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लेखक: space4knews

यस्तो छ आजका लागि तरकारी र फलफूलको मूल्य – Online Khabar

आजका लागि तरकारी र फलफूल के मूल्य विवरण

४ वैशाख, काठमाडौं । कालीमाटी फलफूल तथा तरकारी बजार विकास समितिले आज कृषिउपज के थोक मूल्य निर्धारित किए हैं। समिति के अनुसार गोलभेंडा बड़ा (भारतीय) प्रति किलो ८०, गोलभेंडा छोटा (लोकल) प्रति किलो ४४, गोलभेंडा छोटा (भारतीय) प्रति किलो ४४, गोलभेंडा छोटा (तराई) प्रति किलो ४८, आलू रातो प्रति किलो २४ और आलू रातो (भारतीय) प्रति किलो २४ तथा प्याज सूखा (भारतीय) प्रति किलो ३७ निर्धारित किए गए हैं। साथ ही, गाजर (लोकल) प्रति किलो ५०, गाजर (तराई) प्रति किलो ३५, बन्दा (लोकल) प्रति किलो ६०, काउली स्थानीय प्रति किलो ५५, काउली स्थानीय (ज्यापु) प्रति किलो ७०, लाल मूली प्रति किलो ३५, सफेद मूली (हाइब्रिड) प्रति किलो ३०, भन्टा लाम्चो प्रति किलो ६० और भन्टा डल्लो प्रति किलो ७० बताए गए हैं।

इसी प्रकार, बोडी (तना) प्रति किलो १००, मटरकोसा प्रति किलो ८०, घिउ सिमी (लोकल) प्रति किलो ६०, घिउ सिमी (हाइब्रिड) प्रति किलो ५०, घिउ सिमी (राजमा) प्रति किलो १२०, टाटेसिमी प्रति किलो १२०, भटमास कोसा प्रति किलो २२८, तीते करेला प्रति किलो ८०, लौका प्रति किलो २० मूल्य निर्धारित हैं। परवर (लोकल) प्रति किलो १००, चिचिन्डो प्रति किलो ७०, घिरौँला प्रति किलो ५०, फर्सी पाकी प्रति किलो ६०, हरियो फर्सी (लाम्चो) प्रति किलो ३०, हरियो फर्सी (डल्लो) प्रति किलो ४०, भिन्डी प्रति किलो ८०, बरेला प्रति किलो ९०, पिँडालु प्रति किलो ५० और स्कुस प्रति किलो ६० तय किए गए हैं।

रायोसाग प्रति किलो ६०, पालुङ्गो प्रति किलो १००, चमसुर प्रति किलो १२०, तोरीसाग प्रति किलो ४०, मेथी प्रति किलो १२०, हरियो प्याज प्रति किलो ८०, बकुला प्रति किलो ५०, च्याउ (कन्य) प्रति किलो १८०, च्याउ (डल्ले) प्रति किलो ४००, राजा च्याउ प्रति किलो ३०० और सिताके च्याउ प्रति किलो १,००० तय किए गए हैं। कुरिलो प्रति किलो ४५०, निगुरो प्रति किलो ८०, ब्रोकॉली प्रति किलो ६०, चुकुंदर प्रति किलो ५०, सजीवन प्रति किलो १२०, कोइरालो प्रति किलो ३७०, लाल बन्दा प्रति किलो ४०, जीरीका साग प्रति किलो १२०, ग्याठकोभी प्रति किलो ५०, पार्सले प्रति किलो २२८०, सौंफ का साग प्रति किलो ११०, पुदिना प्रति किलो १५०, गान्टेमुला प्रति किलो ५०, इमली प्रति किलो १८०, तामा प्रति किलो १५०, तोफु प्रति किलो १५० और गुन्द्रुक प्रति किलो २५० निर्धारित हैं।

स्याउ (झोले) प्रति किलो २५०, स्याउ (फुजी) प्रति किलो ३२०, कागती प्रति किलो ३२०, अनार प्रति किलो ३८०, अंगूर (हरा) प्रति किलो २३०, अंगूर (काला) प्रति किलो ३५०, संतरा (भारतीय) प्रति किलो १६० और तरबूजा हरा प्रति किलो ४५ मूल्य निर्धारण किए गए हैं। भुइँकटहर प्रति गोटा १६०, काँक्रो (लोकल) प्रति किलो ५५, काँक्रो (हाइब्रिड) प्रति किलो ३०, काँक्रो (लोकलक्रस) प्रति किलो ५०, खकटहर प्रति किलो ११०, मेवा (नेपाली) प्रति किलो ७०, मेवा (भारतीय) प्रति किलो ९० और किवी प्रति किलो ४०० तय हैं। इसी तरह, एवोकाडो प्रति किलो ८००, अदुवा प्रति किलो १००, सूखा खुर्सानी प्रति किलो ४५०, खुर्सानी (हरा) प्रति किलो ९०, खुर्सानी हरा (बुलेट) प्रति किलो ७०, माछे खुर्सानी प्रति किलो ९०, खुर्सानी अकबरे प्रति किलो ३८०, भेडेखुर्सानी प्रति किलो ११० और हरियो लसुन प्रति किलो १२० निर्धारित किए गए हैं। हरियो धनिया प्रति किलो १००, लसुन सूखा (चाइनीज) प्रति किलो २२८, लसुन सूखा (नेपाली) प्रति किलो १४०, छ्यापी सूखा प्रति किलो १२०, छ्यापी हरा प्रति किलो ९०, माछा सूखा प्रति किलो १,०००, ताजा माछा (रहु) प्रति किलो ३४०, ताजा माछा (बचुवा) प्रति किलो ३१० और ताजा माछा (छडी) प्रति किलो ३०० तय किए गए हैं।

आज विदेशी मुद्राको विनिमय दर

४ वैशाख, काठमाडौं । नेपाल राष्ट्र बैंकले आज (शुक्रवार) का लागि विदेशी मुद्राको विनिमय दर निर्धारण गरेको छ । निर्धारीत विनिमय दरअनुसार अमेरिकी डलर एकको खरिद दर १४८ रुपैयाँ ८२ पैसा र बिक्री दर १४९ रुपैयाँ ४२ पैसा तोकिएको छ । यस्तै, युरोपियन युरो एकको खरिद दर १७५ रुपैयाँ ४० पैसा र बिक्री दर १७६ रुपैयाँ ११ पैसा, युके पाउण्ड स्ट्रलिङ्ग एकको खरिद दर २०१ रुपैयाँ ६० पैसा र बिक्री दर २०२ रुपैयाँ ४१ पैसा, स्वीस फ्र्याङ्क एकको खरिद दर १८९ रुपैयाँ ९४ पैसा र बिक्री दर १९० रुपैयाँ ७१ पैसा कायम गरिएको छ ।

अष्ट्रेलियन डलर एकको खरिद दर १०६ रुपैयाँ ७३ पैसा र बिक्री दर १०७ रुपैयाँ १६ पैसा, क्यानडियन डलर एकको खरिद दर १०८ रुपैयाँ ३८ पैसा र बिक्री दर १०८ रुपैयाँ ८२ पैसा, सिङ्गापुर डलर एकको खरिद दर ११७ रुपैयाँ ०२ पैसा र बिक्री दर ११७ रुपैयाँ ५० पैसा तोकिएको छ । जापानी येन १० को खरिद दर ९ रुपैयाँ ३६ पैसा र बिक्री दर ९ रुपैयाँ ४० पैसा, चिनियाँ युआन एकको खरिद दर २१ रुपैयाँ ८२ पैसा र बिक्री दर २१ रुपैयाँ ९१ पैसा, साउदी अरेबियन रियाल एकको खरिद दर ३९ रुपैयाँ ६७ पैसा र बिक्री दर ३९ रुपैयाँ ८३ पैसा, कतारी रियाल एकको खरिद दर ४० रुपैयाँ ८२ पैसा र बिक्री दर ४० रुपैयाँ ९८ पैसा कायम भएको छ ।

केन्द्रीय बैंकका अनुसार थाइ भाट एकको खरिद दर ४ रुपैयाँ ६६ पैसा र बिक्री दर ४ रुपैयाँ ६८ पैसा, युएई दिराम एकको खरिद दर ४० रुपैयाँ ५२ पैसा र बिक्री दर ४० रुपैयाँ ६८ पैसा, मलेसियन रिङ्गेट एकको खरिद दर ३७ रुपैयाँ ६४ पैसा र बिक्री दर ३७ रुपैयाँ ७९ पैसा तोकिएको छ । साउथ कोरियन वन १०० को खरिद दर १० रुपैयाँ ०८ पैसा र बिक्री दर १० रुपैयाँ १२ पैसा, स्वीडिस क्रोनर एकको खरिद दर १६ रुपैयाँ २२ पैसा र बिक्री दर १६ रुपैयाँ २८ पैसा र डेनिस क्रोनर एकको खरिद दर २३ रुपैयाँ ४७ पैसा र बिक्री दर २३ रुपैयाँ ५७ पैसा तोकिएको छ ।

राष्ट्र बैंकले हङकङ डलर एकको खरिद दर १९ रुपैयाँ ०२ पैसा र बिक्री दर १९ रुपैयाँ ०९ पैसा, कुवेती दिनार एकको खरिद दर ४८६ रुपैयाँ ०२ पैसा र बिक्री दर ४८७ रुपैयाँ ९८ पैसा, बहराइन दिनार एकको खरिद दर ३९४ रुपैयाँ ५४ पैसा र बिक्री दर ३९६ रुपैयाँ १३ पैसा रहेको छ । ओमानी रियाल एकको खरिद दर ३८६ रुपैयाँ ४५ पैसा र बिक्री दर ३८८ रुपैयाँ १० पैसा रहेको छ । यस्तै, भारतीय रुपैयाँ एक सयको खरिद दर १६० रुपैयाँ र बिक्री दर १६० रुपैयाँ १५ पैसा तोकिएको छ । राष्ट्र बैंकले यो विनिमय दरलाई आवश्यकतानुसार जुनसुकै समयमा पनि संशोधन गर्न सकिने जनाएको छ । वाणिज्य बैंकले तोक्ने विनिमय दर भने फरक हुनसक्ने र अद्यावधिक विनिमय दर केन्द्रीय बैंकको वेबसाइटमा उपलब्ध हुने जनाइएको छ ।

इजरायल के साथ युद्धविराम का पालन करने हिजबुल्लाह के लिए ट्रम्प की अपील

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दक्षिणी लेबनान में स्थित हिजबुल्लाह से इजरायल के साथ लागू युद्धविराम नियमों का पालन करने का आग्रह किया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर हिजबुल्लाह से इस अहम समय में सद्भावना दिखाने की उम्मीद जताई है।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने लिखा, ‘मुझे भरोसा है कि हिजबुल्लाह इस ऐतिहासिक समय में उचित और सकारात्मक तरीके से व्यवहार करेगा।’ उन्होंने आगे कहा, ‘यदि उन्होंने ऐसा किया, तो यह उनके लिए एक शानदार समय होगा। अब कोई हत्याकांड नहीं होंगे। अंततः शांति स्थापित होनी ही चाहिए।’

इससे पहले ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल नेटवर्क पर एक पोस्ट के माध्यम से लेबनान और इजरायल के बीच 10 दिनों का युद्धविराम समझौता होने की घोषणा की थी। युद्धविराम की घोषणा के दौरान ट्रम्प ने लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ अवन और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत की जानकारी दी थी।

तकनीकी रूप से, यह युद्धविराम इजरायल और लेबनान के बीच है, जहां हिजबुल्लाह का ठिकाना है। एक इजरायली अधिकारी ने अमेरिकी मीडिया संस्थान सीबीएस न्यूज को बताया कि युद्धविराम के दौरान इजरायल केवल ‘हिजबुल्लाह के हमलों’ के प्रति सैन्य प्रतिक्रिया देगा। सिर्फ गुरुवार को ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्थायी शांति समझौते के लिए ईरान समर्थित समूहों को निरस्त्रीकृत करने की बात कही थी।

अमेरिका-ईरान युद्ध: चार संभावित परिदृश्य

ईरान के साथ युद्धविराम के दूसरे चरण की वार्ता के लिए अमेरिका संवाद कर रहा माना जाता है। पिछली रविवार को हुए 20 घंटे के वार्ता में कोई निष्कर्ष नहीं निकला, फिर भी वर्तमान में दो सप्ताह का युद्धविराम बना हुआ है। निष्कर्षहीन वार्ता के एक दिन बाद ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ होर्मुज जलसंधि के आस-पास समुद्री नाकाबंदी की घोषणा की। इस प्रारंभिक वार्ता की विफलता को कैसे समझा जाए और आने वाली वार्ता की संभावनाएं क्या हो सकती हैं? क्या ईरान और अमेरिका नियंत्रित संघर्ष की ओर हैं या असंभव बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं? नीचे संभावित चार परिदृश्य चर्चा किए गए हैं।

१. कमजोर युद्धविराम के “रणनीतिक कदम”
कुछ सप्ताहों की लड़ाई के बाद आए इस युद्धविराम ने दोनों पक्षों में संकट नियंत्रण की इच्छा दिखाई। लेकिन शुरू से ही इसकी शर्तें, भौगोलिक दायरा और संघर्ष विराम में शामिल लक्षित क्षेत्र में विभाजन देखा गया है। युद्धविराम उल्लंघन की व्याख्या में भी कई विश्लेषक इसे टिकाऊ आधार नहीं, बल्कि लड़ाई में लागू एक रणनीतिक रोक समझते हैं। “लड़ाई शुरू होने पर सहमति की संभावना लगभग नहीं थी,” वाशिंगटन स्थित फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के वरिष्ठ शोधकर्ता बेहनाम बेन तालेब्लू ने कहा। “यह सभी सिद्धांत, रुख और नीतियां हैं जिनमें अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से मतभेद थे। युद्ध ने तुरंत उन मतभेदों को कम नहीं किया, बल्कि वे और बढ़ गए,” उन्होंने बताया।

२. “छद्मयुद्ध”
एक संभावित और सबसे संभव परिदृश्य है “नियंत्रित लड़ाई” की ओर लौटना। इसका मतलब है कि दोनों पक्ष पूर्ण स्तर के युद्ध में नहीं उतरेंगे, लेकिन सैन्य कार्रवाई पूरी तरह से बंद नहीं करेंगे। इसमें सीमित स्वरूप के हमले सैन्य संरचना, लक्ष्य और आपूर्ति मार्गों पर जारी रह सकते हैं। इस स्थिति में छद्म (‘प्रॉक्सी’) समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। ईराक या अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में ईरान समर्थित समूहों की गतिविधि बढ़ सकती है। युद्ध की तीव्रता सीधे तौर पर नहीं बढ़ेगी, परंतु युद्ध का भौगोलिक दायरा फैल सकता है।

३. शांतिपूर्ण कूटनीतिक निरंतरता
पाकिस्तान में वार्ता के विफल होने के बाद कूटनीतिक प्रयास ठप या वार्ता बंद होने की बात नहीं कही जा सकती। पाकिस्तान की मध्यस्थता के कारण आने वाले दिनों में तेहरान और वाशिंगटन के बीच संदेशों का आदान-प्रदान होता रहेगा और प्रयास जारी रह सकते हैं।

४. समुद्री नाकाबंदी की निरंतरता
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी नौसेना को होर्मुज जलसंधि में जलयान आवागमन को रोकने और ईरान पर नाकाबंदी करने का आदेश दिया है। यह कदम ईरान के तेल व्यापार को संकट में डालकर अर्थव्यवस्था को भारी क्षति पहुंचा सकता है और ईरानी तेल के मुख्य खरीदार चीन पर भी दबाव बना सकता है।

अंततः इन परिदृश्यों से युद्ध और शांति के बीच अस्पष्ट रेखा वाली स्थिति विकसित हो सकती है। पाकिस्तान में वार्ता की विफलता कूटनीतिक अंत नहीं है, न ही व्यापक युद्ध की आवश्यकता को दर्शाती है। बल्कि यह एक अस्पष्ट स्थिति की निरंतरता को इंगित करती है।

संघीय सरकारको हस्तक्षेपले शैक्षिक उपलब्धि गुम्ने पालिका महासंघको निष्कर्ष 

संघीय सरकार के हस्तक्षेप से शैक्षिक उपलब्धियाँ प्रभावित होने का पालिका महासंघ का निष्कर्ष

गाउँपालिका महासंघ और नगरपालिका संघ ने संघीय सरकार द्वारा शैक्षिक सत्र को देर से शुरू करने तथा रविवार को अवकाश देने के निर्णय से शैक्षिक उपलब्धियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का निष्कर्ष निकाला है। इस संबंध में गाउँपालिका राष्ट्रिय महासंघ और नेपाल नगरपालिका संघ ने शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल को चार बिंदु संलग्न ध्यानाकर्षण पत्र सौंपा है। संघीय सरकार ने वैशाख १५ से ही नामांकन और वैशाख २१ से ही पढ़ाई-लिखाई प्रारंभ करने के निर्देश जारी किए हैं। ४ वैशाख, काठमांडू।

गाउँपालिका महासंघ और नगरपालिका संघ का मानना है कि संघीय सरकार का शैक्षिक सत्र को विलंबित कर शुरू करने और रविवार को अवकाश देने का निर्णय शैक्षिक उपलब्धियों को प्रभावित करेगा। इसी विषय पर गाउँपालिका राष्ट्रिय महासंघ और नेपाल नगरपालिका संघ ने गुरुवार को शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मंत्री सस्मित पोखरेल को चार बिंदुओं वाला ध्यानाकर्षण पत्र सौंपा है।

रविवार को छुट्टी देने और वैशाख २१ से ही पढ़ाई शुरू करने के निर्णय के कारण वर्ष में २२० दिन कक्षा संचालन की कानूनी अवधि पूरी नहीं हो पाएगी, यह पालिका प्रतिनिधियों का मत है। इसके चलते पठनपाठन अधूरा रह जाएगा और विद्यार्थियों की सीखने की उपलब्धियों में कमी आएगी, इसके लिए उन्होंने चिंता व्यक्त की है। महासंघ की अध्यक्ष लक्ष्मीदेवी पाण्डे और संघ के अध्यक्ष भीमप्रसाद ढुंगानाद्वारा हस्ताक्षरित ध्यानाकर्षण पत्र में उल्लेख है कि पालिका ने प्राप्त कानूनी अधिकारों का उपयोग करके ही शैक्षिक गतिविधियों का संचालन किया है।

पत्र में निर्णय और परिपत्र के आधार पर विद्यालय शिक्षा संचालन नहीं करने के बजाय शीघ्र शिक्षा अधिनियम संघीय संसद से जारी करने की पहल करने के लिए शिक्षा मंत्री से अनुरोध किया गया है। संघीय सरकार ने चैत १३ को स्वीकृत शासकीय सुधार सम्बंधित १०० बिंदुओं की कार्यसूची के अनुसार कक्षा ५ तक के विद्यार्थियों की आंतरिक परीक्षाएं आगामी शैक्षिक सत्र से बंद करने की योजना बनाई है। साथ ही, संघीय सरकार के निर्देशानुसार वैशाख १५ से नामांकन और वैशाख २१ से पठनपाठन शुरू करने की व्यवस्था है।

गैँडाको खागसहित चार जनालाई पक्राउ किया गया

सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल नम्बर १ बराह बाहिनी ने सुनसरी के बर्जु गाउँपालिका–६ से गैँडाको खागसहित चार व्यक्तियों को नियन्त्रण में लिया है। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों के पास से एक गैँडाको खाग और दो मोटरसाइकिल बरामद की गई हैं, जिसकी जानकारी सशस्त्र प्रहरी उपरीक्षक श्याम कार्की ने दी। पकड़े गए व्यक्तियों के नाम गोपनीय रखे गए हैं और नेटवर्क व्यापक होने के कारण जांच जारी है, जैसा कि सशस्त्र पुलिस ने बताया है।

४ वैशाख, सुनसरी। सुनसरी के बर्जु गाउँपालिका–६ से गुरुवार रात गैँडाको खागसहित चार लोगों को नियन्त्रण में लिया गया है। गुप्त सूचना के आधार पर सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल नम्बर १ बराह बाहिनी की पकली टीम ने यह कार्रवाई की, जिसके बारे में सशस्त्र प्रहरी बल ४ नम्बर गण सुनसरी के सशस्त्र प्रहरी उपरीक्षक श्याम कार्की ने बताया।

झापा से गैँडाको खाग लाने की सूचना मिलने पर बर्जु–६ ताल के निकट चार लोगों को नियन्त्रण में लिया गया, उन्होंने बताया। पकड़े गए व्यक्तियों के पास से एक खाग और दो मोटरसाइकिल बरामद की गई हैं, उन्होंने उल्लेख किया। पकड़े गए लोगों के नाम गोपनीय रखे गए हैं और इस मामले का नेटवर्क व्यापक होने के कारण जांच जारी है, इसलिए नाम सार्वजनिक न करने का निर्णय लिया गया है, उन्होंने जानकारी दी।

ट्रकको ठक्करबाट एक जनाको मृत्यु    – Online Khabar

ट्रक की ठक्कर से एक व्यक्ति की मौत

पृथ्वीराजमार्ग अंतर्गत तनहुँ के बन्दीपुर गाउँपालिका-४ विमलनगर में ट्रक की ठक्कर से गोरखा के 61 वर्षीय खुदबहादुर थापा की मृत्यु हो गई है। दमौली से आँबुखैरेनी की ओर जा रहे गैस सिलेंडर से भरे ट्रक ने रास्ता छेदते समय उन्हें ठोकर मार दी थी। घायलों को उपचार के लिए प्रदेश अस्पताल दमौली लाया गया था, जहां चिकित्सकों ने बृहस्पतिवार शाम 5:48 बजे उन्हें मृत घोषित किया।

जिला पुलिस कार्यालय तनहुँ के अनुसार, मृत व्यक्ति का नाम खुदबहादुर थापा पुष्टि किया गया है। प्र३-०१-००३क ४८९८ नंबर के ट्रक ने ठक्कर दी घटना में पुलिस ने ट्रक और चालक को गिरफ्तार कर लिया है।

सर्वोच्च अदालत ने दीपक खड्कालाई जमानत देने का आदेश दिया

सर्वोच्च अदालत ने पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खड्कालाई संपत्ति शुद्धीकरण मामले में जमानत देने का आदेश जारी किया है। चैत 15 तारीख को गिरफ्तार किए गए उन्हें उनकी पत्नी विनिता थापाने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से जमानत की मांग की थी। न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल और श्रीकांत पौडेल की पीठ ने उन्हें जमानत देने तथा विदेश जाने से पहले अनुमति लेने का निर्देश दिया है।

सर्वोच्च अदालत ने नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खड्कालाई जमानत देने का आदेश पारित किया है। उन्हें संपत्ति शुद्धीकरण मामले की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। चैत 15 को गिरफ्तारी के बाद उनकी पत्नी विनिता थापाने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। उक्त याचिका पर न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल और श्रीकांत पौडेल की पीठ ने सुनवाई करते हुए जमानत देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उन्हें विदेश जाने से पहले अनुमति लेने की भी शर्त लगाई गई है।

जेनजी आंदोलन के दौरान दीपक खड्काक घर पर प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ और आगजनी की थी। आगजनी के बाद उनके घर में रखे नेपाली और विदेशी नोट जलने के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए थे। कुछ मूल्यवान नोट भी प्रदर्शनकारियों द्वारा ले जाते हुए तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे। विभाग ने पहले ही उनके घर से जले हुए नोटों के टुकड़े और आसपास से राख इकट्ठा की थी। इसी मामले की जांच के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

७ हजार शय्याबाट निःशुल्क उपचार, कसरी लिन सकिन्छ सेवा ?

७ हजार शय्याओं पर निःशुल्क उपचार सेवा, कैसे प्राप्त करें?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश भर के अस्पतालों में उपलब्ध १० प्रतिशत निःशुल्क शय्याओं का विवरण सार्वजनिक करने के लिए ‘फ्री हेल्थ पोर्टल’ लॉन्च किया है। अब तक २३ अस्पतालों ने पोर्टल पर उपलब्ध ५३२५ शय्याओं में से ६२१ शय्या निःशुल्क आरक्षित की हैं, जिनमें से केवल एक शय्या ही उपयोग में है। निजी अस्पतालों ने स्पष्ट मानदंड न होने के कारण १० प्रतिशत निःशुल्क शय्याओं को लागू करने में कठिनाई जताई है। ३ वैशाख, काठमांडू।

विपन्न, असहाय और बेवारिसे मरीजों के लिए अस्पतालों को आरक्षित करनी वाली १० प्रतिशत निःशुल्क शय्याओं का विवरण ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से सार्वजनिक किया जा रहा है। स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय ने ‘फ्री हेल्थ पोर्टल’ संचालित कर देश भर के अस्पतालों में उपलब्ध निःशुल्क शय्या, उन शय्यों में उपचाररत मरीजों का विवरण रियल टाइम में देखने की व्यवस्था कर दी है। मंत्रालय के सहप्रवक्ता डॉ. समीयर अधिकारी के अनुसार इस पोर्टल से अस्पतालों में कितनी निःशुल्क शय्या उपलब्ध हैं, कौन-कौन उन शय्याओं पर इलाज ले रहे हैं और कितनी शय्या खाली हैं, यह जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सकती है।

मंत्रालय के अनुसार कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने और अस्पतालों में उपलब्ध निःशुल्क सेवाओं की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने के लिए ‘फ्री हेल्थ पोर्टल’ शुरू किया गया है। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक संघ, प्रदेश और स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों के कुल लगभग ७ हजार शय्याओं से विपन्न और असहाय नागरिकों को निःशुल्क सेवा मिलेगी। डॉ. अधिकारी के अनुसार निःशुल्क उपचार सेवा लेने के इच्छुक विपन्न मरीज अस्पताल की सामाजिक सेवा इकाई से सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।

निजी अस्पतालों के छाता संगठन एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट हेल्थ इंस्टिट्यूशंस ऑफ नेपाल (अफिन) के अध्यक्ष डॉ. पदम खड़का ने कहा कि १० प्रतिशत निःशुल्क शय्या उपलब्ध कराने के लिए स्पष्ट मानदंड के बिना इसे लागू करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, ‘राज्य किस तरह लागू करेगा, खर्च कैसे प्रबंधित होगा और कौन कौन सी सेवाएं निःशुल्क होंगी, इन सभी पर स्पष्ट नीति के बाद ही व्यावहारिक रूप से इसे लागू किया जा सकता है।’

सरकारी अस्पतालों में शनिवार और रविवार को ओपीडी सेवा बंद रहेगी

३ वैशाख, काठमांडू। स्वास्थ्य क्षेत्र में सक्रिय १४ संयुक्त पेशेवर संगठनों के कड़े दबाव के बाद सरकार ने अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में साप्ताहिक दो दिन सार्वजनिक छुट्टी देने का फैसला किया है। सरकार के इस निर्णय के अनुसार अब देश भर के सरकारी अस्पतालों में शनिवार और रविवार को नियमित ओपीडी सेवाएं बंद रहेंगी। हालांकि, आकस्मिक और इनडोर सेवाएं पहले की तरह २४ घंटे चालू रहेंगी, यह जानकारी स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय ने दी है।

स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता, स्वास्थ्य सचिव डा. विकास देवकोटा और १४ पेशेवर संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच मंत्रालय में हुई बैठक के बाद सरकार ने इस निर्णय में लचीलापन दिखाया है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार साप्ताहिक दो दिन छुट्टी देने पर सहमति बन चुकी है। ‘स्वास्थ्य मंत्रालय और पेशेवर संगठनों के बीच हुई इस सहमति के तहत शनिवार और रविवार छुट्टी दी जाएगी,’ मंत्रालय के सूत्र ने बताया, ‘मंत्रालय एक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी करने वाला है। जल्दी ही औपचारिक निर्णय सार्वजनिक किया जाएगा।’

ओपीडी सेवा दो दिन बंद रहने के कारण सरकार आकस्मिक सेवाओं की क्षमता बढ़ाने की तैयारी भी कर रही है, मंत्रालय के सूत्र ने बताया। नेपाल चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डा. अनिलविक्रम कार्की के नेतृत्व में बने दबाव समूह ने स्वास्थ्यकर्मियों को भी अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह दो दिन सरकारी छुट्टी देने की मांग की थी। उन्होंने बढ़ते कार्यभार और मानसिक तनाव को कारण बताते हुए आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। इससे पहले मंत्रिपरिषद ने २०७८ चैत्र २२ को सभी सरकारी कर्मचारियों को साप्ताहिक दो दिन छुट्टी देने का निर्णय लिया था। लेकिन स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय ने अस्पतालों में रविवार को भी ओपीडी सेवा जारी रखने का निर्देश दिया था, जिससे स्वास्थ्यकर्मी असंतुष्ट थे। स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा मंत्रालय के इस फैसले के खिलाफ संयुक्त आंदोलन की चेतावनी के बाद अंततः सरकार ने अस्पतालों में भी दो दिन की छुट्टी लागू करने का निर्णय लिया है।

सम्पत्ति जाँचबुझ के हो ? आयोगले कसरी गर्छ काम ? – Online Khabar

सम्पत्ति जाँच क्या है? आयोग कैसे करता है काम?

समाचार सारांश प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रकुमार भण्डारी की संयोजकता में पांच सदस्यीय संपत्ति जाँच आयोग का गठन किया है। इस आयोग को 2048 साल से सार्वजनिक पदों पर रहने वाले उच्च पदस्थ राजनेताओं और कर्मचारियों की संपत्ति की जांच करने का आदेश मिला है। यह आयोग तथ्यांक एकत्रित कर विश्लेषण करेगा, सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा और आगे की जांच के लिए सुझाव देगा। 3 वैशाख, काठमांडू। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की अगुवाई में सरकार बनने के बाद पहली मंत्रिपरिषद बैठक में प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद कार्यालय के अधीन संपत्ति जांच समिति बनाने की घोषणा की गई थी। लगभग तीन सप्ताह में सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रकुमार भण्डारी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय संपत्ति जांच आयोग गठित करने का निर्णय लिया। आयोग में पुनरावेदन अदालत के दो पूर्व न्यायाधीश, नेपाल पुलिस के एक पूर्व डीआईजी तथा एक चार्टर्ड अकाउंटेंट सदस्य भी शामिल हैं। जबकि सरकार ने आयोग के अधिकार क्षेत्र को सार्वजनिक नहीं किया है, पुराने निर्णयों के अनुसार 2048 साल से सार्वजनिक पदों पर रहे उच्च पदस्थ राजनेताओं और कर्मचारियों की संपत्ति की जांच का उल्लेख है। सरकार के अनुसार संपत्ति जांच दो चरणों में होगी – 2062/63 साल से वर्तमान तक तथा 2048 साल तक की अवधि।

संपत्ति जांच क्या है? आयोग कैसे काम करता है और क्या प्रकार के सुझाव दे सकता है? इस विषय पर पत्रकार कृष्ण ज्ञवाली द्वारा तैयार किए गए सवाल-जबाव इस प्रकार हैं: जांच आयोग क्या है? यह राज्य के उन नियमित तंत्रों के लिए बनता है जिनके लिए विशिष्ट मामलों की जांच करना मुश्किल होता है। यह फक्ट फाइंडिंग कमीशन होता है। 2026 साल में जारी जांच आयोग अधिनियम के तहत नेपाल में इस प्रकार के आयोग बनाए जाते हैं। ये आयोग न्यायालय के समान अधिकार रखते हैं, जिनके पास व्यक्तियों को तलब करने, बयान लेने व सबूत मांगने का अधिकार है। आयोगों के पास सहयोग न करने वालों को गिरफ्तार करने और जुर्माना लगाने का भी अधिकार है। आयोग तथ्य एकत्रित कर उन्हें विश्लेषित करते हुए सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करता है और आवश्यकतानुसार आगे की जांच की सिफारिश करता है। प्रमुख न्यायाधीश के नेतृत्व वाले आयोग में संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ सदस्य होते हैं और पदाधिकारी गोपनीयता की शपथ लेते हैं। सरकार भी इस प्रक्रिया में सहयोग करती है।

जांच आयोग और संपत्ति जांच आयोग में क्या अंतर है? नेपाल में सामान्यत: आपराधिक घटनाओं या मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं में विशेषज्ञ आयोग बनाए जाते हैं। लेकिन, 2058 साल में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश भैरवप्रसाद लम्साल की अध्यक्षता में विशेष संपत्ति जांच आयोग गठित किया गया था जिसका उद्देश्य सार्वजनिक पदाधिकारियों की संपत्ति की जांच करना था। अन्य आयोग अपराध अनुसंधान करते हैं जबकि संपत्ति जांच आयोग सार्वजनिक पदाधिकारियों की संपत्ति की छानबीन करता है। राजनीतिक बदलाव और संपत्ति जांच का संबंध राजनीतिक परिवर्तन के बाद पूर्व सत्ताधारी वर्ग की संपत्ति की जांच करना प्रचलित रहा है। सार्वजनिक पद पर रहते हुए दुरुपयोग से अर्जित अवैध संपत्ति की खोज ही संपत्ति जांच का मूल उद्देश्य है।

2046 साल से पंचायती कालीन नेताओं की संपत्ति जांच की मांग होती रही है किन्तु यह ठोस रूप नहीं ले सकी। 2058 में गठित लम्साल आयोग इसका एक उदाहरण है। माओवादी शांति प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति की जांच व्यवस्था थी, परन्तु उसे लागू नहीं किया गया। हालिया राजनीतिक उठापटक के चलते यह विषय फिर सक्रिय हुआ है। संपत्ति जांच कैसे होती है? आयोग उच्च पदों पर रहे सार्वजनिक पदाधिकारियों से संपत्ति विवरण मांगती है और आय के अनुरूप उनकी संपत्ति का विश्लेषण कर असामान्य संपत्ति का पता लगाती है। यदि संदेह होता है तो बयान भी लिया जा सकता है। नेपाल में 2058 साल से सार्वजनिक पद पर रहे लोगों को संपत्ति विवरण देना जरूरी है जिसे आयोग जांच के लिए उपयोग करता है। संपत्ति को वैध या गैरकानूनी कैसे माना जाता है? संविधान के अनुसार प्रत्येक नागरिक को संपत्ति का अधिकार है, किन्तु सार्वजनिक पदाधिकारियों को वैध माध्यम से ही संपत्ति अर्जित करनी होती है। आयोग मुख्य रूप से वैध आय से तुलना कर असामान्य संपत्ति पाए जाने पर जांच की सिफारिश करता है।

संपत्ति मूल्यांकन का मानदंड क्या है? 2058 में गठित लम्साल आयोग से लेकर आज तक अख्तियार के अनुभव, सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और न्यायिक सिद्धांतों के आधार पर संपत्ति परीक्षण के मानदंड बनाए गए हैं। मूल रूप से सार्वजनिक पद पर रहने वाले व्यक्ति की तनख्वाह और सुविधाओं से 70 प्रतिशत की बचत अनुमानित की जाती है। इसी आधार पर उससे अधिक संपत्ति होने पर उसे संदिग्ध माना जाता है। गैरकानूनी संपत्ति एक अपराध है जिसके लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2059 की धारा 20 के अंतर्गत 1 से 3 साल तक जेल व जुर्माना हो सकता है। संपत्ति जब्त करने के साथ एक वर्ष अतिरिक्त कैद भी हो सकती है। आयोग न्यायाधीश व सैनिकों की संपत्ति की जांच भी कर सकता है। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर अन्य संस्थाएं विस्तृत जांच और कार्रवाई करती हैं। रिपोर्ट के आधार पर ही मुकदमा चलाया नहीं जाता। वरिष्ठ अधिवक्ता राजुप्रसाद चापागाई के अनुसार आयोग मुकदमा नहीं चला सकता, केवल संदेहित पक्षों की आगे जांच की सलाह देता है।

क्यों शक्तिशाली आयोग का गठन? नियमित संस्थाओं पर राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण प्रभावी जांच कठिन होने पर सरकार ने विशेष जांच आयोग गठित किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहर दाहाल बताते हैं कि आयोग का कार्य तथ्य संग्रहण तक सीमित होता है, वह मुकदमेबाजी नहीं करता। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित संस्था आगे जांच करती है।

लम्साल आयोग की महत्वपूर्ण रिपोर्ट 2058 में भैरव लम्साल की अध्यक्षता में बनी रिपोर्ट में प्रमुख राजनेताओं और प्रशासकों की अवैध संपत्ति उजागर हुई थी। लेकिन राजनीतिक कारणों से प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई। जांच के दायरे में कौन-कौन आते हैं? पहले चरण में पूर्व प्रधानमंत्री, उच्च पदाधिकारी और संवैधानिक संस्थाओं के व्यक्तियों की संपत्ति जांच में आ सकती है। इनमें कुछ पूर्व राजनीतिज्ञ आर्थिक विवादों में भी शामिल हैं। संपत्ति जांच की चुनौतियां और सहजताएं 2058/59 के आसपास नेपाली समाज में सार्वजनिक पद पर रहते हुए संपत्ति जमाने का चलन शुरू हुआ था। भ्रष्टाचार से जमा संपत्ति सामाजिक प्रतिष्ठा का साधन भी बन गई थी। लेकिन हाल के दशकों में भ्रष्टाचार व संपत्ति छुपाने की प्रवृत्ति विदेशों तक फैल गई है। अख्तियार सहित कई संस्थाओं ने भ्रष्टाचार और संपत्ति संबंधी मामले दर्ज किए हैं एवं विविध आर्थिक अपराधों के आरोप लगाए हैं। पत्रकार हरिबहादुर थापा के अनुसार नया आयोग कुछ क्षेत्रों में सुविधा प्रदान करेगा किन्तु चुनौतियां भी हैं क्योंकि संपत्ति छुपाने के तरीके और जटिल हो गए हैं।

प्राकृतिक स्रोतों की रॉयल्टी में स्थानीय तह की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नए सूत्र विकसित करने का निर्णय

अंतर सरकारी वित्त परिषद् और विषयगत समितियों की बैठक में प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त रॉयल्टी में स्थानीय तह की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नए सूत्र लागू करने का निर्णय किया गया है। इसके साथ ही, वित्तीय संघीयता से संबंधित कानूनों के संशोधन का मसौदा और बजट अनुशासन से जुड़े कानूनों का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया अर्थ मंत्रालय द्वारा आगे बढ़ाने का निर्णय भी लिया गया है।

बैठक में संघीय बजट वृद्धि के अनुपात में वित्तीय समन्वय अनुदान बढ़ाने, सशर्त अनुदान को क्रमिक रूप से घटाने और राजस्व चुहावट नियंत्रण में तीनों स्तर की सरकारों के बीच समन्वय स्थापित करने का भी निर्णय किया गया है। यह निर्णय ३ वैशाख को काठमांडू में हुई बैठक में लिया गया है। प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाली रॉयल्टी में स्थानीय तह की हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना सार्वजनिक की गई है।

गुरुवार को सम्पन्न अंतर सरकारी वित्त परिषद् और विषयगत समितियों की बैठक में इस उद्देश्य के लिए नए सूत्र लागू करने का निर्णय लिया गया। निर्णय में उल्लेख है, ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक स्रोत तथा वित्त आयोग की सिफारिश के साथ विद्युत, पर्वतारोहण, वन और खनन क्षेत्रों की रॉयल्टी में स्थानीय तह की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नए सूत्र लागू किए जाएंगे।’

बैठक ने वित्तीय हस्तांतरण और अनुदान प्रणाली में सुधार करते हुए संघीय बजट वृद्धि के अनुपात में वित्तीय समानीकरण अनुदान बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। संघ और प्रदेश सरकार से मिलने वाले सशर्त अनुदान को क्रमिक रूप से घटाने की नीति अपनाने का निर्णय लिया गया। राजस्व चुहावट नियंत्रण के लिए तीनों स्तरों की सरकारों के बीच समन्वय स्थापित करना भी निर्णय में शामिल किया गया है। आंतरिक स्रोतों के परिचालन को प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक स्तर की सरकार को निर्देश दिया गया है कि वे अपने आर्थिक वर्ष के भीतर ‘राजस्व संकलन और चुहावट नियंत्रण सुधार कार्ययोजना’ तैयार कर लागू करें। यह बैठक अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में सातों प्रदेश के आर्थिक मामिला तथा योजना मंत्री, परिषद के पदेन और विशेषज्ञ सदस्य, राष्ट्रीय योजना आयोग के उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय प्राकृतिक स्रोत तथा वित्त आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष, अर्थ सचिव, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव, नेपाल राष्ट्र बैंक के डिप्टी गवर्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सर्वोच्च न्यायालय ने दीपक खड्कालाई विदेश यात्रा के लिए अनुमति लेने का निर्देश दिया

सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खड्कालाई विदेश जाने से पहले अदालत से अनुमति लेने का निर्देश दिया है। खड्का पर संपत्ति शुद्धीकरण के मामले में जांच के लिए गिरफ्तारी हुई थी, और उनकी पत्नी विनिता थापाले बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट दाखिल की थी। जेनजी आंदोलन के दौरान खड्का के घर में तोड़फोड़ और आगजनी हुई थी, जिसके बाद जले हुए नोट के कुछ टुकड़े विभाग द्वारा संकलित किए गए हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने नेपाली कांग्रेस नेता एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खड्कालाई विदेश यात्रा से पहले अदालत से अनुमति लेने हेतु निर्देश जारी किया है। उन पर संपत्ति शुद्धीकरण के मामले में जांच के लिए गिरफ्तारी हुई थी। उनकी पत्नी विनिता थापाले चैत १५ को गिरफ्तार किए गए खड्का को जमानत देने और विदेश जाने से पहले अनुमति लेने के आदेश के लिए रिट दायर की थी।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल और श्रीकांत पौडेल की खंडपीठ ने उक्त रिट में सुनवाई करते हुए खड्का को जमानत देने और विदेश जाने से पहले अनुमति लेने का आदेश जारी किया। जेनजी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने खड्का के घर में तोड़फोड़ और आगजनी की थी। आगजनी के बाद उनके घर में नेपाली और विदेशी नोट के जले हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। विभाग ने इससे पहले ही खड्का के घर से जले हुए नोट के कुछ टुकड़े और आस-पास से राख इकट्ठा कर ली है।

सार्वजनिक पुस्तकालयमा समाज कल्याण परिषद्को वक्रदृष्टि

सार्वजनिक पुस्तकालय में समाज कल्याण परिषद का विवादित नजरिया

समाचार का संक्षिप्त विवरण संपादकीय रूप में प्रस्तुत। २०६० साल असार में डॉ. नारायण खड्क के नेतृत्व में काठमांडू में सार्वजनिक पुस्तकालय स्थापना के लिए एक बैठक आयोजित की गई थी। २०६२ साल असार २५ को पुस्तकालय भृकुटीमंडप में स्थानांतरित किया गया और संस्कृतिविद् सत्यमोहन जोशी ने इसका उद्घाटन किया। २०८२ साल चैत ३० को समाज कल्याण परिषद ने पुस्तकालय द्वारा किराया न देने का आरोप लगाकर ताला लगवा दिया।

२ वैशाख, काठमांडू। २०६० साल असार में डिल्लीबजार के भोजनालय में समाज के कुछ प्रबुद्ध वर्गों की बैठक हुई। इस बैठक का नेतृत्व नेपाली कांग्रेस के नेता डॉ. नारायण खड्क ने किया जहां डॉ. केदारभक्त माथेमा, हिमालय शम्शेर जबरा समेत कई व्यक्तिगण उपस्थित थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य काठमांडू में सार्वजनिक पुस्तकालय स्थापित करना था। सार्वजनिक पुस्तकालय के संचालन के माध्यम से अध्ययनशील समाज बनाने के लक्ष्य के साथ उसी वर्ष असोज में काठमांडू उपत्यका सार्वजनिक पुस्तकालय समाज का गठन किया गया। काठमांडू महानगर पालिका ने पुस्तकालय के लिए राष्ट्रीय सभागृह के एक कक्ष की सुविधा दी जहाँ लगभग दो वर्षों तक संचालन हुआ।

२०६२ साल असार २५ को पुस्तकालय का स्थानांतरण भृकुटीमंडप किया गया, जहां संस्कृतिविद् एवं शताब्दी पुरुष सत्यमोहन जोशी ने उद्घाटन किया। २०८२ के अंत में, २० वर्षों तक लगातार चलने वाले सार्वजनिक पुस्तकालय के लिए ‘काला दिन’ आया जब समाज कल्याण परिषद ने किराया न चुकाने का मुद्दा उठाकर चैत ३० को ताला लगा दिया। पुस्तकालय की व्यवस्थापक लीला भट्टराई के अनुसार यह पहली बार था जब २०६२ के बाद ताला लगाया गया। समाज कल्याण परिषद के भृकुटीमंडप स्थित दो स्टालों में काठमांडू उपत्यका सार्वजनिक पुस्तकालय समाज पुस्तकालय चला रहा था। परिषद ने निजी व्यवसाय, सामाजिक संस्थाओं और मीडिया कार्यालयों सहित २० स्टालों में ताला लगाते हुए यह नीति पुस्तकालय पर भी लागू की।

परिषद के अनुसार, ३४ नंबर के स्टाल ने किराया के रूप में १ करोड़ १३ लाख ५३ हजार ९५ रुपये जमा करना बाकी है जबकि दूसरे स्टाल ३८ का बकाया १ करोड़ ७६ लाख ७० हजार २८१ रुपये है। परिषद और सार्वजनिक पुस्तकालय समाज ने २०६४ असोज २१ को किराए का समझौता किया था जिसमें पुस्तकालय को अन्य से ७५ प्रतिशत किराया छूट दी गई थी। ३४ नंबर स्टाल से मासिक ४,८४४ रुपये और ६८ नंबर स्टाल से ७,५५५ रुपये किराया त кровь रूप में लिया जाना तय था, जिसे पुस्तकालय व्यवस्थापिका भट्टराई ने बताया।

उन्होंने कहा, ‘दोनों स्टालों से सालाना ढाई लाख रुपये चुकाते आ रहे हैं। पुराने समझौते का पुनर्विचार किए बिना समाज कल्याण परिषद ने पुस्तकालय को निजी व्यवसाय की तरह ही व्यवहार किया।’ परिषद के सदस्य सचिव सरोजकुमार शर्मा ने कहा कि अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने पुस्तकालय को छूट देने पर सवाल उठाया है। आयोग ने पुस्तकालय को छूट न देने का निर्देश दिया है, और हम स्थिति स्पष्ट करने में असमर्थ हैं। दोनों पक्षों के बीच हर दो वर्ष में समझौते का नवीनीकरण होना आवश्यक था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। २०६६ में नवीनीकरण के प्रस्ताव पर परिषद का कहना था, ‘यह पुस्तकालय है, इसे क्यों नवीनीकृत करना चाहिए? बस चलाते रहो।’

व्यवस्थापक भट्टराई को यह बात याद है। पुस्तकालय बिना बाधा के जारी रहा और शिक्षा मंत्रालय ने वार्षिक ५० लाख रुपये देने शुरू किए। प्रदेश एवं स्थानीय सरकारों ने भी आर्थिक सहायता प्रदान की। दानदाताओं और व्यक्तियों ने पुस्तकालय में ४० हजार पुस्तकें, पत्रिकाएं, जर्नल और मंत्रालय की रिपोर्ट्स उपलब्ध कराई हैं। पुस्तकालय में डिजिटल प्रणाली का भी उपयोग हो रहा है। यहाँ बच्चे से लेकर वृद्ध तक नियमित अध्ययन के लिए आते हैं। परिषद के अनुसार, लगभग २०० पाठक प्रतिदिन अध्ययन के लिए पुस्तकालय आते हैं।

पुस्तकालय के नियमित पाठक ही नहीं बल्कि समाज कल्याण परिषद के इस कदम से असंतुष्ट भी हैं। देश भर से आए नागरिकों ने अध्ययन के अवसरों को बाधित करने पर आपत्ति जताई है। लामा ने कहा, ‘पुस्तकालय सरकार को ही खोलना चाहिए। जो पुस्तकालय समाज सेवा के लिए खोला गया था, उसे बंद कर समाज कल्याण का क्या मतलब है? पुस्तकालय बंद करने से किसका कल्याण हुआ?’ उन्होंने बताया कि उन्होंने सिफारिश की कई लोग पुस्तकालय आते थे। पिछले वित्तीय वर्ष में २१,३६२ पाठकों ने पुस्तकालय सेवाओं का लाभ लिया और ३,००० व्यक्तियों ने वार्षिक सदस्यता लेकर पुस्तकें उधार लीं।

पुस्तकालय प्रबंधन के लिए तीन साल की अवधि में संचालक समिति है। कांग्रेस नेता डॉ. गोविन्दराज पोखरेल वर्तमान में संस्था के अध्यक्ष हैं। पोखरेल का कहना है कि अध्ययन संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पुस्तकालय चलाया जाता है। ‘पुस्तकालय लाभ कमाने के लिए नहीं खोला गया। जूते की दुकान और पुस्तकालय को एक ही पैमाने पर रखना उचित नहीं,’ उन्होंने कहा, ‘विकसित देशों ने मुख्य स्थानों पर बड़े पुस्तकालय खोले हैं।’ उन्होंने सुझाव दिया कि पुस्तकालय सरकार की संपत्ति है और सरकार को ही इसे संचालित करना चाहिए।

पुस्तकालय संचालित करने के लिए सात कर्मचारी कार्यरत हैं। अतीत के कई प्रधानमंत्री और नेपाल में नियुक्त राजदूतों ने पुस्तकालय का निरीक्षण किया है। आर्थिक संकट के कारण पुस्तकालय बंद करने की योजना बन रही थी, इसी बीच समाज कल्याण परिषद ने माघ महीने में किराया बकाया चुकाने हेतु पत्र भेजा था। वित्तीय संकट शिक्षामंत्री सुमना श्रेष्ठ के कार्यकाल से शुरू हुआ माना जाता है, क्योंकि उस दौरान पुस्तकालय के लिए वार्षिक बजट रोक दिया गया था। पुस्तकालय को कहीं और समाहित करने की अधूरी योजना के बाद परिषद ने ताला लगा दिया।

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के काठमांडू महानगरपालिका के मेयर रहते हुए मुख्य प्रशासकीय अधिकारी प्रदीप परियार पुस्तकालय के लिए १ करोड़ रुपये आवंटित करने की योजना बना रहे थे, लेकिन उनके तबादले के बाद नए प्रभारी ने कोई धनराशि नहीं दी। डॉ. पोखरेल का कहना है, ‘पाठकों से शुल्क, संचालक और निजी संस्थानों तथा व्यक्तियों के सहयोग से पुस्तकालय चला रहा है। अब चंदा इकट्ठा कर किराया देना होगा अन्यथा पुस्तकालय को बंद करना पड़ेगा। पुस्तक और सामग्री प्रबंधन की भी समस्याएं हैं।’

परिषद के सदस्य सचिव शर्मा का कहना है कि किराया किराने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने कहा, ‘यदि सरकार छूट देती है तो स्थिति बेहतर हो सकती है, लेकिन अभी हमारे पास किराया वसूलने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।’ ताला लगने के बाद कुछ स्टालों ने किराया देने की बात कही है और कुछ किस्तों में भुगतान करने की जानकारी दी है। शर्मा ने कहा, ‘समाज कल्याण परिषद ने एक साथ किराया जमा करने का निर्देश दिया है।’

सरकार ने अवैध मछली आयात पर कड़ी कार्रवाई, ३ दिन में स्थलगत रिपोर्ट देने का निर्देश

सरकार ने भारत से अवैध रूप से आने वाली पंगास मछली के आयात और बिक्री वितरण पर संबंधित विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं। पशु सेवा विभाग ने मोरङ, सुनसरी और झापा में अवैध मछली आने वाले स्थानों की पहचान कर रोकथाम के लिए सक्रियता दिखाई है। विभाग ने सीमा क्षेत्र में निरीक्षण करते हुए तीन दिन के अंदर यथार्थ स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस और सशस्त्र प्रहरी को निर्देश दिया है।

३ वैशाख, काठमांडू। सरकार ने भारत से बिना अनुमति के पंगास (पंगासियस) सहित अन्य मछलियों के अवैध आयात और बिक्री वितरण पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। कृषि तथा पशुपालन विकास मंत्रालय के अधीन पशु सेवा विभाग ने सीमा क्षेत्र से होने वाले ऐसे अवैध कारोबार को नियंत्रित करने के लिए संबंधित विभागों को पत्र जारी किया है।

कृषि, वन एवं वातावरण मंत्री गीता चौधरी ने पहले ही सातों प्रदेशों और उनके अधीन निकायों को नेपाली कृषि उत्पादों की सुरक्षा और खाद्य स्वच्छता बनाए रखने का निर्देश दिया था। उसी निर्देश के तहत विभाग ने भारत से बिना अनुमति तथा मानकों के विपरीत मछली आने से रोकने में सक्रियता दिखाई है। विशेष रूप से मोरङ, सुनसरी और झापा के स्थानीय मछुआरा किसान और व्यापारियों ने भारतीय मछलियों के कारण नेपाली उत्पादों को बाजार में जगह नहीं मिलने और अवैध आयात बढ़ने की शिकायत की जिसके बाद विभाग ने यह कदम उठाया है।

विभाग के अनुसार सुनसरी के अमडुवा फार्म एवं सिक्ती बॉर्डर, मोरङ के दुमरिया, धनपालथान, मिल्स क्षेत्र और हुलास मेटल क्षेत्र तथा झापा के बलुवागढ़ी और कांकड़भिट्टा नाकों से बड़ी मात्रा में मछली अवैध रूप से लाई जा रही है। इस प्रकार अवैध मछली विराटनगर, इटहरी, इनरुवा और धरान जैसे प्रमुख शहरों के बाजारों में खुलेआम बिक्री होती मिली है, ऐसी सूचना विभाग को प्राप्त हुई है। अवैध आयात रोकने के लिए विभाग ने पशु क्वारंटीन कार्यालय कांकड़भिट्टा और विराटनगर को विशेष निर्देश भी दिए हैं। स्थानीय प्रशासन, नेपाल पुलिस और सशस्त्र प्रहरी के साथ समन्वय कर सीमा पर स्थलगत निरीक्षण कर तीन दिन के अंदर यथार्थ स्थिति की रिपोर्ट विभाग को सौंपने को कहा गया है।