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लेखक: space4knews

सांसदों के लिए इलेक्ट्रॉनिक हाजिरी प्रक्रिया शुरू

२३ वैशाख, काठमाडौं । अब सांसदों को इलेक्ट्रॉनिक हाजिरी प्रणाली के माध्यम से हाजिरी दर्ज करानी होगी। कल से सांसदों के बॉयोमेट्रिक विवरण संग्रह की प्रक्रिया शुरू हो रही है। संघीय संसद सचिवालय ने बुधवार को सूचना जारी कर सभी सांसदों से इलेक्ट्रॉनिक हाजिरी के लिए अपने बॉयोमेट्रिक विवरण उपलब्ध कराने का आह्वान किया है। विभिन्न संसदीय समितियों ने बॉयोमेट्रिक विवरण संग्रह हेतु समय और स्थान अलग-अलग निर्धारित किए हैं। विवरण संग्रह के दौरान आधिकारिक तस्वीर भी ली जाएगी, इसलिए सांसदों को आधिकारिक पोशाक पहनकर संघीय संसद के लोगो के साथ उपस्थित होने कहा गया है।

अंतरराष्ट्रीय संबंध व पर्यटन समिति के सदस्य तथा विकास, आर्थिक मामले और सुशासन समिति के सदस्य कल सुबह १० बजे से १२ बजे तक सार्वजनिक लेखा समिति के हॉल में उपस्थिति दर्ज कराएं। अर्थ समिति के सदस्य और विधायन प्रबंधन समिति के सदस्य भी कल ही अर्थ समिति के हॉल में उपस्थित रहना आवश्यक है। उद्योग तथा वाणिज्य और श्रम एवं उपभोक्ता हित समिति के सदस्य कल दोपहर २ बजे से ४ बजे तक सार्वजनिक लेखा समिति के हॉल में जाएंगे। कानून, न्याय एवं मानवाधिकार समिति के सदस्य भी कल दोपहर २ बजे से ४ बजे तक अर्थ समिति के हॉल में उपस्थिति दें।

कृषि, सहकारी तथा प्राकृतिक स्रोत समिति के सदस्य और संघीयता सबलीकरण तथा राष्ट्रीय सरोकार समिति के सदस्य परसों शुक्रवार सुबह १० बजे से १२ बजे तक सार्वजनिक लेखा समिति के हॉल में पहुंचेंगे। पूर्वाधार विकास समिति के सदस्य और सार्वजनिक नीति तथा प्रत्यायोजित विधायन समिति के सदस्य भी सुबह १० बजे से १२ बजे तक अर्थ समिति के हॉल में उपस्थित होंगे। महिला एवं सामाजिक मामले समिति के सदस्य परसों दोपहर २ बजे से ४ बजे तक सार्वजनिक लेखा समिति के हॉल में उपस्थित होंगे। राज्य व्यवस्था तथा सुशासन समिति के सदस्य परसों दोपहर २ बजे से ४ बजे तक अर्थ समिति के हॉल में पहुंचेंगे। सार्वजनिक लेखा समिति के सदस्यों का बॉयोमेट्रिक विवरण २८ वैशाख को सुबह १० बजे से १२ बजे तक लेखा समिति के हॉल में एकत्र किया जाएगा। शिक्षा, स्वास्थ्य और सूचना प्रौद्योगिकी समिति के सदस्यों का बॉयोमेट्रिक विवरण भी २८ वैशाख को सुबह १० बजे से १२ बजे तक अर्थ समिति के हॉल में संग्रहित होगा।

देउवा दम्पतीविरुद्ध ‘रेड नोटिस’ प्रक्रियामा इन्टरपोलले माग्यो थप कागजात

देउवा दंपती के खिलाफ ‘रेड नोटिस’ प्रक्रिया में इंटरपोल ने मांगे अतिरिक्त दस्तावेज़

समाचार सारांश

  • इंटरपोल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा और उनकी पत्नी आरजु राणा देउवा के खिलाफ रेड नोटिस जारी करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज़ मांगे हैं।
  • पिछले चैत २४ को काठमांडू जिला अदालत ने देउवा दंपती के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
  • देउवा दंपती १४ फागुन को इलाज के लिए विदेश गए थे और अब तक नेपाल नहीं लौटे हैं।

२३ वैशाख, काठमांडू। पूर्व प्रधानमंत्री एवं नेपाली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष शेरबहादुर देउवा और उनकी पत्नी पूर्व विदेश मंत्री डॉ. आरजु राणा देउवा के खिलाफ रेड नोटिस जारी करने के लिए इंटरपोल ने अतिरिक्त दस्तावेज़ों की मांग की है।

पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक, इंटरपोल ने आवश्यक अतिरिक्त दस्तावेज़ों के विवरण नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (एनसीबी), काठमांडू से मांगे हैं।

“रेड नोटिस की प्रक्रिया जारी है। इंटरपोल ने आवश्यक अतिरिक्त दस्तावेज़ों की मांग की है,” एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया।

पिछले चैत २४ को काठमांडू जिला अदालत ने संपत्ति शुद्धिकरण अनुसंधान विभाग की सूचना के आधार पर देउवा दंपती के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। गिरफ्तारी वारंट जारी होते ही उन्हें नेपाल लाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

रेड नोटिस के लिए एनसीबी काठमांडू ने आधिकारिक तौर पर इंटरपोल को पत्राचार किया था, लेकिन इंटरपोल ने दस्तावेजों के अभाव का हवाला देते हुए रेड नोटिस जारी नहीं किया है।

जब गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ, तब देउवा दंपती विदेश में थे। चुनाव के पूर्व संध्या १४ फागुन को वे इलाज के लिए सिंगापुर गए थे और फिर ७ चैत को हांगकांग पहुंचने की जानकारी मिली है।

पहले भी जनजातीय आंदोलन के बाद इलाज के लिए सिंगापुर गए देउवा दंपती उपचार के बाद लौटे थे।

लेकिन इस बार १४ फागुन को देश छोड़ने के बाद वे अभी तक नेपाल वापस नहीं आए हैं। सूत्रों के अनुसार वे अभी भी हांगकांग में ही हैं।

यदि रेड नोटिस जारी हो जाता है, तो इंटरपोल के १९६ सदस्य देशों में देउवा दंपती की गिरफ्तारी की जा सकती है और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें नेपाल लाया जा सकता है।

गिरफ्तारी वारंट के बाद देउवा ने एक बयान जारी कर खुद को खुली किताब बताया था। उन्होंने संपत्ति संबंधित मामलों को गुमराह करने वाला और झूठा करार दिया था एवं अपनी संपत्ति के विवरण सरकारी एजेंसियों के समक्ष सार्वजनिक पद धारण करते हुए प्रस्तुत करने का उल्लेख किया था।

इलाज के लिए विदेश जाने की बात उन्होंने कही, लेकिन अपनी वर्तमान स्थिति के बारे में कोई विवरण नहीं दिया।

शेरबहादुर देउवा के रिश्तेदार प्रदीप शमशेर जबरा, भूषण राणा, जयवीर देउवा समेत के कारोबार के बारे में भी जांच चल रही है।

पहले भी देउवा की पत्नी आरजु राणा पर नकली भूटानी शरणार्थी मामले में आरोप लगे थे।

शेरबहादुर देउवा ने बुढानीलकण्ठ में अपने परिसर में दो मकान बनाए थे, जहां वे जनजातीय आंदोलन के समय थे। उस दौरान देउवा दंपती पर हमला हुआ और मकान में आगजनी की भी घटना हुई।

पिछले २३ और २४ भदौ को जनजातीय आंदोलन के दौरान देउवा निवास में जलाए गए नोट्स पाए गए थे और एक वीडियो भी सार्वजनिक हुआ था।

संपत्ति शुद्धिकरण अनुसंधान विभाग ने इस विषय पर मुचलका लेकर जांच शुरू कर दी है।

सिंहदरबार में म्याद समाप्त दही बिक्री, ‘हमरै खाजा घर’ को 2 लाख 5 हजार रुपये जुर्माना

वाणिज्य, आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सिंहदरबार के अंदर म्याद समाप्त दही बेचने वाले ‘हमरै खाजा घर’ को 2 लाख 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अनुगमन टीम ने राष्ट्रीय विपद् जोखिम न्यूनीकरण तथा व्यवस्थापन प्राधिकरण के चमेनागृह में म्याद समाप्त दही बिक्री हो रही होने का खुलासा किया है।

23 वैशाख, काठमाडौँ। देश के प्रमुख प्रशासनिक केंद्र सिंहदरबार के भीतर म्याद समाप्त दही बिक्री हो रही है, जो सामने आया है। वाणिज्य, आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने बुधवार को किए गए आकस्मिक बाजार अनुगमन के दौरान उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हुए म्याद समाप्त दही बेचने वाले ‘हमरै खाजा घर’ नामक चमेनागृह को तत्काल 2 लाख 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

अनुगमन के दौरान चमेनागृह में बिक्री के लिए रखे गए दही की उपभोक्ता म्याद समाप्त पाई गई, जिसके कारण विभाग ने तत्काल कार्रवाई शुरू की है। उपभोक्ता संरक्षण ऐन २०७५ की धारा ३८ (ङ) के अनुसार दोष साबित होने पर विभाग ने इसी ऐन की धारा ३९ (१) (ख) के तहत जुर्माना लगाने का निर्णय किया है। विभाग ने खुदरा विक्रेता के अलावा म्याद समाप्त दही उत्पादन करने वाले श्रीकृष्ण डेरी फर्म को भी जांच के दायरे में लाया है।

काठमाडौं विश्वविद्यालयको निमित्त उपकुलपतिमा ऋषिकेश वाग्ले नियुक्त

प्रधानमन्त्री तथा विश्वविद्यालय के कुलपति बालेन शाह ने काठमाडौं विश्वविद्यालय के निमित्त उपकुलपति के रूप में प्राडा ऋषिकेश वाग्ले को जिम्मेदारी सौंपी है। डीनों के अध्यादेश से मुक्त होने के बाद परीक्षा नियंत्रक वाग्ले को उपकुलपति का कार्यभार दिया गया है। 23 वैशाख, काठमाडौं।

अध्यादेश जारी होने के पश्चात उपकुलपति डॉ. अच्युत वाग्ले पदमुक्त हुए, जिसके कारण ऋषिकेश वाग्ले को यह पद सौंपा गया है। प्रधानमन्त्री और कुलपति बालेन शाह ने उन्हें यह जिम्मेदारी दी है। डीनों के भी पदमुक्त होने पर परीक्षा नियंत्रक रहे वाग्ले ने निमित्त उपकुलपति की जिम्मेदारी संभाली है। वाग्ले ने कहा कि उन्हें यह जिम्मेदारी प्राप्त होने की सूचना मिली है। ‘ज़िम्मेदारी मिली है,’ उन्होंने बताया।

उपकुलपति पद पर स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया लंबित होने के कारण कुछ समय के लिए ऋषिकेश वाग्ले को निमित्त जिम्मेदारी दी गई है। इसी दिन विभिन्न विश्वविद्यालयों के उपकुलपतियों के नाम सुझाने हेतु शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल के नेतृत्व में समिति का गठन किया गया है।

पन्जाबलाई हराउँदै हैदराबाद शीर्षस्थानमा – Online Khabar

पंजाब को हराकर हैदराबाद ने टेबल में शीर्ष स्थान हासिल किया

सनराइजर्स हैदराबाद ने आईपीएल 2026 में पंजाब किंग्स को 33 रन से हराकर शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया है। हैदराबाद द्वारा निर्धारित 236 रन के लक्ष्य को पीछा करते हुए पंजाब ने 20 ओवर में 7 विकेट खोकर केवल 202 रन ही बना पाए। हैदराबाद के कप्तान पैट कमिंस और शिवांग कुमार ने 2-2 विकेट लिए, और हैदराबाद 11 मैचों में 14 अंक लेकर शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। 23 वैशाख, काठमांडू।

बुधवार के मैच में लगातार तीसरी हार झेलने के कारण पंजाब दूसरा स्थान पर आ गया है। कूपर कोनॉली ने नाबाद शतक बनाया, लेकिन बाकी बल्लेबाज उनकी मदद नहीं कर सके। कोनॉली ने 59 गेंदों में 7 चौके और 8 छक्के लगाकर 107 रन बनाए। मार्कस स्टोइनिस ने 28 रन और सूर्यांश शेड्गे ने 25 रन जोड़े।

पहले बल्लेबाजी करते हुए हैदराबाद ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 235 रन बनाए। हेनरिक क्लासेन और ईशान किशन ने अर्धशतक पूरा किया। क्लासेन ने 43 गेंदों में 3 चौके और 4 छक्के लगाकर 69 रन बनाए जबकि किशन ने 32 गेंदों में 2 चौके और 4 छक्के लगाकर 55 रन जोड़े। ट्रैविस हेड ने 38 और अभिषेक शर्मा ने 35 रन बनाए। पंजाब के लिए अर्शदीप सिंह, लकी फर्गुसन, युवजेंद्र चहल और विजयकुमार वैशाक ने 1-1 विकेट लिए। इस जीत के साथ हैदराबाद ने 11 मैचों में 14 अंक हासिल करते हुए तालिका में शीर्ष स्थान पाया है जबकि 10 मैचों में 13 अंक के साथ पंजाब दूसरे स्थान पर है।

रासायनिक मल कारखाना खोल्ने कि प्रांगारिकमा जोड दिने ? – Online Khabar

रासायनिक खाद कारखाना खोलने या जैविक खाद को प्राथमिकता देने पर चर्चा

२३ वैशाख, काठमाडौं। संसद में लगातार उठ रहा एक अहम मुद्दा है – किसानों को समय पर और आसानी से खाद प्राप्त नहीं हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए देश में खाद कारखाना खोलने का विषय राजनीतिक एजेंडा पर पिछले चार दशक से बना हुआ है। लेकिन अब तक कोई खाद कारखाना नहीं खुल सका है और किसानों को आसानी से खाद भी नहीं मिल पा रहा है। २१ फागुन को हुए चुनाव के बाद गठित प्रतिनिधि सभा के कृषि, सहकारी तथा प्राकृतिक स्रोत समिति के अध्यक्ष के चुनाव के बाद हुई पहली बैठक में भी यह मुद्दा उठाया गया। सिंहदरबार स्थित समिति कक्ष में बुधवार को हुई बैठक में सांसदों ने रासायनिक खाद कारखाना खोलने या जैविक खाद को प्राथमिकता देने पर चर्चा की।

एमाले सांसद लक्ष्मीप्रसाद पोखरेल के अनुसार २०१५ साल से ही संसद में खाद की कमी का विषय उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘हाल के समय में बजट में भी यह विषय आया है। राजनीतिक प्रतिबद्धता भी है, अब इसे निष्कर्ष तक पहुंचाना होगा। सरकार को नेपाल में ही खाद कारखाना खोलने का निर्णय लेना चाहिए।’ उनके पूर्व वक्ता, राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के सांसद राजीव खत्री ने कहा कि रासायनिक खाद की खरीद के साथ-साथ जैविक खाद के उत्पादन पर भी जोर देना चाहिए। उनके अनुसार यदि जैविक खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता तो किसानों को रासायनिक खाद के लिए रात-दिन जागरूक होने और पुलिस लाठी खाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

रास्वपाकी सांसद समिना मियाँ ने रासायनिक खाद के इस्तेमाल से उत्पादित कृषि उपज के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को बताते हुए सरकार से नागरिकों के स्वास्थ्य को नुकसान न पहुँचाने वाली कृषि उत्पादन नीति लाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘सभी प्रकार की क्रांति हो गई, लेकिन कृषि क्रांति नहीं हुई।’ उन्होंने आगे कहा, ‘जैविक खाद को प्राथमिकता देने से प्राकृतिसम्पन्न खाद मृदा की उर्वरता बनाए रखने में मदद करता है।’ रास्वपाकी सांसद पुनमकुमारी अग्रवाल ने उत्पादन वृद्धि के अलावा मृदा संरक्षण पर भी सरकार का ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

रास्वपाकी अन्य सांसद आशिका तामांग ने तत्काल रासायनिक खाद के वितरण को सुगम बनाने तथा दीर्घकालीन रूप से जैविक खाद को बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने कहा, ‘यह आश्चर्य की बात है कि देश में खाद कारखाना तक नहीं है। जब रासायनिक खाद न हो, तो हर पालिका में जैविक खाद के लिए कोल्ड स्टोरेज होना आवश्यक है।’ उन्होंने खाद वितरण में भेदभाव की भी सरकार को सूचित किया। उन्होंने कहा, ‘वास्तविक किसानों के पास एक बोरा खाद तक नहीं है, जबकि पहुंच रखने वाले व्यक्तियों के पास पाँच बोरा तक है।’

रासायनिक खाद कारखाना खोलने या विकल्प खोजने की बहस के दौरान रास्वपाकी सांसद सुजाता तामांग ने आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में इस विषय पर स्पष्ट नीति आने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा, ‘खाद के विषय में आगामी बजट में क्या किया जा सकता है, इस पर चर्चा करनी चाहिए।’

सालों से जारी बहस में, एमाले सांसद लक्ष्मीप्रसाद पोखरेल ने कहा कि नेपाल में ही रासायनिक खाद कारखाना खोलने का सपना वर्षों से है लेकिन पूर्णता प्राप्त नहीं कर पाया है। कृषि तथा पशुपालन विकास मंत्रालय के अनुसार नेपाल में विं.सं. २००७ से रासायनिक खाद का उपयोग शुरू हुआ।

उससे पहले नेपाल पूरी तरह जैविक कृषि आधारित था। शुरुआत में भारत से अमोनियम सल्फेट लाया जाता था, और बाद में नेशनल ट्रेडिंग लिमिटेड के माध्यम से रूस से रासायनिक खाद का आयात आरंभ हुआ। उस समय रासायनिक खाद की खपत बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम और प्रचार-प्रसार किए गए। खाद के आयात को सुगम बनाने के लिए २०२२ साल में कृषि मंत्रालय के अंतर्गत कृषि सामग्री कंपनी लिमिटेड की स्थापना हुई, जो आज तक सक्रिय है। २०३० साल से नेपाल सरकार रासायनिक खाद पर किसानों को अनुदान दे रही है। वर्तमान में नेपाल में मुख्यत: यूरिया, डीएपी, पोटाश, अमोनियम सल्फेट, सिंगल सुपर फॉस्फेट और अमोनियम फॉस्फेट सल्फेट का आयात हो रहा है।

खाद खपत में वृद्धि के कारण, नेपाल में ही खाद कारखाना खोलने का विषय २०४० साल में सम्भाव्यता अध्ययन के तहत रखा गया था। यह अध्ययन जापान सहयोग नियोग (जाइका) द्वारा किया गया था लेकिन वह केवल अध्ययन तक सीमित रहा। आर्थिक वर्ष २०७३/०७४ में सरकार की नीति एवं कार्यक्रम में यह विषय शामिल किया गया था। तत्कालीन अर्थमंत्री विष्णु पौडेल ने नेपाल में रासायनिक खाद कारखाना खोलने की नीति बनाई थी। इसके बाद और अध्ययन हुए। तत्कालीन कृषि मंत्रालय ने निवेश बोर्ड को कारखाना संबंधी अध्ययन की जिम्मेवारी दी। भारत के डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ कर्नाटक के द्वारा की गई सम्भाव्यता अध्ययन रिपोर्ट में बताया गया कि नेपाल में प्राकृतिक गैस के अलावा अन्य ऊर्जा स्रोतों से तत्काल खाद कारखाना चलाना असम्भव है।

२०८० जेठ में तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ के भारत दौरे के दौरान उच्चस्तरीय बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई। १८ जेठ २०८० को आयोजित संयुक्त पत्रकार सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था, ‘नेपाल में रासायनिक खाद कारखाना खोलने में आवश्यक सहयोग के लिए भारत तैयार है।’ हालांकि, नेपाल में खाद कारखाना खोलने का मुद्दा ठोस रूप से आगे नहीं बढ़ पाया। उस समय राजनीतिक दल इस मुद्दे को लगातार उठा रहे थे।

गत २१ फागुन के चुनाव से पहले रास्वपाले १०० बिंदु वाली प्रतिज्ञापत्र जारी की थी, जिसमें बिंदु संख्या ४३ में खाद कारखाना खोलने का उल्लेख है। इसमें कहा गया है, ‘रासायनिक खाद और कृषि यांत्रिकीकरण में प्राथमिकता के साथ निवेश बढ़ाकर कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि और उत्पादन लागत में कमी करेंगे। कृषि उत्पादन वृद्धि की व्यवस्था नेपाल सरकार करेगी।’ रास्वपा ऊर्जा आधारित बड़े उद्योगों जैसे स्टील, सीमेंट, जड़ी-बूटी प्रसंस्करण, डेटा सर्वर स्टेशन और रासायनिक खाद उद्योग को आकर्षित करने का वादा करती रही है।

इन चुनावी वादों के साथ रास्वपा २१ फागुन के चुनाव में भारी बहुमत लेकर विजयी हुई। रास्वपा के नेतृत्व में शक्तिशाली एकल सरकार बनने के बाद भी संसद की समिति में खाद कारखाने के मुद्दे को पुनः उठाया गया है। इसके बावजूद, सरकार ने इस विषय पर अब तक कोई ठोस जवाब नहीं दिया है।

वित्तीय प्रणाली में अधिक तरलता के कारण धन का मूल्य घटने लगा, जमा राशि बढ़ रही है

समाचार सारांश

समीक्षा के बाद तैयार।

  • वित्तीय प्रणाली में अधिक तरलता के कारण बैंक और वित्तीय संस्थानों में जमा राशि के धन का मूल्य कम हो रहा है।
  • नेपाल राष्ट्र बैंक के अनुसार, फागुन महीने की मुद्रास्फीति 3.62 प्रतिशत और बचत पर अधिकतम ब्याज दर 2.75 प्रतिशत है।
  • बैंक एवं वित्तीय संस्थानों की कुल जमा राशि 79 खरब 45 अरब और कर्ज निवेश 58 खरब 78 अरब तक पहुंच गई है।

23 वैशाख, काठमांडू। बैंक और वित्तीय संस्थानों में जमा की गई राशियों के धन का मूल्य घट रहा है। वित्तीय प्रणाली में बढ़ी अधिक तरलता के कारण ब्याज दरों में कमी आई है, जो पैसे के मूल्य में गिरावट का कारण बनी है।

आमतौर पर पैसे के मूल्य को बनाए रखने के लिए बाजार में मुद्रास्फीति के अनुसार ब्याज दर आवश्यक होती है। नेपाल राष्ट्र बैंक के अनुसार, फागुन महीने की मुद्रास्फीति 3.62 प्रतिशत है जबकि बचत पर अधिकतम ब्याज दर 2.75 प्रतिशत है।

यह केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दर करिडोर की निचली सीमा निर्धारित करने का भी परिणाम है। यदि केंद्रीय बैंक नियंत्रण न करे तो अधिकतर तरलता के कारण ब्याज दर और भी कम स्तर पर जा सकती है।

नेपाल के अर्थशास्त्री डॉ. रमेश पौडेल के अनुसार, बैंक एवं वित्तीय संस्थान जो जमा पर ब्याज देते हैं उसकी तुलना में मुद्रास्फीति अधिक होने के कारण पैसे का मूल्य कम हुआ है।

“मुद्रास्फीति और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव पैसे के मूल्य में प्रभाव डालते हैं,” पौडेल ने कहा, “अर्थव्यवस्था के सिद्धांत के अनुसार बचत पर ब्याज दर कम से कम मुद्रास्फीति के बराबर होनी चाहिए, यदि कम हो तो पैसे का मूल्य कम हो जाता है।”

वित्तीय प्रणाली में पैसे की आपूर्ति बढ़ी है, पर मांग स्थिर रहने के कारण अधिक तरलता पैदा हुई है, पौडेल ने बताया।

अब तक वित्तीय प्रणाली में लगभग 11 खरब रुपए जमा हो चुके हैं। इसे सुधार कर पैसे के मूल्य में वृद्धि करने के लिए निवेश का विस्तार जरूरी है, उनकी सलाह है। साथ ही सरकार को वित्तीय क्षेत्र में मौजूद अधिक तरलता को प्रभावी तरीके से उपयोग करने के उपाय विकसित करने चाहिए।

पूर्व केंद्रीय बैंक के कार्यकारी निदेशक नरबहादुर थापाले ने कहा है कि वित्तीय प्रणाली में जमा में वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन निवेश में कमी नकारात्मक पहलू है।

उन्होंने वित्तीय संसाधनों को पूंजी निर्माण और व्यवसाय विस्तार में निवेश करने पर बल दिया।

“यदि वित्तीय क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग नहीं होता तो यह स्थिति चिंताजनक है,” थापाले ने कहा, “सरकार को नीतिगत उपायों के तहत वित्तीय क्षेत्र की अधिक तरलता परिचालित कर इसे विकास और रोजगार सृजन में लगाना होगा।”

थापाले ने कहा कि सरकार को शासकीय सुधार के समान आर्थिक सुधारों के लिए भी प्रभावी कदम उठाने होंगे।

“सरकार को शासकीय सुधारों के साथ ही अर्थव्यवस्था के लिए ठोस कार्ययोजना बनानी होगी तभी आर्थिक प्रणाली बेहतर होगी। ऐसी स्थिति में वित्तीय संसाधन परिचालित होकर रोजगार का सृजन करेंगे,” उन्होंने कहा।

उनके अनुसार वित्तीय क्षेत्र के संसाधनों को व्यवसाय विस्तार और पूंजी निर्माण में ही निवेशित करना चाहिए।

अधिक तरलता के कारण बचतकर्ताओं को उचित लाभ न मिलना चिंताजनक बात है, थापाले ने कहा। “आज की मुद्रास्फीति दर के मुकाबले पैसे के मूल्य में गिरावट हो रही है और बचत पर मिलने वाला ब्याज भी मुद्रास्फीति को पूरा नहीं कर पा रहा है,” उन्होंने कहा। “अगर अर्थव्यवस्था में गंभीर सुधार और दिशा-निर्देश नहीं आए तो वर्तमान स्थिति में वृद्धि तो होगी लेकिन वास्तविक परिवर्तन नहीं आएगा।”

थापाले ने आगामी वित्तीय वर्ष के बजट से अर्थव्यवस्था में सकारात्मक सुधार की उम्मीद जताई। “यदि बजट में सुधार न किया गया तो आर्थिक स्थिति जटिल हो सकती है,” उन्होंने कहा, “सरकार को न केवल शासकीय सुधार बल्कि आर्थिक सुधार पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा जो अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा।”

नेपाल राष्ट्र बैंक के आंकड़ों के अनुसार बुधवार तक बैंक एवं वित्तीय संस्थानों की कुल जमा राशि 79 खरब 41 अरब रुपए हो गई है, जो देश के कुल घरेलू उत्पाद से 20 प्रतिशत अधिक है।

राष्ट्रीय तथ्यांक कार्यालय के अनुसार चालू वर्ष की जीडीपी 66 खरब रुपए अनुमानित है। अर्थव्यवस्था में अपेक्षित गति नहीं होने, रेमिटेंस और निर्यात में वृद्धि के कारण वित्तीय प्रणाली में जमा बढ़ा है, जिससे पैसों के वास्तविक मूल्य में कमी आई है।

बैंक एवं वित्तीय संस्थानों में जमा राशि से मिलने वाली आमदनी अधिक तरलता के कारण कम हुई प्रतीत होती है। इसी वजह से केंद्रीय बैंक ने दीर्घकालीन ऋणपत्र से लेकर अल्पकालीन स्थाई जमा सुविधा तक का उपयोग कर 10 खरब 9 अरब रुपए को नियंत्रण में रखा है।

वित्तीय क्षेत्र की कुल जमा राशि और कर्ज निवेश के आंकड़े बताते हैं कि कर्ज की मांग नहीं बढ़ पाई है। वर्तमान में बैंक एवं वित्तीय संस्थान औसतन 73.23 प्रतिशत कर्ज जमा अनुपात बनाए हुए हैं।

केंद्रीय बैंक को इस व्यवस्था के प्रबंधन पर वार्षिक रूप से भारी खर्च करना पड़ता है। पिछले वित्तीय वर्ष में तरलता प्रबंधन के लिए 10 अरब रुपए खर्च किए गए थे।

बैंक पुराने कर्ज की डिफ़ॉल्ट दर में वृद्धि होने के बावजूद नए कर्जों में सतर्क हैं, जिसकी वजह से निवेश अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंच पा रहा है। निवेश में सुस्ती के कारण वित्तीय प्रणाली में धन जमा हो रहा है। हालांकि आर्थिक गतिविधि में सुधार न होने पर भी जमा राशि लगातार बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए नकारात्मक संकेत है।

चालू वर्ष के 22 वैशाख तक बैंक और वित्तीय संस्थाओं की कुल जमा राशि 79 खरब 45 अरब रुपए पहुंच गई है, लेकिन कुल कर्ज निवेश केवल 58 खरब 78 अरब रुपए ही है। केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार वाणिज्यिक बैंकों की कुल जमा राशि 71 खरब 65 अरब और विकास बैंक तथा फाइनेंस कंपनियों की 7 खरब 81 अरब रुपए है।

इस आधार पर कर्ज की मांग में कमी स्पष्ट होती है। बैंक और वित्तीय संस्थानों का औसत कर्ज जमा अनुपात 73.23 प्रतिशत है, जिसे 90 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। चालू वर्ष के फागुन तक बैंक एवं वित्तीय संस्थानों से निजी क्षेत्र को प्रवाहित कर्ज में 4.4 प्रतिशत, अर्थात 2 खरब 43 अरब 54 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है।

समस्याग्रस्त सहकारीका प्रमुख ऋणीहरूको नाम सार्वजनिक

समस्याग्रस्त सहकारी व्यवस्थापन समितिले आज १० वटा समस्याग्रस्त सहकारीका प्रमुख ऋणीहरूको नाम सार्वजनिक गरेको छ। समितिले ती ऋणीहरूलाई यथाशीघ्र कार्यालयमा सम्पर्क गरी ऋण चुक्ता गर्न निर्देशन दिएको छ, नभए कानुन बमोजिम असुली प्रक्रिया अघि बढाइने बताइएको छ। समितिले अन्य समस्याग्रस्त सहकारीका प्रमुख ऋणीहरूको नाम क्रमशः सार्वजनिक गर्ने र तिनीहरूलाई ऋण बुझाउन आग्रह गर्ने जनाएको छ। २३ वैशाख, काठमाडौं।

समस्याग्रस्त सहकारी व्यवस्थापन समितिले समस्याग्रस्त सहकारीका प्रमुख ऋणीहरूको नाम सार्वजनिक गर्ने काम थालनी गरेको छ। समितिका अनुसार आज समस्याग्रस्त घोषित १० वटा सहकारीका प्रमुख ऋणीहरूको नाम सार्वजनिक गरिएको छ। अन्य समस्याग्रस्त सहकारीका ठूला ऋणीहरूको नाम क्रमशः सार्वजनिक गरिने समितिको जानकारी छ।

समितिले जारी गरेको सूचनामा सम्बन्धित ऋणीहरूलाई यथाशीघ्र कार्यालयमा सम्पर्क गरी ऋण चुक्ता गर्ने निर्देशन दिइएको छ। नभए कानुन बमोजिम करबाही गरिने स्पष्ट पारिएको छ। साथै आगामी दिनहरूमा अन्य ऋणीहरूको नामावली पनि सार्वजनिक गरिने भएकाले ती ऋणीहरूले पनि छिट्टै कार्यालयमा सम्पर्क गरी ऋण तिर्न आग्रह गरिएको छ।

समितिले आज घेदुङ बहुउद्देश्यीय सहकारी, हाम्रो सगरमाथा बहुउद्देश्यीय सहकारी, तपाई हाम्रो बहुउद्देश्यीय सहकारी, नागरिक कल्याण बहुउद्देश्यीय सहकारी, आइडियल यमुना बहुउद्देश्यीय सहकारी, तुलसी बहुउद्देश्यीय सहकारी, नेपाल वित्तीय सहकारी, ओरियन्टल कोअपरेटीभ सहकारी, गौतम श्री सहकारी र नेपाल सहकारी वित्तीयका प्रमुख ऋणीहरूको नाम सार्वजनिक गरेको छ।

कानुनमन्त्रीसँग नेपालका लागि फ्रान्सकी राजदूतको भेटवार्ता

कानुन मन्त्रीसँग नेपालका लागि फ्रान्सकी राजदूत भिर्जिनि कोर्टेबलको भेट

२३ वैशाख, काठमाडौं । कानुन, न्याय तथा संसदीय मामिलामन्त्री सोबिता गौतमले नेपालका लागि फ्रान्सकी राजदूत भिर्जिनि कोर्टेबलसँग भेटवार्ता गरेकी छिन्। कानुन मन्त्री गौतमलाई भेट्न राजदूत कोर्टेबल बुधबार दिउँसो मन्त्रालय पुगेकी थिइन्। सो क्रममा राजदूत कोर्टेबलले मन्त्री गौतमलाई बधाइ तथा शुभकामना व्यहोरिन्। साथै, मन्त्रालयसँग सहकार्य गर्न सकिने विभिन्न विषयमा पनि व्यापक छलफल भएको मन्त्री गौतमले जनाइन्।

अब इन लाखों स्मार्टफोनों में WhatsApp काम नहीं करेगा

WhatsApp ने घोषणा की है कि 8 सितंबर 2026 से Android 6.0 या उससे पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम वाले स्मार्टफोन पर इसका सपोर्ट बंद कर दिया जाएगा। पुराने Android संस्करण वाले फोन पर WhatsApp नए फीचर और सुरक्षा अपडेट प्रदान नहीं करेगा, जिसके कारण कंपनी को यह कदम उठाना पड़ा है। इस साल लाखों स्मार्टफोनों में WhatsApp उपलब्ध नहीं रहेगा।

साल 2026 में Meta द्वारा WhatsApp को सिस्टम अपडेट मिलने के बाद से पुराने मॉडल के लाखों Android स्मार्टफोन पर WhatsApp काम नहीं करेगा। आगामी 8 सितंबर से Android 6.0 से पुराना ऑपरेटिंग सिस्टम होने वाले स्मार्टफोन में WhatsApp सपोर्ट नहीं करेगा। Android 5.0 या 5.1 वाले फोन पर WhatsApp पूरी तरह से बंद हो जाएगा।

WhatsApp लगातार पुराने डिवाइस का सपोर्ट हटाता रहा है ताकि उपयोगकर्ता नए फीचर और बेहतर सुरक्षा के साथ सेवा का उपयोग कर सकें। पुराने मॉडल आमतौर पर नए अपडेट का समर्थन नहीं करते और सुरक्षा की दृष्टि से जोखिम भी ज्यादा होता है। खासकर विकासशील और तीसरी दुनिया के कई देशों के उपयोगकर्ता अभी भी 8 से 10 साल पुराने स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं।

Samsung Galaxy S4, Nexus 4, LG G2 जैसे मॉडल्स का पहले ही सपोर्ट बंद हो चुका है। आगामी सितंबर से सपोर्ट बंद होने वाले फोन के उपयोगकर्ताओं को WhatsApp नोटिफिकेशन भेजना शुरू कर चुका है। यदि आपका फोन Android 6.0 से पुराना है, तो आपको जल्द ही WhatsApp से नोटिफिकेशन मिल सकता है। इस स्थिति में आपके पास दो विकल्प हैं: पहला, यदि आपका फोन Android अपडेट का विकल्प देता है तो नवीनतम संस्करण में अपडेट करें। यदि अपडेट संभव नहीं है तो नया फोन खरीदकर WhatsApp का उपयोग करना होगा।

रास्वपा सांसद खनाल ने किसानों के लिए कृषि एम्बुलेंस की आवश्यकता पर जोर दिया

रास्वपा सांसद केपी खनाल ने कृषि एम्बुलेंस शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है, जो किसानों की उपज को समय पर बाजार तक पहुँचाने में मदद करेगा। उन्होंने कृषि एम्बुलेंस को कृषि क्षेत्र के आईसीयू में जरूरी ऑक्सीजन के रूप में व्याख्यायित करते हुए आगामी आर्थिक वर्ष में इसकी शुरूआत की जरूरत सामने रखी।

सांसद खनाल ने बुधवार को सिंहदरबार में आयोजित कृषि समिति की बैठक में कहा, “जैसे किसी मानव के बीमार होने पर एम्बुलेंस आती है, उसी तरह किसान के खेत की उपज भी जब बीमार हो, तब एम्बुलेंस आनी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “देश में करोड़ों के वाहन तो हैं, लेकिन देश को पालने वाले किसानों को पांच से सात लाख रुपये की कृषि एम्बुलेंस देने में असमर्थ रहना, तो कृषि के मुख्य मुद्दों में क्या उपलब्धि होगी?”

उन्होंने मिट्टी की जाँच के महत्व को भी रेखांकित किया और किसानों द्वारा सड़क पर अपने उत्पाद फेंकने से उपभोक्ताओं को महंगा माल खरीदना पड़ने की स्थिति को समाप्त करने की बात कही। खनाल ने कहा, “यह व्यवस्था दलालों के सेटिंग को तोड़ने और किसानों की मेहनत को नकद में बदलने के लिए कृषि एम्बुलेंस बेहद जरूरी है।” उन्होंने नेपाल में उत्पादित फल और सब्जियों के लगभग 20 से 35 प्रतिशत हिस्से का सही परिवहन और भंडारण की कमी के कारण बाजार तक पहुँचने से पहले नष्ट हो जाने के विषय पर भी ध्यानाकर्षण कराया।

आर्सनल 20 वर्षों बाद चैंपियंस लीग के फाइनल में प्रवेश करता है

इंग्लिश फुटबॉल क्लब आर्सनल ने 20 वर्षों बाद यूरोपीय चैंपियंस लीग के फाइनल में स्थान बनाया है। सेमीफाइनल के दूसरे लेग में आर्सनल ने एट्लेटिको मैड्रिड को 1-0 से हराते हुए समग्र स्कोर 2-1 से बनाए रखा। फाइनल मुकाबला 30 मई को हंगरी के पुश्काश एरिना में बायरन म्यूनिख और पेरिस सेंट-जर्मेन (पीएसजी) के विजेता के साथ खेला जाएगा। 23 वैशाख, काठमाडौँ।

गुजरात रात को खेले गए सेमीफाइनल के दूसरे लेग में स्पेनिश क्लब एट्लेटिको मैड्रिड को 1-0 से हराकर लंदन की आर्सनल फाइनल में पहुंची। पहले लेग का मुकाबला 1-1 से समाप्त हुआ था। घरेलू मैदान एमिरेट्स स्टेडियम में आर्सनल के बुकेयो साका ने खेल के 45वें मिनट में लियांद्रो ट्रोसार्ड के पास से निर्णायक गोल किया और टीम को आगे बढ़ाया।

एट्लेटिको को भी गोल करने के मौके मिले, लेकिन वे उनका सदुपयोग नहीं कर पाए। अब आर्सनल फाइनल में बायरन म्यूनिख और पीएसजी के बीच विजेता टीम से मुकाबला करेगा। पहले लेग में पीएसजी ने बायरन म्यूनिख को 5-4 से हराया था। आर्सनल ने पिछली बार 2005-06 के सत्र में चैंपियंस लीग का फाइनल खेला था, जहां वे बार्सिलोना से 2-1 पराजित होकर उपविजेता बने थे। यह उनकी दूसरी बार है फाइनल में पहुंचना, और आर्सनल पहली बार चैंपियंस लीग का खिताब जीतने का लक्ष्य रखता है।

प्रधानन्यायाधीशको सिफारिसमा परम्परा जोगिएला कि तोडिएला ?

प्रधानन्यायाधीश नियुक्ति में परंपरा कायम रहेगी या टूटेगी?

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने गुरुवार अपराह्न संवैधानिक परिषद की बैठक बुलाकर प्रधानन्यायाधीश नियुक्ति की सिफारिश करने की तैयारी की है। संवैधानिक परिषद के नए अध्यादेश ने तीन सदस्यों की सर्वसम्मति से निर्णय लेने का प्रावधान किया है, जिससे वरिष्ठतम न्यायाधीश की सिफारिश न करने की आशंका बढ़ गई है। प्रधानन्यायाधीश नियुक्ति में परंपरा टूटकर वरिष्ठतम न्यायाधीश के अलावा अन्य न्यायाधीश को नियुक्त करने की संभावना ने न्यायिक क्षेत्र में असमंजस और चिंता बढ़ा दी है। 23 वैशाख, काठमाडौं।

प्रधानमंत्री और संवैधानिक परिषद के अध्यक्ष बालेन शाह ने गुरुवार अपराह्न संवैधानिक परिषद की बैठक बुलाई है। संवैधानिक परिषद के सचिवालय ने बुधवार को ‘प्रधानन्यायाधीश नियुक्ति की सिफारिश’ एजेंडा के साथ सदस्यों को पत्र भेजा है। प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय द्वारा जारी विवरण के अनुसार, सभामुख डोलप्रसाद अर्याल, राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष नारायणप्रसाद दाहाल, कानून मंत्री सोबिता गौतम, प्रतिनिधि सभा के विपक्षी दल के नेता भीष्मराज आङ्देम्बे और उपसभामुख रुवी कुमारी को बैठक के लिए पत्र भेजा गया है।

नेपाल के संविधान की धारा 129(3) के अनुसार, “सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद पर न्यूनतम तीन वर्षों का कार्य अनुभव रखने वाला व्यक्ति प्रधान न्यायाधीश नियुक्ति के योग्य होगा।” परन्तु इस बार राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी और प्रधानमंत्री बालेन शाह इस प्रथा को तोड़ते हुए अन्य न्यायाधीश को प्रधानन्यायाधीश नियुक्त करने की आशंका के चलते चर्चा में हैं। इसी बीच सर्वोच्च न्यायालय के कई वरिष्ठ न्यायाधीश चिंतित और अनिश्चितता में हैं।

सर्वोच्च न्यायालय तथा प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस बार की प्रधानन्यायाधीश नियुक्ति में पिछली न्यायिक परंपरा टूटने की आशंका के कुछ कारण हैं। पहला, राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने “इस बार न्यायपालिका के नेतृत्व चयन प्रक्रिया में पिछले निर्णय को तोड़ा जा सकता है” बयान दिया है। प्रधानमंत्री से जुड़े टीम द्वारा मौजूद अन्य कुछ न्यायाधीशों पर ध्यान दिए जाने ने उनकी इस आशंका को और मजबूत किया है।

सप्तरी में तोड़फोड़ के आरोपियों को 35 हजार रुपये जमानत पर रिहा किया गया

२३ वैशाख, सप्तरी। जेनजी आंदोलन के दौरान सार्वजनिक सम्पत्ति को तोड़फोड़ करने के आरोप में राजकिशोर यादव को सप्तरी जिला अदालत ने ३५ हजार रुपये जमानत पर रिहा करने का निर्णय लिया है। जिला न्यायाधीश शम्भु गौतम की अदालत ने यादव को जमानत देने का आदेश दिया है।

यादव पर बोदेबर्साइन नगरपालिका कार्यालय और क्षेत्र प्रशासन कार्यालय के पास सरोज रानीसिंह यादव के घर में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया गया है। बोदेबर्साइन के मेयर आतेशकुमार सिंह और सरोज रानीसिंह यादव ने यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। इस शिकायत के आधार पर यादव सहित ११ लोगों के खिलाफ फागुन १४ को आपराधिक उपद्रव का मुकदमा दायर किया गया था। यादव बुधवार को अपने मामले में सप्तरी जिला अदालत में पेश हुए थे। इससे पहले इसी मामले में नामजारी अन्य आरोपी राजुकुमार यादव, रमेशकुमार साह और सुरेन्द्रप्रसाद साह भी जमानत पर रिहा हो चुके हैं।

भारत-चीन के समझौते को नेपाल के लिए स्वीकार्य नहीं मानते गणेश पराजुली

समाचार सारांश

समीक्षा किया गया समाचार।

  • रास्वपा संसदीय दल के उपनेता गणेश पराजुली ने लिपुलेक क्षेत्र में दो पड़ोसी देशों के बीच हुए व्यापारिक समझौते को नेपाल के लिए मान्य न ठहराया है।
  • पराजुली ने कहा कि सरकार सीमा विवाद को गंभीरता से ले रही है और कूटनीतिक नोट भेज चुकी है।
  • सरकार ने संवाद के माध्यम से समस्या समाधान का संकल्प जताया है और आवश्यक पहल शुरू की है।

२३ वैशाख, काठमांडू। रास्वपा संसदीय दल के उपनेता गणेश पराजुली ने लिपुलेक क्षेत्र में दो पड़ोसी देशों द्वारा किए गए व्यापारिक समझौते को नेपाल के लिए स्वीकार्य नहीं बताया है।

बुधवार को संसदीय दल की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में पराजुली ने यह बात कही।

उन्होंने कहा कि सरकार सीमा विवाद को गंभीरता से ले रही है और इस मामले में कूटनीतिक नोट भेजा जा चुका है।

पराजुली ने उन दोनों पड़ोसी देशों द्वारा बिना नेपाल को जानकारी दिए लिपुलेक से संबंधित द्विपक्षीय समझौते पर आपत्ति जताई।

उन्होंने कहा कि सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मामलों को उत्तेजना के बजाय कूटनीतिक और राजनीतिक संवाद के माध्यम से ही सुलझाया जाना चाहिए।

उनके अनुसार सरकार इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक तैयारी कर रही है और संवाद के जरिए समस्या का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए पराजुली ने कहा, ‘हमारी जानकारी के बिना दोनों पड़ोसी देशों द्वारा किया गया व्यापारिक समझौता स्वीकार्य नहीं है। सरकार ने सीमा विवाद को संवाद के जरिए सुलझाने की स्पष्ट इच्छा के साथ कूटनीतिक नोट भेजा है।’

उन्होंने इस विषय पर अधिक टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं बताई क्योंकि सरकार ने आवश्यक पहलें शुरू कर दी हैं।