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लेखक: space4knews

नेपाल एयरलाइन्स के कर्मचारी को 54 लाख रुपये के साथ मलेशिया जाते समय गिरफ्तार

त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 54 लाख 71 हजार से अधिक विदेशी मुद्रा के साथ नेपाल एयरलाइन्स के कर्मचारी कमलनारायण विश्वास को गिरफ्तार किया गया है। विश्वास सोमवार की रात बाटिक एयर के माध्यम से मलेशिया जाने वाले थे, जब उनके सामान में लोहे के कैसरोल में छुपाई गई इस रकम को पाया गया। नेपाल एयरलाइन्स में 16 वर्षों से कार्यरत विश्वास पहले भी 26 बार विदेश यात्रा कर चुके हैं, यह जानकारी हवाई अड्डा पुलिस ने दी है।

19 जेठ, काठमांडू। त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 54 लाख 71 हजार रुपये सहित विजिट वीजा पर विदेश जाने वाले नेपाल एयरलाइन्स के ग्राउंड इक्विपमेंट ऑपरेटर कमलनारायण विश्वास को त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की सुरक्षा कार्यालय ने गिरफ्तार किया है। सुनसरी के गढ़ी गाउँपालिका-1 के निवासी और वर्तमान में काठमांडू के बनस्थली में रहने वाले विश्वास 16 वर्षों से नेपाल एयरलाइन्स के माध्यम से त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ग्राउंड इक्विपमेंट ऑपरेटर के रूप में कार्यरत थे।

सोमवार रात 8:30 बजे बाटिक एयर की फ्लाइट के माध्यम से विजिट वीजा पर मलेशिया के कुआलालंपुर रवाना होने के दौरान हवाई अड्डा पुलिस ने उनके सामान में लोहे के कैसरोल के अंदर विभिन्न देशों की मुद्राएं बरामद कीं। पुलिस के अनुसार, उन्होंने अब तक 26 बार विदेश यात्रा की है। पुलिस ने उनके पास नेपाली, अमेरिकी, ओमानी, पाकिस्तानी, मलेशियाई, श्रीलंकाई, जापानी और अफ्रीकी मुद्राएं पाईं। कुल 54 लाख 71 हजार 689 रुपये 32 पैसे की राशि बरामद की गई है।

मुख्यमंत्री शाह ने संसदीय दल के एकजुट होने का संदेश देने का संकल्प व्यक्त किया

१९ जेठ, धनगढी। सुदूरपश्चिम प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलबहादुर शाह के प्रति नेपाली कांग्रेस के कुछ सांसद असंतुष्ट थे। उन्होंने शाह को दल के नेता और मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए मोर्चाबंदी करते हुए मंगलवार को संसदीय दल कार्यालय में अविश्वास प्रस्ताव दायर किया। १८ सांसदों में से ९ ने शाह को दल के नेता पद से हटाने के निर्णय तथा अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। प्रकाश देउवा अमेरिका में मौजूद थे इसलिए उन्हें शामिल किए बिना १७ सदस्यों में से बहुमत का दावा करते हुए ९ सांसदों ने यह निर्णय लिया और शाह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दायर किया। हटाने वाले पक्ष ने पार्टी केंद्र को भी इस निर्णय की जानकारी दी और मंगलवार को सभामुख भीमबहादुर भंडारी से मिलकर इस विषय पर सूचित किया।

पहली नजर में मुख्यमंत्री शाह के खिलाफ सांसदों की यह पहल एकदम ताज़ा लगती है, लेकिन इसके पीछे पुरानी पृष्ठभूमि है, ऐसा नेताओं का कहना है। असंतुष्ट सांसद लम्बे समय से शाह को पदमुक्त करने की कोशिश कर रहे थे। डम्मरी महराबाहेक आठ अन्य सांसद पहले ही शाह को हटाने के लिए हस्ताक्षर कर चुके थे। महर के भी तैयार होते ही हटाने वाले पक्ष का बहुमत पूरा होने का दावा किया गया। हालांकि, मंगलवार को ही शाह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दायर करने के लिए हस्ताक्षर करने वाली महर ने वापसी करते हुए अपने हस्ताक्षर वापस ले लिए। महर द्वारा हस्ताक्षर वापस लेने के बाद मुख्यमंत्री शाह ने तुरंत राहत की साँस ली।

कांग्रेस के प्रतिनिधि मंत्री और अपने समर्थक सांसदों की उपस्थिति में शाह ने मुख्यमंत्री एवं मंत्रिमंडल कार्यालय में पत्रकार सम्मेलन किया। सम्मेलन में उन्होंने संसदीय दल को एकजुट करके आगे बढ़ने का संकल्प जताया। महर को भी संलग्न करते हुए शाह ने अपने खिलाफ हस्ताक्षर करने वाले सांसदों के प्रति सौम्य शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, ‘कुछ साथियों में असंतुष्टियां हो सकती हैं, लेकिन मैं हमेशा उन समस्याओं को सुलझाने के लिए खुला रहा हूँ। फिलहाल नीति एवं कार्यक्रम तैयार हो चुका है और बजट निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। हमारे बीच कोई भी मतभेद नहीं होगा। हम एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे।’ शाह ने कहा, ‘जल्द ही दल की बैठक बुलाकर संसदीय दल के एकजुट होने का संदेश दिया जाएगा। दल के व्यवस्थाओं में साथियों के बीच सहमति-असहमति बनी रहती है।’

थप पर्यटक आकर्षित गर्ने लक्ष्य केन्द्रीत

समाचार सारांश

समीक्षा किया गया लेख ।

  • थाईलैंड पर्यटन प्राधिकरण ने नेपाली पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए स्वास्थ्य एवं आरोग्य पर्यटन को प्राथमिकता देते हुए एक नया अभियान शुरू किया है।
  • नेपाल के लिए थाईलैंड के राजदूत डोनाविट पुलसावत ने इस वर्ष 20 से 30 हजार और नेपाली पर्यटकों को थाईलैंड भ्रमण कराने का लक्ष्य बताया है।
  • वर्तमान में नेपाल और थाईलैंड के बीच तीन एयरलाइंस कंपनियां साप्ताहिक 19 उड़ानें संचालित कर रही हैं।

19 जेठ, काठमांडू – थाईलैंड पर्यटन प्राधिकरण ने नेपाली पर्यटकों को लक्षित कर एक प्रचार अभियान शुरू किया है। विश्वभर से पर्यटकों को आकर्षित करता आ रहा थाईलैंड अब ‘वेलनेस टूरिज्म प्रोडक्ट’, अर्थात् स्वास्थ्य और आरोग्य पर्यटन को प्राथमिकता देते हुए नेपाल में नया अभियान चला रहा है।

थाईलैंड पर्यटन प्राधिकरण के नई दिल्ली कार्यालय ने मंगलवार को काठमांडू में एक कार्यक्रम आयोजित कर नेपाली टूर ऑपरेटरों को अपने पर्यटन उत्पादों के बारे में जानकारी दी। इस कार्यक्रम में नेपाल के लिए थाईलैंड के राजदूत डोनाविट पुलसावत ने थाईलैंड की गतिशीलता पर प्रकाश डाला।

राजदूत पुलसावत ने बताया कि लगभग 50 हजार नेपाली पर्यटक प्रतिवर्ष थाईलैंड का दौरा कर रहे हैं और इस साल 20 से 30 हजार अतिरिक्त नेपाली पर्यटकों को वहां लाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि नेपाल और थाईलैंड के बीच राजनीतिक परिस्थितियाँ पर्यटन क्षेत्र के लिए चुनौतियां उत्पन्न कर रही हैं, लेकिन थाईलैंड विश्व स्तरीय सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

थाईलैंड अत्याधुनिक आधारभूत संरचना, विश्वकोशीय समुद्र तट, स्वादिष्ट व्यंजन, समृद्ध संस्कृति और मनोरंजक नाइटलाइफ़ के लिए जाना जाता है। वर्तमान में यह देश स्वास्थ्य एवं आरोग्य पर्यटन को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न पैकेज की बिक्री शुरू कर चुका है। इसके अलावा, थाईलैंड बंजी जंपिंग, पैरामोटर, स्काई डाइविंग, एटीवी राइड्स जैसे साहसिक गतिविधियों के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।

थाईलैंड पर्यटन प्राधिकरण के अनुसार नेपाली नागरिक देश के किसी भी स्थान से ई-वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। नेपाल और थाईलैंड के बीच फिलहाल तीन एयरलाइंस कंपनियां सप्ताह में 19 उड़ानें संचालित कर रही हैं, जो दोनों देशों के पर्यटन संबंधों को और मजबूत बना रही हैं।

नेपाल एयरलाइंस सप्ताह में 3, थाई लायन 2 और थाई एयरवेज 14 उड़ानें चला रहे हैं। नई दिल्ली कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार आज के समय में थाईलैंड में तक़रीबन 30 हजार नेपाली पर्यटक प्रतिवर्ष भ्रमण करते हैं।

४ वर्ष की कैद एवं ३८ लाख ५० हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई

विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार मामले में दोषी पाए गए मधेस प्रदेश के प्रदेशसभा सदस्य सरोजकुमार सिंह कुशवाहा को ४ वर्ष १ महीने की कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने कुशवाहा को ३८ लाख ५० हजार १ सय ३९ रुपये जुर्माना और इसी राशि के बराबर राशि जप्त करने का फैसला किया है। उपभोक्ता समितियों से रिश्वत लेने की पुष्टि होने पर अख्तियार द्वारा दायर मामले में अदालत ने कुशवाहा को दोषी ठहराते हुए इस प्रकार सजा सुनाई है।

१९ जेठ, काठमांडू। विशेष अदालत ने रिश्वत लेने के आरोप में दोषी पाए गए मधेस प्रदेश के प्रदेशसभा सदस्य सरोजकुमार सिंह कुशवाहा को ४ वर्ष १ महीने की कैद की सजा सुनाई है। विशेष अदालत के अध्यक्ष सुदर्शनदेव भट्ट तथा सदस्य उमेश कोइराला और विदुर कोइरालाके संयुक्त इजलास ने गत जेठ ४ को सिंह को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, २०५९ के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद आज अदालत ने उन्हें ४ वर्ष की कैद के साथ ३८ लाख ५० हजार १ सय ३९ रुपये जुर्माना भी लगाई है।

अदालत के अनुसार सिंह ने विभिन्न उपभोक्ता समितियों से रिश्वत और कमीशन के रूप में कुल ३८ लाख ५० हजार १ सय ३९ रुपये प्राप्त किए थे। इस राशि को भ्रष्टाचार की हानि मानकर सजा दी गई है। फैसले के अनुसार घटना के समय सिंह महोत्तरी निर्वाचन क्षेत्र नंबर ४ (ख) से निर्वाचित प्रदेशसभा सदस्य थे। उन्होंने सार्वजनिक पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार किया, यह मानते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा २४ के अनुसार अतिरिक्त १ महीने की कैद की सजा भी दी गई है।

विशेष अदालत ने सिंह से रिश्वत के रूप में मिली ३८ लाख ५० हजार १ सय ३९ रुपये ज़ब्त करने और वसूली का आदेश दिया है। इसके अलावा, जुर्माने के आधार पर अपराध पीड़ित संरक्षण अधिनियम, २०७५ के तहत १ लाख ५४ हजार ५ रुपये ५६ पैसा क्षतिपूर्ति शुल्क वसूल कर पीड़ित राहत कोष में जमा करने का आदेश भी दिया है।

अख्तियार दुरुपयोग अनुसंधान आयोग ने सिंह के विरुद्ध विभिन्न उपभोक्ता समितियों से कमीशन एवं रिश्वत लेने के आरोप में भ्रष्टाचार का मामला दायर किया था। विशेष अदालत ने आरोपों की पुष्टि के बाद उन्हें दोषी ठहराकर यह सजा तय की है।

मे महीने में पर्यटकों की आगमन में महत्वपूर्ण सुधार, 1 लाख 2 हजार से अधिक पहुंचे

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार।

  • सन् 2026 के मे महीने में 1 लाख 2 हजार 626 पर्यटक नेपाल आए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19.03 प्रतिशत अधिक है।
  • इस अवधि में पड़ोसी देश भारत से सबसे ज्यादा 40 हजार 782 पर्यटक हवाई मार्ग से नेपाल भ्रमण पर आए हैं।
  • नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार इस महीने में 11 हजार 514 चीनी और 9 हजार 1 अमेरिकी पर्यटक नेपाल आए हैं।

19 जेठ, काठमांडू। सन् 2026 के मे महीने में नेपाल आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

आवासन विभाग के आंकड़ों के अनुसार नेपाल पर्यटन बोर्ड ने जारी रिपोर्ट में बताया है कि इस महीने नेपाल में 1 लाख 2 हजार 626 पर्यटक भ्रमण पर आए हैं। यह संख्या सन् 2025 के मे महीने की तुलना में 19.03 प्रतिशत अधिक है। उस महीने नेपाल 86 हजार 216 पर्यटकों का स्वागत कर चुका था।

इस वर्ष के मे महीने में आए पर्यटकों की संख्या कोविड-19 महामारी से पहले सन् 2019 के उस महीने से भी अधिक है, जब 78 हजार 329 पर्यटक नेपाल आए थे।

प्रि-मॉनसून सीजन के कारण नेपाल में पर्वतारोहण और पदयात्रा गतिविधियाँ तीव्र होती हैं। इसके साथ ही गर्मी से बचने के लिए कई भारतीय पर्यटक भी प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने नेपाल आते हैं।

नेपाल सरकार केवल हवाई मार्ग से आने वाले भारतीय नागरिकों को ही पर्यटक के रूप में गिनती में शामिल करती है। इस प्रकार आने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में 32.66 प्रतिशत की वृद्धि के कारण कुल पर्यटक आगमन में सुधार देखने को मिला है।

बोर्ड के अनुसार, मे 2026 में 40 हजार 782 भारतीय पर्यटक नेपाल आए हैं, जबकि पिछले वर्ष उसी महीने में 28 हजार 160 भारतीय पर्यटक थे। इस सुधार का सार्क क्षेत्र के देशों के समग्र आंकड़ों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

सार्क क्षेत्र से इस वर्ष के मे महीने में पिछले वर्ष की तुलना में 33.4 प्रतिशत अधिक पर्यटक आए हैं। बांग्लादेश से 5 हजार 298, भूटान से 1 हजार 360, पाकिस्तान से 434 और श्रीलंका से 580 पर्यटक इस महीने नेपाल पहुँचे हैं। मे महीने में नेपाल आने वाले पर्यटकों में सार्क देशों की हिस्सेदारी 47.22 प्रतिशत है।

चीन से भी पर्यटकों की आगमन में वृद्धि हुई है। आंकड़ों के अनुसार, मे 2026 में 11 हजार 514 चीनी पर्यटक आए हैं, जबकि सन् 2025 में यह संख्या 8 हजार 824 थी। सार्क के बाहर के एशियाई देशों से कुल पर्यटक आगमन 19.94 प्रतिशत है। इंडोनेशिया से 428, जापान से 1,756, मलेशिया से 2,857, म्यांमार से 335, फिलिपींस से 604 पर्यटक आए हैं। इसी तरह सिंगापुर से 446, दक्षिण कोरिया से 1,217, वियतनाम और थाईलैंड से क्रमशः 446 और 824 पर्यटक आए हैं।

यूरोपीय देशों से आए पर्यटकों की हिस्सेदारी 13.10 प्रतिशत है। इसमें सबसे अधिक 3,375 पर्यटक ब्रिटेन से आए हैं। फ्रांस से 1,154, जर्मनी से 1,548, नेदरलैण्ड से 1,278 और रूस से 1,550 पर्यटक आए हैं।

ऑस्ट्रेलिया से 2,070 पर्यटक नेपाल आए हैं। अमेरिकी देशों से आने वाले पर्यटकों की हिस्सेदारी 10.35 प्रतिशत है। इसमें सबसे अधिक 9,001 अमेरिकी पर्यटक आए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में अमेरिकी पर्यटकों की संख्या में थोड़ी कमी आई है। सन् 2025 के मे महीने में 9,074 अमेरिकी पर्यटक आए थे।

हर्कराज राई ने प्रधानमंत्री से संसद में माफी मांगने का आग्रह किया

श्रम संस्कृति पार्टी के अध्यक्ष हर्कराज राई ने प्रधानमंत्री वालेन्द्र साह से संसद में माफी मांगने की आवश्यकता बताई है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री की अभिव्यक्ति से देश की भौगोलिक अखंडता और संप्रभु सत्ता को गंभीर खतरा पैदा हुआ है। राई ने यह भी संदेह जताया कि प्रधानमंत्री ने अपनी यह अभिव्यक्ति भारत को प्रभावित करने के उद्देश्य से दी हो सकती है।

१९ जेठ, काठमांडू। प्रतिनिधि सभा की बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में राई ने कहा कि प्रधानमंत्री साह की अभिव्यक्ति राष्ट्रहित के खिलाफ है और इसलिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, “उन्होंने जो कुछ कहा है, वह पूरी तरह गलत है, कार्यकारी प्रमुख के रूप में ऐसा बोलना उचित नहीं है।” राई ने दावा किया कि प्रधानमंत्री की अभिव्यक्ति ने देश की सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी है।

उन्होंने आगे कहा, “ऐसी अभिव्यक्तियों के बाद विभिन्न जगहों पर भारतीय सैनिक हथियारों के साथ घुसपैठ कर रहे हैं, और विभिन्न योजनाएं बाधित हो रही हैं।” राई ने प्रधानमंत्री साह की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि ‘नेपाल ने भारत की सीमा का उल्लंघन किया है’, जो देश की भौगोलिक अखंडता और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।

राई ने प्रधानमंत्री के इस कथन को आश्चर्यचकित करने वाला बताते हुए कहा, “प्रधानमंत्री जैसे सम्मानित व्यक्ति ने ऐसी गलती कैसे की?” उन्होंने १७ जेठ की बैठक से संबंधित भी सवाल उठाए और कहा, “शायद रवि जी भारत जाने वाले थे, इसलिए आकस्मिक बैठक बुलानी पड़ी?”

सहकारी बेथितिका १४ कर्मचारीलाई स्पष्टीकरण, थप अध्ययनका लागि समिति गठन

भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालयले सहकारी क्षेत्रमा देखिएका बेथितिहरूको छानबिन तीव्र बनाएको छ। सहकारी जाँचबुझ आयोगको प्रतिवेदनका आधारमा मन्त्रालयले १४ जना तत्कालीन पदाधिकारी तथा कर्मचारीसँग सात दिनभित्र स्पष्टीकरण माग गरेको छ। आयोगको प्रतिवेदन कार्यान्वयन तथा थप अध्ययनका लागि प्रशासन महाशाखा प्रमुखको संयोजकत्वमा पाँच सदस्यीय समिति गठन गरिएको छ। सहकारी मन्त्री प्रतिभा रावलले सहकारी क्षेत्रको संरचनागत सुधारका लागि ठोस योजनामा काम सुरु भएको बताइन्। १९ जेठ, काठमाडौं।

नेपाल सरकार मन्त्रिपरिषद्को निर्णयअनुसार गठन भएको सहकारी बेथितिजाँचबुझ आयोग, २०८२ ले पेश गरेको प्रतिवेदनमा दिइएका सुझाव र सिफारिसहरू कार्यान्वयन गर्न मन्त्रालय तयार भएको जनाएको छ। मन्त्रिपरिषद्को जेठ ११ गतेको निर्णयअनुसार सार्वजनिक गरिएको उक्त प्रतिवेदनमा सहकारी दर्ता, कार्यक्षेत्र विस्तार, सेवा केन्द्र तथा शाखा कार्यालय स्वीकृति र एकीकरण लगायतका कामहरूमा सहकारीका सिद्धान्त, मूल्य–मान्यता र प्रचलित कानुन विपरीत भूमिका निर्वाह गरेको भन्दै तत्कालीन जिम्मेवार पदाधिकारी र कर्मचारीहरूलाई स्पष्टीकरणको लागि सोधिएको छ।

प्रतिवेदनमा १४ जना तत्कालीन पदाधिकारी तथा कर्मचारीहरूको नाम उल्लेख गरी छानबिन गर्न सिफारिस गरिएको थियो। स्पष्टीकरण सोधिने व्यक्तिहरू शाखा अधिकृतदेखि सहसचिवसम्मका रहेका छन्। मन्त्रालयले सम्बन्धित व्यक्तिहरूलाई पत्राचार गर्दै आफ्नो कार्यकालमा आयोगको प्रतिवेदनमा उल्लिखित अनुचित कार्य गरेको हो कि होइन भन्ने विषयमा आधारसहित सात दिनभित्र लिखित जवाफ माग गरेको छ। तोकिएको अवधिभित्र जवाफ नभएमा प्रचलित कानुनबमोजिम आवश्यक कानुनी प्रक्रिया अगाडि बढाइने मन्त्रालयले जनाएको छ।

थप अध्ययनका लागि मन्त्रालयले प्रशासन महाशाखा प्रमुखको संयोजकत्वमा पाँच सदस्यीय समिति गठन गरेको छ। समितिमा सहकारी नियमन प्राधिकरणका निर्देशक, मन्त्रालयको कानुन महाशाखाका उपसचिव, सहकारी विभागका उपरजिष्टार, र मन्त्रालयको सहकारी प्रवर्द्धन शाखाका उपसचिव सदस्य सचिव रहने व्यवस्था गरिएको छ। समितिलाई आयोगको प्रतिवेदनको विस्तृत अध्ययन गरी तत्कालीन तथा दीर्घकालीन सुधारका सुझाव तयार गर्न, प्राप्त स्पष्टीकरणहरूको विश्लेषण गर्न, नयाँ सहकारी ऐनको मस्यौदा तयार गर्न सहयोग गर्न तथा प्रतिवेदनमा उल्लिखित सहकारी संस्थासम्बन्धी टिप्पणी फाइलहरूको अध्ययन तथा विश्लेषण गर्न कार्यादेश दिइएको छ। विभागीय मन्त्री प्रतिभा रावलले प्रतिवेदन कार्यान्वयनलाई प्राथमिकताका साथ अगाडि बढाइने बताइन् र भनिन्, ‘प्रतिवेदनका सुझावअनुसार सहकारी क्षेत्रको संरचनागत सुधारका लागि ठोस योजनाहरुमा काम सुरु भइसकेको छ।’

सहकारी कानून के विपरीत कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया

सहकारी क्षेत्र में अनियमितताओं की जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय ने १४ तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों से ७ दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांग किया है। आयोग की रिपोर्ट के क्रियान्वयन और विस्तार अध्ययन हेतु मंत्रालय ने प्रशासन महाशाखा प्रमुख के संयोजन में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। विभागीय मंत्री प्रतिभा रावल ने कहा, “रिपोर्ट के सुझावानुसार सहकारी क्षेत्र के संरचनात्मक सुधार के ठोस योजना पर काम शुरू हो चुका है।” १९ जेठ, काठमाडौँ।

भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र में विसंगतियों और अनियमितताओं की जांच को तीव्र कर दिया है। नेपाल सरकार के मंत्रिपरिषद के निर्णयानुसार गठित सहकारी अनियमितता जाँच आयोग, २०८२ द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के सुझावों और सिफारिशों को कार्यान्वित करने में मंत्रालय लगा है।

मंत्रिपरिषद के २०८३ जेठ ११ के निर्णय के अनुसार सार्वजनिक रिपोर्ट में सहकारी रजिस्ट्रेशन, कार्यक्षेत्र विस्तार, सेवा केन्द्र एवं शाखा कार्यालयों की स्वीकृति और एकीकरण जैसे कार्यों में सहकारी सिद्धांत, मूल्य-मान्यता और कानून के विपरीत कार्य करने वाले तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। रिपोर्ट में १४ तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम औपचारिक रूप से उल्लेखित कर उनसे जांच करने का सुझाव दिया गया था। स्पष्टीकरण मांगे गए कर्मियों में शाखा अधिकृत से लेकर सहसचिव तक के पदाधिकारी शामिल हैं। मंत्रालय ने संबंधित व्यक्तियों को पत्राचार कर आयोग की रिपोर्ट में उल्लिखित विषयों पर सात दिनों में आधार सहित लिखित जवाब देने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समयावधि में जवाब न मिलने पर प्रचलित कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

अधिक अध्ययन के लिए समिति का गठन किया गया है। मंत्रालय ने आयोग की रिपोर्ट के कार्यान्वयन और विस्तृत अध्ययन हेतु प्रशासन महाशाखा प्रमुख के संयोजन में पांच सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में सहकारी नियमन प्राधिकरण के निदेशक, मंत्रालय के कानूनी महाशाखा के उपसचिव, सहकारी विभाग के उपरजिस्ट्रार तथा मंत्रालय के सहकारी प्रवर्धन शाखा के उपसचिव सदस्य–सचिव रहेंगे। समिति को आयोग की रिपोर्ट का गहन विश्लेषण कर तत्कालीन एवं दीर्घकालीन सुधार हेतु सुझाव तैयार करने, प्राप्त स्पष्टीकरणों का विश्लेषण करने, नए सहकारी कानून का मसौदा बनाने में सहयोग देने तथा रिपोर्ट में उल्लिखित सहकारी संस्थाओं से संबंधित टिप्पणी फाइलों का अध्ययन एवं विश्लेषण करने का दायित्व सौंपा गया है। विभागीय मंत्री प्रतिभा रावल ने कहा कि रिपोर्ट के क्रियान्वयन को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “रिपोर्ट के सुझावानुसार सहकारी क्षेत्र के संरचनात्मक सुधार की ठोस योजना पर काम शुरू हो चुका है।”

सहकारी कानून के विरुद्ध कार्य करने वाले पदाधिकारी एवं कर्मचारियों से मांगा स्पष्टीकरण

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा गरिएको।

  • सहकारी क्षेत्र की अनियमितताओं की जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर मंत्रालय ने 14 तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों से 7 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण माँगा है।
  • आयोग की रिपोर्ट के क्रियान्वयन और आगे अध्ययन के लिए मंत्रालय ने प्रशासन महाशाखा प्रमुख की संयोजकता में 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है।
  • विभागीय मंत्री प्रतिभा रावल ने कहा, “रिपोर्ट के सुझावों के अनुसार सहकारी क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार की ठोस योजना पर काम शुरू हो चुका है।”

19 ज्येष्ठ, काठमांडू। भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामले तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र में अनियमितताओं की जांच को तीव्र कर दिया है।

नेपाल सरकार के मंत्रिपरिषद् के निर्णय के अनुसार गठित सहकारी क्षेत्र की अनियमितताओं की जांच आयोग, 2082 द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में सुझाए गए सुधारों को लागू किया जा रहा है, मंत्रालय ने यह जानकारी दी।

मंत्रिपरिषद् के 2083 ज्येष्ठ 11 के निर्णय के अनुसार सार्वजनिक की गई रिपोर्ट में सहकारी पंजीकरण, कार्यक्षेत्र विस्तार, सेवा केंद्र एवं शाखा कार्यालय स्वीकृति और एकीकरण जैसे कार्यों में सहकारी सिद्धांतों, मूल्य–मान्यताओं एवं प्रचलित कानूनों के विरुद्ध भूमिका निभाने वाले तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण माँगा गया है।

रिपोर्ट में 14 तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों के नामों को अंकित करते हुए जांच की सिफारिश की गई थी। स्पष्टीकरण मांगे जाने वालों में शाखा अधिकारी से लेकर सहसचिव तक के कर्मचारी शामिल हैं।

मंत्रालय ने संबंधित व्यक्तियों को पत्र भेज कर निर्देश दिया है कि वे अपनी कार्यकाल में आयोग की रिपोर्ट में उल्लिखित कार्यों को किया या नहीं किया, इसका आधार सहित सात दिनों के भीतर लिखित जवाब दें। निर्धारित समय में जवाब न मिलने पर प्रचलित कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

अधिक अध्ययन के लिए समिति का गठन

आयोग की रिपोर्ट के कार्यान्वयन और आगे अध्ययन के लिए मंत्रालय ने प्रशासन महाशाखा प्रमुख की संयोजकता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति में सहकारी नियमन प्राधिकरण के निदेशक, मंत्रालय के कानून महाशाखा के उपसचिव, सहकारी विभाग के उपरजिस्ट्रार और मंत्रालय की सहकारी प्रचार शाखा के उपसचिव सदस्य सचिव होंगे।

समिति को आयोग की रिपोर्ट का व्यापक अध्ययन कर तत्कालीन एवं दीर्घकालीन सुधार के सुझाव तैयार करने, प्राप्त स्पष्टीकरण का विश्लेषण करने, नए सहकारी अधिनियम का प्रारूप तैयार करने में सहायता देने तथा रिपोर्ट में उल्लेखित सहकारी संस्थाओं से संबंधित टिप्पणियों का अध्ययन और विश्लेषण करने का दायित्व सौंपा गया है।

विभागीय मंत्री प्रतिभा रावल ने कहा कि रिपोर्ट के सुझावों को प्राथमिकता देते हुए कार्यान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा, रिपोर्ट के सुझावों के अनुसार सहकारी क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार की ठोस योजना पर काम शुरू हो चुका है।

सरकार ने बिजली का उपयोग कर हरित यूरिया मल उत्पादन की योजना बनाई

सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष के बजट के माध्यम से नेपाल विद्युत् प्राधिकरण और निजी क्षेत्र के सहयोग से हरित यूरिया मल उद्योग संचालित करने की घोषणा की है। हरित यूरिया उत्पादन के लिए विद्युत् प्राधिकरण सहूलियत दर पर बिजली उपलब्ध कराएगा और उत्पादित मल को सरकार खरीदेगी। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि विद्युत् प्राधिकरण का मुख्य कार्य विद्युत सेवा प्रदान करना है, इसलिए इसे मल उत्पादन में शामिल नहीं होना चाहिए। १९ जेठ, काठमांडू। नेपाल में रासायनिक मल की कमी दूर करने के लिए सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष के बजट में एक महत्वाकांक्षी योजना प्रस्तुत की है। सरकार ने नेपाल विद्युत् प्राधिकरण और निजी क्षेत्र की सहकार्य में ‘कंपनी मॉडल’ में ‘हरित यूरिया’ मल उद्योग संचालित करने की घोषणा की है। आगामी वर्ष २०८३/८४ के बजट वक्तव्य के माध्यम से ऊर्जा, जल स्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय ने विद्युत् प्राधिकरण और निजी क्षेत्र के सहयोग से कंपनी मॉडल में हरित यूरिया मल उद्योग संचालन की बात कही है।

सरकार ने निजी क्षेत्र को आकर्षित करने के लिए उत्पादित मल की खरीद गारंटी (पीपीए) करने और सहूलियत दर पर बिजली उपलब्ध कराने की नीति अपनाई है। प्राधिकरण संचालक समिति के सदस्य अम्सुकिरण शाही के अनुसार, हाइड्रोजन को पृथक करके हरित यूरिया बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विश्वभर चर्चा में रहे हरित हाइड्रोजन को नेपाल में भी बजट में शामिल किए जाने के बाद अधिक रुचि दिखी है। सरकार ने इस विषय पर तीन अध्ययन कराए हैं। इन अध्ययनों से पता चला कि नेपाल में हरित यूरिया मल उत्पादन संभव है। इसी आधार पर सरकार ने पहली बार इसे बजट में शामिल किया है।

शुरुआत में उद्योग मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय के सचिवों के बीच चर्चा हुई थी। चर्चा के बाद इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए उदयपुर सीमेंट उद्योग को केंद्र में रखा गया था। सीमेंट उद्योग से निकलने वाले गैस को फ्यूज करके यूरिया मल बनाने की योजना है। हालांकि, वर्तमान में उदयपुर सीमेंट उद्योग बंद है। सरकार इसे पुनः संचालित करने की तैयारी में है। उसी आधार पर उक्त उद्योग से निकलने वाले वेस्ट गैस से हरित यूरिया मल बनाने की योजना है, यह शाही ने बताया।

हरित यूरिया सामान्यत: रासायनिक मल का उत्पादन करते समय प्राकृतिक गैस या कोयले जैसे जीवाश्म ईंधन का उपयोग किया जाता है, जो वातावरण में कार्बन उत्सर्जन बढ़ाता है। फिर भी, नेपाल में कार्यरत प्रचुर जलविद्युत का उपयोग करके पानी से हाइड्रोजन अलग कर बनाया जाने वाला मल ही हरित यूरिया कहलाता है। यह पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल होने के साथ-साथ स्वदेशी कच्चा माल (बिजली और पानी) पर आधारित है, ऐसा शाही ने बताया। हरित यूरिया के उत्पादन के लिए मुख्य तीन कच्चे माल आवश्यकता होती है: विद्युत्, पानी और कार्बनडाईऑक्साइड (CO₂)। पहले बिजली के जरिए पानी (H₂O) को तोड़कर हाइड्रोजन गैस निकाली जाती है। उसके बाद हवा से नाइट्रोजन लेकर निकाले गए हाइड्रोजन के साथ मिलाकर अमोनिया बनाया जाता है। अमोनिया में कार्बनडाईऑक्साइड मिलाने के बाद ठोस यूरिया मल बनता है, शाही ने बताया।

नेपाल में कार्बनडाईऑक्साइड को उदयपुर सीमेंट जैसी उद्योगों से निकलने वाली धुआं (वेस्ट गैस) को ‘कैप्चर’ करके उपयोग करने की योजना प्रस्तावित की गई है। ‘सीमेंट उद्योग से बड़े पैमाने पर CO₂ निकलता है, इसे उपयोग में लाने से प्रदूषण कम होता है और सस्ते में मल उत्पादन संभव होता है,’ शाही ने कहा। बजट में निर्दिष्ट किया गया है कि सरकार निजी क्षेत्र को इस उद्योग में निवेश के लिए विशेष सुविधा प्रदान करेगी। प्राधिकरण सहूलियत दर पर बिजली देगा और इसी आधार पर जल्द से जल्द परीक्षण के रूप में हरित यूरिया मल उत्पादन की योजना को आगे बढ़ाएगा। ‘हम पांच रुपये प्रति यूनिट बिजली देकर नेपाल में बड़ी मात्रा में यूरिया का उत्पादन करने की क्षमता रखते हैं,’ शाही ने कहा।

नेपाल में यह योजना कितनी संभव है? नेपाल में इसका तकनीकी अध्ययन काठमांडू विश्वविद्यालय द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान में साढ़े दो मेगावाट की क्षमता वाला एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है। वर्षा ऋतु में अधिक होने वाली बिजली को मल उत्पादन में उपयोग करके बिजली की बर्बादी रोकी जा सकेगी, शाही ने बताया। जल तथा ऊर्जा आयोग का सचिवालय और वैकल्पिक ऊर्जा प्रचार केंद्र इसे प्राथमिकता देते हुए अध्ययन कर रहे हैं। पड़ोसी भारत में भी विद्युत प्राधिकरण के अंतर्गत ग्रीन हाइड्रोजन विभाग बनाया गया है। संभावनाएं होते हुए भी कुछ कानूनी और तकनीकी चुनौतियां बनी हुई हैं। प्राधिकरण के संचालक सदस्य शाही के अनुसार हाइड्रोजन के गुण जांचने और नियमन करने वाला किसी ‘नियामक निकाय’ की नेपाल में अभी तक व्यवस्था नहीं है। हाइड्रोजन गैस अत्यंत ज्वलनशील होती है, इसलिए इसकी सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण में विशेष सावधानी आवश्यक है।

नेपाल हर साल भारी राशि खर्च करके रासायनिक मल का आयात करता है। सरकार द्वारा बजट में प्रस्तावित हरित यूरिया अवधारणा सफल होने पर न केवल मल उत्पादन में बल्कि जलविद्युत उपयोग में भी नई(dimensoins) उम्मीदें जुड़ेंगी। प्राधिकरण इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। विशेषज्ञों का सवाल – क्या प्राधिकरण विद्युत उत्पादन करे या मल निर्माण? सरकार की इस योजना पर विशेषज्ञों ने आश्चर्य जताया है। उनका तर्क है कि विद्युत प्राधिकरण का कार्य विद्युत उत्पादन, प्रसारण और वितरण है, मल निर्माण में संलग्न नहीं होना चाहिए। विद्युत प्राधिकरण के पूर्व उपकार्यकारी निदेशक प्रबल अधिकारी ने सवाल उठाया कि क्या प्राधिकरण का काम मल बनाना है या यह विद्युत सेवा से संबंधित है। ‘विद्युत प्राधिकरण ने निजी क्षेत्र के साथ मिलकर हरित यूरिया मल बनाने की बात कही है, लेकिन प्राधिकरण का असली काम क्या है? यह विद्युत उत्पादन और सेवा में दक्ष है। उसी पर ध्यान केन्द्रित होना चाहिए और इसे बेहतर बनाने पर काम होना चाहिए,’ उन्होंने कहा, ‘मगर जब मल निर्माण की बात आती है तो यह पुनर्संरचना योजना से मेल नहीं खाती।’ एक तरफ प्राधिकरण को तीन कंपनियों में विभाजित करने की योजना है, वहीं दूसरी ओर मल उत्पादन करने का मुद्दा विरोधाभास लिए हुए है, उन्होंने कहा। ‘पुनर्संरचना के कारण प्राधिकरण के टूटने की स्थिति आएगी, तब मल निर्माण संभव होगा कैसे? क्यों प्राधिकरण मल बनाये? यह काम निजी सेक्टर कर सकता है, तो यह पहल क्यों?’ उन्होंने प्रश्न उठाया। विद्युत सेवा प्रदान करने वाले प्राधिकरण को मल निर्माण का जिम्मा देना, यह विषय उनके मुताबिक विचारणीय एवं गम्भीर है।

रविले भारतीय गृहमंत्री अमित शाह से नई दिल्ली में भेंट की

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने भारतीय गृहमंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस जयशंकर से नई दिल्ली में भेंट की है। भारतीय जनता पार्टी के निमंत्रण पर पांच दिन के दौरे के लिए भारत आए लामिछाने ने आज से राजनीतिक मुलाकातें शुरू की हैं। 19 जेठ, काठमांडू।

लामिछाने और अमित शाह के बीच भेंट कुछ समय पहले ही हुई है। पांच दिन के दौरे पर मौजूद लामिछाने ने आज विभिन्न राजनीतिक मुलाकातों की शुरुआत की है। उन्होंने आज ही विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की। वे भारतीय जनता पार्टी के निमंत्रण पर कल भारत पहुंचे थे।

नारा नया, कार्यक्रम जसका तसिका

१९ जेठ, पोखरा । ४ चैत २०८० मा तीनै तहका सरकार प्रमुखहरूको उपस्थितिमा पोखरालाई पर्यटनको राजधानी घोषणा गरिएको थियो। तर तीनै तहका सरकारले पर्यटकीय राजधानीलाई स्थापित गर्ने र पर्यटक आकर्षित गर्ने कुनै ठोस कार्यक्रम ल्याएनन्। पर्यटकीय राजधानी घोषणा भएपछिको पर्यटक संख्या, गतिविधि, योजना र भ्रमणस्थलको स्पष्ट विवरण कुनै पनि तहले प्रस्तुत गर्न सकेन। गण्डकी प्रदेश सरकारले पर्यटक आगमनको स्पष्ट तथ्यांक प्रस्तुत गर्न सकेको छैन। ५ वर्षभित्र भारत र चीनबाट आउने पर्यटकको संख्या दोब्बर गर्ने लक्ष्यसहित प्रचारमूलक कार्यक्रम घोषणा गरेको छ। पोखरालाई पर्यटनको राजधानीको रूपमा स्थापित गर्ने कार्य चालु आर्थिक वर्षको नीति तथा कार्यक्रममा समावेश गरिएको छ। आगामी वर्षको नीति तथा कार्यक्रममा पोखरालाई ब्राण्डिङ, प्रमुख परियोजना र अन्तर्राष्ट्रिय प्रचारसँग जोड्ने भनिएको छ भने भारत र चीनबाट आउने पर्यटक संख्या पाँच वर्षभित्र दोब्बर बनाउने लक्ष्य राखिएको छ।
गण्डकी प्रदेश सरकारले आर्थिक वर्ष २०८३/८४ का लागि ल्याएको नीति तथा कार्यक्रम वितरण र प्रचारमुखी देखिन्छ, जुन परिणाममुखीभन्दा बढी छ। अघिल्लो वर्षका अधिकांश कार्यक्रमलाई नयाँ नाम, नारा र लक्ष्यसहित पुनः प्रस्तुत गरिएको छ। नयाँ उपलब्धि मापन गर्न सकिने कार्यक्रमहरूको संख्या सीमित देखिन्छ। अघिल्लो वर्षको पर्यटन प्रवर्द्धन कार्यक्रम ‘गण्डकी जाऔँ: प्रकृति र संस्कृतिसँग रमाऔँ’ अभियानमा परिणत गरिएको छ। विद्यालयमा सूचना प्रविधि विस्तारलाई ‘डिजिटल गण्डकीको आधार: विद्यालयमा ICT पूर्वाधार’ को नारा दिइएको छ। युवा लक्षित कार्यक्रमलाई ‘अबको निकास: युवाको विकास’ अभियानको रूपमा प्रस्तुत गरिएको छ। यीमध्ये अधिकांश कार्यक्रम अघिल्लो वर्षकै निरन्तरता रहेको देखिन्छ।
प्रदेश प्रमुख डिल्लीराज भट्टले प्रदेश सभामा नीति तथा कार्यक्रम बुझाउने क्रममा नीति वितरण र प्रचारमुखी देखिएको बताएका छन्। धेरै क्षेत्रमा कार्यक्रमको नाम, नारा र प्रस्तुतीकरण बदलिएको भए पनि आधारभूत नीति र कार्यदिशा उही छ। कृषि, पर्यटन, युवा, शिक्षा र सामाजिक क्षेत्रका कार्यक्रमहरूमा प्रचार र अभियानमुखी भाषाको प्रयोग बढेको छ। कृषि, वन, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पूर्वाधार, खानेपानी, सहकारी, उद्योग, सुशासन र सामाजिक विकासका अधिकांश क्षेत्रहरूमा पुराना कार्यक्रमहरूलाई केही शब्द परिमार्जन, लक्ष्य विस्तार र नयाँ नारासहित पुनः संलग्न गरिएको छ। रैथाने बालीदेखि कृषि क्यारिडोरसम्म कृषि क्षेत्रमा सरकारको प्राथमिकता यथावत् रहेको छ।
रैथाने बाली संरक्षण, ब्राण्डिङ र बजार प्रवर्द्धन, असल कृषि अभ्यास, प्राङ्गारिक कृषि, कृषिजन्य यान्त्रीकरण, उत्पादन आधारित अनुदान, कृषि क्यारिडोर विकास, भूमि बैंक, भूमि उपयोग योजना, सुन्तला, कफी, अलैंची, स्याउ, ओखर लगायत उच्च मूल्यका बालीहरूको प्रवर्द्धन तथा कृषि बीमा कार्यक्रम अघिल्लो वर्षकै निरन्तरता जारी रहनेछ। माटो परीक्षण प्रत्येक वर्षको नीति तथा कार्यक्रममा रहेको भएपनि यस वर्ष ‘माटो स्वास्थ्य प्रमाणपत्र’ कार्यक्रम नयाँ नाममा समेटिएको छ। गाउँ फर्किएका युवालाई कृषि उद्यममा जोड्ने विशेष पहल गरिने जनाएको छ।
पशु स्वास्थ्य, खोप अभियान, पशुजन्य रोग नियन्त्रण, दुग्ध तथा मासु उत्पादन वृद्धि, पशुपन्छीको व्यावसायिकरण र पशु सेवा विस्तारका कार्यक्रमहरूलाई निरन्तरता दिइएको छ। यस वर्ष ‘वान हेल्थ’ नामक नयाँ दृष्टिकोणमार्फत मानव, पशु र वातावरणीय स्वास्थ्यलाई एकीकृत रूपमा हेर्ने नीति अघि सारिएको छ। सडक तथा पूर्वाधार: निरन्तरता नै मुख्य आधार प्रदेश सरकारले नयाँ मेगा पूर्वाधारभन्दा पहिले मूल विकासका रहेका योजनाहरू पूरा गर्ने रणनीति अपनाएको देखिन्छ। यस क्षेत्रमा नयाँ ठूला आयोजनाको घोषणा गर्ने भन्दा पुराना निर्माणाधीन आयोजनाहरू पूरा गर्ने, अधुरा सडक र पुलहरू पुरा गर्ने तथा चलिरहेका योजनाहरूसँग निरन्तरता दिने नीति देखिन्छ। सरकारले नयाँ थप्नुभन्दा पुराना पूरा गर्नेमै ध्यान दिएको छ जुन भविष्यमा बजेट उपलब्ध हुँदा स्पष्ट हुनेछ।
अधुरा सडक, सडक पुल, रणनीतिक सडक, शालग्राम क्यारिडोर, कोराला–पोखरा–त्रिवेणी सडक, ग्रामीण सडक सञ्जाल, बसपार्क स्तरोन्नति र विद्युतीय यात्रामा जोड दिइएको छ। दीर्घकालीन रूपमा निर्माणाधीन सडक र पुलहरू पूरा गर्ने, स्थानीय तह केन्द्रहरू जोड्ने बाँकी सडक कालोपत्रे गर्ने, मुस्ताङ–डोल्पा अन्तरप्रदेश सडक स्तरोन्नति, झोलुङ्गे पुल निर्माण, शालग्राम क्यारिडोर निरन्तरता र कोराला–पोखरा–त्रिवेणी सडक निरन्तरता प्राथमिकतामा राखिएको छ। प्रदेश स्तरमा आर्थिक परिवर्तनमा सहयोग पुर्‍याउने नयाँ मेगा परियोजना, औद्योगिक क्यारिडोर, सुरुङ मार्ग, नयाँ आर्थिक केन्द्र, स्मार्ट सिटी वा ठूला उत्पादनमूलक पूर्वाधारहरूको स्पष्ट रणनीति गण्डकीमा उपलब्ध छैन। नीति तथा कार्यक्रममा नयाँ सडक खोल्नु भन्दा मर्मत-सम्भार, सडक सुरक्षा परीक्षण, सम्पूर्ण सडक कायम राख्ने र अधुरा पुलहरू पूरा गर्ने पक्षलाई प्राथमिकता दिइएको छ, जसले पुराना पूर्वाधारलाई सञ्चालन योग्य बनाउने रणनीति पुष्टि गर्छ।
सार्वजनिक यातायात सुधार, बसपार्क स्तरोन्नति, विद्युतीय सवारी प्रवर्द्धन, राइड सेयरिङ नियमन र यातायात सेवामा डिजिटल प्रणाली विस्तारका कार्यक्रमहरू पनि विगत वर्षहरूदेखि निरन्तरता पाइरहेका छन्। उद्योग स्थापना, स्थानीय कच्चा पदार्थमा आधारित उद्योग प्रवर्द्धन, निर्यात वृद्धि, निजी क्षेत्रसँग साझेदारी, लगानी सम्मेलन, ‘इन्भेस्ट गण्डकी’ अभियान र व्यापार सहजीकरणका कार्यक्रमहरू अघिल्लो वर्षकै निरन्तरतामा छन्। लोकाहा खोला र पुँडीटारमा औद्योगिक क्षेत्र स्थापनाको विषय वर्षेनी निरन्तरता पाउँदै आएको भए पनि अहिलेसम्म सुरुवाती प्रक्रियामै छ।
धार्मिक पर्यटन सर्किट निर्माण, डायलाइसिसमा पालो कुर्न नपर्ने व्यवस्था आगामी वर्षको नीति तथा कार्यक्रममा दामोदरकुण्ड–मुक्तिनाथ–देवघाट–त्रिवेणीधाम धार्मिक पर्यटन सर्किट र लिगलिगकोट–गोरखा–मनकामना धार्मिक पदमार्ग विकासलाई नयाँ प्राथमिकताको रूपमा अघि सारिएको छ। विशेषीकृत स्वास्थ्य सेवा, आयुर्वेद सेवा, नसर्ने रोग नियन्त्रण, मानसिक स्वास्थ्य, जनस्वास्थ्य सेवा विस्तार, स्वास्थ्य जनशक्ति उत्पादन तथा स्वास्थ्य संस्थाको सुदृढीकरणलाई सरकार प्राथमिकतामा राखेको छ। सरकारले डायलाइसिस सेवामा पालो कुर्न नपर्ने व्यवस्था गर्ने घोषणा गरिसकेको छ। रोगको समुदाय स्तरिय स्क्रिनिङ, डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली विस्तार र विशेषज्ञ सेवा सुदृढीकरण जस्ता पुराना कार्यक्रम यस वर्ष पनि प्राथमिकतामा राखिएका छन्।
सूचना प्रविधिमैत्री शिक्षा, विद्यालयमा नवप्रवर्तन, प्राविधिक तथा व्यावसायिक शिक्षा, सीप विकास, गण्डकी विश्वविद्यालयलाई विशिष्टीकृत प्राविधिक विश्वविद्यालय बनाउन नीति तथा शैक्षिक गुणस्तर सुधार कार्यक्रम अघि सारिएको छ। मातृभाषा संरक्षण र प्रवर्द्धनलाई यस वर्ष थप जोड दिइएको छ। आगामी वर्ष एआई, साइबर सुरक्षा, स्टिम ल्याब जस्ता विषयहरूलाई सरकार प्राथमिकतामा राख्ने जनाएको छ। ‘सिक्दै कमाउँदै, कमाउँदै सिक्दै’ कार्यक्रमलाई पनि निरन्तरता दिइएको छ। युवालाई कृषि उद्यममा आकर्षित गर्ने कार्यक्रमलाई यस वर्ष विशेष रूपमा उठाइएको छ। युवासम्बन्धी कार्यक्रममा ‘युवाको विकास र विकासमा युवा’, ‘अबको निकास: युवाको विकास’ जस्ता आकर्षक नाराहरू समावेश गरिएका छन्। ‘एक घर: एक धारा’, ‘नदी किनारका गह्रा: सधैं हराभरा’, ‘एक जिल्ला, एक जलाशय’ जस्ता कार्यक्रमहरू आकर्षक नारा पाएका छन्। घरधुरीमा निजी धारा जडान, सिँचाइ विस्तार र मर्मत-सम्भार कोष स्थापनामा सरकारले जोड दिएको छ। नतिजामूलक अनुगमन, रियल टाइम अनुगमन प्रणाली, कर्मचारी कार्यसम्पादन मूल्यांकन, आयोजना प्रमुखलाई जवाफदेही बनाउने तथा डिजिटल शासन विस्तारजस्ता विषयहरूलाई सुशासनका लागि जोड दिइएको छ।

भीम रावल ने भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया के बाद प्रधानमंत्री से राय व्यक्त करने को कहा

१९ जेठ, काठमाडौं । नेपाली कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के नेता भीम रावल ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) से सीमा समस्या समाधान के संबंध में भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया के बाद स्पष्ट धारणा सार्वजनिक करने का आग्रह किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को नेपाल–भारत सीमा समस्या पर वार्ता में तीसरे पक्ष को शामिल करने के प्रस्ताव को अस्वीकार किया था। इस प्रतिक्रिया के बाद रावल ने प्रधानमंत्री की राय व्यक्त करने की मांग की है।

‘प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने नेपाल के अतिक्रमित भूभाग के विषय में ब्रिटेन सरकार को वार्ता में शामिल करने की बात संसद के प्रतिनिधि सभा में व्यक्त की थी। इसी संदर्भ में भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि भारत और नेपाल के द्विपक्षीय मामलों में तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं हो सकती,’ रावल ने कहा, ‘अब नेपाल की बहुत सी जमीन भारत द्वारा अतिक्रमित किए जाने की झूठी और राष्ट्रहित के विरुद्ध विचार को संसद के प्रतिनिधि सभा में रखने वाली राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी की लगभग दो तिहाई बहुमत वाली सरकार के प्रधानमंत्री के प्रति भारतीय विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया के जवाब की आवश्यकता है।’ उन्होंने कहा कि इस विषय में नेपाली जनता के बीच स्पष्टता लानी होगी।

‘स्मरण रहे, वर्तमान में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के सभापति रवि लामिछाने भारत यात्रा पर हैं,’ रावल ने आगे कहा।

फीफा विश्व कप २०२६ के लिए ४८ देशों की अंतिम टीम सूची जारी

फीफा ने २०२६ के विश्व कप के लिए भाग लेने वाले ४८ देशों के १,२४८ खिलाड़ियों की अंतिम सूची जारी की है। इस बार की प्रतियोगिता में केप वर्डे, क्यूराकाओ, जॉर्डन और उज़्बेकिस्तान ने ऐतिहासिक रूप से पहली बार विश्व कप में डेब्यू किया है। अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी और पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो रिकॉर्ड छठी बार विश्व कप खेलने की तैयारी में हैं। १९ जेठ, काठमांडू – फीफा विश्व कप २०२६ नजदीक है और कौन-कौन से देशों के खिलाड़ी इस大会 में हिस्सा लेंगे, इस बात को लेकर काफी उत्सुकता थी। लेकिन अब जब फीफा ने ४८ देशों की अंतिम टीमों की सूची जारी कर दी है, तो यह जिज्ञासा समाप्त हो गई है। २३वें संस्करण का फीफा विश्व कप ११ जून से अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में आयोजित होगा। विश्व कप शुरू होने में केवल ९ दिन बाकी हैं और सभी ४८ देशों की अंतिम टीमों की सूची जारी की गई है। फीफा के अनुसार, यह सूची प्रतियोगिता के सबसे दिलचस्प माइलस्टोन में से एक का प्रतिनिधित्व करती है।

तीन देशों में पहली बार आयोजित हो रहे इस फीफा विश्व कप में अब तक की सबसे अधिक १०४ मैच होंगे। पहली बार ४८ देश इस विश्व कप में प्रतिस्पर्धा करेंगे और कुल १,२४८ खिलाड़ी अंतिम टीम में चुने गए हैं। फीफा ने कहा है कि यह संस्करण विश्व फुटबॉल के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ होगा और इससे पहले से ज्यादा देशों, खिलाड़ियों और प्रशंसकों के लिए नए अवसर खुलेंगे। ४८ देशों की अंतिम टीम सूची इस प्रतियोगिता की विशालता और स्थायी आकर्षण को मजबूत करेगी। फीफा के अनुसार इस बार कम से कम एक बार विश्व कप खेलने वाले ३५७ खिलाड़ी पुनः इस बार खेलेंगे, जबकि ८९१ खिलाड़ी पहली बार विश्व कप का अनुभव लेने जा रहे हैं।

इस विश्व कप में खिलाड़ियों की उम्र में भी काफी अंतर है। स्कॉटलैंड के क्रेग गॉर्डन (४३ वर्ष १६२ दिन) इस प्रतियोगिता के सबसे वरिष्ठ खिलाड़ी हैं, जबकि मेक्सिको के गिल्बर्टो मोरा (१७ वर्ष २४० दिन) सबसे युवा खिलाड़ी हैं, जिनके बीच लगभग २५ वर्ष का अंतर है। प्रतिस्पर्धा की शुरुआत में २० वर्ष से कम उम्र के २२ खिलाड़ी और ४० वर्ष या उससे अधिक उम्र के ७ खिलाड़ी मैदान पर उतर सकते हैं। इस बार की खिलाड़ी सूची आधुनिक फुटबॉल के वैश्विक स्वरूप को भी स्पष्ट रूप से दर्शाती है। फीफा विश्व कप २०२६ में विश्व के ७१ देशों के ४४९ विभिन्न क्लबों के खिलाड़ी शामिल हैं। इनमें एशिया से १४, अफ्रीका से ६, कंकाकाफ क्षेत्र से ७, कॉनमेबोल से ८, ओशेनिया से १ और यूरोप से ३५ क्लब के खिलाड़ी शामिल हैं।

फुटबॉल की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में स्थापित सितारों के साथ-साथ चार नए देशों ने इस बार विश्व कप में पदार्पण किया है। केप वर्डे, क्यूराकाओ, जॉर्डन और उज़्बेकिस्तान पहली बार फीफा विश्व कप में हिस्सा ले रहे हैं। इस बार मुख्य आकर्षण उज़्बेकिस्तान की विश्व मंच पर ऐतिहासिक पहली उपस्थिति है, जहाँ मैनचेस्टर सिटी के अब्दुकुदिर खुसानोव जैसे प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी देश के सपनों को पूरा कर रहे हैं। अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी, पुर्तगाल के स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो, और मेक्सिको के गोलकीपर गुइलेर्मो ओचोआ भी अपनी रिकॉर्ड छठी फीफा विश्व कप में खेलने के लिए तैयार हैं। मेसी और रोनाल्डो विश्व कप में छठी बार खेलने का विश्व रिकॉर्ड बनाने की चुनौती में हैं।

प्रशिक्षकों के क्षेत्र में, घाना के पुर्तगाली कोच कार्लोस क्वीरोज़ लगातार पाँचवीं बार फीफा विश्व कप में कोच के रूप में भाग ले रहे हैं। उन्होंने २०१० में पुर्तगाल का, और २०१४, २०१८ तथा २०२२ में ईरान का नेतृत्व किया है। फीफा विश्व कप २०२६ खेलने वाले सभी ४८ देशों ने १ जून तक अपनी अंतिम टीम फीफा को सौंप दी थी, जिसके बाद मंगलवार को फीफा ने सभी टीमों की सूची सार्वजनिक की है।

विधायिका को छल गर्दै कर दरों में मनमानी संशोधन

१९ जेठ, काठमाडौं। सरकार की कर नीति और दरों से संबंधित अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज है – आर्थिक विधेयक। इसी विधेयक में उल्लिखित नीति और दरों के अनुसार सरकार ने १५ जेठ से कर वसूली शुरू कर दी है।

लेकिन संसद में १५ गते पेश किए गए आर्थिक विधेयक और अर्थ विभाग ने अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक किए गए आर्थिक विधेयक में कर संबंधी व्यवस्थाओं में व्यापक अंतर है। नेपाल सरकार ने संसद में ४६७ पृष्ठों का आर्थिक विधेयक दर्ता कराया है, जबकि अर्थ विभाग ने एकतरफा चार बार बदलाव कर अपनी साइट पर ४५० पृष्ठों का संशोधित दस्तावेज अपलोड किया है।

संसद सचिवालय के पूर्व सचिव, सोमबहादुर थापा के अनुसार संसद में दर्ता हो चुके विधेयक में कोई भी विषय में सुधार करना हो तो संसद की अनुमति अनिवार्य होती है। उन्होंने कहा, ‘संसद में पेश किए गए आर्थिक विधेयक में संशोधन लाने के लिए पहले संसद में मंजूरी लेना जरूरी है। अर्थ मंत्रालय को स्वयं संशोधन करने का कानूनी अधिकार नहीं है। यदि कर की दरों के विषय पर ही बिना मंजूरी संशोधन किया गया है तो यह एक गंभीर मामला है।’

हालांकि, ऐसा प्रतीत होता है कि अर्थ मंत्रालय ने कर दरों और नीति में मामूली नहीं बल्कि गंभीर बदलाव किए हैं।

एक पूर्व अर्थ सचिव ने कहा, ‘संसद में दर्ता हो चुके आर्थिक विधेयक में इस तरह मनमानी संशोधन होना स्वाभाविक नहीं है। चाहे कितनी भी सामान्य भूल हो, उसे संसद में चर्चा कर ही संशोधित किया जाना चाहिए।’ उन्होंने भले ही अर्थ मंत्री को मामूली संशोधन करने का बयान दिया हो, लेकिन इस विषय को लेकर उन्हें आश्चर्य हुआ है।

पहला– संसद सचिवालय में दर्ता आर्थिक विधेयक की अनुसूची १ में वैट छूट देने वाली वस्तुओं की सूची में ‘गृह उपयोग के लिए ५० यूनिट तक बिजली पर कर छूट’ का प्रावधान था। लेकिन मंत्रालय की वेबसाइट पर संशोधित विधेयक में इस व्यवस्था में बड़ा फर्क है। अब विद्युत व्यवसायी द्वारा बेची गई तथा घरेलू उपयोग के लिए ५० यूनिट तक की बिजली पर कर छूट का प्रावधान है, जिससे विद्युत आयोजना प्रवर्धकों को कर-मुक्ति देने की संभावना है।

पहले के विधेयक के अनुसार ५० यूनिट से कम खपत करने वाले ग्राहकों को छोड़कर सभी पर वैट लागू था। बिजली उत्पादन कंपनी यदि प्राधिकरण को बेचती तो भी वैट लगता। लेकिन संशोधित प्रावधान ने विद्युत आयोजना प्रवर्धकों को कर से अलग छूट दे दी है।

दूसरा– संसद में दर्ता विधेयक में महानगरपालिका और उपमहानगरपालिका के बाहर सिनेमा हॉल संचालित करने पर आयकर में कोई छूट का प्रावधान नहीं था। लेकिन अर्थ मंत्रालय ने आयकर कानून में संशोधन करते हुए ‘महानगरपालिका और उपमहानगरपालिका के बाहर स्थापित सिनेमाघरों को व्यवसाय शुरू करने की तिथि से १० वर्ष तक कर छूट’ प्रदान करने की व्यवस्था जोड़ी है।

चलचित्र क्षेत्र मनोरंजन के लिए है, परोपकार के लिए नहीं। यह छूट विशेष व्यक्तियों को ही लाभ पहुंचाने वाली दिखती है।

तीसरा– संसद में दर्ता विधेयक में व्यक्तियों को अपनी संतान के शिक्षण शुल्क भुगतान पर उस राशि को आयकर योग्य आय से घटाने का प्रावधान नहीं था। लेकिन मंत्रालय ने संशोधित विधेयक में ‘प्राकृतिक व्यक्तियों को संतान की शिक्षा के लिए किए गए भुगतान का २५ प्रतिशत या २५ हजार रुपये तक आय से घटाने’ की व्यवस्था की है।

चौथा– संसद में दर्ता विधेयक में ब्रिफकेस, वॉलेट, और सूटकेस पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी की दर १५ प्रतिशत थी। लेकिन मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर मौजूद संशोधित विधेयक में इसे ३० प्रतिशत बढ़ा दिया है।

पाँचवां– संसद में दर्ता विधेयक के सड़क निर्माण दस्तूर में सभी विद्युत चालित वाहन पर ५ प्रतिशत दस्तूर लगाने का उल्लेख था। लेकिन अर्थ मंत्रालय ने नई छूट व्यवस्था के तहत २० लाख तक मूल्य वाली कुछ मोटर गाड़ियों पर केवल २.५ प्रतिशत दस्तूर लगाने की व्यवस्था की है।

छठा– आर्थिक विधेयक की धारा ११ में विद्युतीय वाहनों पर लगने वाले स्वच्छ पूर्वाधार निवेश शुल्क में संशोधन कर पैठारी बिंदु पर अंतःशुल्क देने वाले वाहनों पर शुल्क न लगने का प्रावधान जोड़ा गया है।

संसद में दर्ता विधेयक में बिना सांसदों को जानकारी दिए सरकार द्वारा संशोधन करना उचित नहीं है, संसद सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा। उन्होंने कहा, ‘त्रुटि सुधारना भी हो तो संसद प्रक्रिया के तहत ही किया जाएगा।’

नाम न छापने की शर्त पर बोले पूर्व अर्थ सचिव ने कहा, ‘हमारे समय में विधेयक में त्रुटि हो तो भी स्वतः संशोधन की अनुमति नहीं होती थी।’

संसद सचिवालय के सहसचिव तथा प्रवक्ता एकराम गिरि ने भी बताया कि आर्थिक और बजट से संबंधित विधेयक पारित और संशोधन की स्पष्ट प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा, ‘पहले विनियोजन विधेयक पर चर्चा होती है, फिर बजट आधारित विधेयकों पर चर्चा और संशोधन होता है। सांसदों को ७२ घंटे का संशोधन समय दिया जाता है।’

बजट आधारित विधेयक केवल मंत्रिपरिषद और राष्ट्रपतीय प्रमाणीकरण के बाद लागू होता है।

चार्टर्ड एकाउंटेंट शेषमणि दाहाल ने कहा है कि कर नीतियों में संशोधन के लिए नियमित संसदीय प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।