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लेखक: space4knews

सधैँ ‘अम्पायरिङ एरर’, खेलाडीलाई कारबाहीको डर – Online Khabar

नेपाल क्रिकेट संघ अम्पायर स्तर सुधारको लागि ग्रेडिङ प्रणाली लागू गर्न लागिपरेको

नेपाल क्रिकेट संघले अम्पायरको स्तर सुधारका लागि पहिलोपटक ग्रेडिङ प्रणाली लागू गर्ने तयारी गरिरहेको छ। टेक्निकल कमिटीले अम्पायरको प्रदर्शनको निगरानी गर्दै आएको छ र म्याच रेफ्रीसँगको छलफलमा सुधारका सुझावहरू दिइरहेको छ। २४ चैत, काठमाडौं।

प्रधानमन्त्री कपको एक दिवसीय क्रिकेट अन्तर्गत मधेश प्रदेशविरुद्धको खेलमा अम्पायरको निर्णयप्रति असन्तुष्टि जनाउँदा लुम्बिनीका कप्तान देव खनालले एक खेलको प्रतिबन्ध भोग्नुपर्ने बाध्यात्मक अवस्था आएको थियो। खेलको आठौं ओभरको अन्तिम बलमा रूपेश सिंहको बलमा अपर कट प्रयास गर्दा देवलाई विकेटकिपरले क्याच गरेपछि आउट दिइएको थियो। अम्पायरको आउट निर्णयविरुद्ध देवले केही समय मैदानमै रहेर असन्तुष्टि देखाए। त्यसपछि म्याच रेफ्रीले उनलाई एक खेलको प्रतिबन्ध लगाएका थिए।

नेपाल प्रिमियर लिगको दोस्रो संस्करणअन्तर्गत लुम्बिनी लायन्सविरुद्ध चितवन राईनोजका रिजन ढकालले एलबीडब्लुको निर्णयका लागि अपिल गर्दा अम्पायरले आउट नदिँदा असन्तुष्टि व्यक्त गरेका थिए। सोही कारण उनलाई कारबाही गरिएको थियो। एलपीएलको यो संस्करणमा अम्पायरबाट धेरै गलत निर्णयहरू भएका कारण त्यहाँ तीव्र आलोचना भएको थियो। गत वर्षको जय ट्रफीमा क्रिकेटर सन्दीप लामिछानेले सामाजिक सञ्जालमार्फत नेपालमा अम्पायरिंगको स्तरमा ठुलो सुधार आवश्यक रहेको बताएका थिए।

एक वरिष्ठ अम्पायरको भनाइ छ, ‘खेलाडीले गल्ती गरे कारबाही हुन्छ तर अम्पायरले पटकपटक गलत निर्णय गर्दा पनि कुनै कारबाही हुँदैन। क्यानले उनीहरूलाई कारबाही नगरी कसरी अम्पायरिंगको स्तर सुधार हुन्छ?’ लुम्बिनी प्रदेशका मुख्य प्रशिक्षक वसन्त शाही पनि अम्पायरको स्तरप्रति असन्तुष्ट छन्। उनले भने, ‘अम्पायरिंगका निर्णयहरूमा हामी मात्र होइन, सबै टिम असन्तुष्ट छन्। पीएम कपमा अम्पायरिंगको स्तर राम्रो देखिएको छैन। यसमा सुधार आवश्यक छ।’

क्यानका प्रवक्ता छुम्बी लामाले भने, ‘अम्पायरको विषय बोर्ड बैठकमा छलफल गरिएको थियो। क्यानको टेक्निकल कमिटीले दिएको रिपोर्टको आधारमा अम्पायरको ग्रेडिङ गरिनेछ। यसले अम्पायरको गुणस्तर वृद्धि हुने विश्वास छ।’

बहुविवाह मामले में 29 वर्षों बाद फरार जोड़े की गिरफ्तारी

२४ चैत, स्याङ्जा। बहुविवाह के मामले में अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए और 29 वर्षों से फरार एक जोड़े को गिरफ्तार किया गया है। बिरुवा गाउँपालिका–४ के 52 वर्षीय उमाकान्त पोखरेल (हुमबहादुर थापा) और 46 वर्षीय शारदादेवी पोखरेल को गिरफ्तार किया गया है। स्याङ्जा जिला प्रहरी कार्यालय के सूचना अधिकारी, पुलिस उप निरीक्षक (डीएसपी) प्रशन्नराज चौधरी ने मंगलवार को दोनों के गिरफ्तारी की जानकारी दी है।

उनके विरुद्ध २०५३ साल वैशाख १९ गते बहुविवाह का मामला दर्ज किया गया था। स्याङ्जा जिला अदालत ने उक्त मामले में दोनों को दोषी मानते हुए दो- दो महीने की कैद की सजा सुनाई थी। लेकिन इस फैसले के लागू होने से पहले ही वे फरार हो गए थे। पुलिस के अनुसार, सजा से बचने के लिए दोनों ने अपनी असली पहचान छिपा कर भारत में निवास किया। जांच के दौरान उनकी लोकेशन पता चलने पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया, डीएसपी चौधरी ने बताया।

गिरफ्तारी के बाद दोनों को अदालत के समक्ष पेश किया गया है। अदालत ने कैद की सजा को लागू करने के लिए दोनों को जिला कारागार स्याङ्जा भेजने का निर्देश दिया है। पुलिस ने हाल ही में अदालत के फैसले को लागू करने के लिए फरार आरोपियों की गिरफ्तारी को प्राथमिकता देते हुए अभियान तेज किया है।

संसद्को रोस्ट्रममा हुँदैछ प्रधानमन्त्रीको खोजी – Online Khabar

संसद के रोस्ट्रम पर प्रधानमंत्री की खोज जारी

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने अब तक प्रतिनिधि सभा की बैठक में कोई संबोधन नहीं दिया है, जबकि संसद उनकी दृष्टि और नीति जानना चाहती है।
  • संसद के नियमों के तहत प्रधानमंत्री से प्रत्यक्ष प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित करना अनिवार्य है, लेकिन उन्होंने अभी तक भाषण नहीं दिया है।
  • सांसद ऋण स्वीकृति और जांच आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने जैसे मुद्दों पर प्रधानमंत्री से सवाल कर रहे हैं और जवाब की उम्मीद कर रहे हैं।

२४ चैत, काठमाडौं। जेनजी आन्दोलन के बाद हुए प्रतिनिधिसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी को लगभग दो तिहाई बहुमत मिलने पर लगभग दो सप्ताह पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह प्रधानमंत्री बने हैं। इसके बाद अबतक चार प्रतिनिधिसभा की बैठकें हुईं, जिसमें सभी दलों के प्रमुख नेताओं ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए, लेकिन प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने अबतक कोई संबोधन नहीं दिया है।

अपने दल से लगभग दो तिहाई समर्थन मिलने के बाद प्रधानमंत्री के सामने यह प्रश्न है कि वे देश को नए संदर्भ में कैसे आगे ले जाना चाहते हैं? नेपाल का भविष्य किस दिशा में जाएगा? ये सवाल संसद के भीतर भी उठने लगे हैं।

पिछले संसद अधिवेशनों में पहले दिन दलों के शीर्ष नेताओं के साथ प्रधानमंत्री का भी संबोधन होता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। १९ चैत को हुई पहली बैठक में सत्तारूढ़ दल रास्वपाकी सभापति रवि लामिछाने ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अभी तक बात नहीं की है।

संसद के पूर्व महासचिव सूर्यकिरण गुरुङ कहते हैं कि इतनी शक्तिशाली सरकार की देश के लिए क्या दृष्टि है, इसकी जानकारी जनता को मिलना नागरिकों का अधिकार है।

गुरुङ का कहना है, ‘प्रधानमंत्री की समग्र दृष्टि क्या है? वे देश को कैसे आगे ले जाना चाहते हैं? यह पदाधिकारियों के लिए सुनना आवश्यक है। दो तिहाई बहुमत वाली सरकार देश को कैसे मार्गदर्शन कर रही है? जनता को क्या राहत दी जाएगी? इसे स्पष्ट करना जरूरी है।’

गुरुङ के अनुसार केवल नेपाली जनता ही नहीं, विश्व समुदाय भी नेपाल सरकार की नई विदेशी नीति और आर्थिक नीतियों के बारे में जानने के इच्छुक है।

विदेश नीति से लेकर आर्थिक नीतियां और नागरिक राहत तक संसद में उठे अथवा उठने वाले सभी मुद्दों पर प्रधानमंत्री को स्पष्टता देनी चाहिए, ऐसा गुरुङ का सुझाव है।

‘प्रधानमंत्री को संसद के रोस्ट्रम से अपनी सोच व्यक्त करनी चाहिए,’ वे कहते हैं, ‘संसद में उठाए गए सभी मुद्दों पर चर्चा कर जनता को पता चले कि सरकार की नीति क्या है और देश कैसे आगे बढ़ रहा है।’

प्रधानमंत्री के प्रमुख निजी सचिव सुवास शर्मा ने कहा है, ‘अभी तत्काल संसद को संबोधित करने की कोई योजना नहीं है।’

संसद के पहले दिन संविधानविद् डॉ. विपिन अधिकारी ने कहा था कि प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी से कुछ असमंजस की स्थिति बनी है। ‘संभवतः सभापति के चुनाव के बाद प्रधानमंत्री संबोधन कर सकेंगे।’

पहले पार्टी के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री एक ही व्यक्ति होते थे, इसलिए संसद के रोस्ट्रम से प्रधानमंत्री अपने विचार व्यक्त करते थे। इस बार पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री अलग हैं, इसलिए प्रधानमंत्री का अपने विचार रखना उचित होता है, विशेषज्ञों का मानना है।

प्रधानमंत्री की तैयारी क्या है?

१९ चैत से संघीय संसद की प्रतिनिधिसभा और राष्ट्रिय सभा की बैठकों का सिलसिला जारी है। प्रधानमंत्री सचिवालय के अधिकारी कहते हैं कि उचित समय आने पर प्रधानमंत्री संसद को संबोधित करेंगे।

‘प्रधानमंत्री कब संसद में बोलेंगे?’ इस सवाल पर प्रमुख निजी सचिव सुवास शर्मा ने कहा, ‘अभी तत्काल कोई तैयारी नहीं है।’

संघीय संसद सचिवालय के अनुसार प्रधानमंत्री को किसी भी समय संसद में बोलने की स्वतंत्रता है, इसके लिए किसी विशेष अनुमति या समय सीमा का पालन जरूरी नहीं है।

प्रतिनिधिसभा नियमावली के अनुसार हर महीने एक दिन प्रधानमंत्री के साथ प्रत्यक्ष प्रश्नोत्तर कार्यक्रम आयोजित होना अनिवार्य है।

प्रतिनिधिसभा नियम ५६ के मुताबिक, ‘प्रधानमंत्री या उनकी कार्यक्षेत्र संबंधित विषयों पर प्रश्न पूछने के लिए सभापति प्रत्येक महीने की पहली सप्ताह की बैठक में पहली एक घंटे की व्यवस्था करेंगे।’

राष्ट्रीय सभा में भी इसी तरह का नियम है। नियम ५५क के अनुसार प्रति माह तीसरे सप्ताह की बैठक में अध्यक्ष प्रधानमंत्री के साथ प्रत्यक्ष प्रश्नोत्तर के लिए समय दे सकते हैं।

प्रधानमंत्री उक्त प्रत्यक्ष प्रश्नोत्तर से अपने नीतिगत दृष्टिकोण व्यक्त कर सकते हैं।

‘संसद में प्रधानमंत्री की तलाश जारी है’

पिछले सोमवार प्रतिनिधिसभा की बैठक में रास्वपाकी सांसद खुश्बु ओली ने सरकार के एशियाई विकास बैंक और विश्व बैंक से ऋण लेने के फैसले पर सवाल उठाए।

उन्होंने पूछा, ‘किस संसदीय समिति, किस नीतिगत बहस या आवश्यकता के आधार पर यह ऋण मंजूर किया गया?’

पिछले रविवार मंत्रिपरिषद ने डिजिटल नेपाल ट्रांसफॉर्मेशन परियोजना के लिए ९० मिलियन अमेरिकी डॉलर का सस्ता ऋण लेने का निर्णय लिया था। उसी दिन विश्व बैंक से ९५ मिलियन डॉलर तक के ऋण को भी स्वीकार किया गया।

सांसदों ने पूछा है कि क्या सत्ता पृथक्करण का सिद्धांत लागू होता है या नहीं? क्या सरकार सांसदों की बात सुनती है? बजट चर्चा समय पर होती है? क्या मंत्री के दरवाजे सांसदों के लिए खुले हैं? कानून निर्माण में स्वार्थ समूहों का प्रभुत्व रहता है या नहीं?

पहले भी सरकार ने सहुलियत ऋण लिए हैं। इस बार भी ऐसा फैसला होने पर संसद जवाब मांगना चाहती है।

सांसद ओली कहते हैं, ‘हमारी संसद अभी शिशु अवस्था में है। संसदीय समिति एवं उपसमितियां अभी नहीं बनी हैं। ऐसे हालात में निर्णय पारदर्शी नहीं हो सकता।’

ऋण लेने की प्रक्रिया पर भी उन्होंने सवाल उठाए: ‘क्या यह ऋण हमने मांगा था या हमारे ऊपर थोपे गए? क्या यह ऑफर लोन है या रिक्वेस्टेड लोन?’

सरकार को इस पर संसद में जवाब देना होगा। प्रधानमंत्री भी इन सवालों के जवाब देने की स्थिति में हैं।

१९ चैत की प्रतिनिधिसभा के एक बैठक में नेपाली कांग्रेस के सांसद भिष्मराज आङ्दम्बे ने पूछा था, ‘जांच आयोग की रिपोर्ट सरकार जन के सामने कब लाएगी? क्या जनता खुद पढ़ पाएगी?’

२३ और २४ चैत को हुए जेनजी आंदोलन में ७६ लोगों की मृत्यु हुई थी और आंदोलन के दौरान व्यापक आगजनी और तोड़फोड़ हुई।

पूर्व न्यायाधीश गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व में गठित जांच आयोग ने रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। मीडिया में कुछ विषयगत जानकारी आ रही है।

सांसद आङ्दम्बे ने उस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के लिए प्रधानमंत्री से जवाब मांगा है और २३ तथा २४ चैत की घटनाओं का स्पष्ट विवरण चाहिए बताया है।

संसद में उठाए गए इन सवालों का प्रधानमंत्री कब जवाब देंगे निश्चित नहीं है, लेकिन सांसद लगातार उन्हें याद दिलाते हुए अपनी बात रख रहे हैं।

सोमवार को राष्ट्रीय सभा की बैठक में नेपाली कांग्रेस के सांसद रंजीत कर्ण ने सरकार से सहयोग का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री जी से अनुरोध है कि आइए, राष्ट्रीय एकता करें, सहयोग के साथ एजेंडों को आगे बढ़ाएं।’

चुनाव तक पार्टी या विचार में अंतर रह सकता है, लेकिन चुनाव के बाद सभी का लक्ष्य उन्नत नेपाल और सम्मानित नेपाली होना चाहिए। कर्ण के प्रस्ताव के बाद सरकार विपक्ष के साथ सहयोग करेगा या नहीं, यह प्रधानमंत्री से स्पष्ट होगा।

संसद और सरकार के बीच रिश्तों में सुधार के लिए प्रतिबद्धता भी मांगी जा रही है।

रास्वपाका सांसद मनिष झा ने संसद पैलेस से संसद को बंदी न बनाने की गारंटी मांगी। उन्होंने पिछली बैठक में कहा, ‘पिछली बार सदन खुमलटार, बालुवाटार और बालकोट में बंदी रहा, केवल संख्या गिनी गई, सिद्धांत कमजोर पड़े।’

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचंड’, केपी शर्मा ओली और शेरबहादुर देउवा की ओर संकेत किया। प्रचंड खुमलटार में, ओली बालकोट में थे, जबकि बालुवाटार तत्कालीन प्रधानमंत्री निवास था।

सांसद झा ने संसद में बालुवाटार अर्थात प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप न होने की मांग दोहराई।

रास्वपाका सांसद गणेश पराजुली ने भी सत्ता पृथक्करण के पालन, सांसदों की बात सुनने, बजट चर्चा समय पर होने, मंत्री के दरवाजे सांसदों के लिए खुलने और कानून निर्माण में स्वार्थ समूहों के प्रभुत्व जैसे सवाल उठाए।

उन्होंने कहा, ‘अब पुरानी राजनीतिक गलतियां दोहराई न जाएं। संसद में उठे मुद्दों को समय पर संबोधित करना जरूरी है।’

पराजुली ने कहा, ‘संसद में उठाए गए विषयों को संविधान, कानून और नीति के रूप में आगे बढ़ाने के लिए सरकार ध्यान दे, संसद में रखने से समाधान निकलता है।’

ये सभी प्रश्न और जिज्ञासाएं प्रधानमंत्री को संसद के रोस्ट्रम पर जाकर उत्तर देने होंगे ताकि वे स्वयं संसद और जनता को अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत कर सकें।

शिक्षामन्त्री ने कहा– विश्वविद्यालय के कुलपति प्रधानमंत्री बनने की व्यवस्था की पुनः समीक्षा की जाएगी

२४ चैत, महेन्द्रनगर। नेपाल के विश्वविद्यालयों में कुलपति प्रधानमंत्री और सहकुलपति शिक्षामंत्री बनने की कानूनी व्यवस्था की पुनः समीक्षा की जाएगी, यह बात शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मंत्री सस्मित पोखरेल ने कही। मंगलवार को कंचनपुर के महेन्द्रनगर स्थित सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालय का दौरा करते हुए मंत्री पोखरेल ने पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी।
‘विश्वविद्यालयों में बढ़ती राजनीतिकरण को समाप्त करना आवश्यक है। इसके लिए कुलपति और सहकुलपति को क्रमशः प्रधानमंत्री और शिक्षामंत्री बनाए जाने वाली वर्तमान व्यवस्था की पुनः समीक्षा करेंगे,’ उन्होंने कहा।
इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के भीतर के छात्र संगठन को भंग करने के पूर्व सरकार के निर्णय को वर्तमान सरकार प्रतिबद्धतापूर्वक आगे बढ़ा रही है, यह भी बताया। मंत्री पोखरेल ने शैक्षणिक विकास के लिए सरकार द्वारा आवश्यक सहायता देने का संकल्प जताते हुए विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों और कर्मचारियों को सरकार की रफ्तार और सौ दिन की कार्यसूची के अनुसार कार्य करने के निर्देश दिए।

अमेरिका/इजरायल-इरान युद्ध : टर्कीको सबैभन्दा ठूलो टाउको दुखाइ

अमेरिका और इज़राइल-ईरान युद्ध: तुर्की की मुख्य चिंता

अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के बाद से तुर्की ने हमेशा सतर्क और सावधानीपूर्वक रुख अपनाया है। तुर्की अधिकारियों ने न तो अमेरिका को और न ही तेहरान को सीधे तौर पर दोषी ठहराया है, बल्कि इस संघर्ष से जुड़े जोखिमों के प्रति सतर्क करने का प्रयास किया है। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के हमले के बाद तुर्की के विदेश मंत्रालय ने जारी की गई प्रथम विज्ञप्ति में सभी पक्षों से तत्काल हमले बंद करने और मध्यस्थता का प्रस्ताव रखने का आग्रह किया था।

कोशी प्रदेश सभा के शीतकालीन अधिवेशन का समापन, तीन विधेयक पारित

२५ चैत्र, विराटनगर। कोशी प्रदेश सभा का शीतकालीन तथा आठवाँ अधिवेशन तीन विधेयकों को पारित करते हुए समाप्त हुआ है। प्रदेश सरकार की सिफारिश पर प्रदेश प्रमुख पर्शुराम खापुङ ने सोमवार रात 12 बजे से लागू होने के साथ अधिवेशन समाप्ति की घोषणा की। सोमवार को हुई कोशी प्रदेश मंत्रिपरिषद की बैठक में अधिवेशन समाप्ति के लिए प्रदेश प्रमुख को सिफारिश प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया था।

जेनजी आंदोलन के दौरान प्रदेश सभा भवन और सचिवालय में आगजनी होने से असमंजस की स्थिति उत्पन्न हुई थी। इसके बाद प्रदेश सभा की बैठक विराटनगर के वीरेन्द्र सभा गृह में आयोजित की गई, जिसे माघ 25 से किराए पर लेकर बुलाया गया था। लगभग दो माह तक चली इस अधिवेशन में तीन विधेयक पारित किए गए, इसकी जानकारी कोशी प्रदेश सभा सचिवालय के सूचना अधिकारी निरोज ढकाल ने दी।

उनके अनुसार ‘प्रदेश अनुसंधान तथा प्रशिक्षण प्रतिष्ठान ऐन, २०६९ को संशोधित करने हेतु विधेयक’, ‘प्रदेश विधान सम्बन्धी व्यवस्था बनाने हेतु विधेयक’ तथा ‘कोशी प्रदेश आम-संचार व्यवस्था के संबंध में विधेयक’ पारित किए गए हैं। जेनजी आंदोलन के दौरान प्रदेश सभा भवन और सचिवालय जलकर क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण वीरेन्द्र सभा गृह किराए पर लेकर संचालन किए गए अधिवेशन में कुल 15 बैठकें हुईं। अधिवेशन के ‘शून्य समय’ में 83 सांसदों ने अपने विचार व्यक्त किए, वहीं ‘विशेष समय’ का उपयोग करते हुए 19 सांसदों ने मन्तव्य प्रस्तुत किए।

मन्त्रालयको संख्या घटाइँदै, सचिवहरूको व्यवस्थापन कसरी होला ?

मंत्रालयों की संख्या घटाई जा रही है, सचिवों का प्रबंधन कैसे होगा?

समाचार सारांश: प्रधानमंत्री बालेन शाह ने मंत्री परिषद् के सदस्यों की संख्या २२ से घटाकर १७ करने की योजना बनाई है। इसी क्रम में, सरकार सचिवालय की पदसंख्या में भी कटौती करने की तैयारी में है। पुनर्संरचना व्यवस्थापन सचिवालय की स्थापना कर कर्मचारी प्रबंधन और सेवा की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए संक्रमण मार्गचित्र बनाने की योजना है। २३ चैत्र, काठमांडू। प्रधानमंत्री पद ग्रहण के बाद लगभग डेढ़ सप्ताह पहले बालेन शाह ने १५ सदस्यीय मंत्रिपरिषद् का गठन किया था। वर्तमान में मंत्रालयों की संख्या २२ है, जिसमें सरकार कुछ मंत्रियों को विपरीत क्षेत्रों से जुड़े दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी देकर पुनर्गठन कर रही है। मंत्रिपरिषद् गठन के कुछ समय बाद ही १०० बिंदुओं वाली कार्ययोजना तैयार की गई थी, जिसमें ‘प्रशासन सुधार, पुनर्संरचना और मितव्ययिता’ के तहत मंत्रालयों की संख्या घटाकर १७ करने का लक्ष्य रखा गया है।

उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय और प्रधानमंत्री तथा मंत्री परिषद् कार्यालय को मंत्रालय जैसी भूमिका दी गई है, जिससे ये मंत्रालय मिलाकर मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। एक महीने के भीतर मंत्रालयों की संख्या घटाने की योजना के साथ पदसंख्या में भी प्रबंधन किया जाएगा। इसके लिए पुनर्संरचना व्यवस्थापन सचिवालय का गठन होगा। प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद् कार्यालय में स्थित यह सचिवालय दो मुख्य कार्य करेगा: एक, सेवा में किसी भी बाधा को रोकने के लिए कर्मचारियों के प्रमोशन का प्रबंधन; दो, सेवा की निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु संक्रमण मार्गचित्र तैयार करना। मंत्रालयों की संख्या कम करने की योजना के साथ ही सचिवों की संख्या में भी बड़ी कटौती होने की संभावना है। वर्तमान में प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद् कार्यालय में मुख्य सचिव के अलावा चार सचिव कार्यरत हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय से सम्बद्ध नेपाल ट्रस्ट, सार्वजनिक खरीद अनुश्रवण कार्यालय, सतर्कता केंद्र जैसे छोटे क्षेत्र वाले निकायों में भी सचिव पद निर्धारित हैं। अर्थ मंत्रालय के पास अर्थ और राजस्व संभालने हेतु दो सचिव हैं, जबकि महालेखा नियंत्रक कार्यालय के पास भी अलग सचिव पद है। स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य और प्रशासन की जिम्मेदारी के अनुसार सचिव व्यवस्था है। मंत्रालयों के अलावा विभिन्न आयोग, निकाय और संवैधानिक अंगों में भी एक से अधिक सचिवों की व्यवस्था है। जल तथा ऊर्जा आयोग, अक्षर, निर्वाचन आयोग, लोक सेवा आयोग जैसे निकायों के पास सचिव पद निर्धारित हैं। महालेखा परीक्षक कार्यालय, महान्यायाधिवक्ता कार्यालय और संघीय संसद सचिवालय में चार-चार सचिव हैं। इन निकायों की तुलना में कार्यपालिका अन्तर्गत निकायों के सचिवों की संख्या पुनः समीक्षा के प्राथमिकता में होगी, प्रधानमंत्री कार्यालय के एक उप सचिव ने बताया। अब पदसंख्या कटौती के दौरान विलय किए गए मंत्रालयों से केवल एक सचिव ही रहेगा। जिन मंत्रालयों में दो या अधिक सचिव हैं, उनकी संख्या भी घटेगी। जिन निकायों के लिए सचिव पद आवश्यक नहीं होगा, उनके पद भी पुनः समीक्षा के दायरे में आएंगे।

प्रधानमंत्री बालेन शाह के नीति, प्रशासन और सुशासन सलाहकार सुदिप ढकाल ने मंत्रालयों की संख्या घटाने हेतु समिति गठित होने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा, ‘समिति बन चुकी है और काम कर रही होगी। अभी तक अतिरिक्त जानकारी नहीं मिली है।’ मंत्रालयों की संख्या घटाई जा रही है: ७ मंसिर २०७८ को सरकार ने कार्यविभाजन नियमावली संशोधित करते हुए २२ मंत्रालय बनाए थे, जिनमें सभी में सचिव पद थे। पाँच मंत्रालय घटाने के बाद कम से कम पाँच सचिव स्वतः हट जाएंगे। प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद् कार्यालय के एक स्रोत के अनुसार फिलहाल तत्काल सचिवों की संख्या में कटौती नहीं की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, आगामी असार माह के अंत तक चार सचिव सेवानिवृत्त होंगे। सचिवों की संख्या घटाने की रणनीति के अनुसार, पद खाली होने पर नई नियुक्ति नहीं होगी। सचिव पद के लिए बढ़ोत्तरी की प्रतीक्षा कर रहे सहसचिवों पर कुछ समय तक इसका असर पड़ेगा और कई सहसचिव ५८ वर्ष की आयु सीमा तक पहुंचकर सचिव बने बिना ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

संरचना में संभावित परिवर्तन: संघीय स्तर पर वर्तमान में ६३ और सात प्रदेशों में प्रमुख सचिव सहित कुल ७० सचिव पद हैं। प्रदेशों में तैनात प्रमुख सचिव भी संघीय निजामती सेवा के अंतर्गत आते हैं। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सचिव के समकक्ष १२वें स्तर पर चार अधिकृत हैं। सहसचिवों की संख्या लगभग ६५० है। अब तक सरकार ने मुख्य सचिव से सचिव तक की पदसंख्या निर्धारित नहीं की है। १०० बिंदुओं वाली कार्ययोजना के अनुसार पुनर्संरचना व्यवस्थापन सचिवालय शेष रूपरेखा तैयार करेगा। कुछ महीनों के भीतर संघीय संसद में पेश किया जाने वाला नियामक विधेयक कर्मचारी प्रबंधन के विभिन्न रूप और मानदंड निर्धारित करेगा।

पूर्व की रिपोर्ट उपयोगी हो सकती है: संघीय निजामती सेवा में कर्मचारी संख्या आवश्यकता से अधिक होने का प्रश्न बार-बार उठता रहा है। इसके अतिरिक्त, सचिव पद बढ़ाने में निजी स्वार्थ भी शामिल होने की शिकायतें हैं। तीन वर्ष पहले भी सचिवों की संख्या को लेकर यही प्रश्न उठे थे, जिसके बाद सरकार ने पुनः समीक्षा हेतु समिति बनाई थी। प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद् कार्यालय के तत्कालीन सचिव लक्ष्मण अर्याल की अध्यक्षता में बनी समिति ने २०७९ में सचिवों की संख्या घटाने और कुछ जगहों पर सचिव और सहसचिव के व्यापक प्रबंधन के सुझाव दिए थे। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, जिन मंत्रालयों में दो सचिव हैं वहां संख्या घटनी चाहिए। उद्योग, कृषि एवं पशुपालन, स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान प्रौद्योगिकी और ऊर्जा मंत्रालयों में वर्तमान में दो-दो सचिव हैं। समिति ने सचिवों की संख्या को ५० तक सीमित करने, अतिरिक्त सचिव पद बनाए रखने और सहसचिवों की संख्या को ६२८ तक सीमित करने की सिफारिश की थी। साथ ही कुछ आयोगों के अनावश्यक सचिव पद काटकर अतिरिक्त सचिव बनाए रखने का सुझाव भी दिया गया था। इसके अलावा, एक से अधिक सहसचिव वाले मंत्रालयों को छोड़कर अन्य निकायों में अतिरिक्त सचिव पदों का प्रावधान करने की सिफारिश की गई थी। इसी प्रकार संवैधानिक निकायों और दो से अधिक सहसचिव वाले निकायों में भी अतिरिक्त सचिव पद की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया था। सचिवों के पदोन्नति के लिए ५० वर्ष की उम्र पूरी करने वाले, कोई दंडात्मक कार्रवाई न होने वाले और स्वच्छ छवि वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता देने के लिए कानूनी व नीतिगत व्यवस्था करने की बात भी कही गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था, ‘राजपत्रांकित प्रथम श्रेणी या इसके समकक्ष कर्मचारियों को क्लस्टर पद्धति के अनुसार तैनात करना, प्रदेश मंत्रालयों की संख्या निर्धारित करना आदि सुधार आवश्यक हैं।’

प्रकाशचन्द्र लोहनी का अध्यक्ष पद से इस्तीफा राजेन्द्र लिङ्देन ने किया स्वीकृत

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के निर्देशक समिति के अध्यक्ष पद से डॉ. प्रकाशचन्द्र लोहनी ने चैत ८ गते दिया गया इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष राजेन्द्र लिङ्देन द्वारा स्वीकृत किया गया है। लोहनी ने प्रतिनिधि सभा चुनाव के नतीजों से स्तब्ध होकर पार्टी महाधिवेशन आयोजित करने का आग्रह किया था और इसके बाद ही पद पर बने रहने की बात कही थी। उन्होंने अपने इस्तीफे के पत्र में पार्टी नेतृत्व के पदाधिकारियों को तुरंत रास्ता खोलने की बात भी लिखी थी। २४ चैत, काठमाडौँ।

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) के निर्देशक समिति के अध्यक्ष पद से डॉ. प्रकाशचन्द्र लोहनी का इस्तीफा स्वीकृत हुआ है। लोहनी ने इसी चैत ८ गते दिया गया इस्तीफा आज मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष राजेन्द्र लिङ्देन ने मंजूर किया है। ‘चैत ८ गते निर्देशक समिति के अध्यक्ष पद से उन्होंने दिया गया इस्तीफा आज पार्टी अध्यक्ष ने स्वीकृत किया है,’ राप्रपा सूत्रों ने जानकारी दी है।

लोहनी ने हाल ही में सम्पन्न हुई प्रतिनिधि सभा चुनाव के परिणाम से स्तब्ध होकर तदर्थ समिति के माध्यम से पार्टी महाधिवेशन कराना आवश्यक बताया था। उन्होंने महाधिवेशन के पश्चात ही पद पर बने रहने का स्पष्ट उल्लेख किया था। पार्टी नेतृत्व के पदाधिकारियों को तुरंत प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा गया था, जिसे उन्होंने अपने इस्तीफे के पत्र में लिखा था।

आईपीएलमा राजस्थान रोयल्सको लगातार तेस्रो जित – Online Khabar

आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स ने लगातार तीसरी जीत दर्ज की

राजस्थान रॉयल्स ने आईपीएल क्रिकेट में लगातार तीसरी जीत हासिल करते हुए मुंबई को 27 रनों से हराया। बारिश के कारण मैच 11 ओवरों में सीमित किया गया था और राजस्थान ने 151 रनों का लक्ष्य निर्धारित किया था। राजस्थान ने 3 मैचों में 6 अंक हासिल कर शीर्ष स्थान पर कब्जा किया है, जबकि मुंबई 2 अंकों के साथ सातवें स्थान पर है। 25 चैत्र, काठमांडू।

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) क्रिकेट में राजस्थान रॉयल्स ने लगातार तीसरी जीत निकालते हुए मंगलवार रात देर से शुरू होकर मध्यरात्रि के बाद संपन्न हुए मैच में मुंबई को 27 रनों से हराया। बारिश के कारण टॉस समय पर नहीं हो पाया और मैच 11 ओवरों के लिए सीमित कर दिया गया। 11 ओवर के खेल में राजस्थान द्वारा दिए गए 151 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए मुंबई ने 9 विकेट खोकर केवल 123 रन बनाए। नमन धीर और शेरफन रदरफोर्ड ने समान रूप से सर्वाधिक 25-25 रन बनाए। तिलक वर्मा ने 14 रन जोड़े जबकि अन्य खिलाड़ियों ने डीगिंग अंक में रन नहीं बनाए।

राजस्थान के लिए नान्द्रे बर्गर, रवि विष्णोई और संदीप शर्मा ने 2-2 विकेट लिए जबकि जोफ्रा आर्चर और तुषार देशपांडे ने 1-1 विकेट हासिल किया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने का मौका पाई राजस्थान ने निर्धारित 11 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 150 रन बनाए। ओपनर यशस्वी जैसवाल और वैभव सूर्यवंशी ने शानदार शुरुआत की। जैसवाल 32 गेंदों में नाबाद 79 रन पर रहे, जिसमें 10 चौके और 4 छक्के शामिल थे। वैभव ने 14 गेंदों में 39 रन बनाए और आउट हुए। कप्तान रियान पराग ने 20 रन जोड़े। मुंबई के अलाह गजनफर ने 2 विकेट लिए जबकि शार्दुल ठाकुर ने 1 विकेट। लगातार तीसरी जीत के साथ राजस्थान ने 3 मैचों में 6 अंक लेकर शीर्ष स्थान हासिल किया है। मुंबई ने 3 मैचों में 2 अंक बनाए हैं और वह सातवें स्थान पर है।

ब्रिटेन में पढ़ रहे ४७५ नेपाली छात्रों ने एक वर्ष में शरण की मांग की

२४ चैत, लन्दन। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष ब्रिटेन में शरण का दावा करने वाले नेपालीों की संख्या ४७५ है। २०२५ के दिसंबर अंत तक ब्रिटेन में कुल १ लाख ६२५ लोगों ने शरण का दावा किया था, जिनमें से ४७५ नेपाली हैं। आंकड़ों के मुताबिक, तीन लोग छोटे डिंगा में सवार होकर अवैध रूप से ब्रिटेन पहुँचे और ४७२ ने वहां पहुंचने के बाद शरणार्थी का दावा किया। आवेदकों में ३२८ पुरुष और १४७ महिलाएं हैं। मुख्य आवेदक ४४८ और आश्रित (निर्भर) २७ लोग हैं। आयु वर्ग के अनुसार, १८ वर्ष से कम उम्र के ११, १८ से २९ वर्ष के अंतर्गत ४०६ (८५%), ३० से ४९ वर्ष के ५२ (११%) और ५० से ६९ वर्ष के ६ (१%) लोग शामिल हैं। १८ से २९ वर्ष के आयु वर्ग में ८५ प्रतिशत आवेदक छात्र हैं।

पिछले पाँच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो, २०२० में १०४, २०२१ में १८२, कोविड महामारी के समय २०२२ में सबसे अधिक १२६३, २०२३ में ७०४ और २०२४ में ७१८ लोगों ने ‘असाइलम’ आवेदन किए थे। पिछले वर्ष ब्रिटेन में शरण का दावा करने वालों की संख्या घटी है, लेकिन २०२१ की तुलना में अधिक है। २०२५ दिसंबर तक के आंकड़ों के अनुसार कुल १ लाख ६२५ लोगों ने शरण का दावा किया, जो २०२४ दिसंबर की तुलना में ४ प्रतिशत कम है परन्तु २०१९ दिसंबर के मुकाबले दोगुना है। पिछले वर्ष कुल आवेदकों में १२ हजार ५७८ छात्र थे।

इसी तरह, १३ हजार ५५७ लोग वर्क वीजा पर ब्रिटेन आए थे और ७ हजार ५२१ लोग वीजिट वीजा पर आए थे। पिछले वर्ष शरण का दावा करने वाले शीर्ष १० देशों में पाकिस्तान, इरिट्रिया, ईरान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, सूडान, भारत, सोमालिया, नाइजीरिया और वियतनाम के नागरिक शामिल हैं। सरकार ने पिछले मार्च २ से नया नियम लागू किया है जिसके तहत शरण का दावा करने वालों को स्थायी निवास स्थान नहीं मिलेगा, केवल अस्थायी निवास दिया जाएगा। नए नियम के अनुसार, सभी वयस्क शरणार्थी आवेदकों की हर ३० महीने में समीक्षा की जाएगी।

गोल्डेनगेट र टाइम्सले दोस्रो क्वालिफायर खेल्ने, हाउण्ड्स बाहिरियो – Online Khabar

गोल्डेनगेट और टाइम्स दूसरे क्वालिफायर में आमने-सामने, हाउण्ड्स बाहर

टाइम्स बास्केटबाल क्लब ने केभीसी हाउण्ड्स को ७६-६८ से हराकर एचजेएनबीएल के दूसरे क्वालिफायर में अपनी जगह पक्की कर ली है। गुरुवार को टाइम्स, गोल्डेनगेट बास्केटबाल क्लब के खिलाफ फाइनल के लिए मुकाबला करेगा। टाइम्स के श्रेयस बहादुर थापा ने २३ अंक बनाए, जबकि मनिष केसी को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया।

२४ चैत, काठमाडौं। हिमालयन जावा नेशनल बास्केटबाल लीग (एचजेएनबीएल) २०२६ के अंतर्गत मंगलवार को हुए एलिमिनेटर मैच में टाइम्स बास्केटबाल क्लब ने केभीसी हाउण्ड्स को ७६-६८ से पराजित करते हुए दूसरे क्वालिफायर के लिए अपना स्थान निश्चित किया। त्रिपुरेश्वर के दशरथ रंगशाला कवरहल में हुए इस मुकाबले में टाइम्स ने हाउण्ड्स को हराया।

अब टाइम्स गुरुवार को दूसरे क्वालिफायर में फाइनल में पहुंचने के लिए गोल्डेनगेट बास्केटबाल क्लब से मुकाबला करेगा। पहले क्वालिफायर में त्रिभुवन आर्मी क्लब से हारने वाला गोल्डेनगेट को फाइनल में पहुंचने का दूसरा मौका मिला है। वहीं, हाउण्ड्स इस लीग से बाहर हो चुका है।

मैच के पहले क्वार्टर में टाइम्स ने २४-१८ की बढ़त लेकर मजबूत शुरुआत की। दूसरे क्वार्टर में हाउण्ड्स ने १८-१२ की बढ़त बनाकर हाफटाइम तक स्कोर ३६-३६ की बराबरी पर पहुंचाया। इसके बाद तीसरे क्वार्टर में टाइम्स ने २१-१२ का स्कोर दर्ज कर चौथे क्वार्टर से पहले ५७-४८ की बढ़त ले ली। चौथे और अंतिम क्वार्टर में हाउण्ड्स ने २०-१९ की बढ़त बनाई, लेकिन टाइम्स को जीत से रोक नहीं पाया। लीग चरण में टाइम्स तीसरे और हाउण्ड्स चौथे स्थान पर थे। दोनों टीमों ने लीग में एक-दूसरे के खिलाफ दो मैच खेले, जिनमें एक-एक जीत दोनों के नाम रही।

प्लास्टिक प्रतिबंध पुनः लागू, पातले झोलों के उत्पादन व बिक्री पूरी तरह से रोकी गई

सरकार ने 40 माइक्रोन से पतले प्लास्टिक झोलों के उत्पादन, आयात, बिक्री, वितरण और उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है और इस प्रतिबंध को कड़ाई से लागू करने का आदेश भी दिया है। वाणिज्य, आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने १७ माघ २०७८ को मन्त्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित ‘प्लास्टिक झोला प्रतिबंध संबंधी कार्ययोजना २०७८’ के कार्यान्वयन को जारी रखने की याद दिलाई है।

यह प्रतिबंध १ मंसिर २०८२ से लागू होगा, जिसका उद्देश्य पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करना है। चूंकि बाजार में प्लास्टिक झोलों के उपयोग में पूर्णता नहीं दिखी है, सरकार ने पुनः यह सूचना जारी की है। मंगलवार को जारी इस सार्वजनिक सूचना में 40 माइक्रोन से पतले प्लास्टिक झोलों के उत्पादन, आयात, बिक्री, वितरण और उपयोग पर कड़ी रोक लगाई गई है।

विभाग ने प्रतिबंधित प्लास्टिक झोलों के उत्पादन, आयात, बिक्री, वितरण तथा दैनिक उपयोग में न लाने का पुनः आग्रह संबंधित पक्षों को किया है। प्रारंभ में प्रतिबंध लागू होने के बावजूद बाजार में इनके उपयोग में पूरी रुकावट नहीं देखने को मिली, इसलिए सरकार को पुनः इस सूचना के माध्यम से सभी हितधारकों को सचेत करना पड़ा है।

१ करोड़ ७० लाख पाठ्यपुस्तक छपाई पूरी

जनक शिक्षा सामग्री केंद्र ने नए शैक्षिक सत्र के लिए १ करोड़ ७० लाख पाठ्यपुस्तकें छपाई पूरी कर ली है। सरकार ने १५ वैशाख से शैक्षिक सत्र शुरू करने का निर्णय लेते हुए उस अवधि तक पुस्तकों को विद्यार्थियों तक वितरित करने की योजना बनाई है। केंद्र के प्रबंधक यदुनाथ पौडेल के अनुसार, प्रदेश कार्यालय से १२६० आधिकारिक विक्रेता संबंधित पालिकाओं में पुस्तक वितरण करेंगे। २४ चैत्र, काठमांडू।

यदुनाथ पौडेल ने जानकारी देते हुए कहा, “विद्यार्थी संख्या के आधार पर प्रादेशिक कार्यालय में पर्याप्त पुस्तकें पहुँच चुकी हैं। १४-१५ लाख की दर से पुस्तकों का प्रदेश-प्रशासित रूप से वितरण किया जा चुका है।” उन्होंने यह भी बताया कि २१ फागुन के चुनाव का पाठ्यपुस्तक छपाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। केंद्र कक्षा १, २, और ४ के अलावा अन्य कक्षाओं की पुस्तकें छापता है वहीं इन कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकें निजी क्षेत्र द्वारा छापी जाती हैं। पौडेल ने कहा, “कक्षा संचालन के समय छात्रों के हाथ में पुस्तकें पहुंच जाएंगी। किसी भी प्रकार की कमी नहीं होगी।”

हर्क साम्पाङको पहलमा पुल बन्न लागेको महाकालीमै हो ?

महाकाली नदी पर पुल निर्माण को लेकर हर्क साम्पाङ की पहल की सच्चाई क्या है?

२४ चैत, काठमाडौं। श्रम संस्कृति पार्टी के अध्यक्ष एवं प्रतिनिधि सभा सदस्य हर्क साम्पाङ द्वारा दार्चुला में झोलुङ्गे तुइन के विस्थापन हेतु दान संकलन करने की घोषणा के बाद कई लोगों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अकेला पुल बनाने पर आपत्ति जताई है। दार्चुला से निर्वाचित प्रतिनिधि सभा सदस्य गणेश ठगुन्ना ने साम्पाङ की पहल को ‘स्टंटबाजी और हवा-हवाई बातें’ बताते हुए आलोचना की है। नेपाल सरकार के पूर्व सचिव भीम उपाध्याय ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय नदियों पर पुल निर्माण करते समय कूटनीति, सीमा सुरक्षा तथा भूगोल जैसे विषयों का ध्यान रखना आवश्यक है। उपाध्याय ने फेसबुक पर लिखा, “ऐसे असंभव कार्यों में भी बिना सोचे-समझे दौड़ना, और अन्य लोग भावुक होकर उनका अनुसरण करते देख रहा हूँ।”

मंगलवार को दार्चुला पहुंचकर साम्पाङ ने झोलुङ्गे पुल कि शिलान्यास की है। दार्चुला के प्रमुख जिल्ला अधिकारी अनिल पौडेल ने बताया, “माननीय ने ब्यास गाउँपालिकाको वडा नम्बर २ स्थित दुम्लिङकाठामा पुल शिलान्यास किया है, जो नेपाल-भारत की सीमा नदी नहीं है।” महाकाली नदी में न होकर घट्टे खोलामा पुल बनने की जानकारी ब्यास गाउँपालिका के अध्यक्ष मंगलसिंह धामी ने दी है। ब्यास गाउँपालिका-१ के वडा अध्यक्ष अशोक ब्यासी ने कहा, “स्थानीय भूगोल को न जानने वाले लोग महाकाली नदी पर पुल बनेगा ऐसा गलत अफवाह फैला रहे हैं।”

दार्चुला के सांसद ठगुन्ना ने कहा कि वहां झोलुङ्गे पुल की आवश्यकता जरूर है, लेकिन साम्पाङ अनावश्यक प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “उनका प्रयास सकारात्मक है। देश-विदेश में रह रहे नेपालीजनों को महाकाली नदी में पुल बनाने तथा तुइन विस्थापित करने का आश्वासन देना केवल स्टंटबाजी है।” श्रम संस्कृति पार्टी के महासचिव आरेन राई ने कहा कि दार्चुला के लोगों की सुविधा के लिए स्वैच्छिक सहयोग से झोलुङ्गे पुल बनाने की योजना है। साम्पाङ ने भी अपने किसी राजनीतिक स्वार्थ की बात से इनकार किया। उन्होंने फेसबुक में लिखा, “दार्चुला के पुल के निर्माण में मेरा कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है।”

लगभग १२० मीटर लंबे पुल के निर्माण में अनुमानतः एक करोड़ रुपैयाँ खर्च आने का अनुमान ब्यास गाउँपालिका के निप्तित प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत कृष्णानन्द बडुले दिया है। बडुले बताया कि साम्पाङ ने पुल निर्माण हेतु पालिका से अनुमति भी प्राप्त कर ली है।

इनड्राइभ ने नेपाल के चालक कर्मचारियों को 22 लाख रुपये मूल्य के ईंधन सहायता देने की घोषणा की

इनड्राइभ ने अपने पार्टनर चालकों को 22 लाख रुपये के बराबर ईंधन सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। कंपनी ने बताया कि यह ईंधन सहायता योजना वैशाख २ (15 अप्रैल) से शुरू होगी। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण चालकों की संचालन लागत में वृद्धि हुई है और इसका उनके आय पर प्रभाव पड़ा है, कंपनी ने यह भी कहा।

कंपनी के बयान में कहा गया है, ‘इनड्राइभ का पियर–टू–पियर मॉडल यात्रियों और चालकों दोनों को किराए का निर्धारण सीधे करने की सुविधा देता है। यह वास्तविक बाजार स्थितियों और संचालन लागत को देखकर उचित किराया निर्धारित करने में मदद करता है।’ इस पहल के माध्यम से कंपनी चालकों के आर्थिक दबाव को कम करने और उनकी आय को स्थिर बनाए रखने का लक्ष्य रखती है।

नेपाल में राइड-हेलिंग सेवा के विस्तार ने कई चालकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। यात्री भी सुविधाजनक और किफायती परिवहन सेवा का लाभ उठा रहे हैं। लेकिन हाल ही में ईंधन कीमतों में निरंतर वृद्धि ने चालकों की संचालन लागत बढ़ा दी है, जिसके कारण उनकी दैनिक आय पर सीधे प्रभाव पड़ा है।

कंपनी ने चालकों के समुदाय की चिंताओं और शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए इस क्षेत्र की संरचनात्मक समस्याओं के समाधान के लिए हो रही पहलों का समर्थन किया है।