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लेखक: space4knews

कुशल भुर्तेल के अर्धशतकीय पारी से नेपाल ने टी-20 श्रृंखला में क्लीन स्वीप टाल दिया

इस जीत के साथ ही दो मैचों की टी-20 आई श्रृंखला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुई है। 8 वैशाख, काठमांडू। यूएई के खिलाफ दूसरे टी-20 आई मैच में नेपाल ने 8 विकेट से जीत हासिल की है। त्रिवि क्रिकेट मैदान में यूएई द्वारा दिए गए 129 रन के लक्ष्य को नेपाल ने 15 ओवर 5 गेंदें रहते हुए 2 विकेट खोकर पूरा किया। इसी के साथ दो मैचों की टी-20 आई श्रृंखला बराबरी पर समाप्त हुई। इससे पहले सोमवार को हुए पहले मैच में यूएई ने नेपाल को 6 विकेट से हराया था। नेपाल के सलामी बल्लेबाज कुशल भुर्तेल ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। कुशल ने 57 गेंदों पर 84 रनों की नाबाद पारी खेली जिसमें उन्होंने 12 चौके और 2 छक्के लगाया। कप्तान दीपेन्द्रसिंह ऐरी ने 17 गेंदों पर 23 रन बनाकर नाबाद रहे। सलामी बल्लेबाज कुशल मल्ल 19 गेंदों पर और संतोष यादव 1 रन बनाकर आउट हुए।

बॉलिंग में यूएई की ओर से मोहम्मद अरफान और निलंश केसवानी ने एक-एक विकेट लिया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए यूएई ने निर्धारित 20 ओवरों में 8 विकेट गंवाकर 128 रन बनाए। यूएई के अक्षदीप नाथ ने अर्धशतक लगाया। 48 रन पर 6 विकेट जाने के बाद संकट में पहुंची यूएई की पारी को अक्षदीप और मोहम्मद अरफान की साझेदारी ने संभाला। दोनों ने सातवें विकेट के लिए 64 रन जोड़े। नाथ 53 रन बनाकर नाबाद रहे जबकि अरफान 32 रन पर आउट हुए। कप्तान मोहम्मद वासिम 0, अदीब उसमानी 30, अलीशान शराफू 1, हरप्रीत सिंह भाटिया 1, शोएब खान 0, निलंश केसवानी 0 और तनभीर भी 0 रन पर आउट हुए। नेपाल की ओर से सन्दीप लामिछाने ने 3, हेमन्त धामी ने 2 और नन्दन यादव तथा शाहव आलम ने एक-एक विकेट लिया।

बक्सिङको विवादका विषयमा छानविन गर्न राखेपले बनायो छानविन उपसमिति

राष्ट्रिय खेलकुद परिषद ने बक्सिंग विवादों की जांच के लिए उपसमिति का गठन किया

राष्ट्रिय खेलकुद परिषद ने बक्सिंग क्षेत्र में उत्पन्न विवादों को सुलझाने के लिए भोजानन्द राई की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच उपसमिति गठित की है। उपसमिति को बक्सिंग महासंघ के पदाधिकारियों के खिलाफ दायर शिकायतों और प्रस्तुतियों की जांच कर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच उपसमिति नियम, कानून और संघ के विधान के आधार पर अध्ययन करेगी और आवश्यक दस्तावेज़ों तथा संबंधित पक्षों के साथ समन्वय का प्रबंध करेगी। ८ वैशाख, काठमांडू।

राष्ट्रिय खेलकुद परिषद (राखेप) ने नेपाल बक्सिंग महासंघ सहित बक्सिंग क्षेत्र में उत्पन्न विभिन्न विवाद और समस्याओं के समाधान के लिए जांच उपसमिति का गठन किया है। राखेप की कार्यकारी समिति की मंगलवार को हुई बैठक में राखेप प्रशासन विभाग के प्रमुख भोजानन्द राई की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच उपसमिति गठित करने का निर्णय लिया गया। इस उपसमिति के अन्य दो सदस्य राखेप कानूनी शाखा प्रमुख नारायणराज अर्याल और राखेप खेलकूद विकास विभाग के प्रशासनिक अधिकारी सानुराज केसी हैं।

बक्सिंग से जुड़े विभिन्न विवादों की शिकायतों और प्रस्तुतियों की समीक्षा, संबंधित पक्षों से चर्चा और आवश्यक जांच कर उपयुक्त सुझाव सहित रिपोर्ट सात कार्यदिवसों के भीतर प्रस्तुत करने की समय सीमा निर्धारित की गई है। “नेपाल बक्सिंग महासंघ के पदाधिकारियों द्वारा महासंघ के सचिव पुष्करराज पन्त को नियमों के विरुद्ध बर्खास्त करने, परिषद के पूर्व नेतृत्व द्वारा अनियमितताओं को छुपाने हेतु वाहन खरीद कर उपलब्ध कराने संबंधी शिकायत, पुष्करराज पन्त द्वारा २०८२ पुस ८ को दायर शिकायत जिसमें दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है, नेपाल बक्सिंग महासंघ के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष किरण बहादुर श्रेष्ठ सहित अन्य पदाधिकारियों द्वारा राष्ट्रीय स्वाभिमान को आघात पहुंचाने संबंधी अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग में दाखिल शिकायत, और राखेप के बक्सिंग मुख्य प्रशिक्षक प्रकाश थापा मगर द्वारा सहायक प्रशिक्षक दीपक महर्जन के खिलाड़ियों के सामने अभद्र व्यवहार और अपशब्दों के प्रयोग की शिकायत पर परिषद में दो बार कार्रवाई हेतु प्रस्तुत किए गए आवेदन जिनके विषय में जांच और रिपोर्ट तैयार करने का प्रभारी बनाया गया है,” राखेप ने जानकारी दी है।

उक्त उपसमिति को शिकायत से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों का अध्ययन करने, संबंधित पक्षों के समन्वय से रिपोर्ट तैयार करने, विवरण तैयार करते समय प्रचलित नियम, कानून और संघ के विधान के आधार पर कार्य करने, निर्धारित समय में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने और अपनी बैठक की कार्यप्रणाली स्वयं निर्धारित करने का अधिकार तथा जांच के दायरे का निर्धारण करने का प्रावधान दिया गया है।

‘नेपाल के कम्युनिस्टों में वामपंथी चरित्र ही नहीं है’

नेपाल के कम्युनिस्ट पार्टी चुनाव के बाद बेहद छोटे हो गए हैं और पार्टी के पुनर्गठन, नेतृत्व की समीक्षा और बदलाव के मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो रही है। डॉ. खगेन्द्र प्रसाईं ने कम्युनिस्टों की चुनाव हार को समाजवादी अभियान के संकट की स्थिति नहीं कहा है। उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टियों में व्यक्तिगत स्वार्थ और नवउदारवादी प्रवृत्तियों के कारण आंतरिक लोकतंत्र कमजोर होने का उल्लेख किया है।

प्रतिनिधि सभा चुनाव के बाद नेपाल के कम्युनिस्ट पार्टी बहुत छोटे हो गए हैं। वर्तमान में उनके बीच पार्टी पुनर्गठन, नेतृत्व समीक्षा और बदलाव के विषय में गहन चर्चा चल रही है। कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के ७७वें वर्ष के संदर्भ में एकता का मुद्दा भी सामने आ रहा है। इसी संदर्भ में डॉ. खगेन्द्र प्रसाईं ने कहा, “पिछले १०–१५ वर्षों से नेपाल के मुख्य कहे जाने वाले कम्युनिस्ट पार्टी वास्तव में समाजवादी अभियान या आन्दोलन का नेतृत्व नहीं कर रहे थे।”

उन्होंने आगे कहा, “पिछले चुनाव से नेपाल के कम्युनिस्ट पार्टी बहुत छोटे हो गए हैं।” उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी की संसदीय स्थिति और वामपंथी आन्दोलन की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “हमारे संविधान में ‘समाजवाद’ अंकित है और चुनाव जीतने-हारने वाले सभी दलों की दस्तावेजों में समाजवाद का उल्लेख है।”

डॉ. प्रसाईं ने कहा, “पूंजीवाद और नवउदारवाद व्यक्ति को केंद्र में रखते हैं और समूह या समाज को गौण मानते हैं।” उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी की कार्यशैली में नज़र आने वाली मुख्य समस्याओं और कमजोरियों पर भी बातचीत की। उन्होंने जोड़ा, “पार्टी एकीकरण क्यों होता है या फिर क्यों टूटता है? इसके पीछे मुख्य कारण व्यक्तिगत स्वार्थ ही होता है।”

सर्वोच्च अदालत ने रवि लामिछाने के खिलाफ रिट याचिका दायर करने से किया इंकार

सर्वोच्च अदालत ने रवि लामिछाने के खिलाफ पेश की गई रिट याचिका दायर करने से इंकार कर दिया है। अदालत प्रशासन ने आयुष बडाल द्वारा पेश याचिका पर दरपीठ आदेश जारी किया है। बडाल अदालत प्रशासन के इस आदेश के खिलाफ सर्वोच्च अदालत में पुनः याचिका दाखिल कर सकते हैं। ८ वैशाख, काठमांडू।

सर्वोच्च अदालत ने रवि लामिछाने के खिलाफ दायर रिट याचिका दायर करने से इंकार किया है। सर्वोच्च अदालत प्रशासन ने आयुष बडाल द्वारा दायर याचिका पर दरपीठ (दर्ज करने से इंकार करने का आदेश) जारी किया है। इस आदेश के साथ बडाल की याचिका अस्वीकार कर दी गई है। हालांकि, वे अदालत प्रशासन के इस आदेश के खिलाफ सर्वोच्च अदालत में पुनः याचिका दाखिल कर सकते हैं। सर्वोच्च अदालत के एक माननीय न्यायाधीश की एकल पीठ इस याचिका की सुनवाई कर दरपीठ आदेश रद्द कर सकती है, जिसके बाद अदालत प्रशासन को याचिका दर्ज करनी होगी। संपत्ति शुद्धीकरण के आरोपों से घिरे रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने को सांसद के रूप में कार्यवाहियां करने से रोकने की मांग करते हुए बडाल ने सर्वोच्च अदालत में रिट याचिका दाखिल की थी।

कैलिफोर्निया के हाइब्रिड मधुमक्खियों में ‘वरोआ माइट्स’ के खिलाफ प्राकृतिक प्रतिरोध क्षमता का विकास

दक्षिण कैलिफोर्निया में एक हाइब्रिड मधुमक्खी ने ‘वरोआ माइट्स’ के खिलाफ प्राकृतिक रूप से लड़ने की क्षमता विकसित की है। 2019 से 2022 तक के अध्ययन के अनुसार, इन हाइब्रिड मधुमक्खियों में व्यावसायिक मधुमक्खियों की तुलना में 68 प्रतिशत कम परजीवी पाए गए हैं। इनके लार्वा चरण में ‘वरोआ’ परजीवी का आक्रमण कम होता है और रासायनिक उपचार की आवश्यकता पाँच गुना कम देखी गई है। 8 वैशाख, काठमांडू।

विश्व के मधुमक्खी पालक घातक परजीवी के कारण बड़ी संख्या में मधुमक्खी के छत्ते खो रहे थे, ऐसे समय में दक्षिण कैलिफोर्निया की एक विशेष हाइब्रिड मधुमक्खी ने नई उम्मीद जगाई है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, रिवरसाइड के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस मधुमक्खी ने मधुमक्खी जगत के सबसे खतरनाक दुश्मन माने जाने वाले ‘वरोआ माइट्स’ के खिलाफ प्राकृतिक रूप से लड़ने की क्षमता विकसित की है। 2025 में ही अमेरिका भर में लगभग 62 प्रतिशत व्यावसायिक मधुमक्खी के छत्ते नष्ट हो चुके थे।

अनुसंधान का निष्कर्ष: 68 प्रतिशत कम परजीवी — ‘साइन्टिफिक रिपोर्ट्स’ पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने 2019 से 2022 तक 236 मधुमक्खी छत्तों का सूक्ष्म अध्ययन किया। अध्ययन में पाया गया कि कैलिफोर्निया की ये हाइब्रिड मधुमक्खियाँ व्यावसायिक मधुमक्खियों की तुलना में औसतन 68 प्रतिशत कम परजीवी पाती हैं। साथ ही, इन मधुमक्खियों में रासायनिक उपचार की आवश्यकता भी पांच गुना कम देखी गई है।

मुख्य शोधकर्ता जेनेसिस चोंग-इचावेज़ के अनुसार, ये मधुमक्खियाँ व्यावसायिक प्रजनन कार्यक्रम के जरिए नहीं, बल्कि जंगली और विभिन्न वंशों की मधुमक्खियों के प्राकृतिक संमिश्रण से विकसित हुई हैं। इनमें अफ्रीकी, पूर्वी यूरोपीय, मध्यपूर्वी और पश्चिमी यूरोपीय मधुमक्खियों के गुण सम्मिलित हैं। बचपन से ही दिखने वाली प्रतिरोध क्षमता इस शोध का सबसे आश्चर्यजनक पक्ष है। प्रयोगशाला में किए गए परीक्षण में पाया गया कि ‘वरोआ’ परजीवी इन हाइब्रिड मधुमक्खियों के लार्वाओं की ओर कम आकर्षित होते हैं।

भविष्य की संभावनाएँ: परागण में मधुमक्खियों की भूमिका विश्वभर के कृषि उत्पादन के लिए अत्यंत आवश्यक है और इसका आर्थिक मूल्य अरबों डॉलर में है। इस परिस्थिति में, इस प्राकृतिक प्रतिरोध क्षमता की पहचान विश्वभर के मधुमक्खी पालन व्यवसाय और खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। इन्टोमोलॉजी के प्रोफेसर बोरिस बेर के अनुसार, आने वाला चुनौती इन मधुमक्खियों के विशिष्ट आनुवंशिक गुणों की पहचान कर उन्हें अन्य प्रजातियों तक फैलाना और रासायनिक विषादी के उपयोग पर निर्भरता घटाना होगा।

एन्फासम्बन्धी छानबीन के लिए राखेप ने समिति गठित की

समाचार सारांश

OK AI द्वारा तयार। सम्पादकीय समीक्षा।

  • राष्ट्रीय खेलकूद परिषद ने अखिल नेपाल फुटबल संघ के आर्थिक मामलों की जांच के लिए तीन सदस्यीय उपसमिति बनाई है।
  • उपसमिति के संयोजक राखेप के कार्यकारी सदस्य कमल भट्टarai हैं और सात दिन के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समयसीमा दी गई है।
  • एन्फा के अर्ली इलेक्शन विवाद के बाद राखेप ने एन्फा को तीन महीने के लिए निलंबित किया था और जांच उपसमिति निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार करेगी।

८ वैशाख, काठमाडौं। अखिल नेपाल फुटबल संघ (एन्फा) के आर्थिक मामलों की जांच हेतु राष्ट्रीय खेलकूद परिषद (राखेप) ने मंगलवार को जांच समिति गठित की है।

मंगलवार को हुई राखेप की कार्यकारी समिति की बैठक में राखेप के कार्यकारी सदस्य कमल भट्टराई के संयोजन में तीन सदस्यीय जांच उपसमिति गठित करने का निर्णय लिया गया।

अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग के पत्र के आधार पर युवा एवं खेलकूद मंत्रालय के वैशाख ७ गते (सोमवार) के पत्र के अनुसार राय प्रस्तुत करने हेतु जांच उपसमिति बनाई गई है, जानकारी राखेप सदस्यसचिव रामचरित्र मेहता ने दी।

जांच समिति में राखेप के लेखा अधिकारी टंकनाथ कँडेल और आपूर्ति एवं भण्डार शाखा के गोपीकृष्ण निरौला सदस्य हैं। समिति को सात दिन के भीतर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समयसीमा दी गई है।

एन्फा के आर्थिक नियमावली, कार्यविधि और विधान के विपरीत खरीद प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होने एवं अनियमितताओं के कारण अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग में शिकायत दी गई थी।

जांच उपसमिति को शिकायत से संबंधित आवश्यक दस्तावेज अध्ययन करने, संबंधित पक्षों से समन्वय कर रिपोर्ट तैयार करने, प्रचलित नियम, कानून और संघ के विधान के आधार पर विवरण संकलित करने, निर्धारित समय में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा स्वयं बैठक के कार्यविधि निर्धारण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

हाल ही में राखेप और एन्फा के बीच एन्फा के अर्ली इलेक्शन को लेकर विवाद हुआ है, जिससे नेपाली फुटबॉल संकट की ओर बढ़ रहा है।

एन्फा ने राष्ट्रीय खेलकूद विकास अधिनियम के विरुद्ध अर्ली इलेक्शन कराने की कोशिश की थी, जिसके कारण राखेप ने चैत ११ गते एन्फा को तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया था।

इस मुद्दे की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी जांच उपसमिति के संयोजक कमल भट्टराई को सौंपी गई है, उन्होंने जानकारी दी।

पेट्रोलियम पदार्थको मूल्यवृद्धि विरुद्ध काठमाडौंमा प्रदर्शन

काठमाडौं में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन

संयुक्त विद्यार्थी संगठन ने काठमाडौं के प्रदर्शनी मार्ग पर पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ राँके जुलूस के साथ प्रदर्शन किया। छात्रों ने शिक्षा, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मित पोखरेल की इस्तीफ़ा की मांग की है। उन्होंने सरकार पर विश्वविद्यालयों में राजनीतिक हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। ८ वैशाख, काठमाडौं।

पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के विरोध में संयुक्त विद्यार्थी संगठन द्वारा काठमाडौँ के प्रदर्शनी मार्ग पर राँके जुलूस सहित प्रदर्शन किया गया। विभिन्न दलों से जुड़े विद्यार्थी संगठनों ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें कम करने की मांग के साथ प्रदर्शन किया। उन्होंने शिक्षा, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मित पोखरेल की इस्तीफ़ा भी मांगी।

वे आरोप लगाते हैं कि सरकार ने विश्वविद्यालयों में राजनीतिक हस्तक्षेप किया है। प्रदर्शनकारियों ने “पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत वृद्धि वापस ले”, “विश्वविद्यालयों में राजनीतिक हस्तक्षेप बंद करो”, और “विद्यार्थी संगठन को समाप्त नहीं किया जा सकता” जैसे नारे लिखे प्लेकार्ड भी लेकर प्रदर्शन किया।

कवयित्रि शर्मा की ‘पोइटिक डायस्पोरा’ कविता संग्रह पर समीक्षा

कवयित्री अनुशा शर्मा सुवेदी द्वारा लिखित कविता संग्रह ‘पोइटिक डायस्पोरा’ की समीक्षा ललितपुर के हात्तिवन में आयोजित की गई। प्रोफेसर अरुण गुप्ता ने कविता की शब्दावली को विचारशील और लेखिका की शब्दों के साथ खेलने की क्षमता को सशक्त बताया। अनुशा ने परिवार से दूर रहने के दौरान अनुभव किए गए भावनाओं को कविताओं में समेकित किया है और शिव भगवान के प्रति गहरा भक्ति भाव भी व्यक्त किया है।

काठमांडू। कवयित्री अनुशा शर्मा सुवेदी की कविता कृति ‘पोइटिक डायस्पोरा’ पर चर्चा हुई। ललितपुर के हात्तिवन में आयोजित विशेष समारोह में इस कृति की समीक्षा की गई। प्रमुख अतिथि प्रोफेसर अरुण गुप्ता ने कविताओं की शब्दावली को अत्यंत विचारशील बताया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा में लिखी 130 कविताएँ बेहद प्रभावशाली हैं। लेखिका की किसी विषय को पकड़कर शब्दों के साथ खेलने की क्षमता और शब्दकल्पना शक्ति बहुत मजबूत है।

इसी प्रकार कवि समीक्षक केशव सिग्देल ने अनुशा की कविताओं को उच्च स्तर का बताया। उन्होंने कहा, ‘शब्द-शब्द में गहरे अर्थों को सुंदर कलाकृति में पिरोया गया है। जटिल शैली पाठक को बांधकर रखने में असमर्थ होती है। कविताओं में भक्तिभाव प्रमुख है। कविताओं को पढ़ते हुए कवि की मनोस्वतंत्रता की भावना स्पष्ट झलकती है।’ समीक्षक महेश पौडेल ने अनुशा की कविताओं में जीवन और संसार को देखने की दृष्टि होने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इनमें ध्यान करने की क्षमता विद्यमान है।

कवि सरला केसी ने भी अनुशा की कविताओं में गहरा भाव देखा। उन्होंने कहा, ‘जब मैं उनकी कविताएँ पढ़ती हूँ तो ऐसा लगता है जैसे मैं किसी ठंडी छतरी के नीचे बैठी हूँ। शब्दों में शक्ति और भावों में प्रभाव होता है। भावनात्मक संदेश में पाठक को बांधने की योग्यता कविताओं में झलकती है।’ कवि लेखक राजीव श्रेष्ठ ने अनुशा की कविताओं में जीवन अनुभव की झलक पाई। उन्होंने कहा, ‘उनकी कविताएँ उनके जीवन के अनुभवों का प्रतिबिंब हैं। मैं उनके साथ निकटता से काम करता आ रहा हूँ इसीलिए उन्हें जानता हूँ। वह आध्यात्मिक व्यक्ति हैं। शिव भक्ति में उन्हें चरम आनंद प्राप्त होता है। इसलिए उनकी कविताओं में आध्यात्मिक रस भी प्रबल है।’

प्रोफेसर गुप्ता ने बताया कि स्वयं को पहचानने के बाद महिला कैसे समाज में सशक्त भूमिका निभा सकती है, यह संदेश अनुशा की कविताओं में विद्यमान है। उन्होंने कहा कि कविताएँ पढ़ते समय आध्यात्मिक भाव के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना की झलक भी मिलती है। पत्रकार, कवि एवं लेखक दीपक सापकोटा ने अनुशा की कुछ कविताओं का पाठ किया। पत्रकार एवं साहित्यकार राज सरगम ने सहजकर्ता की भूमिका निभाते हुए अनुशा के साथ कृति पर संवाद किया।

इस अवसर पर अनुशा ने बताया कि उन्होंने उन बातों को कविताओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया जिनको वे शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाईं। उन्होंने कहा, ‘मैंने विभिन्न कारणों से परिवार से दूर रहते हुए अपने भाव को कविताओं के माध्यम से व्यक्त किया है। अपने विचारों को कविताओं के जरिए प्रस्तुत किया है। इस कृति के प्रकाशन में मेरे परिवार ने मेरा बहुत सहयोग किया है।’ उन्होंने प्रकृति प्रेम और शिव भगवान के प्रति गहरी भक्तिभाव की भी जानकारी दी। कार्यक्रम में लेखक एवं बालगीतकार रामबाबु सुवेदी ने स्वागत भाषण दिया।

प्रचण्ड और गगन के बीच बैठक सम्पन्न

८ वैशाख, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस के सभापति गगन कुमार थापा और नेकपा अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड के बीच बैठक सम्पन्न हुई है। प्रचण्ड के सचिवालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दोनों के बीच मंगलवार दोपहर मानभवन स्थित प्रचण्ड निवास में वार्ता हुई थी। ‘चुनाव के बाद यह पहली मुलाकात थी। समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई,’ दाहाल ने बताया। बैठक में सामान्य बातचीत ही हुई है। ‘चुनाव बाद की स्थिति का विश्लेषण और राजनीतिक विषयों पर ही चर्चा हुई है। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने वाली कोई निश्चित वार्ता नहीं हुई है,’ स्रोत ने बताया।

क्याटालिस्ट के अंदरूनी हिस्से से ऑक्सीजन प्रवाह की नई खोज

वैज्ञानिकों ने क्याटालिस्ट की केवल सतह ही नहीं, बल्कि उसके अंदरूनी हिस्से से भी ऑक्सीजन के परमाणु प्रवाहित हो रहे हैं, इसका प्रत्यक्ष अवलोकन किया है। डालियान इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल फिजिक्स के शोधकर्ताओं ने ‘बल्क ऑक्सीजन स्पिलओवर’ प्रक्रिया को ‘एन्वायरनमेंटल ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी’ के माध्यम से खोजा है। इस खोज से क्याटालिस्ट की अवधारणा को त्रිआयामी बनाया जाएगा और ऊर्जा उत्पादन तथा पर्यावरणीय स्वच्छता में प्रभावी योगदान मिलेगा। ८ वैशाख, काठमांडू।

वैज्ञानिकों ने क्याटालिस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर वर्षों से चली आ रही मान्यता को चुनौती देते हुए महत्वपूर्ण खोज की है। डालियान इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल फिजिक्स की टीम ने पहली बार प्रत्यक्ष रूप से दिखाया है कि ऑक्सीजन के परमाणु केवल क्याटालिस्ट की सतह से ही नहीं, बल्कि इसके अंदरूनी भाग (बल्क) से भी प्रवाहित हो रहे हैं। ‘नेचर’ जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन से भविष्य में अधिक कुशल और स्मार्ट क्याटालिस्ट विकसित करने के नए मार्ग खुलेंगे।

आमतौर पर माना जाता था कि रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करने में केवल क्याटालिस्ट की बाहरी सतह सक्रिय होती है और उसका अंदरूनी भाग निष्क्रिय होता है। लेकिन प्रोफेसर ताओ झांग और यानकियांग हुआंग के नेतृत्व में टीम ने ‘एन्वायरनमेंटल ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी’ का उपयोग करके ऑक्सीजन के परमाणुओं को क्याटालिस्ट की आंतरिक परत से लेकर धातु की सतह तक प्रवाहित होते हुए ट्रैक किया है। वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया को ‘बल्क ऑक्सीजन स्पिलओवर’ नाम दिया है।

टाइटेनियम डाइऑक्साइड की भूमिका को समझने के लिए टीम ने रुथेनियम (Ru) और टाइटेनियम डाइऑक्साइड (TiO2) के मिश्रण का उपयोग किया। टाइटेनियम डाइऑक्साइड में ऑक्सीजन संग्रहण और उत्सर्जन की क्षमता पाई गई। परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि ऑक्सीजन के परमाणु सतह से ३ से ५ परतें नीचे से होकर धातु की इंटरफेस तक पहुंचते हैं। प्रोफेसर वेई लियू के अनुसार क्याटालिस्ट की इंटरफेस ‘एटॉमिक गार्ड’ की तरह कार्य करती है और ऑक्सीजन प्रवाह को नियंत्रित करती है।

इस प्रयास का प्रभाव यह है कि लगभग ५० वर्षों तक वैज्ञानिकों का मानना रहा कि धातु और उसके आधारभूत सामग्री के बीच की अंतःक्रिया केवल सतह तक सीमित होती है। लेकिन यह नई खोज क्याटालिस्ट की द्वि-आयामी सतह की अवधारणा को एक त्रि-आयामी ‘सतह – इंटरफेस – अंदरूनी भाग’ के समन्वय में परिवर्तित कर देती है। यह विशेष रूप से ऊर्जा उत्पादन, प्लास्टिक निर्माण और पर्यावरणीय शुद्धता में क्याटालिस्ट की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करेगी। प्रोफेसर झांग के अनुसार अब लक्ष्य है कि क्याटालिस्ट के अंदरूनी भाग को भी प्रत्यक्ष रूप से रासायनिक प्रतिक्रिया में शामिल कर उत्पादन लागत कम करना और दक्षता में वृद्धि करना।

‘राम नाम सत्य’ बाट निर्माताले कति कमाए ? – Online Khabar

‘राम नाम सत्य’ फिल्म से निर्माताओं को मिली कितनी आय?

फिल्म ‘राम नाम सत्य’ ने २७ चैत्र से रिलीज होकर सोमवार तक ३ करोड़ २० लाख रुपये का कुल कलेक्शन किया है, यह जानकारी वितरक गोविन्द शाही ने दी। निर्माता उपेन्द्र शाही ने बताया कि अमेरिकी बाजार को छोड़कर विदेशी बाजार से ७० लाख रुपये की आय हुई है तथा अमेरिका में २४ अप्रैल से २०० शो होने वाले हैं। निर्देशक माइकल चन्द ने बताया कि डिजिटल राइट्स ७२ लाख रुपये में बिक गई हैं जिससे निर्माण पक्ष को लाभ हुआ है और ३ करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म के साथ सुरक्षा का कदम उठाया गया है।

काठमाडौं। २७ चैत्र से प्रदर्शित हुई फिल्म ‘राम नाम सत्य’ ने बॉक्स ऑफिस पर सोमवार तक ३ करोड़ २० लाख रुपये का सकल कलेक्शन किया है, इसी बात की जानकारी वितरक गोविन्द शाही ने दी। शनिवार तक विकास बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार फिल्म की कमाई लगभग २ करोड़ ७८ लाख रुपये थी। हालांकि कुछ सिनेमाघरों के आंकड़े बोर्ड में शामिल नहीं होने की वजह से वितरक के मुताबिक व्यापार थोड़ा अधिक दिखाया गया है, ऐसा वितरक शाही ने बताया।

फिल्म ने अमेरिकी बाजार को छोड़कर विदेशी बाजार से ७० लाख रुपये की कमाई कर ली है, यह जानकारी निर्माता उपेन्द्र शाही ने दी। अमेरिका के विभिन्न शहरों में २४ अप्रैल से यह फिल्म २०० शो के साथ प्रदर्शित होगी। निर्माण पक्ष ने अमेरिका में फिल्म को शेयर प्रतिशत के आधार पर बेचा है और अमेरिका से भी निर्माताओं को अच्छी आय होने की उम्मीद है।

ओएसआर डिजिटल से फिल्म ने ७२ लाख रुपये डिजिटल राइट्स की बिक्री से प्राप्त किए हैं, यह जानकारी निर्देशक माइकल चन्द ने दी। डिजिटल राइट्स ७२ लाख में बिक जाने के बाद निर्माण पक्ष को भी लाभ हुआ है। ३ करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म से वे सुरक्षित मार्ग पर हैं, निर्देशक चन्द ने यह भी बताया। श्वेता विमली और उपेन्द्र शाही के निर्माण में बनी इस फिल्म में विराज भट्ट, सुशील श्रेष्ठ, दिव्या रायमाझी, सुपुष्पा भट्ट, आयुषसिंह ठकुरी, खुशी कार्की, सुनील थापा, प्रशांत ताम्राकार सहित कई कलाकारों ने अभिनय किया है।

जेलबाट फरार ज्यान मुद्दाका दोषी पक्राउ

धादिङको बेनिघाट रोराङ गाउँपालिका–७ का ३८ वर्षीय झ्याप्ले कमल न्यौपानेलाई काठमाडौं उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालयको टोलीले पक्राउ गरेको छ। उनी ज्यानसम्बन्धी मुद्दाको समयमा सुन्धारा स्थित केन्द्रीय कारागार जग्गनाथदेवलबाट फरार भएका थिए। उनलाई कर्तव्य ज्यान मुद्दामा १० वर्ष कैद सजाय सुनाइएको थियो। मनमैजुबाट पक्राउ गरी उनलाई पुनः केन्द्रीय कारागार जग्गनाथदेवल पठाइएको छ। ८ वैशाख, काठमाडौं। कारागारबाट फरार भएका कर्तव्य ज्यान मुद्दाका दोषी पक्राउ परेका छन्। पक्राउ पर्नेमा धादिङको बेनिघाट रोराङ गाउँपालिका–७ धुसाका ३८ वर्षीय झ्याप्ले कमल न्यौपाने, जसलाई कमल विक नामले पनि चिनिन्छ, रहेका छन्। उनलाई काठमाडौं उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालयको टोलीले पक्राउ गरेको हो। उनी ज्यान मुद्दाको बेलामा सुन्धारा स्थित केन्द्रीय कारागार जग्गनाथदेवलबाट फरार भएका थिए। उनलाई कर्तव्य ज्यान मुद्दामा १० वर्ष कैद सजाय सुनाइएको थियो। पक्राउपछि उनलाई पुनः केन्द्रीय कारागार जग्गनाथदेवल पठाइएको प्रहरीले जानकारी दिएको छ।

कांग्रेस ने संविधान संशोधन से संबंधित आंतरिक चर्चा शुरू की

८ वैशाख, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस ने संविधान संशोधन के लिए सुझाव संकलन करने वाली समिति ने मंगलवार से अपना कार्य प्रारंभ किया है। पार्टी के उपसभापति पुष्पा भुसाल के संयोजकत्व में गठित १७ सदस्यों वाली समिति ने अपना पहला बैठक कर कार्य आगे बढ़ाया। इस बैठक में पार्टी सभापति गगन थापा, महामंत्री प्रदीप पौडेल, सहमहामंत्री उदयशमशेर राणा और योगेन्द्र चौधरी भी उपस्थित थे। बैठक में पार्टी सभापति थापाने संविधान संशोधन की आवश्यकता और समिति के दायित्वों के बारे में जानकारी दी।
थापाने कहा कि संविधान बनने को १० वर्ष से अधिक समय हो चुका है और अभ्यास के दौरान पाई गई कुछ विसंगतियों को संशोधित करने की जरूरत है। लोकतंत्र, नागरिक अधिकार, राष्ट्रीयता और समृद्धि को केंद्र में रखते हुए संविधान संशोधन पर चर्चा करने का समिति के पदाधिकारियों से आग्रह किया।
समिति के सदस्य सचिव राजु कटुवाल के अनुसार संविधान का सूक्ष्म अध्ययन करके संशोधन से संबंधित मसौदा तैयार किया जाएगा और इसके लिए संबंधित पक्षकारों, विज्ञों एवं सभी स्तरों के नागरिकों के साथ व्यापक संवाद की योजना बनाएगी। इसके साथ ही सरकार ने शुक्रवार तक कांग्रेस से संविधान संशोधन विषयक बहसपत्र बनाने के लिए प्रतिनिधि नाम भेजने का अनुरोध किया है, जो समिति को सूचित किया गया। समिति में वरिष्ठ अधिवक्ता राधेश्याम अधिकारी, हरिहर दाहाल, प्रेमबहादुर खड्का, उपेन्द्रकेशरी न्यौपाने, शेरबहादुर केसी, यदुनाथ खनाल, गोपालकृष्ण घिमिरे, योगेन्द्रबहादुर अधिकारी, दिनेश त्रिपाठी, सिताराम केसी, ललितबहादुर बस्नेत तथा अधिवक्ता रनबहादुर थेवे, शर्मिला श्रेष्ठ, झलमाया बिक और निरज गुप्ता सदस्य के रूप में शामिल हैं।

अमेरिका किस ईरानी ताकत से बातचीत कर रहा है?

समाचार की समीक्षा के बाद तैयार। ईरान पाकिस्तान में अमेरिका के साथ शांति वार्ता में हिस्सा लेने की संभावना पर विचार कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स (आईआरजीसी) ने होर्मुज स्ट्रेट में नियंत्रण बनाए रखा है और जहाजों के आवागमन को प्रबंधित कर रहा है। ईरानी सरकार और आईआरजीसी के बीच अमेरिका के साथ वार्ता को लेकर मतभेद नजर आ रहे हैं और आईआरजीसी देश में प्रमुख सत्ता है। ८ वैशाख, काठमाडौं।

मंगलवार, २१ अप्रैल को ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ईरान पाकिस्तान में अमेरिका के साथ शांति वार्ता में भाग लेने पर विचार कर रहा है। ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स’ (आईआरजीसी) से जुड़े फ़ार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, मेजर जनरल अब्दुल्लाही ने फ़ारसी में कहा, ‘आईआरजीसी ने इज़राइल और अमेरिका को थका दिया है, जिससे वे युद्धविराम की मांग करने पर मजबूर हुए हैं।’

हालांकि कुछ दिन पहले ईरानी संसद के सभापति मोहम्मद बगर गालिबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की धमकियों के बीच ईरान ने वार्ता स्वीकार नहीं करने की बात कही थी। सोमवार को ही ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के साथ वार्ता में शामिल होने के बारे में अभी कोई निर्णय नहीं होने की जानकारी दी। इसी प्रकार, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सोमवार को कहा कि अमेरिका के साथ तनाव कम करने के लिए सभी कूटनीतिक उपाय अपनाए जाने चाहिए, हालांकि उन्होंने अमेरिकी कदम की वजह से बढ़े अविश्वास पर चिंता भी जताई। विदेश मंत्री अब्बास अराघाची ने अधिक सौम्य रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका के साथ संबंधों की सभी पक्षों से समीक्षा कर भविष्य की रणनीतियां निर्धारित की जाएंगी।

विचारों में भिन्नता

सोमवार को ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने भी अमेरिका के साथ वार्ता जारी रखने की बात कही लेकिन इरान की सीमाओं का सम्मान आवश्यक बताया। इससे पता चलता है कि अमेरिका के साथ वार्ता विषय पर २४ घंटे के भीतर विभिन्न अभिव्यक्तियां आई हैं और ईरान अंततः वार्ता की दिशा में कितनी गंभीर है, स्पष्ट नहीं है। अप्रिल ११ को दोनों पक्षों के बीच पहले चरण की वार्ता हुई थी, जो दो सप्ताह के युद्धविराम के बाद हुई थी, मगर वह एक ही दिन खत्म हो गई। ऐसी स्थिति में ईरान में अंतिम निर्णय आखिर किसका है, यह अस्पष्ट है।

डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि ईरान के नए नेता पुराने कट्टरपंथी नहीं हैं और उनके साथ संवाद संभव है।

निर्णय किसके पास है?

ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि ईरान के नए नेता समझदार हैं तो देश का भविष्य उज्ज्वल और समृद्ध हो सकता है, लेकिन वे कौन हैं यह अभी स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार कभी-कभी अमेरिका के साथ शांति प्रक्रिया सही दिशा में लगती है तो कभी उलझन और अस्थिरता छा जाती है। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल उठता है – आखिर अमेरिका ईरान की किस ताकत से वार्ता कर रहा है? ‘पिस टॉक’ के माध्यम से होर्मुज स्ट्रेट खोलने या बंद करने के फैसले आखिर किसके हैं? क्या राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघाची, सभापति गालिबाफ, या इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स (आईआरजीसी)?

ईरानी मामलों के विशेषज्ञ सईद गोल्कर ने वाल स्ट्रीट जर्नल से कहा है कि वर्तमान में ईरान में ऐसा कोई केंद्रित व्यक्तित्व नहीं है जो पूरे देश को समेट सके, इसलिए अनिश्चितता बढ़ी है।

क्या आईआरजीसी सबसे शक्तिशाली है?

शुक्रवार, १७ अप्रैल को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघाची ने होर्मुज स्ट्रेट से सभी व्यावसायिक जहाजों के आवागमन की पूरी अनुमति देने की सूचना दी थी। लेकिन कुछ घंटों बाद आईआरजीसी ने घोषणा की कि अमेरिका की नाकेबंदी जारी रहने तक वे होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेंगे। इसके बाद शनिवार, १८ अप्रैल को भारतीय झंडे वाले दो जहाजों पर गोलीबारी की खबर आई और आईआरजीसी नौसेना ने उस क्षेत्र से उन जहाजों को आगे बढ़ने से रोका था। इससे अराघाची के विपरीत यह साबित हुआ कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को खुला नहीं रखा, और वहां नियंत्रण आईआरजीसी के पास है।

विदेश नीति विशेषज्ञ हर्ष पंत कहते हैं, ‘ईरान सरकार और आईआरजीसी के बीच मतभेद हैं। आईआरजीसी अपनी सत्ता बनाए रखना चाहता है और आज ईरान में आईआरजीसी के ऊपर कोई नियंत्रण नहीं है।’ अंतरराष्ट्रीय मामलों की जानकार स्मिता शर्मा ने कहा, ‘अराघाची जैसे लोग ईरान में बहुत कम हैं जो अभी अमेरिका के साथ वार्ता कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अलग थलग करने की कोशिश की जा रही है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘अराघाची को ईरान में अपमानित किया गया है और आईआरजीसी के वीडियो क्लिप उनके मज़ाक उड़ाते हैं।’

गालिबाफ की भूमिका

इस्लामवाद की वार्ता से पहले भी ईरान ने वार्ता में चुनौतियां पेश की थीं। बाद में वार्ता हुई और संसद के सभापति गालिबाफ ने इसे ‘रिक्त’ बताया था। मार्च २३ को द गार्जियन ने उल्लेख किया कि ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विट्कॉफ और अब्बास अराघाची के बीच मिस्र की मध्यस्थता में बैकचैनल बातचीत हुई थी, जिसे गालिबाफ ने नकार दिया और अमेरिका को अविश्वसनीय कहा था। १ मार्च को सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनी के निधन के अगले दिन गालिबाफ ने कहा था, ‘अमेरिका और इज़राइल ने रेड लाइन पार कर दी है और उन्हें इसका मूल्य चुकाना होगा।’ उन्होंने सरकारी संचार माध्यमों में कड़े बयान दिए और ट्रम्प तथा नेतन्याहू पर गंभीर आरोप लगाए। छह सप्ताह बाद, ११ अप्रैल को गालिबाफ इस्लामी वैश्विक वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख थे। यह १९७९ के बाद पहली उच्चस्तरीय वार्ता थी। गालिबाफ वार्ता का ईरानी चेहरा होने के बावजूद अमेरिकी विरोधी कठोर रुख के कारण असमंजस पैदा हुआ है और कई विशेषज्ञों का मानना है कि शांति वार्ता सफल होना कठिन है।

क्या शांति वार्ता ने ईरान के कट्टरपंथियों को नाराज़ किया?

अमेरिका और ईरान के पहले चरण की वार्ता के दौरान कट्टरपंथी समूह उत्साहित नहीं थे। वे होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने पर ज्यादा उत्साहित थे। उनका मानना है कि युद्ध जारी रखना चाहिए क्योंकि इससे अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ स्थिति मजबूत हो रही है। तेहरान से मिली रिपोर्ट के अनुसार, युद्धविराम घोषित होने पर उन्होंने अमेरिकी और इज़राइली झंडे जला दिए थे। आईआरजीसी के तहत बसिज मिलिशिया के कुछ सदस्यों ने भी रात भर जागकर इस फैसले का विरोध किया था। इससे साबित होता है कि उस समय आईआरजीसी और ईरानी सरकार की सोच पूरी तरह भिन्न थी।

स्मिता शर्मा ने कहा, ‘ट्रम्प के लगातार बदलते बयानों ने ईरान में कट्टरपंथी ताकतों को मजबूत किया है क्योंकि वे फिर से जनता को दिखाने में सफल हुए हैं कि अमेरिका भरोसेमंद नहीं है।’

यूएई ने दूसरे टी–20 मैच में नेपाल को 129 रन का लक्ष्य दिया

यूएई ने दूसरे टी–20 अंतरराष्ट्रीय मैच में नेपाल को 129 रन का लक्ष्य दिया है। निर्धारित 20 ओवरों में यूएई ने 8 विकेट खोते हुए 128 रन बनाए। नेपाल के सन्दीप लामिछाने ने 3 विकेट लिए जबकि हेमन्त धामी ने 2 विकेट हासिल किए।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय क्रिकेट मैदान में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए यूएई ने 20 ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर 128 रन बनाए। यूएई के अक्षदीप नाथ ने अर्धशतकीय पारी खेली। 48 रन पर 6 विकेट गिरने के बाद संकट में फंसे यूएई की बल्लेबाजी अक्षदीप और मोहम्मद अरफान की साझेदारी ने मजबूती प्रदान की। नाथ और अरफान ने सातवें विकेट के लिए 64 रन जोड़े। नाथ 53 रन पर नाबाद रहे जबकि अरफान 32 रन पर आउट हुए।

कप्तान मोहम्मद वासिम शून्य पर आउट हुए, अदीब उसमानी ने 30 रन बनाए, अलीशान शराफू 1 रन, हरप्रीत सिंह भाटिया 1 रन, शोएब खान 0, निलंश केसवानी 0 और तनभीर 0 रन पर आउट हुए। गेंदबाजी में नेपाल के सन्दीप लामिछाने को 3 विकेट मिले, हेमन्त धामी ने 2 विकेट लिए जबकि नंदन यादव और शाहव आलम को एक-एक विकेट मिला। पहले मैच में नेपाल को यूएई के खिलाफ 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था।