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लेखक: space4knews

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के ‘नेपाल ने भी भारत की भूमि पर अतिक्रमण किया’ बयान ने कैसे विवाद छेड़ दिया?

बालेन शाह

तस्वीर स्रोत, RSS

प्रकाशित

पढ़ने का समय: 5 मिनट

प्रतिनिधि सभा में विपक्षी दल के सांसदों ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) के “नेपाल ने भी भारत की भूमि पर अतिक्रमण किया है” कहने पर आपत्ति जताई है।

प्रधानमंत्री बालेन ने रविवार को प्रतिनिधि सभा की बैठक में सांसदों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद पर चर्चा की।

नेकपा एमाले की सांसद पद्मा अर्याल ने लिम्पियाधुरा और लिपुलेक से संबंधित प्रश्न उठाए थे।

उन्होंने पूछा, “भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय समझौते के तहत व्यापारिक मार्ग निर्माण का कार्य तेज गति से चल रहा है, ऐसे में नेपाल सरकार की क्या राय है?”

प्रधानमंत्री ने लिपुलेक और लिम्पियाधुरा से संबंधित प्रश्न समझते हुए इसका जवाब दिया।

स्वादिलो मात्रै होइन, स्वास्थ्यका लागि समेत अतिउपयोगी भुइँकटहर

स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक भुइँकटहर

गर्मी के मौसम में शरीर को स्वस्थ और हाइड्रेटेड रखने के लिए ८५ प्रतिशत पानी युक्त भुइँकटहर अत्यंत उपयोगी होता है, यह विशेषज्ञों की राय है। तेज़ गर्मी से शरीर जल्दी डिहाइड्रेट हो सकता है। पूरे देश में तीव्र गर्मी का अनुभव किया जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में स्वास्थ्य के प्रति थोड़ी भी लापरवाही गंभीर प्रभाव डाल सकती है। इसलिए, इस गर्मी के मौसम में अपने आहार का विशेष रूप से ध्यान रखना आवश्यक है।

भुइँकटहर गर्मी के मौसम में प्रायः मिलने वाला एक पसंदीदा फल है। इसका रसिला और स्वादिष्ट स्वरूप कम ही लोगों को न भाता होगा। इसमें अधिक मात्रा में पानी होने के कारण शरीर को हाइड्रेट रखने में यह फल काफी उपयोगी माना जाता है। पकाकर भुइँकटहर को क्रीम करके खाने या इसका जूस बनाकर पीने की प्रथा अधिकतर लोगों को पसंद आती है।

भुइँकटहर के लाभों में ब्रोमेलेन नामक एंजाइम का पाचन तंत्र को मजबूत बनाना, सूजन कम करना और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना प्रमुख हैं। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है, जो त्वचा को चमकदार और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। भुइँकटहर में पाए जाने वाले फाइबर, मैंगनीज और एंटीऑक्सिडेंट शरीर को तरोताजा रखने और विभिन्न रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ाने वाले माने जाते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, भुइँकटहर में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-वायरल गुण प्रचुर मात्रा में होते हैं। यह शरीर में सूजन कम करने और वायरल संक्रमण को रोकने में मदद करता है। विशेष रूप से महिलाओं के लिए यह फल उपयोगी बताया जाता है, क्योंकि इसमें पर्याप्त मात्रा में लोहा होता है, जो मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द और थकान को कम करने में सहायक होता है। भुइँकटहर का जूस पीने से भी मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में राहत मिल सकती है।

रात के अंतिम शब्दों में प्रेम की मौन ध्वनि

समाचार सारांश एआई द्वारा सृजित। संपादकीय समीक्षा की गई। लेखक ने रात की सुनसान घड़ी में अपने भावों को शब्दों में व्यक्त करने का प्रयास करते हुए खाली कागज के सामने बैठा है। कविता में प्रियजन के स्पर्श की गर्माहट, मौन की गहराई, काजल भरे आँखों और मंद मुस्कान का मार्मिक चित्रण किया गया है। प्रेम को शब्दों से परे मौन में तलाशते हुए लेखक ने अपनी भावनाओं को अमर करने की इच्छा व्यक्त की है।

रात फिर धीरे-धीरे पृथ्वी पर उतर रही है। आकाश ने अपनी नीली चमक समेटकर काली रेशमी चादर ओढ़ ली है। शहर की भीड़ अब सो चुकी है, गलियां सुनसान हैं, ज्यों-त्यों बाहर बह रही हवा ने भी अपनी थकावट को मधुर मौन में समर्पित कर दिया है। लेकिन इस सारी शांति के बीच भी मेरे मन में एक आवाज़ जाग रही है, अत्यंत मंद, परंतु गहरी, वह आवाज़ तुम्हारी है!

और उसी क्षण, मुझे जानकारी दिए बिना, मेरी कलम फिर तुम्हारे नाम की ओर बहने लगती है। मैं देर तक खाली कागज को निहारता रहता हूँ। शब्द आते हैं, लेकिन जब तुम्हें लिखने की कोशिश करता हूँ तो वे सब अपने अर्थ खो कर मौन हो जाते हैं। क्योंकि तुम्हें वर्णित करना किसी साधारण प्रेम कथा लिखने जैसा नहीं है, तुम्हें लिखना मतलब अपनी आत्मा के भीतर छिपे अधूरे ब्रह्मांड को धीरे-धीरे उजागर करना है।

मैं सोचता हूँ.. आज तुम्हारे किस रूप को शब्द दूँ? तुम्हारे हाथ की वह गर्माहट लिखूँ? जो पहली बार मेरी ठंडी हुई अस्तित्व पर धूप बनकर चमकी। वह स्पर्श मात्र स्पर्श नहीं था, वह तो थकी हुई आत्मा का पहली बार आश्रय पाना था। पर डर लगता है कि अगर वह गर्माहट लिखी गई तो कहीं ये कागज तुम्हारे प्यार की तपिश सह नहीं पाएगा और आग की तरह जल नहीं जाएगा?

फिर सोचता हूँ तुम्हारे मौन की गहराई लिखूँ? वह मौन, जहाँ शब्द कभी बोले नहीं गए, पर भावनाएँ तो समुद्र की ज्वार-भाटे की तरह लगातार उमड़ती रहीं। वह गहराई भी नापा जाने वाला कोई मापदंड नहीं; वह एक ऐसी अथाह आकाश है, जहाँ एक बार खो जाने के बाद इंसान खुद को वापस नहीं ला सकता।

मैं तुम्हारी आँखों को याद करता हूँ। वे काजल भरी आँखे, जिनमें मैंने अपने सम्पूर्ण अस्तित्व को धीरे-धीरे विलीन होते देखा था। वहाँ मैं कितनी बार खो गया, उसका कोई हिसाब मेरे पास नहीं है, पर इतना ज्ञात है कि एक दिन इस तरह खो जाने के बाद वापस आने की इच्छा भी मेरे भीतर शांति मृत्यु की तरह मरी गई।

फिर तुम्हारी वह मंद मुस्कान याद आती है। वह मुस्कान जो किसी चेहरे की सजावट मात्र नहीं थी, बल्कि मेरे उजड़े हुए मन के रेगिस्तान में अचानक खिल उठा वसंत था। तुम्हारी शर्मीली नज़रें तो सावन की पहली बारिश जैसी थीं—अचानक आने वाली, पर पूरी अंदर की दुनिया को भिगो देने वाली। इससे मेरे मन में वर्षों से जलती पीड़ा पर ठंडक छा गई थी।

शायद इसलिए आज भी मैं प्रेम को शब्दों में नहीं, तुम्हारे मौन में तलाशता हूँ। क्योंकि दुनिया के कई प्रेम होंठों से शुरू होकर समय के साथ खत्म हो जाते हैं। पर तुम, तुम तो मेरी आत्मा में मौन होकर भी अनंत तक बोलती रहने वाली अनुभूति हो।

आज फिर इस सादे कागज के सामने बैठकर मैं अंतिम निर्णय के किनारे खड़ा हूँ। क्या तुम्हारी तस्वीर इन शब्दों में सजा कर अमर बना दूँ? या इस अधूरी कविता को फाड़कर हवा में उड़ा दूँ, जैसे लोग अपने अधूरे सपनों को भूल जाते हैं।

पर मैं नहीं कर सकता। क्योंकि तुम्हें भूलना अपने साँस को भूलने जैसा है। इसलिए अब मैं तुम्हारे स्पर्श की गर्माहट और मौन के नीले आकाश को एक ही शब्द में मिला दूँगा। और उसी शब्द से एक नया ऋतु जन्मेगा, जहाँ प्रेम शब्दों से गहरा होगा, मौन संगीत से मधुर होगा, और भावनाएँ कवि की अंतिम साँस जैसे समय से भी बहुत आगे तक जीवित रहेंगी।

नेपाल टी-२० अन्तर्राष्ट्रीय में दो बार ३०० रन पार करने वाली पहली टीम

नेपाली पुरुष क्रिकेट टीम ने चीन के खिलाफ मुकाबले में २० ओवर में ३१३ रन बनाकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की है। इस मैच में नेपाल ने २९ छक्के लगाकर विश्व के सर्वाधिक छक्के लगाने का रिकॉर्ड बराबर किया है। नेपाली बल्लेबाज कुशल भुर्तेल ने एक ही ओवर में ६ छक्के लगाकर बाउंड्री से सर्वाधिक ११६ रन बनाने का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया है। १७ जेठ, काठमांडू।

नेपाल ने रविवार सुबह एशियन गेम्स क्वालीफायर के तहत चीन के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए २० ओवर में ३१३ रन का बड़ा स्कोर बनाया। इस उपलब्धि के साथ कुछ नए रिकॉर्ड भी कायम हुए हैं। नेपाल टी-२० अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में दो बार ३०० रन से अधिक स्कोर करने वाली पहली टीम बन गई है। इससे पहले नेपाल ने वर्ष २०२३ में एशियन गेम्स के मैच में मंगोलिया के खिलाफ ३१४ रन बनाए थे।

नेपाल ने टी-२०आई में पहली बार ३०० रन पार करने वाली टीम के रूप में भी इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है। जिम्बाब्वे ने गाम्बिया के खिलाफ २०२४ में ३४४ रन बनाकर नेपाल का रिकॉर्ड तोड़ा था। रविवार को नेपाल की टीम ने चीन के खिलाफ २९ छक्के लगाए, जो एक ही इनिंग में सर्वाधिक छक्के लगाने का (साझा) रिकॉर्ड है। कुशल भुर्तेल ने एक ही ओवर में ६ छक्के लगाकर एक दुर्लभ रिकॉर्ड बनाया है।

‘रोल नं १’ हेरेपछि विद्यार्थी भन्छन्- हामीजस्ता विद्यार्थीले हेर्नुपर्ने फिल्म

‘रोल नं १’ देखकर विद्यार्थी कहते हैं – हम जैसे विद्यार्थियों को जरूर देखनी चाहिए यह फिल्म

समाचार सारांश

समीक्षा के बाद तैयार।

  • शैक्षिक प्रणाली और बालमनोविज्ञान पर आधारित नेपाली फिल्म ‘रोल नं १’ शुक्रवार से प्रदर्शित होकर दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त कर रही है।
  • यह फिल्म विद्यमान शैक्षिक प्रणाली और मूल्यांकन पद्धति के कारण बच्चों को होने वाले मानसिक दबाव को मुख्य रूप से उजागर करती है।
  • निर्माता विनोद पौडेल ने कहा कि शिक्षक और अभिभावकों को भी अपने बच्चों के साथ यह फिल्म ज़रूर देखनी चाहिए ताकि वे विद्यार्थियों की मनोस्थिति को बेहतर समझ सकें।

काठमांडू। कथा-आधारित फिल्म ‘रोल नं १’ ने दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया पाई है। शैक्षिक विषय को केंद्र में रखकर बनाई गई यह फिल्म बताती है कि शिक्षण प्रणाली का अभिभावकों और विद्यार्थियों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

निर्माता विनोद पौडेल के अनुसार, फिल्म देखने वाले विद्यार्थियों ने इसे पसंद किया और सभी विद्यार्थियों को यह जरूर देखनी चाहिए। ‘‘हमने जिस उद्देश्य से यह फिल्म बनाई थी, वह पूरा हुआ,’’ पौडेल ने कहा, ‘‘देखने वाले विद्यार्थी इसकी प्रशंसा कर रहे हैं और सभी के लिए आवश्यक बताते हैं।’’

पौडेल ने कहा कि अब यह अभिभावकों की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने बच्चों को लेकर सिनेमाघरों में जाकर ‘रोल नं १’ फिल्म दिखाएं।

फिल्म ने विद्यार्थियों की मनोस्थिति को समझने और पढ़ाई के विषय को लेकर उठाए गए सवालों को उठाया है, इसलिए शिक्षक और अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने विद्यार्थी और बच्चों के साथ यह फिल्म देखें।

पौडेल ने कहा, ‘‘यह फिल्म विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक तीनों के लिए साथ बैठकर देखने योग्य है। यदि विद्यार्थियों को यह पसंद नहीं आई होती तो हम यह सुझाव नहीं देते। आइए, अपने बच्चों को यह फिल्म देखने के लिए लेकर चलें।’’

बालमनोविज्ञान पर केंद्रित इस फिल्म ने वर्तमान नेपाल की शैक्षिक प्रणाली में मूल्यांकन पद्धति के कारण विद्यार्थियों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को प्रमुख विषय बनाया है। गलतफहमियों और दबाव के कारण बच्चों में उत्पन्न मानसिक तनाव को फिल्म ने उजागर किया है, जिसे दर्शकों ने सराहा है।

यह फिल्म शुक्रवार से प्रदर्शित हो रही है। कलाकार दर्शकों से मिलने सिनेमाघरों में जा रहे हैं। कुछ कलाकार मोफसल के सिनेमाघरों में और कुछ काठमांडू में मौजूद हैं। निर्देशक जान येञ्जन द्वारा निर्देशित इस फिल्म में मुकुन भुसाल, सुशांक मैनाली, रेणु योगी, सिर्जना अधिकारी मुख्य भूमिका में हैं। बाल कलाकारों में निर्भिक रेग्मी, रिन्चेन लामा, संयम कटुवाल और सिजल श्रेष्ठ शामिल हैं।

विनोद और जान्वी पौडेल के निर्माता होने के साथ, सह-निर्माता के रूप में छत्रमाया गिरी और रमेश चौलागाईं हैं। पटकथा महेश दवाड़ी द्वारा लिखित है और छायांकन शिवराम श्रेष्ठ द्वारा किया गया है।

सुख्खा भू-स्खलन के कारण खाँदबारी–किमाथाङ्का सड़क पूरी तरह से बंद

सङ्खुवासभा के भोटखोला गाउँपालिका–४ सिरेक में शुक्रवार को सुख्खा भू-स्खलन होने से खाँदबारी–किमाथाङ्का सड़कखंड पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। भू-स्खलन के कारण लगभग १५ मीटर सड़क मलबे में दफ़न हो गई है, जिससे भोटखोला क्षेत्र के स्थानीय निवासी और आवागमन करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन एवं सुरक्षा निकायों के समन्वय में आवश्यक उपकरणों की तैनाती कर सड़क खोलने का प्रयास जारी है, जिससे जिला पुलिस कार्यालय ने जानकारी दी है।

शुक्रवार दोपहर सड़क के ऊपर के खड़ी चट्टानी भाग से बड़ी मात्रा में पत्थर, मिट्टी और मलबा गिरने के कारण उक्त सड़कखंड पर यातायात सेवा पूरी तरह ठप हो गई है। भू-स्खलन के कारण यहां से आवागमन कर रहे यात्री एवं वाहन प्रभावित हुए हैं। जिला प्रहरी कार्यालय के प्रमुख प्रहरी नायब उपरीक्षक कुमारप्रमाद मैनाली ने कहा कि भू-स्खलन की सूचना मिलने के तुरंत बाद पुलिस दल घटनास्थल पर भेजा गया, फिर भी मलबे का गिरना रुक नहीं पाया है, इसलिए सड़क अभी खुल नहीं पाई है।

खाँदबारी–किमाथाङ्का सड़कखंड जिल्ले के उत्तरी क्षेत्र को मुख्यालय से जोड़ने वाला प्रमुख सड़क जाल है। सड़क अवरुद्ध होने से भोटखोला क्षेत्र के स्थानीय लोग, यात्री और आवश्यक वस्तुएं ले जाने वाले मालवाहक वाहन भी प्रभावित हुए हैं। उत्तर–दक्षिण कोशी सड़क योजना के प्रमुख रामबहादुर गुरुङ ने बताया कि हाल के दिनों में सड़क के आसपास की खड़ी पहाड़ी क्षेत्रों में सुख्खा भू-स्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं। कमजोर चट्टान और पत्थर गिरने का जोखिम अभी भी बना हुआ है, इसलिए उन्होंने यात्रा करते समय विशेष सतर्कता बरतने का अनुरोध किया है। योजना कार्यालय, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा निकायों के समन्वय से आवश्यक उपकरण लगाकर मलबा हटाने की तैयारी जारी है।

सशस्त्र प्रहरी जवान सहित दुई जना डडेल्धुरादेखि बेपत्ता

डडेल्धुराको परशुराम नगरपालिका–५ बाट शुक्रबारदेखि सशस्त्र प्रहरी जवानसहित दुई जना बेपत्ता भएका छन्। बेपत्ता भएका व्यक्तिहरूमा सशस्त्र प्रहरी बलमा कार्यरत ओमप्रकाश पुन मगर र स्थानीय ५६ वर्षीय तीर्थबहादुर थापा मगर रहेका छन्। महाकाली नदीको किनारमा उनीहरूले प्रयोग गरेको ट्युब फेला परेपछि, नदीमा बगेको आशङ्का गर्दै खोजी कार्य सुरु गरिएको छ। १७ जेठ, अमरगढी (डडेल्धुरा)।

जिल्ला प्रहरी कार्यालय डडेल्धुराका अनुसार बेपत्ता हुनेमा परिगाउँस्थित सशस्त्र प्रहरी बलको बोर्डर आउट पोस्ट (बिओपी) मा कार्यरत प्रहरी जवान ओमप्रकाश पुन मगर र स्थानीय ५६ वर्षीय तीर्थबहादुर थापा मगर छन्। प्रहरी नायब उपरीक्षक (डीएसपी) बरुणबहादुर सिंहका अनुसार दुवै जना शुक्रबारदेखि सम्पर्कविहीन छन् र उनीहरू मामाघरका सम्बन्धी हुन्। महाकाली नदीको किनारमा उनीहरूले प्रयोग गरेको ट्युब भेटिएपछि नदीमा बगेका हुन् भन्ने आशङ्कामा खोजी सुरु गरिएको उनले जानकारी दिए।

फ्रांस में चैंपियंस लीग उत्सव के दौरान झड़प, 400 से अधिक गिरफ्तार

समाचार सारांश: फ्रांस में पीएसजी ने चैंपियंस लीग जीतने के बाद हुए उत्सव के दौरान समर्थकों और पुलिस के बीच हुई झड़प में चार सौ से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए हैं। पेरिस में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने वाहनों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाया। विजेता खिलाड़ी रविवार को आयोजित होने वाली विजय रैली और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन द्वारा आयोजित स्वागत कार्यक्रम में भाग लेंगे।

17 जून, काठमांडू। फ्रांस में फुटबॉल क्लब पीएसजी ने UEFA चैंपियंस लीग के फाइनल में आर्सेनल को हराने के बाद उत्सव मनाने के दौरान फुटबॉल समर्थकों और पुलिस के बीच हुई झड़प में 400 से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए हैं। राजधानी पेरिस में बस, रेल और अन्य परिवहन सेवाओं में व्यवधान होने के कारण अशांति नियंत्रित करने के लिए हजारों पुलिस कर्मी तैनात किए गए थे। उत्सव के दौरान आतिशबाजी और फ्लेयर जलाए गए जबकि कुछ पुलिस कर्मी भी घायल हुए। शहर के केंद्र भाग में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया।

यह पीएसजी की लगातार एक और सफलता है, लेकिन फुटबॉल से जुड़ी हिंसा लगातार दूसरे वर्ष जारी है। 2025 में फ्रांसीसी टीम की जीत के बाद भी हिंसक उत्सव देखने को मिला था। पेरिस से जारी वीडियो में सड़कों पर फ्लेयर जलाते हुए, इलेक्ट्रिक स्कूटर जलते हुए और कम से कम एक दुकान की शीशे टूटती हुई दिखाई दे रही है। फ्रांसीसी टीम ने पेनाल्टी शूटआउट में जीत हासिल की, जिसके बाद चैंप्स एलिसीस क्षेत्र में समर्थकों की भारी भीड़ जुटी। समर्थक पीएसजी के घरेलू मैदान पार्क डे प्रिंस में बड़े पर्दों पर फाइनल लाइव देखने गए थे, जहां भी पुलिस से झड़प हुई। पुलिस के अनुसार, अशांति के दौरान 6 वाहन, 2 व्यावसायिक प्रतिष्ठान और एक बस स्टॉप को नुकसान पहुंचा है।

फ्रांस के गृह मंत्रालय ने रविवार सुबह तक 416 गिरफ्तारियों की पुष्टि की है, जिनमें से 280 पेरिस के निवासी हैं। पीएसजी के खिलाड़ी रविवार दोपहर विजय रैली में भाग लेंगे। वे एफिल टावर के पास से परिक्रमा करेंगे और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन द्वारा आयोजित स्वागत समारोह में शामिल होंगे।

इबोला: कांगो में फैल रहे प्रकोप की स्थिति ‘बेहद चिंताजनक’ – चेतावनी

इबोला

तस्बिर स्रोत, Anadolu via Getty Images

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में तेजी से फैल रहे इबोला प्रकोप ने चिकित्सा संस्था मेडिसिन्स सॉ फ्रंटियर्स (एमएसएफ) को ‘बेहद चिंताजनक’ स्थिति की चेतावनी दी है।

प्रकोप की घोषणा के दो सप्ताह के भीतर एमएसएफ के उप निदेशक डॉ. एलन गोंसालिस ने बताया कि इतनी तेजी से फैलने और अत्यधिक संख्या में मामलों का अनुभव पहले कभी नहीं हुआ था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख डॉ. टेड्रोस अधानम गेब्रेयसस ने पूर्वी कांगो के इटुरी प्रांत का दौरा करते हुए इस स्थिति पर यह टिप्पणी की है।

अब तक कांगो में एक हजार से अधिक इबोला से जुड़े संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें कम से कम 246 लोगों की मौत हो चुकी है।

पड़ोसी देश युगांडा में भी नौ पुष्ट मामले और एक व्यक्ति की मृत्यु दर्ज की गई है।

संसद्‌मा प्रधानमन्त्रीको सम्बोधन (लाइभ) – Online Khabar

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में किया संबोधन शुरू

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने प्रतिनिधि सभा की बैठक में अपना संबोधन शुरू कर दिया है। १७ जेठ, काठमांडू। प्रधानमंत्री शाह पर विपक्षी दलों ने संसद की बैठक में उपस्थित होकर भी कोई जवाब न देने की आलोचना की थी। इसी बीच, प्रधानमंत्री शाह रविवार की बैठक में उपस्थित हुए हैं। वे वर्तमान में रोस्ट्रम पर मौजूद हैं।

दाम्पत्य जीवन में असंतोष के कारण

नेपाल के अदालतों में दर्ज किए गए मामलों में सबसे अधिक समस्या संबंध विच्छेद से जुड़ी होती हैं। नेपाली समाज में पारिवारिक विघटन और दाम्पत्य संबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। पति-पत्नी के बीच की आत्मीयता कम होने से वैवाहिक संस्थाओं का भावनात्मक आधार कमजोर होता जा रहा है। प्रसिद्ध भारतीय लेखिका अरुंधति रॉय ने अपनी उपन्यास ‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ में पूर्वाग्रहों के कारण मानव अंतर्मन की भावनाओं को कैसे सीमित किया जाता है, इसका मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया है। यह उपन्यास सन् 1997 का विश्वप्रसिद्ध बुकर पुरस्कार विजेता है।

‘प्रेम के नियमों’ की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा है– जातीय, धार्मिक और सामाजिक वर्ग की अवधारणाओं ने सदियों से मनुष्य को अपनी आत्मिक अनुभूति के आधार पर स्वतंत्र प्रेमी या जीवनसाथी चुनने के अधिकार से वंचित किया है। जाति, धर्म और वर्ग के अनुसार प्रेम करने या न करने के विषय में सीमाएं निर्धारित की गई हैं। अन्तरजातीय, धार्मिक और सामाजिक प्रतिष्ठा के असमान संबंधों को समाज अस्वीकार करता है और अपने परंपरागत नियमों के माध्यम से प्रतिबंधित करता है। नतीजतन, संबंध आत्मीय नहीं रहकर समझौते तक सीमित हो जाते हैं, जहां भले ही लोग जुड़ जाते हैं, पर मन जुड़ता नहीं।

‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ तत्कालीन दक्षिण भारतीय सामाजिक पृष्ठभूमि में लिखा गया उपन्यास है, लेकिन इसने पूरे भारतभर की कठोर परंपरागत मान्यताओं के माझ समाज के कई लोगों के अभिशप्त जीवन का चित्रण किया है। इसे देखकर हमें नेपाली समाज में भी बहुत अंतर नजर नहीं आता। हमारी चेतना भी लगभग उसी क्षेत्र में सीमित है और पर्याप्त परिवर्तन नहीं आया है। उपन्यास के प्रकाशित हुए तीन दशक बीत जाने के बाद भी सामाजिक मान्यताएं समय के अनुसार विकल्पित नहीं हुई हैं। प्रेम की स्वतःस्फूर्त आकांक्षाएं अभी भी पूरी तरह से पूरी नहीं हुई हैं और सामाजिक नियमों के दायरे में बनी हुई हैं।

सफल दाम्पत्य जीवन केवल दंपतियों के लिए ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े अन्य जीवनों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। संबंध टूटने से बेहतर है वे जुड़ें। इस लेख में प्रतिबंधित वर्गों का सम्मान करते हुए, नेपाली समकालीन समाज में दाम्पत्य संबंधों के कुछ संकट और कारणों का विश्लेषण किया गया है। नेपाल की वैवाहिक संस्कृति प्राचीन काल से मुख्य रूप से मांग विवाह पर आधारित रही है, परंतु अब प्रेम या अपनी इच्छा से विवाह और ‘लिविंग टुगेदर’ की अवधारणाएं भी धीरे-धीरे स्थान पा रही हैं। ऐसी परिवर्तनशील सामाजिक परिस्थितियां असामान्य नहीं हैं और इन्हें स्वीकार करना आवश्यक है।

वैवाहिक संबंध जोड़ना अनेक लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन उस संबंध में जीवन कितना सुखद और सहयात्रा कैसी आत्मीय है, यह अधिक महत्वपूर्ण है। इसे गहराई से ही समझा जा सकता है। कोई भी दंपती मुस्कुराते हुए जीवन बिताते हुए भी अक्सर अपने संबंध की समस्याओं को छुपाने को मजबूर होता है। क्यों हाल के वैवाहिक संबंध कर्मकांड आधारित हो रहे हैं और दाम्पत्य जीवन में दरारें बढ़ रही हैं, इस पर लेख केंद्रित है।

मानवीय सुख अनुभूति का विषय है। इसे समझने के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिवेश की जानकारी जरूरी है। नेपाल में शहरी और ग्रामीण समाज के बीच परिस्थितियों का भेद जीवन के अनुभवों में अंतर पैदा करता है। शहरी समाज आर्थिक रूप से सशक्त और तुलनात्मक रूप से उदार है, जबकि ग्रामीण समाज अब भी अंधविश्वास, भेदभाव और गरीबी से संघर्षरत है। इसीलिए मानवीय अनुभवों में फर्क है, पर प्रेम, ममता और आत्मीयता जैसी दाम्पत्य जीवन की मूलभूत इच्छाओं में बड़ा भेद नहीं है।

पिछले वर्षों में नेपाल में विदेश रोजगार एक प्रमुख चुनौती के रूप में उभरा है। इससे कई परिवार टूटे हैं फिर भी इससे उन्हें जीवित रहने का आधार मिला है। लेकिन इसने पीड़ा और तनाव को गहरा कर दिया है। कई दंपति महीनों-दिन साथ नहीं रह पाते हैं और बिना किसी आत्मीयता के विदेश जाने को मजबूर होते हैं। नतीजतन, संबंध कमजोर हो जाते हैं और परिवारों में विवाद उत्पन्न होते हैं।

इसके अतिरिक्त, गरीब समाज की कहानी और व्यथा गंभीर है, जबकि तुलनात्मक रूप से जागरूक समाज भी लैंगिक असंतुलन के संकट से जूझ रहा है। नारी जागरण अपनी पहचान की खोज में है, लेकिन पितृसत्ता इसे स्वीकार नहीं कर पा रही है। इस द्वंद्व ने वैवाहिक संबंधों में तनाव उत्पन्न किया है। पति-पत्नी के बीच सम्मान और भूमिका जटिल होते जा रहे हैं, जिससे संवाद और समझदारी कमजोर पड़ रही है।

डिजिटल तकनीक और सामाजिक मीडिया के विकास ने विश्वव्यापी मानवीय संबंधों को बदल दिया है, लेकिन इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी सामने आए हैं, जैसे अधिक व्यक्तिवाद और उपभोक्तावाद, जिससे आर्थिक तनाव बढ़ा है। सामाजिक और नैतिक मूल्यों का क्षरण हो चुका है। लोग ‘विशेष’ दिखना चाहते हैं, ‘ब्रांड’ बनना चाहते हैं और अपने मूल्य पर डटे रहने की प्रवृत्ति दिखाते हैं। दाम्पत्य मिलन का आकर्षण घट रहा है, विवाह के बाहर संबंध बढ़ रहे हैं और दाम्पत्य संबंध बोझ जैसे प्रतीत होने लगे हैं।

इसी प्रकार, सोशल नेटवर्क का अत्यधिक प्रयोग दाम्पत्य संस्थाओं के भावनात्मक आधार को कमजोर कर रहा है। जीवनसाथी के साथ आत्मीयता, संवाद और भविष्य की साझी अभिलाषाएं गायब हो रही हैं। कई दंपति सोशल मीडिया पर ‘ब्लॉक’ करना, गलत प्रशंसा लेना जैसी विकृतियां भी दिखाते हैं, जो व्यावहारिक संबंधों को औपचारिकता में सीमित कर देती हैं।

यह समस्या केवल भावनात्मक ही नहीं है, नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय के आर्थिक वर्ष 2081/82 की वार्षिक रिपोर्ट भी पुष्टि करती है कि संबंध विच्छेद के मामले सबसे अधिक हैं। 4,739 मामलों में से 33,050 फर्यादें निपट चुकी हैं। ये आंकड़े हमारे समाज की गंभीर स्थिति की तस्वीर पेश करते हैं।

दाम्पत्य संबंध जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। जोड़ना आसान है, पर जतन करना कठिन। खराब परिस्थितियां दिखें तो भी दोष केवल दंपतियों पर ही नहीं आता। देश और समाज को समयानुसार नीति व तकनीकी उपाय लागू करके न्यायोचित राज्य निर्माण का दायित्व लेना चाहिए। साथ ही हमें अपने संबंधों के मधुर पक्ष को बचाने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। सुखमय दाम्पत्य जीवन के लिए संयम, विवेक और जागरूकता आवश्यक है। अधिकारों के साथ-साथ संबंधों की जिम्मेदारियों और सीमाओं के प्रति सजगता जरूरी है। संबंध के प्रति निष्ठा और जीवन के सत्य पालन से ही अँधकार दूर हो सकता है।

हमें ‘वर्चुअल’ दुनिया के चमक-दमक से बाहर आकर अपने परिवार में संवाद बढ़ाना होगा, पारस्परिक सम्मान और स्व-अनुशासन को अपनाना होगा। करुणा, क्षमा और आत्म-स्वीकृति से समस्याएं हल हो सकती हैं। विश्वप्रसिद्ध लेखक अर्नेस्ट हेमिंग्वे ने कहा है, ‘दुनिया बहुतों को तोड़ती है लेकिन बहुत से वहीं से मजबूत होकर निकलते हैं।’ मैं इस बात से सहमत हूं, लेकिन इसके लिए जागरूक दृष्टि, विवेक और आत्मावलोकन आवश्यक है।

किस दाम्पत्य जीवन में असंतोष है?

समाचार सारांश

  • नेपाल की अदालतों में दर्ज मामलों में सबसे अधिक शिकायत सम्बन्ध विच्छेद से संबंधित हैं।
  • नेपाली समाज में पारिवारिक विखंडन और दाम्पत्य संबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
  • दम्पतियों के बीच की आत्मीयता घटने से वैवाहिक संस्थाओं का भावनात्मक आधार कमजोर होता जा रहा है।

प्रसिद्ध भारतीय लेखिका अरुंधती रॉय ने अपनी उपन्यास ‘द गॉड ऑफ स्माल थिंग्स’ में पूर्वाग्रहों द्वारा मनुष्य के अंतरमन की भावनाओं को कैसे सीमित किया जाता है, इसका मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया है। यह 1997 का विश्वप्रसिद्ध बुकर पुरस्कार विजेता उपन्यास है।

‘प्रेम के नियमों’ की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा– जातीय, धार्मिक और वर्गीय अवधारणाएं मानव को सदियों से आत्मिक अनुभूतियों के आधार पर स्वतंत्र प्रेमी या जीवनसाथी चुनने के अधिकार से वंचित करती आई हैं।

जाति, धर्म और वर्ग के अनुसार प्रेम करने या न करने की सीमाएं निर्धारित की गई हैं। अंतरजातीय, धार्मिक और असमान प्रतिष्ठा के संबंधों को समाज अस्वीकार करता है तथा अपने पारंपरिक नियमों द्वारा प्रतिबंधित करता है। परिणामस्वरूप, संबंध आत्मीयता की बजाय समझौते तक सीमित रह जाते हैं, जहाँ लोग जुड़े होते हैं लेकिन दिल नहीं जुड़ते।

‘द गॉड ऑफ स्माल थिंग्स’ तत्कालीन दक्षिण भारतीय सामाजिक पृष्ठभूमि में लिखा गया था, और यह भारत भर के कठोर पारंपरिक मान्यताओं के अधीन रहे समाज के कई लोगों की अभिशप्त जिंदगी को दर्शाता है।

इसे देखते हुए, हम नेपाली समाज में भी कुछ विशेष अंतर नहीं पाते। हमारी चेतना भी लगभग उसी भौगोलिक दायरे में सीमित है और परिवर्तन अत्यधिक नहीं हुआ है।

तीन दशकों बाद भी सामाजिक मान्यताएं समय के साथ मेल नहीं खाती हैं। प्रेम की जन्मजात आकांक्षाएं पूरी तरह से पूरी नहीं हो पाईं हैं और सामाजिक नियमों में सीमित हैं।

सफल दाम्पत्य जीवन केवल दम्पतियों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके जुड़े अन्य जीवनों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। संबंध टूटने की बजाय जुड़ा होना बेहतर है।

इस लेख में इन प्रतिबंधित वर्गों के प्रति सम्मान दर्शाते हुए, नेपाली समकालीन समाज के दाम्पत्य संबंधों की कुछ समस्याओं और कारणों का विश्लेषण किया गया है।

नेपाल की वैवाहिक संस्कृति प्राचीन काल से मांग विवाह पर आधारित रही है, परन्तु अब प्रेम विवाह या अपनी इच्छा से विवाह और ‘लिविंग टुगेदर’ जैसे विचार भी जगह पाने लगे हैं। ऐसे परिवर्तन गतिशील समाज में स्वाभाविक हैं और इन्हें स्वीकार करना आवश्यक है।

वैवाहिक सम्बन्ध में जुड़ना कई लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है, पर उस संबंध में जीवन कितना सुखद और सहयात्रा कितनी आत्मीय है, यह अधिक महत्वपूर्ण है। यह गहरा स्तर पर ही समझा जा सकता है।

कोई भी दंपती जीवन में हँसते हुए भी अक्सर अपने संबंधों की समस्याओं को छुपाने के लिए बाध्य होता है। क्यों हाल की वैवाहिक संबंध कर्मकांडी होते जा रहे हैं और दाम्पत्य जीवन में दरारें बढ़ रही हैं, इस विषय पर यह लेख केंद्रित है।

मानवीय सुख अनुभूति का विषय है, जिसे समझने के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिवेश को समझना जरूरी होता है। नेपाल में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की भिन्न परिस्थितियों ने जीवन के अनुभव अलग कर दिए हैं।

शहरी समाज आर्थिक रूप से मजबूत और अपेक्षाकृत उदार है, जबकि ग्रामीण समाज अभी भी अंधविश्वास, भेदभाव और गरीबी से जूझ रहा है। इस कारण लोगों के जीवन अनुभवों में फर्क है।

लेकिन प्रेम, ममता और आत्मीयता दाम्पत्य जीवन के मूलभूत इच्छाओं में अधिक अंतर नहीं पाया जाता।

हाल के वर्षों में नेपाल में वैदेशिक रोजगार एक प्रमुख चुनौती बनकर उभरा है। इससे कई परिवार टूटे हैं, फिर भी इससे उन परिवारों को जीने का आधार मिला है। परन्तु यह पीड़ा और तनाव को भी गहरा करता है।

कई दंपतियों को महीनों तक एक साथ रहने का अवसर नहीं मिलता और वे बिना आत्मीयता के विदेश जाने पर मजबूर होते हैं। परिणामस्वरूप संबंध कमजोर होते हैं और परिवारों में विवाद बढ़ते हैं।

इसके अलावा, गरीब समाज की कहानी और भी गंभीर है, वहीं समर्पित सोच वाले समाज लैंगिक संतुलन संकट से जूझ रहे हैं। नारी जागरण अपनी पहचान खोज रही है, लेकिन पितृसत्ता इसे स्वीकार नहीं करती।

यह द्वंद्व वैवाहिक संबंधों में तनाव उत्पन्न करता है। पति-पत्नी के बीच आत्म-सम्मान और भूमिका की उलझनें बढ़ रही हैं, जिससे संवाद और समझदारी कमजोर हो रही है।

डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया ने वैश्विक मानवीय संबंधों को बदल दिया है, पर इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी देखे गए हैं जैसे अधिक व्यक्तिवाद और उपभोक्तावाद, जो आर्थिक तनाव बढ़ाते हैं।

सामाजिक और नैतिक मूल्य कमजोर हो चुके हैं। लोग ‘विशेष’ दिखने, ‘ब्रांड’ बनने की चाह रखते हैं और मूल्य होते हुए भी पीछे नहीं हटते। दाम्पत्य मिलन में रुचि कम हो रही है, विवाह के अलावा संबंध बढ़ रहे हैं और दाम्पत्य संबंध बोझ बनते जा रहे हैं।

इस तरह से सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग दाम्पत्य संस्थाओं के भावनात्मक आधार को कमजोर कर रहा है। जीवनसाथी के साथ आत्मीयता, संवाद और भविष्य के सपने धीरे-धीरे मिटते जा रहे हैं।

कई दम्पति सोशल मीडिया पर ‘ब्लॉक’ करने, गलत प्रशंसा पाने जैसी विकृतियां भी दिखाते हैं, जिससे वास्तविक संबंध केवल औपचारिक रह जाते हैं।

यह समस्या सिर्फ भावनात्मक नहीं है, नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय की आर्थिक वर्ष 2081/082 की वार्षिक रिपोर्ट से भी पुष्टि होती है कि संबंधविच्छेद के मामले सबसे अधिक हैं। 4,739 मामलों में से 33,050 मामले निस्तारित हो चुके हैं। ये आँकड़े हमारे समाज की गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं।

दाम्पत्य संबंध जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। जुड़ना आसान है पर इसे बनाए रखना मुश्किल। खराब स्थिति दिखाई देती है तो भी सभी दोष केवल दंपतियों पर नहीं डाले जा सकते।

देश और समाज को समयानुकूल नीति और तकनीक लागू कर न्यायसंगत राज्य निर्माण की जिम्मेदारी उठानी होगी। पर हमें अपने संबंधों की मधुरता बनाए रखने का दायित्व भी निभाना होगा। सुखद दाम्पत्य जीवन के लिए संयम, विवेक और जागरूकता आवश्यक हैं।

अधिकारों के साथ-साथ संबंधों की जिम्मेदारी और सीमाओं के प्रति भी सजग होना जरूरी है। संबंधों के प्रति निष्ठा और जीवन के सत्यपालन से अंधकार दूर किया जा सकता है।

हमें ‘वर्चुअल’ दुनिया की चमक से बाहर आकर अपने परिवार में संवाद बढ़ाना चाहिए, पारस्परिक सम्मान और आत्म अनुशासन को अपनाना चाहिए। करुणा, क्षमा और आत्म स्वीकृति से ही समस्याएं हल होती हैं।

विश्वप्रसिद्ध लेखक अर्नेस्ट हेमिंग्वे ने कहा है, ‘दुनिया बहुतों को तोड़ती है लेकिन बहुत से वहीं से मजबूत होकर निकलते हैं।’

मैं इस बात से सहमत हूं, पर इसके लिए चैतन्य दृष्टि, विवेक और आत्ममंथन आवश्यक है।

विद्यालय कर्मचारीहरूको सेवासुविधा सुधारको माँग अघि बढाई

नेपाल विद्यालय कर्मचारी परिषदले आगामी आर्थिक वर्षको बजेटमा विद्यालय कर्मचारीहरूको सेवासुविधा र स्थायित्व सुनिश्चित गर्ने माग सरकारसँग राखेको छ। परिषदका अनुसार देशभरि २७ हजार १० विद्यालयहरूमा ३० हजार ३४६ कर्मचारीहरू कार्यरत छन्। बजेट पारित हुनु अघि नै कर्मचारीहरूको तलब व्यवस्था र सामाजिक सुरक्षासँग सम्बन्धित विषयहरूमा स्पष्टता प्रदान गर्न परिषदले अनुरोध गरेको छ। १७ जेठ, काठमाडौं।

नेपाल विद्यालय कर्मचारी परिषदले आगामी आर्थिक वर्षको बजेटमा आफ्ना सेवासुविधा थप वृद्धिको विषयलाई पुनः विचार गराउन सरकारलाई माग गरेको छ। परिषदले आज जारी गरेको विज्ञप्तिमा सामुदायिक विद्यालयमा कार्यरत कर्मचारीहरूको तलब, स्थायित्व र सामाजिक सुरक्षामा स्पष्टता आवश्यक रहेको उल्लेख गरिएको छ। परिषदका अध्यक्ष गङ्गाराम तिवारी र महासचिव शान्तिराम योगीद्वारा जारी विज्ञप्तिमा शिक्षा मन्त्रालय, अर्थ मन्त्रालय, विभिन्न राजनीतिक दलका नेतृत्व, सम्बन्धित मन्त्री तथा सरकारका उच्च पदाधिकारीहरूसँग पटक–पटक भेटघाट र छलफल गरी माग राख्दा पनि यसमा कुनै समाधान नखोजिएको जनाइएको छ।

बजेटमाथि छलफल र पारित हुने प्रक्रियामा विद्यालय कर्मचारीहरूको तलबमान, स्थायित्व, सामाजिक सुरक्षा र सेवासुविधासम्बन्धी मागहरूलाई स्पष्टरूपमा सम्बोधन गर्न परिषदले आग्रह गरेको छ। हाल देशभरका २७ हजार १० विद्यालयहरूमा कुल ३० हजार ३४६ विद्यालय कर्मचारीहरू कार्यरत छन्। तीमध्ये ७ हजार ६२३ विद्यालय सहायक र २२ हजार ७२३ विद्यालय सहयोगी कर्मचारी रहेको परिषदले जानकारी दिएको छ।

नेपाली महिला क्रिकेट टीम एशियाई खेलों के चयन में नाकाम

समाचार सारांश

समीक्षा गरिएको छ।

  • नेपाली महिला क्रिकेट टीम चीन के खिलाफ 5 विकेट से हारकर एशियाई खेलों के चयन में नाकाम रही।
  • बारिश के कारण 7 ओवरों में संक्षिप्त किए गए मैच में नेपाल द्वारा दिया गया लक्ष्य पूरा करते हुए चीन ने आखिरी गेंद पर रोमांचक जीत हासिल की।
  • नेपाल को हराने वाली चीन और दूसरी सेमीफाइनल जीतने वाली थाईलैंड ने एशियाई खेलों के लिए चयन हासिल किया है।

16 जेठ, काठमांडू। नेपाली महिला क्रिकेट टीम एशिय Asian Games के लिए चयन में असफल रही।

रविवार को तीसरे स्थान के मैच में चीन के खिलाफ हार के बाद नेपाल का चयन सफल नहीं हो पाया। बारिश के कारण मैच 7 ओवर में सीमित किया गया था, जिसमें चीन ने नेपाल को 5 विकेट से पराजित किया।

परिवर्तित लक्ष्य 43 रन को चीन ने 7 ओवरों में पूरा किया। अंतिम गेंद पर 2 रन चाहिए थे, जिसे चौके के जरिए चीन ने मैच जीत लिया। इससे पहले चीन ने अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन नेपाल ने बीच के ओवरों में शानदार वापसी भी की।

पहले ओवर में चीन ने 16 रन जोड़े थे। दूसरे ओवर में 7 रन जोड़कर स्थिति 23-0 हो गई थी। तीसरे ओवर में रिया शर्माने दो विकेट लेकर खेल नेपाल के पक्ष में मोड़ा। एक रन आउट विकेट भी हुआ।

चौथे ओवर में कविता कुवंर ने 3 रन दिए और एक विकेट लिया। पांचवें ओवर में रिया शर्मा ने मात्र 3 रन दिए। छठे ओवर में मनिषा उपाध्याय ने 6 रन दिए। अंतिम ओवर में चीन को 7 रन चाहिए थे।

सीता ने पहली गेंद डॉट रखी और दूसरी गेंद पर 1 रन दिया। तीसरी और चौथी गेंद पर 1-1 रन मिला। पांचवीं गेंद पर वाइड और स्टम्प आउट ने चीन को 2 गेंदों में 3 रन चाहिए बना दिए। इसके बाद चीन ने आखिरी गेंद पर चौका मारा।

पहले टॉस हारकर बल्लेबाजी करने आई नेपाल ने 7 ओवर में 5 विकेट खोकर 50 रन बनाए। कविता कुवंर ने 22 रन नाबाद बनाए जबकि कप्तान इंदु बर्मा ने 11 रन जोड़े।

इससे पहले शनिवार को हुए सेमीफाइनल में नेपाल मलेशिया से हार गया था। दूसरी सेमीफाइनल में थाईलैंड ने चीन को हराकर एशियाई खेलों में जगह पक्की की।

नेपाल को हराने वाली चीन भी एशियाई खेलों के लिए चयनित हो गई है।

अपांगता भएका व्यक्तिलाई अनिवार्य उम्मेदवार बनाउनुपर्ने व्यवस्था प्रस्ताव

अपांगता भएका व्यक्तिलाई अनिवार्य रूपमा उम्मेदवार बनाउने व्यवस्था प्रस्तावित

१७ जेठ, काठमाडौं। प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन (पहिलो संशोधन) विधेयकमा तीनवटा संशोधन प्रस्तावहरू प्रस्तुत गरिएको छ। यो विधेयक प्रतिनिधि सभाबाट पारित भई राष्ट्रिय सभामा पुगेको छ। राष्ट्रिय सभामा तीनवटा संशोधन प्रस्तावहरू राखिएका छन्। सांसदहरूले अपांगता भएका व्यक्तिलाई अनिवार्य रूपमा उम्मेदवार बनाउनु पर्ने व्यवस्था प्रस्ताव गरेका छन्।

सांसद सुरेश कुमार आले मगर लगायतले निर्वाचनमा राजनीतिक दलहरूले उम्मेदवारी दिँदा अपांगता भएका व्यक्तिहरूको प्रतिनिधित्व सुनिश्चित गर्ने व्यवस्था गर्नुपर्ने प्रस्ताव अघि प्रस्तुत गरेका छन्। सांसद पदम बहादुर परियार लगायतले उम्मेदवारको बन्द सूचीका लागि समावेशी आधारमा तालिका पछि निर्धारण गर्नुपर्ने बताएका छन्। यसअन्तर्गत राजनीतिक दलहरूले उम्मेदवारी दिँदा अपांगता भएका व्यक्तिहरूको समेत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित गर्नुपर्ने व्यवस्था गरिनुपर्ने भनिएको छ।

त्यस्तै, तराई दलितहरूलाई पनि सम्बोधन गरिनुपर्ने प्रस्ताव पनि राखिएको छ। सांसद खम्म बहादुर खाती लगायतले पनि उम्मेदवारको बन्द सूचीका लागि समावेशी आधारको स्पष्टता आवश्यक हुने प्रस्ताव राखेका छन्।