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लेखक: space4knews

लेबनानी सेनाने इजरायल पर युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाया

लेबनानी सेनाने इजरायल पर युद्धविराम उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। सेना ने कहा है कि इजरायल ने अनेक बार गोलीबारी और हमला किया है। विस्थापित नागरिकों को दक्षिणी गांवों में लौटते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। ४ वैशाख, काठमांडू। लेबनान ने इजरायल पर युद्धविराम उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। लेबनानी सेना ने इजरायल के साथ हुए युद्धविराम समझौते का कई बार उल्लंघन होने की बात कही है। सोशल मीडिया एक्स पर की गई पोस्ट में सेना ने लेबनानी गांवों में इजरायल के कई हमलों को ‘रिकॉर्ड’ किया गया बताया है।

लेबनानी सेना ने इजरायल की ओर से कई बार गोलीबारी हुई जानकारी दी है। सेना ने विस्थापित नागरिकों से दक्षिणी क्षेत्र के गांवों में लौटते समय सतर्क रहने और खतरनाक इलाकों से दूर रहने का आग्रह किया है। इजरायल के साथ युद्धविराम की घोषणा के बाद हमलों के कारण लेबनान से विस्थापित हुए लोग अपने घरों को लौटने लगे हैं। युद्धविराम के बाद लेबनान में नागरिकों ने खुशी के साथ उत्सव मनाए हैं।

ट्रम्प का दावा: इरान युद्ध जल्द खत्म होगा, इजरायल-लेबनान के बीच युद्धविराम लागू

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इरान युद्ध जल्द ही समाप्त होने का दावा किया है। नवादा में कर दिवस की चर्चा के दौरान युद्ध से संबंधित संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए ट्रम्प ने कहा, “यह बहुत जल्द समाप्त हो जाना चाहिए।” उन्होंने इस पर अधिक व्याख्या नहीं की, लेकिन बताया कि युद्ध अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा है। ट्रम्प ने अमेरिकी सेना द्वारा रॉकेट हमले की प्रशंसा भी की। पिछले सप्ताहांत अमेरिका और इरान के बीच इस्लामाबाद में हुई वार्ता असफल रही थी। हालांकि पाकिस्तान सहित मध्यस्थकर्ता दूसरे चरण की वार्ता के लिए पहल कर रहे हैं। व्हाइट हाउस ने संभावित दूसरे चरण की शांति वार्ता पर चर्चा हो रही होने की पुष्टि की है, लेकिन तारीख और स्थान अभी निर्धारित नहीं हुए हैं।

इजरायल और लेबनान के बीच १० दिनों का युद्धविराम समझौता लागू हो गया है। अमेरिका ने बताया है कि यह युद्धविराम लंबे समय तक टिक सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू ने आशा व्यक्त की है कि यह समझौता लेबनान के साथ “ऐतिहासिक समझौते के लिए” एक अवसर प्रदान करेगा। इरान समर्थित हीज़बुल्लाह ने भी युद्धविराम का पालन करने की पुष्टि की है। इस लड़ाकू समूह ने कहा है कि लेबनान की जमीन पर आक्रमण रोकने और इजरायली सेना द्वारा भी वहां गतिविधि बंद करने पर सहमति होनी चाहिए।

इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान के १० किलोमीटर के भीतर “सुरक्षा क्षेत्र” तक सीमित रहेगी। इस प्रस्ताव को हीज़बुल्लाह ने अपनी मांगे के विपरीत माना है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि समझौते के अनुसार लेबनानी सरकार को हीज़बुल्लाह द्वारा इजरायल पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए “महत्वपूर्ण कदम” उठाने होंगे। युद्धविराम लागू होते ही इजरायल डिफेंस फोर्सेस (आईडीएफ) ने जारी बयान में कहा कि पिछले २४ घंटों में हीज़बुल्लाह के ३८० निशानों पर हमले किए गए हैं।

लेबनान सेना ने बताया है कि उनके ग्रामीण क्षेत्र में इजरायली हमले अभी भी जारी हैं और इससे युद्धविराम का उल्लंघन हो रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने हीज़बुल्लाह से भी युद्धविराम का पालन करने का आह्वान किया है। उन्होंने इजरायल और लेबनान के नेताओं को व्हाइट हाउस में बुलाने की बात कही है। लेकिन अब आगे क्या होगा यह अभी स्पष्ट नहीं है।

इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम लागू होने के साथ ही शुक्रवार को एशियाई बाजारों में तेल की कीमत में गिरावट आई है। विश्वसामान्य ‘ब्रेंट’ कच्चे तेल की कीमत लगभग एक प्रतिशत घटकर ९८.५० अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार हुई है। अमेरिका से व्यापारित तेल की कीमत में भी गिरावट देखी गई है।

ओझेलमा परेका कला उजागर – Online Khabar

ओझेल में पड़े कला और सांस्कृतिक धरोहर का पुनःप्रकाश

४ वैशाख, तेह्रथुम। तेह्रथुम की पहाड़ी भौगोलिक क्षेत्र में छिपी मौलिक कला, परंपराएं और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करने के उद्देश्य से यहाँ आयोजित तीन दिवसीय हस्तकला गोष्ठी तथा चित्रकला कार्यशाला ने स्थानीय स्तर पर सृजनात्मक चेतना की एक नई लहर पैदा की है। पारंपरिक कौशल और स्थानीय पहचान को आधुनिक अभिव्यक्ति से जोड़ने के प्रयास में संचालित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया है कि कला केवल सृजन का माध्यम नहीं बल्कि समाज और पहचान का दर्पण भी है। नेपाल ललितकला प्रज्ञा प्रतिष्ठान, नक्साल, काठमांडू के आयोजन में एवं म्याङ्लुङ नगरपालिका के सहयोग से सम्पन्न इस कार्यशाला में जिले के विभिन्न स्थानों से कलाकार, विद्यार्थी और कला के प्रति रुचि रखने वाले व्यक्तियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

तीन दिन तक चले इस कार्यक्रम ने स्थानीय संसाधनों के उपयोग से हस्तकला निर्माण और चित्रकला की व्यावहारिक अभ्यस्तता में केंद्रित होकर प्रतिभागियों को कौशल और सृजनशीलता बढ़ाने का अवसर प्रदान किया। तेह्रथुम के ऐतिहासिक स्थल, ग्रामीण जीवनशैली और मौलिक संस्कृति को कैनवास पर उतारने का अभ्यास सहभागी कलाकारों द्वारा किया गया। इस सम्बन्ध में नेपाल ललितकला प्रज्ञा प्रतिष्ठान के मूर्तिकला विभाग के सदस्य जंग पहाड़ी ने बताया कि स्थानीय कला, कौशल और ऐतिहासिक धरोहर को चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

उनके अनुसार, ऐसे गतिविधियाँ ओझेल में पड़े संभावनाओं को उजागर करते हुए स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। प्रतिष्ठान के कुलपति नारदमणि हार्तम्छाली ने उल्लेख किया कि कला सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का सशक्त माध्यम है, तथा कला के माध्यम से समाज को जोड़ने के उद्देश्य से ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि परंपरागत मूल्यों और आधुनिक सृजनशीलता के संयोजन से ही स्थिर सांस्कृतिक विकास संभव है। कार्यशाला का एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष स्थानीय विषयवस्तु का प्रोत्साहन भी है। प्रतिष्ठान के चित्रकला विभाग प्रमुख संजय बान्तावा के अनुसार, स्थानीय परिवेश, संस्कृति और जीवनशैली आधारित सृजन शक्ति ही समुदाय की वास्तविक पहचान को प्रतिबिंबित कर सकती है। ‘स्थानीय विषयवस्तु पर आधारित कला सृजन हमारी मौलिकता की रक्षा करता है और आने वाली पीढ़ियों तक उसे हस्तांतरित करने में मदद करता है,’ उन्होंने कहा। यह कार्यशाला केवल कौशल विकास तक सीमित नहीं रहकर तेह्रथुम में छिपी प्रतिभाओं को उजागर करने का एक महत्वपूर्ण मंच भी बनी है। स्थानीय स्तर पर ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता से कला और संस्कृति की संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन के विकास में भी सहारा मिलने की अपेक्षा की जा रही है।

विदेश से लौटे भीम भण्डारी ने घुम्ती गोठ से आत्मनिर्भरता हासिल की

बहरीन से स्वास्थ्य समस्याओं के कारण लौटने वाले भीम भण्डारी आठ वर्षों से चलाए जा रहे बकरीपालन व्यवसाय से आत्मनिर्भर हो गए हैं। भीम भण्डारी के गोठ में वर्तमान में 150 स्थानीय खरी जात की बकरियां हैं और वार्षिक 15 से 20 बकरे-बकरियाओं की बिक्री होती है। धवलागिरि गाउँपालिका ने महामारीजन्य संक्रमण पीपीआर के खिलाफ टीका और तकनीकी सेवा प्रदान की है, जबकि भण्डारी दंपती ने नि:शुल्क उपचार और पशु बीमा की मांग की है। 4 वैशाख, म्याग्दी।

रोजगार की खोज में बहरीन गए धवलागिरि गाउँपालिका-3 फलीयागाँव के 39 वर्षीय भीम भण्डारी को स्वास्थ्य समस्याओं के कारण चार साल में ही घर लौटना पड़ा। तीन संतान, वृद्ध अभिभावकों, भाई-बहनों की पढ़ाई और घर के खर्च चलाते हुए भीम ने विदेश से लौटने पर निराशा का सामना किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। विदेश से बेरोजगार लौटे भीम ने बकरीपालन का योजना बनाया। आठ साल पहले शुरू किया गया घुम्ती गोठ बकरीपालन व्यवसाय उनके लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का जरिया बना।

“विदेश से लौटते वक्त घर का खर्च कैसे पूरा करूंगा, इस चिंता में था,” उन्होंने व्यक्त किया, “घुम्ती गोठ में बकरीपालन शुरू करने के बाद रोजगार और घर चलाने के लिए दूसरों पर निर्भर न होने का एहसास हुआ।” भीम ने अपने पूर्वजों द्वारा चलाए जा रहे बकरीपालन पेशे को व्यवस्थित करते हुए इसे जारी रखा। 50 बकरियों से शुरू हुआ गोठ अब बढ़कर 150 स्थानीय खरी जात की बकरियों तक पहुंच चुका है। उनकी पत्नी विपना भी इस प्रयास में साथ दे रही हैं। वार्षिक 15 से 20 बकरियाँ और मवेशी बिक्री कर रहे भण्डारी दंपती बकरीपालन से संतुष्ट हैं।

नेपाल की ‘बफर स्टेट’ संकल्पना और कूटनीतिक विवाद

नई सरकार द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रीय प्रतिबद्धता पत्र के मसौदे में नेपाल को ‘बफर स्टेट’ के रूप में चित्रित किया गया है। इस पर कूटनीतिक विशेषज्ञों ने देश की संप्रभुता को प्रतिबंधित करने की आशंका जताते हुए इसे संशोधित करने की मांग की है। दो प्रतिस्पर्धी शक्तियों के बीच स्थित होकर सीधे संघर्ष का जोखिम कम करने के लिए छोटे देशों को ‘बफर स्टेट’ के रूप में परिभाषित किया जाता है। लेकिन सरकार द्वारा इस सप्ताह जारी प्रतिबद्धता पत्र में नेपाल को ‘बफर स्टेट’ से भारत और चीन को जोडऩे वाले ‘ब्राइट ब्रिज’ यानी गतिशील पुल में बदलने का संकल्प व्यक्त किया गया है।

इस शब्दावली को लेकर दो पूर्व विदेश मंत्रियों सहित कूटनीतिक विशेषज्ञों ने असंतोष प्रकट किया है और मसौदे के अंतिम रूप देने के दौरान उक्त शब्द को हटाने की उम्मीद है। एक पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि भारत और चीन दोनों त्रिपक्षीय साझेदारी की अवधारणा को अस्वीकार करते हैं, इसलिए नेपाल को अपने राष्ट्रीय हितों को केंद्र में रखकर प्राथमिकताएं निर्धारित करनी चाहिए। अनौपचारिक रूप से प्रयुक्त यह शब्द सरकारी दस्तावेज में आने के कारण, चीन, भारत और नेपाल के बीच त्रिपक्षीय साझेदारी बनाने, संबंधों के नेटवर्क का विस्तार करने और दोनों महाशक्तियों के बीच नेपाल को पुल के रूप में स्थापित करने की धारणा सार्वजनिक हुई, जिसे काठमांडू के शीर्ष नेतृत्व ने पहले भी व्यक्त किया था।

हालांकि इस बार सभी पार्टियों के घोषणापत्रों के आधार पर तैयार सरकारी दस्तावेज में ही नेपाल को ‘बफर स्टेट’ के रूप में चिन्हित करने के प्रयास को देखकर, राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी नेतृत्व वाली सरकार के इस कदम पर कूटनीतिक जानकारों ने असंतोष जताया है। नेपाल में दो पूर्व प्रधानमंत्री के सलाहकार भी रह चुके कूटनीतिज्ञ दिनेश भट्टराई ने कहा, “ऐतिहासिक रूप से हम संप्रभु राष्ट्र हैं और किसी भी परिस्थिति में किसी और की सुरक्षा छत्रछाया में रहना नहीं चाहते।”

यस्तो छ आजका लागि तरकारी र फलफूलको मूल्य – Online Khabar

आजका लागि तरकारी र फलफूल के मूल्य विवरण

४ वैशाख, काठमाडौं । कालीमाटी फलफूल तथा तरकारी बजार विकास समितिले आज कृषिउपज के थोक मूल्य निर्धारित किए हैं। समिति के अनुसार गोलभेंडा बड़ा (भारतीय) प्रति किलो ८०, गोलभेंडा छोटा (लोकल) प्रति किलो ४४, गोलभेंडा छोटा (भारतीय) प्रति किलो ४४, गोलभेंडा छोटा (तराई) प्रति किलो ४८, आलू रातो प्रति किलो २४ और आलू रातो (भारतीय) प्रति किलो २४ तथा प्याज सूखा (भारतीय) प्रति किलो ३७ निर्धारित किए गए हैं। साथ ही, गाजर (लोकल) प्रति किलो ५०, गाजर (तराई) प्रति किलो ३५, बन्दा (लोकल) प्रति किलो ६०, काउली स्थानीय प्रति किलो ५५, काउली स्थानीय (ज्यापु) प्रति किलो ७०, लाल मूली प्रति किलो ३५, सफेद मूली (हाइब्रिड) प्रति किलो ३०, भन्टा लाम्चो प्रति किलो ६० और भन्टा डल्लो प्रति किलो ७० बताए गए हैं।

इसी प्रकार, बोडी (तना) प्रति किलो १००, मटरकोसा प्रति किलो ८०, घिउ सिमी (लोकल) प्रति किलो ६०, घिउ सिमी (हाइब्रिड) प्रति किलो ५०, घिउ सिमी (राजमा) प्रति किलो १२०, टाटेसिमी प्रति किलो १२०, भटमास कोसा प्रति किलो २२८, तीते करेला प्रति किलो ८०, लौका प्रति किलो २० मूल्य निर्धारित हैं। परवर (लोकल) प्रति किलो १००, चिचिन्डो प्रति किलो ७०, घिरौँला प्रति किलो ५०, फर्सी पाकी प्रति किलो ६०, हरियो फर्सी (लाम्चो) प्रति किलो ३०, हरियो फर्सी (डल्लो) प्रति किलो ४०, भिन्डी प्रति किलो ८०, बरेला प्रति किलो ९०, पिँडालु प्रति किलो ५० और स्कुस प्रति किलो ६० तय किए गए हैं।

रायोसाग प्रति किलो ६०, पालुङ्गो प्रति किलो १००, चमसुर प्रति किलो १२०, तोरीसाग प्रति किलो ४०, मेथी प्रति किलो १२०, हरियो प्याज प्रति किलो ८०, बकुला प्रति किलो ५०, च्याउ (कन्य) प्रति किलो १८०, च्याउ (डल्ले) प्रति किलो ४००, राजा च्याउ प्रति किलो ३०० और सिताके च्याउ प्रति किलो १,००० तय किए गए हैं। कुरिलो प्रति किलो ४५०, निगुरो प्रति किलो ८०, ब्रोकॉली प्रति किलो ६०, चुकुंदर प्रति किलो ५०, सजीवन प्रति किलो १२०, कोइरालो प्रति किलो ३७०, लाल बन्दा प्रति किलो ४०, जीरीका साग प्रति किलो १२०, ग्याठकोभी प्रति किलो ५०, पार्सले प्रति किलो २२८०, सौंफ का साग प्रति किलो ११०, पुदिना प्रति किलो १५०, गान्टेमुला प्रति किलो ५०, इमली प्रति किलो १८०, तामा प्रति किलो १५०, तोफु प्रति किलो १५० और गुन्द्रुक प्रति किलो २५० निर्धारित हैं।

स्याउ (झोले) प्रति किलो २५०, स्याउ (फुजी) प्रति किलो ३२०, कागती प्रति किलो ३२०, अनार प्रति किलो ३८०, अंगूर (हरा) प्रति किलो २३०, अंगूर (काला) प्रति किलो ३५०, संतरा (भारतीय) प्रति किलो १६० और तरबूजा हरा प्रति किलो ४५ मूल्य निर्धारण किए गए हैं। भुइँकटहर प्रति गोटा १६०, काँक्रो (लोकल) प्रति किलो ५५, काँक्रो (हाइब्रिड) प्रति किलो ३०, काँक्रो (लोकलक्रस) प्रति किलो ५०, खकटहर प्रति किलो ११०, मेवा (नेपाली) प्रति किलो ७०, मेवा (भारतीय) प्रति किलो ९० और किवी प्रति किलो ४०० तय हैं। इसी तरह, एवोकाडो प्रति किलो ८००, अदुवा प्रति किलो १००, सूखा खुर्सानी प्रति किलो ४५०, खुर्सानी (हरा) प्रति किलो ९०, खुर्सानी हरा (बुलेट) प्रति किलो ७०, माछे खुर्सानी प्रति किलो ९०, खुर्सानी अकबरे प्रति किलो ३८०, भेडेखुर्सानी प्रति किलो ११० और हरियो लसुन प्रति किलो १२० निर्धारित किए गए हैं। हरियो धनिया प्रति किलो १००, लसुन सूखा (चाइनीज) प्रति किलो २२८, लसुन सूखा (नेपाली) प्रति किलो १४०, छ्यापी सूखा प्रति किलो १२०, छ्यापी हरा प्रति किलो ९०, माछा सूखा प्रति किलो १,०००, ताजा माछा (रहु) प्रति किलो ३४०, ताजा माछा (बचुवा) प्रति किलो ३१० और ताजा माछा (छडी) प्रति किलो ३०० तय किए गए हैं।

आज विदेशी मुद्राको विनिमय दर

४ वैशाख, काठमाडौं । नेपाल राष्ट्र बैंकले आज (शुक्रवार) का लागि विदेशी मुद्राको विनिमय दर निर्धारण गरेको छ । निर्धारीत विनिमय दरअनुसार अमेरिकी डलर एकको खरिद दर १४८ रुपैयाँ ८२ पैसा र बिक्री दर १४९ रुपैयाँ ४२ पैसा तोकिएको छ । यस्तै, युरोपियन युरो एकको खरिद दर १७५ रुपैयाँ ४० पैसा र बिक्री दर १७६ रुपैयाँ ११ पैसा, युके पाउण्ड स्ट्रलिङ्ग एकको खरिद दर २०१ रुपैयाँ ६० पैसा र बिक्री दर २०२ रुपैयाँ ४१ पैसा, स्वीस फ्र्याङ्क एकको खरिद दर १८९ रुपैयाँ ९४ पैसा र बिक्री दर १९० रुपैयाँ ७१ पैसा कायम गरिएको छ ।

अष्ट्रेलियन डलर एकको खरिद दर १०६ रुपैयाँ ७३ पैसा र बिक्री दर १०७ रुपैयाँ १६ पैसा, क्यानडियन डलर एकको खरिद दर १०८ रुपैयाँ ३८ पैसा र बिक्री दर १०८ रुपैयाँ ८२ पैसा, सिङ्गापुर डलर एकको खरिद दर ११७ रुपैयाँ ०२ पैसा र बिक्री दर ११७ रुपैयाँ ५० पैसा तोकिएको छ । जापानी येन १० को खरिद दर ९ रुपैयाँ ३६ पैसा र बिक्री दर ९ रुपैयाँ ४० पैसा, चिनियाँ युआन एकको खरिद दर २१ रुपैयाँ ८२ पैसा र बिक्री दर २१ रुपैयाँ ९१ पैसा, साउदी अरेबियन रियाल एकको खरिद दर ३९ रुपैयाँ ६७ पैसा र बिक्री दर ३९ रुपैयाँ ८३ पैसा, कतारी रियाल एकको खरिद दर ४० रुपैयाँ ८२ पैसा र बिक्री दर ४० रुपैयाँ ९८ पैसा कायम भएको छ ।

केन्द्रीय बैंकका अनुसार थाइ भाट एकको खरिद दर ४ रुपैयाँ ६६ पैसा र बिक्री दर ४ रुपैयाँ ६८ पैसा, युएई दिराम एकको खरिद दर ४० रुपैयाँ ५२ पैसा र बिक्री दर ४० रुपैयाँ ६८ पैसा, मलेसियन रिङ्गेट एकको खरिद दर ३७ रुपैयाँ ६४ पैसा र बिक्री दर ३७ रुपैयाँ ७९ पैसा तोकिएको छ । साउथ कोरियन वन १०० को खरिद दर १० रुपैयाँ ०८ पैसा र बिक्री दर १० रुपैयाँ १२ पैसा, स्वीडिस क्रोनर एकको खरिद दर १६ रुपैयाँ २२ पैसा र बिक्री दर १६ रुपैयाँ २८ पैसा र डेनिस क्रोनर एकको खरिद दर २३ रुपैयाँ ४७ पैसा र बिक्री दर २३ रुपैयाँ ५७ पैसा तोकिएको छ ।

राष्ट्र बैंकले हङकङ डलर एकको खरिद दर १९ रुपैयाँ ०२ पैसा र बिक्री दर १९ रुपैयाँ ०९ पैसा, कुवेती दिनार एकको खरिद दर ४८६ रुपैयाँ ०२ पैसा र बिक्री दर ४८७ रुपैयाँ ९८ पैसा, बहराइन दिनार एकको खरिद दर ३९४ रुपैयाँ ५४ पैसा र बिक्री दर ३९६ रुपैयाँ १३ पैसा रहेको छ । ओमानी रियाल एकको खरिद दर ३८६ रुपैयाँ ४५ पैसा र बिक्री दर ३८८ रुपैयाँ १० पैसा रहेको छ । यस्तै, भारतीय रुपैयाँ एक सयको खरिद दर १६० रुपैयाँ र बिक्री दर १६० रुपैयाँ १५ पैसा तोकिएको छ । राष्ट्र बैंकले यो विनिमय दरलाई आवश्यकतानुसार जुनसुकै समयमा पनि संशोधन गर्न सकिने जनाएको छ । वाणिज्य बैंकले तोक्ने विनिमय दर भने फरक हुनसक्ने र अद्यावधिक विनिमय दर केन्द्रीय बैंकको वेबसाइटमा उपलब्ध हुने जनाइएको छ ।

इजरायल के साथ युद्धविराम का पालन करने हिजबुल्लाह के लिए ट्रम्प की अपील

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दक्षिणी लेबनान में स्थित हिजबुल्लाह से इजरायल के साथ लागू युद्धविराम नियमों का पालन करने का आग्रह किया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर हिजबुल्लाह से इस अहम समय में सद्भावना दिखाने की उम्मीद जताई है।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने लिखा, ‘मुझे भरोसा है कि हिजबुल्लाह इस ऐतिहासिक समय में उचित और सकारात्मक तरीके से व्यवहार करेगा।’ उन्होंने आगे कहा, ‘यदि उन्होंने ऐसा किया, तो यह उनके लिए एक शानदार समय होगा। अब कोई हत्याकांड नहीं होंगे। अंततः शांति स्थापित होनी ही चाहिए।’

इससे पहले ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल नेटवर्क पर एक पोस्ट के माध्यम से लेबनान और इजरायल के बीच 10 दिनों का युद्धविराम समझौता होने की घोषणा की थी। युद्धविराम की घोषणा के दौरान ट्रम्प ने लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ अवन और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत की जानकारी दी थी।

तकनीकी रूप से, यह युद्धविराम इजरायल और लेबनान के बीच है, जहां हिजबुल्लाह का ठिकाना है। एक इजरायली अधिकारी ने अमेरिकी मीडिया संस्थान सीबीएस न्यूज को बताया कि युद्धविराम के दौरान इजरायल केवल ‘हिजबुल्लाह के हमलों’ के प्रति सैन्य प्रतिक्रिया देगा। सिर्फ गुरुवार को ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्थायी शांति समझौते के लिए ईरान समर्थित समूहों को निरस्त्रीकृत करने की बात कही थी।

अमेरिका-ईरान युद्ध: चार संभावित परिदृश्य

ईरान के साथ युद्धविराम के दूसरे चरण की वार्ता के लिए अमेरिका संवाद कर रहा माना जाता है। पिछली रविवार को हुए 20 घंटे के वार्ता में कोई निष्कर्ष नहीं निकला, फिर भी वर्तमान में दो सप्ताह का युद्धविराम बना हुआ है। निष्कर्षहीन वार्ता के एक दिन बाद ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ होर्मुज जलसंधि के आस-पास समुद्री नाकाबंदी की घोषणा की। इस प्रारंभिक वार्ता की विफलता को कैसे समझा जाए और आने वाली वार्ता की संभावनाएं क्या हो सकती हैं? क्या ईरान और अमेरिका नियंत्रित संघर्ष की ओर हैं या असंभव बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं? नीचे संभावित चार परिदृश्य चर्चा किए गए हैं।

१. कमजोर युद्धविराम के “रणनीतिक कदम”
कुछ सप्ताहों की लड़ाई के बाद आए इस युद्धविराम ने दोनों पक्षों में संकट नियंत्रण की इच्छा दिखाई। लेकिन शुरू से ही इसकी शर्तें, भौगोलिक दायरा और संघर्ष विराम में शामिल लक्षित क्षेत्र में विभाजन देखा गया है। युद्धविराम उल्लंघन की व्याख्या में भी कई विश्लेषक इसे टिकाऊ आधार नहीं, बल्कि लड़ाई में लागू एक रणनीतिक रोक समझते हैं। “लड़ाई शुरू होने पर सहमति की संभावना लगभग नहीं थी,” वाशिंगटन स्थित फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के वरिष्ठ शोधकर्ता बेहनाम बेन तालेब्लू ने कहा। “यह सभी सिद्धांत, रुख और नीतियां हैं जिनमें अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से मतभेद थे। युद्ध ने तुरंत उन मतभेदों को कम नहीं किया, बल्कि वे और बढ़ गए,” उन्होंने बताया।

२. “छद्मयुद्ध”
एक संभावित और सबसे संभव परिदृश्य है “नियंत्रित लड़ाई” की ओर लौटना। इसका मतलब है कि दोनों पक्ष पूर्ण स्तर के युद्ध में नहीं उतरेंगे, लेकिन सैन्य कार्रवाई पूरी तरह से बंद नहीं करेंगे। इसमें सीमित स्वरूप के हमले सैन्य संरचना, लक्ष्य और आपूर्ति मार्गों पर जारी रह सकते हैं। इस स्थिति में छद्म (‘प्रॉक्सी’) समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। ईराक या अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में ईरान समर्थित समूहों की गतिविधि बढ़ सकती है। युद्ध की तीव्रता सीधे तौर पर नहीं बढ़ेगी, परंतु युद्ध का भौगोलिक दायरा फैल सकता है।

३. शांतिपूर्ण कूटनीतिक निरंतरता
पाकिस्तान में वार्ता के विफल होने के बाद कूटनीतिक प्रयास ठप या वार्ता बंद होने की बात नहीं कही जा सकती। पाकिस्तान की मध्यस्थता के कारण आने वाले दिनों में तेहरान और वाशिंगटन के बीच संदेशों का आदान-प्रदान होता रहेगा और प्रयास जारी रह सकते हैं।

४. समुद्री नाकाबंदी की निरंतरता
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी नौसेना को होर्मुज जलसंधि में जलयान आवागमन को रोकने और ईरान पर नाकाबंदी करने का आदेश दिया है। यह कदम ईरान के तेल व्यापार को संकट में डालकर अर्थव्यवस्था को भारी क्षति पहुंचा सकता है और ईरानी तेल के मुख्य खरीदार चीन पर भी दबाव बना सकता है।

अंततः इन परिदृश्यों से युद्ध और शांति के बीच अस्पष्ट रेखा वाली स्थिति विकसित हो सकती है। पाकिस्तान में वार्ता की विफलता कूटनीतिक अंत नहीं है, न ही व्यापक युद्ध की आवश्यकता को दर्शाती है। बल्कि यह एक अस्पष्ट स्थिति की निरंतरता को इंगित करती है।

संघीय सरकारको हस्तक्षेपले शैक्षिक उपलब्धि गुम्ने पालिका महासंघको निष्कर्ष 

संघीय सरकार के हस्तक्षेप से शैक्षिक उपलब्धियाँ प्रभावित होने का पालिका महासंघ का निष्कर्ष

गाउँपालिका महासंघ और नगरपालिका संघ ने संघीय सरकार द्वारा शैक्षिक सत्र को देर से शुरू करने तथा रविवार को अवकाश देने के निर्णय से शैक्षिक उपलब्धियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का निष्कर्ष निकाला है। इस संबंध में गाउँपालिका राष्ट्रिय महासंघ और नेपाल नगरपालिका संघ ने शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल को चार बिंदु संलग्न ध्यानाकर्षण पत्र सौंपा है। संघीय सरकार ने वैशाख १५ से ही नामांकन और वैशाख २१ से ही पढ़ाई-लिखाई प्रारंभ करने के निर्देश जारी किए हैं। ४ वैशाख, काठमांडू।

गाउँपालिका महासंघ और नगरपालिका संघ का मानना है कि संघीय सरकार का शैक्षिक सत्र को विलंबित कर शुरू करने और रविवार को अवकाश देने का निर्णय शैक्षिक उपलब्धियों को प्रभावित करेगा। इसी विषय पर गाउँपालिका राष्ट्रिय महासंघ और नेपाल नगरपालिका संघ ने गुरुवार को शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मंत्री सस्मित पोखरेल को चार बिंदुओं वाला ध्यानाकर्षण पत्र सौंपा है।

रविवार को छुट्टी देने और वैशाख २१ से ही पढ़ाई शुरू करने के निर्णय के कारण वर्ष में २२० दिन कक्षा संचालन की कानूनी अवधि पूरी नहीं हो पाएगी, यह पालिका प्रतिनिधियों का मत है। इसके चलते पठनपाठन अधूरा रह जाएगा और विद्यार्थियों की सीखने की उपलब्धियों में कमी आएगी, इसके लिए उन्होंने चिंता व्यक्त की है। महासंघ की अध्यक्ष लक्ष्मीदेवी पाण्डे और संघ के अध्यक्ष भीमप्रसाद ढुंगानाद्वारा हस्ताक्षरित ध्यानाकर्षण पत्र में उल्लेख है कि पालिका ने प्राप्त कानूनी अधिकारों का उपयोग करके ही शैक्षिक गतिविधियों का संचालन किया है।

पत्र में निर्णय और परिपत्र के आधार पर विद्यालय शिक्षा संचालन नहीं करने के बजाय शीघ्र शिक्षा अधिनियम संघीय संसद से जारी करने की पहल करने के लिए शिक्षा मंत्री से अनुरोध किया गया है। संघीय सरकार ने चैत १३ को स्वीकृत शासकीय सुधार सम्बंधित १०० बिंदुओं की कार्यसूची के अनुसार कक्षा ५ तक के विद्यार्थियों की आंतरिक परीक्षाएं आगामी शैक्षिक सत्र से बंद करने की योजना बनाई है। साथ ही, संघीय सरकार के निर्देशानुसार वैशाख १५ से नामांकन और वैशाख २१ से पठनपाठन शुरू करने की व्यवस्था है।

गैँडाको खागसहित चार जनालाई पक्राउ किया गया

सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल नम्बर १ बराह बाहिनी ने सुनसरी के बर्जु गाउँपालिका–६ से गैँडाको खागसहित चार व्यक्तियों को नियन्त्रण में लिया है। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों के पास से एक गैँडाको खाग और दो मोटरसाइकिल बरामद की गई हैं, जिसकी जानकारी सशस्त्र प्रहरी उपरीक्षक श्याम कार्की ने दी। पकड़े गए व्यक्तियों के नाम गोपनीय रखे गए हैं और नेटवर्क व्यापक होने के कारण जांच जारी है, जैसा कि सशस्त्र पुलिस ने बताया है।

४ वैशाख, सुनसरी। सुनसरी के बर्जु गाउँपालिका–६ से गुरुवार रात गैँडाको खागसहित चार लोगों को नियन्त्रण में लिया गया है। गुप्त सूचना के आधार पर सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल नम्बर १ बराह बाहिनी की पकली टीम ने यह कार्रवाई की, जिसके बारे में सशस्त्र प्रहरी बल ४ नम्बर गण सुनसरी के सशस्त्र प्रहरी उपरीक्षक श्याम कार्की ने बताया।

झापा से गैँडाको खाग लाने की सूचना मिलने पर बर्जु–६ ताल के निकट चार लोगों को नियन्त्रण में लिया गया, उन्होंने बताया। पकड़े गए व्यक्तियों के पास से एक खाग और दो मोटरसाइकिल बरामद की गई हैं, उन्होंने उल्लेख किया। पकड़े गए लोगों के नाम गोपनीय रखे गए हैं और इस मामले का नेटवर्क व्यापक होने के कारण जांच जारी है, इसलिए नाम सार्वजनिक न करने का निर्णय लिया गया है, उन्होंने जानकारी दी।

ट्रकको ठक्करबाट एक जनाको मृत्यु    – Online Khabar

ट्रक की ठक्कर से एक व्यक्ति की मौत

पृथ्वीराजमार्ग अंतर्गत तनहुँ के बन्दीपुर गाउँपालिका-४ विमलनगर में ट्रक की ठक्कर से गोरखा के 61 वर्षीय खुदबहादुर थापा की मृत्यु हो गई है। दमौली से आँबुखैरेनी की ओर जा रहे गैस सिलेंडर से भरे ट्रक ने रास्ता छेदते समय उन्हें ठोकर मार दी थी। घायलों को उपचार के लिए प्रदेश अस्पताल दमौली लाया गया था, जहां चिकित्सकों ने बृहस्पतिवार शाम 5:48 बजे उन्हें मृत घोषित किया।

जिला पुलिस कार्यालय तनहुँ के अनुसार, मृत व्यक्ति का नाम खुदबहादुर थापा पुष्टि किया गया है। प्र३-०१-००३क ४८९८ नंबर के ट्रक ने ठक्कर दी घटना में पुलिस ने ट्रक और चालक को गिरफ्तार कर लिया है।

सर्वोच्च अदालत ने दीपक खड्कालाई जमानत देने का आदेश दिया

सर्वोच्च अदालत ने पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खड्कालाई संपत्ति शुद्धीकरण मामले में जमानत देने का आदेश जारी किया है। चैत 15 तारीख को गिरफ्तार किए गए उन्हें उनकी पत्नी विनिता थापाने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से जमानत की मांग की थी। न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल और श्रीकांत पौडेल की पीठ ने उन्हें जमानत देने तथा विदेश जाने से पहले अनुमति लेने का निर्देश दिया है।

सर्वोच्च अदालत ने नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खड्कालाई जमानत देने का आदेश पारित किया है। उन्हें संपत्ति शुद्धीकरण मामले की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। चैत 15 को गिरफ्तारी के बाद उनकी पत्नी विनिता थापाने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। उक्त याचिका पर न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल और श्रीकांत पौडेल की पीठ ने सुनवाई करते हुए जमानत देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उन्हें विदेश जाने से पहले अनुमति लेने की भी शर्त लगाई गई है।

जेनजी आंदोलन के दौरान दीपक खड्काक घर पर प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ और आगजनी की थी। आगजनी के बाद उनके घर में रखे नेपाली और विदेशी नोट जलने के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए थे। कुछ मूल्यवान नोट भी प्रदर्शनकारियों द्वारा ले जाते हुए तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे। विभाग ने पहले ही उनके घर से जले हुए नोटों के टुकड़े और आसपास से राख इकट्ठा की थी। इसी मामले की जांच के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

७ हजार शय्याबाट निःशुल्क उपचार, कसरी लिन सकिन्छ सेवा ?

७ हजार शय्याओं पर निःशुल्क उपचार सेवा, कैसे प्राप्त करें?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश भर के अस्पतालों में उपलब्ध १० प्रतिशत निःशुल्क शय्याओं का विवरण सार्वजनिक करने के लिए ‘फ्री हेल्थ पोर्टल’ लॉन्च किया है। अब तक २३ अस्पतालों ने पोर्टल पर उपलब्ध ५३२५ शय्याओं में से ६२१ शय्या निःशुल्क आरक्षित की हैं, जिनमें से केवल एक शय्या ही उपयोग में है। निजी अस्पतालों ने स्पष्ट मानदंड न होने के कारण १० प्रतिशत निःशुल्क शय्याओं को लागू करने में कठिनाई जताई है। ३ वैशाख, काठमांडू।

विपन्न, असहाय और बेवारिसे मरीजों के लिए अस्पतालों को आरक्षित करनी वाली १० प्रतिशत निःशुल्क शय्याओं का विवरण ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से सार्वजनिक किया जा रहा है। स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय ने ‘फ्री हेल्थ पोर्टल’ संचालित कर देश भर के अस्पतालों में उपलब्ध निःशुल्क शय्या, उन शय्यों में उपचाररत मरीजों का विवरण रियल टाइम में देखने की व्यवस्था कर दी है। मंत्रालय के सहप्रवक्ता डॉ. समीयर अधिकारी के अनुसार इस पोर्टल से अस्पतालों में कितनी निःशुल्क शय्या उपलब्ध हैं, कौन-कौन उन शय्याओं पर इलाज ले रहे हैं और कितनी शय्या खाली हैं, यह जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सकती है।

मंत्रालय के अनुसार कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने और अस्पतालों में उपलब्ध निःशुल्क सेवाओं की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने के लिए ‘फ्री हेल्थ पोर्टल’ शुरू किया गया है। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक संघ, प्रदेश और स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों के कुल लगभग ७ हजार शय्याओं से विपन्न और असहाय नागरिकों को निःशुल्क सेवा मिलेगी। डॉ. अधिकारी के अनुसार निःशुल्क उपचार सेवा लेने के इच्छुक विपन्न मरीज अस्पताल की सामाजिक सेवा इकाई से सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।

निजी अस्पतालों के छाता संगठन एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट हेल्थ इंस्टिट्यूशंस ऑफ नेपाल (अफिन) के अध्यक्ष डॉ. पदम खड़का ने कहा कि १० प्रतिशत निःशुल्क शय्या उपलब्ध कराने के लिए स्पष्ट मानदंड के बिना इसे लागू करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, ‘राज्य किस तरह लागू करेगा, खर्च कैसे प्रबंधित होगा और कौन कौन सी सेवाएं निःशुल्क होंगी, इन सभी पर स्पष्ट नीति के बाद ही व्यावहारिक रूप से इसे लागू किया जा सकता है।’

सरकारी अस्पतालों में शनिवार और रविवार को ओपीडी सेवा बंद रहेगी

३ वैशाख, काठमांडू। स्वास्थ्य क्षेत्र में सक्रिय १४ संयुक्त पेशेवर संगठनों के कड़े दबाव के बाद सरकार ने अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में साप्ताहिक दो दिन सार्वजनिक छुट्टी देने का फैसला किया है। सरकार के इस निर्णय के अनुसार अब देश भर के सरकारी अस्पतालों में शनिवार और रविवार को नियमित ओपीडी सेवाएं बंद रहेंगी। हालांकि, आकस्मिक और इनडोर सेवाएं पहले की तरह २४ घंटे चालू रहेंगी, यह जानकारी स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय ने दी है।

स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता, स्वास्थ्य सचिव डा. विकास देवकोटा और १४ पेशेवर संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच मंत्रालय में हुई बैठक के बाद सरकार ने इस निर्णय में लचीलापन दिखाया है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार साप्ताहिक दो दिन छुट्टी देने पर सहमति बन चुकी है। ‘स्वास्थ्य मंत्रालय और पेशेवर संगठनों के बीच हुई इस सहमति के तहत शनिवार और रविवार छुट्टी दी जाएगी,’ मंत्रालय के सूत्र ने बताया, ‘मंत्रालय एक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी करने वाला है। जल्दी ही औपचारिक निर्णय सार्वजनिक किया जाएगा।’

ओपीडी सेवा दो दिन बंद रहने के कारण सरकार आकस्मिक सेवाओं की क्षमता बढ़ाने की तैयारी भी कर रही है, मंत्रालय के सूत्र ने बताया। नेपाल चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डा. अनिलविक्रम कार्की के नेतृत्व में बने दबाव समूह ने स्वास्थ्यकर्मियों को भी अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह दो दिन सरकारी छुट्टी देने की मांग की थी। उन्होंने बढ़ते कार्यभार और मानसिक तनाव को कारण बताते हुए आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। इससे पहले मंत्रिपरिषद ने २०७८ चैत्र २२ को सभी सरकारी कर्मचारियों को साप्ताहिक दो दिन छुट्टी देने का निर्णय लिया था। लेकिन स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय ने अस्पतालों में रविवार को भी ओपीडी सेवा जारी रखने का निर्देश दिया था, जिससे स्वास्थ्यकर्मी असंतुष्ट थे। स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा मंत्रालय के इस फैसले के खिलाफ संयुक्त आंदोलन की चेतावनी के बाद अंततः सरकार ने अस्पतालों में भी दो दिन की छुट्टी लागू करने का निर्णय लिया है।