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लेखक: space4knews

क्या एआई के कारण इंसान कम चतुर हो रहे हैं?

मोबाइल में चैटबॉट

तस्वीर स्रोत, Getty Images

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) जब लगातार संवेदनशील कार्य करने लगे हैं, तो शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इससे इंसानों के सोचने और काम करने की बौद्धिक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

शोधकर्ता नतालिया कोस्मिना ने सहायक नियुक्ति के लिए आवेदन पत्रों का अध्ययन किया, तो पाया कि सभी आवेदन पत्र एक जैसे, परिष्कृत लेकिन विषय से संबंधित नहीं थे। इन आवेदन पत्रों के सारांश विषय के अनुरूप नहीं थे।

उन्होंने यह नहीं पहचाना कि आवेदकों ने चाटजीपीटी, गूगल जेमिनी, क्लाउड जैसी एआई चैटबॉट का उपयोग करके पत्र तैयार किया था।

कोस्मिना माज़ाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में मानव और कंप्यूटर इंटरैक्शन में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में छात्रों में अध्ययन सामग्री भूलने की प्रवृत्ति बढ़ी है।

एलएलएम पर निर्भरता बढ़ने के साथ ही छात्रों की संज्ञानात्मक क्षमता घटने की चिंता कोस्मिना को है, और वह इस विषय में और अध्ययन करना चाहती हैं।

कांग्रेसको निर्वाचन समीक्षा कार्यक्रम आज विराटनगरमा, सभापति गगन थापा सहभागी हुने

कांग्रेस का चुनावी समीक्षा कार्यक्रम आज विराटनगर में, अध्यक्ष गगन थापा होंगे शामिल

९ वैशाख, काठमांडौ। नेपली कांग्रेस ने आज कोशी प्रदेश के विराटनगर में अपना चुनावी समीक्षा कार्यक्रम आयोजित किया है। इस कार्यक्रम में अध्यक्ष गगन कुमार थापा सहित कई नेता भाग लेंगे। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, अध्यक्ष थापा सुबह ९:५० बजे विराटनगर हवाई अड्डे पर उतरेंगे और १०:३० बजे से समीक्षा कार्यक्रम की शुरुआत होगी, जिसकी जानकारी पार्टी की सहमहामंत्री डॉ. डिला संग्रौलाले दी।

उनके मुताबिक, पार्टी का उद्देश्य प्रदेश स्तरीय संगठन को मजबूत करना, चुनाव परिणामों की समीक्षा करना और आगामी रणनीति का निर्धारण करना है। कांग्रेस के कोशी प्रदेश नेतृत्व प्रबंधन और संगठन सुदृढ़ीकरण के विषयों पर भी बैठक में विशेष चर्चा होगी, जो सहमहामंत्री संग्रौलाले बताई।

कार्यक्रम में पार्टी के कोशी प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारी, केंद्रीय सदस्य, प्रदेश कार्यसमिति, संघीय व प्रदेश सांसद, जिला अध्यक्ष, क्षेत्रीय अध्यक्ष और पिछले चुनावों में प्रत्यक्ष तथा समानुपातिक उम्मीदवार शामिल होंगे। कांग्रेस ने हाल ही में विभिन्न प्रदेशों में चुनावी समीक्षा कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इससे पहले गण्डकी, लुम्बिनी, बागमती और मधेश प्रदेशों में समीक्षा बैठकें हो चुकी हैं।

पार्टी नेतृत्व ने बताया है कि समीक्षा कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय तह से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन की स्थिति, चुनावी परिणाम, कमजोरियां और सुधार के संभावनाओं पर सीधे सुझाव लिए जाएंगे। इसके साथ ही आगामी राजनीतिक रणनीति, संगठन विस्तार, सक्रिय सदस्यता वृद्धि, १५वीं महाधिवेशन की तैयारियां और कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने पर चर्चा होगी। कांग्रेस ने प्रदेश स्तरीय समीक्षा कार्यक्रमों को केवल चुनावी जीत-हार के विश्लेषण तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे संगठन पुनरूत्थान अभियान के रूप में आगे बढ़ाया है।

हतारमा श्रममन्त्री हटाएथे प्रधानमन्त्रीले, गृहमन्त्रीमाथि गम्भीर प्रश्न उठ्दा चुप

प्रधानमंत्री ने श्रम मंत्री को हटाया, गृह मंत्री पर उठे सवालों पर रखा मौन

समाचार संक्षेप
पूर्व श्रम मंत्री दीपककुमार साह पर स्वास्थ्य बीमा बोर्ड में अपनी पत्नी को सदस्य पद पर नियुक्त करने के आरोप के बाद प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने उन्हें पद से हटा दिया है। गृह मंत्री सुधन गुरुङ के दो माइक्रोइंश्योरेंस कंपनियों में 50 लाख रुपए के संस्थापक शेयर अपनी संपत्ति विवरण में न जोड़ने पर कानूनी सवाल उठे हैं। राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी (रास्वपा) की केंद्रीय समिति की बैठक में गृह मंत्री गुरुङ के विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई और पार्टी ने औपचारिक प्रतिक्रिया भी नहीं दी है। 8 वैशाख, काठमांडू।

स्वास्थ्य बीमा बोर्ड सदस्य पद पर अपनी पत्नी की नियुक्ति के आरोप के कारण तत्कालीन श्रम मंत्री दीपककुमार साह पर सवाल उठे। इस मामले में प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने आंतरिक जांच की। उन्होंने साह से केवल सामान्य पूछताछ की और कोई औपचारिक स्पष्टीकरण नहीं लिया। इसके बजाय तुरंत उन्हें मंत्री पद से हटाने का निर्णय लिया। 13 दिन के भीतर साह का मंत्री पद समाप्त हो गया। प्रधानमंत्री बालेन्द्र के इस निर्णय को कई लोगों ने सुशासन के लिए एक ‘साहसी’ कदम माना।

लेकिन दीपक साह के मामले से अधिक गंभीर मामला गृह मंत्री सुधन गुरुङ से जुड़ा है, जिस पर प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी रास्वपा ने मौनता बनाए रखी है। इसी बीच, सभापति रवि लामिछाने और प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के बीच बैठक हुई है। गृह मंत्री गुरुङ ने मंगलवार को भी रास्वपा के सभापति रवि लामिछाने से मुलाकात की है। हालांकि इस मामले पर सरकार और पार्टी ने कोई औपचारिक रुख नहीं अपनाया है। गृह मंत्री गुरुङ को लेकर व्यापक सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सोमवार को हुई रास्वपा की बैठक में इस विषय पर चर्चा नहीं हुई।

गृह मंत्री गुरुङ ने दो माइक्रोइंश्योरेंस कंपनियों में खरीदे गए शेयर अपनी संपत्ति विवरण में शामिल नहीं किए हैं। उनके शेयर खरीदने के स्रोत और विवादित व्यक्ति से संबंध पर सवाल उठे हैं। हालांकि उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण दिया है, लेकिन पार्टी ने इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं की है। रास्वपा के नेता पहले तो इस मामले में मुखर थे, लेकिन अब चुप्पी साधे हुए हैं। पत्रकारों के बार-बार सवाल करने पर भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया है।

कांग्रेस ने लिडरशिप एकेडेमी संचालित करने का निर्णय, जनप्रतिनिधि बनने के लिए कक्षाएं पूरी करना अनिवार्य

८ वैशाख, काठमाडौं । नेपाली कांग्रेस ने पार्टी के आंतरिक और सार्वजनिक नेतृत्व विकास को सशक्त बनाने के उद्देश्य से ‘कांग्रेस लिडरशिप एकेडेमी’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह एकेडेमी पार्टी के केन्द्रीय नीति अनुसन्धान तथा प्रशिक्षण प्रतिष्ठान के अंतर्गत संचालित होगी और कांग्रेस द्वारा इसे ‘ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट’ के रूप में परिभाषित किया गया है। इस एकेडेमी के माध्यम से पार्टी के सक्रिय सदस्यों को कांग्रेस के इतिहास, आदर्श, विचारधारा, आर्थिक नीति, विकास नीति और सामाजिक नीतियों के बारे में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। सक्रिय सदस्यता नवीनीकरण करने वाले कार्यकर्ताओं को पार्टी की नीतियों, कार्यक्रमों, प्राथमिकताओं तथा नवीनतम नीतिगत विषयों पर नियमित पुनः ताजगी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

एकेडेमी पार्टी की ओर से निर्वाचित स्थानीय, प्रदेश एवं संघीय जनप्रतिनिधियों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेगी। आगामी चुनावों में जनप्रतिनिधि बनने की इच्छा रखने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए आधारभूत एवं विषयगत ज्ञान, कौशल तथा नेतृत्व विकास से संबंधित विशिष्ट कक्षाएं संचालित की जाएंगी। कांग्रेस के प्रवक्ता देवराज चालिसे ने कहा, ‘जो लोग नेतृत्व में जाना चाहते हैं, उन्हें ज्ञान, कौशल, प्रबंधकीय क्षमता और समग्र रूप से सक्षम बनाना हमारा लक्ष्य है।’

महामंत्री प्रदीप पौडेल ने इस एकेडेमी को कार्यकर्ताओं को राज्य प्रणाली के प्रति सशक्त बनाने वाली महत्वपूर्ण पहल के रूप में बताया। उन्होंने कहा, ‘‘राज्य प्रणाली, संवैधानिक व्यवस्था, विभिन्न स्तरों की सरकारों की जिम्मेदारियां और प्रशासनिक क्षमताओं के विषय में जानकारी देने हेतु यह प्रशिक्षण संस्था संचालित की जा रही है।’’ महामंत्री पौडेल के अनुसार, सार्वजनिक जिम्मेदारी संभालने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए निर्वाचन से कम से कम तीन महीने पूर्व ‘पब्लिक पॉलिसी’ की कक्षा अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी। एकेडेमी के माध्यम से निर्धारित कक्षा पूरी करने को ही पार्टी की उम्मीदवारता चयन और अन्य जिम्मेदारियों पर सीधा प्रभाव डालेगा।

प्रवक्ता चालिसे ने इस एकेडेमी को ‘स्कूल’ की संज्ञा दी। उन्होंने बताया, ‘‘इसका अपना पाठ्यक्रम होता है और यह तीन महीने का कोर्स है।’” चालिसे ने स्पष्ट किया कि कोर्स पूरी न करने वाले कार्यकर्ता किसी भी उम्मीदवार के रूप में मान्य नहीं होंगे। ‘‘कोर्स पूरी न करने वाले उम्मीदवार मान्य नहीं होंगे,‘‘ उन्होंने कहा, ‘‘हमारा उद्देश्य राजनीतिक पारदर्शिता और मेरिटोक्रेसी स्थापित करना है।’’ कांग्रेस इस एकेडेमी को पार्टी की दीर्घकालीन क्षमता विकास के लिए एक महत्वपूर्ण आधार मान रही है।

कहाँ पुग्यो देउवा दम्पतीविरुद्ध रेड नोटिस प्रक्रिया ?

देउवा दंपती के खिलाफ रेड नोटिस प्रक्रिया किस चरण में है?

पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा और उनकी पत्नी डॉ. आरजु राणा देउवा के खिलाफ २४ चैत्र को गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। हालांकि, गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद अब तक उनके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी नहीं हुआ है। देउवा दंपती विदेश में हैं और नेपाल लौटना बाकी है। ८ वैशाख, काठमांडू।

गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद भी देउवा दंपती को नेपाल लाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी जारी है। हालांकि, गिरफ्तारी वारंट जारी हुए दो सप्ताह बीत चुके हैं, फिर भी रेड नोटिस जारी नहीं किया गया है। पुलिस प्रधान कार्यालय ने इस संदर्भ में कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। नेपाल पुलिस के केंद्रीय प्रवक्ता तथा डीआईजी अविनारायण काफ्ले ने इस विषय को जांच के दायरे में बताते हुए कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है।

जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार अब तक देउवा दंपती के खिलाफ रेड नोटिस के लिए नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (एनसीबी), काठमांडू ने इंटरपोल को औपचारिक रूप से पत्राचार नहीं किया है। ‘केवल गिरफ्तारी वारंट के आधार पर रेड नोटिस के लिए पत्राचार नहीं किया जा सकता। इसके लिए ठोस आधार और कागजी प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है। वह प्रक्रिया अभी बाकी है, इसलिए फिलहाल पत्राचार नहीं किया गया है,’ सूत्र ने बताया।

गिरफ्तारी वारंट जारी होने के समय देउवा दंपती विदेश में ही थे। वे चुनाव से पहले १४ फाल्गुन को चिकित्सा कारणों से सिंगापुर गए थे और वहां से ७ चैत्र को हांगकांग पहुंचे थे। इंटरपोल के माध्यम से रेड नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पुलिस प्रधान कार्यालय के तहत नेशनल सेंट्रल ब्यूरो द्वारा आगे बढ़ाई जाएगी। नोटिस जारी होने पर इंटरपोल के १९६ सदस्य देश देउवा दंपती को गिरफ्तार कर सकेंगे।

समस्याग्रस्त सहकारीलाई 15 दिनभित्र ऋण तिर्न अन्तिम सूचना, नतिरे सम्पत्ति लिलाम गरिने

भूमि व्यवस्था, सहकारी तथा गरिबी निवारण मन्त्रालयले समस्याग्रस्त सहकारीका ऋणीहरुलाई १५ दिनभित्र ऋण चुक्ता गर्न सूचना जारी गरेको छ। समस्याग्रस्त सहकारी व्यवस्थापन समितिले ऋणी तथा जमानीको सम्पत्ति रोक्का र धितो लिलाम गर्ने चेतावनी दिएको छ। सरकारले समस्याग्रस्त सहकारी व्यवस्थापन समितिलाई पूर्णता दिएको र नयाँ अध्यक्ष तथा सदस्य नियुक्त गरेको छ। ८ वैशाख, काठमाडौं।

भूमि व्यवस्था, सहकारी तथा गरिबी निवारण मन्त्रालयले समस्याग्रस्त सहकारीका ऋणीहरुलाई १५ दिनभित्र ऋण चुक्ता गर्न अन्तिम सूचना जारी गरेको छ। समस्याग्रस्त सहकारी व्यवस्थापन समितिले पूर्णता पाएपछि मंगलबार सूचना जारी गर्दै ऋणी, जमानी, व्यवस्थापक, कर्मचारी तथा सञ्चालकहरुको नाममा १५ दिनभित्र ऋण तिर्न चेतावनी दिएको हो। ऋण चुक्ता नगरे ऋणी र जमानीको सम्पत्ति रोक्का गरी धितो लिलाम गरिने बताइएको छ।

‘नेपाल सरकार (भूमि व्यवस्था, सहकारी तथा गरिबी निवारण मन्त्रालय) अन्तर्गत सहकारी ऐन २०७४ को दफा १०४ अनुसार समस्याग्रस्त घोषणा भएका र सम्पत्ति व्यवस्थापन तथा दायित्व भुक्तानीका लागि यस समितिको मातहतमा रहेका सहकारी संस्थाका सञ्चालक, ऋणी सदस्य, व्यवस्थापक, कर्मचारी एवं जमानीहरुलाई कार्यालयको वेबसाइट, राष्ट्रिय स्तरका दैनिकपत्र, एसएमएस र फोनमार्फत पटक–पटक जानकारी गराइँदा पनि ऋण चुक्ता नगरेकाले १५ दिनभित्र कार्यालय बुद्धनगर, काठमाडौंमा सम्पर्क गरी आफ्नो बाँकी ऋण, ब्याज तथा हर्जाना बुझाउन यो सूचना प्रकाशित गरिएको छ,’ सूचनामा भनिएको छ।

साथै, १५ दिनभित्र ऋण चुक्ता नगरेका ऋणी, तिनका परिवार र जमानीहरुको नाम सार्वजनिक गरिने र उनीहरुको सम्पत्ति तथा खाताहरु रोक्का गरिने पनि सूचनाले जनाएको छ। थप रूपमा सार्वजनिक सेवा सुविधा समेत रोक्का गरिने र कर्जा लिँदा राखिएको धितो लिलाम गरिने उल्लेख छ। सूचनामा भनिएको छ, ‘उल्लेखित म्यादभित्र ऋण चुक्ता नगरे ऋणीहरुको व्यक्तिगत विवरण सार्वजनिक गरिने, ऋणी, परिवार र जमानीहरुको सम्पत्ति र खाताहरु रोक्का गरी सम्बन्धित निकायमा जानकारी पठाउनेछौं; साथै सहकारी ऐन २०७४ र सहकारी नियमावली २०७५ को आधारमा कर्जा लिँदा राखिएको धितो लगायत सम्पूर्ण लेनादेनको रकम उद्दार गरिनेछ।’

आजै सरकारले समस्याग्रस्त सहकारी व्यवस्थापन समितिलाई पूर्णता दिएको छ। मन्त्रिपरिषद बैठकले प्युठानका डिल्लीराज आचार्यलाई अध्यक्ष र धादिङका नवराज सिँखडा तथा ललितपुरका रोशनबहादुर शाक्यलाई सदस्य नियुक्त गरेको छ। मन्त्रालयले सहकारी बचतकर्ताको रकम फिर्ता गर्न चरणबद्ध प्रक्रिया अघि बढाएको छ। ऋण असुलीसँगै बचत फिर्ता प्रक्रिया तीव्र बनाउने तयारी भइरहेको छ।

थुनुवा कक्ष से उद्धार किए गए युवक श्रीकृष्ण विक का निधन

समाचार सारांश: सिन्धुली के इलाका पुलिस कार्यालय खुर्कोट के थुनुवा कक्ष से उद्धार किए गए २२ वर्षीय श्रीकृष्ण विक उपचार के दौरान निधन हो गए हैं। विक को थुनुवा कक्ष में फांसी के फंदे पर लटकता पाया गया, उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक के परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए समिति बनाई है और शव पोस्टमार्टम के लिए रखा गया है। ८ वैशाख, काभ्रेपलाञ्चोक।

सिन्धुली के इलाका पुलिस कार्यालय खुर्कोट के थुनुवा कक्ष से उद्धार किए गए युवक की मृत्यु हो गई है। थुनुवा कक्ष में फांसी के फंदे पर पाए गए सिन्धुली के सुनकोशी गाउँपालिका–३ जुम्लेडाँडा के २२ वर्षीय श्रीकृष्ण विक को उद्धार कर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया था। थुनुवा कक्ष की वेंटिलेशन में स्वयं अपने शर्ट के पासे से फांसी लगाकर लटक गए विक को तुरन्त उद्धार कर सुनकोशी सामुदायिक अस्पताल ले जाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें आगे इलाज के लिए सिन्धुली अस्पताल भेजा गया, लेकिन चिकित्सकों ने उनकी मृत्यु की पुष्टि की।

जिले के पुलिस प्रमुख लालध्वज सुवेदी ने बताया कि घटना के समय थुनुवा कक्ष में विक अकेले थे। मृतक विक काठमांडू में वाहन चालक के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने खोटांग की १६ वर्षीय युवती से गत २८ चैत को प्रेम विवाह किया था। विवाह के बाद युवती नाबालिग बताकर परिवार ने जबरदस्ती कराया का आरोप लगाते हुए ललितपुर के सातदोबाटो थाने में शिकायत की थी। उसके बाद सातदोबाटो पुलिस ने जांच के लिए ३ वैशाख को विक को इलाका पुलिस कार्यालय खुर्कोट भेजा था।

मृत्यु की घटना के बाद मृतक के परिजन और स्थानीय निवासियों ने इलाका पुलिस कार्यालय खुर्कोट में इकट्ठा होकर घटनाक्रम की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उनकी मांग पर मृतक के परिजनों की भागीदारी में सिन्धुली के सहायक प्रमुख जिला अधिकारी एवं सूचना अधिकारी दीपेन्द्र पौडेल के संयोजन में पुलिस प्रवक्ता, स्थानीय वडा अध्यक्ष सहित एक समिति गठित की गई है, जिला पुलिस प्रमुख सुवेदी ने बताया। मृतक का शव फिलहाल पोस्टमार्टम के लिए सिन्धुली अस्पताल में रखा गया है।

जेनजी विद्रोहको स्वरमा ‘बफिन्स ९८’ ले ल्यायो ‘हाम्रो आवाज, नयाँ नेपाल’

‘हमारी आवाज, नया नेपाल’ गीत के माध्यम से ‘बफिन्स ९८’ ने जेन-जी विद्रोह की आवाज को प्रस्तुत किया

पोखरा स्थित संगीत समूह ‘बफिन्स ९८’ ने जेन-जी पीढ़ी के आंदोलन और विद्रोह को समेटते हुए नया गीत ‘हमारी आवाज : नया नेपाल’ रिलीज़ किया है। इस गीत में २०८२ साल भाद्र २३ की युवाओं की सड़कों पर संघर्ष और दमन को जीवंत तरीके से दर्शाया गया है। गीत का केंद्र विषय भ्रष्टाचार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर रोकथाम के खिलाफ युवाओं की आवाज़ है।

इस म्यूजिक वीडियो में २०८२ साल भाद्र २३ को पूरे देश में युवाओं द्वारा किए गए परिवर्तन की बुलंदी और सड़कों पर संघर्ष को जीवंत रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। सरकार द्वारा नागरिकों की असंतुष्टि की अनदेखी करने पर जेन-जी पीढ़ी अपने आप सड़कों पर उतरी, जिस पर हुए निरंकुश दमन, अनियंत्रित गोलीबारी और दर्जनों युवाओं की मृत्यु तथा घायल होने की करुणामय वास्तविकता गीत में झलकती है।

गायक संजीव गुरंग के शब्द और स्वर में यह गीत युवाओं को अपनी ही मिट्टी में लौटकर देश के निर्माण में जुटने का आवाह्न करता है। इससे पहले भी ‘हमारा देश नेपाल’, ‘मैं मर भी जाऊं’, ‘कर्णाली भूमि रो रही है’, ‘जब सूरज की पहली किरण’ और ‘बराबर के आंसू’ जैसे दर्जनों कालजयी देशभक्ति और सामाजिक जागरूकता के गीत प्रस्तुत करने वाला यह समूह देश में बदलाव की अपरिहार्यता को पुनः अपने संगीत के माध्यम से स्पष्ट करता है।

म्यूजिक वीडियो में जेन-जी आंदोलन में दिखे युवा जोश, कलाकारों द्वारा कलात्मक रूप से अभिव्यक्त एकता की भावना के साथ-साथ हिमालय, पहाड़ और तराई के आम नेपाली लोगों के श्रम और जीवनशैली को आकर्षक रूप में दिखाया गया है। बैंड के बेस गिटारिस्ट जीवन भाई ने पूरे नेपाल के दृश्य इस वीडियो में समेटे हैं। ‘हमारी आवाज-नया नेपाल’ केवल एक संगीत प्रस्तुति ही नहीं, बल्कि जेन-जी आंदोलन के अमर शहीदों, घायल युवाओं और उनके परिवारों के प्रति भावपूर्ण श्रद्धांजलि भी है, इसका बैंड द्वारा उल्लेख किया गया है।

लगानी बोर्ड की बैठक में अर्थमंत्री का बयान- प्रगति की स्थिति लज्जाजनक है

अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने लगानी बोर्ड से स्वीकृत ५५ परियोजनाओं में से मात्र २ ही निर्माणाधीन होने की स्थिति को देखकर कठोर समीक्षा की आवश्यकता बताई है। उन्होंने विदेशी निवेश स्वीकृत परियोजनाओं में काम नहीं होने के कारणों की पहचान करने और कानून में बदलाव करने की जरूरत पर जोर दिया। प्रधानमंत्री के सलाहकार सुदीप ढकाल ने परियोजनाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय बताते हुए समन्वय की समस्याओं को उजागर किया और तुरंत समाधान की मांग की।

८ वैशाख, काठमांडू। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने कहा कि लगानी बोर्ड से स्वीकृत ५५ परियोजनाओं में केवल २ का निर्माण कार्य शुरू होना शर्मनाक बात है। उनकी सचिवालय द्वारा जारी विवरण में यह बात सामने आई है।

लगानी बोर्ड की अनुगमन एवं सहजीकरण समिति की १३वीं बैठक में उन्होंने कहा, “विदेशी निवेश स्वीकृत परियोजनाओं में इतनी लंबी अवधि में कार्य न होना कठोर समीक्षा की आवश्यकता दर्शाता है।” उन्होंने उन जिम्मेदारों की पहचान करने पर जोर दिया जिनके कारण परियोजनाओं में कार्य नहीं बढ़ पाया। यदि दोषी व्यक्ति या कानूनी विसंगतियाँ हैं, तो उनका पता लगाकर कानूनों में संशोधन करना जरूरी है, यह उन्होंने स्पष्ट किया।

अर्थमंत्री वाग्ले ने कहा, “समस्याएं क्या हैं, उनकी तुरन्त जांच होनी चाहिए।” उन्होंने १४वीं बैठक तक समस्या के समाधान न होने पर बिना किसी नरमी के विचार करने की चेतावनी भी दी। निवेश सहजीकरण करने वाली प्रमुख संस्था की कमजोरी और गलत सूचनाओं का प्रचार गंभीर मामला है, उन्होंने कहा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि कम से कम १० परियोजनाओं में तत्काल प्रगति देखी जानी चाहिए। “कुछ आकर्षक परियोजनाएं हैं, उनकी जांच जरूरी है,” उन्होंने जोड़ा।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के नीति, प्रशासन एवं सुशासन सलाहकार सुदीप ढकाल ने कहा कि देश के भविष्य से जुड़े परियोजनाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय है। उन्होंने कहा, “परियोजना आगे बढ़ाने में कौन-कौन सी बाधाएं हैं, उनका तत्काल समाधान हो। कौन-कौन से निकाय और व्यक्ति संबंधित हैं, और किन कारणों से समन्वय नहीं हो पाया, इसका पता लगाया जाएगा। अब इसे मॉनिटर कर सुधार किया जाएगा,” उन्होंने बताया। इसी अवसर पर लगानी बोर्ड के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुशील ज्ञवाली ने बोर्ड, कार्यालय और समिति के दायित्व तथा अधिकार और स्वीकृत एवं सहायता प्राप्त परियोजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की।

उपाध्यक्ष दाहाल ने डायस्पोरा बांड के माध्यम से मातृभूमि के विकास पर जोर देने की योजना की प्रशंसा की

गैरआवासीय नेपाली संघ के उपाध्यक्ष लोकप्रसाद दाहाल ने कहा है कि सरकार द्वारा प्रस्तावित वार्षिक एक खरब रुपये मूल्य के डायस्पोरा बांड से मातृभूमि के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए एक मजबूत आधार तैयार होगा। दाहाल ने कहा, “सरकार, एनआरएनए और निजी क्षेत्र के बीच दृढ़ सहयोग ही डायस्पोरा की पूंजी को राष्ट्रनिर्माण में निवेश करने का मुख्य स्तंभ बनेगा।” ८ वैशाख, काठमाडौं।

उपाध्यक्ष दाहाल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “विशेष रूप से वार्षिक १ खरब रुपये मूल्य के डायस्पोरा बांड की सरकार की योजना विदेशों में रहने वाले ८० लाख नेपाली लोगों की पूंजी को मातृभूमि के विकास से जोड़ने का मूल आधार प्रस्तुत करती है।” उन्होंने बताया कि पिछले विदेशी रोजगार बचत बांड में कम भागीदारी के कारण इस बार एक विश्वसनीय और आकर्षक निवेश मॉडल की आवश्यकता है।

दाहाल ने आगे कहा, “विशेषज्ञों ने छोटे से लेकर बड़े निवेशकों और विदेशी पासपोर्टधारी नेपाली लोगों को भी शामिल करते हुए सामूहिक निवेश कोष की अवधारणा प्रस्तावित की है।” उन्होंने जलविद्युत, पूर्वाधार, कृषि और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश करके विदेशों में मौजूद १०० खरब से अधिक आर्थिक संसाधनों को नेपाल की समृद्धि में परिवर्तित करने की मजबूत संभावना जताई।

उपाध्यक्ष दाहाल ने एनआरएनए की हाल की एकता ने डायस्पोरा निवेश में नई आशा और उत्साह को बढ़ावा दिया है, भी बताया। काठमाडौं में सम्पन्न महाधिवेशन में नए नेतृत्व के चयन के बाद पिछली आंतरिक विवादों को समाप्त कर संघ सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है।

जसले विदेशबाट आफैं उपकरण किन्दै नेपालमा न्युरो सर्जरी सुरु गरे

विदेश से उपकरण खरीदकर नेपाल में न्यूरो सर्जरी शुरू करने वाले डॉक्टर

आज वे इस धरती पर नहीं हैं, लेकिन नेपाल में आधुनिक शल्यचिकित्सा की नींव रखने वाले उनके साहस, संघर्ष और समर्पण की कहानी चिकित्सा इतिहास में हमेशा उज्जवल रहेगी।

समाचार सारांश

समीक्षा किया गया सामग्री।

  • डा. दिनेशनाथ गोंगल ने नेपाल में पहली बार न्यूरो सर्जरी की शुरुआत कर आधुनिक शल्य चिकित्सा की नींव रखी।
  • डॉक्टर गोंगल ने 40,000 से अधिक शल्यक्रियाएं कीं और वीर अस्पताल में न्यूरो सर्जरी विभाग स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • उन्होंने डॉ. उपेन्द्र देवकोटा को ब्रिटेन भेजकर न्यूरो सर्जरी में दक्ष मानव संसाधन तैयार करने में मदद की।

वीर अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर एक ऑपरेशन थिएटर है, जिसका नाम है – गोंगल थिएटर।

यह न्यूरो सर्जरी कक्ष किसी व्यक्ति के नाम पर क्यों रखा गया?

इस सवाल से नेपाल में न्यूरो सर्जरी के इतिहास की खोज शुरू होती है।

साथ ही यह एक समर्पित डॉक्टर के जीवन की कहानी भी है।

दो साल पहले रखे गए इस नाम का अर्थ अब और भी गहरा हो गया है क्योंकि नेपाली न्यूरोसर्जरी के पिता डॉ. दिनेशनाथ गोंगल अब इस दुनिया में नहीं हैं।

वीर अस्पताल के न्यूरोसर्जरी प्रमुख डॉ. राजीव झा कहते हैं, ‘हर सुबह जब हम ऑपरेशन थिएटर में प्रवेश करते हैं, दरवाजे पर लिखा उनका नाम हमें याद दिलाता है। न्यूरो सर्जरी में जो कुछ सीखा हमने, वह उनके द्वारा बनाए गए आधार पर खड़ा है।’

नेपाल में पहली बार सिर खोलने वाले डॉक्टर

जब नेपाल में न तो सीटी स्कैन था और न ही आधुनिक उपकरण, उस समय डॉ. गोंगल ने खुद जोखिम लेकर मरीज का सिर खोला। मुश्किल हालात में भी उन्होंने जटिल शल्यक्रिया का अभ्यास शुरू किया।

इस साहसिक फैसले ने नेपाल में न्यूरो सर्जरी की नींव रखी।

वि.सं. 2018 में एक सड़क दुर्घटना से घायल मरीज का सिर खोलकर डॉ. गोंगल ने शल्यक्रिया की। यह नेपाल में की गई पहली न्यूरो सर्जरी थी। हालांकि यह ऑपरेशन सफल नहीं हुआ और मरीज को बचाया नहीं जा सका।

पहली कोशिश विफल होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। एक साल बाद, वि.सं. 2019 में उन्होंने ब्रेन ट्यूमर की शल्यक्रिया की जो सफल रही। लेकिन जोखिम इतना बड़ा था कि 48 घंटे तक मरीज का इलाज उन्हें खुद करना पड़ा।

क्योंकि अस्पताल में भरोसेमंद उपकरण नहीं थे, न आईसीयू था और न पर्याप्त नर्सिंग निगरानी। कुछ भी गलत हो सकता था।

इसके अलावा, केवल सामान्य एक्स-रे के आधार पर की गई ये शल्यक्रियाएं आज के डॉक्टरों के लिए भी आश्चर्यचकित करने वाली हैं।

डा. झा के अनुसार, डॉ. गोंगल ने नेपाल में पहली बार पिट्यूटरी ग्रंथि के ट्यूमर का ऑपरेशन किया था। ‘आज की आधुनिक तकनीक कुछ भी नहीं थी,’ झा याद करते हैं, ‘लेकिन उनके साहस और कौशल से किया गया ऑपरेशन आज भी अविश्वसनीय लगता है।’

सामान खुद खरीदकर लाते थे

सर्जरी के लिए जरूरी उपकरण नेपाल में आसानी से उपलब्ध नहीं होते थे। कई बार वे विदेश जाकर खुद उपकरण खरीदकर लाते थे। कुछ उपकरण तो वे Kathmandu में ही बनवाते थे।

इसी लिए कई चिकित्सा विशेषज्ञ उन्हें नेपाल में आधुनिक शल्यचिकित्सा के जनक के रूप में याद करते हैं।

डा. गोंगल ने अपने जीवनकाल में 40,000 से अधिक शल्यक्रियाएं की हैं। न्यूरोसर्जरी के साथ-साथ पिट्यूटरी ट्यूमर, स्पाइनल इंजूरी के लिए लैमिनेक्टॉमी, फेफड़ों की न्यूमोनोमेक्टॉमी, हृदय की माइट्रल वाल्वोटोमी और पेट संबंधी जटिल शल्यक्रियाएं नेपाल में पहली बार उन्होंने कीं।

वीर अस्पताल में बीता जीवन

डा. गोंगल का जन्म वि.सं. 1989 में काठमांडू में हुआ था, लेकिन उनका पारिवारिक घर पाल्पा के तानसेन में है।

उन्होंने त्रिचंद्र कॉलेज से बीएससी पूरा किया, भारत के दरभंगा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और बंबई के ग्रांट मेडिकल कॉलेज से एमएस किया।

भारत से एमबीबीएस और एमएस करने के बाद वि.सं. 2013 साल में उन्होंने सरकारी सेवा में प्रवेश किया।

उनका अधिकांश चिकित्सा जीवन वीर अस्पताल में बीता। वहीं उन्होंने शल्यचिकित्सा अभ्यास शुरू किया और नई पीढ़ी के चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया। बाद में वे चिकित्सा विज्ञान राष्ट्रीय प्रतिष्ठान (न्याम्स) के संस्थापक उपकुलपति भी बने। डॉ. गोंगल के तीन पुत्र और एक पुत्री हैं।

जब गोंगल ने देवकोटालाई विदेश भेजा

डा. गोंगल ने युवा चिकित्सकों को प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजकर नेपाल में विशेषज्ञ चिकित्सक तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।

हालांकि वे प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त थे, पर वे चिकित्सकों और छात्रों से दूर नहीं थे।

डा. झा याद करते हैं, ‘मैं न्यूरोसर्जरी विभाग में मेडिकल ऑफिसर था और विभागीय प्रमुख डॉ. उपेन्द्र देवकोटा थे। साप्ताहिक अंतर-विभागीय बैठक में डॉ. गोंगल नियमित आते थे।’

वे कक्ष में ज्यादा बोलते नहीं थे, लेकिन ध्यान से सुनते और जरूरत पड़ने पर ही मार्गदर्शन देते थे।

‘वे कम बोलने वाले, ज्यादा सुनने वाले गुरु थे,’ झा कहते हैं, ‘इसी शैली ने हमें सिखाया।’

उनके निर्देशन में नेपाली न्यूरोसर्जरी ने नई पीढ़ी को प्रशिक्षण दिया। वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. प्रकाश विष्ट और स्वर्गीय डॉ. उपेन्द्र देवकोटा जैसे डॉक्टर डॉ. गोंगल के साथ काम करते हुए अनुभव हासिल किए। देवकोटा बनने में डॉ. गोंगल का बड़ा हाथ था।

नेपाल में न्यूरो सर्जरी की बुनियाद तैयार करने में गुरू-शिष्य का रिश्ता महत्वपूर्ण था। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डॉ. देवकोटा को डॉ. गोंगल ने विदेश भेजकर न्यूरो सर्जरी की राह खोल दी।

वीर अस्पताल में न्यूरो सर्जरी की औपचारिक सेवा अभी शुरू नहीं हुई थी, पर सिर और तंत्रिका तंत्र के गंभीर रोगों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही थी। Nepal में ऐसे ऑपरेशन संभव नहीं थे, इसलिए कई मरीज महंगे खर्चे पर विदेश जाना पड़ता था। इससे डॉ. गोंगल चिंतित हो गए।

उन्होंने सोचा – नेपाल में ही न्यूरो सर्जरी शुरू करनी चाहिए। लेकिन इसके लिए दक्ष मानव संसाधन चाहिए थे जो तत्काल उपलब्ध नहीं थे। इसलिए वीर अस्पताल के किसी डॉक्टर को विदेश भेजने की योजना बनी। पहली बार कई लोग हिचकिचाए।

‘मरीज ज्यादा नहीं आते, अभ्यास नहीं होगा’ यह चिंता थी।

उस वक्त एक युवा डॉक्टर आगे आया – डॉ. उपेन्द्र।

डॉ. गोंगल के लिए यह क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण था। न्यूरो सर्जरी के भविष्य को देखते हुए अपना अस्पताल से एक सक्षम डॉक्टर विदेश जाने को तैयार देखकर वे उत्साहित हुए।

1982 में डॉ. गोंगल को ब्रिटिश सरकार द्वारा दो सप्ताह के कार्यक्रम के लिए ब्रिटेन जाना हुआ। वहां उन्होंने चिकित्सकों से संबंध बनाए। ग्लासगो विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. ग्राहम टिजडेल से मुलाकात हुई।

डॉ. गोंगल ने स्पष्ट कहा, ‘नेपाल को एक प्रशिक्षित न्यूरोसर्जन चाहिए। कृपया प्रशिक्षण में मदद करें।’

तब ग्लासगो विश्वविद्यालय न्यूरो सर्जरी और शोध में विश्व अग्रणी माना जाता था। प्रोफेसर टिजडेल ने गोंगल के प्रस्ताव को स्वीकार किया। कुछ समय बाद औपचारिक पत्र आया और ब्रिटिश काउंसिल के माध्यम से 1983 में डॉ. देवकोटा को ब्रिटेन भेजा गया।

शुरुआत में छह महीने का प्रशिक्षण था, जो बाद में तीन साल की स्कॉलरशिप में बदल गया। ब्रिटेन में डॉ. देवकोटा ने अपनी असाधारण क्षमता दिखाते हुए एफआरसीएस परीक्षा पास की, जिसमें केवल 15 से 20 प्रतिशत ही उत्तीर्ण होते थे।

लंबे प्रशिक्षण के बाद 1989 में डॉ. देवकोटा नेपाल लौटे और फिर से वीर अस्पताल में काम शुरू किया।

उस समय अस्पताल पुरानी स्थिति में था। देवकोटा के लौटने के बाद स्थिति में सुधार हुआ और डॉ. गोंगल के लिए यह बड़ा राहत का पल था। उन्होंने महसूस किया कि उनका बोझ हल्का हो गया है।

इसके बाद वीर अस्पताल में न्यूरो सर्जरी आधुनिक रूप में आगे बढ़ना शुरू हुआ। सरकार ने नए उपकरण लाने में मदद की, जरूरी पदस्थापन किए गए और अलग न्यूरो सर्जरी विभाग स्थापित हुआ।

अभी वीर अस्पताल में दो न्यूरो सर्जरी ऑपरेशन थिएटर हैं। एक डॉ. गोंगल के नाम और दूसरा डॉ. देवकोटा के नाम पर है।

डा. झा कहते हैं, ‘आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जब हम ऑपरेशन थिएटर में प्रवेश करते हैं, उनका नाम हमें याद दिलाता है।’

वरिष्ठ चिकित्सक धनु जी पौडेल डॉ. गोंगल को ‘नेपाली शल्यचिकित्सा का एक इतिहास’ मानते हैं।

‘नेपाली शल्यचिकित्सा का एक ऐसा इतिहास जिसने बिना सीटी स्कैन के जटिल सिर और मस्तिष्क की सफल शल्यक्रिया कर विश्व को चकित किया,’ डॉ. पौडेल कहते हैं, ‘जिन्होंने सिर से लेकर पैर तक की जटिल शल्यक्रिया में चिकित्सकों का सहयोग किया।’

डा. गोंगल को चापलूसी और मोलभाव से दूर, बोलचाल में कड़े लेकिन दिल में अत्यंत कोमल शल्यचिकित्सा के शिल्पकार के रूप में याद किया जाता है।

उनके नेपाली चिकित्सा क्षेत्र में योगदान की मान्यता स्वरूप कई पदक और पुरस्कार मिले। ज्योतिर्मय सुविख्यात त्रिशक्तिपट्ट प्रथम, गोरखा दक्षिणबाहु (प्रथम से चौथा तक), महेन्द्र विद्याभूषण सहित कई पदक डॉ. गोंगल को मिले।

वे अपने जीवन को ‘पहाड़ी की धूप’ से तुलना करते थे।

मिटते हुए धूप की तरह जीवन के अंतिम चरण में होने के बावजूद उन्होंने सपने देखना नहीं छोड़ा। ‘मेरा निजी सपना नहीं है,’ गोंगल ने छह साल पहले कहा था, ‘लेकिन इस जीवनकाल में नेपाल को समृद्ध होते देखना था।’

आज वे इस धरती पर नहीं हैं, लेकिन नेपाल में आधुनिक शल्यचिकित्सा की नींव रखने वाले उनके साहस, संघर्ष और समर्पण की कहानी चिकित्सा इतिहास में सदैव रोशन रहेगी।

सरकार के फैसले को न मानने वाले व्यवसायी, सोमवार से १४.२ किलो गैस सिलेंडर की बिक्री शुरू करेंगे

समाचार सारांश संशोधित विश्लेषण। गैस व्यवसायियों ने डीजल मूल्य वृद्धि के कारण सोमवार से १४.२ किलो गैस सिलेंडर बिक्री करने का निर्णय लिया है। व्यवसायियों ने आधा सिलेंडर नीति को अपनाने से इनकार किया है और कहा है कि यदि डीजल ढुलाई खर्च उपलब्ध नहीं कराया गया तो व्यापार करना संभव नहीं होगा। नेपाल आयल निगम ने गैस की कोई कमी नहीं बताई है, लेकिन भविष्य में संकट आने की संभावना को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। ८ वैशाख, काठमांडू। बाजार में गैस की कमी को रोकने के लिए सरकार द्वारा लागू की गई ‘आधा सिलेंडर’ नीति को गैस व्यवसायी मानने से इनकार कर चुके हैं। गैस व्यवसायियों ने सरकार के औपचारिक निर्णय का इंतजार किए बिना आगामी सोमवार से ग्राहकों को १४.२ किलो (पूरा) गैस सिलेंडर बेचने की घोषणा की है। गैस विक्रेता महासंघ और नेपाल एलपी गैस उद्योग संघ के बीच आज हुई संयुक्त बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसकी जानकारी गैस विक्रेता महासंघ के अध्यक्ष ज्ञानेश्वर अर्याल ने दी। अध्यक्ष अर्याल के अनुसार, डीजल की कीमत में अप्रत्याशित वृद्धि से ढुलाई खर्च वहन करना मुश्किल हो गया है, जिसके कारण व्यवसायी इस कदम को लेने के लिए बाध्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले आधा सिलेंडर (७.१ किलो) ही भरने का निर्णय लिया था, लेकिन इससे व्यवसायियों और उपभोक्ताओं दोनों को नुकसान हुआ है। ‘‘हमने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि सोमवार से १४.२ किलो गैस सिलेंडर बेचेंगे,’’ उन्होंने कहा, ‘‘यदि सरकार द्वारा डीजल के ढुलाई खर्च का प्रावधान नहीं किया गया तो हम कारोबार जारी रखने में असमर्थ हो जाएंगे और उसके बाद औपचारिक रूप से सरकार को सूचित करेंगे।’’ अध्यक्ष अर्याल ने नेपाल आयल निगम की अप्रभावी नीतियों के कारण आने वाले दो महीनों में देश में गैस की गंभीर कमी हो सकती है, इस बात की चेतावनी भी दी। नेपाल एलपी गैस उद्योग संघ के मुताबिक, फिलहाल सभी गैस बुलेट भरे हुए हैं और बाजार में पूर्ण क्षमता के सिलेंडर भेजने में कोई समस्या नहीं है। उद्योगी बताते हैं कि आधे सिलेंडर बेचने के नियम के कारण मौजूद गैस की बिक्री में कठिनाई हो रही है। आधे वजन वाले कई सिलेंडर उपभोक्ताओं के घरों पर पड़े हुए हैं, जिससे भारत से आए गैस बुलेट उद्योगों में अनलोड नहीं हो पा रहे हैं। इस कारण ७.१ किलो सिलेंडर भेजने पर सभी बुलेट जम होकर खड़े हो गए हैं। ‘‘अभी सभी गैस बुलेट रुक गए हैं, नेपाल आयल निगम यदि ध्यान नहीं देगा तो दो महीने बाद गैस की कमी हो सकती है,’’ अर्याल ने कहा। व्यवसायियों ने बताया कि वे सरकार के संबंधित अधिकारियों के साथ बार-बार चर्चा कर चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है। वे आरोप लगाते हैं कि सरकार के निकट व्यक्तियों को डीजल की कीमत न बढ़ाने का सुझाव दिया गया था, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। अपने व्यवसायिक अस्तित्व को बचाने और आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए व्यवसायियों ने स्वयं यह निर्णय लिया है। अध्यक्ष अर्याल ने दक्षिण एशियाई देशों भारत, भूटान और मालदीव के उदाहरण देते हुए बताया कि इन देशों ने डीजल मूल्य वृद्धि नहीं की और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने का प्रयास किया। ‘‘छिमेकी देशों ने आर्थिक स्थिरता के लिए डीजल मूल्य नहीं बढ़ाया, लेकिन नेपाल सरकार ने कोई ठोस प्रयास नहीं किया,’’ उन्होंने कहा। डीजल मंहगाई के कारण ढुलाई और अन्य खर्च बढ़ने से व्यवसायी घाटा सहने में असमर्थ हैं और गैस कारोबार जारी रखना चाहते हैं। नेपाल आयल निगम का कहना है कि बाजार में गैस की कमी नहीं है, लेकिन संभावित संकट को ध्यान में रखकर सावधानी बरतनी चाहिए।

पूर्णबहादुर खड्काद्वारा निवर्तमान कार्यवाहक सभापति के रूप में पहला संवाद

८ वैशाख, काठमाडौं। सर्वोच्च अदालत द्वारा नेपाली कांग्रेस के विवाद पर सुनवाई के बाद, पूर्णबहादुर खड्काले निवर्तमान कार्यवाहक सभापति के रूप में पहली बार प्रेस वक्तव्य जारी किया है। मंगलवार को जारी इस वक्तव्य में खड्काने विद्यार्थी संगठन और स्वतन्त्र विद्यार्थी यूनियन को समाप्त करने सरकार के निर्णय के प्रति आपत्ति जताई है। खड्काने विद्यार्थी संगठन को नेपाल के गौरवशाली राजनीतिक इतिहास की मेरुदण्ड के रूप में वर्णित किया है। उन्होंने बताया कि स्वतन्त्र विद्यार्थी यूनियन के माध्यम से ही देश ने संघीय लोकतान्त्रिक गणतांत्रिक व्यवस्था प्राप्त की है और नेपाली जनता उच्चतम नागरिक स्वतंत्रता का आनंद ले रही है।

‘निर्दलीय निरंकुश पंचायती प्रशासन के अंधकारमय युग में जब राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाया गया था,’ विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘उस समय राजनीतिक विचारधारा के आधार पर संगठित विद्यार्थी संघों ने लोकतंत्र की मशाल जलाई, जनता में चेतना जगाई और अधिनायकवाद के खिलाफ विद्रोह की शुरुआत करने वाले साहसिक अभियान का नेतृत्व किया, यह इतिहास सत्यापित करता है।’ वर्तमान में बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लोकतंत्र की नर्सरी मानी जाने वाली विद्यार्थी संघ-संगठन और स्वतन्त्र विद्यार्थी यूनियन के अस्तित्व पर प्रहार कर उन्हें समाप्त करने के निर्णय को विज्ञप्ति में सरकार का अधिनायकवादी कदम बताया गया है। खड्काने का प्रेस विज्ञप्ति इस प्रकार है :

सिनियर सम्हालिए, नयाँ धर्मराए – Online Khabar

वरिष्ठ खिलाड़ियों के नेतृत्व में नए खिलाड़ियों का प्रभाव

नेपाल ने कप्तान परिवर्तन करते हुए दीपेन्द्रसिंह ऐरी के नेतृत्व में यूएई के खिलाफ दो टी–20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। टी–20 टीम में नए खिलाड़ियों हेमन्त धामी और सन्तोष यादव ने डेब्यू किया है। सन्दीप लामिछाने ने दोनों मैचों में 3-3 विकेट लेकर प्रभावशाली प्रदर्शन किया, जबकि कुशल भुर्तेल ने दूसरे मैच में 84 रन बनाकर नेपाल को जीत दिलाने में मदद की। 8 वैशाख, काठमांडू।

कप्तान समेत खिलाड़ियों में बदलाव कर गठित नेपाली क्रिकेट टीम ने घरेलू मैदान त्रिवेणी क्रिकेट मैदान में यूएई के खिलाफ सोमवार और मंगलवार को दो टी–20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। इन मैचों में नेपाल और यूएई ने एक-एक मैच जीतकर श्रृंखला 1-1 से बराबर समाप्त की। मुकाबले प्रतिस्पर्धात्मक होने की उम्मीद थी, लेकिन दोनों मैच पूरी तरह प्रतिस्पर्धात्मक नहीं हो सके। पहले मैच में यूएई ने बढ़त बनाई, जबकि दूसरे मैच में नेपाल विजेता रहा।

इस श्रृंखला में कई अनुभवी खिलाड़ियों को बाहर रखते हुए युवा खिलाड़ियों को अवसर दिया गया था। हेमन्त धामी और सन्तोष यादव ने टी–20 अंतरराष्ट्रीय में पदार्पण किया। पहले मैच में महंगे साबित हुए हेमन्त ने दूसरे मैच में किफायती गेंदबाज़ी की। दीपेन्द्रसिंह ऐरी, सन्दीप लामिछाने और कुशल भुर्तेल ने अपने प्रदर्शन से टीम को संभाला। दीपेन्द्र दोनों मैचों में बल्लेबाजी में नाबाद रहे।

सन्दीप लामिछाने ने दोनों मैचों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। ओपनर कुशल भुर्तेल ने दूसरे मैच में 57 गेंदों में नाबाद 84 रन बनाकर नेपाल को जीत दिलाई। लंबे समय बाद टी–20 अंतरराष्ट्रीय टीम में वापसी करने वाले कुशल मल्ल ने भी बल्लेबाजी का प्रयास किया, लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल सके। इस बार मौका पाने वाले अर्जुन साउद, सन्दीप जोरा, बसिर अहमद, गुल्सन झा एवं नन्दन यादव का प्रदर्शन अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच सका।

सार्वजनिक परिवहन में सीसीटीवी और जीपीएस अनिवार्य, नई निर्देशिका जारी

सरकार ने सार्वजनिक परिवहन में अनिवार्य रूप से जीपीएस और दो या उससे अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए नई निर्देशिका तैयार की है। सार्वजनिक वाहनों में ऑनलाइन टिकट खरीद और भुगतान के लिए मोबाइल एप एवं डिजिटल प्रणाली को अनिवार्य किया जाएगा। अग्निशमन तंत्र, प्राथमिक चिकित्सा किट और आपातकालीन सहायता बटन लगाने के निर्देश भी जारी किए जाने की तैयारी है। ८ वैशाख, काठमाडौं। अब से सार्वजनिक परिवहन में ‘जीपीएस’ (किसी भी वस्तु या व्यक्ति की स्थिति का पता लगाने वाला उपकरण) अनिवार्य रूप से स्थापित करना होगा। भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात मंत्रालय ने परिवहन साधनों को तकनीकी सुसज्जित, स्वस्थ, सुरक्षित, मर्यादित और यात्री-मित्र बनाए रखने के लिए निर्देशिका २०८२ का मसौदा तैयार किया है। इसी निर्देशिका के तहत सरकार जीपीएस को सार्वजनिक वाहन में अनिवार्य करने जा रही है। इसके लिए यातायात व्यवस्था विभाग तकनीकी सहयोग प्रदान करने का प्रस्ताव दे चुका है।

सवारी चालक, परिचालक और वाहन मालिक की जिम्मेदारी होगी कि वे उपकरण का समुचित संचालन और निगरानी सुनिश्चित करें। लगाए जाने वाले उपकरणों में अनिवार्य भौगोलिक सीमांकन, तेज गति चेतावनी प्रणाली, इग्निशन संचालन/बंद चेतावनी प्रणाली और मार्ग संबंधी जानकारी शामिल करनी होगी। मंत्रालय आगामी सप्ताह में उक्त निर्देशिका का अंतिम रूप देने के लिए संबंधित पक्षों के साथ चर्चा की तारीख निर्धारित करेगा। सरकार यातायात व्यवस्थापन कार्यविधि निर्देशिका २०६० की धारा ११ में संशोधन करते हुए सार्वजनिक यातायात आचारसंहिता २०६७ को हटाकर नई निर्देशिका लागू करने जा रही है।

सार्वजनिक वाहनों में सीसीटीवी लगाने की जिम्मेदारी संबंधित वाहन मालिक की होगी। टैक्‍सी के मामले में तो सीसीटीवी अनिवार्य नहीं किया गया है, परंतु यदि वाहन मालिक चाहे तो विभाग तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। सीसीटीवी का डेटा कम से कम ३ महीने तक सुरक्षित रखना होगा। इसके अलावा, लगाए जाने वाले उपकरणों से वाहन के भीतर सभी गतिविधियों को रिकॉर्ड करना आवश्यक होगा।

ऑनलाइन टिकट और भुगतान के लिए मोबाइल एप्लीकेशन या अन्य सुविधाओं सहित प्रणाली विकसित करनी होगी। यातायात सेवा के भुगतान हेतु नेपाल सरकार से मान्यता प्राप्त भुगतान गेटवे या क्विक रिस्पांस कोड (क्यूआर कोड) का उपयोग अनिवार्य होगा। साथ ही, सार्वजनिक परिवहन में अग्नि नियन्त्रण उपकरण और प्राथमिक चिकित्सा किट को अनिवार्य रखा जाएगा। चालक और परिचालक को इसके उपयोग संबंधी न्यूनतम प्रशिक्षण भी प्रदान करना आवश्यक होगा।