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लेखक: space4knews

दाइजो स्वीकार गर्नू पनि दण्डनीय हो : उपसभामुख – Online Khabar

उपसभामुखः दाइजो स्वीकार करना भी दंडनीय है

३ वैशाख, काठमांडू। उपसभामुख रूविकुमारी ठाकुर ने दाइजो प्रथा को महिलाओं के सम्मान, समानता और अधिकारों पर प्रत्यक्ष चोट पहुँचाने वाली बताया है। उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया फेसबुक के माध्यम से कहा कि दाइजो लेना–देना ही नहीं, बल्कि दाइजो के आधार पर होने वाले विवाहों में भोज ग्रहण करना भी कानूनी रूप से दंडनीय कृत्य है।

‘दाइजो लेना और देना ही नहीं, दाइजो के लेन-देन पर आधारित विवाह को स्वीकार करना, ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेना या भोज ग्रहण करना सामाजिक रूप से अस्वीकार्य और कानूनी रूप से दंडनीय अभ्यास है,’ उपसभामुख ठाकुर ने लिखा है, ‘यह प्रथा महिलाओं के सम्मान, समानता और अधिकारों के सीधे आघात का कारण बनती है।’

उन्होंने समाज परिवर्तन, देश के विकास और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध खड़ा होना चाहने वालों से कहा कि परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से करनी होगी। ‘अगर हम वास्तव में समाज परिवर्तन की बात करते हैं, देश के विकास का सपना देखते हैं और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध खड़े होना चाहते हैं, तो बदलाव की शुरुआत हमें स्वयं से करनी होगी,’ उपसभामुख ने कहा, ‘व्यक्तिगत स्तर पर उठाया गया एक छोटा कदम भी बड़े सामाजिक परिवर्तन की राह खोल सकता है।’

अपना विवाह निमंत्रण पत्र प्राप्त करते हुए उन्होंने बताया कि अभी तक किसी भी कार्ड पर ‘दहेज मुक्त विवाह’ स्पष्ट रूप से उल्लेखित नहीं देखा है। ‘मैं यह स्पष्ट करना चाहती हूँ कि दाइजो लेनदेन वाले विवाहों में मैं भाग लेने में असमर्थ रहूँगी,’ उपसभामुख ठाकुर ने कहा, ‘कृपया दहेज मुक्त, समानता आधारित और सभ्य विवाह की प्रथा को बढ़ावा दें।’

खेलकूद और सांगीतिक कार्यक्रमों के माध्यम से चांगलुङ गुफा के पर्यटन को बढ़ावा

३ वैशाख, तेह्रथुम। हाल के दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों के ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाले स्थलों को पर्यटक गन्तव्य के रूप में विकसित करने के प्रयास तीव्र हो रहे हैं। इसी क्रम में, तेह्रथुम के छथर गाउँपालिका-६, सुदा में स्थित चांगलुङ गुफा भी विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से आंतरिक पर्यटन के प्रवर्धन का केंद्र बन गया है। स्थानीय प्रदेश सरकार के निवेश से यहां भौतिक संरचनाएं निर्मित की जा रही हैं, जिससे यह स्थल पर्यटक गन्तव्य के रूप में विकसित हो रहा है।

पिछले कई वर्षों से नववर्ष के अवसर पर यहां लगातार आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की परंपरा को इस वर्ष भी जारी रखते हुए “स्वर्गीय गोद्रिलाल स्मृति कप वॉलीबॉल प्रतियोगिता तथा भव्य सांगीतिक कार्यक्रम २०८३” सम्पन्न हुआ। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव ने मनोरंजन ही नहीं बल्कि चांगलुङ गुफा की पहचान फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूर-दूर से आए दर्शक, खिलाड़ी और पर्यटकों की महत्वपूर्ण उपस्थिति ने इस क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं पर नया प्रकाश डाला है।

कार्यक्रम में धामी–झांकी नृत्य, केलांग च्याबरुङ नृत्य एवं धान नृत्य जैसे मौलिक सांस्कृतिक झलकें लिम्बु समुदाय की जीवनशैली और पारंपरिक पहचान को जीवंत रूप में प्रदर्शित कर रही थीं। यहां के सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के प्रवर्धन में हुए खर्च से मूल संस्कृति के संरक्षण में मदद मिलेगी, जैसा कि छथर गाउँपालिका अध्यक्ष संतोष तिगेला ने बताया।

सांगीतिक कार्यक्रमों में गायक इन्द्र सुशील चोंगबाङ और गायिका निरंता नेम्बाङ सहित स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां प्रमुख आकर्षण रहीं, वहीं ‘टाट्नो गीत यात्रा’ की प्रस्तुति भी शामिल थी। साथ ही, नृत्य प्रतियोगिताओं ने स्थानीय कला और रचनात्मकता को मंच प्रदान करते हुए सांस्कृतिक विविधता की सुंदर झलक दिखाई। पारंपरिक वेशभूषा में मंचित नृत्यों ने दर्शकों में सांस्कृतिक अनुभूति को जीवंत किया। चांगलुङ गुफा मेलाबजार प्रबंधन समिति के अध्यक्ष संतकुवीर आंखेवा के अनुसार, पर्यटन प्रवर्धन के लिए खेलकूद, सांस्कृतिक और संगीत कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जा रहे हैं। पहुंच के विस्तार, आधारभूत संरचनाओं के विकास और दीर्घकालीन योजनाओं के कार्यान्वयन के साथ यह क्षेत्र पूर्वी नेपाल का महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल बन सकता है।

टर्की के स्कूल में १४ वर्षीय छात्र द्वारा गोलीबारी, ९ की मौत

३ वैशाख, काठमांडू। टर्की के एक स्कूल में हुई गोलीबारी में ९ लोगों की जान चली गई है। दक्षिण टर्की के कहरामनमारास क्षेत्र में स्थित आयसर क्यालिक सेकेंडरी स्कूल में हुए इस घटना में आठ छात्र और एक शिक्षक शहीद हुए हैं। गृह मंत्री मुस्तफा सिफ्सी ने इस घटना की पुष्टि की है। गोलीबारी में अतिरिक्त १३ लोग घायल हुए हैं, जिनमें से ६ की हालत गंभीर बनी हुई है। हमलावर १४ वर्षीय छात्र भी मौके पर ही मारा गया है। बुधवार को हुई इस गोलीबारी के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, हमलावर छात्र ने दो कक्षाओं में प्रवेश कर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। बताया गया है कि उस छात्र के पास पाँच बंदूकें और सात मैगजीन थीं। हमलावर के पिता एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी हैं।

इससे पहले मंगलवार को टर्की के दक्षिणी क्षेत्र के एक अन्य हाई स्कूल में एक पूर्व छात्र द्वारा गोलीबारी की गई थी। उस घटना में १६ लोग घायल हुए थे और उसके बाद हमलावर ने खुद को गोली मारने की बात कही थी।

वामपन्थी एकता स्वार्थपूर्तिका लागि ? – Online Khabar

क्या वामपंथी एकता केवल स्वार्थ पूरा करने के लिए है?

३ वैशाख, काठमाडौं। नेकपा एमाले के नेता सुरेन्द्र पाण्डे ने वामपंथी एकता के औचित्य पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूर्व की एकता को याद करते हुए पुनः वामपंथी एकता की बहस चलने को लेकर संदेह व्यक्त किया है। शुरुआत में एमाले और तत्कालीन माओवादी के बीच हुई एकता को पद प्राप्ति और व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए किया गया टिप्पणी करते हुए पाण्डे ने अब सवाल किया है कि अब किन कारणों से एकता की जाएगी।

‘हमारे कई कमरेड नेतृत्व पर संकट आने की बात कहते हुए पुनः ‘वाम एकता’ की दौड़ में लगे हुए हैं’, उन्होंने कहा, ‘कल पद प्राप्ति के लिए एकता हुई, आज शायद अपनी घटती पहचान बचाने के लिए। लेकिन क्या पार्टी की एकता स्पष्ट विचारधारा और सिद्धांत के लिए होगी या कुछ सीमित व्यक्तियों के स्वार्थ पूरा करने के लिए?’ पाण्डे ने कहा कि फिलहाल एकता से अधिक जरूरी है कि कैसे एमालेलाई एकजुट बनाया जाए।

विचार और निश्चित लक्ष्य के बिना एकता का कोई अर्थ नहीं होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी का पुनर्निर्माण करते हुए सक्षम और दक्ष व्यक्तियों, खासकर युवाओं को पार्टी में शामिल करना आवश्यक है। ‘भविष्य में वैचारिक आधार के बिना की गई एकता असफल होने का कड़वा अनुभव हमने भोगा है। कल चुप रहना हमारी गलती थी, लेकिन आज भी न बोलना गंभीर मूर्खता होगी’, उन्होंने कहा, ‘नेकपा (एमाले) को अब सत्ता और स्वार्थ के खेल से ऊपर उठकर नियम, सुशासन और परिणाममुखक नेतृत्व के साथ नए मार्ग पर आगे बढ़ाने का साहस हमे जरूर करना होगा।’

सशस्त्र प्रहरीमा रिक्त ७ डीआईजी पदका दाबीदारहरूलाई कार्यसम्पादन विवरण पेश गर्न निर्देशन

सशस्त्र प्रहरी बलमा रिक्त ७ डीआईजी पदका दाबीदारहरूलाई आफ्ना कार्यसम्पादन विवरणहरू पेश गर्न सर्कुलर जारी गरिएको छ। डीआईजी बढुवाको लागि गृह सचिवको नेतृत्वमा समिति गठन गरिनेछ र दाबीदारहरूले पावरपोइन्ट प्रस्तुति समेत दिन तयार रहनुपर्ने तयारी भईरहेको छ। हाल १३ जना एसएसपीहरू ७ डीआईजी पदका लागि प्रतिस्पर्धा गरिरहेका छन् भने लामो समयदेखि बढुवा नहुँदा पेशागत विकासमा असर परिसकेको छ। २ वैशाख, काठमाडौं।

सशस्त्र प्रहरी बल (एपीएफ) मा रिक्त रहेको ७ डीआईजी (नायब महानिरीक्षक) पदका दाबीदारहरूलाई आफैले गरेका कार्यहरूको सूची तथा विवरण पेश गर्न निर्देशन दिइएको छ। सशस्त्र प्रहरी मुख्यालयले दाबीदार एसएसपीहरूलाई कार्यसम्पादन सम्बन्धी विवरण पठाउन भनिरहेको छ। स्रोतका अनुसार दाबीदारहरूले निर्देशन अनुसार आवश्यक सूची र जानकारी पठाइसकेका छन्। “मन्त्रालयको निर्देशन अनुसार आफूले गरेका कार्यहरूको विवरण हामीले दाबीदारहरूलाई मागेका थियौं। उहाँहरूले उक्त विवरण पूर्ण रूपमा बुझाइसक्नुभएको छ,” सशस्त्र प्रहरी मुख्यालयका स्रोतले बताए।

त्यसैगरी प्रस्तुति तयार गर्न पनि निर्देशन दिइएको छ। दाबीदारहरूलाई आफ्नो कामहरूको प्रस्तुति र आगामी दिनका योजना सहित तयार रहन भनिएको छ। पहिले कार्यसम्पादनको विवरण पेश गर्ने र प्रस्तुति दिने प्रक्रिया आवश्यक थिएन। नयाँ संविधान प्रतिनिधिसभाबाट निर्वाचित सरकारले कार्यक्षमता र मापदण्डको आधारमा बढुवा गर्ने निर्णय गरेपछि सशस्त्र प्रहरी मुख्यालयले आवश्यक तयारी थालेको हो।

डीआईजी बढुवाको लागि गृह सचिवको नेतृत्वमा समिति गठन गरिनेछ, जसमा गृह सचिवसँगै सशस्त्र प्रहरी महानिरीक्षक (आइजीपी) र एक सहायक आइजी सदस्य सचिव पनि रहनेछन्। स्रोतका अनुसार समिति दाबीदारहरूलाई पावरपोइन्ट प्रस्तुति दिन लगाउने तयारीमा रहेको छ। तर अहिलेसम्म कुनै मिति तोकिएको वा बोलाइएको छैन, डीआईजी बढुवाका एक दाबीदारले बताए।

सुधन गुरुङ: गृहमन्त्रीको सक्रियतामा रास्वपामा असन्तोष

लेख जानकारीजेन जि आन्दोलन चलिरहेको बेला प्रधानमन्त्री र गृहमन्त्रीको गिरफ्तारीमा सक्रिय देखिएका गृहमन्त्री सुधन गुरुङको दौडधुप अझै निरन्तर छ। राजधानीभित्र मातहतका विभिन्न कार्यालयहरूमा पुग्ने उनी काठमाडौँ उपत्यकाबाहिर पनि निरन्तर सक्रिय देखिन्छन्। हालको सरकारले रहेका मन्त्रीहरूले उनको बाहिरी सक्रियता निकै देखिएको छ। त्यसैले कतिपयले उनलाई सरकारका ‘एक्शन’मा सक्रिय एकल मन्त्रीको रूपमा उल्लेख गरेका छन्। तर उनको सक्रियता विवादबाट मुक्त छैन। उनका दल राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) का सांसदहरूले पनि असन्तोष देखाएका छन्।

प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाहसमक्ष किन गृहमन्त्रीबारे ‘गुनासो’? सांसद चुनेर तत्काल सुधन गुरुङ विभिन्न कार्यालय र मंत्रालयहरूमा गई सर्वसाधारणसँग सम्बन्धित कामहरूमा ध्यानाकर्षण गराएका थिए। गृहमन्त्री भएपछि उनले सर्वसाधारणलाई विदेशबाट पीडा नदिन सडकमा आफैं सवारीसाधनलाई बाटो बनाउन लगाएको एउटा भिडियो पनि सार्वजनिक भएको थियो। उनले केही दिनअघि राति १० बजेर ६ मिनेटमा मन्त्रालय सचिवसहितको तस्बिर आफ्नो फेसबुकमा राख्दै लेखेका छन् : “गृहसचिव राजकुमार श्रेष्ठले हाम्रो पदभार ग्रहणपछि लगाएको भावनाका अनुसार काम गर्दै आउनुभएको छ। लेट नाइट, ओभर टाइम र शून्य गुनासो।”

उनका विभिन्न सक्रियता र गतिविधिलाई कतिपयले ‘स्टन्ट’ भन्दै आलोचना गरेका छन्। रास्वपाको संसदीय दलको बैठकमा पनि प्रश्न उठेका छन्। काभ्रेका सांसद मधुकुमार चौलागाईं तीमध्ये एक हुन्। उनले भने, “असन्तुष्टिवाट बढी उहाँले जे विषयको जानकारी लिन देशदैरे दौडधुपमा हुनुहुन्छ, त्यो क्षेत्रका सांसद र जनप्रतिनिधिलाई त्यो विषयमा केही जानकारी हुनु जरूरी थियो,” र थपे, “त्यसैले त्यहाँका जनप्रतिनिधिलाई समेटेर वा जानकारी गराएर जानु राम्रो हुन्थ्यो।”

१०० बढी नयाँ कानुन ल्याइँदै, मन्त्रालयहरू विधेयक निर्माणमा व्यस्त

१०० से अधिक नए कानून लाने में मंत्रालय व्यस्त, विधेयक निर्माण जारी

३ वैशाख, काठमाडौं । सरकार १०० से अधिक नए कानूनों का निर्माण और संशोधन करने जा रही है। इसके लिए विषयों की पहचान करने का कार्य पूरा हो चुका है। प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद्क के कार्यालय के अनुसार कुल १०३ नए कानूनों के विषय और संशोधित किए जाने वाले कानूनों की पहचान की गई है। प्राथमिकता के आधार पर प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद्क कार्यालय सहित २२ मंत्रालय कार्यरत हैं। कानून निर्माण की संरचना और विधायी प्रक्रिया पूरी हुई या नहीं, इसका अनुगमन कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मंत्रालय कर रहा है। इसी मंत्रालय द्वारा अन्य मंत्रालयों को आवश्यक सहयोग भी प्रदान किया जा रहा है। १०० से अधिक नए कानूनों के निर्माण और संशोधन की सूची में से ४० से ४५ विधेयक आगामी संघीय संसद के अधिवेशन में पेश कर पारित कराने की सरकार की योजना है।

इसी क्रम में प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद्क कार्यालय सार्वजनिक खरीद कानून २०६३ में संशोधन कर रहा है और इसका विधेयक का मसौदा तैयार कर चुका है। यह विधेयक आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करके मंत्रिपरिषद् को प्रस्तुत किया जाएगा। मंत्रिपरिषद् से स्वीकृति मिलने के बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा। संसद की स्वीकृति और राष्ट्रपतिगण की प्रमाणीकरण के बाद यह विधेयक कानून के रूप में लागू होगा।

मंत्रालयों द्वारा प्राथमिकता निर्धारित करते हुए वे अपने-अपने विधेयक लाएंगे। वित्त मंत्रालय राष्ट्र बैंक कानून संशोधन विधेयक लाने की योजना बना रहा है। नेपाल राष्ट्र बैंक कानून २०५८ से अब तक ९ बार संशोधित हो चुका है, जिनमें पहला संशोधन २०६३ में हुआ था और बाद के संशोधन २०६६, २०७२, २०७३, २०७४, २०७५, २०७६, २०८० तथा २०८१ में किए गए। नई सरकार भी इस कानून में संशोधन करने जा रही है। वित्त मंत्रालय कानूनी, न्याय तथा संसदीय मामिला मंत्रालय से स्वीकृति लेकर संशोधन प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है, हालांकि संशोधन के विशिष्ट विषय अभी प्रकट नहीं किए गए हैं। इसके साथ ही कर्मचारी संचय कोष कानून २०१९ का दसवां संशोधन भी किया जा रहा है, जिसका मसौदा तैयार कर राय-सुझाव एकत्र किए जा रहे हैं। संशोधित विधेयक में कोष की संरचना, कार्यक्षेत्र और निवेश नीति में व्यापक विस्तार प्रस्तावित है।

उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय कंपनी कानून संशोधन विधेयक लेकर आ रहा है। आर्थिक उदारीकरण के तहत उद्योग, व्यापार और व्यवसायों में निवेश को प्रोत्साहित कर देश की आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देना इसका उद्देश्य है। यह कानून २०६३ में बना था और इससे पहले तीन बार संशोधित हो चुका है। चौथा संशोधन कंपनी की स्थापना, संचालन और प्रशासन को और अधिक सुगम, सरल तथा पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से है। गृह और ऊर्जा मंत्रालय चार-चार विधेयकों पर काम कर रहे हैं। गृह मंत्रालय नेपाल पुलिस विधेयक, सशस्त्र प्रहरी विधेयक, आव्रजन संबंधी विधेयक और गुप्तचर संबंधी विधेयक पर कार्यरत है। सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल और नेपाल पुलिस विधेयक पिछली संसद में भी प्रस्तुत हुआ था, लेकिन प्रतिनिधि सभा के भदौ २७ को विघटन के कारण वे विधेयक निष्क्रिय हो गए।

नेपाल पुलिस विधेयक पुलिस समायोजन से संबंधित है। संघीय शासन की स्थापना के दस वर्ष बाद भी सुरक्षा निकाय संघीय व्यवस्था के अनुकूल नहीं हो सके हैं, इस संदर्भ में यह विधेयक पिछली संसद में आया था पर कानून नहीं बन पाया था। वर्तमान सरकार इसे प्राथमिकता दे रही है। ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय भी चार विधेयकों को अपनी प्राथमिकता में रखकर काम कर रहा है, जिनमें जलस्रोत, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता, विद्युत एवं सिंचाई विकास तथा प्रबंधन संबंधी विधेयक शामिल हैं। नवीकरणीय ऊर्जा तथा ऊर्जा दक्षता संबंधी विधेयक का मसौदा तैयार हो चुका है।

इरानी सेनाओं द्वारा हिरासत में लिए गए नेपाली युवक अमृत झा रिहा

इरान ने हिरासत में लिए गए नेपाली युवक अमृत झा को आज रिहा किया है। अमृत झा युद्ध शुरू होने से पहले इज़राइल-अमेरिका और ईरान के बीच ईंधन लेकर इरान गए थे। वह दुबई की “ब्लैक सी मरिन LLC” कंपनी के जहाज में कप्तान थे और तेल लेकर दुबई लौटते समय पकड़े गए थे। २ वैशाख, काठमांडू।

ईरान ने आज (बुधवार) अमृत झा को रिहा किया है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने उनकी रिहाई की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘उनकी रिहाई हो चुकी है। हमने ईरान स्थित कांसुलर से बातचीत की है।’ अधिकारियों ने उनके परिवार के सदस्यों को भी इस संबंध में जानकारी दी है।

उनके भतीजे राजेश झा ने कुछ समय पहले सरकारी अधिकारियों से अमृत की रिहाई की सूचना प्राप्त होने की जानकारी दी है। अमृत युद्ध शुरू होने से पहले इज़राइल-अमेरिका और ईरान के बीच ईंधन लेकर इरान गए थे। वह दुबई की एक जलयान कंपनी में कप्तान के रूप में कार्यरत थे और तेल लेकर दुबई लौट रहे थे जब उन्हें हिरासत में लिया गया। अमृत दो साल पहले विदेशी रोजगार के लिए दुबई गए थे। वहां वह “ब्लैक सी मरिन LLC” कंपनी के जहाज के कप्तान थे। उनके साथ कुछ भारतीय नागरिक भी पकड़े गए थे।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ सऊदी अरब में, अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के प्रयास

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ चार दिवसीय दौरे पर बुधवार को सऊदी अरब पहुंचे। उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ क्षेत्रीय परिस्थितियों और अमेरिका-ईरान तनाव पर चर्चा की। सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की आर्थिक राहत और 5 अरब डॉलर के जमा की अवधि अनिश्चितकाल तक बढ़ा दी है।

3 वैशाख, जेद्दा। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित दूसरे चरण की शांति वार्ता से पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ चार दिन के दौरे पर बुधवार को सऊदी अरब पहुंचे। पिछले सप्ताह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में वाशिंगटन और तेहरान के बीच दशकों बाद उच्चस्तरीय वार्ता हुई थी। इसी वार्ता के आधार पर शरीफ सऊदी अरब के उच्च अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

प्रधानमंत्री के दौरे में विदेश मंत्री इशाक दार समेत वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जो अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थता कर रहे हैं। मध्यपूर्व का तनाव और कूटनीतिक प्रयासों के तहत पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के कार्यालय के अनुसार, शरीफ ‘क्षेत्रीय स्थिति’ और अमेरिका-ईरान तनाव पर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से विशेष चर्चा करेंगे। सऊदी अरब के बाद उनका दौरा कतार और तुर्की में होगा।

तुर्की में वह ‘अंताल्या कूटनीति मंच’ में भाग लेंगे तथा तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगान से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। फरवरी 28 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद मध्य पूर्व में युद्ध भड़क गया था। ईरान ने जवाब में सऊदी अरब, क़तर समेत खाड़ी के अमेरिकी सहयोगी देशों को निशाना बनाते हुए ऊर्जा निर्यात में बाधा उत्पन्न की, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ गईं। इसी युद्ध को समाप्त करने के प्रयास के रूप में इस्लामाबाद में वार्ता शुरू हुई।

पहले चरण की वार्ता से ठोस परिणाम नहीं निकले, बावजूद इसके दोनों पक्षों को संवाद की मेज पर लाने को बड़ी प्रगति माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की और इस सप्ताह इस्लामाबाद में वार्ता फिर शुरू होने का संकेत दिया। अमेरिका ने ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी का आदेश दिया है, हालांकि युद्धविराम अगले सप्ताह तक जारी है।

साथ ही, प्रधानमंत्री की सऊदी यात्रा के दौरान पाकिस्तानी सेना प्रमुख असिम मुनिर के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचा। मुनिर का ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान में स्वागत किया। ईरानी सरकारी टीवी के अनुसार, सेना प्रमुख मुनिर वाशिंगटन का “नया संदेश” लेकर दूसरे चरण की वार्ता पर चर्चा के लिए वहां गए हैं।

प्रधानमंत्री के सऊदी दौरे के बीच संकटग्रस्त पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को रियाद से बड़ी आर्थिक राहत मिली है। पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने बुधवार को घोषणा की कि सऊदी अरब पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए 3 अरब डॉलर उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा, सऊदी ने पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक में पहले से जमा 5 अरब डॉलर की राशि की अवधि भी अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दी है। पाकिस्तान ने यूएई से अरबों डॉलर का ऋण चुकाने का संकल्प जताया था, जिसके कुछ ही दिनों बाद सऊदी से यह सहायता मिली।

नेपालमा जग्गा हदबन्दी: क्या है और कैसे लागू होती है?

नए सरकार के मंत्रियों द्वारा कुछ दिन पहले अपनी संपत्ति विवरण सार्वजनिक करने के बाद कई लोगों ने जग्गा हदबंदी पर चर्चा शुरू कर दी है। नेपाल के मौजूदा कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति को सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक भूमि रखने की अनुमति नहीं है। भूमिसम्बन्धी ऐन, २०२१ के तहत व्यक्ति या उसके परिवार द्वारा भूमि मालिक के रूप में रखी जा सकने वाली अधिकतम जमीन की सीमा को जग्गा हदबंदी कहा गया है। नेपाल में भूमिसम्बन्धी ऐन, २०२१ ही नहीं, बल्कि २०५८ में किया गया संशोधन भी पहले की तुलना में कम जमीन रखने का प्रावधान करता है, जैसा कि भूमि व्यवस्था, सहकारी तथा गरीबी निवारण मंत्रालय के प्रवक्ता गणेशप्रसाद भट्ट ने बताया। २०२१ में लागू हुए भूमिसम्बन्धी ऐन में कई बार संशोधन हुए, लेकिन पांचवें संशोधन में पुराने हदबंदी को बदलकर नया प्रावधान किया गया है जो केवल जमीन की अधिकतम सीमा निर्धारित करने के उद्देश्य से है।

भूमिसम्बन्धी ऐन, २०२१ के अनुसार क्षेत्र के आधार पर भूमि की विभिन्न हदबंदी तय की गई है। २०२१ के मंसिर १ से २०५८ साल साउन ३२ तक देशभर में २५ विघा से ज्यादा जमीन रखना प्रतिबंधित था, लेकिन पांचवें संशोधन में इसे १० विघा तक सीमित किया गया है। संशोधन से पहले काठमांडू उपत्यका में ५० रोपनी तक जमीन रखना संभव था, जबकि संशोधन के बाद यह सीमा २५ रोपनी कर दी गई है। काठमांडू उपत्यका के बाहर पहाड़ी क्षेत्रों में ८० रोपनी की हदबंदी थी, संशोधन के पश्चात इसे ७० रोपनी किया गया है। हालांकि, परिवार के लिए अतिरिक्त जमीन रखने की छूट ऐन में दी गई है। भित्री मधेश समेत सम्पूर्ण तराई क्षेत्र में जमीन की सीमा ३ विघा से घटाकर १ विघा कर दी गई है। काठमांडू उपत्यका में पहले अतिरिक्त ८ रोपनी जमीन रखने की अनुमति थी, जिसे संशोधन ने ५ विघा तक सीमित कर दिया है। उपत्यका के बाहर पहाड़ी क्षेत्रों के लिए पहले १६ रोपनी की हदबंदी थी, संशोधन के बाद इसे ५ रोपनी कर दिया गया है।

भूमिसम्बन्धी ऐन, २०२१ के अनुसार मोही के तौर पर सीमित मात्रा में जमीन रखने की अनुमति है: (क) भित्री मधेश सहित सम्पूर्ण तराई क्षेत्र में ४ विघा, (ख) काठमांडू उपत्यका में १० रोपनी, (ग) काठमांडू उपत्यका के बाहर पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकतम २० रोपनी तक। हदबंदी में कुछ अपवाद भी हैं, जहाँ सरकार विशेष परिस्थितियों में छूट प्रदान कर सकती है, जैसा कि मंत्रालय के प्रवक्ता भट्ट ने बताया। ऐन की धारा ७ और १० में उल्लिखित परिस्थितियों में हदबंदी लागू नहीं होती।

भूमि व्यवस्था, सहकारी तथा गरीबी निवारण मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार देश डिजिटल प्रणाली की ओर बढ़ रहा है जिससे नियमन प्रक्रिया आसान हुई है। “पहले डिजिटल प्रणाली नहीं होने से हमें जानकारी नहीं मिलती थी और भूमि लेन-देन में संबंधित पक्ष को घोषणा करना होता था,” प्रवक्ता भट्ट ने बताया। “अब यदि किसी के पास हदबंदी से अधिक जमीन होगी, तो हमारी डिजिटल प्रणाली वह पहचान लेगी और उस जमीन का लेन-देन रोक देगी।”

२ हजार कर्मचारी कटौती गर्दै बीबीसी – Online Khabar

बीबीसी 2 हजार कर्मचारियों को निकालने की योजना बना रहा है

बीबीसी ने लगभग दो हजार कर्मचारियों की संख्या कम करने की योजना बनाई है, ऐसा ब्रिटिश मीडिया ने बुधवार को बताया। आईटीवी न्यूज और प्रेस एसोसिएशन न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह बीबीसी की पिछले 15 वर्षों में सबसे बड़ी कर्मचारी कटौती होगी। बीबीसी ने इस कटौती की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और एएफपी की ओर से पूछताछ पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

3 अप्रैल, लंदन। ब्रिटिश मीडिया के विभिन्न स्रोतों की मानें तो बीबीसी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी करने की प्रक्रिया में है। आईटीवी न्यूज और प्रेस एसोसिएशन न्यूज एजेंसी के अनुसार यह कर्मचारी कटौती प्रसारण क्षेत्र में एक ही संस्थान द्वारा पिछले लगभग 15 वर्षों में की जा रही सबसे बड़ी होगी। हालांकि, बीबीसी ने अब तक कर्मचारियों की नौकरी में कटौती की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। एएफपी के पूछने पर भी कोई तत्काल जवाब नहीं मिला।

स्वास्थ्य क्षेत्र में दो दिन की छुट्टी लागू न होने पर आंदोलन की चेतावनी

स्वास्थ्य क्षेत्र में सक्रिय १४ संयुक्त पेशेवर संगठनों ने स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सप्ताह में दो दिन की छुट्टी लागू करने को लेकर सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। नेपाल चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डॉ. अनिल विक्रम कार्की की संयोजकता में गठित इस समूह ने स्वास्थ्य क्षेत्र में दो दिन की छुट्टी लागू करने की मांग की है। स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय ने मंत्रिपरिषद के निर्णय के विपरीत दो दिन की छुट्टी न लागू करने का निर्णय लिया है, जिसे तत्काल सुधारने की मांग समूह ने की है। २ वैशाख, काठमांडू।

संयुक्त पेशेवर संगठनों ने स्वास्थ्यकर्मियों को भी सप्ताह में दो दिन की छुट्टी लागू करने की मांग करते हुए सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। उनकी घोषणा है कि यदि ये माँग पूरी नहीं हुई तो वे संयुक्त आंदोलन करेंगे। नेपाल चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डॉ. अनिल विक्रम कार्की की अध्यक्षता में गठित इस संयुक्त समूह ने जारी विज्ञप्ति में कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र में लागू सप्ताह में दो दिन की छुट्टी स्वास्थ्य क्षेत्र के कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू होनी चाहिए। इस समूह के सदस्य सचिव डेन्टल हाइजेनिस्ट माइकल देवकोटा हैं।

‘लंबे समय से स्वास्थ्य क्षेत्र में आवश्यक जनशक्ति की कमी और संगठनात्मक कमजोरियों के कारण चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी अत्यधिक कार्यभार से गुजर रहे हैं। इससे मानसिक तनाव समेत अनेक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं,’ विज्ञप्ति में कहा गया है। संगठन ने स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय द्वारा मंत्रिपरिषद के निर्णय के विपरीत स्वास्थ्य क्षेत्र में दो दिन की छुट्टी न लागू करने के फैसले को कानूनी रूप से अमल योग्य नहीं बताया है। उन्होंने मंत्रालय से इस निर्णय को तुरंत संशोधित करने की मांग की है।

मंत्रालय द्वारा रविवार को भी ओपीडी सेवाएं संचालित रखने का आग्रह करने के बाद सरकारी अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया है। कुछ अस्पतालों ने सेवाओं को नियमित बनाए रखा है। संयुक्त संगठनों ने कहा है कि यदि स्वास्थ्यकर्मियों की मांगों की अनदेखी की गई तो वे स्वास्थ्य क्षेत्र में संयुक्त आंदोलन की घोषणा करेंगे।

सम्पत्ति जाँचबुझ आयोगले कसरी गर्छ काम ? – Online Khabar

संपत्ति जांच आयोग की कार्यप्रणाली क्या है?

सरकार ने सार्वजनिक पदों पर नियुक्त व्यक्तियों की संपत्ति जाँच के लिए सर्वोच्च के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रसिंह भण्डारी की अध्यक्षता में पाँच सदस्यों का एक न्यायिक आयोग गठित किया है। यह आयोग २०६२/६३ से २०८२/८३ तक के सार्वजनिक पदों पर रह चुके प्रमुख राजनीतिक पदाधिकारियों और उच्च पदस्थ कर्मचारियों की संपत्ति की जांच करेगा। आयोग केवल जांच करता है, कार्रवाई नहीं कर सकता; इसके लिए इसकी सिफारिश अभियोजन प्राधिकरण को भेजी जाएगी। यदि गैरकानूनी संपत्ति अधिग्रहण की पुष्टि होती है तो एक से तीन वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।

२ वैशाख, काठमाडौं। सरकार ने सार्वजनिक पदों पर कार्यरत व्यक्तियों की संपत्ति की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठन करने का निर्णय लिया है। बुधवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सर्वोच्च अदालत के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रसिंह भण्डारी की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय आयोग बनाने का निश्चय किया गया। आयोग में पुनरावेदन अदालत से सेवानिवृत्त न्यायाधीश पुरुषोत्तम पराजुली और चण्डीराज ढकाल सदस्य हैं। नेपाल पुलिस के पूर्व डिप्टी आईजी गणेश केसी और चार्टर्ड एकाउंटेंट प्रकाश लम्साल भी आयोग के सदस्य नियुक्त किए गए हैं।

सरकार ने प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय के अधीन एक संपत्ति जांच समिति बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन बुधवार को मंत्रिपरिषद ने पूर्व की तरह एक मजबूत जांच आयोग स्थापना का निर्णय लिया। यह आयोग २०६२/६३ से २०८२/८३ के बीच सार्वजनिक पदों पर रहे व्यक्तियों की संपत्ति का विवरण जांचेगा। सरकार की सौ-फेज़ीय कार्ययोजना के तहत संपत्ति जांच दो चरणों में होगी; पहले चरण में २०६२/६३ से २०८२/८३ की अवधि की संपत्ति की जांच होगी।

दूसरे चरण में २०४८ से २०६२/६३ के जनआन्दोलन तक की संपत्ति की जांच करने का प्रावधान है। आयोग को आवश्यक दस्तावेज, विवरण और अभिलेख एकत्रित कर विश्लेषण करने तथा सिफारिश करने का अधिकार प्राप्त होगा। इस आयोग की अधिकार सीमा गौरीबहादुर कार्की की अध्यक्षता में गठित आयोग के बराबर होगी, जो जेएनजिई आन्दोलन में हुए दमन और विध्वंस की भी जांच करता है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, २०५९ सार्वजनिक पदों पर कार्यरत लोगों को गैरकानूनी संपत्ति अर्जित करने से रोकता है। कानून के विरुद्ध संपत्ति जुटाने या असामान्य जीवनशैली अपनाने वालों के खिलाफ गैरकानूनी संपत्ति अर्जन का मामला चलाया जाता है। हालांकि, गैर-सार्वजनिक पद के व्यक्तियों पर यह कानून लागू नहीं होता, लेकिन यदि उनकी असामान्य संपत्ति मिलती है और अन्य अपराध सिद्ध होते हैं तो संपत्ति शुद्धिकरण के आरोप में भी जाँच हो सकती है।

गैरकानूनी संपत्ति के प्रमाण मिलने पर आरोपित को एक से तीन वर्ष कैद, जुर्माना और क़ुर्बानी देना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में गैरकानूनी संपत्ति जब्त करने का प्रावधान भी है। वर्तमान में न्यायाधीश और सैनिकों की जांच नहीं की जा सकती, लेकिन वे सेवानिवृत्त होने के बाद अभियोजन प्राधिकरण जांच कर सकता है।

राजेन्द्रसिंह भण्डारी ने २०२२ में प्रशासन सेवा में शाखा अधिकृत के रूप में प्रवेश किया था और २०६४ में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश से सेवानिवृत्त हुए। गठित आयोग सार्वजनिक पदाधिकारियों की संपत्ति जांच करेगा लेकिन स्वयं मुक़दमा चलाने या कार्रवाई करने में सक्षम नहीं होगा, इसके लिए अलग से सिफारिश करनी होगी।

पहली बार तत्कालीन देउवा सरकार ने २०५८ फाल्गुन २० को ‘२०४७ के बाद सरकारी सेवा में आए लोगों की संपत्ति जांच’ के लिए आयोग बनाया था। उस आयोग के अध्यक्ष बहाल न्यायाधीश भैरव लम्साल थे, और सदस्य पूर्व न्यायाधीश उदयराज उपाध्याय तथा ज्ञाइन्द्रबहादुर श्रेष्ठ थे। उस आयोग की रिपोर्ट के आधार पर अनेक मंत्री और सार्वजनिक पदाधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए गए।

राजेन्द्रसिंह भण्डारी प्रशासन सेवा में शाखा अधिकृत के रूप में २०२२ में शामिल हुए थे और २०६४ में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने जिला, अंचल, विशेष और पुनरावेदन अदालतों में कार्यरत रहने के बाद सर्वोच्च अदालत तक अपनी न्यायिक यात्रा पूरी की। २०६१ से २०६४ तक सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश रहे भण्डारी सेवानिवृत्ति के बाद पाँच जांच आयोगों का नेतृत्व कर चुके हैं। माओवादी शांति प्रक्रिया में कोटेश्वर के व्यापारी रामहरि श्रेष्ठ हत्या के मामले की जांच करने वाले आयोग की अध्यक्षता उन्होंने की थी।

अन्य आयोगों में पुलिस की गोली से प्रदीपकुमार खड्का मृत्यु, खिलाड़ी निर्मल पन्त और पुष्कर डंगोल हत्या, तथा केंद्रीय कारागार में गोलीबारी की जांच भी शामिल है। इस्लामिक महासंघ के महासचिव फैजान अहमद की हत्या की जांच भी उनके नेतृत्व में हुई है। पूर्व न्यायाधीश फोरम के सक्रिय सदस्य भण्डारी सर्वोच्च न्यायालय में मेलमिलापकर्ता और मध्यस्थ (आर्बिटरेटर) के रूप में भी कार्यरत हैं।

रोयल इन्फिल्ड ने नेपाल में गोवन क्लासिक-350 मोटरसाइकिल का अनावरण किया

रोयल इन्फिल्ड ने नेपाल में 2026 संस्करण की गोवन क्लासिक 350 मोटरसाइकिल का अनावरण किया है। इस मोटरसाइकिल में 349 सीसी एयर ऑयल कूल्ड सिंगल सिलेंडर इंजन और 5-स्पीड गियरबॉक्स शामिल हैं। मोटरसाइकिल दो मूल्य वर्गों में उपलब्ध है: सैक ब्लैक और पर्पल हेज, जिनकी कीमत क्रमशः 5 लाख 98 हजार और 6 लाख 2 हजार रूपये है। 2 वैशाख, काठमांडू।

मिड-साइज मोटरसाइकिल सेगमेंट में विश्वव्यापी अग्रणी रोयल इन्फिल्ड ने नेपाल में 2026 संस्करण की गोवन क्लासिक 350 मोटरसाइकिल का अनावरण किया है। बॉबर-प्रेरित डिजाइन में तैयार इस मोटरसाइकिल ने स्वतंत्र और मुक्त जीवनशैली प्रस्तुत करते हुए राइडर-केंद्रित नई खूबियों के साथ बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जैसा कि कंपनी ने बताया। नए मॉडल में 349 सीसी एयर ऑयल कूल्ड सिंगल सिलेंडर इंजन है, जो 6,100 RPM पर 20.2 बीएचपी की शक्ति और 4,000 RPM पर 27 एनएम टॉर्क उत्पन्न करता है।

कंपनी के अनुसार, इस इंजन को लेडबैक बॉबर स्टाइल की अनुरूप सुगम और आरामदायक राइडिंग अनुभव देने के लिए विशेष रूप से ट्यून किया गया है। “इसका 5-स्पीड गियरबॉक्स शहर की व्यस्तता से लेकर खुले राजमार्गों तक सहज गियर परिवर्तन और आरामदायक यात्रा अनुभव सुनिश्चित करता है,” कंपनी ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा। मोटरसाइकिल में नया असिस्ट एंड स्लिपर क्लच, उन्नत USB टाइप-C चार्जिंग पोर्ट और डाउनशिफ्ट पर उत्कृष्ट नियंत्रण प्रणाली भी शामिल है। कंपनी का दावा है कि ये सभी फीचर्स राइडर को और अधिक सहज, सुरक्षित और आरामदायक अनुभव प्रदान करेंगे।

डिजाइन की दृष्टि से, इसने अपनी विशिष्ट सिग्नेचर सिंगल सीट बॉबर स्टाइलिंग को कायम रखा है। उद्घाटन कार्यक्रम में, अल्फा ऑटोमोटिव के निदेशक मेघराज पौडेल ने नेपाल के राइडर्स के बीच इस मॉडल की लोकप्रियता को लेकर आश्वस्ति जताई। उनके अनुसार, गोवन क्लासिक 350 उन राइडर्स के लिए ब्रांड की लाइनअप में एक अलग पहचान बनाएगा जो स्वतंत्र जीवनशैली को पसंद करते हैं। यह मॉडल नेपाल भर के सभी आधिकारिक रोयल इन्फिल्ड शोरूम्स में उपलब्ध होगा।

शिखर नगरपालिकाः संघीय सरकार से कहा– रविवार को विद्यालय बंद नहीं होना चाहिए

२ वैशाख, काठमाडौं । डोटी की शिखर नगरपालिकाने रविवार को विद्यालय बंद न करने के पक्ष में संघीय सरकार को पत्र भेजा है। नगर प्रमुख दीर्घबहादुर बलायर ने बुधवार को संघीय सरकार के शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय को पत्र लिखते हुए बताया कि रविवार को छुट्टी देने के निर्णय से पूरे वर्ष में केवल १३८ दिन ही पढ़ाई संभव होगी। मेयर बलायर के पत्र में कहा गया है कि संघीय सरकार के रविवार को अवकाश देने के निर्णय के अनुसार, नगरपालिका और विद्यालयों के लिए शैक्षिक कार्य योजना और समय सारिणी बनाना अत्यंत कठिन होगा।

अवकाश का हिसाब-किताब नगरपालिका के पत्र में शामिल है जहाँ दिखाया गया है कि यदि रविवार को छुट्टी दी गई तो वार्षिक विद्यालय कैलेंडर में दिक्कत आएगी। वर्ष के ३६५ दिनों में से ५२ शनिवार छुट्टी है, इसमें ५२ रविवार जोड़ें और प्रदेश के ३२ सार्वजनिक छुट्टियाँ मिलाएं तो कुल अवकाश १३६ दिन हो जाते हैं। शिक्षा नियमावली २०५९ के नियम ८५(२) के तहत घटस्थापना से पूर्णिमा तक पाँच दिन दशैं छुट्टी, नियम ८५(३) के अनुसार हिउँदे या वर्षे या दोनों मिलाकर ४५ दिन छुट्टी, तथा नियम ८५(४) के तहत ५ दिन स्थानीय छुट्टी की अनुमति है, जिससे कुल ५५ और दिन छुट्टियाँ हो सकती हैं, जो कानूनी प्रावधान भी हैं।

‘इससे स्कूल खुलने वाले दिन केवल १७४ ही बचते हैं’, पत्र में उल्लेख है। ऐसी स्थिति में शिक्षा नियमावली के नियम ८४(५) के अनुसार कम से कम २२0 दिन विद्यालय संचालन करना आवश्यक है, जिसे पूरा न करने का खतरा होता है, यह मेयर बलायर ने शिक्षा मंत्रालय को सचेत किया है। ‘नेपाल के वर्तमान पाठ्यक्रम के अनुसार कम से कम १८0-१९0 दिन पढ़ाई जरूरी है’, पत्र में कहा गया, ‘लेकिन १७4 दिन में से परीक्षा के लिए तीन बार कुल २1 दिन निकल जाते हैं। वैशाख १५ के पहले और चैत्र अंत के बाद कम से कम १५ दिन पढ़ाई नहीं होती।’

रविवार को अवकाश देने पर पढ़ाई के लिए केवल १३८ दिन बचेंगे, यह हिसाब नगरपालिका ने पत्र में प्रस्तुत किया। ‘अतिरिक्त गतिविधियाँ, परीक्षा तैयारी के लिए अवकाश, परिणाम घोषित करने का समय, शिक्षक छुट्टियाँ और विद्यार्थियों की अनुपस्थिति को भी जब ध्यान में रखा जाए तो शैक्षिक सत्र में पढ़ाई का समय बहुत कम रह जाता है’, पत्र में लिखा है। शैक्षिक सत्र के प्रबंधन और संचालन को बेहद चुनौतीपूर्ण माना गया है। नगर कार्यपालिक की बैठक ने संघीय सरकार को सुझाव देते हुए पत्र भेजने का निर्णय लिया, यह जानकारी मेयर बलायर ने दी।

शैक्षिक सत्र प्रबंधन के दबाव को ध्यान में रखते हुए जल्दी समाधान के लिए नगरपालिकाने शिक्षा मंत्रालय से अनुरोध किया है। नगरीय प्रमुख बलायर के अनुसार, यदि समाधान नहीं हुआ तो नगरपालिका स्वयं निर्णय लेकर संघीय सरकार के आदेश विपरीत रविवार को विद्यालय संचालित करने की तैयारी में है। ‘हम अपने विद्यालयों और बच्चों की चिंता करते हैं। सम्पूर्ण वर्ष उचित पढ़ाई सुनिश्चित करना चाहते हैं’, उन्होंने कहा, ‘हमें आशा है कि संघीय सरकार इसका समाधान करेगा, अन्यथा संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के तहत हम स्वयं निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।’ पत्र की प्रति प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय, शिक्षा तथा मानव स्रोत विकास केन्द्र सानोठिमी एवं शिक्षा विकास समन्वय इकाई डोटी को भी भेजी गई है।