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लेखक: space4knews

मधेश प्रदेश की खुदरा योजनाओं में रुकावट से मंत्री और कर्मचारी असंतुष्ट

११ असार, जनकपुरधाम। मधेश प्रदेश के शिक्षा तथा संस्कृति मंत्रालय ने चालू आर्थिक वर्ष के रेडबुक में शामिल प्रशिक्षण, गोष्ठी, सड़क नाटक सहित छोटे कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने के लिए १९ जेठ को प्रस्ताव आमंत्रित करते हुए सूचना प्रकाशित की।

१५ दिन की सूचना के माध्यम से १० लाख रुपए की ८ योजनाएं, ९ लाख रुपए की २ योजनाएं और ८ लाख रुपए की एक योजना सहित कुल ११ योजनाओं के कार्यान्वयन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। लेकिन ये सभी योजनाएं कार्यान्वयन शुरू होने से पहले ही रोक दी गईं।

योजना रोकने का मुख्य कारण अर्थ मंत्रालय का निर्णय और उसके अनुसार जारी परिपत्र है। अर्थ मंत्रालय ने २६ जेठ एवं २ असार को मंत्रालय, सचिवालय, आयोग, प्रतिष्ठान और अन्य निकायों को पत्राचार करते हुए १० लाख रुपए तक की योजनाएं कार्यान्वित न करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, २५ जेठ तक हुए समझौतों की ही भुगतान करने को कहा गया है।

इस निर्णय पर शिक्षा तथा संस्कृति मंत्रालय ने असंतोष जताया है। शिक्षा तथा संस्कृति मंत्री मनोजकुमार सिंह ने कहा कि प्रदेशसभा से पारित होकर रेडबुक में शामिल योजनाओं को लागू करने दिया जाना चाहिए।

‘रेडबुक में सदन से पारित योजनाओं को तो चलने देना चाहिए। अन्यथा इसका सीधा असर जनता पर पड़ेगा। यदि खर्च १० लाख रुपए से कम है तो ज्यादा बजट क्यों रखा जाए,’ मंत्री सिंह ने कहा, ‘चल रही योजनाएं भी रोकी गई हैं।’

अर्थ मंत्रालय के परिपत्र से अन्य मंत्रालय भी असंतुष्ट हैं, जिसके कारण मंत्रालयों के नियमित कार्यों में भी बाधा आई है।

वैशाख के अंतिम सप्ताह में बजट खर्च प्रणाली (पीएलआईएमबीएस) के माध्यम से मंत्रालय और सम्बद्ध निकायों के बजट खोले गए थे। इससे पहले बजट रोका हुआ था, जिसके कारण कई योजनाओं का कार्यान्वयन नहीं हो पाया था। उस समय अर्थ मंत्री की जिम्मेदारी जनमत पार्टी के महेशप्रसाद यादव के पास थी।

चालू आर्थिक वर्ष में प्रदेश सरकार ने अपनी क्षमता से अधिक बजट लाया है, जिससे अर्थ मंत्रालय आर्थिक जोखिम में है। बजट कार्यान्वयन के दौरान करीब १२ अरब रुपए से अधिक घाटे का संकेत मिलने पर अर्थ मंत्रालय ने पहले ही सभी शीर्षकों पर २० प्रतिशत बजट कटौती और १० लाख रुपए तक की योजनाओं का बजट समर्पित करने के निर्देश दिए थे।

अब पुनः जारी परिपत्र में १० लाख रुपए तक की योजनाओं को रोकने के साथ ही विभिन्न शीर्षक में खर्च कटौती का निर्देश दिया गया है। परिपत्र के अनुसार २५ जेठ तक हुए समझौते की योजनाओं की ही भुगतान की जाएगी। मसलंड और कार्यालय सामग्री खरीद पर ३० प्रतिशत बजट कटौती का उल्लेख है।

इसी प्रकार ईंधन, वाहन व मशीनरी औजारों की मरम्मत, सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण और मरम्मत, छपाई और सूचना प्रकाशन, उत्पादन सामग्री और सेवा, कार्यक्रम संचालन, प्रशिक्षण, परामर्श सेवा, कर्मचारी प्रशिक्षण, विज्ञापन और भ्रमण खर्च जैसे शीर्षकों में बचे बजट का ५० प्रतिशत रकम रोकने का निर्देश है।

अर्थ मंत्रालय ने वाहन और मशीनरी औजार खरीद, वन और वातावरण संरक्षण, संरचना निर्माण, निर्मित संरचनाओं की सुधार, पुस्तक और सामग्री खरीद, सूचना प्रणाली एवं सॉफ़्टवेयर स्थापना, विभिन्न संस्थाओं को अनुदान और पूंजीगत सहयोग, पशुपालन एवं बागवानी विकास, विद्युत संरचना निर्माण और पुनर्निर्माण में बचे हुए सभी खर्चों को रोकने का भी निर्देश दिया है।

खर्चों पर अर्थ मंत्रालय की सख्ती के कारण अन्य मंत्रालय असंतुष्ट हुए हैं तथा मंत्री एवं कर्मचारी भी नाराज हैं। भूमि व्यवस्था, कृषि और सहकारी मंत्रालय ने असार के अंत तक अपना कार्य ठप होने की जानकारी दी है।

भूमि व्यवस्था, कृषि और सहकारी मंत्री श्यामप्रसाद पटेल के अनुसार, अर्थ मंत्रालय के परिपत्र के कारण मंत्रालय का काम पूरी तरह प्रभावित हुआ है।

‘अर्थ मंत्रालय के परिपत्र से हमारे सभी काम ठप हो गए हैं। २५ जेठ से पहले हुए समझौते की ही भुगतान होगी, ऐसा अर्थ मंत्रालय ने बताया है,’ उन्होंने शिकायत की।

मंत्री पटेल ने कहा कि वैशाख के अंत में ही अर्थ मंत्रालय ने पीएलआईएमबीएस में बजट खोला था, जिसके बाद मंत्रालय ने योजनाओं को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की थी।

‘बजट रिलीज होने के बाद मंत्रालय ने कार्यक्रम के लिए सूचना जारी की। किसानों के आवेदन में लगभग एक माह लग जाता है। कर्मचारियों का निगरानी करना भी १५ दिनों तक समय लेता है। यदि जेठ तक नतीजा निकला और असार में काम हुआ, तो ही समझौता करके अनुदान दिया जा सकता है,’ मंत्री पटेल ने बताया, ‘लेकिन अर्थ मंत्रालय के कारण हमारा सारा काम रुक गया। किसानों के लिए अधिक काम नहीं कर सके।’

उन्होंने इस मुद्दे को मंत्रिपरिषद की बैठक में भी उठाया था। मुख्यमंत्री और अर्थ मंत्री से शिकायत की गई थी, जहां उन्हें पहले से चल रही योजनाओं का विवरण भेजने को कहा गया था। ‘पत्र भेजे बावजूद बजट नहीं खोला गया है,’ मंत्री पटेल ने कहा।

भौतिक पूर्वाधार विकास मंत्री मोहम्मद समिर ने कहा कि अर्थ मंत्रालय के बजट रोकने से उनके मंत्रालय के काम प्रभावित हुए हैं और इस मामले पर मंत्रिपरिषद में चर्चा करेंगे।

ऊर्जा, सिंचाई एवं पेयजल मंत्रालय के सचिव होमनाथ पौडेल ने कहा कि कार्यान्वयन की स्थिति में पहुंच चुकी योजनाओं पर परिपत्र का प्रत्यक्ष प्रभाव कम रहेगा। ‘परियोजनाओं का भुगतान करने में कोई बड़ी समस्या नहीं दिखती, पर कुछ हद तक प्रभाव आएगा,’ उन्होंने कहा।

मसलंड सामग्री खरीद जैसे शीर्षकों में बजट कम होने के कारण मंत्रालय ने संबंधित निकायों को समन्वय के लिए कहा है।

हाल ही में मधेश प्रदेश में गठबंधन के परिवर्तन के बाद अर्थ मंत्री के रूप में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) संसदीय दल के नेता युवराज भट्टराई नियुक्त हुए हैं। उन्होंने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की कड़ी रणनीति अपनाई है। उसी के तहत खुदरा योजनाओं पर पूर्ण रोक लगाने और मंत्रालयों को परिपत्र जारी करने का मंत्रीस्तरीय निर्णय किया गया है।

अर्थ मंत्रालय ने यह भी कहा है कि अनावश्यक और फिजूलखर्ची शीर्षकों में भी बजट में भारी कटौती की जाएगी।

आर्थिक मंत्रालय के अनुसार, राजस्व संग्रह अपेक्षा अनुरूप न हो पाने के कारण विभिन्न बजट शीर्षकों में कटौती और खुदरा योजनाओं को रोका गया है। मंत्री भट्टराई के बजट में भी खुदरा योजनाओं को कमज़ोर करने, खुले प्रतिस्पर्धा द्वारा काम कराने और वाहन खरीद पर रोक लगाने का प्रावधान है।

पेरिस में अत्यधिक गर्मी के कारण सार्वजनिक स्थानों पर शराब बिक्री पर रोक

भीषण गर्मी (हिटवेव) के कारण फ्रांस की राजधानी पेरिस के अस्पतालों में मरीजों की संख्या अत्यधिक बढ़ने के बाद प्रशासन ने सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने और बिक्री पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। अत्यधिक गर्मी के दौरान शराब सेवन से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ सकती हैं और अस्पतालों पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए प्रशासन ने यह कदम उठाया है।

प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार शुक्रवार दोपहर 12 बजे से शनिवार सुबह 7 बजे तक एवं पुनः शनिवार दोपहर 12 बजे से रविवार सुबह 7 बजे तक सार्वजनिक स्थलों पर शराब पीना वर्जित रहेगा। इसी तरह, दुकानों से शराब खरीद कर साथ ले जाने (टेकअवे) की बिक्री भी शुक्रवार शाम 6 बजे से शनिवार सुबह 7 बजे तक और शनिवार शाम 6 बजे से रविवार सुबह 7 बजे तक प्रतिबंधित रहेगी। हालांकि, अनुमति प्राप्त बार और रेस्टोरेंट में यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्न ने भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए देश में सबसे उच्च स्तर की स्वास्थ्य चेतावनी (हेल्थ अलर्ट) जारी करने की जानकारी दी है। इस चेतावनी के साथ अस्पतालों में अतिरिक्त स्वास्थ्यकर्मी एवं कर्मचारी तैनात किए गए हैं ताकि जोखिम में मौजूद और संवेदनशील नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पिछले कुछ दिनों से स्पेन, ब्रिटेन और फ्रांस को प्रभावित कर रही यह हिटवेव अब पूर्वी यूरोप की ओर बढ़ रही है। जर्मनी और चेक गणराज्य के मौसम विज्ञान विभागों ने भी अपने-अपने देशों में अत्यधिक गर्मी की चेतावनी जारी की है। जर्मनी में शुक्रवार को तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि चेक गणराज्य के अधिकांश क्षेत्रों में भी अब तक का सबसे उच्च तापमान अलर्ट लागू किया गया है।

बुबाओं के नक्शे कदम पर विश्वकप में इतिहास रच रहे नॉर्वे के तीन खिलाड़ी

साल 1994 का फीफा विश्वकप, अमेरिका। नॉर्वे की टीम में तीन खिलाड़ी थे – गोलकीपर एरिक थोर्स्टवेड्ट, मिडफील्डर अल्फ-इने हालांड और फॉरवर्ड गोरान सोर्लोथ। 32 साल बाद अमेरिका फिर से विश्वकप की मेजबानी कर रहा है और इतिहास ने एक खास चक्र पूरा किया है। इस बार नॉर्वे की जर्सी में मैदान पर उतरे हैं ये तीनों खिलाड़ियों के बेटे – क्रिस्टियन थोर्स्टवेड्ट, एर्लिंग हालांड और अलेक्जेंडर सोर्लोथ। इराक के खिलाफ ग्रुप स्टेज के मैच में ये तीनों एक साथ मैदान पर उतरे और नॉर्वे फीफा विश्वकप के इतिहास में ऐसा करने वाला पहला देश बन गया जिसने एक ही मैच में पूर्व विश्वकप खिलाड़ी के तीन बेटों को खेलवाया।

यह कहानी अमेरिका से शुरू हो कर फिर अमेरिका में दोहराई गई। 1994 का विश्वकप नॉर्वे के लिए बेहद खास था। 1938 के बाद पहली बार विश्वकप खेलने वाली उस टीम में अल्फ-इने हालांड, गोरान सोर्लोथ और एरिक थोर्स्टवेड्ट एक साथ मौजूद थे। उन्होंने क्वालीफायर्स में नीदरलैंड्स को पछाड़ते हुए इंग्लैंड को बाहर किया था। विश्वकप में नॉर्वे ने मेक्सिको को 1-0 से हराया, इटली से 1-0 से हार गया और आयरलैंड के साथ बिना गोल के ड्रॉ खेला। चारों टीमों के समान चार अंक होने के बावजूद, गोल अंतर के कारण नॉर्वे का सफर ग्रुप स्टेज पर खत्म हो गया। अब उस टीम के तीन बेटों ने फिर से अमेरिकी मैदानों पर विश्वकप खेल रहे हैं।

एर्लिंग हालांड ने कहा, “विश्वकप में डेब्यू करना और 28 साल बाद नॉर्वे को जीत दिलाना मेरे लिए गर्व की बात है।” सोर्लोथ परिवार के गोरान सोर्लोथ ने नॉर्वे के लिए 55 मैच खेले और 15 गोल किए। उनके बेटे अलेक्जेंडर सोर्लोथ यूरोप में 14 सीज़न में 13 क्लबों में खेल चुके हैं। एरिक थोर्स्टवेड्ट 1994 में नॉर्वे के पहले विकल्प के गोलकीपर थे। उनके बेटे क्रिस्टियन थोर्स्टवेड्ट मिडफील्डर के तौर पर खेल रहे हैं।

नॉर्वे ने इस बार शानदार शुरुआत की है। इराक को 4-1 और सेनेगल को 3-2 से हराकर नॉर्वे ने नॉकआउट चरण के लिए क्वालिफाई कर लिया है। इस टीम को नॉर्वे की ‘गोल्डन जेनरेशन’ माना जाता है। उनके बाप-पिता ने 1994 में अमेरिकी मैदानों पर विश्वकप खेला था। 32 साल बाद उनके बेटे उसी मैदान पर इतिहास बना रहे हैं। फुटबॉल में विरासत की बातें अक्सर सुनाई देती हैं, लेकिन नॉर्वे की यह कहानी विरासत से परे है – यह तीन परिवार और दो पीढ़ियों ने मिलकर विश्वकप का एक अद्भुत अध्याय लिखा है।

जेनजेड की पसंद में सेकेंड हैंड कपड़ों की बढ़ती लोकप्रियता

फैशन ने दो पीढ़ियों को विभाजित किया है: मिलेनियल्स और जेनजेड। पहले की पीढ़ी फैशन में विलासिता को महत्व देती थी, लेकिन जेनजेड में ऐसा आकर्षण नहीं दिखता। वे स्वतंत्र और मितव्ययी हैं। इसे मापने के तीन पहलू हैं: पहला, सेकेंड हैंड कपड़ों की रुचि; दूसरा, यूनिसेक्स पहनावे का उपयोग; और तीसरा, ओवरसाइज और सादगीपूर्ण शैली। काठमांडू के थ्रिफ्ट कपड़ों की दुकानों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। सोशल मीडिया का प्रभाव, उपभोग संस्कृति में बदलाव और पर्यावरणीय जागरूकता ने सेकेंड हैंड कपड़ों की खरीद-फरोख्त को, खासकर जेनजेड पीढ़ी के बीच, फैशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।

आज के युवा महंगे ब्रांडों की ही तलाश नहीं करते। वे अपनी पहचान, सहजता, किफायतीपन और स्थिरता को प्राथमिकता देते हैं। इसलिए नेपाल में थ्रिफ्ट स्टोर्स की संख्या बढ़ रही है और सेकेंड हैंड कपड़ों के बाजार का विस्तार हो रहा है, जिससे फैशन की परिभाषा भी बदल रही है। पहले फैशन का मतलब नया कपड़ा, महंगा ब्रांड और चमकदार लुक होता था, लेकिन अब की जेनजेड पीढ़ी फैशन को आत्म-अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में देखती है।

काठमांडू के बांसबारी स्थित विश्व शांति चिरण मिलन कैंपस में स्नातक द्वितीय वर्ष के छात्र गौरव पोखरेल के अनुसार, आज के युवा दूसरों के पहनावे से ज्यादा यह देखते हैं कि उनके लिए क्या उपयुक्त है। उनका मानना है कि जेनजेड पीढ़ी फैशन को केवल ट्रेंड फॉलो करने के बजाय अपनी व्यक्तिगत पहचान प्रस्तुत करने का माध्यम मानती है। सोशल मीडिया के माध्यम से विश्वभर के फैशन ट्रेंड्स आसानी से पहुँच रहे हैं, जिससे नेपाली युवा भी अंतरराष्ट्रीय फैशन से जुड़ रहे हैं।

थ्रिफ्टिंग युवाओं को सीमित बजट में भी अपनी पसंदीदा शैली अपनाने का अवसर देती है। यही कारण है कि जेनजेड पीढ़ी इसे फैशन का एक महत्वपूर्ण विकल्प मानने लगी है। सोशल मीडिया ने थ्रिफ्टिंग को ‘कूल’ बनाकर प्रस्तुत किया है। थ्रिफ्ट बाय कुसकी की संचालक कुसुम केसी के अनुसार, थ्रिफ्टिंग केवल सेकेंड हैंड कपड़े खरीदने का विषय नहीं बल्कि उपभोग की सोच में आए बदलाव का संकेत भी है। जेनजेड की फैशन पसंद यह दिखाती है कि वे ब्रांड प्रदर्शन से ज्यादा अपनी व्यक्तिगत पहचान बनाने में विश्वास रखते हैं।

श्रीलंका में वायुसेना के सैनिकों से भरे बस पर जंगली हाथी का हमला

श्रीलंका में वायुसेना के सैनिकों से भरी एक बस पर जंगली हाथी ने हमला किया, जिसका वीडियो सार्वजनिक हुआ है। यह घटना 23 जून मंगलवार को श्रीलंका के दक्षिणी प्रांत में स्थित किरिंडा शहर में घटित हुई। हाथी के हमले में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ, लेकिन बस को नुकसान पहुंचा है।

श्रीलंका के वन क्षेत्र में जंगली हाथी कभी-कभी लोगों और वाहनों पर आक्रमण कर देते हैं।

पाराग्वे और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहला हाफ 0-0 ड्रॉ

शुक्रवार सान फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम में खेले जा रहे मैच में दोनों टीमों ने पहला हाफ गोल करने में सफल नहीं रहीं। १२ असार, काठमाडौं। फीफा विश्व कप २०२६ के ग्रुप ‘डी’ में शामिल पाराग्वे और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहला हाफ बिना गोल के ड्रॉ पर समाप्त हुआ। शुक्रवार को सान फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम में जारी इस मुकाबले में दोनों टीमों ने गोल करने का प्रयास किया लेकिन असफल रहीं। इससे पहले दोनों टीमों को अमेरिका से हार और तुर्की से जीत मिली थी।

तनहुँ में संदिग्ध वस्तु मिलने पर सेना ने सुरक्षित तरीके से नष्ट किया

१२ असार, काठमाडौं । तनहुँ के व्यास नगरपालिका–५ संगमटोल स्थित एक घर के पास संदिग्ध वस्तु पाई गई है। उक्त वस्तु नेपाली सेना द्वारा सुरक्षित तरीके से नष्ट की गई है। कालीभञ्जन गण से खटी नेपाली सेना की बम डिस्पोजल टीम ने इस वस्तु को नष्ट करने की जानकारी दी है।

फिफा विश्व कप २०२६ में पहली हाफ में अमेरिकी टीम टर्की से पिछड़ गई

फिफा विश्व कप २०२६ के तहत जारी मैच में पहली हाफ के अंत तक अमेरिका ने शुरू में ली गई बढ़त खोते हुए टर्की के खिलाफ २–१ से पिछड़ रही है। १२ असार, काठमांडू।

अमेरिका ने मैच के तीसरे मिनट में बढ़त लेकर खेल में दबदबा बनाया था। अमेरिका के लिए ऑस्टिन ट्रस्टी ने गोल किया था। लेकिन मैच के १०वें मिनट में टर्की के अर्दा गुलर ने गोल करके खेल को बराबरी पर ला दिया। फिर, ३१वें मिनट में टर्की के ओर्कुन कोकुले ने गोल करते हुए टीम को २–१ की बढ़त दिलाई।

पहली हाफ के अंदर अधिक गोल नहीं होने के कारण अमेरिकी टीम २–१ के गोल अंतर से पीछे रह गई।

धन कमाने की प्रतिस्पर्धा में खोता जा रहा जीवन का अर्थ

पिछले दो-तीन दशकों तक नेपाली समाज की मुख्य पहचान सामूहिकता, पारिवारिक निकटता, सांस्कृतिक सह-अस्तित्व और प्रकृति के साथ सहज संबंध रही थी। किसी व्यक्ति की सफलता केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि से नहीं, बल्कि परिवार और समुदाय के सम्मान से जुड़ी मानी जाती थी। गांव के चौतरी संवाद के केंद्र होते थे, पड़ोसी सुख-दुख के साझेदार और परिवार केवल रक्त संबंध नहीं बल्कि जीवन का आधार था। लेकिन 21वीं सदी में आते-आते यह सामाजिक संरचना तेज़ी से परिवर्तनशील हो रही है। आज के नेपाली समाज के स्वरूप को बदलने वाली तीन प्रमुख शक्तियाँ बन चुकी हैं – बाध्यकारी वैदेशिक रोजगार, अनियंत्रित शहरीकरण और चौबीसों घंटे मनुष्य की चेतना को प्रभावित करने वाला सामाजिक नेटवर्क। ये तीनों तत्व आर्थिक अवसरों, उपभोग क्षमता और जीवनशैली में अभूतपूर्व बदलाव ला रहे हैं। पर यह बदलाव समाज को एक भौतिकवादी प्रतिस्पर्धा की ओर धकेल रहा है, जहां साधन प्राप्ति की दौड़ में व्यक्ति जीवन के वास्तविक उद्देश्य और संबंधों के मूल्यों को भूलता जा रहा है।

वैदेशिक रोजगार, शहरीकरण और सामाजिक नेटवर्क के प्रभाव में हम भौतिक समृद्धि की दौड़ में अंधाधुंध भाग रहे हैं। लेकिन यह दौड़ हमारे पारिवारिक मूल्यों, आत्मिक शांति और सामाजिक सद्भाव को कमजोर कर रही है। इस संकट का सबसे पहला और प्रत्यक्ष प्रभाव परिवार पर पड़ा है। रेमिटेंस देश की अर्थव्यवस्था को सहारा देते हुए गरीब परिवारों को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाने में मदद कर रही है। कर्णाली के दुर्गम गांवों से लेकर मधेश के मैदानों और पहाड़ों तक बड़े और मजबूत मकान बने हैं। लेकिन इन्हीं कंक्रीट के घरों के भीतर भावनात्मक शून्यता बढ़ रही है। लाखों युवा खाड़ी की रेगिस्तान में पसीना बहाते हुए घर में एक पीढ़ी अभिभावकों की सान्निध्य से वंचित होकर बड़े हो रहे हैं।

पति-पत्नी लंबे समय तक अलग रहने के कारण अविश्वास बढ़ने से संबंध-विच्छेद बढ़े हैं। पिछले वर्ष देशभर में लगभग 24 हजार 522 संबंध-विच्छेद के मामले दायर हुए थे, जो अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। बच्चे पिता के कंधे और मां की गोदी की बजाय महंगी बोर्डिंग स्कूल के हॉस्टल में पाले जा रहे हैं। वृद्ध माता-पिता गांव के खाली घरों या शहर के आधुनिक मकानों में भावनात्मक खालीपन और अकेलेपन से जूझ रहे हैं। परिवारों में भौतिक समृद्धि आई है पर आंतरिक संबंध और भावनाएं टूट रही हैं। दूसरी ओर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटॉक लोगों को दूसरों के जीवन का संपादित संस्करण दिखाते हैं। सफलता की चमक तो दिखती है, संघर्ष छिपाया जाता है। उपलब्धियां प्रदर्शित होती हैं, असफलताएं छुपाई जाती हैं। अर्थशास्त्री रिचर्ड इस्टरलिन के अध्ययन में भी यह बात सामने आई है कि व्यक्ति की संतुष्टि उसकी वास्तविक आय से अधिक उसके “खुद को दूसरों की तुलना में कहां देखकर महसूस करता है” से जुड़ी होती है।

परिणामस्वरूप, लोग खुद को संतुष्ट नहीं कर पाते। तकनीक ने मानवीय संबंधों को पहले से अधिक जुड़े हुए दिखाया है, लेकिन भावनात्मक तौर पर हम दूर होते जा रहे हैं। संवाद के माध्यम बढ़े हैं लेकिन अंतरंगता कम हुई है। संपर्कों की संख्या बढ़ी है पर संबंधों की गहराई कमजोर हुई है। गांव धीरे-धीरे खाली हो रहे हैं और शहर अनियंत्रित रूप से फैल रहे हैं। सामाजिक नेटवर्क ने वास्तविक जीवन की तुलना में आभासी दुनिया को अधिक आकर्षक और प्रभावशाली बना दिया है। इससे व्यक्ति की मनोविज्ञान पर सीधा प्रभाव पड़ा है। तुलना, असंतुष्टि, मानसिक तनाव और अकेलापन आज के साझा सामाजिक समस्याएं बन चुकी हैं। बाहरी तौर पर परिवार और समाज समृद्ध, आधुनिक और विकसित दिखाई देते हैं, लेकिन अंदर संबंधों का विस्थापन, मानवीय मूल्यों का क्षरण और आत्मिक शून्यता का संकट गहरा होता जा रहा है। इसलिए आज की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना, सामाजिक सद्भाव और संबंधों की गर्माहट बनाए रखना भी है।

धन कमाने की दौड़ में खोता जा रहा जीवन का अर्थ

पिछले दो-तीन दशकों तक नेपाली समाज की मुख्य पहचान सामूहिकता, पारिवारिक निकटता, सांस्कृतिक सहअस्तित्व और प्रकृति से सहज संबंध थी। किसी व्यक्ति की सफलता सिर्फ उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं थी, बल्कि परिवार और समुदाय के सम्मान से भी जुड़ी होती थी। गांव के चौतरी संवाद के केंद्र थे, पड़ोसी सुख-दुख के साझेदार थे, और परिवार सिर्फ रक्त संबंध नहीं, जीवन का आधार बनता था।

लेकिन 21वीं सदी में आते-आते यह सामाजिक संरचना तेज़ी से बदल रही है। आज नेपाली समाज को तीन मुख्य शक्तियाँ बदल रही हैं – बाध्यात्मक वैदेशिक रोजगार, अनियंत्रित शहरीकरण और चौबीसों घंटे मानव चेतना को प्रभावित करने वाला सामाजिक नेटवर्क।

ये तीनों तत्व आर्थिक अवसरों, उपभोग क्षमता और जीवनशैली में अभूतपूर्व बदलाव ला रहे हैं। लेकिन यह बदलाव समाज को एक भौतिकवादी प्रतिस्पर्धा की तरफ धकेल रहा है, जहां साधन पाने की दौड़ में लोग जीवन के वास्तविक उद्देश्य और संबंधों की कीमत भूल रहे हैं। वैदेशिक रोजगार, शहरीकरण और सोशल मीडिया के प्रभाव से हम भौतिक समृद्धि की दौड़ में अंधाधुंध भाग रहे हैं। परन्तु यह दौड़ हमारे पारिवारिक मूल्य, आंतरिक शांति और सामाजिक सद्भाव को कमजोर कर रही है।

इस संकट का सबसे पहले और प्रत्यक्ष असर परिवार पर पड़ा है। रेमिटेंस ने देश की अर्थव्यवस्था को सहारा दिया और गरीबी के दायरे से परिवारों को ऊपर उठाया है। कर्णाली के दूरदराज गांवों से लेकर मधेश के मैदानों और पहाड़ों तक बड़े मजबूत मकान बने हैं। पर इन कंक्रीट मकानों के अंदर भावनात्मक शून्यता बढ़ रही है। लाखों युवा खाड़ी के मरुस्थल में पसीना बहाते हैं, और घर में एक पूरा पीढ़ी बिना अभिभावक के बड़ा हो रहा है।

पति-पत्नी लंबे समय तक अलग रहने से अविश्वास बढ़ा है, जिस कारण तलाक के मामले बढ़े हैं। पिछले वर्ष देशभर में लगभग 24,522 तलाक के मामले दर्ज हुए, जो अब तक के सबसे अधिक संख्या है। बच्चे माता-पिता के संरक्षण के बजाय महंगे बोर्डिंग स्कूलों के हॉस्टल में बड़े हो रहे हैं। वृद्ध माता-पिता गाँवों के खाली घरों या शहरों के आधुनिक घरों में भावनात्मक खालीपन और अकेलापन झेल रहे हैं। परिवार में भले ही भौतिक समृद्धि आई हो, पर आंतरिक संबंध और भावनाएं टूट रही हैं।

वहीं, फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोगों को दूसरों के संपादित जीवन का संस्करण दिखाते हैं। सफलता का झलक तो मिलती है, संघर्ष छिपा रहता है। उपलब्धि दिखती है, असफलता छिपी रहती है। अर्थशास्त्री रिचर्ड इस्टरलिन के अध्ययन से पता चला है कि संतुष्टि का संबंध वास्तविक आय से कम और दूसरों के सापेक्ष ‘मैं कहां हूं’ की अनुभूति से ज्यादा होता है। परिणामस्वरूप, लोग खुद को संतुष्ट नहीं कर पाते।

तकनीक ने मानवीय संबंधों को पहले से ज्यादा जोड़ा है, लेकिन भावनात्मक स्तर पर दूरी पैदा हुई है। संवाद के अनेक माध्यम होने के बावजूद आत्मीयता संकीर्ण हो गई है। संपर्क के नंबर्स बढ़े हैं, लेकिन संबंधों की गहराई कमजोर हो रही है।

गांव धीरे-धीरे खाली हो रहे हैं और शहर अनियंत्रित तरीके से फैल रहे हैं। सोशल मीडिया ने वास्तविक जीवन के मुकाबले आभासी दुनिया को अधिक आकर्षक और प्रभावशाली बना दिया है। इसका व्यक्ति के मनोविज्ञान पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। तुलना, असंतुष्टि, मानसिक तनाव और अकेलापन आधुनिक सामाजिक समस्याएं बन गए हैं।

बाहरी तौर पर परिवार और समाज समृद्ध, आधुनिक और विकसित दिखते हैं, पर भीतर ही भीतर संबंधों का विस्थापन, मानवीय मूल्यों का क्षय और भावनात्मक खालीपन बढ़ रहा है। इसलिए आज की सबसे बड़ी चुनौती केवल आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना, सामाजिक सद्भाव और संबंधों की गर्माहट को बनाए रखना है।

जीवन की संतुष्टि क्या है? सफलता का अर्थ क्या है? धन, पद, प्रतिष्ठा, शक्ति, सम्मान या खुशी क्या है? ये सवाल पुराने हैं लेकिन इनका जवाब जटिल है। दार्शनिकों से लेकर आधुनिक मनोवैज्ञानिकों, धार्मिक ग्रंथों से लेकर समकालीन शोध तक सभी ने जीवन की सफलता और संतुष्टि का अपना-अपना अर्थ बताया है।

पर 21वीं सदी के प्रतिस्पर्धात्मक संसार में यह प्रश्न और भी गंभीर हो गए हैं। इतिहास में पहली बार मानव जाति के पास अधिक अवसर, सुविधा और संपदा है, लेकिन इतनी ही अधिक असंतोष, तनाव, भावनात्मक शून्यता और अकेलापन भी है।

इस विषय पर विश्व विख्यात लेखक यूवल नोआ हरारी ने अपनी किताबों ‘सेपियंस’ और ‘होमो डीउस’ में गहन तर्क प्रस्तुत किए हैं। उनके अनुसार मानव सभ्यता ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन इंसान पहले से अधिक खुश हुआ है या नहीं, इसका स्पष्ट जवाब नहीं है। विज्ञान ने मनुष्य को शक्तिशाली बनाया, पर जीवन के अर्थ का ठोस जवाब नहीं दिया। इसलिए आधुनिक व्यक्ति बाहर से सफल दिखने के बावजूद अंदरूनी रूप से असंतुष्ट और अकेला है।

आधुनिक समाज ने सफलता की निश्चित छवि बनाई है – उच्च शिक्षा, अच्छी नौकरी, आकर्षक वेतन, बड़ा घर, महंगी कार और सामाजिक प्रतिष्ठा। यह छवि इतनी प्रबल है कि कई लोग अपने जीवन को इसी मापदंड से आंकते हैं। लेकिन अगर यह सब पर्याप्त होता तो दुनिया के अमीर, प्रसिद्ध और शक्तिशाली लोग मानसिक तनाव, डिप्रेशन और असंतोष से क्यों जूझते?

दूसरे विश्व युद्ध के बाद नाजी यातना शिविरों से बचे मनोचिकित्सक विक्टर फ्रेंकल ने अपनी पुस्तक ‘मैन्’स सर्च फॉर मीनिंग’ में लिखा है – “इंसान की मूल आवश्यकता सुख नहीं, अर्थ है।” फ्रेंकल का निष्कर्ष सरल लेकिन गहरा है। जो अपनी जीवन का उद्देश्य खोज लेता है, वह दुःख और संघर्ष को भी सह सकता है।

जिसने जीवन का अर्थ नहीं समझा, वह सफलता के बाद भी अकेलापन और शून्यता महसूस करता है। हम पूछते हैं, ‘क्या बनना है?’ पर यह नहीं पूछते कि ‘क्यों बनना है?’ नतीजे में लक्ष्य पूरा होने के बाद नई असंतुष्टियां जन्म लेती हैं।

विश्व का सबसे लंबा मानव विकास अध्ययन ‘हार्वर्ड स्टडी ऑफ एडल्ट डेवलपमेंट’ ने 85 साल से अधिक समय तक सैकड़ों व्यक्तियों के जीवन का विश्लेषण करते हुए निष्कर्ष निकाला है – “दीर्घकालीन सुख, संतुष्टि और स्वास्थ्य का आधार धन, प्रसिद्धि या व्यावसायिक सफलता नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण मानवीय संबंध है।”

लेकिन जब व्यक्ति मध्यमवर्गीय या उच्च आर्थिक स्तर पर पहुंचता है, तब आय बढ़ने के बावजूद जीवन के प्रति संतुष्टि स्थिर बनी रहती है।

यह आधुनिक जीवनशैली की कमजोरी को दर्शाता है। हम सफलता की दौड़ में संबंधों को खो रहे हैं। करियर बनाने की चक्कर में परिवार, समाज और रिश्ते कमजोर पड़ रहे हैं। संपत्ति इकट्ठा करते हुए दोस्ती, आत्मीयता और नजदीकियां खो रही हैं।

इस वजह से भौतिक सुख-सुविधाओं के बीच खड़ा आधुनिक इंसान इतिहास में शायद सबसे अधिक मानसिक अशांति, अकेलापन और उलझन में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के हालिया आंकड़ों के अनुसार, विश्व में लगभग 300 मिलियन लोग डिप्रेशन और तीव्र तनाव के शिकार हैं।

यह भौतिकवादी दौड़ पर एक गंभीर दार्शनिक सवाल उठाता है – क्या इस दौड़ से जीवन में सच्ची संतुष्टि मिलती है? या हम साधनों को ही लक्ष्य मानकर एक कभी न खत्म होने वाली भ्रम की जाल में फंसे हैं?

अर्थशास्त्र कहता है कि आय स्तर में वृद्धि जीवनस्तर और सुख बढ़ाती है। लेकिन 1974 में अर्थशास्त्री रिचर्ड इस्टरलिन ने ‘इस्टरलिन विरोधाभास’ प्रस्तुत किया, जिसने इस धारणा को चुनौती दी। इनके मुताबिक, मूल आवश्यकताएं पूरी होने के बाद पैसा खुशी बढ़ाने में निर्णायक भूमिका नहीं निभाता।

जब व्यक्ति मध्यमवर्गीय या उच्च आर्थिक स्तर पर पहुंचता है, तब आय बढ़ने के बावजूद जीवन के प्रति संतुष्टि में कोई खास वृद्धि नहीं होती।

नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री डेनियल कानमैन और एंगस डिटन के अध्ययन ने भी दिखाया है कि आर्थिक आय की एक सीमा पार होने पर पैसा दैनिक भावनात्मक सुख पर खास प्रभाव नहीं डालता। यह पैसों से कमी और दुख घट सकता है, लेकिन संतुष्टि सुनिश्चित नहीं करता।

अंत में, हमारा जीवन यांत्रिक हो गया है, जहां भावना की गहराई से ज्यादा कार्यक्षमता और व्यस्तता को महत्व दिया जाता है। सुबह से शाम तक की भागदौड़ सिर्फ काम, लक्ष्यों और जिम्मेदारियों के चारों ओर घूमती है। परिवार, मित्रों या समुदाय के साथ खुलकर बात करने का समय कम हो गया है। बाहर से जीवन सफल दिखे, लेकिन अंदर मन में असंतोष, अकेलापन और निराशा बढ़ रही है।

इसलिए जीवन की सच्ची सफलता केवल भौतिक समृद्धि नहीं, बल्कि मानवता, संबंध, मूल्य और आंतरिक शांति को बनाए रखना है। हमें यह देखना चाहिए कि हम कितने सफल हुए, उससे ज्यादा कि हमने कितना अर्थपूर्ण और संतुष्टिपूर्ण जीवन जिया। जीवन का अर्थ और मूल्य उपलब्धियों से नहीं, बल्कि मन की संतुष्टि से आता है।

हमने क्या प्राप्त किया उससे ज्यादा, हमने क्या सार्थक बनाया, यह हमारी संतुष्टि तय करता है। इसलिए जीवन का अर्थ केवल “आप कितने सफल हैं” नहीं, बल्कि “आप कितना संतुष्ट और अर्थपूर्ण जीवन जीते हैं” होना चाहिए।

अंतिम मैच में तुर्की से हार के बावजूद अमेरिका बना समूह ‘डी’ का विजेता

फीफा विश्व कप 2026 के सह-आयोजक अमेरिका समूह ‘डी’ का विजेता बना है। समूह चरण के अंतिम मैच में तुर्की से पराजित होने के बावजूद, पहले के दो जीतों के साथ अमेरिका ने 6 अंक हासिल करते हुए समूह की तालिका में शीर्ष स्थान बनाए रखा। अंतिम मैच में तुर्की ने अमेरिका को 3–2 गोल के अंतर से हराया। तुर्की के लिए अंतिम चोटकाल में 8वें (90+8) मिनट पर कान आयहान ने गोल करके जीत सुनिश्चित की।

मैच के तीसरे मिनट में अमेरिका ने बढ़त बनाई थी। अमेरिका के लिए ऑस्टिन ट्रस्टी ने गोल किया। मैच के 10वें मिनट में तुर्की के अर्दा गुलर ने गोल कर मैच को बराबरी पर ला दिया। इसके बाद 31वें मिनट में तुर्की के लिए ऑर्कुन कोकुले ने गोल करते हुए टीम को 2–1 की बढ़त दिलाई। अमेरिका के लिए 49वें मिनट में सेबेस्टियन बरहाल्टर ने बराबरी का गोल किया। लेकिन अंतिम समय में अमेरिकी टीम गोल रोकने में नाकाम रही और हार सहनी पड़ी। अमेरिका से इस हार के बावजूद तुर्की विश्व कप से बाहर हो गया है। तुर्की इससे पहले पैराग्वे और ऑस्ट्रेलिया से हार चुका था।

अष्ट्रेलिया समूह में उपविजेता बनकर फीफा विश्वकप 2026 के नॉकआउट चरण में प्रवेश

अष्ट्रेलिया ने समूह में उपविजेता बनकर फीफा विश्वकप 2026 के नॉकआउट चरण में प्रवेश कर लिया है। अमेरिका के सान फ्रांसिस्को वे एरिया स्टेडियम में शुक्रवार सुबह संपन्न मैच में अष्ट्रेलिया ने पेराग्वे के खिलाफ बिना गोल के ड्रा खेलते हुए नॉकआउट स्टेज के लिए क्वालीफाई किया। पूरे मैच के दौरान दोनों टीमों ने गोल करने के कई मौके पाए लेकिन गोल करने में असफल रहीं।

समूह ‘डी’ से अष्ट्रेलिया उपविजेता के रूप में नॉकआउट में पहुंची है, जबकि सह-आयोजक अमेरिका 6 अंकों के साथ शीर्ष स्थान पर है। पेराग्वे, जिसने अष्ट्रेलिया के साथ ड्रा खेला, का भी नॉकआउट चरण में पहुंचने का मौका बना हुआ है। तीसरे स्थान पर मौजूद टीमों में चौथे स्थान पर पेराग्वे का नॉकआउट में प्रवेश अन्य मैचों के नतीजों पर निर्भर करेगा।

तीसरे स्थान की टीमों में से सर्वश्रेष्ठ 8 में जगह बनाने वाली ही पेराग्वे नॉकआउट स्टेज में प्रवेश करेगी। यह अष्ट्रेलिया की तीसरी बार है जब उसने नॉकआउट चरण में स्थान बनाया है। सात बार विश्व कप खेलने वाला अष्ट्रेलिया पहले 2006 और 2022 के विश्व कप में समूह चरण पार कर चुका है। इस समूह से अमेरिका 7 अंकों के साथ विजेता बनकर नॉकआउट में पहुंचा है, जबकि तुर्की 3 अंकों के साथ टूर्नामेंट से बाहर हो गया है।

वेनेजुएला में दो बड़े भूकंपों के बाद 30 से अधिक परकंप, क्यों है यह देश भूकंप के जोखिम क्षेत्र में

वेनेजुएला में भूकंप से क्षतिग्रस्त घर में बचावकर्मी

तस्वीर स्रोत, Reuters

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वेनेजुएला में लगातार दो बड़े भूकंपों के कारण मृतकों की संख्या 235 पहुंच गई है, स्वास्थ्य मंत्री ने बताया।

बचावकर्मी टूटे हुए भवनों और मलबे में फंसे कई लोगों की खोज जारी रखे हुए हैं।

राजधानी काराकास के नजदीक भूकंप का केंद्र बिंदु होने के कारण 1,500 से अधिक लोग घायल हो गए हैं।

राजधानी काराकास और निकटवर्ती तटीय शहर ला ग्वैरिया में टूटे भवनों के मलबे से कुछ लोग सहायता के लिए चिल्ला रहे हैं, बचावकर्मीयों ने कहा।

अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने ला ग्वैरिया के सबसे प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया है।

अमेरिका ने टर्की के खिलाफ बराबरी का गोल किया

बरहाल्टर के गोल के साथ ही मैच का स्कोर २–२ बराबरी पर आ गया है। १२ असार, काठमाडौं। फीफा विश्वकप २०२६ के अंतर्गत टर्की के खिलाफ जारी मैच में अमेरिका ने बराबरी का गोल किया है। अमेरिका के लिए ४९वें मिनट में सेबेस्टियन बरहाल्टर ने बराबरी का गोल किया। पहले हाफ में टर्की २–१ के गोल अंतर से आगे था। बरहाल्टर के इस गोल ने स्कोर को २–२ पर ले आया।

टर्की ने अमेरिका के खिलाफ मैच में बनाई बढ़त

फीफा विश्व कप 2026 के तहत जारी मैच में टर्की ने अमेरिका के खिलाफ बढ़त बना ली है।


12 आषाढ़, Kathmandu। फीफा विश्व कप 2026 के तहत चल रहे मैच में अमेरिका के विरुद्ध टर्की ने बढ़त हासिल की है।

टर्की की ओर से 31वें मिनट में ओरकुन कोकुले ने गोल कर टीम को 2-1 के अंतर से आगे बढ़ाया।

इससे पहले, अमेरिका ने मैच के तीसरे मिनट में अग्रता बनाई थी। अमेरिका के लिए ऑस्टिन ट्रस्टी ने गोल किया था।

वहीं, मैच के 10वें मिनट में टर्की के अर्दा गुलर ने गोल कर स्कोर को बराबरी पर ला दिया था।