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लेखक: space4knews

अमेरिका कैसे खुद बनायी गई ‘भयावह स्थिति’ में फंसा?

मध्य पूर्व में जारी द्वंद्व के कारण अमेरिका ऐतिहासिक रणनीतिक हार के करीब पहुंच चुका है, ऐसा विश्लेषकों का कहना है। ईरान स्ट्रेट ऑफ हर्मुज पर अपने वर्चस्व को कायम रखते हुए अमेरिकी दबाव और संभावित सैन्य कार्रवाई का सामना करने की तैयारी कर रहा है। खाड़ी के देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए तेहरान के साथ द्विपक्षीय वार्ता को आगे बढ़ाने के साथ-साथ रक्षात्मक गठबंधन की नींव रखी है। २१ सावन, काठमांडू।

मध्य पूर्व के विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका ऐतिहासिक ‘रणनीतिक हार’ के बहुत करीब है। अमेरिका ने इज़राइल के उकसावे पर ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था, और यह युद्ध अब पांच महीने से अधिक समय से जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार धमकियाँ देते हुए भी समझौते की उम्मीद जताते रहे हैं, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ हर्मुज पर अपने नए वर्चस्व को छोड़ने वाला नहीं है।

स्ट्रेट ऑफ हर्मुज पर नियंत्रण छोड़ना विश्व अर्थव्यवस्था से पकड़ खोने जैसा होगा। सैन्य रूप से संभव न होने वाले इस युद्ध में ईरान के लिए यही सबसे बड़ा हथियार है। ईरान ने अमेरिकी प्रशासन के साथ १७ जून को हुए समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) की समाप्ति का संकेत दिया है, इसलिए वह ट्रंप प्रशासन की संभावित सैन्य कार्रवाई को सहने के लिए तैयार है। ईरान ने आत्मसमर्पण नहीं किया है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और उनके ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ सहयोगियों ने द्वंद्व को और बढ़ावा दिया है।

सऊदी अरब, जॉर्डन और मिस्र अब ईरान के निशाने पर हैं। अगला लक्ष्य सीरिया हो सकता है। बुधवार देर शाम ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बघाई ने बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने ओमान के साथ जलमार्ग पुनः खोलने की वार्ता को ‘दूरदर्शी’ बताया है। उन्होंने कहा कि ‘यदि कोई तीसरा पक्ष इस प्रक्रिया में बाधा न डाले तो’ समझौता संभव होगा।

वाशिंगटन की जोखिम सलाहकार संस्था, गल्फ स्टेट एनालिटिक्स के सीईओ जॉर्जियो क्याफिएरो के अनुसार ट्रंप प्रशासन ‘खुद बनायी गई अत्यंत कठिन स्थिति’ में फंस चुका है। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन के सामने दो विकल्प हैं – पहला, अमेरिका उस युद्ध को जारी रखे जो जीतना संभव नहीं है, और दूसरा, राष्ट्रपति ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान होने के बावजूद कूटनीतिक समझौता स्वीकार करना।

इबिस के अनुसार यह अमेरिकी वैश्विक शक्ति के पतन का पहला बड़ा कदम होगा। १९५६ में ब्रिटेन और फ्रांस ने इज़राइल के साथ मिलकर सुएज नहर पर नियंत्रण किया था, जिसके बाद उनकी एतिहासिक गिरावट शुरू हुई थी। अमेरिका की भी स्थिति ऐसी ही होगी। इबिस ने कहा है कि युद्ध बढ़ाने से ‘ईरान के खिलाफ अनिश्चितकालीन और आक्रामक घेराबंदी की नई संरचना’ बनेगी।

मध्य पूर्व में इस तरह के द्वंद्व की बुनियाद तैयार हो रही है। इराक क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है। वर्तमान में इराक, सऊदी अरब और जॉर्डन के खिलाफ ड्रोन और मिसाइल हमलों का केंद्र बना हुआ है। ये हमले लड़ाकू समूह कर रहे हैं जो कागज पर इराकी सेना के हिस्से हैं, लेकिन उन्हें ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से हथियार और नेतृत्व प्राप्त है।

सऊदी अरब ने अपनी तटस्थ नीति छोड़ दी है। उसने २९ जुलाई को अपनी ऊर्जा अवसंरचना पर हुए ड्रोन हमले का जवाब दिया है। उसने अमेरिका के साथ मिलकर इराक में ईरान समर्थक लड़ाकू समूहों के खिलाफ संयुक्त हवाई हमले किए हैं। ईरान और उसके ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ सहयोगी अपनी रणनीति लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

इससे ईरान की ‘बहुत सस्ती लेकिन बेहद प्रभावी’ ड्रोन तकनीक के सामना करने में मदद मिलेगी। ईरान इन देशों को युद्ध में अमेरिका के सहयोगी के रूप में देखता है। सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने रविवार को हस्तक्षेप कर ट्रंप को तेहरान के खिलाफ तनाव बढ़ाने से रोकने की कोशिश की थी।

इबिस के अनुसार जीसीसी देशों ने एक बात समझ ली है कि ईरान उनके खिलाफ हमला करके विश्व अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा है। वह ‘किसी भी कीमत पर युद्ध समाप्त करने’ के लिए अमेरिका पर भारी दबाव डाल रहा है। यह स्थिति ‘जिसका वे पहले अनुमान लगा चुके थे लेकिन रोक नहीं सके’ एक बड़ी विपत्ति है।

इबिस के मुताबिक, जीसीसी सदस्यों के लिए इसका प्रभाव कम करने का एकमात्र उपाय यह है कि वे तेहरान के साथ अपनी द्विपक्षीय वार्ता को विकसित करें और वाशिंगटन के साथ संबंधों को भी बनाए रखें।

सऊदी अरब ने रेड सी, बाब अल-मंडेब स्ट्रेट और गल्फ ऑफ एडेन में जहाजों के संचालन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए एक बहुराष्ट्रीय समुद्री रक्षा गठबंधन स्थापित करने की योजना घोषित की थी। क्याफिएरो ने कहा, ‘‘फ़रवरी के अंत से यह संकट लंबा और फैल रहा है, जिससे रियाद के दृष्टिकोण में बदलाव आया है।’’

सऊदी अरब कूटनीति को प्राथमिकता दे रहा है, लेकिन उसने आक्रमण रोकने के लिए मापित सैन्य प्रतिक्रिया देने की ‘मजबूत इच्छा’ भी दिखाई है। इबिस के अनुसार खाड़ी के देश ईरान के साथ युद्ध में बड़ी चपेट में आना नहीं चाहते, लेकिन किसी न किसी मोड़ पर ‘उन्हें सहना पड़ सकता है और इसमें शामिल होना होगा’।

(South China Morning Post से)

फिफा अध्यक्ष जियानी इन्फान्टिनो ने गलती स्वीकार कर माफी मांगी, नेतृत्व में बनेंगे कायम

फिफा अध्यक्ष जियानी इन्फान्टिनो ने विश्वकप में निजी निवेश लाने की विवादास्पद योजना में हुई त्रुटि स्वीकार करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। फिफा के प्रबंधन बोर्ड ने मोरक्को के रबात में हुई बैठक के बाद इन्फान्टिनो के प्रति पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है। फिफा ने 2030 विश्वकप के फाइनल मैच के मोरक्को में होने से जुड़ी खबरों को भ्रामक और गलत बताते हुए खंडन किया है। 21 साउन, काठमाडौं।

इन्फान्टिनो ने विश्वकप सहित अन्य प्रतियोगिताओं में निजी निवेश लाने की योजना में हुई गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी है। इसके बावजूद, फिफा के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके नेतृत्व पर भरोसा और समर्थन जारी रखने का आश्वासन दिया है। गुरुवार को मोरक्को के रबात स्थित फिफा के अफ़्रीका कार्यालय में हुई प्रबंधन बोर्ड की बैठक में इन्फान्टिनो को पूर्ण समर्थन देने का निर्णय लिया गया।

इससे पहले यूरोपीय फुटबाल संघ (यूईएफए) ने निजी निवेश से संबंधित प्रस्ताव को ‘अस्पष्ट और बंद कमरे में हुए समझौते’ के रूप में बताया और इन्फान्टिनो के प्रति अपना विश्वास खोने की बात कही थी। फिफा के महासचिव मैटियास ग्राहस्ट्रोम ने भी आंतरिक पत्राचार में इस मामले को ‘दुःखद और निंदनीय’ करार दिया था। हालांकि, बैठक के बाद ग्राहस्ट्रोम और प्रबंधन बोर्ड ने संयुक्त रूप से इन्फान्टिनो के अध्यक्ष पद पर पूर्ण समर्थन का निर्णय लिया।

इन्फान्टिनो और ग्राहस्ट्रोम ने फिफा के उपाध्यक्षों, परिषद के सदस्यों तथा 211 सदस्य राष्ट्रों को एक संयुक्त पत्र के माध्यम से अपनी त्रुटियों के लिए ईमानदारी से माफी मांगी है। वे भविष्य में इस प्रकार की गलतियों को दोहराए न जाने का संकल्प भी व्यक्त कर चुके हैं। फिफा ने बैठक में बताया कि इस प्रक्रिया में सदस्य राष्ट्रों और फिफा परिषद की पर्याप्त भागीदारी न कराना एक गलती थी।

आमुर बाघः कजाखस्तान के जंगलों में ७० वर्षों बाद दुर्लभ बाघ पुनः छोड़ा गया

कजाखस्तान में ७० वर्षों बाद दुर्लभ प्रजाति के बाघ जंगलों में पुनः दिखाई दिए हैं। लगभग एक सदी पहले मध्य एशिया से आमुर बाघ विलुप्त हो गया था। हाल ही में कजाखस्तान के इली-बल्खाश संरक्षित क्षेत्र में रूस से लाए गए एक मादा बाघ को जंगल में छोड़ा गया है। इस परियोजना का उद्देश्य इस दुर्लभ बाघ की पुनर्स्थापना करना है।
उमित नामक इस मादा बाघ सहित रूस से कुल चार बाघ लाए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि बाकी तीन बाघों को भी जंगल में छोड़ने से पहले उमित की अनुकूलता का परीक्षण किया जाएगा।

अमेरिका ने आप्रवासी वीजा के लिए सार्वजनिक सहायता से जुड़ा जमानत विकल्प लागू किया

अमेरिका ने आप्रवासी वीजा के लिए सार्वजनिक सहायता से जुड़ी ‘पब्लिक चार्ज बॉन्ड’ जमानत प्रक्रिया पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कुछ सीमित मामलों में शुरू की है। यह प्रावधान आर्थिक रूप से सरकारी सहायता पर निर्भर होने की संभावना वाले, लेकिन अन्य कानूनी मानदंड पूरे करने वाले आवेदकों के लिए लक्षित है। आधिकारिक सूचना आने तक आवेदकों को स्वयं जमानत राशि भेजने की आवश्यकता नहीं है और यह प्रक्रिया स्थायी निवास से संबंधित है, पर्यटक वीजा के लिए नहीं। २१ साउन, काठमाडौं।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने कुछ आप्रवासी वीजा आवेदकों के लिए ‘पब्लिक चार्ज बॉन्ड’ यानी सार्वजनिक सहायता संबंधी जमानत प्रक्रिया लागू करना शुरू कर दिया है। इसका मतलब यह नहीं है कि अब अमेरिका जाने वाले सभी को बहुत बड़ी जमानत जमा करनी होगी। यह नियम पर्यटक, विद्यार्थी या सभी प्रकार के वीजा पर स्वतः लागू नहीं होगा। यह व्यवस्था केवल उन सीमित आवेदकों के लिए है, जिनका आप्रवासी वीजा अमेरिकी सरकार के आर्थिक बोझ बनने का जोखिम माना जाता है, लेकिन वे अन्य कानूनी पात्रता पूरी करते हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग ने इस स्थिति में निश्चित राशि की जमानत देकर वीजा प्राप्त करने का एक और अवसर प्रदान करने की बात कही है। ‘पब्लिक चार्ज’ का क्या अर्थ है? अमेरिकी आव्रजन कानून में ‘पब्लिक चार्ज’ से तात्पर्य उन व्यक्तियों से है, जो भविष्य में अपने जीवनयापन के लिए सरकारी नकद सहायता या दीर्घकालीन संस्थागत देखभाल पर निर्भर होंगे। वीजा या स्थायी निवास के आवेदन का मूल्यांकन करते समय उम्र, स्वास्थ्य, पारिवारिक स्थिति, आय, संपत्ति, शिक्षा, कौशल और आर्थिक सहायता क्षमता सहित कई पहलुओं का समग्र मूल्यांकन किया जाता है। वर्तमान नीति के अनुसार सरकारी नकद सहायता, दीर्घकालीन नर्सिंग और संस्थागत देखभाल को ‘पब्लिक चार्ज’ माना जाता है, जबकि खाद्य सहायता, स्कूल भोजन, आपदा राहत, किराए की सहायता या अधिकांश गैर-नकद सेवाएं स्वचालित रूप से इसमें शामिल नहीं हैं।

क्रिस्टियन नोर्गार्ड ने आर्सनल छोड़कर एवरटन में शामिल हुए

डेनमार्क के मिडफील्डर क्रिस्टियन नोर्गार्ड ने आर्सनल को छोड़कर दो साल के अनुबंध के साथ एवरटन में शामिल हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक एवरटन ने 32 वर्षीय नोर्गार्ड को लाने के लिए लगभग 7 मिलियन पाउंड खर्च किए हैं। कोच डेविड मौयस की योजना से प्रभावित नोर्गार्ड ने एवरटन को सही दिशा में प्रगति कर रहा बताया है।

नोर्गार्ड पिछले साल ब्रेंटफोर्ड से 15 मिलियन पाउंड में आर्सनल पहुंचे थे। आर्सनल के लिए उन्होंने सभी प्रतियोगिताओं में 20 मैच खेले, लेकिन प्रीमियर लीग में मात्र सात मैचों का मौका मिला। पिछले सीजन, जब आर्सनल ने 22 वर्षों बाद प्रीमियर लीग का खिताब जीता, नोर्गार्ड उस टीम के सदस्य थे।

एवरटन ने इसी ट्रांसफर विंडो में मिडल्सब्रो से हेडन हैकनी और चेल्सी से युवा विंगर टाइरिक जॉर्ज को भी अनुबंधित कर लिया है। नोर्गार्ड ने ब्रेंटफोर्ड में छह साल बिताए, जहां उन्होंने 196 मैच खेले और टीम के कप्तान भी रहे। एवरटन नई प्रीमियर लीग सीजन की शुरुआत 22 अगस्त को अपने घरेलू मैदान पर क्रिस्टल पैलेस के खिलाफ मैच से करेगा।

भारी मात्रा में मादक पदार्थ तस्करी करने वाले विमानचालक गिरफ्तार

मलेशिया से विमान द्वारा आए एक पायलट को जकार्ता के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 70,000 से अधिक ‘एक्स्टसी पिल्स’ के साथ गिरफ्तार किया गया है। मादक पदार्थ तस्करी के आरोप में दोषी पाए जाने पर उन्हें इंडोनेशिया में आजीवन कारावास से लेकर फांसी तक की सजा हो सकती है। मलेशिया के क्वालालंपुर से उड़ान भरते हुए उक्त को-पायलट ने स्वयं भी मादक पदार्थ सेवन करने की पुष्टि अधिकारियों ने की है।

हवाई अड्डे के सीमा शुल्क अधिकारियों ने उनके सूटकेस में 26 किलो वजनी 14 बैग ‘एक्स्टसी पिल्स’ और हाथ में पकड़े बैग में चार ग्राम ‘मेथ’ बरामद किए थे। इंडोनेशिया में मादक पदार्थ तस्करी को नियंत्रित करने के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं। हालांकि, फांसी की सजा होने के बावजूद पिछले कुछ वर्षों से इसे लागू नहीं किया गया है।

शेख हसिना ने मौत की सजा के खतरे के बीच देश में वापसी की इच्छा जताई

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसिनाने मानवता के विरुद्ध अपराध के मामले में मौत की सजा मिलने के जोखिम के बावजूद दिसंबर में देश लौटने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। उन्होंने पर लगाए गए आरोपों को नकारते हुए कहा है कि वे अपने देश वापस लौटना चाहती हैं। 2024 में सरकार के विरोधी विद्रोह के कारण सत्ता से हटने के बाद वह भारत चली गई थीं। बांग्लादेश में उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया था और उन्हें दोषी ठहराया गया था। सत्ता से बेदखल हुए दो वर्ष पूरा होने पर, बुधवार को दिल्ली के एक प्रेस क्लब में ‘ऑडियो’ के माध्यम से बातचीत करते हुए हसिना ने कहा कि उन्हें “लौटना ही होगा।” हालांकि उन्होंने घर लौटने की कोई निश्चित योजना या तारीख का खुलासा नहीं किया।

ढाका के विशेष न्यायालय ने गत वर्ष हसिना को आंदोलनकारियों पर घातक बल प्रयोग के आदेश देने के जुर्म में मौत की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही उनकी आवामी लीग पार्टी कमजोर पड़ने लगी है। भारतीय अधिकारियों पर भी उन्हें सौंपने का दबाव बढ़ रहा है। दिल्ली में हुए इस ‘वर्चुअल’ कार्यक्रम के जरिए 15 वर्षों तक सत्ता में रही हसिनाने सत्ता से बेदखल होने के बाद पहचली बार पत्रकारों से बात की। “ऑडियो लिंक” के माध्यम से दिए गए संबोधन के बाद उन्होंने कुछ सवालों के जवाब भी दिए। उन्होंने कहा, “मुझे पता है वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मार भी सकते हैं। कुछ भी हो सकता है, फिर भी मुझे लौटना ही होगा।”

अपने संबोधन में उन्होंने 2024 के छात्र आन्दोलन को कुछ संगठनों द्वारा “हिंसक आन्दोलन” में बदलने का आरोप लगाया। हालांकि वह इस बात का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाईं। हसिनाने उन आरोपों को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है, जिसमें उन्हें दोषी ठहराया गया था। वहीं संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं ने पाया कि हसिना और उनकी सरकार ने योजनाबद्ध और घातक बल का प्रयोग कर सत्ता बनाए रखने की कोशिश की।

बांग्लादेश और भारत के बीच तनाव के बाद हसिना ढाका से पलायन कर गईं। सत्ता से हटाए जाने के बहुत जल्द ही अंतरिम सरकार ने जिम्मेदारी संभाली थी। फरवरी में हुए चुनाव के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सत्ता में आई है और इसके नेता तारिक रहमान वर्तमान प्रधानमंत्री हैं। रहमान की सरकार ने पहले ही स्थानीय मीडिया को हसिना के बयानों को प्रकाशित या प्रसारित न करने की चेतावनी दे रखी थी। हसिनाके इस संबोधन के बाद बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि भारत में उन्हें मीडिया के साथ सार्वजनिक कार्यक्रम करने की अनुमति दिए जाने पर असंतोष व्यक्त किया गया है।

इरान और ओमान के बीच हॉर्मुज जलसंधि में समझौता, अमेरिका के साथ वार्ता जारी विवादों के बीच

२१ साउन, काठमांडू। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि इरान के साथ बातचीत जारी है और यह संभावित अमेरिकी सैन्य आक्रमण को टाल सकता है। लास वेगास में आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि वह लोगों को मारना नहीं चाहते और इरान के साथ समझौता करना चाहते हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में बताया कि इरान के साथ वार्ता “जटिल” है, लेकिन अंततः यह अमेरिका के हित में होगी। उन्होंने कहा कि इरान को परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकने के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य सभी विकल्पों का उपयोग किया जाएगा।

हालांकि, इरान ने ट्रम्प के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं हुई है। इरान ने बताया कि हॉर्मुज जलसंधि में नए समुद्री मार्ग की भौगोलिक स्थिति को लेकर केवल ओमान के साथ एक समझौता हुआ है, जो अंतिम मसौदा चरण में है। इरानी अधिकारियों ने इस चर्चाएं में ओमान के अलावा किसी बाहरी हस्तक्षेप की बात से इनकार किया है। इरान ने अमेरिकी नौसेना की नाकाबींदी और सैन्य गतिविधियों को जलसंधि में बाधा उत्पन्न करने का आरोप लगाया है।

फिर भी, ओमान के साथ यह समझौता मौजूदा संकट का पूर्ण समाधान नहीं कर पाएगा। इरान के राष्ट्रपति मसूद फजैसीयान ने अपने कार्यकाल के दूसरे वर्ष में कहा कि विरोधी देश देश की क्षमता और तकनीकी प्रगति को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिए वे इरानी सैन्य कमांडर और वैज्ञानिकों को निशाना बना रहे हैं। दूसरी ओर, वाशिंगटन ने हॉर्मुज पर इरान के नियंत्रण को स्वीकार नहीं किया है और किसी भी अस्थायी समुद्री मार्ग के लिए अनुमति या शुल्क की आवश्यकता नहीं होने का दावा किया है। ओमान और इरान के बीच हुई बातचीत ने अमेरिका-इरान के शांति समझौते और हॉर्मुज जलसंधि की बाधाओं को हटाने की आशा जगाई है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के रूप में दिखा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत ०.५ प्रतिशत की गिरावट के साथ प्रति बैरल ७९.०८ डॉलर पर बनी हुई है, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत ०.७ प्रतिशत घटकर प्रति बैरल ७४.६९ डॉलर हो गई है।

जर्मनी के हवाईअड्डे पर विस्फोटक से लैस ड्रोन पाए जाने के बाद रूस पर संदेह

जर्मनी के लाइपज़िग–हाले हवाईअड्डे पर यूक्रेनी कार्गो विमान के पास विस्फोटक सामग्री से युक्त ड्रोन मिलने के बाद सुरक्षा उपाय कड़े किए गए हैं। पुलिस ने बम निष्क्रिय टीम की सहायता से ड्रोन में लगे विस्फोटक उपकरण को सुरक्षित ढंग से निष्क्रिय कर दिया है। मामले की गहन जांच जारी है और यूक्रेन के राजदूत ने इस घटना में रूस की संलिप्तता का संदेह जताया है।

२१ साउन, काठमाडौं। जर्मनी के लाइपज़िग–हाले हवाईअड्डे पर यूक्रेनी कार्गो विमान के निकट विस्फोटक युक्त ड्रोन पाया गया। घटना के समय एक विमान उड़ान भर रहा था और ड्रोन के अज्ञात वस्तु से टकराने के बावजूद विमान सुरक्षित रूप से उतरने में सफल रहा, अधिकारियों ने बताया। इस घटना के बाद लाइपज़िग–हाले हवाईअड्डे पर सभी उड़ानों को कुछ घंटों के लिए अन्य हवाई अड्डों पर डायवर्ट किया गया था।

जर्मन पुलिस ने बम निष्क्रिय करने वाली टीम के सहयोग से ड्रोन में मौजूद विस्फोटक उपकरण को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया है। पूर्वी जर्मनी के इस हवाईअड्डे को जर्मन सेना और नाटो के लिए सैन्य सामग्री के परिवहन केंद्र के रूप में उपयोग किया जाता है। यहाँ यूक्रेन की एंटोनोव एयरलाइंस भी अपने संचालन कर रही है।

जर्मनी के लिए यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सी माकियन ने इस घटना में रूस की संलिप्तता की संभावना जताते हुए कहा, ‘रूस के अलावा और कौन हो सकता है?’ हालांकि जर्मन अधिकारियों ने अब तक इस घटना में रूस की प्रत्यक्ष संलिप्तता को साबित करने वाला कोई प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया है। यूक्रेन युद्ध के बाद से जर्मनी समेत यूरोप के कई देशों के हवाईअड्डों पर मानव रहित ड्रोन देखे जाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

नेपाल और न्यूज़ीलैंड ‘ए’ टीम के बीच एकदिवसीय अभ्यास मैच खेला जाएगा

नेपाली क्रिकेट टीम ने आगामी ६ सितंबर को ऑस्ट्रेलिया के डार्विन में न्यूज़ीलैंड ‘ए’ टीम के खिलाफ एकदिवसीय अभ्यास मैच खेलने की पुष्टि की है। न्यूज़ीलैंड क्रिकेट बोर्ड द्वारा जारी कार्यक्रमानुसार यह मैच मरारा क्रिकेट ग्राउंड–२ में आयोजित किया जाएगा। १३ अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाले खिलाड़ियों समेत न्यूज़ीलैंड ‘ए’ टीम के खिलाफ यह मैच नेपाल के लिए आगामी मुकाबलों की तैयारी के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

२१ साउन, काठमाडौं। आगामी सितंबर में नेपाली क्रिकेट टीम न्यूज़ीलैंड ‘ए’ टीम के साथ एकदिवसीय अभ्यास मैच खेलने जा रही है। न्यूज़ीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने गुरुवार को सोशल मीडिया के जरिए टॉप एंड टी–२० सीरीज के लिए टीम की घोषणा करते हुए बाद में अभ्यास एकदिवसीय मैच खेलने की जानकारी दी। कार्यक्रमानुसार, न्यूज़ीलैंड ‘ए’ टीम २ सितंबर को साउथ ऑस्ट्रेलिया, ४ सितंबर को तस्मानिया और ६ सितंबर को नेपाल के साथ मुकाबला करेगी। ये तीनों मैच ऑस्ट्रेलिया के डार्विन स्थित मरारा क्रिकेट ग्राउंड–२ में आयोजित किए जाएंगे।

इससे पहले न्यूज़ीलैंड ‘ए’ टीम २० अगस्त से ३० अगस्त तक होने वाली एनटी टॉप एंड टी–२० सीरीज में प्रतिस्पर्धा करेगी। वर्ष २०२२ से शुरू हुई इस प्रतियोगिता में इस बार नौ टीमें भाग ले रही हैं। टॉप एंड टी–२० सीरीज में नेपाल के मैचों का कार्यक्रम पहले ही सार्वजनिक किया जा चुका है। न्यूज़ीलैंड ‘ए’ टीम में १३ खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें क्रिस्टियन क्लार्क, मैट फिसर, डीन फोक्सक्राफ्ट, मिश हे, जेडेन लेनॉक्स और बेन लिस्टर जैसे ब्लैक कैप्स के अनुभवी खिलाड़ी भी शामिल हैं। इनमें से कई खिलाड़ी पिछले महीने वेस्ट इंडीज के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला में भी न्यूज़ीलैंड का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। Nepal के लिए यह अभ्यास मैच आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी में बेहद महत्वपूर्ण होगा।

नारायणगढ-मुग्लिन सड़क: पुनर्निर्माण के एक दशक बाद भी क्यों फंसी है पहाड़ी कटाव की समस्या?

सड़क विभाग के अधिकारी इस वर्ष की बरसात के मौसम में काठमांडू को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण नारायणगढ-मुग्लिन सड़क पर लगातार गिरने वाली भूस्खलन की समस्या से चिंतित दिखाई दे रहे हैं। विभाग के सहायक प्रवक्ता इंजीनियर शुभांजन दाहाल ने कहा, “वर्तमान समस्या यह है कि भूस्खलन लगातार नए-नए स्थानों से हो रहा है।” इस हफ्ते सड़क बार-बार बंद और खुलती रही है। सड़क विभाग भरतपुर के अनुसार, असार माह में ही इस सड़क खंड पर दो दर्जन से अधिक बड़े भूस्खलन हुए हैं। वर्ष 2018 में स्तरोन्नति के दौरान सड़क की चौड़ाई 9 से 11 मीटर निर्धारित की गई थी। भित्ति काटने का विशाल कार्य हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार उन चट्टानों को स्थिर रखने में अभी भी चुनौतियां हैं।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग अध्ययन संस्थान के भूगर्भविज्ञानी वसंतराज अधिकारी ने कहा, “मुख्य समस्या यह है कि सड़क के सामने खड़े ऊंचे पहाड़ों पर सीमित स्थानों में ही भूस्खलन रोकने के उपाय किए गए हैं, जो पर्याप्त नहीं हैं।” इस वजह से ऊपर से गिरने वाले मलबे और बीच में जमा हुए पानी के कारण मिट्टी गीली होती है, साथ ही भूकंपीय अस्थिरता ने समस्या को और बढ़ा दिया है। सड़क विभाग भरतपुर के प्रवक्ता कृष्णप्रसाद आचार्य ने बताया कि इस वर्षा ऋतु में सिमलताल, तुइनखोला और खहरेखोला क्षेत्रों में बार-बार भूस्खलन हुए हैं। “सिमलताल क्षेत्र में पुराना भूस्खलन पुनः सक्रिय हुआ है, जबकि मुग्लिन की दिशा में लगभग पांच किलोमीटर क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा है। दासढुंगा से मुग्लिन तक कोई भी जगह पूरी तरह से भूस्खलन-रहित नहीं है।”

मुग्लिन की ओर नाम्सीखोला और नारायणगढ की ओर तुइनखोला में भूस्खलन नियंत्रण के लिए लगभग 22 करोड़ रुपये के ठेका समझौते हो चुके हैं। इसके अंतर्गत खड़ी चट्टानों को स्थिर करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य किए जाएंगे। आचार्य ने बताया, “यहां कमजोर हिस्सों को हटाने, एंकरिंग और जाल लगाने का काम जारी है।” लगभग आठ वर्ष पहले 32.5 किलोमीटर लंबे सड़क खंड की मरम्मत और स्तरोन्नति पर लगभग 3 अरब रुपये खर्च हुए थे।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि उक्त क्षेत्र में जल निकासी की उचित व्यवस्था, पहाड़ी कटाव को रोकने के लिए कुछ कटाफाट, संरचना निर्माण और वृक्षारोपण की आवश्यकता है। वे केवल इन्हीं उपायों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि “प्राकृतिक समाधान” और नवीन तकनीकों का संयोजन भी आवश्यक बताया गया है। सबसे पहले भूस्खलन की संभावित जगहों का भूगर्भीय अध्ययन करके सड़क निर्माण के दौरान कटे हुए चट्टानों के उचित प्रबंधन पर जोर देना चाहिए। “ऐसे अध्ययन के बिना सुरक्षित उपाय प्रभावी साबित नहीं हो सकते।”

होर्मुज जलसंधि: क्या वैकल्पिक मार्गों से खाड़ी क्षेत्र के तेल और गैस आपूर्ति जारी रखी जा सकती है?

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ने के साथ ही विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक जलक्षेत्रों में से एक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, पुनः वैश्विक ध्यान केंद्रित हो गया है। स्थायी रूप से संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से एक महीने के अंदर हुए अंतरिम समझौते के बाद दोनों देशों ने फिर से आक्रामकता शुरू कर दी है। इस स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को बढ़ावा दिया है। यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाज संचालन जोखिमपूर्ण हो जाता है, तो खाड़ी क्षेत्र के तेल और गैस निर्यातक वैकल्पिक जलमार्गों का उपयोग कर अपने उत्पाद विश्व बाजार तक पहुंचा सकते हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हैं, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की रणनीतिक महत्ता और क्षमता को पूरी तरह प्रतिस्थापित करने वाला कोई विकल्प नहीं है।

ईरान और ओमान के बीच स्थित आ estre जलक्षेत्र, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, खाड़ी क्षेत्र के अधिकांश तेल और गैस निर्यात का मुख्य मार्ग है। इसकी विशाल क्षमता, लचीलापन और तुलनात्मक रूप से कम लागत इसके प्रमुख फायदे हैं। पाइपलाइन की तुलना में तेलवाहक टैंकर कम खर्च में बड़ी मात्रा में तेल परिवहन कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दैनिक लगभग दो करोड़ बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का आदान-प्रदान होता है, जो विश्व की समुद्री मार्गों द्वारा होने वाली कुल तेल व्यापार का लगभग एक चौथाई है। इनमें से करीब 80 प्रतिशत तेल एशियाई बाजारों में भेजा जाता है। इसी मार्ग से विश्व के कुल तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यात का लगभग एक पांचवा हिस्सा भी पारगमन करता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के कारण ईरान विश्व ऊर्जा बाजार में बड़ा प्रभाव डालता है, इसलिए खाड़ी क्षेत्र के तेल उत्पादक देशों ने लंबे समय से इस जलमार्ग पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय वैकल्पिक पूर्वाधारों में निवेश करना शुरू किया है। इस दिशा में सबसे बड़ी परियोजना सऊदी अरब की इस्टवेस्ट पाइपलाइन ‘पेट्रोलाइन’ है। लगभग 1200 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन पूर्वी तेल क्षेत्र को रेड सी के यानबू निर्यात टर्मिनल से जोड़ती है। यह पाइपलाइन 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान बनाई गई थी, जब दोनों देशों ने खाड़ी क्षेत्र में तेलवाहक टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया था। 2019 में इसकी क्षमता बढ़ाकर इसे आपातकालीन स्थितियों में रोजाना 70 लाख बैरल तेल परिवहन करने योग्य बनाया गया है।

बर्दियाका बाघों का दुर्लभ व्यवहार विश्व के समक्ष प्रकट

बर्दिया राष्ट्रीय निकुञ्ज में दिखे बाघों के दुर्लभ व्यवहार पर आधारित बीबीसी वृत्तचित्र ‘टाइगर आइलैंड’ ने नेपाल के बाघ संरक्षण की सफलता को विश्व स्तर पर चर्चा में ला दिया है। वृत्तचित्र में मादा बाघ द्वारा शावकों की देखभाल करना और नर बाघ का संरक्षण में सक्रिय योगदान देना जैसे नए तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं। सन् 2010 में 121 के करीब बाघ थे, जो अब 400 से अधिक हो चुके हैं, लेकिन संख्या में बढ़ोतरी के साथ मानव–वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन गया है। 20 साउन, Kathmandu।

जंगल में देखे गए बाघों के ऐसे दुर्लभ और पहले रिकॉर्ड में न दर्ज किए गए व्यवहार कैमरे में कैद होने के बाद नेपाल के बाघ संरक्षण की सफलता ने पुनः वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। बर्दिया राष्ट्रीय निकुञ्ज एवं आस-पास के इलाकों में फिल्मांकन किया गया बीबीसी वृत्तचित्र ‘टाइगर आइलैंड: अ हिडन वर्ल्ड रिवील्ड’ ने बाघों के असाधारण व्यवहारों के साथ-साथ समुदाय आधारित संरक्षण के नेपाली मॉडल को विश्व के दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया है। इसका विशेष प्रदर्शन बुधवार को काठमांडौ के ठमेल स्थित एलफ्ट होटल में टूरिज्म इन्फो नेपाल द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें पर्यटन, संरक्षण और सरकारी क्षेत्र के सौ से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए।

बीबीसी और पीबीएस के सहयोग से निर्मित इस वृत्तचित्र का छायांकन बर्दिया राष्ट्रीय निकुञ्ज के दूरस्थ सीमावर्ती नदी टापू और सामुदायिक वन क्षेत्रों में किया गया है। वृत्तचित्र में गोमा, माला और जुगिनी नामक मादा बाघों की गतिविधियों को गहराई से दर्शाते हुए असाधारण बाघ व्यवहार के दृश्य प्रस्तुत किए गए हैं। विशेष रूप से, मादा बाघों द्वारा मिल-जुलकर शावकों की देखभाल और नर बाघ द्वारा भी उनके संरक्षण एवं देखभाल में सक्रिय भागीदारी करने के दृश्यों ने बाघ व्यवहार को लेकर स्थापित समझ को चुनौती दी है, जो निर्माण टीम का दावा है।

सन् 2022 के अंत में शुरू हुई इस डॉक्यूमेंट्री में बीबीसी टीम ने बर्दिया में मादा बाघों की गतिविधियों का लंबे समय तक अध्ययन और फिल्मांकन करके नए तथ्य तथा दृश्य एकत्रित किए हैं। ड्रोन, थर्मल कैमरा, नाइट-विजन तकनीक और विस्तृत क्षेत्र निगरानी का इस्तेमाल कर बाघों की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया गया है। वृत्तचित्र के दूसरे भाग में रात के समय बर्दिया राष्ट्रीय निकुञ्ज के अंदर बाघों द्वारा शिकार करने के दुर्लभ दृश्य भी दर्शाए गए हैं। कार्यक्रम में नेपाल पर्यटन बोर्ड के पूर्व सीईओ दीपकराज जोशी ने कहा कि नेपाल की बाघ संरक्षण सफलताओं को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच प्रचारित करने में यह वृत्तचित्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने वन्यजीव संरक्षण को प्राकृतिक आधार पर और सतत पर्यटन से जोड़कर नेपाल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में और अधिक स्थापित किया जा सकता है, यह भी व्यक्त किया। वृत्तचित्र प्रदर्शन के बाद सजल प्रधान के संयोजन में एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। चर्चा में बर्दिया के प्रकृतिक गाइड सुशीला महतरा और मञ्जु महतरा ने वृत्तचित्र के निर्माण में बाघों की खोज, निगरानी व ट्रैकिंग के दौरान किए गए कार्यों और अनुभवों को साझा किया। साथ ही नेपाल के बाघ संरक्षण की यात्रा में मिली उल्लेखनीय प्रगति पर चर्चा हुई। सन् 2010 में जहां बाघों की संख्या लगभग 121 थी, वह अब 400 से ऊपर पहुंच चुकी है, यह तथ्य उपस्थित लोगों ने साझा किया और नेपाल को बाघ संरक्षण के क्षेत्र में विश्वस्तरीय सफल मॉडल के रूप में स्थापित करने में सफल बताया। हालांकि, बाघों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ मानव–वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन एक नई चुनौती भी बनी है। संरक्षण की उपलब्धियों को दीर्घकालिक बनाने के लिए संरक्षित क्षेत्रों के आस-पास के समुदायों के हित, सुरक्षा और सहभागिता को समान महत्व देना आवश्यक है, इस बात पर सभी ने जोर दिया।

सरकार ने सार्वजनिक वित्त प्रबंधन सुधार के लिए कार्यान्वयन योजना तैयार की

सरकार ने सार्वजनिक वित्त प्रबंधन सूचना प्रणालियों के स्तरोन्नति को चालू वित्तीय वर्ष के भीतर पूर्ण करने के लक्ष्य के साथ तीसरी सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन सुधार राष्ट्रीय रणनीति को कार्यान्वित किया है। तीन स्तरों की सरकारों के संचयी कोष की दैनिक रिपोर्ट स्वतः प्राप्त होने की व्यवस्था और सभी विदेशी सहायता को बजट प्रणाली में सम्मिलित करने की नीति भी इस वर्ष के भीतर बनाई जाएगी। आयोजना बैंक की स्थापना और खरीद नियमावली के संशोधन के माध्यम से सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन को और अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीकी-सहायक बनाने का लक्ष्य सरकार ने रखा है। २० साउन, काठमांडू।

सरकार ने अंतरमंत्रालय बजट सूचना प्रणाली (एलएमबीआईएस), स्थानीय तह संचयी कोष प्रबंधन प्रणाली (सुत्र) सहित मौजूदा सार्वजनिक वित्त प्रबंधन सूचना प्रणालियों के स्तरोन्नति को चालू वित्तीय वर्ष के भीतर ही पूरा करने के लिए समयसीमा निर्धारित की है। सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करते हुए एकीकृत और स्वचालित प्रणाली के विकास का कार्य भी चालू वित्तीय वर्ष के भीतर पूरा होगा, जिसे अर्थ मंत्रालय द्वारा तैयार की गई तीसरी सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन सुधार राष्ट्रीय रणनीति (२०८२–८७) कार्यान्वयन कार्ययोजना में उल्लेख किया गया है।

बजट की विश्वसनीयता, बजट कार्यान्वयन और रिपोर्टिंग, राजस्व प्रबंधन, अंतरसरकारी वित्तीय प्रबंधन, ऋण एवं वित्तीय जोखिम प्रबंधन, परिसंपत्ति प्रबंधन, बाह्य निगरानी तथा पारदर्शिता और जवाबदेही के सात रणनीतिक स्तंभ निर्धारित कर कार्यान्वयन योजना बनाई गई है। इस योजना में सुधार की प्राथमिकताएँ, अपेक्षित परिणाम और दीर्घकालीन सुधार के मार्गदर्शन का स्पष्ट चित्र प्रस्तुत किया गया है। मंत्रालय के अनुसार इस कार्ययोजना से सुधार गतिविधियों का स्पष्ट कार्यान्वयन मार्गदर्शन उपलब्ध होगा।

नेपाल में गैस की तत्काल मांग 60 हजार टन, भारत कितने दिन तक आपूर्ति करेगा?

नेपाल आयल निगम ने उपभोक्ताओं के आक्रामक खरीद के कारण गैस की मांग में वृद्धि होने की जानकारी दी है और दावा किया है कि आगामी 15 दिन के भीतर आपूर्ति में सुधार होगा। निगम के कार्यकारी निदेशक दीपक बराल ने संसद की समिति को बताया कि गैस की मांग वर्तमान में 47 हजार टन से बढ़कर 60 हजार टन हो गई है। भारतीय आयल कॉर्पोरेशन (IOC) के साथ आपूर्ति बढ़ाने के लिए पहल जारी है और प्रतिदिन 110 से 115 गैस बुलेट लोड हो रहे हैं, जिससे समस्या शीघ्र समाधान होगी, निगम ने बताया। 20 साउन, काठमांडू।

नेपाल आयल निगम ने बाजार में खाना पकाने के लिए एलपी गैस की असामान्य रूप से बढ़ी मांग पर चिंता जताते हुए आने वाले 10 से 15 दिनों में आपूर्ति सामान्य होने का दावा किया है। बुधवार को सिंहदरबार में राष्ट्रीय सभा की संघीयता सबलीकरण तथा राष्ट्रीय सरोकार समिति की बैठक में दीपक बराल ने कहा कि तकनीकी समस्याओं और उपभोक्ताओं के ‘पैनिक बाइंग’ यानी घबराकर खरीदने के कारण कुछ असुविधाएं रही हैं, लेकिन दो हफ्तों के भीतर गैस आपूर्ति पूरी तरह से सुचारु हो जाएगी।

निगम के अनुसार सामान्य स्थिति में गैस की मांग लगभग 47 हजार टन होती थी, जो अब बढ़कर 60 हजार टन हो गई है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के साथ आपूर्ति बढ़ाने हेतु लगातार प्रयास जारी हैं। बराल ने कहा, ‘हम आमतौर पर दो महीने के लिए 49 हजार टन की मांग भेजते थे, लेकिन अब 60 हजार टन की मांग आ रही है। आईओसी ने केवल 49,500 टन उपलब्ध कराने की बात कही है, लेकिन हमने 55 हजार टन उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।’

आईओसी ने 55 हजार टन की मांग पूरी नहीं मानी है, पर गैस बुलेट लोडिंग बढ़ाई गई है, बराल ने बताया। निगम का मानना है कि बाजार में गैस की कमी का मुख्य कारण उपभोक्ताओं द्वारा घबराकर गैस का जमावड़ा करना है। उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा में यह सहमति हुई है कि दशहरा-तिहार को ध्यान में रखते हुए दो महीने के लिए 60 हजार टन गैस आयी और घरों में खाली सिलेंडर भरे जा सकें, तो बाजार का दबाव कम होगा, बराल ने कहा।

तत्काल आपूर्ति बढ़ाने में तकनीकी और परिवहन संबंधी बाधाएं भी मौजूद हैं, निगम ने बताया। बराल ने कहा, ‘हम तुरंत ही बुलेटों के बेड़े का प्रबंधन नहीं कर पा रहे हैं, और आईओसी भी रिफाइनरी से उत्पादन बढ़ा नहीं सकता। हल्दिया पाइपलाइन में आग लगने से उत्पादन प्रभावित हुआ है। ये विभिन्न कारण हैं जिनसे आपूर्ति में समस्या आ रही है।’ हालांकि, निगम ने गैस आपूर्ति को सुचारु बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने की बात कही है। बराल ने दावा किया, ‘पहले प्रतिदिन 80 बुलेट लोड होते थे, अब प्रबंधन से 110-115 बुलेट प्रतिदिन लोड हो रहे हैं। इसी तरह आपूर्ति जारी है और हम 8 से 15 दिनों के भीतर इसे पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए आशावादी हैं।’