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लेखक: space4knews

टर्कीको तटमा डुङ्गा डुब्दा १८ जनाको मृत्यु    – Online Khabar

तुर्की के तट पर डूबने से 18 लोगों की मौत

तुर्की के मुग्ला तट पर अवैध प्रवासी ले जा रही नाव के डूबने से कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है, तुर्की की तटरक्षक ने यह जानकारी दी है। बोडरम जिले के रिसॉर्ट से रवाना हुई यह नाव स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग छह बजे दुर्घटना का शिकार हुई थी। तुर्की की तटरक्षक ने बचाव के लिए आवश्यक नावें और जलयान घटनास्थल पर तैनात किए हैं और लापता व्यक्तियों की खोज जारी है।

तुर्की के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत मुग्ला तट पर बुधवार को अवैध प्रवासी ले जा रही नाव के डूबने से कम से कम 18 प्रवासियों की मृत्यु हुई और अन्य 21 लोगों को बचा लिया गया, तुर्की की तटरक्षक से मिली जानकारी के अनुसार। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोडरम जिले के रिसॉर्ट से प्रस्थान करने वाली नाव स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग छह बजे दुर्घटनाग्रस्त हुई। दुर्घटना की सूचना मिलने पर तुर्की तटरक्षक ने आपातकालीन सुरक्षा प्रबंधन के लिए आवश्यक नावें और जलयान घटनास्थल पर भेजे। अधिकारियों ने लापता व्यक्तियों की खोज और बचाव कार्य लगातार जारी होने की जानकारी दी है।

१४ विद्यार्थी संगठन द्वारा जारी संयुक्त बयान: छात्र आंदोलन किसी की कृपा से नहीं मिला है

१८ चैत, काठमांडू। सरकार द्वारा सरकारी सुधार से संबंधित १०० कार्यसूचियों में से छात्र संगठन से सम्बंधित विषय को लेकर १४ छात्र संगठनों ने एकजुट होकर आवाज उठाई है। बुधवार को जारी किए गए संयुक्त बयान के माध्यम से ये संगठन इस बात को स्पष्ट किया है कि नेपाल का छात्र आंदोलन किसी की दया, कृपा या अनुकंपा से प्राप्त नहीं हुआ है। बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार की पहली मंत्रिपरिषद की बैठक में सरकारी सुधार से संबंधित १०० कार्यसूचियों को मंजूरी दी गई थी। इसी कार्यसूची के बिंदु संख्या ८६ पर छात्र संगठनों ने अपनी ध्यानाकर्षण व्यक्त की है।

‘नेपाल का छात्र आंदोलन बलिदानी संघर्ष की नींव पर विकसित होता रहा है और यह राष्ट्र, राष्ट्रीयता, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, शैक्षिक सुधार और छात्र अधिकारों के पक्ष में निरंतर सक्रिय है,’ बयान में कहा गया है, ‘इस आंदोलन का इतिहास किसी की दया, कृपा या अनुकंपा से प्राप्त नहीं हुआ है।’ राणा शासन से लेकर लोकतांत्रिक आंदोलन तक के बलिदानी संघर्ष में छात्र संगठनों ने अपनी वीरता का इतिहास प्रस्तुत किया है, यह भी बयान में उल्लेख किया गया है।

‘छात्र आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को नजरअंदाज करते हुए शिक्षा क्षेत्र की जटिल समस्याओं के समाधान के नाम पर छात्र संगठनों पर प्रतिबंध और निषेध लगाने का सरकार का निर्णय दीर्घकालीन रूप से सकारात्मक परिणाम नहीं दे सकता है,’ संयुक्त बयान में कहा गया है। विश्वविद्यालयों की कई समस्याओं को स्वीकार करते हुए छात्र संगठनों ने इन समस्याओं के वास्तविक कारणों की खोज और समाधान के लिए राज्य को व्यापक अध्ययन के बाद नीतियाँ एवं कार्यक्रम विकसित करने का सुझाव दिया है।

ऐसे तथ्यों की अनदेखी कर शिक्षा क्षेत्र की सभी समस्याएं छात्र संगठनों पर थोपने की सरकार की दृष्टि को अपरिपक्व एवं सतही बताया गया है। छात्र आंदोलन को समय के अनुसार पुनर्गठन करने के विषय में स्वयं भी आवश्यक समझकर बहस कर रहे हैं, जिसका परिणाम अब दिखने लगा है, यह भी बयान में याद दिलाया गया है। ‘विचार के आधार पर संगठन में शामिल होने का अधिकार नेपाल के संविधान द्वारा सुनिश्चित मूलभूत अधिकार है। किसी के विचार पर प्रतिबंध लगाना लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विपरीत हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानदंडों के अनुरूप भी नहीं होता,’ यह बात बयान में उल्लेखित है।

रूसी सैन्य विमान दुर्घटना में २९ लोगों की दर्दनाक मौत

क्रीमिया में रूसी सैन्य विमान एएन-२६ तकनीकी समस्याओं के कारण पहाड़ से टकरा गया है। विमान में सवार सभी २९ लोग, जिनमें छह चालक दल के सदस्य और २३ यात्री शामिल थे, की मृत्यु हो गई है। स्थानीय समयानुसार मंगलवार शाम ६ बजे विमान के साथ संपर्क टूट गया था और खोज दल ने दुर्घटना स्थल पर विमान के भग्नावशेष पाए।

रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, एएन-२६ विमान तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हुआ। विमान में सवार सभी २९ लोगों के निधन की पुष्टि की गई है। दुर्घटना के बाद खोज एवं बचाव कार्य के दौरान भग्नावशेष बरामद किए गए हैं।

के हो चट्याङ ? जसले १२ वर्षमा लियो एक हजार बढीको ज्यान

चट्‌याङ क्या है? जिसने 12 वर्षों में 1000 से अधिक लोगों की जान ली है

18 चैत, काठमांडू। गृह मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकालीन कार्य संचालन केंद्र द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, नेपाल में पिछले 12 वर्षों में चट्‌याङ के कारण भारी जनधन का नुकसान हुआ है। राष्ट्रीय विपद् जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ हाइड्रोलॉजिस्ट राजेंद्र शर्मा के अनुसार, विप्रति 2070 से 2082 फागुन मसान्त तक देशभर में 3,386 चट्‌याङ की घटनाएँ दर्ज हुई हैं। इनमें कुल 1,073 लोगों की मृत्यु हुई है। इनमें 460 पुरुष, 303 महिलाएं और 312 की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। चट्‌याङ से 3,408 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 1,317 पुरुष और 1,633 महिलाएं शामिल हैं। चार हजार दो सौ नवासी परिवार चट्‌याङ से प्रभावित हुए हैं, बताया केंद्र ने। इसके अलावा 104 घरों को पूर्ण और 390 घरों को आंशिक क्षति पहुँची है। पूर्वाधार क्षेत्र में 114 गोठ और 4,849 पशुचौपायों को नुकसान हुआ है। केंद्र के अनुसार, चट्‌याङ की घटनाओं से कुल 11 करोड़ 82 लाख 18 हजार 260 की अनुमानित आर्थिक हानि हुई है, वरिष्ठ हाइड्रोलॉजिस्ट शर्मा ने जानकारी दी।

इस अवधि में मकवानपुर में सबसे अधिक 182 चट्‌याङ की घटनाएँ दर्ज हुई हैं, जहाँ 41 लोग मरे और 75 घायल हुए। साथ ही 300 परिवार प्रभावित हुए। झापा में 113, उदयपुर में 104, दैलेख में 105 और मोरंग में 95 घटनाएँ हुई हैं। मानवीय नुकसान की दृष्टि से मकवानपुर में सबसे अधिक 75, मोरंग में 42 और उदयपुर में 39 लोग मरे, राष्ट्रीय आपातकालीन कार्य संचालन केंद्र ने बताया। पूर्वी पहाड़ी इलाकों में भी चट्‌याङ का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा गया है। खोत्ताङ में 92, संखुवासभा में 86 और ओखलढुंगा में 76 घटनाएँ दर्ज हुईं, जिससे इन क्षेत्रों में चट्‌याङ का सतत जोखिम प्रदर्शित होता है।

मधेस प्रदेश के सप्तरी, सिराहा, धनुषा, पर्सा आदि जिलों में दर्जनों लोग चट्‌याङ के कारण मरे हैं, राष्ट्रीय आपातकालीन कार्य संचालन केंद्र के विवरण में उल्लेख है। पश्चिमी नेपाल के रोल्पा में 91, गुल्मी और प्युठान में 72-72 तथा अछाम में 73 घटनाएँ हुई हैं। आर्थिक नुकसान में झापा सबसे आगे है, लगभग एक करोड़ 7 लाख के बराबर की क्षति हुई है जबकि खोत्ताङ, उदयपुर और संखुवासभा में भी भारी नुकसान हुआ। विशेषज्ञों ने बताया कि मानसून और प्री-मानसून के दौरान चट्‌याङ की घटनाएँ अधिक होती हैं, इसलिए सुरक्षा उपाय और जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।

पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर वार्षिक औसतन 67 लोगों की मौत चट्‌याङ के कारण होती है। गृह मंत्रालय के अनुसार, 2077 में 248 घटनाएँ हुईं, जिससे 70 लोग मरे और 248 घायल हुए। विप्रति 2078 में घटनाएँ कम होकर 203 हुईं, जिनमें 56 की मौत और 179 घायल हुए। वरिष्ठ हाइड्रोलॉजिस्ट शर्मा के अनुसार, 2079 में 290 घटनाएँ दर्ज हुईं, 84 मौतें और 238 घायल, 2080 में 247 घटनाएँ, 44 मौतें और 228 घायल, 2081 में 436 घटनाएँ, 79 मौतें और 322 घायल हुए। 2082 की वैशाख से चैत्र 14 तक 416 घटनाएँ हुईं, जिनमें 47 की मौत और 307 घायल बताया गया।

चट्‌याङ क्या है? राष्ट्रीय विपद् जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा प्रकाशित आपदा जोखिम न्यूनीकरण से संबंधित हाता पुस्तक के अनुसार, चट्‌याङ बादल से जमीन तक बहने वाली उच्च मात्रा की विद्युत धारा है। विभिन्न ऊंचाइयों पर विपरीत चार्ज वाले बादल जब पास आते हैं तो अचानक विद्युत प्रवाह होता है, जिससे अत्यधिक शक्ति उत्पन्न होकर तेज धमाका और आग के साथ विद्युत तरंग पृथ्वी की सतह पर आती है, जिससे चट्‌याङ का खतरा बनता है। बस्तियाँ, जंगल, वनस्पति और भौगोलिक परिवेश चट्‌याङ के जोखिम निर्धारण में भूमिका निभाते हैं, किंतु मूलतः यह एक दुर्घटना है। चट्‌याङ का सबसे ज्यादा खतरा खुले क्षेत्रों में काम करने वाले किसानों, मज़दूरों और पशुपालकों को होता है। ऊँची इमारतें, विद्यालय, अस्पताल, शॉपिंग मॉल, विद्युत और टेलीफोन लाइन में चट्‌याङ प्रतिबंधक तकनीक लगाकर जनधन की सुरक्षा की जा सकती है।

सरकारी वकील कार्यालय में रमेश लेखक का बयान शुरू

१८ चैत, काठमांडू। पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक का बयान आज से जिला सरकारी वकील कार्यालय में शुरू हुआ है। जिला प्रहरी परिसर काठमांडू के एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर से लेखक का बयान जारी है।

लेखक को जिला अदालत काठमांडू से ५ दिनों का अतिरिक्त समय दिया गया था। भदौ २३ और २४ तारीख को जनजी आंदोलन के दौरान तत्कालीन गृह मंत्री के रूप में किए गए कार्यकलापों के बारे में उनसे सवाल किए गए थे। जनजी आंदोलन की घटना की जांच के लिए सरकार द्वारा गठित जाँच आयोग ने लेखक को जांच के लिए सिफारिश की थी।

लेखक के साथ-साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भी उसी सिफारिश में शामिल किया गया था। इस सिफारिश के आधार पर शनिवार सुबह ओली और लेखक दोनों को गिरफ्तार किया गया था।

इरान ने कुवैत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमला किया, ईंधन टैंक में लगी आग

इरान ने कुवैत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया है, जिससे ईंधन भंडारण टैंक में आग लग गई है। कुवैत की नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के प्रवक्ता अब्दुल्लाह अल-राज्ही ने बताया कि इस हमले में कोई मानवीय क्षति नहीं हुई है।

इस हमले का संबंध २८ फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा इरान पर किए गए हमले के बाद बढ़े क्षेत्रीय तनाव से है। बुधवार को हुए इस हमले के कारण ईंधन भंडारण टैंक में भारी आग लगी है। कुवैत की सरकारी समाचार एजेंसी कुना (कुवैत न्यूज एजेंसी) ने भी इस घटना में किसी मानवीय क्षति की अनुपस्थिति की पुष्टि की है।

इरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र के अमेरिकी सहयोगियों को लक्षित करते हुए हमले तीव्र कर दिए हैं। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां सुरक्षा स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना रही हैं। घटना के बाद हवाई अड्डे के क्षेत्र की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और आग को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं। हाल के दिनों में कुवैत हवाई अड्डे और वहां मौजूद ईंधन भंडारण केंद्रों पर बार-बार हमले हो रहे हैं।

पंकज राईद्वारा अध्यक्षमा स्वतन्त्र उम्मेदवारी घोषणा

पंकज राई ने अध्यक्ष पद के लिए स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा पूरी हुई।

  • पश्चिमाञ्चल यातायात व्यवसायी (ट्रक) समिति की 25वीं वार्षिक आम सभा और 14वीं अधिवेशन चैत 20 और 21 तारीख को बुटवल में आयोजित होने जा रही है।
  • उम्मीदवार पंकज राई ने अध्यक्ष पद के लिए स्वतंत्र उम्मीदवारी घोषित करते हुए 14 बिंदुओं की प्रतिबद्धता प्रस्तुत की है।
  • राई ने मोबाइल एप प्रणाली विकसित करने, सामाजिक सुरक्षा कोष में चालकों को शामिल करने, और भारत के नंबर प्लेट वाले ट्रकों के नेपाल में चलने के समय को कम करने की प्रतिबद्धता जताई है।

18 चैत, बुटवल। पश्चिमाञ्चल यातायात व्यवसायी (ट्रक) समिति में नया नेतृत्व चुनने के लिए चुनावी गतिविधियाँ शुरू हो गई हैं। इस समिति की 25वीं वार्षिक आम सभा और 14वीं अधिवेशन इस चैत 20 और 21 तारीख को बुटवल में आयोजित होने जा रहे हैं। लगभग 2 हजार ट्रक और 1300 व्यवसायी से जुड़े इस समिति को नेपाल का सबसे बड़ा ट्रक समिति माना जाता है।

दो वर्ष के कार्यकाल के लिए नया नेतृत्व चुनने के मकसद से युवा व्यवसायी पंकज राई ने अध्यक्ष पद के लिए स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया है। राई ने बुधवार को बुटवल में एक पत्रकार सम्मेलन के दौरान 14 बिंदुओं वाली प्रतिबद्धता सार्वजनिक की।

राई ने कारोबारियों, स्वरोजगारियों और मजदूरों के बीच समन्वय स्थापित कर सड़क दुर्घटना के बाद होने वाली समस्याओं तथा जटिल प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए मोबाइल एप सिस्टम विकसित करने और शीघ्र समस्या समाधान की व्यवस्था प्राथमिकता देने का इरादा जाहिर किया है।

व्यापार-सहयोगी कानून बनाने के लिए व्यावहारिक और कारोबारी हितों के खिलाफ नियमों में सुधार के लिए सरकार से पहल करने, चालकों और सहचालकों को सामाजिक सुरक्षा कोष से जोड़ने, बीमा, प्रशिक्षण तथा स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था चलाने का भी राई ने संकल्प लिया है।

चालकों के स्वास्थ्य और बीमा की सुनिश्चितता, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और दुर्घटना बीमा कार्यक्रम का संचालन, व्यवसायी और कर्मचारियों के बीच सम्मान व सहयोग पर आधारित संबंधों का विकास, पार्किंग संबंधी समस्याओं का समाधान, ईंधन और माल चोरी रोकने के लिए सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना आदि राई की प्रतिबद्धताओं में शामिल हैं।

इसके अलावा, राई ने भारतीय नंबर प्लेट वाले ट्रकों को नेपाल में 72 घंटे के बजाय केवल 24 घंटे तक चलाने के नियम को घटाने, रोड परमिट प्रक्रिया को सरल व कारगर बनाकर वार्षिक एक बार इसे अनिवार्य करने, टोल-फ्री हेल्पलाइन सेवा शुरू करने तथा दुर्घटना तथा आपातकालीन स्थिति में त्वरित सहायता प्रदान करने की भी बात कही। उन्होंने कहा, ‘सुरक्षित ड्राइविंग प्रशिक्षण, ट्रैफिक नियमों और आपातकालीन प्रबंधन से संबंधित नियमित प्रशिक्षण आयोजित करने मेरी प्रतिबद्धता है। मैं संस्था के कार्यों में पारदर्शिता और व्यवसायियों की समस्या का स्थायी समाधान प्राथमिकता देता हूँ।’

सामाजिक सुरक्षा कोष के सुचारू संचालन के लिए हेल्प डेस्क स्थापित करने और सदस्यता विस्तार को प्रभावी बनाने की भी योजना राई के प्रस्तावों में शामिल है। समिति के नेतृत्व के लिए नेपाली कांग्रेस से जुड़े प्रताप कार्की और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े व्यवसायी यम जीसी के नेतृत्व में दो अन्य समूह भी पैनल बनाकर उम्मीदवारी के लिए तैयारी कर रहे हैं।

विदेशी रोजगार जाने वालों को अब सरकार देगी अभिमुखीकरण प्रशिक्षण

समाचार सारांश

  • सरकार ने विदेशी रोजगार जाने वाले श्रमिकों को दिया जाने वाला अभिमुखीकरण प्रशिक्षण पूरी तरह से ऑनलाइन प्रणाली में संचालित करने की योजना बनाई है।
  • श्रम मंत्री दीपककुमार साह ने बताया कि पाठ्यक्रम आधारित 15-16 घंटे के वीडियो तैयार कर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा और श्रमिक भी ऑनलाइन प्रशिक्षण लेंगे।
  • प्रशिक्षण प्रदान करने वाले 153 संस्थान शुल्क लेते हैं, सरकार ने शुल्क मात्र 700 रुपये निर्धारित किया है और अधिक वसूली पर अनुमति रद्द करने की चेतावनी दी है।

18 चैत, काठमांडू। विदेशी रोजगार जाने वाले श्रमिकों को विदेश जाने से पहले दिया जाने वाला अभिमुखीकरण प्रशिक्षण अब सरकार द्वारा संचालित किया जाएगा।

पहले विशेष संस्थानों द्वारा संचालित यह प्रशिक्षण अब श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय की ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से संचालित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

वर्ष 2003 (वि.सं. 2060) से विदेशी रोजगार जाने वाले श्रमिकों को पूर्व-प्रस्थान अभिमुखीकरण प्रशिक्षण निश्चित संस्थानों के माध्यम से दिया जाता रहा है।

वर्तमान में विदेशी रोजगार विभाग में सूचीबद्ध 153 संस्थान अभिमुखीकरण प्रशिक्षण दे रहे हैं। लेकिन सरकार के माध्यम से जाने वाले श्रमिकों को भैंसेपाटी स्थित राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रतिष्ठान से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

अन्य श्रमिकों के लिए यह प्रशिक्षण प्रदायक संस्थानों द्वारा संचालित होता रहा है। मंत्रालय अब पाठ्यक्रम आधारित दृश्य सामग्री डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है।

पूर्व-प्रस्थान अभिमुखीकरण प्रशिक्षण (पीडीओटी) को पूरी तरह से ऑनलाइन प्रणाली पर आधारित बनाने की योजना श्रम मंत्रालय की है।

इस योजना के लागू होने के बाद वर्तमान में प्रशिक्षण देने वाले 153 संस्थानों का भविष्य संकट में दिखाई दे रहा है। ये संस्थान विदेशी रोजगार ऐन 2064 और अभिमुखीकरण प्रशिक्षण संचालन कार्यविधि 2076 के मापदंडों के अनुसार प्रशिक्षण दे रहे हैं।

प्रत्येक प्रशिक्षु से ये संस्थान 2,100 रुपए शुल्क लेते हैं। हालांकि विदेशी रोजगार विभाग ने शुल्क केवल 700 रुपए निर्धारित किया है और अधिक शुल्क लेने पर अनुमति निरस्त करने की चेतावनी दी है।

सरकार अपनी 100 दिन की 100 कार्यसूची के तहत अभिमुखीकरण प्रशिक्षण को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी कर रही है।

श्रम मंत्री दीपककुमार साह ने बताया, “अब अभिमुखीकरण प्रशिक्षण पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा। 15-16 घंटे के पाठ्यक्रम आधारित वीडियो तैयार कर ऑनलाइन रखे जाएंगे और श्रमिक ऑनलाइन ही शिक्षा ग्रहण करेंगे।”

“पाठ्यक्रम अनुसार 15-16 घंटे का वीडियो तैयार किया जाएगा, जो जिस देश में जाना है उसी देश के अनुसार होगा। वीडियो देखने के समय की माप और ऑनलाइन उपस्थिति भी आवश्यक होगी,” मंत्री साह ने कहा।

मंत्रालय प्रशिक्षण को ऑनलाइन नि:शुल्क संचालित करने की भी तैयारी कर रहा है और श्रमिकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

फिलहाल अभिमुखीकरण प्रशिक्षण प्रशिक्षण प्रदायक संस्थानों के माध्यम से ही दिया जा रहा है और जब पूरी तैयारी होगी तभी ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। विदेश रोजगार बोर्ड को भी निर्देश दे दिया गया है।

हालांकि इस योजना से प्रशिक्षण प्रदायक संस्थान चिंतित हैं। विदेशी रोजगार अभिमुखीकरण व्यवसायी महासंघ के अध्यक्ष राजाराम गौतम ने कहा कि कानूनी आधार पर स्थापित संस्थानों के भविष्य के बारे में राज्य को जवाब देना चाहिए।

“अब शायद देश में कानून की जरूरत नहीं रही, हमने जो निवेश किया है, उसे कैमरा लगवाने तक कहा जाता है,” उन्होंने प्रश्न किया, “यह बड़ी पूंजी लगाकर किया गया काम है और अब ऐसा किया जा रहा है। सरकार की रणनीति क्या है? व्यवसायियों की स्थिति क्या होगी? इस पर ध्यान देना होगा।”

उन्होंने कहा, “इस क्षेत्र में लगभग 1,000 से 1,200 रोजगार प्रतिवर्ष प्रदान किए जाते हैं और करोड़ों की पूंजी निवेश है। यदि सरकार विकल्प नहीं देती तो संविधान के रोजगार के मौलिक अधिकार के बाबजूद हमारी रोजगार और निवेश की गारंटी क्या होगी?” उन्होंने अपनी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने श्रमिकों के रोजगार, व्यवसायी और उनके परिवारों के भविष्य पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र स्थापना काल से ही अस्थिर रहा है और हाल ही में सरकार के निर्देशों के अनुसार करोड़ों रुपए का निवेश किया गया है।

“हाल ही में कई ने ऋण लेकर निवेश किया है, हम सरकार के मानकों के अनुसार काम कर रहे हैं,” उन्होंने कहा, “पहले सभी प्रशिक्षु प्रशिक्षण के लिए आते थे और व्यवसायिक स्तर पर करने की तैयारी थी, लेकिन वह कभी पूरा नहीं हुआ।”

तत्कालीन श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री शरतसिंह भंडारी ने अभिमुखीकरण प्रशिक्षण संचालन कार्यविधि 2076 में संशोधन कर शुल्क 700 से बढ़ाकर 2,100 रुपये किया था और भाषा अध्ययन एवं प्रमाणपत्र परीक्षा शुल्क भी जोड़ा गया था।

नई व्यवस्था के तहत तीन दिन का प्रशिक्षण और अंत में भाषा अध्ययन एवं प्रमाणपत्र परीक्षा अनिवार्य था।

हालांकि प्रशिक्षण प्रदायक संस्थान 2,100 रुपए शुल्क लेकर भी केवल दो दिन का प्रशिक्षण दे रहे थे और वह भी पुराने पाठ्यक्रम के अनुसार।

इस विवाद के बाद विभाग ने 13 असोज 2081 में जारी विज्ञप्ति में प्रशिक्षण शुल्क 700 रुपए ही रहने की पुष्टि की थी।

साल 2018 में तत्कालीन सचिव पूर्णचंद्र भट्टराई की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय विदेशी रोजगार सुधार कार्यदल ने बताया था कि प्रमाणपत्र मिलने के बाद प्रशिक्षण की प्रवृत्ति बढ़ रही है और उचित शिक्षण सामग्री, प्रशिक्षण प्रदायक की ईमानदारी, निगरानी प्रभावकारिता, सीखने के मूल्यांकन प्रणाली एवं गंतव्य देश में प्रभावकारी प्रशिक्षण व्यवस्था का अभाव के कारण प्रशिक्षण प्रभावी नहीं हो पा रहा।

इसी आधार पर श्रम मंत्रालय ने 8 फागुन 2076 को पाठ्यक्रम में संशोधन कर प्रशिक्षण अवधि को दो दिन (10 घंटे) से बढ़ाकर तीन दिन (18 घंटे) कर दिया था और गंतव्य देश के अनुसार वर्गीकरण किया गया था।

अब सरकार प्रशिक्षण प्रदायक संस्थानों के माध्यम से दिया जाने वाला प्रशिक्षण भी ऑनलाइन नि:शुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रही है।

हेटौंडा में सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत

मकवानपुर के हेटौंडा उपमहानगरपालिका-९ गुम्बाचोक स्थित पूर्व-पश्चिम राजमार्ग पर दो मोटरसाइकिलों के टकराने से एकता वैद्य की मौत हो गई। हादसे में घायल हुए मोटरसाइकिल चालक रोनिक कार्की और पुष्पलाल गुरुङ का इलाज जारी है। दुर्घटना में शामिल ट्रक चालक बद्री गडरिया को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। १८ चैत्र, हेटौंडा।

मकवानपुर के हेटौंडा उपमहानगरपालिका-९ गुम्बाचोक में बुधवार को हुई सवारी दुर्घटना में एक की मौत और दो घायल होने की जानकारी मकवानपुर पुलिस ने दी है। हेटौंडा से रातोमाटे की ओर जा रही प्रदेश ३-०२-००७ प ७६८३ नंबर की मोटरसाइकिल और विपरीत दिशा से आ रही ना ४४ प ९३५४ नंबर की मोटरसाइकिल के आपस में टकराने की पुष्टि की गई है।

दुर्घटना में प्रदेश ३-०२-००७ प ७६८३ नंबर की मोटरसाइकिल पर पीछे सवार हेटौंडा-९ निवासी १८ वर्षीय एकता वैद्य की मौत हो गई। मोटरसाइकिल से टकराने के बाद मृतक वैद्य उसी दिशा से आ रहे ना ६ ख ३१४५ नंबर के सीमेंट से लदे ट्रक से टकरा गईं, जिससे उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। उनका हेटौंडा अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया।

दुर्घटना में उक्त मोटरसाइकिल चालक हेटौंडा-४ कर्रा के १९ वर्षीय रोनिक कार्की सामान्य रूप से घायल हुए हैं, जबकि दूसरी मोटरसाइकिल चालक चितवन इच्छाकामना गाउँपालिका-५ बदेलटार के २१ वर्षीय पुष्पलाल गुरुङ मध्यम रूप से घायल हैं। जिला प्रहरी कार्यालय मकवानपुर ने जानकारी दी है। इस दुर्घटना में शामिल ट्रक चालक बाँके कोहलपुर नगरपालिका-१४ के ३३ वर्षीय बद्री गडरिया को पुलिस ने हिरासत में लिया है।

कुर्द कौन हैं?

समाचार सारांश

  • कुर्द समुदाय पश्चिम एशिया में विभाजित है और उनका अपना स्वतंत्र राज्य नहीं होने के बावजूद उनकी संख्या लगभग 2.5 करोड़ से 4.5 करोड़ के बीच अनुमानित है।
  • अमेरिकी गुप्तचर एजेंसी CIA इरान के कुर्द सशस्त्र समूहों को हथियार उपलब्ध कराने की योजना बना रही है, और इरानी कुर्द विद्रोह के संकेत दे रहे हैं।
  • इराक, तुर्की, सीरिया और इरान के कुर्द वर्षों से अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि तुर्की PKK के खिलाफ युद्ध जारी रखे हुए है।

१८ चैत्र, काठमांडू। कुर्द समुदाय पश्चिम-एशिया में बसे एक जातीय अल्पसंख्यक समूह हैं जिनका अपना स्वतंत्र राष्ट्र नहीं है।

विश्व में उनकी संख्या लगभग 2.5 करोड़ से 4.5 करोड़ के बीच मानी जाती है। इनमें से अधिकांश पश्चिमी ईरान, पूर्वी तुर्की, उत्तरी इराक, सीरिया और आर्मेनिया के पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करते हैं। लेकिन कुर्दों के आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध न होने के कारण उनकी वास्तविक संख्या ज्ञात नहीं है।

पहले विश्व युद्ध के बाद ऑटोमन साम्राज्य के पतन के दौरान, पश्चिमी सहयोगी राष्ट्रों ने ऑटोमन क्षेत्र का विभाजन किया और कुर्द राज्य की स्थापना का प्रस्ताव रखा था। लेकिन तुर्की के स्वतंत्रता संग्राम के बाद नई तुर्की सरकार ने पूरे एनाटोलियन प्रायद्वीप पर नियंत्रण स्थापित कर लिया।

इस प्रक्रिया में कुर्दों को तुर्की, ईरान, इराक और सीरिया की नई सीमाओं में बांट दिया गया और वे दशकों से अपने राष्ट्रीय अधिकारों के लिए विरोध और विद्रोह जारी रखे हुए हैं।

कुर्दों की लगभग आधी आबादी तुर्की में रहती है, जहाँ वे देश के सबसे बड़े जातीय अल्पसंख्यक समूह हैं।

अधिकांश कुर्द सुन्नी मुसलमान हैं, लेकिन उनके धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक परंपराओं में विविधता भी देखी जाती है। कुर्ड भाषा की कई बोलियाँ यहां प्रचलित हैं।

क्षेत्रीय कुर्द राजनीतिक समूह विभाजित होने के बावजूद, अधिकांश कुर्द अधिक अधिकार, स्वतंत्रता और स्वायत्तता के लिए साझा संघर्ष में एकजुट हैं।

ईरान के कुर्द कौन हैं?

ब्रिटिश सरकार के अनुमान के अनुसार, ईरान की कुल जनसंख्या में कुर्दों का हिस्सा 8 से 17 प्रतिशत तक है। पश्चिमी ईरान के कुर्द क्षेत्र ने लंबे समय से अधिक स्वायत्तता या स्वतंत्रता की मांग की है।

1946 में एक अल्पकालीन कुर्दिश राज्य, “महावाद गणराज्य” की स्थापना हुई, जो एक वर्ष से कम समय तक टिक पाया, इसके बाद ईरानी सैनिकों ने इसे समाप्त कर दिया। इसे आधुनिक कुर्द गणराज्य का पहला उदाहरण माना जाता है।

उसके बाद के दशकों में ईरानी सशस्त्र कुर्द समूहों ने सरकार के खिलाफ संघर्ष जारी रखा है। ये समूह इराक-ईरान सीमा पर सैन्य चौकियों से हमले करते हैं और हजारों लड़ाके वहां तैनात हैं।

एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य मानवाधिकार संगठनों ने ईरान में कुर्द अल्पसंख्यकों पर हो रहे व्यापक मानवाधिकार उल्लंघनों का उजागर किया है।

यहां कुर्द भाषा की शिक्षा पर प्रतिबंध है, कुर्द नामों का पंजीकरण रोका गया है और कुर्द कार्यकर्ताओं की मनमानी गिरफ्तारी जारी है।

इराक, तुर्की और सीरिया के कुर्द कौन हैं?

इराक में कुर्द आबादी कुल जनसंख्या का लगभग 15 से 20 प्रतिशत है। वे “कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार” (KRG) द्वारा संचालित अर्ध-स्वायत्त क्षेत्रों में रहते हैं, जिनकी राजधानी अर्बिल है।

2017 में KRG और कुर्द सुरक्षा बल द्वारा नियंत्रित विवादित क्षेत्रों में जनमत संग्रह हुआ था, जिसमें अधिकांश ने स्वतंत्रता के पक्ष में वोट किया। लेकिन इराक सरकार ने इसे अवैध घोषित कर दिया और संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी इसका समर्थन नहीं किया।

सीरिया में लगभग 2.4 करोड़ की जनसंख्या में कुर्दों का हिस्सा 10 प्रतिशत है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में ISIS के खिलाफ लड़ने के लिए “सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेस” (SDF) के माध्यम से कुर्दों को हथियार देने की अनुमति दी गई थी।

तुर्की में कुर्द समुदाय सबसे बड़ा जातीय अल्पसंख्यक है, जो कुल जनसंख्या का लगभग 20 प्रतिशत है।

तुर्की सरकार दशकों से “कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी” (PKK) के खिलाफ युद्ध कर रही है। PKK स्वायत्त कुर्द राज्य की स्थापना का लक्ष्य रखता है और छह वर्षों से हिंसक गतिविधियां कर रहा है, जिसे अमेरिका एक आतंकी संगठन के रूप में मानता है।

“काउंसिल ऑन फॉरिन रिलेशंस” (CFR) के अनुसार, तुर्की-कुर्द संघर्ष में हजारों लोग मारे गए हैं, ज्यादातर कुर्द ही। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान कुर्द राष्ट्रवाद के विरोध में सख्त रुख अपनाए हुए हैं।

एर्दोगान ने 2024 में सीरियाई सरकार और SDF के बीच हुए समझौते को तुर्की और PKK लड़ाकों के बीच शांति प्रक्रिया में सहायक बताया है।

ईरान युद्ध के बारे में नवीनतम अपडेट क्या है?

सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी गुप्तचर संस्था CIA ईरानी कुर्द सशस्त्र बलों को हथियार उपलब्ध कराने की तैयारी में है, जिसका उद्देश्य इरान में विद्रोह फैलाना है। डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के दौरान इरान-विरोधी समूहों और इराक के कुर्द नेताओं के साथ सैन्य सहयोग पर चर्चा हुई थी।

इरानी कुर्द समूह सार्वजनिक रूप से विद्रोह के संकेत दे रहे हैं और ईरानी सेना के सदस्यों को विद्रोह में शामिल होने के लिए बुला रहे हैं।

इराकी कुर्दिस्तान सरकार ने कहा है कि वह ईरानी कुर्द विरोधी दलों को ईरान भेजने की योजना में शामिल नहीं होगी।

CIA का सहयोग युद्ध शुरू होने से कुछ महीने पहले ही शुरू हो चुका था और कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार के कुछ शीर्ष अधिकारियों ने इसे पुष्टि भी की है।

इराकी कुर्दों का समर्थन हथियार ट्रांसपोर्ट के लिए आवश्यक है ताकि उन्हें सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जा सके और कुर्दिस्तान को एक हमले का आधार क्षेत्र बनाया जा सके।

इराकी कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार के एक उच्च अधिकारी ने कहा, ‘यह बहुत खतरनाक है, लेकिन हम क्या कर सकते हैं? हम अमेरिका से छुपा नहीं सकते। हम बहुत चिंतित हैं।’

लंदन स्थित रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टिट्यूट के शोधकर्ता अर्बन कनिंगहैम बताते हैं कि CIA और संभवतः इजरायली गुप्तचर संस्था मोसाद ईरानी अल्पसंख्यक समूहों से संपर्क कर रही है।

वे केवल कुर्दों ही नहीं बल्कि बलूच और अज़रबैजानी जैसे अन्य अल्पसंख्यकों के साथ भी बातचीत कर रहे हैं।

कनिंगहैम ने कहा, ‘म आश्चर्यचकित हूं कि यह जानकारी अब क्यों सार्वजनिक हुई? यह ईरान के भीतर और बाहर सभी प्रभावित समूहों के लिए बेहद जोखिम भरा है।’

अमेरिकी संलिप्तता और अतीत की धोखाधड़ी

1991 में अमेरिकी नेतृत्व वाले बहुराष्ट्रीय सैन्य बल ने कुवैत से सद्दाम हुसैन की ईराकी सेना को खदेड़ने के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश ने ईराकी सेना और जनता से तानाशाह के खिलाफ विद्रोह करने का आह्वान किया था।

लेकिन जब इराकी कुर्दों ने हुसैन शासन के खिलाफ विद्रोह किया, तो उन्हें अमेरिका से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। परिणामस्वरूप हजारों कुर्दों की हत्या हो गई और लाखों विस्थापित हुए।

2003 में अमेरिकी हमले के दौरान कुर्द फिर भी अमेरिका के सहयोगी बने।

सीरिया में भी, ISIS के मुख्यालय रक्का को हटाने में अमेरिकी समर्थित ‘सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेस’ (SDF) ने प्रमुख सैन्य भूमिका निभाई थी।

लेकिन राजनीतिक माहौल के बदलने के कारण अमेरिकी समर्थन कमजोर पड़ गया। 2018 में जब इराकी सेना ने कुर्दों को ISIS के खिलाफ जीते क्षेत्र से हटाया, तो अमेरिका ने कोई सहायता नहीं दी और केवल तमाशा देखा।

2019 में अमेरिकी सेना के सीरिया से वापसी पर कुर्द नेतृत्व वाली SDF संकट में आ गई। 2024 में बसर अल-असद शासन के पतन के बाद नई सरकार से विवाद में कुर्दों ने कुछ कब्जे वाले क्षेत्रों को खो दिया।

रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टिट्यूट के कनिंगहैम कहते हैं, ‘‘जब ट्रम्प या (इजरायली प्रधानमंत्री बेनजामिन) नेतन्याहू कुर्दों को ईरानी शासन के विरोध में लड़ने के लिए कहते हैं, तो उनके दिमाग में सीरियाई कुर्दों के पुराने अनुभव ताजा होंगे। यदि कुर्द अमेरिका या इजरायल को भरोसेमंद साझेदार मानने लगेंगे, तो यह आश्चर्यजनक होगा। कई को केवल सैन्य सहायता की जरूरत हो सकती है।’’

विश्लेषकों के अनुसार कुर्दों का अमेरिका के लगभग होना तुर्की सरकार के लिए चिंता का विषय होगा।

कनिंगहैम कहते हैं, ‘‘यदि कुर्द अमेरिकी सहायता से अपनी शक्ति मजबूत करने में सफल हुए, तो तुर्की बहुत डर जाएगा।’’

हालांकि, किसी स्वायत्त कुर्द राज्य की स्थापना अभी दूर की बात है।

इराक की प्रथम महिला और प्रसिद्ध कुर्द कार्यकर्ता शाहनाज इब्राहिम अहमद कहती हैं, ‘‘कुर्दों को अक्सर तब ही याद किया जाता है जब बलिदान करना पड़ता है। वे आग्रह करती हैं, ‘हमें अकेला मत छोड़ो। हम भाड़े के बंदूकधारी नहीं हैं।’

फिल्म ‘एक मुठ्ठी बादल’ को गीत ‘रेल घुम्यो घुम्तीमा’ सार्वजनिक

फिल्म ‘एक मुठ्ठी बादल’ का पहला गीत ‘रेल घुम्यो घुम्ती’ हुआ जारी

फिल्म ‘एक मुठ्ठी बादल’ ने जेठ १ गते अपनी प्रदर्शनी तिथि घोषित करते हुए अपना पहला गीत ‘रेल घुम्यो घुम्ती’ सार्वजनिक किया है। इस गीत को आँचल शर्मा, निशा शर्मा, उषा रजक और सहयोग अधिकारी ने स्वर दिया है, जबकि संगीत सुमित पाठक का है। निर्देशक सहारा शर्मा ने बताया कि इस गीत में तीन पीढ़ियों की महिलाओं की भावनाओं को समेटा गया है और यह फिल्म के भाव को अभिव्यक्त करता है।

गीत के वीडियो में शादी से पहले के खुशहाल माहौल को प्रस्तुत किया गया है। शादी की तैयारियों के साथ शुरू हुआ यह गीत निशा शर्मा, उषा रजक और आँचल शर्मा ने अपने जीवन के अनुभवों को गीत के माध्यम से जाहिर किया है। सहारा शर्मा ने कहा, ‘हमने गीत तैयार करते समय सभी पीढ़ियों की महिलाओं की भावनाओं को शामिल करने का प्रयास किया। हमने एक ऐसी रचना बनाने का लक्ष्य रखा जो हमारी दादी-परदादी से लेकर पोती तक सभी महिलाओं द्वारा अपनाई जा सके, और लगता है कि हमने वह लक्ष्य पूरा कर लिया है।’

फिल्म के गीत के निर्देशन का काम प्रतीक गुरुङ ने किया है। इस गीत में कृतिका बराल की कोरियोग्राफी, निहाल भण्डारी की छायांकन और कृष्ण भण्डारी का संपादन शामिल है। फिल्म में आँचल शर्मा, निशा शर्मा, उषा रजक, भीमा मैनाली, अस्मिता गौतम, शेखर चापागाईँ, मनिष निरौला, सहयोग अधिकारी, गौरव विष्ट, अविरलप्रताप अधिकारी सहित कई कलाकारों ने अभिनय किया है। फिल्म का निर्माण अभिमन्यु दीक्षित ने किया है जबकि निकुन श्रेष्ठ कार्यकारी निर्माता हैं।

फिल्म के लगभग सभी विभागों में महिलाओं का नेतृत्व है और इस फिल्म का निर्माण गठली इन्टरटेनमेन्ट एवं मन प्रोडक्सन ने संयुक्त रूप से किया है। नेपाल में इस फिल्म का वितरण आरआर फिल्म्स द्वारा किया जाएगा।

रुकुमपूर्वको भूमे गाउँ तीन दिनदेखि सञ्चारविहीन – Online Khabar

रुकुमपूर्वको भूमे गाउँपालिकामा तीन दिनदेखि मोबाइल सेवा अवरुद्ध

रुकुमपूर्वको भूमे गाउँपालिकाका विभिन्न बस्तीहरूमा तीन दिनदेखि नेपाल टेलिकमको मोबाइल सेवा बन्द छ। मोबाइल सेवा नहुँदा बैंकिङ सेवा, विद्यालय, स्वास्थ्य सेवा र प्रशासनिक कार्यहरू प्रभावित भएका छन्। नेपाल टेलिकमको रुकुमपूर्व कार्यालयले सेवा बन्द हुनुको कारणबारे कुनै आधिकारिक जानकारी दिएको छैन। १८ चैत, रुकुमपूर्व।

रुकुमपूर्वको भूमे गाउँपालिकाका विभिन्न बस्तीहरूमा तीन दिनदेखि टेलिफोन सेवा बन्द रहेको छ। नेपाल टेलिकमको मोबाइल सेवा बन्द हुँदा स्थानीय जनजीवन प्रभावित भइरहेको छ। सोमबारदेखि सेवा अवरुद्ध भएपछि झुम्लाबाङ, मोराबाङ, सिमा, जितखोला, खाबाङ, महतलगायत गाउँहरू संचारविहीन बनेका छन्। मोबाइल सेवामा निर्भरता बढिरहेका बेला नेटवर्क अवरुद्ध हुँदा बैंकिङ सेवा, विद्यालयका गतिविधि, स्वास्थ्य सेवा र पालिकाका प्रशासनिक कामहरू प्रभावित भएका छन्।

डिजिटल माध्यमबाट हुने सेवा प्रवाहमा अवरोध आएपछि स्थानीय बासिन्दाले दैनिक कार्यहरू सञ्चालन गर्न पनि कठिनाइ भोगिरहेका छन्। नेपाल टेलिकमको रुकुमपूर्व कार्यालयले अहिलेसम्म सेवा अवरुद्ध हुनुको कारणबारे कुनै औपचारिक सूचना सार्वजनिक गरेको छैन। यसैबीच, नेटवर्क अवरुद्ध भएपछि स्थानीय चन्द्र रसाइलीले सामाजिक सञ्जालमार्फत ध्यानाकर्षण गराएका छन्। उनले भूमे–६ महतमा रहेको टेलिकम टावरको दीर्घकालीन व्यवस्थापन हुन नसकेको उल्लेख गर्दै स्थानीय विद्युत् अवरुद्धताका कारण बारम्बार सेवा ठप्प हुने समस्या दोहोरिँदै आएको बताएका छन्।

इरान युद्ध: इस्फहान में परमाणु केंद्र और वायुसेना के मुख्य शिविर पर विस्फोट

इरान के इस्फहान शहर में जहां परमाणु केंद्र और वायुसेना का मुख्य शिविर स्थित है, वहां भारी विस्फोट हुए हैं। हवाई हमले के बाद 10 मिनट में जारी किए गए वीडियो के अनुसार, इस शहर में एक परमाणु केंद्र, वायुसेना का मुख्य शिविर और अन्य सैन्य स्थल मौजूद हैं।

इरानी मीडिया ने कुछ “सैन्य स्थलों” पर हवाई हमले की पुष्टि की है, जैसा कि समाचार एजेंसी AFP ने बताया है। इससे पहले, इजरायल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू ने अपने देश द्वारा युद्ध के लिए निर्धारित लक्ष्यों के आधे से अधिक हासिल होने की बात कही थी।

संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने पिछले महीने से इरान पर हमले शुरू किए हैं।

चार बार के विश्व विजेता इटली फिर से फीफा विश्व कप क्वालीफाइंग में असफल

चार बार के विश्व विजेता इटली ने 2026 के फीफा विश्व कप क्वालीफाइंग में फिर से असफलता का सामना किया है। बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ पेनाल्टी शूटआउट में 4-1 से हार के बाद इटली लगातार तीसरी बार विश्वकप क्वालीफाई करने में नाकाम रहा। बोस्निया और हर्जेगोविना ने यह अवसर 14 वर्षों बाद प्राप्त किया है। 18 चैत, काठमाडौं। चार बार विश्व चैम्पियन रह चुकी इटली ने फीफा विश्व कप क्वालीफाइंग में फिर असफलता झेली है। 2026 में संयुक्त रूप से अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में आयोजित होने वाले विश्व कप के लिए मंगलवार रात सम्पन्न हुए यूरोपीय प्लेऑफ मुकाबले में इटली को बोस्निया और हर्जेगोविना के हाथों पेनाल्टी शूटआउट में 4-1 से हार का सामना करना पड़ा और लगातार तीसरी बार विश्वकप क्वालीफाई नहीं कर पाया। इटली 2018 और 2022 में भी विश्व कप क्वालीफाइंग से चूक चुका है और दोनों बार प्लेऑफ चरण में ही बाहर हो गया था। बोस्निया के स्टेडियम बिलिनो पोल्जे में खेले गए इस मैच में इटली अपने शुरुआती तीन पेनाल्टी में से दो गोल करने में नाकाम रहा और हार स्वीकार करनी पड़ी। हार के बाद इटली के कोच गेनारो गटुसो ने इस परिस्थिति को स्वीकार करना कठिन बताया और बताया कि यह उनके लिए बेहद दुखद है। नियत समय में मैच 1-1 से बराबरी पर समाप्त हुआ था, जिसके बाद परिणाम पेनाल्टी शूटआउट से तय किया गया। माइकल केन ने 15वें मिनट में गोल कर इटली को बढ़त दिलाई थी। लेकिन 41वें मिनट में एलेसान्द्रो बास्टोनी को मिले रेड कार्ड के कारण टीम 10 खिलाड़ियों में सिमट गई। बोस्निया के हरिस तावाकोविच ने 79वें मिनट में बराबरी का गोल करके मैच को टाई कराया। 40 वर्ष के कप्तान एडेन जेको के नेतृत्व में बोस्निया और हर्जेगोविना ने कुल मिलाकर दूसरी बार और 2014 के बाद पहली बार फीफा विश्व कप क्वालीफाई किया है। 14 वर्षों के अंतराल के बाद विश्व कप में स्थान हासिल करने वाली बोस्निया अब समूह ‘बी’ में कनाडा, कतर और स्विट्जरलैंड के साथ प्रतिस्पर्धा करेगी।

टर्की २४ साल बाद फिफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई

समाचार सारांश

  • टर्की ने २४ साल बाद फिफा विश्वकप के लिए क्वालीफाई किया है।
  • मंगलवार रात हुए यूरोपीय प्लेऑफ में कोसोवो को हराकर टर्की ने विश्वकप यात्रा सुनिश्चित की।
  • टर्की ग्रुप C में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और पेराग्वे के साथ मुकाबला करेगा।

१८ चैत्र, काठमांडू। यूरोपीय राष्ट्र टर्की २४ साल बाद फिफा विश्वकप के लिए क्वालीफाई हुआ है।

मंगलवार रात हुए यूरोपीय प्लेऑफ में कोसोवो को १-० से हराकर टर्की २०२६ में संयुक्त रूप से अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में होने वाले विश्वकप के लिए क्वालीफाई कर गया है।

टर्की आखिरी बार २००२ में एशियाई देशों जापान और दक्षिण कोरिया में हुए विश्वकप में हिस्सा लिया था, जहां उसने तीसरा स्थान हासिल किया था।

इसके बाद टर्की पांच संस्करणों में क्वालीफाई नहीं कर सका, लेकिन इस बार प्लेऑफ जीतकर विश्वकप का रास्ता तय किया है।

टर्की को विश्वकप तक पहुंचाने वाला निर्णायक गोल ५३वें मिनट में केरम अर्टुकोग्लू ने किया।

चार साल पहले भी टर्की विश्वकप के करीब था लेकिन प्लेऑफ सेमीफाइनल में पुर्तगाल से हार गया था।

कोसोवो अपनी पहली विश्वकप क्वालीफिकेशन पूरी नहीं कर सका।

अब टर्की विश्वकप के ग्रुप C में सह-आयोजक अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और पेराग्वे के खिलाफ खेलने जा रहा है।