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लेखक: space4knews

जलवायु परिवर्तन बुझ्ने नयाँ प्रयोग  – Online Khabar

जलवायु परिवर्तन को समझने के लिए नई तकनीक ‘गोफ्लो’

समाचार सारांश

समीक्षा किया गया ।

  • वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर समुद्री सतह के प्रवाह को अब तक के सबसे व्यापक रूप में ट्रैक करने वाली ‘गोफ्लो’ तकनीक विकसित की है।
  • ‘गोफ्लो’ तकनीक मौसमी उपग्रहों की छवियों को उच्च गुणवत्ता वाले समुद्री प्रवाह मानचित्र में बदलती है और हर घंटे ताजा मानचित्र उपलब्ध कराती है।
  • यह तकनीक मौसम पूर्वानुमान, तेल रिसाव ट्रैकिंग और समुद्री कचरा प्रबंधन में सहयोग करेगी, ऐसा माना जा रहा है।

9 वैशाख, काठमाडौँ। वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करते हुए समुद्री सतह के प्रवाह को अब तक के सबसे विस्तृत तरीके से ट्रैक करने वाली नई तकनीक विकसित की है।

‘गोफ्लो’ नामक इस तकनीक से अंतरिक्ष में मौजूद मौसमी उपग्रहों की तस्वीरों को उच्च गुणवत्ता वाले समुद्री प्रवाह मानचित्र में बदला जाएगा।

‘नेचर जियोसाइंस’ जर्नल में प्रकाशित इस खोज ने पृथ्वी के जलवायु और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को समझने के नए रास्ते खोल दिए हैं।

स्क्रिप्स इंस्टीट्यूशन ऑफ ओशेनोग्राफी के वैज्ञानिक लुक लेटन और उनकी टीम ने इस तकनीक को विकसित किया है, जो ‘डीप लर्निंग’ का उपयोग कर उपग्रह द्वारा ली गई थर्मल छवियों में तापमान पैटर्न के बदलाव का विश्लेषण करती है और पानी के प्रवाह की गति और दिशा को पहचानती है।

पहले ऐसे छोटे और तेज़ लहरों का प्रत्यक्ष अवलोकन असंभव समझा जाता था।

यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?

समुद्री लहरें विश्व भर में तापमान संतुलित करने, वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को गहरे समुद्र तक पहुंचाने और समुद्री जीवों के लिए पोषक तत्वों के प्रवाह में अहम भूमिका निभाती हैं।

पहले के उपग्रह हर दस दिन में एक बार ही एक स्थान का अवलोकन करते थे, जिससे कुछ घंटों में बनने और खत्म होने वाली लहरों को रिकॉर्ड करना संभव नहीं था। लेकिन ‘गोफ्लो’ हर घंटे ताजा मानचित्र उपलब्ध कराता है, जो समुद्र में होने वाली ‘वर्टिकल मिक्सिंग’ जैसी जटिल प्रक्रियाओं को समझना आसान बनाता है।

पुराने उपग्रहों से नई क्षमताएं

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए कोई नया अंतरिक्ष उपकरण भेजने की आवश्यकता नहीं है।

2023 से उत्तर अटलांटिक क्षेत्र में चलाए गए परीक्षणों ने इस तकनीक को जहाजों से किए गए माप के बराबर सटीक साबित किया है। वैज्ञानिकों ने इसे खासतौर पर ‘गल्फ स्ट्रीम’ जैसी जटिल धाराओं के अध्ययन के लिए इस्तेमाल किया है।

बादल छाने पर तस्वीरें लेने में समस्या होती है, लेकिन वैज्ञानिक अन्य उपग्रहों के डेटा को मिलाकर इसे वैश्विक स्तर पर लागू करने की योजना बना रहे हैं।

यह तकनीक भविष्य में मौसम पूर्वानुमान, तेल रिसाव ट्रेकिंग और समुद्री कचरे के प्रबंधन में महत्वपूर्ण मदद करेगी। साथ ही यह दशक पुरानी सिद्धांतों को वास्तविक आंकड़ों के आधार पर परखने का अवसर प्रदान करती है कि समुद्र कैसे ताप और कार्बन सोखता है।

‘नकली सदस्यता वाली केन्द्रीय समिति अब आंदोलन का नेतृत्व नहीं कर सकती’

नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना को ७६ वर्ष पूरे हो गए हैं और सभी कम्युनिस्ट धाराएं ७७वें स्थापना दिवस का उत्सव मना रही हैं। नेकपा एमाले के नेता सुरेन्द्र पांडे ने पार्टी के अंदर नौकरशाहीकरण और आंतरिक लोकतंत्र की कमी को वामपंथी पार्टियों की पराजय का मुख्य कारण बताया है। पांडे ने कहा कि पार्टी में सुधार नहीं, बल्कि विचारधारा, संगठन और सक्रियता में मौलिक परिवर्तन आवश्यक है और युवा नेतृत्व को आगे लाना होगा। नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी स्थापना को आज ७६ वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस अवसर पर अधिकांश कम्युनिस्ट घटक ७७वां स्थापना दिवस मनाकर शुभकामनाएँ व्यक्त कर रहे हैं। लेकिन स्थापना दिवस के आयोजन की पृष्ठभूमि उनके लिए काफी दुखदाई है। गत २१ फागुन को हुए चुनाव में वामपंथी पार्टियों को शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा है। २० वर्षों के बाद देश में वामपंथी रहित सरकार बनी है। इसी संदर्भ में नेकपा एमाले के नेता एवं पूर्वअर्थमंत्री सुरेन्द्र पांडे से संवाद किया गया है।

पांडे ने कहा, “क्या आपने सोचा था कि कम्युनिस्ट पार्टी इस स्थिति तक पहुंचेगी? मुझे ऐसा हो सकता है ऐसा लगता था। हमारे आंदोलन और पार्टी के भीतर की प्रवृत्तियां भी यही संकेत दे रही थीं। राजनीतिक दल लोक सेवा आयोग नहीं हैं, जहाँ केवल उम्र के आधार पर कोई वरिष्ठ हो जाए। राजनीति में प्रतिभा होने पर जूनियर भी वरिष्ठ नेता बन सकता है। लेकिन हम पार्टी को नौकरशाही बना रहे हैं। पार्टी के भीतर आलोचनात्मक विचार रखने वालों को बर्दाश्त नहीं किया गया और उनमें ‘मेरा भविष्य मुश्किल होगा’ जैसी डर की भावना पैदा कर दी गई। इससे पार्टी में असंतोष के बावजूद लोग बोलना बंद कर दिए और बाहर से सब ठीक होने का दावा करने की प्रवृत्ति बढ़ी। जब ऐसा माहौल बनने लगा, तो पार्टी की भारी पराजय अनिवार्य थी।”

पांडे ने आगे कहा, “हमें इसे समझकर पार्टी को नए रूप में व्याख्यायित और रूपांतरित करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। आर्थिक, सामाजिक और चेतना के बदलाव को न समझ पाने के कारण कांग्रेस जैसे पुराने दलों ने हाल के समय में झटका खाया है। पुराने दल लोकतंत्र के नए स्वरूप को समझ नहीं पाए। आज का लोकतंत्र २००६ साल जैसा नहीं है। अब नागरिकों के पास मोबाइल है, जिसे हम ‘मोबाइल लोकतंत्र’ कहते हैं। लोग जो चाहे तुरंत विश्व स्तर पर उपलब्ध करा सकते हैं। अब पार्टी पुराने तरीके से ‘पार्टी के मुद्दे पार्टी में ही रखें’ नहीं कह सकती।”

पांडे ने कहा, “अब पार्टी में आकर ‘मैं सांसद या मेयर बनूंगा’ जैसी स्वतंत्र संभावनाएं नहीं हैं। पुरानी पीढ़ी की वह भी समाप्त हो चुकी है। अब स्वयं पहल करके पार्टी बनानी होगी, नहीं तो सफल होना असंभव है। पार्टी की केन्द्रीय समिति आज की चुनौतियों का सामना नहीं कर सकती। नकली सदस्यता से बनी केन्द्रीय समिति अब आंदोलन का नेतृत्व नहीं कर सकती। इसलिए, वार्ड समिति से लेकर केन्द्रीय समिति तक नए ढंग से पुनर्गठन किए बिना पार्टी उबर नहीं सकती।”

विद्यालय के पैसे हड़पने के आरोप में प्रिंसिपल समेत 8 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार मामला दर्ज

अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने रुकुम पश्चिम के त्रिभुवन जनता माध्यमिक विद्यालय के 8 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। मामला के अनुसार तत्कालीन प्रधानाध्यापक हरिप्रसाद खनाल और लेखापाल ठकबहादुर बुढाथोकी पर प्रत्येक के खिलाफ 10 लाख 75 हजार 753 रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की गई है। अख्तियार ने प्रविधिमैत्री कक्षा कक्ष निर्माण में नकली बिल वाउचर बनाकर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है। 9 वैशाख, काठमाडौँ।

रुकुम पश्चिम के त्रिभुवन जनता माध्यमिक विद्यालय के तत्कालीन विद्यालय प्रबंधन समिति अध्यक्ष खेमराज खड़्का, प्रधानाध्यापक हरिप्रसाद खनाल सहित 8 लोगों के खिलाफ विशेष अदालत काठमाडौँ में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज हुआ है। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर भ्रष्टाचार करने के आरोप में अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने विशेष अदालत में मामला दायर किया है।

तत्कालीन प्रिंसिपल खनाल और लेखापाल ठकबहादुर बुढाथोकी के खिलाफ प्रत्येक पर 10 लाख 75 हजार 753 रुपये की क्षतिपूर्ति मांगी गई है, जबकि कार्यालय सहायक रमा शाह और गौरी रावत केसी के खिलाफ प्रत्येक पर 4 लाख 88 हजार 811 रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की गई है। इसी तरह, दाङ के तुलसीपुर उपमहानगरपालिका-6 के डिजिटल कम्प्युटर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स वर्ल्ड के प्रोपाइटर शिवप्रसाद श्रेष्ठ के खिलाफ 7 लाख 8 हजार 811 रुपये की क्षतिपूर्ति मांगी गई है।

वित्तीय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष खड़्का, मुसीकोट नगरपालिक के शाखा अधिकृत बिनाराम खड़्का और सूचना प्रौद्योगिकी अधिकृत गोपाल ओली को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2059 के धारा 19(2) के तहत कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने आर्थिक वर्ष २०७८/७९ में प्रविधिमैत्री कक्षा कक्ष निर्माण तथा प्रबंधन कार्यक्रम में खरीदी गई सामग्री के लिए नकली बिल वाउचर बनाकर भ्रष्टाचार करने का आरोप अख्तियार ने लगाया है।

सम्पत्ति जाँच आयोगः बालेन सरकार ने एक वर्ष की अवधि निर्धारित की, किनकी होगी जांच?

सरकार द्वारा गठित सम्पत्ति जाँच आयोग को एक वर्ष के भीतर जांच पूरी करने की अवधि दी गई है। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों ने बुधवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्र कुमार भंडारी के नेतृत्व में गठित आयोग के सदस्यों में पुनरावेदन अदालत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पुरुषोत्तम पराजुली, उच्च अदालत के पूर्व न्यायाधीश चंद्रराज ढकाल, नेपाल पुलिस के पूर्व उप महानिरीक्षक (डीआईजी) गणेश केसी और नेपाल चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्था (आइक्यान) के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश लम्साल शामिल हैं।

मंत्रिपरिषद की पिछले सप्ताह हुई बैठक में आयोग गठन का निर्णय लिया गया था। मुख्य न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल ने बुधवार सुबह आयोग के अध्यक्ष भंडारी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई, इसके बाद अध्यक्ष भंडारी ने सदस्यों को भी शपथ दिलाई, ऐसी जानकारी आयोग के सदस्य प्रकाश लम्साल ने दी। जांच के दायरे में आने वाले कर्मचारी और जनप्रतिनिधि से संबंधित जानकारी सरकार के प्रवक्ता एवं शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, युवा तथा खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल ने प्रदान की है।

आयोग को “2062/2063 से लेकर अब के वर्ष 2082/2083 तक सार्वजनिक पदों पर रहे प्रमुख राजनीतिक पदाधिकारी और उच्च पदस्थ कर्मचारियों की सम्पत्ति का विवरण एकत्रित करना, प्रमाणित करना तथा जांच करना” की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग के सदस्य एवं पूर्व न्यायाधीश चंद्रराज ढकाल ने इसकी पुष्टि की है, हालांकि अतिरिक्त विवरण प्रदान नहीं किए हैं। सदस्य सीए लम्साल ने बताया है कि यह विवरण जल्द ही राजपत्र में प्रकाशित किए जाएंगे।

गृह मंत्रालय के कानूनी शाखा प्रमुख सहसचिव कृष्णबहादुर कार्की ने भी आयोग के कार्यादेश के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। तथापि, नाम न छापने की शर्त पर एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि राजपत्र में प्रकाशित किए जाने वाले कार्यादेश में स्थानीय तह के जनप्रतिनिधियों को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। एक अधिकारी के अनुसार, “प्रधानमंत्री और सांसदों से लेकर स्थानीय तह के प्रमुख और उपप्रमुख तक की सम्पत्ति की जांच की जाएगी,” जबकि प्रदेश स्तर के जनप्रतिनिधि और कर्मचारी भी जांच के दायरे में आएंगे।

ओलीको सन्देश सुनाउँदै बादलले भने- एक भएर चुनौती पार गर्नुपर्नेछ

ओली का संदेश सुनाते हुए बादल ने कहा- चुनौतियों को पार करने के लिए एकजुट होना अनिवार्य है

समाचार सारांश: नेकपा एमाले के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने कहा है कि पार्टी की एकता अनिवार्य है और चुनौतियों को पार करने के लिए एकजुट होना जरूरी है। ओली ने नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना दिवस पर संदेश भेजते हुए पार्टी द्वारा निरंकुशता समाप्ति और गणतंत्र स्थापना में नेतृत्वकर्ता भूमिका निभाने का उल्लेख किया। उनका यह संदेश पार्टी के उपाध्यक्ष रामबहादुर थापा ‘बादल’ ने पढ़कर सुनाया, जबकि ओली अस्वस्थ होने के कारण घर पर आराम कर रहे हैं। (९ वैशाख, काठमांडू)

नेकपा एमाले के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने वर्तमान चुनौतियों का सामना करने के लिए पार्टी की एकता को अनिवार्य बताया है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने संदेश भेजकर यह बात कही। अस्वस्थ होने के चलते घर पर आराम कर रहे ओली ने आज के कार्यक्रम के लिए संदेश भेजा था, जिसे पार्टी के उपाध्यक्ष रामबहादुर थापा ‘बादल’ ने पढ़कर सुनाया।

‘पार्टी की नेतृत्व में चलाए गए विभिन्न आंदोलन ने उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन कई बार पीड़ा भी झेली गई है। पार्टी ने निरंकुशता के अंत और गणतंत्र की स्थापना में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई है,’ ओली का संदेश पढ़ते हुए बादल ने कहा, ‘इसने देश को सुखी और समृद्ध नेपाल की दिशा में आगे बढ़ाया। नेकपा एमाले ने अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए यहां तक पहुंचा है। हमें एकजुट होकर गौरवमयी और ऐतिहासिक चुनौतियों का सामना करना होगा।’ उन्होंने बताया कि आज की परिस्थितियों में चुनौती पार करने के लिए पार्टी को एकजुट कर आगे बढ़ना आवश्यक है।

सेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, 3 कंपनियों के शेयर मूल्य में 15 प्रतिशत की वृद्धि

बुधवार को नेप्से परिसूचक 2.95 अंक गिरकर 2804 अंक पर स्थिर हुआ है। गृह मंत्री सुधन गुरुङ़ ने साढ़े 2 बजे इस्तीफा देने के बाद नेप्से 2818 अंक तक पहुंच गया था। आज के कारोबार की रकम 7 अरब 81 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है और 121 कंपनियों के शेयर मूल्य में वृद्धि दर्ज की गई है।

दोपहर 12:28 बजे नेप्से 2763 अंक तक गिर गया था। उसके बाद बाजार सामान्य स्थिति में लौट कर 2:53 बजे 2818 अंक तक पहुंचा। बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के कारण कारोबार की मात्रा भी बढ़ी है। पिछले दिन 5 अरब 77 करोड़ के कारोबार की तुलना में आज 7 अरब 81 करोड़ का कारोबार हुआ है। 121 कंपनियों के शेयर मूल्य बढ़े, जबकि 138 कंपनियों के मूल्य में गिरावट आई और 10 कंपनियों के शेयर मूल्य स्थिर रहे।

बैंकिंग क्षेत्र में 0.13%, फाइनेंस में 0.58%, निवेश में 0.09%, उत्पादन तथा प्रसंस्करण में 0.25%, निर्जीवन बीमा में 0.38% की वृद्धि हुई है। विकास बैंक में 0.27%, होटल एवं पर्यटन में 2.36%, जलविद्युत में 0.06%, जीवन बीमा में 0.25%, माइक्रोफाइनेंस में 0.15%, अन्य क्षेत्रों में 0.03% और व्यापार में 1.10% की गिरावट दर्ज की गई है। तीन कंपनियों के शेयर मूल्य में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ये कंपनियां पाल्पा सीमेंट, सूर्याकुंड हाइड्रो इलेक्ट्रिक और शिखर पावर हैं।

झापा एनर्जी के शेयर मूल्य में 14.08% और गुरांस लघुवित्त के शेयर मूल्य में 9.16% की वृद्धि हुई है। होटल फॉरेस्ट इन का शेयर मूल्य सबसे अधिक 10.75% गिरा है। एशियन हाइड्रोपावर के शेयर मूल्य में 8.38% और कॉर्पोरेट डेवलपमेंट बैंक के शेयर मूल्य में 7.84% की कमी आई है। आज सबसे अधिक कारोबार करने वाली कंपनियों में नेशनल हाइड्रोपावर, रिलायंस स्पिनिंग मिल्स, सोलु हाइड्रोपावर, होटल फॉरेस्ट इन और एसवाई पैनल शामिल हैं।

कम्युनिस्ट आन्दोलन में बड़ा झटका, अंदर की गंदगी साफ करनी होगी – पुष्पकलम दाहाल ‘प्रचण्ड’

९ वैशाख, काठमाडौं । नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी(नेकपा) के संयोजक पुष्पकलम दाहाल ‘प्रचण्ड’ ने कहा है कि नेपाल में कम्युनिस्ट आन्दोलन को हाल ही में एक क्षणिक बड़ा झटका लगा है। कम्युनिस्ट पार्टी स्थापना दिवस के अवसर पर नेकपा केन्द्रीय कार्यालय पेरिसडाँडा में आयोजित समारोह में उन्होंने इस झटके का अग्रगामी और वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण से समीक्षा करने की आवश्यकता जताई।

‘अभी कम्युनिस्ट आन्दोलन को क्षणिक झटका लगा है। हमें कमजोरियाँ कहाँ हैं, इसकी वस्तुनिष्ठ समीक्षा अवश्य करनी चाहिए,’ प्रचण्ड ने कहा, ‘मुझे लगता है कि समय-समय पर ऐसे झटके आते रहेंगे, ये हमारे अंदर की गंदगी और मैला हटाने का अवसर भी होते हैं।’ उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि सत्ता में रहते हुए पार्टी के अंदर कई गंदगी साफ की गई है।

प्रचण्ड ने स्पष्ट तो नहीं किया कि जनता ने उनके प्रति नकारात्मक भावना व्यक्त की है, लेकिन बताया कि ऐसा लग रहा है जैसे जनता हमें ‘नहा कर, धो कर साफ होकर आओ’ कह रही हो। कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर मौजूद गलत पहलुओं को सुधारने के इस अवसर का सदुपयोग करना आवश्यक है, उनका मानना है।

‘पहले पार्टी का पुनर्गठन करना होगा, नए महाधिवेशन में निचले स्तर से लेकर उच्चतम स्तर तक नए युवा और गतिशील नेतृत्व को प्राथमिकता देने की योजना बना रहे हैं। हम पुरानी पीढ़ी भी किसी न किसी तरह नई भूमिका और स्वरूप में प्रस्तुत होने पर विचार-विमर्श कर रहे हैं,’ प्रचण्ड ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आगामी ६ महीनों के भीतर महाधिवेशन संपन्न करने का लक्ष्य है और संभव हो तो असोज माह तक यह प्रक्रिया पूर्ण करना चाहते हैं।

गृह मंत्री सुधन गुरुङ ने इस्तीफा दिया, प्रधानमंत्री को सौंपा गृह मंत्रालय

गृह मंत्री सुधन गुरुङ ने अपनी संपत्ति के स्रोत संबंधी सवालों का सामना करते हुए “नैतिकता के आधार पर” पद से इस्तीफा दिया है। गोरखा १ से प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचित गुरुङ ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा है, “अपने से संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच हो और पद पर रहते हुए स्वार्थ का द्वंद्व न हो, इसी उद्देश्य से” उन्होंने इस्तीफा दिया है।

गुरुङ ने बुधवार को प्रधानमंत्री वदेंद्र शाह से मिलकर इस्तीफापत्र सौंपा, यह जानकारी प्रधानमंत्री की प्रेस एवं अनुसंधान विज्ञ दिपा दाहाल ने दी। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री शाह ने गृह मंत्रालय तत्काल के लिए अपने साथ ही रख लिया है। शाह के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद बनने के दिन ही गुरुङ को गृह मंत्री नियुक्त किया गया था।

उनकी संपत्ति विवरण सार्वजनिक होने के बाद आय और निवेश के स्रोत से जुड़े विभिन्न सवाल उठे थे। मंत्री बनने के 27वें दिन उन्होंने इस्तीफा दिया है। वर्तमान मंत्रिपरिषद से हटने वाले गुरुङ दूसरे व्यक्ति हैं। पत्नी की नियुक्ति को लेकर विवाद के बाद दीपककुमार साह ने मंत्री पद से दो सप्ताह में इस्तीफा दे दिया था।

गुरुङ ने फेसबुक पोस्ट में कहा है, “नागरिक स्तर से मेरी शेयर सहित अन्य मामलों पर उठाए गए प्रश्न, टिप्पणियाँ और जनचाहल मुझे गंभीर लगे हैं। मेरे लिए पद से बड़ा नैतिकता है, और जनविश्वास से बड़ी कोई शक्ति नहीं है।” उन्होंने निष्पक्ष जांच के लिए अपने इस्तीफे की व्याख्या करते हुए कहा है, “अगर हम सचमुच बदलाव चाहते हैं तो सत्य, ईमानदारी और आत्मशुद्धि के मार्ग पर सभी को खड़ा होना होगा।”

गृहमन्त्रालयको जिम्मेवारी प्रधानमन्त्री बालेनले सम्हाल्ने

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली

९ वैशाख, काठमांडू। फिलहाल गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री बालेन शाह के पास ही रहेगी। आज सुधन गुरुङ ने गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह जानकारी दी कि यह जिम्मेदारी प्रधानमंत्री के अधीन रहेगा। विवादित व्यापारी दीपक भट्ट के साथ साझेदारी के तथ्य सामने आने के बाद सुधन गुरुङ भी विवाद में फंस गए थे। इसके बाद उन्होंने अपने खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पद से इस्तीफा दे दिया।

इस सरकार के गठन के २६ दिन बाद ही गृह मंत्री सुधन गुरुङ ने इस्तीफा दिया। संपत्ति से जुड़े सवालों के कारण उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलकर इस्तीफा सौंपा। कुछ दिन पहले ही उन्होंने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक किया था। उस विवरण को असामान्य कहकर सवाल उठाए जाने के बीच, माइक्रो इन्श्योरेंस समेत अन्य क्षेत्रों में उनके निवेश का भी ब्यौरा सामने आया।

उन्होंने चलाए गए सामाजिक संगठन ‘हम नेपाल’ में आए सहयोग राशि को व्यक्तिगत खाते से लेनदेन करने का विषय भी उजागर हुआ था, जिस कारण गुरुङ को पद से हटाने के लिए विभिन्न पक्षों से दबाव बनना शुरू हो गया था। इसी दबाव में बुधवार को उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया।

कार्ल्सबर्ग की प्राथमिकता जलस्रोत संरक्षण, नेपाल में 10 अरब रुपये निवेश की योजना

कार्ल्सबर्ग समूह ने डब्लूडब्लूएफ डेनमार्क के साथ साझेदारी में नेपाल में जलस्रोत संरक्षण और पानी के सतत प्रबंधन पर अपना फोकस और मजबूत किया है। साल 2026 से 2028 तक चलने वाली तीन साल की इस योजना में सिमसार क्षेत्र की पुनर्स्थापना और जल उपलब्धता सुधारने का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी ने नेपाल को प्राथमिकता वाला बाजार मानते हुए 10 अरब रुपये निवेश करने का संकल्प जताया है और सतत विकास तथा स्थानीय उत्पादन सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया है।

कार्ल्सबर्ग ने जलस्रोत संरक्षण की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को और गहरा किया है। डब्लूडब्लूएफ डेनमार्क के साथ सहयोग के माध्यम से कंपनी ने पानी के स्थायी प्रबंधन को महत्वपूर्ण माना है। ब्रुअरी उद्योग के लिए पानी अत्यंत आवश्यक संसाधन है, इसलिए कंपनी जल के कुशल उपयोग के साथ-साथ भूजल पुनर्भरण और सिमसार क्षेत्र पुनर्स्थापना में सक्रिय रूप से कार्यरत है। ये पहल दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के रणनीतिक कार्यक्रम का हिस्सा हैं।

साल 2026 से 2028 तक संचालित इस योजना के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में बिगड़े सिमसार क्षेत्रों की पुनर्स्थापना और पानी की आपूर्ति सुधारने का लक्ष्य है। इससे नदियों और नालों के जल स्तर का दीर्घकालीन संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। यह कार्यक्रम डब्लूडब्लूएफ वाटर रिस्क फिल्टर के मार्गदर्शन में चल रहा है, जो कंपनी के संचालन और आपूर्ति श्रृंखला में जल से जुड़ी जोखिमों की पहचान और प्रबंधन के लिए तथ्य आधारित दृष्टिकोण अपनाने में सहायक होगा। नेपाल को कार्ल्सबर्ग ने रणनीतिक रूप से प्राथमिकता प्राप्त बाजार के रूप में चुना है। कंपनी ने हाल ही में 10 अरब रुपये निवेश का संकल्प व्यक्त करते हुए सतत विकास, स्थानीय उत्पादन सशक्तिकरण और दीर्घकालिक साझेदारी विस्तार पर बल दिया है।

सिंहदरबार में प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार नेविसंघ कार्यकर्ताओं को छोड़ने कांग्रेस की मांग

९ वैशाख, काठमाडौं। सिंहदरबार के भीतर सरकार के विरोध में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन करने के दौरान नेपाल विद्यार्थी संघ (नेविसंघ) के नेताओं को गिरफ्तार किए जाने पर नेपाली कांग्रेस ने गहरा ध्यानाकर्षण व्यक्त किया है। कांग्रेस के प्रवक्ता देवराज चालिसे ने एक बयान जारी करते हुए मंगलवार को गिरफ्तार नेविसंघ के नेता भुवन भट्ट, कुम्भराज देउवा, नवीन विष्ट, आकाश देवकोटा, शुशील ऐडी और विशाल विसी के गिरफ्तारी मामले पर अपनी गंभीर चिंता जताई है।

‘लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में अभिव्यक्ति और प्रकाशन की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण रूप से आवाज़ उठाने का अधिकार तथा विरोध या असहमति प्रकट करने की स्वतंत्रता नागरिकों के मौलिक अधिकार हैं,’ बयान में कहा गया है, ‘इन अधिकारों का प्रयोग करते हुए नागरिकों को गिरफ्तार करना और जेल में रखना लोकतंत्र के बुनियादी मूल्य, कानून का शासन और नागरिक स्वतंत्रता की गारंटी पर गंभीर सवाल उठाता है। असहमति को नियंत्रित करने और दमन करने का यह तरीका सरकार की लोकतांत्रिक स्वीकृति और संविधान की भावना के विरुद्ध है।’

गिरफ्तार नेविसंघ के नेताओं को बिना शर्त तत्काल रिहा करने की कांग्रेस ने मांग की है।

कंडोम उत्पादन में 30 प्रतिशत तक मूल्यवृद्धि की योजना

दुनिया की सबसे बड़ी कंडोम निर्माता कंपनी कारेक्स ने इरानी युद्ध के कारण कच्चे माल की कमी के चलते उत्पादन की कीमत 30 प्रतिशत या इससे अधिक बढ़ाने की तैयारी की है। कारेक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गो मिया कियाट ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद उत्पादन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और परिवहन खर्च तथा देर से डिलीवरी ने बाजार में कमी को और बढ़ा दिया है।

इरान से जारी युद्ध ने ऊर्जा बाजार और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बनाया है और आर्थिक अनिश्चितता के कारण कंडोम की मांग लगभग 30 प्रतिशत बढ़ गई है, कंपनी ने यह जानकारी दी है। मलेशिया स्थित इस कंपनी के सीईओ गो मिया कियाट ने रॉयटर्स और ब्लूमबर्ग के साथ किए गए साक्षात्कार में कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद उत्पादन लागत में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी देखी गई है।

“ड्युरेक्स” और “ट्रोजन” जैसे विश्व प्रसिद्ध ब्रांड्स के लिए उत्पादन करने वाली कारेक्स प्रति वर्ष 5 अरब से अधिक कंडोम का उत्पादन करती है। अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों के बाद, इरान ने होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने वाली आपूर्ति में बाधा डालने की धमकी दी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

कारेक्स ने कहा कि कंडोम उत्पादन के लिए आवश्यक अमोनिया और सिलिकॉन आधारित लूब्रिकेंट मुख्य रूप से तेल आधारित सामग्री पर निर्भर हैं, इसलिए युद्ध का प्रभाव मूल्य पर पड़ा है। खासतौर पर आर्थिक संकट या अनिश्चितता के दौरान कंडोम की मांग करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। सीईओ कियाट के अनुसार, लोग अपने भविष्य और नौकरी को लेकर अनिश्चितता महसूस करते हैं और बढ़ती आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण परिवार नियोजन के साधनों का उपयोग करते हैं।

ट्रम्पले किन बढाए इरानसँगको युद्धविराम?  – Online Khabar

ट्रम्प ने इरान के साथ युद्धविराम अवधि क्यों बढ़ाई?

समाचार सारांश

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इरान के साथ युद्धविराम अवधि बढ़ाई है, लेकिन कोई नई समयसीमा घोषित नहीं की है।
  • इरानी पक्ष से वार्ता संबंधी कोई जवाब न मिलने के कारण ट्रम्प प्रशासन में अनिश्चितता है और इरानी नेतृत्व में भी विभाजन नजर आ रहा है।
  • इरान नाकाबंदी हटाने की मांग कर रहा है, जबकि ट्रम्प ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का खुलना अंतिम समझौते तक संभव नहीं होगा।

9 वैशाख, काठमांडू। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार दोपहर व्हाइट हाउस में अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ बैठक कर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया – इरान के साथ क्या किया जाए?

उनके द्वारा घोषित युद्धविराम की अवधि समाप्त होने वाली थी, और उपराष्ट्रपति जेडी व्हांस जो अगले चरण की वार्ता के लिए पाकिस्तान जा रहे थे, वे जोइंट बेस एंड्रयूज में एयरफोर्स टू में थे। लेकिन ट्रम्प प्रशासन में अनिश्चितता थी क्योंकि इरानी पक्ष से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ था।

पहले अमेरिकी पक्ष ने वार्ता के अगले चरण से पहले इरानियों को कुछ मुख्य बिंदु भेजे थे, लेकिन तीन अधिकारियों के अनुसार कई दिनों तक कोई प्रतिक्रिया न मिलने के कारण जब उपराष्ट्रपति व्हांस और उनकी टीम पाकिस्तान रवाना हुए, तो वहां से मिलने वाली उपलब्धि को लेकर शंका उत्पन्न हो गई थी।

मंगलवार को व्हाइट हाउस में ट्रम्प ने व्हांस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पिट हेगसेथ, जोइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन और सीआईए निदेशक जॉन रैटकलिफ के साथ चर्चा की, लेकिन इरानी पक्ष से कोई खबर नहीं मिली। अधिकारियों ने पाकिस्तान के मुख्य मध्यस्थ फील्ड मार्शल आसिम मुनिर से अनुरोध किया था कि वे व्हांस को विमान में चढ़ने से पहले उत्तर लाएं।

हालांकि, घंटों बीतने के बावजूद भी इरान से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

उन तीन अधिकारियों के अनुसार व्हाइट हाउस के सलाहकार मानते हैं कि इरान से जवाब न आने का मुख्य कारण वहां के नेतृत्व में मतभेद है। यह अनुमान आंशिक रूप से पाकिस्तानी मध्यस्थों से प्राप्त सूचना पर आधारित है। ट्रम्प प्रशासन को लग रहा है कि यूरेनियम संवर्धन और भंडारण जैसे मुद्दों पर इरान में साझा सहमति नहीं बनी है, जो वर्तमान वार्ता के सबसे जटिल विषय बन गए हैं।

अमेरिकी खुफिया मानते हैं कि नए सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनई ने अपने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश नहीं दिए हैं या वे केवल अनुमान लगा रहे हैं। मोज्तबा खुद को पर्दे के पीछे रखना चाहते हैं, जिससे आंतरिक चर्चा में बाधा आई है।

फिर भी, एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिका और इरानी वार्ताकार जल्द ही बैठक कर सकते हैं, लेकिन कब और कैसे यह अनिश्चित है।

ट्रम्प ने सैन्य आक्रमण शुरू किए बिना युद्धविराम अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है, लेकिन नई कोई निश्चित तिथि नहीं दी है। उन्होंने ‘ट्रूथ सोशल’ पर कहा कि इरानी अधिकारियों में “गंभीर विभाजन” है। वे अभी भी युद्ध का कूटनीतिक समाधान निकालने के इच्छुक हैं।

अभी तक वार्ता असफल रहने के कारण ट्रम्प को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

इरान वार्ता शुरू करने से पहले नाकाबंदी हटाने की मांग कर रहा है, खासकर होर्मुज स्ट्रेट के इरानी बंदरगाहों पर ट्रम्प द्वारा लगाई गई नाकाबंदी। लेकिन ट्रम्प ने कहा है, “अंतिम समझौता होने तक होर्मुज स्ट्रेट नहीं खुलेगा।”

मंगलवार दोपहर हुई बैठक में ट्रम्प और उनकी टीम ने युद्धविराम की अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया, जो पाकिस्तानी मध्यस्थों के अनुसार कुछ घंटों में समाप्त होने वाली थी। ट्रम्प ने कहा कि यह बुधवार शाम तक जारी रहेगी। इससे इरानी पक्ष को ज्यादा समय मिल सकेगा, लेकिन इसकी गारंटी कम है।

इरान वार्तालाप के लिए तैयार है तो तत्काल यात्रा की तैयारी की जा सकती है। होर्मुज स्ट्रेट बंद रहने से दोनों पक्षों को आर्थिक नुकसान होता है, जिससे इसका त्वरित समाधान खोजे जाने की उम्मीद है।

पाकिस्तानी मध्यस्थ ट्रम्प को भी युद्धविराम बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। ट्रम्प ने कहा है कि जब तक वार्ता प्रस्ताव नहीं आएगा और चर्चा का निष्कर्ष नहीं निकलता, वह युद्धविराम बढ़ाएंगे।

हालांकि, इरानी अधिकारियों पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा है।

इरानी वार्ता टीम के सदस्य मेहदी मोहम्मदी ने कहा, “ट्रम्प का युद्धविराम बढ़ाना कोई मतलब नहीं रखता। हारने वाला पक्ष सर्त थोप नहीं सकता। नाकाबंदी तो बमबारी के बराबर है और इसका मुकाबला सैन्य रूप से किया जाना चाहिए।”

ट्रम्प की यह घोषणा युद्धविराम जारी रहने के बारे में अनिश्चितता के बीच आशा की किरण बनी, जबकि उस दिन की शुरुआत में उन्होंने निकट भविष्य में इरान पर पुनः बमबारी करने की वे उम्मीद जता चुके थे।

युद्धविराम के लिए नई समयसीमा न देने से दबाव कम होगा और इरान को वार्ता लंबित करने का मौका मिलेगा, यह चेतावनी ट्रम्प के सलाहकारों ने गुप्त रूप से दी है।

कम से कम वार्ताकारों को उम्मीद थी कि इसी सप्ताह प्रारंभिक सहमति हो जाएगी और फिर सार्थक विषयों पर चर्चा शुरू होगी।

लेकिन आलोचकों का कहना है कि वार्ता को टालना रणनीतिक चाल हो सकती है, जिससे इरान अपने मिसाइल सिस्टम को खुलासे के लिए तैयार होने का समय पा सके।

इरान के लिए भविष्य में यूरेनियम संवर्धन, उच्च संवर्धित यूरेनियम संग्रह और प्रतिबंध हटाने जैसे अहम मुद्दे अभी भी अधूरे हैं।

समझौता संभव हो या न हो, अंततः दोनों पक्षों की शर्तों की लचीलापन पर निर्भर करेगा। ट्रम्प के लिए अनिवार्य शर्त यह है कि वह पुराने ‘ज्वाइन्ट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन’ जैसे समझौते से मेल खाने वाला समझौता स्वीकार नहीं करेंगे। ट्रम्प 2018 में उस परमाणु समझौते से बाहर आ गए थे और उसे कमजोर समझौता बताते हुए आलोचना कर रहे हैं।

ट्रम्प ने अपनी वार्ता कौशल पर बड़ा आत्मविश्वास दिखाया और मंगलवार को कहा कि अगर वे उस वक्त राष्ट्रपति होते तो युद्ध भी जीत जाते।

“मुझे लगता है अंततः हम बेहतरीन समझौते तक पहुंचेंगे,” उन्होंने कहा। “उनके पास मूल रूप से दूसरा विकल्प नहीं है। हमने उनकी नौसेना और वायु सेना को तबाह कर दिया है और उनके नेता भी निशाने पर हैं, जिसने स्थिति को जटिल बना दिया है।”

कुछ घंटे बाद ‘स्टेट डाइनिंग रूम’ में खिलाड़ियों का सम्मान करते हुए ट्रम्प ने युद्ध विषय पर असामान्य चुप्पी कायम रखी और पत्रकारों के सवालों से बचते हुए वहां से चले गए।

बच्चों में हीन भावना के प्रमुख ८ कारण और उन्हें दूर करने के उपाय

बच्चों का मानसिक विकास सामाजिक, पारिवारिक और विद्यालयीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है और नकारात्मक सोच हीन भावना को जन्म देती है। हीन भावना को रोकने के लिए अभिभावकों, शिक्षकों और समाज को एक सकारात्मक वातावरण प्रदान कर बच्चों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। बच्चों का मानसिक विकास पूरी तरह से उनके सामाजिक, पारिवारिक और विद्यालयीय परिवेश पर आधारित होता है। यदि छोटी उम्र में किसी परिस्थिति के कारण बच्चे के मन में अपने बारे में नकारात्मक सोच उत्पन्न हो जाती है, तो वे हीन भावना से ग्रस्त हो सकते हैं। इसका प्रभाव बच्चे के आत्मविश्वास पर गहरा पड़ता है। इससे भविष्य में मानसिक समस्याएं जैसे डिप्रेशन, चिंता, सामाजिक अलगाव और पढ़ाई में ध्यान केंद्रित न कर पाने की समस्या हो सकती है। हीन भावना से बच्चों को मुक्त कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके लिए उनके चारों ओर ऐसा माहौल आवश्यक है जो अत्यंत सकारात्मक, विश्वासपूर्ण और प्रोत्साहनकारी हो, ताकि वे अपना आत्मविश्वास न खोएं।

हीन भावना कभी-कभी छोटी उम्र से शुरू होकर व्यस्कता तक बनी रह सकती है, इसलिए अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के लिए इसे समय रहते पहचानकर उचित समाधान करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। बच्चों में हीन भावना के मुख्य कारणों में प्रतिस्पर्धा का दबाव, गलत मूल्यांकन प्रक्रिया, दबाव महसूस होना, समानता का अभाव, नकारात्मक टिपण्णी एवं आलोचना, असुरक्षा की भावना, अवास्तविक अपेक्षाएं और शारीरिक कमजोरी शामिल हैं।

बच्चों को हीन भावना से मुक्त कराने के लिए अभिभावक, शिक्षक और समाज को सहयोग करना होगा। यह कार्य एक दिन में पूरा नहीं होता, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है। बच्चों के साथ प्रतिदिन कम से कम २०-३० मिनट गुणवत्तापूर्ण समय बिताना चाहिए, नियमित खुला संवाद करना चाहिए, उनके अनुभव साझा करने का अवसर देना चाहिए, प्रयास की सराहना करनी चाहिए, बच्चों की मजबूत खूबियों की पहचान कर प्रोत्साहित करना चाहिए, सकारात्मक वातावरण तैयार करना चाहिए, उन्हें स्वतंत्रता और जिम्मेदारी देना चाहिए, तथा नकारात्मक तुलना करने से बचाना चाहिए।

इस प्रकार, बच्चों को सकारात्मक और प्रोत्साहक वातावरण में परवरिश करने पर उनके आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।

नेपालगंज में ‘विटनेश ऑफ टाइम’ फोटो प्रदर्शनी आयोजित

पत्रकार एवं फोटोग्राफर जयनारायण शाह द्वारा ली गई तस्वीरों की ‘विटनेश ऑफ टाइम’ शीर्षक से आगामी जेठ ११ और १२ तारीख को नेपालगंज में एकल फोटो प्रदर्शनी आयोजित की जाने जा रही है। इस प्रदर्शनी में समय, समाज, प्रकृति और जनजीवन के महत्वपूर्ण क्षणों को तस्वीरों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। इसका उद्देश्य नेपाली समाज और सांस्कृतिक जीवन को उजागर करना है। आयोजन संस्था अंतराल नई पीढ़ी में फोटोग्राफी के प्रति रुचि बढ़ाने और समाज की जीवंत तस्वीर दुनिया को दिखाने के लक्ष्य के साथ सभी चित्रकारों, विद्यार्थियों और आम जनता को आमंत्रित कर रही है।

अंतराल के आयोजन और प्रबंधन में पत्रकार/फोटोग्राफर जयनारायण शाह की तस्वीरों की ‘विटनेश ऑफ टाइम’ नामक एकल फोटो प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। जेठ ११ और १२ को नेपालगंज में आयोजित इस प्रदर्शनी में समय, समाज, प्रकृति और जनजीवन के महत्वपूर्ण पलों को तस्वीरों के जरिये दर्शाया जाएगा। ‘विटनेश ऑफ टाइम’ प्रदर्शनी समय के साक्षी बने दृश्यों, पात्रों, नेपाली समाज, पोशाक, संस्कृति के साथ-साथ दैनिक जीवन और प्रकृति की भावनाओं को तस्वीरों के माध्यम से उजागर करने का उद्देश्य रखती है। प्रदर्शित तस्वीरें दर्शकों को मानव सभ्यता और प्रकृति के विविध पहलुओं का अनुभव कराने में सफल होंगी।

‘कभी-कभी कुछ पल केवल स्मृतियों में नहीं रहते, वे इतिहास बन जाते हैं,’ पत्रकार एवं फोटोग्राफर जयनारायण शाह कहते हैं, ‘यही क्षण जीवंत रखने का प्रयास इस फोटो प्रदर्शनी के माध्यम से किया गया है।’ पिछले डेढ़ दशक में देश में अनेक राजनीतिक घटनाएं हुई हैं। परिवेश बदला है, कई आंदोलन और संघर्ष रहे हैं। भूकंप, नाकाबंदी, कोविड महामारी एवं लॉकडाउन ने आम जनजीवन को अत्यंत कठिन बना दिया। इन सभी कालखंड के झलकियां फोटोग्राफर शाह ने अपनी तस्वीरों में कैद की हैं।

‘मैंने यात्राओं के दौरान जहां-जहां गया, वहां के जनजीवन, रहने-सहने का तरीका, पोशाक, बस्तियां, प्रकृति, फूल, मनमोहक दृश्य और पदयात्रा में मिले लोगों की तस्वीरें कैमरे में सुरक्षित कीं,’ पत्रकार शाह कहते हैं, ‘अब इन तस्वीरों को प्रदर्शनी के माध्यम से साझा कर रहा हूं।’ इस प्रदर्शनी के माध्यम से नई पीढ़ी में फोटोग्राफी के प्रति आकर्षण बढ़ाने तथा समाज की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करने का उद्देश्य रखा गया है, जिसे आयोजन संस्था अंतराल ने बताया है। समय, समाज और स्मृतियों की कहानी कहने वाली इन तस्वीरों को देखने के लिए सभी चित्रकार, विद्यार्थी, पत्रकार और आम जनता को अंतराल की ओर से हार्दिक निमंत्रण दिया गया है।