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लेखक: space4knews

अमेरिकी एफ-३५ लड़ाकू विमान का आपातकालीन अवतरण, पायलट की स्थिति स्थिर

समाचार सारांश

  • अमेरिका के एफ-३५ लड़ाकू विमान ने इरान पर हमला करने के बाद मध्य पूर्व के सैन्य अड्डे पर आपातकालीन अवतरण किया, पायलट की स्थिति स्थिर है।
  • इरान के साथ संघर्ष में कम से कम १३ अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और १,४४४ इरानियों की मौत हुई है, जबकि घायल होने वालों की संख्या भी बहुत अधिक है।
  • अमेरिकी रक्षा मंत्री पिट हेगसेथ ने इरान के खिलाफ अभियान के उद्देश्यों की पुष्टि की है कि वे यथावत हैं और इसकी कोई निश्चित समय-सीमा नहीं है।

काठमांडू। अमेरिका का एक एफ-३५ लड़ाकू विमान, जो इरान पर हमला करने गया था, उसने मध्य पूर्व के एक सैन्य अड्डे पर आपातकालीन अवतरण किया है। हालांकि ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि यह विमान इरान के हमले की चपेट में आया था, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार विमान ने सुरक्षित तरीके से अवतरण किया है और पायलट की स्थिति स्थिर है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हकिन्स ने जारी बयान में कहा कि इरान पर लड़ाकू मिशन पूरा करने के बाद विमान ने क्षेत्रीय अड्डे पर आपातकालीन अवतरण किया। “विमान सुरक्षित अवतरण कर चुका है और पायलट की स्थिति स्थिर है। इस घटना की जांच जारी है,” उन्होंने उल्लेख किया।

अमेरिकी मीडिया नेटवर्क सीएनएन ने सूत्रों को उद्धृत करते हुए बताया कि लगभग १०० मिलियन डॉलर मूल्य का यह विमान इरान के हमले की चपेट में आया हो सकता है। हालांकि अमेरिकी पक्ष ने आपातकालीन अवतरण के स्पष्ट कारण अभी तक सार्वजनिक नहीं किए हैं।

अल जज़ीरा के अनुसार एफ-३५ स्टेल्थ लड़ाकू विमान २०१८ से युद्ध सक्रियता में है, लेकिन अब तक आक्रमण से प्रभावित होने की पुष्टि वाली कोई घटना सार्वजनिक नहीं हुई थी।

मार्च १ को अमेरिकी तीन एफ-१५ ई स्ट्राइक ईगल विमान कुवैती एफ/ए-१८ द्वारा गलती से ‘फ्रेंड्ली फायर’ में गिराए गए थे, जिनमें छह चालक दल के सदस्य सभी सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे थे।

इसी बीच, इरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने एक अमेरिकी विमान को निशाना बनाकर हमला करने का दावा किया है।

फरवरी २८ से शुरू हुए संघर्ष में अमेरिका ने लगभग १२ एमक्यू-९ रिपर ड्रोन खो दिए हैं। साथ ही सऊदी अरब स्थित एक अड्डे पर ईरानी मिसाइल हमले के कारण पांच ईंधन भरने वाले विमान क्षतिग्रस्त हो गए, हालांकि इन जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

अब तक इरान के साथ युद्ध में कम से कम १३ अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं, जबकि लगभग २०० घायल हैं। वहीं इरानी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार १,४४४ लोग मारे गए हैं और १८,५५१ घायल हुए हैं।

अमेरिकी उद्देश्य यथावत

अमेरिकी रक्षा मंत्री पिट हेगसेथ ने कहा है कि इरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका के लक्ष्य शुरू से ही जैसे थे वैसे ही बने हुए हैं।

उनके अनुसार अमेरिका ने अब तक इरान में ७,००० से अधिक लक्ष्यों पर हमला किया है, साथ ही ४० से ज्यादा बमवाहक विमान और ११ पनडुब्बियों को निशाना बनाया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे उद्देश्य पहले दिन से ही हैं – इरान की मिसाइल प्रक्षेपण प्रणाली को नष्ट करना, उसकी रक्षा उद्योग संरचना और नौसेना क्षमताओं को क्षतिग्रस्त करना और उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना।’’

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभियान के चलने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं है।

ओली, लेखकसहित प्रधानसेनापति सिग्देल पनि जेनजी आन्दोलनका दोषी

ओली, लेखक समेत प्रधानसेनापति सिग्देल जेनजिए आन्दोलनका दोषी घोषित

समाचार सारांश

  • राष्ट्रिय मानव अधिकार आयोग ने २३ और २४ भदौ की घटनाओं की जांच रिपोर्ट आयोग के अध्यक्ष तपबहादुर मगर को सौंप दी है।
  • रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने जेनजिए आंदोलन के दौरान सुरक्षा योजना प्रभावी ढंग से लागू नहीं करने का निष्कर्ष निकाला है।
  • रिपोर्ट में मानवाधिकार उल्लंघन में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है और आयोग ने ९० लोगों से बयान लिया है।

६ चैत, काठमांडू। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने २३ और २४ भदौ की घटनाओं की जांच के लिए गठित समिति ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, गृहमंत्री रमेश लेखक, प्रधानसेनापति अशोकराज सिग्देल सहित राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट तैयार की है।

शुक्रवार को आयोग के अध्यक्ष तपबहादुर मगर के समक्ष समिति ने जांच के बाद तैयार की गई रिपोर्ट प्रस्तुत की।

आयोग की सदस्य डॉ. लिली थापा के संयोजन में आयोग ने जेनजिए प्रदर्शन के दौरान हुए मानवाधिकार उल्लंघन की जांच के लिए समिति गठित की थी। आयोग के प्रवक्ता टीकाराम पोखरेल ने कहा, ‘अनुसंधान समिति ने अध्यक्ष को रिपोर्ट सौंप दी है। अब आयोग की पूर्ण बैठक में इस विषय पर निर्णय लिया जाएगा।’

जांच रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने जेनजिए आंदोलन के दौरान अपनी भूमिका प्रभावी रूप से निभाने में विफल रहने का निष्कर्ष निकाला है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सुरक्षा परिषद की है, लेकिन घटना की गंभीरता के कारण आवश्यक सुरक्षा योजना बनाने और लागू करने की कार्यवाही नहीं हुई।

‘रिपोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकारियों को दोषी माना है और मानवाधिकार उल्लंघन में कार्रवाई की सिफारिश की है,’ सूत्र ने बताया, ‘आयोग रिपोर्ट पारित करने के बाद सिफारिशों को लागू करेगा।’

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सुरक्षा परिषद गठित होती है, जिसमें रक्षा मंत्री, गृह मंत्री, विदेश मंत्री, अर्थ मंत्री, मुख्य सचिव और प्रधान सेनापति सदस्य होते हैं। रक्षा मंत्रालय के सचिव सदस्य सचिव के रूप में होते हैं।

आंदोलन के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी ओली सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष थे। उपप्रधानमंत्री एवं अर्थ मंत्री विष्णुप्रसाद पौडेल, गृह मंत्री रमेश लेखक, विदेश मंत्री डॉ. आरजु राणा देउवा, रक्षा मंत्री मानवीर राई, मुख्य सचिव एकनारायण अर्याल, और प्रधान सेनापति अशोक सिग्देल सदस्य थे।

सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों के खिलाफ मानवाधिकार आयोग अधिनियम तथा अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

आयोग ने तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली, गृहमंत्री लेखक, संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुङ, नेपाल पुलिस के महानिरीक्षक चन्द्रकुवेर खापुङ, सशस्त्र पुलिस महानिरीक्षक राजु अर्याल सहित कई अन्य से बयान भी लिया है।

पूर्व गृहमंत्री रवि लामिछाने, काठमांडू महानगर के मेयर बालेन्द्र शाह, कलाकार दीपकराज गिरि, निशचल बस्नेत सहित और व्यक्तियों से भी बयान लिए गए थे।

प्रधान सेनापति अशोकराज सिग्देल को भी बयान के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए, आयोग के सूत्र ने जानकारी दी।

शुक्रवार मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष तपबहादुर मगर को रिपोर्ट सौंपते हुए जांच समिति संयोजक डॉ. लिली थापा।

समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा योजना भी प्रभावी रूप से लागू नहीं हुई, आंदोलन नियंत्रण के लिए चरणबद्ध बल प्रयोग न करके एक साथ अत्यधिक बल और घातक हथियार उपयोग किया गया। ऐसी घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

आयोग ने जेनजिए आंदोलन के नेताओं और सड़क पर नेतृत्व करने वालों की भूमिकाओं का भी विस्तार से अध्ययन किया है।

२३ भदौ के आंदोलन की पूर्व तैयारी का भी व्यापक मूल्यांकन किया गया। विभिन्न सोशल मीडिया में प्रसारित संदेशों और वीडियो का अध्ययन किया गया। डिस्कॉर्ड समेत सामाजिक मीडिया पर बम बनाने की शिक्षा देने, नेताओं एवं व्यवसायियों के घर और कार्यालय के नक्शे साझा करने की गतिविधियां भी पाई गईं, सूत्र ने बताया।

आयोग ने ३-४ सौ संदेश, वीडियो, ऑडियो आदि का अध्ययन किया है। फॉरेंसिक और बैलिस्टिक दोनों प्रकार की रिपोर्टों के साथ घटनाओं का गहराई से विश्लेषण किया गया।

२३ भदौ को हुई पुलिस गोलीबारी में मारे जाने वालों के पोस्टमार्टम रिपोर्ट अधिकांशतः कमर के ऊपर गोली लगने की पुष्टि करती हैं, जिसे आयोग ने प्राप्त किया है।

उस समय काठमांडू महानगर पालिका की भूमिका और रवि लामिछाने की जेल से रिहाई के दौरान हुए मानवाधिकार मामले पर भी आयोग ने जांच की। तत्कालीन मेयर बालेन्द्र शाह और रवि लामिछाने से बयान लेकर उनकी भूमिका समझी गई।

जेनजिए आंदोलन में हुई घटनाओं की जांच के लिए सरकार ने गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता में एक जांच आयोग बनाया था, जो हाल ही में रिपोर्ट प्रस्तुत कर चुका है, लेकिन वह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।

मानवाधिकार आयोग ने विशुद्ध मानवाधिकार और जवाबदेही के दृष्टिकोण से जांच की बताई है, विशेष रूप से अत्यधिक बल उपयोग के मुद्दे को केंद्र में रखा गया।

डॉ. लिली थापा के संयोजन में ६ सदस्यों वाली समिति ने लगभग ६ सौ पृष्ठों से अधिक लंबी रिपोर्ट तैयार की है। अनुसूची सहित कुल लगभग १० हजार पृष्ठों की रिपोर्ट बनी है।

आयोग ने बताया कि मानवाधिकार उल्लंघन हुआ या नहीं, तथा आंदोलन में अत्यधिक बल प्रयोग हुआ या नहीं, इस पर रिपोर्ट केंद्रित है।

आयोग ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, गृहमंत्री रमेश लेखक, काठमांडू महानगर के मेयर बालेन्द्र शाह सहित ९० लोगों से बयान लिए थे। दूसरे चरण में ५ सय ६ लोगों से पूछताछ की गई।

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकारी, नेपाल पुलिस तथा सशस्त्र पुलिस के महानिरीक्षक और कमांडर, जिला सुरक्षा समिति के अधिकारी आदि से भी आयोग ने बयान लिए।

‘आंदोलन के समय की जिम्मेदारियों और भूमिकाओं का विस्तार से अध्ययन किया गया है,’ सूत्र ने बताया।

सरकारी रिपोर्ट में दो दिन की घटनाओं में ७७ मौतें बताई गई हैं जबकि आयोग की रिपोर्ट में ७६ मौतें दर्ज हैं। घायलों की संख्या २४९ बताई गई है।

आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिवार, घायल, आंदोलन आयोजक, जेनजिए नेता, सड़क पर मौजूद प्रदर्शनकारी, और आंदोलन में शामिल कलाकार और पेशेवरों से भी पूछताछ की गई।

आयोग की टीम और क्षेत्रीय कार्यालयों ने ४५ जिलों में स्थल अध्ययन किया था और सभी ७७ जिलों का भी निरीक्षण किया गया। दो दिन की घटनाओं के सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज का फॉरेंसिक अध्ययन रिपोर्ट में शामिल है।

मानव अधिकार आयोग ने गत १५ चैत को तीनकुने में हुए राजावादी आंदोलन की भी रिपोर्ट बनाई थी, जो अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है।

नेविसंघ सिनेट की बैठक में निर्णय: कांग्रेस का भ्रातृ संगठन नहीं रहेगा, बीपी कोइराला के सिद्धांतों का करेंगे पालन


६ चैत, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस के निकट संबंध रखने वाले नेपाल विद्यार्थी संघ (नेविसंघ) ने अपने संगठन को कार्यात्मक रूप से स्वायत्त बनाने के लिए पार्टी का भ्रातृ संगठन न रहने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को हुई नेविसंघ की सिनेट बैठक में संगठन को स्वायत्त बनाने के उद्देश्य से आगामी दिनों में पार्टी के भ्रातृ संगठन के रूप में नहीं रहने का फैसला किया गया।

नेविसंघ के प्रवक्ता सुरज सेजुवाल ने कहा, ‘नेविसंघ ने अपनी कार्यात्मक स्वायत्तता मांगी है। पार्टी का भ्रातृ संगठन होने के नाते हर निर्णय पार्टी के निर्देशानुसार लेना पड़ता था, जिससे छात्र आंदोलनों में प्रभावी भूमिका निभाना असंभव हो जाता था। इसलिए नेविसंघ के अधिकार सम्पन्न सिनेट की बैठक ने यह निर्णय लिया है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘हम कांग्रेस के भ्रातृ संगठन न रहने का मतलब यह नहीं है कि हमने पार्टी के प्रति आस्था छोड़ दी है। हम कांग्रेस से अलग या पर नहीं होंगे। हम पार्टी के मूल्यों को अपनाएंगे और बीपी कोइराला द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत हमारे मार्गदर्शक बने रहेंगे।’

नेविसंघ के पदाधिकारियों ने पार्टी का भ्रातृ संगठन रहने पर छात्र आंदोलनों के विषय में आवाज उठाने में बाधित होने और अपने संगठन को स्वतंत्र रूप से संचालित न कर पाने की शिकायत भी की है।

सुरज सेजुवाल ने बताया, ‘यहां तक कि हमारे अधिवेशन भी समय पर स्वायत्त रूप से नहीं हो पाते थे। समिति चयन के लिए पार्टी के अध्यक्ष और कार्यस्थानीय समिति के निर्णय की आवश्यकता पड़ती थी, जिससे हम और भी कमजोर हो जाते थे। विधान संशोधन के लिए पार्टी की अनुमति लेना भी जरूरी होता था। इसलिए नेविसंघ प्रभावशाली रूप से काम नहीं कर पाया, यह हमारी समीक्षा है।’

उन्होंने बताया कि नेपाली कांग्रेस के सरकार संचालन के दौरान लिए गए गलत निर्णयों और अकर्मण्यता का भार भी नेविसंघ को उठाना पड़ा, जिससे संगठन की प्रतिष्ठा पर असर पड़ा है। ‘भ्रष्टाचार पार्टी के नेताओं के कारण होता है और इसका भार नेविसंघ को भी उठाना पड़ता है। विरोध प्रकट करने का अवसर भी नहीं मिला, इसलिए हमारी अच्छी उपलब्धियां भी छिप गईं,’ सेजुवाल ने कहा, ‘अब नेविसंघ के लिए छात्र एवं देश के मुद्दे निडर होकर उठाने का यह निर्णय है।’

अध्यक्ष दुजाङ शेर्पा ने बताया कि संगठन की स्वायत्तता न होने की वजह से समय पर महाधिवेशन करना भी कठिन हो गया था। उन्होंने कहा, ‘हम गतिशील संगठन बनाना चाहते हैं, लेकिन पार्टी के निर्देश के बिना कोई कदम नहीं उठा सकते थे, जिससे स्वतंत्रता बाधित हो गई। बाहर से ऐसा लगता था कि हम अधिवेशन नहीं करना चाहते क्योंकि पार्टी को महाधिवेशन की कार्यसूची भिजवाने पर उसे पारित नहीं किया जाता और विधान संशोधन नहीं होता। इसलिए हमने स्वायत्तता के लिये यह निर्णय लिया है।’

नेविसंघ एक ऐसी संगठन है जो छात्र राजनीतिक विरासत को साथ लेकर चलती है, इसलिए पदाधिकारी यह चाहते हैं कि इसे मौलिक रूप से स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिले। ‘पंचायती शासन के दौरान जब पार्टी प्रतिबंधित थी तब भी नेविसंघ सक्रिय रहा और उसी आधार पर लोकतंत्र आया,’ अध्यक्ष शेर्पा ने कहा, ‘अब नेविसंघ भी आंदोलन के रूप में आगे बढ़ेगा।’

बेन्जामिन नेतन्याहुले पत्रकार सम्मेलन गर्दै भने– मैं जीवित हूँ


६ चैत, काठमाडौं। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहु ने अपनी ज़िंदगी की पुष्टि करने के लिए पत्रकार सम्मेलन आयोजित किया है।

गुरुवार रात आयोजित पत्रकार सम्मेलन के माध्यम से उन्होंने विश्व समुदाय को स्पष्ट किया कि वे जीवित हैं।

“मैं सबसे पहले यह कहना चाहता हूँ कि मैं जीवित हूँ और आप सभी इसका साक्षी हैं,” नेतन्याहु ने सम्मेलन की शुरुआत में कहा, “साथ ही मैं सभी झूठी खबरों का खंडन भी करता हूँ।”

उन्होंने सोशल मीडिया पर फैल रही उनकी मृत्यु की अफवाहों को खारिज करते हुए यही पत्रकार सम्मेलन आयोजित किया है।

उन्होंने आगे कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका और इज़राइल अपने लक्ष्यों की ओर मजबूती से बढ़ रहे हैं।”

इसके पहले, १३ मार्च को नेतन्याहु के एक एक्स अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया गया था, जिसमें वे ईरान पर संभावित हमले के बारे में जानकारी दे रहे थे।

कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने उस वीडियो को ‘एआई उत्पन्न’ (AI generated) बताया था।

इसके अतिरिक्त, कुछ ने उनकी मृत्यु हो चुकी होने का भी दावा किया था, जिसके बाद इज़राइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसे झूठा बताया था।

‘बालेनलाई प्रधानमन्त्री बनाउन पार्टीको विधान संशोधन गर्नुपर्दैन’

‘बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनाने के लिए पार्टी के विधान में संशोधन जरूरी नहीं’

समाचार सारांश

  • राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी १३ जेठ को बालेन शाह को प्रधानमंत्री घोषित करने की तैयारी में है और महामंत्री कविंद्र बुर्लाकोटी के अनुसार विधान में संशोधन की आवश्यकता नहीं होगी।
  • रास्वपा वर्तमान में २२ मंत्रालयों को घटाकर १८ मंत्रालयों में सीमित करने की तैयारी कर रही है और कुछ मंत्री दोहरी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
  • संसदीय दल के नेता चयन के लिए १२ जेठ को बैठक होगी और सभी मंत्री १३ तारीख को एक साथ शपथ लेंगे।

काठमांडू। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) नई सरकार गठन के लिए व्यस्त है। बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनाने के लिए पार्टी के विधान में संशोधन की आवश्यकता नहीं है, ऐसा रास्वपा के महामंत्री कविंद्र बुर्लाकोटी ने कहा है।

उनके अनुसार, बिना किसी विधान संशोधन के वरिष्ठ नेता बालेन शाह १३ जेठ को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। उसी दिन एक छोटा आकार का मंत्रिपरिषद भी गठन किया जाएगा। वर्तमान में मौजूद २२ मंत्रालयों को घटाकर अधिकतम १८ मंत्रालयों में सीमित करने का प्रयास रास्वपा कर रही है।

इस विषय पर रास्वपा महामंत्री कविंद्र बुर्लाकोटी से बातचीत –

छोटे आकार के मंत्रिपरिषद बनाने की क्या तैयारी है? कितने मंत्रालय होंगे?

मंत्रालयों की संख्या कम करने के लिए गृहकार्य चल रहा है। हमारे वचन-पत्र में १८ मंत्रालय रखने का उल्लेख है। उसी के आसपास मंत्रालयों को समायोजित करने का काम जारी है।

मंत्रालयों को संचालित करने के लिए उन्हें छोटा बनाने या दोहरी जिम्मेदारी देने का क्या योजना है?

मंत्रालयों से जुड़े विभिन्न विभाग और कार्य क्षेत्रों को किस मंत्रालय के अधीन रखा जाए, इस पर विचार हो रहा है। अभी २२-२३ मंत्रालय हैं। उन्हें घटाकर १८ करने के बाद किन मंत्रालयों को हटाना है और उनके कार्य दूसरे मंत्रालयों को कैसे सौंपे जाएं, इस पर गृहकार्य चल रहा है।

ठीक तऱह से निर्णय नहीं हुआ है लेकिन लगभग १८ मंत्रालयों में सीमित करने की योजना है।

१५ मंत्रालय रहने की अफवाहें चल रही हैं?

कम करने का प्रयास है, लेकिन फिलहाल प्राथमिकता के अनुसार लगभग १८ मंत्रालयों में mayoría मंत्री शामिल होंगे। कुछ मंत्री दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाल सकते हैं, ऐसा सुझाव भी है।

दोहरी जिम्मेदारी देने पर गृहकार्य हो रहा है?

हां, इस पर सुझाव आए हैं और गृहकार्य चल रहा है। अभी अंतिम निर्णय बाकी है।

मंत्रालय की संख्या सुनिश्चित हो चुकी है?

अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। व्यक्तिगत स्तर पर कुछ प्रस्ताव आए हैं, लेकिन पार्टी के सामूहिक निर्णय अभी बाकी हैं। व्यक्तिगत गृहकार्य समाप्त हो सकता है, लेकिन सामूहिक निर्णय अभी बाकी है।

आप कह रहे हैं कि मंत्रालयों की संख्या अभी निश्चित नहीं हुई है?

पार्टी के संयंत्र में औपचारिक रूप से कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

क्या व्यक्तिगत जिम्मेदारियों पर निर्णय हो चुका है?

जिम्मेदारी संबंधी कोई भी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। निर्णय एक साथ लिया जाएगा और विस्तृत विभाजन अभी नहीं हुआ है। अभी प्रस्ताव के स्तर पर गृहकार्य चल रहा है।

क्या १३ जेठ को सभी मंत्रियों का शपथ ग्रहण एक साथ होगा?

हां, १३ तारीख को सभी एक साथ शपथ लें, ऐसी तैयारी होनी चाहिए। प्रधानमंत्री की शपथ के बाद उसी दिन सभी मंत्री भी शपथ ग्रहण करेंगे।

संसदीय दल के नेता चयन और केन्द्रीय समिति की बैठक की तैयारी कैसी है?

संसदीय दल के नेता के चयन के लिए १२ जेठ को सांसदों की शपथ के बाद बैठक आयोजित करने की तैयारी है।

क्या विधान संशोधन करने की योजना है?

राजनीतिक सहमति के कारण विधान संशोधन की आवश्यकता नहीं लग रही है। दल के नेता से संबंधित विषय के लिए संशोधन जरूरी नहीं है, लेकिन अन्य मामलों के लिए संशोधन संभव हो सकता है। राजनीतिक सहमति इसे पहले ही पार कर चुकी है और केन्द्रीय समिति ने भी इसका अनुमोदन कर दिया है। इसी आधार पर आगामी कार्य आगे बढ़ रहे हैं।

बालेन शाह : प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार और रास्वपा के वरिष्ठ नेता क्या कर रहे हैं?

बालेन शाह

तस्वीर स्रोत, Reuters

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह ‘बालेन’, जिन्हें प्रधानमंत्री उम्मीदवार माना जा रहा है, पार्टी के नए निर्वाचित सांसदों के लिए आयोजित परिचयात्मक और अभिमुखीकरण कार्यक्रम में भी अनुपस्थित रहने के बाद व्यापक रूप से खोजे जा रहे हैं। एक उच्च पदाधिकारी ने बताया कि वे “विशेषज्ञों से परामर्श कर रहे हैं”।

हाल ही में संपन्न प्रतिनिधि सभा चुनाव में भारी बहुमत हासिल करने वाली रास्वपा बालेन के नेतृत्व में सरकार बनाने की तैयारी कर रही है।

“वे विशेषज्ञों के साथ अधिक चर्चा कर रहे हैं और साथ ही पार्टी के नेताओं से भी विचार-विमर्श कर रहे हैं,” उक्त दल के महासचिव कविन्द्र बुर्लाकोटी ने कहा।

पार्टी द्वारा मंगलवार और बुधवार को नवनिर्वाचित सांसदों के लिए आयोजित कार्यक्रमों में वे अनुपस्थित थे।

“मुख्य बात यह है कि वे स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। उनका स्वास्थ्य पहले काफी नाजुक था। अभी अधिक चर्चा इस बात पर हो रही है कि कैसे काम करना है, मुख्य विषय क्या हैं और काम करते समय किन बातों पर ध्यान देना चाहिए,” उन्होंने आगे कहा।

अब ७६१ सरकारों के वित्तीय सूचकांक एक ही डैशबोर्ड पर देखे जा सकेंगे


६ चैत, काठमांडू। ‘नेपाल फिस्कल डैशबोर्ड’ के माध्यम से तीनों स्तरों की सरकारों के वित्तीय सूचक आसानी से देखे जा सकेंगे।

विश्व बैंक नेपाल द्वारा तैयार इस डैशबोर्ड के जरिए संघ, प्रदेश और स्थानीय तह सहित तीनों स्तरों की सरकारों के बजट, राजस्व, खर्च, ऋण और अन्य वित्तीय सूचक एक ही स्थान पर देखा, विश्लेषण और डाउनलोड किए जा सकेंगे।

नेपाल आर्थिक पत्रकार संघ (नाफिज) द्वारा शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में नेपाल विश्व बैंक समूह ने इस विषय पर प्रस्तुति दी। पिछले माह जारी किए गए डैशबोर्ड के माध्यम से देश के तीनों स्तरों की सरकारी आय, खर्च और ऋण से संबंधित आंकड़ों तक सहज पहुंच संभव होगी।

इस डैशबोर्ड के जरिए संघ, प्रदेश और स्थानीय तहों के बजट, राजस्व स्रोत और खर्च उपलब्ध कराए जाएंगे। इन सभी आंकड़ों को एक ही ‘प्लेटफॉर्म’ पर लाकर ‘विजुअलाइजेशन’ तथा विश्लेषण करना संभव होगा। विश्व बैंक ने इस डैशबोर्ड को एकीकृत प्रणाली का इंटरेक्टिव और उपयोगकर्ता के अनुकूल उपकरण बताया है।

डैशबोर्ड में २०१८ से २०२२ तक के ऐतिहासिक आंकड़े शामिल हैं और नए आंकड़ों को क्रमशः अपडेट किया जाएगा, यह जानकारी विश्व बैंक ने दी। स्रोत के रूप में बजट भाषण, महालेखा नियंत्रक कार्यालय द्वारा प्रकाशित एकीकृत वित्तीय विवरण और नेपाल राष्ट्र बैंक सहित अन्य सार्वजनिक निकायों के आंकड़ों का उपयोग किया गया है।

डैशबोर्ड उपयोग करने के लिए कोई अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी और कोई भी इसे स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि, चूंकि आंकड़े सरकारी स्रोतों से आए हैं, अतः स्रोत का उल्लेख करना उचित माना गया है। –रासस

चीन ने उर्वरक निर्यात पर प्रतिबंध लगाया, वैश्विक आपूर्ति में नई समस्याएं

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा पश्चात् तैयार।

  • चीन ने अपने घरेलू बाजार की सुरक्षा के लिए नाइट्रोजन-पोटैशियम उर्वरक और कुछ फॉस्फेट उर्वरकों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है।
  • इस प्रतिबंध से वैश्विक उर्वरक बाजार में आपूर्ति की कमी और बढ़ी है, क्योंकि चीन ने पिछले वर्ष निर्यात किए गए कुल उर्वरकों का आधे से तीन-चौथाई हिस्सा प्रतिबंधित कर दिया है।
  • चीन विश्व के सबसे बड़े उर्वरक निर्यातकों में से एक है और हार्मुज जलसंधि से उर्वरक की आपूर्ति बंद होने के बीच यह खबर आई है।

६ चैत, काठमाडौं । चीन ने अपने घरेलू बाजार की सुरक्षा के लिए कृषि उर्वरक के निर्यात को कम कर दिया है, यह जानकारी उद्योग के सूत्रों ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को दी है। अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण पहले से ही संकटग्रस्त वैश्विक बाजार पर इसने और दबाव डाला है।

मध्य मार्च में, बीजिंग ने नाइट्रोजन-पोटैशियम उर्वरक मिश्रण और कुछ प्रकार के फॉस्फेट उर्वरकों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया, सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया।

समाचार एजेंसी के अनुसार, यूरिया के लिए पहले से लगे प्रतिबंध और निर्यात कोटा के साथ, अब चीन केवल कुछ सीमित उर्वरकों का निर्यात करेगा, विशेष रूप से अमोनियम सल्फेट। इसका अर्थ है कि चीन ने पिछले साल जो कुल मात्रा निर्यात की थी, उसका आधा से तीन-चौथाई हिस्सा अब प्रतिबंधित हो गया है। रॉयटर्स का अनुमान है कि यह लगभग 4 करोड़ टन तक हो सकता है।

चीन दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक निर्यातकों में से एक है, जिसने पिछले वर्ष 13 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के उर्वरक निर्यात किए थे।

हार्मुज जलसंधि के माध्यम से होने वाले उर्वरक परिवहन के अवरुद्ध होने के समय यह प्रतिबंध खबर सामने आया है। इस जलमार्ग से होने वाला परिवहन समुद्र मार्ग द्वारा कुल आपूर्ति का लगभग एक तिहाई हिस्सा है।

बीएमआई के वरिष्ठ कमोडिटी विश्लेषक मैथ्यू बिगिन ने रॉयटर्स को बताया, ‘चीन हमेशा ऐसे समय पर जब वैश्विक आपूर्ति संकट होता है, अपने घरेलू बाजार की सुरक्षा के लिए निर्यात प्रतिबंध लगाता है।’

बिगिन ने आगे कहा, ‘वे खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं और अपने घरेलू बाजार को कीमतों में वृद्धि के प्रभाव से बचाने की कोशिश कर रहे हैं।’

भारतमा रहेका नेपाली श्रमिक फर्किन थाले – Online Khabar

भारत में काम करने वाले नेपाली मजदूर वापस देश लौटने लगे


६ चैत्र, सुदूरपश्चिम। एलपी गैस की कमी शुरू होने के बाद भारत के विभिन्न शहरों में काम कर रहे नेपाली मजदूर युवा अपने देश वापस लौटने लगे हैं। विशेष रूप से होटल में काम करने वाले नेपाली युवा गैस की कमी के कारण व्यवसाय बंद होने पर वापस लौटने को मजबूर हुए हैं।

कैलाली के नेपाल-भारत सीमा के त्रिनगर में मिले डोटी के रोशन खड्काले बताया कि गैस की कमी के कारण उनका कार्यरत होटल बंद होने वाला था, इसलिए वे स्वदेश लौटे। ‘खाने और रहने की व्यवस्था होटल में ही थी,’ मुम्बई से लौटे खड्काले कहा, ‘गैस की कमी के कारण होटल बंद होने की तैयारी चल रही थी, जब बेरोजगारी की स्थिति आई तो स्वदेश वापस आना पड़ा।’

समान सीमा क्षेत्र में मिले विजय विक ने भी कहा कि होटल बंद होने की स्थिति बन रही थी और नजदीक आ रहे ‘विसू’ पर्व को मनाने के लिए वे समय रहते घर लौटने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा, ‘विसू पर्व चैत्र के अंत में मनाने का विचार था, लेकिन अब काम करने वाले होटल बंद होने लगे हैं, इसलिए जल्दी लौट आया हूं।’ गैस की कमी के कारण भारत में होटल में काम करने वाले नेपाली सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, उन्होंने जानकारी दी।

देश लौटे अन्य युवक महेश भट्ट ने किया स्पष्ट किया कि गैस की कमी से रोजगार खोने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ‘होटल में काम करने वाले कई नेपाली बेरोजगार हो रहे हैं। अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले नेपाली भी प्रभावित हैं, लेकिन विशेष रूप से होटल में काम करने वाले ज्यादा प्रभावित हुए हैं,’ भट्ट ने बताया।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति में समस्या आई है और भारत सरकार ने ईंधन और खाना पकाने वाली गैस की वितरण में सख्ती कर दी है।

भारत में सुदूरपश्चिम से बड़ी संख्या में नेपाली मजदूर काम कर रहे हैं।

नेपाल फुटबॉल: आव्रजन विभाग के पत्र के बाद राष्ट्रीय लीग स्थगित

नेपालको पुरुष राष्ट्रिय लीग खेल्दै विदेशी खेलाडी

तस्बिर स्रोत, ANFA

तस्बिरको क्याप्शन, नेपाल में वर्तमान में फुटबॉल खेल रहे अधिकांश विदेशी खिलाड़ियों के पास श्रम स्वीकृति नहीं है, अधिकारी बताते हैं

आव्रजन विभाग ने श्रम स्वीकृति के बिना पर्यटक वीजा पर मौजूद विदेशी खिलाड़ियों को राष्ट्रीय लीग के पुरुष/महिला फुटबॉल प्रतियोगिताओं में खेलने से रोकने के लिए पत्र जारी किया, जिसके बाद अखिल नेपाल फुटबॉल संघ (एन्फा) ने काठमांडू में जारी दोनों राष्ट्रीय लीग प्रतियोगिताओं को स्थगित कर दिया है।

एन्फा ने एक विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि तकनीकी कारणों से अगले सूचनाएं आने तक लीग स्थगित की जा रही है।

पुरुष राष्ट्रीय लीग में भाग लेने वाले 17 क्लबों में से चितलांग फुटबॉल क्लब ने कहा है कि उनके विदेशी खिलाड़ियों के पास श्रम स्वीकृति है।

पुरुष लीग में गुरुवार को तीन मैचों का कार्यक्रम था। इनमें से चितलांग एफसी बनाम लालिगुंरास एफसी और त्रिभुवन आर्मी क्लब बनाम सातदोबाटो यूथ क्लब के दो मैच आयोजित हुए। इन दोनों मैचों में विदेशी खिलाड़ी भी शामिल थे।

लेकिन शाम को मच्छिन्द्र क्लब और एपीएफ के बीच होने वाला मैच रोक दिया गया।

चैत्र ११ को दिन प्रतिनिधि सभा के ज्येष्ठ सदस्य अर्जुननरसिंह केसी का शपथ ग्रहण

समाचार सारांश

संपादकीय रूप से समीक्षा किया गया।

  • प्रतिनिधि सभा के ज्येष्ठ सदस्य अर्जुननरसिंह केसी चैत्र ११ को राष्ट्रपति कार्यालय में शपथ लेंगे।
  • शपथ ग्रहण समारोह चैत्र १२ को दोपहर २ बजे सिंहदरबार स्थित संघीय संसद भवन में आयोजित होगा।
  • सांसदों को निर्वाचन आयोग का प्रमाण पत्र, नागरिकता की प्रति और पासपोर्ट साइज फोटो लेकर आना होगा तथा सांस्कृतिक पहचान के पोशाक में उपस्थित होने को कहा गया है।

६ चैत्र, काठमांडू। प्रतिनिधि सभा के ज्येष्ठ सदस्य चैत्र ११ को शपथ ग्रहण करेंगे। इसके लिए संघीय संसद सचिवालय ने राष्ट्रपति कार्यालय को पत्र भेजा है।

संघीय संसद सचिवालय के सहसचिव एवं प्रवक्ता एकराम गिरी ने कहा, ‘निर्वाचित सदस्यों में से ज्येष्ठ सदस्य की पहचान की गई है और ज्येष्ठ सदस्य की शपथ चैत्र ११ को उपयुक्त समय पर राष्ट्रपति कार्यालय में आयोजित करने के लिए पत्र भेजा गया है।’

गिरी के अनुसार, संसद सचिवालय ने शुक्रवार को ज्येष्ठ सदस्य की पहचान की है।

नेपाली कांग्रेस से समानुपातिक निर्वाचन प्रणाली के तहत निर्वाचित अर्जुननरसिंह केसी ज्येष्ठ सदस्य हैं। उनकी उम्र ७८ वर्ष है।

ज्येष्ठ सदस्य केसी राष्ट्रपत‍ि से शपथ लेने के बाद अन्य सदस्यों को शपथ दिलाएंगे। अन्य सदस्यों की शपथ चैत्र १२ दोपहर २ बजे निर्धारित है।

शपथ ग्रहण समारोह दोपहर २ बजे निर्माणाधीन संघीय संसद भवन के बहुउद्देश्यीय सभाकक्ष सिंहदरबार में होगा।

शपथ ग्रहण के लिए निर्धारित समय से दो घंटे पहले पहुंचने को कहा गया है।

शपथ ग्रहण में आने वाले सांसदों को कुछ आवश्यक दस्तावेज़ साथ लाने होंगे। सचिवालय की जारी सूचना के अनुसार, निर्वाचन आयोग से प्रतिनिधि सभा सदस्य के रूप में निर्वाचित प्रमाण पत्र (सक्कल और प्रति), नागरिकता प्रमाणपत्र की प्रति तथा हाल में ली गई पासपोर्ट साइज की दो तस्वीरें साथ लानी होंगी।

शपथ ग्रहण के दौरान सांसदों को अपनी सांस्कृतिक पहचान के अनुसार पोशाक पहन कर उपस्थित होने का अनुरोध संसद सचिवालय ने किया है।

यदि कोई सांसद अपनी मातृभाषा के अलावा अन्य भाषा में शपथ लेना चाहता है, तो उसे शपथ की जानकारी संबंधित भाषा में अनुवाद कर शपथ कार्यक्रम शुरू होने से तीन दिन पहले संघीय संसद सचिवालय के सांसद सुविधा प्रबंधन शाखा में जमा करनी होगी।

 

सऊदी अरब की चेतावनी: अवरोध जारी रहने पर तेल का भाव 180 डॉलर पार कर सकता है

समाचार सारांश

स्रोतों के आधार पर संपादकीय समीक्षा की गई।

  • सऊदी अरब के अधिकारियों के अनुसार, यदि अप्रैल के अंत तक होर्मुज़ स्ट्रेट में अवरोध जारी रहा तो तेल का भाव प्रति बैरल 180 डॉलर तक जा सकता है।
  • ईरान और इज़राइल के बीच संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा केंद्र प्रभावित हो रहे हैं, जिससे सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह को निशाना बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
  • कतर के रास लाफान एलएनजी निर्यात केंद्र पर ईरान के हमले के बाद यह संभावित है कि यह लंबे समय तक बंद रहे और 2026 तक फिर से चालू न हो पाए।

6 चैत्र, काठमांडू। सऊदी अरब के अधिकारियों ने आकलन किया है कि ‘होर्मुज स्ट्रेट’ में अप्रैल के अंत तक अवरोध जारी रहने पर तेल का मूल्य प्रति बैरल 180 डॉलर तक पहुंच सकता है।

अमेरिकी मीडिया द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने नाम न जाहिर किए गए स्रोतों के हवाले से यह जानकारी दी है।

28 फरवरी को ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतों में तीव्र उतार-चढ़ाव देखा गया है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड का भाव कुछ समय के लिए प्रति बैरल 119 डॉलर तक पहुंचा, फिर गिर गया।

रियाद स्थित किंग फैसल सेंटर फॉर रिसर्च एंड इस्लामिक स्टडीज के विदेश नीति विशेषज्ञ उमर करीम ने अलजज़ीरा को बताया कि युद्ध जारी रहने पर तेल का मूल्य कम से कम प्रति बैरल 150 डॉलर तक पहुंच सकता है।

‘‘अगर लाल सागर के टर्मिनलों पर हमला होता है और वहां कोई अवरोध आता है तो मुझे लगता है कि तेल का भाव 150 डॉलर से ऊपर जा सकता है,’’ करीम ने कहा।

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘यह फिलहाल यूरोप और एशिया के बीच एकमात्र संभावित मार्ग है।’

सऊदी अरब, खाड़ी क्षेत्र से 1,000 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित लाल सागर के यानबू बंदरगाह से निरंतर तेल का निर्यात कर रहा है।

ईरान और इज़राइल के संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा स्रोत प्रभावित हो रहे हैं, जिससे इस बंदरगाह को भी निशाना बनाए जाने का अंदेशा है, सऊदी अधिकारियों का अनुमान है।

रास लाफान के नुकसान का क्या असर होगा?

पेरिस स्थित सेंटर ऑन ग्लोबल एनर्जी पॉलिसी की विशेषज्ञ एनी-सोफ़ी कोर्बो के अनुसार, कतर का रास लाफान, जो विश्व का सबसे बड़ा तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) निर्यात केंद्र है, इस सप्ताह ईरान के हमले की चपेट में आया है और इसका मरम्मत में कितना समय लगेगा, इसका अध्ययन चल रहा है।

‘‘नुकसान का वास्तविक प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है,’’ कोर्बो ने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा, ‘‘पहले के एलएनजी केंद्रों पर हुए हादलों पर नजर डालें तो मरम्मत में महीनों लग सकते हैं।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘पहले 2022 में टेक्सास के फ्रीपोर्ट एलएनजी सेंटर में एक बड़ा हादसा हुआ था, जिसकी वजह से वह आठ महीने तक बंद रहा।’

उससे पहले, सितंबर 2020 में नॉर्वे के स्नोविट एलएनजी केंद्र में आग लगने के कारण डेढ़ साल तक बंद रहा था।

‘‘सबसे खराब स्थिति के अनुसार, रास लाफान 2026 तक फिर से शुरू नहीं हो सकता, जिसका मतलब है कि एलएनजी आपूर्ति 2021 के स्तर पर बनी रहेगी,’’ उन्होंने बताया।

यह पांच साल का बड़ा झटका होगा और इसका प्रभाव विश्व और गैस के दामों पर व्यापक होगा, उन्होंने कहा।

(अलजज़ीरा की सहायता से)

विसंगतिको चाङमा ‘साइलेन्स किलिङ’ र ‘स्याबोटेज’ को असर रह्यो

विसंगतियों का बोझ और ‘साइलेंस किलिंग’ तथा ‘सैबोटेज’ का प्रभाव बरकरार

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के रूप में।

  • नेपाली कांग्रेस ने चुनाव में पराजय का कारण सदैव चली आ रही विसंगतियों का भार लेकर चुनाव में प्रवेश करते समय विशेष महामहाधिवेशन के विरोधी समूहों द्वारा किए गए असहयोग को बताया है, इसकी व्याख्या उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा ने की।
  • शर्मा के अनुसार कांग्रेस की पराजय के कारण पार्टी के आंतरिक गुटबंदी, पुरानी संगठनात्मक संरचना, सोशल मीडिया के एल्गोरिदम, गठबंधन का प्रभाव तथा नागरिक असंतोष प्रमुख हैं।
  • उपसभापति शर्मा ने स्पष्ट किया कि सभापति गगन थापा को इस्तीफा नहीं देना चाहिए और नए नेतृत्व से तुरंत विजय की अपेक्षा करना न्यायसंगत नहीं है।

६ चैत, काठमाडौं । नेपाली कांग्रेस की चुनाव में पराजय का मुख्य कारण विद्यमान विसंगतियों के बोझ के साथ चुनाव में प्रवेश करते समय विशेष महामहाधिवेशन का विरोध कर रहे समूहों द्वारा किया गया असहयोग माना गया है, जो प्रारंभिक विश्लेषण में सामने आया है।

चुनाव के बाद केंद्रीय समिति की पहली बैठक में उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा ने चुनावी पराजय का प्रारंभिक मूल्यांकन प्रस्तुत किया। उन्होंने पार्टी द्वारा अपेक्षित परिणाम न मिलने के २७ प्रमुख कारणों का विश्लेषण किया।

सभापति गगन थापा के दो दिन पहले इस्तीफा देने के कारण उनकी अनुपस्थिति में उपसभापति शर्मा ने बैठक की अध्यक्षता की। शर्मा के अनुसार पार्टी की पराजय में ‘साइलेंस किलिंग’ और ‘सैबोटेज’ दोनों का महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवारों को पराजित करने के लिए पार्टी के एक पक्ष का इशारा करते हुए नाम नहीं लिया।

शर्मा ने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने उम्मीदवार बनने की इच्छा जताई पर टिकट न मिलने के कारण गंभीर असहयोग किया। पूर्वसभापति शेरबहादुर देउवा भी उम्मीदवार बनने का प्रयास करने के बावजूद टिकट नहीं पाने वाले और पूर्व संस्थान के नेताओं द्वारा अपने दल के उम्मीदवारों को पराजित करने में भूमिका निभाने की बात विश्लेषकों ने विशेष महामहाधिवेशन समर्थकों के तौर पर बताई है।

शर्मा ने असहयोग के दूसरे पक्ष पर कहा, ‘विशेष महामहाधिवेशन का विरोध करना एक व्यक्ति की स्वतंत्रता है, लेकिन रूख चिन्ह के उम्मीदवारों को समर्थन न देना विशेष महामहाधिवेशन के विरोध का बहाना नहीं हो सकता। जहां कोई प्रत्याशी लगातार चुनाव लड़ता है वहां दूसरे उम्मीदवार को सहयोग करना सामान्य नैतिक जिम्मेदारी है।’

कुछ नेताओं ने ‘साइलेंस किलिंग’ द्वारा मौन रहते हुए भूमिका निभाई, जिसका उल्लेख शर्मा ने किया। पूर्वसभापति देउवा, कृष्णप्रसाद सिटौला, प्रकाशमान सिंह जैसे नेताओं पर असहयोग का आरोप लगाया गया है, जो विशेष महामहाधिवेशन समर्थकों की समझ में है।

शर्मा का कहना है कि जो लोग कांग्रेस के उम्मीदवारों को पराजित करने में भूमिका निभाते हैं, उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग तत्परता के साथ ‘सैबोटेज’ के कार्यों में लगे हैं। इससे पार्टी को ही नहीं, संबंधित व्यक्तियों के भविष्य की राजनीति पर भी बड़ा प्रभाव पड़ा है। मौनता और निष्क्रियता पर नैतिक प्रश्न उठ रहे हैं और अनुशासनात्मक जांच जारी है।’

चुनाव में अपेक्षित परिणाम न मिलने के मूल कारणों में विशेष महामहाधिवेशन के बाद पार्टी में समय की कमी के कारण नवीन दृष्टिकोण और नए नेतृत्व का संदेश मतदाताओं तक न पहुंचना भी शामिल है। लंबे समय से जारी नागरिक असंतोष को कम समय में विश्वास में न ले पाना भी एक कारण माना गया है।

शर्मा ने यह भी कहा कि पुरानी संगठनात्मक संरचना ने भी पराजय में भूमिका निभाई है, ‘‘हमने पुरानी प्रणाली से चुनाव लड़ा जो नई चुनौतियों का सामना करने में असफल रही। यह हमारी पराजय का संगठनात्मक कारण भी था।’

विशेष महामहाधिवेशन न होता तो चुनाव में सक्रियता कम होने से परिणाम और भी खराब होते। उन्होंने कहा, ‘‘विशेष महामहाधिवेशन से पार्टी में नयी ऊर्जा आई।’

उपसभापति शर्मा यह भी मानते हैं कि कांग्रेस की पराजय में पुरानी विसंगतियों का बड़ा योगदान है। उन्होंने यह भी कहा कि एक व्यक्ति द्वारा सम्मेलन से समिति गठन न करवाना भी इसका कारण है।

उन्होंने कहा, ‘‘विशेष महामਹाधिवेशन के पाँच दिन बाद उम्मीदवार पंजीकृत हुए और पचास दिन में चुनाव सम्पन्न हुआ। नए नेतृत्व ने पार्टी के निचले स्तर तक ऊर्जा पहुंचाई, लेकिन परिवर्तन का संदेश जल्दी नागरिकों तक नहीं पहुंचा। लंबे समय से असंतोष को जल्दी नहीं बदला जा सका।’’

शर्मा ने स्वीकार किया कि सभी पक्षों की भागेदारी रही इसलिए पराजय की जिम्मेदारी सभी की है, परन्तु सभापति को पद छोड़ने की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने कहा, ‘‘जो अंतिम स्तर पर आग लगने पर उसे बुझाने गए थे, अगर नहीं बुझाते तो आरोप लगाना उचित नहीं।’

‘पराजय के मूल में श्रृंखलाबद्ध विकृतियाँ’

शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की पराजय का कारण पिछले सरकारों, चुनावी गठबंधनों, राजनीतिक भागबंदी, कांग्रेस-एमाले गठबंधन, सामाजिक नेटवर्क के एल्गोरिदम आदि जैसे कारण हैं।

२०७४ में स्थिर सरकार की आशा में जनता ने तत्कालीन नेकपा को मतदान किया, लेकिन पांच साल स्थिर सरकार न चलने से जनता में वितृष्णा बढ़ी। २०७९ के चुनाव में कोई दल बहुमत न पाकर बड़ा दल होते हुए भी कांग्रेस सरकार बनाने में असफल हुई, जिससे नुकसान हुआ।

उन्होंने कहा, ‘‘नया संविधान लागू होने के बाद २०७४ के चुनावों में दो तिहाई स्थिर सरकार बनने का सुनहरा अवसर था जिसे भ्रष्टाचार कर क्षति पहुंचाई गई। पांच साल नहीं चला सके तो मतदाताओं ने विकल्प खोजा।’’

प्रधानमंत्री का बार-बार एक ही चेहरा होना भी नागरिकों में पुरानी पार्टियों से वितृष्णा बढ़ा रहा है। २०७९ के चुनावों में सबसे बड़ा दल होते हुए भी असफलता और विपक्ष में न होने से नुकसान हुआ।

गठबंधन ने चुनाव केंद्रित काम किया फिर भी पार्टी में असंतोष बढ़ा और हार झेलनी पड़ी। स्थानीय स्तर पर असंतोष और भदौ २३-२४ के जेएनजी विद्रोह तक की स्थिति को समय पर नहीं सुलझा सके।

शर्मा ने कहा, ‘‘जेएनजी विद्रोह के दौरान भी आपातकालीन स्थिति घोषित कर परिवर्तन के द्वार नहीं खोले। लगभग सवा सौ दिन व्यर्थ आंतरिक बहस में बीते।’

घरेलू राजनीति कमजोर होने से सोशल मीडिया में विरोध के स्वर मजबूत हुए जो जेएनजी विद्रोह में मुख्य भूमिका निभाकर चुनाव नतीजों तक पहुंचे।

शर्मा ने संगठन में विचारों के बजाय व्यक्तिमुखीकरण, गुटबंदी और अत्यधिक राजनीति ने कांग्रेस को चुनावी नुकसान पहुंचाया बताया। राज्य के अंगों में भागबंदी से नागरिक वितृष्णा बढ़ी।

उन्होंने कहा कि चरम राजनीतिकीकरण, सुशासन और भ्रष्टाचार नियंत्रण में विफलता ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया।

‘३५ वर्षों में कुछ नहीं हुआ यह धारणा बनी’

सबसे बड़ी पार्टी बनी रास्वपा द्वारा पिछले ३५ वर्षों में कुछ नहीं होने की धारणा फैलाने से कांग्रेस की पराजय हुई, शर्मा ने कहा। ‘‘यह तथ्य जनता तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाया कि कांग्रेस लगातार शासन में थी।’

सशस्त्र संघर्ष का अंत, लोकतंत्र की पुनःस्थापना और संविधान निर्माण जैसी उपलब्धियां जनता तक न पहुंच पाने के कारण पराजय मिली।

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस के नेतृत्व में देश ने नया संविधान और नया रास्ता पाया। जातीय, भौगोलिक और धार्मिक संघर्षों के बीच भी कांग्रेस ने संयम और परिपक्वता से देश को एकजुट किया। अनेक चुनौतियों के बावजूद देश ने आर्थिक और भौतिक प्रगति हासिल की, जो कांग्रेस के नेतृत्व और नीति का परिणाम है।’’

‘लोकप्रियता के आधार’ को नहीं समझ पाने से पराजय हुई। पुरानी सभी गलत बातें और कांग्रेस आने पर सब ठीक हो जाएगा जैसी धारणा ने जनमत को भ्रमित किया। सोशल मीडिया के एल्गोरिदम के प्रभाव से भी पराजय आई।

किसी दल के चुनाव जीतने के बाद विदेश न जाने का प्रचार भी कांग्रेस की हार का एक कारण बना। ‘‘कुछ दलों का कहना है कि चुनाव जीतें तो विदेश जाना जरूरी नहीं, इससे उनके परिवार में भी भावनात्मक प्रभाव पड़ा,’’ उन्होंने लिखा।

विशेष महामहाधिवेशन से आए नेतृत्व को हार का कारण नहीं मानते उपसभापति शर्मा। वे कहते हैं, ‘‘नए नेतृत्व से जल्दी जीत की उम्मीद रखना न्यायसंगत नहीं और सभापति का पद छोड़ना भी संगठन के प्रति गलत होगा।’

चट्‌यान से गुल्मी में 3 घायल, 3 बकरियाँ मृत

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के बाद तैयार।

  • गुल्मी के मालिका गाउँपालिका-२ दर्लिङ में चट्‌यान से ३२ वर्षीय गोमा खड्का, २८ वर्षीय निरु खड्का और २९ वर्षीय विष्णु खड्का घायल हुए हैं।
  • घायलों में से एक की हालत गंभीर बताई गई है और सभी को इलाज के लिए गुल्मी अस्पताल भेजा गया है, जिला पुलिस कार्यालय गुल्मी ने जानकारी दी।
  • उसी स्थान पर चट्‌यान से ३ बकरियाँ भी मरी हैं।

६ चैत, गुल्मी। गुल्मी के मालिका गाउँपालिका-२ दर्लिङ में चट्‌यान से ३ लोग घायल हो गए हैं।

शुक्रवार दोपहर को हुई यह घटना में ३२ वर्षीय गोमा खड्का, २८ वर्षीय निरु खड्का और २९ वर्षीय विष्णु खड्का घायल हुए हैं, पुलिस ने बताया।

जिला पुलिस कार्यालय गुल्मी के पुलिस उपरीक्षक (डीएसपी) गंगाबहादुर सारुले ने बताया कि घायलों में से एक की हालत गंभीर है और उन्हें उपचार के लिए गुल्मी अस्पताल भेजा गया है।

साथ ही, उसी जगह चट्‌यान से ३ बकरियाँ भी मरी हैं।

श्रीलंकाने अपने विमानस्थल पर अमेरिकी लड़ाकू विमान के उतरने की अनुमति नहीं di


६ चैत, काठमाडौं। श्रीलंकाने अपने विमानस्थल पर लड़ाकू विमान उतरने के लिए अमेरिका के अनुरोध को अस्वीकार किया है। शुक्रवार को श्रीलंकाई संसद में राष्ट्रपति अनुरा दिसानायके ने अपने देश की तटस्थ नीति का कड़ाई से पालन करते हुए अमेरिकी अनुरोध को ठुकरा दिया।

श्रीलंकाई समाचार संस्था डेली मिरर के अनुसार, इरान ने भी श्रीलंका से तीन जहाजों को सौहार्द यात्रा के लिए भेजने का अनुरोध किया था जबकि अमेरिका ने मत्तला विमानस्थल पर अपने दो लड़ाकू विमानों को उतरने की अनुमति मांगी थी। राष्ट्रपति दिसानायके ने बताया कि दोनों ही प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया गया।

‘श्रीलंका ने अमेरिका और इरान दोनों के अनुरोध अस्वीकार करते हुए अपनी तटस्थता बरकरार रखी है,’ दिसानायके ने स्पष्ट किया। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी भी पक्ष को सैन्य गतिविधियों के लिए अपनी जमीन का उपयोग करने की अनुमति नहीं देंगे।