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लेखक: space4knews

संविधानको फ्रेम बाहिर गएर केही गर्दैनौं : अर्थमन्त्री वाग्ले

संविधान के ढांचे से बाहर कुछ भी लागू नहीं करेंगे: अर्थमंत्री वाग्ले

३ वैशाख, काठमाडौं। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार संविधान के प्रति पूरी प्रतिबद्धता रखती है। उन्होंने बिहीवार को अर्थ मंत्रालय में आयोजित अंतर सरकारी वित्त परिषद की बैठक में कहा कि सरकार ने संविधान के ईमानदारी से क्रियान्वयन में पहल की है और आवश्यक सुधार संविधान के अनुसार ही किए जाएंगे। कुछ मीडिया ने यह अटकलें लगाईं कि सरकार प्रचण्ड बहुमत के आधार पर संविधान में बदलाव या हटाने की संभावना तलाश रही है, लेकिन उन्होंने ऐसी आशंकाओं को निराधार बताया।

बालकों के खिलाफ यौन हिंसा पर चर्चा कार्यक्रम सम्पन्न

नेपाल में बालकों के खिलाफ यौन हिंसा के विरुद्ध जनचेतना फैलाने के लिए ‘नीला छाता दिवस’ के अवसर पर एक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। वॉइस ऑफ चिल्ड्रन और फैमिली फॉर एवरी चाइल्ड ग्लोबल एलाइंस की संयुक्त पहल से सम्पन्न इस कार्यक्रम में बालकों के खिलाफ होने वाली यौन हिंसा से संबंधित अध्ययन के तथ्य और सुझाव प्रस्तुत किए गए। सन् 2021 से हर साल 16 अप्रैल को मनाए जाने वाले नील छाता दिवस के अंतर्गत बालकों के विरुद्ध होने वाली यौन हिंसा की घटनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ नीतिगत पैरवी भी की जाती है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, महिला, बाल बालिका तथा वरिष्ठ नागरिक मंत्रालय के सह सचिव चक्रबहादुर बुढ़ाले बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में वॉइस ऑफ चिल्ड्रन द्वारा निभाई जा रही नेतृत्व भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने बालबालिका संबंधित ऐन 2075 के संशोधन की तैयारी की जानकारी देते हुए बताया कि इसके लिए संबंधित निकायों और व्यक्तियों से सुझाव एकत्रित किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद के सदस्य सचिव इंद्रा देवी ढकाल ने कहा कि बालकों के खिलाफ होने वाली हिंसा को समाप्त करना सरकार और संबंधित पक्षों के सहयोग से ही संभव है।

वॉइस ऑफ चिल्ड्रन के कार्यकारी निदेशक कृष्णकुमार थापा ने कहा कि महिला, किशोरी और बालिकाओं पर ही यौन हिंसा होती है, यह सामाजिक दृष्टिकोण गलत है, बालक भी यौन हिंसा के जोखिम में हैं, और इसलिए नील छाता दिवस इस तथ्य को उजागर करने में महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में वॉइस ऑफ चिल्ड्रन की वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक कृति भट्टराई ने बालकों के खिलाफ होने वाली यौन हिंसा से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत किए।

उन्होंने बताया कि सामाजिक मूल्य–मान्यताएं, पितृसत्तात्मक सोच और ‘बेटे को हमेशा मजबूत होना चाहिए’ जैसी धारणाओं के कारण बालकों के लिए अपनी हिंसा की बात खुलकर बताना कठिन होता है। नेपाल पुलिस साइबर ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष २०७९/८० में २५३ बालबालिका साइबर अपराधों से प्रभावित हुए, जबकि वित्तीय वर्ष २०८०/८१ में यह संख्या ३५१ तक बढ़ गई है। कार्यक्रम में शामिल युवा प्रतिभागियों ने बाल सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्रभावशाली नीतियों और व्यवहारिक पहलों की आवश्यकता पर जोर दिया।

विद्यालय अध्ययन पर प्रभाव डालने वाली दो दिवसीय छुट्टी प्रणाली की पुनः समीक्षा की मांग

बडिमालिका नगरपालिका ने सामुदायिक विद्यालयों की छुट्टी प्रबंधन में नीतिगत स्पष्टता की मांग करते हुए शिक्षा मंत्रालय को औपचारिक पत्राचार किया है। नगर प्रमुख अमर खड़का ने कहा है कि दो दिवसीय छुट्टी और त्यौहारों के कारण विद्यालयों में पढ़ाई के दिन कम हो गए हैं और इसका असर सीखने की गुणवत्ता पर पड़ा है। नगरपालिका ने वार्षिक 220 शिक्षण दिनों को पूरा करना मुश्किल बताया है और सुझाव दिया है कि सप्ताह में केवल एक दिन की छुट्टी देना शिक्षा के दृष्टिकोण से अधिक व्यावहारिक होगा।

3 वैशाख, धनगढी। संघीय सरकार द्वारा सप्ताह में दो दिन (शनिवार और रविवार) सार्वजनिक छुट्टी लागू करने के बाद विद्यालयों में वार्षिक न्यूनतम 220 शिक्षण दिन पूरे करना चुनौतीपूर्ण हो गया है, ऐसा नगरपालिका का कहना है। नगर प्रमुख खड़का ने मंत्रालय के सचिव को भेजे पत्र में उल्लेख किया कि वर्तमान छुट्टी प्रणाली के कारण विद्यालयों में वास्तविक पढ़ाई के दिन स्पष्ट रूप से घट रहे हैं। इस स्थिति का शैक्षिक गुणवत्ता, विद्यार्थियों की सीखने की उपलब्धि और नियमित अध्ययन प्रक्रिया पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ रहा है, जिसे नगरपालिका ने माना है।

पत्र में शिक्षा नियमावली, 2059 की नियम 84 (5) के अनुसार एक शैक्षणिक सत्र में कम से कम 220 दिन विद्यालय संचालन अनिवार्य है, फिर भी वर्तमान छुट्टी संरचना से इस व्यवस्था के कार्यान्वयन में व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। नगर प्रमुख खड़का ने बताया कि इसी आधार पर नगरपालिका ने स्थानीय तह पर अपनाए गए मॉडल के अनुसार सप्ताह में केवल एक दिन अर्थात शनिवार को छुट्टी देने का प्रावधान शैक्षिक दृष्टि से अधिक उपयुक्त और प्रभावशाली पाया है।

ट्रम्प द्वारा सच मंच पर प्रस्तुत AI छवि ने ईसाई समुदाय में विवाद खड़ा किया


डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को अपने ‘ट्रूथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर एक AI द्वारा निर्मित तस्वीर पोस्ट की है, जिसने फिलहाल विवाद को जन्म दिया है।

उस तस्वीर में ट्रम्प को यीशु जैसे दैवीय स्वरूप में दर्शाया गया है, जहां उनके हाथों से दिव्य प्रकाश निकल रहा है और वे अस्पताल के बिस्तर पर पड़े मरीज का उपचार कर रहे हैं। पृष्ठभूमि में नरक का एक राक्षस दिखाई देता है।

तस्वीर विवादों में आने के बाद ट्रम्प ने उस पोस्ट को हटा दिया। उसी दिन उन्होंने इस मंच पर पोप लियो 14वें के खिलाफ गंभीर आलोचना की थी। ट्रम्प ने पोप पर ‘अपराध नियंत्रण में कमजोर’ होने का आरोप लगाया और कहा कि वे कैथोलिक चर्च के प्रमुख और बराक ओबामा के रणनीतिकार डेविड एक्सेलरड के प्रभाव में हैं।

ट्रम्प ने पोप से माफी माँगने से इंकार करते हुए कहा, ‘वे सार्वजनिक रूप से आए थे। मैं केवल पोप लियो 14वें को जवाब दे रहा था।’

ट्रम्प को अपने कुछ वरिष्ठ व वफादार ईसाई समर्थकों के गुस्से का सामना करना पड़ा है, जबकि कई अन्य ने ट्रम्प का अन्य गलतियों में भी समर्थन किया था।

फॉक्स न्यूज की पॉडकास्ट होस्ट राइली गेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि ट्रम्प ने यह पोस्ट क्यों किया।

उन्होंने आगे लिखा, ‘क्या वह कोई प्रतिक्रिया पाने की कोशिश कर रहे हैं? क्या वे सचमुच ऐसा सोचते हैं? फिर भी दो बातें सच हैं: 1– थोड़ी विनम्रता उन्हें लाभ पहुंचाएगी। 2– ईश्वर का मजाक उड़ाना उचित नहीं है।’

रुढ़िवादी ‘डेली वायर’ की लेखिका मेगन बासम ने उक्त पोस्ट को अत्यंत अपमानजनक बताया।

उन्होंने लिखा, ‘मुझे नहीं पता राष्ट्रपति मजाक कर रहे थे या किसी नशीली वस्तु के प्रभाव में थे, या इसके लिए कोई अन्य संभावित स्पष्टीकरण हो सकता है।’

उन्होंने ट्रम्प से इस तस्वीर को तुरंत हटाने और पहले अमेरिकी जनता से और फिर ईश्वर से माफी मांगने का आग्रह किया।

इसी मीडिया माध्यम की होस्ट इसाबेल ब्राउन ने इस तस्वीर को घृणित और अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा, ‘यीशु से महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। स्पष्ट तौर पर कहें तो, यह पोस्ट घृणित और अस्वीकार्य है।’

राइट-विंग ‘ब्लेज टीवी’ के होस्ट स्टीव डेस ने केवल एक शब्द में प्रतिक्रिया दी, ‘नहीं’। जब पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि क्या उन्होंने खुद को यीशु मसीह के रूप में दिखाते हुए तस्वीर पोस्ट की है, तो ट्रम्प ने जवाब दिया, ‘वह कोई चित्रण नहीं था, वह मैं हूं।’

ट्रम्प ने आगे कहा, ‘यह तो एक चिकित्सक के रूप में मेरी तस्वीर होनी चाहिए जो लोगों को ठीक कर रहा है।’ उन्होंने दावा किया कि वे वास्तव में लोगों को ठीक कर सकते हैं।

उपराष्ट्रपति जेडी भान्स ने सोमवार को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ऐसा तस्वीर सिर्फ ‘मजाक’ बताया और ट्रम्प का बचाव किया।

‘कई लोगों को उनके मजाक को समझने में दिक्कत हुई इसलिए ट्रम्प ने पोस्ट हटाई,’ भान्स ने कहा।

ट्रम्प वर्तमान में कैथोलिक इतिहास के पहले अमेरिकी मूल के पोप, लियो 14वें, के साथ मौखिक विवाद में हैं। पोप लियो ने बिना ट्रम्प का नाम लिए इरान के साथ युद्ध के संदर्भ में अमेरिकी विदेश नीति को ‘सर्वशक्तिमान होने का भ्रम’ करार दिया था।

ट्रम्प ने पोप को ‘अपराध नियंत्रण में कमजोर’ कहा और साफ तौर पर कहा कि वे ‘पोप लियो के प्रशंसक नहीं हैं’। साथ ही उन्होंने कहा कि विश्व के एक अरब 40 करोड़ कैथोलिकों के नेता कट्टर वामपंथी स्वार्थों की पूर्ति में लगे हुए हैं।

गाजा में हुए नरसंहार और विनाश के खिलाफ मुखर रहने वाले पोप ने अल्जीरिया यात्रा के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए ट्रम्प प्रशासन का डर नहीं मानने और युद्ध के खिलाफ लगातार आवाज उठाने की बात कही।

ट्रम्प के पोप पर हमले की व्यापक निंदा हुई है। उनके पुराने समर्थक और कट्टर दक्षिणपंथी उप प्रधानमंत्री माटेओ साल्विनी समेत इटली के विभिन्न राजनीतिक विचारधारा के नेताओं ने पोप पर हमला गैर-जरूरी और बुद्धिमानी के विपरीत बताया है।

(गार्जियन में प्रकाशित सामग्री का अनुवादित अंश)

पेटमा भरिएको ग्यास निकालेर छिट्टै राहत दिने ४ घरेलु उपाय

पेट की गैस कम करने के ४ घरेलू उपाय

अदरक, पुदीना, टिमूर और गुनगुना पानी पेट की गैस कम करने के घरेलू उपाय के रूप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। गैस की समस्या बार-बार होने पर चिकित्सक से परामर्श करने की सलाह दी जाती है। भागदौड़ भरी जीवनशैली, अनियमित खानपान, अत्यधिक तेलीय और मसालेदार भोजन, कम मात्रा में पानी पीना, तेज़-तेज़ खाना खाने की आदत और शारीरिक गतिविधि में कमी से पेट में गैस जमने की समस्या आम होती जा रही है। लंबे समय तक खाली पेट रहना, देर रात खाना खाना, भोजन ठीक से चबाए बिना निगलना या तनाव में रहना भी आंतों में गैस बनने का कारण बन सकता है। इसके परिणामस्वरूप पेट फूलना, डकार आना, पेट सख्त होना, गड़बड़ी या दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं और कभी-कभी छाती तक असहज महसूस होता है। अधिकांश मामलों में ये समस्या खानपान और पाचन से जुड़ी होती है। भोजन ठीक से पच न पाने पर आंतों में अम्लीयता बढ़ती है, जिससे गैस बनती है। कब्ज, दाल-चना, बंदगोभी, कोल्ड ड्रिंक, अधिक चाय-कॉफी, दूधजन्य खाद्य पदार्थ या अधिक समय तक बैठने जैसी आदतें समस्या को और बढ़ा सकती हैं। दवाइयाँ लेने से पहले घर में उपलब्ध कुछ प्राकृतिक पदार्थ जैसे अदरक, पुदीना, सौंफ या टिमूर जैसे मसाले और गुनगुना पानी मिलाकर लेने से हल्की गैस में राहत मिल सकती है।

१. पाचन को सक्रिय करने वाला अदरक: अदरक पेट की गैस कम करने वाले सबसे प्रभावी घरेलू उपायों में से एक है। इसमें मौजूद सक्रिय तत्व पाचन रस और एंजाइम की क्रियाशीलता बढ़ाते हैं। यह भोजन को पेट में लंबा अटकने से रोक कर तेज़ी से नीचे भेजता है, जिससे आंतों में अतिरिक्त गैस कम होती है। गैस की वजह से पेट फूलना, जलन या भारीपन महसूस होने पर अदरक बहुत लाभकारी साबित होता है। इसके लिए ताजा अदरक का छोटा टुकड़ा कूटकर एक कप पानी में ५–१० मिनट तक उबालें, हल्का गुनगुना होने पर धीरे-धीरे पिएं। भोजन के बाद या पेट फूलने पर सेवन करने से कई लोगों को आराम मिलता है। कुछ चिकित्सकीय स्रोतों के अनुसार अदरक पेट की मांसपेशियों को आराम देकर गैस को बाहर निकालने में मदद करता है।

२. पुदीना पेट की मांसपेशियों को आराम देता है: पुदीने में मौजूद मेन्थॉल पेट और आंतों की मांसपेशियों को शिथिल करता है। जब आंतों की मांसपेशियां अत्यधिक सिकुड़ी होती हैं, तो गैस बाहर निकलने में दिक्कत होती है। पुदीना इस कसावट को कम कर जम चुकी गैस को आसानी से नीचे निकालने में सहायता करता है। पेट फूलना, डकार रुकना या भोजन के बाद भारीपन और ऐंठन जैसी स्थिति में पुदीना बहुत प्रभावी होता है। कुछ ताजा पुदीने के पत्ते गुनगुने पानी में ५ मिनट तक भिगोकर उसका रस पी सकते हैं। यदि पत्ते उपलब्ध न हों तो पुदीने की चाय का भी उपयोग किया जा सकता है। नियमित रूप से भोजन के बाद पुदीने की चाय पीने से गैस बनने की प्रवृत्ति कम हो सकती है।

३. जमा हुआ वायु कम करने वाला टिमूर: नेपाली रसोई में आसानी से मिलने वाला टिमूर पेट की गैस के लिए पारंपरिक मसाला है। इसके तीखे और सुगंधित गुण पाचन प्रणाली को सक्रिय करते हैं। अधपचा हुआ भोजन पेट और आंतों में बनने वाली गैस को कम करने में यह मदद करता है। टिमूर के कुछ दाने कूटकर गुनगुने पानी में डालकर पी सकते हैं। इसे ५ मिनट तक पानी में उबालकर भी लिया जा सकता है। भोजन के बाद अगर पेट फूल जाए, डकार अटक जाए या गैस नीचे न निकले तो यह उपाय लाभदायक सिद्ध होता है।

४. गुनगुना पानी और हल्की सैर: अधिकांश मामलों में पेट की गैस एक ही जगह पर अटकी रहती है। ऐसी स्थिति में गुनगुना पानी धीरे-धीरे पीना और १०–१५ मिनट हल्की सैर करना बहुत प्रभावी उपाय होता है। गुनगुना पानी पाचन तंत्र को सहज बनाता है, आंतों की गति बढ़ाता है और अटकी गैस को नीचे निकालने में मदद करता है। भोजन के तुरंत बाद लेटने की आदत गैस को बढ़ा सकती है। इसलिए भोजन के बाद थोड़ी देर बैठे रहना, धीरे-धीरे चलना और शरीर को सक्रिय रखना गैस को प्राकृतिक रूप से बाहर निकालने में सहायक होता है। गैस की समस्या जीवनशैली से जुड़ी होती है, इसलिए यह उपाय दीर्घकालिक रूप से भी उपयोगी साबित होता है।

समस्या बार-बार होने पर क्या संकेत हो सकते हैं? यदि गैस की समस्या निरंतर बनी रहती है, पेट अत्यधिक फूलता है, कब्ज़, दस्त, एसिडिटी, पेट दर्द या वजन कम होना भी साथ में दिखाई देता है तो यह सामान्य गैस की समस्या नहीं हो सकती। ऐसी स्थिति में आंतों की संवेदनशीलता, ल्य्क्टोज असहिष्णुता, कब्ज, अम्लपित्त या अन्य पाचन रोग हो सकते हैं। इसलिए घरेलू उपायों से अस्थायी राहत मिलने पर भी समस्या के बार-बार होने पर चिकित्सक से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

अनावश्यक वस्तुएं खरीदने की आदत कैसे छोड़ें?

समाचार सारांश

समीक्षा के बाद तैयार।

  • घर के दराज, बाथरूम के रैक या रसोई के कोनों की सफाई करने से हमें मानसिक शांति का अलग ही अनुभव होता है।

वसंत ऋतु के आगमन के साथ ही प्रकृति नया रूप लेकर आती है, जैसे पुराने पत्तों की जगह नए फर्नीचर उगता है, उसी तरह हमारे जीवन में भी नई ऊर्जा का संचार होता है। बहुत से लोगों के लिए यह समय उनके घर के पुराने और अनावश्यक सामानों को हटाने, अर्थात् ‘डिक्लटरिंग’ करने का उपयुक्त अवसर होता है।

हाल के समय में ‘सॉफ्ट डिक्लटरिंग’ की अवधारणा काफी लोकप्रिय हो रही है, जो हमें छोटी-छोटी जगहों से अनावश्यक सामग्री हटाने के लिए प्रेरित करती है। हालांकि, सिर्फ दराज या रैक को खाली करना काफी नहीं होता, बल्कि उन्हें फिर से अनावश्यक वस्तुओं से भरने से बचाना असली चुनौती होती है।

हम अक्सर सामान जमा करने की आदत में रहते हैं। जब हम अनावश्यक वस्तुएं जमा करते हैं, तभी हम पैसों की बचत कर सकते हैं, अव्यवस्था से मुक्त हो सकते हैं और पर्यावरण के अनुकूल जीवन जी सकते हैं।

लेखिका आश्ली पाइपर कहती हैं, ‘नई वस्तुएं न खरीदना केवल पैसे बचाना ही नहीं है, बल्कि अपने और अपने पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार होना भी है।’

अपने जीवन को सरल, व्यवस्थित और सार्थक बनाने के लिए अनावश्यक खरीदारी से बचने के कुछ प्रभावी उपाय हैं।

1. खरीदारी की प्रक्रिया को थोड़ा कठिन बनाएं

आज के डिजिटल युग में खरीदारी बेहद आसान और ‘फ्रिक्शनलेस’ हो गई है। सिर्फ एक क्लिक में सामान आपके घर पहुंच जाता है। लेकिन यही सुविधा अक्सर अनावश्यक खर्चों का कारण बनती है। यदि हम खरीदारी की प्रक्रिया में कुछ रुकावट या ‘फ्रिक्शन’ पैदा करें, तो हम कम खरीदारी करेंगे।

कार्ड विवरण हटाएं

ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स से अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड का विवरण हटा दें। जब भी आपको हर बार खरीदारी के लिए अपना कार्ड निकालकर नंबर टाइप करना पड़ेगा, आपका दिमाग यह सोचने का समय पाएगा, ‘क्या मुझे सच में ये वस्तु चाहिए? इससे मेरे जीवन में क्या मूल्य बढ़ेगा?’

नोटिफिकेशन बंद करें

विभिन्न ब्रांडों द्वारा आने वाले ईमेल, संदेश या पुश नोटिफिकेशन को ब्लॉक कर दें। व्यापारी और स्टोर लगातार विज्ञापन भेजते रहते हैं, उनसे दूर रहना ही प्रलोभन से बचने का सबसे अच्छा उपाय है।

2. भविष्य नहीं, वर्तमान के बारे में सोचें

अक्सर हम खरीदारी करते समय वर्तमान की तुलना में ‘भविष्य के खुद’ को ध्यान में रखते हैं। जैसे ‘यह कपड़ा मैं बाद में पार्टी में पहनूंगा’ या ‘यह सामान मैं बाद में काम में लाऊंगा’ वाली सोच से हम सामानों के ढेर में फंस जाते हैं।

लेखिका कोर्टनी कार्वर के अनुसार, कोई भी वस्तु खरीदने से पहले हमें खुद से दो सवाल पूछने चाहिए:

-क्या यह आज मेरे जीवन के लिए उपयोगी है?

-क्या मैं इसे अगले 30 दिनों में इस्तेमाल करूंगा?

कई बार हम फिल्मों के किरदारों या सोशल मीडिया के इन्फ्लुएंसर्स से प्रेरित होकर अनावश्यक महंगी चीजें खरीद लेते हैं, जिन्हें पहनना या इस्तेमाल करना भी मुश्किल होता है।

कोई लोग भव्य आयोजन की कल्पना में महंगे बर्तनों की खरीद करते हैं, पर असल में उनके पास ऐसा आयोजन करने का समय या रुचि नहीं होती। इसलिए अपने वास्तविक जीवनशैली के अनुसार ही खरीदारी करें।

3. खरीदने की इच्छा वाली चीजों की सूची बनाएं

अगर कोई वस्तु बहुत जरूरी नहीं है तो उसे तुरंत खरीदने से बचें। उसकी एक सूची बनाएं। कोई कॉपी या मोबाइल के नोट्स एप में खरीदारी की सूची बनाकर रखें।

महीने के अंत में उस सूची को देखें। तब तक कई वस्तुओं के प्रति आपका लगाव कम हो चुका होगा। तुरंत मर्जी में किए गए खरीदारी के फैसले अक्सर बचत को रोकते हैं।

अक्सर लोग तनाव, दुख या आलस में ऑनलाइन शॉपिंग कर बैठते हैं। अपनी खरीदारी की आदत पर नजर रखें। क्या आप रात को टिक टॉक या फेसबुक देखते हुए अनावश्यक सामान खरीद लेते हैं? यदि ऐसा है तो उस समय मोबाइल इस्तेमाल न करने की आदत बनाएं।

4. वस्तुएं दूसरों से लेने या साझा करने की आदत अपनाएं

हर वस्तु खुद खरीदने की आवश्यकता नहीं होती। कभी-कभी कम उपयोग वाली वस्तुओं के लिए बड़ी रकम खर्च करने की बजाय उन्हें पड़ोसी या दोस्तों से उधार लेकर इस्तेमाल करें। यदि आपके पास ऐसी समान वस्तुएं हों तो दूसरों को भी इस्तेमाल करने दें।

खासकर समारोहों में पहनने वाले महंगे कपड़े दोस्तों के साथ आदान-प्रदान करने की परंपरा न केवल पैसा बचाती है, बल्कि रिश्तों को भी मजबूत करती है।

सामुदायिक समूहों का भी उपयोग किया जा सकता है। आजकल फेसबुक मार्केटप्लेस या ‘बाई नथिंग’ जैसे समूह सक्रिय हैं, जहां लोग अपनी जरूरत की न रहने वाली वस्तुएं निःशुल्क या साटासाट के लिए देते हैं।

कुछ सार्वजनिक पुस्तकालय न केवल किताबें बल्कि उपकरण, खेल सामग्री और वाद्ययंत्र भी किराए पर देते हैं। ऐसी सुविधाएं खोजें। एक छोटी सी जरूरत के लिए महंगा टूल खरीदने की बजाय उधार लेना समझदारी है।

5. सॉफ्ट डिक्लटरिंग और मानसिक शांति

घर के दराज, बाथरूम के रैक या रसोई के कोनों की सफाई करने से हमें मानसिक शांति का अलग ही अनुभव होता है। ‘सॉफ्ट डिक्लटरिंग’ हमें वर्तमान में जीना सिखाता है। दस सालों से दराज में पड़े वह सामान जो कभी इस्तेमाल नहीं हुए, वे किसी दूसरे के लिए उपयोगी हो सकते हैं। उन्हें दान या देना हमें खुशी देता है।

जब सामान कम होता है, तो उसे साफ-सफाई करने, व्यवस्थित करने और मरम्मत करने का झंझट भी कम होता है। इससे हम अपनी ऊर्जा और समय उन रचनात्मक कार्यों में लगा पाते हैं जो हमें पसंद हैं।

अंत में,

जीवनशैली को बेहतर बनाना नए और महंगे सामान खरीदते रहने में नहीं, बल्कि मौजूदा वस्तुओं का सही उपयोग करने और अनावश्यक बोझ से मुक्त होने में है। सजग होकर खरीदारी करने की आदत न केवल हमारी आर्थिक स्थिति मजबूत करती है, बल्कि पृथ्वी के पर्यावरण संतुलन को भी बनाए रखने में मददगार होती है।

प्रधानमंत्री शाह ने मुख्यमंत्रीयों के साथ की बैठक

३ वैशाख, काठमांडू। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) ने प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की है। गुरुवार दोपहर प्रधानमंत्री एवं मंत्रीपरिषद कार्यालय में उन्होंने मुख्यमंत्रियों के साथ विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में पाँच प्रदेशों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। कोशी प्रदेश के मुख्यमंत्री हिक्मत कार्की मातृशोक में होने के कारण और सुदूरपश्चिम प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलबहादुर शाह उपचार के लिए विदेश में होने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके। मधेश, बागमती, गण्डकी, लुम्बिनी और कर्णाली प्रदेशों के मुख्यमंत्री बैठक में मौजूद रहे।

ब्रिक्स सदस्यता के लिए मलेशिया और थाईलैंड इच्छुक, जापान ने शक्ति संतुलन में बदलाव की चिंता जताई

टोक्यो उभरती अर्थव्यवस्था के समूह ब्रिक्स में शामिल होने के लिए मलेशिया और थाईलैंड द्वारा दी गई आवेदन पर गहन नजर रखे हुए है। ब्रिक्स को यूरोप, अमेरिका और जापान जैसे स्थापित आर्थिक शक्तियों के प्रतिस्पर्धी गठबंधन के रूप में देखा जाता है। विश्लेषकों के अनुसार, ये दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश ऐतिहासिक रूप से विद्यमान और उभरती शक्ति समूहों के बीच संतुलित कूटनीति से हटकर अलग रुख अपनाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे लेकर जापान चिंतित है। जापान की समझ में ये देश मुख्यतः चीन और रूस के प्रभाव वाले समूह के प्रति झुके हुए हैं।

“इस विषय पर टोक्यो में गहरी चिंता और सतर्कता व्यक्त की जाएगी,” जापान की राजधानी में स्थित मेइजी विश्वविद्यालय के राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर गो इटोल ने कहा। उन्होंने ‘दिस विक इन एशिया’ से बातचीत में कहा, “थाईलैंड का चीन के साथ रिश्ता कुछ समय से काफी मजबूत रहा है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अमेरिका के बाहर विश्व में सबसे अधिक संख्या में ‘कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट’ थाईलैंड में स्थित हैं।”

ये संस्थाएं चीनी सरकार द्वारा संचालित शिक्षण और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रदान करती हैं और अक्सर सरकारी प्रचार को बढ़ावा देने के आरोपों के घेरे में रहती हैं। इटोल के अनुसार, बैंकॉक और कुआलालम्पुर दोनों ही ब्रिक्स में जल्द शामिल होकर आर्थिक लाभ प्राप्त करना चाहते हैं। मलेशिया अपने सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार का लक्ष्य रखता है, वहीं थाईलैंड अपनी घरेलू ऑटोमोबाइल उद्योग को मजबूत बनाना चाहता है। थाईलैंड ने जून में इस समूह में सदस्यता के लिए आवेदन किया था और अगले माह मलेशिया ने भी अपने निर्णय की औपचारिक पुष्टि की थी। इस महीने के अंत में रूस में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इन दोनों देशों के आवेदन को मंजूरी मिलने की संभावना है।

सन् 2009 में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ स्थापित ब्रिक्स ने आक्रामक विस्तार की योजना बनाई है। पिछले वर्ष दक्षिण अफ्रीका में आयोजित शिखर सम्मेलन में छह नए सदस्य देशों का स्वागत किया गया था। आर्थिक रूप से शक्तिशाली देशों से सीमित महसूस करने वाले ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों को शामिल करने के लिए चीन और रूस उत्सुक हैं, जिनका उद्देश्य पश्चिमी प्रभुत्व का विकल्प बनाना है। प्रारंभिक पांच सदस्य देशों की विश्व जनसंख्या में हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत और विश्व अर्थव्यवस्था में लगभग 25 प्रतिशत थी। विश्लेषकों के अनुसार नए सदस्यों के जुड़ने से समूह की प्रभावशाली क्षमता और बढ़ेगी। ब्रिक्स के विस्तार के जवाब में जापान के निष्क्रिय रहने की संभावना कम है।

इटोल के अनुसार, जापान ने हाल के वर्षों में वियतनाम के साथ जो सहयोग किया है उसी तरह थाईलैंड और मलेशिया के साथ अपने संबंधों को तेज करने की योजना बनाई है। उन्होंने दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सक्रियता के खिलाफ सुरक्षा सहयोग को मजबूत बनाने के संकेत भी दिए। हालांकि, टोक्यो की टेम्पल यूनिवर्सिटी के एशियाई अध्ययन निदेशक जेफ किंग्स्टन का कहना है कि ये दोनों देश ब्रिक्स सदस्यता का आवेदन करते हुए अपनी वफादारी में बड़ा बदलाव नहीं कर रहे होंगे।

“इसे एक चालाक हेजिंग रणनीति के रूप में देखना चाहिए, जहाँ वे खुद को थोड़ा आगे बढ़ाते हुए पूछ रहे हैं, ‘आप मेरे लिए क्या कर सकते हैं?'” उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों से अधिकतम लाभ उठाने के लिए ये देश खुद को अनुकूल स्थिति में रखने का प्रयास कर रहे हैं।

“अब तक मुझे किसी का भी स्पष्ट पक्ष परिवर्तन होता दिखा नहीं, बल्कि वे चतुराई से बीच में बने रहकर देख रहे हैं कि कौन सा पक्ष अधिक लाभ देगा,” किंग्स्टन ने कहा। उनका मानना है कि ब्रिक्स गठबंधन की सबसे बड़ी कमजोरी इसका भौगोलिक और राजनीतिक रूप से बिखरा हुआ होना है। उदाहरण के लिए, रूस का दक्षिण अफ्रीका के साथ कम संबंध है, जबकि थाईलैंड को भी संयुक्त अरब अमीरात के साथ कम सहयोग का अनुभव होगा।

“सदस्य देश वस्तुओं की उच्च कीमत चाहते हैं, लेकिन विदेशी नीति के अन्य लक्ष्यों में समानता कम है,” उन्होंने कहा। “यह ऐसी संस्था है जो स्पष्ट और संगत एजेंडा खोज रही है, पर फिलहाल ऐसा एजेंडा बनना कम संभावना है।”

जापान दक्षिण-पूर्वी एशिया में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। क्षेत्र में भारी निवेश के साथ ही हाल के दशकों में अपनी विदेश सहायता बजट का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा यहीं क्षेत्र के लिए आवंटित करता रहा है। “चीन, दक्षिण कोरिया या ताइवानी कंपनियों की तुलना में जापानी कंपनियों को अधिक सहयोगी निवेशक के रूप में देखा जाता है। जापान को पूर्वाधार निर्माण में सहज और जिम्मेदार पार्टनर माना जाता है,” किंग्स्टन ने कहा।

उन्होंने यह भी बताया कि समय की पाबंदी और काम की सटीकता जापान की ताकत हैं। उन्होंने यह संभावना कम आंका कि क्षेत्र के अन्य देश मलेशिया और थाईलैंड की तरह ब्रिक्स सदस्यता के लिए आवेदन करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने जापान की दीर्घकालीन साझा प्रतिबद्धता और सामाजिक व सरकारी स्तर पर संबंध मजबूत करने की रणनीतिक ‘लॉन्ग गेम’ दृष्टिकोण को भी दोहराया।

१० वर्षों से निष्क्रिय बैंक खातों में २० अरब रुपये, राज्य कोष में स्थानांतरण की तैयारी

झोले से पैसे निकालते हुए व्यक्ति

तस्वीर स्रोत, Getty Images

नई सरकार के निष्क्रिय बैंक खातों की रकम को राज्य कोष में लाने के योजना बनाने के बाद नेपाल राष्ट्र बैंक ने निष्क्रिय खातों का विवरण इकट्ठा करना शुरू कर दिया है, ऐसा केंद्रीय बैंक के प्रवक्ता ने बताया।

नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरुप्रसाद पौडेल ने बताया कि वाणिज्यिक बैंकों में १० वर्ष से अधिक समय तक निष्क्रिय पड़े खातों की संख्या लगभग ४३ लाख ४० हजार है।

“उन खातों में कुल जमा राशि २० अरब ६४ करोड़ रुपये के करीब है,” पौडेल ने कहा।

बैंक और वित्तीय संस्थाओं को १० वर्षों तक निष्क्रिय पड़े बैंक खातों के बारे में नियामक निकाय राष्ट्र बैंक को रिपोर्ट करना कानूनी रूप से आवश्यक है।

बैंक तथा वित्तीय संस्थाएं अधिनियम की धारा ११२ के अनुसार, “बैंक या वित्तीय संस्था को १० वर्षों से सक्रिय नहीं रहे या जिसमें हकदावा नहीं हुआ हो ऐसे निक्षेप खातों का विवरण प्रत्येक वित्तीय वर्ष की पहली महीने के भीतर राष्ट्र बैंक को देना होगा।”

बन्ने भयो ‘जेम्स बण्ड’ को नयाँ फिल्म, को बन्ला जासुस नायक ?

‘जेम्स बॉन्ड’ की नई फिल्म बनेगी, नया जासूस नायक कौन होगा?

अमेजन एमजीएम स्टूडियो ने नई जेम्स बॉन्ड फिल्म के निर्देशन के लिए डेनिस विलेन्यूवे का चयन किया है। फिल्म प्रमुख कोर्टनी वैलेन्टी ने नई बॉन्ड की घोषणा कब होगी इस विषय में ‘बहुत उत्साहित न न हों’ कहते हुए सावधानी बरतने की बात कही है। नई बॉन्ड की भूमिका के लिए जैकब एलर्डी, कैलेम टर्नर और लुइस पैट्रिज चर्चा में हैं, लेकिन अंतिम निर्णय अभी बाकी है। जेम्स बॉन्ड फिर लौटेंगे, लेकिन कब यह अभी स्पष्ट नहीं है।

अमेजन एमजीएम स्टूडियो ने आगामी फिल्म के बारे में संक्षिप्त जानकारी जारी की है। जासूसी फ्रैंचाइज़ी का रचनात्मक नियंत्रण हाल ही में अपने हाथ में लेने के बाद स्टूडियो ने नई श्रृंखला के निर्देशन के लिए डेनिस विलेन्यूवे को चुना है। ‘ड्यून’ जैसी सफल फिल्मों के निर्देशक विलेन्यूवे के चयन को सकारात्मक रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, ‘पीकी ब्लाइंडर्स’ के निर्माता स्टीवन नाइट को पटकथा लेखन की जिम्मेदारी दी गई है। अब विलेन्यूवे के साथ निर्माता एमी पास्कल और डेविड हेयमैन के सामने सबसे बड़ी चुनौती नई जेम्स बॉन्ड की भूमिका निभाने वाले कलाकार का चयन करना है।

हालांकि, फिल्म कार्यक्रम में स्टूडियो ने अपनी आगामी फिल्मों की सूची प्रस्तुत करते हुए बॉन्ड की भूमिका के बारे में कोई संकेत नहीं दिया है। अमेजन एमजीएम स्टूडियो की फिल्म प्रमुख कोर्टनी वैलेन्टी ने कहा, ‘मुझे पता है कि आप सभी को यह जानने की उत्सुकता है कि नई जेम्स बॉन्ड की घोषणा कब होगी। लेकिन बहुत अधिक उत्साहित न हों। हम इस काम को बेहद सावधानी और सम्मान से कर रहे हैं। यह हमारा जीवन का सबसे बड़ा सपना है, और हम इसे हल्के में लेने की स्थिति में नहीं हैं।’

नई बॉन्ड की भूमिका के लिए कौन आएगा इस पर चर्चा जोरों पर है। जैकब एलर्डी, कैलेम टर्नर और लुइस पैट्रिज जैसे कलाकारों के नाम चर्चा में हैं। लेकिन जो भी चुना जाएगा, उसे भारी जिम्मेदारी निभानी होगी। पिछले जेम्स बॉन्ड के रूप में डैनियल क्रेग को इतिहास के श्रेष्ठ बॉन्ड्स में गिना जाता है, साथ ही सीन कॉनरी के साथ। ‘कसिनो रॉयल’ और ‘स्काईफॉल’ जैसी फिल्मों ने श्रृंखला को एक नई ऊंचाई दी थी। उन्होंने 2021 की ‘नो टाइम टू डाई’ के बाद बॉन्ड की भूमिका नहीं निभाने का फैसला किया है।

अमेजन के लिए ‘बॉन्ड 26’ को सफल बनाना बेहद महत्वपूर्ण है। 2022 में एमजीएम स्टूडियो खरीदने के लिए कंपनी ने 8 अरब डॉलर से अधिक खर्च किया, जिसका मुख्य कारण यह फ्रैंचाइज़ी है। इसलिए नई फिल्म से ‘गोल्डफिंगर’ जैसी सफलता की उम्मीद की जा रही है, न कि ‘ए व्यू टू ए किल’ जैसा प्रदर्शन।

नेपाली कांग्रेस के सांसद खड़का का लेखा समिति के सभापति पद के लिए नामांकन दायर

३ वैशाख, काठमाडौँ। नेपाली कांग्रेस के सांसद भरतबहादुर खड़का ने प्रतिनिधि सभा की सार्वजनिक लेखा समिति के सभापति पद के लिए नामांकन दायर किया है। आज ही कांग्रेस संसदीय दल ने खड़का को लेखा समिति के सभापति पद के लिए भेजने का निर्णय लिया था। इसी निर्णय के आधार पर खड़का ने नामांकन दायर किया है।

आज प्रतिनिधि सभा की संसदीय समितियों में नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। प्रतिनिधि सभा में लगभग दो-तिहाई बहुमत रखने वाली राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ने लेखा समिति के सभापति पद को प्रमुख विपक्षी दल को देने और बाकी सभी समितियों के सभापति पदों के लिए अपने सांसदों को भेजने का निर्णय लिया है। वहीं विपक्षी दलों ने भी लेखा समिति के सभापति पद के लिए कांग्रेस के उम्मीदवार का समर्थन करने पर सहमति जताई है।

सरकार का लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला

केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में डीलिमिटेशन विधेयक की चर्चा के दौरान बताया कि प्रत्येक राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाई जाएगी। उनकी जानकारी के अनुसार, लोकसभा की सीट संख्या 815 हो जाएगी, जिसमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार ने आज संसद में डीलिमिटेशन विधेयक को दायर कर दिया है। विपक्षी दलों ने इस विधेयक पर आरोप लगाया है कि यह उत्तर भारत और अधिक प्रभाव वाले राज्यों में सीटें बढ़ाने और दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व को कमजोर करने का प्रयास है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने डीलिमिटेशन का विरोध करते हुए कहा है कि वे इस विषय में 23 अप्रैल के मतदान में विरोध करेंगे। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस विधेयक का विरोध करते हुए संसद में कहा, “सन् 2023 में संसद ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया था। विपक्षी नेताओं ने 2024 के चुनाव से इसे लागू करने की मांग की थी, लेकिन यह लागू नहीं हुआ।” तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष ने बताया कि डीलिमिटेशन में महिलाओं के आरक्षण को जोड़ने के कारण इसका विरोध किया जा रहा है।

राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा, “भाजपा की योजना 2029 के चुनाव में अपने लाभ के लिए सभी लोकसभा सीटों का डीलिमिटेशन अपने पक्ष में करने की है।” उन्होंने आगे कहा, “मतदाता वितरण असमान है और क्षेत्रीय रूप से अलग-अलग क्षेत्र हैं जिनका दूसरे क्षेत्रों से कोई संबंध नहीं दिखता।” विपक्षी दलों का मानना है कि यह पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव से पहले महिलाओं को लुभाने की राजनीतिक रणनीति भी है।

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इस विधेयक को बेहद अन्यायपूर्ण बताते हुए दक्षिणी राज्यों को क्षति पहुंचाने पर प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि महिलाओं को 30 सालों से अधिकारों के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ रही है और अब यह लागू हो रहा है।

रास्वपा संसदीय दलको उपनेता गणेश पराजुली – Online Khabar

रास्वपा संसदीय दल के उपनेता के रूप में गणेश पराजुली का चयन

राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी ने प्रतिनिधि सभा संसदीय दल के उपनेता के रूप में सांसद गणेश पराजुली का चयन किया है। ३ वैशाख, काठमाडौं। आज संसदीय दल की बैठक में पार्टी के मुख्य सचेतक के रूप में कविन्द्र बुर्लाकोटी और सचेतकों के रूप में प्रकाशचन्द्र परियार तथा क्रान्तिशिखा धिताल को चयनित किया गया है। रास्वपा संसदीय दल का नेतृत्व प्रधानमंत्री बालेन शाह के पास है।

लहान के छोटे व्यवसायियों ने हाटबजार प्रबंधन के खिलाफ किया विरोध

सिरहा के लहान नगरपालिका-५ में स्थित हाटबजार को ४ करोड़ ४१ लाख रुपये की लागत से आधुनिक व्यावसायिक भवन निर्माण शुरू होने के बाद छोटे व्यवसायी विरोध में उतर गए हैं। नगरप्रमुख महेश प्रसाद चौधरी जब हाटबजार प्रबंधन के शिलान्यास के लिए पहुंचे, तब व्यवसायियों ने नारेबाजी करते हुए कार्यक्रम में बाधा उत्पन्न की। विस्थापन के डर के कारण व्यवसायी गुड़िया खातुन ने कहा, “हमें प्राथमिक विकल्प चाहिए” और नगरप्रमुख ने वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने का आश्वासन दिया।

लहान नगरपालिका द्वारा हाटबजार को आधुनिक और स्तरिय बनाने के प्रयासों के कारण स्थानीय व्यवसायी असंतुष्ट हुए हैं। गुरुवार को हाटबजार प्रबंधन और निर्माण कार्य के शिलान्यास समारोह के दौरान नगरप्रमुख चौधरी के कार्यक्रम को व्यवसायियों की प्रतिरोध के कारण बाधित करना पड़ा। नगरपालिकाई योजना के तहत इस स्थान पर ४ करोड़ ४१ लाख रुपये की लागत से व्यावसायिक भवन निर्माण की तैयारी थी।

नगरप्रमुख चौधरी के शिलान्यास के लिए पहुंचने पर व्यवसायियों ने उच्च स्वर में विरोध जताते हुए अवरोध किया, जिससे तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई। नगरप्रमुख और उनकी टीम बिना शिलान्यास किए वापस लौट गए। वापस लौटने के तुरंत बाद आक्रोशित व्यवसायी और स्थानीय लोग लहान के नए बाजार क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन करते हुए चक्काजाम तक कर दिया। उन्होंने बिना विकल्प दिए इस संरचना निर्माण के निर्णय का विरोध व्यक्त किया।

वर्षों से यहाँ व्यापार कर रहे छोटे व्यवसायी इस भवन निर्माण और टेंडर समझौते के बाद अपने विस्थापन की आशंका जता रहे हैं। विरोध कर रही व्यवसायी गुड़िया खातुन ने कहा, “हमें प्राथमिक विकल्प चाहिए। नगरपालिका जब भव्य भवन बनाएगी और टेंडर लगाएगी तो हम छोटे व्यवसायी कहाँ जाएंगे? जब तक हमारी रोज़ी-रोटी की सुनिश्चितता नहीं होती, हम इस कार्य की अनुमति नहीं देंगे।” लहान का यह हाट पूरे जिले का सबसे पुराना, बड़ा और व्यस्त बाजार माना जाता है, जहाँ प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को भव्य हाट लगता है। नगरप्रमुख चौधरी ने कहा है कि विवाद का समाधान वार्ता के माध्यम से किया जाएगा।

कारागारबाटै सौतेनी छोराले बनाएका थिए योजना, भान्जा र ज्वाइँसहित ५ जना संलग्न

पोखरामा सौतेनी छोराको योजना अनुसार सिर्जना पौडेल केसी की हत्या, ५ आरोपियों को किया गिरफ्तार

पोखराका मुख्य बजार में २५ चैत्र की शाम सिर्जना पौडेल केसी की हत्या सौतेनी पुत्र गौरव की साजिश के तहत हुई है, ऐसा पुलिस ने निष्कर्ष निकाला है। हत्या की योजना में शामिल ५ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है, जबकि गौरव को कारागार से लाकर अतिरिक्त पूछताछ की जा रही है। पुलिस प्रमुख एसपी नवीन कार्की ने बताया कि सिर्जना की हत्या पारिवारिक कलह, संपत्ति विवाद और हिस्सेदारी के मुकदमों के कारण हुई थी।

२५ चैत्र की शाम सभागार चौक के पास ४२ वर्षीय एकल महिला सिर्जना पौडेल केसी पर खुकरी से हमला कर उनकी हत्या कर दी गई थी। स्कूटर पर आए दो व्यक्तियों ने उनकी गर्दन में खुकरी मारी और मौके से फरार हो गए। पुलिस ने खुकरी चलाने वाले और स्कूटर चलाने वाले दोनों को गिरफ्तार कर २७ चैत्र को सार्वजनिक किया था। खुकरी चलाने वाला सिर्जना का भांजा, २७ वर्षीय शिशिर केसी (जिसे संतोष के नाम से भी जाना जाता है) और स्कूटर चालक ३२ वर्षीय कुशल परियार को पुलिस ने शुरुआती ही चरण में गिरफ्तार कर लिया था।

गिरफ्तार में शामिल हैं सिर्जना के भांजा, पर्वत कुश्मा नगरपालिका-११ निवासी और वर्तमान में पोखरा महानगरपालिका-५ जिरो किलो में रहने वाले २४ वर्षीय वसन्त केसी, तथा उनकी बेटी के देवर, पर्वत फलेवास नगरपालिका-९ भंगारा निवासी और वर्तमान में पोखरा-१६ लामाचौर में रहने वाले २७ वर्षीय नवराज पौडेल क्षेत्री। वसन्त शिशिर के छोटे भाई हैं। मामी सिर्जना की हत्या में भांजे के दो भाइयों और देवर सहित कुल चार गिरफ्तार हुए हैं, लेकिन पुलिस जांच को और व्यापक बनाने का प्रयास कर रही है। इस बीच पारिवारिक मामले में संदिग्ध पक्षों के होने की बात सामने आई है, साथ ही परिवार में हिस्सेदारी, बॉक्स और संपत्ति विवाद भी विद्यमान है।