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लेखक: space4knews

शिखर नगरपालिकाः संघीय सरकार से कहा– रविवार को विद्यालय बंद नहीं होना चाहिए

२ वैशाख, काठमाडौं । डोटी की शिखर नगरपालिकाने रविवार को विद्यालय बंद न करने के पक्ष में संघीय सरकार को पत्र भेजा है। नगर प्रमुख दीर्घबहादुर बलायर ने बुधवार को संघीय सरकार के शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय को पत्र लिखते हुए बताया कि रविवार को छुट्टी देने के निर्णय से पूरे वर्ष में केवल १३८ दिन ही पढ़ाई संभव होगी। मेयर बलायर के पत्र में कहा गया है कि संघीय सरकार के रविवार को अवकाश देने के निर्णय के अनुसार, नगरपालिका और विद्यालयों के लिए शैक्षिक कार्य योजना और समय सारिणी बनाना अत्यंत कठिन होगा।

अवकाश का हिसाब-किताब नगरपालिका के पत्र में शामिल है जहाँ दिखाया गया है कि यदि रविवार को छुट्टी दी गई तो वार्षिक विद्यालय कैलेंडर में दिक्कत आएगी। वर्ष के ३६५ दिनों में से ५२ शनिवार छुट्टी है, इसमें ५२ रविवार जोड़ें और प्रदेश के ३२ सार्वजनिक छुट्टियाँ मिलाएं तो कुल अवकाश १३६ दिन हो जाते हैं। शिक्षा नियमावली २०५९ के नियम ८५(२) के तहत घटस्थापना से पूर्णिमा तक पाँच दिन दशैं छुट्टी, नियम ८५(३) के अनुसार हिउँदे या वर्षे या दोनों मिलाकर ४५ दिन छुट्टी, तथा नियम ८५(४) के तहत ५ दिन स्थानीय छुट्टी की अनुमति है, जिससे कुल ५५ और दिन छुट्टियाँ हो सकती हैं, जो कानूनी प्रावधान भी हैं।

‘इससे स्कूल खुलने वाले दिन केवल १७४ ही बचते हैं’, पत्र में उल्लेख है। ऐसी स्थिति में शिक्षा नियमावली के नियम ८४(५) के अनुसार कम से कम २२0 दिन विद्यालय संचालन करना आवश्यक है, जिसे पूरा न करने का खतरा होता है, यह मेयर बलायर ने शिक्षा मंत्रालय को सचेत किया है। ‘नेपाल के वर्तमान पाठ्यक्रम के अनुसार कम से कम १८0-१९0 दिन पढ़ाई जरूरी है’, पत्र में कहा गया, ‘लेकिन १७4 दिन में से परीक्षा के लिए तीन बार कुल २1 दिन निकल जाते हैं। वैशाख १५ के पहले और चैत्र अंत के बाद कम से कम १५ दिन पढ़ाई नहीं होती।’

रविवार को अवकाश देने पर पढ़ाई के लिए केवल १३८ दिन बचेंगे, यह हिसाब नगरपालिका ने पत्र में प्रस्तुत किया। ‘अतिरिक्त गतिविधियाँ, परीक्षा तैयारी के लिए अवकाश, परिणाम घोषित करने का समय, शिक्षक छुट्टियाँ और विद्यार्थियों की अनुपस्थिति को भी जब ध्यान में रखा जाए तो शैक्षिक सत्र में पढ़ाई का समय बहुत कम रह जाता है’, पत्र में लिखा है। शैक्षिक सत्र के प्रबंधन और संचालन को बेहद चुनौतीपूर्ण माना गया है। नगर कार्यपालिक की बैठक ने संघीय सरकार को सुझाव देते हुए पत्र भेजने का निर्णय लिया, यह जानकारी मेयर बलायर ने दी।

शैक्षिक सत्र प्रबंधन के दबाव को ध्यान में रखते हुए जल्दी समाधान के लिए नगरपालिकाने शिक्षा मंत्रालय से अनुरोध किया है। नगरीय प्रमुख बलायर के अनुसार, यदि समाधान नहीं हुआ तो नगरपालिका स्वयं निर्णय लेकर संघीय सरकार के आदेश विपरीत रविवार को विद्यालय संचालित करने की तैयारी में है। ‘हम अपने विद्यालयों और बच्चों की चिंता करते हैं। सम्पूर्ण वर्ष उचित पढ़ाई सुनिश्चित करना चाहते हैं’, उन्होंने कहा, ‘हमें आशा है कि संघीय सरकार इसका समाधान करेगा, अन्यथा संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के तहत हम स्वयं निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।’ पत्र की प्रति प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय, शिक्षा तथा मानव स्रोत विकास केन्द्र सानोठिमी एवं शिक्षा विकास समन्वय इकाई डोटी को भी भेजी गई है।

दलित कोटामा ‘गैरदलित’ सिफारिस भएको आरोप, मुद्दा सर्वोच्चमा

दलित कोटे में गैरदलित सिफारिश के आरोप पर मामला सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन

गण्डकी प्रदेश लोक सेवा आयोग पर दलित कोटे में गैरदलित उम्मीदवार को सिफारिश करने के आरोप के साथ मामला सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन है। राष्ट्रीय दलित आयोग ने दलित सूची से कुछ जाति/थरों को हटाकर प्रमाणपत्र रद्द करने हेतु सातों प्रदेश लोक सेवा आयोगों को पत्र भेजा है। मामला सर्वोच्च अदालत में होने के कारण अंतिम निर्णय वहीं से आने की उम्मीद है और दलित कोटे की प्रमाणिकता विवादित बनी हुई है। २ वैशाख, काठमाडौं।

लोक सेवा आयोग के तहत स्वास्थ्य सेवा, हेल्थ इन्स्पेक्शन समूह के पाँचवें स्तर के हेल्थ असिस्टेंट (एचए) पद के एक परिणाम पर विवाद उत्पन्न हुआ है। दलित कोटे में गैरदलित को उत्तीर्ण कर सिफारिश करने के आरोप के चलते मामला सर्वोच्च अदालत पहुंचा और नियुक्ति विवादित हो गई। गण्डकी प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा ३ असार को प्रकाशित परिणाम के अनुसार, पर्सा के मुकेश सहनी मलाह दलित कोटे से उत्तीर्ण होकर पर्वत के महाशिला गाउँपालिका के लिए सिफारिश किए गए थे।

लेकिन उसी पद की वैकल्पिक सूची में पहले स्थान पर रहने वाले सप्तरी के तिरहुत गाउँपालिका-२ के देवकृष्ण मंडल ने इस सिफारिश को नियमों के खिलाफ बताते हुए न्याय पाने के लिए विभिन्न संस्थाओं से संपर्क किया है। देवकृष्ण ने दलित कोटे में गैरदलित सिफारिश किए जाने के खिलाफ राष्ट्रीय दलित आयोग, लोक सेवा आयोग और गृह मंत्रालय तक लिखित आवेदन दिया है। उनका मामला लगभग ८ माह से सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन है।

इस बीच, राष्ट्रीय दलित आयोग ने २०७९ वैशाख १० को देश के सभी सात प्रदेश लोक सेवा आयोगों को “अत्यंत आवश्यक” बताते हुए पत्र भेजा था। आयोग ने २०७८ असार २९ की बैठक में तराई-मधेशी समुदाय में आने वाली पटवा, चिट्लार, विन, मुखिया, मलाह (सहनी), लोहार और गोढिया जाति/थरों को दलित सूची से हटाने का निर्णय लिया। पत्र में कहा गया कि इन जाति/थरों के द्वारा प्राप्त दलित प्रमाणपत्र रद्द किए जाएं और दलित कोटे में गैरदलित समुदाय के लोगों की सिफारिश न हो, इसके लिए संबंधित संस्थाओं को निर्देश दिया जाए।

आयोग के अनुसार, कुछ जिला प्रशासन कार्यालयों ने उक्त थरों को दलित के रूप में प्रमाणपत्र जारी किए हैं, जिसके आधार पर लोक सेवा आयोग के परीक्षा में दलित कोटे से भाग लेकर सिफारिश भी हुई है, इस संबंध में शिकायत आयोग को मिली है। आयोग को आशंका है कि कुछ लोग उन प्रमाणपत्रों का उपयोग कर सामाजिक सुरक्षा भत्ते भी ले रहे होंगे। इसी संदर्भ में आयोग ने गृह मंत्रालय, संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय, लोक सेवा आयोग और प्रदेश लोक सेवा आयोगों को पत्राचार कर कहा है कि संबंधित प्रमाणपत्र रद्द करें तथा दलित कोटे में गैरदलित समुदाय के लोगों की सिफारिश न हो, उसकी व्यवस्था करें।

देवकृष्ण मंडल द्वारा आवेदन करने के बाद राष्ट्रीय दलित आयोग ने २ साउन को गण्डकी प्रदेश लोक सेवा आयोग से अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगते हुए पत्र भेजा था। जवाब में आयोग ने छह दिन बाद भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया कि मुकेश सहनी ने न्यूनतम योग्यता के दस्तावेज और पर्सा जिला प्रशासन कार्यालय से जारी दलित प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था, इसलिए आवेदन स्वीकार किया गया और परीक्षा की पूरी प्रक्रिया पूरी कर उत्तीर्ण होने के बाद सिफारिश की गई। दलित कोटे की प्रमाणिकता और जातीय सूची पर स्पष्टता नहीं होने के कारण विवाद उत्पन्न हुआ है। मामला सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन होने के कारण अंतिम निर्णय वहीं से आने की संभावना बनी हुई है।

मंडल ने कहा, ‘मैं अन्याय के शिकार महसूस करता हूं। आठ महीनों से विभिन्न संस्थाओं के पास गुहार लगा रहा हूं। सर्वोच्च अदालत बार-बार मेरी समय सीमा बढ़ा रही है। दलित के नाम पर गैरदलित को सुविधा नहीं मिलनी चाहिए। मैं सचमुच अन्याय में हूं।’

‘वेलनेस दिवस’ पर वीडियो प्रतियोगिता का आयोजन, हर प्रदेश के विजेताओं को मिलेगा ७५ हजार नकद पुरस्कार

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने पहले अंतर्राष्ट्रीय वेलनेस दिवस के अवसर पर ‘हर फ्रेम में वेलनेस, हर कहानी में नेपाल’ नारे के साथ वीडियो प्रतियोगिता का आयोजन किया है। इस प्रतियोगिता में सातों प्रदेशों से एक-एक विजेता चुना जाएगा और प्रत्येक को ७५ हजार रुपये नकद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। आवेदन करने की अंतिम तिथि १४ मई २०२६ निर्धारित की गई है। प्रतियोगिता आयुर्वेद, योग, ध्यान, स्पा और आध्यात्मिक उपचार क्षेत्रों को समेटते हुए २० सेकंड का वीडियो बनाने के लिए आमंत्रित कर रही है तथा वीडियो को सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर हैशटैग के साथ साझा करना होगा।

नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य नेपाल को विश्व के प्रमुख आध्यात्मिक तथा प्राकृतिक स्वास्थ्य (वेलनेस) स्थलों में प्रचारित करना है। बोर्ड ने हर प्रदेश से एक विजेता चुनकर ७५ हजार रुपए नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। इच्छुक प्रतिभागी अपनी रचनाएँ photonepal.org पर अपलोड कर सकते हैं।

प्रतियोगिता प्रतिभागियों से हिमालय की शांति और देश की विभिन्न वेलनेस पद्धतियों को २० सेकंड के प्रभावशाली वीडियो में प्रस्तुत करने का आग्रह करती है। डिजिटल उपस्थिति बढ़ाने के लिए प्रतिभागियों को #WellnessNepal और #NepalNow जैसे हैशटैग के साथ वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने होंगे। पर्यटन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) दीपकराज जोशी ने कहा, ‘यह प्रतियोगिता विश्व को हमारे राष्ट्र की आत्मा से जोड़ने वाला डिजिटल पुल साबित होगी।’

कांग्रेस ने निर्वाचन ब्यूरो का गठन किया

२ वैशाख, काठमांडू। नेपाली कांग्रेस ने निर्वाचन ब्यूरो का गठन किया है। बुधवार को सम्पन्न कैन्द्रीय कार्यसम्पादन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। कार्यवाहक मुख्य सचिव कृष्णप्रसाद दुलाल के अनुसार, उपसभापति पुष्पा भुसाल को संयोजक बनाकर ब्यूरो का गठन किया गया है। साथ ही, बैठक ने उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा के नेतृत्व में केन्द्रीय नीति, अनुसंधान तथा प्रशिक्षण प्रतिष्ठान के गठन की भी जानकारी दी है।

कांग्रेस ने महामंत्री प्रदीप पौडेल की संयोजकता में ‘सदस्यता प्रबंधन केन्द्रीय समिति’ का गठन किया है। समिति के सदस्यों में सहमहामंत्री योगेन्द्र चौधरी और प्रकाश रसाइली ‘‘स्नेही’’ शामिल हैं जबकि एक सदस्य बाद में चयन किए जाने की सूचना दी गई है। इसी प्रकार, महामंत्री गुरुराज घिमिरे की संयोजकता में संगठन परिचालन तथा समन्वय समिति भी गठित की गई है, जिसके सदस्य सहमहामंत्री बहादुरसिंह लामा और सहमहामंत्री मुक्ताकुमारी यादव हैं।

साथ ही, केन्द्रीय सदस्य अर्जुननरसिंह केसी की संयोजकता में अन्य राजनीतिक दल संवाद समिति और केन्द्रीय सदस्य चिनकाजी श्रेष्ठ की संयोजकता में मर्यादाक्रम निर्धारण समिति का भी गठन किया गया है। बैठक ने सार्वजनिक कार्यक्रम संचालन कार्यविधि-२०८३ को प्रदेश एवं जिला कार्यसमिति के सुझावों को समेटकर १ जेठ से लागू करने के लिए पारित किया है। पार्टी में व्यापक एकता बनाते हुए १५वें महाधिवेशन को निर्धारित समय के भीतर संपन्न करने के लिए पार्टी के नेताओं से संवाद हेतु सभापति गगनकुमार थापालाई जिम्मेदारी देने का निर्णय भी बैठक में लिया गया है।

केन्द्रको निर्देशनविपरीत स्थानीय तहले गरे धमाधम विद्यार्थी भर्ना

स्थानीय तहहरूले केन्द्र सरकारको निर्देशनलाई बेवास्ता गर्दै विद्यार्थी भर्ना प्रक्रिया अघि बढाए

समाचार सारांश समीक्षित सामग्री। केन्द्र सरकारले वैशाख १५ गतेदेखि विद्यार्थी भर्ना र २१ गतेदेखि पठनपाठन सञ्चालन गर्ने निर्णय गरेको छ। तर, तनहुँ, रुपन्देही र प्युठानका स्थानीय तहहरूले केन्द्रको निर्णय विपरीत वैशाख २ गतेदेखि भर्ना र पठनपाठन सुरु गरेका छन्। प्याब्सनले शिक्षा मन्त्रीलाई भेटेर १५ गतेदेखि पठनपाठन सुरु गर्ने निर्णयमा ध्यानाकर्षण गराएको छ। २ वैशाख, काठमाडौं। संघीय सरकारको निर्णय विपरीत केही स्थानीय तहहरूले विद्यार्थी भर्ना र पठनपाठन सुरु गरेका छन्। केन्द्र सरकारले वैशाख १५ गतेदेखि भर्ना र २१ गतेदेखि पठनपाठन सञ्चालन गर्ने निर्णय गरेको छ। तर स्थानीय तहहरूले उक्त निर्णयलाई बेवास्ता गर्दै भर्ना र पठनपाठन सुरु गर्ने सूचना जारी गरेका छन्।

तनहुँको आँबुखैरेनी गाउँपालिकाले वैशाख २ गते (आज) देखि भर्ना र पठनपाठन सञ्चालन सुरु गर्ने सूचना जारी गरेको छ। संविधानले आधारभूत र माध्यमिक तहको शिक्षा व्यवस्थापन स्थानीय तहलाई जिम्मा दिएकोले उक्त शैक्षिक सत्र सुरु गरेको सूचना प्रकाशित गरिएको छ। ‘यस गाउँपालिकाभित्रका सम्पूर्ण सामुदायिक र संस्थागत विद्यालयहरूले वैशाख २ गतेदेखि भर्ना अभियान र नियमित पठनपाठन सञ्चालन गर्न/गराउन सबैमा यो सूचना जारी गरिएको छ,’ गाउँपालिका अध्यक्ष शुक्र चुमानको जारी सूचनामा भनिएको छ।

त्यस्तै, तनहुँको बन्दीपुर गाउँपालिकाले २ वैशाखदेखि ८ गतेसम्म भर्ना र ९ गतेबाट पठनपाठन सुरु गर्ने निर्णय गरेको छ। ‘सिकाइ उपलब्धिको तयारी र वार्षिक कार्ययोजना लगायत सबै तयारी ८ गतेसम्म पूरा हुन्छ। आजदेखि नै भर्ना अभियान सुरु गरेका छौँ,’ गाउँपालिका अध्यक्ष सुरेन्द्रबहादुर थापाले भने, ‘९ गतेबाट पठनपाठन सुरु हुन्छ।’ शैक्षिक क्यालेन्डर तयार भएकाले सोही अनुसार सत्र सुरु गरिएको उनले बताए। ‘क्यालेन्डरअनुसार पठनपाठन नहुँदा कोर्स पूरा गर्न सकिँदैन। नजिकैका अन्य विद्यालयले पनि पठनपाठन सुरु गरिसकेका छन्,’ उनले थपे।

रुपन्देहीको तिलोत्तमा नगरपालिकाले ७ वैशाखदेखि विद्यार्थी भर्ना सुरु गर्ने र १० गतेदेखि नियमित पठनपाठन गराउने निर्णय गरेको छ। नगर प्रमुख रामकृष्ण खाणले जारी गरेको विज्ञप्तिमा २ वैशाखदेखि शैक्षिक तथा विभिन्न प्रवर्द्धनात्मक र रचनात्मक शैक्षिक कार्यक्रमहरू सञ्चालन गर्ने उल्लेख छ। प्युठानको झिमरुक गाउँपालिकाले पनि विद्यार्थी भर्ना छिटो सुरु गरेको छ। ‘आजदेखि भर्ना सुरु गरेका छौँ। १० गतेबाट पठनपाठन सुरु हुनेछ,’ गाउँपालिका अध्यक्ष पितबहादुर महताराले भने।

गत चैत १० गते विद्यार्थीहरूको परीक्षा सकिएपछि लामो समयसम्म बिदा हुने भएकोले विद्यार्थीहरू अन्यत्र जाने भएपछि भर्ना शुरु गरिएको उनले बताए। ‘संविधान र स्थानीय सरकार सञ्चालन ऐनले माविसम्मको अधिकार स्थानीय तहलाई दिएको छ। त्यसैअनुसार क्यालेन्डर बनाएर कार्यान्वयन गरिरहेका छौँ,’ उनले थपे। तर संघीय सरकारले भने १५ वैशाखदेखि विद्यार्थी भर्ना मात्र सञ्चालन गर्न निर्देशन दिएको छ। ‘१५ गतेदेखि भर्ना गर्ने निर्देशन र परिपत्र जारी गरिसकेको छौं,’ शिक्षा तथा मानव स्रोत विकास केन्द्रका महानिर्देशक अणप्रसाद न्यौपानेले बताए।

प्याब्सन काठमाडौंले वैशाख २ गतेदेखि भर्ना सुरु गर्ने, ७ गतेदेखि पूर्वतयारी कक्षा सञ्चालन गर्ने, र १५ गतेदेखि नियमित कक्षा सञ्चालन गर्ने सूचना जारी गरेको छ। यसैबीच बुधबार प्याब्सन टोलीले शिक्षा मन्त्री सस्मित पोखरेललाई भेटेर यस विषयमा ध्यानाकर्षण गराएको छ। ‘मन्त्रीज्यूलाई यस विषयमा अवगत गराएका छौँ। उहाँले १५ गतेबाट मात्रै पठनपाठन सुरु गर्न निर्देशन दिनुभएको छ,’ प्याब्सन अध्यक्ष कृष्ण अधिकारीले भने।

इनड्राइभको ‘राइड मोर, विन मोर’ क्याम्पेन नयाँ वर्ष २०८३ को शुभ अवसरमा

इनड्राइभले नेपाली नयाँ वर्ष २०८३ को अवसरमा ‘राइड मोर, विन मोर’ क्याम्पेन वैशाख १ देखि २१ सम्म सञ्चालन गर्ने घोषणा गरेको छ। यस क्याम्पेनमा प्रत्येक राइडको लागि १ लक्की ड्र टिकट प्रदान गरिनेछ र मेगा गिभअवेमा भाग लिन कम्तीमा २ कारोबार खल्ती एपमार्फत गर्नुपर्नेछ। प्रमुख पुरस्कारमा १० वटा अनर एक्स ७ डी स्मार्टफोनसहित प्रोमो कोडमार्फत क्यासब्याक र एयरलाइन प्रोमो कोड पनि समावेश गरिएको छ।

२ वैशाख, काठमाडौं। विश्वव्यापी मोबिलिटी तथा डेलिभरी प्लेटफर्म इनड्राइभले नेपाली नयाँ वर्ष २०८३ को अवसरमा ‘राइड मोर, विन मोर’ क्याम्पेन सुरु गरेको छ। यस क्याम्पेन मार्फत प्रयोगकर्ताले इनड्राइभ एपबाट राइड बुक गर्दा आकर्षक पुरस्कार जित्ने अवसर पाउनेछन्। नयाँ वर्षको समयमा परिवार र साथीसँग भेटघाट गर्न धेरैले यात्रा गर्ने भएकाले प्रत्येक यात्रालाई अझ रमाइलो र लाभदायक बनाउन यो क्याम्पेन ल्याइएको इनड्राइभले जनाएको छ।

वैशाख १ देखि सुरु भएको क्याम्पेन वैशाख २१ सम्म सञ्चालन हुनेछ। क्याम्पेनमा हरेक राइडमा १ लक्की ड्र टिकट प्राप्त हुनेछ (जति धेरै राइड, उति धेरै जित्ने मौका) भनी इनड्राइभले जानकारी गराएको छ। मेगा गिभअवेमा सहभागी हुन राइड पूरा गरेपछि प्रयोगकर्ताले खल्ती एपमार्फत कम्तीमा २ वटा कारोबार गर्नुपर्नेछ जुन कारोबार ड्राइभरको खल्तीमा पठाइनेछ। कम्पनीका अनुसार प्रमुख पुरस्कारका रूपमा १० वटा अनर एक्स ७ डी स्मार्टफोन मेगा गिभअवेमा प्रदान गरिनेछ। साथै, प्रोमो कोड पुरस्कारका रूपमा १ हजार जनालाई १५ प्रतिशत क्यासब्याक (अधिकतम ५० रुपैयाँ), १ हजार जनालाई २०० रुपैयाँ क्यासब्याकसहित एयरलाइन प्रोमो कोड र १०० जनालाई खल्ती प्रोमा अपग्रेड गरिनेछ।

नेपाल मेडिकल काउंसिल ने बिना अनुमति चलाए जाने वाले आईवीएफ शिविर को रोकने प्रशासन को लिखा पत्र

नेपाल मेडिकल काउंसिल ने बिना अनुमति संचालित होने वाले आईवीएफ से संबंधित चिकित्सा शिविर को रोकने के लिए प्रशासन को पत्र लिखा है। काउंसिल ने चिकित्सा सेवा संचालित करने के लिए पंजीकरण और पूर्व-स्वीकृति आवश्यक होने के बावजूद बिना अनुमति कार्य करना कानून के विरुद्ध और जनस्वास्थ्य के लिए नकारात्मक बताकर चेतावनी दी है। पत्र के माध्यम से प्रशासन से इस कार्यक्रम को तत्काल बंद करने, जांच करने और कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। २ वैशाख, काठमांडू।

नेपाल मेडिकल काउंसिल ने बिना अनुमति शुरू किए जाने वाले आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) संबंधित चिकित्सा शिविर को रोकने के लिए जिल्ला प्रशासन कार्यालय काठमांडू के प्रमुख जिल्ला अधिकारी को पत्र लिखा है। सामाजिक माध्यम और प्रचार सामग्री के आधार पर यह जानकारी मिली कि अप्रिल १६ (कल) को होटल याक एंड यती में आईवीएफ परामर्श सेवा संचालित होनी है, जिस पर काउंसिल ने गंभीर ध्यान देने की बात कही है।

काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. सतिश देव के अनुसार, नेपाल मेडिकल काउंसिल ऐन २०२० और प्रचलित नियमावली २०२४ के तहत किसी भी विदेशी या स्वदेशी चिकित्सक, संस्था, अस्पताल या परामर्श शिविर को संचालित करने से पहले काउंसिल में पंजीकरण और पूर्व स्वीकृति लेना अनिवार्य है। मगर प्रचार सामग्री के अध्ययन से ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित चिकित्सक या संस्था ने काउंसिल में पंजीकरण या स्वीकृति नहीं प्राप्त की है। बिना अनुमति चिकित्सा सेवा देने से न केवल कानून का उल्लंघन होगा, बल्कि जनस्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए काउंसिल ने चेतावनी जारी की है।

‘प्रचार सामग्री के अध्ययन पर, संबंधित चिकित्सक और संस्था के पास काउंसिल में विधिवत पंजीकरण या स्वीकृति होने का प्रमाण नहीं मिला है। इस प्रकार बिना अनुमति चिकित्सा सेवा देना कानून के खिलाफ होने के साथ-साथ जनस्वास्थ्य के लिए खतरा है,’ पत्र में उल्लेख है। पत्र के माध्यम से काउंसिल ने प्रशासन से इस कार्यक्रम को तुरंत रोकने, जांच शुरू करने और कानूनी कार्रवाई प्रारंभ करने का निवेदन किया है। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की गतिविधि शुरू करने से पहले संबंधित विभाग से अनिवार्य स्वीकृति लेने और हितधारकों को इस बारे में सचेत करने का आग्रह किया है। काउंसिल ने इस शिविर में भारतीय चिकित्सक डॉ. जयदीप मल्होत्रा और डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा के भी शामिल होने का उल्लेख किया है। रजिस्ट्रार डॉ. देव ने कहा कि जनस्वास्थ्य से संबंधित संवेदनशील सेवाओं के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का अनुपालन अनिवार्य है और नियमों का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा।

जसले सुन तस्करीको उजुरी दिए, उनीहरूमाथि नै भ्रष्टाचार मुद्दा

सुन तस्करी की शिकायत करने वाले कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज

समाचार सारांश

  • अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के कस्टम कार्यालय के तीन कर्मचारियों के खिलाफ सुन तस्करी में शामिल होने के आरोप में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है।
  • कस्टम कार्यालय में जब्त इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (वेप) के अंदर सुन छिपाकर तस्करी करने की घटना दो साल बाद सार्वजनिक हुई है।
  • जिला अदालत ने सुन चोरी में शामिल कर्मचारियों को आपराधिक विश्वासघात का दोषी मानते हुए जेल और जुर्माना की सजा सुनाई है।

२ वैशाख, काठमांडू। त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के कस्टम कार्यालय के प्रमुख अरुण पोखरेल, प्रमुख कस्टम अधिकारियों मुक्तिप्रसाद श्रेष्ठ और अम्बिकाप्रसाद खनाल, ये तीन कर्मचारियों ने उच्च अधिकारियों को सूचित नहीं किया होता, तो इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (वेप) के अंदर छिपाकर की गई सुन तस्करी सार्वजनिक नहीं होती।

घटना के लगभग दो साल बाद अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने तस्करी की लिखित शिकायत और रिपोर्ट देने वाले कर्मचारियों पर ही भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर दिया है।

अख्तियार का यह निर्णय विरोधाभासी है क्योंकि आरोपित कर्मचारी जिला अदालत में सुन तस्करी की सूचना देने वाले गवाह के रूप में बयान देने जा रहे हैं।

अख्तियार ने बड़े और उच्च प्रोफ़ाइल व्यक्तियों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों पर दबाव के कारण, तस्करी और अनियमितता की सूचना देने वाले कर्मचारियों पर भी मामला दर्ज किया है। दो वर्षों तक जांच न करने के बाद नए सरकार बनने के साथ ही मामला दर्ज किया गया है।

कस्टम द्वारा जब्त की गई वेप

१० पुष, २०८०। सुबह साढ़े ७ बजे त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थित कस्टम कार्यालय के चेकप्वाइंट पर फ्लाई दुबई विमान से नेपाल आए चीनी नागरिक ली हांग सुंग के दो सूटकेस की जांच के दौरान ७३ पैकेटों में रखे ७३० इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (वेप) बरामद हुए।

यह सामान व्यवसायिक मात्रा में लाने की अनुमति थी परंतु झीटीगुण्टा सुविधा के तहत पाए जाने के कारण विमानस्थल कस्टम ने सूटकेस जब्त कर लिए।

जब्त पूंजी और कागजात तैयार करने के बाद सूटकेस प्रमुख कस्टम अधिकारी मुक्तिप्रसाद श्रेष्ठ के कार्यालय के पास रखा गया और कस्टम कर्मचारी नासु सरोज श्रेष्ठ ने फोटो भी खींचे।

बाद में इन सूटकेसों का निरीक्षण करने और कार्रवाई हेतु एक महीने से अधिक समय लगा और अंततः गोदाम में भेजा गया, हालांकि कस्टम रिपोर्ट में सूटकेस यात्रु शाखा काउंटर पर होने का उल्लेख है।

सूचना देने वाले कर्मचारियों का कहना है कि शुरुआत में उन्हें पता नहीं था कि वेप के अंदर सुन छिपाई गई है, उन्होंने केवल बिजनेस सामान होने के आधार पर जप्त किया था।

त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे में टर्मिनल पर कस्टम जांच पास यूनिट, चेकप्वाइंट और कर्मचारी कार्यालय होते हैं, नीचे कस्टम कार्यालय, प्रमुख कार्यकक्ष और गोदाम होते हैं, बरामद सामान आमतौर पर वहां भेजा जाता है।

जब वेप जब्त किया गया, तब प्रमुख कस्टम प्रशासक अरुण पोखरेल के संयोजन में मूल्यांकन समिति बैठकर उसकी कीमत ५ लाख ११ हजार निर्धारण की गई, पर नीलामी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई।

सुरक्षा गार्ड की वसूली

निर्मल विक एयरपोर्ट कस्टम के सुरक्षा गार्ड हैं। उन्होंने सूटकेस टर्मिनल से नीचे ले जाने में मदद की। गोदाम पहुंचने के बाद सूटकेस फोड़कर सामग्री की जांच की।

जिला अदालत और अख्तियार के मुताबिक निर्मल ने एक वेप चोरी कर घर ले जाकर जलाने की कोशिश की, समस्या उत्पन्न होने पर सुन की दुकान पर दिखाया तो दुकानदार ने यह सुन होने की बात कही और उन्होंने सुन सिक्के बनाकर बचे हुए रूपये से मजदूरी भी चुकाई।

सुरक्षा गार्ड ने नीलामी कराने वाले बब्लु गुप्ता को बताया कि वेप के अंदर सुन है। बब्लु ने एयरपोर्ट कस्टम कर्मचारियों से मिलकर सुन बिक्री का काम किया और वेप का बदला किया।

कस्टम में जब्त सामान को पोको सूटकेस के गोदाम में रखा गया, वेप और अंदर की सुन अलग कर बेच दी गई और नया वेप खरीदकर उसी सूटकेस में रखकर गोदाम में रख दिया गया।

वेप जब्त होते ही एयरपोर्ट कस्टम में बार-बार फोन आए और राहुल महरा व पूर्व सभापति कृष्णबहादुर महरा ने सूटकेस छोड़ने दबाव बनाया।

उस वक़्त कर्मचारियों को वेप में सुन होने की सूचना नहीं थी, प्रमुख अरुण पोखरेल ने नीलामी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे।

बब्लु ने संदिग्ध सामग्री होने के कारण सबकी रुचि होने की बात कही, पर नीलामी उनके चुनाव हेतु दबाव बनाया गया।

सूटकेस का एक्स-रे परीक्षण किया गया, लेकिन कुछ नहीं देखा गया, पर फोटो लेने वाले कर्मचारी सही नहीं मिले, जिससे पता चला वेप बदला हुआ है।

जब वेप बदलने की पुष्टि हुई तो उनको नासु रेवंत खड्डा बुलाकर समझाया गया, नासु ने इससे इनकार किया तथा डिजिटल उपस्थिति प्रणाली में मौजूद रहे।

प्रमुख कस्टम अधिकारी अम्बिका खनाल के नेतृत्व में अध्ययन समिति बनी और वेप बदलने की रिपोर्ट तैयार की गई।

रिपोर्ट पाते ही प्रमुखों ने नासु और अन्य को तुरंत सामान खोजने और ठीक रखने का निर्देश दिया।

रेवंत ने दिनेश बस्नेत को वेप बदले जाने की बात बताई, लेकिन दिनेश ने कहा सुन बिक्री हो चुकी है और अब वापसी संभव नहीं।

वेप के अंदर छिपाई गई सुन बेचकर दिनेश ने एक करोड़ रुपये कमाए, जिनमें से 65 लाख प्रतिनिधि नासु रेवंत खड्डा को दिए गए।

सुन बिक्री की रकम प्रेरणा थापा और ललिता भंडारी के खातों में जमा कराई गई, और नासु ने 10 लाख से अधिक राशि लेने का आरोपपत्र में उल्लेख है।

नासु ने पैसे से सुकुटे रिसोर्ट में पार्टी भी की, लेकिन बाकी रकम का हिसाब नहीं दे पाए।

दिनेश के बयान अनुसार निकाल गई सुन कुल नौ किलो हुई और पूरी बिक्री हुई है।

दिनेश ने 2 करोड़ 75 लाख रुपए अपने ससुर रामकेशव थापा नाम पर जमीन खरीदी, कुछ नगद बैंक में जमा किए और हिस्सा खर्च किया।

रिपोर्ट में सामने आए खुलासे

अम्बिका खनाल के नेतृत्व वाली समिति की रिपोर्ट के बाद स्पष्ट हुआ कि वेप बदला गया था, और कस्टम कर्मचारी बार-बार नासु रेवंत पर दबाव डाल रहे थे। अंततः नासु ने स्वीकार किया।

कस्टम कार्यालय ने सीआईबी से लिखित अनुरोध कर जांच शुरू कराई, जिसमें प्रमुख अरुण पोखरेल स्वयं सीआईबी गए।

नासु ने बयान में कहा कि उसी चिट्ठी के आधार पर वह गिरफ्तार हुआ।

लेकिन पुलिस की जांच में देरी हुई, कुछ पुलिस अधिकारी प्रभावित हुए और जांच रुक गई।

जब यह सार्वजनिक हुआ तो सीआईबी ने जांच शुरू की और १७ चैत २०८० को ठगी का मामला दायर किया।

सुन तस्करी में शामिल सभी पर मामला दर्ज हुआ, पर सीआईबी ने मामला कमजोर करने की भी कोशिश की।

ट्रैवलर और अन्य मुख्य आरोपियों पर मामला नहीं चला, पूर्व सभापति महरा और उनके पुत्रों की भी जांच नहीं हुई।

सुन चोरी की घटना प्रचंड सरकार में हुई, पर राजनीतिक तौर पर मामला आगे नहीं बढ़ पाया।

सरकार बदलने के बाद जांच फिर शुरू हुई और कुछ आरोपी गिरफ्तार हुए।

जिला अदालत ने नासु रेवंत खड्डा और दिनेश बस्नेत को सुन चोरी में संलिप्त माना और उन्हें आपराधिक विश्वासघात की सजा सुनाई।

६ करोड़ से अधिक लेनदेन होने के बावजूद अदालत ने अधिकांश रकम को बिगो नहीं माना, केवल ३ करोड़ रुपये को बिगो मान्यता दी।

आंतरिक जांच में भी कर्मचारियों द्वारा सामान बदलने का पता चला, जिसके कारण उन्हें जेल और जुर्माना की सजा मिली।

जिन्होंने सूचना दी, उनके खिलाफ मामला

सुन तस्करी की सूचना लंबे समय तक छुपाई गई, पर अख्तियार ने एक साथ पिछली सप्ताह २८ व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया। शिकायत करने वाले कर्मचारियों को भी आरोपित किया गया है।

घटना के वक्त प्रमुख कस्टम प्रशासक अरुण पोखरेल विदेश में थे और उनके लौटते ही शिकायत दर्ज हुई। फिर भी अख्तियार ने उन्हें भी दोषी माना।

जांच के बाद कस्टम ने एक्स-रे परीक्षण किए, लेकिन पुलिस ने वेप जांच करते हुए पूरी जांच नहीं की।

जिला अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों ने कर्मचारियों द्वारा कस्टम जांच में छुपाई गई सुन चोरी की पुष्टि की है।

अख्तियार का आरोप है कि तस्करी की शिकायत करने वाले कर्मचारियों ने मिलकर मामले को दबाया और प्रमुख अधिकारियों ने ‘आपराधिक जिम्मेदारी’ लेते हुए वेप के अंदर मौजूद सुन की बिक्री की।

परंतु प्रमुख अधिकारी दावा करते हैं कि वे घटना को रोकने के लिए प्रयासरत थे और सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी थीं।

जिला अदालत के फैसले के अनुसार सुरक्षा गार्ड निर्मल विक ने चोरी की सूटकेस सूचना तस्करों को दी और वे भी सुन बिक्री में शामिल थे।

उप सचिव मुक्तिप्रसाद श्रेष्ठ की योजना के अनुसार वेप के अंदर सुन रखी गई थी और गोदाम में सीसीटीवी न होने के कारण चोरी संभव हुई।

कस्टम अधिकारी अम्बिकाप्रसाद खनाल पर सूचना छुपाने और गलत मूल्यांकन करने का भी आरोप है।

फिर भी अदालत के फैसले और दस्तावेजों से अख्तियार के आरोप पूरी तरह सत्यापित नहीं होते, जहां शिकायत आने के बाद जांच शुरू हुई।

अंत में जिला अदालत ने यह दर्शाया कि गोदाम की जिम्मेदारी वाले कर्मचारियों और उनके समूह की जांच तब शुरु हुई जब हवाई अड्डे कस्टम की शिकायत आई।

होटल उद्योग ने पहली अंतरराष्ट्रीय वेलनेस दिवस मनाया

होटल एसोसिएसन नेपाल और यूके नेपाल-नेपाल इन बिजनेस ने पहली अंतरराष्ट्रीय वेलनेस दिवस का उत्सव मनाया। हान अध्यक्ष विनायक शाह ने वेलनेस दिवस को नेपाल को विश्वव्यापी वेलनेस क्षेत्र में स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण सहयोग मानते हुए अपनी विश्वास जताई। नेपाल इन बिजनेस ने पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से वेलनेस पर्यटन के प्रचार-प्रसार हेतु एक वीडियो जारी किया है, साथ ही राष्ट्रीय वेलनेस पर्यटन रणनीति के निर्माण की प्रक्रिया भी प्रगति पर है। २ वैशाख, काठमांडू।

होटल एसोसिएसन नेपाल (हान) द्वारा आयोजित और यूके नेपाल-नेपाल इन बिजनेस के सहयोग से बुधवार को पहली अंतरराष्ट्रीय वेलनेस दिवस का उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में हान के सदस्य संस्थागत होटल व्यवसायी, वेलनेस क्षेत्र के विशेषज्ञ, निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि, शैक्षिक क्षेत्र और विकास साझेदार उपस्थित थे। हान ने जानकारी दी कि अध्यक्ष विनायक शाह ने इस ऐतिहासिक अवसर को नेपाल को विश्व स्तर पर वेलनेस उद्योग में स्थापित करने हेतु सहायक बताया।

इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र संघ ने नेपाल सरकार के प्रस्ताव पर हर वर्ष १५ अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय वेलनेस दिवस घोषित किया है। नवगठित मंत्रिपरिषद ने अपने १०० दिवसीय कार्य योजना में वेलनेस पर्यटन को प्राथमिकता दी है, जैसे कि अध्यक्ष शाह ने बताया। कार्यक्रम में हान, पर्यटन मंत्रालय और नेपाल पर्यटन बोर्ड के सहयोग से नेपाल इन बिजनेस द्वारा निर्मित वेलनेस पर्यटन प्रचार वीडियो जारी किया गया, जिसका लक्ष्य नेपाल को अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए एक उत्कृष्ट वेलनेस गंतव्य के रूप में बढ़ावा देना है।

नेपाल इन बिजनेस के टीम लीडर रतिश बस्न्यात ने वेलनेस पर्यटन को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने में नेपाल इन बिजनेस और पर्यटन मंत्रालय के बीच सहयोग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राष्ट्रीय वेलनेस पर्यटन रणनीति के निर्माण की प्रक्रिया जारी है। पर्यटन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) दीपकराज जोशी ने नेपाल के वेलनेस संभावनाओं पर चर्चा करते हुए नवप्रवर्तन के माध्यम से विविध वेलनेस पैकेज विकसित करने और मौलिकता तथा भिन्नता के साथ उन्हें बाज़ार में प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

“वेलनेस पर्यटन के पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए हमें चार मुख्य पक्षों – निवेश, कौशल विकास, प्रमाणीकरण और ब्रांडिंग – पर ध्यान देना होगा,” उन्होंने कहा। हान कार्यसमिति सदस्य अश्लेषा कार्की ने कहा कि नेपाल में वेलनेस पर्यटन को प्रमुख पर्यटन उत्पाद के रूप में विकसित करने की व्यापक संभावना है और इसके लिए सरकार, निजी क्षेत्र, संघ-संस्थाओं और निवेशकों के बीच साझा जिम्मेदारी आवश्यक है। पैनल चर्चा में आयुर्वेद संघ नेपाल के डॉ. रमेश पौडेल ने दक्ष जनशक्ति की कमी को वेलनेस क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास में सबसे बड़ी चुनौती बताया। नाट्टा प्रतिनिधि युविका भंडारी, काव्या रिसोर्ट एंड स्पा के डॉ. रवि शिखावत, पर्यटन मंत्रालय की सहसचिव इंदु घिमिरे सहित अन्य ने वेलनेस पर्यटन से संबंधित अपने विचार साझा किए।

सभामुख का सुझाव: कंपनी पंजीकरण और बंद प्रक्रिया को सरल बनाने के उपाय

२ वैशाख, काठमाडौं। सभामुख डोलप्रसाद (डीपी) अर्याल ने कंपनी पंजीकरण तथा बंद करने की प्रक्रिया को सहज और सरल बनाने का सुझाव दिया है। सभामुख अर्याल ने बुधवार को उद्योग मंत्री गौरी कुमारी से हुई मुलाकात में कंपनी पंजीकरण और बंद प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता बताई। उन्होंने निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए नीति सुधारों को भी अनिवार्य बताया।

के सरकारले भनेझैं नेपाल ‘बफर स्टेट’ हो ? – Online Khabar

क्या नेपाल वास्तव में ‘बफर स्टेट’ है जैसा सरकार कहती है?

समाचार सारांश समीक्षा की गई सामग्री। सरकार ने संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले छह दलों के चुनावी घोषणापत्रों को मिलाकर ‘राष्ट्रीय प्रतिबद्धतापत्र’ का मसौदा प्रकाशित किया है। इस मसौदे में नेपाल को ‘बफर स्टेट’ से ‘वाइब्रेंट ब्रिज’ में बदलने का प्रस्ताव है, जो विवादास्पद विषय बन गया है। कूटनीतिक विशेषज्ञों ने कहा है कि ‘बफर स्टेट’ शब्द नेपाल की संप्रभुता और विदेश नीति से मेल नहीं खाता, इसलिए इसे हटाने की सलाह दी गई है।

2 वैशाख, काठमांडू। सरकार ने संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले छह राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणापत्रों, संकल्पपत्रों और वाद-पत्रों को एक ही मसौदे में शामिल कर दो दिन पहले ‘राष्ट्रीय प्रतिबद्धतापत्र’ का प्रारूप जारी किया। यह दस्तावेज दस दिनों तक सुझावों के लिए खुला रखा गया है। इस दस्तावेज के बिंदु संख्या 14 में प्रयुक्त शब्दावली वर्तमान में राजनीतिक और कूटनीतिक क्षेत्रों में चर्चा का विषय बनी हुई है — वह शब्द है ‘बफर स्टेट’।

‘अंतरराष्ट्रीय संबंध और कूटनीति’ शीर्षक के अंतर्गत नेपाल को ‘बफर स्टेट’ से ‘वाइब्रेंट ब्रिज’ में परिवर्तित करने का प्रस्ताव मसौदे में रखा गया है। इसमें उल्लेख है, ‘नेपाल की संप्रभुता और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए नेपाल को ‘बफर स्टेट’ से ‘वाइब्रेंट ब्रिज’ में बदलने और त्रिपक्षीय आर्थिक साझेदारी तथा कनेक्टिविटी के माध्यम से राष्ट्रीय हित सुनिश्चित कर नेपाल को स्वतंत्र, तटस्थ और विश्वशांति पर आधारित असंलग्न राष्ट्र के रूप में वैश्विक मंच पर स्थापित किया जाएगा।’

हालांकि यह प्रस्ताव आकर्षक जरूर लगता है, पर क्या नेपाल का अपने सरकारी आधिकारिक दस्तावेजों में स्वयं को ‘बफर स्टेट’ कहना कूटनीतिक और सार्वभौमिक दृष्टिकोण से उचित है? कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. खड्ग केसी कहते हैं, ‘नेपाल कभी भी बफर स्टेट नहीं रहा। इसलिए सरकार के प्रारंभिक मसौदे में इस शब्द का होना उचित नहीं था।’

भू-राजनीति के विश्लेषक चन्द्रदेव भट्ट भी ऐसी ही राय देते हुए कहते हैं, ‘सरकारी दस्तावेजों में बफर स्टेट शब्द का इस्तेमाल करना अजीब है। यह नेपाल की संप्रभुता पर सवाल उठाता है और इसे कमजोर दिखाने का जोखिम रखता है।’

सरकार ने राजस्व कर्मचारी एवं कोष नियन्त्रकों को एक साथ अन्तःशुल्क अधिकृत नियुक्त करने का निर्णय लिया

सरकार ने आन्तरिक राजस्व विभाग के विभिन्न स्तरों के कर्मचारियों और ५२ कोष एवं लेखा नियन्त्रक कार्यालयों के प्रमुखों को एक ही बार में अन्तःशुल्क अधिकृत नियुक्त करने का निर्णय लिया है। मन्त्रिपरिषद की बैठक में यह बताया गया कि अन्तःशुल्क ऐन २०५८ के अनुसार अन्तःशुल्क संबंधित कार्य करने के लिए अधिकृत नियुक्त करने की प्रक्रिया नियमित रूप से चलती रही है। पूर्व सरकार द्वारा बंद किए गए ३६ राजस्व कार्यालयों के कार्य अब कोष नियन्त्रक कार्यालयों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। २ वैशाख, काठमाडौं।

बुधवार को हुई मन्त्रिपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया। अर्थ मन्त्रालय के प्रवक्ता टंकप्रसाद पाण्डे के अनुसार, “अन्तःशुल्क ऐन २०५८ के तहत सरकार अन्तःशुल्क संबंधी कार्य करने के लिए अधिकृत नियुक्त करती है, यह एक नियमित प्रक्रिया है।” इस बार पूर्व सरकार ने ३६ राजस्व कार्यालयों को बंद किया और उन कार्यालयों से हो रहे कार्यों को विभिन्न कोष नियन्त्रकों द्वारा करने का प्रावधान किया।

जिम्मेदारी मिलने वाले कोष नियन्त्रक प्रमुखों को सरकार ने एक साथ अन्तःशुल्क अधिकृत नियुक्त करने का निर्णय लिया है। पाण्डे ने कहा, “ऐन के अनुसार बिना अन्तःशुल्क अधिकृत नियुक्ति के अधिकारी अंतःशुल्क से संबंधित कार्य करने का अधिकार नहीं रखते।” मन्त्रिपरिषद के निर्णय में उल्लेख है कि आन्तरिक राजस्व विभाग के उप महा महानिर्देशक, निर्देशक, शाखा अधिकृत, बड़े करदाता कार्यालय एवं मध्यमस्तरीय करदाता कार्यालय के प्रमुख कर प्रशासक, प्रमुख कर अधिकृत, कर अधिकृत, आन्तरिक राजस्व कार्यालय के प्रमुख कर अधिकृत और कर अधिकृत, तथा ५२ कोष और लेखा नियन्त्रक कार्यालय के प्रमुख कोष नियन्त्रक को उनकी संबंधित क्षेत्र के आधार पर अन्तःशुल्क अधिकृत के रूप में नियुक्त किया जाएगा।

१ अर्ब ३६ करोडको क्रिप्टो कारोबारमा मुद्दा दर्ता

काठमाडौं उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालयले ६ चैतमा १५ लाख ३० हजार रुपैयाँसहित नरेश रेउलेलाई पक्राउ गरेको थियो। उनलाई दिप्ती पोखरेल र प्रवेश अलीसँग मिलेर १ अर्ब ३६ करोड रुपैयाँभन्दा बढीको क्रिप्टो कारोबार गरेको खुलासा भएको छ। उनीहरूविरुद्ध काठमाडौं जिल्ला अदालतमा हुण्डी र अभौतिक मुद्रासम्बन्धी कसुरमा मुद्दा दर्ता भई सुनुवाइ भइरहेको छ। २ वैशाख, काठमाडौं।

१५ लाख ३० हजार रुपैयाँसहित पक्राउ परेका व्यक्तिबाट सुरु गरिएको अनुसन्धानले १ अर्ब ३६ करोड रुपैयाँभन्दा बढीको क्रिप्टो कारोबारमा संलग्नता उजागर गरेको छ। ६ चैतमा काठमाडौं उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालयको टोलीले सामाखुसी चोकबाट नेपालगञ्ज उपमहानगरपालिका–२०, सम्झना चोकका ३१ वर्षीय नरेश रेउलेलाई पक्राउ गरेको थियो। क्रिप्टो कारोबारको सूचना प्राप्त भएपछि प्रहरीले उनलाई नियन्त्रणमा लिएको थियो। रेउलेले प्रहरीलाई आफू क्रिप्टो कारोबार गर्न इच्छुक व्यक्तिको खोजी गर्ने र अर्को व्यक्तिलाई सम्पर्क गराउने काम गरेको बताएका छन्।

उनको माध्यमबाट ललितपुर महानगरपालिका–२५ नख्खु निवासी ३२ वर्षीया दिप्ती पोखरेलसम्म प्रहरीले सम्पर्क पुगेको थियो। रेउलेले दिप्तीलाई भारतको पश्चिम बंगाल राज्य मेदिनीपुर मोयना थाना, उत्तर श्रीकण्ठ ग्रामका ४१ वर्षीय प्रवेश अलीसँग सम्पर्क गराएको जानकारी प्रहरीलाई प्राप्त भएको छ। दिप्ती १० हजार अमेरिकी डलर सटही गर्न इकबाललाई भेट्न गएको भन्ने सूचना पनि प्रहरीले रेउलेबाट पाएको थियो। त्यसपछि प्रहरीले दिप्तीलाई १५ लाख ३० हजार रुपैयाँसहित सामाखुसी नजिकै रेडनपुलबाट पक्राउ गर्‍यो।

अनुसन्धानको क्रममा इकबाललाई पनि ललितपुरको एकान्तकुनाबाट पक्राउ गरिएको थियो। इकबाल पक्राउपछि क्रिप्टो कारोबारको रहस्य खुलेको छ। प्रहरीले उनको मोबाइलमा रहेको बिनान्स नामक क्रिप्टो ट्रेडिङ अकाउन्टबाट करिब १ अर्ब ३६ करोड ८० लाख ४५ हजार ५८० रुपैयाँ बराबरको क्रिप्टो कारोबार गरिएको तथ्य पत्ता लगाएको छ। लगभग डेढ अर्ब रुपैयाँभन्दा बढीको क्रिप्टो कारोबार गर्ने इकबाल विगत २८ वर्षदेखि नेपालमा बस्दै आएका थिए र सामाखुसीमा ‘अली बाबा सर्भिसेस’ नामक सेवा कम्पनी चलाउँदै आएका थे।

पक्राउ परेका तीनै जनाले एकअर्कासँग मिलेर अवैध रूपमा क्रिप्टो कारोबार गर्दै आएका थिए। बयानका क्रममा एकले अर्कोलाई दोषारोपण गरे पनि प्रहरीको दाबी अनुसार उनीहरू संयुक्त मिलेमतोमा कार्यरत थिए। यस प्रकरणमा अनिल घिमिरे नाम गरेका अर्का व्यक्तिको पनि संलग्नता रहेको बताइएको छ। पहिचान र वतन नखुलेका ती व्यक्तिविरुद्ध अहिले मुद्दा दर्ता भइसकेको छ र थप खुलासा भएपछि थप मुद्दा दर्ता गरिने जानकारी दिइएको छ।

टाइम म्यागजिनको विश्वका १०० प्रभावशाली व्यक्तिको सूचीमा प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाह

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह टाइम मैगज़ीन की विश्व के १०० प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को साल २०२६ के टाइम मैगज़ीन की १०० प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल किया गया है। शाह ने फागुन २१ को हुए चुनाव में जीत हासिल कर प्रधानमंत्री बनने में सफलता पाई थी। टाइम ने शाह के उदय को युवाओं के राजनीतिक परिवर्तन की लहर के रूप में प्रस्तुत किया है। २ वैशाख, काठमांडू।

इस सूची में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग शामिल हैं। विश्व के २५ नेता इस सूची में स्थान पाए हैं। ३५ वर्षीय शाह ने फागुन २१ को संपन्न चुनाव में जीतकर नेपाल के प्रधानमंत्री पद को संभाला। टाइम ने उनकी ऐतिहासिक जीत को विशेष रूप से युवाओं के व्यापक समर्थन और पिछले वर्ष की जनआंदोलन की भूमिका से संभव बताया है।

टाइम के संपादक-एट-लार्ज चार्ली कैंपबेल ने लिखे प्रोफाइल में शाह के उदय को युवाओं की राजनीतिक बदलाव की लहर के रूप में पेश किया है। पारंपरिक और वंशवादी राजनीति से असंतुष्ट जनता ने उन्हें राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचाया है। राजनीति में आने से पहले हिप-हॉप कलाकार के रूप में परिचित शाह ने काठमांडू महानगरपालिका के मेयर के रूप में कूड़ा प्रबंधन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार किए।

टाइम ने उनकी इसी कार्यशैली को राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय होने का कारण माना है। शाह अपनी कठोर और स्पष्ट अभिव्यक्ति के लिए भी जाने जाते हैं। वे भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाते रहे हैं। संगीत पृष्ठभूमि के कारण शाह युवाओं के बीच विशेष प्रभावशाली माने जाते हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर प्राप्त सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर दोबारा स्थापित कर पाने में उनकी सफलता का प्रश्न अभी भी बना हुआ है। आर्थिक असमानता, गरीबी और संस्थागत भ्रष्टाचार जैसे चुनौतियों के बीच शाह का नेतृत्व कितना प्रभावकारी होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

नेप्से में दो ‘सर्किट ब्रेक’ और चौबीस घंटे ऑर्डर सुविधा लागू

नेपाल स्टॉक एक्स्चेंज ने शेयर खरीद-बिक्री के लिए चौबीस घंटे ऑर्डर देने की व्यवस्था लागू की है, जिसे धितोपत्र बोर्ड ने अनुमोदित किया है। धितोपत्र बोर्ड ने नेप्से के सर्किट ब्रेकर सीमा को ५ और ८ प्रतिशत तक सीमित करते हुए ट्रेडिंग स्थगित करने के नए नियम लागू किए हैं। इस नियम से गैर-आवासीय नेपाली भी शेयर बाजार में आसानी से कारोबार कर सकेंगे और नियमित कारोबार समय के बाद भी ऑर्डर देना संभव होगा। २ वैशाख, काठमांडू।

शेयर निवेशक अब चौबीस घंटे शेयर खरीद-बिक्री के आदेश (ऑर्डर) दे सकेंगे, जो नेपाल स्टॉक एक्स्चेंज (नेप्से) के कारोबार विनियमावली के अनुसार धितोपत्र बोर्ड द्वारा अनुमोदित किया गया है। इस प्रस्ताव से खरीद-बिक्री आदेश के लिए नियमित कारोबार समय का इंतजार करने की आवश्यकता समाप्त हो गई है। नेप्से ने धितोपत्र कारोबार संचालन विनियमावली २०७५ में समय-समय पर संशोधन करते हुए बोर्ड को संशोधन प्रस्ताव भेजा था।

नेप्से द्वारा प्रस्तुत कुछ व्यवस्थाओं में सुधार करते हुए बोर्ड ने स्वीकृति प्रदान की है। प्रस्तावित सर्किट ब्रेक, कंपनी के शेयर मूल्य के उतार-चढ़ाव सीमा और कारोबार आदेश देने के समय में कुछ संशोधन करके संचालक समिति ने बोर्ड की अनुमति प्राप्त की है। बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा, “नेप्से ने तीन सर्किट ब्रेक प्रस्तावित किए थे, लेकिन बोर्ड ने दो सर्किट तक सीमित करने का निर्णय लिया है।”

नई व्यवस्था से गैर-आवासीय नेपाली के लिए भी शेयर कारोबार करना आसान होगा, ऐसा बोर्ड के अधिकारियों ने बताया। उच्चस्तरीय आर्थिक सुधार सुझाव आयोग ने भी धितोपत्र के द्वितीयक बाजार में गैर-आवासीय नेपाली को कारोबार की अनुमति देने की सिफारिश की है। इसी प्रकार, सर्किट ब्रेकर संबंधी व्यवस्थाओं में नेप्से द्वारा प्रस्तावित बदलावों में बोर्ड ने कुछ परिवर्तन किए हैं।