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लेखक: space4knews

बालकुमारीको एसडीपीएल ट्रेड प्रालिलाई २ लाख जरिबाना

बालकुमारी स्थित एसडीपीएल ट्रेड प्रा. लि. को २ लाख रुपये जुर्माना

१७ चैत्र, काठमाण्डौ । वाणिज्य, आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभागले ललितपुरको बालकुमारीमा अवस्थित एक व्यावसायिक फर्मलाई २ लाख रुपैयाँको जरिवाना लगाएको छ। मंगलवार गरिएको बजार अनुगमनको क्रममा उपभोक्ता संरक्षण ऐनको उल्लङ्घन भएको पाइएपछि एसडीपीएल ट्रेड प्रा. लिलाई उक्त जरिवाना गरिएको हो। विभागले काठमाडौं उपत्यकाका विभिन्न स्थानहरूमा सञ्चालित अन्य २१ व्यावसायिक फर्महरूको पनि अनुगमन गरेको बताएको छ। ती फर्महरूलाई तत्काल सुधारका लागि सामान्य निर्देशन पनि दिइएको छ।

बाल बालिकाओं के सुरक्षित वर्तमान के बिना समृद्ध नेपाल की संभावना नहीं

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • मानसिं वाइबा मकवानपुर के बकैया-६, ज्यामिरे के बालक हैं, जिन्हें बाल श्रम से मुक्त कराया गया और जो अब स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं।

आदरणीय प्रधानमंत्री जी,

मैं मानसिं वाइबा हूँ। मेरा घर मकवानपुर जिले के बकैया-६, ज्यामिरे में है, जिसे अब भी अत्यंत दुर्गम क्षेत्र माना जाता है। मैं एक बालक था जो बालश्रम में फंसा था और वहां से उद्धार पाया हूँ।

मेरे परिवार के पास दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से होती थी। मेरे माता-पिता वृद्ध हैं, बहनों की शादी हो चुकी है, और मैं एक अकेला बेटा हूँ इसलिए परिवार की जिम्मेदारी मुझे संभालनी पड़ती है। मेरी हालत देखकर गाँव के ठेकेदार ने मुझे बहकाया, ज्यादा कमाई का लालच दिया। पढ़ाई की इच्छा होने पर भी मैं गलैँचा बुनने काठमाडौँ आ गया।

मेरी उम्र तब मात्र ११ वर्ष थी, जाड़े का मौसम था। मेरे पास पतली शर्ट और पैंट ही थीं। उस समय गलैंचों के धागे पर सोकर काम किया, लेकिन न तो वे पैसे देते, न कोई और सुविधा। इतनी श्रमशोषण देख मैं वहां से भागकर होटल में बर्तन धोने लगा। वहां के मजदूर भड़कीली शराब पीकर रात में मुझे पीटते थे।

साहू- साहूनी से ज़्यादा तो वे लोग जो उनके रिश्तेदार थे, वे बस थोड़ी गाली देते पर कुछ अधिक नहीं करते थे। सताए जाने के बाद मैंने हिम्मत करके पुलिस चौकी जाकर अपनी समस्या बताई।

इसके बाद चाइल्ड रेस्क्यू नेपाल, नेपाल पुलिस और ईस्थर बेन्जामिन स्मृति संस्था की मदद से मेरा बचाव हुआ, जो विक्रम संवत २०७२ की घटना है।

ईस्थर बेन्जामिन स्मृति संस्था ने मुझे संरक्षण दिया, पढ़ाई, लेखन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं। मैंने वहां अपने घर की समस्याएं भी बताईं जिससे परिवार को कुछ मदद मिल सकी।

मैंने वहां करीब तीन साल पढ़ाई की। बाद में गांव में रहकर पढ़ाई जारी रखने की इच्छा हुई, और संस्था की मदद से मैंने गांव में ही पढ़ाई जारी रखी। आठवीं कक्षा पूरी करने के बाद कोविड महामारी के बाद मैं फिर काठमाडौँ आया और पढ़ाई जारी रखी। अब उसी संस्था के सहयोग से मैं १२वीं कक्षा पास कर स्नातक की पढ़ाई कर रहा हूं।

आज मैं एक जागरूक नागरिक के रूप में खड़ा हूँ लेकिन मेरे जैसी स्थिति हजारों बच्चे देश में झेल रहे हैं। ऐसी बाल समस्याओं को सरकार क्यों संबोधित नहीं कर पा रही?

नेपाल के संविधान ने बालकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, संरक्षण, शोषण से सुरक्षा व सम्मानजनक जीवन के अधिकार सुनिश्चित किए हैं। बालश्रम कानूनों ने बालश्रम को प्रतिबंधित किया है। इसके बावजूद बच्चे विभिन्न रेस्तरां, मोटरसाइकिल वर्कशॉप, कल-कारखानों में काम करने को मजबूर हैं और शोषित हो रहे हैं।

सन् 2021 की नेपाल बालश्रम रिपोर्ट के अनुसार लगभग 11 लाख से अधिक बच्चे अभी भी बालश्रम में हैं। उनमें से कई मेरी ही तरह बड़ी समस्याएँ झेल रहे हैं।

मैंने नियम-कानून के सहारे अपनी जिंदगी बदली, लेकिन मेरे हजारों भाई-बहन शोषण की चपेट में हैं। इन कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन एवं संबंधितों को राहत देना अति आवश्यक है। आने वाले दिनों में बालश्रम और बालशोषण रोकने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।

मैं बाल संरक्षण क्षेत्र में स्वयंसेवक और प्रशिक्षार्थी के रूप में बचाए गए बच्चों से बातचीत करता हूँ। श्रम और बेचबिखन में फंसे तथा अभिभावक विहीन बच्चों को जन्म प्रमाण पत्र और नागरिकता न मिलने की समस्या भी जटिल है, जो उनकी उच्च शिक्षा और नागरिक अधिकारों को प्रभावित करती है।

यदि राज्य प्रभावी नीतियां और कार्यक्रम लागू करे तो सुरक्षित भविष्य संभव है, ऐसा मेरा अनुभव है।

संविधान और प्रचलित कानूनों के अनुसार बालश्रम के प्रति शून्य सहिष्णुता और प्रभावी कार्यान्वयन के साथ बालकों का उचित उद्धार, संरक्षण एवं विकास सुनिश्चित करना आवश्यक है।

बालकों के सुरक्षित वर्तमान के बिना समृद्ध नेपाल का भविष्य संभव नहीं है। इस विषय को राष्ट्रीय प्राथमिकता देते हुए ठोस, समयबद्ध और परिणाममुखी पहल करने का पुनः हार्दिक अनुरोध करता हूँ।

रौतहट अदालत के डिट्ठा लबकुमार सिंह 50 हजार रुपये रिश्वत के साथ गिरफ्तार

अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने रौतहट जिला अदालत में कार्यरत डिट्ठा लबकुमार सिंह को 50 हजार रुपये रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया है। आयोग के अनुसार, उन्होंने अदालत के फैसले के अनुसार दाखिला पुर्जी तैयार कर जमीन की फुकुवा कराने के एवज में सेवाग्राही से रिश्वत ली थी। इसी कारण से अख्तियार के हेटौडा स्थित कार्यालय से मंगलवार को पौने 4 बजे उन्हें अदालत परिसर से पकड़ा गया। १७ चैत, काठमांडू। रौतहट जिला अदालत के डिट्ठा लबकुमार सिंह को अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने अदालत के फैसले के अनुरूप दाखिला पुर्जी तैयार कर जमीन फुकुवा कराने के सिलसिले में सेवाग्राही से रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। आयोग ने बताया कि वे रिश्वत लेते हुए अदालत परिसर से ही पकड़े गए।

रूस की चेतावनी: ‘प्राइस सिलिंग’ लागू करने वाले देशों को तेल की आपूर्ति बंद

रूसी उपविदेशमंत्री आंद्रेई रुदेन्को ने स्पष्ट किया है कि रूस उन देशों को किसी भी स्थिति में तेल की आपूर्ति नहीं करेगा जो रूसी तेल पर ‘प्राइस सिलिंग’ लागू करते हैं। रुदेन्को ने जापान द्वारा लगाई गई मूल्य सीमा को ‘बाजार विरोधी और आपूर्ति श्रृंखला को नष्ट करने वाला उत्तेजक कदम’ बताया। उन्होंने कहा, ‘वर्तमान में ऊर्जा बाजार अत्यंत अस्थिर है, कमी और मूल्य वृद्धि हो रही है, ऐसे समय में रूस अपने राष्ट्रीय आर्थिक हितों की रक्षा के लिए ऐसे उकसावे भरे कदम उठाने वालों को तेल नहीं बेचेगा।’

उपविदेशमंत्री रुदेन्को के अनुसार जापान और अन्य पश्चिमी देशों द्वारा लगाया गया यह प्रतिबंध वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अतिरिक्त चुनौती है। यदि किसी देश ने आधिकारिक रूप से तेल आपूर्ति के लिए अपील की, तो रूस उन देशों के साथ अपने संबंधों तथा आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय करेगा। वर्तमान में पश्चिमी एशिया में युद्ध और हर्मुज जलसंधि के बंद होने के कारण दुनिया भर में ईंधन के दाम प्रति लीटर 2 यूरो से ऊपर जाने का खतरा बना हुआ है, और रूस की यह चेतावनी विश्व अर्थव्यवस्था में और अधिक हलचल पैदा कर रही है।

नेपाल सरकार द्वारा वैदेशिक रोजगार और श्रम स्वीकृति में किए गए बदलाव और शेष कार्य

वैदेशिक रोजगारीमा जान लागेका दुई महिला राहदानी र कागजपत्र हाथ में लिए त्रिभुवन विमानस्थल के क्षेत्र में

तस्वीर स्रोत, Getty Images

तस्वीर का शीर्षक, सरकार द्वारा उठाए गए हालिया कदम से श्रम स्वीकृति का प्रक्रिया पहले से अधिक तेज और सुविधाजनक हुई है, अधिकारियों का कहना है।

वैदेशिक रोजगार के लिए श्रम स्वीकृति में टोकन प्रणाली हटाए जाने के बाद प्रति दिन अधिक आवेदकों को स्वीकृति मिलने लगी है, अधिकारियों ने बताया।

वैदेशिक रोजगार विभाग के अनुसार, पहले काठमांडू से रोजाना लगभग 900 व्यक्तियों को श्रम स्वीकृति मिलती थी, लेकिन अब औसत रूप से लगभग 2,000 लोगों को प्रतिदिन स्वीकृति मिल रही है।

“कई कार्यालयों में भी आवेदन के दिन ही सेवाग्राही श्रम स्वीकृति प्राप्त कर रहे हैं,” व्यक्तिगत श्रम स्वीकृति शाखा के हरिप्रसाद चपाई ने बताया।

“टोकन प्रणाली हटाए जाने के बाद सेवाग्राहीयों को पहले जैसी प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती।

विभाग के उपमहानिर्देशक और प्रवक्ता चंद्रबहादुर शिवाकोटी ने सोमवार को देशभर और विदेश में स्थित कूटनीतिक कार्यालयों में कुल 3,197 श्रम स्वीकृति जारी होने की जानकारी दी।

मन्त्री पोखरेल का ग्रासरूट स्तर से खिलाड़ी उत्पादन पर जोर

नवनियुक्त युवा तथा खेलकुद मन्त्री सस्मित पोखरेल ने खेलकुद को ग्रासरूट स्तर से जोड़कर खिलाड़ी उत्पादन पर जोर देने की बात कही है। मन्त्री पोखरेल ने कहा कि खेल क्षेत्र में चुनौतियाँ और अवसर दोनों मौजूद हैं, इसलिए काम करके दिखाना आवश्यक है और दीर्घकालीन विकास में दक्षता का विशेष महत्व है। राखेप के बोर्ड अध्यक्ष के रूप में वे सातदोबाटो स्थित अन्तर्राष्ट्रीय खेलकुद परिसर हातामा निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण करने पहुंचे थे। १७ चैत, काठमाडौं।

मन्त्री पोखरेल ने राष्ट्रीय खेलकुद परिषद् (राखेप) द्वारा मंगलवार को त्रिपुरेश्वर स्थित कार्यालय राखेप हातामै आयोजित कार्यक्रम में कहा कि खेलकर प्रदर्शन करना और ग्रासरूट स्तर से ही खिलाड़ी उत्पादन करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि खेल क्षेत्र में चुनौतियां और अवसर दोनों हैं, इसलिए केवल शब्दों से नहीं बल्कि काम करके दिखाना होगा, साथ ही संबंधित सभी की दक्षता का सम्मान करते हुए खेलकुद के दीर्घकालीन विकास में इसका उपयोग करना आवश्यक है।

राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के सांसद डॉ. अच्युत लामिछाने ने पूरे राष्ट्र के खेलकुद को आगे बढ़ाने के लिए सबको मिलकर कार्य करने पर जोर देते हुए नेपाल खेलकुद विज्ञान प्रतिष्ठान (सान) को और प्रभावकारी बनाने की आवश्यकता बताई। राखेप के सदस्य-सचिव रामचंद्र मेहताले राखेप बोर्ड और कार्यसमिति की संरचना, क्षेत्र, बजट, पूर्वाधार स्थिति, राष्ट्रीय खेल संघ, कर्मचारी पद, खिलाड़ियों के अटके पुरस्कार, मिशन–२०२६ के तहत वर्तमान में रुके विशेष प्रशिक्षण, आंतरिक संसाधन और ऐन संशोधन का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।

इससे पहले मन्त्री पोखरेल का सदस्य-सचिव मेहतासहित राखेप कार्यकारी समिति, बोर्ड सदस्य, विभागीय प्रमुख, शाखा प्रमुख और कर्मचारीयों ने स्वागत किया। स्वागत समारोह के बाद मन्त्री पोखरेल ने सातदोबाटो स्थित अन्तर्राष्ट्रीय खेलकुद परिसर हातामा निर्माणाधीन जेनजी पार्क, खेलकुद विज्ञान अनुसन्धान केन्द्र, उच्च प्रदर्शन केन्द्र और पौडी पोखरी का निरीक्षण किया।

प्रधानमन्त्रीको प्रेस सहजकर्तामा बजगाईं नियुक्त

प्रधानमंत्री के प्रेस सहजकर्त्ता के रूप में सुरेंद्र बजगाईं नियुक्त

समाचार सारांश

समीक्षित।

  • प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के प्रेस सहजकर्त्ता के रूप में सुरेंद्र बजगाईं नियुक्त किए गए हैं।
  • बजगाईं को स्वकीय शाखा अधिकृत के समान सेवा सुविधाएं प्राप्त कर नियुक्ति मिली है।
  • वे मेयर शाह के सचिवालय में कार्यरत रहे और पत्रकारिता में सक्रिय हैं।

१७ चैत्र, काठमांडू। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) के प्रेस सहजकर्त्ता के रूप में सुरेंद्र बजगाईं को नियुक्त किया गया है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बजगाईं को स्वकीय शाखा अधिकृत के रूप में सेवा सुविधाएं प्रदान कर प्रधानमंत्री शाह के प्रेस सहजकर्त्ता के पद पर नियुक्त किया गया है।

बजगाईं इससे पहले बालेन के काठमांडू महानगरपालिका मेयर रहते प्रेस संयोजक के रूप में भी कार्यरत रह चुके हैं। ललितपुर निवासी बजगाईं पत्रकारिता में सक्रिय हैं।

वे मेयर शाह के सचिवालय में रहकर काम करते रहे और हालिया चुनावों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

पूर्णबहादुर खड्काले समानुपातिक उम्मेदवार हटाए, अदालत जाने तैयारी में हैं

नेता पूर्णबहादुर खड्काले नेपाली कांग्रेस के समानुपातिक सांसद चयन में नियमों के उल्लंघन का दावा किया है। खड्का ने जानकारी दी है कि दलित कोटे से समानुपातिक सूची में शामिल मानबहादुर नेपाली भी अदालत पहुंच चुके हैं। विशेष महाधिवेशन के बाद कांग्रेस के अंदर विवाद बढ़ा है और पार्टी प्रवक्ता देवराज चालिसे ने चेतावनी दी है। १७ चैत्र, काठमांडू।

नेपाली कांग्रेस के नेता पूर्णबहादुर खड्काले पार्टी के संस्थापक समूह द्वारा नियमों का उल्लंघन करने की जानकारी दी है। उन्होंने काठमांडू के धुम्बराही स्थित होटल स्मार्ट में अपने समूह के नेताओं को संबोधित करते हुए समानुपातिक सांसद चयन में नियमों का उल्लंघन होने की बात कही। उन्होंने कहा, ‘विशेष महाधिवेशन ने नियमों का उल्लंघन किया। समानुपातिक में पिछड़े क्षेत्र से प्रथम नंबर की विद्या तिमिल्सिना का नाम हटाकर क्लस्टर में नामहीन पुरुष खस आर्य कोटा के ७ नंबर पर मौजूद कालीबहादुर सहकारी को नामित किया गया,’ उन्होंने बैठक में कहा, ‘हमारे उम्मीदवार अदालत गए हैं।’

खड्का ने दलित कोटे से समानुपातिक सूची में शामिल उम्मीदवार मानबहादुर नेपाली के भी अदालत पहुंचने की जानकारी दी। ‘दलित कोटे से मानबहादुर नेपाली भी अदालत गए हैं,’ खड्का ने बैठक में कहा। पार्टी के तत्कालीन महामंत्री गगनकुमार थापा और विश्वप्रकाश शर्मा सहित के समूह ने गत माघ १ को विशेष महाधिवेशन सम्पन्न कर नया नेतृत्व चुना, जिसके बाद कांग्रेस के भीतर विवाद बढ़ गया है। वर्तमान में विशेष समूह के खिलाफ कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष शेरबहादुर देउवा और नेता शेखर कोइराला का समूह एकजुट है। वे लगातार संयुक्त विचार-विमर्श कर रहे हैं। वहीं पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता देवराज चालिसे ने इस अलग समूह को पार्टी अनुशासन का पालन करने की चेतावनी दी है।

दलाई लामा ने वैश्विक युद्धों की निंदा करते हुए कहा – हिंसा से केवल हिंसा ही जन्म लेती है

१७ चैत, काठमाडौँ। भारत में निर्वासित तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने विश्वभर चल रहे युद्धों को समाप्त करने का आह्वान किया है। मंगलवार को उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से कहा, “हिंसा से ही दूसरी हिंसा उत्पन्न होती है,” और सभी से संवाद, समझदारी तथा पारस्परिक सम्मान के मार्ग पर आगे बढ़ने का आग्रह किया।
‘हम सभी इस बात पर सहमत हैं कि ईसाई धर्म, बौद्ध धर्म, इस्लाम, हिन्दू धर्म, यहूदी धर्म या विश्व के किसी भी आध्यात्मिक परंपरा का संदेश हमेशा एक ही होता है – प्रेम, करुणा, सहिष्णुता और आत्म-अनुशासन,’ दलाई लामा ने कहा।
‘इतिहास बार-बार यह साबित करता रहा है कि हिंसा अन्य हिंसा को जन्म देती है लेकिन स्थायी शांति स्थापित कर पाती नहीं,’ उन्होंने जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान केवल संवाद और समझदारी से ही संभव है। ‘चाहे मध्य पूर्व हो या रूसी-यूक्रेनी संघर्ष, इन सबका समाधान संवाद, समझदारी और पारस्परिक सम्मान से ही संभव है,’ दलाई लामा ने बताया।
दलाई लामा ने सभी से हिंसा और संघर्ष तुरंत रोकने का प्रार्थना एवं अनुरोध भी किया।

अध्यागमनको कालोसूचीमा व्यवसायी दीपक भट्ट – Online Khabar

अध्यागमन विभाग ने व्यापारी दीपक भट्ट को काली सूची में डाला

१७ चैत, काठमांडू। अध्यागमन विभाग ने व्यापारी दीपक भट्ट को काली सूची में डाला है। भट्ट पर संपत्ति शोधन के आरोप में जांच चल रही है, जिसके कारण वे अध्यागमन की काली सूची में शामिल किए गए हैं, सूत्रों ने बताया। संपत्ति शोधन जांच विभाग ने सोमवार को अध्यागमन विभाग को पत्र भेजकर उनका पासपोर्ट रोकने का अनुरोध किया है, सूत्रों ने आगे जानकारी दी। इस मामले में चल रही जांच के विषय में अब तक सरकारी विभागों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

नरम दोस्त से कैसे बचें? ७ महत्वपूर्ण संकेत

किशोरावस्था में बच्चों के शरीर, मन, भावनाओं और मूल्यों में बड़े बदलाव आते हैं और वे अक्सर उलझन में पड़ जाते हैं। खराब दोस्त बच्चे की पढ़ाई, व्यवहार और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं, जिसके लिए माता-पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। माता-पिता को बच्चों को गलत दोस्तों से बचाना चाहिए, खुला संवाद बनाए रखना चाहिए और सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। ‘किशोरावस्था’ एक ऐसा दौर होता है, जो बच्चों के रास्ता चुनने के शुरुआती संकेत देता है। यह उनके और माता-पिता दोनों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील समय होता है। इस उम्र में बच्चे के शरीर ही नहीं, मन, दिमाग, भावनाएं और मूल्य भी बड़े परिवर्तित होते हैं। वे बचपन और युवावस्था के बीच होते हैं, जिसकी वजह से अक्सर वे उलझन में आ जाते हैं और सही-गलत को अलग करने में कठिनाई होती है। इसलिए कई किशोर गलत दोस्त चुनने की गलती करते हैं। खराब संगत उनके पढ़ाई, व्यवहार, आत्मसम्मान और पूरे भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इस उम्र में बच्चे पूरी तरह परिपक्व नहीं होते, इसलिए माता-पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। माता-पिता को बच्चों को सही रास्ता दिखाना, दोस्तों की गुणवत्ता पहचानना और आवश्यक होने पर हस्तक्षेप करना चाहिए।

खराब दोस्त के प्रमुख संकेत नीचे दिए गए हैं। यदि ये संकेत दिखें तो तुरंत सावधान हो जाना चाहिए और बच्चे को ऐसे व्यक्तियों से दूर रहने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
1. घर में न बताने की सलाह: कोई दोस्त बार-बार कहता है ‘‘यह बात घर में मम्मी-पापा से मत कहना’’, ‘‘यह हमारा सीक्रेट है’’ तो समझना चाहिए कि उसके मन में कुछ गलत बात है। अच्छा दोस्त कभी गुप्त बातें नहीं सिखाता। ऐसा दोस्त बच्चे को गलत रास्ते पर ले जा सकता है। माता-पिता को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि जो बात घर पर बताने में डर लगे वह काम बिल्कुल न करें।
2. भावनात्मक दबाव देना: अगर दोस्त कहता है ‘‘तुम मेरे दोस्त हो तो यह काम करना पड़ेगा’’, ‘‘नहीं करने पर दोस्ती खत्म’’ जैसे दबाव देता है तो यह साफ खतरा है। असली दोस्त जबरदस्ती नहीं करता। इससे बच्चा कमजोर और निर्भर बनता है। माता-पिता को सिखाना चाहिए कि सच्चा दोस्त स्वतन्त्रता और सम्मान देता है, दबाव नहीं।
3. गलत काम को कूल बताना: गलत बातों को ‘‘कूल’’ या ‘‘आकर्षक’’ कह कर सामान्य मानने वाला दोस्त खराब संकेत है। कक्षा मिस करना, सिगरेट या शराब पीना, किसी को मारना या गाली देना जैसी आदतों को मनोरंजक और स्वीकार्य ठहराने वाला दोस्त बच्चे को गलत दिशा में ले जाता है। ऐसे लोगों से तुरंत दूरी बनानी चाहिए।
4. पढ़ाई को बोरिंग कहना: खराब दोस्त पढ़ाई, अनुशासन और शिक्षकों के साथ अच्छे संबंध को ‘‘बोरिंग’’ या ‘‘चमचा’’ कह कर तुच्छ समझता है। ऐसा दोस्त प्रगतिशील मित्रों को नीचा दिखाना चाहता है। अच्छा दोस्त दूसरों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है, नीचा दिखाने के लिए नहीं।
5. बच्चे में नकारात्मक बदलाव दिखना: अगर बच्चे में झूठ बोलना बढ़ जाये, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना, परिवार से झगड़ा करना, पढ़ाई में ध्यान न देना या मोबाइल और सोशल मीडिया में अत्यधिक समय बिताना जैसे लक्षण दिखें, तो सावधान होना चाहिए। इस स्थिति में माता-पिता को तुरंत ध्यान देना जरूरी है।
6. दोस्त की सीमा का सम्मान न करना: दोस्तों की व्यक्तिगत सीमाओं को न मानना भी खतरे का संकेत है। यदि बच्चा कहता है ‘‘मैं यह नहीं करूंगा’’ और दोस्त जबरदस्ती कराता है या सीमा पार करता है तो वह सच्चा दोस्त नहीं है। अच्छा दोस्त ‘‘ना’’ को सम्मान देता है। माता-पिता को बच्चे को ‘‘ना’’ कहना और आत्मसम्मान बनाए रखना सिखाना चाहिए।
7. गलत काम के लिए उकसाना: किसी गलत काम के लिए सीधे उकसाने वाला दोस्त सबसे खतरनाक होता है। घर से पैसे चोरी करने, परीक्षा में नकल करने, अश्लील सामग्री देखने के लिए प्रोत्साहित करने जैसे दोस्त से जल्द दूरी बनानी चाहिए। ऐसी संगत बच्चे की पूरी जिंदगी बिगाड़ सकती है।

खराब दोस्त की पहचान होने पर माता-पिता को खुला और विश्वासपूर्ण संवाद बनाए रखना चाहिए ताकि बच्चा बिना डर अपनी बात कह सके। कभी-कभी दोस्त को घर पर बुलाकर या स्कूल में मिलकर उनके व्यवहार को समझना जरूरी होता है। अच्छे दोस्तों की प्रशंसा करनी चाहिए और उनसे समय बिताने के लिए प्रेरित करना चाहिए। माता-पिता को खुद भी सकारात्मक उदाहरण पेश करना चाहिए क्योंकि बच्चे माता-पिता के व्यवहार से बहुत कुछ सीखते हैं। किशोरावस्था में खराब दोस्त बच्चे के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, लेकिन माता-पिता की सतर्कता, समझदारी, प्यार और निरंतर साथ से बच्चे को सही राह पर वापस लाया जा सकता है। इस उम्र में माता-पिता की मार्गदर्शन ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

गजेन्द्रनारायण सिंह अस्पताल के पाँच चिकित्सकों की दरबन्दी काज वापस लेने का निर्णय

१७ चैत्र, सप्तरी। गजेन्द्रनारायण सिंह अस्पताल, राजविराज में पदस्थापित पाँच चिकित्सकों की दरबन्दी काज वापस लेने का निर्णय लिया गया है। स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय ने राजविराज अस्पताल में दरबन्दी वाले चिकित्सकों को संबंधित क्षेत्र में वापस भेजने के लिए काज वापस लेने का निर्णय किया है।

यहाँ नियुक्त नाक, कान, गला (ईएनटी) सर्जन वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. रोहित बज्राचार्य, कंसल्टेंट एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ. जोशनलाल बज्राचार्य, कंसल्टेंट एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ. विशालकुमार देव, कंसल्टेंट रेडियोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश ढकाल तथा कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट डॉ. सुशील समदर्शी अन्य क्षेत्रों में काज संभाल रहे थे। डॉ. रोहित भरतपुर अस्पताल चितवन में, डॉ. जोशनलाल मुख्यमन्त्री तथा मन्त्रीपरिषद के कार्यालय कोशी प्रदेश के अधीन, डॉ. विशालकुमार कोशी अस्पताल विराटनगर में, डॉ. प्रकाश मुख्यमन्त्री तथा मन्त्रीपरिषद के कार्यालय लुम्बिनी प्रदेश के अधीन, और डॉ. सुशील मुख्यमन्त्री तथा मन्त्रीपरिषद के कार्यालय कर्णाली प्रदेश के अधीन कार्यरत थे, अस्पताल सूत्रों ने बताया।

लंबे समय से काज पर बाहर रह रहे चिकित्सकों के काज वापस आने के बाद अस्पताल की सेवाओं में सुधार की स्थानीय लोगों को उम्मीद है।

ल्याबमा प्रयोग हुने पन्जाले माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा अधिक दिखाने की पहचान

समाचार सारांश समीक्षा कर प्रकाशन योग्य। मिशिगन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने नाइट्राइल और लेटेक्स पन्जों से माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा अधिक दिखने का पता लगाया है। ‘आरएससी एनालिटिकल मेथड्स’ जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पन्जों में पाए जाने वाले ‘स्टियरेट्स’ रसायन से गलत सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। अध्ययन में माइक्रोप्लास्टिक की सटीक माप हेतु क्लीनरूम ग्लव्स उपयोग करने की सलाह दी गई है। १७ चैत्र, काठमांडू। पर्यावरण प्रदूषण का मुख्य घटक माना जाने वाला ‘माइक्रोप्लास्टिक’ की मात्रा वैज्ञानिक अध्ययनों में वास्तविक से अधिक दिख सकती है, यह नई जांच में सामने आया है। मिशिगन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के मुताबिक वैज्ञानिकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक ‘नाइट्राइल’ और ‘लेटेक्स’ पन्ज इस समस्या का मुख्य कारण हो सकते हैं। ‘आरएससी एनालिटिकल मेथड्स’ जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इन पन्जों में प्रयुक्त ‘स्टियरेट्स’ नामक रसायन परीक्षण के दौरान माइक्रोप्लास्टिक के समान झूठे कण उत्पन्न करता है। पन्ज से आसानी से हटने वाले साबुन जैसे पदार्थ लैब उपकरणों में हजारों ‘गलत सकारात्मक’ परिणाम पैदा कर रहे हैं, जैसा कि शोध से पता चला है। शोधकर्ता मेडेलिन क्लाफ और प्रोफेसर एन मैकनिल के परीक्षण में इन पन्जों से प्रति वर्ग मिलीमीटर लगभग २००० झूठे कण फैलने की घटना देखी गई है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि वातावरण में माइक्रोप्लास्टिक मौजूद नहीं है। “हम माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा को अधिक आंक रहे हो सकते हैं, लेकिन वास्तव में वहां प्लास्टिक कण मौजूद होना चाहिए,” प्रोफेसर मैकनिल ने स्पष्ट किया है। अध्ययन ऐसे त्रुटियों को कम करने के लिए क्लीनरूम ग्लव्स इस्तेमाल करने की सलाह देता है, जिससे बाहरी कणों का प्रवाह कम होता है। यह खोज विश्वभर के वैज्ञानिकों को पुराने आंकड़ों की पुनः जांच कर माइक्रोप्लास्टिक की वास्तविक स्थिति का पता लगाने की नई दिशा प्रदान करती है।

इरान युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता: ट्रम्प के साथ संबंध का प्रभाव

मौजूदा संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के पाकिस्तान के प्रयास ने कई लोगों को हैरान कर दिया है। हालांकि इसमें आश्चर्य करने की कोई बात नहीं है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असिम मुनिर का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ विशेष संबंध है। मुनिर खुद को ट्रम्प का पसंदीदा फील्ड मार्शल बताते हैं और ट्रम्प ने भी उन्हें प्रशंसा दी है। ट्रम्प ने मुनिर को बताया था कि वे इरान को “दूसरों से बेहतर समझते हैं।” इरान और पाकिस्तान लगभग 900 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं और सांस्कृतिक तथा धार्मिक रूप से भी निकट संबंध रखते हैं। दोनों देशों ने अपने बीच “भ्रातृत्वपूर्ण” संबंध होने की बात कही है।

पाकिस्तान में अमेरिकी एयरफोर्स का कोई कैंप नहीं है। खाड़ी के अन्य देशों ने इस संघर्ष में किसी न किसी रूप में भाग लिया है, लेकिन पाकिस्तान अभी तक इस मामले में अलग रहा है। मुख्य बात यह है कि पाकिस्तान इस मामले में प्रवेश करने की इच्छा दिखा रहा है। अगर अमेरिका और इरान के बीच शांति स्थापित होती है तो यह पाकिस्तान के हित में होगा। हालांकि, अफगानिस्तान और भारत के साथ विवाद में फंसे पाकिस्तान के लिए यह सवाल अभी भी बाकी है कि क्या वह ‘शांति दूत’ के रूप में खुद को पेश कर पाएगा या नहीं।

पाकिस्तान इरान और अमेरिका के बीच संतुलन कायम करने के लिए दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान कर रहा है, दूसरे मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों को बुलाकर वार्ता आयोजित कर रहा है और फोन के माध्यम से कूटनीतिक संवाद कर रहा है। फिर भी इस संतुलन प्रयास में जोखिम कम नहीं है। पाकिस्तान तेल के आयात पर निर्भर है और यदि यह संघर्ष लंबा चला तो आर्थिक भार बढ़ सकता है।

पाकिस्तान की सऊदी अरब के साथ सुरक्षा समझौते के अनुसार, यदि किसी एक देश पर हमला होता है तो इसे दोनों पर हमला माना जाएगा। यदि पाकिस्तान युद्ध में शामिल होता है तो आंतरिक प्रतिष्ठा पर प्रभाव पड़ने का डर भी है। अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों के बाद इरान के सर्वोच्च नेता की मृत्यु के बाद पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन हुए थे। पाकिस्तान के नेता इरान के प्रति सहानुभूति जाहिर करने के मामले में संवेदनशील हैं।

पाकिस्तान की वैश्विक छवि और कूटनीतिक भूमिका के बारे में भी सवाल उठ रहे हैं। अगर पाकिस्तान इस युद्ध में सफल होता है तो यह विश्वस्तरीय कूटनीति में उच्च स्थान प्राप्त कर सकता है। लेकिन असफल होने पर भी इसे प्रयासरत देश के रूप में माना जाएगा। कूटनीतिक वार्ताएं जारी हैं, लेकिन शांति समझौता सुनिश्चित करना आसान नहीं होगा।

अञ्जन विष्टले खोले आफ्नै ट्रेनिङ सेन्टर, ‘नेक्स्ट जेन बुट क्याम्प’ आयोजना हुने

अञ्जन विष्ट ने अपने प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की, ‘नेक्स्ट जेन बूट कैंप’ का आयोजन होगा

राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के स्ट्राइकर अञ्जन विष्ट ने ललितपुर में ‘अञ्जन विष्ट ट्रेनिंग सेंटर’ की स्थापना की है और 8 से 16 वर्ष के खिलाड़ियों के लिए 10 दिन का ‘नेक्स्ट जेन बूट कैंप’ संचालित करने की घोषणा की है। यह कैंप चैत 21 से 30 तारीख तक बुद्धिविकास फुटबॉल मैदान में चलेगा, जिसमें एएफसी और फीफा प्रमाणित कोच सहित विदेशी प्रशिक्षक प्रशिक्षण देंगे। अञ्जन विष्ट ने कहा, ‘मैंने जो अनुशासन, कड़ी मेहनत और समर्पण सीखा है, वही सफलता का सूत्र है’ और ‘जब तक हम हैं, फुटबॉल भी जीवित रहेगा।’

मंगलवार को आयोजित पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने ‘अञ्जन विष्ट ट्रेनिंग सेंटर’ की घोषणा करते हुए युवा खिलाड़ियों को लक्षित ‘नेक्स्ट जेन बूट कैंप’ के संचालन की जानकारी दी। यह 10 दिवसीय बूट कैंप चैत 21 से 30 तारीख तक ललितपुर के बुद्धिविकास फुटबॉल मैदान में आयोजित होगा। 8 से 16 वर्ष की आयु वर्ग के खिलाड़ियों के लिए यह कैंप आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रशिक्षण प्रतिदिन सुबह 8 से 10 बजे तक दिया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि इस कैंप में एएफसी और फीफा प्रमाणित कोचों के साथ-साथ विदेशी प्रशिक्षक भी भाग लेंगे।

प्रशिक्षण में बुनियादी कौशल के साथ खेल अनुशासन, मेहनत और सहनशीलता जैसे पहलुओं पर विशेष जोर दिया जाएगा। कैंप के अंत में अभ्यास और फाइनल मैच भी आयोजित किए जाएंगे। प्रतिभागी राष्ट्रीय खिलाड़ियों से मिलने का अवसर पाएंगे। कैंप में भागीदारी के लिए 8,500 रुपये शुल्क रखा गया है, जिसमें जर्सी, नाश्ता, प्रमाणपत्र और अन्य उपहार शामिल होंगे। पत्रकार सम्मेलन में विष्ट ने बताया कि उनका लक्ष्य केवल खिलाड़ियों का निर्माण नहीं बल्कि सफलता का मार्ग भी सिखाना है। ‘10 दिनों में अनुशासन और हार के बाद जीतने का आत्मविश्वास विकसित करना हमारा उद्देश्य है।’ विष्ट ने कहा कि वे अभी भी कुछ वर्षों तक उच्च स्तर पर खेलना चाहते हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि नेपाली फुटबॉल वर्तमान में चुनौतीपूर्ण स्थिति में है, लेकिन यह समाप्त नहीं होगा। ‘जब तक हम हैं, फुटबॉल भी जीवित रहेगा,’ उन्होंने कहा।