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लेखक: space4knews

बायोगैस प्लांट पुनः संचालन के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर

काठमांडू महानगरपालिका और वैकल्पिक ऊर्जा प्रवर्द्धन केंद्र ने टेकु स्थित बायोगैस प्लांट को पुनः संचालन में लाने के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। कार्यवाहक प्रमुख सुनिता डंगोल ने जैविक कूड़े की स्थायी प्रबंधन और तकनीक के उपयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से यह समझौता होने की जानकारी दी। समझौते के तहत, केंद्र प्लांट का विस्तृत अध्ययन, उपकरण स्थापना और परीक्षण कर महानगरपालिकालाई सौंपेगा। १८ साउन, काठमांडू।

समझौता पत्र पर महानगरपालिकाके प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी सरोज गुरागाईं और केंद्र के कार्यकारी निदेशक नवराज ढकाल ने हस्ताक्षर किए हैं। नगर में उत्पन्न जैविक कूड़े के प्रवंधन को आधुनिक और तकनीक अनुकूल बनाने के मकसद से यह समझौता किया गया है। कार्यवाहक प्रमुख डंगोल ने कहा, “पुनः स्थापना मात्र महत्वपूर्ण नहीं है, इसे स्थायी रूप से चलाकर और सीख को व्यापक रूप देना ही सफलता है।”

केंद्र के कार्यकारी निदेशक नवराज ढकाल ने आवश्यक उपकरण, सामग्री और तकनीकी सेवाओं के माध्यम से प्लांट को संचालन में लाने की बात कही। उन्होंने बताया, “हम इसकी निगरानी और सुपरविजन के बाद महानगरपालिकालाई सौंपेंगे।” यह प्लांट महानगरपालिका की समग्र स्थायी कूड़ा प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत निर्मित है, जो सन् २०१५ से संचालित है।

प्लांट संचालन के दौरान रोजाना तीन मीट्रिक टन जैविक कूड़ा से १४ किलोवाट बिजली, ३०० किलो जैविक खाद तथा १३ हजार पाँच सौ लीटर पानी उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया था। तकनीकी कारणों से संचालन में समस्या आने के बाद परियोजना को पुनः स्थायी रूप से चलाने के लिए यह समझौता किया गया है। महानगरपालिका ने प्लांट के दीर्घकालीन संचालन और रखरखाव के लिए आवश्यक बजट व्यवस्था करने की जानकारी भी दी है।

इस्लिङ्टन कलेज के 29 विद्यार्थी अध्ययन के दौरान विश्वव्यापी कंपनियों के साथ कर रहे काम

इस्लिङ्टन कलेज के 29 छात्र-छात्राएँ नेपाल में रहकर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूके की कंपनियों के साथ व्यावसायिक काम कर रहे हैं। कलेज ने अपने ‘रकिङ द वर्ल्ड फ्रॉम नेपाल’ अभियान के तहत विद्यार्थियों को अध्ययन के दौरान ही अंतरराष्ट्रीय कार्य अनुभव प्रदान करना शुरू किया है। कलेज के अध्यक्ष सुलभ बुढाथोकी के अनुसार, छात्रों को डिग्री पूरी करने या विदेश जाने का इंतजार किये बिना करियर शुरू करने का अवसर दिया गया है।

अध्ययन के दौरान अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ पेशेवर रूप से काम करने का अवसर प्रदान करते हुए इस्लिङ्टन कलेज के 29 विद्यार्थी वर्तमान में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूके की कंपनियों के साथ सीधे साझेदारी में काम कर रहे हैं। कलेज ने इसे अपने ‘रकिङ द वर्ल्ड फ्रॉम नेपाल’ अभियान की व्यावहारिक सफलता माना है। कलेज के अनुसार, ‘रकिङ द वर्ल्ड फ्रॉम नेपाल’ सिर्फ प्रचार का नारा नहीं बल्कि विद्यार्थियों को नेपाल में ही बैठकर विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की शैक्षिक सोच है।

उद्योग के साथ सहयोग को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है, जिसके माध्यम से छात्र अध्ययन के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रशिक्षण प्राप्त कर वैश्विक व्यावसायिक टीम के साथ काम करने का अवसर पा रहे हैं। कलेज द्वारा डिग्री पूरी न होने पर भी विद्यार्थियों को वास्तविक परियोजनाओं में शामिल कर अंतरराष्ट्रीय अनुभव देने का अभ्यास निरंतर जारी है। वर्तमान में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूके की कंपनियों के साथ काम करने वाले 29 छात्र-छात्राएँ इसी सफलता का उदाहरण हैं।

कलेज के अध्यक्ष सुलभ बुढाथोकी ने कहा कि अब विद्यार्थियों को डिग्री पूरी करने या करियर शुरू करने के बीच उलझन में नहीं पड़ना पड़ेगा। उनके अनुसार, छात्र अध्ययन और करियर दोनों को एक साथ आगे बढ़ा रहे हैं। विश्वभर के प्रतिभाओं की खोज, प्रशिक्षण और प्रमाणन सहित उन्हें विशेषज्ञ व्यावसायिक टीमों से जोड़ने वाले पेक्सस टेक सॉफ्टवेयर विकास, डिजाइन, मार्केटिंग, संचालन आदि क्षेत्रों में संगठित सहायता, स्टैंडबाई संसाधन और एसएलए आधारित सेवा प्रदान कर रहा है। कलेज ने इन छात्रों को अपना पहला ‘एआई–नेटिव टैलेंट’ समूह बताया है।

विद्यार्थी न केवल अपनी विषयगत ज्ञान बढ़ा रहे हैं, बल्कि एआई-सक्षम वैश्विक कार्यपरिसर में काम करने के कौशल भी विकसित कर रहे हैं, जैसा कि कलेज ने बताया है। कलेज के साझेदार संस्था ग्लोबल टिम्स एआई के सहयोग से छात्र अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूके की परियोजनाओं में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। कलेज के अनुसार, उचित प्रशिक्षण, उपयुक्त अवसर और उद्योग के साथ सहयोग से यह संदेश गया है कि विद्यार्थियों को डिग्री पूरी करने या विदेश जाने के लिए प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए।

बीमाले आर्थिक समृद्धिको साधनका रूपमा विकास गर्न सुझाव

समाचार सारांश

संपादकीय रूप से समीक्षा किया गया।

  • नेपाल में सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्यमों की सुरक्षा के लिए बीमा प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर एक अध्ययन रिपोर्ट जारी की गई है।
  • यूएनडीपी और नेपाल बीमा प्राधिकरण द्वारा प्रकाशित अध्ययन व्यवसाय की निरंतरता और आर्थिक उत्थान के लिए बीमे को महत्वपूर्ण साधन के रूप में दर्शाता है।
  • पूर्व वित्त मंत्री रमेश्वर खनाल ने एमएसएमई के जोखिम प्रबंधन में निक्षेप एवं ऋण संरक्षण कोष और बीमा प्राधिकरण की भूमिका को और प्रभावशाली बनाने की बात कही है।

18 साउन, काठमाडौँ। संयुक्त राष्ट्र संघीय विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) नेपाल के सहयोग से ‘इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट स्टडीज’ (आईआईडीएस) द्वारा किए गए अध्ययन ने सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्यमों को प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन और अन्य बाधाओं से सुरक्षित रखने के लिए बीमा को विकसित करने का सुझाव दिया है।

अध्ययन में बीमे को केवल वित्तीय उत्पाद नहीं बल्कि व्यवसाय की निरंतरता और आर्थिक उन्नति के महत्वपूर्ण साधन के रूप में विकसित करने पर बल दिया गया है।

यूएनडीपी नेपाल और नेपाल बीमा प्राधिकरण ने सोमवार को ‘रिस्क मैनेजमेंट इन नेपाल्स एमएसएमईज: द इन्श्योरेन्स प्रोटेक्शन गैप’ शीर्षक से अध्ययन रिपोर्ट जारी की।

नेपाल आर्थिक पत्रकार समाज (सेजन) के सहयोग से प्रकाशित यह रिपोर्ट बीमा की पहुंच में मौजूद संरचनात्मक बाधाओं की पहचान करते हुए पहुंच, वहनयोग्यता और उपलब्धता सुधार के लिए विभिन्न नीतिगत सिफारिशें प्रस्तुत करती है।

अध्ययन में नेपाल के सूक्ष्म, छोटे एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) में बीमा पहुंच के विस्तार के लिए नीतिगत और नियामकीय सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है।

यूएनडीपी की इन्श्योरेन्स एंड रिस्क फाइनेंस फैसिलिटी (आईआरएफएफ) के सहयोग से आईआईडीएस द्वारा तैयार इस अध्ययन रिपोर्ट के प्रकाशन समारोह में एमएसएमई क्षेत्र में बीमा पहुंच के विस्तार और वित्तीय उत्पादकता मजबूत करने पर उच्चस्तरीय नीतिगत संवाद भी आयोजित किया गया।

अध्ययन में बताया गया है कि एमएसएमई रोजगार सृजन, स्थानीय जीविकोपार्जन और आर्थिक विकास के प्रमुख स्तंभ हैं, जबकि उनकी जोखिमों के प्रति संवेदनशीलता ज्यादा होने के कारण वे जोखिम में अत्यधिक रहते हैं।

इसलिए, आपदा जोखिम प्रबंधन और व्यवसाय की दीर्घकालीन स्थिरता के लिए बीमा प्रणाली को और प्रभावकारी बनाने की आवश्यकता है, जैसा कि रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है।

नीतिगत संवाद में सरकारी अधिकारी, नीति निर्माता, नियामक निकाय, बीमा उद्योग, वित्तीय संस्थान तथा एमएसएमई क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने नियामकीय सुधार, नए बीमा उत्पादों का विकास, सार्वजनिक-निजी साझेदारी का विस्तार और स्थायी वित्त तथा आपदा जोखिम वित्तीय प्रबंधन के साथ बीमा को जोड़ने पर जोर दिया।

पूर्व अर्थ मंत्री रमेश्वर खनाल ने नेपाल की आर्थिक विकास में एमएसएमई के महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख करते हुए इस क्षेत्र के जोखिम प्रबंधन में निक्षेप और ऋण सुरक्षा कोष तथा नेपाल बीमा प्राधिकरण की भूमिका को और प्रभावशाली बनाने की बात कही।

उन्होंने बीमा प्रीमियम पर उपलब्ध सरकारी सहायता को मजबूत करके एमएसएमई की उन्नति को बढ़ावा देने की भी धारणा व्यक्त की।

यूएनडीपी नेपाल की आवासीय प्रतिनिधि क्योको योकोसुका ने कहा कि एमएसएमई नेपाल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन ये विभिन्न जोखिमों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होने के कारण बीमा संरक्षण के दायरे का विस्तार आवश्यक है ताकि व्यवसाय, रोजगार और संपूर्ण अर्थव्यवस्था का उत्थान सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने समावेशी बीमा प्रणाली विस्तार के लिए सरकार, नेपाल बीमा प्राधिकरण, निजी क्षेत्र और विकास साझेदारों के साथ सहयोग बनाए रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

बीमा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुशीलदेव सुवेदी ने कहा कि अध्ययन की सिफारिशें एमएसएमई के लिए बीमा को स्थायी विकास और उत्थान के रणनीतिक निवेश के रूप में स्थापित करने में सहायक होंगी और भविष्य में नीति एवं नियामकीय सुधार के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेंगी।

सरकार ने सहूलियतपूर्ण ऋण कार्यक्रम में 39 अरब रुपये ब्याज अनुदान प्रदान किया, ऋण बकाया 40 अरब रुपए तक पहुंचा

सरकार ने सहूलियतपूर्ण ऋण कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 39 अरब 27 करोड़ रुपये ब्याज अनुदान के रूप में भुगतान किया है। दुरुपयोग के कारण दो वर्षों से रूका हुआ यह कार्यक्रम संशोधित कार्यप्रणाली के साथ पुनः शुरू किया गया है। नई कार्यप्रणाली के अनुसार ब्याज अनुदान की सीमा पांच प्रतिशत से घटाकर तीन प्रतिशत कर दी गई है।

18 साउन, काठमांडू। सरकार ने सहूलियतपूर्ण ऋण कार्यक्रम के माध्यम से आंतरिक उत्पादन वृद्धि के साथ-साथ स्वरोजगार सृजन, महिलाओं एवं कृषि व्यवसाय के प्रोत्साहन के लिए कुल 39 अरब 27 करोड़ रुपये ब्याज अनुदान प्रदान किए हैं। उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए सरकार विभिन्न शीर्षकों के तहत ब्याज अनुदान उपलब्ध कराती रही है और इसी कार्यक्रम के जरिए यह सुविधा दी जा रही है।

हालांकि, सहूलियतपूर्ण ऋण के दुरुपयोग के कारण पिछले दो वर्षों से यह कार्यक्रम ठप था। पिछली वित्तीय वर्ष की बजट में इसे पुनः परिष्कृत कर चलाने का निर्णय लिया गया था। कंपनियों को ब्याज अनुदान नहीं मिलने के कारण बैंक और वित्तीय संस्थान ऐसे ऋण देना बंद कर चुके थे। अब नई कार्यप्रणाली के साथ यह कार्यक्रम पुनः संचालित है जिसमें ब्याज दर को 5 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत किया गया है।

वित्त मंत्रालय की जानकारी के अनुसार पुराने कार्यप्रणाली में 2087 साल तक ऋण देने का प्रावधान था, लेकिन नेपाल राष्ट्र बैंक ने बैंक और वित्तीय संस्थानों को ऋण प्रवाह का निर्देश नहीं दिया था।

ऋण के दुरुपयोग के बाद सरकार ने ब्याज अनुदान संबंधी कार्यप्रणाली 2082 को संशोधित कर लागू किया। उस समय भी ब्याज अनुदान भुगतान लंबित था। पिछले वित्तीय वर्ष के बजट में इस कार्यक्रम को जारी रखने का उल्लेख था और सरकार ने शांतिपूर्वक नई कार्यप्रणाली लागू कर इसे निरंतरता दी। ब्याज भुगतान न होने के कारण बैंक दो वर्षों से अनौपचारिक रूप से सहूलियतपूर्ण ऋण देना बंद कर चुके हैं और राष्ट्र बैंक ने भी मौन समर्थन करते हुए ऋण स्वीकृति नहीं दी।

बैंक और वित्तीय संस्थानों द्वारा सहूलियतपूर्ण ऋण के नाम पर कुल 1 खरब 40 अरब रुपये ऋण जारी किया जा चुका है। इनमें से लगभग 40 अरब 20 करोड़ रुपये बकाया हैं। सरकार ने अब तक 39 अरब 27 करोड़ रुपये ब्याज अनुदान का भुगतान कर दिया है। नई कार्यप्रणाली के अनुसार ब्याज दर व्यवस्था में बैंक आधार दर पर अतिरिक्त 1.5 प्रतिशत प्रीमियम ले सकेंगे, जो पहले 2 प्रतिशत थी। ऋण अवधि पाँच वर्ष निर्धारित की गई है।

नई कार्यप्रणाली राष्ट्रीय बैंक, बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं तथा ऋणी सभी को जिम्मेदार बनाते हुए कर्तव्य और अधिकार स्पष्ट करती है। कार्यक्रम के तहत कृषि और पशुपालन ऋण 5 करोड़ रुपये तक, महिला उद्यमशीलता ऋण 25 लाख रुपये तक, वैदेशिक रोजगार से लौटे युवाओं के लिए स्वरोजगार ऋण 20 लाख रुपये तक एवं शिक्षित युवा परियोजना ऋण 20 लाख रुपये तक दिए जाने की व्यवस्था है।

इसी प्रकार दलित समुदाय के लिए भगत सर्वजित उद्यम विकास ऋण 20 लाख, स्टार्टअप उद्यम ऋण 25 लाख, उद्योग में बॉयलर प्रतिस्थापन ऋण अधिकतम 50 लाख, प्राकृतिक विपद् प्रभावितों के निजी आवास निर्माण ऋण 5 लाख तक सहूलियतपूर्ण ऋण वर्ग के तहत कार्यप्रणाली में उल्लेखित है।

भारत की नीति से नेपाल में चीनी की तस्करी में तेजी, महीने में डेढ़ गुना से अधिक वृद्धि

समाचार सारांश: भारत द्वारा चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद नेपाल की सीमाओं पर अवैध चीनी तस्करी काफी तेज़ी से बढ़ गई है। सशस्त्र पुलिस ने असार महीने में 10,502 किलो अवैध चीनी बरामद की है, जो जेठ महीने की तुलना में डेढ़ गुना अधिक है। उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता माधव तिमल्सिनाले ने आरोप लगाया कि बिना सीमा शुल्क और सुरक्षा एजेंसियों के मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर चीनी तस्करी संभव नहीं है।

18 साउन, काठमांडू। रसोई में रोज़ाना उपयोग में आने वाली चीनी जितनी मीठी होती है, उससे भी अधिक नेपाल की सीमा नाकों पर हो रही अवैध चीनी की तस्करी सुरक्षा बलों और अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण तथा खतरनाक हो गई है। 11 साउन को झापा अर्जुनधारा नगरपालिका-11 कालीझोड़ा से सशस्त्र प्रहरी बल की गश्ती टीम ने 1 लाख 12 हजार रुपए के बराबर 32 बोरे चीनी बरामद किए थे। सशस्त्र पुलिस की शनिश्चरे बेस से आए दल ने भन्सार छली हुई चीनी पकड़ी थी।

दो हफ्ते पहले 30 असार को भी धनुषा में विशेष सूचना पर सशस्त्र पुलिस ने एक ट्रक को रोका और उसमें से 420 बोरे अवैध चीनी बरामद की। लाखों मूल्य की यह मात्रा दिखाती है कि नेपाल में अब चीनी की तस्करी केवल छोटी झोलियों तक सीमित नहीं, बल्कि ट्रकों के माध्यम से भी हो रही है। ये मामले सार्वजनिक हुए हाल के कुछ उदाहरण हैं।

सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल के जेठ और असार महीने के आंकड़ों से पता चलता है कि रोज़ाना तस्करी होती रही है। पूर्वी इलाम/झापा से लेकर पश्चिमी कंचनपुर तक 1,800 किलोमीटर खुली सीमा अब तस्करों के नियंत्रण में है। और गंभीर बात यह है कि मात्र एक महीने में तस्करी में दोगुनी से अधिक वृद्धि हुई है।

जेठ महीने में सशस्त्र पुलिस ने झापा, मोरंग और कंचनपुर सहित 15 सीमावर्ती जिलों से कुल 4,111 किलो चीनी बरामद की, जिसकी सीमा शुल्क मूल्य 2,84,870 रुपए थी। जेठ में सर्वाधिक धनुषा से 1,390 किलो, मोरंग से 763 किलो और सुनसरी से 340 किलो चीनी मिली।

लेकिन असार महीने की शुरुआत होते ही स्थिति और बिगड़ गई। सशस्त्र प्रहरी बल के उप महानिरीक्षक एवं केन्द्रीय प्रवक्ता नेत्रबहादुर कार्की के अनुसार असार 2083 में 14 जिलों से 10,502 किलो (10.5 टन) अवैध चीनी बरामद की गई, जिसकी सीमा शुल्क मूल्य 7,80,255 रुपए पहुंची। “जेठ के मुकाबले असार महीने में बरामद चीनी की मात्रा डेढ़ गुना अधिक है,” उन्होंने कहा।

असार में तस्करों ने सुनसरी को मुख्य अड्डा बना लिया है। पूरे महीने सुनसरी से ही 5,13,000 रुपए से अधिक मूल्य की 7,276 किलो अवैध चीनी बरामद हुई। इसके अतिरिक्त इलाम से 500 किलो, पश्चिम नवलपरासी से 645 किलो और बांके से 450 किलो चीनी पकड़ी गई, जिससे देश भर में तस्करी का जाल सक्रिय नजर आता है।

नेपाल में चीनी तस्करी अचानक क्यों बढ़ी? भारत सरकार ने 31 वैशाख 2083 को चीनी निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया, जिसके बाद नेपाल में चीनी की तस्करी तेजी से बढ़ी है, ऐसा संबंधित पक्ष बताते हैं। भारत ने आंतरिक बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और आपूर्ति सुविधाजनक बनाने के लिए 30 सितंबर 2026 तक चीनी को ‘निषिद्ध’ श्रेणी में रखा। इसी प्रतिबंध के महीने (जेठ और असार) में नेपाल की सीमाओं पर तस्करी चरम पर पहुंची, यह एक सहज संयोग नहीं है।

भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। इस मौजूदा मौसम में उसने पहले 15 लाख 90 हजार टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी लेकिन अचानक नीति में बदलाव किया। इसके दो प्रमुख कारण थे – मौसम और ईंधन।

पहला, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में गन्ने की फसल बहुत कम हो गई। ‘अल नीनो’ प्रभाव और मानसून की अनिश्चितता के कारण भारत में लगातार दूसरे वर्ष उत्पादन घटी हुई अनुमानित है।

दूसरा कारण है इथेनॉल उत्पादन नीति। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के चलते भारत ने ईंधन आयात पर निर्भरता घटाने के लिए पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण अनिवार्य कर दिया। इथेनॉल गन्ने से ही बनता है। इसका अर्थ यह हुआ कि भारत वर्तमान में गन्ने से चीनी उत्पादन की तुलना में पेट्रोल में मिलाने के लिए इथेनॉल उत्पादन पर अधिक ध्यान दे रहा है।

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए कमजोर होने से खाद्य महंगाई का डर और गिरावट की आशंका में भारत ने चीनी निर्यात पर रोक लगा दी है।

चीनी के दाम प्रति किलो 20 रुपए तक बढ़े: भारत द्वारा चीनी निर्यात प्रतिबंध लगने के बाद व्यापारी खुदरा स्तर पर चीनी के भाव 15 से 20 रुपए तक बढ़ा चुके हैं। फिलहाल बाजारों में चीनी की खुदरा कीमत 115 से 120 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। उद्योगपतियों का दावा है कि फैक्ट्री मूल्य लगभग 85 रुपए प्रति किलो है, जिसमें 13 प्रतिशत वैट और परिवहन लागत जोड़ने पर काठमांडू तक पहुंचने पर भी अधिकतम 105 रुपए प्रति किलो होना चाहिए।

व्यापारी उद्योगी द्वारा मूल्य बढ़ाने का दोष खुद पर डालते हैं, जबकि चीनी उद्योगी एजेंट और खुदरा व्यापारियों को कारण बताते हैं। नेपाल चीनी उत्पादक संघ के अध्यक्ष शशिकांत अग्रवाल ने कहा कि उद्योग से निकलने वाले मूल्यों पर उद्योग का नियंत्रण होता है, लेकिन बाजार में मूल्य वृद्धि पर उद्योग का नियंत्रण नहीं होता। उन्होंने कहा, “हमने फैक्ट्री मूल्य में खास बढ़ोतरी नहीं की है, बाजार या डाउनस्ट्रीम मूल्य नियंत्रण संभव नहीं है। अगर कीमत बढ़ी है तो वह डीलर या एजेंटों का कारण हो सकता है।”

मांग और आपूर्ति के कारण कभी-कभी 1-2 रुपए上下 बहस स्वाभाविक माना जाता है, उन्होंने कहा।

सरकारी एजेंसियों के मिलीभगत से सीमा से चीनी की तस्करी: भारत के निर्यात प्रतिबंध के बाद नेपाल की सीमाओं से बढ़ी अवैध तस्करी में राज्य सुरक्षा एजेंसियों के संलिप्त होने का उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है। माधव तिमल्सिनाले कहा कि सीमा शुल्क और सुरक्षा एजेंसियों के ‘ग्रीन सिग्नल’ के बिना ट्रकों के माध्यम से अवैध चीनी नेपाल में आना असंभव है। उन्होंने कहा कि बिना सरकारी समर्थन के यह मुमकिन नहीं हो सकता।

बाजार में चीनी की अनियमित मूल्य वृद्धि के पीछे सरकारी तंत्र, घरेलू उद्योग और तस्करों का गठजोड़ सक्रिय है। “राज्य सुरक्षा एजेंसियों की बिना समर्थन के इतने बड़े पैमाने पर साइकिल, गाड़ी, और ट्रक से चीनी का कारोबार संभव नहीं,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत द्वारा निर्यात बंद होने के बाद नेपाल के घरेलू उद्योगपतियों ने सीमित कुछ व्यापारियों को चीनी उपलब्ध कराकर बाजार में असामान्य सिन्डिकेट बनाया है। उद्योगपतियों ने सरकार पर दबाव डालकर 40 प्रतिशत सीमा शुल्क लागू करवाया, लेकिन तस्करी से बाज़ार में चीनी की भरमार हो गई और दाम बढ़े। “प्रतिबंध लगते ही हमारे उद्योगपतियों ने सीमित व्यापारियों के जरिए तस्करों को बोर्ड पर लाना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में चीनी के दाम 120 रुपए तक पहुंच गए,” उन्होंने बताया।

बिना क्वारंटाइन पास के सीमा से नॉन-फूड ग्रेड चीनी: तिमल्सिनाले कहा कि रसोई में इस्तेमाल होने वाली तस्करी से आई चीनी कोई खाद्य क्वारंटाइन या प्लांट से पास नहीं होती, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा है। तस्कर फर्जी बिल का इस्तेमाल कर पुलिस और प्रशासन को चकमा देते हैं। एक ही बिल बार-बार उपयोग कर तस्करी हो रही है। “भारतीय बोरे की चीनी नेपाली बोरे में डालकर लाई जाती है,” उन्होंने कहा। राजस्व अनुसन्धान और अर्थ मंत्रालय को इस विषय पर गहन अध्ययन करना चाहिए।

मुंबई एवं पर्व आते ही तस्कर चीनी के गोदाम भरने लगे हैं और महंगे दामों पर बेच कर सरकार को धोखा देने की योजना बना रहे हैं।

चीनी आयात में वृद्धि: चीनी उत्पादक संघ के आंकड़ों के अनुसार नेपाल में चीनी उत्पादन बढ़ रहा है। पिछले साल नेपाल ने 1 लाख 80 हजार टन चीनी का उत्पादन किया। पहले उद्योगपतियों के पास लगभग 80 हजार टन का स्टॉक था। हालांकि घरेलू उत्पादन और स्टॉक बढ़ने का दावा है, फिर भी विदेश से आयात में वृद्धि हुई है।

आर्थिक वर्ष 2081/82 में चीनी आयात पर 30 प्रतिशत सीमा शुल्क था, जिसकी वजह से व्यापारी कम आयात करते थे। लेकिन 15 जेठ 2082 के बजट भाषण में पूर्व अर्थ मंत्री विष्णु पौडेल ने इसे घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया, जिसके बाद आयात बढ़ा।

सीमा शुल्क विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2082/83 में नेपाल में चीनी आयात बहुत बढ़ गया। इस वर्ष कुल 3 अरब 48 करोड़ रुपए मूल्य की 51,485 टन चीनी आयात हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग डबल है।

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि नेपाल में सालाना चीनी की मांग लगभग 3 लाख टन है। सामान्य महीनों में 20 से 25 हजार टन मांग होती है, जबकि दशहरा, तिहार, और छठ जैसे बड़े त्योहारों में मासिक मांग 30 हजार टन से अधिक हो जाती है।

घरेलू चीनी मिलें मात्र लगभग 2 लाख टन वार्षिक उत्पादन करती हैं, जिससे वर्षाना लगभग 1 लाख टन चीनी की कमी रह जाती है। इस कमी को पूरा करने के लिए नेपाल को भारत सहित अन्य देशों से आयात करना पड़ता है।

खाद्य व्यवस्था कंपनी 1,000 टन चीनी आयात करेगी: इस कमी को पूरा करने के लिए सरकारी स्वामित्व वाली खाद्य व्यवस्था एवं व्यापार कंपनी (FMTC) ने भारत से चीनी आयात करने की योजना बनाई है। कंपनी सरकार से सरकार (G2G) प्रक्रिया के तहत भारत से 1,000 टन चीनी लाने की तैयारी कर रही है, जैसा कि सूचना अधिकारी माधव मिश्र ने बताया।

मिश्र के अनुसार यह कोटा भारत सरकार द्वारा नेपाल को प्रदान किया गया है। “हम G2G माध्यम से भारत से 1,000 टन चीनी लाने जा रहे हैं,” उन्होंने कहा। “शुरुआत में 1,000 टन लाने के बाद बाजार की मांग और खपत देख कर और चीनी भी लायी जा सकती है।”

वर्तमान में कंपनी उपभोक्ताओं को प्रति किलो 100 से 105 रुपए के बीच मूल्य में चीनी बेच रही है।

‘दो तिहाई मतों से अपनी मर्जी से संविधान संशोधन करने का अधिकार नहीं है’

समाचार सारांश

OK AI द्वारा निर्मित। सम्पादकीय समीक्षा गरिएको।

  • नेपाली कांग्रेस ने सरकार द्वारा गठित संविधान संशोधन कार्यदल की औचित्य और प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसका रिपोर्ट संशोधन का आधार बनाने से इनकार किया है।
  • कांग्रेस उपसभापति पुष्पा भुसाल ने संविधान की मूल संरचना को अक्षुण्ण रखते हुए 10 वर्षों में सामने आई व्यवहारिक समस्याओं का समाधान संशोधन के माध्यम से करने पर जोर दिया है।
  • कांग्रेस ने संविधान संशोधन के लिए विशेषज्ञ, नागरिक समाज और राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करने वाला निष्पक्ष और साझा संयंत्र बनाने का प्रस्ताव दिया है।

१७ साउन, काठमांडू। राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा गठित संविधान संशोधन सुझाव कार्यदल ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते ही संविधान संशोधन चर्चा शुरू हो गई है। लेकिन मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने सरकार की पहल पर असंतोष जताते हुए कार्यदल के गठन प्रक्रिया, प्रतिनिधित्व एवं अधिकार क्षेत्र पर सवाल खड़े किए हैं और रिपोर्ट को संविधान संशोधन का आधार मानने से इनकार किया है।

कांग्रेस संविधान संशोधन विषय पर व्यापक चर्चा के लिए कार्ययोजना और विषयगत खाका तैयार करने के मकसद से सुझाव संकलन कर रही है। ‘संविधान संशोधन अध्ययन तथा सुझाव समिति’ के माध्यम से यह काम किया जा रहा है।

कांग्रेस उपसभापति पुष्पा भुसाल के संयोजन में गठित समिति देश भर के विभिन्न पक्षों से चर्चा कर सुझाव एकत्रित कर रही है, इसलिए संविधान संशोधन का ड्राफ्ट तैयार नहीं किया गया है।

उपसभापति भुसाल संविधान की आधारभूत संरचना को अक्षुण्ण रखते हुए आवश्यक संशोधन पर सहमत हैं। उनका कहना है कि संसदीय प्रणाली, संघीयता, निर्वाचन प्रणाली, समानुपातिक समावेशिता, और संवैधानिक निकायों के कार्य में आई व्यवहारिक जटिलताओं का समाधान संशोधन से हो सकता है।

संविधान संशोधन को लेकर पार्टी के अंदर हुए विवाद, १५वें महाधिवेशन की तैयारियां, विशेष महाधिवेशन से संशोधित विधान की वैधानिकता पर पुनरावलोकन याचिका और सरकार के कार्यकाल को लेकर कांग्रेस उपसभापति पुष्पा भुसाल से हुई बातचीत के संपादित अंश प्रस्तुत हैं।

सरकार द्वारा गठित संविधान संशोधन सुझाव कार्यदल ने रिपोर्ट सौंपी है जिसमें कई धाराओं के संशोधन की बात कही गई है। कांग्रेस इसका क्या मूल्यांकन करती है?

इसे दो नजरियों से देखना होगा। रास्वपा ने चुनाव में संविधान संशोधन को मुख्य एजेंडा बनाकर १०० बिंदु कार्यक्रम में रखा था। इसी आधार पर सरकार ने कार्यदल गठित किया।

कोई भी पार्टी अपने घोषणापत्र के अनुसार अध्ययन कार्यदल बना सकती है जो पार्टी को सुझाव दे, लेकिन ऐसा कार्यदल राष्ट्रीय संविधान संशोधन की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा सकता।

दूसरी ओर कार्यदल द्वारा उठाए गए विषय निजी एकपक्षीय एजेंडा नहीं हैं। संविधान संशोधन सामाजिक संरचना, राजनीतिक आंदोलन, नागरिक अधिकार एवं शासन व्यवस्था से जुड़ा विषय है। एक दल सरकार द्वारा गठित कार्यदल अंतिम राय नहीं दे सकता, न ही संवैधानिक अधिकार है।

इसलिए कार्यदल की रिपोर्ट रास्वपा या सरकार की अपनी सोच हो सकती है, पर इसे संविधान संशोधन का आधार नहीं माना जा सकता।

क्या दो तिहाई के करीब बहुमत मिलने पर संविधान संशोधन संभव नहीं है?

सरकार पहल कर सकती है लेकिन दो तिहाई बहुमत होने और मनमाने ढंग से संविधान संशोधन करने में अंतर है।

जनता का मत स्थिर सरकार, सुशासन, विकास, समृद्धि और संसद के प्रति जवाबदेही के लिए दिया गया है। मत को आधारभूत संरचना को अपनी मर्जी से बदलने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।

२०७२ को संविधान किसी एक दिन या पार्टी की इच्छा से नहीं बना है। यह २०६२/०६३ के आन्दोलन, शांति प्रक्रिया, अंतरिम संविधान, दो बार संविधान सभा चुनाव और लगभग आठ वर्षों की चर्चा से बना है।

संविधान सभा के दल, नागरिक समाज, विशेषज्ञ, समुदाय और आन्दोलनकारी शक्ति की राय लेकर संविधान बनाया गया है। महिलाओं, दलित, जनजाति, मधेसी, मुस्लिम, थारु आदि अल्पसंख्यक समूहों के अधिकार संविधान में शामिल हैं।

इसलिए नेपाल की सामाजिक संरचना और विविधता का प्रतिबिंब यह संविधान है। संशोधन करते समय यही गंभीरता, सहभागिता और विश्वास जरूरी है।

हम कहते हैं — दस साल के संविधान कार्यान्वयन में सामने आई चुनौतियां, कमियां और समस्याएं पहचान कर ही संशोधन होना चाहिए। संशोधन प्रक्रिया विश्वसनीय होनी चाहिए। सुझाव देने और मसौदा तैयार करने की व्यवस्था निष्पक्ष, तटस्थ और राजनीतिक दबाव से मुक्त होनी चाहिए।

हम पूर्व प्रधान न्यायाधीश के नेतृत्व में संविधान संशोधन मसौदा समिति बनाने का प्रस्ताव देते हैं जिसमें संविधान विशेषज्ञ, राजनीतिक दल, नागरिक समाज और विशेषज्ञ शामिल हों।

संविधान किसी एक दल या सरकार का दस्तावेज नहीं है। इसलिए संशोधन भी एक ही दल तक सीमित नहीं रह सकता।

आधारभूत संविधान संरचना में कौन-कौन से विषय अपरिवर्तनीय हैं?

संविधान की प्रस्तावना में संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य, संसदीय शासन प्रणाली, समानुपातिक समावेशिता, मिश्रित निर्वाचन प्रणाली, संघीयता और तीन स्तरों वाली सरकार की कल्पना की गई है।

ये संविधान के मूल मूल्य और संरचना हैं। संशोधन चर्चा इन सीमाओं के भीतर ही 10 वर्षों के अनुभव में आई समस्याओं के समाधान तक सीमित होनी चाहिए।

प्रणाली खुद गलत नहीं है, लेकिन संचालन में राजनीतिक संस्कृति, नेतृत्व और संस्थागत अभ्यास की समस्याएं आ सकती हैं। इन्हें संशोधन से ठीक किया जा सकता है लेकिन मूल संरचना नष्ट नहीं होनी चाहिए।

कांग्रेस संसदीय प्रणाली, संघीयता और समानुपातिक समावेशिता को कमजोर करने वाले संशोधनों का समर्थन नहीं करती।

सरकार के कार्यदल में कांग्रेस शामिल क्यों नहीं हुई?

हमारी मुख्य असहमति कार्यदल गठन में थी। कार्यदल की संरचना विश्वसनीय और समावेशी नहीं थी। संविधान संशोधन जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषय को केवल एक दल के कार्यक्रम के तहत बनाये गए कार्यदल नहीं चला सकता।

कार्यदल में दलों, नागरिक समाज, विशेषज्ञों और संविधान निर्माण से जुड़े लोगों का प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं था। प्रक्रिया विश्वसनीय नहीं थी इसलिए कांग्रेस ने अपना प्रतिनिधि नहीं भेजा।

कुछ विषय संविधान की मूल संरचना से जुड़े हैं इसलिए उन पर एक दल के कार्यदल को राजनीतिक या नैतिक अधिकार नहीं है।

हमने सरकार से खुले संवाद, साझा संयंत्र बनाने और व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की अपील की है।

कांग्रेस द्वारा गठित संविधान संशोधन अध्ययन एवं सुझाव समिति का उद्देश्य क्या है?

संविधान लागू होने के 10 वर्षों में आई चुनौतियों का अध्ययन करने के लिए पार्टी ने मेरी संयोजन में 18 सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें कानूनी विशेषज्ञ और विषय विशेषज्ञ शामिल हैं।

यह समिति संविधान संशोधन नहीं करती बल्कि अध्ययन करके पार्टी को सुझाव देती है। अंतिम निर्णय पार्टी लेगी।

हम संविधानविदों, राजनीतिक वैज्ञानिकों, नागरिक समाज और युवाओं से विचार-विमर्श कर रहे हैं। अधिकांश का सुझाव है कि संविधान की मूल संरचना के बाहर संशोधन न करें।

संविधान में लिखित अधिकार क्यों लागू नहीं हुए? संसदीय प्रणाली क्यों स्थिर नहीं हुई? तीन स्तरों की सरकार अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं दे पाई? संवैधानिक निकाय प्रभावी क्यों नहीं हुए? इस विषय पर ही संशोधन बहस केंद्रित होनी चाहिए।

समिति ने प्रारंभिक सुझाव पार्टी नेतृत्व को दे दिए हैं। पार्टी अध्यक्ष गगनकुमार थापा ने भी सार्वजनिक रूप से कहा है कि आधारभूत मूल्यों के अंतर्गत संशोधन संभव है।

अब कांग्रेस अन्य राजनीतिक दलों, नागरिक समाज, विशेषज्ञों और प्रदेश स्तर की इकाइयों से संवाद कर साझा दृष्टिकोण बनायेगी।

कांग्रेस द्वारा पहचाने गए संविधान संशोधन के मुख्य क्षेत्र कौन-कौन से हैं?

पहला, संसदीय प्रणाली कायम रखते हुए कार्यान्वयन में आई समस्याओं का समाधान। सरकार गठन प्रक्रिया, विश्वास मत, अविश्वास प्रस्ताव और संसद के कार्यकारी जवाबदेही के विषय पर चर्चा की जा सकती है।

दूसरा, निर्वाचन प्रणाली में सुधार आवश्यक है। सांसदों की संख्या घटाने पर विचार हो रहा है लेकिन समानुपातिक समावेश प्रभाव कम नहीं होना चाहिए।

समानुपातिक सीटें कम भी हों, महिलाओं, दलितों और सीमांतित समुदायों की उम्मीदवार सुनिश्चित करनी होगी। स्थानीय स्तर पर महिलाएँ अक्सर उपप्रमुख पद तक सीमित हैं। प्रमुख, वार्ड अध्यक्ष और निर्णायक पदों में महिलाओं, दलितों और पिछड़े समुदायों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर चर्चा होनी चाहिए।

तीसरा, संघीयता के कार्यान्वयन में आई समस्याओं का समाधान। संघ, प्रदेश और स्थानीय सरकार के अधिकार स्पष्ट नहीं हैं। अधिकार के दोहरेपन से कार्य, बजट और जवाबदेही में समस्याएं हैं।

केंद्र और प्रदेश में समान प्रकृति के मंत्रालयों की पुनः समीक्षा होनी चाहिए। समान विषय के मंत्रालय दोनों स्तरों पर होने से प्रशासनिक व आर्थिक भार बढ़ता है। काम कौन करेगा – संघ, प्रदेश या स्थानीय सरकार, स्पष्ट होना चाहिए।

प्रदेश को सरल, सस्ता और प्रभावी बनाया जा सकता है। प्रदेश और संघ के सांसद व मंत्रिमंडल के आकार पर भी चर्चा हो सकती है।

चौथा, संवैधानिक निकायों को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त करना आवश्यक है। चुनाव आयोग, भ्रष्टाचार निरोधक आयोग, महालेखा परीक्षक आदि निकाय सुशासन के लिए बने हैं। नियुक्ति में राजनीतिक हिस्सेदारी पड़ी तो संस्थान स्वतंत्र नहीं रह सकते।

न्यायाधीशों तथा संवैधानिक पदाधिकाऱियों की नियुक्ति प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप कम करना महत्वपूर्ण होगा।

पाँचवां, राजनीतिक दलों को आंतरिक रूप से लोकतांत्रिक और समावेशी बनाना। नेतृत्व और निर्णयस्थल में महिलाओं के साथ अन्य समुदायों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना आवश्यक है।

सरकार के कार्यदल में स्थानीय सरकार को दलगत आधार से अलग करने का प्रस्ताव आया है। कांग्रेस का इससे क्या मत है?

स्थानीय सरकार ही सरकार है। संविधान ने इसे कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका अधिकार दिए हैं। इतने शक्तिशाली सरकार को दल-मुक्त करना सैद्धांतिक और लोकतांत्रिक संविधान की भावना के खिलाफ है।

राजनीतिक दल लोकतंत्र के आधार हैं। स्थानीय सरकार को दलबिना बनाना वर्तमान संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुकूल नहीं है।

कोई भी विषय लोकप्रिय लग सकता है लेकिन संविधान की मूल भावना के विरोध में प्रस्ताव नहीं आगे बढ़ सकता।

कांग्रेस संसदीय प्रणाली का पक्ष क्यों रखती है, जबकि प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी चर्चा में है?

संसदीय प्रणाली जनता के सबसे निकट शासन प्रणाली है। संसद जनता का प्रतिनिधि है और प्रधानमंत्री संसद से निकलता है, इसलिए प्रधानमंत्री संसद के प्रति जवाबदेह होता है।

जनता आवधिक चुनावों में अपना प्रतिनिधि चुनती है और यदि असंतुष्ट होती है तो अगले चुनाव में बदल भी सकती है। यही लोकतांत्रिक नियंत्रण संसदीय प्रणाली की ताकत है।

नेपाल की भौगोलिक, सामाजिक और राजनीतिक दशा के लिए संसदीय प्रणाली उपयुक्त है। दक्षिण एशियाई संदर्भ और नेपाल की भूराजनीतिक संवेदनशीलता के चलते शक्ति एक व्यक्ति में केंद्रीत करने की बजाय प्रतिनिधि और जवाबदेह प्रणाली जरूरी है।

हमने सुदृढ़ संसदीय प्रणाली अपनाई है। इसमें आ रही कमियां सुधार से ठीक होंगी। अस्थिरता के लिए सिर्फ प्रणाली दोषी नहीं है, प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी व्यवस्था सही विकल्प नहीं।

मिश्रित निर्वाचन प्रणाली में फिलहाल एक दल को दो तिहाई के करीब बहुमत मिला है, जिसका मतलब है कि जनता स्थिर सरकार चाहती है।

कांग्रेस में संविधान संशोधन को लेकर सहमति है?

हम मूल रूप से स्पष्ट हैं कि संविधान की मूल संरचना को बचाते हुए कार्यान्वयन में मिली चुनौतियों का समाधान करने वाले संशोधन स्वीकार्य हैं।

विस्तृत मुद्दों पर पार्टी की केन्द्रीय समिति, प्रदेश संरचना, कार्यकर्ता और महाधिवेशन में विचार-विमर्श होगा। विभिन्न मत होना स्वाभाविक है।

हमारी प्राथमिकता बाहरी विशेषज्ञों, युवाओं, संविधान निर्माण में शामिल शक्तियों और अन्य दलों से बातचीत कर साझा एजेंडा बनाना है, उसके बाद पार्टी में व्यापक चर्चा होगी।

संविधान निर्माण में नेपाली कांग्रेस ने नेतृत्व किया था। सुशील कोइराला के नेतृत्व में संविधान जारी करने का ऐतिहासिक दायित्व हमारी जिम्मेदारी है। संशोधन के समय भी कांग्रेस को सहमति बनाने में नेतृत्व करना होगा।

१५वें महाधिवेशन के करीब आते ही पार्टी में विवाद सामने आ रहे हैं, क्या यह सामान्य मतभेद हैं या गहरी समस्या?

महाधिवेशन विवाद का विषय नहीं, यह पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा का अवसर है।

संविधान और पार्टी विधान के अनुसार निर्धारित समय पर महाधिवेशन होना आवश्यक है, इसलिए १५वें महाधिवेशन की तैयारी चल रही है।

सदस्यता का डिजिटलकरण, नवीनीकरण और युवाओं के लिए सदस्यता खोलने का काम चल रहा है। हम सदस्यों को गांव तक कार्यालय से जोड़ने का वातावरण बना रहे हैं।

महाधिवेशन स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी होना चाहिए। किसी को सदस्यता, प्रतिनिधित्व या प्रतिस्पर्धा से वंचित नहीं किया जाएगा। पार्टी ने किसी को रोका नहीं है।

नेताओं के मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इसे गुटबंदी, फुट या विखंडन में बदलना गलत है। महाधिवेशन को पार्टी मजबूत करने वाला होना चाहिए।

खबरें आ रही हैं कि कांग्रेस टूटने वाला है?

कांग्रेस टूटेगी नहीं। यह पार्टी ऐतिहासिक, लोकतांत्रिक और आंदोलनकारी है। इतिहास, संगठन और मूल्य इसे नहीं तोड़ सकते।

लेकिन नेताओं द्वारा विवाद को अनावश्यक राजनीति बनाना नई पीढ़ी को नकारात्मक संदेश देगा। हम कहते हैं ‘कांग्रेस बदले’, इसका व्यवहार से प्रमाण दे।

अगर नेता विवाद में फंसे तो नेतृत्व परिवर्तन का संदेश नहीं जाएगा। मुझे विश्वास है कि १५वें महाधिवेशन में सभी नेता शामिल होंगे।

असंतुष्ट नेता कहते हैं कि पार्टी नेतृत्व एकता के लिए पहल नहीं कर रहा, क्या इसकी सच्चाई है?

अध्यक्ष व्यक्ति-से-व्यक्ति और समूह-से-समूह बातचीत कर रहे हैं। कहना कि नेतृत्व संवाद नहीं चाहता, गलत है। कार्य वक्त बताएगा।

सदस्यता खुली है, नवीकरण और अपडेट हो रहा है, महाधिवेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

अध्यक्ष का उद्देश्य सभी को सम्मिलित कर १५वें महाधिवेशन को संगठन सुदृढ़ीकरण और एजेंडा बनाने वाला बनाना है।

दो पक्षों के बीच सहमति का आधार क्या हो सकता है?

निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय महाधिवेशन सहमति का मुख्य आधार होगा।

सभी सदस्यों को नवीकरण और अपडेट करना होगा। सभी को महाधिवेशन में भाग लेने का मौका मिले। चुनाव स्वच्छ और निष्पक्ष हो। नेतृत्व महाधिवेशन प्रतिनिधि द्वारा चुना जाए।

महाधिवेशन विषय पर सभी पक्ष सहमत हैं। प्रक्रिया और समय सारिणी चल रही है। ऐसे में विवाद की बजाय महाधिवेशन सफल बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

महाधिवेशन के बाद स्थानीय और प्रदेश चुनाव होंगे। लाखों कार्यकर्ताओं के लिए उम्मीदवार और नेतृत्व का मौका बने। केंद्र के नेताओं को स्वार्थ से ऊपर उठकर संगठन के भविष्य को प्राथमिकता देनी होगी।

निवर्तमान अध्यक्ष शेरबहादुर देउवा और उपाध्यक्ष पूर्णबहादुर खड़का ने विशेष महाधिवेशन की वैधता पर पुनरावलोकन की मांग की है, इस मुद्दे को कैसे देखा जाता है?

सर्वोच्च अदालत ने विशेष महाधिवेशन और नेतृत्व को मान्यता दी है। इसके बाद पार्टी ने इस नेतृत्व के हस्ताक्षर से संसदीय चुनाव लड़ा। नेताओं ने टिकट लेकर चुनाव लड़ा। अदालत के निर्णय के बाद विशेष महाधिवेशन को अवैध कहना अनुचित है।

किसी प्रक्रिया में भाग लेकर परिणाम स्वीकार करना और बाद में उसे अवैध कहना सही नहीं है।

पुनरावलोकन कानूनी अधिकार है पर इससे संवाद के दरवाजे बंद हो सकते हैं, विवाद बढ़ सकते हैं और संगठन कमजोर हो सकता है।

इस मुद्दे का राजनीतिक हथियार बनने से बचना चाहिए। अब सभी नेतृत्व १५वें महाधिवेशन और पार्टी एकता पर केंद्रित हों।

पुराने विवाद दोहराने की बजाय नई पीढ़ी को नेतृत्व में लाना, युवाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना, पार्टी को समावेशी एवं मजबूत बनाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

कांग्रेस मजबूत हो तभी देश की लोकतांत्रिक प्रणाली मजबूत होगी। कांग्रेस की अपेक्षा सभी राजनीतिक दल और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले समुदाय करते हैं।

अंत में, सरकार के कार्यकाल का आपके अनुसार क्या आकलन है?

रास्वपा ने परिवर्तन, सुशासन, समृद्धि और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का नारा लेकर चुनाव लड़ा था। उसे परंपरागत मतदाता ही नहीं, बल्कि अन्य दलों के मतदाता भी उम्मीद के साथ वोट दे रहे हैं।

जनता ने स्थिर सरकार, सुशासन और बदलाव अपेक्षित किया है, जिसका सम्मान होगा। नागरिकों को डरमुक्त माहौल में जीवन और काम करने का अनुभव होना चाहिए। उद्योगपति, व्यापारी, पत्रकार और आम जनता को भयभीत महसूस नहीं होना चाहिए।

मीडिया सरकार और समाज को चौथा अंग मानता है। मीडिया कर्मियों पर दबाव, डराने या आवाज बंद करने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था स्वीकार नहीं करती।

आर्थिक क्षेत्र में विश्वास का वातावरण अभी नहीं बना है। निवेश के लिए सुरक्षा और स्थिरता चाहिए। सरकार को उद्योगों और निवेशकों को उत्साहित करना होगा।

सामाजिक सद्भाव में बाधा डालने वाले घटनाक्रम पर सरकार को गंभीर रहना चाहिए। राजनीतिक दलों ने सहयोग का आश्वासन दिया है। अच्छा कार्य हो तो कांग्रेस समर्थन करेगी, गलत हो तो प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निगरानी करना है।

हम सरकार के पूरे पाँच साल चलने के पक्ष में हैं। स्थिर सरकार जरूरी है लेकिन स्थिरता जवाबदेही से मुक्त होना नहीं।

रासायनिक उर्वरक उपलब्ध होने के बावजूद कृत्रिम अभाव, मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण का अभाव, और जनता में निराशा बढ़ना सरकार के लिए चेतावनी हैं।

सरकार ने कुछ अच्छे काम किए हैं लेकिन जनता की अपेक्षा अनुसार माहौल नहीं बना है, ऐसा मैं नहीं कहूंगी। मतदाता को निराश नहीं होना चाहिए, यही मेरी आकांक्षा है।

जंगे पिलर: राष्ट्रीय एकता का प्रतीक

सीमा पर ऊँचे खड़े, देश के गर्व का परिचय। वीर पूर्वजों की मेहनत से, इतिहास की गाथा उकेरते। चाहे तूफान आएं या आँधियाँ, कभी न झुका सिर। हमारी सार्वभौमिकता का प्रतीक, वह जंगे पिलर।

मेची से महाकाली तक, मिट्टी की खुशबू लिए। नेपाली वीरता की कहानी, विश्व भर में सुनाते। सदियों से सीमा पर, पहरा देते अडिग। सीमा सुरक्षा के अभिन्न साक्षी, हमारी राष्ट्रीयता की शक्ति।

बाढ़ आए या भू-स्खलन, कभी न झुका सिर। हमारी स्वतंत्रता की विरासत, वह जंगे पिलर। पूर्वजों द्वारा सौंपी गई निशानी, वह जंगे पिलर।

समय के प्रवाह में, कुछ पिलर खो गए होंगे। समय के साथ, कुछ पिलर टूटे होंगे। परन्तु हमारे नेपाली दिलों में अभी भी गहरा बसे हैं। हमारी अखंडता की धरोहर, वह जंगे पिलर।

गुल्मी में स्क्रब टाइफस से महिला की मृत्यु

गुल्मी के धुर्कोट गाउँपालिका–४ की ३५ वर्षीय सीता पोख्रेल का स्क्रब टाइफस के कारण जिला अस्पताल तम्घास में उपचार के दौरान निधन हो गया। मृतक के परिजनों ने चिकित्सकों की लापरवाही को मौत का कारण बताया, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने अपनी कमजोरी स्वीकार की है। अस्पताल ने आगामी दिनों में गंभीर मरीजों की निगरानी बढ़ाने और सेवा सुधार हेतु कई निर्णय लिए हैं। १८ साउन, गुल्मी।

गुल्मी में स्क्रब टाइफस से एक महिला की मृत्यु हुई है। धुर्कोट गाउँपालिका–४ की जैसिथोक की लगभग ३५ वर्षीय सीता पोख्रेल का जिला अस्पताल तम्घास में उपचार के दौरान निधन हुआ। पुलिस के अनुसार १४ साउन को पोख्रेल को उपचार के लिए जिला अस्पताल तम्घास लाया गया था। सामान्य उपचार के पश्चात चिकित्सकों की सलाह के अनुसार ७२ घंटों बाद समस्या उत्पन्न होने पर पुनः अस्पताल आने के लिए उसी दिन छुट्टी दे दी गई थी। इसके बाद १८ साउन को पुनः स्वास्थ्य समस्याएं देखी गईं, तब उन्हें फिर से जिला अस्पताल तम्घास लाया गया। अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान सुबह ११ बजे चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित किया, ऐसा डीएसपी वीरेन्द्रवीर विश्वकर्मा ने बताया।

मृत्यु के बाद परिजनों ने चिकित्सकों की लापरवाही का आरोप लगाया। अस्पताल ने मरीज का भर्ती न कर पाने की कमजोरी स्वीकार की है। मरीज की मृत्यु के बाद अस्पताल ने सेवा सुधार के लिए कई निर्णय लिए हैं। अस्पताल में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि भविष्य में गंभीर मरीजों को दोपहर तक निगरानी में रखा जाएगा और आवश्यकतानुसार भर्ती कर उपचार किया जाएगा। साथ ही, ऐसे मामलों की रिपोर्ट बना कर संबंधित निकायों को भेजने का निर्णय भी लिया गया है।

बैठक में अस्पताल के ट्रैफिक व सेवा प्रबंधन को व्यवस्थित बनाने के लिए संबंधित पक्षों के साथ समन्वय और बैठक करने का निर्णय भी लिया गया, अस्पताल प्रशासन ने बताया। सीधे मरीजों के उपचार में लगे चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी और अन्य कर्मचारियों को व्यवहार सुधार और सेवा-उन्मुख प्रशिक्षण प्रदान करने का निर्णय भी लिया गया है। मरीज की मृत्यु के बाद अस्पताल ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सेवा सुधार, प्रबंधन सशक्तीकरण और स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता उन्नयन पर विशेष जोर देने का आश्वासन दिया है।

पश्चिम अस्ट्रेलियामा एक मां डॉल्फिन ने मृत शिशु को कई दिनों तक अपने साथ रखा

पश्चिम अस्ट्रेलिया के बनबरी में कुछ दिन पहले एक मां डॉल्फिन ने अपने मृत शिशु को लंबे समय तक अपने साथ रखा देखा गया है। इस दौरान, उसकी साथी, ‘फ्रैगल’ नामक दूसरी मां डॉल्फिन भी उसके साथ मौजूद थी। डॉल्फिन अपने शिशुओं को छोड़ने से पहले आमतौर पर कई दिनों तक शोक मनाती हैं।

ऑस्ट्रेलिया के पशु कल्याण अनुसंधान संस्थान ने ड्रोन की मदद से इस वीडियो को रिकॉर्ड किया है।

बिहार में प्रशांत किशोर की शानदार जीत से भाजपा का गढ़ हिला

समाचार संकलित एवं संपादित किया गया है। बिहार के बाँकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,246 मतों के अंतर से भारी बहुमत के साथ हराकर शानदार जीत हासिल की है। मध्य प्रदेश के दतिया में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने भाजपा के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से पराजित कर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। गुजरात के मन्जलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा के उम्मीदवार सतेन्द्रभाई पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,630 मतों के बड़े अंतर से हराते हुए अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखी है। 18 साउन, काठमाडौं। भारत के तीन राज्यों बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। सबसे अधिक ध्यान बिहार की बाँकीपुर सीट पर केंद्रित था, जहां जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शानदार जीत दर्ज की है। वहीं, मध्य प्रदेश के दतिया और गुजरात के मन्जलपुर सीटों पर कांग्रेस और भाजपा ने जीत का दावा किया है।

प्रशांत किशोर ने भाजपा का गढ़ तोड़ा राजनीति रणनीतिकार से राजनीतिज्ञ बने प्रशांत किशोर ने अपने पहले चुनाव में बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने बिहार की बाँकीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा के उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,246 मतों के व्यापक अंतर से हराया है। किशोर को कुल 63,946 मत मिले, जबकि निकटतम प्रतिद्वंदी नीरज कुमार को केवल 44,700 मत प्राप्त हुए। बाँकीपुर सीट को लंबे समय से भाजपा का मजबूत किला माना जाता था। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लगातार पाँच बार यहां विधायक निर्वाचित हुए थे, लेकिन हाल ही में राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद यह सीट खाली हो गई थी।

जीत के बाद प्रतिक्रिया में प्रशांत किशोर ने कहा, ‘मैं विधायक बनते ही बाँकीपुर रातों-रात बंगालौर नहीं बन जाएगा, लेकिन आने वाले दो-तीन महीनों में यहां सुधार आप सभी निश्चित रूप से देखेंगे।’ उन्होंने आगे कहा, ‘बाँकीपुर के लोगों ने भाजपा नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दिया है – कृपया बिहार के लिए एक योग्य व्यक्ति को मुख्यमंत्री के पद पर चुने। बिहारी केवल मजदूर बनने के लिए पैदा नहीं हुए हैं।’

मध्य प्रदेश के दतिया में कांग्रेस विजयी मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार भाजपा के उम्मीदवार को हराया है। कांग्रेस के उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों के अंतर से पराजित किया है। इस इलाके में भाजपा ने पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्र का टिकट काट कर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन तिवारी अपने ही पार्टी के प्रभावशाली नेता मिश्र के मतदान केंद्र में भी हार गए। मतदान केंद्र नंबर 121 पर कांग्रेस ने 291 मत हासिल किए जबकि भाजपा केवल 264 मत तक सीमित रही।

गुजरात के मन्जलपुर में भाजपा का दबदबा बरकरार गुजरात के वडोदरा स्थित मन्जलपुर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है। भाजपा के उम्मीदवार सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,630 मतों के बड़े अंतर से हराया है। ये सभी तीन सीटों के लिए मतदान 30 जुलाई को संपन्न हुआ था। प्रशांत किशोर की पार्टी ने पहले चुनाव में ही भाजपा के गढ़ को ध्वस्त कर दिया, जिसके चलते जन सुराज पार्टी के पटना कार्यालय में खुशी का माहौल है। वहीं, वडोदरा में भाजपा कार्यकर्ताओं ने गरबा नृत्य कर जीत का जश्न मनाया है, जबकि भोपाल में कांग्रेस ने भी अपनी जीत की खुशी जताई है।

सांसद परियार ने कहा: सरकार शैक्षिक परामर्श क्षेत्र में नियमन करना चाहती है

रास्वपाका सचेतक प्रकाशचंद्र परियार ने कहा है कि सरकार शैक्षिक परामर्श क्षेत्र को नियंत्रण में नहीं, बल्कि मर्यादित बनाने के लिए नियमन करना चाहती है। उन्होंने शैक्षिक परामर्श व्यवसायियों को मानव तस्करी के एजेंट के रूप में देखने को गलत बताया और स्पष्ट किया कि नई नियमावली उनके कर्तव्यों को और अधिक जिम्मेदार बनाएगी। परियार ने कहा कि विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों के माध्यम से भले ही पैसा देश से बाहर जा रहा हो, लेकिन इसके साथ-साथ ज्ञान, कौशल और रेमिटेंस देश के भीतर आ रहे हैं। उन्होंने व्यवसायियों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्धता जताई। १८ साउन, काठमाडौं।

राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के सचेतक प्रकाशचंद्र परियार ने शैक्षिक परामर्श क्षेत्र को सरकार द्वारा नियंत्रित करने की बजाय नियमन करने की स्पष्ट बात करते हुए सोमवार को काठमाडौं में आयोजित ’शैक्षिक परामर्श, भाषा शिक्षण तथा तयारी कक्षा (सञ्चालन र व्यवस्थापन) नियमावली, २०७३’ के कार्यान्वयन, चुनौतियों और सहयोग की संभावनाओं पर हुई चर्चा में यह बात कही। सचेतक परियार ने परामर्श व्यवसायियों को मानव तस्करी के एजेंट के रूप में दिखाना गलत बताया और कहा कि नई व्यवस्था व्यवसायियों को अधिक जिम्मेदार बनाएगी और उनके राज्य के प्रति योगदान को स्थापित करेगी।

विदेश अध्ययन के लिए जाने वाले छात्रों के माध्यम से बड़ी रकम के देश से बाहर निकलने की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए परियार ने कहा कि इसके सकारात्मक पक्षों को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘सरकार व्यवसायियों को नियंत्रित करने या दुश्मन के रूप में देखने की कोशिश नहीं कर रही है। यह क्षेत्र को नियमन करके मर्यादित बनाने और राज्य की जिम्मेदारी में लाने का प्रयास है। १ खरब ४० अरब रुपये बाहर गए यह केवल एक पक्ष है, लेकिन इसके आधार पर खरबों की रेमिटेंस, ज्ञान, कौशल और उच्च शिक्षा की डिग्री भी देश के भीतर आई है।’ कर वृद्धि के कारण छात्रों के लिए पढ़ाई महंगी हो सकती है इस बहस के बावजूद, उन्हें लगता है कि इससे व्यवसायी और अधिक जिम्मेवार बनेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि व्यवसायियों को जो समस्याएं और शिकायतें हैं, उन्हें सरकार संबोधित करने के लिए प्रतिबद्ध है। आवश्यकतानुसार संविधान संशोधन की बहस चल रही है और कानूनी गलत व्याख्याओं को सुधारते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

पूर्वाधार विकास और गुणवत्ता में इंजीनियर की भूमिका महत्वपूर्ण: मंत्री श्रेष्ठ

ऊर्जा मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ ने कहा कि राष्ट्र के विकास और समृद्धि में ईमानदार तथा जिम्मेदार इंजीनियर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंत्री श्रेष्ठ ने कहा, “प्रत्येक निर्णय, तकनीकी सुझाव और हस्ताक्षर लाखों नागरिकों के जीवन पर सीधे प्रभाव डालते हैं, इसलिए उच्च जिम्मेदारी के साथ काम करना आवश्यक है।” उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रसेवा में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ नई पीढ़ी के इंजीनियरों से नवीन सोच, सकारात्मक ऊर्जा और नैतिक साहस की अपेक्षा की जाती है।

१८ साउन, काठमांडू। ऊर्जा, जलस्रोत और सिंचाई मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ ने कहा कि राष्ट्र की समृद्धि, पूर्वाधार विकास और सार्वजनिक सेवा की गुणवत्ता दक्ष, ईमानदार और जिम्मेदार इंजीनियर की भूमिका पर निर्भर करेगी। जल और ऊर्जा आयोग के सचिवालय जलस्रोत और ऊर्जा अनुसंधान केंद्र द्वारा आज आयोजित नवप्रवेशी इंजीनियरों के संबोधन के दौरान उन्होंने बताया कि सरकारी सेवा में प्रवेश केवल नौकरी की शुरुआत नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के अभियान में समर्पण का ऐतिहासिक अवसर है। मंत्री श्रेष्ठ ने कहा, “प्रत्येक निर्णय, तकनीकी सुझाव और हस्ताक्षर लाखों नागरिकों के जीवन पर सीधे प्रभाव डालते हैं, इसलिए उच्च जिम्मेदारी के साथ काम करना आवश्यक है।”

उन्होंने कहा कि राष्ट्र का विकास, सभ्यता और समृद्धि इतिहास इंजीनियर की रचनात्मकता, अनुसंधान, अनुशासन और अथक परिश्रम से जुड़ा है। सड़क, पुल, विद्युत परियोजना, प्रसारण लाइन, जलाशय, सिंचाई प्रणाली, पेयजल पूर्वाधार, औद्योगिक संरचनाएं तथा आधुनिक शहर निर्माण इंजीनियर की दूरदृष्टि और क्षमता पर निर्भर करता है, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रसेवा में ज्ञान के साथ-साथ चरित्र का भी समान महत्व है, इसलिए सरकारी सेवा में तकनीकी दक्षता से अधिक नैतिक साहस कभी-कभी और भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

नेपाल में उड़ान देरी पर यात्रियों को मुआवजा दिलाने वाली प्रस्तावित कानूनी व्यवस्था क्या है?

विमानस्थल पर खड़े विमान

तस्वीर स्रोत, RSS

सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत नया कानून पारित होने पर अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की तरह आंतरिक उड़ानों में भी यात्रियों को विमान सेवा से मुआवजा मिल सकेगा।

वायु यात्री बीमा राशि बढ़ाने और उड़ान में देरी होने पर क्षतिपूर्ति देने से संबंधित प्रावधानों वाला विधेयक राष्ट्रीय सभा में पंजीकृत किया गया है।

विधेयक के अनुसार, आंतरिक विमान हादसे में यात्री की मृत्यु होने पर विमान सेवा कंपनी को एकमुश्त एक लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग डेढ़ करोड़ नेपाली रूपये) मुआवजा यात्रियों के परिवार को देना होगा। वर्तमान में मुआवजा केवल 20 हजार डॉलर निर्धारित है।

प्रस्तावित क़ानून में विमान दुर्घटना से प्रभावित यात्रियों के अलावा विमान के बाहर खड़े तृतीय पक्षों को भी बीमा में शामिल करना अनिवार्य होगा। हालांकि जहाज के अंदर गुपचुप यात्रा करने वाले यात्रियों को यह बीमा नियम लागू नहीं होगा, यह स्पष्ट किया गया है।

किस स्थिति में दी जाएगी क्षतिपूर्ति?

संसद में पेश किए गए कानून के अनुसार नेपाल में पहली बार विमान सेवा की वजह से उड़ान में देरी या यात्रियों को चोट लगने या सामान को नुकसान होने के मामले में विमान सेवा को क्षतिपूर्ति देनी होगी।

अमेरिकी क्रिकेटर अखिलेश रेड्डी पर आठ साल का प्रतिबंध लगाया गया

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद् (ICC) ने अमेरिकी क्रिकेटर बोडुगुम अखिलेश रेड्डी पर भ्रष्टाचार के आरोप में आठ साल का प्रतिबंध लगाया है। रेड्डी को अबूधाबी टी–10 लीग 2025 में मैच फिक्सिंग और जांच में अवरोध उत्पन्न करने के कारण दोषी ठहराया गया है। यह प्रतिबंध 21 नवंबर 2025 से प्रभावी होगा और इसके बाद वे सभी प्रकार की क्रिकेट गतिविधियों में भाग लेने के पात्र नहीं होंगे। 18 साउन, काठमांडू।

अमेरिकी क्रिकेटर बोडुगुम अखिलेश रेड्डी पर ICC ने आठ वर्ष का प्रतिबंध लगाया है। ICC के एंटी करप्शन यूनिट (ACU) ट्रिब्यूनल ने रेड्डी को ACU से संबंधित आचार संहिता के तीन मामलों में दोषी पाया, जिसके बाद उन पर सभी क्रिकेट गतिविधियों में सक्रिय होने पर रोक लगाई गई है। यह प्रतिबंध 21 नवंबर 2025 से लागू किया जाएगा, जिस दिन से वे अस्थायी रूप से निलंबित भी थे।

रेड्डी पर लगे आरोप संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में आयोजित अबूधाबी टी–10 लीग 2025 से संबंधित हैं। इस टूर्नामेंट के लिए Emirates Cricket Board ने ICC को भ्रष्टाचार विरोधी निकाय (DACO) के रूप में नियुक्त किया था। ट्रिब्यूनल ने रेड्डी को मैच के परिणाम या किसी अन्य पक्ष पर अनुचित प्रभाव डालने का प्रयास करने, एक अन्य प्रतिभागी को मैच फिक्सिंग के लिए उकसाने, तथा जांच के दौरान मोबाइल से संबंधित डेटा और संदेश मिटाकर जांच में बाधा डालने के आरोप में दोषी पाया है।

मेकअप के साथ सनस्क्रीन कैसे लगाएं: त्वचा की सुरक्षा के प्रभावी उपाय

सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • मेकअप के बाद सनस्क्रीन न लगाने से त्वचा पर धूप से तपना, हल्के धब्बे पड़ना और समय से पहले बुढ़ापा आ सकता है।
  • त्वचा विशेषज्ञ मेकअप को खराब किए बिना सनस्क्रीन को दोबारा लगाने के लिए स्प्रे या पाउडर के उपयोग की सलाह देते हैं जो सबसे प्रभावी तरीका है।

अधिकतर महिलाएं सुबह ऑफिस, कॉलेज या अन्य गतिविधियों में जाने से पहले हल्का मेकअप लगाकर अपने चेहरे को और अधिक आकर्षक बनाने का प्रयास करती हैं। लेकिन कई महिलाओं को मेकअप के बाद सनस्क्रीन कैसे लगाए इस बात में संदेह होता है।

कुछ महिलाएं दिन भर सनस्क्रीन को दोबारा नहीं लगातीं क्योंकि उन्हें डर होता है कि मेकअप खराब हो सकता है। इससे त्वचा सूरज की उल्ट्रा वाइलट (UV) किरणों से अपर्याप्त सुरक्षा पा पाती है, जिससे त्वचा जल सकती है, दाग-धब्बे पड़ सकते हैं, उम्र जल्दी बढ़ सकती है और अन्य त्वचा समस्याएं हो सकती हैं।

त्वचा विशेषज्ञों का सुझाव है कि केवल सुबह एक बार सनस्क्रीन लगाना पर्याप्त नहीं होता। जब आप लंबे समय तक सूर्य के प्रकाश में रहते हैं तो हर 2-3 घंटे में पुनः सनस्क्रीन लगाना जरूरी होता है। लेकिन कई लोग यह नहीं जानते कि मेकअप को खराब किए बिना दोबारा सनस्क्रीन कैसे लगाया जाए। सही तरीका अपनाने पर सनस्क्रीन लगाने से मेकअप पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, जिससे सुरक्षा और सौंदर्य दोनों बरकरार रहते हैं।

मेकअप के बाद भी सनस्क्रीन लगाया जा सकता है

पहले कई महिलाएं गर्मी के मौसम में सनस्क्रीन को दोबारा लगाने से डरती थीं कि उनके मेकअप खराब हो जाएंगे। लेकिन यदि उचित प्रकार का सनस्क्रीन चुना जाए और सही तरीके से लगाया जाए तो मेकअप के बाद भी सनस्क्रीन लगाया जा सकता है।

विशेषकर गर्मी, मानसून या लंबे समय तक बाहर रहने पर सनस्क्रीन न लगाने से त्वचा पर टैनिंग, दाग-धब्बे और अन्य त्वचा समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए मेकअप से ज्यादा अपनी त्वचा की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।

सनस्क्रीन स्प्रे: श्रेष्ठ विकल्प

जो लोग बिना मेकअप खराब किए सनस्क्रीन लगाना चाहते हैं, उनके लिए सनस्क्रीन स्प्रे सबसे उपयुक्त होता है। इसे चेहरे से लगभग 15-20 सेंटीमीटर की दूरी पर रखकर समान रूप से छिड़कना चाहिए। इसे कुछ मिनट सूखने देना चाहिए, उसके बाद ही चेहरे को छूना या मास्क लगाना बेहतर होता है।

स्प्रे लगाते समय ध्यान रखें कि यह आंखों में न जाए।

सनस्क्रीन पाउडर: एक और प्रभावी विकल्प

बाजार में उपलब्ध सनस्क्रीन पाउडर भी मेकअप करने वालों के लिए आदर्श रहता है। इसे हल्के ब्रश के साथ चेहरे पर समान रूप से लगाया जा सकता है। यह न सिर्फ सूरज की किरणों से सुरक्षा करता है बल्कि अतिरिक्त तेल और पसीना भी सोखता है, जिससे मेकअप लंबे समय तक ताजा रहता है। खासकर तैलीय त्वचा के लिए यह बेहद लाभकारी है।

सही SPF चुनने की विधि

विशेषज्ञ रोजमर्रा के उपयोग के लिए कम से कम SPF 30 वाला ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाने की सलाह देते हैं। अगर आप लंबे समय तक धूप में रहेंगे तो SPF 50 वाला प्रोडक्ट चुनना चाहिए। UVA और UVB दोनों किरणों से सुरक्षा करने वाला सनस्क्रीन चुनना अनिवार्य है।

मेकअप ज्यादा दिनों तक टिकाए रखने के सुझाव

आप सुबह से ही धूप में ज्यादा समय बिताते हैं और पसीना आता है तो मेकअप पिघल सकता है। ऐसी स्थिति में चेहरे को रगड़ने या ज़ोर से गीले वाइप से पोंछने से बचें क्योंकि इससे मेकअप और सनस्क्रीन दोनों हट सकते हैं। इसके बजाय ब्लोटिंग पेपर या साफ़ टिशू से हल्के दबाव में पसीने को सोखें। जरूरत पड़ने पर सनस्क्रीन स्प्रे या पाउडर दोबारा लगाएं जो मेकअप को ताजा और साफ़ बनाए रखेगा।

सामान्य गलतियाँ जिनसे बचें

– मेकअप के ऊपर अत्यधिक मात्रा में गाढ़ा क्रीम सनस्क्रीन लगाने से बचें, अन्य विकल्पों का उपयोग करें।

– पसीना आने पर बार-बार चेहरे को धोना उचित नहीं।

– एक्सपायर्ड या अवैध सनस्क्रीन उत्पादों का इस्तेमाल न करें।

– केवल सुबह एक बार सनस्क्रीन लगाने के बाद दिन भर सूरज से सुरक्षा मिलने का भ्रम न पालें, दिन में दोबारा लगाना आवश्यक है।

– बादल छाए या अंदर बैठे होने पर सूरज की किरणों से सुरक्षा की अनदेखी न करें क्योंकि UV किरणें खिड़की से भी प्रवेश कर सकती हैं।

त्वचा की सुरक्षा को प्राथमिकता दें

सुंदर मेकअप से ज्यादा स्वस्थ त्वचा महत्वपूर्ण होती है। मेकअप खराब होने के डर से सनस्क्रीन लगाना छोड़ना सही नहीं है। अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार उपयुक्त सनस्क्रीन चुनें, समय-समय पर दोबारा लगाएं जिससे आपकी त्वचा सूरज की हानिकारक किरणों से सुरक्षित रहे और आपका मेकअप लंबे समय तक अच्छा दिखे।

दिन भर बाहरी गतिविधियों में रहने वाली महिलाओं के लिए सनस्क्रीन स्प्रे या पाउडर सबसे आसान और प्रभावी विकल्प माना जाता है।