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लेखक: space4knews

कवयित्रि शर्मा की ‘पोइटिक डायस्पोरा’ कविता संग्रह पर समीक्षा

कवयित्री अनुशा शर्मा सुवेदी द्वारा लिखित कविता संग्रह ‘पोइटिक डायस्पोरा’ की समीक्षा ललितपुर के हात्तिवन में आयोजित की गई। प्रोफेसर अरुण गुप्ता ने कविता की शब्दावली को विचारशील और लेखिका की शब्दों के साथ खेलने की क्षमता को सशक्त बताया। अनुशा ने परिवार से दूर रहने के दौरान अनुभव किए गए भावनाओं को कविताओं में समेकित किया है और शिव भगवान के प्रति गहरा भक्ति भाव भी व्यक्त किया है।

काठमांडू। कवयित्री अनुशा शर्मा सुवेदी की कविता कृति ‘पोइटिक डायस्पोरा’ पर चर्चा हुई। ललितपुर के हात्तिवन में आयोजित विशेष समारोह में इस कृति की समीक्षा की गई। प्रमुख अतिथि प्रोफेसर अरुण गुप्ता ने कविताओं की शब्दावली को अत्यंत विचारशील बताया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा में लिखी 130 कविताएँ बेहद प्रभावशाली हैं। लेखिका की किसी विषय को पकड़कर शब्दों के साथ खेलने की क्षमता और शब्दकल्पना शक्ति बहुत मजबूत है।

इसी प्रकार कवि समीक्षक केशव सिग्देल ने अनुशा की कविताओं को उच्च स्तर का बताया। उन्होंने कहा, ‘शब्द-शब्द में गहरे अर्थों को सुंदर कलाकृति में पिरोया गया है। जटिल शैली पाठक को बांधकर रखने में असमर्थ होती है। कविताओं में भक्तिभाव प्रमुख है। कविताओं को पढ़ते हुए कवि की मनोस्वतंत्रता की भावना स्पष्ट झलकती है।’ समीक्षक महेश पौडेल ने अनुशा की कविताओं में जीवन और संसार को देखने की दृष्टि होने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इनमें ध्यान करने की क्षमता विद्यमान है।

कवि सरला केसी ने भी अनुशा की कविताओं में गहरा भाव देखा। उन्होंने कहा, ‘जब मैं उनकी कविताएँ पढ़ती हूँ तो ऐसा लगता है जैसे मैं किसी ठंडी छतरी के नीचे बैठी हूँ। शब्दों में शक्ति और भावों में प्रभाव होता है। भावनात्मक संदेश में पाठक को बांधने की योग्यता कविताओं में झलकती है।’ कवि लेखक राजीव श्रेष्ठ ने अनुशा की कविताओं में जीवन अनुभव की झलक पाई। उन्होंने कहा, ‘उनकी कविताएँ उनके जीवन के अनुभवों का प्रतिबिंब हैं। मैं उनके साथ निकटता से काम करता आ रहा हूँ इसीलिए उन्हें जानता हूँ। वह आध्यात्मिक व्यक्ति हैं। शिव भक्ति में उन्हें चरम आनंद प्राप्त होता है। इसलिए उनकी कविताओं में आध्यात्मिक रस भी प्रबल है।’

प्रोफेसर गुप्ता ने बताया कि स्वयं को पहचानने के बाद महिला कैसे समाज में सशक्त भूमिका निभा सकती है, यह संदेश अनुशा की कविताओं में विद्यमान है। उन्होंने कहा कि कविताएँ पढ़ते समय आध्यात्मिक भाव के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना की झलक भी मिलती है। पत्रकार, कवि एवं लेखक दीपक सापकोटा ने अनुशा की कुछ कविताओं का पाठ किया। पत्रकार एवं साहित्यकार राज सरगम ने सहजकर्ता की भूमिका निभाते हुए अनुशा के साथ कृति पर संवाद किया।

इस अवसर पर अनुशा ने बताया कि उन्होंने उन बातों को कविताओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया जिनको वे शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाईं। उन्होंने कहा, ‘मैंने विभिन्न कारणों से परिवार से दूर रहते हुए अपने भाव को कविताओं के माध्यम से व्यक्त किया है। अपने विचारों को कविताओं के जरिए प्रस्तुत किया है। इस कृति के प्रकाशन में मेरे परिवार ने मेरा बहुत सहयोग किया है।’ उन्होंने प्रकृति प्रेम और शिव भगवान के प्रति गहरी भक्तिभाव की भी जानकारी दी। कार्यक्रम में लेखक एवं बालगीतकार रामबाबु सुवेदी ने स्वागत भाषण दिया।

प्रचण्ड और गगन के बीच बैठक सम्पन्न

८ वैशाख, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस के सभापति गगन कुमार थापा और नेकपा अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड के बीच बैठक सम्पन्न हुई है। प्रचण्ड के सचिवालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दोनों के बीच मंगलवार दोपहर मानभवन स्थित प्रचण्ड निवास में वार्ता हुई थी। ‘चुनाव के बाद यह पहली मुलाकात थी। समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई,’ दाहाल ने बताया। बैठक में सामान्य बातचीत ही हुई है। ‘चुनाव बाद की स्थिति का विश्लेषण और राजनीतिक विषयों पर ही चर्चा हुई है। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने वाली कोई निश्चित वार्ता नहीं हुई है,’ स्रोत ने बताया।

क्याटालिस्ट के अंदरूनी हिस्से से ऑक्सीजन प्रवाह की नई खोज

वैज्ञानिकों ने क्याटालिस्ट की केवल सतह ही नहीं, बल्कि उसके अंदरूनी हिस्से से भी ऑक्सीजन के परमाणु प्रवाहित हो रहे हैं, इसका प्रत्यक्ष अवलोकन किया है। डालियान इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल फिजिक्स के शोधकर्ताओं ने ‘बल्क ऑक्सीजन स्पिलओवर’ प्रक्रिया को ‘एन्वायरनमेंटल ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी’ के माध्यम से खोजा है। इस खोज से क्याटालिस्ट की अवधारणा को त्रිआयामी बनाया जाएगा और ऊर्जा उत्पादन तथा पर्यावरणीय स्वच्छता में प्रभावी योगदान मिलेगा। ८ वैशाख, काठमांडू।

वैज्ञानिकों ने क्याटालिस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर वर्षों से चली आ रही मान्यता को चुनौती देते हुए महत्वपूर्ण खोज की है। डालियान इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल फिजिक्स की टीम ने पहली बार प्रत्यक्ष रूप से दिखाया है कि ऑक्सीजन के परमाणु केवल क्याटालिस्ट की सतह से ही नहीं, बल्कि इसके अंदरूनी भाग (बल्क) से भी प्रवाहित हो रहे हैं। ‘नेचर’ जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन से भविष्य में अधिक कुशल और स्मार्ट क्याटालिस्ट विकसित करने के नए मार्ग खुलेंगे।

आमतौर पर माना जाता था कि रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करने में केवल क्याटालिस्ट की बाहरी सतह सक्रिय होती है और उसका अंदरूनी भाग निष्क्रिय होता है। लेकिन प्रोफेसर ताओ झांग और यानकियांग हुआंग के नेतृत्व में टीम ने ‘एन्वायरनमेंटल ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी’ का उपयोग करके ऑक्सीजन के परमाणुओं को क्याटालिस्ट की आंतरिक परत से लेकर धातु की सतह तक प्रवाहित होते हुए ट्रैक किया है। वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया को ‘बल्क ऑक्सीजन स्पिलओवर’ नाम दिया है।

टाइटेनियम डाइऑक्साइड की भूमिका को समझने के लिए टीम ने रुथेनियम (Ru) और टाइटेनियम डाइऑक्साइड (TiO2) के मिश्रण का उपयोग किया। टाइटेनियम डाइऑक्साइड में ऑक्सीजन संग्रहण और उत्सर्जन की क्षमता पाई गई। परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि ऑक्सीजन के परमाणु सतह से ३ से ५ परतें नीचे से होकर धातु की इंटरफेस तक पहुंचते हैं। प्रोफेसर वेई लियू के अनुसार क्याटालिस्ट की इंटरफेस ‘एटॉमिक गार्ड’ की तरह कार्य करती है और ऑक्सीजन प्रवाह को नियंत्रित करती है।

इस प्रयास का प्रभाव यह है कि लगभग ५० वर्षों तक वैज्ञानिकों का मानना रहा कि धातु और उसके आधारभूत सामग्री के बीच की अंतःक्रिया केवल सतह तक सीमित होती है। लेकिन यह नई खोज क्याटालिस्ट की द्वि-आयामी सतह की अवधारणा को एक त्रि-आयामी ‘सतह – इंटरफेस – अंदरूनी भाग’ के समन्वय में परिवर्तित कर देती है। यह विशेष रूप से ऊर्जा उत्पादन, प्लास्टिक निर्माण और पर्यावरणीय शुद्धता में क्याटालिस्ट की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करेगी। प्रोफेसर झांग के अनुसार अब लक्ष्य है कि क्याटालिस्ट के अंदरूनी भाग को भी प्रत्यक्ष रूप से रासायनिक प्रतिक्रिया में शामिल कर उत्पादन लागत कम करना और दक्षता में वृद्धि करना।

‘राम नाम सत्य’ बाट निर्माताले कति कमाए ? – Online Khabar

‘राम नाम सत्य’ फिल्म से निर्माताओं को मिली कितनी आय?

फिल्म ‘राम नाम सत्य’ ने २७ चैत्र से रिलीज होकर सोमवार तक ३ करोड़ २० लाख रुपये का कुल कलेक्शन किया है, यह जानकारी वितरक गोविन्द शाही ने दी। निर्माता उपेन्द्र शाही ने बताया कि अमेरिकी बाजार को छोड़कर विदेशी बाजार से ७० लाख रुपये की आय हुई है तथा अमेरिका में २४ अप्रैल से २०० शो होने वाले हैं। निर्देशक माइकल चन्द ने बताया कि डिजिटल राइट्स ७२ लाख रुपये में बिक गई हैं जिससे निर्माण पक्ष को लाभ हुआ है और ३ करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म के साथ सुरक्षा का कदम उठाया गया है।

काठमाडौं। २७ चैत्र से प्रदर्शित हुई फिल्म ‘राम नाम सत्य’ ने बॉक्स ऑफिस पर सोमवार तक ३ करोड़ २० लाख रुपये का सकल कलेक्शन किया है, इसी बात की जानकारी वितरक गोविन्द शाही ने दी। शनिवार तक विकास बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार फिल्म की कमाई लगभग २ करोड़ ७८ लाख रुपये थी। हालांकि कुछ सिनेमाघरों के आंकड़े बोर्ड में शामिल नहीं होने की वजह से वितरक के मुताबिक व्यापार थोड़ा अधिक दिखाया गया है, ऐसा वितरक शाही ने बताया।

फिल्म ने अमेरिकी बाजार को छोड़कर विदेशी बाजार से ७० लाख रुपये की कमाई कर ली है, यह जानकारी निर्माता उपेन्द्र शाही ने दी। अमेरिका के विभिन्न शहरों में २४ अप्रैल से यह फिल्म २०० शो के साथ प्रदर्शित होगी। निर्माण पक्ष ने अमेरिका में फिल्म को शेयर प्रतिशत के आधार पर बेचा है और अमेरिका से भी निर्माताओं को अच्छी आय होने की उम्मीद है।

ओएसआर डिजिटल से फिल्म ने ७२ लाख रुपये डिजिटल राइट्स की बिक्री से प्राप्त किए हैं, यह जानकारी निर्देशक माइकल चन्द ने दी। डिजिटल राइट्स ७२ लाख में बिक जाने के बाद निर्माण पक्ष को भी लाभ हुआ है। ३ करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म से वे सुरक्षित मार्ग पर हैं, निर्देशक चन्द ने यह भी बताया। श्वेता विमली और उपेन्द्र शाही के निर्माण में बनी इस फिल्म में विराज भट्ट, सुशील श्रेष्ठ, दिव्या रायमाझी, सुपुष्पा भट्ट, आयुषसिंह ठकुरी, खुशी कार्की, सुनील थापा, प्रशांत ताम्राकार सहित कई कलाकारों ने अभिनय किया है।

जेलबाट फरार ज्यान मुद्दाका दोषी पक्राउ

धादिङको बेनिघाट रोराङ गाउँपालिका–७ का ३८ वर्षीय झ्याप्ले कमल न्यौपानेलाई काठमाडौं उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालयको टोलीले पक्राउ गरेको छ। उनी ज्यानसम्बन्धी मुद्दाको समयमा सुन्धारा स्थित केन्द्रीय कारागार जग्गनाथदेवलबाट फरार भएका थिए। उनलाई कर्तव्य ज्यान मुद्दामा १० वर्ष कैद सजाय सुनाइएको थियो। मनमैजुबाट पक्राउ गरी उनलाई पुनः केन्द्रीय कारागार जग्गनाथदेवल पठाइएको छ। ८ वैशाख, काठमाडौं। कारागारबाट फरार भएका कर्तव्य ज्यान मुद्दाका दोषी पक्राउ परेका छन्। पक्राउ पर्नेमा धादिङको बेनिघाट रोराङ गाउँपालिका–७ धुसाका ३८ वर्षीय झ्याप्ले कमल न्यौपाने, जसलाई कमल विक नामले पनि चिनिन्छ, रहेका छन्। उनलाई काठमाडौं उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालयको टोलीले पक्राउ गरेको हो। उनी ज्यान मुद्दाको बेलामा सुन्धारा स्थित केन्द्रीय कारागार जग्गनाथदेवलबाट फरार भएका थिए। उनलाई कर्तव्य ज्यान मुद्दामा १० वर्ष कैद सजाय सुनाइएको थियो। पक्राउपछि उनलाई पुनः केन्द्रीय कारागार जग्गनाथदेवल पठाइएको प्रहरीले जानकारी दिएको छ।

कांग्रेस ने संविधान संशोधन से संबंधित आंतरिक चर्चा शुरू की

८ वैशाख, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस ने संविधान संशोधन के लिए सुझाव संकलन करने वाली समिति ने मंगलवार से अपना कार्य प्रारंभ किया है। पार्टी के उपसभापति पुष्पा भुसाल के संयोजकत्व में गठित १७ सदस्यों वाली समिति ने अपना पहला बैठक कर कार्य आगे बढ़ाया। इस बैठक में पार्टी सभापति गगन थापा, महामंत्री प्रदीप पौडेल, सहमहामंत्री उदयशमशेर राणा और योगेन्द्र चौधरी भी उपस्थित थे। बैठक में पार्टी सभापति थापाने संविधान संशोधन की आवश्यकता और समिति के दायित्वों के बारे में जानकारी दी।
थापाने कहा कि संविधान बनने को १० वर्ष से अधिक समय हो चुका है और अभ्यास के दौरान पाई गई कुछ विसंगतियों को संशोधित करने की जरूरत है। लोकतंत्र, नागरिक अधिकार, राष्ट्रीयता और समृद्धि को केंद्र में रखते हुए संविधान संशोधन पर चर्चा करने का समिति के पदाधिकारियों से आग्रह किया।
समिति के सदस्य सचिव राजु कटुवाल के अनुसार संविधान का सूक्ष्म अध्ययन करके संशोधन से संबंधित मसौदा तैयार किया जाएगा और इसके लिए संबंधित पक्षकारों, विज्ञों एवं सभी स्तरों के नागरिकों के साथ व्यापक संवाद की योजना बनाएगी। इसके साथ ही सरकार ने शुक्रवार तक कांग्रेस से संविधान संशोधन विषयक बहसपत्र बनाने के लिए प्रतिनिधि नाम भेजने का अनुरोध किया है, जो समिति को सूचित किया गया। समिति में वरिष्ठ अधिवक्ता राधेश्याम अधिकारी, हरिहर दाहाल, प्रेमबहादुर खड्का, उपेन्द्रकेशरी न्यौपाने, शेरबहादुर केसी, यदुनाथ खनाल, गोपालकृष्ण घिमिरे, योगेन्द्रबहादुर अधिकारी, दिनेश त्रिपाठी, सिताराम केसी, ललितबहादुर बस्नेत तथा अधिवक्ता रनबहादुर थेवे, शर्मिला श्रेष्ठ, झलमाया बिक और निरज गुप्ता सदस्य के रूप में शामिल हैं।

अमेरिका किस ईरानी ताकत से बातचीत कर रहा है?

समाचार की समीक्षा के बाद तैयार। ईरान पाकिस्तान में अमेरिका के साथ शांति वार्ता में हिस्सा लेने की संभावना पर विचार कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स (आईआरजीसी) ने होर्मुज स्ट्रेट में नियंत्रण बनाए रखा है और जहाजों के आवागमन को प्रबंधित कर रहा है। ईरानी सरकार और आईआरजीसी के बीच अमेरिका के साथ वार्ता को लेकर मतभेद नजर आ रहे हैं और आईआरजीसी देश में प्रमुख सत्ता है। ८ वैशाख, काठमाडौं।

मंगलवार, २१ अप्रैल को ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ईरान पाकिस्तान में अमेरिका के साथ शांति वार्ता में भाग लेने पर विचार कर रहा है। ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स’ (आईआरजीसी) से जुड़े फ़ार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, मेजर जनरल अब्दुल्लाही ने फ़ारसी में कहा, ‘आईआरजीसी ने इज़राइल और अमेरिका को थका दिया है, जिससे वे युद्धविराम की मांग करने पर मजबूर हुए हैं।’

हालांकि कुछ दिन पहले ईरानी संसद के सभापति मोहम्मद बगर गालिबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की धमकियों के बीच ईरान ने वार्ता स्वीकार नहीं करने की बात कही थी। सोमवार को ही ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के साथ वार्ता में शामिल होने के बारे में अभी कोई निर्णय नहीं होने की जानकारी दी। इसी प्रकार, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सोमवार को कहा कि अमेरिका के साथ तनाव कम करने के लिए सभी कूटनीतिक उपाय अपनाए जाने चाहिए, हालांकि उन्होंने अमेरिकी कदम की वजह से बढ़े अविश्वास पर चिंता भी जताई। विदेश मंत्री अब्बास अराघाची ने अधिक सौम्य रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका के साथ संबंधों की सभी पक्षों से समीक्षा कर भविष्य की रणनीतियां निर्धारित की जाएंगी।

विचारों में भिन्नता

सोमवार को ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने भी अमेरिका के साथ वार्ता जारी रखने की बात कही लेकिन इरान की सीमाओं का सम्मान आवश्यक बताया। इससे पता चलता है कि अमेरिका के साथ वार्ता विषय पर २४ घंटे के भीतर विभिन्न अभिव्यक्तियां आई हैं और ईरान अंततः वार्ता की दिशा में कितनी गंभीर है, स्पष्ट नहीं है। अप्रिल ११ को दोनों पक्षों के बीच पहले चरण की वार्ता हुई थी, जो दो सप्ताह के युद्धविराम के बाद हुई थी, मगर वह एक ही दिन खत्म हो गई। ऐसी स्थिति में ईरान में अंतिम निर्णय आखिर किसका है, यह अस्पष्ट है।

डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि ईरान के नए नेता पुराने कट्टरपंथी नहीं हैं और उनके साथ संवाद संभव है।

निर्णय किसके पास है?

ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि ईरान के नए नेता समझदार हैं तो देश का भविष्य उज्ज्वल और समृद्ध हो सकता है, लेकिन वे कौन हैं यह अभी स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार कभी-कभी अमेरिका के साथ शांति प्रक्रिया सही दिशा में लगती है तो कभी उलझन और अस्थिरता छा जाती है। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल उठता है – आखिर अमेरिका ईरान की किस ताकत से वार्ता कर रहा है? ‘पिस टॉक’ के माध्यम से होर्मुज स्ट्रेट खोलने या बंद करने के फैसले आखिर किसके हैं? क्या राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघाची, सभापति गालिबाफ, या इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स (आईआरजीसी)?

ईरानी मामलों के विशेषज्ञ सईद गोल्कर ने वाल स्ट्रीट जर्नल से कहा है कि वर्तमान में ईरान में ऐसा कोई केंद्रित व्यक्तित्व नहीं है जो पूरे देश को समेट सके, इसलिए अनिश्चितता बढ़ी है।

क्या आईआरजीसी सबसे शक्तिशाली है?

शुक्रवार, १७ अप्रैल को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघाची ने होर्मुज स्ट्रेट से सभी व्यावसायिक जहाजों के आवागमन की पूरी अनुमति देने की सूचना दी थी। लेकिन कुछ घंटों बाद आईआरजीसी ने घोषणा की कि अमेरिका की नाकेबंदी जारी रहने तक वे होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेंगे। इसके बाद शनिवार, १८ अप्रैल को भारतीय झंडे वाले दो जहाजों पर गोलीबारी की खबर आई और आईआरजीसी नौसेना ने उस क्षेत्र से उन जहाजों को आगे बढ़ने से रोका था। इससे अराघाची के विपरीत यह साबित हुआ कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को खुला नहीं रखा, और वहां नियंत्रण आईआरजीसी के पास है।

विदेश नीति विशेषज्ञ हर्ष पंत कहते हैं, ‘ईरान सरकार और आईआरजीसी के बीच मतभेद हैं। आईआरजीसी अपनी सत्ता बनाए रखना चाहता है और आज ईरान में आईआरजीसी के ऊपर कोई नियंत्रण नहीं है।’ अंतरराष्ट्रीय मामलों की जानकार स्मिता शर्मा ने कहा, ‘अराघाची जैसे लोग ईरान में बहुत कम हैं जो अभी अमेरिका के साथ वार्ता कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अलग थलग करने की कोशिश की जा रही है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘अराघाची को ईरान में अपमानित किया गया है और आईआरजीसी के वीडियो क्लिप उनके मज़ाक उड़ाते हैं।’

गालिबाफ की भूमिका

इस्लामवाद की वार्ता से पहले भी ईरान ने वार्ता में चुनौतियां पेश की थीं। बाद में वार्ता हुई और संसद के सभापति गालिबाफ ने इसे ‘रिक्त’ बताया था। मार्च २३ को द गार्जियन ने उल्लेख किया कि ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विट्कॉफ और अब्बास अराघाची के बीच मिस्र की मध्यस्थता में बैकचैनल बातचीत हुई थी, जिसे गालिबाफ ने नकार दिया और अमेरिका को अविश्वसनीय कहा था। १ मार्च को सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनी के निधन के अगले दिन गालिबाफ ने कहा था, ‘अमेरिका और इज़राइल ने रेड लाइन पार कर दी है और उन्हें इसका मूल्य चुकाना होगा।’ उन्होंने सरकारी संचार माध्यमों में कड़े बयान दिए और ट्रम्प तथा नेतन्याहू पर गंभीर आरोप लगाए। छह सप्ताह बाद, ११ अप्रैल को गालिबाफ इस्लामी वैश्विक वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख थे। यह १९७९ के बाद पहली उच्चस्तरीय वार्ता थी। गालिबाफ वार्ता का ईरानी चेहरा होने के बावजूद अमेरिकी विरोधी कठोर रुख के कारण असमंजस पैदा हुआ है और कई विशेषज्ञों का मानना है कि शांति वार्ता सफल होना कठिन है।

क्या शांति वार्ता ने ईरान के कट्टरपंथियों को नाराज़ किया?

अमेरिका और ईरान के पहले चरण की वार्ता के दौरान कट्टरपंथी समूह उत्साहित नहीं थे। वे होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने पर ज्यादा उत्साहित थे। उनका मानना है कि युद्ध जारी रखना चाहिए क्योंकि इससे अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ स्थिति मजबूत हो रही है। तेहरान से मिली रिपोर्ट के अनुसार, युद्धविराम घोषित होने पर उन्होंने अमेरिकी और इज़राइली झंडे जला दिए थे। आईआरजीसी के तहत बसिज मिलिशिया के कुछ सदस्यों ने भी रात भर जागकर इस फैसले का विरोध किया था। इससे साबित होता है कि उस समय आईआरजीसी और ईरानी सरकार की सोच पूरी तरह भिन्न थी।

स्मिता शर्मा ने कहा, ‘ट्रम्प के लगातार बदलते बयानों ने ईरान में कट्टरपंथी ताकतों को मजबूत किया है क्योंकि वे फिर से जनता को दिखाने में सफल हुए हैं कि अमेरिका भरोसेमंद नहीं है।’

यूएई ने दूसरे टी–20 मैच में नेपाल को 129 रन का लक्ष्य दिया

यूएई ने दूसरे टी–20 अंतरराष्ट्रीय मैच में नेपाल को 129 रन का लक्ष्य दिया है। निर्धारित 20 ओवरों में यूएई ने 8 विकेट खोते हुए 128 रन बनाए। नेपाल के सन्दीप लामिछाने ने 3 विकेट लिए जबकि हेमन्त धामी ने 2 विकेट हासिल किए।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय क्रिकेट मैदान में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए यूएई ने 20 ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर 128 रन बनाए। यूएई के अक्षदीप नाथ ने अर्धशतकीय पारी खेली। 48 रन पर 6 विकेट गिरने के बाद संकट में फंसे यूएई की बल्लेबाजी अक्षदीप और मोहम्मद अरफान की साझेदारी ने मजबूती प्रदान की। नाथ और अरफान ने सातवें विकेट के लिए 64 रन जोड़े। नाथ 53 रन पर नाबाद रहे जबकि अरफान 32 रन पर आउट हुए।

कप्तान मोहम्मद वासिम शून्य पर आउट हुए, अदीब उसमानी ने 30 रन बनाए, अलीशान शराफू 1 रन, हरप्रीत सिंह भाटिया 1 रन, शोएब खान 0, निलंश केसवानी 0 और तनभीर 0 रन पर आउट हुए। गेंदबाजी में नेपाल के सन्दीप लामिछाने को 3 विकेट मिले, हेमन्त धामी ने 2 विकेट लिए जबकि नंदन यादव और शाहव आलम को एक-एक विकेट मिला। पहले मैच में नेपाल को यूएई के खिलाफ 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था।

योजना आयोग र नीति प्रतिष्ठान खारेज होइन, अझ सुदृढ बनाउने हो : प्रधानमन्त्री – Online Khabar

योजना आयोग और नीति अनुसन्धान प्रतिष्ठान को समाप्त नहीं किया जाएगा, बल्कि और मजबूत बनाया जाएगा : प्रधानमंत्री

समाचार सारांश

  • प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने राष्ट्रीय योजना आयोग और नीति अनुसन्धान प्रतिष्ठान को समाप्त न कर उनके सुधार और सुदृढ़ीकरण का निर्देश दिया।
  • उन्होंने नीति अनुसन्धान प्रतिष्ठान के विशेषज्ञों के प्राज्ञिक कार्यों को पूरी तरह अपनाने तथा ठोस योजना और सावधानीपूर्वक कार्यान्वयन की आवश्यकता बताई।
  • अर्थमंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने इसे सुधार का स्वर्णिम अवसर मानते हुए नीति विकास और नवप्रवर्तनात्मक कार्यक्रमों का राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने की योजना की जानकारी दी।

८ वैशाख, काठमाडौं। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने राष्ट्रीय योजना आयोग तथा नीति अनुसन्धान प्रतिष्ठान जैसे संस्थानों को समाप्त करने के बजाय सुधार कर उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाकर सरकार की सेवा प्रदान करने की क्षमता को प्रभावी बनाने पर बल दिया है।

प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय में मंगलवार को आयोग के पदाधिकारी एवं कर्मचारियों के साथ हुई चर्चा में शाह ने कहा कि योजना निर्माण और नीतिगत अनुसन्धान प्रणालीगत होने पर ही सरकार की सेवा प्रदान करने में आसानी होगी। उन्होंने कहा, ‘इन संस्थाओं में सुधार किया जा सके तो सरकार के संचालन में बड़ी मदद मिलेगी।’

नीति अनुसन्धान प्रतिष्ठान के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘विशेषज्ञों और अनुसन्धानकर्ताओं का महत्व हम जानते हैं। हमें ऐसी उत्कृष्ट विशेषज्ञता चाहिए, जो जनप्रतिनिधियों से गहरा अध्ययन और दूरगामी सोच प्रस्तुत कर सके। सरकार विशेषज्ञों के प्राज्ञिक कार्यों को पूर्ण रूप से स्वीकार करेगी।’

प्रधानमंत्री शाह ने स्पष्ट किया कि बिना किसी बहाने के परिणाम निकालने के उद्देश्य से दोनों संस्थाओं को कार्य करने का निर्देश दिया गया है। ‘किसी भी कार्य को कराने के लिए ठोस योजना और सजग कार्यान्वयन आवश्यक होता है। विकास में विषय विशेषज्ञ की भूमिका अतुलनीय है। इस तथ्य को आत्मसात कर आगे बढ़ें।’

मंत्रालयों के बीच समन्वय की कमी के दावे को उन्होंने अस्वीकार करते हुए कहा कि एक ही सरकार के अधीन ऐसा कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। साथ ही बजट और कानूनी जटिलताओं को काम न करने के बहाने के रूप में प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। ‘प्रभावी अध्ययन और अनुसन्धान से ही परिणाम संभव है। पुराने नीति और कानूनों पर आधारित काम ५० वर्षों तक हो सकता है, लेकिन जब तक सुधार नहीं होगा तब तक देश समृद्ध नहीं हो सकता,’ प्रधानमंत्री ने कहा।

उसी अवसर पर अर्थमंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने वर्तमान समय को सुधार का स्वर्णिम अवसर मानते हुए बताया कि उच्च राजनीतिक प्रतिबद्धता के तहत कार्य आगे बढ़ेगा। उन्होंने विशेषज्ञों के ज्ञान को सरकारी नीतियों, कार्यक्रमों और बजट में परिवर्तित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि स्पष्ट लक्ष्य, पर्याप्त बजट, निश्चित जिम्मेदारी और मापन योग्य परिणाम सहित प्रस्ताव संबंधित मंत्रालयों के माध्यम से लाना होगा।

अर्थमंत्री वाग्ले ने वर्तमान संस्थागत संरचना के सुदृढ़ीकरण, अप्रासंगिक प्रावधानों की समाप्ति और नई जरूरतों के अनुसार नीति विकास की प्रक्रिया शुरू करने की सूचना दी। उन्होंने नवप्रवर्तनात्मक कार्यक्रमों को ‘पायलट प्रोजेक्ट’ के रूप में शुरू कर सफलता मिलने पर राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने की रणनीति भी साझा की।

चर्चा के दौरान आयोग के पदाधिकारियों ने अपने क्षेत्र के कार्यों की प्रगति, चुनौतियां और बजट की स्थिति पर प्रधानमंत्री को रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रतिष्ठान के कर्मचारियों ने अब तक के अध्ययन- अनुसन्धान से सरकारी कार्य प्रणाली में महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख किया और अधिक जनशक्ति व संसाधनों की आवश्यकता जताई। प्रधानमंत्री के साथ प्रत्यक्ष संवाद से उन्हें और उर्जा और मेहनत के साथ कार्य करने की प्रेरणा मिली है।

अस्पतालों में प्रसूति सेवा के दौरान होने वाली हिंसा पर राष्ट्रिय सभा में चर्चा होगी

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार किया गया।

  • महिला, कानून और विकास मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम में एफडब्लुएलडी के निदेशक सविन श्रेष्ठ ने प्रसूति हिंसा के खिलाफ कानून की कमी की बात कही।

८ वैशाख, काठमांडू। राष्ट्रिय सभा के तहत संघीयता सुदृढ़ीकरण और राष्ट्रिय सरोकार की समिति की अध्यक्ष जयंतीदेवी राई ने प्रसूति हिंसा से संबंधित विषयों पर सम्बंधित मंत्रालय के अधिकारियों को बुलाकर चर्चा करने की बात कही है।

११६वें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला, कानून और विकास मंच (एफडब्लुएलडी) द्वारा मंगलवार को आयोजित ‘मबाट महिलावाद’ कार्यक्रम में सम्मानजनक मातृत्व सेवा तथा प्रसूति हिंसा से संरक्षण विषय पर सभा अध्यक्ष राई ने इस आशय की बात कही। उन्होंने कहा, ‘निजी अस्पतालों की तुलना में सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवा के दौरान हिंसा अधिक होती है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसे मामलों पर गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के साथ चर्चा करूंगी।’

हिंसा के खिलाफ कानून निर्माण और लैंगिक समानता के संघर्ष में एफडब्लुएलडी द्वारा नेपाली समाज में निभाई गई भूमिका की उन्होंने प्रशंसा की।

सम्मानजनक प्रसूति सेवा की वर्तमान स्थिति और कार्यक्रम के उद्देश्य पर एफडब्लुएलडी के कार्यकारी निदेशक अधिवक्ता सविन श्रेष्ठ ने प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रसूति सेवा के दौरान हिंसा के मामले में दंडित करने के लिए कानून की कमी है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र की महिला विरोधी सभी प्रकार के भेदभाव उन्मूलन की महासन्धि (सीईडी) समिति की सातवीं आवधिक रिपोर्ट में भी नेपाल सरकार को कानून बनाने की सिफारिश की गई है।

श्रेष्ठ ने नेपाल में प्रसूति हिंसा के घटनाओं के ‘केस स्टडी’ प्रस्तुत करते हुए पीड़ितों के अनुभवों के माध्यम से कार्यक्रम के उद्देश्य को स्पष्ट किया।

इसी प्रकार, एफडब्लुएलडी के अधिवक्ता दीपेश श्रेष्ठ ने सुरक्षित मातृत्व सेवा और प्रसूति हिंसा से संबंधित वर्तमान वास्तविक स्थिति पर प्रकाश डाला।

प्रसूति सेवा के दौरान किस प्रकार की हिंसा हो सकती है, इस विषय पर वीडियो संदेश और नाटक प्रस्तुत किया गया। बज्रपानी द्वारा प्रस्तुत नाटक में ग्रामीण परिवेश में प्रसूति के दौरान महिलाओं को सामना करनी पड़ने वाली हिंसा को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया।

रविन तामांग के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक में रांहनी लामा, हेमंत मगर, रमिला मोक्तान, अस्मिता मगर, केशव सिंह और शुक्रराज मगर ने अभिनय किया।

कार्यक्रम में एफडब्लुएलडी ने एसआरएचआर यूथ फेलोज को सम्मानित भी किया। दिक्षिका गजमेर, सृष्टि सिंह, प्राथा धमला, ज्योति रायमाझी, राजेश भुजु, निराजन बोहोरा, प्रकाश शाही, सुनिता श्रेष्ठ और शर्मिला गोली को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में कानून के प्रोफेसर, कानून और नर्सिंग के विद्यार्थी, एसआरएचआर यूथ फेलोज, पत्रकार, अधिकारकर्मी, विभिन्न नागरिक समाज संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा प्रजनन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भागीदारी रही।

नेपाल विद्यार्थी संघ ने गिरफ्तार छात्र नेताओं की निष्कल्प रिहाई की मांग की

नेपाल विद्यार्थी संघ ने गृहमंत्री सुधन गुरुङ के इस्तीफे की मांग करते हुए गिरफ्तार छात्र नेताओं की बिना शर्त रिहाई का आग्रह किया है। नेविसंघ ने शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल छात्रों को तत्काल रिहा न किए जाने की स्थिति में और भी सशक्त आंदोलन की चेतावनी दी है। ८ वैशाख, काठमांडू।

गृहमंत्री सुधन गुरुङ के इस्तीफे की मांग करते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार छात्र नेताओं की बिना शर्त रिहाई के लिए नेपाल विद्यार्थी (नेवि) संघ ने मांग की है। नेविसंघ के कार्यवाहक सभापति नवीन पौडेल ने एक विज्ञप्ति जारी कर यह मांग की है। विरोध को लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए नेविसंघ ने शांतिपूर्ण आंदोलन में भाग लेने वाले छात्र नेताओं को तत्काल बिना शर्त रिहा करने पर बल दिया है।

गिरफ्तार छात्र नेताओं को तुरंत रिहा न करने की स्थिति में नेविसंघ ने और अधिक सशक्त आंदोलन की योजना बनाने की चेतावनी दी है। नेविसंघ ने गृहमंत्री गुरुङ से अपनी संपत्ति के स्रोत का खुलासा करने, सत्य तथ्य स्पष्ट करने तथा तत्काल इस्तीफा देकर निष्पक्ष जांच में सहयोग करने की मांग की है। गृहमंत्री के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान नेविसंघ के केन्द्रीय सदस्य भुवन भट्ट, सीटीईभीटी अध्यक्ष कुम्मरोज देउवा तथा विद्यार्थी नेता नवीन विष्ट, आकाश देवकोटा, सुशील ऐडी और विसाल बिसी को गिरफ्तार किया गया है, ऐसा नेविसंघ ने बताया है।

डिजर पर नया संगीत का 44 प्रतिशत हिस्सा एआई द्वारा निर्मित

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा सहित।

  • डिजर के अनुसार नए संगीत में 44 प्रतिशत हिस्सा एआई-जेनरेटेड ट्रैकों का है।
  • डिजर ने एआई द्वारा निर्मित गीतों को अपने एल्गोरिदम और संपादकीय प्लेलिस्ट से हटाने की नीति अपनाई है।
  • डिजर के सीईओ एलेक्सिस लान्तर्नियर ने कलाकारों के अधिकार संरक्षण और पारदर्शिता के लिए पूरे संगीत उद्योग को एकजुट होने का आह्वान किया है।

८ वैशाख, काठमाडौं। म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म डिजर ने प्रकाशित किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, उसके प्लेटफॉर्म पर अपलोड होने वाले नए संगीत में 44 प्रतिशत ट्रैक एआई-जनरेटेड हैं।

कंपनी वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 75 हजार और मासिक 20 लाख से अधिक एआई निर्मित गीत प्राप्त कर रही है, जबकि जनवरी 2025 में यह संख्या रोजाना केवल 10 हजार थी।

भले ही एआई संगीत की संख्या तेजी से बढ़ी हो, कुल स्ट्रीमिंग में इसकी खपत केवल 1 से 3 प्रतिशत तक सीमित है, जिनमें से 85 प्रतिशत स्ट्रीम फर्जी पाई गई हैं, इसलिए कंपनी ने इससे होने वाली आय रोक दी है।

इस चुनौती का सामना करने के लिए डिजर ने एआई निर्मित गीतों को अपने एल्गोरिदम और संपादकीय प्लेलिस्ट से हटाने की नीति अपनाई है, और अब इस तरह के ट्रैकों के उच्च गुणवत्ता वाले संस्करण भी संग्रहित नहीं करेगा।

जनवरी 2025 से एआई संगीत को अलग ‘टैग’ करना शुरू करने वाले डिजर ने अब तक 13.4 मिलियन से अधिक ट्रैक वर्गीकृत किए हैं। कंपनी के एक सर्वेक्षण में 97 प्रतिशत लोग मानव निर्मित और एआई निर्मित संगीत के बीच भेद नहीं कर पाए।

डिजर के सीईओ एलेक्सिस लान्तर्नियर ने कलाकारों के अधिकारों की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए पूरी संगीत दुनिया को एकजुट होने का आग्रह किया है। हाल ही में एआई संगीत ने अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में आईट्यून्स के शीर्ष स्थान भी प्राप्त किए हैं।

डिजर के साथ-साथ स्पोटिफाई और एप्पल म्यूजिक जैसे अन्य बड़े प्लेटफॉर्म भी एआई संगीत को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न फिल्टर और पारदर्शिता उपाय अपनाए जा रहे हैं।

केराको मूल्य नबढाएको किसानको स्पष्टीकरण, न्यूनतम समर्थन मूल्य तोक्न र बजार अनुगमन माग

किसान का केरा मूल्य नबढ़ाने का स्पष्टिकरण, न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार नियमन की मांग

नेपाल केरा उत्पादक महासंघ ने स्पष्ट किया है कि किसानों ने केरा का मूल्य नहीं बढ़ाया है, बल्कि बाजार में दलालों ने कीमत अत्यधिक बढ़ाई है। महासंघ के अध्यक्ष विष्णुहरि पन्त ने बताया कि किसान मालभोग केरा प्रति दर्जन ७० से ८५ रुपये और हाइब्रिड केरा ५० से ६० रुपये में बेच रहे हैं। महासंघ ने सरकार से बाजार निगरानी, न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण और कृषि बीमा प्रणाली में सुधार की मांग की है। ८ वैशाख, काठमाडौं।

केरा उत्पादक किसानों ने केरा के मूल्य नबढ़ाने का स्पष्ट करते हुए नेपाल केरा उत्पादक महासंघ ने कहा है कि बाजार में दलालों के अत्याचार के कारण केरा किसान और उपभोक्ता दोनों ठगे जा रहे हैं। किसान प्रति दर्जन ५० से ८५ रुपये में केरा बेचते हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को खुदरा बाजारों में ४ सौ रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं, जिससे गुस्सा और नाखुशी बढ़ी है। इस कारण महासंघ ने तत्काल बाजार नियमन की मांग सरकार से की है।

महासंघ की तदर्थ समिति के अध्यक्ष विष्णुहरि पन्त के अनुसार, पिछले १५-१६ वर्षों में किसान को प्रति दर्जन केरा का मूल्य मात्र ६ से ८ रुपये ही बढ़ा है, जबकि बाजार में उपभोक्ता मूल्य काफी बढ़ा है। ‘‘हम अपनी भुजामा मालभोग केरा प्रति दर्जन ७० से ८५ रुपये और हाइब्रिड केरा ५० से ६० रुपये में बेच रहे हैं, लेकिन बाजार में कृत्रिम रूप से अभाव पैदा करके ३५० से ४०० रुपये तक बेचा जा रहा है,’’ अध्यक्ष पन्त ने बताया।

महासंघ के अनुसार नेपाल में वार्षिक लगभग ९ लाख टन केरा की मांग है, लेकिन वर्तमान में करीब ७ लाख टन ही देश में उत्पादन हो रहा है। २ लाख टन की कमी के कारण विशेषकर वैशाख, जेठ और असार महीनों में बाजार में केरा की कमी महसूस होती है। ‘‘वर्तमान सत्र में उत्पादन कुछ कम है, लेकिन साउन से पुस तक नेपाली केरा पूरी तरह बाजार की मांग को पूरा करेगा,’’ अध्यक्ष पन्त ने कहा।

देश भर में वर्तमान में १५,७०० हेक्टेयर क्षेत्र में केरा की खेती हो रही है। यदि ६ से ७ हजार हेक्टेयर क्षेत्र और जोड़ा जाए तो केरा में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है, उन्होंने कहा। सरकार ने केरा की खतरनाक बीमारी ‘पानामा टीआर फोर’ के जोखिम को ध्यान में रखते हुए जैव सुरक्षा के लिए भारतीय केरा के आयात पर रोक लगा रखी है।

महासंघ ने बाजार में दलालों के अत्यधिक हस्तक्षेप को रोकने के लिए शीघ्र प्रभावी बाजार निगरानी की आवश्यकता जताई है और विभिन्न मांगें सरकार के समक्ष रखी हैं। किसान और उपभोक्ता दोनों को ठगा न जाने देने के लिए केरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण, कृषि बीमा प्रणाली का सरल एवं प्रभावी बनाना, उच्च गुणवत्ता वाले टिश्युकल्चर पौधे तथा रासायनिक उर्वरकों की सरल उपलब्धता आवश्यक होने पर महासंघ ने जोर दिया है।

व्हाट्सएप ने नई सशुल्क सदस्यता योजना ‘व्हाट्सएप प्लस’ का परीक्षण शुरू किया

व्हाट्सएप वर्तमान में अपने उपयोगकर्ताओं के लिए इंस्टाग्राम प्लस और स्नैपचैट प्लस जैसे नए सशुल्क सदस्यता विकल्प ‘व्हाट्सएप प्लस’ का परीक्षण कर रहा है। यह अतिरिक्त सेवा मुख्य रूप से ऐप की सजावट और व्यक्तिगत अनुकूलन पर केंद्रित है। इसके तहत उपयोगकर्ता भुगतान करके कस्टमाइज्ड आइकन, थीम, रिंगटोन और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। मेटा के प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि प्रीमियम फीचर्स में 20 तक चैट पिन करने की सुविधा, विशेष चैट थीम और नए नोटिफिकेशन टोन शामिल होंगे।

हालांकि, पिछले वर्ष से व्हाट्सएप के ‘स्टेटस’ में दिखने वाले विज्ञापनों को हटाने के संदर्भ में इस योजना के तहत कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। मूल्य निर्धारण की आधिकारिक घोषणा कम्पनी द्वारा नहीं की गई है, लेकिन विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार यूरोप में मासिक 2.49 यूरो और पाकिस्तान में 0.82 यूरो के आसपास शुल्क लगने का अनुमान है। व्हाट्सएप ने शुरुआत में कुछ सीमित उपयोगकर्ताओं के लिए एक माह का मुफ्त ट्रायल भी उपलब्ध कराया है। लगभग 10 वर्ष पहले व्हाट्सएप वार्षिक 1 डॉलर शुल्क लेता था, लेकिन फेसबुक द्वारा अधिग्रहण के बाद 2016 से इसे पूरी तरह से मुफ्त कर दिया गया था। हाल के वर्षों में व्हाट्सएप मेटा के लिए राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है, जिसका वार्षिक आय 2 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। फिलहाल यह सुविधा केवल सीमित समूह में परीक्षणाधीन है, इसलिए तुरंत बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।

पोखरा विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर एआई और डेटा साइंस की शिक्षा शुरू

८ वैशाख, काठमाडौं। पोखरा विश्वविद्यालय ने स्नातक स्तर पर एआई और डेटा साइंस की शिक्षा शुरू कर दी है। यह कार्यक्रम ललितपुर के च्यासल स्थित श्रमिक शांति कैंपस में संचालित हो रहा है, जो पोखरा विश्वविद्यालय का पहला अंगीक कैंपस है। विश्वविद्यालय के विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संकाय के डीन बुद्धि राज जोशी के अनुसार, चार वर्षीय कार्यक्रम का पहला सेमेस्टर पूरा हो चुका है। एक सेमेस्टर पूरा होने के बाद विश्वविद्यालय ने आगामी २ से ८ सेमेस्टर तक के पाठ्यक्रम का समीक्षा कर तैयार किया है।

जोशी के अनुसार इस कार्यक्रम में एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के उपयोग, एप्लिकेशन विकास, सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग के विषय शामिल हैं। इसके साथ ही डेटा विश्लेषण की शिक्षा भी दी जाएगी। चार वर्षीय कार्यक्रम में कुल १२२ क्रेडिट आवर्स होंगे, जिनमें १०५ सैद्धांतिक, ३६ मार्गदर्शन (ट्युटोरियल) और ९१ प्रयोगात्मक घंटे शामिल हैं। छात्र पढ़ाई के बाद इंटर्नशिप का अवसर पायेंगे, जहां वे एआई का उपयोग करने वाली कंपनियों और नेपाल सरकार के निकायों में डेटा एनालिस्ट के रूप में कार्य करने का अवसर प्राप्त करेंगे।

डीन जोशी ने कहा कि स्नातक स्तर पर एआई और डेटा साइंस की पढ़ाई इसी विश्वविद्यालय में पहली बार हो रही है। इस विषय को पढ़ने के लिए प्लस टू में विज्ञान विषय अनिवार्य नहीं है, लेकिन ११वीं और १२वीं कक्षा में गणित या कंप्यूटर साइंस लेना आवश्यक है। अब तक विश्वविद्यालय ने ४८ छात्रों के लिए कोटा तय कर दाखिला लिया है, जिनमें ९ छात्रवृत्ति पर हैं। चार वर्षों की पढ़ाई के लिए कुल ४ लाख ७८ हजार २०० रुपये खर्च होंगे।

कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने विशेषज्ञों के साथ कार्यशालाएं भी आयोजित की हैं। पाठ्यक्रम को और प्रभावशाली बनाने हेतु सम्पन्न कार्यशालाओं में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के ५० से अधिक विशेषज्ञों के सुझाव एकत्रित किए गए हैं। विश्वविद्यालय के करिकुलम डेवलपमेंट सेंटर के आयोजन और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संकाय के समन्वय में हुई कार्यशाला में उपकुलपति प्रो. डॉ. वेदराज केसी भी उपस्थित थे, जिन्होंने कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं।