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लेखक: space4knews

‘हम पर्वत को साफ-सुथरा रखने में सफल नहीं हुए’: सगरमाथा संरक्षण पर कामिरिता शेर्पा का सुझाव

‘हम पर्वत को साफ-सुथरा रखने में सफल नहीं हुए’: सगरमाथा संरक्षण पर कामिरिता शेर्पा का सुझाव

29 मई 1953 को तेनजिंग नोर्गे शेर्पा और सर एडमंड हिलरी ने विश्व की सर्वोच्च चोटी सगरमाथा पर पहली बार कदम रखा था, जिसे याद करते हुए शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय सगरमाथा दिवस मनाया जा रहा है। उस ऐतिहासिक आरोहण के पदचिन्हों पर चलते हुए अब तक 10,000 से अधिक लोग सगरमाथा के सफल आरोहण में कामयाब हुए हैं, पर्यटन विभाग ने यह जानकारी दी है।

इस वर्ष वसंत ऋतु में नेपाल से लगभग 495 लोगों को सगरमाथा आरोहण की अनुमति मिली थी, जिनमें 105 महिलाएं भी थीं। सगरमाथा पर सबसे अधिक 32 बार चढ़ चुके 56 वर्षीय कामिरिता शेर्पा (सोलुखुम्बु) लोगों की बढ़ती भीड़ और कूड़े-करकट को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं।

यात्रियों की भीड़ को कम करने या सगरमाथा को कुछ समय के लिए विश्राम देने की मांगें कभी-कभी सामने आती रहती हैं, लेकिन कामिरिता शेर्पा का मानना है कि सगरमाथा को पूर्ण विश्राम देने के बजाय आरोहण की अनुमति सीमित की जानी चाहिए और आरोहण से पहले 7,000 मीटर से ऊंचे किसी हिमालयी पर्वत पर चढ़ाई का अनुभव अनिवार्य करना चाहिए।

कसरी बदल्दै छ प्रविधिले युद्धको रूप ? – Online Khabar

युद्ध के स्वरूप में तकनीक कैसे बदलाव ला रही है?

१५ जेठ, काठमाडौँ। सन् २०२२ में यूक्रेन के युद्ध क्षेत्र में देखी गई ट्रेंच युद्ध और भारी तोपखाने का दृश्य अब पूरी तरह अलग हो चुका है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमला करने से शुरू हुई संघर्ष किसी पूरी तरह से भिन्न है। हालांकि, इन दोनों संघर्षों में कुछ समानताएँ भी नजर आई हैं। युद्ध शुरू हुए लगभग तीन महीने के बाद भी ये समानताएँ अधिक स्पष्ट हो रही हैं। दोनों संघर्षों में शक्तिशाली सैन्य बल वाले देश अपने प्रतिद्वंद्वी को पराजित नहीं कर पाए हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चार साल पहले अपनी विशेष सैन्य अभियान शुरू करते समय शीघ्र विजय की उम्मीद जताई थी। उत्तरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी प्रारंभ में ईरान के खिलाफ युद्ध ४ से ५ सप्ताह में समाप्त होने का दावा किया था। ईरान के खिलाफ यह संघर्ष गत २८ फरवरी को शुरू हुआ था।

पेरिस के प्रतिष्ठित सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय साइंसेज पो की की प्रोफेसर निकोल ग्राजेव्सकी, जो ईरान और रूस मामलों की विशेषज्ञ हैं, उन्होंने कहा, ‘रूस और अमेरिका दोनों के सैन्य अभियान अपेक्षा के अनुसार सफल नहीं हुए हैं।’ उनके अनुसार इसका मुख्य कारण दोनों पक्षों का अहंकार है। हालिया वार्ताओं में ईरान और अमेरिका के बीच प्रारंभिक शांति प्रयासों में कुछ प्रगति देखने को मिली है, लेकिन सोमवार को अमेरिका द्वारा ईरान पर पुनः हवाई हमला करने से यह प्रगति अस्थिर हो गई है। चाहे समझौता हो या न हो, इस युद्ध ने आधुनिक युद्ध के विकास के बारे में महत्वपूर्ण सबक दिए हैं। यूक्रेन संघर्ष ने भी ऐसा ही संदेश दिया है।

तकनीक युद्ध के स्वरूप को बदल रही है, जहां पारंपरिक सैन्य झड़प में कमजोर पक्ष सीधे तौर पर अधिक शक्तिशाली सेना से मुकाबला नहीं कर पाते। यूक्रेन और ईरान ने ‘असिमेट्रिकल’ रणनीति अपनाई है, जिसके कारण ये राष्ट्र शक्तिशाली सेनाओं को रोकने में सफल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों में हमला कर अमेरिका पर दबाव डाला है। कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों के बड़े सैन्य बेस कैंप और ऊर्जा केंद्रों पर ड्रोन के एकतरफा हमले किए गए, जिससे फारस की खाड़ी क्षेत्र में आतंक फैल गया। साथ ही, ईरान ने हॉर्मुज जलमार्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए समुद्री माइन और तेज गति के हथियारबंद नौकाओं से डर पैदा किया है। दूसरी ओर, यूक्रेन ने मास्को में पहुंचकर रूसी सैनिक अधिकारियों की हत्या की है और तेल शोधन केंद्रों तथा भंडारण स्थलों पर नियमित हमले जारी रखे हैं। यूक्रेन ने काला सागर की नौसेना को कमजोर करने के लिए समुद्री ड्रोन का भी उपयोग किया है।

सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, ये संघर्ष नई तकनीक और आविष्कारों ने युद्ध के स्वरूप को किस प्रकार बदल दिया है यह सबसे स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। अमेरिकी रक्षा के कुछ स्रोत बताते हैं कि सऊदी अरब के ‘प्रिंस सुल्तान एयर बेस’ की सुरक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसयुक्त ‘ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम’ का इस्तेमाल हो रहा है। यह प्रणाली शुरू में यूक्रेन ने रूस के हमलों से बचाव के लिए विकसित की थी। वहीं, लेबनान के लड़ाकू समूह हिज़्बुल्लाह ने इजरायली सैनिकों पर विस्फोटक ड्रोन से हमला किया है, जिसे फाइबर-ऑप्टिक केबल द्वारा नियंत्रित किया जाता है। फारस की खाड़ी में प्रयुक्त सेंसर, निर्देशित मिसाइल और एआई तकनीक युक्त ड्रोन की बहु-स्तरीय प्रणाली दुनिया भर में तेजी से फैल सकती है। ‘कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस’ के विशेषज्ञ माइकल कॉफमैन के अनुसार, इन युद्धों ने ‘मैदान में व्यापक और सटीक हमलों की तकनीक के प्रवेश’ को दर्शाया है। वे कहते हैं, हिज़्बुल्लाह और माली के लड़ाके भी आर्थिक और सुलभ तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, जिससे यह प्रणाली छोटे और मध्यम शक्तियों के लिए भी युद्धभूमि में सटीक निशाने का तकनीकी उपयोग आसान हो जाएगा।

इसी तरह की आक्रमण रणनीतियाँ गत अप्रैल में मध्य पूर्व के संघर्ष में युद्धविराम से पहले देखी गई थीं। वहां बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ भारी मात्रा में ड्रोन (ड्रोन स्वार्म्स) भेजकर हमला किया गया था। विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार ऐसी रणनीति पहली बार रूस ने यूक्रेन पर हमला करते समय अपनाई थी। सन् २०२२ में ईरान ने रूस को ‘साहेद’ ड्रोन प्रदान किया था, जिसे मास्को ने यूक्रेन पर इस्तेमाल किया। इसी वर्ष ईरान उन ड्रोन को खाड़ी देशों में भी तैनात कर रहा है। बदले में, रूस ने भी ईरान को कुछ सैन्य सहायता दी है, जिसका पूरा विवरण स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार रूस कैस्पियन सागर के ऊपर ड्रोन पार्ट्स भेज रहा है।

विशेषज्ञ ग्राजेव्सकी के अनुसार विरोधी निशाने को भ्रमित करने के लिए रूस और ईरान ने ‘ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम’ (GPS) में हेरफेर के लिए सहयोग किया है। अमेरिकी नौसेना की नजरों से बचने के लिए ईरान से जुड़े कई जहाजों ने हॉर्मुज जलमार्ग में अपनी स्थिति ट्रैकर को नकली बना रखा है। यह रणनीति रूस के अवैध ऊर्जा टैंकरों ने पहले ही इस्तेमाल में लाई थी। सन् २०२४ मार्च में साइप्रस में ब्रिटिश सैन्य बेस पर निशाना बने एक ईरानी ड्रोन से रूसी एंटी-जैमिंग उपकरण मिला था। यूरोपीय अधिकारी चिंतित हैं कि यदि वर्तमान शांति वार्ता विफल हुई और ईरान फिर से आक्रमण पर उतरा, तो रूस उसे हथियार उपलब्ध करा सकता है। गत अप्रैल में यूक्रेन को सैन्य सहायता देने वाले देशों की बैठक में ब्रिटिश रक्षा मंत्री जॉन हिली ने कहा था, ‘हमने रूस द्वारा ईरान को आक्रमण में सहयोग करने के प्रमाण देखे हैं।’ उन्होंने विस्तृत विवरण नहीं दिया, लेकिन यह भी कहा, ‘पुतिन चाहते थे कि हमारा ध्यान मध्य पूर्व की ओर जाए और यूक्रेन से दूर रहे।’

ईरान युद्ध ने कुछ देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में दरार डाली है। खासकर ट्रम्प प्रशासन और यूरोप के बीच संबंध तनावपूर्ण हुए हैं। कई यूरोपीय नेताओं ने इस विवाद को अनावश्यक और अवैध बताया है। इस संघर्ष ने विश्व स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में समस्याएँ पैदा की हैं और देशों में ईंधन की होड़ शुरू हो गई है। कुछ देश अवैध होने के बावजूद उपलब्ध तेल और गैस के लिए रूस की ओर आकर्षित हो रहे हैं। अमेरिका का ध्यान मध्य पूर्व की ओर होने से रूस और यूक्रेन के बीच शांति प्रक्रिया प्रभावित हुई है। किव सुरक्षा फोरम के निदेशक और यूक्रेन के पूर्व उपराष्ट्रपति डैनिलो लुब्किव्स्की ने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान में युद्ध शुरू किया तो क्रेमलिन में खुशी से शैम्पेन खुला था।’

लेकिन ईरान युद्ध ने कुछ अप्रत्याशित कूटनीतिक गठबंधन भी बनाए हैं। यूक्रेन द्वारा खाड़ी देशों के साथ स्थापित की गई नई साझेदारी इसका उदाहरण है। गत अप्रैल में यूक्रेन ने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ नई सुरक्षा समझौते किए। कुछ साल पहले ऐसे कूटनीतिक संबंधों की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी क्योंकि उस समय खाड़ी देश रूस के प्रति तटस्थ थे। ‘यूरोपीय काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस’ के सुरक्षा कार्यक्रम सह-निर्देशक जाना कोब्जोवा के अनुसार किव अपनी ड्रोन तकनीक और सैन्य प्रशिक्षण के बदले मध्य पूर्व से कूटनीतिक समर्थन, ऊर्जा समझौते और आधुनिक हवाई सुरक्षा प्रणाली लेना चाहता है। जाना कोब्जोवा कहती हैं कि यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की इस संकट को अवसर में बदलने की आशा रखते हैं। तेल धनी खाड़ी देशों के साथ ये समझौते यूक्रेन के लिए लाभकारी होंगे। ड्रोन तकनीक की बिक्री से यूक्रेन के तेजी से बढ़ते रक्षा उद्योग को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा। पिछले साल अमेरिका ने किव को हथियार अनुदान पर रोक लगाई थी, तब से यूरोप ही यूक्रेन का मुख्य समर्थक बना है। यूरोपीय देश अमेरिका के साथ मिलकर हथियार खरीद कर यूक्रेन भेज रहे हैं। इसके अलावा, पिछले महीने यूरोपीय संघ ने यूक्रेन को ९० अरब यूरो का ऋण स्वीकृत किया है। लेकिन यूरोप की यह निरंतर सहायता उसकी अपनी आर्थिक स्थिति पर निर्भर होगी। ईरान युद्ध से उत्पन्न ऊर्जा और आपूर्ति की कमी यूरोपीय अर्थव्यवस्था पर कितना प्रभाव डालेगी, यह यह निर्धारित करेगा। यदि शीघ्र शांति स्थापित नहीं होती है, तो यूरोप की आर्थिक स्थिति और नाजुक हो सकती है। रोम में अंतरराष्ट्रीय मामले संस्थान के विशेषज्ञ रिकार्डो अल्कारो ने कहा कि हॉर्मुज जलमार्ग पर जारी गतिरोध ने विश्व ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर चुनौती दी है। यह जलमार्ग विश्व की कुल ऊर्जा आपूर्ति का २० प्रतिशत हिस्सा संभालता है और यहां तनाव के कारण ईरान यूक्रेन की तरह यूरोप के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। यूरोप और ईरान मामलों पर शोध कर रहे अल्कारो ने कहा, ‘यूक्रेन युद्ध अभी भी यूरोप का मुख्य मोर्चा है, पर ईरान युद्ध को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए। यह यूरोप की सबसे बड़ी प्राथमिकता, अर्थात् यूक्रेन की सहायता करने की क्षमता पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है।’

सिजी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स के छत्रछाया में टाइगर लैंड से क्राउन प्लाजा तक

काठमाडौँ। सिजी होल्डिङ्स अन्तर्गत संचालित होटल और रिसॉर्ट अब सिजी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स के एक ही छत्रछाया में संचालित होंगे। बिहीवार ललितपुर में आयोजित कार्यक्रम में कंपनी के प्रबंध निर्देशक सूर्यान्श चौधरी ने बताया कि सिजी होल्डिङ्स के सभी होटल और रिसॉर्ट आगामी दिनों से सिजी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स के अंतर्गत संचालित होंगे। चौधरी के अनुसार, वर्तमान में सिजी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स में ललितपुर के पुलचोक में स्थित पाँच सितारा क्राउन प्लाजा, द प्लाजा, चितवन के जगतपुर में स्थित टाइगरलैंड सफारी, नगरकोट के भंगेरी दरबार रिसॉर्ट और काठमाडौँ के मेराकी वेलनेस रिट्रीट शामिल हैं। इसके अलावा, भविष्य में संचालित होने वाले होटल और रिसॉर्ट भी इसी छत्रछाया में रखे जाएंगे।

कंपनी के अनुसार पुलचोक स्थित क्राउन प्लाजा इस वर्ष २०८३ के अंदर संचालन में आ जाएगा। इस होटल का प्रबंधन ग्लोबल कंपनी इंटरकॉन्टिनेंटल हॉस्पिटैलिटी ग्रुप (IHG) करेगा। करीब ६ वर्षों बाद, IHG सिजी होल्डिङ के माध्यम से नेपाल में पुनः प्रवेश करने जा रहा है, जो अब तक साल्टि होटल के प्रबंधन से अलग हो चुका था। २०७६ वैशाख में शिलान्यास किया गया यह होटल इसी वर्ष संचालन के लिए तैयार हो रहा है।

सिजी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स के अंतर्गत एक अन्य प्रमुख रिसॉर्ट नगरकोट का भंगेरी दरबार रिसॉर्ट है। आठ वर्ष पहले निर्माण शुरू हुआ यह रिसॉर्ट गत वैशाख से संचालन में है और इसका नाम चन्द्र शमशेर द्वारा नगरकोट में निर्मित भंगेरी दरबार के नाम पर रखा गया है। कंपनी ने सिजी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स में चितवन के जगतपुर में स्थित टाइगरलैंड सफारी को भी शामिल किया है। यह वन्यजीव रिसॉर्ट अंतरराष्ट्रीय चेन हॉस्पिटैलिटी कंपनी लेमन ट्रिस्को के प्रबंधन में संचालित है और चितवन राष्ट्रीय निकुञ्ज की उत्तरी सीमा पर स्थित है। इसी प्रकार, ललितपुर के पुलचोक में स्थित नेपाल का सबसे बड़ा मल्टीवेन्यू ‘द प्लाजा’ भी सिजी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स के छत्रछाया में संचालित है। इसके अलावा, काठमाडौँ के बुढानिलकण्ठ में स्थित मेराकी वेलनेस रिट्रीट भी संचालित है। यह रिसॉर्ट काठमाडौँ उपत्यका के निकट होने के कारण वेलनेस को प्राथमिकता देते हुए जंगल के भीतर आवास का अनुभव प्रदान करने का तरीका अपनाता है।

जनार्दन शर्मा: लोकतांत्रिक मूल्य और संस्कृति अभी भी सूखे की स्थिति में

फाइल तस्वीर समाचार सारांश के रूप में समीक्षा की गई। प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी के नेता जनार्दन शर्मा ने नेपाल में अभी भी लोकतांत्रिक मूल्य, संस्कृति और व्यवहार की सूखे की स्थिति होने का दावा किया है। गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा, “आज भी नेपाल में लोकतांत्रिक मूल्य, संस्कृति और व्यवहार की सूखे की स्थिति है।” गणतंत्र की घोषणा के समय तत्कालीन राजा की सहमति भी थी, इसका स्मरण करते हुए उन्होंने सरकार और जनप्रतिनिधियों से जनता के प्रति ज़िम्मेदार होने पर जोर दिया। १५ जेठ, काठमाडौं। प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी (प्रलोपा) के नेता जनार्दन शर्मा ने कहा कि आज भी नेपाल में लोकतांत्रिक मूल्य, संस्कृति और व्यवहार की सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर शुक्रवार को शुभकामना संदेश देते हुए वे इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं।

‘आज भी नेपाल में लोकतांत्रिक मूल्य, संस्कृति और व्यवहार की सूखे की स्थिति है। इसे पुनर्स्थापित किए बिना सच्चे लोकतंत्र का अभ्यास संभव नहीं है। गणतंत्र की घोषणा के समय न केवल तत्कालीन राजा की सहमति थी, यह तथ्य हमें नहीं भूलना चाहिए,’ उन्होंने कहा। नेता शर्मा ने संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र, समावेशिता, सुशासन और समृद्धि के लिए हर किसी से गणतंत्र दिवस के अवसर पर लोकतंत्र को आत्मसात करने की प्रतिबद्धता करने का आग्रह किया है। ‘लोकतंत्र केवल एक शब्द नहीं है; यह विचार, संस्कृति, स्वतंत्रता और अधिकारों का संतुलन भी है। उत्पीड़ित, निर्धन जनता, गरीब किसान, सुकुम्वासी, दलित और महिलाओं को हकारने वाली व्यवस्था को लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता। आवधिक चुनाव और उससे प्राप्त परिणाम ही लोकतंत्र का पूरा स्वरूप नहीं हैं; महत्वपूर्ण यह है कि सरकार, संसद और जनप्रतिनिधि जनता के प्रति जिम्मेदार हों,’ उन्होंने उल्लेख किया।

डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर सहित २५० डॉलर मूल्य के नए नोट जारी करने की तैयारी

अमेरिका की स्वतंत्रता घोषणा के २५०वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर और हस्ताक्षर सहित २५० डॉलर मूल्य का नया नोट जारी करने की तैयारी चल रही है। जीवित व्यक्तियों की तस्वीर मुद्रित नोट पर छापने की अनुमति न देने वाले वर्तमान कानून में संशोधन के लिए अमेरिकी कांग्रेस में विधेयक दायर किया गया है। विपक्षी दल डेमोक्रेट्स के विरोध की संभावना के बीच सरकारी अधिकारियों ने नोट के डिजाइन और छपाई प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा दिया है। १५ जेठ, काठमांडू।

अमेरिका के ट्रेजरी विभाग के स्कॉट बेसेंट ने बताया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर और हस्ताक्षर वाले २५० डॉलर के नए नोट को छापने की योजना बन रही है। यह विशेष नोट अमेरिका की स्वतंत्रता घोषणा के २५०वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर जारी किया जाएगा। हालांकि, अंतिम निर्णय इस नोट को बाजार में लाने या न लाने का अमेरिकी कांग्रेस करेगी।

अमेरिकी कानून के अनुसार कोई भी जीवित व्यक्ति की तस्वीर अमेरिकी डॉलर या सरकारी मुद्रा में मुद्रित नहीं की जा सकती। १८६६ से लागू इस कानून के कारण पिछले १५० वर्षों से अधिक समय से कोई भी जीवित अमेरिकी नागरिक की तस्वीर मुद्रा पर नहीं है। लेकिन वर्तमान एवं पूर्व राष्ट्रपतियों को मुद्रा में स्थान देने के लिए पिछले वर्ष कांग्रेस में एक विधेयक दायर किया गया था।

बेसेंट ने व्हाइट हाउस में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में बताया कि संसद में दायर इस विधेयक के पारित होने की आशा के साथ मंत्रालय ने नोट के डिजाइन को पहले ही तैयार कर लिया है। ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ के अनुसार, ट्रम्प द्वारा नियुक्त अमेरिकी कोषाध्यक्ष ब्रैंडन बीच इस नोट के डिजाइन और छपाई प्रक्रिया को तेज करने के लिए मंत्रालय के ‘ब्यूरो ऑफ एंग्रेविंग एंड प्रिंटिंग’ पर दबाव डाल रहे हैं। नोट के डिजाइन मॉकअप पर ‘अमेरिका २५० वार्षिकोत्सव’ लिखा हुआ है। वर्ष २०२५ में पुनः व्हाइट हाउस लौटने वाले राष्ट्रपति ट्रम्प ने सरकारी संस्थानों में अपनी निजी ब्रांडिंग का विस्तार किया है, जिसपर विपक्षी दलों ने आलोचना की है। इससे पहले अमेरिकी न्याय मंत्रालय सहित कई संघीय भवनों में ट्रम्प की बड़ी तस्वीरें लगाई गई हैं। राष्ट्रीय कला केंद्र के नाम में भी ट्रम्प का नाम जोड़ा गया है। अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन में रिपब्लिकन बहुमत होने के बावजूद सीनेट में इस विधेयक को पारित करने के लिए ६० मतों की आवश्यकता है, इसलिए विपक्षी डेमोक्रेट्स इसके रोकने का प्रयास कर सकते हैं।

यूक्रेन युद्ध: रोमानिया के आवासीय भवन पर रूसी ड्रोन हमला

रोमानिया में स्थित एक आवासीय भवन पर रूसी ड्रोन द्वारा आक्रमण किया गया, जिसमें आग लग गई, यह जानकारी रोमानिया के रक्षा मंत्रालय ने दी है। इस घटना में दो लोग घायल हुए हैं। रूसी ड्रोन ने यूक्रेन की सीमा के निकट पूर्वी शहर गलात्स में हमला किया, जिसे मंत्रालय के जारी बयान में बताया गया है। रोमानिया की आपातकालीन सेवा की रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन में लगे सभी विस्फोटक सामग्री फट गई और आवासीय भवन के निचले दस तलों में आग लग गई। यूक्रेन युद्ध के दौरान पिछले चार वर्षों में रूसी ड्रोन बार-बार रोमानिया में गिरे हैं, लेकिन यह पहली बार है जब इससे रोमानिया को नुकसान पहुंचा है। रोमानिया नाटो का सदस्य देश है।

दुर्घटना में घायल दो लोगों का इलाज चल रहा है और आग बुझाने के दौरान लगभग 70 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, अधिकारियों ने बताया। रूस ने इस घटना पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन रोमानिया ने इसे रूसी पक्ष द्वारा तनाव बढ़ाने वाली “गंभीर और गैर-जिम्मेदाराना” घटना बताते हुए बताया है। रोमानिया के रक्षा मंत्रालय ने इस मामले में नाटो महासचिव को सूचना दी है और “ड्रोन विरोधी क्षमता की शीघ्र उपलब्धता” का अनुरोध किया है।

नाटो के एक प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में “रूस की लापरवाही” की निंदा की है। उन्होंने कहा कि नाटो “ड्रोनसहित सभी खतरों के खिलाफ अपनी रक्षा प्रणाली को लगातार मजबूत करने” के लिए प्रतिबद्ध है। रोमानिया के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि जब उनके आसमान में ड्रोन देखे गए, तब दो F-16 लड़ाकू विमानों को तैनात किया गया था।

गलात्स शहर डेन्यूब नहर के पास स्थित है, जो रोमानिया और यूक्रेन को अलग करता है। रूस लगातार इस नदी के आसपास के बंदरगाहों को निशाना बना रहा है। इस वर्ष अप्रैल में भी गलात्स में एक रूसी ड्रोन गिरा था, जिससे कुछ भौतिक नुकसान हुआ था लेकिन कोई मानवीय हानि नहीं हुई थी। रोमानिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 47 बार रूसी ड्रोन या उनके अवशेष रोमानिया में गिरे हैं, जिनमें से 12 मामले इस वर्ष सामने आए हैं।

विनोद भण्डारीले स्वीडेनको नर्डिक स्म्याश टी-२० लिग खेल्ने

विनोद भण्डारी ने स्वीडन की नॉर्डिक स्मैश टी-20 लीग में खेलने का निर्णय लिया

नेपाली विकेटकीपर बल्लेबाज विनोद भण्डारी स्वीडन की नॉर्डिक स्मैश टी-20 लीग में वासटरास यूनाइटेड द्वारा अनुबंधित किए गए हैं। भण्डारी इस विदेशी फ्रैंचाइज़ क्रिकेट लीग में पहली बार हिस्सा ले रहे हैं। वह नेपाल के घरेलू क्रिकेट में त्रिभुवन आर्मी और नेपाल प्रीमियर लीग में सुदूरपश्चिम रोयल्स के लिए खेलते हैं।

वासटरास यूनाइटेड क्लब ने विनोद का स्वागत उनके अंतरराष्ट्रीय अनुभव, नेतृत्व क्षमता और दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी के रूप में किया है। क्लब ने सोशल मीडिया पर कहा, “विनोद अपनी अनुभव और आक्रामक बल्लेबाजी से टीम को मजबूत बनाने में मदद करेंगे।” इस टीम में इटली के जीपी मिएडे, ऑस्ट्रेलिया के विल बोसिस्टो और यूएई के जाहूर खान जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं। यह विनोद का नेपाल के बाहर पहला विदेशी फ्रैंचाइज़ लीग अनुभव होगा।

काग की अद्भुत क्षमताएँ: उपकरण बनाने से लेकर इंसान को पहचानने तक

वैज्ञानिकों के अनुसार काग एक अत्यंत बुद्धिमान पक्षी है, जो मनुष्य के चेहरे पहचानने, उपकरण निर्माण करने और जटिल समस्याओं को हल करने में सक्षम है। आमतौर पर काग को केवल सामान्य, आवाज करने या कूड़ा-खोर पक्षी के रूप में देखा जाता है। कुछ लोग इसकी आवाज को अशुभ संकेत भी मानते हैं। लेकिन विज्ञान काग को दुनिया के सबसे बुद्धिमान पक्षियों में से एक मानता है। काग केवल भोजन ढूंढ़कर जीवन यापन करने वाला पक्षी नहीं है, बल्कि यह इंसान के चेहरे याद रखता है, गुस्सा करता है, उपकरण बनाता है, समस्याएँ हल करता है और अपने साथियों के साथ सूचना का आदान-प्रदान भी करता है। अपने मृत साथियों के आसपास जमा होकर ‘शोक सभा’ जैसी क्रियाएँ करना इसकी आदत है, जो वैज्ञानिकों को भी हैरान कर देती है।

विशेषज्ञों के अनुसार काग का मस्तिष्क क्षमता कई बार बंदर के समान होती है। नेपाल के गांवों से लेकर काठमांडू की भीड़-भाड़ तक, काग ने खुद को सहज रूप से अनुकूलित कर लिया है। कूड़े के ढेर, नदियों के किनारे, खेत-खलिहान, मंदिरों के आसपास या शहर के बिजली के तारों पर — कहीं भी काग आसानी से देखे जा सकते हैं। वन्यजीव फोटोग्राफर राजेश ढुंगाना के मुताबिक काग दुनिया के सबसे अधिक अनुकूलनीय पक्षियों में से एक है। काग नई परिस्थितियों को जल्दी समझता है और भोजन पाने के लिए नए-अनूठे तरीके अपनाता है। जापान में किए गए एक अध्ययन में काग ने अखरोट सड़क पर रखा, गाड़ी गुजरने का इंतजार किया और ट्रैफिक लाइट लाल होने पर आराम से उसे खा लिया।

काग स्वयं उपकरण बनाता है, जो वैज्ञानिकों के लिए चौंकाने वाला प्रमाणित हुआ है। काग ने पत्थर फेंक कर पानी की सतह पर चीजें ऊपर लाने की क्षमता भी दिखायी है। यह ‘कारण और परिणाम’ समझ सकता है। काग की ‘शोक सभा’ तब होती है जब कोई काग मर जाता है और अन्य काग उसकी मृत्यु के बारे में पूछताछ के लिए इकट्ठा हो जाते हैं। काग की सबसे भयावह लेकिन रोचक क्षमता है इंसान के चेहरे पहचानने की शक्ति। अमेरिका में किए गए अध्ययन से यह ज्ञात हुआ कि काग जब विशेष मास्क वाले व्यक्ति को देखता है तो तेज़ आवाज़ करने लग जाता है। यह दिखाता है कि काग न केवल याद रखता है, बल्कि सामाजिक जानकारियाँ साझा करने वाला जीव भी है।

नेपाल में काग का विशेष स्थान है। तिहार के पहले दिन ‘काग तिहार’ मनाया जाता है, जिसमें काग की पूजा की जाती है और उसे भोजन करवाया जाता है। काठमांडू जैसे व्यस्त शहर में भी काग ने खुद को आसानी से अनुकूलित कर लिया है। काग कूड़ा साफ करता है, मृत पशुओं को खाता है, कीड़ों को नियंत्रित करता है और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करता है। काग की बुद्धिमत्ता और अनुकूलन क्षमता इसे विशेष बनाती है।

प्रदेश प्रमुख देवकोटा: गणतंत्र सुदृढ़ीकरण के लिए नागरिकों की पहुँच और लाभों का न्यायपूर्ण वितरण आवश्यक है

बागमती प्रदेश प्रमुख दीपकप्रसाद देवकोटा ने कहा है कि नागरिकों की सहज पहुँच और राज्य से प्राप्त होने वाले लाभों का न्यायसंगत वितरण ही गणतंत्र को मजबूत बना सकता है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर बागमती प्रदेश गणतंत्र मूलसमारोह समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि संघीय लोकतांत्रिक गणतांत्रिक शासन व्यवस्था के माध्यम से देश की राष्ट्रीय एकता, भौगोलिक अखंडता और सार्वभौम संप्रभुता को अक्षुण्ण रखते हुए स्थायी शांति, सुशासन, विकास और समृद्धि की आकांक्षा पूरी करना सबका साझा दायित्व है।

उन्होंने गणतंत्र दिवस सभी को आपसी सद्भाव, भ्रातृत्व और एकता के सूत्र में बांधने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करे, ऐसी कामना करते हुए गणतंत्र की स्थापना के लिए अपना अमूल्य जीवन अर्पित करने वाले सभी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उसी अवसर पर नेपाल पत्रकार महासंघ ललितपुर के अध्यक्ष रामहरी कार्की, पत्रकार पोष्टराज अधिकारी, सुनिता विष्ट और युवराज श्रेष्ठ को प्रति व्यक्ति ५० हजार रूपये नकद सहित ‘प्रदेश संस्थागत विकास पत्रकारिता’ पुरस्कार प्रदान किया गया।

अमेरिका ने ईरान के सैन्य तेल कारोबार पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की

अमेरिका ने ईरान के सैन्य तेल कारोबार में शामिल आठ बड़े टैंकरों और 15 से अधिक व्यावसायिक संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान को अपनी सैन्य क्षमता और सशस्त्र बलों को मजबूत बनाने के लिए तेल राजस्व वृद्धि को रोकने का स्पष्ट संदेश दिया है। फरवरी 28 से शुरू हुआ वर्तमान युद्ध विश्व के 20 प्रतिशत तेल और गैस के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद कर चुका है।

15 जून, काठमांडू। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम बढ़ाने तथा हर्मूज जलमार्ग से व्यावसायिक जहाजों के आवागमन को खोलने पर प्रारंभिक सहमति बनी हुई है, इसी बीच अमेरिका ने ईरान के सैन्य तेल कारोबार पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने विश्व बाजार में ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन में लगे आठ बड़े टैंकरों पर पाबंदी लगाई है। प्रतिबंधित जहाजों में मार्शल आइलैंड्स ध्वज वाला ‘फ्लोरा’, कोमोरोस ध्वज वाला कच्चा तेल वाहक ‘ह्वान्कायो’ और पनामा ध्वज वाला ‘इल ग्याप’ शामिल हैं।

अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने जारी बयान में ईरानी सरकार को यह स्पष्ट किया है कि वह अपनी सैन्य शक्ति और सशस्त्र बलों को पुनः सशक्त करने के लिए तेल से होने वाली आय में वृद्धि की अनुमति नहीं देगा। फरवरी 28 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किए गए युद्ध ने विश्व के 20 प्रतिशत तेल और गैस के महत्वपूर्ण जलमार्ग को बंद कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम समझौते को अंतिम मंजूरी देने के लिए बाकी प्रक्रिया का हवाला दिया है।

अमेरिका ने जहाजों के अलावा हांगकांग की ‘वर्थ सिन एनर्जी लिमिटेड’, दुबई की ‘सिम्फनी शिपिंग एंड मैरीटाइम मैनेजमेंट इंक’ तथा हांगकांग की ‘मेहदीयेभ ट्रेडिंग कंपनी’ सहित 15 से अधिक व्यावसायिक संस्थाओं पर भी प्रतिबंध लगाया है। ट्रेजरी विभाग के अनुसार, प्रतिबंधित कई ईरानी संस्थाएं विदेशी स्रोतों से पेट्रोलियम पदार्थ प्राप्त करने के लिए ईरानी सेना के तेल बिक्री नेटवर्क का उपयोग कर रही हैं। उदाहरण के लिए, वर्थ सिन एनर्जी ईरान की सशस्त्र बलों की तेल बिक्री शाखा ‘सेपेहर एनर्जी जहान’ से राष्ट्रीय ईरानी तेल कंपनी के लिए परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद खरीद रही है, जिसे अमेरिकी जांच ने पुष्टि की है।

शान्ति सम्झौताका लागि अझै केही विषय मिल्न बाँकी छ : अमेरिकी उपराष्ट्रपति

शांति समझौते के लिए कुछ मुद्दों पर अभी भी सहमति बाकी: अमेरिकी उपराष्ट्रपति

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए ठोस समझौते पर पहुंचने के लिए अभी भी कुछ प्रमुख विषयों पर सहमति बननी बाकी है, यह बात अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी भान्स ने कही। उपराष्ट्रपति भान्स ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि समझौते पर कब हस्ताक्षर होंगे और यह कब पूरी तरह लागू होगा। प्रस्तावित समझौते के अनुसार, दोनों देशों में युद्धविराम सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है…

गणतंत्र दिवस समारोह स्थल पर सैनिक जवान गिरे, स्वास्थ्य अवस्था सामान्य

समाचार सारांश

  • सैनिकमञ्च टुँडीखेलमें आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में ड्यूटी पर तैनात एक सैनिक जवान अचानक जमीन पर गिरे।
  • गिरे हुए सैनिक जवान को तुरंत साथियों ने सैनिकमञ्च के उपचार स्थल पर पहुंचाया।
  • नेपाली सेना के प्रवक्ता राजाराम बस्नेत ने बताया कि जवान का पैर जाम हो गया था और उनकी स्थिति सामान्य है।

१५ जेठ, काठमांडू। सैनिकमञ्च टुँडीखेल में गणतंत्र दिवस २०८३ का मुख्य समारोह जारी था, इसी दौरान एक सैनिक जवान अचानक गिर पड़े।

ड्यूटी पर तैनात उस सैनिक को इसकी घटना के बाद अन्य सहयोगियों ने उठाया और तुरंत सैनिकमञ्च के उपचार स्थल पर पहुंचाया गया। वह सहयोगियों की मदद से चलते हुए उपचार स्थल तक गए।

नेपाली सेना के प्रवक्ता राजाराम बस्नेत ने बताया कि वह सैनिक जवान एक ही जगह खड़ा था, तभी उसके पैर जाम होने के कारण वह गिर गया। उन्होंने कहा, ‘कभी-कभी शरीर में पानी की कमी के कारण ऐसा होता है, कभी-कभी पैर जाम होने से भी।’ वो जवान पूरी तरह होश में था और खुद ही उपचार स्थल तक चला गया था।

प्रवक्ता बस्नेत ने बताया कि जवान की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य है। हालांकि अभी उस सैनिक जवान की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।

फोटो : चन्द्र बहादुर आले

फोन पकड़े कार चलाने का आरोप, महिला के एक हाथ नहीं होने पर आरोप वापस

संयुक्त राज्य अमेरिका के फ्लोरिडा के पाम बीच में एक महिला को कार चलाते समय दाहिनी हाथ में फोन पकड़ने के आरोप में एक पुलिस अधिकारी ने रोका था। कॅथलीन थॉमस ने अपने दाहिने हाथ के न होने को दिखाया था, इसके बावजूद उन पर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने का केस दर्ज किया गया था। यह घटना फरवरी महीने की है।

लेकिन इस सप्ताह उस पुलिस अधिकारी ने कॅथलीन के खिलाफ दर्ज आरोपों को खारिज करने की प्रक्रिया शुरू की है। पाम बीच काउंटी शेरिफ कार्यालय ने जानकारी देते हुए कहा, “अधिकारी ने देख कर गाड़ी रोक दी थी” लेकिन जांच के बाद और नियम किस प्रकार उल्लंघन हुआ, यह स्पष्ट न होने के कारण मामले को वापस लेने की तैयारी चल रही है।

ईरान और कजाखस्तान खिताब के लिए आमने-सामने, नेपाल और भारत तीसरे स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे

काभा महिला वॉलीबॉल चैंपियनशिप के खिताब के लिए आज कजाखस्तान और ईरान त्रिपुरेश्वर स्थित दशरथ रंगशाला कवरहाल में मुकाबला करेंगे। सेमीफाइनल में कजाखस्तान ने भारत को और ईरान ने नेपाल को समान रूप से ३-० सेट से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। तीसरे स्थान के लिए आज दोपहर १ बजे सेमीफाइनल में हारने वाले नेपाल और भारत के बीच मैच होगा।

काठमाडौं में चल रही काभा महिला वॉलीबॉल चैंपियनशिप का फाइनल मैच त्रिपुरेश्वर स्थित दशरथ रंगशाला कवरहाल में दोपहर साढ़े ४ बजे शुरू होगा। कजाखस्तान ने भारत को २५-२१, २५-१७, २५-१४ के सेट में हराया था जबकि दूसरे सेमीफाइनल में ईरान ने नेपाल को २५-२०, २५-१५, २५-११ के सेट परिणाम से पराजित किया।

पुराना विजेता ईरान और कजाखस्तान ने समूह चरण में भी आमने-सामने मुकाबला किया था। समूह बी के अंतिम मैच में ईरान ने कजाखस्तान को सीधे सेटों में हराया था। फाइनल में भी इसी लय को बनाए रखते हुए ईरान का लक्ष्य चैंपियन बनने का है। कजाखस्तानी खिलाड़ी क्रिस्टिना बेलोवा ने समूह चरण में कमजोरी के कारण ईरान के खिलाफ हार स्वीकार की है।

इसी प्रकार तीसरे स्थान के लिए सेमीफाइनल में हारने वाले नेपाल और भारत के बीच आज दोपहर १ बजे मैच होगा। नेपाल को समूह चरण के पहले मैच में भारत से ३-२ सेट से हार मिली थी। टीम में नए खिलाड़ी शामिल हैं और पहला मैच होने के कारण भारत के खिलाफ कुछ गलतियां हुईं, लेकिन नेपाल अब भारत को हराकर तीसरे स्थान पर कब्जा करने का लक्ष्य रखता है।

ईरान और कजाखस्तान उपाधि के लिए मुकाबला करेंगे, नेपाल और भारत तीसरे स्थान के लिए खेलेंगे

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा पश्चात तैयार।

  • काभा महिला वॉलीबॉल चैंपियनशिप का उपाधि मुकाबला आज कजाखस्तान और ईरान के बीच त्रिपुरेश्वर स्थित दशरथ रंगशाला कवरडहॉल में होगा।
  • सेमीफाइनल में कजाखस्तान ने भारत को तथा ईरान ने नेपाल को समान ३-० सेट से हाराकर फाइनल में जगह बनाई थी।
  • तीसरे स्थान के लिए आज दोपहर 1 बजे सेमीफाइनल में पराजित नेपाल और भारत के बीच मुकाबला होगा।

15 जेठ, काठमांडू। काठमांडू में चल रहे काभा महिला वॉलीबॉल चैंपियनशिप में आज कजाखस्तान और ईरान उपाधि के लिए भिड़ेंगे।

फाइनल मैच त्रिपुरेश्वर के दशरथ रंगशाला कवरडहॉल में दोपहर 4:30 बजे शुरू होगा। सेमीफाइनल में कजाखस्तान ने भारत को तथा ईरान ने मेजबान नेपाल को समान 3-0 सेटों में हराया था।

कजाखस्तान ने भारत को 25-21, 25-17, 25-14 से हराया, जबकि दूसरे सेमीफाइनल में ईरान ने नेपाल को 25-20, 25-15, 25-11 के सेटों में पराजित किया।

पूर्व विजेता ईरान और कजाखस्तान समूह चरण में भी आमने-सामने थे। समूह बी के अंतिम मैच में ईरान ने कजाखस्तान को सीधे सेटों में हराया था।

फाइनल में भी ईरान इसी लय को बनाए रखते हुए चैंपियन बनने का लक्ष्य रखता है। शुरुआत से ही ईरानी खिलाड़ी उपाधि जीतने का उद्देश्य रखे हुए थे।

वहीं, सेमीफाइनल में भारत पर सहज जीत के बाद कजाखस्तान ने भी फाइनल में ईरान से बदला लेने का लक्ष्य बनाया है। कजाखस्तानी खिलाड़ी क्रिस्टिना बेलोवा ने माना कि समूह चरण में अपनी कमजोरियों के कारण वे ईरान से हार गई थीं, लेकिन सेमीफाइनल में बेहतरीन प्रदर्शन कर जीत हासिल की।

उन्होंने बताया कि अब फाइनल में ईरान को हराकर उपाधि जीतने का लक्ष्य है।

इसी तरह तीसरे स्थान के लिए सेमीफाइनल में हार का सामना करने वाले नेपाल और भारत के बीच आज दोपहर 1 बजे मैच होगा। नेपाल ने समूह चरण के पहले मैच में भारत से 3-2 से हार का सामना किया था।

टीम में कई नए खिलाड़ी होने और यह पहला मैच होने के कारण भारत के खिलाफ कुछ गलतियां हुई थीं, लेकिन अब नेपाल भारत को हराकर तीसरा स्थान हासिल करने का लक्ष्य रखता है।