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लेखक: space4knews

‘दुर्गा प्रसाइँ और राप्रपाकी असंतुष्टों को समेट कर नई पार्टी बनाऊंगा’

समाचार सारांश

  • डा. धवल शमशेर राण ने कहा है कि वे राप्रपा में कभी वापस नहीं लौटेंगे।
  • उनका आरोप है कि नेतृत्व ने एजेंडा बेचा है।
  • वे कहते हैं – हिंदू राष्ट्र और राजा की स्तुति करके केवल वोट मांगे गए, अब राप्रपा से पार पाना संभव नहीं है।

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) के महामंत्री डा. धवल शमशेर राणा ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है।

राप्रपा नेतृत्व पर आरोप है कि उन्होंने हिंदू राष्ट्र और राजतंत्र के एजेंडे को सिर्फ सत्ता के स्वार्थ में इस्तेमाल किया, जरूरी समय पर महाधिवेशन नहीं किया और पार्टी में विषाक्त माहौल बना दिया गया। पूर्व सांसद और नेपालगंज के पूर्व मेयर राणा जल्द ही नई पार्टी बनाने की तैयारी में हैं।

दुर्गा प्रसाईं जैसे कार्यकर्ताओं और छोटे दलों को मिलाकर एक ‘कट्टर राष्ट्रवादी’ पार्टी बनाने की उनकी योजना है। प्रस्तुत है राप्रपा छोड़ने के कारण और आगामी राजनीतिक यात्रा पर डॉ. राणा के साथ विस्तृत बातचीत :

अब आपको राप्रपा का महामंत्री नहीं कहा जा सकता?

जिस दिन मैंने कहा था, उसी दिन से मैंने राप्रपा छोड़ दी है। इसलिए अब मुझे धवल शमशेर कहें।

‘नेता’ कहे जाने की आवश्यकता नहीं थी?

नेता कहने से लोग अच्छा महसूस नहीं करते। नेता खराब नाम अर्जित कर चुके हैं। मुझे धवल दाइ या धवल शमशेर कहें, जो भी ठीक लगे।

राप्रपा छोड़ने का कारण क्या है?

हमें जो लक्ष्य और मूल्यधाराएं थीं, वे राप्रपा में पूरी नहीं हो रही थीं, इसलिए मैंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया। हम सनातन धर्म आधारित हिंदू अधिराज्य, देश के कल्याण और भ्रष्टाचार समाप्ति के उद्देश्य से राजनीति करते थे, लेकिन यह पार्टी इसे पूरा नहीं कर सकती। जनता ने भी प्रमाणित कर दिया है कि अब राप्रपा से पार पाना संभव नहीं।

पिछली उपचुनावों और राष्ट्रीय चुनावों में हमारे लगभग ९७ प्रतिशत उम्मीदवारों की गारंटी जब्त हो गई। महाधिवेशन न करने और नेतृत्व परिवर्तन न होने की स्थिति ने बड़ी चुनौतियां पैदा कीं। ऐसी विषाक्त स्थिति में बने रहना उचित नहीं लगा, इसलिए नई पार्टी बनाने जा रहा हूं।

राप्रपा के दस्तावेज़ में राजतंत्र, हिंदू राष्ट्र और संघीयता से इन्कार स्पष्ट है, आप महामंत्री थे, फिर भी क्या हुआ?

हाँ, मैंने दस्तावेज़ बनाए हैं, सब कुछ उसमें है। लेकिन शब्दों और कर्मों में फर्क है। राप्रपा नेतृत्व अपना एजेंडा पूरा नहीं कर पा रहा। मैंने चार साल बदलाव के लिए संघर्ष किया, जो कठिन समय था। अब ऐसी दूषित स्थिति में समय बर्बाद नहीं करूंगा। नई पार्टी से हमारे मूल्यों और एजेंडे को आगे बढ़ाऊंगा।

चार साल पहले २०७८ के महाधिवेशन में क्या समस्या आई?

कमल थापा को अध्यक्ष पद से हटाने और प्रजातांत्रिक प्रणाली में पार्टी चलाने की कोशिश में मैंने उम्मीदवार बनने का विचार किया। बाद में राजेन्द्र लिङ्देन को आगे किया, लेकिन उन्होंने मेरे सुझावों को नजरअंदाज किया, जिससे टूट बढ़ी।

महाधिवेशन नहीं होगा तो निर्णय क्या रहा?

कार्यसमिति की बैठक में महाधिवेशन करवाने की पहल की, पर नेतृत्व ने अनदेखी की। बहाना बनाकर पार्टी का सफाया हो गया। यही देखकर पार्टी छोड़ने का फैसला लिया।

आप अध्यक्ष बनने की इच्छा रखते थे?

महाधिवेशन न होने की वजह से अध्यक्ष बनने का सपना पूरा नहीं हुआ। महाधिवेशन के बिना अध्यक्ष बनना संभव नहीं, इसलिए बाहर निकलने का निर्णय लिया।

राप्रपा अब एक सीट पर सिमित है, पार्टी टूटने पर क्या होगा?

एक ही सीट मिलने की स्थिति का विश्लेषण नेतृत्व को करना चाहिए। जनता नाराज है क्योंकि पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया।

नेताओं की कार्यशैली जिम्मेदार है या एजेंडा कमजोर पड़ गया?

हमारे काम और व्यवहार जनता की अपेक्षा के विपरीत रहे हैं। हिंदू राष्ट्र और राजा की पूजा करने को कहकर भी व्यवहार में वो नहीं दिखता।

१५ चैत के आसपास आंदोलन में समर्थन न मिलने की पीड़ा?

राजनीति में बहुत समय बीता है। पार्टी का समर्थन न मिलने पर व्यक्तिगत नुकसान हुआ। फिर भी पीड़ा सहकर यह फैसला लिया।

क्या राप्रपा ने बीमारी के बावजूद कार्रवाई की बात सच है?

हाँ, बीमार पड़ने पर भी पद से हटाया गया। मैं देशभर स्थानीय निकायों को सक्रिय कर रहा था, पर पद से हटाए जाने की कार्रवाई हुई।

राप्रपा छोड़कर नई पार्टी कब घोषणा करेंगे?

१५ दिन के भीतर व्यवस्था कर लूंगा। अभी मलमास चल रहा है, उसके बाद नई पार्टी की घोषणा होगी।

कौन-कौन शामिल होंगे?

बहुत से जिलों के कार्यकर्ता और मधेस प्रदेश के छोटे दल बातचीत में हैं। दुर्गा प्रसाईं भी लगभग तयशुदा हैं।

राप्रपा में वापस जाने की संभावना कितनी है?

मैं वापस राप्रपा में नहीं जाऊंगा। वहां कोई संभावना नहीं है।

यह नई पार्टी पुरानी से कैसे भिन्न होगी?

सिद्धांत समान होगा, लेकिन काम करने का तरीका अलग होगा। हम जनता को धोखा नहीं देंगे, सबको साथ लेकर चलेंगे और अनावश्यक कार्रवाई नहीं करेंगे।

नेतृत्व का मूल्यांकन कैसे करेंगे?

मैं भ्रष्टाचार से ऊपर वाला व्यक्ति हूं। १० साल नेपालगंज के मेयर रहते कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा। मैं कुर्सी पकड़कर नहीं बैठता।

सांसदीय नेता/कार्यकर्ता राजेन्द्र लिङ्देन के प्रति क्या कहेंगे, इसका डर नहीं?

ऐसा दिन आए तो मैं खुद पद छोड़ दूंगा। पद की लालसा नहीं है मुझे।

वीडियो/फोटो: शंकर गिरी

करेंट लगने से मछली पकड़ते समय पुरुष की मृत्यु

२१ जेठ, झापा। झापाको अर्जुनधारा क्षेत्रमा बिहीबार दिउँसो करेन्टको प्रयोग गरी माछा मार्ने क्रममा एक पुरुष की मृत्यु हो गई है। अर्जुनधारा नगरपालिका–११ के ४४ वर्षीय सागर नामक डम्बर हस्दा की मौत हुई है, इसकी पुष्टि पुलिस ने की है। जिला प्रहरी कार्यालय के प्रहरी निरीक्षक सुमन बानियाका के अनुसार, वह स्थानीय काली मंदिर के पास हिले नदी में करेन्ट का उपयोग कर मछली मार रहे थे। इसी दौरान करेन्ट लगने से वह बेहोश हो गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को तत्काल सूचित किया। पुलिस घटना स्थल पर पहुंची तो उनकी मृत्यु हो चुकी थी। –रासस

क्यानले भुटानका खेलाडीलाई ‘टाइम आउट’ अपिल गरेकोमा माफी माग्यो

नेपाल क्रिकेट संघ (क्यान) ले भुटानविरुद्धको खेलमा नेपाली खेलाडीहरूले गरेका ‘टाइमआउट’ अपिलको घटनाप्रति माफी मागेको छ। एसीसी प्रिमियर कपमा भुटानका ब्याटर ढिलो मैदान प्रवेश गरेको अवस्थामा नेपाली खेलाडीहरूले अम्पायरसमक्ष टाइमआउटको अपिल गरेका थिए। क्यानका सचिव पारस खड्काले जारी गरेको विज्ञप्तिमा उक्त घटना क्रिकेटको मूल्य र खेलभावनासँग मेल नखाने उल्लेख गरेका छन्। २१ जेठ, काठमाडौं।

क्यानले जारी गरेको विज्ञप्तिमा भनिएको छ कि उक्त घटना क्रिकेट मूल्य र खेलभावनाको अनुरूप छैन। ‘यो आउट क्रिकेटको नियम भित्र भए पनि खेलको भावना नियमभन्दा माथि हुन्छ र सधैं हाम्रो व्यवहारको केन्द्रमा रहनुपर्छ भन्ने हामी स्वीकार गर्छौं,’ क्यान सचिव पारस खड्काले विज्ञप्तिमा उल्लेख गरेका छन्।

क्यानले नेपालको विकासशील क्रिकेट राष्ट्र भएको कारण खेल भावना, पारस्परिक सम्मान र निष्पक्ष खेललाई उच्च प्राथमिकतामा राखेको बताउँदै उक्त घटनाले यी नै मान्यताहरूको उल्लंघन गरेको स्वीकार गरेको छ। विज्ञप्तिमा भनिएको छ, ‘यस घटनाले उत्पन्न गरेको निराशाप्रति हामी दुःख व्यक्त गर्छौं।’ क्यानले भुटान क्रिकेट, सम्बन्धित खेलाडी र सरोकारवालासँग क्षमायाचना गर्दै मैदानभित्र र बाहिर क्रिकेटको भावना र उच्च नैतिक मापदण्ड कायम राख्न प्रतिबद्धता व्यक्त गरेको छ। एसीसी प्रिमियर कप अन्तर्गत आज विहान नेपाल र भुटानबीच भएको खेलमा भुटानले जवाफी ब्याटिङ गर्दा इनिङको पहिलो बलमै विकेट गुमाएपछि वानडाउन ब्याटर आउन केही ढिलो भएको थियो। यस क्रममा नेपाली खेलाडीहरूले अम्पायरलाई प्रश्न गर्दै अपिल गरेका थिए। नियमअनुसार यो स्वीकृत हुनसक्ने भए पनि खेलभावनाको विपरीत हुने पक्षलाई क्यानले स्वीकार गरेको छ।

हिजबुल्लाह ने कहा- इज़राइल और लेबनान के बीच युद्धविराम स्वीकार्य नहीं है

हिजबुल्लाह के नेता नैम कासिम, 21 जेठ, काठमाडौं। लेबनान के सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह ने हाल ही में इज़राइल और लेबनान सरकार के बीच हुए युद्धविराम समझौते को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। अमेरिका के मध्यस्थता में संपन्न युद्धविराम समझौते की सभी शर्तों को नकारते हुए इसे स्वीकार न करने का स्पष्ट संदेश दिया गया है। हिजबुल्लाह के नेता नैम कासिम ने गुरुवार को जारी अपने बयान में दोनों देशों के बीच हुए युद्धविराम वार्ता को ‘बेकार’ और लेबनान के लिए ‘अपमानजनक’ बताया, साथ ही दावा किया कि लेबनान की बहुसंख्यक जनता भी इसे स्वीकार नहीं करेगी।

अमेरिका, इज़राइल और लेबनान ने बुधवार को संयुक्त रूप से एक वक्तव्य जारी कर युद्धविराम की घोषणा की थी। उस घोषणा में कहा गया था कि हिजबुल्लाह द्वारा गोलीबारी बंद करने की स्थिति में ही युद्धविराम लागू होगा। लेकिन, हिजबुल्लाह के नेता कासिम की इस प्रतिक्रिया ने युद्धविराम समझौते के बीच अस्थिरता पैदा कर दी है। उन्होंने कहा, ‘इस युद्धविराम के अनुसार हिजबुल्लाह को गोलीबारी रोकनी होगी और इज़राइली सीमा के निकट दक्षिणी क्षेत्र में अपने लड़ाकों को हटाना होगा। यह आत्मसमर्पण के बराबर है और इज़राइल के उद्देश्य को हासिल करने में मदद करेगा।’

नेपाली चिया निर्यात में भारत द्वारा लगाए गए ‘अदृश्य’ अवरोध: परीक्षण के नाम पर गोदामों में फंसे माल

भारत द्वारा नेपाली चिया आयात पर पुनः शतप्रतिशत परीक्षण नियम लागू किए जाने के बाद लगभग दो लाख किलो चिया सिलिगुड़ी और कोलकाता के गोदामों में फंसी हुई है। भारतीय पक्ष की जटिल परीक्षण प्रक्रिया के कारण पूर्वी सीमा नाका मेची भन्सार से दो सप्ताह से नेपाली चिया निर्यात रोक रखा है। नेपाली चिया उत्पादकों ने भारत स्थित नेपाली दूतावास और सरकार के माध्यम से दीर्घकालीन रूप से गैरभन्सार अवरोध हटाने हेतु कूटनीतिक पहल करने की मांग की है।

२१ जेठ, काठमांडू। नेपाली चिया निर्यात में भारत द्वारा लगातार लगाए जा रहे अवरोधों ने यहाँ के छोटे किसानों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। २१ दिन लंबी नाकाबंदी के बाद ही भारतीय बाजार में पहुँची नेपाली चिया अब भी सिलिगुड़ी, कोलकाता सहित अन्य व्यावसायिक केंद्रों के गोदामों में फंसी हुई है। भारत पहुंची लगभग २०० टन (दो लाख किलो) नेपाली चिया बिक्री के इंतजार में गोदामों में ही पड़ी है, ऐसा व्यापारियों ने बताया है।

भारत द्वारा पुनः नेपाली चिया पर गैरभन्सार अवरोध लगाए जाने से निर्यात प्रभावित हुआ है। इससे पहले १८ वैशाख से लागू इसी प्रकार का नियम होने से २१ दिनों तक चिया निर्यात पूरी तरह बंद रही। बाद में भारत के चिया बोर्ड ने भारतीय बाजार में बिकने वाली चिया के लिए नमूना परीक्षण करने और तीसरे देशों को जाने वाली चिया के लिए पूर्ण परीक्षण करने की सूचना जारी कर निकासी कुछ हद तक सुगम बनाई। इससे नेपाली किसानों को थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन २१ दिन बाद भारतीय टी बोर्ड ने मानक संशोधित कर आंतरिक बाजार और पुनः तीसरे देश को निर्यात की जाने वाली चिया के लिए अलग-अलग परीक्षण नियम लागू किए।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने आधिकारिक स्पष्टीकरण न दिए होने तक आंतरिक खपत के लिए जाने वाली चिया पर टी बोर्ड ने परीक्षण न करने का निर्देश दिया था। परंतु भन्सार कार्यालय और एफएसएसएआई ने जोखिम प्रबंधन प्रणाली के तहत रैंडम नमूना संकलन कर परीक्षण करने का प्रावधान बनाया। टी बोर्ड ने चिया परीक्षण परिणाम की प्रक्रिया भी तेज की थी। अब तक परीक्षण रिपोर्ट कम से कम १५ दिन में आती थी, जिसे ५ दिन के भीतर ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया। लेकिन वर्तमान में भारतीय पक्ष ने फिर से सभी चिया का १००% परीक्षण करने का कठोर नियम लागू किया है, जिससे दूसरी सीजन की चिया भेजने वाले व्यापारी और किसान प्रभावित हुए हैं।

पहाड़ से आई और भारतीय गोदामों में फंसी चिया के नमूना परीक्षण के लिए भेजे गए चिया के नतीजे पिछले एक हफ्ते से नहीं मिले हैं, ऐसा चिया व्यवसायियों ने बताया। नेपाल में वार्षिक २५ हजार टन (२.५ करोड़ किलो) चिया का उत्पादन होता है, जिसमें लगभग ९० प्रतिशत भारत को निर्यात होती है। विशेष रूप से पूर्वी नेपाल के इलाम, झापा, पाँचथर, धनकुटा और तेह्रथुम में उत्पादित अर्थोडॉक्स चिया भारतीय बाजार होते हुए विश्व बाजार में पहुँचती है।

मेची भन्सार से दो सप्ताह से निर्यात अवरुद्ध मेची भन्सार कार्यालय के सूचना अधिकारी ईश्वर कुमार हुमागाईं ने बताया कि लगभग दो सप्ताह से भारत की ओर चिया निर्यात नहीं हो रही है। “पहले बताए थे अवरोध हट गया है, लेकिन अभी तक चिया यहाँ से नहीं गई है,” उन्होंने कहा। उन्होंने बताया कि दो सप्ताह पहले परीक्षण के लिए भेजी गई ८ टन चिया की स्थिति अस्पष्ट है। पूर्वी नेपाल से उत्पादित चिया भारत, भूटान और बांग्लादेश तक भी जाती है, जिनके लिए मुख्य नाका मेची भन्सार ही है। चिया के इसी मार्ग पर रोक लगने से व्यवसायी परेशान हैं।

भारतीय चिया बोर्ड की रणनीति नेपाली चिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की उद्देश्य: उद्योगी श्रेष्ठ चिया उद्योगी उत्तम श्रेष्ठ के अनुसार भारतीय चिया बोर्ड की रणनीति नेपाली चिया पर पूर्ण रोक लगाने तथा बाजार तोड़ने की है। निर्यात खुले जैसे दिखने के बावजूद भारतीय पक्ष चिया को गोदामों तक पहुँचाकर विभिन्न कारणों से रोक रखता है।

तारागाउँ टी स्टेट और सिद्धेश्वर टी स्टेट के संचालक तथा चिया उत्पादक संघ के पूर्व अध्यक्ष श्रेष्ठ के अनुसार नेपाल और भारत के भन्सार से तो ट्रक पास होते हैं, लेकिन ये चियाएं विभिन्न भारतीय शहरों के गोदामों में फंसी हैं। “हमारी चिया सिलिगुड़ी और कोलकाता के गोदामों में फंसी हुई है,” उन्होंने कहा, “भन्सार से तो गुज़री है, पर नमूना परीक्षण के लिए सैंपलिंग की जा रही है।”

उनके अनुसार लगभग १.५ से २ लाख किलो नेपाली अर्थोडॉक्स चिया भारतीय गोदामों में फंसी हुई है। परीक्षण की प्रक्रिया जटिल और महंगी है, रिपोर्ट आने में २२ दिन तक लग जाता है। “एक परीक्षण शुल्क ११ हजार रुपये से ज्यादा है, पुनः परीक्षण के लिए १५ हजार रुपये देने होते हैं। इतना महंगा शुल्क देने के बाद भी परीक्षण पास होने की गारंटी नहीं,” उद्योगी श्रेष्ठ कहते हैं। भारत के अवरोधों से नेपाली चिया के बाजार और गुणवत्ता दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

पहली सीजन की चिया का मूल्य अच्छा होता था, लेकिन गोदाम में २२–२५ दिन फंसने से गुणवत्ता गिरती है और बाजार मूल्य कम हो जाता है, उन्होंने बताया। “पहली बार जाने पर चिया को अच्छा दाम मिलता था, लेकिन अब समय के कारण इसका असर पड़ रहा है। दूसरी सीजन के चिया का उत्पादन शुरू हो चुका है, पर पहली सीजन की चिया का फैसला नहीं हुआ,” उन्होंने जोड़ा।

सरकार और संबंधित निकायों की भूमिका पर उन्होंने सवाल उठाए। वाणिज्य मंत्रालय ने समस्या समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन व्यवहारिक तौर पर कोई सुधार नहीं हुआ। “मंत्रालय से बातचीत में दुख न हो और समस्या न आएं कहा गया था, उसी आधार पर चिया भेजी गई, लेकिन अब गोदाम में रुकी हुई है,” उन्होंने शिकायत की। नेपाल चिया तथा कॉफी विकास बोर्ड से भी कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ, उनका आरोप है। भारत के चिया बोर्ड सक्रिय है, जबकि नेपाल ने वैसा भूमिका नहीं निभाई है। परीक्षण के नाम पर नेपाली चिया को भारतीय बाजार में प्रवेश नहीं देने व साख गिराने की रणनीति के विरुद्ध कूटनीतिक रूप से मजबूत कदम उठाने की जरूरत है, उद्योगी श्रेष्ठ ने कहा।

भन्सार में नहीं गोदाम में शुरू हुई समस्या नेपाल चिया उत्पादक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिवकुमार गुप्ता ने कहा कि भारत ने कानूनी तौर पर भन्सार में रोक नहीं लगाई, लेकिन आयातक के गोदाम में नई जटिलताएं पैदा कर दीं। पहले भन्सार में रोक होती थी, लेकिन इस बार भन्सार पास होने के बाद भारत ने कड़ी कार्रवाई की है। “अभी भन्सार में समस्या नहीं है, लेकिन आयातक के गोदाम से नमूना परीक्षण कर पास कराने के बाद ही चिया बेची जा सकती है।”

उनके अनुसार, इस नए नियम ने भारतीय व्यापारियों को नेपाली चिया खरीदने से हिचकिचाने पर मजबूर कर दिया है। रिपोर्ट न आने तक सामान रोक रखा जाना और निवेश जोखिम के कारण व्यापारी खरीद में संकोच कर रहे हैं। गुप्ता के अनुसार यह ‘अप्रत्यक्ष’ रोकथाम की रणनीति है। “चिया बोर्ड ने नमूना रिपोर्ट न आने तक बेचने न देने का नियम बनाया है, इसलिए व्यापारी जोखिम उठाने से कतराते हैं। कानूनी तौर पर भन्सार में रोक नहीं लगाई जा सकी तो यह तरीका अपनाया गया है।”

चिया व्यवसायियों ने सरकार से कूटनीतिक प्रयास कर नेपाली चिया निर्यात को आसान बनाने की मांग की है। बार-बार भारत द्वारा निर्मित तकनीकी व प्रशासनिक अड़चनों से नेपाली चिया की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। इन अवरोधों को हटाने के लिए निजी क्षेत्र ने भारत के नेपाली दूतावास के माध्यम से कूटनीतिक पहल करने का अनुरोध किया है। यस पार्टी के सभापति रवि लामिछाने भारत भ्रमण पर रहते हुए व्यवसायियों ने चिया निर्यात में आ रही प्रशासनिक एवं तकनीकी समस्याओं को दूर करने की मांग दूतावास के जरिए की है।

म्यानचेस्टर सिटीबाट सर्वाधिक १९ खेलाडी विश्वकपमा, अन्य रोचक तथ्यहरू फिफा विश्वकप २०२६ संग सम्बन्धित

फिफाले सन् २०२६ को विश्वकपका लागि ४८ देशका १,२४८ खेलाडी समावेश गरेको आधिकारिक सूची सार्वजनिक गरेको छ। अर्जेन्टिनाका लियोनेल मेसी, पोर्चुगलका क्रिस्टियानो रोनाल्डो र मेक्सिकोका गुइलेर्मो ओचोआ छैटौं पटक विश्वकप टोलीमा छनोट भएका छन्। यस विश्वकपमा इंग्ल्यान्डका क्लबहरूबाट सबैभन्दा धेरै २०० खेलाडी र म्यानचेस्टर सिटीबाट सर्वाधिक १९ खेलाडीले प्रतिनिधित्व गर्दैछन्। २१ जेठ, काठमाडौं – आगामी जुन ११ देखि संयुक्त राज्य अमेरिका, मेक्सिको र क्यानडामा आयोजना हुन लागेको फिफा विश्वकप २०२६ को लागि सबै सहभागी राष्ट्रको अन्तिम टोली सार्वजनिक भइसकेको छ। फिफाले जुन २ मा ४८ टोलीहरूको आधिकारिक सूची सार्वजनिक गर्यो। प्रत्येक टोलीमा २६ खेलाडी छन् र यस विश्वकपमा कुल १,२४८ खेलाडी प्रतियोगितामा सहभागी हुँदैछन्।

विश्वकपमा सहभागी टोलीको संख्या ३२ बाट बढेर ४८ पुगेपछि खेलाडीहरूको संख्या पनि उल्लेख्य रूपमा बढेको छ। अन्तिम टोली सूची सार्वजनिक भएपछि विश्वकप खेल्न आउने टोलीका केही विशेषताहरू यस प्रकार छन्: इंग्ल्यान्डका क्लबहरूमा खेलिरहेका २०० खेलाडी विश्वकपका विभिन्न टिममा समावेश छन्। त्यस्तै जर्मनीका क्लबबाट १०९, फ्रान्स र स्पेनका क्लबबाट समान रूपमा ८६, इटलीबाट ७१, साउदी अरेबियाबाट ४९, टर्कीयाबाट ४५, अमेरिकाबाट ४२, नेदरल्यान्ड्सबाट ४६, ब्राजिल र पोर्चुगलबाट ३६-३६ खेलाडी रहेका छन्।

स्कटल्यान्डका गोलकिपर क्रेग गोर्डन विश्वकप टोलीमा समावेश सबैभन्दा वृद्ध खेलाडी हुन्। उनले आउटफिल्ड खेलाडीहरू मध्ये सबैभन्दा वृद्ध भएर विश्वकप खेल्ने अवसर पाउनेछन्। इजिप्टका गोलकिपर एसाम अल हाडारीले सन् २०१८ मा ४५ वर्षको उमेरमा विश्वकप खेलेका थिए। ४१ वर्षीय क्रिस्टियानो रोनाल्डो पनि विश्वकप खेल्ने चौथो सबैभन्दा वृद्ध खेलाडी बन्ने क्रममा छन्। २२ खेलाडीले पहिले पनि फिफा विश्वकप जितिसकेका छन् र उनीहरू सन् २०२६ को विश्वकपमा प्रतिस्पर्धा गर्ने टोलीमा छन्।

म्यानचेस्टर सिटीबाट सर्वाधिक १९ खेलाडीलाई विश्वकपका लागि छनोट गरिएको छ। यी खेलाडीहरू अल्जेरिया, बेल्जियम, क्रोएशिया, इजिप्ट, इंग्ल्यान्ड, फ्रान्स, घाना, नेदरल्यान्ड्स, नर्वे, पोर्चुगल, स्पेन र उज्बेकिस्तानका राष्ट्रिय टिमहरूमा छनोट भएका छन्। मेक्सिकोका १७ वर्षीय गिब्लर्टो मोरा यस विश्वकपमा समावेश सबैभन्दा कान्छा खेलाडी हुन्। अर्जेन्टिनाका लियोनेल मेसीले विश्वकपमा हालसम्म सर्वाधिक १३ गोल गर्दै आएका छन् र आगामी विश्वकपमा बढी गोल गर्ने लक्ष्यमा छन्।

म्यानचेस्टर सिटीबाट सर्वाधिक १९ खेलाडी समावेश, अन्य रोचक तथ्यहरू

समाचार सारांश

OK AI द्वारा सिर्जित, संपादकीय समीक्षा अधीन।

  • फिफाले सन् २०२६ को विश्वकपका लागि ४८ देशका १,२४८ खेलाडीहरू समावेश गरेको आधिकारिक सूची सार्वजनिक गरेको छ।
  • अर्जेन्टिनाका लियोनेल मेसी, पोर्चुगलका क्रिस्टियानो रोनाल्डो र मेक्सिकोका गुइलेर्मो ओचोआ छैटौं पटक विश्वकप टोलीमा चयन भएका छन्।
  • यस विश्वकपमा इंग्ल्यान्डका क्लबहरूबाट सबैभन्दा धेरै २०० खेलाडी र म्यानचेस्टर सिटीबाट सर्वाधिक १९ खेलाडीले प्रतिनिधित्व गर्दैछन्।

२१ जेठ, काठमाडौं – आगामी जुन ११ देखि संयुक्त राज्य अमेरिका, मेक्सिको र क्यानडामा आयोजना हुन लागेको फिफा विश्वकप २०२६ का लागि सबै सहभागी राष्ट्रहरूको अन्तिम टोली सार्वजनिक भइसकेको छ।

फिफाले जुन २ मा ४८ टोलीहरूको आधिकारिक सूची सार्वजनिक गर्‍यो। प्रत्येक टोलीमा २६ खेलाडी रहेका छन् र यस विश्वकपमा कुल १,२४८ खेलाडीहरू सहभागी हुँदैछन्।

विश्वकपमा सहभागी टोलीहरूको संख्या ३२ बाट बढेर ४८ पुगेपछि खेलाडीहरूको संख्यामा पनि उल्लेखनीय वृद्धि भएको छ।

अन्तिम टोली सूची सार्वजनिक भएपछिको विश्वकप खेल्न आउने टोलीका केही विशेष तथ्यहरू यसप्रकार छन्:

२००: इंग्ल्यान्डका क्लबहरूमा खेलिरहेका २०० खेलाडी विश्वकपका विभिन्न टोलीहरूमा समावेश छन्। त्यसैगरी जर्मनीका क्लबबाट १०९, फ्रान्स र स्पेनका क्लबबाट समान रूपमा ८६–८६, इटलीबाट ७१, साउदी अरेबिया बाट ४९, टर्कीबाट ४५, अमेरिकाबाट ४२, नेदरल्यान्ड्सबाट ४६, ब्राजिल र पोर्चुगलबाट ३६–३६ खेलाडी रहेका छन्।

४३: स्कटल्यान्डका गोलकिपर क्रेग गोर्डन विश्वकप टोलीमा समावेश सबैभन्दा वृद्ध खेलाडी हुन्। उनी आउटफिल्ड खेलाडीहरू मध्ये सबैभन्दा जेठो हुँदै विश्वकप खेलनेछन्। इजिप्टका गोलकिपर एसाम अल हादारीले २०१८ मा ४५ वर्षको उमेरमा विश्वकप खेलेका थिए। ४१ वर्षीय क्रिस्टियानो रोनाल्डो यस विश्वकपमा खेल्ने चौथो सबैभन्दा वृद्ध खेलाडी बन्ने क्रममा छन्।

२५: कतार र साउदी अरेबियाको टोलीमा घरेलु लिगका सबैभन्दा धेरै, २५–२५ खेलाडी छन्। कतारका लेफ्ट ब्याक हुमन अहमद स्पेनको क्लबमा छन् भने साउदीका साउद अब्दुल्हामिद फ्रान्समा खेल्छन्। केप भर्डे, डायआर कंगो, आइभरी कोस्ट, कुराकाओ, सेनेगल र उरुग्वेका टोलीहरूमा सबै विदेशी लिगका खेलाडी छन्।

२२: २२ खेलाडीले पहिले पनि फिफा विश्वकप जितिसकेका छन् र उनीहरू २०२६ को विश्वकपमा प्रतिस्पर्धा गर्ने टोलीमा छन्। २०२२ मा कतारमा विश्वकप जितेको अर्जेन्टिना टोलीबाट १७ खेलाडी, २०१४ को विश्वकप विजेता जर्मनीबाट मानुएल नोएर लगायत छन्। फ्रान्सलाई दोस्रो पटक च्याम्पियन बनाउने उसमान डेम्बेले, लुकास हर्नान्डेज, एन’गोलो कान्टे र केलियन एमबाप्पे पनि टोलीमा छनोट भएका छन्।

अर्जेन्टिनाका मुख्य प्रशिक्षक लियोनेल स्कालोनीले २०२२ विजेता टोलीका १७ जना खेलाडीहरूलाई थपेका छन्। तीमध्ये थियागो आल्माडा, जुलियन अल्भारेज, रोड्रिगो डे पाउल, एन्जो फर्नान्डेज, एलेक्सिस म्याक एलिस्टर, एमिलियानो मार्टिनेज, लाउटारो मार्टिनेज, लिसान्द्रो मार्टिनेज, लियोनेल मेसी, नाहुएल मोलिना, गोन्जालो मोन्टिएल, निकोलस ओटामेन्डी, एक्सेक्विएल पालासियोस, लिएन्ड्रो परेडेस, क्रिस्टियन रोमेरो, गेरोनिमो रुल्ली र निकोलस टाग्लियाफिको रहेका छन्।

१९: म्यानचेस्टर सिटीबाट सबैभन्दा धेरै १९ खेलाडी विश्वकपका लागि छनोट भएका छन्। यी खेलाडीहरू अल्जेरिया, बेल्जियम, क्रोएशिया, इजिप्ट, इंग्ल्याण्ड, फ्रान्स, घाना, नेदरल्यान्ड्स, नर्वे, पोर्चुगल, स्पेन र उज्बेकिस्तानका राष्ट्रिय टोलीमा छनोट भएका छन्।

त्यस्तै जर्मन क्लव बायर्न म्युनिकबाट १८ खेलाडी, आर्सनल र पिएसजीबाट समान १६, बार्सिलोनाबाट १५, अल हिलाल, एट्लेटिको मड्रिड, क्रिस्टल प्यालेस र म्यानचेस्टर यूनाइटेडबाट प्रत्येक १२ खेलाडी छनोट भएका छन्। बोरुसिया डर्टमन्ड, गालातासारे र लिभरपुलबाट ११–११ खेलाडी छन्।

१७: मेक्सिकोका १७ वर्षीय गिब्लर्टो मोरा यस विश्वकपमा समावेश सबैभन्दा कान्छा खेलाडी हुन्। उनको टोलीका गोलकिपर गुइलेर्मो ओचोआ छैटौं पटक विश्वकप खेल्दैछन्। मोराले यदि यो विश्वकपमा खेले भने उनी कन्काकाफ क्षेत्रबाट विश्वकप खेल्ने सबैभन्दा कान्छा खेलाडी बन्नेछन्।

१३: अर्जेन्टिनाका लियोनेल मेसीले विश्वकपमा अहिलेसम्म सबैभन्दा धेरै १३ गोल गरिसकेका छन् र आगामी विश्वकपमा अझ बढी गोल गर्ने लक्ष्यमा छन्। सबैभन्दा धेरै गोल गर्ने खेलाडी जर्मनीका मिरवस्लाव क्लोज हुन्, जसले १६ गोल गरेका थिए। मेसीसँगै केलियन एमबाप्पेले १२, ह्यारी केन, नेमार र क्रिस्टियानो रोनाल्डोले समान ८–८ गोल गरेका छन्।

६: लियोनल मेसी, गुइलेर्मो ओचोआ र क्रिस्टियानो रोनाल्डोले छैटौं पटक विश्वकप खेल्ने अवसर पाएका छन्। मेसी र रोनाल्डोले पहिले पाँच पटक विश्वकप खेलेका थिए भने ओचोआले तीन संस्करणमा मात्र भाग लिएका थिए।

२.०५: अस्ट्रेलियाका गोलकिपर फ्लोरिन विगेल विश्वकपमा सहभागी सबैभन्दा अग्ला खेलाडी हुन्। उनको उचाइ २.०५ मिटर छ। २०२२ मा नेदरल्यान्ड्सका गोलकिपर आन्द्रेस नोर्पर्ट २.०३ मिटर अग्ला थिए। सन् २०२६ को विश्वकपमा इंग्ल्यान्डका डिफेन्डर डान बर्न र कोलम्बियाका गोलकिपर अल्भारो मोन्टेरो दुवै २.०१ मिटर अग्ला छन्।

१.६०: पनामा टोलीका प्लेयर सेजार यानिस यस विश्वकपमा सबैभन्दा सानो शारीरिक कदका खेलाडी हुन्। उनको उचाइ १.६० मिटर छ। दोस्रो स्थानमा कुराकाओका आक्रमणकारी जेरेमी एन्टोनिस छन्, जसको उचाइ १.६४ मिटर छ।

गौतमबुद्ध विमानस्थल से नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भारतीय पक्ष से अनुरोध

समाचार सारांश

समीक्षा किए गए स्रोतों पर आधारित।

  • भारत के गोरखपुर में सम्पन्न ‘‘भारत–नेपाल आर्थिक सहयोग मंच–२०२६’’ में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
  • कार्यक्रम में गौतमबुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का पूर्ण संचालन और लुम्बिनी के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन संवर्धन में भारतीय निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी आवश्यक बताई गई।
  • नेपाल और भारत के उद्योगपतियों ने भैरहवा में विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) में भारतीय उद्योगों को आकर्षित करने के लिए नीतिगत और व्यावसायिक सहयोग की आवश्यकता जताई।

२१ जेठ, बुटवल। नेपाल और भारत के बीच आर्थिक, व्यापारिक और निवेश सहयोग को और प्रभावी बनाकर साझा समृद्धि का आधार तैयार करने के लिए दोनों देशों के सरकारी और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने जोर दिया है।

गौतमबुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पूर्ण संचालन, सीमा पार क्षेत्र के औद्योगिक विकास और लुम्बिनी के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन संवर्धन में भारत के निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।

गुरुवार को भारत के गोरखपुर में सम्पन्न ‘‘भारत–नेपाल आर्थिक सहयोग मंच–२०२६’’ में शामिल वक्ताओं ने कृषि, पर्यटन, ऊर्जा, बैंकिंग, आधारभूत संरचना, औद्योगिक निवेश और सीमा पार व्यापार को प्राथमिकता में रखकर द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाईयों पर ले जाने की बात कही।

कार्यक्रम में नेपाली निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने गौतमबुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए भारतीय एयरलाइंस कंपनियों और निजी क्षेत्र के सहयोग की आवश्यकता बताई।

हवाई अड्डे के संचालन से लुम्बिनी क्षेत्र के पर्यटन, व्यापार और निवेश संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान होने की उम्मीद व्यक्त की गई।

चर्चा के दौरान भैरहवा में स्थित विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) में भारतीय उद्योगों को आकर्षित करने हेतु नीतिगत और व्यावसायिक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने सीमा पार क्षेत्र के औद्योगिक संभावनाओं का उपयोग करते हुए संयुक्त निवेश और उत्पादन विस्तार पर बल दिया।

लुम्बिनी को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए भारतीय पर्यटन व्यवसायियों और निजी क्षेत्र को अधिक भूमिका निभानी चाहिए, इस बात पर भी वक्ताओं ने जोर दिया। बुद्ध के जन्मस्थान लुम्बिनी को भारतीय बौद्ध पर्यटकों और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के प्रमुख गंतव्य के रूप में संवर्धित करने हेतु संयुक्त अभियान चलाने का सुझाव दिया गया।

भारत में नेपाली दूतावास के सहसचिव तारानाथ अधिकारी ने कहा कि नेपाल और भारत के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए व्यापार, पर्यटन, निवेश और आधारभूत संरचना विकास में सहयोग बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी आर्थिक समृद्धि की मजबूत नींव बन सकती है।

भारत में नेपाली दूतावास के आर्थिक सलाहकार रवींद्रजंग थापा ने कहा कि नेपाल में निवेश, उद्योग, पर्यटन और व्यापार में अपार संभावनाएं हैं, और निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगी।

नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के उपाध्यक्ष कृष्णप्रसाद शर्मा ने बताया कि व्यापार की सुविधा, निवेश-मैत्री वातावरण का सृजन और सीमा पार क्षेत्र के आर्थिक विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नेपाल–भारत आर्थिक संबंधों को वास्तविक और परिणाममुखी बनाने में निजी क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है।

भारत-नेपाल आर्थिक सहयोग मंच के सचिव, उपाध्यक्ष और कार्यक्रम अध्यक्ष कमलेश जैन ने नेपाल-भारत आर्थिक सहयोग के अवसरों, व्यापारिक संबंधों और निजी क्षेत्र की भूमिका के बारे में जानकारी देते हुए दोनों देशों के साझेदारी को और अधिक परिणाममुखी बनाने की आवश्यकता बताई।

भारतीय उद्योगपति अनुकुल भटनागर ने कहा कि नेपाल और भारत के ऐतिहासिक संबंधों को आर्थिक विकास से जोड़ना चाहिए तथा व्यापार, उद्योग, निवेश और वित्तीय सहयोग के विस्तार के माध्यम से दोनों देश पारस्परिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

नेपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स लुम्बिनी प्रदेश के अध्यक्ष टंक पोखरेल ने कहा कि सीमा पार क्षेत्र के व्यापार, पर्यटन और उद्योग संवर्धन के लिए निजी क्षेत्र के बीच सहयोग बढ़ाना आवश्यक है।

नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ लुम्बिनी प्रदेश के अध्यक्ष ठाकुरकुमार श्रेष्ठ ने सीमा पार क्षेत्र के आर्थिक विकास, पर्यटन और औद्योगिक सहयोग के विस्तार पर जोर दिया।

कार्यक्रम में नेपाल और भारत के उद्योगपतियों, व्यवसायियों, बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधियों, वाणिज्य और उद्योग संघ के पदाधिकारियों तथा विशेषज्ञों के बीच गोलमेज़ चर्चा, अंतःक्रिया और अनुभवों के आदान-प्रदान का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों ने गौतमबुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन, लुम्बिनी पर्यटन संवर्धन, विशेष आर्थिक क्षेत्र में निवेश विस्तार, व्यापारिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण, आधारभूत संरचना विकास और निजी क्षेत्र के सहयोग के माध्यम से द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और प्रभावी बनाने का निष्कर्ष निकाला।

एक प्रसिद्ध गायिकालाई लगातार उत्पीड़न गरेको आरोपमा युवक पक्राउ

२१ जेठ, काठमाडौं । एक प्रसिद्ध गायिकालाई विभिन्न माध्यमबाट अनावश्यक पीडा र लगातार उत्पीड़न गरेको आरोपमा प्रहरीले एक युवकलाई पक्राउ गरेको छ। प्रहरीले जनाएको छ कि २२ वर्षीय अजय यादवलाई जिल्ला प्रहरी कार्यालय पर्साको समन्वयमा वीरगञ्जबाट पक्राउ गरिएको हो। यादव बारा जिल्लाको देवताल गाउँपालिका–२ का स्थायी बासिन्दा हुन्। उक्त गायिकाले काठमाडौंमा उनीविरुद्ध उजुरी दर्ता गराएकी थिइन्। उजुरीका आधारमा प्रारम्भिक अनुसन्धानमा यादवले लामो समयदेखि विभिन्न फोन नम्बरबाट ती गायिकालाई पटक–पटक फोन गरेर उत्पीड़न गरिरहेको देखिएको छ। प्रहरीले पक्राउ परिसकेको यादवलाई थप अनुसन्धान र आवश्यक कानुनी प्रक्रिया अघि बढाउन काठमाडौं ल्याउने जनाएको छ। घटनासम्बन्धी थप अनुसन्धान जारी रहेको प्रहरीले बताएको छ।

किम जोङ से मिलने पर महिला फुटबॉल खिलाड़ी हुईं भावुक

उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोङ ने एएफसी महिला चैंपियंस लीग विजेता नाएगोह्याङ महिला फुटबॉल क्लब की खिलाड़ीओं से प्योंगयांग में मुलाकात कर उन्हें बधाई दी है। नाएगोह्याङ महिला फुटबॉल क्लब ने जापान की टोक्यो वर्दी बेलेजा को १–० से हराकर ऐतिहासिक एएफसी महिला चैंपियंस लीग का खिताब जीता था। इस अवसर पर किम ने नाएगोह्याङ और उत्तर कोरिया की यू–१७ महिला राष्ट्रीय टीम के बीच मैत्रीपूर्ण मैच का भी अवलोकन किया।

२१ जेठ, काठमांडू। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोङ से मिलने पर उत्तर कोरियाई महिला फुटबॉल खिलाड़ी भावुक हो गईं। एएफसी महिला चैंपियंस लीग के ऐतिहासिक खिताब विजेता उत्तर कोरियाई क्लब नाएगोह्याङ की खिलाड़ियों का किम जोङ ने इस सप्ताह प्योंगयांग में व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया, जिससे वे खुशी से भावुक हो उठीं। किम ने उन्हें गले लगाकर सामूहिक तस्वीर खिंचवाई।

नाएगोह्याङ महिला एफसी ने २३ मई को दक्षिण कोरिया के सुवान में हुए फाइनल में जापान की टोक्यो वर्दी बेलेजा को १–० से पराजित कर एएफसी महिला चैंपियंस लीग का खिताब जीता। इस प्रकार यह प्रतियोगिता जीतने वाली पहली उत्तर कोरियाई क्लब बनी। उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया के अनुसार किम ने टीम को इस ऐतिहासिक सफलता के लिए बधाई दी। उन्होंने नाएगोह्याङ महिला क्लब और उत्तर कोरिया की यू–१७ महिला राष्ट्रीय टीम के बीच मैत्रीपूर्ण मैच का भी अवलोकन किया।

सभामुख अर्याल ने नई पीढ़ी की भावना और बदलती परिस्थितियों के आधार पर संविधान संशोधन की प्रतिबद्धता जताई

प्रतिनिधि सभा के सभामुख डोलप्रसाद अर्याल ने नई पीढ़ी की भावना और बदलती परिस्थितियों के अनुसार संविधान संशोधन करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। काभ्रेपलाञ्चोक में आयोजित जिला समन्वय समिति की नववीं जिला सभा एवं समीक्षा कार्यक्रम में उन्होंने आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कानून बनाए जाने और संविधान में आवश्यक संशोधन करने की बात कही। २१ जेठ को काभ्रेपलाञ्चोक में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘बहुत वर्षों तक जनता ने राज्य होने का अनुभव नहीं किया, संविधान बनने के बाद भी आवश्यक कानून नहीं बन सके, न्याय प्राप्त नहीं हो पाया। अब नई पीढ़ी की भावना और वर्तमान परिवर्तित परिस्थितियों के अनुसार संविधान संशोधन किया जाएगा।’

सभामुख अर्याल ने संविधान की धारा ५६ में संघ, प्रदेश और स्थानीय तह को सरकार के तीन स्तर के रूप में परिभाषित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा, ‘सिंहदरबार में संघीयता की परीक्षा नहीं होती, बल्कि स्थानीय तह में सेवा प्रदान करते वक्त होती है।’ संविधान द्वारा स्थानीय सरकार को दिए गए अधिकार, जिम्मेदारियाँ और अवसरों को नागरिकों तक प्रत्यक्ष रूप से पहुँचाना सभी की साझा जिम्मेदारी है, उन्होंने बताया।

संघीयता के अभ्यास के साथ-साथ जिला समन्वय समिति की भूमिका, प्रभावकारिता और औचित्य को लेकर बहस जारी है। हालांकि, संविधान में परिकल्पित समन्वय, सहयोग और साझा विकास की भावना को व्यवहार में लागू करने के लिए जिले स्तरीय समितियों को समय-समय पर सुदृढ़ और प्रभावी बनाना आवश्यक है, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया। ‘संविधान संशोधन या संघीय संरचना की पुनः समीक्षा भविष्य के लोकतांत्रिक विमर्श के विषय हो सकते हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति में संविधान द्वारा निर्धारित भूमिकाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना हमारा मुख्य कर्तव्य है,’ उन्होंने कहा।

नववीं जिला सभा एवं समीक्षा कार्यक्रम में प्रतिनिधि सभा सदस्य बदन भण्डारी, मधु चौलागाईं, डॉ. राम लामा तथा बागमती प्रदेश के सदस्य लक्ष्मण लम्साल, रत्न ढकाल और रुकु चौलागाईं भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली १३ पालिकाओं को सम्मानित किया गया।

सभामुख अर्याल: नई पीढ़ी की भावना और परिस्थितियों के अनुसार संविधान संशोधन होगा

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के साथ।

  • प्रतिनिधि सभा के सभामुख डोलप्रसाद अर्याल ने कहा कि नई पीढ़ी की भावना और बदलती परिस्थितियों के अनुसार संविधान संशोधन किया जाएगा।
  • सभामुख अर्याल ने कहा, “संघीयता की असली परीक्षा सिंहदरबार में नहीं, स्थानीय तह में सेवा प्रवाह में होती है।”
  • काभ्रेपलाञ्चोक में आयोजित नवें जिला सभा में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट 13 पालिकाओं को सम्मानित किया गया।

21 जेठ, काभ्रेपलाञ्चोक – प्रतिनिधि सभा के सभामुख डोलप्रसाद अर्याल ने कहा है कि नई पीढ़ी की भावना और बदलती परिस्थितियों के अनुसार संविधान में संशोधन किया जाएगा।

काभ्रेपलाञ्चोक में आयोजित जिला समन्वय समिति की नवें जिला सभा एवं समीक्षा कार्यक्रम में सभामुख अर्याल ने बताया कि आवश्यकतानुसार कानून बनाए जाएंगे और संविधान में जरूरी संशोधन भी किए जाएंगे।

‘लंबे समय तक जनता यह महसूस नहीं कर पाई कि उनके पास राज्य है, संविधान बनने के बाद भी आवश्यक कानून नहीं बन सके, न्यायालय से न्याय नहीं मिल पाया। अब नई पीढ़ी की भावना और वर्तमान परिवर्तित परिस्थितियों के अनुसार संविधान संशोधन होगा,’ उन्होंने कहा, ‘आवश्यकतानुसार कानून बनेंगे और संविधान संशोधित होगा। इसके लिए सभी दलों का एकजुट होना जरूरी है।’

सभामुख अर्याल ने बताया कि संविधान की धारा 56 संघ, प्रदेश और स्थानीय तह को राज्य शक्ति प्रयोग करने वाली तीन सरकारों के रूप में परिभाषित करती है, साथ ही ये तीनों स्तर सहकार्य, सह-अस्तित्व और समन्वय के सिद्धांतों पर आधारित संघीय शासन प्रणाली के स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि संघीयता की सफलता केवल कागजी अधिकारों पर नहीं, बल्कि जनता के दैनिक जीवन में नजर आने वाले बदलाव से मापी जानी चाहिए।

‘संघीयता की असली परीक्षा सिंहदरबार में नहीं, स्थानीय तह में सेवा प्रवाह के दौरान होती है,’ उन्होंने ज़ोर दिया।

सभामुख अर्याल ने कहा कि संविधान द्वारा स्थानीय सरकारों को दिए गए अधिकार, जिम्मेदारियाँ और अवसरों का नागरिकों को सीधे अनुभव कराया जाना सबकी साझा जिम्मेदारी है।

अर्याल ने कहा कि संघीयता के अभ्यास के साथ-साथ जिला समन्वय समिति की भूमिका, प्रभावकारिता और औचित्य पर चर्चा होती रही है, लेकिन संविधान में कल्पित समन्वय, सहकार्य और साझा विकास के भाव को व्यवहार में लाने के लिए जिला स्तर की समितियों को समय के अनुसार मजबूत और प्रभावी बनाना आवश्यक है।

‘संविधान संशोधन या संघीय संरचना का पुनरावलोकन भविष्य की लोकतांत्रिक बहसों का विषय हो सकता है, लेकिन वर्तमान में संविधान के तहत दी गई भूमिकाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हमारी मुख्य जिम्मेदारी है,’ उन्होंने कहा।

नवें जिला सभा एवं समीक्षा कार्यक्रम में प्रतिनिधि सभा सदस्य बदन भण्डारी, मधु चौलागाईं, डॉ. राम लामा तथा बागमती प्रदेश के सदस्य लक्ष्मण लम्साल, रत्न ढकाल और रुकु चौलागाईं ने भी भाग लिया।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 13 पालिकाओं को सम्मानित किया गया।

पालुङटार में अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों का सम्मान

समाचार सारांश

तैयार किया गया, संपादकीय समीक्षा के साथ।

  • गोरखा के पालुङटार नगरपालिका ने २१वें जातीय भेदभाव एवं छुआछूत उन्मूलन दिवस के अवसर पर गुरुवार को तीन अंतरजातीय जोड़ों को सम्मानित किया।
  • सम्मानित जोड़ों में जेम्स कोइराला एवं गंगा लामा, सुजन थापा क्षेत्री एवं रंजीता कुमाल, तथा बरदान श्रेष्ठ एवं सचिन गुरुङ शामिल हैं।
  • मयर विवश चिंतन ने कहा, ‘अंतरजातीय विवाह करके सामाजिक परिवर्तन के अभियान में अमूल्य योगदान के लिए हम उन्हें सम्मानित कर रहे हैं।’

२१ जेठ, गोरखा। गोरखा के पालुङटार नगरपालिका ने अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों को सम्मानित किया है। २१वें जातीय भेदभाव तथा छुवाछूत उन्मूलन दिवस के अवसर पर गुरुवार को तीन जोड़ों को सम्मानित करने की जानकारी नगरपालिका ने दी।

वार्ड नं। १ के जेम्स कोइराला और गंगा लामा, वार्ड नं। ५ के सुजन थापा क्षेत्री और रंजीता कुमाल, तथा उसी वार्ड के बरदान श्रेष्ठ और सचिन गुरुङ की जोड़ों को मयर विवश चिंतन ने सम्मानित किया।

उन्होंने कहा, ‘अंतरजातीय विवाह कर सामाजिक परिवर्तन के अभियान में अमूल्य योगदान के कारण हम उन्हें सम्मानित कर रहे हैं।’

देवकोटाले बताया कि सम्मान समारोह में खादा पहनाकर और प्रशंसा पत्र देकर उन्हें सम्मानित किया गया।

उसी कार्यक्रम के तहत ‘जातीय भेदभाव के व्यवहारिक उन्मूलन में विद्यार्थियों की भूमिका’ विषय पर वाक् प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।

प्रतियोगिता में युनाइटेड बोर्डिंग स्कूल के प्रिंस गिरी प्रथम, त्रिवेणी मावि की रोजिना गुरुङ द्वितीय, भवानी मावि की दीपशिखा बख्रेल तृतीय, और अन्नपूर्ण मावि की समीक्षा रम्तेल को सांत्वना पुरस्कार मिला।

उन्हें नकद पुरस्कार भी प्रदान किया गया। प्रतियोगिता में कुल २० विद्यार्थी शामिल हुए थे।

सोनम वाङचुक और दिपके कक्रोच जनता पार्टी के दिल्ली प्रदर्शन में शामिल होंगे

शिक्षाविद् सोनम वाङचुक ने कहा है कि यदि शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान 5 जून तक इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वे 6 जून को कक्रोच जनता पार्टी के दिल्ली प्रदर्शन में भाग लेंगी। कक्रोच जनता पार्टी ने परीक्षा में अनियमितताओं के विरोध में 6 जून को दिल्ली के जन्तरमंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान करते हुए तीन प्रवक्ता नियुक्त किए हैं। भारत सरकार ने परीक्षा में अनियमितताओं की जांच के लिए केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के अध्यक्ष और सचिव को पद से हटाकर एक सदस्यीय समिति का गठन किया है।

15 मई को भारत के सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद ‘कक्रोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) का उदय हुआ। नवयुवाओं को कक्रोच से तुलना करने पर सोशल मीडिया पर तीव्र प्रतिक्रिया स्वरूप यह पार्टी स्थापित की गई। कम ही समय में इस पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी से अधिक समर्थक प्राप्त कर काफी लोकप्रियता हासिल की है। सीजेपी के संस्थापक अभिजित दिपके ने कहा, ‘मैंने इतनी बड़ी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं की थी। यह पूरी तरह अप्रत्याशित और स्वाभाविक समर्थन है।’

1 जून को दिपके ने शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से इस्तीफा मांगते हुए नई दिल्ली के जन्तरमंतर पर 6 जून को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की घोषणा की थी। इससे पहले भी यह पार्टी संसद तक जाकर अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा इस पार्टी में शामिल होने वाली पहली प्रमुख नेता हैं। दिपके ने कहा, ‘नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के कारण आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के पक्ष में हम लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं।’

सोनम वाङचुक सीजेपी के नए नेतृत्व के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरी हैं। उन्होंने लद्दाख के पहाड़ी इलाके से शुरू हुई ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन और जेल यात्रा पूरी कर ली है। वाङचुक ने कहा, ‘इस अभियान को लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के रूप में देखना चाहिए, इसे खतरा नहीं माना जाना चाहिए।’ उन्होंने पुनः कहा कि यदि शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान 5 जून तक इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वे 6 जून को कक्रोच जनता पार्टी के दिल्ली प्रदर्शन में शामिल होंगी। दिपके ने भी कहा, ‘नीट प्रश्नपत्र लीक और सीबीएसई मूल्यांकन विवाद के कारण प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए।’

FIFA विश्व कप 2026 में अनुपस्थित रहेंगे ये बड़े सितारे

यूरोपियन चैंपियंस लीग जीतने के साथ ही इस सत्र के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित हुए जॉर्जियन मेस्सी और कवाराडोना के नाम से प्रसिद्ध 25 वर्षीय विंगर ‘क्वारा’ इस बार FIFA विश्व कप 2026 में नजर नहीं आएंगे।

समाचार सारांश

  • जॉर्जियन फुटबॉलर ख्विचा कवारात्स्खेलिया की फ्रांसीसी क्लब पीएसजी ने लगातार दूसरी बार UEFA चैंपियंस लीग का खिताब जीता।
  • चैंपियंस लीग 2025-26 के सीज़न में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कवारात्स्खेलिया को प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया।
  • जॉर्जिया क्वालीफाई न कर पाने के कारण कवारात्स्खेलिया FIFA विश्व कप 2026 में खेलने में असमर्थ होंगे।

21 जेठ, काठमांडू। जॉर्जियन मेस्सी के नाम से प्रसिद्ध खिलाड़ी ख्विचा कवारात्स्खेलिया का नाम डिएगो म्याराडोना के साथ जोड़ा जाता है, और क्रिस्टियानो रोनाल्डो भी उनके आदर्श खिलाड़ी हैं। विश्व के तीन महान खिलाड़ियों के साथ नाम जुड़ने पर कैसे गर्व की अनुभूति होती है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

ख्विचा का नाम उच्चारण कठिन है, इसलिए कई बार उन्होंने खुद से इसका सही उच्चारण भी करवाया है। वे खुद को संक्षेप में ‘क्वारा’ कहने के लिए कहते हैं।

कवारात्स्खेलिया ने हाल ही में फ्रांसीसी क्लब पेरिस सैंट जर्मेन (पीएसजी) के साथ यूरोप की सबसे प्रतिष्ठित क्लब फुटबॉल प्रतियोगिता UEFA चैंपियंस लीग का खिताब जीता। पीएसजी को लगातार दूसरी बार चैंपियन बनाने में उनके शानदार योगदान को व्यक्तिगत पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया, जिसमें उन्हें 2025-26 सीजन के चैंपियंस लीग का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।

लेकिन अपने करियर के चरम पर मौजूद 25 वर्षीय विंगर ख्विचा अगले सप्ताह शुरू होने वाले FIFA विश्व कप 2026 में खेलते हुए नजर नहीं आएंगे।

कभी-कभी फुटबॉल में ऐसे फैसले लेनी पड़ती हैं। खेल में चमकते हुए भी विश्व कप खेलने का मौका हाथ नहीं आता क्योंकि विश्व कप के लिए राष्ट्र को क्वालीफाई करना होता है।

जॉर्जियन मेसी के नाम से मशहूर ख्विचा विश्व के बेहतरीन विंगरों में शुमार हैं, पर दुर्भाग्यवश उनका देश जॉर्जिया FIFA विश्व कप 2026 के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया है।

इस वजह से 11 जून से अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में होने वाले विश्व फुटबॉल महाकुंभ में उन्हें देखा नहीं जा सकेगा। ख्विचा का जादू भी इस सबसे बड़े विश्व मंच पर नहीं दिखेगा। वह इस विशाल टूर्नामेंट के एक बड़े दर्शक के रूप में रहेंगे।

पीएसजी को लगातार दूसरी बार चैंपियंस लीग दिलाने में उनके योगदान के बावजूद यह सत्य है कि 2025-26 के सीजन में उन्होंने पीएसजी के लिए सबसे अधिक 10 गोल किए और 6 असिस्ट प्रदान किए।

उनके बाद रियल मैड्रिड के किलियन एम्बापे ने 15 और बायर्न म्यूनिख के हैरी केन ने 14 गोल किए। कवारात्स्खेलिया ने न केवल चैंपियंस लीग जिती बल्कि इस टूर्नामेंट के सर्वोत्तम खिलाड़ी का पुरस्कार भी जीता।

विश्व कप खेलना अब तक उन्हें नसीब नहीं हुआ है। उनके लिए जॉर्जिया के लिए अब तक सबसे बड़ा टूर्नामेंट यूरो 2024 था, जहां वह अंतिम 16 में स्पेन से हारकर बाहर हो गए थे।

FIFA विश्व कप 2026 के यूरोपीय क्वालीफायर के ग्रुप ई में जॉर्जिया, स्पेन और टर्की से पीछे रहते हुए ग्रुप चरण से बाहर हो गया।

जॉर्जिया ने बुल्गारिया को एक मैच में हराया, लेकिन बाकी पांच मैचों में हार का सामना किया। कवारात्स्खेलिया ने इन मुकाबलों में 2 गोल किए – टर्की के खिलाफ 3-2 की हार और बुल्गारिया के खिलाफ 3-0 की जीत में एक-एक गोल।

कवारात्स्खेलिया का करियर

जॉर्जिया के टिबिलिसी में 2001 में जन्मे कवारात्स्खेलिया ने डिनामो टिबिलिसी से युवाओं के स्तर पर करियर शुरू किया। इसके बाद वे इसी क्लब के मुख्य टीम में शामिल हुए और जॉर्जिया के रुस्तावी क्लब में भी खेले।

थोड़े समय के लिए रूस के लोकोमोटिव मास्को क्लब में लोन पर खेलने के बाद वे रूसी क्लब रबिन काज़ान के लिए 2019 से 2022 तक खेले। 2022 में वे जॉर्जियन डिनामो बातुमी वापस आए और एक सीजन बिताया।

2022 में उन्होंने इटली के नापोली क्लब से अनुबंध किया, जो उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुआ। नापोली में उन्होंने अपनी खेल क्षमता विश्व स्तर पर प्रदर्शित की और शानदार प्रदर्शन किया। वे 2025 तक नापोली के लिए 85 मैचों में 28 गोल कर चुके थे। जनवरी 2025 में उन्होंने फ्रांसीसी क्लब पीएसजी से अनुबंध किया।

पीएसजी के लिए दो सीजन खेलते हुए उन्होंने कई खिताब और पुरस्कार जीते हैं। पीएसजी ने लगातार दो बार चैंपियंस लीग जिती और कवारात्स्खेलिया उसके मुख्य खिलाड़ी के रूप में चमके।

उन्होंने 2016 में जॉर्जिया U-17 राष्ट्रीय टीम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया। इसके बाद वे कई उम्र समूहों की राष्ट्रीय टीमों में खेले और 2019 में जॉर्जिया की मुख्य राष्ट्रीय टीम में शामिल हुए।

उन्होंने जॉर्जिया के लिए अब तक 49 मैचों में 22 गोल किए हैं। मार्च 2026 में वे राष्ट्रीय टीम के कप्तान भी बने। उनके प्रदर्शन से वे देश के महान खिलाड़ियों की कतार में शामिल हो रहे हैं।

2024 में उन्होंने जॉर्जिया को यूरो 2024 के लिए क्वालीफाई कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई था। यह जॉर्जिया का पहला प्रमुख अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था।

साथ ही, उन्होंने काखा कालाड्जे के साथ मिलकर पाँच बार जॉर्जियन फुटबॉलर ऑफ द इयर का पुरस्कार जीतने का कीर्तिमान बनाया, जिसमें 2020 से 2025 के बीच यह उपलब्धि मिली। केवल 2024 में गोलकीपर जॉर्जी मामर्दशिविली को यह सम्मान दिया गया था।

जॉर्जियन मेस्सी और कवाराडोना

म्याराडोना और मेस्सी दोनों अर्जेंटीना के महान खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अपने देश को FIFA विश्व कप का खिताब दिलाया। 1980 के दशक के दौरान म्याराडोना का दबदबा था, जिन्होंने 1986 में अर्जेंटीना को दूसरी बार विश्व कप जिताया। 36 साल बाद, मेस्सी ने 2022 में अपनी कप्तानी में अपने देश को विश्व कप दिलाया।

वे दोनों अलग-अलग युग के महान खिलाड़ी हैं। वर्तमान विश्व फुटबॉल में मेस्सी के साथ-साथ क्रिस्टियानो रोनाल्डो भी सुपरस्टार माने जाते हैं, हालांकि रोनाल्डो ने अभी तक विश्व कप नहीं जीता है।

विश्व कप खेलने से वंचित ख्विचा कवारात्स्खेलिया का नाम बेहद महान खिलाड़ियों के साथ जोड़ा जाना काफी चौंकाने वाला हो सकता है, लेकिन इसके भी पीछे खास वजह है।

विश्व में ऐसे खिलाड़ी जिन्हें मेस्सी जैसा कौशल हासिल होता है, उनके देश के साथ मेस्सी का नाम जोड़कर उन्हें उपनाम दिया जाता है। उन्हें भी जॉर्जियन मेस्सी कहा जाता है, पर वे खुद पोर्तुगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो को अपना आदर्श मानते हैं।

मेस्सी की तरह उच्च कौशल, तकनीकी क्षमता और ड्रिब्लिंग की वजह से उन्हें समर्थक और पत्रकार ‘जॉर्जियन मेस्सी’ कहते हैं। वे दोनों पैरों को समान दक्षता से इस्तेमाल कर सकते हैं।

मेस्सी से जुड़ा उपनाम पाते हुए भी कवारात्स्खेलिया रोनाल्डो को अपना मॉडल मानते हैं। वे रोनाल्डो को इतना पसंद करते थे कि वे इटालियन क्लब नापोली में उनके नंबर 7 की जर्सी पहनना चाहते थे। पर वह नंबर पहले से ही उत्तर मैसेडोनिया के एपिल एल्मास के पास था, इसलिए उन्होंने नंबर 77 जर्सी पहनना चुना।

रोनाल्डो जैसा नंबर पहनना न पा पाने के बावजूद उन्होंने अलग नंबर में नापोली में शानदार प्रदर्शन किया, जिसने उनका नाम फिर से एक महान खिलाड़ी के साथ जोड़ा।

नापोली में उनकी लोकप्रियता और जबरदस्त प्रदर्शन के कारण उन्हें म्याराडोना से जोड़ा गया और उनका उपनाम क्वाराडोना पड़ा। यह एक अनूठा सम्मान था।

नापोली की प्रसिद्ध ‘पार्टेनोपेई’ जर्सी पहनने वाले कई महान खिलाड़ी रहे हैं, जैसे क्लब के सर्वकालीन सर्वाधिक गोलकर्ता ड्रिस मर्टेन्स, स्थानीय नायक लोरेन्जो इन्सिनिया, मार्क हम्सिक और एजेक्वेल लाभेजी। लेकिन इनमें से कोई भी डिएगो म्याराडोना जितना प्रसिद्ध या नापोली के समर्थकों के बीच इतना प्रिय नहीं था। म्याराडोना नेपल्स में एक भगवान के समान पूजनीय थे।

क्लब में म्याराडोना की विरासत इतनी बड़ी थी कि 2020 में उनकी मृत्यु के बाद क्लब ने अपना स्टेडियम उनका नाम दिया। म्याराडोना ने नापोली को 1986/87 और 1989/90 में एकमात्र स्कुडेटो (इतालवी लीग का खिताब) दिलाया, और 1988/89 में UEFA कप जीतकर यूरोपीय फुटबॉल में क्लब की एकमात्र उपलब्धि सुनिश्चित की।

इसलिए नापोली के समर्थक म्याराडोना से तुलना करते हुए उसे उनके लिए सफलता दिलाने वाला खिलाड़ी मानते थे, और कवारादोना ने उस नाम का सम्मान भी किया।

उन्होंने टीम को अर्जेंटीना के उस स्वर्ण युग के बाद पहली बार सिरी ए का खिताब दिलाया। सत्र 2022-23 में उनके जोड़ीदार विक्टर ओसिमहेन ने 26 गोल किए, जबकि कवारात्स्खेलिया ने 12 गोल किए।

म्याराडोना से जुड़े उपनाम के बारे में एक इंटरव्यू में कवारात्स्खेलिया ने कहा, “मुझे यह उपनाम जरूर पसंद है। मैं म्याराडोना के बराबर नहीं पहुंच सकता, लेकिन इस क्लब के लिए एक महान खिलाड़ी बनने के लिए अपनी पूरी कोशिश करूंगा।”

कवारात्स्खेलिया रियल मैड्रिड के भी बड़े प्रशंसक हैं। उन्होंने एक बार कहा था कि उनका सबसे बड़ा सपना रियल मैड्रिड के लिए चैंपियंस लीग जीतना है, लेकिन अब उन्होंने यह सपना फ्रांस के पीएसजी के साथ पूरा किया है और वहीं आनंद ले रहे हैं।