वे निराश हैं। ‘‘दूतावास में जाकर घर लौटने न पाने की स्थिति में भोजन और रहने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया, लेकिन कर्मचारी बोले कि कोई सुविधा नहीं है और दरवाजा बंद कर दिया,’’ उन्होंने बताया। वकील रखकर मामला लड़ने के लिए सहायता मांगने पर भी दूतावास ने समर्थन नहीं दिया, जिससे वे हताश हो गए। ‘‘अगर मुकदमा लड़ने के लिए पैसा होता, तो दूतावास की मदद की जरूरत नहीं पड़ती,’’ वे कहते हैं। अदालत या संबंधित प्राधिकरण ने इस जुर्माने से संबंधित कोई आधिकारिक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराया है। दूतावास की कानूनी व कूटनीतिक पहल न करने के कारण वे असहाय हैं। वह इस वक्त सऊदी की सड़कों पर भीख मांगते और मस्जिद की ठंडी ज़मीन पर सोते हुए अपना जीवन बिताते हैं। कुछ नेपाली उनके साथ अन्याय भी कर रहे हैं और एम्बेसी के नाम पर कुछ रकम लेकर काम कराने का झांसा देते हैं, उन्होंने बताया। सप्तरी में उनका परिवार मृगेन्द्र की हालत से व्यथित है। परिवार ने सरकार, विदेश मंत्रालय और संबंधित संस्थाओं से तत्काल उद्धार व जीवन रक्षा की मांग की है।

दूतावास ने कहा: मामले की जांच चल रही है सऊदी के रियाद स्थित नेपाली राजदूतावास ने बताया कि उनके मामले की जांच जारी है। १५ साल पहले की घटना को लेकर सऊदी संबंधित प्राधिकरणों द्वारा जांच की जा रही है। दूतावास के श्रम काउंसलर कविराज उप्रेती ने कहा, ‘‘१५ साल पुराना मामला है, ६ साल की जेल सजा भुगत चुके हैं। स्पष्ट जानकारी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू करेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘काम के लिए पुनः सऊदी आकर वापस जाने के क्रम में विमानस्थल पर रोका गया है और ब्लड मनी अदा करनी होगी। हम मामले को अच्छे से समझकर आवश्यक कदम उठाएंगे।’’

रास्वपाको महामन्त्री पदको लागि दाबी गर्ने नेताहरूको सूची सार्वजनिक

११ असार, काठमाडौं । रास्वपाको महामन्त्री पदमा कडा प्रतिस्पर्धा देखिएको छ। केन्द्रीय सदस्यहरूको नतिजा आउनु अघि नै आधा दर्जनभन्दा बढी नेताहरूले महामन्त्री पदका लागि उम्मेदवारी दिएका छन्। विपिन आचार्य, शिशिर खनाल, कविन्द्र बुर्लाकोटी, गणेश पराजुली, मनिष झा, रञ्जु दर्शना, सागर ढकाल, प्रमोद न्यौपाने, गणेश कार्की लगायतले महामन्त्री पदका लागि दाबी गरेका छन्। बुर्लाकोटी हालको महामन्त्री हुन् भने आचार्य निर्वाचित सहमहामन्त्री र झा पार्टीका प्रवक्ता हुन्।

‘रास्वपा केवल विकासवादी विचार प्रस्तुत करता है, सामाजिक न्याय को समाहित नहीं करता’

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने स्थापना के चार वर्षों बाद पहली बार अपना महाधिवेशन संपन्न किया है। लगभग ४ हजार प्रतिनिधियों की सहभागिता से सम्पन्न इस महाधिवेशन में पार्टी ने कुछ महत्वपूर्ण राजनीतिक दस्तावेज पारित किए। इन दस्तावेजों पर प्रतिनिधियों को चर्चा या बहस करने का अवसर नहीं मिला क्योंकि पारित करने की प्रक्रिया बिना चर्चा के पूरी हुई। फिर भी, इन तीन दस्तावेजों ने राष्ट्रीय बहस को जन्म दिया है। इसी संदर्भ में राजनीतिक विश्लेषक तुलनारायण साह के साथ संवाद:

रास्वपा ने चार साल बाद पहला महाधिवेशन किया है। यह देखना महत्वपूर्ण था कि सत्तारूढ़ दल कैसा राजनीतिक दस्तावेज लेकर आएगा और इसका देश के राजनीतिक मार्ग निर्धारण में क्या प्रभाव होगा। महाधिवेशन में प्रस्तुत प्रतिवेदन ’प्रदेश सभा खारिज करने’ विषय को भी समेटे हुए हैं। आप इसे कैसे देखते हैं?

सबसे पहले, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) की स्थापना जिस परिस्थिति में हुई और कम समय में उसने बड़ी जनसमर्थन प्राप्त की, वह इस महाधिवेशन तथा पारित दस्तावेजों को अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। डॉ. स्वर्णिम वाग्ले द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव में इस विषय को स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है।

इस दस्तावेज में कई विषयों में संशोधन या परिवर्तन की बात की गई है, जैसे प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी प्रमुख की व्यवस्था सहित अन्य विषय। इनमें से प्रमुख मुद्दा ‘प्रदेश सभा खारिज’ है, जो वर्तमान में संचार माध्यमों में अधिक चर्चा में है।

लेकिन मेरे विचार में, डॉ. स्वर्णिम वाग्ले तथा रवि लामिछाने द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को पढ़ते समय, प्रदेश सभा खारिज से भी अधिक संवेदनशील मुद्दे मौजूद हैं। वे मुद्दे अभी तक व्यापक चर्चा में नहीं आए, हालांकि वे बहस के लिए ज्यादा सान्दर्भिक होते। प्रदेश सभा खारिज विषय इस प्रतिवेदन में संक्षेप में ही प्रस्तुत किया गया है।

रास्वपा की असली धारणा जानने के लिए उनके पिछले दस्तावेज, साक्षात्कार और सभाओं के भाषणों को देखना आवश्यक होगा। इसलिए इस मुद्दे को दस्तावेजों में लाना नया या अप्रत्याशित नहीं है।

वि.सं. २०७९ के पहले आम निर्वाचन के समय भी रास्वपा ने इस विषय को उठाया था। इससे पहले रास्वपा ने प्रदेश सभा में भाग लेने से इनकार किया था। लेकिन दस्तावेजों में यह विषय तब से ही शामिल है। उनकी दलील है – हम संघीयता खत्म नहीं करना चाहते। दस्तावेजों और साक्षात्कारों में ‘संघीयता खारिज’ शब्द नहीं है, लेकिन उनकी मंशा संघीयता के पक्ष में नहीं दिखती, जिससे जनता में भ्रम उत्पन्न होता है। वे ‘प्रदेश सभा हटाकर प्रदेश परिषद बनाना’ चाहते हैं।

इस बहस को समझने के तीन पहलू हैं:

१. नेपाल में कम समय में लोकप्रियता प्राप्त रास्वपा किस प्रकार की संघीयता की कल्पना करता है?

२. पिछले १० वर्षों से लागू की गई संघीयता कैसी है?

३. संघीयता समर्थक या पक्षधर ताकतें किस प्रकार की संघीयता चाहती हैं? ये तीनों मेल नहीं खाने के कारण वर्तमान बहस उभर कर आई है।

रास्वपा की संघीयता, अभ्यास में लागू संघीयता और मांग करने वालों की संघीयता मॉडल कैसी है?

वर्तमान अभ्यास में प्रदेश संरचना जबरदस्ती थोपी गई प्रतीत होती है। प्रदेश के पास भौगोलिक क्षेत्र, प्रदेश सभा, मुख्यमंत्री, मंत्री हैं, लेकिन पर्याप्त अधिकार नहीं दिए गए। इसलिए मेरा मानना है कि प्रदेश संरचना न होते हुए भी केंद्र और स्थानीय स्तर से शासन पालन संभव है। यह दर्शाता है कि प्रदेश संरचना अनचाहे और जबरदस्ती लागू की गई है।

हालाँकि, रास्वपा जो प्रदेश संरचना की कल्पना करता है, वह और भी कम शक्तिशाली है। यह केवल प्रशासनिक संघीयता होगी। वर्तमान संरचना में थोड़ी बहुत पहचान स्वीकार की गई है, लेकिन रास्वपा के मॉडल में प्रदेश सभा नहीं होगी और न ही चुनाव द्वारा सदस्य चुने जाएंगे।

आज प्रदेश सभा कानून निर्माण, बजट और सरकार चयन करती है; परन्तु रास्वपा के दस्तावेजों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। उनकी प्रदेश संरचना केवल कमजोर और प्रशासनिक प्रकार की होगी।

संघीयता की मांग करने वाले बलवान प्रदेश के पक्ष में हैं। मधेशवादी दल मुख्यतः भारत के संघीयता मॉडल और प्रदेश अभ्यास देखकर मजबूत प्रदेश की मांग करते हैं।

संघीयता मांगने वालों का कहना है, प्रदेश सरकार को मजबूत बनाया जाना चाहिए। वे केवल कानून बनाएँ, ऐसा नहीं, बल्कि कर्मचारियों तथा पुलिस की नियुक्ति का अधिकार भी प्रदेश को मिलना चाहिए। प्रदेश की अपनी सुरक्षा (पुलिस) और प्रशासन (कर्मचारी) के बिना सरकार कैसे चलाएगी? स्थानीय तह को प्रदेश के अधीन करना होगा और कर्मचारी स्थानांतरण के अधिकार भी प्रदेश को होने चाहिए। वे शक्तिशाली प्रदेश की पक्षधरता करते हैं।

इसलिए मांगने वालों, वर्तमान अभ्यास और रास्वपा मॉडल के बीच सम्पूर्ण मेल नहीं है। यही विवाद का मूल कारण है।

आपने कहा कि प्रदेश को मजबूत बनाना चाहिए। मैं वर्तमान प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के जनकपुर में दिए भाषण को याद कराना चाहता हूं, जिसमें उन्होंने ‘प्रदेश को और मजबूत करना चाहिए’ कहा था। क्या रास्वपा के महाधिवेशन दस्तावेज इस बात को दर्शाते हैं?

ऐसी कोई बात रास्वपा के दस्तावेजों में नहीं है। वह बालेन्द्र की व्यक्तिगत राय हो सकती है। महाधिवेशन में पारित आधिकारिक दस्तावेज में यह प्रतिबिंबित नहीं होता। चुनाव के दौरान कही गईं कुछ बातें रणनीतिक भी हो सकती हैं, इसलिए भाषण और दस्तावेज के संदेश अलग-अलग हो सकते हैं।

डा. स्वर्णिम वाग्ले द्वारा प्रस्तुत ‘प्रदेश सभा खारिजी’ और रवि लामिछाने के ‘प्रदेश सभा पुनर्संरचना’ की शब्दावली एक जैसी है या भिन्न?

रवि लामिछाने और स्वर्णिम वाग्ले के दस्तावेज तथा रास्वपा के पुराने दस्तावेज समान रेखा पर हैं — वर्तमान संघीयता से कमजोर संघीयता की कल्पना।

इन दस्तावेजों को पढ़कर ऐसा प्रतीत होता है कि एक काल्पनिक संदेश दिया गया है, जो कठोर संघीयता को पक्ष में दिखाना चाहता है। लेकिन विस्तार से पढ़ने पर डॉ. स्वर्णिम वाग्ले का ८ पृष्ठीय और रवि लामिछाने का २३ पृष्ठीय दस्तावेज संघीयता और उसकी मंशा को स्पष्ट करते हैं। दोनों दस्तावेजों की मंशा समान है, लेकिन जनकपुर भाषण और दस्तावेजों के संदेश भिन्न हैं।

प्रदेश सभा खारिज के बाद कार्यकारी अधिकार केंद्र द्वारा निर्देशित मॉडल का समर्थन दस्तावेज में नजर आता है?

हाँ, मुझे भी यही समझ आता है। रास्वपा के अन्य दस्तावेजों को देखने पर यह ज्ञात होता है कि प्रदेश सभा के सदस्यों की संख्या अधिक होने और खर्च अधिक आने के कारण इसे खारिज करने का प्रस्ताव है। इसके बाद एक छोटा प्रादेशिक परिषद बनेगा, जिसमें स्थानीय सतह के निर्वाचित प्रतिनिधि सदस्य चुनेंगे और कानून बनाएंगे। मुख्यमंत्री प्रत्यक्ष निर्वाचित होगा।

इसलिए, पूरे स्वरूप को समझने के लिए रास्वपा की राजनीतिक दृष्टि जाननी पड़ेगी। रास्वपा क्या पार्टी है, कब उत्पन्न हुई और उसकी राजनीति कैसी है, केवल तभी दस्तावेज स्पष्ट हो पाएंगे।

प्रदेश में सत्ता की सुखाड़ और अधिकार न मिलने के कारण विप्लव में जाने वाला तर्क मजबूत हुआ है?

हाँ, ऐसा भी है, पर रास्वपा की मूल धारणा ‘विकासवादी’ है। संघीयता का मुख्य उद्देश्य तेज विकास नहीं है, न ही गरीबी निवारण की परियोजना।

नेपाल में संघीयता के दो मुख्य कारण हैं, जो रास्वपा के विचारों से मेल नहीं खाते।

पहला, नेपाल की विविधता को राज्य और राजनीति में प्रतिनिधित्व नहीं मिला, जिसने बहुत बड़े हिस्से को राजनीतिक और राज्य से दूर और सीमांत बनाया। संघीयता इस विविधता को राज्य से जोड़ने के लिए लाया गया।

दूसरा, विभिन्न समुदायों की धारणा है कि वे भविष्य में प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे। इसलिए कम से कम उनके अपने प्रदेश में मुख्यमंत्री होंगे और उनका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। संघीयता इसी उद्देश्य से आई है।

संघीयता का मुख्य लक्ष्य केवल विकास और भ्रष्टाचार पर रोक नहीं बल्कि सामाजिक पहचान और प्रतिनिधित्व को संवैधानिक सुरक्षा देना है।

विविधता प्रबंधन और स्वशासन सुनिश्चित कर राजनीतिक शासन में समावेशीकरण का उद्देश्य है।

गरीबी निवारण और विकास भी होगा, पर मुख्य लक्ष्य सामाजिक न्याय और पहचान की गारंटी है।

पर रास्वपा की राजनीतिक धारणा ‘शुद्ध विकासवादी’ है। उनके १०० बिंदु के घोषणापत्र से लेकर वर्तमान महाधिवेशन के दस्तावेजों में व्यापक रूप से ‘हम विकास करेंगे, भ्रष्टाचार घटाएंगे और रोजगार सृजित करेंगे’ की प्रमुख भावना है।

सामाजिक न्याय और समावेशीकरण के प्रति दस्तावेज कैसा है? पूर्ण समानुपातिक और प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी का मुद्दा भी है।

प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी का विषय संविधान संशोधन के बाद लागू होगा। रास्वपा ने ‘पूर्ण समानुपातिक निर्वाचन प्रणाली’ अपनाने की नीति बनाई है। मगर सवाल यह है कि इसका प्रतिनिधित्व किसका होगा और आधार क्या होगा? दो बातों पर जोर है—एक युवा प्रतिनिधित्व उम्र के हिसाब से और दूसरा लैंगिक समानुपातिकता।

पर पूर्ण समानुपातिकता लैंगिक या उम्र तक सीमित है या सामाजिक पक्ष से भी सुनिश्चित की जाएगी, दस्तावेज में स्पष्ट नहीं है।

२०६२/६३ के आंदोलन, माओवादी जनयुद्ध और मधेस आंदोलन ने सामाजिक एवं जातीय समूहों को राज्य में समावेशीकरण की मांग की। संविधान ने इसे स्वीकार करके आरक्षण व्यवस्था लागू की।

राजनीति में आरक्षण, समानुपातिक चुनाव व्यवस्था और सरकारी सेवाओं में कोटा प्रणाली के माध्यम से किया गया है।

परंतु रास्वपा के दस्तावेजों में सामाजिक और जातीय समूहों से पूर्ण समानुपातिक व्यवस्था की स्पष्टता नहीं है। जोर केवल उम्र और लैंगिक प्रतिनिधित्व पर है।

सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से दस्तावेज कैसे लगते हैं?

दस्तावेजों में कुछ विरोधाभास देखे जाते हैं। मैं पूर्वाग्रह से नहीं, विश्लेषण के दृष्टिकोण से चर्चा कर रहा हूं। रवि लामिछाने के २३ पेज और डॉ. स्वर्णिम वाग्ले के ८ पेज के दस्तावेजों में सामाजिक न्याय पर स्पष्टता कम है और विरोधाभास भी है।

डा. वाग्ले के दस्तावेज की धारा ३ में सकारात्मक बात है—‘नेपाल में संरचनात्मक भेदभाव है, यह कलंक है और इसे सुधारना होगा।’ लेकिन धारा ७ में कहा गया है – ‘हम परिणाम में समानता की बात नहीं करते’, जो सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से नकारात्मक है और आंदोलन को कमजोर करता है।

रवि के दस्तावेज में समावेशी समाज और लोककल्याणकारी राज्य का विचार है, लेकिन यह नेपाल के सामाजिक आंदोलनों द्वारा समझी गई समावेशी राज्य की अवधारणा नहीं है। समाज स्वाभाविक रूप से समावेशी है, पर राज्य संरचना नहीं है।

ये दस्तावेज लंबे सामाजिक न्याय आंदोलन को आत्मसात नहीं करते, बल्कि इसे पारंपरिक मार्ग से मोड़ने का प्रयास करते दिखते हैं।

रास्वपा के दस्तावेजों में सकारात्मक पक्ष भी हैं। यह महाधिवेशन दल को संस्थागत रूप से पार्टी गठन प्रक्रिया में ले जाने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। पार्टी गठन की प्रक्रिया को आप कैसे देखते हैं? किस दिशा में बढ़ रही है?

आइए दो भागों में चर्चा करें- पहला, रास्वपा की राजनीतिक धारणा क्या है? नेपाल में वह किस तरह की राजनीति करना चाहता है? दूसरा, पार्टी कैसी होगी? नेपाल में पार्टी गठन का इतिहास भी महत्वपूर्ण है।

पुरानी पार्टियाँ किस तरह की राजनीति करती थीं और रास्वपा की राजनीति किस प्रकार अलग है, यह समझना जरूरी है। आमतौर पर पार्टी तीन प्रकार की होती हैं।

पहला प्रकार के पार्टी सामाजिक मुद्दों पर कम बोलते हुए लोकतंत्र और राष्ट्रीयता पर जोर देते हैं। दूसरा प्रकार की पार्टी पहचान और प्रतिनिधित्व को मुख्य एजेंडा बनाती हैं। तीसरा प्रकार विकास और समृद्धि को प्राथमिकता देता है।

रास्वपा तीसरे प्रकार की पार्टी है, जो विकास और समृद्धि को मुख्य मसला मानती है। जब अन्य जारी पहचान और प्रतिनिधित्व पर आलोचना करते हैं, तो रास्वपा मौन रहता है।

रास्वपा ने विकास, समृद्धि, भ्रष्टाचार नियंत्रण और युवाओं को नेतृत्व में लाने पर जोर दिया है।

उनके पास जनसमर्थन है, संसद और पार्टी दोनों में युवाओं का प्रतिनिधित्व है, जो विकास और समृद्धि की राह को आसान बना सकती है।

लेकिन जोखिम यह है कि पहचान और प्रतिनिधित्व के लिए लंबे संघर्ष वाले समूहों और समुदायों के अधिकार कम हो सकते हैं।

रास्वपा सामाजिक न्याय और राष्ट्रीयता जैसे गंभीर मुद्दों पर कम मुखर हो सकता है।

अगला सवाल पार्टी की संरचना का है। राजनीतिक दल की संरचना और चरित्र की विश्वव्यापी अध्ययन हुआ है। राजनीतिक वैज्ञानिक सुसान कारो ने नेतृत्व चयन के आधार पर दलों को पांच प्रकारों में वर्गीकृत किया है:

पहला, सभी सदस्य प्रत्यक्ष मतदान से नेता चुनते हैं। दूसरा, सदस्य महाधिवेशन प्रतिनिधि चुनते हैं जो फिर नेता चुनते हैं। वर्तमान नेपाली कांग्रेस, नेकपा एमाले आदि इसी मॉडल पर हैं।

तीसरा, कॉर्पोरेट या शक्तिशाली केंद्र द्वारा पार्टी गठित। चौथा, परिचित चेहरों का समूह मिलकर पार्टी बनाता है। पांचवां, एकल नेता प्रभुत्व वाली पार्टी।

रास्वपा में पहला, दूसरा और तीसरा मॉडल का मिश्रण दिखता है।

नेपाली राजनीतिक दलों के इतिहास में तीन प्रकार के जन्म देखे जाते हैं — संघर्ष के जरिए, चुनाव के दौरान और सत्ता अभ्यास के कारण टुकड़े होकर बने दल। रास्वपा दूसरी प्रकार की पार्टी है।

रास्वपा स्पष्ट रूप से ‘विकासवादी’ पार्टी है और वन-मैन डॉमिनेंट पार्टी के लक्षण दिखाता है। रवि लामिछाने के उदय से पार्टी की लोकप्रियता बढ़ी है और वर्तमान में दो नेता समान प्रभाव रखते हैं।

आपने नेतृत्व केंद्रित संरचना में कलह होने की बात कही। पार्टी एकजुट होकर आगे बढ़ने की संभावना कितनी है?

दस्तावेजों की भाषा अच्छी होती है, पर राजनीतिक रेखा में मतभेद होते हैं। रास्वपा नई पार्टी होने के कारण आंतरिक लोकतंत्र कमजोर है।

नेपाल में चुनावी बहुमत पाने वाली बड़ी पार्टी के अंदर समान स्तर के दो शीर्ष नेताओं के बीच शक्ति संतुलन का मुद्दा मुख्य समस्या होता है।

रास्वपा में रवि और बालेन्द्र की समानता इस समस्या को दर्शाती है, जो ओली और प्रचण्ड की स्थिति जैसी है। इतिहास बताता है कि जब आंतरिक लोकतंत्र मजबूत होता है तो पार्टी की स्थिरता और जीवनकाल बढ़ता है।

आंतरिक लोकतंत्र मजबूत करने के लिए तीन निकाय आवश्यक हैं:

१. निर्णय प्रक्रिया (उम्मीदवार चयन, कार्रवाई, आर्थिक संसाधन प्रबंध) २. नेतृत्व चयन ३. नीति निर्धारण।

रास्वपा में ये संरचनाएं अभी पूरी तरह विकसित नहीं हैं। आंतरिक लोकतंत्र कमजोर होने से पार्टी और सरकार को टिकाने में कठिनाई होती है।

वर्तमान स्थिति के अनुसार, अगर रवि और बालेन्द्र साथ मिलकर पांच साल सरकार चलाएँ तो देश के लिए अच्छा होगा।

पुरानी पार्टियों में ऐसी सहकारिता लंबी अवधि तक नहीं टिक पाई। पार्टी की स्थिरता आंतरिक लोकतंत्र की मजबूती पर निर्भर करती है।

निशा डाँगी रास्वपाको सहमहामन्त्री पदका लागि उम्मेदवार बनिन्

११ असार, काठमाडौं। रास्वपाको सहमहामन्त्री पदका लागि निशा डाँगीले उम्मेदवारी घोषणा गरेकी छन्। उनले सामाजिक सञ्जालमार्फत आफूलाई यस पदका लागि प्रस्ताव गराएको जानकारी दिईन्। ‘अबको यात्रा सहमहामन्त्रीको,’ डाँगीले फेसबुकमा लेखेकी छन्, ‘सबैलाई साथ दिन अनुरोध गर्दछु।’ निशा डाँगी पहिलेदेखि केन्द्रीय सदस्यको रूपमा काम गरिसकेकी छन् र झापा–१ क्षेत्रबाट निर्वाचित प्रतिनिधि सभा सदस्य पनि हुन्।

रास्वपा महाधिवेशन प्रतिनिधियों को आज शाम तक ही भोजन की व्यवस्था, कल से खुद करनी होगी

११ असार, चितवन। राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के चितवन में चल रहे पहले राष्ट्रीय महाधिवेशन के प्रतिनिधियों को आज शाम तक भोजन पार्टी द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है। कल से प्रतिनिधियों को अपना खाना और नाश्ता स्वयं प्रबंधित करना होगा। असार ७ से शुरू हुआ महाधिवेशन असार ९ को समाप्त होने वाला था, लेकिन इसे दो दिन के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। प्रारंभ में असार ८ और ९ के लिए भोजन व्यवस्था की गई थी, लेकिन महाधिवेशन बढ़ने के कारण असार १० और ११ के लिए भी व्यवस्था की गई थी।

“आज शाम तक भोजन देने का समझौता था, कल से वे स्वयं भोजन करें, हमें कोई सूचना नहीं मिली,” महाधिवेशन में भोजन की व्यवस्था कर रहे दियालो फूडल्याण्ड के प्रबंध निर्देशक रमेश अधिकारी ने बताया। “हमने अपने सामान पैक करना शुरू कर दिया है, कल से प्रतिनिधि क्या करेंगे हमें जानकारी नहीं है।” रास्वपा महाधिवेशन में खुले मतदान के ९९ केन्द्रीय सदस्यों के परिणाम भी सार्वजनिक हो चुके हैं। अब ६ पदाधिकारियों के लिए पुनः मतदान होना बाकी है। पदाधिकारियों के मतदान के लिए पार्टी केन्द्रीय निर्वाचन आयोग आज रात ही चुनाव कराने की तैयारी में है।

अधिकांश प्रतिनिधि महाधिवेशन स्थल छोड़कर अपने-अपने घर लौट रहे हैं, जबकि कुछ प्रतिनिधि आज रात जाने की बात कह रहे हैं। केन्द्रीय सदस्य के लिए कल रात १२ बजे शुरू हुआ मतदान आज दोपहर १२ बजे समाप्त हो गया था। कुल ४३११ प्रतिनिधियों में से २९५९ ने मतदान किया जबकि १३५२ ने मतदान नहीं किया। आगामी पदाधिकारी चुनाव में ५० प्रतिशत से कम मतदान होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

कोशी प्रदेश के लिए 2 अरब 8 करोड़ से अधिक की योजनाएं स्वीकृत

11 असार, विराटनगर। कोशी प्रदेश निवेश प्राधिकरण ने प्रदेश के चार परियोजनाओं के लिए निवेश स्वीकृत किया है। प्राधिकरण की 33वीं बैठक में कुछ दिनों पूर्व सार्वजनिक-निजी साझेदारी मॉडल के तहत 2 अरब 8 करोड़ 53 लाख रुपये के निवेश को अनुमोदित किया गया है। कोशी प्रदेश निवेश सम्मेलन में एक वर्ष पूर्व प्रस्तुत प्रस्तावों में से संभाव्यता के आधार पर चार परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया गया है, यह जानकारी प्राधिकरण के कार्यकारी निर्देशक सरोज कोईरालाले गुरुवार पत्रकार सम्मेलन में दी।

उनके अनुसार, सुनसरी के दुहवी-4 में 55 करोड़ 95 लाख रुपये की लागत से आधुनिक कूड़ा प्रबंधन परियोजना का निर्माण किया जाएगा। इसका जिम्मा रिवाइव इन्फ्राटेक एंड इन्वेस्टमेंट को दिया गया है। दुहवी-4 और 10 में 34 करोड़ रुपये के निवेश से मल्टी चेंबर और कोल्ड स्टोरेज बनाये जाने की योजना स्वीकृत हुई है, जिसका निर्माण दीर्घायु एग्रो एंड इन्वेस्टमेंट करेगी।

उदयपुर के बेलका-9 में रामपुर बहुउद्देश्यीय कृषि फार्म 20 करोड़ रुपये के निवेश से कूड़ा प्रबंधन के साथ मल कारखाना और पशुपालन परियोजना संचालित करेगा, यह योजना भी स्वीकृत हुई है। सुनसरी के रामधुनी-7 स्थित रास ताल क्षेत्र के पर्यटन विकास और संचालन हेतु अर्बन एक्सप्लोरर प्रालि को 98 करोड़ 58 लाख रुपये के निवेश की अनुमति दी गई है। प्राधिकरण ने विराटनगर में रानी से बसपार्क तक पोड-वे निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू की है। लगभग 6 अरब रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए काठमाडौं पोडवे कंपनी को अनुमति दी गई है।

कोशी प्रदेश में 6 वर्ष पहले निवेश प्राधिकरण की स्थापना हुई थी। प्राधिकरण की पहल से निर्मित भेडेटार स्काई वॉक भी अब संचालन में है।

कम से कम १६४ मौतों के साथ वेनेजुएला में बड़े भूकंप से व्यापक नुकसान

शताब्दी के सबसे विनाशकारी दो भूकंपों के कारण वेनेजुएला में गुरुवार दोपहर तक कम से कम १६४ लोगों की मौत स्थानीय सरकार ने पुष्टि की है। इन भूकंपों ने राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में कई इमारतों को गंभीर क्षति पहुंचाई है। गुरुवार को स्थानीय निवासी अपने रिश्तेदारों की खोज में व्यस्त दिखे। बुधवार शाम राजधानी के पश्चिमी क्षेत्र में मैग्नीट्यूड ७.२ और ७.५ के भूकंप आए थे, जो वेनेजुएला के १९०० से लेकर अब तक का सबसे बड़ा भूकंप है, भूगर्भीय अधिकारियों ने बताया है।

रेस्क्यू कर्मचारी और स्थानीय लोग भूकंप के बाद टूटे हुए भवनों में अंधेरे में ऊपर चढ़कर बचाए गए व्यक्तियों की खोज और मलबे में दबे लोगों को निकालने का प्रयास कर रहे थे। फ्रांस, स्पेन और अमेरिका ने तुरंत राहत दल भेजने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार बुधवार शाम राजधानी के पश्चिमी हिस्से में मैग्नीट्यूड ७.२ और ७.५ के शक्तिशाली भूकंप आए। बचाव और खोज कार्य जारी हैं और अधिकारियों ने बताया कि भूकंप से भारी नुकसान हुआ है।

क्षति की गंभीरता को देखते हुए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कम से कम १६४ लोगों के निधन और ९७० से अधिक घायल होने की जानकारी दी है। भूकंप से राजधानी काराकस के उत्तर में स्थित ला गुएरा राज्य सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। ला गुएरा के काटिया ला मार शहर में अपने परिवार को खो चुके ४९ वर्षीय लॉरी रोहास ने एएफपी से कहा, ‘हमारे पास अब कुछ भी नहीं बचा है; न बिजली है, न हिम्मत। राहत कार्य के लिए मलबे में प्रवेश का विचार भी नहीं कर सकते। भूकंप के बाद लगातार आफ्टरशॉक्स हो रहे हैं।’ तटीय शहरों में विद्युत आपूर्ति बंद हो गई है और कई निवासी सड़कों पर रात बिता रहे हैं या अपने परिवार के सदस्यों की खोज में लगे हुए हैं, जिससे संवाददाता रिपोर्ट कर रहे हैं। बुधवार को आए मैग्नीट्यूड ७.५ के भूकंप के बाद यह वेनेजुएला का १९०० के २९ अक्टूबर को समुद्र में आया मैग्नीट्यूड ७.७ का भूकंप छोड़कर अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप है।

नेपाल वॉलीबॉल लीग की 6 फ्रेंचाइजी टीमों की घोषणा

आयोजक केडिया समूह ने गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में पहली बार संचालित होने वाले नेपाल वॉलीबॉल लीग (एनवीएल) में प्रतिस्पर्धा करने वाली 6 फ्रेंचाइजी टीमों के नाम, मालिक और लोगो सार्वजनिक किए हैं। 11 असार, काठमाडौं। नेपाल की पुरुष वॉलीबॉल लीग, नेपाल वॉलीबॉल लीग (एनवीएल) की 6 फ्रेंचाइजी टीमों की घोषणा हुई है। केडिया समूह ने गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में पहले संस्करण में भाग लेने वाली 6 फ्रेंचाइजी टीमों के नाम, टीम मालिक और लोगो सार्वजनिक किए हैं। पहले संस्करण में अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स, कर्णाली शिवराज, काठमाडौं रेड्स, खप्ताड फाल्कन्स, मधेश वारियर्स और सगरमाथा स्मैशर्स प्रतिस्पर्धा करेंगी। ये 6 फ्रेंचाइजी टीमें विभिन्न 6 शहरों का प्रतिनिधित्व करेंगी।

अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स के मालिक सुमिरा स्पोर्ट्स वेंचर हैं, जबकि मिना त्रिपाठी लिम्बु, सुबोध त्रिपाठी और कर्ण थापा टीम के प्रचार-प्रसार करते हैं। क्वेस्ट फार्मास्यूटिकल्स के क्यू स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के माध्यम से संचालित काठमाडौं रेड्स के प्रमोटर उमेश लाल श्रेष्ठ, सुबिन श्रेष्ठ, उत्तम कुमार श्रेष्ठ, पृथ्वी राज भण्डारी और कुमार अनुराग हैं। लक्षरा फिल्म्स के स्वामित्व में कर्णाली शिवराज की प्रमोटर टीम में कृष्ण विक, अशोक भट्ट और सन्तोक विक शामिल हैं। कम्पास इंटरटेनमेंट नेटवर्क के अधीन मधेश वारियर्स के प्रमोटर सन्दिप शाह और प्रनव महत हैं। खप्ताड फाल्कन्स की प्रमोटर टीम में राज शाह, सभराज भण्डारी और संजीव उप्रेती हैं, जबकि सगरमाथा स्मैशर्स के प्रमोटर सन्नी राज भण्डारी और बन्नी राज भण्डारी हैं।

एनवीएल आयोजन के लिए केडिया समूह ने दो साल पहले ही नेपाल वॉलीबॉल संघ के साथ समझौता किया था। विभिन्न कारणों से लीग समय पर संचालित नहीं हो पाई थी, लेकिन अब यह आयोजन के चरण में प्रवेश कर चुका है। नेपाल वॉलीबॉल लीग के प्रबंधकीय निर्देशक आश्विन केडिया ने बताया कि यह लीग नेपाली वॉलीबॉल के लिए ऐतिहासिक साबित होगी। उन्होंने कहा कि इससे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के उत्पादन में मदद मिलेगी। केडिया समूह और नेपाल वॉलीबॉल लीग के अध्यक्ष विमल केडिया ने बताया कि वे लंबे समय से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘हमारी टीम और प्रशंसकों सहित हम सभी ने इस दिन का इंतजार किया था। हमारी लगातार प्रयासों से आज हम इस सफलता तक पहुंचे हैं।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘6 टीमों के प्रमोटरों का सहयोग और उत्साह अत्यंत प्रेरणादायक है और यह लीग भविष्य में बड़ी उम्मीदें जगाती है।’ कार्यक्रम में सभी 6 फ्रेंचाइजी के प्रमोटर उत्साहित होकर नेपाली वॉलीबॉल के विकास में नया अध्याय जोड़ने की प्रतिबद्धता जताई। फिलहाल आयोजकों ने लीग की तारीख आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की है, लेकिन शीघ्र घोषणा करने की योजना है। नेपाल वॉलीबॉल संघ के अध्यक्ष जितेन्द्र बहादुर संघ ने बताया कि भदौ के पहले सप्ताह से दूसरे सप्ताह के बीच लीग संचालन की तारीख को अनुमोदित किया जाएगा।

नेपाल वॉलीबॉल लीग के 6 फ्रेंचाइजी टीमों की घोषणा

आयोजक केडिया समूह ने गुरुवार आयोजित कार्यक्रम में पहली बार आयोजित होने वाली नेपाल वॉलीबॉल लीग (एनवीएल) में प्रतिस्पर्धा करने वाली 6 फ्रेंचाइजी टीमों के नाम, मालिक और लोगो सार्वजनिक किए हैं।

11 असार, काठमांडू। नेपाल के पुरुष वॉलीबॉल लीग नेपाल वॉलीबॉल लीग (एनवीएल) की 6 फ्रेंचाइजी टीमों की घोषणा की गई है।

केडिया समूह ने गुरुवार आयोजित कार्यक्रम में पहली संस्करण में भाग लेने वाली 6 फ्रेंचाइजी टीमों के नाम, टीम मालिक और लोगो सार्वजनिक किए जाने की जानकारी दी है।

पहले संस्करण में अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स, कर्णाली शिवराज, काठमांडू रेड्स, खप्ताड फाल्कन्स, मधेश वारियर्स और सगरमाथा स्माशर्स प्रतिस्पर्धा करेंगे।

ये 6 फ्रेंचाइजी टीमें देश के विभिन्न 6 शहरों का प्रतिनिधित्व करेंगी।

अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स के स्वामित्व में सुमिरा स्पोर्ट्स वेन्चर है, जबकि मिना त्रिपाठी लिम्बू, सुबोध त्रिपाठी और कर्ण थापा टीम के प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं।

क्वेस्ट फार्मास्यूटिकल्स के क्यू स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के तहत संचालित काठमांडू रेड्स के प्रमोटर उमेश लाल श्रेष्ठ, सुबिन श्रेष्ठ, उत्तम कुमार श्रेष्ठ, पृथ्वी राज भंडारी और कुमार अनुराग हैं।

लक्षरा फिल्म्स के स्वामित्व वाली कर्णाली शिवराज के प्रमोटर कृष्ण विक, अशोक भट्ट और संतोक विक हैं।

कंपास इंटरटेनमेंट नेटवर्क के स्वामित्व वाली मधेश वारियर्स के प्रमोटर सन्दिप शाह और प्रणव महत हैं।

खप्ताड फाल्कन्स के प्रमोटर राज शाह, सभराज भंडारी और संजीव उप्रेती हैं, जबकि सगरमाथा स्माशर्स के प्रमोटर सन्नी राज भंडारी और बन्नी राज भंडारी हैं।

एनवीएल आयोजित करने के लिए केडिया समूह ने दो साल पहले ही नेपाल वॉलीबॉल संघ के साथ समझौता कर लिया था। विभिन्न कारणों से लीग समय पर शुरू नहीं हो सकी, लेकिन अब वह आयोजन की योजना पर है।

नेपाल वॉलीबॉल लीग के प्रबंध निदेशक आश्विन केडिया ने इस लीग को नेपाली वॉलीबॉल के लिए ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि इससे सक्षम खिलाड़ियों के उत्पादन में मदद मिलेगी।

केडिया समूह और नेपाल वॉलीबॉल लीग के अध्यक्ष विमल केडिया ने कहा, “हम लंबे समय से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। हमारी टीम और फैंस भी इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। हमारे निरंतर प्रयासों के बाद आज हम इस सफलता तक पहुंचे हैं।” उन्होंने कहा, “6 टीमों के प्रमोटर द्वारा सहयोग और उत्साह देखना बहुत प्रेरणादायक है। यह लीग भविष्य में बड़ी उम्मीदें जगाएगी।”

कार्यक्रम में सभी 6 फ्रेंचाइजी प्रमोटरों ने उत्साह के साथ नेपाली वॉलीबॉल के विकास में नया अध्याय जोड़ने का संकल्प जताया।

आयोजक ने लीग की तिथि अभी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं की है, लेकिन जल्द घोषणा करने की योजना है।

नेपाल वॉलीबॉल संघ के अध्यक्ष जितेन्द्र बहादुर संघ ने बताया कि भाद्र महीने के पहले या दूसरे साप्ताह के भीतर लीग की तिथि स्वीकृत कर दी जाएगी।

अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स के प्रमोटर
खप्ताड फाल्कन्स के प्रमोटर
मधेश वारियर्स के प्रमोटर
काठमांडू रेड्स के प्रमोटर
कर्णाली शिवराज के प्रमोटर
सगरमाथा स्माशर्स के प्रमोटर

नेपाल टेलिकमले आफ्नै सफ्टवेयर विकास अभियान शुरू गर्दै, ‘भाइब कोडिङ’ प्रविधिमा जोड

११ असार, काठमाडौं । सरकारले ९० प्रतिशत स्वामित्व राख्ने राष्ट्रिय दूरसञ्चार कम्पनी नेपाल टेलिकमले आफूलाई आधुनिक, डिजिटल र ग्राहक-केंद्रित बनाउन आवश्यक सफ्टवेयरहरू आफैं विकास गर्न थालेको छ। पहिले कम्पनीले यस्ता सफ्टवेयरहरू बाह्य स्रोतबाट ल्याउँदै आएको थियो, तर अब आफ्नै प्राविधिक जनशक्ति परिचालन गरी विभिन्न आन्तरिक (इन-हाउस) सफ्टवेयर प्रणालीहरू विकास र कार्यान्वयनलाई प्राथमिकता दिएको छ, कम्पनीका प्रवक्ता कमल लामिछानेले जानकारी दिए।

आफ्ना आन्तरिक कार्यप्रणालीहरू स्वचालित, पारदर्शी र जवाफदेही बनाउन शुरू गरिएको यस प्रयासले कम्पनीको सुशासन र सेवा प्रवाहमा ठूलो सुधार ल्याउने विश्वास गरिएको छ। जस्तै, टेलिकमले केन्द्रीय कार्यालयदेखि क्षेत्रीय निर्देशनालय र मातहतका सबै कार्यालयहरूमा ‘प्रोक्योरमेन्ट म्यानेजमेन्ट सिस्टम’ अर्थात् खरिद व्यवस्थापन प्रणाली लागू गरेको छ। नेपालको सार्वजनिक खरिद ऐनका प्रावधान र व्यावहारिक आवश्यकतालाई ध्यानमा राखेर विकास गरिएको यो सफ्टवेयरले खरिद प्रक्रियालाई प्रविधिमैत्री, पारदर्शी र व्यवस्थित बनाउन महत्वपूर्ण भूमिका खेल्नेछ, प्रवक्ता लामिछानेले बताए।

खरिद योजना निर्माणदेखि बोलपत्र आह्वान, सम्झौता र अनुगमनसमेत सबै प्रक्रिया डिजिटल माध्यमबाट गरिने भएकाले प्रशासनिक ढिलाइ कम हुनेछ र यसले समयको बचत हुनेछ भनी कम्पनीले जनाएको छ। साथै, देशभर रहेका टेलिकम कार्यालयहरूको मर्मत–सम्भार व्यवस्थापनका लागि ‘ड्युटी चार्ट म्यानेजमेन्ट सिस्टम’ नामक नयाँ सफ्टवेयर पनि विकास गरिएको छ। यसले कुन कार्यालयमा कुन प्राविधिक कस्तो शिफ्टमा काम गर्दैछन् र उनीहरूको जिम्मेवारी के छ भन्ने कुरा तुरुन्तै थाहा पाउन सहज बनाउँछ। विशेष गरेर दूरसञ्चार सेवामा अवरोध आउँदा ड्युटिमा रहेका कर्मचारीलाई सिधै सम्पर्क गर्न फोन नम्बर सहित आवश्यक विवरण उपलब्ध गराइएकोले समस्या छिटो समाधान हुने प्रवक्ता लामिछानेले बताए।

नेपाली फुटबल पुनर्निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता – मन्त्री पोखरेल

११ असार, काठमाडौं । शिक्षा तथा खेलकुदमन्त्री सस्मित पोखरेलले नेपाली फुटबलको पुनर्निर्माणका लागि आगामी प्रतिबद्धता व्यक्त गरेका छन्। बिहीबार मात्र अखिल नेपाल फुटबल संघ (एन्फा) लाई फीफाले निलम्बन गर्ने निर्णय गरेको थियो। यसै सन्दर्भमा मन्त्री पोखरेलले आफ्नो मन्तव्य व्यक्त गरेका हुन्।

सामाजिक सञ्जालमा एक प्रश्नको जवाफ दिँदै मन्त्री पोखरेलले खेलकुदका सरोकारवाला र पूर्व खेलाडीहरूसँग निरन्तर छलफल भइरहेकामा जोड दिनुभयो र नेपाली फुटबललाई पुनर्निर्माण गर्ने प्रबल सङ्कल्प व्यक्त गर्नुभयो। फेसबुकमा राष्ट्रिय परीक्षा बोर्डसँग सम्बन्धित एक पोस्टमा एक व्यक्तिले फीफाको एन्फा निलम्बनबारे धारणा सोधेका थिए। यतिबेला मन्त्री पोखरेलले भने, ‘हामी हालका र विगतका फुटबल खेलाडीहरू लगायत विभिन्न सरोकारवालासँग निरन्तर छलफलमा छौं। हामी नेपाली फुटबललाई पुनर्निर्माण गर्नेछौं।’

ओपनएआई ने अपनी खुद की एआई चिप ‘जलापेनो’ लॉन्च की

११ असार, काठमाडौं। चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई ने अपनी डिज़ाइन की हुई पहली एआई चिप ‘जलापेनो’ सार्वजनिक कर दी है। कंपनी ने सेमीकंडक्टर निर्माता ‘ब्रोडकम’ के साथ मिलकर इस चिप को विकसित किया है। इस नई चिप को चैटजीपीटी, कोडेक्स और भविष्य में आने वाले अत्याधुनिक एआई एजेंट्स को सुरक्षित, विश्वसनीय और तेज़ गति से संचालित करने के लिए तैयार किया गया है, कंपनी ने बताया।
अब तक ओपनएआई अपने मॉडल्स चलाने के लिए एनविडिया जैसी अन्य कंपनियों के चिप्स पर निर्भर था। ओपनएआई के अनुसार, एआई के विकास में चिप्स अत्यंत महत्वपूर्ण आधार होते हैं। अपनी खुद की चिप होने से कंपनी कम लागत में व्यापक स्तर पर लोगों को एआई सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम होगी। इस कदम से वैश्विक एआई बाजार में बड़े बदलाव आने और एआई तकनीक की पहुँच में और विस्तार होने की उम्मीद कंपनी ने जताई है।

भेनेजुएलामा विनाशकारी भूकम्पका कारणहरू

एक मिनेटको अन्तरालमा आएका दुई शक्तिशाली भूकम्पका कारण भेनेजुएलाको राजधानी कराकसमा बुधबार कैयौँ भवनहरू भत्किएका छन्। सार्वजनिक बिदाको दिन साँझपख आएको भूकम्पका कारण दर्जनौँ मानिसको मृत्यु भएको छ भने सयौँ घाइते भएका छन्। उद्धारकर्ताहरू भत्किएका भवनका अवशेषहरूमा मानिसहरूलाई खोजी गरिरहेका छन्। मृतकहरूको संख्या अझै बढ्ने सम्भावना छ। अमेरिकी भूगर्भिक सर्वेक्षण निकाय यूएसजीएसले पहिलो भूकम्पको मापन ७.२ र दोस्रोको ७.५ म्याग्निट्यूड जनाएको छ। कोलम्बियाको राजधानी बोगोटासम्म पनि यो भूकम्प महसुस गरिएको थियो। हाल अधिकारीहरूले प्रभावित क्षेत्रको क्षतिको विवरण संकलन गरिरहेका छन्। यूएसजीएसले मृतकको संख्या १०,००० देखि एक लाखसम्म पुग्न सक्ने सम्भावना ४० प्रतिशत रहेको बताएको छ।

भूकम्पका कारण हुने जनधनको क्षतिमा विभिन्न कारकहरू सक्रिय हुन्छन्। म्याग्निट्यूड र अवधिले भूकम्पको विनाशकारी शक्तिमा महत्वपूर्ण भूमिका खेल्दछन्। भूकम्पको धक्का ‘फल्ट लाइन’ सँगको दूरी र त्यसलाई उत्पन्न गर्ने शक्तिको आधारमा मापन गरिन्छ। साना भूकम्पका कम्पनहरू केही सेकेन्डसम्म मात्र रहन्छन् भने मध्यम वा ठूलो भूकम्पका कम्पनहरू केही मिनेटसम्म जारी रहन सक्छन्।

भूकम्प आउने समय पनि महत्त्वपूर्ण हुन्छ। राति सुतिरहेको अवस्थामा आएको भूकम्पले धेरै भवनहरू भत्किने जोखिम रहन्छ। मोरक्कोमा भएको भूकम्पको केन्द्रबिन्दु पृथ्वीको सतहभन्दा १८ किलोमिटर तल गहिरो थियो, जसले क्षति र उद्धार कार्यलाई प्रभावित बनाउन सक्छ। भूकम्पको पूर्वतयारी साथै उद्धार टोलीको छिटो र प्रभावकारी काम पनि अत्यावश्यक हुन्छ।

दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच पहला हाफ गोलरहित समाप्त

मोन्टेरे स्टेडियम में चल रहे मैच में ४५ मिनट और अतिरिक्त समय में दोनों टीमों ने गोल नहीं किया। ११ असार, काठमाडौं। फीफा विश्व कप २०२६ के तहत समूह ‘ए’ के मुकाबले में दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच पहला हाफ गोलरहित बराबरी पर खत्म हुआ है। मोन्टेरे स्टेडियम में जारी मैच में ४५ मिनट के साथ अतिरिक्त समय में भी दोनों टीमों ने गोल करने में सफल नहीं हुईं।