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लेखक: space4knews

फ्रिज में न रखने वाले ६ खाद्य पदार्थ

गर्मी के मौसम में खाना सुरक्षित रखने के लिए हर खाद्य पदार्थ को फ्रिज में रखना हमेशा उपयुक्त नहीं होता है। कुछ खाद्य वस्तुएं ठंड से जल्दी खराब या विषैले हो सकती हैं। गर्मी के समय घर में लाए गए खाने-पीने की वस्तुएं या सब्ज़ियों को फ्रिज में रखने की प्रवृत्ति होती है, लेकिन सभी खाद्य पदार्थों के लिए फ्रिज में रखना सही नहीं होता। कभी-कभी फ्रिज में रखने से खाद्य वस्तुएं शीघ्र खराब हो जाती हैं। अनुचित भंडारण से बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं, जो भोजन में विषाक्तता उत्पन्न कर सकते हैं। इसलिए यह जानना आवश्यक है कि कौन-कौन से खाद्य पदार्थ फ्रिज में नहीं रखने चाहिए।

आलू हर रसोई की अनिवार्य सब्ज़ी है, लेकिन इसे फ्रिज में रखना हानिकारक होता है। फ्रिज में रखने से अलू में मौजूद स्टार्च चीनी में बदल जाता है, जिससे इसके स्वाद और बनावट में परिवर्तन आ जाता है। आलू को सूखे, हवादार और अंधेरे स्थान में रखना चाहिए। प्याज की नमी उसे जल्दी नमीला और खराब बना देती है, इसलिए प्याज को खुली जगह में रखना ही बेहतर होता है। लहसुन को भी फ्रिज में रखने से इसके स्वाद में बदलाव आ जाता है। इसे घर के अंदर ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां नमी न हो।

केला एक जल्दी खराब होने वाला फल है जिसे कभी भी फ्रिज में नहीं रखना चाहिए। फ्रिज में रखने से केले का छिलका काला हो जाता है और फल खराब हो जाता है। शहद को भी फ्रिज में रखने से यह जम जाता है और प्रयोग में कठिनाई होती है। शहद को हमेशा कमरे के तापमान पर बड़े बंद कंटेनर में रखना चाहिए। टमाटर को ठंडे स्थान पर रखना ठीक नहीं होता क्योंकि ठंडा उसे स्वाद देने वाले एंजाइमों को नष्ट कर देता है, जिससे इसकी प्राकृतिक खुशबू और ताजगी कम हो जाती है।

विश्व कप 2026 की टाइटल को छीनने वाली पांच प्रमुख द्वंद्वियाँ

समाचार सारांश

  • विश्व कप 2026 के फाइनल में सोमवार सुबह अर्जेंटीना और स्पेन एक दूसरे के सामने उपाधि के लिए मुकाबला करेंगे।
  • लियोनेल मेसी की आक्रमण क्षमता को रोकने में स्पेन के लापोर्टे, कुबार्सी और रोड्री की रक्षा टोली की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
  • खेल का परिणाम निर्धारित करने में दोनों टीमों के मिडफील्ड और गोलकीपर के व्यक्तिगत प्रदर्शन निर्णायक होंगे।

2 साउन, काठमाडौं। विश्व कप 2026 की उपाधि सोमवार सुबह अर्जेंटीना और स्पेन में से एक की झोली में जाएगी।

इन दो बेहतरीन टीमों का मुकाबला केवल रणनीति और टीम खेल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मैदान पर कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तिगत द्वंद्व भी खेल की दिशा तय करेंगे।

फाइनल में उपाधि के लिए टक्कर में पांच प्रमुख द्वंद्वियां जो बड़ी भूमिका निभाने वाली हैं, उनके विषय में यहां चर्चा की गई है।

मेसी बनाम स्पेन की डिफेंस

39 वर्षीय अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी को विश्व कप के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। उन्होंने अब तक 8 गोल किए हैं और गोल्डन बुट की दौड़ में आगे हैं, साथ ही 4 असिस्ट भी दे चुके हैं।

प्रतियोगिता के इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले मेसी ने इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भी दो असिस्ट किये थे, जिससे खेल की दिशा पूरी तरह से बदल गई।

स्पेन के लिए मेसी को रोकना सबसे बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए आयमेरिक लापोर्टे, युवा सेंटर-बैक पाउ कुबार्सी और कप्तान रोड्री की सामूहिक भूमिका निर्णायक होगी।

स्पेन ने इस विश्व कप में सात मैचों में केवल एक गोल छोड़ा है, जो उनकी रक्षा प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।

रोड्री बनाम एन्जो फर्नांडीज

विश्व फुटबॉल के दो बेहतरीन मिडफील्डर आमने-सामने होंगे।

स्पेन के कप्तान रोड्री ने इस प्रतियोगिता में अब तक सबसे ज्यादा 648 सफल पास पूरे किए हैं। उनकी पासिंग सफलता दर 93 प्रतिशत है। वे सबसे लंबी दूरी के पास भी देते हैं। खेल की गति नियंत्रित करने और विरोधी हमले को रोकने की जिम्मेदारी उन्हीं की कंधों पर है।

दूसरी ओर अर्जेंटीना के एन्जो फर्नांडीज ने विश्व कप में अपनी क्षमता साबित की है। उन्होंने टीम के लिए सबसे ज्यादा 43 बार गेंद वापस छीन ली है। नॉकआउट चरण में मिस्र और इंग्लैंड के खिलाफ निर्णायक गोल कर टीम को फाइनल तक पहुंचाने में बड़ा योगदान दिया है।

लामिन यमाल बनाम अर्जेंटीना की रक्षा

स्पेन के 19 वर्षीय स्टार लामिन यमाल चोट से वापसी के बाद नॉकआउट चरण में शानदार फॉर्म में हैं। फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने पेनाल्टी दिलाई और लगातार दबाव बनाए रखा।

यमाल को रोकने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से बाएं फुलबैक निकोलस टालियाफिको की होगी। विश्व कप जित चुके अनुभवी टालियाफिको एक-एक करके डिफेंस में बेहद प्रभावशाली माने जाते हैं।

जरूरत पड़ने पर नाहुएल मोलीना को भी यमाल को डबल मार्किंग करनी पड़ सकती है।

अल्वारेज–लाउतारो बनाम स्पेन के सेंटर-बैक

अर्जेंटीना के सबसे बड़ी आक्रमण करने वाली जोड़ी में से एक ये हैं।

जूलियन अल्वारेज की अथक दौड़, प्रेसिंग और खाली जगह बनाने की क्षमता तथा सुपर सब के रूप में लगातार निर्णायक बने लाउतारो मार्टिनेज स्पेन के लिए बड़ी चुनौती हैं। इंग्लैंड के खिलाफ भी लाउतारो ने बेंच से आकर विजयी गोल किया था।

इन्हें रोकने की जिम्मेदारी लापोर्टे और कुबार्सी की होगी, जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन तालमेल दिखाया है। स्पेन ने सात मैचों में केवल एक गोल छोड़ा है, इसका मुख्य कारण यह सेंटर-बैक जोड़ी है।

एमिलियानो मार्टिनेज बनाम उनाई सिमोन

फाइनल का एक और निर्णायक द्वंद्व गोल पोस्ट के सामने होगा।

अर्जेंटीना के एमिलियानो ‘डिबु’ मार्टिनेज विश्व फुटबॉल के बेहतरीन गोलकीपरों में से एक हैं। विश्व कप, कोपा अमेरिका और पेनाल्टी शूटआउट में उनके प्रभावशाली प्रदर्शन ने उन्हें बड़े मैचों के विशेषज्ञ के रूप में स्थापित किया है।

स्पेन के उनाई सिमोन भी हाल के वर्षों में ला लीगा के सबसे भरोसेमंद गोलकीपरों में से एक बन चुके हैं। उनकी बेहतरीन पोजिशनिंग, गेंद वितरण और महत्वपूर्ण बचावों की वजह से स्पेन को पूरे टूर्नामेंट में केवल एक गोल हासिल हुआ है।

यदि मैच अतिरिक्त समय या पेनाल्टी शूटआउट तक जाता है तो इन दोनों गोलकीपरों के बीच बड़ा बचाव करने वाला ही विश्व कप की उपाधि का निर्धारण कर सकता है।

वर्ल्ड कप 2026: फाइनल से पहले मेस्सी और यमाल की ‘दुर्लभ’ तस्वीर

वीडियो कैप्शन शुरू हो रहा है,

वर्ल्ड कप फाइनल से पहले चर्चा में आया मेस्सी और यमाल की ‘दुर्लभ’ तस्वीर

सन् 2007 में ली गई यह तस्वीर आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है।

फुटबॉल दुनिया के सुपरस्टार लियोनेल मेस्सी और युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ी लैमिन यमाल की यह दुर्लभ तस्वीर चर्चा में आने का कारण भी खास है।

आज से 19 साल पहले जब यह तस्वीर खींची गई थी, तब मेस्सी ने शायद उस छोटे से बच्चे के साथ फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर कभी आमना-सामना करने का कल्पना भी नहीं की होगी।

लेकिन आज रात होने वाले विश्व कप फुटबॉल फाइनल में एक तरफ मेस्सी होंगे, जो अर्जेंटीना को लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनाने की कोशिश में हैं, और दूसरी तरफ यमाल होंगे, जो स्पेन को विश्व विजेता बनाने के मौके का सामना करेंगे।

सन् 2007 में 20 वर्षीय मेस्सी ‘ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम’ यानी ‘गोट’ बनने की राह पर थे और उसी समय मेस्सी ने यूनिसेफ के चैरिटी कैलेंडर के लिए यह फोटो सेशन कराया था।

तब बार्सिलोना क्लब से जुड़े मेस्सी ने क्याम्प नू स्टेडियम के ड्रेसिंग रूम में उसी शिशु यमाल के साथ यह तस्वीर खिंचवाई थी।

फोटो सेशन से पहले ‘बार्सिलोना खिलाड़ी के साथ तस्वीर खिंचवाने का मौका’ के लिए यमाल के परिवार ने भी नामांकन कराया था।

लॉटरी के जरिए यह अवसर यमाल के परिवार को मिला, जिसके बाद मेस्सी ने प्लास्टिक के बाथटब में रखे शिशु के साथ तस्वीर खिंचवाई, और फोटोग्राफर जॉन मर्फर्ट ने ये तस्वीरें लीं।

वर्तमान में मेस्सी 39 वर्ष के हो चुके हैं और यमाल की उम्र 19 साल है। मेस्सी कई बार यमाल को ‘फुटबॉल का भविष्य’ कहा है और अपने उत्तराधिकारी के रूप में मानते हैं।

जब यह तस्वीर खिंचवाई गई थी, यमाल कुछ महीनों का शिशु थे, जो अब अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में स्पेन के एक प्रमुख और प्रभावशाली खिलाड़ी हैं।

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मेसी से यमाल तक: फीफा विश्वकप फाइनल के प्रमुख खिलाड़ी

फीफा विश्वकप के 23वें संस्करण के फाइनल में पूर्व चैंपियन अर्जेंटीना और स्पेन सोमवार सुबह ट्रॉफी के लिए आमने-सामने होंगे। अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी लगातार दूसरी बार विश्वकप जीतकर अपने ऐतिहासिक करियर का एक सुखद अंत करना चाहते हैं। वहीं स्पेन के 18 वर्षीय युवा प्रतिभा लैमिन यमाल और कप्तान रोड्री के प्रदर्शन से फाइनल के नतीजे पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा, ऐसी उम्मीद है।

3 साउन, काठमांडू – फीफा विश्वकप सोमवार सुबह अपने 23वें संस्करण के विजेता की घोषणा करने जा रहा है। ट्रॉफी के लिए दो बार के पूर्व विजेता टीम स्पेन और अर्जेंटीना आमने-सामने होंगी। फाइनल केवल दो टीमों के बीच मुकाबला नहीं है, बल्कि विश्व फुटबॉल के कुछ बेहतरीन और प्रभावशाली खिलाड़ियों के बीच भी प्रतिस्पर्धा होगी। एक ओर करियर के आखिरी विश्वकप में खेल रहे लियोनेल मेसी हैं, तो दूसरी ओर विश्व फुटबॉल के नए सुपरस्टार के रूप में उभरे लैमिन यमाल। इनके अलावा दोनों टीमों में कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जो खेल का रुख बदल सकते हैं।

लियोनेल मेसी (अर्जेंटीना)
सबसे अधिक फोकस स्वाभाविक रूप से अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी पर होगा। 39 वर्षीय मेसी इस विश्वकप में अब तक 8 गोल कर चुके हैं और गोल्डन बूट दौड़ में दूसरे स्थान पर हैं। रविवार सुबह हुए तीसरे स्थान के मैच में किलियन एमबाप्पे ने दो गोल किए और गोल्डन बूट की दौड़ में आगे बढ़ गए। मेसी ने इस टूर्नामेंट में चार असिस्ट भी दिए हैं। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में दो असिस्ट कर उन्होंने टीम की वापसी में निर्णायक भूमिका निभाई। मेसी विश्वकप इतिहास के सर्वाधिक गोलकर्ता, सर्वाधिक मैच खेलने वाले और सर्वाधिक असिस्ट करने वाले खिलाड़ी हैं। अब उनका लक्ष्य लगातार दूसरी बार विश्वकप जीतकर अपने महान करियर का ऐतिहासिक अंत करना है। स्पेन की मजबूत रक्षा पंक्ति मेसी को कितना कंट्रोल कर पाती है, यह फाइनल का सबसे बड़ा प्रश्न होगा।

लैमिन यमाल (स्पेन)
स्पेन के लिए सबसे अधिक ध्यान 18 वर्षीय लैमिन यमाल पर होगा। विश्व फुटबॉल के भविष्य के रूप में देखे जाने वाले यमाल ने पूरे टूर्नामेंट में अपनी गति, ड्रिब्लिंग और रचनात्मक खेल से विरोधी रक्षा पंक्ति को दबाव में रखा है। फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने पेनाल्टी दिलाया और दाहिने विंग से बनाए गए अवसर स्पेन के आक्रमण को और मजबूत बनाया। यदि मेसी एक युग के प्रतीक हैं, तो यमाल अगले युग के शुरुआत करने वाले खिलाड़ी माने जा रहे हैं। विश्वकप फाइनल में चमक कर वह फुटबॉल इतिहास के सबसे बड़े मंच पर अपनी स्थिति और मजबूत करेंगे।

रोड्री (स्पेन)
स्पेन के कप्तान रोड्री टीम के मुख्य नियंत्रक हैं। वह टूर्नामेंट में सबसे अधिक सफल पास देने वाले खिलाड़ियों में शीर्ष पर रहे हैं और स्पेन के खेल की गति नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। आक्रमण और रक्षा के बीच कड़ी के रूप में रोड्री की भूमिका बेहद जरूरी है। यदि वह मध्य क्षेत्र में नियंत्रण बनाए रख पाते हैं तो स्पेन खेल की लय अपने पक्ष में कर सकता है।

एंजो फर्नांडीज (अर्जेंटीना)
रोड्री को चुनौती देने की जिम्मेदारी एंजो फर्नांडीज के कंधों पर है। कतर 2022 के श्रेष्ठ युवा खिलाड़ी एंजो ने इस विश्वकप में भी लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ डिबक्स के बाहर से शानदार लंबी दूरी का गोल कर उन्होंने अर्जेंटीना की वापसी का आधार बनाया।

जूलियन अल्वारेज (अर्जेंटीना)
मेसी की छाया में होने के बावजूद, जूलियन अल्वारेज अर्जेंटीना के सबसे खतरनाक हथियारों में से एक हैं। उनकी अथक दौड़, दबाव बनाने की क्षमता और खाली स्थान खोजने की प्रवृत्ति विरोधी डिफेंडरों पर निरंतर दबाव डालती है।

डैनी ओल्मो (स्पेन)
स्पेन के आक्रमण का एक और मजबूत आधार डैनी ओल्मो हैं। मध्य क्षेत्र और आक्रमण के बीच पुल का काम करने वाले ओल्मो ने पूरे टूर्नामेंट में निर्णायक पास और गोल बनाने के साथ विरोधी रक्षा की कमजोर जगह खोजने का काम बखूबी किया है।

मेसी से यमाल तक: फीफा विश्व कप फाइनल के बेहतरीन खिलाड़ियों पर एक नजर

समाचार सारांश

समीक्षित सामग्री।

  • फीफा विश्व कप के 23वें संस्करण के फाइनल में पूर्व विजेता अर्जेंटीना और स्पेन सोमवार सुबह ट्रॉफी के लिए आमने-सामने होंगे।
  • अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी लगातार दूसरी बार विश्व कप जीतकर अपने ऐतिहासिक करियर का शानदार अंत करने का लक्ष्य रखते हैं।
  • स्पेन के 18 वर्षीय युवा सितारे लामिन यमाल और कप्तान रोड्री का प्रदर्शन फाइनल के परिणाम को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है।

3 साउन, काठमांडू – फीफा विश्व कप सोमवार सुबह 23वें संस्करण का विजेता घोषित करेगा। ट्रॉफी के लिए दो पूर्व विजेता टीम, स्पेन और अर्जेंटीना आमने-सामने हैं।

फाइनल में अर्जेंटीना और स्पेन के बीच मुकाबला केवल दो टीमों के बीच की प्रतिस्पर्धा ही नहीं, बल्कि विश्व फुटबॉल के कुछ बेहतरीन और प्रभावशाली खिलाड़ियों के बीच की टक्कर भी होगी।

एक ओर करियर के आखिरी विश्व कप से खेल रहे लियोनेल मेसी हैं, वहीं दूसरी ओर विश्व फुटबॉल के नए सुपरस्टार के रूप में उभरते लामिन यमाल हैं।

इन दोनों के अलावा भी दोनों टीमों में ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो मैच के रुख को बदल सकते हैं।

फाइनल में चमकने वाले संभावित खिलाड़ियों पर हमने यहां चर्चा की है।

लियोनेल मेसी (अर्जेंटीना)

स्वाभाविक रूप से सबसे अधिक ध्यान अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी पर रहेगा।

39 वर्षीय मेसी ने इस विश्व कप में अबतक आठ गोल किए हैं और गोल्डन बूट की दौड़ में दूसरे स्थान पर हैं। रविवार सुबह हुए तीसरे स्थान के मैच में किलियन एमबाप्पे ने दो गोल कर गोल्डन बूट की दौड़ में आगे बढ़ गए थे।

मेसी ने टूर्नामेंट में चार असिस्ट भी किए हैं। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में दो असिस्ट देकर उन्होंने अर्जेंटीना की वापसी में निर्णायक भूमिका निभाई थी।

मेसी पहले ही विश्व कप इतिहास के सर्वाधिक गोल करने वाले, सबसे अधिक मैच खेलने वाले और सबसे ज्यादा असिस्ट देने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं। अब उनका लक्ष्य लगातार दूसरी बार विश्व कप जीतकर अपने महान करियर का ऐतिहासिक अंत करना है।

स्पेन की मजबूत रक्षा पंक्ति मेसी को कितना नियंत्रित कर पाती है, यह फाइनल का सबसे बड़ा सवाल होगा।

लामिन यमाल (स्पेन)

स्पेन के लिए सबसे ज्यादा ध्यान 18 साल के युवा लामिन यमाल पर होगा।

विश्व फुटबॉल के भविष्य के रूप में देखे जाने वाले यमाल ने पूरे प्रतियोगिता में अपनी गति, ड्रिब्लिंग और रचनात्मक खेल से विपक्षी रक्षा को दबाव में रखा है।

फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने पेनाल्टी दिलाई थी, साथ ही अपने दाहिने विंग से बनाए गए मौके स्पेन के आक्रमण को और ताकतवर बनाते रहे।

यदि मेसी एक युग के प्रतीक हैं तो यमाल नए युग की शुरुआत करने वाले खिलाड़ी माने जा रहे हैं।

विश्व कप के फाइनल में यदि वे शानदार प्रदर्शन करते हैं तो फुटबॉल इतिहास के सबसे बड़े मंच पर अपनी जगह और भी मजबूत कर लेंगे।

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रोड्री (स्पेन)

स्पेन के कप्तान रोड्री टीम के मुख्य नियंत्रणकर्ता हैं।

वे पूरे टूर्नामेंट में सबसे अधिक सफल पास देने वालों में शीर्ष पर रहे हैं और स्पेन की खेल गति को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। डिफेंस और आक्रमण को जोड़ने वाली कड़ी के रूप में रोड्री की भूमिका बेहद जरूरी होगी।

यदि वे मध्य मैदान पर नियंत्रण बनाए रखने में सफल होते हैं तो स्पेन अपनी मैच की लय भी अपने पक्ष में ला सकता है।

एन्जो फर्नांडीज (अर्जेंटीना)

रोड्री को चुनौती देने की जिम्मेदारी एन्जो फर्नांडीज पर होगी।

कतार 2022 के सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ी एन्जो ने इस विश्व कप में भी लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ डिबक्स के बाहर से शानदार लॉन्ग रेंज गोल कर अर्जेंटीना की वापसी की नींव डाली थी। इससे पहले मिस्र के खिलाफ मैच में भी उन्होंने उत्कृष्ट हेडर गोल कर टीम को चोट के समय बढ़त दिलाई थी।

मध्य मैदान में रोड्री और एन्जो के बीच मुकाबला काफी हद तक मैच का नियंत्रण किसके हाथ में जाएगा, यह तय करेगा।

जूलियन अल्वारेज़ (अर्जेंटीना)

मेसी की छाया में होने के बावजूद, जूलियन अल्वारेज़ अर्जेंटीना के सबसे खतरनाक हथियारों में से एक हैं।

उनकी अथक दौड़, प्रेसिंग क्षमता और खाली स्थान खोजने की प्रवृत्ति विपक्षी डिफेंडरों के लिए लगातार दबाव बनाती है।

मेसी द्वारा बनाए गए मौके को गोल में बदलने की जिम्मेदारी अधिकतर अल्वारेज़ के कंधों पर होगी।

डानी ओल्मो (स्पेन)

स्पेन के आक्रमण की एक और प्रमुख कड़ी डानी ओल्मो हैं।

मिडफील्ड और आक्रमण के बीच पुल का काम करने वाले ओल्मो ने पूरे टूर्नामेंट में निर्णायक पास, गोल के मौके बनाने और विपक्षी रक्षा में खाली स्थान तलाशने का काम बखूबी किया है।

यदि अर्जेंटीना यमाल को रोकने में सफल रहता है, तब भी ओल्मो के पास खेल का रुख बदलने की क्षमता है। वे मिकेल ओयरजाबाल को निर्णायक पास देने में सक्षम दिख रहे हैं।

द्वि महाद्वीपीय चैंपियन का विश्वकप विजेता बनने की प्रतिस्पर्धा

अनुभवी लियोनल मेसी अपने ऐतिहासिक करियर में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ने का प्रयास करेंगे जबकि १८ वर्षीय लामीन यमाल विश्व फुटबॉल के नए युग की शुरुआत करने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेंगे। फीफा विश्वकप २०२६ का फाइनल मैच सोमवार सुबह अर्जेंटीना और स्पेन के बीच न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में खेला जाएगा। लगातार दूसरी बार विश्वकप जीतने के लक्ष्य से प्रस्तुत अर्जेंटीना और १६ वर्षों के बाद खिताब की तलाश में मौजूद स्पेन के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होने की उम्मीद है। लियोनल मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना और युवा खिलाड़ियों से सुसज्जित स्पेन के लिए यह मुकाबला फुटबॉल के भविष्य का निर्धारण करेगा। ३ साउन, काठमाडौं। ४८ टीमें, १०४ मैच और अंत में एक विजेता। ९६ वर्षों के विश्वकप इतिहास का २३वां संस्करण ऐसे मोड़ पर पहुंचा है जहाँ नया इतिहास बनेगा। एक टीम लगातार दूसरा विश्वकप जीतकर दुर्लभ उपलब्धि हासिल करने को तैयार है, जबकि दूसरी टीम १६ वर्षों बाद विश्व फुटबॉल के सर्वोच्च मंच पर लौटने का सपना लेकर मैदान में उतरेगी।

अर्जेंटीना आठवीं बार विश्वकप फाइनल में खेल रहा है, और इसका केंद्र बिंदु अभी भी लियोनल मेसी हैं। दूसरी ओर, युवा जोश, तीव्र आक्रमण और आकर्षक खेल शैली से विश्व को प्रभावित करने वाला स्पेन है, जो अपनी दूसरी विश्वकप ट्रॉफी जीतने का अवसर तलाश रहा है। अमेरिका के न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी स्टेडियम में सोमवार सुबह होने वाला फीफा विश्वकप २०२६ का फाइनल सिर्फ दो टीमों के बीच उपाधि की टक्कर नहीं, बल्कि दो पीढ़ियों, दो फुटबॉल शैलियों और विभिन्न खेल दर्शन के बीच निर्णायक संघर्ष होगा। अनुभवी मेसी अपने करियर में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ने का प्रयास करेंगे, जबकि १८ वर्षीय लामीन यमाल विश्व फुटबॉल के नए युग की शुरुआत करने की आकांक्षा लिए हैं।

ग्रुप चरण से ही दोनों टीमें बिना किसी हार के अपनी उपाधि का दावा कर चुकी हैं। अर्जेंटीना ने कठिन नकआउट दौर पार करते हुए लगातार दूसरी बार फाइनल में प्रवेश किया है, जबकि स्पेन ने नियंत्रणयुक्त आक्रामक फुटबॉल खेलकर प्रतियोगिता की सबसे प्रभावशाली टीम के रूप में अपनी पहचान बनाई है। अब शेष है केवल ९० मिनट या आवश्यक होने पर अतिरिक्त समय, जिसके बाद विश्वकप फुटबॉल का २३वां संस्करण अपना चैंपियन घोषित करेगा।

स्पेन की प्रभावशाली राह: यूरोपीय चैंपियन स्पेन ने सेमीफाइनल में उपाधि के मजबूत दावेदार फ्रांस को पूरी तरह नियंत्रण में रखते हुए फाइनल की राह पकड़ी। लंबे समय तक गेंद अपने नियंत्रण में रखने की शैली और सटीक फिनिशिंग के कारण स्पेन को प्रतियोगिता की सबसे संतुलित टीम माना जाता है।

स्पेन ने ग्रुप ‘एच’ की शुरुआत सहज नहीं की। केप वर्डे के खिलाफ बिना गोल के ड्रॉ खेलने के बाद, उसने सऊदी अरब को ४-० से हराया और उरुग्वे के खिलाफ १-० से जीत दर्ज करते हुए ग्रुप विजेता बनाया। फिर अंतिम ३२ में ऑस्ट्रिया को ३-० से हराया, अंतिम १६ में पुर्तगाल और क्वार्टरफाइनल में बेल्जियम को मिकेल मेरिनो के अंतिम समय के निर्णायक गोल से पराजित किया। प्रतियोगिता में स्पेन ने केवल एक गोल स्वीकार किया है। अब २०१० के बाद पहली बार विश्वकप फाइनल में खेलते हुए स्पेन दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का लक्ष्य रखता है।

अर्जेंटीना का सफर स्पेन के मुकाबले कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण रहा है। मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना ने ग्रुप चरण के तीनों मैच जीते। अल्जीरिया के खिलाफ मेसी का हेट्रिक, ऑस्ट्रिया के खिलाफ दो गोल और जॉर्डन के खिलाफ उत्कृष्ट प्रदर्शन ने ग्रुप चरण को आसान बनाया। लेकिन प्रत्येक नकआउट दौर में अर्जेंटीना को संघर्ष करना पड़ा। अंतिम ३२ में केप वर्डे को अतिरिक्त समय में ३-२ से हराया, अंतिम १६ में मिस्र के खिलाफ ७९वें मिनट तक २-० से पिछड़ने के बाद एक ऐतिहासिक वापसी की। क्वार्टरफाइनल में स्विट्जरलैंड को अतिरिक्त समय में हराया और सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ भी वापसी करते हुए फाइनल में जगह बनाई।

अर्जेंटीना के लिए मेसी के साथ जुलियन आल्वारेज, लाउतारो मार्टिनेज, एन्जो फर्नांडीज और गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज जैसे मुख्य खिलाड़ी होंगे। स्पेन के युवा सितारे लामीन यमाल, कप्तान रोड्री, डैनी ओल्मो और सेंटर बैक जोड़ी आयमेरिक लापोर्टे-पाउ कुबार्सी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

स्पेन की संभावित एगारह: सिमोन; पेड्रो पोरो, आयमेरिक लापोर्टे, पाउ कुबार्सी, मार्क कुकुरेला; रोड्री, फाबियन रुइज; लामीन यमाल, डैनी ओल्मो, एलेक्स बाएना; मिकेल ओयरज़ाबाल।
अर्जेंटीना की संभावित एगारह: एमिलियानो मार्टिनेज; नाहुएल मोलिना, क्रिस्टियन रोमेरो, लिसान्द्रो मार्टिनेज, निकोलस टालियाफिको; लिआन्ड्रो पारेडेस, एलेक्सिस मैक एलिस्टर, एन्जो फर्नांडीज, जुलीयानो सिमियोन; लियोनेल मेसी, जुलियन आल्वारेज।

मैच: स्पेन बनाम अर्जेंटीना
फाइनल तिथि और समय: ४ साउन सुबह १२:४५ बजे
स्थान: न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम
प्रत्यक्ष प्रसारण: हिमालय स्पोर्ट्स

इरानी हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत, जॉर्डन में एक सैनिक लापता

अमेरिकी सैनिक

तस्बिर स्रोत, Getty Images

शुक्रवार को जॉर्डन में हुए ईरानी बैलैस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई और एक सैनिक अभी भी लापता है, सैन्य अधिकारियों ने बताया।

यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकम) ने सूचना दी है कि चार अमेरिकी सैनिकों को उपचार के लिए जॉर्डन के अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है और इनमें से कुछ को डिस्चार्ज भी किया जा चुका है। सामान्य चोटें पाने वाले अन्य सैनिक अपनी जिम्मेदारियों पर लौट चुके हैं।

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने मारे गए सैनिकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। घटना की परिस्थितियों और स्थान के बारे में भी कोई जानकारी प्रदान नहीं की गई है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश पर शनिवार रात अमेरिका ने ईरान के खिलाफ हवाई हमले की नई लहर शुरू की, सेंटकम ने बताया।

लगातार आठवीं रात होर्मुज जलडमरूमार्ग में तस्करी को बाधित करने वाले ईरानी क्षमता को कमजोर करना इस हवाई अभियान का मुख्य उद्देश्य है, सेंटकम के बयान में कहा गया है।

नेपाल में विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने के सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष

विदेशी मुद्रा गंदे हुए एक महिला का हाथ

तस्वीर स्रोत, EPA-EFE/REX/Shutterstock

तस्वीर का कैप्शन, नेपाल में विदेशी विनिमय भंडार अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है

नेपाल में अब तक सबसे अधिक मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार और रेमिटेंस यानी विप्रेषण का प्रवाह हुआ है, जो तथ्यांक नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा प्रकाशित किया गया है।

केंद्रीय बैंक के अनुसार, गत जेठ महीने के अंत तक विदेशी विनिमय भंडार 37 खरब 55 अरब रुपये से अधिक हो गया है।

उस अवधि में विप्रेषण प्रवाह 38.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 21 खरब 20 अरब रुपये से अधिक पहुंचा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्ष हैं।

वे बताते हैं कि जब तक देश में बड़े परियोजनाएं आगे नहीं बढ़तीं, तब तक विदेशी मुद्रा का भंडार खासा कम होने की संभावना नहीं है।

यूक्रेन-रूस युद्ध: रूस के पक्ष में लड़ते हुए जान गंवाने वाले विदेशी सैनिकों में नेपालीों की संख्या उल्लेखनीय

काठमांडू में 24 फरवरी 2024 को आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान यूक्रेन युद्ध में जान गंवाने वाले नेपालीों की तस्वीर अंकित बैनर पर माल्यार्पित करते मृतक के परिवारजन

तस्वीर स्रोत, NurPhoto via Getty Images

तस्वीर का कैप्शन, परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार रूसी सेना में भर्ती हुए 131 नेपाली सैनिकों की मृत्यु की सूचना नेपाल सरकार को प्राप्त हुई है

रूसी सेना में भर्ती होकर यूक्रेन युद्ध में जान गंवाने वाले विदेशी सैनिकों में नेपालीों की संख्या तत्कालीन सोवियत संघ के नागरिकों के बाद सबसे अधिक बताई गई है।

नेपाल के परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में बताया कि असार महीने के तीसरे सप्ताह तक रूसी सेना में भर्ती होकर जान गंवाने वाले 131 नेपाली सैनिकों की मृत्यु की पुष्टि नेपाल सरकार ने कर दी है। परराष्ट्र मंत्रालय ने यह संख्या स्थिर रहने की जानकारी दी है।

विभिन्न स्रोतों के माध्यम से तथ्य जुटाकर इस संबंध में तथ्य संग्रह किया गया है।

मृतकों की सूची में अंतिम जुड़ा नेपाली का विवरण नेपाल सरकार को 15 मई को प्राप्त हुआ था। वह व्यक्ति सुर्खेत जिले का स्थायी निवासी था, जैसा परराष्ट्र मंत्रालय के एक स्रोत ने पुष्टि की।

राष्ट्रीय सभा में दो सप्ताह पहले दिए गए अभिवेदन में परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि रूसी सेना में भर्ती 131 नेपाली सैनिकों की मृत्यु हुई, 95 लोग घायल या लापता हैं और 9 यूक्रेन के नियंत्रण में हैं।

इंग्लैंड ने तीसरे मिनट में बनाया बढ़त

मियामी स्टेडियम में तीसरे स्थान के लिए जारी मैच में इंग्लैंड ने तीसरे मिनट में बढ़त हासिल कर ली है। फीफा विश्व कप 2026 के तीसरे स्थान के मुकाबले में इंग्लैंड ने फ्रांस के खिलाफ शुरुआती बढ़त बनाई है। मियामी स्टेडियम में खेले गए इस मैच में तीसरे मिनट में ही इंग्लैंड ने गोल कर अपनी बढ़त बरकरार रखी है। 3 साउन, काठमांडू। खेल की शुरुआत में ही डेक्लान राइस ने गोल कर इंग्लैंड को बढ़त दिलाई है।

१८ मिनट में इंग्लैंड ने फ्रांस के खिलाफ दो गोलों से बढ़त बनाई

मियामी स्टेडियम में हो रहे तीसरे स्थान के मुकाबले में, इंग्लैंड ने १८वें मिनट में दो गोलों की बढ़त हासिल की है। फीफा विश्व कप २०२६ के तीसरे स्थान के लिए निर्धारित इस मैच में इंग्लैंड ने फ्रांस के खिलाफ बढ़त लेकर खेल को आगे बढ़ाया है। मैच के तीसरे मिनट में डेक्लान राय ने गोल कर इंग्लैंड को पहली बढ़त दिलाई थी। १८वें मिनट में एंजी कोन्शा ने हेडर के जरिए गोल करते हुए टीम की बढ़त दोगुनी कर दी। ३ साउन, काठमाडौं। मियामी स्टेडियम में जारी इस मुकाबले में इंग्लैंड ने फ्रांस के खिलाफ दो गोलों से बढ़त बनाए रखी है। मैच की शुरुआत में, तीसरे मिनट में डेक्लान राय ने गोल कर इंग्लैंड को पहली बढ़त दिलाई, जबकि १८वें मिनट में एंजी कोन्शा ने हेडर गोल कर टीम की बढ़त दोगुनी की।

क्रिकेटर सिद्धान्त लोहनी ने किया संन्यास का ऐलान

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा गरिएको।

  • नेपाली क्रिकेटर सिद्धान्त लोहनी ने लगातार चोट और सात बार घुटने की सर्जरी के बाद पेशेवर क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की है।
  • उन्होंने बताया कि उन्हें बाएं घुटने का पूर्ण प्रत्यारोपण कराना पड़ा, जिसके कारण उनका खेल जीवन समाप्त होना पड़ा।
  • उन्होंने कहा, ‘संन्यास का अर्थ क्रिकेट से विदाई नहीं है, मैं एक नई भूमिका में क्रिकेट में वापस आने की आशा रखता हूँ’ और भविष्य में सक्रिय रहने का संकल्प लिया है।

3 साउन, काठमांडू। नेपाली क्रिकेटर सिद्धान्त लोहनी ने पेशेवर क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की है।

शनिवार को सोशल मीडिया के माध्यम से संन्यास की घोषणा करते हुए उन्होंने बताया कि सात बार घुटने की सर्जरी करानी पड़ी और चोटों के कारण आखिरकार उन्हें क्रिकेट से विदा होना पड़ा।

सन् 2015 में नेपाली राष्ट्रीय टीम से पदार्पण करने वाले लोहनी ने ठीक 11 वर्ष बाद इसी दिन अंतरराष्ट्रीय और पेशेवर क्रिकेट से संन्यास लिया है।

उन्होंने बताया कि घुटने की चोट के बाद वापसी के कई प्रयास करने के बाद भी सर्जरी के बाद संक्रमण की वजह से बाएं घुटने का पूर्ण प्रत्यारोपण कराना पड़ा।

‘‘मैंने कई सर्जरी के बाद मैदान में वापस आने की कोशिश की, लेकिन संक्रमण से स्थिति और बिगड़ी और अंततः बाएं घुटने को पूरी तरह बदलना पड़ा। अब मेरा पैर पहले जैसा नहीं रहेगा और जीवनभर घुटना मोड़ने में भी सीमाएं रहेंगी,’’ उन्होंने लिखा।

सन् 2023 में जनकपुर में हुए महेन्द्र नारायण निधि टी-20 राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कोशी प्रदेश के कप्तान थे, जहां गंडकी प्रदेश के खिलाफ फील्डिंग के दौरान घायल हो गए थे।

सन् 2015 के जुलाई में आईसीसी टी20 विश्व कप क्वालिफायर के तहत जर्सी के खिलाफ खेलते हुए नेपाली सीनियर टीम में उनका पदार्पण हुआ था। तब उन्होंने 16 गेंदों पर 2 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 27 रन बनाए थे।

पारस खड्के के हाथ से उद्घाटन कैप स्वीकार करते हुए

उस मैच में नेपाल 7 विकेट से हारा, लेकिन सिद्धान्त सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी थे। उनका हेलिकॉप्टर शॉट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत चर्चा में आया था।

पदार्पण मैच में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद उनका अंतरराष्ट्रीय करियर विस्तारित नहीं हो सका।

सिद्धान्त ने साल 2018 में एवरेस्ट प्रीमियर लिग और 2023 जनवरी में नेपाल टी20 लीग में भी हिस्सा लिया था। वह जून 2023 में घायलों के बाद फिर से खेल में लौट नहीं सके।

उन्होंने स्वीकार किया कि पेशेवर क्रिकेट में वापसी की अब कोई संभावना नहीं है और वर्तमान में चलने में सक्षम होने के लिए भगवान के आभारी हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इतनी कम उम्र में चोट के कारण क्रिकेट छोड़ना दुखद है। लेकिन राष्ट्रीय टीम के लिए खेले गए पल जीवनभर ताजा रहेंगे।’’

लोहनी ने अपने क्रिकेट करियर में साथ देने वाले परिवार, कोच, फिजियो, साथियों, समर्थकों, नेपाल क्रिकेट संघ (कैन), मोरङ जिला क्रिकेट संघ, कोशी प्रदेश क्रिकेट संघ तथा सभी फ्रेंचाइजी टीमों का आभार व्यक्त किया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि संन्यास क्रिकेट से पूर्ण विदाई नहीं है और भविष्य में एक अलग भूमिका में क्रिकेट के साथ जुड़े रहने का विश्वास जताया है। उन्होंने कहा, ‘‘संन्यास का मतलब क्रिकेट से विदाई नहीं है। अब नई भूमिका में फिर से क्रिकेट से जुड़ने की आशा रखता हूं।’’

वर्ल्ड कप फाइनल में गुरु और शिष्य के बीच रणनीतिक टकराव

सन् २०१७ में एक ही कक्षा में फुटबॉल पर बहस करने वाले गुरु और छात्र अब विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े उपाधि के निर्णायक मुकाबले में आमने-सामने होंगे। वर्ल्ड कप फुटबॉल फाइनल में अर्जेंटीना और स्पेन के कोच लियोनेल स्कालोनी और लुइस डे ला फुएन्ते के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा होगी। सन् २०१७ के यूईएफए प्रो लाइसेंस कोर्स में डे ला फुएन्ते गुरु और स्कालोनी छात्र थे। स्पेन के कोच डे ला फुएन्ते की रणनीति गेंद नियंत्रण पर आधारित है जबकि अर्जेंटीना के स्कालोनी परिस्थिति के अनुसार शैली बदलने में सक्षम माने जाते हैं।

२ साउन, काठमांडू। सोमवार सुबह न्यू जर्सी में विश्व कप की ट्रॉफी उठाने वाली टीम का चयन केवल सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि कोचों के बीच रणनीतिक युद्ध भी निर्णायक होगा। अर्जेंटीना और स्पेन के फाइनल में दो कोच लुइस डे ला फुएन्ते और लियोनेल स्कालोनी के बीच रिश्ता केवल प्रतिस्पर्धा का नहीं, गुरु-शिष्य का भी है। सन् २०१७ में स्पेनिश फुटबॉल महासंघ (आरएफईएफ) द्वारा आयोजित यूईएफए प्रो लाइसेंस कोचिंग कोर्स में अर्जेंटीना के स्कालोनी छात्र थे और स्पेन के वर्तमान कोच लुइस डे ला फुएन्ते गुरु थे। उस समय स्कालोनी कक्षा की पहली पंक्ति में बैठकर सबसे ज्यादा प्रश्न पूछने वाले छात्रों में से एक थे। ‘जब अन्य छात्र पीछे बैठते थे तब भी स्कालोनी हमेशा आगे रहते थे। वे हमेशा बहस करते, सवाल उठाते और अपना दृष्टिकोण रखते थे,’ डे ला फुएन्ते ने एक साक्षात्कार में कहा। ‘तब उनके अंदर कुछ अलग था।’

उस कक्षा में स्पेन के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पाब्लो ओर्बिज़, कार्लोस गुर्पेगी, पियरे लुइगी चेरीनबिनो, एंडोनी इराओला भी मौजूद थे। सभी की यादें एक समान हैं — डे ला फुएन्ते की कक्षा केवल पढ़ाई नहीं बल्कि फुटबॉल पर खुली चर्चा का केंद्र थी। स्कालोनी यहां सबसे सक्रिय प्रतिभागी थे।

युवा टीम से विश्व कप फाइनल तक डे ला फुएन्ते की यात्रा
स्पेन के ६४ वर्षीय डे ला फुएन्ते वरिष्ठ टीम सँभालने से पहले करीब एक दशक तक स्पेन की उम्र वर्ग टीमों के कोच रहे हैं। सन् २०१५ में उन्होंने स्पेन को यू-१९ यूरोपियन चैंपियन बनाया था, जिसमें आज के मुख्य खिलाड़ी रोड्री, मिकेल मेरिनो और उनाई सिमोन थे। उसके बाद उन्होंने सन् २०१८ में यू-२१ यूरोपीय चैंपियनशिप जीती। सन् २०२१ टोक्यो ओलंपिक में स्पेन को रजत पदक दिलाया। सन् २०२२ में लुइस एनरिके के स्थान पर वरिष्ठ टीम की कमान संभाली और स्पेन को फिर से यूरोप के शीर्ष पर पहुंचाया।

उनके नेतृत्व में स्पेन ने सन् २०२३ में यूईएफए नेशंस लीग जीती और २०२४ में यूरोपीय चैंपियनशिप का खिताब हासिल किया। अब उनका लक्ष्य है १६ वर्षों बाद स्पेन को विश्व कप खिताब दिलाना।

वहीं, स्कालोनी की यात्रा और भी असाधारण है। सन् २०१८ विश्व कप के बाद अर्जेंटीना ने उन्हें अंतरिम कोच बनाया, लेकिन कई लोग उन्हें अनुभवहीन बताते हुए आलोचना करते थे। उन्होंने पहले स्पेनिश क्लब सेविला में सहायक कोच और जिज़ साम्पाओली के सहायक के रूप में काम किया था। लेकिन आठ वर्षों में उन्होंने अर्जेंटीना के फुटबॉल इतिहास को बदल दिया। उनके नेतृत्व में अर्जेंटीना ने कोपा अमेरिका २०२१, २०२२ के विश्व कप फाइनल में यूरोपियन चैंपियन और कोपा अमेरिका विजेता के बीच फाइनलिसिमा २०२२, फिफा विश्व कप २०२२ और कोपा अमेरिका २०२४ जीता है। वे लगातार दूसरी बार विश्व कप खिताब जीतने के दावेदार हैं। यदि वे जीतते हैं तो स्कालोनी आधुनिक फुटबॉल के सबसे सफल राष्ट्रीय कोचों में शुमार होंगे।

दोनों कोचों की सबसे बड़ी ताकत खिलाड़ी प्रबंधन है। पूर्व प्रतिभागी उनका वर्णन करते हैं कि डे ला फुएन्ते “हमेशा एक समान स्वभाव वाले व्यक्ति” हैं। “पहले दिन जैसा व्यवहार करते थे, हजारों दिनों बाद भी वैसा ही करते हैं,” ओर्बिज़ कहते हैं। स्कालोनी के बारे में भी सहपाठी इसी तरह सोचते हैं। “हमें तब पता था कि वे केवल लाइसेंस लेने नहीं आए थे, वे वास्तव में कोच बनने की पढ़ाई कर रहे थे,” कार्लोस गुर्पेगी याद करते हैं।

डे ला फुएन्ते की स्पेन टीम गेंद नियंत्रण, छोटे पास, उच्च प्रेसिंग और तेज़ हमला पर विश्वास करती है। वहीं स्कालोनी की अर्जेंटीना परिस्थिति के अनुसार खेल शैली बदलने वाली टीम है। जरूरत पड़ने पर गेंद नियंत्रण करती है, जरूरत हो तो काउंटर अटैक पर जाती है और कठिन मैचों में मानसिक रूप से मजबूत रहती है। यही अर्जेंटीना की पहचान है।

सन् २०१७ में एक ही कक्षा में फुटबॉल विषयक बहस करने वाले गुरु और छात्र अब विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े उपाधि के निर्णायक फैसले का हिस्सा हैं। उस समय उनके सामने नोटबुक थी, आज उनके सामने विश्व कप ट्रॉफी होगी। और ९० मिनट बाद — या आवश्यक होने पर अतिरिक्त समय और पेनाल्टी शूटआउट के बाद — फुटबॉल न केवल नए विश्व विजेता का निर्धारण करेगा बल्कि यह भी तय होगा कि कौन सी रणनीति सफल रही।

एआई प्रतिस्पर्धा में चीनी कंपनी ने पेश किया नया मॉडल

समाचार संक्षेप

OK AI द्वारा तैयार। संपादकीय समीक्षा की गई।

  • बीजिंग की मुनसट एआई द्वारा प्रस्तुत किया गया किमी केथ्री मॉडल अमेरिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एकल प्रभुत्व चुनौती देता है।
  • यह चीनी मॉडल कोडिंग और टेक्स्ट रैंकिंग में अमेरिकी मॉडलों को पछाड़ते हुए कीमत में 40 प्रतिशत कम है।
  • एआई विश्लेषक किम आइसेनबर्ग के अनुसार, किमी की उपस्थिति ने पूरी खेल रणनीति बदल दी है और कुछ के लिए खतरे की घंटी है।

एजेंसी। एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अमेरिका अब अकेले वर्चस्व बनाए रखने की स्थिति में नहीं है, यह दावा एक्सियोस में प्रकाशित रिपोर्ट में किया गया है।

बीजिंग स्थित मुनसट एआई नामक कंपनी ने गुरुवार को एक बड़े आकार का ‘किमी केथ्री’ मॉडल सार्वजनिक किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस चीनी मॉडल ने कुछ सप्ताह पहले तक लीड कर रहे अमेरिकी मॉडलों को बहुत कम कीमत में प्रतिस्थापित कर दिया है।

इसकी उपस्थिति ने डेवलपर्स का ध्यान आकर्षित किया है और सिलिकॉन वैली को स्तब्ध करते हुए खेल के नियमों को पूरी तरह से बदल दिया है।

नए मॉडल ने कोडिंग परीक्षणों में एन्थ्रोपिक कंपनी के फेबल फाइव और ओपनएआई के जीपीटी फाइब पॉइंट सिक्स को पछाड़ दिया है। साथ ही, यह व्यापक टेक्स्ट रैंकिंग में एन्थ्रोपिक के ओपस 4.8 को भी पीछे छोड़ चुका है।

इतनी शक्तिशाली क्षमताओं के बावजूद इसकी कीमत अमेरिकी मॉडलों की तुलना में 40 प्रतिशत कम है। मुनसट कंपनी ने योजना बनाई है कि आगामी 27 जुलाई को काइमोलाई ओपन-वेट मॉडल के रूप में जारी किया जाएगा, जिससे विभिन्न कंपनियां और सरकारें इसे अपने सिस्टम में लागू कर सकेंगी।

अब तक अमेरिकी नीति निर्माता चीनी तकनीक को पांच से बारह महीने पीछे मानते थे। इस वर्ष की अप्रैल में अमेरिकी सरकार के परीक्षण केंद्र ने चीनी कंपनी डीपसिक के मॉडल को अमेरिकी सिस्टम से आठ महीने पिछड़ा पाया था।

लेकिन किमी के आगमन ने इस दूरी को सोच से तेज़ी से कम होता दिखाया है, रिपोर्ट में यह उल्लेख है।

एआई विश्लेषक किम आइसेनबर्ग का कहना है, ‘पूरी खेल रणनीति ही बदल गई है और मुझे लगता है कि यह कुछ के लिए खतरे की घंटी बजाएगा।’

हालाँकि अमेरिकी अग्रणी अनुसंधान संस्थान पूरी तरह कमजोर नहीं हुए हैं और किमी मॉडल में अमेरिकी तकनीक का प्रभाव हो सकता है। एन्थ्रोपिक कंपनी ने चीनी अनुसंधान संस्थानों पर अमेरिकी मॉडल से डेटा चोरी कर अपने सिस्टम को प्रशिक्षण देने का आरोप लगाया है।

वाशिंगटन ने कम्प्यूटेशनल पावर पर प्रतिबंध लगाए हैं, बावजूद इसके चीनी कंपनियां तस्करी नेटवर्क के माध्यम से एनविडिया के प्रतिबंधित चिप्स प्राप्त कर चुकी हैं। उधर, ओपनएआई और एन्थ्रोपिक कंपनियां जीपीटी सिक्स और क्लाउड ओपस फाइव जैसे नए सिस्टम विकसित करने में तेजी से काम कर रही हैं।

फीफा विश्व कप फाइनल टिकट की जबरदस्त मांग – विश्व खेल इतिहास की सबसे महंगी घटना

फीफा विश्व कप 2026 का अर्जेंटीना और स्पेन के बीच फाइनल मैच अब तक का सबसे महंगा खेल आयोजन बन गया है। फाइनल मैच के औसत रिसेल टिकट मूल्य 12,751 अमेरिकी डॉलर पहुंचकर सुपर बाउल द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड को भी पार कर गया है। लियोनेल मेस्सी के संभावित अंतिम विश्व कप और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों की भारी भीड़ ने टिकट कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। 2 साउन, काठमांडू।

अर्जेंटीना और स्पेन के बीच चल रहे फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल मैच खेल इतिहास का सबसे महंगा आयोजन बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। इस मैच के रिसेल टिकट की कीमतें पहले सुपर बॉल और एनबीए फाइनल के रिकॉर्ड को भी तोड़ चुकी हैं। न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी स्टेडियम में सोमवार को होने वाले फाइनल के औसत रिसेल टिकट मूल्य अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गए हैं, ऐसा द न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया है।

लियोनेल मेस्सी का दूसरी बार विश्व कप ट्रॉफी जीतने का प्रयास, वैश्विक मांग और प्रतियोगिता में दर्शकों की बड़ी संख्या के कारण टिकट की कीमतें इतनी ऊंची हो गई हैं। विश्व कप फाइनल का एक औसत रिसेल टिकट मूल्य 12,751 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। यह मूल्य 2024 के सुपर बाउल (कान्सास सिटी चीफ्स और सैन फ्रांसिस्को 49र्स के बीच मैच) में बनाए गए 10,540 डॉलर के रिकॉर्ड से अधिक है। मैच शुरू होने के दो दिन पहले प्रमुख रिसेल प्लेटफार्मों पर उपलब्ध सबसे सस्ता टिकट भी लगभग 7,600 डॉलर में सूचीबद्ध था।

प्रिमियम श्रेणी 1 के सीटें 11,000 डॉलर से अधिक कीमत पर बिक्री के लिए रखी गई थीं। इस प्रकार के किसी भी खेल आयोजन में इतनी ऊंची औसत रिसेल कीमत पहले कभी नहीं देखी गई थी। टिकट बेचने वाले प्रमुख प्लेटफार्म ‘स्टबहब’ पर फाइनल मैच के कुल टिकट खरीदारों में लगभग 20 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय दर्शक शामिल हैं। यह संख्या 2024 के सुपर बाउल में मात्र 4.5 प्रतिशत थी। मेस्सी के यह संभावित अंतिम विश्व कप हो सकता है, इसलिए भी टिकट की मांग बहुत अधिक बढ़ी है, हालांकि अर्जेंटीना के फाइनल में पहुंचने से पहले ही टिकट कीमतें बढ़नी शुरू हो गई थीं। इसमें मैच होने वाले स्टेडियम की भूमिका भी है। न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी स्टेडियम की क्षमता 80,000 से अधिक दर्शकों को समाहित करने की है। यह हाल ही में सुपर बाउल आयोजित स्टेडियमों से बड़ा है, फिर भी इसने अभूतपूर्व रिसेल कीमत बनाए रखने में सफलता पाई है।