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लेखक: space4knews

‘बाह्रखरी गल्फ तथा इकोनोमिक सिम्पोजियम’ १९ वैशाखमा काठमाडौंमा हुने

‘बाह्रखरी गोल्फ एवं आर्थिक परिसंवाद’ १९ वैशाख को काठमाडौं में आयोजित होगा

समाचार सारांश की समीक्षा की गई है। एनसेल बिजनेस बाह्रखरी गोल्फ प्रतियोगिता और आर्थिक सिम्पोजियम का नवां संस्करण वैशाख १९ तारीख को गोकर्ण गोल्फ कोर्स में आयोजित किया जाएगा। भारत के नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कान्त ‘की नोट स्पीकर’ के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे, जबकि अर्थ मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले विशेष संबोधन करेंगे। प्रतियोगिता में एक सौ से अधिक खिलाड़ी भाग लेंगे, तथा मुख्य विजेता को सोने का बॉल पुरस्कार दिया जाएगा, वहीं होल इन वन खिलाड़ी को बीवाईडी की एट्टो थ्री गाड़ी पुरस्कार स्वरूप प्रदान की जाएगी। ३ वैशाख, काठमाडौं। ‘एनसेल बिजनेस बाह्रखरी आमंत्रण गोल्फ प्रतियोगिता’ का नवां संस्करण और ‘आर्थिक सिम्पोजियम’ इस वर्ष काठमाडौं में आयोजित होने जा रहा है। बिहीवार (वैशाख ३) को काठमाडौं में पत्रकार सम्मेलन के दौरान बाह्रखरी मीडिया ने पुष्टि की कि प्रतियोगिता और आर्थिक परिसंवाद इसी वैशाख १९ को गोकर्ण गोल्फ कोर्स में आयोजित होंगे। इस नववें संस्करण के ‘एनसेल बिजनेस बाह्रखरी गोल्फ तथा आर्थिक सिम्पोजियम’ में भारत के वरिष्ठ प्रशासक अमिताभ कान्त ‘की नोट स्पीकर’ के रूप में भाग लेंगे। वे एमआईआईटी यूनिवर्सिटी के चांसलर एवं भारत के नीति आयोग के पूर्व सीईओ रह चुके हैं। पत्रकार सम्मेलन में बाह्रखरी मीडिया के प्रधान संपादक प्रतीक प्रधान ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि अर्थ मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ‘आर्थिक सिम्पोजियम’ में मुख्य अतिथि के रूप में विशेष संबोधन करेंगे।

‘कांग्रेस विवाद संवाद और सहमति से सुलझाना होगा’

नेपाली कांग्रेस के आंतरिक विवाद तेज़ हो रहे हैं। केंद्रीय अनुशासन समिति ने निवर्तमान कार्यवाहक सभापति पूर्णबहादुर खड्का से नकली लेटरपैड का उपयोग कर प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के आरोप में सात दिन का स्पष्टीकरण मांगा है। खड्काओं ने इस निर्णय को अवैध, हास्यास्पद और निरर्थक करार देते हुए अस्वीकार किया है। उन्होंने पार्टी की आधिकारिकता से जुड़ा मामला सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन होने और उन्होंने वास्तविक लेटरपैड का उपयोग किया होने का दावा किया है। इस विवाद ने पार्टी के भीतर अनुशासन और नेतृत्व की वैधता पर गंभीर टकराव पैदा किया है।

इस विषय पर कांग्रेस के नेता एवं पूर्व विदेश मंत्री एनपी साउद से किए गए संक्षिप्त संवाद में उन्होंने कहा, “पूर्णजी से मांगा गया स्पष्टीकरण उचित नहीं है। 14वें महाधिवेशन से निर्वाचित कार्यसमिति और विशेष महाधिवेशन से निर्वाचित कार्यसमिति के विवाद का अंतिम निर्णय अभी तक नहीं हुआ है। यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है, इसलिए उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करना उचित नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “अदालत में विचाराधीन मामलों पर पार्टी के भीतर विवाद होने से विभाजन की संभावना बढ़ती है।”

साउद ने कहा, “नेपाली कांग्रेस एक ऐतिहासिक पार्टी है। इसकी एकता लोकतंत्र और राष्ट्रवाद के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।” उन्होंने पार्टी सदस्यता अद्यतन प्रक्रिया में बदलाव से आंतरिक लोकतंत्र, निष्पक्षता और पारदर्शिता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की चेतावनी दी।

साउद ने निष्कर्ष में कहा, “नेपाली कांग्रेस में व्यापक एकता, परिवर्तन और नियमित वैधानिक प्रक्रियाओं को बाधित किए बिना ही पार्टी को मजबूत किया जा सकता है। चर्चा और संवाद से किसी भी जटिल समस्या का समाधान संभव है।”

महिमानसिंह विष्ट को ६ महीने की कैद की सजा, रेसम चौधरी की गिरफ्तारी में संलिप्तता सबूतित

२२ चैत, काठमाण्डौ। जिल्ला अदालत काठमाण्डौ ने सर्वोच्च अदालत के शाखा अधिकारी महिमानसिंह विष्ट को लिखित संबंधी अपराध में दोषी पाते हुए ६ महीने की कैद की सजा सुनाई है। विष्ट द्वारा जारी किए गए नकली पत्र के आधार पर नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के तत्कालीन संस्थापक नेता रेसम चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। न्यायधीश खिमानन्द भुसाल की अदालत ने उन्हें ६ महीने की कैद के साथ-साथ १० हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

पिछले वैशाख १७ को सर्वोच्च अदालत के शाखा अधिकारी महिमानसिंह विष्ट द्वारा जारी किए गए पत्र की वजह से नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के संरक्षणकर्ता एवं पूर्व सांसद रेसम चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। अदालत में विचाराधीन मामले का अंतिम निर्णय न होने के बावजूद चौधरी को दंडित करने वाला यह पत्र अनधिकृत और गैर कानूनी घोषित किए जाने पर कुछ ही घंटों के भीतर चौधरी को रिहा कर दिया गया था। इस घटना के बाद उक्त पत्र जारी करने वाले विष्ट को गिरफ्तार किया गया।

सर्वोच्च अदालत ने कारागार और पुलिस को तुरंत एक अन्य पत्र भेजकर रेसम चौधरी की रिहाई की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की।

इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन का युद्धविराम तय, ट्रम्प ने किया ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन के युद्धविराम पर सहमति होने की घोषणा की है। ट्रम्प ने बताया कि 34 वर्षों के बाद वाशिंगटन डीसी में दोनों देशों के अधिकारियों की पहली बार मुलाकात हुई है। उन्होंने उपराष्ट्रपति, विदेश मंत्री और सेना प्रमुख के साथ मिलकर दीर्घकालीन शांति स्थापित करने के निर्देश भी दिए हैं।

3 वैशाख, काठमाडौं। गुरुवार शाम सोशल मीडिया ट्रुथ पर अपने संदेश में ट्रम्प ने कुछ ही घंटों में 10 दिन के युद्धविराम की सहमति की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, ‘मैंने अभी-अभी लेबनान के माननीय राष्ट्रपति जोसेफ अवाने और इजरायल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतान्याहू से बात की। ये दोनों नेता अपने-अपने देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए 10 दिन के युद्धविराम शुरू करने के लिए सहमत हुए हैं।’

ट्रम्प के अनुसार, इन दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने 34 वर्षों बाद पहली बार वाशिंगटन डीसी में मिलकर बातचीत की, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी शामिल थे। ‘मैंने उपराष्ट्रपति जेडी भान्स, विदेश मंत्री रुबियो और संयुक्त सेना प्रमुख समिति के अध्यक्ष डान कैनी को निर्देश दिया है कि वे इजरायल और लेबनान के बीच दीर्घकालीन शांति स्थापना के लिए काम करें,’ उन्होंने कहा। ट्रम्प ने यह भी बताया कि विश्व में अब तक नौ युद्ध समाधान मेरी प्रतिष्ठा हैं और यह युद्ध समाधान 10वां होगा।

सिंहदरबारभित्र भुर्रभुर्र (तस्वीरहरू) – Online Khabar

सिंहदरबार के भीतर रंग-बिरंगे फूलों का नज़ारा (तस्वीरें)

फूल किराफट्याङ्ग्रा और पक्षियों को भोजन, आकर्षण और सुरक्षित वातावरण प्रदान करते हैं। फूलों के प्रति मानव और पक्षियों की आकर्षितता मानवीय स्वभाव और प्राकृतिक आवश्यकताओं को स्पष्ट करती है। ३ वैशाख, काठमांडू। विभिन्न प्रजाति के रंग-बिरंगे फूलों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खिंचा है। फूलों की सुन्दरता मानवीय जाति को आकर्षित करती है। फूलों के प्रति आकर्षण केवल मानवीय स्वभाव की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि किराफट्याङ्ग्रा से लेकर पक्षी भी इससे आकर्षित होते हैं। पक्षियों के फूलों के प्रति आकर्षण के कई कारण हैं। फूल पक्षियों को भोजन, आकर्षण और सुरक्षित आवास का संयोजन प्रदान करते हैं, जिसके कारण वे स्वाभाविक रूप से फूलों की ओर आकर्षित होते हैं। देश के प्रमुख प्रशासनिक केंद्र सिंहदरबार के भीतर वर्तमान में रंग-बिरंगे फूलों की बहार है। सिंहदरबार के चारों ओर के रंग-बिरंगे फूल भँगेरा, जुरेली, सारौं जैसे पक्षियों का स्वागत करते प्रतीत होते हैं। रंग-बिरंगे फूलों के बीच पक्षी स्वतंत्र रूप से उड़ते हुए आनंदित और प्रसन्न दिख रहे हैं।

यूट्यूब शॉर्ट्स को स्थायी रूप से बंद करने का नया विकल्प जारी

यूट्यूब पर वीडियो देखते हुए ‘शॉर्ट्स’ की अनंत दुनिया में खो जाने और समय व्यर्थ करने की समस्या से अब निजात मिल सकती है। यूट्यूब ने अपनी ‘टाइम मैनेजमेंट’ सुविधा को अपडेट करते हुए उपयोगकर्ताओं को बिना किसी तृतीय पक्ष ऐप के शॉर्ट्स फीड को पूरी तरह से ब्लॉक करने का विकल्प प्रदान किया है। यह सुविधा प्रारंभ में अभिभावकों के लिए जारी की गई थी और अब १६ अप्रैल, २०२६ से सभी उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध हो गई है।

शॉर्ट्स बंद करने का तरीका इस प्रकार है: सेटिंग्स में जाएं: अपने एंड्रॉइड या iOS डिवाइस पर यूट्यूब ऐप खोलें। स्क्रीन के नीचे दाईं ओर स्थित प्रोफाइल आइकन पर टैप करके ‘सेटिंग्स’ में प्रवेश करें। टाइम मैनेजमेंट: सेटिंग्स के अंदर ‘टाइम मैनेजमेंट’ सेक्शन खोलें। यहां यूट्यूब ने उपयोगकर्ताओं का समय बचाने और ध्यान भटकाने वाली समस्याओं को रोकने के लिए विभिन्न विकल्प शामिल किए हैं।

शॉर्ट्स फीड लिमिट ऑन करें: उपलब्ध ‘Shorts feed limit’ विकल्प को ऑन (Toggle on) करें। पहले इसमें कम से कम 15 मिनट की सीमा निर्धारित करनी होती थी, लेकिन नए अपडेट में इसे ‘शून्य’ मिनट पर सेट किया जा सकता है। समय सीमा ‘०’ मिनट करें: अपनी दैनिक सीमा को ‘० मिनट’ पर निर्धारित करें। इस सेटिंग के बाद यूट्यूब तुरंत ही आपके लिए शॉर्ट्स सामग्री दिखाना बंद कर देगा।

यह सुविधा सक्रिय करने के बाद क्या होगा? जब आप समय सीमा को शून्य पर सेट करेंगे, तो यूट्यूब के शॉर्ट्स टैब में कोई वीडियो प्रदर्शित नहीं होगा। इसके स्थान पर “आपने अपने शॉर्ट्स फीड की सीमा पूरी कर ली है” (Reached your Shorts feed limit) संदेश दिखाई देगा। अधिकांश मामलों में आपके होम फीड से भी शॉर्ट्स संबंधित सामग्री हटा दी जाएगी।

हिल्सा क्षेत्र की सीमा पर अतिरिक्त सशस्त्र पुलिस तैनात

३ वैशाख, हुम्ला। सशस्त्र पुलिस ने हुम्ला की उत्तरी नाम्खा गाउँपालिका–५ के हिल्सा नाका इलाके में अतिरिक्त जनशक्ति तैनात की है। यह कदम सीमा क्षेत्र में तैनात सशस्त्र पुलिस बल के बीओपी हिल्सा की सुरक्षा और निगरानी को और मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। नेपाल सरकार के नवीनतम निर्णय के तहत, सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल के ४४ गुल्म हेड क्वाटर से ९ नए पुलिसकर्मी हुम्ला भेजे गए हैं, जिनकी जानकारी सशस्त्र प्रहरी उप निरीक्षक (डीएसपी) पुष्कर सिंह ने दी है।

डीएसपी सिंह ने कहा कि सीमा क्षेत्र में अपराध को कम करने, सीमा की सुरक्षा और चोरी तथा तस्करी नियंत्रण में यह अतिरिक्त जनशक्ति महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि नारा लेक की हिमपात और खतरों को झेलते हुए लगभग ६ घंटे पैदल यात्रा करके यह नई टीम हिल्सा पहुंची है।

इजरायली हमलामा दक्षिण लेबनान जोड्ने अन्तिम पुल पनि ध्वस्त

इजरायली हमले में दक्षिण लेबनान से जुड़ने वाला अंतिम पुल भी ध्वस्त

३ वैशाख, काठमाडौं। इजरायली सेनाले बिहीबार गरेको मिसाइल आक्रमणले दक्षिण लेबनानको अन्तिम सुरक्षित पुल पनि ध्वस्त भएको छ। बीबीसीका अनुसार, नबतिएह शहरमा उक्त आक्रमणपछि ठूलो धुँवाको बादल उठेको छ। लिटानी नदीमाथि रहेको यो पुल नबतिएह शहरमा रहेको छ, जहाँ ४० हजारभन्दा बढी मानिसहरू बसोबास गर्छन्। यस आक्रमणपछि दक्षिणी लेबनानसँग जोड्ने कुनै पनि मार्ग बाँकी नरहेको लेबनानी अधिकारीहरूले जनाएका छन्।

बागमती प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को संवैधानिक संशोधन कर मंत्रियों की संख्या कम करने का सुझाव दिया

बागमती प्रदेश के मुख्यमंत्री इन्द्रबहादुर बानियाँ ने संविधान संशोधन के माध्यम से प्रदेश सरकार में मंत्रियों की संख्या कम करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के साथ हुई चर्चा में कहा कि निर्वाचन प्रणाली में भी सुधार आवश्यक है और मुख्यमंत्री के चुनाव को प्रत्यक्ष कराना चाहिए। इसके अलावा, भूमि, वन तथा पुलिस के अधिकार प्रदेश को देने के लिए संघीय संसद से शीघ्र कानून निर्माण का भी आग्रह किया।

३ वैशाख, काठमांडू। बागमती प्रदेश के मुख्यमंत्री इन्द्रबहादुर बानियाँ ने स्पष्ट किया है कि संविधान संशोधन के द्वारा प्रदेश सरकार में मंत्रियों की संख्या घटाई जानी चाहिए। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के साथ बातचीत में उन्होंने बताया कि संविधान में २० प्रतिशत मंत्री रखने का प्रावधान लागू करने से प्रदेश में अस्वाभाविक रूप से अधिक मंत्री हो जाते हैं और इससे आलोचना भी होती है। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री के साथ चर्चा में मैंने यह धारणा व्यक्त की कि संविधान संशोधन करके प्रदेश मंत्रिपरिषद की संख्या कम करनी चाहिए। प्रदेशसभा के कुल सदस्यों की संख्या के २० प्रतिशत तक मंत्री बनाने का नियम प्रदेशों के लिए आलोचनात्मक साबित हो रहा है। बागमती प्रदेश अपने मंत्रियों की संख्या घटाकर ७ कर रहा है, जिससे शासन व्यवस्था पर होने वाला खर्च कम होगा।’

इस चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री बानियाँ ने उल्लेख किया कि संघीय सरकार संविधान संशोधन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए बातचीत कर रही है और उन्होंने कहा कि चुनाव प्रणाली में भी संशोधन आवश्यक है। उन्होंने कहा, ‘वर्तमान निर्वाचन प्रणाली स्थिरता प्रदान नहीं करती। एक ही दल का बहुमत प्राप्त करना हमेशा संभव नहीं होता। इसलिए मेरा मानना है कि संविधान संशोधन कर मुख्यमंत्री का प्रत्यक्ष चुनाव होना चाहिए। साथ ही, निश्चित भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार समावेशी और समानुपातिक प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।’

उन्होंने बताया कि भूमि, वन तथा पुलिस के अधिकार प्रदेश को न मिलने के कारण सेवाओं में समस्याएँ आ रही हैं। प्रदेश सरकार के पास भूमि का अधिकार नहीं होने से बागमती प्रदेश गत आठ वर्षों से अपनी आवश्यक अवसंरचना भी नहीं बना पाया है। ‘भूमि का अधिकार न होने से अवसंरचना निर्माण में समस्या आ रही है,’ उन्होंने कहा। इस मुद्दे को उन्होंने प्रधानमंत्री के समक्ष सटीक रूप से रखा और संघीय संसद से शीघ्र कानून बनाकर भूमि, वन और पुलिस के अधिकार प्रदेश को देने की मांग की।

प्रधानमंत्री शाह ने बातचीत में काठमांडू को प्रदेश राजधानी हेटौँडा से जोड़ने वाले दक्षिणकाली–सिस्नेरी–भीमफेदी और फर्पिङ–कुलेखानी–भीमफेदी सड़क परियोजनाओं में रुचि दिखाई। मुख्यमंत्री बानियाँ ने बताया कि आगामी वित्तीय वर्ष के भीतर दोनों सड़कों का पुनर्निर्माण पूरा किया जाएगा। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को गरीब वर्ग तक पहुंचाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने हर विद्यालय और अस्पताल में १० प्रतिशत सीटें विपन्न वर्ग के लिए सुरक्षित रखने का प्रतिबद्धता जताई। बानियाँ ने कहा कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कानूनी जटिलताओं और पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन के लिए निर्धारित समय में कार्य पूरा करने के प्रावधानों को लागू करने हेतु संघीय सरकार से सहायता आवश्यक है।

कांग्रेस में प्रमुख प्रतिपक्ष के रूप में भूमिका निर्वाह पर व्यापक विचार-विमर्श

समाचार सारांश

  • नेपाली कांग्रेस ने संसद में मुख्य प्रतिपक्ष की प्रभावी भूमिका निभाने और सरकार के साथ सहयोग करने का निर्णय लिया है।
  • कांग्रेस ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के शासन के संरक्षण के लिए सरकार को सचेत करते हुए नागरिक स्वतंत्रताओं को सीमित न करने का अनुरोध किया है।
  • गौरीबहादुर कार्की आयोग की रिपोर्ट अधूरी और पक्षपाती बताते हुए कांग्रेस ने भदौ २४ की घटनाओं की स्वतंत्र जांच के लिए उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग गठित करने की मांग की है।

३ वैशाख, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस ने प्रमुख प्रतिपक्षी दल के रूप में अपनी भूमिका कैसे निभाई जाए, इस बारे में गंभीर विचार-विमर्श किया है। सभापति गगनकुमार थापा की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय कार्यसम्पादन समिति की बैठक में संसद में प्रमुख प्रतिपक्ष की भूमिका तथा सरकार के साथ संबंधों पर चर्चा की गई।

‘नेपाली जनता ने २००७ साल से लेकर २०८२ तक बार-बार संघर्ष और आंदोलनों के माध्यम से जो स्वतंत्रता, समानता, सम्मान और सहअस्तित्व के मूल्य स्थापित किए हैं, उन्हें लोकतंत्र के उर्वर मैदान में पनपने का दृढ़ विश्वास नेपाली कांग्रेस को है,’ कांग्रेस के निर्णय के पहले बिंदु में कहा गया है, ‘संविधान में दर्ज लोकतंत्र, गणतंत्र, संघीयता, नागरिक सर्वोच्चता, बहुलवाद, शक्ति पृथक्करण, स्वतंत्र न्यायपालिका, अभिव्यक्ति एवं प्रेस स्वतंत्रता, विधि का शासन, मानवाधिकार और भाषाई, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विविधता जैसे मूलभूत मूल्य-मान्यताओं के प्रति कोई समझौता किए बिना कांग्रेस अपने चुनावी घोषणापत्र में उल्लिखित नीतिगत, संस्थागत और संरचनात्मक सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता के साथ संसद में प्रमुख प्रतिपक्ष की भूमिका प्रभावी ढंग से निभाएगी।’

इसके साथ ही सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मजबूत संसदीय परंपराओं को मजबूत करने के लिए कांग्रेस प्रतिबद्ध है। कांग्रेस के फैसले में यह भी कहा गया है, ‘कानून के शासन, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों को संकुचित करने वाले किसी भी कार्य का कांग्रेस समर्थन नहीं करेगी। सरकार को ऐसे कदम उठाने से बचाने के लिए सचेत किया जाएगा।’

कांग्रेस के पूर्ण निर्णय इस प्रकार हैं:

समसामयिक राजनीतिक विषय

१. संसद में प्रमुख प्रतिपक्ष की भूमिका और सरकार के साथ संबंध

  • नेपाली जनता ने २००७ साल से २०८२ तक किए संघर्ष और आंदोलनों से जो स्वतंत्रता, समानता, सम्मान और सहअस्तित्व के मूल्य स्थापित किए हैं, उन्हें लोकतंत्र के उर्वर मैदान में विकसित किया जा सकता है। संविधान में वर्णित लोकतंत्र, गणतंत्र, संघीयता, नागरिक सर्वोच्चता, बहुलवाद, शक्ति पृथक्करण, स्वतंत्र न्यायपालिका, अभिव्यक्ति एवं प्रेस स्वतंत्रता, विधि का शासन, मानवाधिकार तथा भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता जैसे मूल्यों का नैतिक संरक्षण करते हुए कांग्रेस संसद में प्रभावी प्रतिपक्ष की भूमिका निभाएगी।
  • सदाचार, पारदर्शिता, जवाबदेही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मजबूत संसदीय संस्कार – इन पाँच स्तंभों को सुदृढ़ करने के लिए कांग्रेस प्रतिबद्ध होगी। सहिष्णुता, संवाद और सम्मानजनक व्यवहार से संसदीय लोकतंत्र मजबूत होगा। सरकार की कानूनी कार्रवाइयों में समर्थन रहेगा और राष्ट्रीय हितों के साझा मुद्दों पर सहयोग होगा। लेकिन विधि के शासन, नागरिक अधिकारों या लोकतांत्रिक मूल्यों को सीमित करने के किसी भी कदम का कांग्रेस समर्थन नहीं करेगी और सरकार को सचेत किया जाएगा।

२. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र का संरक्षण

  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है। नागरिकों को निर्भय होकर अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार होना आवश्यक है और कांग्रेस इसे मानती है। संविधान हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है, जो लंबे लोकतांत्रिक संघर्ष का परिणाम है। हाल ही में साइबर लिंचिंग के डर के कारण लोग स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने में हिचकिचा रहे हैं, जिससे अभिव्यक्ति स्वतंत्रता सीमित हुई है। कांग्रेस खुला समाज बनाए रखने के लिए निरंतर संघर्ष करेगी।
  • भदौ २३ और २४ की घटनाएं भ्रष्टाचार मुक्त समाज और सुशासन के साथ-साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में भी थीं। वर्तमान सरकार से उम्मीद है कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और खुला समाज बनाए रखेगी, लेकिन कुछ हालिया निर्णय ऐसे संकेत नहीं दे पा रहे हैं। कांग्रेस सरकार को नागरिक स्वतंत्रताओं का संरक्षण करने और विरोधी कदम न उठाने के लिए सचेत करती है।
  • समानता संविधान का मूल है, स्वतंत्रता आधारशिला है और प्रेस स्वतंत्रता मूल अधिकार है। सरकारी और निजी मीडिया के बीच समान व्यवहार से ही प्रेस स्वतंत्रता प्रभावी हो सकती है। निजी मीडिया को सरकारी विज्ञापन से वंचित करना संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है। सरकार से समान व्यवहार करने का आग्रह किया गया है।

३. विधि का शासन और सरकारी संचालन

  • विधि का शासन लोकतंत्र की आधारशिला है। कानून सबके लिए समान रहता है और कोई कानून से ऊपर नहीं है। राज्य कानून के अनुसार जांच कर सकता है और सभी नागरिकों को सहयोग करना चाहिए, यह कांग्रेस की स्पष्ट धारणा है।
  • जांच में उचित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना राज्य की जिम्मेदारी है। पद और सत्ता के दुरुपयोग से भेदभाव लोकतंत्र के लिए चुनौती है। सरकार की सभी कार्रवाइयां कानूनी ढांचे के अंतर्गत होनी चाहिए।
  • आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी वारंट जारी करते समय ठोस सबूत होना आवश्यक है, मगर हाल के समय में यह बिना पर्याप्त तर्क के हो रहा है। यह गैर कानूनी हिरासत और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन कर सकता है। सरकार को जांच निष्पक्ष और पारदर्शी बनानी होगी।

४. संपत्ति जांच

  • कांग्रेस ने २०४८ साल से सार्वजनिक पदों पर रहे उच्च अधिकारियों की संपत्ति जांच आयोग गठित करने, अवैध संपत्ति राष्ट्रीयकरण और २०४६ से २०८२ तक भ्रष्टाचार मामलों की जांच की मांग की है। सरकार ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है, जिस पर कांग्रेस सकारात्मक है और जांच के दायरे को बढ़ाने का आग्रह करती है।
  • सरकार ने मंत्रिपरिषद के निर्णय से आयोग बनाया है, जो स्वायत्त या निष्पक्ष होने की स्थिति में नहीं है। यह कार्यपालिका हस्तक्षेप की संभावना बढ़ाता है। कांग्रेस स्वायत्त और स्वतंत्र आयोग की जरूरत पर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराती है।
  • प्रधानमंत्री और मंत्रियों की संपत्ति सार्वजनिक होने के बाद स्रोत और कर संबंधी प्रश्न उठे हैं। सार्वजनिक पद पर आकर संपत्ति सार्वजनिक करना कानूनी कर्तव्य है और स्रोत स्पष्ट करना नैतिक जिम्मेदारी है, यह कांग्रेस का दृष्टिकोण है।

५. गौरीबहादुर कार्की आयोग की रिपोर्ट और २०८२ भदौ २३-२४ की घटनाओं की निष्पक्ष जांच एवं दोषियों को सज़ा

गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व वाले आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक न करना गलत है। कांग्रेस इसे तत्काल विधिसम्मत रूप में सार्वजनिक करने की मांग करती है। मानव अधिकार आयोग की रिपोर्ट को भी जल्दी सार्वजनिक करने का आग्रह किया गया है।

रिपोर्ट आधिकारिक और औपचारिक न होने तक उससे कार्रवाई सही नहीं होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता यदुनाथ खनाल की अध्यक्षता में गठित समिति ने रिपोर्ट का अध्ययन कर सुझाव दिया है।

समिति की सिफारिशों के अनुसार कांग्रेस ने निर्णय लिया:

  • आयोग का मूल दायित्व भदौ २३ और २४ की घटनाओं की तथ्यात्मक जांच है। पर रिपोर्ट में नीति और अभियोजन से जुड़ी सिफारिशें मिली हुई हैं और आयोग राजनीतिक एवं संरचनात्मक विषयों में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर गया है।
  • रिपोर्ट ने भदौ २३ की घटनाओं को अधिक प्राथमिकता दी है जबकि भदौ २४ की घटनाओं को सतही तौर पर प्रस्तुत किया गया है, जिससे संतुलन पर प्रश्न उठता है। यह गंभीर घटनाओं की पर्याप्त जांच नहीं हुई दिखाता है।
  • आयोग की सिफारिशों को कानूनी परीक्षण के बाद ही लागू किया जाना चाहिए। आयोग को न्यायिक निकायों जैसा मानना संविधान और न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
  • सरकार का चयनात्मक व्यवहार गलत है। समान दिन की समान घटनाओं में अलग कदम उठाना उचित नहीं है। इससे स्थापित कानूनी प्रक्रिया के बाहर कार्रवाई हो सकती है।
  • इसलिए कांग्रेस मानती है कि गौरीबहादुर कार्की आयोग की रिपोर्ट अपूर्ण, पक्षपाती और चयनात्मक है। पर्याप्त जांच न होने के कारण पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया है। अतः भदौ २४ की घटनाओं की स्वतंत्र और उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग से जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही संसदीय निगरानी के लिए विशेष समिति गठित की जानी चाहिए।

६. पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि को कम करने संबंधी

मध्यपूर्व संकट ने नेपाली जनता के दैनिक जीवन, व्यवसाय, रोजगार और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर असर डाला है। पेट्रोलियम उत्पादों और गैस की बढ़ी हुई कीमतों ने कृषि, पर्यटन और परिवहन क्षेत्रों में संकट बढ़ाया है।

इस संदर्भ में सरकार से कांग्रेस निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह करती है:

१. बढ़ी हुई कीमतों पर लागू किए गए मूल्य अभिवृद्धि कर में राहत या वापसी की जाए। जनता को महंगी कीमतों से बचाने के लिए पुराने कर दरों पर अस्थायी राहत दी जाए।

२. विभिन्न करों को आंशिक या पूर्ण रूप से कम या हटाने की व्यवस्था की जाए, जैसे पूर्वाधार विकास कर की समाप्ति और अन्य करों में कमी।

३. आयात पर लगने वाले करों के कारण नेपाल आयल निगम को महंगे दामों पर खरीदना पड़ रहा है। VAT की वापसी या छूट स्पष्ट की जाए।

४. वर्तमान कीमत वृद्धि को ध्यान में रखते हुए समग्र कर दरों की समीक्षा कर कमी की व्यवस्था की जाए। विशेषकर छात्रों के यातायात खर्च पर भी विशेष छूट प्रदान की जाए।

७. भ्रातृ संस्थाओं के संबंध में

भ्रातृ संस्थाओं और प्रवासी जनसम्पर्क समितियों की वर्तमान स्थिति का अध्ययन कर आवश्यक सुझावों सहित रिपोर्ट पारित की गई है।

८. सक्रिय सदस्यता के संबंध में

कांग्रेस के विधान, २०१७ के अनुसार सक्रिय सदस्यता अद्यतन करने की प्रक्रिया में विभिन्न निर्णय लिए गए हैं। नई सदस्यता प्रदान और नवीनीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

क) १४वें महाधिवेशन के सक्रिय सदस्यताओं का नवीनीकरण किया जाएगा।

ख) नए इच्छुक सदस्यों को विधान के अनुसार सदस्यता प्रदान की जाएगी।

                                                                                                      देवराज चालिसे

                                                                                               प्रवक्ता

पाकिस्तानी सेनाप्रमुख तेहरान में, ईरानी सभामुख गालिबाफ से मुलाकात

३ वैशाख, काठमाडौं। पाकिस्तान के सेनाप्रमुख फील्ड मार्शल असिम मुनीर ने बुधवार को ईरानी संसद के सभापति मोहम्मद बाघर गालिबाफ से मुलाकात की है। मध्य पूर्व में युद्ध को रोकने के मध्यस्थ के रूप में सक्रिय मुनीर गुरूवार को ईरान पहुंचे थे। वहां उन्होंने ईरान की ओर से शांति वार्ता टीम का नेतृत्व करने वाले सभामुख गालिबाफ से बातचीत की, जिसकी जानकारी ईरानी सरकारी टेलीविजन ने दी।

सरकारी टेलीविजन के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध को समाप्त करने के लिए और वार्ता करने का दबाव बनाने के उद्देश्य से मुनीर ईरान दौरे पर गए हैं। ‘कल ईरान पहुंचे पाकिस्तानी सेनाप्रमुख मुनीर ने ईरानी सभामुख गालिबाफ से मुलाकात और संवाद किया है,’ गुरूवार की सुबह की रिपोर्ट को उद्धृत करते हुए ईरानी टेलीविजन ने कहा। मुनीर के प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान में हुई अन्य बैठकों के बारे में अभी कोई अन्य विवरण जारी नहीं किया गया है। ईरानी टेलीविजन ने शांति योजना के प्रस्ताव को अमेरिका द्वारा भेजे गए संदेश के रूप में व्याख्यायित किया है। इससे पहले पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता विफल हुई थी। पिछले कुछ दिनों से दोनों पक्षों ने वार्ता की संभावनाओं को फिर से व्यक्त किया है।

टोरन्टोमा गुञ्जियो ‘गाउँ गाउँबाट उठ’, अमृत गुरुङ भन्छन्- नयाँले यो गीतको मर्म बिर्सनुभएन

टोरंटो में ‘गांव गांव से उठ’ गीत गूंजा, अमृत गुरुङ ने नई पीढ़ी को गीत का मर्म न भूलने की सलाह दी

समाचार सारांश: २२ वर्षीया रिया बस्नेत कैंसर के चौथे चरण में होने के बावजूद नेपथ्य के कॉन्सर्ट में भाग लेकर सफलता पूर्वक नृत्य कर पाई। नेपथ्य का कनाडा टूर टोरंटो कॉन्सर्ट दो सप्ताह पहले ही टिकट ‘सोल्डआउट’ हो चुका था। कांसर्ट के बाद टीम १८ अप्रैल को ओंटारियो के लंदन म्यूजिक हॉल में अगला कार्यक्रम करने की तैयारी में है।
टोरंटो (कनाडा) – क्वीन एलिजाबेथ थिएटर से बाहर निकलते वक्त दर्शकों के चेहरे पर खुशी की चमक साफ नजर आ रही थी। पर तब सबमें सबसे अलग स्थिति २२ वर्षीया रिया बस्नेत की थी। वे झापाको बिर्तामोड की वाणिज्यशास्त्र की स्नातक हैं और कैंसर के चौथे चरण से जूझ रही हैं। दो बार शल्यक्रिया और विभिन्न चिकित्सा उपचार के बावजूद नेपथ्य के अपने पसंदीदा बैंड के कॉन्सर्ट में शामिल होना उनके लिए बेहद कठिन था। खड़े रहना भी मुश्किल था और नाचना लगभग असंभव।
लेकिन सोमवार शाम वे टोरंटो के हाउसफुल हॉल में पहुंचीं। बैठना न चाहने पर उन्होंने अपने लिए नृत्य स्थल तक पहुंचने की व्यवस्था कराई और नाचने में सफल रहीं। ‘मेरे शरीर की स्थिति के कारण मैं वहां नाच रहे अन्य दर्शकों से अलग थी,’ रिया ने कहा, ‘मेरे बचपन से देखे गए सपनों के हर क्षण को मैं अपने भीतर संघर्ष करते हुए जी रही थी।’
कैंसर ने उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डाला है और वे अभी डिप्रेशन की दवाइयां भी ले रही हैं। ‘गहरी अंधकार में थोड़ी सी रोशनी का महत्व मैं कैसे बयां करूँ?’ रिया ने कहा, ‘मैं इस पावन पल को जिंदगी का अंतिम सांस तक संजो कर रखूंगी।’
टोरंटो, कनाडा जैसे व्यस्त व्यावसायिक शहर में आयोजित नेपथ्य के शो के लिए दो सप्ताह पहले टिकट ‘सोल्डआउट’ हो चुका था। पुलिस के बीच भी नाच रहे दर्शकों का व्यवहार एक जैसा था, पर उनमें से कुछ की परिस्थितियां अलग थीं, जैसे दूसरी दर्शक सोनिया तिवारी।
उत्तर अमेरिका में लम्बे समय से बसने वाले नेपाली परिवार की तीसरी पीढ़ी की सोनिया पहले कभी किसी नेपाली कॉन्सर्ट में नहीं गई थीं। ‘मेरे जन्म से पहले ही घर में नेपथ्य के गीत बजते थे, मैं उन्हीं गीतों को सुनकर बड़ी हुई हूँ,’ सोनिया ने कहा, ‘गायक अमृत स्टेज से हर दर्शक में इतनी ऊर्जा पैदा करते हैं कि आत्मा छू जाती है, मैं इसे कल्पना भी नहीं कर सकती थी।’
भले ही यह नेपाली कार्यक्रम था, पर हर सेकंड का महत्व दिया गया और अत्यंत व्यवस्थित तरीके से इसे संचालित किया गया। इसी अनुभव के कारण सोमवार शाम कॉन्सर्ट खत्म होने के बाद भी दर्शक तुरंत हॉल छोड़ना नहीं चाहते थे, बल्कि कलाकारों को ‘नेपथ्य, नेपथ्य’ कहते हुए लंबे समय तक नारे लगा रहे थे। उस समय हर तरफ नेपाली झंडे लहरा रहे थे।
मंच पर गाए गए गीतों के अलावा हर संदेश ने भी दर्शकों को ऊर्जा और उत्साह दिया, जैसे गायक अमृत गुरुङ के ‘गांव गांव से उठ’ गीत से पहले का मन्तव्य। ‘यह गीत नेपाल के सभी आंदोलनों में बजा और सत्ता परिवर्तन हुआ,’ अमृत ने गीत से पहले कहा, ‘पर बार-बार सत्ता में आने वालों ने इस गीत के मर्म को भुला दिया।’
अमृत ने ‘हाल की जेन-जी आंदोलन’ बताकर कहा, ‘पहले की तरह नई पीढ़ी को भी इस गीत का अर्थ भूलना नहीं चाहिए। यह गीत श्याम तमोट ने पञ्चायती व्यवस्था के विरोध में लिखा था और मन्जुल-रामेश ने गाया था। अगर गलती दोहराई गई तो नेपाली फिर से गांव गांव, बस्ती बस्ती से उठकर सचेत होंगे।’
उस समय दर्शकों से बड़ी सहमति और उत्साह के स्वर सुनाई दिए। यही नहीं, पूरे कॉन्सर्ट के दौरान कलाकार दर्शकों की इसी ऊर्जा और प्रोत्साहन से भरे रहे।
‘एक के बाद दूसरा गीत बज रहा था और पुराने स्मृतियों में खो जाने का अवसर मिला,’ काठमांडू से टोरंटो आकर मेडिकल लैब तकनीशियन समीर श्रेष्ठ ने कहा।
टोरंटो में नेपथ्य के कॉन्सर्ट को देखने के लिए दूर-दूर से कई दर्शक आए थे, जिनमें वैंकूवर से आए अनुप घिमिरे भी थे।
‘मेरे जीवन में पहली बार नेपथ्य का कॉन्सर्ट है,’ पोखरा से संचार में स्नातक अनूप ने कहा, ‘प्रस्तुति, हॉल का माहौल और कार्यक्रम की व्यवस्था देखकर मैं दूर से आने का एहसास ही नहीं हुआ।’
जॉर्ज ब्राउन कॉलेज की स्नातक उज्वला प्रधान ने बताया कि कॉन्सर्ट ने उन्हें उनकी जड़ों की याद दिलाई। ‘यह एक रोमांचक और पुराने अनुभवों की मिठास भरी कहानी जैसी थी,’ उन्होंने कहा, ‘नेपथ्य ने अपनी संस्कृति लेकर हमें घर की याद दिलाई।’
सिक्किम से आई उज्वला बताती हैं कि बैंड की जोशीली प्रस्तुति से सभी दर्शक नाच उठे।
नेपथ्य ने अपने प्रस्तुति को ‘रातो र चन्द्रसुर्जे’ गीत से समाप्त किया। मंच पर अमृत के साथ ध्रुव लामा (ड्रमसेट), सुविन शाक्य (बेस गिटार), नीरज गुरुङ (गिटार), शांति रायमाझी (मादल) और दिनेशराज रेग्मी (कीबोर्ड) थे।
‘विदेशी धरती पर इतनी नेपाली प्रस्तुति दुर्लभ है,’ आयोजक छिरिंग शेर्पा ने उम्मीद जताई, ‘पूरा हॉल आनंदित हुआ देखकर इस तरह के कॉन्सर्ट आयोजित करने पर गर्व होता है।’
इस प्रस्तुति के बाद १४ सदस्यीय कलाकार, तकनीशियन और प्रबंधन टीम कनाडा यात्रा के दौरान ओंटारियो राज्य के लंदन प्रस्थान करेगी। टोरंटो से लगभग दो सौ किलोमीटर दूर लंदन म्यूजिक हॉल में १८ अप्रैल को कॉन्सर्ट होगा। एलिजाबेथ हॉल में पहले से ही टिकट बिक चुके हैं, इसलिए आयोजकों को विश्वास है कि टोरंटो के दर्शक लंदन में भी शामिल होंगे।
कांसर्ट के लिए ऑनलाइन टिकट खरीदी की सुविधा नेपालय द्वारा उपलब्ध कराई गई है। नेपथ्य की वेबसाइट पर जाकर अपना सीट सुरक्षित किया जा सकता है।

रूपन्देही में नकली नोट के साथ चार गिरफ्तार

रूपन्देही पुलिस ने नकली नोट के साथ चार लोगों को गिरफ्तार कर सार्वजनिक किया है। गिरफ्तार किए गए लोग कपिलवस्तु, नवलपरासी, सिन्धुपाल्चोक और काठमांडू के निवासी हैं। ये व्यक्ति चैत २२ और २६ तारीख को सिद्धार्थनगर और सैनामैना क्षेत्रों में एक हजार रुपये के २१ नकली नोटों के साथ पकड़े गए हैं।

जिला पुलिस कार्यालय रूपन्देही की टीम ने नकली नोटों के साथ चार लोगों को गिरफ्तार कर इस गिरफ्तारी की जानकारी दी है। पुलिस की जानकारी के अनुसार, पकड़े गए व्यक्तियों में कपिलवस्तु के वाणगंगा नगरपालिका-२ के ३६ वर्षीय विष्णु श्रेष्ठ, नवलपरासी (पूर्व) के देवचली नगरपालिका-१५ के २८ वर्षीय सुजन खनाल जिसे मुक्तिप्रसाद खनाल भी कहा जाता है, सिन्धुपाल्चोक के चौतारा साँगाचोकगढी नगरपालिका-८ के ३५ वर्षीय रोलबहादुर श्रेष्ठ और काठमांडू के बूढानीलकण्ठ नगरपालिका-९ के ५३ वर्षीय दीपेन्द्र थापा शामिल हैं।

जिला पुलिस कार्यालय के सूचना अधिकारी एवं पुलिस उपनिरीक्षक कृष्णकुमार चन्द के अनुसार, जिले के विभिन्न स्थानों पर नकली नेपाली नोटों का अवैध कारोबार हो रहा था, जिसकी पुलिस को विशेष सूचना मिली थी। इसके आधार पर जिला पुलिस कार्यालय और उसके अधीनस्थ कार्यालयों की टीम ने निगरानी के तहत चैत २२ को सिद्धार्थनगर नगरपालिका-५ (भैरहवा) और चैत २६ को सैनामैना नगरपालिका-१० के भच्कैया क्षेत्र से एक हजार रुपये के २१ नकली नोटों के साथ चार लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए चारों को सार्वजनिक कर दिया गया है और इस संबंध में जांच जारी है।

प्रधानमन्त्री को मुख्यमन्त्री बानियाँ का सुझाव – औषधीय उपयोग के लिए गांजा के प्रयोग की अनुमति दी जाए

३ वैशाख, काठमाडौं। बागमती प्रदेश के मुख्यमन्त्री इन्द्रबहादुर बानियाँ ने औषधीय उपयोग के लिए गांजा के प्रयोग का अधिकार स्वीकृत करने का प्रस्ताव रखा है। सिंहदरबार स्थित प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय में गुरुवार प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाह के साथ हुई बैठक में मुख्यमन्त्री बानियाँ ने संघीय सरकार से कानूनी रूप से इस अधिकार को प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया।

‘गांजा में औषधीय गुण मौजूद हैं। सिंहदरबार के वैद्यखाने में भी औषधि के रूप में गांजा का उपयोग होता है, तो इसे कानूनी रूप से व्यवस्थित क्यों न किया जाए?’ प्रधानमन्त्री को सुझाव देते हुए उन्होंने कहा, ‘शुरुआत पकेट क्षेत्र के रूप में मकवानपुर सहित कुछ जिलों से की जा सकती है। संघ, प्रदेश और स्थानीय सरकारों के बीच समन्वय और नियमन तथा अनुगमन के उचित प्रबंध के साथ गांजा के उपयोग के लिए रास्ता खोलना चाहिए।’

संविधानको फ्रेम बाहिर गएर केही गर्दैनौं : अर्थमन्त्री वाग्ले

संविधान के ढांचे से बाहर कुछ भी लागू नहीं करेंगे: अर्थमंत्री वाग्ले

३ वैशाख, काठमाडौं। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार संविधान के प्रति पूरी प्रतिबद्धता रखती है। उन्होंने बिहीवार को अर्थ मंत्रालय में आयोजित अंतर सरकारी वित्त परिषद की बैठक में कहा कि सरकार ने संविधान के ईमानदारी से क्रियान्वयन में पहल की है और आवश्यक सुधार संविधान के अनुसार ही किए जाएंगे। कुछ मीडिया ने यह अटकलें लगाईं कि सरकार प्रचण्ड बहुमत के आधार पर संविधान में बदलाव या हटाने की संभावना तलाश रही है, लेकिन उन्होंने ऐसी आशंकाओं को निराधार बताया।