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लेखक: space4knews

प्रधानमन्त्री वालेन्द्र शाह की ‘राजनीति रोकने’ की योजना पर उपकुलपतियों की तैयारी

विभिन्न विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठानों से राजनीतिक दलों से जुड़े संगठनों की संरचना हटाने का ‘निर्णायक चरण’ अब शुरू होने वाला है। कुलपति के रूप में प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह ने सोमवार को उपकुलपतियों के साथ बैठक के बाद इसके लिए रास्ता खोल दिया है। बैठक में उन्होंने विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य शैक्षिक संस्थानों में मौजूद दलीय विद्यार्थी एवं कर्मचारी संगठनों की संरचनाएं तत्काल हटाने के निर्देश ‘किसी भी कीमत पर लागू करने’ का आदेश दिए।

विद्यार्थी संगठन सरकार की नियत पर संदेह व्यक्त करते हुए विरोध जताए हैं। कुछ ने तो प्रतिरोध की चेतावनी भी दी है। इस कारण विशेषकर शैक्षिक संस्थानों में झड़प की स्थिति पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। बैठक में शामिल काठमाडौं विश्वविद्यालय के उपकुलपति अच्युत वाग्ले के अनुसार प्रधानमंत्री वालेन्द्र ने शैक्षिक संस्थानों में तालाबंदी नहीं होने का माहौल बनाए रखने पर जोर दिया है।

नियमावली में ‘कर्मचारियों के पेशेवर हितों और संस्थागत विकास के लिए केवल एक कर्मचारी यूनियन बन सकती है’ का उल्लेख है। उपकुलपति दिलीप सुब्बा के अनुसार आंतरिक चर्चाएं प्रारंभ हो चुकी हैं। उन्होंने कहा, “सरकार के प्रशासनिक सुधार योजना के अनुसार आगे बढ़ना आवश्यक है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।”

सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालय के उपकुलपति हेमराज पन्त के अनुसार उस विश्वविद्यालय में न तो किसी दल का संगठन है, न बोर्ड और न ही कार्यालय। उन्होंने कहा, “पांच-छह महीने से राजनीतिक दलों का कोई खास हस्तक्षेप नहीं दिखा है। फिलहाल सब सामान्य है।” काठमाडौं विश्वविद्यालय में छात्र कल्याण परिषद का चुनाव होता है। उपकुलपति के अनुसार कुलपति के पद पर प्रधानमंत्री ने सरकार परिवर्तन के साथ कोई मार्गदर्शन देने का संकेत नहीं दिया है।

जापानमा दशकौंपछि रक्षा निर्यात नियममा परिवर्तन, हट्यो हतियार बिक्री प्रतिबन्ध

जापान ने दशकों बाद रक्षा निर्यात नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए हथियार बिक्री पर प्रतिबंध हटाया

जापान ने दशकों बाद रक्षा निर्यात नियमों में सबसे बड़ा बदलाव करते हुए हथियार बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध पूरी तरह हटा दिए हैं। प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने रक्षा उपकरण क्षेत्र में साझेदार देशों की आवश्यकताओं को उजागर किया है। चीन ने जापान की इस पहल को ‘नए प्रकार के सैन्यीकरण’ के रूप में बताया है और उच्च सतर्कता बरतने की चेतावनी दी है।

जापान ने मंगलवार को अपने रक्षा निर्यात नियमों में दशकों बाद सबसे बड़ा परिवर्तन करते हुए हथियार बिक्री पर लागू पुराने प्रतिबंध पूरी तरह हटाने की घोषणा की। इस निर्णय के बाद जापान युद्धपोत, मिसाइल और अन्य उन्नत सैन्य उपकरणों को विश्व बाजार में निर्यात करने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की शान्तिवादी नीतियों में संशोधन करते हुए जापान अपनी रक्षा उद्योग को मजबूत करने और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए कड़ा कदम उठा रहा है।

प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि आज के विश्व में किसी भी देश के लिए अकेले अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना संभव नहीं है, इसलिए रक्षा उपकरण क्षेत्र में साझेदार देशों के सहयोग की आवश्यकता है। इस रणनीतिक बदलाव के पीछे मुख्य रूप से एशिया में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को संतुलित करने का जापान का प्रयास नज़र आता है। साथ ही यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण अमेरिकी हथियार उत्पादन पर दबाव बढ़ने से जापान के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए अवसर उत्पन्न हुए हैं।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिकी सुरक्षा प्रतिबद्धताएं अनिश्चित होती जा रही हैं, जिसके कारण यूरोप और एशिया के कई देशों ने हथियार आपूर्ति के लिए नए विश्वसनीय विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं, जिसका लाभ जापान उठा रहा है। पहले जापान ने उद्धार, परिवहन, चेतावनी, निगरानी और माइन-स्वीपिंग जैसे पांच सीमित वर्गों में ही सैन्य उपकरणों के निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन अब ये सभी प्रतिबंध पूरी तरह समाप्त कर दिए गए हैं। जापान ने युद्धरत देशों को हथियार न बेचने और तीसरे देशों को हस्तांतरण के मामले में कड़े नियंत्रण बनाए रखने के अपने पुराने सिद्धांत को कायम रखा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार अपवाद स्वीकारने की सरकार की स्पष्ट नीति है।

संसद की हर बैठक में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित होगा

प्रतिनिधिसभा नियमावली के अनुसार, प्रत्येक बैठक के पहले एक घंटे में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया जाएगा। प्रश्न पूछने वाले सदस्य को प्रश्न, संबंधित मंत्री तथा नियम ४७ के तहत सदस्य का नाम बताकर सूचना देनी होगी। मौखिक उत्तर के लिए प्रतिदिन २० और लिखित उत्तर के लिए ५० से अधिक प्रश्न सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे और प्रश्नों की क्रमांकन पंजीकरण क्रम के अनुसार किया जाएगा। ८ वैशाख, काठमांडू।

संसद की प्रत्येक बैठक में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। प्रतिनिधिसभा नियमावली के नियम ४१ में प्रश्नोत्तर समय से संबंधित प्रावधान उल्लेखित हैं। उपनियम १ के अनुसार, ‘सभापति अन्य आदेश न देने तक, प्रत्येक दिन की पहली बैठक में एक घंटे का समय प्रश्नोत्तर के लिए आरक्षित होगा।’ प्रश्नोत्तर समय के समाप्त होने के बाद बैठक की कार्यसूची के अनुसार अन्य अनुष्ठान शुरू किए जाएंगे। संसद में नेपाल सरकार के कार्यक्षेत्र तथा उत्तरदायित्व के अंतर्गत आने वाले सार्वजनिक महत्व के विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकेंगे।

सभा के अधिवेशन के आरम्भ होते ही प्रश्न दर्ज किए जा सकते हैं। प्रश्न पूछने वाले सदस्य को नियमावली में निम्नलिखित विषय साफ़ करनी होगी: (क) पूछने वाला प्रश्न, (ख) प्रश्न से संबंधित मंत्री, और (ग) नियम ४७ के तहत संबंधित सदस्य का नाम। यदि प्रश्न की सूचना एक से अधिक सदस्य देते हैं तो पहला हस्ताक्षरकर्ता ही वह सूचना माना जाएगा। यदि पहला हस्ताक्षरकर्ता अनुपस्थित रहता है, तो क्रम में अगले सदस्य को मान्यता दी जाएगी।

प्रतिनिधिसभा नियमावली के अनुसार एक विषय के लिए एक से अधिक सदस्य द्वारा प्रश्न सूचना देने पर केवल पहली दर्ज की गई सूचना को मान्यता मिलेगी। लेकिन सभा अध्यक्ष प्रश्न पूछने वाले सभी सदस्यों के नाम बैठक में पढ़कर सुनाएंगे। प्रश्न दो प्रकार के होंगे: मौखिक और लिखित। अभिलेख, तथ्यांक सहित उत्तर लिखित रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्रालय से जवाब प्राप्त होने पर प्रतिदिन मौखिक और लिखित उत्तर हेतु अलग-अलग प्रश्न सूची तैयार की जाएगी, जिसमें अस्वीकार नहीं किए गए सभी प्रश्न शामिल होंगे। हालांकि प्रतिदिन केवल २० मौखिक उत्तर और ५० से अधिक लिखित उत्तर के प्रश्न सूची में सम्मिलित नहीं किए जाएंगे। सूची में एक ही सदस्य के दो से अधिक मौखिक उत्तर प्रश्न शामिल नहीं किए जाएंगे। लिखित उत्तर हेतु सवालों का क्रम प्राप्ति समय और विषयानुसार निर्धारित होगा, जबकि मौखिक उत्तर के प्रश्न दर्ताक्रम के अनुसार क्रमबद्ध किए जाएंगे।

सांसदों के उठाए गए प्रश्नों का जवाब मंत्री 7 दिनों के भीतर दें

संसद में सांसदों द्वारा उठाए गए प्रश्नों का जवाब संबंधित मंत्री सात दिनों के भीतर देना अनिवार्य है। यह नियम प्रतिनिधि सभा नियमावली के नियम 15 में उल्लिखित है। शून्य, विशेष और आकस्मिक समय के दौरान उठाए गए विषयों के जवाब मंत्री सात दिनों के अन्दर सदन में प्रस्तुत करेंगे। यदि सांसद बार-बार समय मांगते हैं तो सभामुख आकस्मिक समय देने का प्रावधान भी रखते हैं। 8 वैशाख, काठमांडू। संसद में सांसदों द्वारा उठाए गए प्रश्नों का उत्तर संबंधित मंत्री 7 दिनों के अंदर देना आवश्यक है। प्रतिनिधि सभा नियमावली के नियम 15 में शून्य और विशेष समय से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। शून्य और विशेष समय के अलावा यदि पिछले और आने वाले सत्र के बीच कोई गंभीर घटना या विषय हो, तो सांसद बार-बार समय मांगकर सरकार का ध्यान आकृष्ट करा सकते हैं, जिसके लिए सभामुख आकस्मिक समय उपलब्ध कराएंगे। इस नियम में उल्लेख है, ‘‘आकस्मिक, शून्य और विशेष समय में उठाए गए विषयों का जवाब संबंधित मंत्री सदन में सात दिनों के भीतर देंगे।’’

भारत में राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व ने डिलिमिटेशन विधेयक को कैसे असफल बनाया?

समाचार सारांश

  • 17 अप्रैल, 2026 को भारत के संसद में महिला सशक्तिकरण और निर्वाचन क्षेत्र पुनर्निर्धारण से जुड़े तीन विधेयक पारित नहीं हो पाए।
  • विपक्षी नेता राहुल गांधी ने विधेयक को ‘संघीयता पर प्रहार’ और ‘जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को दंडित करने की साजिश’ बताया।
  • सरकार ने डिलिमिटेशन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक को तत्काल आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया।

8 वैशाख, काठमांडू। 17 अप्रैल, 2026 को बुलाए गए संसद के विशेष सत्र ने भारतीय इतिहास में एक यादगार अधिवेशन के तौर पर अपनी जगह बनाई।

2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के क्रियान्वयन के लिए आयोजित इस सत्र में अंततः भारत के संघीय ढांचे, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और निर्वाचन क्षेत्र पुनर्निर्धारण (डिलिमिटेशन) को लेकर गंभीर टकराव हुआ।

सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के नाम पर लाए गए तीन विधेयकों ने देश के चुनावी भूगोल को ही परिवर्तित करने का संकेत दिया, जिससे संसद में अत्यंत तनावपूर्ण और संघर्षपूर्ण माहौल पैदा हो गया।

इस राजनीतिक घमासान के केंद्र में लोकसभा के विपक्षी नेता राहुल गांधी प्रभावी रणनीतिकार के रूप में खड़े हुए। उनके प्रभावशाली भाषण और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लॉक’ के समन्वय ने सरकार के प्रस्ताव को कड़ी चुनौती दी।

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में सरकार की योजना को ‘संघीयता पर प्रहार’ और ‘जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को दंडित करने की साजिश’ बताते हुए सदन को जागृत किया। उन्होंने विपक्षी दलों को एकजुट करते हुए तीनों विधेयकों को मतदान में पराजित करने का नेतृत्व किया।

इस विधेयक पराजय से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अप्रत्याशित झटका लगा। इससे संसद में विपक्ष के पुनरागमन और शक्ति संतुलन की झलक मिली, तथा डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण मुद्दे की जटिलता स्पष्ट हुई।

महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन का रणनीतिक संयोजन

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 16 अप्रैल, 2026 को संसद में प्रस्तुत व्यवस्थापिका पैकेज में तीन मुख्य जुड़े विधेयक थे – संविधान के 131वें संशोधन, डिलिमिटेशन विधेयक, और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक।

सरकार ने इन विधेयकों को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदम के रूप में पेश किया था। हालांकि महिला आरक्षण के वास्तविक क्रियान्वयन को जनगणना और डिलिमिटेशन से जोड़ा जाने के कारण संवैधानिक दबाव उत्पन्न हुआ।

सबसे विवादित प्रस्ताव लोकसभा की संख्या में भारी वृद्धि का था। वर्तमान 543 सीटों को बढ़ाकर अधिकतम 850 सीट करने का प्रस्ताव था, जिसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें आरक्षित थीं।

विधेयक में संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव था, और आरक्षण अवधि शुरुआत में 15 वर्ष के लिए निर्धारित थी। यह कदम महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने वाला दिखा पर निर्वाचन क्षेत्र पुनर्गठन से जुड़ी राजनीतिक रणनीति शामिल थी।

राहुल का विरोध : ‘यह महिला विधेयक नहीं है’

7 अप्रैल को लोकसभा में तनाव चरम पर था। विपक्षी गठबंधन ने इसे सरकार की आगामी चुनाव लक्षित रणनीति माना। राहुल गांधी ने कहा, “यह महिला विधेयक नहीं है। यह भारत के निर्वाचन नक्शे को बदलने की कोशिश है।” इन शब्दों ने विपक्ष की रणनीति को निर्णायक दिशा दी।

उन्होंने सरकार पर भारतीय महिलाओं की भावनाओं के पीछे छिपकर देश की चुनावी भूगोल को अपने पक्ष में करने का गंभीर आरोप लगाया। सरकार पर महिला सशक्तिकरण को आड़ बनाकर संघीय संतुलन और सामाजिक न्याय को नुकसान पहुंचाने का दावा किया।

गांधी ने इसे लोकतांत्रिक संरचना पर अस्तित्वगत खतरा बताया और कहा कि भाजपा ने छोटे व दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम करके सत्ता में टिकने की कोशिश की है, जिसे उन्होंने ‘राष्ट्रविरोधी कार्रवाई’ कहा।

जातीय जनगणना विवाद

राहुल गांधी ने जातीय जनगणना को सरकार द्वारा अनदेखा करने की कोशिश कर दलित और ओबीसी वर्ग की राजनीतिक आवाज कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने दलित, ओबीसी और उनकी महिलाओं के इतिहास का उल्लेख करते हुए सरकार के नए विन्यास को जातीय जनगणना छलाने की साजिश बताया।

विशेष रूप से बिहार में जातीय सर्वेक्षण के बाद जातीय जनगणना का प्रभावी उपयोग कर के क्षेत्रीय दल और पिछड़े वर्गों को एकजुट किया।

उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के जातीय जनगणना शुरू होने के दावे को भी चुनौती दी। शाह के “घर पर जाति नहीं होती” के तर्क को राजनीतिक चालाकी बताया। मुख्य सवाल जातीय जनगणना की हकीकत नहीं, बल्कि उसके आंकड़े प्रतिनिधित्व में भूमिका निभाएंगे कि नहीं, यह था।

वो अगले 15 वर्षों तक जातीय जनगणना और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को अलग करने का आरोप लगा कर इसे सामाजिक न्याय पर बड़ा खतरा बताया।

16 अप्रैल की गुत्थी

विशेष अधिवेशन में राहुल गांधी के भाषण ने एक रहस्यमय मोड़ लेकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ‘कम ऊर्जा’ और ‘अलग स्वभाव’ संदर्भ में 16 अप्रैल की तारीख और अंक 16 का जिक्र करते हुए एक गूढ़ संदेश दिया।

गांधी ने विधेयक को आगे बढ़ाने में 16 नंबर के प्रभाव की बात कही और इसे सुलझाने का आग्रह किया। “अगर कोई मेरी बात समझे तो मुझे संदेश भेजे” कहकर सोशल मीडिया पर हलचल मचाई। कांग्रेस ने ‘सोह्र’ को ‘एपस्टिन’ से जोड़कर जिज्ञासा बढ़ाई।

गांधी ने हास्य और मजाक के पल भी पैदा किए, सदन का माहौल हल्का किया, और मंत्री अमित शाह को हँसने पर मजबूर करने वाली बहन प्रियंका गांधी का जिक्र किया, जिनके अंदर गंभीर राजनीतिक आरोप छिपे थे। मोदी को ‘जादूगर’ कहते हुए उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंधुर’ और ‘बालाकोट’ संदर्भों से सत्तारूढ़ दल को सैनिक और जन भावना के पीछे छिपने का आरोप लगाया।

कांग्रेस की रणनीति: एकता, संघीयता और संवैधानिक रक्षा

डिलिमिटेशन विधेयक को संसदीय प्रक्रिया से नाकाम करने के लिए कांग्रेस ने बहुआयामी और सावधानीपूर्वक रणनीति अपनाई। विपक्षी एकता मजबूत की, संघीयता पर प्रहार को अभिव्यक्त किया और विधेयक को महिला सशक्तिकरण के आवरण में संवैधानिक खतरा बताया।

17 अप्रैल की मतदान से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में ‘इंडिया ब्लॉक’ के सांसदों की रणनीतिक बैठक हुई। इसमें डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वामपंथी दल शामिल थे।

विशेषकर तृणमूल कांग्रेस के 21 सांसदों के वोट निर्णायक थे, जिनके लिए राहुल गांधी ने अभिषेक बनर्जी को व्यक्तिगत धन्यवाद दिया। संसदीय बहस में कांग्रेस ने डिलिमिटेशन को संघीय संरचना पर लज्जाजनक आक्रमण बताया। केरल के सांसद हिबी ईडन ने इसे संघीयता-विरोधी करार दिया। महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार को विधेयक वापस लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की चुनौती दी।

कांग्रेस ने महिला आरक्षण को विवादित डिलिमिटेशन से अलग करते हुए तत्काल लागू करने पर जोर दिया, जिससे वह संवैधानिक रक्षक के रूप में स्थापित हुई।

विधेयक के असफल होने पर राहुल गांधी ने इसे संविधान पर हमला रोकने की ऐतिहासिक जीत बताया। महासचिव जयराम रमेश ने इसे ‘दुष्ट और धूर्त प्रयास’ कहा और प्रधानमंत्री की वैधता पर सवाल उठाया।

यह संकेत था कि कांग्रेस संघीयता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में नेतृत्व भूमिका निभा सकती है।

दक्षिणी राज्यों का विरोध

विपक्ष की जीत में दक्षिणी राज्यों का एकमत और कड़ा विरोध निर्णायक था।

डिलिमिटेशन का प्रस्ताव दशकों से सफल जनसंख्या नियंत्रण वाले राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करता, जबकि जनसंख्या अधिक वाले उत्तरी राज्यों के हिस्से को बढ़ाता, जिससे दक्षिण भारत में विरोध फैला।

डीएमके सांसद कनिमोझी ने महिला आरक्षण को चुनावी लाभ के लिए ‘ढाल’ बताया और सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाया। डीएमके के सांसद ए. राजा ने राज्यों के बीच भेदभाव बढ़ाने का आरोप लगाया। मतदान के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कहा, “तमिलनाडु ने दिल्ली को हराया,” जो क्षेत्रीय पहचान और अधिकार की जीत थी।

गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव पेश किया। महिला आरक्षण के बाद भी पुरुष या खुली प्रतिस्पर्धा के लिए 39 सीटें कायम रखने की बात कही।

लेकिन विपक्षी दलों ने इस नए सूत्र को स्वीकार नहीं किया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे खतरा बताया और कहा कि यह लागू होना संभव नहीं।

थरूर ने कहा कि लोकसभा आकार 850 सीटें पहुंचाने से संसद असंभव निकाय बन जाएगी और शक्ति संतुलन बिगड़ेगा। उन्होंने इसे ‘पॉलिटिकल डिमोनेटाइजेशन’ कहा।

सरकार का अंतिम प्रयास

गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर महिला और जातीय आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने 1980 और 1990 के कांग्रेस प्रधानमंत्रियों को लेकर कांग्रेस को जनसंख्या नियंत्रण से वंचित करने का दोषी बताया।

शाह ने सदन को अपनी ओर करने के लिए अंतिम समय तक प्रयास किया और एक घंटे से अधिक स्थगन कर संशोधित विधेयक लाने का प्रस्ताव रखा। सभी राज्यों में 50 प्रतिशत सीट वृद्धि के लिए लिखित प्रतिबद्धता बताते हुए सांसदों से विधेयक पारित करने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी अंतिम अपील करते हुए सांसदों से विवेकपूर्ण निर्णय लेने और देश भर की महिलाओं के हित में कार्रवाई करने को कहा। सोशल मीडिया पर ‘नारी शक्ति’ की भावना के प्रति अपमानजनक व्यवहार न करने का विपक्ष से आग्रह किया।

परन्तु सरकार की सभी अपीलों और रणनीतियों के बावजूद विपक्षी गठबंधन की एकता टूट नहीं सकी। मतदान के परिणाम विपक्ष के पक्ष में जाने की संभावना देखकर सरकार को रणनीतिक रूप से पीछे हटना पड़ा।

सरकार ने डिलिमिटेशन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक को तत्काल आगे न बढ़ाने की घोषणा की। चूंकि ये दोनों विधेयक एक-दूसरे से जुड़े थे, एक के असफल होने से पूरा प्रस्ताव रोका गया।

डेलावेयर मैराथन में खुद उत्सव मनाते हुए प्रतियोगी को हार मिली

मैराथन के अंतिम निर्णायक क्षण में जल्दबाजी में मनाए गए उत्सव ने हार का कारण बना। संयुक्त राज्य अमेरिका में आयोजित डेलावेयर मैराथन में ३४ मिनट पहले अग्रणी स्थान पर दौड़ रहे एक धावक ने अंतिम क्षण में खुद से पीछे रहे प्रतियोगी को हार दिया। कार्सन मेलो ने जीत निश्चित समझकर अपनी दौड़ की गति कम कर दी थी। लेकिन पीछे से आए जोशुआ जैक्सन ने तेज़ी से दौड़ लगाकर कार्सन को एक सेकंड से भी कम समय में पीछे छोड़ते हुए ट्रॉफी जीतने में सफल रह गए।

गृहमन्त्रीको राजीनामा माग्दै एमालेले भन्यो– उच्चस्तरीय संयन्त्र गठन गरी अनुसन्धान होस्

गृहमन्त्री के इस्तीफे की मांग करते हुए एमाले ने उच्चस्तरीय समिति बनाकर जांच कराने का आग्रह किया

मीनबहादुर शाही/फाइल तस्वीर समाचार सारांश संपादकीय समीक्षा की गई। नेकपा एमाले ने गृहमंत्री सुधन गुरुङ के इस्तीफे की मांग की है। एमाले प्रचार विभाग प्रमुख मीनबहादुर शाही ने गृहमंत्री से जुड़े मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया है। एमाले ने उच्चस्तरीय समिति बनाकर गृहमंत्री की संलिप्तता वाले सभी मामलों की जांच तुरंत शुरू करने की मांग की है। ८ वैशाख, काठमाडौं। नेकपा एमाले ने गृहमंत्री सुधन गुरुङ के इस्तीफे की मांग की है। एमाले प्रचार विभाग प्रमुख मीनबहादुर शाही द्वारा जारी विज्ञप्ति में गृहमंत्री गुरुङ से जुड़े मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच प्रक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। ‘गृहमंत्री से जुड़े मामलों में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए नेकपा (एमाले) जोरदार मांग करता है। इसके लिए नेकपा (एमाले) स्पष्ट रूप से कहता है—जांच को किसी भी प्रकार के दबाव या प्रभाव से मुक्त रखा जाना चाहिए,’ एमाले ने अपनी विज्ञप्ति में कहा है। गृहमंत्री की संलिप्तता वाले सभी विषयों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित कर तत्काल जांच शुरू करने की भी मांग की गई है। ‘साथ ही, गृहमंत्री स्वयं से ढीलछूम या किसी प्रकार की छुपाछपाई किए बिना जांच प्रक्रिया को सरल, निष्पक्ष और प्रभावमुक्त बनाने के लिए तुरंत मार्ग प्रशस्त करें, यह हम मांग करते हैं,’ एमाले ने कहा है।

काठमाडौं उपत्यकामा ९८ चालकरों के खिलाफ कारवाई

काठमाडौं उपत्यका ट्राफिक प्रहरी कार्यालय रामशाहपथ ने ८ वैशाख को अचानक जांच कर ९८ चालकों के खिलाफ कारवाई की है। इसमें मादक पदार्थ सेवन करने वाले ७ चालक और रेड लाइट उल्लंघन, लेन अनुशासन समेत अन्य नियमों का उल्लंघन करने वाले ९१ चालक शामिल हैं। ट्राफिक पुलिस ने उपत्यका के विभिन्न स्थानों पर जांच करने की जानकारी दी है।

उपत्यका के विभिन्न स्थानों पर ट्राफिक पुलिस ने मंगलवार सुबह अचानक जांच की थी। इस दौरान ९८ चालकों के खिलाफ कारवाई की गई है। जिनमें मादक पदार्थ सेवन करने वाले ७ चालक और रेड लाइट उल्लंघन, लेन अनुशासन तथा अन्य ट्राफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले ९१ चालक शामिल हैं।

सोलुखुम्बु में पहली बार जिपलाइन शुरू

फाइल तस्वीर


समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा किया गया।

  • सोलुखुम्बु के नेचासल्यान गाउँपालिका ने गौरीटाप में पहली बार 550 मीटर लंबी जिपलाइन का संचालन शुरू किया है।
  • जिपलाइन समेत पाँच प्रकार के मनोरंजन स्थल निर्माण में 80 लाख रुपये की लागत हुई है, जो उपाध्यक्ष बिना राई ने बताई।
  • गाउँपालिका ने कुल आय का 70 प्रतिशत स्थानीय तह और 30 प्रतिशत भेडिखोर सामुदायिक वन को देने का प्रावधान किया है।

8 वैशाख, सोलुखुम्बु। सोलुखुम्बु के नेचासल्यान गाउँपालिका गौरीटाप में पहली बार जिपलाइन शुरू हुई है। नेचासल्यान गाउँपालिकाने पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समुद्र तल से लगभग तीन हजार मीटर ऊंचाई पर स्थित पर्यटक स्थल पत्ताले के सीमा क्षेत्र गौरीटाप में जिपलाइन का निर्माण कर उसकी शुरुआत की है।

अंतराष्ट्रीय और स्थानीय पर्यटकों को आकर्षित कर नागरिकों की आय में वृद्धि करने, पड़ोसी जिलों और स्थानीय तहों में पर्यटन को बढ़ावा देने एवं ग्रामीण पर्यटन को समर्थन देने के लिए पर्यटक क्षेत्र की आधारभूत संरचना का निर्माण किया गया है, ऐसा नेचासल्यान गाउँपालिका के अध्यक्ष धनजन राई ने बताया।

नेचासल्यान गाउँपालिका ने 80 लाख रुपये की लागत के साथ साहसिक खेल जिपलाइन, साइक्लिंग, स्वीमिंग, क्लाइम्बिंग और व्यूपॉइंट सहित पाँच प्रकार के मनोरंजन स्थल तैयार किए हैं, यह जानकारी उपाध्यक्ष बिना राई ने दी।

योजना निर्माण के लिए कालिका निर्माण सेवा के साथ 2082 साल साउन 11 तारीख को सम्झौता हुआ था, नेचासल्यान गाउँपालिका के पूर्वाधार विकास शाखा के इंजीनियर सुजन शर्मा ने बताया। उन्होंने कहा कि योजना को 2082 साल चैत्र तक पूरा करने का लक्ष्य था, जिसे नई साल के अवसर पर 2083 साल वैशाख 1 तारीख को गांवपालिका को सौंप कर 550 मीटर लंबी जिपलाइन का उद्घाटन किया गया।

गाउँपालिका अध्यक्ष राई ने उद्घाटन के दिन, वैशाख 1 को नए साल पर परीक्षण के रूप में जिपलाइन को संचालित किया था। उस दिन सौ से अधिक लोगों ने साहसिक खेल जिपलाइन का आनंद लिया।

गौरीटाप में नेचासल्यान गाउँपालिका-1 और सोलुदुधकुण्ड नगरपालिका-8 के पत्ताले के सीमा क्षेत्र में बनी जिपलाइन को नियमित रूप से संचालित करने के लिए ठेका आव्हान कर आधिकारिक संस्था को जिम्मेदारी सौंपने का योजना है, यह गाँवपालिका ने बताया।

गाउँपालिका ने बताया कि इस परियोजना की कुल आय का 70 प्रतिशत राशि स्थानीय तह को और 30 प्रतिशत राशि भेडिखोर सामुदायिक वन को प्रदान की जाएगी। सोलुखुम्बु के पत्ताले और गौरीटाप क्षेत्र से सगरमाथा सहित कई मनोहारी हिमशृंखलाएं देखी जा सकती हैं। इस क्षेत्र ने हाल ही में पर्यटन का ‘हब’ बनने की दिशा में तेजी पकड़ी है।

मन्त्रिपरिषद् बैठक जारी – Online Khabar

मन्त्रिपरिषद की बैठक जारी है

फाइल तस्वीर। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के सचिवालय के अनुसार आज मंत्रिपरिषद की बैठक प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद कार्यालय में चल रही है। सरकार के प्रवक्ता व्यस्त होने के कारण बैठक के निर्णय मंत्री प्रतिभा रावल द्वारा सार्वजनिक किए जाएंगे, ऐसा सचिवालय ने बताया है। बैठक शिक्षा, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय के हॉल में आयोजित की गई है और उपस्थित होने के लिए सचिवालय ने अनुरोध किया है। ८ वैशाख, काठमाडौं। मंत्रिपरिषद की बैठक नियमित रूप से हो रही है। सरकार के प्रवक्ता व्यस्त होने के कारण आज की बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन, भूमि व्यवस्था, सहकारी तथा गरीबी उन्मूलन मंत्री प्रतिभा रावल द्वारा जानकारी दी जाएगी, यह प्रधानमंत्री के सचिवालय ने बताया है। बैठक में उपस्थित होने के लिए शिक्षा, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय के हॉल में प्रधानमंत्री के सचिवालय ने आग्रह किया है।

कुत्ते की मृत्यु के बाद मेघा केसी ने रखा शोक सभा

कुछ रिश्ते अत्यंत ही घनिष्ट होते हैं। ऐसे रिश्तों पर ऐसा लगता है कि वे कभी टुटते नहीं। लेकिन मृत्यु के आगे यह सिद्धांत काम नहीं करता। पर्वत के कुस्मा क्षेत्र की मेघा केसी भी अपने कुत्ते के साथ ऐसे ही करीबी संबंध में थीं। काले रंग और शरीर के कुछ हिस्सों पर भूरा रंग वाला उनका कुत्ता उनके लिए बेहद प्यारा था। वह कुत्ते को ‘काली’ कहकर बुलाती थीं। प्रेम की वजह से कभी-कभी ‘कालु’ भी कहती थीं। उनके लिए कुत्ता बहुत ही अनमोल था, कालु। उसने बचपन से ही इस कुत्ते की परवरिश की थी। सामाजिक संजाल पर साझा की गई कुछ साल पुरानी तस्वीर में काली बहुत छोटा दिखाई देता है और मेघा उस समय वर्तमान की तुलना में बहुत छोटी नजर आती हैं। त्योहारों में भी कुत्ते को टीका लगाया जाता था। और वह हमेशा उसे अपने पास रखती थीं।

लेकिन, कुछ दिन पहले ही काली ने अपनी जान दे दी। वह घर पर नहीं थीं, जब कुत्ते का निधन हुआ था। 11 साल साथ बिताए कुत्ते की मृत्यु के बाद मेघा बहुत दुखी हुईं। क्योंकि उन्होंने कुत्ते को अपनी बेटी समान पला था। उनके परिवार ने भी ये बताया कि 11 वर्षों के दौरान कभी कालु को दुख नहीं दिया गया, जो भी खाना चाहता वह दिया गया, और जहाँ जाना चाहता था वहाँ जाकर आया।

बेटी समान माने जाने वाले कुत्ते की मृत्यु के बाद मेघा ने पूरी विधि से अंतिम संस्कार किया और शोक सभा भी रखी। उन्होंने कुत्ते की आत्मा की शांति के लिए सफेद कपड़ा पहनाया, ज्योत दी, और नमक छिड़का। परिवार के सदस्य के मृत्यु की तरह शोक पूरी तरह मनाया गया। कुत्ते ने सुख-दुःख में साथ देने के लिए उन्होंने ‘काली’ को धन्यवाद दिया। मंगलवार तक कुत्ते की मृत्यु के तीन दिन का शोक भी पूरा कर लिया गया है। नेपाल में कुत्ते की मृत्यु के बाद परिवार के सदस्यों द्वारा शोक सभा रखना यह पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व भी तुलसीपुर के मानपुर के शशीधर पौडेल ने पिछले सावन महीने में नौ दिन तक शोक सभा रखी थी।

काठमाडौंको कपन क्षेत्रमा १४ वर्षीय बालक बेपत्ता

काठमाडौंको कपन क्षेत्रबाट गत चैत ३० गते दिउँसो साढे तीन बजेदेखि युवराज कार्की नामका बालक सम्पर्कविहीन भएका छन्। उनका बुवा सन्तोष कार्कीले प्रहरी प्रभाग कपनमा छोराको खोजतलासका लागि निवेदन दिएका छन्। प्रहरीले बालकलाई अन्तिम पटक महांकाल ओरालोमा देखिएको उल्लेख गर्दै फेला पार्न नजिकैको प्रहरी चौकी वा दिइएका नम्बरमा सम्पर्क गर्न अनुरोध गरेको छ। ८ वैशाख, काठमाडौं।

काठमाडौंको कपन (मुस्कानचोक) क्षेत्रबाट १४ वर्षीय एक बालक बेपत्ता भएका छन्। उनी गत चैत ३० गते दिउँसो साढे तीन बजेदेखि सम्पर्कविहीन रहेको उनका परिवारले बताएका छन्। युवराज कार्की नाम गरेका करिब ५ फिट उचाइ भएका, कालो कपाल र कालो टी-शर्ट लगाएका ती बालक सम्पर्कविहीन भएका छन्।

उनका बुवा सन्तोष कार्कीले प्रहरी प्रभाग कपनमा छोराको खोजका लागि निवेदन दिएका छन्। मातहतका प्रहरी कार्यालयहरूमा खोजी गराउन सर्कुलर पनि गरिएको कपन प्रहरी प्रभागले जनाएको छ। परिवारका अनुसार, बालक कक्षा ८ मा अध्ययनरत थिए। उनलाई अन्तिम पटक महांकाल ओरालो क्षेत्रमा देखिएको प्रहरी जनाएको छ।

उक्त बालकलाई फेला पार्नेले नजिकैको प्रहरी चौकी वा ९८४९११५५२२, ९८५१२४५५२२, ९८४९०६९५५५ मा सम्पर्क गर्न अनुरोध गरिएको छ।

चीन ने युरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता कायम रखी, इरान युद्ध का प्रभाव नहीं पड़ा

चीन ने अपने विशाल कोयला भंडार का उपयोग करते हुए विश्वव्यापी युरिया उत्पादन में ७८ प्रतिशत हिस्सा कोयला आधारित कर लिया है। सन् २०२६ की शुरुआत में पश्चिम एशिया में हुए युद्ध ने होर्मुज स्ट्रेट के व्यापारिक मार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिसके कारण युरिया की कीमत में ७० प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। चीन ने अपनी ५० से ८० प्रतिशत तक की मल निर्यात पर प्रतिबंध लगा कर आंतरिक खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, जिससे विश्व बाजार में मल की कमी और बढ़ गई है।

दुनियाभर युरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस को प्रमुख स्रोत माना जाता है, जबकि चीन ने अपने विशाल कोयला संसाधनों का सदुपयोग कर इस क्षेत्र में अभूतपूर्व आत्मनिर्भरता प्राप्त की है। चीन के कुल युरिया उत्पादन का लगभग ७८ प्रतिशत कोयले से होता है। इसने कतार, रूस और सऊदी अरब जैसे प्राकृतिक गैस पर निर्भर देशों की तुलना में चीन के उत्पादन मॉडल को भिन्न और काफी सुरक्षित बना दिया है।

सन् २०२६ की शुरुआत में पश्चिम एशिया में शुरू हुए युद्ध ने होर्मुज स्ट्रेट को, जो विश्व के उर्वरक व्यापार का ३० प्रतिशत हिस्सा संभालता है, बंद कर दिया। इसके परिणामस्वरूप युरिया की कीमतों में ७० प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई। लेकिन चीन की कोयला आधारित उत्पादन प्रणाली और आंतरिक ऊर्जा स्रोतों के कारण वह बाजार में पर्याप्त सुरक्षित भंडारण बनाए रखने में सफल रहा। रॉयटर्स के अनुसार, चीन में युरिया की कीमतें इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में लगभग एक तिहाई हैं।

चीन ने पिछले वर्ष १३ अरब डॉलर से अधिक मूल्य का उर्वरक निर्यात किया था, जिसका अधिकांश हिस्सा मलेशिया, वियतनाम, इंडोनेशिया और न्यूजीलैंड जाता था। मलेशिया अपने कुल उर्वरक आयात का ६७ प्रतिशत और इंडोनेशिया ४४ प्रतिशत हिस्सा चीन से प्राप्त करता था। लेकिन युद्ध के कारण उत्पन्न कमी और आंतरिक खाद्य सुरक्षा की प्राथमिकता की वजह से चीन ने अपनी ५० से ८० प्रतिशत तक की मल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसने विश्व बाजार में मल की कमी को और बढ़ा दिया है।

मथुरा थापाको ‘कोमल अभिभावकत्व’ पुस्तक सार्वजनिक – Online Khabar

मथुरा थापाको पुस्तक ‘कोमल अभिभावकत्व’ सार्वजनिक

समाचार सारांश

समीक्षित र प्रस्तुत।

  • मथुरा थापाको ‘कोमल अभिभावकत्व’ पुस्तक में महिलाओं की गर्भावस्था से लेकर 18 वर्ष तक बच्चों की पालन-पोषण की प्रक्रियाओं और कौशलों पर चर्चा की गई है।
  • यह पुस्तक बाल मनोविज्ञान, आयु के अनुसार विकास के चरण, खेल, आहार और व्यवहार प्रबंधन को सरल एवं व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करती है।
  • प्रोफेसर डॉ. विदुर चालिसे ने इस पुस्तक को अभिभावकों, गृहिणियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए एक मार्गदर्शक कृति बताया है।

काठमांडू। मथुरा थापाको पुस्तक ‘कोमल अभिभावकत्व’ हाल ही में सार्वजनिक हुआ है।

यह पुस्तक महिलाओं की गर्भावस्था से लेकर बच्चों को 18 वर्ष तक पालन-पोषण की समस्त प्रक्रिया को केंद्रित करते हुए माता-पिता द्वारा अपनाए जाने वाले व्यवहार, सोच और कौशल पर आधारित है।

शिक्षा के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक सक्रिय लेखिका मथुरा थापाको इस पुस्तक में अभिभावकत्व को केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक संवेदनशील कला और दीर्घकालिक सामाजिक निवेश के रूप में स्थापित किया गया है।

७४ अध्यायों में विभाजित इस कृति में बच्चे की आदतों के विकास से लेकर एक अच्छे अभिभावक के माध्यम से सुगठित समाज निर्माण तक के विषय सरल एवं व्यावहारिक तरीके से प्रस्तुत किए गए हैं। बाल मनोविज्ञान आधारित सुझाव, उम्र के अनुसार विकास के चरण, खेल, आहार, व्यवहार और सीखने के तरीके संतुलित ढंग से शामिल किए गए हैं। यह पुस्तक अभिभावकों को केवल जानकारी ही नहीं, बल्कि व्यवहार में लागू करने योग्य मार्गदर्शन प्रदान करती है।

पुस्तक के प्राध्यापक डॉ. विदुर चालिसे ने इसे नेपाली समाज के अभिभावकों, गृहिणियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बाल पालन करने वाले सभी के लिए एक दिशानिर्देशक कृति बताया है। उनका कहना है कि बाल विकास के लिए खिलौने के चयन, पोषणयुक्त आहार, प्राथमिक पांच वर्षों का महत्व, उम्र अनुसार खेल और व्यवहार प्रबंधन पर पुस्तक विशेष ध्यान देती है। साथ ही बालों में दिखाई देने वाले सामान्य व्यवहार जैसे पैरों को जमीन पर मारना या जिद्दी प्रवृत्ति के मनोवैज्ञानिक कारण और उनके दीर्घकालिक प्रभावों का भी गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

लेखिका ने स्पष्ट किया है कि बच्चे जन्म से ही अच्छे या बुरे नहीं होते; उनका व्यक्तित्व निर्माण अभिभावक, शिक्षक और समाज के व्यवहार, वातावरण और संस्कार के साथ होता है। अभिभावक की बोली, व्यवहार और जीवनशैली से बच्चे तेज़ी से प्रभावित होते हैं, इसलिए जागरूक अभिभावकत्व अत्यावश्यक है।

२१ वर्षों के शिक्षण अनुभव पर आधारित, लेखिका ने विभिन्न स्वभाव और पृष्ठभूमि वाले बच्चों और अभिभावकों के साथ अपने संवाद से प्राप्त ज्ञान इस पुस्तक में समेटा है।

अभिभावकों की सामान्य इच्छा अपने बच्चों को अच्छे और सफल बनाना होती है, लेकिन आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल की कमी दिखाई देती है, जिसे यह पुस्तक संबोधित करती है।

पुस्तक में गर्भावस्था से किशोरावस्था तक के विभिन्न चरणों में अभिभावकों द्वारा अपनाए जाने वाले व्यवहारों की विस्तृत चर्चा है। गर्भधारण के समय से ही बच्चे का मानसिक और भावनात्मक विकास शुरू होता है, इसलिए उस समय माता-पिता की सोच, व्यवहार और वातावरण का प्रभाव स्पष्ट किया गया है। नवजात शिशु की देखभाल से लेकर पूर्वबाल्यावस्था और किशोरावस्था के चुनौतियों की सरल भाषा में व्याख्या की गई है।

२७२ पृष्ठों वाली इस पुस्तक का आवरण वाशु क्षितिज द्वारा डिजाइन किया गया है और संपादन प्राडा डॉ. विदुर चालिसे द्वारा किया गया है।

बाल अधिकार संरक्षण में निरंतर सतर्कता अनिवार्य

८ वैशाख, काठमाडौं। बाल अधिकार संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए सरकार, संचार माध्यम और नागरिक समाज को लगातार सतर्क रहने की आवश्यकता पर समाजिक हितधारकों ने ज़ोर दिया है। बालबालिका शान्तिक्षेत्र राष्ट्रीय अभियान (सिजप) द्वारा सोमवार आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने बाल अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ लगातार आवाज़ उठाने का आह्वान किया। बाल विवाह, बाल श्रम समाप्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और पोषण जैसे विषयों पर सतर्क रहना आवश्यक बताया गया।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय पत्रकारिता तथा आम संचार विभाग के प्रमुख प्रा.डा. कुंदन अर्याल ने बाल अधिकार विषयक कार्यपत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि विश्वस्तर पर १९९० से बाल अधिकारों के लिए आवाज़ उठनी शुरू हुई है, “इस क्षेत्र में निरंतर प्रयासों के कारण कुछ अच्छे अभ्यास सामने आए हैं, परन्तु केवल एक या एक दशक की पहल से बाल अधिकारों का प्रचार संभव नहीं है।” अर्याल ने कहा कि हमेशा वकालत करनी होगी, लिखना होगा और नियोजित तरीके से राज्य पर दबाव डालना होगा।

उनके अनुसार, नेपाल ने वर्ष २०३० तक बाल विवाह समाप्त करने की नीति बनाई है, फिर भी बाल विवाह अभी भी न्यूनीकरण के स्तर पर है। आगामी चार वर्षों में बाल विवाह समाप्त होने का व्यापक विश्वास नहीं है। सभी बाल बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और जन्मदर्ता जैसे अधिकार प्रदान करने के लिए पर्याप्त कार्यक्रमों और बजट की कमी है, उन्होंने जानकारी दी।

बालबालिका शान्तिक्षेत्र अभियान के अध्यक्ष तिलोत्तम पौडेल ने कहा कि बालक-बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण में निर्भीक होकर जीने, पढ़ने, खेलने और विकसित होने के अधिकार सुनिश्चित करना सभी पक्षों का दायित्व है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के अधिकार सुरक्षित करने में नागरिक समाज, संचार माध्यम, स्थानीय तह और सरकार की भूमिका पर विचार व्यक्त किए।

पौडेल ने बालक-बालिकाओं से संबंधित विभिन्न कानूनों को एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बाल अधिकार सम्बन्धी कानून, बाल श्रम सम्बन्धी कानून और अन्य कानूनों में असामंजस्य की वजह से क्रियान्वयन में बाधाएँ आती हैं और इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है। साथ ही, लैंगिक और यौन अल्पसंख्यक, अंतरलिंगी बालबालिकाओं एवं आवश्यक संरक्षण के लिए एक अलग आयोग या उच्च स्तरीय निकाय बनाना आवश्यक है, जिसमें वे मजबूती से विश्वास करते हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद को संसाधन-सम्पन्न बनाने और स्थानीय तहों में बच्चों के लिए अलग बजट सहित आवश्यक संरचनाएँ स्थापित करने के लिए संचार माध्यम से निगरानी की भूमिका निभाने पर भी ज़ोर दिया। कार्यक्रम में इन्सेक नेपाल के सूचना अधिकारी कृष्ण गौतम, पत्रकार प्रकाश सिलवाल, संचारकर्मी पुष्पा अधिकारी, सफलता भंडारी, संतोष पौडेल, देवी सापकोटा और प्लान इंटरनेशनल नेपाल के नीति पैरवी प्रबंधक इर्साद अन्सारी ने भी अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए।