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लेखक: space4knews

भाषाविद् गोपाल ठाकुर का दृष्टिकोण: संविधान संशोधन के माध्यम से भाषायी सुधार की आवश्यकता

डा. गोपाल ठाकुर ने कहा है कि नेपाल की भाषाओं को संविधान के तहत मौलिक अधिकारों में रखा गया है, लेकिन राज्य इस विषय में पर्याप्त संवेदनशील नहीं रहा है। संविधान की धारा ७ (१) के अनुसार केवल नेपाली भाषा को सरकारी कार्यों की भाषा माना गया है, जिसमे संशोधन की आवश्यकता है। भाषा आयोग ने २०८० असोज ८ को सरकार को संविधान संशोधन और भाषायी कानून निर्माण की सिफारिश की है, यह जानकारी उन्होंने दी।

९ वैशाख, काठमांडू। ठाकुर ने कहा, “संविधान ने नेपाल में बोली जाने वाली भाषाओं को मौलिक अधिकार के अंतर्गत रखा है, परन्तु इसके निर्माण से ही राज्य इस विषय में संवेदनशीलता नहीं दिखा पाया है।” वह २०७९ चैत से भाषा आयोग के अध्यक्ष हैं और आने वाले गुरुवार को उम्र सीमा की वजह से सेवा निवृत्त होने वाले हैं।

संविधान सभा के सदस्य भी रह चुके ठाकुर ने कहा कि संविधान की धारा ७ (१) में उल्लिखित ‘देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली नेपाली भाषा नेपाल की सरकारी कार्य भाषा होगी’ प्रावधान ने एकल भाषा को सरकारी तौर पर स्थापित किया है और इसमें संशोधन आवश्यक है। संविधान की प्रस्तावना और धारा ३ के अनुसार नेपाल एक बहुभाषी राष्ट्र है, जबकि धारा ७ इसके विपरीत है।

ठाकुर ने आगे कहा, “नेपाली भाषा के अलावा प्रदेशों में सरकारी कार्यों के लिए प्रस्तावित राष्ट्रभाषाओं को संविधान की प्रस्तावना, धारा ३ और धारा ५१ ग (७) के अनुसार सुनिश्चित करने के लिए धारा ७ के उपधारा १ का संशोधन किया जाना चाहिए एवं भाषागत संघीय कानून बनाया जाना चाहिए, इसके लिए आयोग ने सरकार को सिफारिश की है।” उन्होंने बताया कि सरकार आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति तो करती है, लेकिन कार्यक्रम संचालित करने के लिए पर्याप्त बजट नहीं मिलने के कारण वे निराश हैं।

प्रधानमन्त्रीलाई प्रश्न– अब गृहमन्त्रीमा ‘सुधन गुरुङ-२’ ल्याउने हो ?

प्रधानमंत्री से सवाल – क्या अब गृहमंत्री में ‘सुधन गुरुङ-2’ लाएंगे?


९ वैशाख, काठमांडू। सरकार गठन के दौरान प्रधानमंत्री के बाद सबसे सशक्त माने जाने वाले गृह, अर्थ और परराष्ट्र मंत्रालय की जिम्मेदारी किन्हें दी जाएगी, इस पर इस बार भी खासा ध्यान केंद्रित रहा।

विशेषज्ञता के आधार पर अर्थमंत्री के तौर पर स्वर्णिम वाग्ले और परराष्ट्र मंत्री के रूप में शिशिर खानाल नियुक्त हुए। इन मंत्रालयों के लिए राजसंघ के भीतर भी किसी ने बड़ा दावा नहीं किया था।

लेकिन सबसे शक्तिशाली माना जाने वाले गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे दी जाएगी इस सवाल को लेकर राजसंघ के शीर्ष नेता रवि लामिछाने और वरिष्ठ नेता व प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के बीच प्राथमिकता भिन्न थी। लामिछाने ने वर्तमान में सभापति बने डीपी अर्याल को पहली प्राथमिकता दी थी।

प्रधानमंत्री शाह की सूची में तो उनके भरोसेमंदों जैसे सुनील लम्साल से लेकर सुधन गुरुङ तक के नाम थे। प्रधानमंत्री शाह ने लम्साल को भौतिक योजना मंत्रालय दिया जबकि सुधन को गृह मंत्री का पद सौंपा।

गृह मंत्री पद के लिए सुधन गुरुङ का नाम सामने आने के बाद कई लोगों के लिए यह निर्णय हैरान कर देने वाला था। खासकर अर्थ मंत्री वाग्ले के बाद उन्हें मंत्रीमंडल में तीसरे नंबर की प्राथमिकता देना आश्चर्यजनक था। इससे पहले पूर्व मंत्री व सांसद परराष्ट्र मंत्री शिशिर खानाल और विराजभक्त श्रेष्ठ सुधन से नीचे आ गए।

यह इस बात का संकेत था कि वे मंत्रिपरिषद में एक प्रभावशाली पद पर थे। हालांकि कुछ ही दिनों में प्राथमिकता को लेकर सवाल उठने के बाद प्रधानमंत्री ने उन्हें पांचवें नंबर पर ला दिया।

एक पार्टी के लगभग दो-तिहाई बहुमत वाली सरकार में प्रधानमंत्री के मंत्रिपरिषद के सदस्य एवं शक्तिशाली मंत्री के रूप में शामिल हुए गृह मंत्री सुधन गुरुङ बुधवार को मात्र २६ दिन बाद पद से हटाए गए।

व्यक्तिगत संपत्ति की अपारदर्शिता और विवादास्पद व्यक्तियों के आर्थिक साझेदारी के विषय सामने आने के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया।

सभापति रवि लामिछाने और प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के साथ कई बार चर्चा के बाद भी वे कहते हैं कि उन्होंने अपने खिलाफ उठे विषयों की जांच में सहयोग के लिए इस्तीफा दिया।

रास्वपा एक ऐसी शक्ति है जो सुशासन, पारदर्शिता और नए राजनीतिक संस्कार का नारा ले जाती है। इस पार्टी ने पुराने दलों के असफल सुधारों और तरीके से अलग नई शैली अपनाने का संकल्प लिया था।

ऐसे में गुरुङ का इस्तीफा प्रधानमंत्री और रास्वपा की प्रतिबद्धता को मजबूती देता है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल नेपाल के अध्यक्ष मदन शर्मा कहते हैं, ‘जब सवाल उठे, तो पद से हटाना सुशासन की दिशा में एक सहयोगी कदम है।’

लेकिन अगला प्रश्न यह है कि ऐसे विवादास्पद लोग कैसे मंत्री बन जाते हैं।

पूर्व गृह सचिव खेम्मराज रेग्मी बताते हैं, ‘आंदोलन के दौरान विवाद में आए ऐसे लोगों की गृह मंत्री बनने की उपयुक्तता की समीक्षा होनी चाहिए। संपत्ति के अपारदर्शिता से लगे सवालों का संतोषजनक समाधान होना आवश्यक है।’

उनके अनुसार मंत्री का विवाद में फंसना और गृह मंत्री जैसे संवेदनशील पद पर रहते हुए स्वार्थ या संपत्ति विवादों में उलझना नागरिकों की सुशासन में विश्वास पर चोट है।

सुधन गुरुङ के मंत्रीकाल से जेनजी आंदोलन तक की गतिविधियों को देखेंगे तो पता चलता है उन्होंने कार्यों में गति लाने की कोशिश की। लेकिन शुरुआत से ही दिक्कतें आईं। साहस दिखाने की कोशिश में संतुलन खो दिया। आदर्श और नैतिक बनने के लिए ‘गरीब बनकर मरना पाप’ कहते हुए स्वयं को कर्मशील दिखाने का प्रयास किया, लेकिन अंततः अपारदर्शी संपत्ति के खुलासे के बाद उन्हें पद से हटना पड़ा।

गुरुङ का उदय असामान्य था। वे जेनजी आंदोलन के दिनों में माइतीघर में “हमारा नेपाल” संस्था के माध्यम से पानी बांटने गए थे।

वहां पहुंचकर उनकी भूमिका बदल गई और भदौ २४ की विध्वंसक घटनाओं में उनकी संलिप्तता भी उठाई जाती है, हालांकि उस घटना की जांच गौरीबहादुर कार्की आयोग ने नहीं की थी। सुधार के सवाल आज भी कायम हैं।

जेनजी आंदोलन में परोपकारी काम के लिए शामिल हुए गुरुङ समय के साथ उस आंदोलन के नेता के तौर पर उभर आए। सेना से वार्ता से लेकर राष्ट्रपति को धमकी देने तक की गतिविधियां कीं।

सुशीला कार्की नेतृत्व वाली सरकार के दौरान सिंहदरबार के कार्यालयों पर गए और तत्कालीन गृह मंत्री ओमप्रकाश अर्याल को धमकी दी भी।

शुरुआत में उन्होंने मौजूदा निर्वाचन प्रणाली के तहत चुनाव कराने का विरोध करते हुए सभी राजनीतिक दल चुनाव की तैयारी में जुटे थे। फिर उन्होंने राजसंघ (रास्वपा) में प्रवेश किया और गोरखा-१ से चुनाव के लिए उम्मीदवार बने।

आंदोलन से चुनाव तक के पृष्ठभूमि वाले गुरुङ ने गृह मंत्री बनते ही त्वरित कार्रवाई, तत्काल गिरफ्तारी अभियान और बड़े अपराधियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए।

उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और गृह मंत्री रमेश लेखक को २४ घंटे के भीतर गिरफ्तार कराया। शुरू में उनकी इस शैली की सराहना हुई।

लेकिन बाद में उनकी कार्रवाई से जुड़े कानूनी और प्रक्रियागत सवाल अदालत में उठे। कई पकड़ाए गए लोग बाद में अदालत से छूट गए। उन्होंने राजनीतिक भावनाओं की बजाय प्रमाण और प्रक्रिया के अनुसार काम नहीं किया।

उन्होंने गृह मंत्रालय को सक्रिय बनाने का प्रयास किया। आपदा प्रबंधन में उनका रुचि और सुरक्षाकर्मियों से सीधा संवाद करना उनकी कार्यकुशलता प्रदर्शित करता है।

लेकिन उनका अवकाश संपत्ति विवाद और स्वार्थ संबंधी मुद्दों के कारण हुआ। विवादित व्यवसायी की कंपनी में उनकी हिस्सेदारी सामने आई जो उन्होंने संपत्ति विवरण में शामिल नहीं की थी।

जब सार्वजनिक माध्यमों में उनकी अपारदर्शी व्यावसायिक गतिविधियों के तथ्य आए तो उनकी आर्थिक स्वच्छता पर सवाल उठे।

इस्तीफा देकर पद से हटने के बावजूद मुख्य सवाल यह है कि ऐसी पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को क्यों गृह मंत्री बनाया जाता है।

सुशासन का नारा देने वाली सरकार में अपने ही मंत्रियों की पारदर्शिता परीक्षण में विफलता का क्या संदेश जाता है? प्रधानमंत्री शाह के लिए अब इसका जवाब देना चुनौतीपूर्ण है।

ट्रांसपेरेंसी नेपाल के अध्यक्ष मदन शर्मा कहते हैं, ‘उनके हटने से अब संबंधित विषयों और संलग्न व्यक्तियों की जांच से सरकार में सुशासन की दिशा का दिखना शुरू होगा।’

नेपाल की पिछली सरकारों में भी गृह मंत्रालय के मंत्री विवादों में रहे हैं। पद पर रहते या छोड़ते हुए दोनों समय सवाल उठे हैं।

रमेश लेखक से लेकर बालकृष्ण खाँड तक के उदाहरण इस बात को दर्शाते हैं कि गृह मंत्रालय को शक्ति और प्रभाव बढ़ाने के लिए एक मंच के रूप में इस्तेमाल किया गया। लेखक के दौरान वीज़िट वीज़ा मामले विवादित हुए, और अब जेनजी आंदोलन दमन मामला जांचाधीन है।

रास्वपा के सभापति रवि लामिछाने गृह मंत्री रहते नागरिकता विवाद के कारण तत्काल पद से हटे और सांसद पद भी गंवाया। बालकृष्ण खाँड नकली भूटानी शरणार्थी मामले में फंसे हैं और मामला चल रहा है।

इसलिए विवादों में फंसे मंत्री गुरुङ पर और जांच आवश्यक है। वे विवाद के बावजूद पद नहीं छोड़ते – यह पुरानी परंपरा उन्हें तोड़नी होगी, जो अपनी जगह सही है। लेकिन केवल इस्तीफा देना प्रश्नों का समाधान नहीं है।

गुरुङ ने जांच में सहयोग का आश्वासन दिया है, लेकिन सरकार किस प्रकार उनकी और संबंधित साझेदारों की छानबीन करेगी, यह देखना बाकी है।

अब सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की है। नया गृह मंत्री चुनते समय क्या वे एक ईमानदार, पारदर्शी और संस्थागत रूप से परिपक्व व्यक्ति लाएंगे या सुधन गुरुङ-2 को नियुक्त करेंगे? यही सवाल उठता है।

गृह मंत्रालय नागरिकों के लिए न्याय की पहली कड़ी है। पुलिस, प्रशासन और शांति सुरक्षा से जुड़े सभी ढांचे इसी से निर्देशित होते हैं। इसलिए उस मंत्रालय का नेतृत्व करने वाले के व्यवहार और निर्णय का सभी नागरिकों के विश्वास पर सीधे प्रभाव पड़ता है।

यदि गृह मंत्री स्वयं विवादित हैं तो नागरिक उस मंत्रालय पर भरोसा कैसे कर सकते हैं? सुधन गुरुङ के २६ दिवसीय कार्यकाल से रास्वपा और प्रधानमंत्री ने निश्चित तौर पर कई पाठ सीखे होंगे।

राइड शेयरिक वाहन की अधिकतम आयु 15 वर्ष निर्धारित

सरकार ने राइड शेयरिक और राइड हिलिंग में उपयोग किए जाने वाले वाहनों की अधिकतम आयु 15 वर्ष से अधिक न होने का मापदंड निर्धारित किया है। डिजिटल मोबिलिटी सेवा में शामिल चालकों की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष पूरी होनी चाहिए तथा उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस कम से कम 1 वर्ष पुराना होना आवश्यक है। सेवा प्रदाता अधिकतम 10 प्रतिशत किराया कमीशन ही रख सकेंगे और चालक को न्यूनतम दो किलोमीटर की आधारभाड़ भरनी होगी, यह मापदंड भी तैयार किया गया है। 9 वैशाख, काठमांडू। सरकार राइड शेयरिक और राइड हिलिंग माध्यम से परिवहन सेवा प्रदान करने वाले वाहनों की उम्र सीमा निर्धारित करने की तैयारी कर रही है। इस संदर्भ में भौतिक, पूर्वाधार एवं यातायात मंत्रालय ने डिजिटल मोबिलिटी सेवा संचालन के मापदंड 2082 का मसौदा तैयार किया है। मसौदे के अनुसार, राइड हिलिंग में उपयोग होने वाले अनुमति प्राप्त वाहनों की उम्र उनके निर्माण तिथि से 15 वर्ष से कम होनी चाहिए। यह प्रावधान दोपहिया और चारपहिया दोनों प्रकार के वाहनों पर लागू होगा। मंत्रालय के अनुसार तीनों स्तर की सरकारों के बीच कानूनी एकरूपता बनाए रखने के लिए संघीय सरकार यह मापदंड तय कर रही है। सर्वोच्च अदालत के आदेशों के अनुपालन में राइड शेयरिक सेवाओं को विनियमित करने हेतु यह नियम बनाए गए हैं।

यातायात क्षेत्र से जुड़ी उद्यमशीलता और आर्थिक समृद्धि से सीधे संबंधित राइड शेयरिक जैसे इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म से सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा प्रदान करने, सेवा प्रदाता और वाहनों के नियमन एवं प्रबंधन तथा गुणवत्ता सुधार के लिए मापदंड बनाए गए हैं, यह मंत्रालय के मसौदे में उल्लेखित है। मंत्रालय के अनुसार दोपहिया वाहन के लिए पेट्रोल इंजन वाहनों को प्रदूषण मानकों को पूरा करना होगा जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए न्यूनतम 1.5 किलोवाट पीक आवर क्षमता और अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक न होनी चाहिए। चारपहिया वाहनों के लिए भी कम से कम 200 लीटर सामान रखने की क्षमता निर्धारित की गई है। मापदंड लागू होने के बाद सेवा प्रदाता कंपनी केवल तब ही डिजिटल मोबिलिटी सेवा में वाहनों को शामिल कर पाएगी जब वे वाहन मापदंडों का पालन करते हुए उनकी पुष्टि कर दें।

सम्पत्ति जांच आयोग का कार्यालय स्थापित, औपचारिक रूप से कार्य शुरू

सरकार ने भ्रष्टाचार और दंडहीनता नियंत्रण करने के उद्देश्य से सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रकुमार भंडारी की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय सम्पत्ति जांच आयोग का गठन किया है। आयोग ने आज से औपचारिक रूप से कार्य शुरू किया है और सार्वजनिक पदाधिकारियों तथा उनके परिवारों की सम्पत्ति विवरण एकत्रित कर गहन जांच करेगा। आयोग को अपनी जांच रिपोर्ट प्रधानमंत्री एवं मन्त्रिपरिषद के कार्यालय में प्रस्तुत करनी होगी और सरकार को ४५ दिनों के भीतर इसे लागू करना होगा।

९ वैशाख, काठमांडू। भ्रष्टाचार और दंडहीनता कम करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा गठित ‘सम्पत्ति जांच आयोग’ ने आज से औपचारिक रूप से अपना कार्य आरंभ कर दिया है। वैशाख २ को हुई मन्त्रिपरिषद की बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रकुमार भंडारी की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय आयोग गठन किया गया था। आयोग का कार्यालय केशरमहल में स्थापित किया गया है। नव नियुक्त अध्यक्ष भंडारी ने आज ही प्रधान न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल के समक्ष पद और गोपनीयता की शपथ ली।

अन्य सदस्यों में तत्कालीन पुनरावेदन अदालत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पुरुषोत्तम पराजुली, उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश चण्डीराज ढकाल, पूर्व पुलिस उप महानिरीक्षक गणेश केसी और चार्टर्ड एकाउंटेंट प्रकाश लम्साल शामिल हैं। अध्यक्ष भंडारी ने इन्हें भी शपथ दिलाई है। जांच अधिनियम २०२६ के तहत काम करने वाली आयोग की कार्यप्रणाली (टीओआर) भी स्वीकृत हो चुकी है।

एक वर्ष के कार्यकाल के लिए गठित इस आयोग का कार्य सार्वजनिक पद पर वर्तमान में कार्यरत, सेवानिवृत्त या पद से हट चुके पदाधिकारियों और उनके परिवारों की देश-विदेश में स्थित सम्पत्तियों की जानकारी जुटाकर गहन जांच करना होगा। आयोग को किसी भी व्यक्ति की जांच पूरी होते ही रिपोर्ट प्रधानमंत्री एवं मन्त्रिपरिषद् के कार्यालय में प्रदान करनी होगी और सरकार को ४५ दिनों के भीतर उसे मजबूरन लागू करना होगा। आयोग ने पूर्ण स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं व्यावसायिक तरीके से कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई है तथा किसी के दबाव या प्रभाव में आए बिना जिम्मेदारी निभाने का आश्वासन दिया है।

आयोग लिखित, मौखिक, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम, सामाजिक नेटवर्किंग या किसी अन्य किसी भी माध्यम से शिकायतें एकत्रित करेगा। आवश्यकतानुसार विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की सलाह ले सकता है, लेकिन हित-विरोध से ग्रस्त विशेषज्ञों को आमंत्रित करने की अनुमति नहीं होगी, जिसके लिए सख्त नियम बनाये गए हैं। यह आयोग २०८२ चैत १३ को हुई मन्त्रिपरिषद की बैठक में स्वीकृत ‘शासन सुधार से जुड़ी १०० कार्यसूची’ के अंक ४३ में उल्लिखित भ्रष्टाचार विरोधी प्रतिबद्धता के अनुरूप गठित किया गया है। वर्तमान में प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय द्वारा आयोग में कार्यरत ३२ आवश्यक कर्मचारियों के चयन की प्रक्रिया जारी है। आयोग के कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए कर्मचारियों को अपनी सम्पत्ति विवरण एक सप्ताह के भीतर सार्वजनिक करने का नियम बनाया गया है।

सुधन चाहन्थे छानबिन समिति, बालेनले मागे राजीनामा – Online Khabar

सुधन ने छानबिन समिति गठन की मांग के बाद गृहमंत्री पद से दिया इस्तीफा

सुधन गुरुङ ने गृहमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधानमंत्री बालेन शाह और रास्वपा अध्यक्ष ravi लामिछाने से सुधन ने दो बार मिलकर एक छानबिन समिति बनाने का प्रस्ताव रखा था। ९ वैशाख, काठमाडौँ। रास्वपा अध्यक्ष ravi लामिछाने से मंगलवार को दो बार मुलाकात के दौरान गृहमंत्री सुधन गुरुङ का एकमात्र एजेंडा अपने पद को सुनिश्चित कराना था। प्रधानमंत्री बालेन शाह के सामने श्रम मंत्री दीपक साह को हटाने का दबाव था। स्वास्थ्य बीमा बोर्ड में अपनी पत्नी की नियुक्ति को लेकर आरोप लगने के बाद तत्कालीन श्रम मंत्री साह पर उठे सवालों के कारण बालेन की टीम ने सामान्य पूछताछ के अलावा कोई स्पष्टीकरण मांगे बिना १३ दिन में उन्हें हटा दिया था।

सम्पत्ति विवरण में नज़र नहीं आने वाली अपारदर्शी संपत्ति के बारे में सार्वजनिक प्रश्न उठने के बाद गृहमंत्री सुधन घबराए थे। मंगलवार को सुधन ने प्रधानमंत्री बालेन और पार्टी अध्यक्ष लामिछाने से दो-दो बार बात की और अपनी स्थिति रखी— छानबिन समिति बनाकर अपनी संपत्ति तथा उसके अर्जन की पृष्ठभूमि की जांच होनी चाहिए। उसके बाद जांच के नतीजों के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। ‘पार्टी के अंदर सुधन को एक और मौका देने की भी राय थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने अब इस्तीफा देने को उचित माना,’ प्रधानमंत्री की टीम के एक सदस्य ने बताया।

सुधन के स्थान पर उस समय दीपक अर्याल को गृहमंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया गया था, लेकिन लामिछाने ने हाल के दिनों में उनके द्वारा उठाए गए कदमों के कारण राजनीति में नया प्रभाव देखा और कुछ समय काम करने का अवसर देने का पक्ष रखा। कई नेताओं ने सुधन की कार्यशैली पर जल्द राजनीतिक अस्थिरता आने की चेतावनी दी थी। दो माइक्रो इन्श्योरेंस कंपनियों में गृहमंत्री गुरुङ के द्वारा खरीदे गए शेयर संपत्ति विवरण में शामिल नहीं थे और विवादित व्यक्तियों से संबंधों के खुलासे के बाद बालेन सरकार पर सुशासन को लेकर प्रश्न उठे थे।

गृहमंत्री की सार्वजनिक की गई संपत्ति विवरण में सैकड़ों रोपनी जमीन और ८९ तोला सोना दर्ज था, लेकिन इसके स्रोत अस्पष्ट थे। उन्होंने ५० लाख रुपये के संस्थापक शेयर दो माइक्रोइन्श्योरेंस कंपनियों में होने का खुलासा नहीं किया था, जिससे कानूनी सवाल उठे। सोमवार को उन्होंने शेयर खरीदने का स्रोत ऋण होने का दावा किया, लेकिन संपत्ति विवरण में केवल पैतृक संपत्ति, व्यवसाय एवं निवेश को स्रोत के रूप में दर्शाया गया था। सार्वजनिक पद पर रहने के दौरान गृहमंत्री गुरुङ ने लिबर्टी माइक्रोलाइफ इन्श्योरेंस के २५ हजार और स्टार माइक्रो इन्श्योरेंस कंपनी के २५ हजार शेयर अपनी संपत्ति में नहीं बताए, जिससे उन पर नैतिक और कानूनी प्रश्न उठे।

सुधन गुरुङ ने स्वयंसिद्ध अपारदर्शी संपत्ति के खुलासे के तुरंत बाद इस्तीफा दिया है। उन्होंने नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की बात कही है, जबकि सरकार आवश्यक होने पर आगे की जांच भी कर सकती है।

हर्क साम्पाङ का फेसबुक खाता पुनः सक्रिय किया गया

९ वैशाख, काठमाडौं। श्रम संस्कृति पार्टी के अध्यक्ष एवं प्रतिनिधि सभा सदस्य हर्कराज राई (साम्पाङ) का फेसबुक खाता पुनः सक्रिय कर दिया गया है। अत्यधिक रिपोर्टिंग के कारण उनका फेसबुक खाता गत बिहीवार से बंद था। फेसबुक ने सामाजिक मानदंडों के उल्लंघन के आधार पर मिली रिपोर्टों को देखते हुए यह निर्णय लिया था। बुधवार शाम से उनका फेसबुक खाता फिर से चालू हो गया है।

साम्पाङ के आईटी विशेषज्ञ करुण राई के अनुसार, “कम्युनिटी वायलेंस” के कारण फेसबुक पर अत्यधिक रिपोर्ट मिलने से खाता बंद किया गया था। सामाजिक नेटवर्क के माध्यम से हर गतिविधि साझा करते हुए उन्हें इस समस्या का सामना करना पड़ा।

आईजीपी कार्की का निर्देशन: सेवा प्रदान में किसी प्रकार की कमजोरी नहीं होने का सुनिश्चित किया गया

९ वैशाख, काठमांडू। पुलिस महानिरीक्षक दान बहादुर कार्की ने सभी पुलिस कर्मियों को उत्कृष्ट भाषा, व्यवहार और आचार संहिताओं का पालन करते हुए नागरिकों की अपेक्षा के अनुरूप सेवा प्रदान में किसी भी कमी या कमजोरी न होने का निर्देश दिया है। नेपाल पुलिस मुख्यालय से बुधवार को विभिन्न समसामयिक विषयों पर पुलिस कर्मियों को वर्चुअल माध्यम से यह निर्देश और सम्बोधन जारी किया गया।

महानिरीक्षक कार्की ने सरकार द्वारा लागू की गई नीतियों और कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से कार्यान्वित करते हुए प्रत्येक जिले में अपराध न हो, इसके लिए सूचना संग्रहण और विश्लेषण को प्राथमिकता देने तथा आवश्यक सुरक्षा रणनीति अपनाकर प्रभावी पुलिस परिचालन करने को कहा। उन्होंने कहा कि लागूऔषध निर्माण, परिवहन और कारोबार में शामिल व्यक्तियों को कानूनी दायरे में लाया जाए और उपयोगकर्ताओं को सुधारात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से लक्षित कर पुलिस अधिक सक्रिय बने।

सीमा नाकों पर संभावित आपराधिक गतिविधि और तस्करी नियंत्रण में ‘शून्य सहनशीलता’ नीति अपनाने का निर्देश भी पुलिस को दिया गया। गुंडागर्दी के विरुद्ध सख्त और कठोर कार्रवाई करने, फैसलों के क्रियान्वयन तथा फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी में तत्परता दिखाने पर जोर दिया गया।

महानिरीक्षक कार्की ने समाज में शांति और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की सक्रियता और प्रभावशीलता बढ़ाने की आवश्यकता बताई तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुलिस की छवि मजबूत बनाने के लिए सभी पुलिसकर्मियों को उच्च व्यावसायिकता का परिचय देते हुए जिम्मेदारी निष्ठा से कार्य करने पर बल दिया।

समुदाय पुलिस साझेदारी कार्यक्रम को प्राथमिकता देने और नागरिक संवाद के माध्यम से उचित जानकारी प्रदान करने पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर संगठन के उद्देश्य और लक्ष्य की प्राप्ति हेतु सभी पुलिसकर्मी प्रतिबद्ध हों। गैर-व्यावसायिक गतिविधियों में संलिप्त पुलिसकर्मी भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाए जाएंगे।

कार्यक्रम में नेपाल पुलिस के केन्द्रीय प्रवक्ता डिप्टी आईजी अभि नारायण काफ्ले, वरिष्ठ पुलिस उपरीक्षक समेत काठमांडू उपत्यका पुलिस कार्यालय, सातों प्रदेश पुलिस कार्यालय, नेपाल पुलिस प्रदेश कार्यालय, नेपाल पुलिस राजमार्ग सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन कार्यालय, प्रदेश पुलिस प्रशिक्षण केंद्र, नेपाल पुलिस विशेष सुरक्षा गण और प्रदेश पुलिस गण, जिला पुलिस परिसर व कार्यालय तथा मातहत इकाइयों के प्रमुख और प्रतिनिधि वर्चुअल माध्यम से उपस्थित थे।

चीन के सिचुआन में नई विषैला सर्प प्रजाति ‘ट्रिमेरेसुरस ली’ की खोज

चीन के सिचुआन प्रांत में नई विषैला सर्प प्रजाति ‘ट्रिमेरेसुरस ली’ मिली है, जिसे लंबे समय तक सामान्य प्रजाति समझकर अनदेखा किया गया था। डीएनए विश्लेषण ने इस सर्प की अलग विकासवादी शाखा की पुष्टि की है और इसके सिर के विशिष्ट लक्षण अन्य प्रजातियों से भिन्न हैं। यह सर्प सिचुआन के माउंट एमेई और सिलिंग स्नो माउंटेन क्षेत्र में पाया गया है, जिससे जैविक विविधता के केंद्र में और भी अज्ञात प्रजातियों के होने की संभावना उजागर हुई है।

चीन के सिचुआन प्रांत की कुहास भरी पहाड़ियों में दशकों से छिपा चमकीले हरे रंग का विषैला सर्प (पिटवाइपर) खोजा गया है। वैज्ञानिकों ने इसे पूरी तरह से नई प्रजाति घोषित किया है। इससे पहले इसे सामान्य प्रजाति समझकर नजरअंदाज किया जाता रहा, लेकिन हाल ही में किए गए डीएनए विश्लेषण ने इसकी अलग पहचान की पुष्टि की। ‘जुसिस्टेमेटिक्स एंड इवोल्यूशन’ जर्नल में प्रकाशित इस शोध में दावा किया गया है कि अध्ययन क्षेत्रों में और भी अज्ञात प्रजातियां मौजूद हैं।

चेंगडू इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजी और जाइंट पांडा नेशनल पार्क के शोधकर्ताओं ने इस नई प्रजाति का नाम प्राचीन चीनी दर्शनशास्त्री ‘लाओजी’ के सम्मान में ‘ट्रिमेरेसुरस ली’ यानी ‘हुवाक्सी ग्रीन पिटवाइपर’ रखा है। लाओजी के दर्शन मानव और प्रकृति के सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व पर जोर देते हैं, जो इस सर्प के मिलने वाले राष्ट्रीय अभयारणय के संरक्षण अभियान के साथ मेल खाते हैं।

डीएनए और शारीरिक विशेषताओं के आधार पर यह सर्प दशकों तक अपने सामान्य हरे रंग के कारण ‘बांस पिटवाइपर’ समझा जाता था। लेकिन विस्तृत आनुवंशिक परीक्षणों ने इसकी अलग विकास शाखा होने की पुष्टि की है। शारीरिक रूप से भी इसके सिर के पैटर्न अन्य संबंधित प्रजातियों से स्पष्ट रूप से अलग हैं। इस नई सर्प प्रजाति में नर और मादा का रूप और स्वभाव में भी स्पष्ट अंतर है। दोनों का शरीर चमकीले हरे रंग का होता है, पर नर के शरीर के किनारों पर गहरे लाल और सफेद धब्बे होते हैं और आंखों का रंग एम्बर जैसा होता है। मादा में सामान्य पीले धब्बे और संतरंगी पीले रंग की आंखें होती हैं। लगभग 80 सेंटीमीटर लंबा यह सर्प अत्यंत विषैले गुणों वाला है और काटने पर मनुष्य को गंभीर रूप से बीमार कर सकता है।

जैविक विविधता के इस केंद्र में यह सर्प सिचुआन के माउंट एमेई और सिलिंग स्नो माउंटेन के घने वन क्षेत्र में पाया गया है, जो विश्व के जैविक विविधता संपन्न क्षेत्रों में से एक है। शोध टीम के प्रमुख बो काई के अनुसार, इस खोज ने यह साबित किया है कि वर्षों से अन्वेषण किए जा रहे क्षेत्रों में भी बहुत सी अज्ञात वस्तुएं खोजी जानी बाकी हैं। वैज्ञानिकों ने जैविक विविधता के इन केंद्रों में निरंतर स्थल आधारित सर्वेक्षण जारी रखने पर ज़ोर दिया है।

दीपेन्द्र पाँचवें स्थान पर खिसक गए हैं

नेपाली राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर दीपेन्द्रसिंह ऐरी आईसीसी टी-20आई ऑलराउंडर रैंकिंग में पाँचवें स्थान पर आ गए हैं। दीपेन्द्र के रेटिंग अंक 239 पर आ गए हैं और वे चौथे स्थान से पाँचवें स्थान पर खिसक गए हैं। आईसीसी टी-20 विश्व कप में दीपेन्द्र ने नेपाल के लिए सर्वाधिक 169 रन बनाए थे और 2 विकेट भी लिए थे। ११ चैत, काठमाडौं।

आईसीसी ने मंगलवार तक के अपडेट के आधार पर बुधवार को जारी नई रैंकिंग के अनुसार, दीपेन्द्र चौथे से पाँचवें स्थान पर पहुँचे हैं। उनके रेटिंग अंक 239 हो गए हैं। भारत में संपन्न आईसीसी टी-20 विश्व कप के समूह चरण में उनके प्रदर्शन के बाद दीपेन्द्र की रैंकिंग सुधार कर छठे से चौथे स्थान पर आई थी। हाल ही में उन्हें नेपाल के टी-20आई कप्तान के रूप में चुना गया था।

दीपेन्द्र ने टी-20 विश्व कप में नेपाल के लिए सर्वाधिक (169) रन बनाए थे और गेंदबाजी में 2 विकेट हासिल किए थे। इसी प्रदर्शन से उनके रेटिंग अंक में वृद्धि हुई और वह अब तक के सर्वोच्च स्तर (244) तक पहुँच गए थे। नेपाल ने सोमवार और मंगलवार को यूएई के खिलाफ टी-20आई मुकाबले खेले। दीपेन्द्र ने दोनों मैचों में बल्लेबाजी की। पहले मैच में 32 और दूसरे में 23 रन बनाकर नटआउट रहे।

पहले मैच में गेंदबाजी नहीं करने वाले दीपेन्द्र ने दूसरे मैच में 3 ओवर गेंदबाजी करते हुए 16 रन दिए, लेकिन कोई विकेट नहीं लिया। ऑलराउंडर रैंकिंग के शीर्ष स्थान पर जिम्बाबे के सिकन्दर राजा बरकरार हैं। उनके रेटिंग अंक 328 हैं। भारत के हार्दिक पांड्या दूसरे स्थान पर हैं, जिनके रेटिंग अंक 299 हैं। तृतीय स्थान पर पाकिस्तान के सायम अयुब हैं। अजमतुल्लाह ओमरजाई चौथे स्थान पर और वेस्ट इंडीज के रस्टन चेज पाँचवें स्थान पर पहुँच गए हैं। दीपेन्द्र के समान 239 अंक चेज के भी हैं। दोनों खिलाड़ी मिलकर पाँचवें स्थान पर हैं।

सुरक्षा प्रमुखहरू डाकेर प्रधानमन्त्रीले भने- ‘आउँदो शनिबार र आइतबार अतिक्रमित सुकुम्बासी बस्ती खाली गर्नू’

प्रधानमंत्री ने सुरक्षा प्रमुखों को निर्देश दिए- ‘आने वाले शनिवार और रविवार को अतिक्रमित सुकुम्बासी बस्तियाँ खाली करें’

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने आगामी शनिवार और रविवार को अतिक्रमित सुकुम्बासी बस्तियाँ खाली करने के लिए सुरक्षा निकायों के प्रमुखों को निर्देश दिए हैं। आज शाम सभी सुरक्षा निकायों के प्रमुखों के साथ हुई बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि बस्तियाँ हटाने का काम सबसे पहले काठमांडू उपत्यका से शुरू किया जाना चाहिए।

बालेन्द्र ने मेयर रहते हुए भी सुकुम्बासी बस्तियाँ हटाने का प्रयास किया था, लेकिन विरोध के कारण वे सफल नहीं हो सके थे। अब प्रधानमंत्री के रूप में, उन्होंने फिर से सुरक्षा निकायों को अतिक्रमित बस्तियाँ हटाने के निर्देश देते हुए इस कार्य में तत्परता दिखाने का आग्रह किया है।

बीमा कम्पनी के पैसे का शेयर बाजार में दुरुपयोग, पुलिस ने दी गहरी जांच की सिफारिश

नेपाल धितोपत्र बोर्ड ने दीपक भट्ट और उनके समूह द्वारा बीमा कंपनियों के लगभग ४ अरब रुपये के फंड का दुरुपयोग कर शेयर बाजार में सनसनीखेज गतिविधि करने का पता लगाया है। बोर्ड ने भट्ट और अन्य व्यक्तियों पर धितोपत्र सम्बन्धी ऐन २०६३ की धारा ९६ और ९८ के तहत जालसाजी भरे कारोबार करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई के लिए सिफारिश की है। बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, जांच में मिली कमियों को ध्यान में रखते हुए संबंधित एजेंसियों के साथ आवश्यक कार्यवाही की सिफारिश संचालक समिति ने की है। ९ वैशाख, काठमांडू।

नेपाल धितोपत्र बोर्ड की जांच-परख की रिपोर्ट में शेयर बाजार में बीमा कंपनियों के फंड के दुरुपयोग की बातें सामने आई हैं। संपत्ति शुद्धिकरण से जुड़ी जांच के दौरान कारोबारी दीपक भट्ट के शेयर कारोबार विषयक बोर्ड के सुपरविजन विभाग की जांच में यह निष्कर्ष निकला कि भट्ट और उनके समूह ने विभिन्न बीमा कंपनियों के लगभग ४ अरब रुपये के फंड का दुरुपयोग कर शेयर बाजार में भारी हेरफेर की है। बीमा कंपनियाँ पब्लिक लिमिटेड हैं जिनमें आम जनता की भी बड़ी हिस्सेदारी होती है।

भट्ट के समूह ने उन बीमा कंपनियों के फंड का दुरुपयोग किया है जिनमें उनका प्रमुख शेयर हिस्सा है, ऐसा बोर्ड ने पाया। धितोपत्र बोर्ड ने भट्ट से जुड़े नेपाल रीइंश्योरेंस, हिमालयन रीइंश्योरेंस, विभिन्न माइक्रोइंश्योरेंस कंपनियाँ, निवेश कंपनियाँ और व्यापारी परिवारों के शेयर कारोबार की भी जांच की। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि भट्ट निजी और व्यक्तिगत कंपनियों से सस्ते भाव शेयर खरीद कर उनका मूल्य बढ़ाकर विभिन्न बीमा कंपनियों को बेचते थे।

बोर्ड ने इस मामले में संबंधित व्यक्ति और संस्थाओं के खिलाफ जांच के लिए पुलिस प्रधान कार्यालय को सिफारिश की है। इस जांच ने बीमा प्राधिकरण, संपत्ति शुद्धिकरण विभाग और नेपाल पुलिस को आगे की जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने का सुझाव दिया है। शुभी अग्रवाल, जो संपत्ति शुद्धिकरण जांच के दौरन हिरासत में हैं, सुलभ अग्रवाल की पत्नी हैं। सुलभ हिमालयन लाइफ इन्स्योरेन्स कंपनी के अध्यक्ष भी हैं।

सञ्चार मन्त्रालयको आग्रह: अफवाहमा भरोसा गरेर समाचार प्रकाशन/प्रसारण नगर्नुहोस्

समाचार सारांश स्रोत: OK AI द्वारा तयारी, सम्पादकीय समीक्षा। सञ्चार तथा सूचना प्रविधि मन्त्रालयले आधारहीन, मिथ्या र भ्रामक सूचना प्रकाशन नगर्न अनुरोध गरेको छ। त्यस्ता सूचना सामग्रीहरूले आम नागरिकमा भ्रम र गलत मानसिकता फैलाउने उल्लेख मन्त्रालयले गरेको छ। भ्रामक सूचना प्रकाशन गर्ने व्यक्ति वा संस्थालाई कानुन अनुसार कडा कारबाही गरिने जानकारी मन्त्रालयले दिएको छ। ९ वैशाख, काठमाडौं।

सञ्चार तथा सूचना प्रविधि मन्त्रालयले हचुवामा भर गरेर समाचार प्रकाशन/प्रसारण नगर्न आग्रह गरेको छ। बुधबार जारी विज्ञप्तिमा मन्त्रालयले केही समयदेखि विभिन्न अनलाइन मिडिया र सामाजिक सञ्जालमा आधारहीन, मिथ्या र भ्रामक समाचार तथा सूचना प्रसारित भइरहेका विषयमा ध्यानाकर्षण भएको उल्लेख गरेको छ।

‘यस्ता कपोकल्पित सूचना सामग्रीहरूले आम नागरिकहरूमा भ्रम सिर्जना गर्छन् र समाजमा गलत मानसिकता फैलाउँछन्। सरकारले यस प्रकारका भ्रामक सूचना सम्प्रेषणलाई अत्यन्त गम्भीरतापूर्वक लिएको छ,’ विज्ञप्तिमा भनिएको छ, ‘यदि कुनै आधारहीन, मिथ्या वा भ्रामक सूचना प्रकाशन वा प्रसारण गरिएको पाइयो भने, त्यसमा संलग्न व्यक्ति वा संस्थालाई कानुनी रूपमा कडाभन्दा कडा कारबाही गरिने जानकारी गराउँछौं।’

डोनट आकार की खोज ने गणित में नया आयाम जोड़ा

समाचार सारांश गणितज्ञों ने १५० वर्ष पुराने बोनेट नियम को गलत साबित करते हुए दो विभिन्न आकार के डोनट सतहों की खोज की है। प्राविधिक विश्वविद्यालय म्युनिख, बर्लिन और नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी की टीम ने पहली बार ऐसे ठोस उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। इस खोज ने डिफरेंशियल ज्यामिति में दशकों से अनुत्तरित प्रश्न का उत्तर देते हुए भौतिक विज्ञान और इंजीनियरिंग में नए दृष्टिकोण प्रदान किए हैं। ९ वैशाख, काठमाडौं। ज्यामिति के क्षेत्र में १५० वर्ष से मान्यता प्राप्त एक स्थापित नियम को गणितज्ञों ने गलत साबित किया है। प्राविधिक विश्वविद्यालय म्युनिख, बर्लिन और नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दो ऐसे ‘डोनट’ जैसे सतहें (टोरी) खोजी हैं, जिनका स्थानीय मापन पूरी तरह समान होते हुए भी उनकी समग्र आकृति भिन्न है। इससे गणित के क्षेत्र में ‘बोनेट नियम’ की सीमाएँ स्पष्ट हुई हैं। सन् १८६७ में फ्रांसीसी गणितज्ञ पियरे ओसियन बोनेट ने एक सिद्धांत प्रस्तुत किया था जिसके अनुसार किसी सतह के दो मुख्य गुण—‘मेट्रिक’ (दो बिंदुओं के बीच की दूरी) और ‘मीन कर्वेचर’ (सतह की वक्रता)—का हर बिंदु पर पता हो तो सतह की आकृति पूरी तरह निर्धारित की जा सकती है। लेकिन नए शोध ने इस सिद्धांत को हमेशा सत्य नहीं दिखाया है। लंबे समय से गणितज्ञों को इस नियम में कोई न कोई त्रुटि हो सकती थी, इस बात का संदेह था। पिछले अध्ययनों में यह दिखाया गया था कि अनंत सतह या किनारों वाली सतहों पर यह नियम लागू नहीं होता। लेकिन बंद या कॉम्पैक्ट सतहों जैसे डोनट पर इस नियम को मान्य माना जाता था। शोध दल ने पहली बार ऐसा ठोस उदाहरण प्रस्तुत किया है जहाँ दो अलग-अलग आकार के डोनट के ‘मेट्रिक’ और ‘मीन कर्वेचर’ के मान पूरी तरह समान हैं। टीयूएम के प्रोफेसर टिम हॉफमैन कहते हैं, “कई वर्षों के शोध के बाद हमें पहली बार ऐसा उदाहरण मिला है जो दिखाता है कि स्थानीय मापन विश्वव्यापी आकृति का निर्धारण हमेशा नहीं करता।” क्यों है यह खोज महत्वपूर्ण? इस खोज ने डिफरेंशियल ज्यामिति में दशकों से अनसुलझे रहस्य को हल कर दिखाया है। उसने यह स्पष्ट किया कि किसी सतह के हर बिंदु का पूरा विवरण होने के बावजूद उसकी समग्र आकृति एक समान नहीं हो सकती। यह गणितीय मॉडलिंग और टोपोलॉजी में गहरे प्रभाव छोड़ने वाली खोज मानी जा रही है। स्थानीय मापन और समग्र आकृति के बीच की जटिलता भविष्य में भौतिक विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नए दृष्टिकोण और संभावनाएँ उत्पन्न कर सकती है।

विश्व बक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक विजेता चन्द्र को सम्मानित किया गया

काठमांडू महानगरपालिका ने विश्व बक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाले चन्द्रबहादुर थापा मगर को 1 लाख रुपये नकद सहित सम्मानित किया है। चन्द्र ने नवंबर में यूएई के दुबई में आयोजित पुरुष 54 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक प्राप्त किया था। प्रशिक्षक दीपक महर्जन को भी सम्मानित किया गया और इस अवसर पर कार्यवाहक मेयर सुनिता डंगोल ने समारोह में उपस्थित होकर उन्हें सम्मानित किया। 9 वैशाख, काठमांडू। काठमांडू महानगरपालिका ने विश्व बक्सिंग चैंपियनशिप में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने वाले चन्द्रबहादुर थापा मगर को बुधवार को नकद पुरस्कार सहित सम्मानित किया। चन्द्र ने गत नवंबर में यूएई के दुबई में हुए इस चैंपियनशिप के पुरुष 54 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया था। काठमांडू महानगरपालिकाने उन्हें 1 लाख रुपये नकद और सम्मान पत्र से पुरस्कृत किया। चन्द्र ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल स्थान हासिल किया था। नेपाली बॉक्सिंग इतिहास में विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतना यह पहली बार हुआ है। इसी अवसर पर प्रशिक्षक दीपक महर्जन को भी सम्मानित किया गया। उन्हें काठमांडू महानगरपालिका की कार्यवाहक मेयर सुनिता डंगोल, महानगर प्रवक्ता नवीन मानन्धर सहित अन्य ने एक समारोह के दौरान सम्मानित किया।

सीईसी काठमाडौंलाई गौरीशंकर सुपर लिग यू–१७ उपाधि – Online Khabar

सीईसी काठमांडू ने जीता गौरीशंकर सुपर लीग यू–१७ का खिताब

गौरीशंकर सुपर लीग यू–१७ बॉयज़ क्रिकेट प्रतियोगिता का खिताब क्रिकेट एक्सीलेंस सेंटर काठमांडू ने अपने नाम किया है। बुधवार को आयोजित फाइनल में एंजल्स स्पोर्ट्स अकेडमी को ३६ रन से हराते हुए सीईसी ने चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए सीईसी ने २० ओवर में सभी विकेट खोकर १०५ रन बनाए। टीम के दिनेश बोहरा ने १० गेंदों में २ चौकों और ३ छक्कों की मदद से सर्वाधिक २७ रन बनाए। बुद्धिमान विष्ट ने १९ और कप्तान प्रसिद्ध जैशी ने १७ रन का योगदान दिया। एंजल्स के धीरज यादव और प्रह्लाद गौतम ने २-२ विकेट लेकर मुकाबले में वापसी की।

दूसरे पारी में १०६ रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए एंजल्स १८.२ ओवर में ६९ रन बनाकर सिमट गई। विशाल ऐयर ने २१ रन बनाए, लेकिन बाकी बल्लेबाजों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। सीईसी के दिनेश बोहरा ने बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए ४ ओवर में १२ रन खर्च कर ३ विकेट झटके। अनिकेत सिंह ने भी २ विकेट लेकर टीम की मदद की।

फाइनल मैच में क्यान के सचिव पारस खड्का मुख्य अतिथि थे। राखेप सदस्य जगत टमाटा, समाजसेवी केदार खड्का और गौरीशंकर गाउँपालिका की उपाध्यक्ष उमा मगर शेर्पा भी उपस्थित थे। विजेता और उपविजेता टीमों को अतिथियों द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए। एंजल्स के संदीप साउद को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया, जबकि उत्कृष्ट बल्लेबाज का सम्मान जोय थापा और सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज का पुरस्कार साइमन पंत को दिया गया। साउद ने बेहतर प्रदर्शन के लिए बल्लेबाजी पुरस्कार भी प्राप्त किया। उपाधि विजेता सीईसी काठमांडू को ट्रॉफी, मेडल और १ लाख १ हजार रुपए कैश पुरस्कार मिला, जबकि उपविजेता एंजल्स को ४१ हजार रुपए नकद पुरस्कार प्रदान किया गया।