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लेखक: space4knews

गैस अभाव के लिए फिर उपभोक्ताओं को दोषी ठहराया गया

समाचार सारांश की समीक्षा की गई है। सरकार, नेपाल आयल निगम और गैस उद्योग संघ ने बाजार में एलपी गैस की कोई कमी न होने और अनावश्यक भंडारण के कारण कृत्रिम समस्या उत्पन्न होने का दावा किया है। वाणिज्य सचिव नारायणप्रसाद शर्मा दबादी ने गैस वितरण प्रणाली में व्यापक सुधार करते हुए घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए अलग-अलग मूल्य और सिलेंडर नीति लागू करने की जानकारी दी है। काठमांडू के प्रमुख जिल्ला अधिकारी ईश्वरराज पौडेल ने गैस छिपाने या शर्त लगाकर बेचने वाले व्यापारियों को कालाबाजारी अधिनियम के तहत कार्रवाई का चेतावनी दी है।

२९ साउन, काठमांडू। बाजार में खाना पकाने के एलपी गैस की कमी की शिकायत के बीच जब आम लोग खाली सिलेंडर लेकर सड़कों पर लाइन में खड़े हैं, सरकार, नियामक निकाय और उद्योग ने संयुक्त रूप से गैस की कोई कमी नहीं होने का दावा किया है। उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय, जिल्ला प्रशासन कार्यालय काठमांडू, नेपाल आयल निगम और गैस उद्योग संघ ने शुक्रवार को संयुक्त पत्रकार सम्मेलन कर बाजार में गैस की आम आपूर्ति सामान्य से अधिक होने के आंकड़े प्रस्तुत किए।

३१ असार से आधे (७.१ किलो) गैस सिलेंडर की जगह पूरी क्षमता (१४.२ किलो) वाले सिलेंडर बाजार में भेजना शुरू करने के कारण अचानक मांग में वृद्धि हुई और उपभोक्ताओं के अनावश्यक भंडारण की प्रवृत्ति के चलते बाजार में कृत्रिम असुविधा पैदा हुई, ऐसा उनका दावा है। मंत्रालय के अनुसार, १ साउन से २९ साउन तक भारत से २ हजार ७ सय ८१ बुलेट गैस आयात हुई है। सामान्य स्थिति में प्रतिदिन लगभग १ लाख १० हजार सिलेंडर बाजार में जाने की तुलना में इस २८ दिन की अवधि में औसतन प्रतिदिन १ लाख ३२ हजार सिलेंडर वितरित किए गए हैं। २६ साउन को १३४ बुलेट गैस आयात हुई और शुक्रवार को भी १०० से अधिक बुलेट आयात होने का तथ्य मंत्रालय ने प्रस्तुत किया है। देश भर में इस समय ५८ गैस उद्योग संचालित हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता १०,१६६ टन और दैनिक फीलिंग क्षमता १ करोड़ ७५ लाख सिलेंडर है।

वाणिज्य सचिव नारायणप्रसाद शर्मा दबादी ने कहा कि संविधान की धारा ४४ के तहत उपभोक्ताओं के अधिकार के प्रति सरकार पूरी तरह जागरूक है। बाजार में गैस की कमी नहीं है, बल्कि पिछले ‘बैकलॉग’ और डर के कारण मांग में वृद्धि हुई है। सचिव दबादी ने गैस आपूर्ति में देखी जा रही असुविधा को ‘संकट’ मानने से इनकार किया। उन्होंने बताया कि वितरण प्रणाली को औपचारिक और पारदर्शी बनाने के लिए मंत्रालय ने नीति सुधार शुरू कर दिया है।

‘हम गैस वितरण प्रणाली में व्यापक सुधार के चरण में हैं, अब घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए गैस का मूल्य और सिलेंडर अलग-अलग नीति के तहत होगा,’ सचिव दबादी ने कहा, ‘वर्तमान में खुदरा विक्रेता नेटवर्क बहुत अनौपचारिक है, अब डीलर और विक्रेताओं के मानक निर्धारित कर प्रमाणीकरण किया जाएगा।’

अर्थ मंत्रालय ने विराटनगर जुट मिल को संग्रहालय में बदलने और पुनः संचालन के प्रयास शुरू किए

सरकार ने १७ साल पहले बंद किए गए विराटनगर जुट मिल को पुनः संचालन या औद्योगिक संग्रहालय के रूप में विकसित करने के विभिन्न विकल्पों का अध्ययन शुरू किया है। अर्थ मंत्रालय ने इस उद्योग को निजी क्षेत्र को प्रबंधकीय अनुबंध पर देने, संग्रहालय बनाने या स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के प्रस्ताव रखे हैं। उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के सहसचिव संयोजन में गठित कार्यदल मिल की संपत्ति, दायित्व और संभावित रणनीतिक विकल्पों पर एक महीने के भीतर रिपोर्ट देगा। २८ साउन, काठमाडौं। १७ वर्ष पहले मंत्रिपरिषद् ने लगातार घाटे में चल रहे विराटनगर जुट मिल को बंद करने का निर्णय ले चुका था, लेकिन अब सरकार इसे औद्योगिक संग्रहालय बनाने के प्रस्ताव के साथ पुनः संचालित करने की तैयारी में है। नेपाल सरकार ने २०६६ साल में विराटनगर जुट मिल को लिक्विडेशन प्रक्रिया में ले जाने का निर्णय लिया था। लिक्विडेशन में कंपनी रजिस्टार कार्यालय से पत्राचार भी हो चुका था। हालांकि, कुछ सरकारों ने बीच-बीच में मिल पुनः संचालित करने के प्रयास भी किए थे। २०७२ साल से यह उद्योग पूरी तरह बंद है। अर्थ मंत्रालय ने इसे औद्योगिक संग्रहालय के रूप में विकसित करने की सिफारिश की है। मंत्रालय के अनुसार, पुनः उद्योग संचालित करने में महंगा खर्च आने के कारण सरकार तैयार नहीं है, इसलिए इसे दीर्घकालीन लीज या प्रबंधकीय अनुबंध में निजी क्षेत्र को देने का प्रस्ताव रखा है। नेपाल का पहला उद्योग होने के कारण इसे बंद कर प्रदेश सरकार एवं विराटनगर महानगरपालिका के सहयोग से औद्योगिक संग्रहालय के रूप में विकसित करने का विकल्प भी मंत्रालय ने रखा है। सम्मेलन के बाद मिल की जमीन पर हरित विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित कर स्वच्छ हरित ऊर्जा आधारित स्मार्ट उद्योग संचालित करने की संभावना भी दूसरे विकल्प में शामिल है। तीसरे विकल्प में रणनीतिक साझेदार के माध्यम से जुट मिल पुनः संचालित कर नई तकनीक और पूंजी निवेश करने की योजना है। मगर पिछली बार प्रबंधकीय अनुबंध और लीज के माध्यम से संचालित करने में विफलता के कारण संग्रहालय और स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र विकास विकल्प अधिक उपयुक्त समझा जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ भी उद्योग संचालन पर चर्चा हुई है। उद्योग की स्थिति, संपत्ति एवं दायित्व अस्पष्ट हैं, अर्थ मंत्रालय द्वारा तैयार संक्षिप्त रिपोर्ट के अनुसार मिल की संपत्ति और दायित्वों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। मशीनरी, उपकरणों की स्थिति ज्ञात नहीं है और जुट बाजार की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन नहीं होने के कारण पुनः संचालन निर्णय लेना कठिन हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि “मशीनरी और उपकरणों की संचालन स्थिति अनिश्चित है, जमीन और भौतिक संपत्तियों के सटीक विवरण नहीं हैं, बकाया ऋण, कर और अन्य दायित्वों की पुष्टि नहीं हो सकी है।” जुट उत्पादन के उद्देश्य से १३ जुलाई १९३६ को विराटनगर जुट मिल्स लिमिटेड की स्थापना हुई थी। २०५० साल तक यह लाभ में चला लेकिन बाद में घाटे में चला गया और सुचारु न होने की वजह स्पष्ट नहीं है। उद्योग संचालन के लिए खराब स्थिति में उपकरणों और संरचनाओं के विषय में उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के सहसचिव के संयोजन में अध्ययन कार्यदल बनाया गया है। कार्यदल मिल की संरचना, मशीनरी, संपत्ति और दायित्वों की स्थिति एवं पूर्व निर्णयों का समीक्षा करेगा। कार्यदल को जुट मिल पुनः संचालन के संभावित विकल्प तथा रणनीतियों के साथ रिपोर्ट एक माह के भीतर प्रस्तुत करने को कहा गया है। तीन दशक से निजीकरण और पुनः संरचना प्रयास विराटनगर जुट मिल के निजीकरण और पुनः संरचना में तीन दशक से प्रक्रिया जारी है। २९ मंसिर २०५२ को निजीकरण समिति ने अगली निजीकरण चरण में विराटनगर जुट मिल्स लिमिटेड को चुना था। इसके बाद उद्योग को प्रबंधकीय अनुबंध पर देने का काम शुरू हुआ। २४ असार २०५४ को जुट मिल्स ने अर्थ मंत्रालय के निजीकरण इकाई को पत्र लिखकर बताया कि मिल को १३ असार २०५३ से प्रबंधकीय अनुबंध पर दिया गया है। घाटे में चलने के कारण २०६६ साल में मंत्रिपरिषद् ने इसे लिक्विडेशन में ले जाने का निर्णय लिया और छह महीने में प्रक्रिया पूरी करने के लिए कंपनी रजिस्टार कार्यालय के माध्यम से लिक्विडेटर नियुक्त किया। निजी निवेशकों को लिक्विडेशन खर्च में भागीदारी और संपत्ति को गिरवी रख ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय भी लिया गया। उद्योग मंत्रालय ने २३ फागुन २०६६ को कंपनी रजिस्टार कार्यालय को पत्र लिखा। सरकार ने १५ असार २०६७ को मिल की देखरेख सशस्त्र प्रहरी बल, सीमा सुरक्षा कार्यालय मोरङ को सौंपने का निर्णय लिया। उद्योग मंत्रालय ने १७ माघ २०६६ को कर्मचारियों को वेतन कटौती (पे-ऑफ) हेतु ऋण निवेश का प्रस्ताव रखा। मंत्रिपरिषद ने २० माघ २०६६ को कर्मचारियों को सेवामुक्त करने का भी निर्देश दिया। अर्थ मंत्रालय ने २०६६ पुस तक के वेतन और सुविधाओं के लिए ५५ करोड़ ९२ लाख १९ हजार ११० रुपये ऋण मंजूर किया। मंत्रिपरिषद की आर्थिक अवसंरचना समिति ने विराटनगर जुट मिल की जमीन, संरचना और कारखाना उद्योग मंत्रालय के नाम स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। उद्योग मंत्रालय ने १८ पुस २०६८ को अर्थ मंत्रालय से सहमति मांगते हुए मिल को पूरी तरह लिक्विडेशन में ले जाने के लिए पत्राचार किया। लेकिन १७ फागुन २०६८ को मंत्रिपरिषद ने इस निर्णय की पुनरावृत्ति कर निजी क्षेत्र को प्रबंधकीय अनुबंध में देने का प्रस्ताव रखा। २८ फागुन २०६८ को मंत्रिपरिषद की आर्थिक अवसंरचना समिति की बैठक में लिक्विडेशन निर्णय रद्द कर निजी क्षेत्र को लीज पर देने का निर्देश उद्योग मंत्रालय को दिया। इसके अनुसार सरकार ने ३ मंसिर २०६९ को भारतीय कंपनी विनसम इंटरनेशनल लिमिटेड को जिम्मेदारी दी। इस कंपनी ने वार्षिक १ करोड़ ३५ लाख रुपये सरकार को देने की शर्त पर जुट मिल को लीज पर लिया। उसने ११ महीने १८ दिन उद्योग संचालित किया। २०७१ में विद्युत आपूर्ति में समस्या से उद्योग बंद हो गया और पुनः नहीं चला। २०७३ असोज ४ को जुट मिल ने भारतीय कंपनी को लीज समझौता समाप्त करने का पत्र लिखा और दो दिन बाद बोर्ड ने भी समझौता रद्द करने का निर्णय लिया। लीज रद्द होते ही अर्थ मंत्रालय ने १५ मंसिर २०७३ को कारखाना संचालन और किराए संबंधी सूचना मांगी। जवाब में उद्योग ने कहा कारखाना संचालन में नहीं है, संपत्ति की स्थिति बताई और किराया भुगतान व लेखा जांच संपूर्ण किया। तत्कालीन उद्योग मंत्री महेश बस्नेत ने सरकार के शेयर ६८ प्रतिशत से घटाकर ३२ प्रतिशत करने की योजना बनाई थी, जिसे नियुक्त अध्यक्ष वसंत वन एवं प्रबंध निदेशक निलहरी काफ्ले के माध्यम से किया जाना था। लेकिन भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के सतर्कता के कारण यह योजना सफल नहीं हो सकी।

सरकार चलाएगी या निजी क्षेत्र को देगी?

२८ साउन, विराटनगर । बाहर पुराने संरचनाएं जो पेड़ों और झाड़ियों से ढकी हुई हैं। अंदर कपड़े और जंग से ढके हुए मशीनें, मकड़ी के जाले और ओस की खुशबू। चारों ओर कूड़ा और जमा हुआ पानी, कहीं मशीनों पर छोड़े गए फटे बोरे, कहीं क्वाइल निकालकर छोडे गए मोटर जो नजरअंदाज हो चुके हैं। नेपाल की पहली उद्योग, विराटनगर जुट मिल्स की वर्तमान स्थिति कुछ ऐसी ही है। कभी यह मिल ८ हजार लोगों को रोजगार देता था, लेकिन अब इसके लाल दीवार पर अभी भी सफेद अक्षरों में लिखे गए नारे दिखाई देते हैं – ‘उत्पादन बढ़ाएं, मिल बचाएं, कचरा घटाएं, नुकसान बचाएं।’ लेकिन वर्षों से न तो कोई उत्पादन है और न ही मिल सक्रिय है। दीवारें कई जगह फटी हुई हैं और दक्षिण-पश्चिमी दीवार ध्वस्त हो चुकी है। छत से पानी रिसता है और जरूरी पार्ट्स खो चुके हैं। १९९३ में स्थापित यह जुट मिल्स कई वर्षों से बंद है। इसे पुनः चालू करने के लिए सरकार ने एक अध्ययन दल का गठन किया है। टीम बन जाने के बाद मिल फिर से शुरू होने की उम्मीद जगी है। लेकिन कमजोर भौतिक संरचना, पुराने मशीनों और प्रतिस्पर्धी बाजार की वजह से मिल संचालित करना कठिन है। सरकार स्वयं संचालित करेगी या निजी क्षेत्र को लीज पर देगी इस पर चर्चा जारी है। जिनके मुताबिक मिल्स के पूर्व संचालक फूलकुमार लालवानी बताते हैं कि जुट मिल्स कम पूंजी में चलाया जा सकता है। ‘संचालन मुश्किल नहीं है, मशीनें उपयोगी हैं। कम निवेश में चलाना संभव है,’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन सरकार स्व चलाने के बजाय लीज पर देना उचित होगा।’

मिल संचालक समिति के अध्यक्ष नन्दलाल देवकोटा कहते हैं कि मिल तुरंत संचालित हो सकता है। सरकार द्वारा अध्ययन समिति गठित करने के बाद यह संभावना और बढ़ी है। समिति ने संचालन की तैयारी की है और सरकार का सहयोग इसे आसान बनाता है। सरकार खुद चलाने के बजाय निजी क्षेत्र को जिम्मेदारी देना उपयुक्त समझते हैं। ‘५०–६० करोड़ निवेश करके मिल संचालित किया जा सकता है,’ उन्होंने कहा, ‘सरकार उद्योग संचालन से ज्यादा सहजीकरण करेगी। एक टीम को जिम्मेदारी देना बेहतर होगा।’ समिति की सलाह के अनुसार व्यवहार करने का निर्णय लिया गया है। जुट उत्पादन की तकनीक में बदलाव न होने पर भी पुराने मशीनों का उपयोग किया जा सकता है। लेकिन परंपरागत तरीके से मिल्स चलाना संभव नहीं, उद्योग विशेषज्ञ धर्मानंद सञ्जेल बताते हैं। जुट मिल्स के पुराने मशीनें वर्तमान बाज़ार की प्रतिस्पर्धा के लिए पर्याप्त गुणवत्ता के उत्पाद नहीं दे पाती। मौजूदा अन्य जुट मिल्स भी बंद होने की कगार पर हैं, इसलिए पुरानी तकनीक में उद्योग चलना संभव नहीं है। आधुनिक और तकनीक-संगत उत्पादन के बिना बाजार प्रतिस्पर्धा नहीं हो सकेगी, देवकोटा ने कहा। ‘वर्तमान अन्य जुट मिल्स की स्थिति भी अच्छी नहीं है, बांग्लादेश से पट्टुओं का निर्यात नहीं हो रहा है,’ उन्होंने कहा, ‘विराटनगर के अन्य जुट उद्योग नई तकनीक से चल रहे हैं। नई तकनीक लाए जाने पर उद्योग चल सकता है।’ जुट के नए और पर्यावरण-मित्रवत उत्पादन की सुविधा हो तो जुट मिल्स संचालित हो सकता है। ‘भारतीय बाजार के नजदीक है, जुट की थैलियाँ और अन्य सामग्री बनाई जा सकती हैं,’ देवकोटा ने कहा, ‘मिल का क्षेत्र बड़ा है, अन्य उद्योग भी शुरू किए जा सकते हैं।’

उनके अनुसार मिल की इमारत के अंदर के सभी मशीन नहीं हैं। कुछ छोटे मशीन चुरा लिए गए हैं। बड़े हिस्सा खंडहर में हैं। हाल में मशीन चलाने के लिए लाए गए कुछ छोटे मशीनरी भी चोरी हो गए हैं। उद्योग खंडहर की तरह हो चुका है, लेकिन हर घंटे बजने वाली घंटी अभी भी बजती रहती है। एक समय में ८ हजार कारीगर तीन शिफ्ट में काम करते थे, अब केवल ९ कर्मचारी बचे हैं, जिनमें ५ सुरक्षा गार्ड हैं। वे सुरक्षा गार्ड बारी-बारी से घंटी बजा रहे हैं। छत बारिश में पानी रोकने में असमर्थ है, लेकिन जर्जर संरचना के बावजूद कार्यरत कर्मचारियों को मिल बस चलने की थोड़ी उम्मीद है। सुपरवाइजर मनोज खड्काले बताया कि संरचनाएं मरम्मत करके मिल दुबारा शुरू की जा सकती हैं। इमारतें मजबूत हैं, उन्होंने कहा।

विराटनगर जुट मिल्स के स्थापना के साथ ही मोरङ-सुनसरी औद्योगिक कॉरिडोर और देशभर में उद्योग स्थापना की लहर आई थी। नेपाल की औद्योगिक क्रांति के साथ ही प्रजातांत्रिक आंदोलन भी इसी मिल से शुरू हुआ था। यह मिल २०४६ दशक तक सरकार द्वारा संचालित था। निजीकरण की बात करते हुए गोल्छा ऑर्गनाइजेशन को जिम्मेदारी दी गई, लेकिन संचालन नहीं कर सका। २०५८ में सरकार ने २ हजार कर्मचारियों को ५५ करोड़ रुपए भुगतान कर मिल बंद कर दिया। फिर २०६९ में विनसोम इंटरनेशनल कोलकाता को संचालन दिया गया। समझौते के मुताबिक ६ महीने में ३३ केवीए बिजली उपलब्ध कराए जाने थे, लेकिन ढाई साल तक बिजली न मिलने पर २५ साल के लिए लीज पर ली गई कम्पनी को वापस कर दिया गया। वसन्त वन का अध्यक्ष बनने के बाद २०७५ में कुछ समय मिल पुनः चालू हुआ। सूत्री उत्पादन शुरू किया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद बंद हो गया। सूत्री के लिए जोड़े गए छोटे उपकरण भी वर्तमान में उद्योग परिसर में नहीं हैं, वह चोरी हो चुके हैं।

जुट मिल्स पर लंबे समय से अध्ययन कर रहे पत्रकार अनन्तराज न्यौपाने कहते हैं कि संरचनाओं की जटिलता के कारण मिल संचालन कठिन है। ‘मशीनें पुरानी हैं। नई तकनीक आ चुकी है, पुरानी विधि से चलाना व्यर्थ है,’ वे कहते हैं, ‘जुट की थैलियाँ, बैग आदि बनाया जा सकता है, लेकिन राज्य संचालित करना उपयुक्त नहीं है। निजी क्षेत्र को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।’

पुष्पलाल स्मृति बैडमिंटन प्रतियोगिता में शीर्ष ८ खिलाड़ियों का समीकरण पूरा

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा किया गया।

  • लीनिंग १४वां पुष्पलाल स्मृति राष्ट्रीय वरिष्ठता बैडमिंटन प्रतियोगिता में पुरुष एवं महिला एकल सेमीफाइनल का समीकरण पूरा हुआ।
  • पुरुष एकल सेमीफाइनल में क्षितिज खनाल विष्णु कटुवाल से और प्रफुल महर्जन प्रिंस दाहाल से मुकाबला करेंगे।
  • महिला एकल में रसिला महर्जन निता लम्साल से तथा रिहाना सेरचन शेस्ना श्रीपाल से फाइनल के लिए खेलेंगी।

२९ साउन, काठमांडू। लीनिंग १४वां पुष्पलाल स्मृति राष्ट्रीय वरिष्ठता बैडमिंटन प्रतियोगिता में पुरुष और महिला एकल में सेमीफाइनल का समीकरण पूर्ण हो गया है।

सह-आयोजक यल स्पोर्ट्स अकादमी के कवर हॉल में गुरुवार को सम्पन्न समूह चरण के मैचों के साथ पुरुष और महिला एकल के समूह विजेता और उपविजेताओं का निर्धारण हो गया।

पुरुष एकल समूह ‘ए’ से एपीएफ के क्षितिज खनाल ने तीनों मैच जीते और समूह विजेता बने। प्रिंस दाहाल दो जीत के साथ उपविजेता होकर सेमीफाइनल में प्रवेश किये। क्षितिज ने नेपाल पुलिस क्लब के सुनिल जोशी को २१-९, २१-१२ तथा प्रिंस ने पुलिस के जीवन आचार्य को २२-२०, २१-१६ से हराया।

समूह ‘बी’ से त्रिभुवन आर्मी क्लब के प्रफुल महर्जन ने तीनों मैच जीतकर विजेता पद प्राप्त किया और पुलिस के विष्णु कटुवाल दो जीत के साथ उपविजेता हुए। निर्णायक मैच में प्रफुल ने विष्णु को १४-२१, २१-१२, २१-१७ से पराजित किया। एक अन्य मैच में एपीएफ के देवराज राना ने पुलिस के दीपक बोहरा को २१-१६, २२-२० से हराया।

अब पुरुष एकल फाइनल के लिए क्षितिज विष्णु से और प्रफुल प्रिंस से मुकाबला करेंगे।

महिला एकल समूह ‘ए’ से नेपाल की नंबर एक खिलाड़ी और त्रिभुवन आर्मी क्लब की रसिला महर्जन ने दो मैच जीतकर विजेता बनाईं। पुलिस की शेस्ना श्रीपाली एक जीत के साथ उपविजेता हैं। रसिला ने आर्मी की अनुपमा राय को २१-५, २१-७ से हराया।

समूह ‘बी’ से एपीएफ की रिहाना सेरचन तीनों मैच जीतकर विजेता बनीं, जबकि पुलिस की निता लम्साल दो जीत के साथ उपविजेता हैं। निर्णायक मैच में रिहाना ने निता को १३-२१, २१-१४, २१-१२ से हराया। सिटिजन्स बैंक की नंगशल तामांग ने आर्मी की अमिता गिरी को २०-२२, २१-११, २१-१० से पराजित किया।

महिला एकल के फाइनल में रसिला निता से और रिहाना शेस्ना से भिड़ेंगी।

नेपाल खेलकूद महासंघ के राष्ट्रीय बैडमिंटन संघ द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में पुरुष यू-११ एकल में भी अंतिम आठ की स्थिति स्पष्ट हो गई है। नेपाल पुलिस के विराट बस्नेत, सुर्खेत के सुप्रेन शाही, आर्मी के कृमोन रिजाल, इमाडोल बैडमिंटन के धननारायण श्रेष्ठ, नोबल इंवायरनमेंट के डेनिस थापा, सुर्खेत के माहिर बाबु श्रीपाली, जेबी के दीप तामांग तथा कस्तुरी अकादमी के प्रज्ञान ढकाल अंतिम आठ में पहुंच चुके हैं।

महिला यू-११ एकल में आर्मी की युमिका राय, सिन्धुपाल्चोक की रिदिना श्रेष्ठ, इमाडोल बैडमिंटन की इर्याना मगर, गैलेक्सी की योन्जना मगर, आर्मी की अरक्षा डंगोल, जेबी की देनिशा प्रधान, गैलेक्सी की अर्चना मगर और एपीएफ की रेन्शा श्रेष्ठ क्वार्टरफाइनल में पहुँच चुकी हैं।

संचार मंत्री ने दूरसंचार सेवा विस्तार और गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया

संचार मंत्री डॉ. विक्रम तिमिल्सिन ने दूरसंचार सेवा की गुणवत्ता सुधारने और उसकी पहुंच को अधिक व्यापक बनाने को प्राथमिकता देते हुए संबंधित एजेंसियों को परिणामकेंद्रित कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने दुर्गम क्षेत्रों के नागरिकों को संचार सेवाओं से जोड़ना राज्य की प्रमुख जिम्मेदारी बताते हुए ग्रामीण दूरसंचार विकास कोष (आरटीडीएफ) के फंड के प्रभावी उपयोग पर बल दिया।

नेपाल टेलिकॉम की प्रबंध निदेशक संगिता पहाड़ी ने दुर्गम इलाकों में सेवा विस्तार के लिए अतिरिक्त फ्रिक्वेंसी और आरटीडीएफ सहायता की आवश्यकता बताई। मंत्री तिमिल्सिन ने नागरिकों की ओर से लगातार टेलीफोन तथा इंटरनेट सेवाओं की गुणवत्ता में कमी की शिकायतें मिलने का उल्लेख करते हुए सेवा विस्तार और गुणवत्ता सुधार में नियामक संस्थाओं और सेवा प्रदाताओं को गंभीर और परिणामोन्मुख कार्य करने की आवश्यकता बताई।

संचार मंत्री तिमिल्सिन ने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों के साथ-साथ कई शहरी इलाकों में भी नागरिक टेलीफोन और इंटरनेट की उचित सुविधा से वंचित हैं, वहीं ग्रामीण दूरसंचार विकास के लिए संकलित आरटीडीएफ कोष प्रभावी रूप से खर्च नहीं हो पा रहा है। उन्होंने नेपाल टेलिकॉम को सेवा विस्तार और गुणवत्ता सुधार के लिए स्पष्ट व्यावसायिक योजना बनाने और उसे लागू करने के निर्देश दिए।

नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण के अध्यक्ष अर्जुन घिमिरे ने कहा कि आरटीडीएफ कोष के उपयोग से सेवा विस्तार के लिए प्राधिकरण लंबे समय से कार्य कर रहा है, हालांकि कुछ परियोजनाएं अब भी पूरी तरह से संपन्न नहीं हो सकी हैं। नेपाल टेलिकॉम इस वित्तीय वर्ष में लगभग एक हजार किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर का विस्तार करने का लक्ष्य रखता है।

नेपाली पौडी टोली एसियाडको तयारीका लागि भारतमा प्रशिक्षण लिने

नेपाली पौडी टोली २०औं एसियाली खेलकुदको तयारीका लागि भारतको बेंगलुरुमा एक महिनासम्म प्रशिक्षण गर्ने तयारीमा छ। सात सदस्यीय टोलीमा पाँच खेलाडी रहेका छन् र टोली शनिबार भारत प्रस्थान गर्नेछ। राष्ट्रिय खेलकुद परिषद्को सदस्य–सचिव रामचरित्र मेहताले शुक्रबार टोलीलाई बिदाइ गरेका छन्।

खेलाडीमध्ये पुरुषतर्फ जाडेन श्रेष्ठ, अभिभ प्रधान र इर्भिन श्रेष्ठ रहेका छन् भने महिलातर्फ डुवाना लामा र आर्या महर्जन छन्। प्रशिक्षक रत्नलाल महर्जन रहँदा व्यवस्थापकको जिम्मेवारी शिरीष गुरुङले सम्हाल्नेछन्। २०औं एसियाली खेलकुद असोज ३ गतेदेखि सुरु हुनेछ।

शेरबहादुर देउवा: पार्टी की आधिकारिकता विवाद में सर्वोच्च न्यायालय से न्याय मिलने का विश्वास

२९ साउन, काठमाडौं । नेपाली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष शेरबहादुर देउवा ने पार्टी की आधिकारिकता विवाद में सर्वोच्च न्यायालय से न्याय मिलने के विषय में पूर्ण रूप से आश्वस्त होने का उल्लेख किया है। उन्होंने यह आश्वासन शुक्रवार से शुरू हुए विपक्षी पक्ष के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए दिया।

‘इस समय लंबे इतिहास वाले नेपाली कांग्रेस के भीतर गहरा विवाद फैल चुका है। विशेष महाधिवेशन के नाम पर पार्टी को कमजोर करने के उद्देश्य से विधि, विधान और प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया है,’ देउवा ने कहा, ‘यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में पुनरावलोकन के तहत है, इसलिए मैं इस पर और टिप्पणी नहीं करना चाहता। लेकिन मुझे पूर्ण भरोसा है कि हमें अदालत से न्याय मिलेगा।’

नेपाल वॉलीबॉल लीग भदौ १९ से २७ तक आयोजित होगी

नेपाल वॉलीबॉल लीग (एनवीएल) आगामी भदौ १९ से २७ तक आयोजित की जाएगी। आयोजक केडिया ग्रुप ने प्रतियोगिता की आधिकारिक तिथि की घोषणा करते हुए पुरुष फ्रेंचाइजी वॉलीबॉल लीग आयोजित करने की पुष्टि की है। इस प्रतियोगिता में छह फ्रेंचाइजी टीमें हिस्सा लेंगी और खिलाड़ियों की नीलामी भी पूरी हो चुकी है।

पहले यह प्रतियोगिता भदौ १२ से शुरू होने की बात कही गई थी, लेकिन आयोजकों ने आधिकारिक तिथि घोषित नहीं की थी। अब लीग भदौ १९ से २७ तक आयोजित होने की पुष्टि हो चुकी है। लीग में ६ फ्रेंचाइजी टीमें भाग लेंगी और प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ी नीलामी का कार्य भी पूरा हो चुका है। नेपाल वॉलीबॉल लीग केडिया ग्रुप द्वारा आयोजित एक पुरुष फ्रेंचाइजी वॉलीबॉल प्रतियोगिता है।

अर्नवले क्लाइम्बिङ एसिया यूथ च्याम्पियनसिपमा प्रतिस्पर्धा गर्ने

अर्नवमान शेरचन विश्व क्लाइम्बिङ एसिया यूथ च्याम्पियनसिपमा सहभागी हुन आइतबार चीनको गुइयान प्रस्थान गर्दैछन्। भदौ ५ देखि ९ गतेसम्म सञ्चालन हुने उक्त प्रतियोगितामा उनले लिड र बोल्डर विधामा प्रतिस्पर्धा गर्नेछन्, जानकारी नेपाल क्लाइम्बिङ स्पोर्ट संघका महासचिव सन्तोष मादेनले दिएका छन्।

राष्ट्रिय खेलकुद परिषद् सदस्य–सचिव रामचरित्र मेहताले शुक्रबार एक कार्यक्रमका बीच खेलाडी शेरचनलाई बिदाइ गरेका छन्। अर्नवको यो प्रतियोगितामा सहभागिता नेपालका लागि महत्वपूर्ण मानिएको छ।

‘काठमांडू विश्वविद्यालय को दक्षिण एशिया में विशिष्ट पहचान दिलाने की योजना’

काठमांडू विश्वविद्यालय के उपकुलपति के रूप में प्रो. डॉ. विवेक बराल को नियुक्त किया गया है। विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र बराल विद्यार्थी और प्राध्यापक के बाद उपकुलपति की जिम्मेदारी संभालने वाले पहले व्यक्ति बने हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बनाते हुए अनुसंधान और तकनीकी मित्रता वाले प्रशासन पर जोर देने की योजना सार्वजनिक की है।

बराल ने कहा, “यह मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि काठमांडू विश्वविद्यालय ने अपने विद्यार्थियों को दिए अवसर और संस्कृति की सफलता है।” उन्होंने छात्र जीवन में विश्वविद्यालय के शैक्षिक माहौल और संस्कृति को नजदीक से अनुभव किया है और उसी विश्वविद्यालय में अध्यापन, अनुसंधान तथा प्रशासन की जिम्मेदारियां निभाई हैं। उन्होंने उपकुलपति पद ग्रहण करके विश्वविद्यालय को और मजबूत बनाने, इसकी प्रतिष्ठा बनाए रखने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए उत्कृष्ट विश्वविद्यालय बनाने की जिम्मेदारी के रूप में लिया है।

बराल ने कहा कि काठमांडू विश्वविद्यालय का आकार, पहुंच और कार्यक्रमों का विस्तार हुआ है, “लेकिन विस्तार के साथ चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं।” उन्होंने विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में टिकने योग्य, प्रभावशाली अनुसंधान करने वाला और देश के विकास में प्रत्यक्ष योगदान देने वाला बनाना आवश्यक बताया।

उन्होंने शैक्षिक उत्कृष्टता, अनुसंधान और नवप्रवर्तन पर ध्यान देने, अंतरराष्ट्रीयकरण और डिजिटल रूपांतरण के लिए योजनाएं बनाई हैं। बराल ने कहा, “मेरा लक्ष्य काठमांडू विश्वविद्यालय को न केवल नेपाल में बल्कि दक्षिण एशिया में विशिष्ट पहचान बनाने वाला विश्वविद्यालय बनाना है।”

सेन्ट्रल कमान्ड ने ‘फाल्कन स्ट्राइक’ ड्रोन कार्यदल गठन करने की योजना बनाई

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा पश्चात तैयार।

  • अमेरिकी सेन्ट्रल कमान्ड ने पश्चिम एशिया में ड्रोन तकनीक को एकीकृत करते हुए बहुराष्ट्रीय एवं बहु-क्षेत्रीय आक्रमण ड्रोन कार्यदल ‘फाल्कन स्ट्राइक’ गठन करने की योजना घोषित की है।
  • सेन्ट्रल कमान्ड के कमांडर एडमिरल ब्राड कूपर ने साझेदार देशों के साथ मिलकर नई तकनीक और क्षमताओं से सामूहिक सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाने की बात कही।
  • विशेष संचालन कमान्ड सेन्ट्रल के नेतृत्व में बने इस कार्यदल में समुद्री और हवाई क्षेत्रों में मानव रहित प्रणालियों को एकीकृत कर परिचालन किया जाएगा।

२९ साउन, फ्लोरिडा (रासस/एएनआई) — पश्चिम एशिया में संघर्ष और सुरक्षा तनाव बढ़ते हुए, अमेरिकी सेन्ट्रल कमान्ड ने अमेरिका और क्षेत्रीय साझेदारों के मानव रहित प्रणालियों को जोड़ते हुए पहला बहुराष्ट्रीय एवं बहु-क्षेत्रीय आक्रमण ड्रोन कार्यदल ‘फाल्कन स्ट्राइक’ गठन करने की योजना की घोषणा की है।

सेन्ट्रल कमान्ड के अनुसार, यह नया कार्यदल समुद्र की सतह, समुद्र के भीतर और हवाई क्षेत्रों में संचालित मानव रहित प्रणालियों का समन्वय करेगा। इसमें एकतरफा आक्रमण के लिए उपयोग किए जाने वाले ड्रोन भी शामिल होंगे। सेन्ट्रल कमान्ड ने गुरुवार को जारी एक विज्ञप्ति में क्षेत्रीय साझेदारों को कार्यदल में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने की सूचना दी।

यह योजना नौ महीने पहले सेन्ट्रल कमान्ड द्वारा स्थापित ‘स्कर्पियन स्ट्राइक’ नामक कार्यदल के बाद सार्वजनिक की गई है। अमेरिकी सेना ने स्कर्पियन स्ट्राइक को मध्य पूर्व में स्थापित पहला समर्पित एकतरफा आक्रमण ड्रोन कार्यदल बताया है।

स्कर्पियन स्ट्राइक ने पिछले वर्ष दिसंबर में अमेरिकी नौसेना युद्धपोत से पहली बार हवाई आक्रमण ड्रोन लॉन्च किया था। इस कार्यदल ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ के दौरान एकतरफा मानव रहित हवाई प्रणालियों का उपयोग किया, तथा जुलाई में इरानी बंदरगाह संरचनाओं पर हमला करते हुए मानव रहित आक्रमणकारी जलयानों को भी तैनात किया था।

सेन्ट्रल कमान्ड के कमांडर एडमिरल ब्राड कूपर ने बताया कि फाल्कन स्ट्राइक, स्कर्पियन स्ट्राइक की सफलता का विस्तार करेगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सहयोगी और साझेदारों के बीच विकसित नई तकनीक और क्षमताओं का संयुक्त उपयोग जल्दी नए अवसरों को वास्तविकता में बदलने में सहायक होगा।

सेन्ट्रल कमान्ड क्षेत्रीय देशों से परामर्श शुरु कर चुका है और साझेदार देशों को कार्यदल में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेज रहा है। साझेदारों के शामिल होने से फाल्कन स्ट्राइक पश्चिम एशिया में आक्रमणकारी ड्रोन क्षमताओं का विस्तार और बहु-क्षेत्रीय तथा बहुराष्ट्रीय प्रतिरोध क्षमता विकसित करेगा, ऐसी उम्मीद है।

कूपर ने कहा कि अमेरिकी सेना के इस क्षेत्र में मजबूत साझेदारी और मित्र राष्ट्र हैं और नई क्षमताओं के संयुक्त विकास और उपयोग से सामूहिक सुरक्षा क्षमता और मजबूती प्राप्त होगी।

‘स्कर्पियन स्ट्राइक’ की शुरुआत अमेरिकी विशेष संचालन कमांड सेन्ट्रल के कर्मचारियों ने की थी, जो फाल्कन स्ट्राइक का नेतृत्व भी करेंगे। इस कार्यदल में अमेरिकी तथा क्षेत्रीय साझेदारों के प्रतिनिधि होंगे।

विशेष संचालन कमांड सेन्ट्रल का मुख्यालय फ्लोरिडा के टाम्पा में मैकडिल वायुसेना सैनिक अड्डे पर स्थित है। यह पश्चिम एशिया, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया समेत २१ देशों में विशेष सैन्य अभियानों की योजना और संचालन करता है, जो सेन्ट्रल कमान्ड की जिम्मेदारी में आता है।

फाल्कन स्ट्राइक कार्यदल की प्रस्तावित स्थापना से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिकी सेना विभिन्न सैन्य क्षेत्रों में मानव रहित प्रणालियों के उपयोग को बढ़ा रही है तथा क्षेत्रीय साझेदारों के साथ नई ड्रोन तकनीक और क्षमताओं के एकीकरण को तेजी से आगे बढ़ा रही है।

राष्ट्रिय खेलकुदमा खेलाडीहरूको लागि दैनिक म्याच शुल्कको व्यवस्था गर्न माग

राष्ट्रिय खेलकुद परिषदले आगामी दशौँ राष्ट्रिय खेलकुद प्रतियोगिता मङ्सिर १६ देखि २९ गतेसम्म कर्णाली प्रदेशमा सञ्चालन गर्ने निर्णय गरेका छन्। कोशी प्रदेश खेलकुद विकास बोर्डका सदस्य सचिव विप्लव घोषले खेलाडीहरूको मनोबल बढाउन प्रतियोगितामा सहभागी खेलाडी तथा अफिसियलहरूको लागि दैनिक म्याच शुल्कको व्यवस्था गर्न माग गरेका छन्।

बैठकले पहिलोपटक राष्ट्रिय पारा खेलकुद प्रतियोगिता पुस १५ गतेदेखि आयोजना गर्ने र २०औं एसियाली खेलकुदका लागि नेपाली टोलीको नामावली अनुमोदन गर्ने निर्णय गरेको छ। काठमाडौं, २९ साउन। विप्लव घोषले राष्ट्रिय खेलकुद प्रतियोगितामा सहभागी खेलाडी तथा अफिसियलहरूलाई दैनिक म्याच शुल्कको व्यवस्था गर्न माग गरेका छन्। यसको फलस्वरूप खेलाडीहरूको मनोबल बढ्ने उनको भनाइ छ।

बैठकले कर्णाली प्रदेशमा हुने दशौँ राष्ट्रिय खेलकुद प्रतियोगिता मङ्सिर १६ देखि २९ गतेसम्म सञ्चालन गर्ने निर्णय गरेको छ। साथै, पहिलोपटक राष्ट्रिय पारा खेलकुद प्रतियोगिता पुस १५ गतेदेखि आयोजना गर्ने र २०औं एसियाली खेलकुदका लागि नेपाली खेलाडी र अफिसियलहरूको नामावली अनुमोदन गर्ने निर्णय पनि गरेको छ।

विप्लव घोषले दशौँ राष्ट्रिय खेलकुद प्रतियोगिता भव्य रूपमा सम्पन्न गर्न कोशी प्रदेश सरकार र प्रदेश खेलकुद विकास बोर्ड तयारी अवस्थामा रहेको जानकारी दिएका छन्। उनले वैजनाथपुर क्रिकेट रंगशाला, इटहरी रंगशाला, सहिद रंगशालालगायतका संरचनाहरूलाई प्रदेश सरकारले सम्हाल्दा थप लगानी गरेर सुधार तथा स्तरोन्नती गर्न सकिने बताए।

सम्पत्ति मुद्दा संवैधानिक इजलास में पठाने के निर्णय पर बार की आपत्ति

२९ साउन, काठमाडौँ । कानूनी व्यवसायियों की छत्रछाया संस्था नेपाल बार एसोसिएसन ने सम्पत्ति जाँच आयोग से संबंधित रिट याचिकाओं को टिप्पणी आदेश के आधार पर संवैधानिक इजलास में भेजे जाने पर आपत्ति जताई है। बार ने शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा कि मामले की सुनवाई के दिन बहस और चर्चा के माध्यम से इजलास का निर्णय करने की परंपरा होती है, लेकिन टिप्पणी आदेश के आधार पर राष्ट्रीय महत्व के मामलों को संवैधानिक इजलास में भेजा जाना आश्चर्यजनक है।

परंपरा के विपरीत संवैधानिक इजलास का गठन होना और उक्त इजलास में चयन के आधार पर मामलों का निर्धारण किए जाने को बार ने ‘न्यायपालिका की स्थापित मूल्यमान्यता के खिलाफ’ बताया है। न्यायपालिका को नियंत्रण और निर्देश के अधीन नहीं रखा जाना चाहिए, ऐसे आशय को व्यक्त करते हुए बार ने विज्ञप्ति में कहा है, ‘संवैधानिक इजलास की चयनात्मक गठन और आदेश द्वारा विचाराधीन मामले तय किए जाने की प्रक्रिया से न्यायपालिका पर नियंत्रण का खतरा महसूस होता है। इस कारण ऐसे विषयों को तत्काल सुधारा जाना चाहिए, जिसके लिए नेपाल बार एसोसिएसन प्रधान न्यायाधीश का ध्यानाकर्षण कराता है।’

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पेजेस्कियन के नई दिल्ली दौरे की तैयारी

ईरानी राष्ट्रपत‍ि मसूद पेजेस्कियन आगामी सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत आने की तैयारी कर रहे हैं। वर्ष 2024 में ब्रिक्स के पूर्ण सदस्य बने ईरान की इस यात्रा के माध्यम से भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा विषयों पर चर्चा करने की अपेक्षा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पश्चिम एशिया में तनाव समाधान के लिए भारत की सक्रिय भूमिका की संभावना पर जोर देते हुए वार्ता का महत्व बताया है। 29 साउन, नई दिल्ली (रासस/एएनआई)।

ईरानी सूत्रों के हवाले से शुक्रवार को यह बताया गया कि पेजेस्कियन का भारत दौरा ईरान-भारत संबंधों और पश्चिम एशिया की वर्तमान क्षेत्रीय स्थिति के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत द्वारा वर्ष 2026 में अध्यक्षता संभालकर आयोजित किए जाने वाले सम्मेलन में पेजेस्कियन की भागीदारी विशेष महत्व रखेगी। सम्मेलन का विषयवस्तु “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” के रूप में निर्धारित है।

ईरान ने 2024 में ईजिप्ट, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात के साथ ब्रिक्स का पूर्ण सदस्यत्व प्राप्त किया था। वर्ष 2025 में इंडोनेशिया के समूह में शामिल होने के बाद ब्रिक्स के पूर्ण सदस्यों की संख्या 11 हो गई है। पेजेस्कियन ने इससे पहले 2024 के अक्टूबर में रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वार्ता की थी।

इसी बीच, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जून में भारत में हुए ब्रिक्स विदेश मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लिया था। बैठक के बाद उन्होंने कहा था कि भारत, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अराघची ने सशस्त्र संघर्ष का कोई भविष्य नहीं होने और वर्तमान संकट के सैन्य समाधान की असंभवता को कहकर वार्ता के माध्यम से समाधान खोजने को एक व्यावहारिक मार्ग बताया।

फिर भी हार नहीं मानते मानव

आसमान में उठ रही है ज्वाला। भट्टियों में चल रहे हैं शराब के गिलास। चारों तरफ मानव और बस्ती जल रहे हैं। खुद लगाई गई आग में मानव जल रहे हैं। मानव मरने को तैयार हैं। पर हार नहीं मानते।

हर कोई देख रहा है अपनी विपत्ति। सभी के सपने बर्बाद हो चुके हैं। देखते ही देखते सब कुछ स्वाहा हो जाता है। किसी ने भी साथ नहीं दिया। मानव मरने को तैयार हैं। पर हार नहीं मानते।

किसी का कोई साथ नहीं है। बम-बारूद ही हाथ में है। चाहे रूस हो या यूक्रेन। इजरायल हो या हमास। मानव लाश बनने को तैयार हैं। मानव मरने को तैयार हैं। पर हार नहीं मानते।

परमाणु हथियार लेकर युद्ध के लिए तैयार हैं। पूरी दुनिया के लोग मर सकते हैं, पर परमाणु बनाने से रुकते नहीं। मानव मरने को तैयार हैं। पर हार नहीं मानते।

धन्य है हमारा जीवन। उजाला कौन देगा? विश्व शांति का संदेश कौन देगा? मानव अशांत होने को तैयार हैं। मानव मरने को तैयार हैं। पर हार नहीं मानते।