कानून, न्याय तथा संसदीय मामिलाओं की मंत्री सोबिता गौतम से नेपाल के लिए इज़रायल के राजदूत श्मुलिक एरी बास ने शिष्टाचार भेंट की।
मंत्री गौतम ने न्याय तक सुगम पहुँच के लिए तीन स्तर के कानूनों का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने की जानकारी दी।
नेपाल इज़रायल के साथ एकीकृत कानूनी सहायता, पारस्परिक कानूनी सहायता और संक्रमणकालीन न्याय में सहयोग करना चाहता है।
१३ जेठ, काठमांडू। कानून, न्याय तथा संसदीय मामिलाओं की मंत्री सोबिता गौतम से नेपाल के लिए इज़रायल के राजदूत श्मुलिक एरी बास ने औपचारिक भेंट की।
नेपाल और इज़रायल के बीच कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए ६६ वर्ष पूरे होने के अवसर पर, इज़रायल सरकार ने कानून, न्याय तथा संसदीय मामिलाओं की मंत्री के माध्यम से अन्य मंत्रालयों के साथ भी सहयोग कर दोनों देशों के रिश्तों को औपचारिक रूप से मजबूत करने हेतु कानूनी दस्तावेज बनाने एवं सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की, मंत्री गौतम के सचिवालय ने जानकारी दी।
भेंट में मंत्री गौतम ने न्याय तक सहज पहुँच सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय तीन स्तरों के कानूनों तक एक ही प्लेटफॉर्म से पहुँच के लिए डिजिटलीकरण कार्य चल रहा है, यह जानकारी दी।
एकीकृत कानूनी सहायता, पारस्परिक कानूनी सहायता, संक्रमणकालीन न्याय और संसदीय मामलों में इज़रायल सरकार के साथ सहयोग करने के लिए नेपाल तत्पर है, मंत्री गौतम ने चर्चा के दौरान बताया।
राजस्थान रॉयल्स ने बुधवार हुए एलिमिनेटर मैच में सनराइज़र्स हैदराबाद को ४७ रन से हराकर आईपीएल २०२६ के दूसरे क्वालिफायर में प्रवेश किया। राजस्थान के वैभव सूर्यवंशी ने मात्र २९ गेंदों पर ९७ रन बनाकर इस सीजन में ६५ छक्कों के साथ क्रिस गेल के सर्वाधिक छक्के लगाने के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। अब फाइनल में जगह बनाने के लिए राजस्थान का मुकाबला गुजरात टाइटन्स से होगा, जबकि हैदराबाद प्रतियोगिता से बाहर हो चुका है। १३ जैठ, काठमांडू।
राजस्थान रॉयल्स ने आईपीएल २०२६ के दूसरे क्वालिफायर में अपनी जगह पक्की कर ली है। बुधवार को हुए एलिमिनेटर मैच में सनराइज़र्स हैदराबाद को ४७ रन से हराकर राजस्थान ने फाइनल की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया। टारगेट का पीछा करते हुए हैदराबाद अपनी पारी १९.२ ओवर में १९६ रन पर पूरी कर सको। हैदराबाद के लिए नितिश रेड्डी ने सबसे अधिक ३८ रन बनाए, जबकि सलिल अरोड़ा ने ३५ और इशान किशन ने ३३ रन का योगदान दिया।
राजस्थान के जोफ्रा आर्चर ने ३ विकेट लिए, वहीं नान्द्रे बर्गर, सुशांत मिश्रा और रविंद्र जडेजा ने २-२ विकेट और यश राज पुंज ने १ विकेट हासिल किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए राजस्थान ने टॉस हारने के बावजूद २० ओवर में ८ विकेट गंवाकर २४३ रन बनाए। वैभव सूर्यवंशी ने आक्रामक अंदाज में २९ गेंदों में ९७ रन की धमाकेदार पारी खेली। उन्होंने १२ छक्के और ५ चौके लगाए, जिससे उन्होंने क्रिस गेल का २०१२ में बनाया हुआ एक सीजन में सर्वाधिक छक्कों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। सूर्यवंशी अब इस सीजन ६५ छक्के लगा चुके हैं।
सूर्यवंशी के बाद ध्रुव जुरेल ने भी आक्रमक खेल दिखाते हुए २१ गेंदों में ५० रन बनाए। यशस्वी जैसवाल ने २९ और कप्तान रियान पराग ने २६ रन की पारी खेली। हैदराबाद के प्रफुल हिंगे ने ३ विकेट लिए, जबकि इशान मालिंगा, शिवांग कुमार और नितिश रेड्डी ने १-१ विकेट हासिल किया। अब फाइनल में प्रवेश के लिए राजस्थान का मुकाबला गुजरात टाइटन्स से होगा, वहीं हैदराबाद इस प्रतियोगिता से बाहर हो गया है।
काठमांडू में आयोजित दूसरे ‘एवरेस्ट समिटियर्स समिट–2026’ में 26 विभिन्न देशों के 176 सगरमाथा आरोहियों को विशेष पदक और प्रमाणपत्र के साथ सम्मानित किया गया।
सगरमाथा की 32वीं सफल चढ़ाई कर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली कामीरिता शेर्पा को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया गया।
कार्यक्रम के पूर्वसंध्या पर आयोजित ‘समिटियर्स ब्रेकफास्ट’ में राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने भाग लेकर सगरमाथा आरोहियों से मुलाकात की।
१३ जेठ, काठमांडू। दूसरे संस्करण के ‘एवरेस्ट समिटियर्स समिट–2026’ समारोह में 26 देशों के कुल 176 सगरमाथा आरोहियों को सम्मानीय किया गया।
एवरेस्ट अलायंस नेपाल द्वारा आयोजित और संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सहयोग से बुधवार को काठमांडू में संपन्न इस भव्य कार्यक्रम में विश्व के 26 देशों के 176 सगरमाथा आरोहियों को विशेष पदक और प्रमाणपत्र के साथ सम्मानित किया गया।
आरोहियों को संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्री खड्गराज पौडेल, मंत्रालय के सचिव मुकुन्दप्रसाद निरौला, आयोजन संस्था एवरेस्ट अलायंस के अध्यक्ष सुदर्शन नेपाल, नेपाल टूर एंड ट्रैवल एजेंट्स संघ (नाट्टा) के अध्यक्ष कुमारमणि थपलिया, ट्रेकिंग एजेंसियों के संघ ट्रेकिंग एजेंसी एसोसिएशन ऑफ नेपाल (टान) के अध्यक्ष सागर पांडेय और अन्य ने सम्मानित किया।
कार्यक्रम में मंत्री पौडेल ने सगरमाथा आरोहियों के साहस और दृढ़ संकल्प की प्रशंसा की और सुरक्षित तथा सतत पर्वतीय पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
मंत्री पौडेल ने आरोहियों की सुरक्षा में सुधार, आपातकालीन उद्धार प्रणाली के सुदृढ़ीकरण और स्थानीय हिमाली समुदाय के आर्थिक सशक्तिकरण को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई। उन्होंने हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों पर चिंता व्यक्त की।
उनके अनुसार हिमनद के पिघलने की प्रक्रिया, जैव विविधता का ह्रास और बढ़ती कूड़ा प्रबंधन की चुनौतियां रोज बढ़ रही हैं। हिमालय संरक्षण केवल नेपाल का ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की संयुक्त जिम्मेदारी है, उन्होंने कहा।
वरिष्ठ पर्वतारोही और सेवन समिट ट्रेक्स के संचालक मिंत्यमा शेर्पा ने कहा कि नेपाल के हिमालय दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं और हिमालय आरोहण में शेर्पा गाइड्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘आज के शेर्पा पूर्व की तुलना में बहुत तेजी से और प्रशिक्षित हैं, और हम विदेशी आरोहियों को सुरक्षित रूप से शिखर तक ले जाने के लिए सदैव तैयार हैं।’
एवरेस्ट अलायंस नेपाल के अध्यक्ष सुदर्शन नेपाल ने बताया कि विश्व की सबसे ऊंची चोटी सगरमाथा के सफल आरोहण करने वाले आरोहियों का सम्मान करने के लिए आयोजित यह कार्यक्रम पिछले वर्ष शुरू हुआ था और अब दूसरे संस्करण तक पहुंचते-पहुंचते इसका प्रभाव और विस्तार बढ़ गया है।
उन्होंने कहा, ‘हमने पिछले वर्ष से सगरमाथा आरोहियों को सम्मानित करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम शुरू किया था। पहला संस्करण सफल होने से इसका महत्व और विस्तार स्पष्ट हुआ। यह कार्यक्रम नेपाल में ही नहीं, विश्व स्तर पर भी प्रसिद्ध हो चुका है।’
उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से इस आयोजन को भव्य बनाने में सफलता मिली है और इस बार सरकार ने भी इसमें सहयोग किया है, जिसके लिए संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नेपाल टूरिज्म बोर्ड को धन्यवाद दिया।
साथ ही उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में सभी के साथ समन्वय कर इस कार्यक्रम को और व्यापक व प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेगा।
अध्यक्ष नेपाल के अनुसार हिमालय के भविष्य के लिए एकजुट आवाज उठाना और विश्व की सबसे ऊंची चोटी सगरमाथा के आरोहियों के अद्वितीय साहस और योगदान को मान्यता देना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। इससे नेपाल के पर्वतीय पर्यटन को विश्व स्तर पर नई ऊंचाई प्राप्त होगी और साहसी आरोहियों का सम्मान होगा।
कार्यक्रम में दुनिया की सर्वोच्च चोटी सगरमाथा पर 32वीं बार सफल चढ़ाई करने वाली कामीरिता शेर्पा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा कई बार सगरमाथा आरोहण करने वाली महिला लाक्पा शेर्पा सहित अन्य को भी सम्मानित किया गया।
इस बार के कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने भी विशेष रूप से भाग लिया था। उन्होंने ‘समिटियर्स ब्रेकफास्ट’ कार्यक्रम में सहभागी होकर सगरमाथा आरोहियों से मुलाकात की। इससे कार्यक्रम की गरिमा राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक बढ़ गई, आयोजकों ने यह विश्वास जताया है।
नेकपा (एमाले) के प्रमुख सचेतक ऐनबहादुर महर ने वर्तमान सरकार से जनमत का सम्मान करते हुए संसद के प्रति जवाबदेह बनने पर जोर दिया है। बुधवार को संसद भवन परिसर में उन्होंने विपक्षी बेंच से रचनात्मक और सशक्त भूमिका निभाने की आवश्यकता स्पष्ट की और सरकार के सभी कामकाज संविधान और नियमावली के अनुसार होने चाहिए, यह बात कही।
प्रमुख सचेतक महर ने कहा कि एमाले हमेशा विरोध के लिए विरोध नहीं करता बल्कि सरकार के जनहित और संविधान के क्रियान्वयन में उठाए गए सकारात्मक कदमों का समर्थन करता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा, “यदि सरकार संविधान से ऊपर उठने का प्रयास करती है या मनमानी तथा तानाशाही प्रवृत्ति दिखाती है, तो हम सशक्त आलोचना करेंगे।”
महर ने कहा कि प्रतिनिधि सभा नियमावली और संवैधानिक व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री को नियमित रूप से संसद में उपस्थित होकर सांसदों के प्रश्नों के जवाब देना चाहिए। सत्तापक्ष के प्रमुख सचेतक द्वारा किए गए प्रतिबद्धता के अनुसार प्रधानमंत्री के संसद में आने की उम्मीद में वे सदन के कार्यों को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं, यह भी उन्होंने स्पष्ट किया।
“सदन तीन करोड़ नेपाली लोगों की आवाज का प्रतिनिधित्व करने वाला सर्वोच्च स्थल है। प्रधानमंत्री को सदन के माध्यम से जनता को अपने कार्यों की जानकारी देनी चाहिए। जनता की समस्याएं वैसे ही बनी हुई हैं, लेकिन सरकार मुख्यतः प्रचारात्मक कार्यों पर ही ध्यान दे रही है,” उन्होंने कहा। प्रमुख सचेतक महर ने देश में व्याप्त महंगाई, बेरोजगारी और युवा पलायन जैसी गंभीर समस्याओं में सरकार की असफलता का भी आरोप लगाया।
नेपाली कांग्रेस के संस्थापन इतर समूह ने सातों प्रदेश की बैठकों को सम्पन्न करने के बाद महासमिति बैठक बुलाने की आंतरिक तैयारी तेज कर दी है। गंडकी प्रदेश बैठक ने १५ जेठ २०८३ तक विवाद न सुलझने पर महासमिति बैठक के माध्यम से समाधान खोजने के लिए नेतृत्व से आग्रह किया है। सर्वोच्च अदालत ने पार्टी की आधिकारिकता से संबंधित याचिका खारिज कर दी है, फिर भी नेपाली कांग्रेस के अंदर आंतरिक विवाद और गुटगत सक्रियता समाप्त नहीं हो पाई है। १३ जेठ, काठमांडू। विशेष महाधिवेशन के बाद नेपाली कांग्रेस में संस्थापन और इतर समूह के बीच विवाद और भी बढ़ गया है। पार्टी की एकता के लिए अध्यक्ष गगन थापा पर दबाव बढ़ाने की योजना के तहत संस्थापन इतर समूह महासमिति बैठक की तैयारी कर रहा है।
पूर्व अध्यक्ष शेरबहादुर देउवा के निकटम नेताओं ने बताया कि संघीय स्तर की बैठकों के बाद महासमिति बैठक बुलाने की तैयारी चल रही है। नेताओं के बीच बैठक के बाद राष्ट्रीय बैठक बुलाने और बैठक के मांडेट के अनुसार निर्णय लेने के लिए आंतरिक चर्चा चल रही है। ‘महासमिति बुलाने की सलाह चल रही है,’ १४वें महाधिवेशन में देउवा के गृहप्रदेश सुदूरपश्चिम से केंद्रीय सदस्य चुने गए एक नेता ने कहा, ‘वहां से विशेष महाधिवेशन की तरह चुनाव कराने की योजना है।’ पूर्व प्रधानमंत्री देउवा के विश्वासपात्रों में से एक नेता ने पुष्टि की कि सातों प्रदेश की बैठकें संपन्न होने के बाद महासमिति बैठक बुलाने की तैयारी है।
‘बाकी तीन प्रदेश की बैठकों के बाद महाधिवेशन प्रतिनिधि और महासमिति सदस्यों की बैठक होगी,’ उन्होंने कहा, ‘इसी प्रक्रिया से आगे बढ़ेंगे।’ इतर समूह के नेता महासमिति बैठक के बाद महाधिवेशन भी आयोजित करने की तैयारी में हैं, ऐसा दावा भी कर रहे हैं। उक्त नेता ने इस दावे को कुछ संशोधित रूप में स्वीकार किया, ‘संख्या महत्वपूर्ण है। बहुमत हमारे पास होगा तो प्रक्रिया आगे बढ़ेगी,’ उन्होंने कहा। देउवा समूह की गंडकी प्रदेश स्तरीय बैठक ने १५ जेठ तक समाधान न निकाले जाने पर महासमिति बैठक बुलाकर समाधान खोजने का निर्णय कर लिया है।
बैठक के बाद जारी विज्ञप्ति में कहा गया था, ‘२०८३ साल जेठ १५ तक नेता समाधान न निकालें तो महासमिति बैठक आयोजित कर समाधान निकालने का आह्वान किया जाएगा।’ बैठक ने नेताओं से घनिष्ठ संवाद स्थापित कर एकता संदेश देने में देरी न करने का आग्रह करते हुए अध्यक्ष थापा, पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष पूर्णबहাদुर खड्का, डॉ. शेखर कोइराला समेत अन्य को आग्रह किया। गंडकी प्रदेश स्तरीय बैठक ने २१ फागुन को संपन्न आम चुनाव में कांग्रेस अपेक्षित परिणाम नहीं ला सकी, इसका प्रमुख कारण नेता समूहों में सहमति न होना, विशेष महाधिवेशन और उम्मीदवार चयन को माना है।
सरकारी संस्थाओं में से नेपाल आयल निगम ने गत आर्थिक वर्ष में १३ अरब ६४ करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाकर सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाला संस्थान साबित हुआ है। आर्थिक वर्ष २०८१/८२ में सार्वजनिक संस्थानों का कुल शुद्ध मुनाफा १२.०३ प्रतिशत वृद्धि होकर ४५ अरब ८ करोड़ ४९ लाख रुपये तक पहुंच गया है। संचालित ४५ सार्वजनिक संस्थानों में से २७ संस्थान लाभ में हैं जबकि १६ घाटे में हैं तथा सरकारी निवेश ७ खरब ९८ अरब से अधिक हो चुका है।
१३ जेठ, काठमांडू। सरकार द्वारा निवेश किए गए संस्थानों में सबसे अधिक मुनाफा नेपाल आयल निगम ने कमाया है। पिछले आर्थिक वर्ष में निगम ने १३ अरब ६४ करोड़ रुपये शुद्ध मुनाफा अर्जित किया जिससे यह शीर्ष पर है। सार्वजनिक संस्थानों की वार्षिक समीक्षा २०८३ के अनुसार, संचालित ४५ में से २७ संस्थान लाभ में हैं, १६ घाटे में हैं तथा २ संस्थानों ने वित्तीय विवरण प्रस्तुत नहीं किए हैं। पिछले वित्त वर्ष २०८०/८१ में २८ संस्थान लाभ में थे जबकि १५ घाटे में थे और दो ने वित्तीय रिपोर्ट नहीं दी थी।
सार्वजनिक ऋण प्रबंधन कार्यालय के विवरण के अनुसार वित्तीय वर्ष २०८१/८२ के अंत में सार्वजनिक संस्थानों में नेपाल सरकार का कुल निवेश ७ खरब ९८ अरब ५६ करोड़ ३५ लाख रुपये पहुंच गया है। यह निवेश पिछली वित्तीय वर्ष की तुलना में १३.४४ प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। पिछला निवेश ७ खरब ३ अरब ९३ करोड़ ८८ लाख रुपये था। पिछले वर्ष में संस्थानों में सरकार की शेयर निवेश १.४८ प्रतिशत बढ़कर ३ खरब ७० अरब २५ करोड़ १९ लाख रुपये हो गई है। जबकि ऋण निवेश २६.३२ प्रतिशत बढ़कर ४ खरब २८ अरब ३१ करोड़ १५ लाख रुपये हुआ है, जैसा कि अर्थ मंत्रालय ने बताया है। कुल ऋण निवेश का ८१.७३ प्रतिशत नेपाल विद्युत प्राधिकरण में है। वित्तीय वर्ष २०८१/८२ में कुल शेयरधारक कोष १० खरब ७३ अरब २८ करोड़ ३१ लाख रुपये तक पहुंच गया है जो पिछले वर्ष की तुलना में ३.८९ प्रतिशत अधिक है।
पूर्व राज्य मंत्री बिमला बिक ने बताया कि उन्हें दलित होने के कारण मंत्री और सांसद रहते हुए भी कोठा लेने में कठिनाई हुई।
काठमांडू में मकान मालिक द्वारा जातीय भेदभाव झेलने वाली दीपा नेपाली का मामला चार वर्षों से सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन है।
राष्ट्रीय दलित आयोग के अध्यक्ष देवराज विश्वकर्मा ने कहा कि कानूनी जटिलताओं और अविश्वास के कारण दलित समुदाय में थर संशोधन की प्रवृत्ति बढ़ी है।
साल २०७४ के चुनाव के बाद बर्दिया से समानुपातिक सांसद चुनी गईं बिमला बिक काठमांडू आईं। अब उन्हें रहने के लिए कोठा चाहिए था। संसद में बोलने का मौका मिला था, लेकिन राजधानी में सिर छिपाने के लिए कोई ठिकाना नहीं था। कई घरों में कोठा खोजने गईं, लेकिन शहर जितना बड़ा था, उतनी ही सोच संकीर्ण थी।
मकान मालिक जैसे ही दरवाज़ा खोलते, सवाल करते – “कौन हो? कहां से हो? जात क्या है?”
जात पता चलने पर अधिकांश मकान मालिकों का चेहरा बदल जाता था। सीधे कोठा नहीं देते और ‘सलाह करके बताएँगे’ कहकर टालते थे। सलाह के बाद भी कोई जवाब नहीं मिलता था। कई कोशिशों के बाद एक करीबी मित्र की मदद से अनामनगर में कोठा मिला।
कोठा मिलने के बाद कुछ समय वहीं रहीं। साल २०७७ में वे राज्य मंत्री बनीं। पद और जिम्मेदारी बढ़ने के बावजूद सामाजिक भेदभाव से मुक्त नहीं हो सकीं।
मंत्री बनने पर सरकारी नियम अनुसार पुलिस और सैनिक सुरक्षा के साथ रहने का इंतजाम होता है। लेकिन मकान मालिक ने सुरक्षाकर्मी लाने नहीं दिया। सरकार के पास भी राज्य मंत्री को आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं थी। सांसद रहते और मंत्री बनते भी बासस्थान खोजने में कठिनाई फिर से आई।
बिमला बिक
फ्लैट खोजते समय दलित होने की जानकारी मिलने पर मकान मालिक नाक सिकोड़ते और सीधे ‘नहीं देंगे’ कह देते।
लेकिन मकान मालिकों की शुरुआत की बातें और जाति जानने के बाद किए गए व्यवहार से बिमला ने आसानी से समझ लिया कि जाति के कारण कोठा देने से रोक रहे हैं।
‘शुरुआत में कोठा/फ्लैट है कहते, लेकिन थर पूछने पर ‘सलाह कर लेंगे’ कहकर टालते थे। व्यवहार ने ये सारी बातें स्पष्ट कर दीं,’ एमाले केन्द्रीय सदस्य बिमला ने अनुभव साझा किया।
मंत्री होते हुए भी जातीय भेदभाव झेलने के बाद वे मजबूरन पुल्चोक के मंत्री क्वार्टर में जबरदस्ती रहने को मजबूर हुईं। वहाँ एक अन्य व्यक्ति के नाम पर कोठा था, जो उस समय छुट्टी पर थे। बिमला को उस कोठे में ज़बरदस्ती रहना पड़ा।
इस तरह राजधानी काठमांडू में कोठा पाने की जंग लड़ती रह रहीं वे अब देश के तीसरे बड़े दल की केन्द्रीय सदस्य होते हुए भी भेदभाव से मुक्त नहीं हुईं।
कुछ हफ्ते पहले की ऐसी ही घटना उनका अनुभव है। घट्टेकुलो क्षेत्र में एक फ्लैट देखकर पसंद किया लेकिन किराया तय करते मकान मालिक ने फोन कर कह दिया – ‘किसी और ने पहले ही ले लिया, फ्लैट उपलब्ध नहीं है।’
भेदभाव के कारण कोठा न देने के फैसले को बिमला समझने में कोई कठिनाई नहीं हुई।
बिमला के अनुसार ऐसी कई घटनाएं हैं।
साल २०७४ से संसद सदस्य रही आशा विक ने भी कोठा खोजते समय ऐसा अनुभव किया। पूर्व सांसद कल्लुदेवी विश्वकर्मा का भी अनुभव वैसा ही है, जिन्होंने कई बार अपना विश्वकर्मा थर होने से मकान मालिकों द्वारा टाले जाने की बात बताई।
‘सांसद और मंत्री होते हुए भी ऐसा सामना करना पड़ता है तो सामान्य दलितों का क्या होगा? जिनका नाम नहीं जाना जाता, पद नहीं होता और शिकायत सुनने वाला कोई नहीं होता – उनकी कहानियां कब सार्वजनिक होंगी?’ पूर्व सांसद बिमला बिक ने पूछा।
०००
कैलाली की दीपा नेपाली उच्च शिक्षा के लिए काठमांडू आईं। त्रिभुवन विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर करते हुए उनका सपना था – अच्छी पढ़ाई करके अधिकृत या वकील बनना और परिवार में खुशहाली लाना। शहर आने के बाद परिस्थितियाँ सहज नहीं रहीं। पहली चुनौती थी आवास खोजना। भेदभाव के कारण कोठा न मिलने से वे निराश हो गईं।
२०७६ मंसिर में तार्केश्वर नगरपालिकावडा नं. १० नेपालटार के हिल टोला में शोध अधिकृत श्रीकृष्ण बिडारी के घर दो कोठे किराए पर लिए। मंसिर १० को श्रीमती राधिकाने 500 रुपए अग्रिम शुल्क पर बुकिंग भी कराई। रंगाई में दो दिन लगे।
‘सुदूर पश्चिम के लोग सीधे होते हैं, आपको जैसी लगे वैसे कोठा दूंगी, 4-5 साल रहने वाला चाहिए,’ राधिकाने दीपा से कहा। रंगाई के बाद सामान रखने गए तभी मकान मालिक की बेटी शर्मिला ने अपना परिचय दिया। दीपा ने अपना नाम, थर और अन्य विवरण बताए।
परिचय खुलने के बाद घर का माहौल अचानक बदल गया। अगली सुबह मकान मालिक आई और दरवाज़ा खटखटाते हुए कहा, ‘तुम लोग तो तल्लो जात के हो। थर अनजान होने के कारण कोठा नहीं दे सकते। घर में पिता का निधन हुआ है, इसलिए घर साफ करना है। समाज पर भी असर पड़ता है। तुरंत कोठा छोड़ दो।’
दीपा का जीवन इसके बाद कठिन हो गया। मकान मालिक और नीचे रहने वालों ने पानी कटौती की, बिजली बिल बढ़ाया, धमकी दी और मारपीट की कोशिश की। अंत में जबरदस्ती कोठा खाली कराया गया।
इसके बाद भी आवास के लिए भारी संघर्ष करना पड़ा। कई दलित साथियों ने थर बदलकर रहने की सलाह दी। दीपा कहती हैं काठमांडू में स्थायी होने के लिए थर बदलने वाले बहुत हैं। लेकिन वे अपनी पहचान छिपाकर रहना नहीं चाहतीं।
पहली बार जब कोठे से निकाला गया तो दीपा चुप नहीं रहीं। बालाजु पुलिस थाने में भी आवेदन दिया लेकिन सुनवाई नहीं हुई। फिर प्रेस कांफ्रेंस कर जातीय भेदभाव सार्वजनिक किया, कुछ मीडिया ने खबर बनाई। गृह मंत्रालय और महान्यायालय के कार्यालय में जाकर ऑडियो सबूत भी प्रस्तुत किए।
आखिरकार २०७६ फाल्गुन २२ को श्रीकृष्ण बिडारी, राधिका बिडारी, जनकराज ढुंगाना और संतोष ढुंगाना के खिलाफ जातीय भेदभाव का मामला दर्ज हुआ। मामला लड़ने में दीपा की पढ़ाई बिगड़ी, किताब लेकर न्यायिक निकायों में दौड़ती रहीं। यह मामला अब तक सर्वोच्च में विचाराधीन है।
न्याय के द्वार पर दस्तक देते हुए उन्हे बार-बार आठ बार कोठा बदलना पड़ा। हर नए मकान मालिक को पुराने मामले का पता चलने पर कोठा छोड़ने का दबाव बढ़ता गया।
दीपा कैलाली से काठमांडू पढ़ने आईं और बार-बार सामान लेकर बसाई सरीलाई। पढ़ाई और माहौल दोनों बिगड़े, मास्टर की पढ़ाई और लोकसेवा की तैयारी पूरी नहीं हो सकी। उनके भाई-बहन भी मानसिक तनाव में आकर दो साल पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हुए।
‘सबको दलित जानने के बाद कोठा नहीं देते। अब भी भेदभाव वैसा ही है,’ लंबी सांकेतिक धरना देते हुए दीपा ने कहा, ‘आंदोलन में आने से भी कई डरते हैं क्योंकि मकान मालिक उनके फोटो और वीडियो देखकर पहचान सकते हैं। थर बदलकर रहने वाले साथी मैं जानती हूँ।’
सड़क प्रदर्शन में भी कुछ लोग ‘रुपा सुनार का नाम लेकर’ दलितों को चिह्नित करते हैं। रुपा सुनार भी कोठा न मिलने के कारण पीड़ित हैं और न्यायिक मामला लड़ चुकी हैं।
अपने खिलाफ हुई अपमान और अन्याय के विरोध में लड़ते हुए उन्हें ‘डलरे टॅग’ लगाई जाती है, इस समाज पर दीपा बेहद नाराज हैं।
काठमांडू में कोठा खोज रहे कई दलित साथियों के नाम ‘किरण बिक, निर्जन बिक, बिमला बिक, जौमती नेपाली, लक्ष्मी सेन्चुरी, कैलाश बिक, प्रकाश खाती’ हैं। वे कहती हैं, ‘हम अधिकांश दलित अभी भी इस शहर में भेदभाव झेल रहे हैं। गांवों में क्या हाल होगा?’
थर संशोधन की बढ़ती प्रवृत्ति
राष्ट्रीय दलित आयोग के अध्यक्ष देवराज विश्वकर्मा।
दलित होकर कितनी पीड़ा झेल रहे हैं और कितनी शिकायतें हैं, इस पर राष्ट्रीय दलित आयोग के पास ठोस आंकड़े नहीं हैं, ऐसा अध्यक्ष देवराज विश्वकर्मा ने बताया।
उनके अनुसार हाल के दिनों में शिकायत करने की बजाय थर ही बदलने की प्रवृत्ति बढ़ी है। कई लोग कानूनी झंझट से बचने के लिए नागरिकता में थर परिवर्तन की प्रक्रिया अपनाते हैं।
इसके पीछे कारण है कि कानूनी प्रक्रिया में साक्ष्य जुटाना जटिल है, पुलिस और न्यायालय पर अविश्वास बढ़ा है। इसलिए थर बदलकर आसान रास्ता खोजने वाले अधिक दिखाई देते हैं।
‘पुलिस और न्यायालय से दलितों को मदद मिलने का विश्वास ना होने के कारण दूसरा रास्ता अपनाया गया है। थर संशोधित करने वाले बढ़े हैं,’ अध्यक्ष विश्वकर्मा ने कहा, ‘आयोग के पास थर संशोधन संबंधी यकिन आंकड़े अभी नहीं हैं।’
गृह मंत्रालय की सूचना अधिकारी रमा आचार्य।
थर संशोधन की बढ़ती प्रवृत्ति होने के बावजूद गृह मंत्रालय के पास इस पर कोई ठोस आंकड़ा नहीं है, ऐसा गृह मंत्रालय की सूचना अधिकारी रमा आचार्य ने बताया। जिलों के अपने हिसाब से आंकड़े रखने के बावजूद राजधानी में कोई समेकित आंकड़ा नहीं है।
‘जिले अपनी व्यवस्था से आंकड़े रखते हैं, लेकिन हमने सभी का संकलन नहीं किया है,’ उन्होंने कहा, ‘हाल ही में थर संशोधन की सुविधा मिलने के बाद संख्या बढ़ सकती है।’
‘रूम फाइंडर्स’ ने भेदभाव को और छिपाया
भक्तपुर स्थित एक ‘रूम फाइंडर्स’ अर्थात कोठा खोजने वाला मध्यस्थ ने बताया कि कोठा देने में जातीय भेदभाव अब भी बना हुआ है।
नाम न बताने की शर्त पर उन्होंने कहा कि मकान मालिकों को जातीय विषय में पहले से सूचित कर दिया जाता है और उसी अनुसार व्यक्ति को कोठा देने का निर्देश मिलता है।
‘आज सुबह एक व्यक्ति कोठा लेने आए, पर वे बोले दलित और महिला नहीं चाहिए,’ उन्होंने कहा, ‘ऐसी घटनाएं बहुत होती हैं, हमें भी पीड़ा होती है पर व्यवसाय की वजह से ऐसा करना पड़ता है।’
कुछ लोग अपना वास्तविक नाम न बताकर सुरलिपि देते हैं। नाम से कैसे पहचान करेंगे, इस पर उन्होंने कहा कि ‘क्यूआर कोड’ से वास्तविक नाम पता लग जाता है।
नागरिकता की फोटोकॉपी मांगते हैं इसलिए ग्राहक की शिकायत होती है कि फर्जी दस्तावेज हो सकते हैं। इसीलिए बहुत कुछ समझने की कोशिश करते हैं, नहीं तो खुद जाकर मिलना पड़ता है, उन्होंने बताया।
इस प्रकार मध्यस्थकार भेदभाव को छिपाकर कोठा देने की प्रक्रिया अपनाते हैं जो पहले से भी अधिक खतरनाक है, ऐसा पूर्व सांसद बिमला बिक ने बताया।
‘मध्यस्थ सीधे कह देते थे, “आप तो सब ठीक हो, लेकिन दलित हैं इसलिए मकान मालिक नहीं मानते।” अगर ये न बोलते तो हमें पता नहीं चलता। अब भेदभाव मध्यस्थकारों में छिप गया है, जो और भी खतरनाक है,’ पूर्व सांसद ने कहा।
दीपा नेपाली का अनुभव भी यही है। पहले मकान मालिकों की नियत पता चल जाती थी और लड़ना आसान होता था, अब मध्यस्थ छिपाते हैं। ‘काठमांडू में दलितों को कोठा मिलना अब भी कठिन है। रूम फाइंडर कहते हैं ‘तल्लो जात न लाओ’ और वे बिना बताए कोठा दिखाते हैं। इससे भेदभाव और बढ़ने का डर है,’ उन्होंने कहा।
इसलिए अब हर घर पर ‘विभेदरहित घर’ का स्टिकर लगाना आवश्यक है। घर के बाहर ‘कुत्ते से सावधान’ लिखा होता है, ऐसे ही ‘विभेदरहित घर’ लिखा होना चाहिए ताकि सभी की नियत साफ दिखाई दे, ऐसा दीपा मांगती हैं।
‘अन्य को कुत्ता काटेगा डर होता है, हमें डर रहता है कि मकान मालिक जात पूछेंगे। इसलिए हर घर के बाहर स्टिकर लगाना चाहिए, इससे पता चलेगा कौन कैसा है,’ उन्होंने जोड़ा।
१३ जेष्ठ, काठमाडौं। राष्ट्रिय मानवअधिकार आयोग ने भदौ २३ तथा २४ की घटनाओं में तत्कालीन प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली और दो मंत्रियों को मानवाधिकार उल्लंघन में संलग्न पाया है और उन्हें कानून के तहत कारवाई करने की सिफारिश की है। जेनजी आन्दोलन की घटनाओं के अध्ययन के लिए गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने प्रभावी कानून बनाकर कारवाई करने का सुझाव दिया है। आयोग ने तत्कालीन गृहमन्त्री रमेश लेखक और सञ्चार तथा सूचना प्रविधि मन्त्री पृथ्वीसुब्बा गुरुङ को भी मानवाधिकार उल्लंघनकर्ता घोषित किया है।
आयोग ने सरकार को अपनी सिफारिश में कहा है, ‘व्यक्तियों को मानवाधिकार उल्लंघन में दंडित करने का प्रावधान वर्तमान कानून में न होने के कारण मानवता तथा मानवाधिकारों के उल्लंघन में भी पश्चिमी दृष्टिकोण अपनाकर कानून बनाकर दंडित करने का सिद्धांत स्थापित हो चुका है, इसलिए नया कानून बनाना आवश्यक है।’ आयोग ने नए कानून के तहत तीनों को दंडित करने की सिफारिश की है। इस कानून में मानवाधिकार उल्लंघनकर्ताओं को अधिकतम ६ महीने तक कारावास और तीन लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों दंड देने का प्रावधान सबसे पहला शर्त रखा गया है।
आयोग ने रवि लामिछाने और नख्खु कारागार के प्रशासक सत्यराज जोशी की घटनाओं पर भी गंभीर विश्लेषण किया है। आयोग ने निष्कर्ष निकाला है कि लामिछाने के कारागार से बाहर आने से १० बालक कैदी और बंदियों की मृत्यु हुई है। आयोग ने कहा है, ‘इस प्रकार कारागार ऐन, २०७९ का उल्लंघन हुआ है या नहीं, इसकी सरकार द्वारा गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ कारवाई होनी चाहिए।’
आयोग ने मेयर बालेन शाह और सेना की भूमिका पर मौनता बरती है। मेयर शाह से बयान लिए जाने के बावजूद उनकी भूमिका और जिम्मेदारियां रिपोर्ट में उल्लिखित नहीं हैं। आयोग ने सुरक्षा बलों के अनावश्यक हथियार प्रयोग को जिम्मेदार ठहराया है। आयोग ने कहा, ‘भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं में राष्ट्रीय सम्पत्ति तथा आम नागरिकों के मानवाधिकार की रक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रधान सेनापति को निर्देश दिया जाएगा।’
नेपाल के प्रथम राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव ने चुरे क्षेत्र में तीव्र खनिज दोहन को तत्काल रोकने की चेतावनी दी है, अन्यथा तराई क्षेत्र कुछ दशकों में मरुस्थल बन जाएगा। सरकार की नीति तथा कार्यक्रम में चुरे संरक्षण पर चर्चा न होकर खनिज उत्खनन की बात किए जाने से वे चिंतित हैं। देश की लगभग ६० प्रतिशत जनसंख्या चुरे और तराई क्षेत्रों में निवास करती है, इसलिए उन्होंने सरकार से इस क्षेत्र को बचाने हेतु कानूनी व्यवस्था और बजट सुनिश्चित करने की मांग की है।
डा. यादव ने कहा, “यदि चुरे और तराई का तीव्र दोहन नहीं रोका गया तो कुछ दशकों में तराई मरुस्थल बन जाएगी।” उनके कार्यकाल के दौरान, नेपाल सरकार ने आर्थिक वर्ष २०६६/६७ में राष्ट्रपति चुरे संरक्षण कार्यक्रम शुरू किया था। २०७१ असार २ गते राष्ट्रपति चुरे-तराई मधेश संरक्षण विकास समिति का गठन किया गया तथा २०७४ जेठ में गुरुयोजना स्वीकृत की गई थी। लेकिन इस बार सरकार की नीति तथा कार्यक्रम में ‘चुरे संरक्षण’ का कोई उल्लेख नहीं है।
उन्होंने अपने जीवन में चार कोसे क्षेत्र में झाड़ी कटान और चुरे के आधे जंगलों के नष्ट होने की याद करते हुए बताया कि जंगलों के विनाश से तराई-मधेश में अन्न और पानी की गंभीर संकट की स्थिति पैदा हो गई है। वे कहते हैं, “अगर तराई मरुस्थल बन गई तो हिमालय के हिम २० वर्षों में पिघल जाएंगे और हमारी सभ्यता समाप्त हो जाएगी।” इसीलिए उन्होंने वर्तमान सरकार से चुरे संरक्षण के लिए आवश्यक कानून और बजट सुनिश्चित करने का विशेष अनुरोध किया है।
डा. यादव ने कहा कि चुरे की मिट्टी, बालू, पत्थर, जंगल, पशु-पक्षी और जैविक जीवन प्रणाली का संरक्षण राष्ट्रीय हित में है। वे कहते हैं, “यदि तराई मरुस्थल बन गया तो हिमालय के हिम २० वर्षों में पिघल जाएंगे और हमारी सभ्यता नष्ट हो जाएगी।”
केंद्रीय कृषि प्रयोगशाला के अध्ययन के अनुसार मधेश प्रदेश की ५४.७ प्रतिशत मिट्टी में अम्लता की वृद्धि से उत्पादकता में गंभीर गिरावट आई है। मधेश प्रदेश की मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा घटकर १.९४ प्रतिशत रह गई है, जबकि स्वस्थ मिट्टी के लिए यह मात्रा ५ प्रतिशत आवश्यक होती है। मिट्टी के स्वास्थ्य सुधार और अम्लीयता घटाने के लिए सरकार ने मधेश में ५० प्रतिशत अनुदान पर ढैंचों के बीज और कृषि चुन वितरण प्रारंभ किया है। १३ जेठ, काठमांडू।
नेपाल के अन्न भंडार माने जाने वाले मधेश प्रदेश की मिट्टी की seहत की स्थिति वर्तमान में काफी चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। केंद्रीय कृषि प्रयोगशाला द्वारा मधेश के विभिन्न जिलों में किए गए स्थलीय अध्ययन और मिट्टी परीक्षण के नतीजों ने मिट्टी की उत्पादकता में गंभीर गिरावट को दर्शाया है। प्रयोगशाला के वरिष्ठ मिट्टी विशेषज्ञ नेत्रप्रसाद भट्ट के अनुसार मधेश प्रदेश के धनुषा और सिरहा जिलों के १० स्थानीय तह के किसानों के साथ प्रत्यक्ष साक्षात्कार, स्थलीय निरीक्षण और मिट्टी के नमूने एकत्रित किए गए थे।
अध्ययन के दौरान मिट्टी में कठोरता बढ़ना, सूखे की स्थिति, कम जल धारण क्षमता और फसल की जड़ के विकास में कमी पाई गई। भट्ट के अनुसार किसानों ने बताया कि पहले की तुलना में अधिक मात्रा में उर्वरक उपयोग करने के बावजूद भी फसल की पैदावार घट रही है। किसानों में मिट्टी की समस्या के कारण उत्पादन कम होने की सामान्य जानकारी तो है, परंतु समस्याओं के तकनीकी कारणों की समझ अत्यंत कम है।
अमेरिका के पूर्वराष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपने जीवनी लेखक के साथ हुई निजी बातचीत के ऑडियो रिकॉर्डिंग और लिखित सामग्री को सार्वजनिक होने से रोकने के लिए अमेरिकी न्याय विभाग के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। यह मामला पूर्वराष्ट्रपति बाइडेन पर गोपनीय सरकारी दस्तावेज़ों को सुरक्षित न रखने के विषय में विशेष जांच अधिकारी रॉबर्ट हुर द्वारा की गई जांच से जुड़ा है। 2016 और 2017 में हुई इन बातचीत की रिकॉर्डिंग को इस जांच में मुख्य प्रमाण के रूप में लिया गया है। विशेष जांच अधिकारी हुर ने यह निष्कर्ष निकाला था कि बाइडेन ने अपने लेखक मार्क ज्वोनिट्जर को गोपनीय डायरी के अंश पढ़कर सुनाए। हालांकि, बाइडेन का दावा है कि उन्होंने कोई गोपनीय जानकारी साझा नहीं की।
पहले की जांच के दौरान, जब बाइडेन ने कुछ बातों को भूल जाने का उल्लेख किया था, तब हुर ने कहा था कि यह साबित करना मुश्किल होगा कि उन्होंने जानबूझकर कोई गलती की। अमेरिकी न्याय विभाग 15 जून तक उन रिकॉर्डिंग के संशोधित अंश अमेरिकी संसद और ‘हेरिटेज फाउंडेशन’ को उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा था, इसी बीच बाइडेन ने यह कानूनी कदम उठाया है। हेरिटेज फाउंडेशन ने सूचना के अधिकार कानून के तहत उक्त सामग्री मांगते हुए अदालत में याचिका दायर की थी। इस कानूनी विवाद पर अभी तक पूर्वराष्ट्रपति बाइडेन के प्रतिनिधि और न्याय विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भदौ 23 और 24 की घटनाओं में ओली, लेखक और गुरुङ को मानव अधिकार उल्लंघनकर्ता घोषित किया है।
आयोग ने कारागार से कैदियों को बाहर भेजने के मामले में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने को संदेह के घेरे में डालकर सूक्ष्म जांच की सिफारिश की है।
सदस्य लिली थापा की अध्यक्षता में गठित समिति ने बुधवार को घटनाओं की विस्तृत जांच रिपोर्ट जारी की।
13 जेठ, काठमांडू। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भदौ 23 को प्रदर्शन में हुए दमन और अगले दिन की घटनाओं की जांच कर एक रिपोर्ट जारी की है।
आयोग की सदस्य लिली थापा के संयोजन में भदौ 23 और 24 की घटनाओं में मानव अधिकार उल्लंघन की जांच के लिए एक समिति गठित की गई थी।
उस समिति ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक की।
समिति की रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने उस समय सरकार के नेतृत्व में रहे ओली, लेखक और गुरुङ को मानव अधिकार उल्लंघनकर्ता के रूप में दर्ज किया है।
आंदोलन के दौरान कारागार से कैदियों को बाहर भेजने के कार्य में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने की संलिप्तता पर आयोग ने शंका जताते हुए उन्हें जांच के दायरे में लाने और सूक्ष्म जांच करने की सिफारिश की है।
आगामी आर्थिक वर्ष के बजट में सांसद के निर्वाचन क्षेत्र केंद्रित परियोजनाएं शामिल करने के लिए सरकार ने प्रत्यक्ष निर्वाचित सांसदों से रणनीतिक सड़क और पुल परियोजनाओं की मांग की है।
सर्वोच्च न्यायालय ने संसदीय क्षेत्र के पूर्वाधार विकास कार्यक्रम पर अंतरिम रोक लगाई है, फिर भी सरकार योजना मांग कर बजट में इसे छुपाने की कोशिश कर रही है।
नेकपा एमाले के प्रमुख सचेतक ऐन महर ने कहा है कि सरकार की नीतिगत सुझाव न लेकर सिर्फ योजना मांगना सांसदों के प्रति अपमानजनक है।
१३ जेठ, काठमाडौं। इस वर्ष भी बजट में ‘सांसद विकास कोष कार्यक्रम’ को घुमावदार तरीके से शामिल करने की योजना है। सरकार आगामी आर्थिक वर्ष के बजट की पूर्व तैयारी के दौरान सांसदों से निर्वाचन क्षेत्र केंद्रित योजनाएं मांग रही है और इन्हें बजट में रखने की तैयारी में है।
प्रधानमंत्री एवं मन्त्रिपरिषद कार्यालय और अर्थ मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों के अनुसार, सांसदों से योजना संग्रह का काम तत्कालीन शहरी विकास मंत्रालय (अब पूर्वाधार विकास मंत्रालय) ने किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह जनता की मांग सुनने और समाधान करने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
‘जो भी पार्टी से निर्वाचित हों, जनता उन सांसदों को अपनी मांगें बताती है। जनता की आवश्यकता के अनुसार योजना संकलित की गयी हैं,’ एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘इसे गलत समझना उचित नहीं होगा।’
इस योजना के तहत प्रत्यक्ष निर्वाचित सांसदों से तीन-तीन रणनीतिक सड़क और पुल परियोजनाएं संकलित की गई हैं। समानुपातिक सांसदों से प्राथमिकता के आधार पर एक योजना प्राप्त हुई है। यह निर्धारित नहीं था कि कितनी राशि की योजना देनी होगी।
सरकार के आग्रह के अनुसार नेपाली कांग्रेस के सांसद योगेश गौचन ठकाली ने छह योजनाएं पेश की हैं। ठकाली ने कहा, ‘नई और पुरानी दोनों तरह की छह योजनाएं प्रस्तुत की हैं। पिछली कार्यान्वित या धीमी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए निर्देशित किया है।’
पहले संसद सदस्य के चयन के आधार पर उन्हीं योजनाओं में धन आवंटित किया जाता था। २०७० साल में जब सुशील कोइराला प्रधानमंत्री थे, तब पूर्वाधार विकास कोष की अवधारणा शुरू हुई, बाद में नाम बदलकर सांसद विकास कोष रखा गया।
समय के साथ सांसद के मुख्य कार्य को लेकर बहस हुई। कहा गया कि सांसद को विकास योजना मांगने वाली भूमिका नहीं, अपितु कानून निर्माण में लगी भूमिका निभानी चाहिए। इस कारण नाम फिर से ‘स्थानीय पूर्वाधार विकास साझेदारी कार्यक्रम’ रखा गया।
इस कार्यक्रम के तहत संघीय संसद निर्वाचन क्षेत्रों में ६ करोड़ और प्रदेश स्तर पर ६ करोड़ रुपये वार्षिक आवंटन हो रहा था। लेकिन विकास के नाम पर यह राशि कार्यकर्ताओं में वितरण कर दुरुपयोग होने की आलोचना होती रही।
अधिक आलोचनाओं के बाद तत्कालीन अर्थ मंत्री विष्णु पौडेल ने २०७८/७९ के बजट से सांसद विकास कोष की राशि हटा दी और कार्यक्रम समाप्त कर दिया।
लेकिन सांसदों के दबाव पर तत्कालीन अर्थ मंत्री डा. प्रकाशशरण महत ने २०८०/८१ के बजट में सांसद विकास कोष पुनः स्थापित किया।
महत ने ‘संसदीय पूर्वाधार विकास कार्यक्रम’ के तहत निर्वाचन क्षेत्रों में पाँच-पाँच करोड़ रुपये आवंटित किए। इसके अनुसार २७५ सांसदों के लिए कुल १३ अरब ७५ करोड़ रुपये विनियोजित हुए, परंतु यह कार्यक्रम लागू नहीं हो सका।
संसदीय पूर्वाधार विकास कार्यक्रम के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा दायर किया गया। ६ भदौ २०८० को सर्वोच्च के संवैधानिक इजलास ने योजना आयोग, मंत्रालयों के क्षेत्राधिकार, विकास अवधारणा, स्वार्थ दूरी, सुशासन एवं जवाबदेही पर ध्यान देते हुए इस कार्यक्रम पर अंतरिम रोक लगा दी।
सर्वोच्च अदालत के फैसले के खिलाफ संसद में भी प्रश्न उठे। तत्कालीन सांसद रमेश लेखक, श्यामकुमार घिमिरे, महेश बर्तौला, सूर्य थापा और अम्मरबहादुर थापाले इस मामले को स्वीकार नहीं किया और मुकदमे का सामना किया, लेकिन वित्तीय वर्ष के भीतर कोई निर्णय नहीं हुआ।
आज भी सांसद विकास कोष की मांग जारी है। सर्वोच्च के आदेश के बाद भी सांसद योजना मांग रहे हैं और उन्हें बजट में आवंटन किया जा रहा है।
तत्कालीन अर्थ मंत्री वर्षमान पुन ने सांसदों से योजना मांग कर बजट तैयार किया था। उस समय लाखों की योजनाओं को भी बजट में जगह मिली थी।
इस वर्ष भी इसी तरह सांसदों से योजना मांग कर बजट में शामिल किया जा रहा है, हालांकि राशि की कोई सीमा निर्धारित नहीं है।
प्रकाशशरण महत ने २०८० साल में नियम बनाए थे जिसमें संघीय स्तर पर ३ करोड़, प्रदेश स्तर पर एक करोड़ से अधिक और स्थानीय स्तर पर एक करोड़ से कम मूल्य की योजना ही लाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन अब तक यह लागू नहीं हो पाया है।
अर्थात् सांसद अभी भी विधायी भूमिका में रहते हुए योजना चयन और बजट कार्यान्वयन में शामिल हैं।
सुशासन के सिद्धांतों के विरुद्ध
समाजशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. दीपेश घिमिरे के अनुसार सांसदों को विकास कार्यों में जोड़ने के पीछे दो मुख्य कारण हो सकते हैं।
पहला, सांसद का मुख्य काम नीति निर्माण है, इस बात की व्यापक जन चेतना नहीं है। जनता सड़क और विकास योजना चाहती है।
दूसरा, ऐसे कार्यक्रमों में करीब १०% प्रशासनिक खर्च होता था जो कार्यकर्ताओं के परिचालन में सहायक होता था।
सांसदों द्वारा चयनित योजनाओं में उपभोक्ता समितियों के माध्यम से भी कार्यकर्ताओं के लिए व्यवस्था की जाती थी। उन्होंने बताया, ‘पहले सांसद इन कार्यक्रमों के जरिये खुद को विकासकर्ता साबित करते थे और कार्यकर्ताओं को पोषण भी करते थे।’
लेकिन लगातार इस तरह की योजनाओं को जारी रखना गलत है, ऐसा घिमिरे का तर्क है।
‘सांसद का काम कानून बनाना और सरकार को जवाबदेह बनाना है। तंत्र में जांच और संतुलन बनाए रखना है,’ उन्होंने कहा, ‘अपने जिम्मे कार्यों से बाहर कार्य करना सुशासन के सिद्धांतों के खिलाफ है। यह अभ्यास गलत है।’
उन्होंने इन योजनाओं के समाप्ति और सरकार एवं सांसदों से नई दिशा अपनाने का आग्रह किया।
वर्तमान सरकार जेनजी आंदोलन की पृष्ठभूमि में आई है, जिसने सुशासन और भ्रष्टाचार नियंत्रण की मांग की थी। इसी क्रम में प्रतिनिधि सभा चुनाव हुआ और राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी ने दो तिहाई बहुमत से मजबूत सरकार बनाई।
राष्ट्रिय समाजवादी पार्टी संसदीय दल के नेता वालेन्द्र शाह (बालेन) इस सरकार के प्रमुख हैं। सरकार के समक्ष नीतिगत सुधार के लिए कोई बाधा नहीं है।
डॉ. घिमिरे कहते हैं, ‘यदि सांसदों को फिर से योजना चयन का अधिकार दिया गया तो यह सुशासन के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। सरकार को इसे रोकने के लिए कदम उठाना चाहिए।’
नीति संबंधी मुद्दों में विपक्ष का उपेक्षा
बजट को लेकर व्यक्तिगत रूप से सांसदों से योजना जरूर मांगी गई है, लेकिन सरकार ने विपक्षी दलों के साथ सामूहिक चर्चा नहीं की है।
नेपाली कांग्रेस की मुख्य सचेतक बसना थापा ने कहा, ‘पहले विपक्षी दल के साथ औपचारिक चर्चा होती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।’
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विपक्ष के सुझावों से सरकार के फैसलों की समझ बढ़ेगी। ‘निर्णय सरकार करेगा लेकिन कैसे आगे बढ़ना है, इसे समझना जरूरी है,’ उन्होंने कहा।
प्रधानमंत्री बालेन ने व्यक्तिगत रूप से प्रदेशवार सांसदों से चर्चा की है।
१६ चैत को कोशी और कर्णाली प्रदेश के सांसदों से, १७ चैत को सुदूरपश्चिम से, १८ चैत को मधेस प्रदेश से, २० चैत को गण्डकी प्रदेश से और २३ चैत को लुम्बिनी प्रदेश के सांसदों से वार्ता की गई।
२ वैशाख को समानुपातिक सांसदों के साथ भी मौजूदा और अगली आर्थिक वर्ष की प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री बालेन ने सांसदों से मुख्यतः तीन बातें अनुरोध कीं-
पहला- इस वर्ष सरकारी सुधार पर सरकार का मुख्य फोकस रहेगा, उसी के अनुरूप सुझाव दें।
दूसरा- बजट आवंटन में असमानता न हो और रणनीतिक योजनाएं प्रस्तुत करें।
तीसरा- तत्काल समाधान योग्य समस्याओं के लिए समन्वय करें।
सांसदों की योजनाओं को प्रधानमंत्री एवं मन्त्रिपरिषद कार्यालय द्वारा संकलित कर प्राथमिकताओं के आधार पर बजट में शामिल किया जाता रहा है।
लेकिन एमाले के प्रमुख सचेतक ऐन महर के अनुसार ऐसे सुझाव और ‘कुछ योजनाएं भेजो’ के स्तर की मांगें जनता की वास्तविक आवश्यकता पूरी नहीं कर सकतीं।
‘हमें नीतिगत चर्चा चाहिए कि पूर्वाधार में कैसे सुधार लाया जाए, कौन सी गेम-चेंजिंग योजनाएं हो सकती हैं,’ उन्होंने पूछा। ‘शिक्षा, स्वास्थ्य, विद्युतीकरण में सरकार का काम कैसे आगे बढ़े, उसमें विपक्ष की भूमिका भी अहम है।’
महर ने कहा, ‘सरकार ने विपक्ष को पूरी तरह नजरअंदाज किया है। ‘तीन सड़क और तीन पुल योजना लाओ’ ये क्या सांसद होने का काम है?’ उन्होंने यह भी कहा, ‘निर्वाचन क्षेत्र की सभी समस्याएं न पूछकर केवल सड़क परियोजनाओं तक सीमित कर देना सांसदों का अपमान है।’
महेन्द्र राजमार्ग के अंतर्गत रौतहट के चन्द्रनिगाहपुर में बस की ठक्कर से 26 वर्षीय मोटरसाइकिल चालक शेख गुलाम की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई।
पुलिस ने दुर्घटना में शामिल बस और चालक मकवानपुर के लक्ष्मीभक्त ओझा को हिरासत में लिया है।
13 जेठ, रौतहट। महेन्द्र राजमार्ग के अंतर्गत रौतहट के चन्द्रनिगाहपुर में एक बस ने मोटरसाइकिल चालक को टक्कर मार दी, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
मृतक मोटरसाइकिल चालक की पहचान ना२५प १०८० नम्बर की मोटरसाइकिल पर सवार, चन्द्रपुर नगरपालिका-1 पौराइ के 26 वर्षीय शेख गुलाम के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, पूर्व से पश्चिम की ओर जा रही ना५ख ७२४८ नम्बर की यात्रुवाहक बस ने विपरीत दिशा से आ रही उक्त मोटरसाइकिल को बुधवार को टक्कर मारी।
बस चालक मकवानपुर के गढी गाउँपालिका-3 के लक्ष्मीभक्त ओझा तथा टक्कर देने वाली बस को इलाका प्रहरी कार्यालय चन्द्रनिगाहपुर ने नियंत्रित कर लिया है और मृतक शेख के शव को चन्द्रनिगाहपुर अस्पताल में रखवाया है, यह जानकारी जिला ट्रैफिक प्रहरी कार्यालय के ट्रैफिक प्रहरी निरीक्षक राजेन्द्र थापामगर ने दी है।
नेपाल के युवा तकनीकी उद्यमियों द्वारा विकसित ‘वायुदृष्टि’ को संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रमुख ६० विश्वव्यापी नवाचार सूची में सम्मिलित किया गया है। विश्वभर के ९०० से अधिक तकनीकी नवाचारों के बीच प्रतिस्पर्धा करते हुए यह नेपाली नवाचार उत्कृष्ट सूची में स्थान पाने में सफल रहा है। बोट्स इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से एआई तकनीक द्वारा वायु गुणवत्ता की वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। १३ जेठ, काठमाडौं। नेपाल के युवा तकनीकी उद्यमियों द्वारा विकसित ‘वायुदृष्टि’ संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रकाशित उत्कृष्ट विश्वव्यापी नवाचार सूची में शामिल किया गया है। जलवायु-प्रौद्योगिकी (क्लाइमेट-टेक) क्षेत्र में काम कर रहे इस नेपाली नवाचार को संयुक्त राष्ट्र संघ के आर्थिक और सामाजिक मामलों विभाग (यूएन डेसा) द्वारा तैयार ‘एसटीआई सोल्यूशंस बुक २०२६’ में स्थान दिया गया है।
विश्वभर से प्राप्त ९०० से अधिक तकनीकी और डिजिटल नवाचारों के बीच प्रतिस्पर्धा करते हुए ‘वायुदृष्टि’ उत्कृष्ट ६० नवाचारों की सूची में शामिल होने में सफल हुआ है। दिग्गज विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने में योगदान देने वाला, व्यावहारिक एवं वैश्विक स्तर पर विस्तार योग्य समाधान के रूप में इसे चयनित किया गया है, जो यूएन डेसा की आधिकारिक वेबसाइट पर उल्लेखित है। नेपाल में विकसित यह प्लेटफॉर्म वायु प्रदूषण की वैज्ञानिक एवं सहज जानकारी आम जनता तक पहुँचाने के उद्देश्य से बनाया गया है। यह कम लागत वाले वायु गुणवत्ता मापन उपकरण, उपग्रह डेटा, भूमि में लगे सेंसरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग कर वास्तविक समय में वायु गुणवत्ता की जानकारी देता है। ‘वायुदृष्टि’ बोत्स इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के अंतर्गत विकसित किया गया है। इसके संस्थापक नुवाकोट शिवपुरी गाउँपालिका-७ के सक्रिय पाण्डे तथा सहसंस्थापक श्रीषा पाण्डे हैं।
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