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लेखक: space4knews

इपीजी का नेपाल संयोजक थापाले परराष्ट्र मंत्रालय को दस्तावेजों की चाबी सौंप दी

नेपाल-भारत प्रबुद्ध समूह (इपीजी) के नेपाल की ओर संयोजक डा. भेषबहादुर थापाने रिपोर्ट और दस्तावेज़ों से भरे दराज की चाबी परराष्ट्र मंत्रालय को सौंप दी है। उन्होंने अपनी स्वास्थ्य और उम्र के कारण परराष्ट्र मंत्री और सचिव को चाबी सौंपने का निर्णय लिया। यह रिपोर्ट जो 2016 से 2018 तक अध्ययन कर तैयार की गई है, अभी तक दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों तक पहुंचाई नहीं जा सकी है। 21 जेठ, काठमांडू।

डा. थापाले इपीजी की रिपोर्ट और उससे संबंधित कागजातों को सुरक्षित रखने वाले दराज की चाबी परराष्ट्र मंत्रालय को सौंप दी है। उन्होंने अपनी उम्र और स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए यह जिम्मेदारी परराष्ट्र मंत्री और सचिव को सौंपी है। नेपाल और भारत के बीच समस्याओं और उनके समाधान के लिए दोनों देशों के प्रबुद्ध लोगों ने यह समूह बनाया था।

इपीजी द्वारा 2016 से 2018 तक किए गए अध्ययन की रिपोर्ट दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा देखी जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक इस तक पहुंच संभव नहीं हो सकी है। परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल ने कहा, “भेषबहादुर थापाले अपनी उम्र को कारण बताते हुए दराज की चाबी परराष्ट्र मंत्रालय को सौंप दी है, रिपोर्ट तो हमें देखनी ही नहीं है, यह प्रधानमंत्री स्तर पर देखी जानी चाहिए।”

बजट में प्रसारण लाइन को प्राथमिकता देने का स्वागत, पीपीए को पूरी तरह से खुला करने का आग्रह

स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संगठन नेपाल (इप्पान) ने आगामी आर्थिक वर्ष के बजट में प्रसारण लाइन निर्माण को प्राथमिकता दिए जाने को स्वागतयोग्य बताया है। इप्पान के अध्यक्ष गणेश कार्की ने १८० दिनों के भीतर सभी परियोजनाओं के विद्युत खरीद करार को लागू करने के लिए सरकारी प्रतिबद्धता को कार्यान्वित करने की मांग की है। व्यवसायियों ने विद्युत प्राधिकरण के खंडीकृत ढांचे के कारण निजी क्षेत्र की भुगतान सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा कर्मचारीतंत्र के अवरोध दूर करने हेतु सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। २१ जेठ, काठमाडौं। ऊर्जा क्षेत्र के व्यवसायियों ने सरकार द्वारा प्रस्तावित आगामी आर्थिक वर्ष के बजट का स्वागत किया है। बजट में प्रसारण लाइनों को प्राथमिकता देने को उन्होंने अत्यंत सकारात्मक कदम बताया है। स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संगठन नेपाल (इप्पान) के अध्यक्ष गणेश कार्की ने सरकार के हाल ही प्रस्तुत बजट में ऊर्जा अवसंरचना, विशेषकर प्रसारण लाइन निर्माण को प्राथमिकता देना सकारात्मक एवं स्वागतयोग्य कदम बताया है।

इप्पान द्वारा आयोजित ‘पोस्ट बजट चर्चा’ कार्यक्रम में अध्यक्ष कार्की ने ट्रांसमिशन लाइन की कमी के कारण उत्पादन विद्युत का व्यर्थ होने की समस्या पर प्रकाश डाला और कहा कि इस बजट ने इस समस्या के समाधान की उम्मीद जगाई है। “पूर्व में हमने कई स्थानों पर विद्युत उत्पादन किया लेकिन ट्रांसमिशन लाइन उपलब्ध न होने के कारण विद्युत व्यर्थ हो गई। इस बार सरकार ने अवसंरचना क्षेत्र, खासकर प्रसारण लाइन के लिए अधिक बजट आवंटित किया है, जो अत्यंत स्वागत योग्य है,” कार्की ने कहा। अवसंरचना के बिना विकास संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने इस कदम को सरकार की सकारात्मक पहल माना।

बजट तथा सरकार के १०० बिंदु सुधार कार्यक्रम में १० मेगावाट तक की परियोजनाओं के लिए ‘टेक और पे’ (ऊर्जा लें या भुगतान करें) आधार पर विद्युत खरीद समझौता (पीपीए) की व्यवस्था की गई है, जिसका उन्होंने स्वागत किया और इसे पूरी तरह से खुला करने का आग्रह किया। कार्की ने सभी परियोजनाओं के पीपीए को १८० दिनों के भीतर प्रभावी रूप से लागू करने पर ज़ोर दिया। “पीपीए न होने से लगभग १ खरब रुपये से अधिक निवेश डूबने का जोखिम है, इसलिए सरकार को अपनी प्रतिबद्धता पूरी करनी चाहिए,” उन्होंने कहा।

इप्पान के निवर्तमान अध्यक्ष कृष्ण आचार्य ने सरकार के नीतिगत फैसलों के क्रियान्वयन में कर्मचारीतंत्र की बाधाओं की शिकायत की। उन्होंने बताया कि राजनीतिक नेतृत्व की घोषणाओं और कर्मचारीतंत्र द्वारा तैयार की गई कानूनी भाषा में भिन्नता के कारण निजी क्षेत्र में समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। आचार्य ने कहा कि पिछले राजनीतिक अस्थिरता और संघर्ष के कारण अब देश के विकास में कोई बहाना नहीं बचे हैं। “जनता ने हाल ही में लगभग दो-तिहाई मत देकर सरकार को स्पष्ट मैंडेट दिया है, इसलिए सरकार के पास काम न करने का कोई बहाना नहीं है,” उन्होंने कहा।

पहले ऊर्जा उद्यमियों पर ‘झोला खोलामामा’ लेकर चलने का आरोप लगने के बावजूद अब निजी क्षेत्र देश के विकास का मुख्य चालक बन गया है, यह आचार्य ने बताया। इप्पान के सलाहकार अरुण सुवेदी ने कहा कि किसी भी दल के अर्थमंत्री आएं, निजी क्षेत्र हमेशा उपेक्षित रहता है, जिसका मुख्य कारण प्रणालीगत त्रुटि है। बजट एवं अर्थमंत्री के रोल पर टिप्पणी करते हुए सुवेदी ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवाद उन्मुख’ उल्लेख होने के कारण अर्थमंत्री पूर्णतया उदारवादी और बाजारमुखी बजट नहीं ला पाते।

सरकार स्वयं व्यापार में संलग्न होने के कारण ‘स्वार्थ संघर्ष’ (कन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) उत्पन्न हुआ है, उन्होंने कहा। “सरकार नियामक है या प्रतियोगी? यदि सरकार बिजली उत्पादन और व्यापार करती है और निजी क्षेत्र से भी ऐसा करने को कहती है तो नीतिगत विरोधाभास होगा, ऐसी स्थिति में देश का विकास नहीं हो सकता,” उन्होंने कहा। इप्पान के उपाध्यक्ष आनन्द चौधरी ने कहा कि बजट ऐतिहासिक रूप से बड़ा और ऊर्जा क्षेत्र के कई सकारात्मक पक्षों को समाहित करता है, फिर भी कार्यान्वयन और नीतिगत स्पष्टता में और सुधार आवश्यक है। उन्होंने नेपाल विद्युत प्राधिकरण के उत्पादन, प्रसारण और वितरण को तीन अलग-अलग कंपनियों में बदलने की योजना को ऊर्जा क्षेत्र की दक्षता बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि शुष्क मौसम में प्रतिस्पर्धात्मक बोलियों में स्पष्टता जरूरी है तथा विद्युत प्राधिकरण के खंडीकरण से निजी क्षेत्र के भुगतान सुरक्षा के लिए कदम उठाना आवश्यक है।

पर्यटन भिसामा नेपालमा व्यवसाय गर्दै दुई चिनियाँ नागरिक पक्राउ

२१ जेठ, काठमाडौँ – अध्यागमन विभागले पर्यटक भिसामार्फत नेपालमा व्यवसाय संचालन गरिरहेका दुई चिनियाँ नागरिकलाई पक्राउ गरेको छ। विभागका प्रवक्ता टीकाराम ढकालका अनुसार, ती व्यक्तिहरूलाई बिहीबार पक्राउ गरिएको हो। उनीहरूले पर्यटन भिसाको उद्देश्य विपरीत व्यवसायिक गतिविधि सञ्चालन गर्दै आएका थिए।

प्राप्त विवरणअनुसार, ती व्यक्तिहरू सन् २०२४ मा चीनको तिब्बत हुइदा इन्टरनेसनल ट्रेड र जिजाङ साङ चेन्ग हेल्थ इन्डस्ट्रीका बजार विश्लेषकको रूपमा नेपाल प्रवेश गरेका थिए। दुई वर्षअघि विदेशी लगानीसँगै लिउ जुन विथ रेस्टुरेन्ट स्थापना गर्ने प्रतिबद्धतासहित व्यवसायिक भिसा प्राप्त गरेका थिए। तथापि विभागको भनाइ अनुसार, उनीहरूले त्यो प्रतिबद्धता पूरा नगरेका र पर्यटन भिसामै नै रहेको तथ्य पत्ता लागेको छ।

प्रारम्भिक अनुसन्धानले देखाएको छ कि ती व्यक्तिहरूले गैरकानूनी रूपमा नेपाली नागरिकका नाममा “नेपाल जङ्गनी ट्रेडिङ एन्ड इन्भेस्टमेन्ट” नामक कम्पनी दर्ता गरी चिनियाँ कृषि कम्पनीको नाममा व्यवसाय गरिरहेका छन्। विभागका अनुसार उक्त कम्पनी टिकटकमार्फत प्रचार गर्दै विभिन्न खाद्य सामग्री बिक्री वितरण गर्दै आएको छ। यी व्यक्तिहरूले हिमाली क्षेत्रका स्याउ, ओखर, लसुन, किसमिसलगायत खाद्य सामग्री सस्तो उपलब्ध गराउने भनी प्रचार गरेका भए पनि बजार मूल्यभन्दा बढी मूल्यमा बिक्री गर्दै आएको पाइएको छ।

राजनीतिक दबाव के बीच संसद सचिवालय ने अर्थमंत्री की त्रुटि सुधार पत्र दर्ज किया

अर्थ मंत्रालय ने संसद में पेश किए गए आर्थिक विधेयक में कर दर संशोधन के लिए संसद सचिवालय पर दबाव बनाते हुए त्रुटि सुधार पत्र दर्ज कराया है। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने विधेयक में संशोधन करते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों की सड़क शुल्क, सिनेमा हॉल के आयकर और शिक्षण शुल्क से संबंधित कर दरों में परिवर्तन किया है। बजट से जुड़े विशेषज्ञों ने संसद में प्रस्तुत विधेयक को संसदीय प्रक्रिया के विपरीत सरकार द्वारा अपने अनुकूल संशोधित करने को गंभीर त्रुटि बताया है। २१ जेठ, काठमांडू।

अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने संसद को छलकर आर्थिक विधेयक में मनमानी कर दर संशोधन को वैध बनाने के उद्देश्य से संसद में दर्ता कराए गए ‘त्रुटि सुधार’ पत्र की प्रक्रिया में गंभीर कमी सामने आई है। संसदीय नियम और प्रथानुसार संसद में प्रस्तुत किसी भी विधेयक में संशोधन केवल संसद की पूरी बैठक या समिति के द्वारा ही किया जा सकता है। फिर भी, डॉ. वाग्ले ने आर्थिक विधेयक में किए गए संशोधनों को मंजूरी दिलाने के लिए संसद सचिवालय को त्रुटि सुधार पत्र भेजा है।

संसद सचिवालय के अनुसार अर्थमंत्री द्वारा भेजा गया त्रुटि सुधार पत्र १७ जेठ को प्राप्त हुआ था। लेकिन संसद में पेश विधेयक में संशोधन प्रस्ताव दर्ज नहीं किया जा सकता, इसलिए सचिवालय के कर्मचारियों ने उस पत्र को दर्ज करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद जब मीडिया में खबरें आईं, तब अर्थ मंत्रालय ने मंत्री वाग्ले को उस प्रस्ताव को दर्ज करने के लिए दबाव डालने की जानकारी संसद सचिवालय सूत्रों ने दी है।

पूर्व प्रशासनिक अधिकारी बताते हैं कि यदि अर्थमंत्री को मनमर्जी करने की अनुमति दी गई तो विधेयक का संसद में पेश और पारित होना निरर्थक हो जाएगा। उन्होंने कहा, ‘१५ जेठ को बजट लाकर लागू किए गए कर दरों को बिना वजह बदला नहीं जाना चाहिए।’ आम तौर पर बजट और उससे संबंधित विधेयकों को सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत किए गए स्वरूप में ही पारित किया जाता है और ‘एक-एक शब्द तक’ संशोधन नहीं किया जाता।

सशस्त्र प्रहरी का 7 डीआईजी का तबादला, 7 की पदस्थापन, कौन कहाँ?

समाचार सारांश

  • गृह मन्त्रालय ने सशस्त्र प्रहरी बल के सात नायब महानिरीक्षक (डीआईजी) का तबादला और सात की पदस्थापन किया है।
  • तबादला और पदस्थापन किए गए डीआईजी को विभिन्न बाहिनी, विभाग, ब्यूरो और कॉलेजों में जिम्मेदारी दी गई है।

२१ जेठ, काठमांडू। गृह मन्त्रालय ने सशस्त्र प्रहरी बल के सात नायब महानिरीक्षक (डीआईजी) का तबादला और सात की पदस्थापन की घोषणा की है।

गुरुवार को सशस्त्र प्रहरी बल, प्रधान कार्यालय ने इस संबंध में जानकारी दी।

उसके अनुसार, विष्णुप्रसाद भट्ट, दीपक अधिकारी, कृष्णराज पाठक, दीपेन्द्र शाह, कृष्ण ढकाल, दीपेन्द्र कुँवर और सुरेशकुमार श्रेष्ठ का तबादला किया गया है।

भट्ट को नम्बर २ छिन्नमस्ता बाहिनी मुख्यालय महोत्तरी, अधिकारी को नम्बर ५ विन्ध्यवासिनी मुख्यालय महोत्तरी, पाठक को नम्बर ६ महेश्वरी बाहिनी मुख्यालय सुर्खेत स्थानांतरित किया गया है। शाह को इंटेलिजेंस ब्यूरो, ढकाल को कार्य विभाग, कुँवर को मानवस्रोत विभाग और श्रेष्ठ को सीमा सुरक्षा विभाग में तबादला किया गया है।

दिगविजय सुवेदी को नम्बर ७ वैद्यनाथ बाहिनी मुख्यालय कैलाली, किरण बस्नेत को नम्बर ३ गढ़िमाई बाहिनी मकवानपुर, माधवप्रसाद पौडेल को नम्बर ९ पशुपतिनाथ बाहिनी मुख्यालय काठमांडू, प्रविण कँडेल को नम्बर ४ मुक्तिनाथ बाहिनी मुख्यालय कास्की, राजेश उप्रेती को एपीएफ कमांड तथा स्टाफ कॉलेज, नेत्रबहादुर कार्की को सशस्त्र प्रहरी महानिरीक्षक के सचिवालय और राजेन्द्र खड्काको मानवस्रोत विभाग में पदस्थापन किया गया है।


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‘दुर्गा प्रसाईं और राप्रपा की असंतुष्ट आवाज़ों को जोड़कर नई पार्टी बनाऊंगा’

डा. धवल शमशेर राणाले स्पष्ट रूप से कहा है कि वे कभी राप्रपा में वापस नहीं लौटेंगे। उन्होंने नेतृत्व पर एजेंडा खरीदने का आरोप लगाते हुए कहा, “हिंदू राष्ट्र और राज को केवल वोट पाने के लिए इस्तेमाल किया गया, अब राप्रपा से पार पाना मुश्किल है।” राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) के महामंत्री डा. धवल शमशेर राणाले पार्टी छोड़ने की घोषणा की है। राप्रपा नेतृत्व द्वारा हिंदू राष्ट्र और राजतंत्र के एजेंडे को केवल सत्ता की लालसा के लिए उपयोग करने, निर्धारित समय पर महाधिवेशन न करने और पार्टी के भीतर विषाक्त माहौल बनाने के कारण उन्होंने यह निर्णय लिया है।

पूर्व प्रतिनिधि सभा सदस्य और नेपालगंज के पूर्व मेयर रह चुके राणा शीघ्र ही नई पार्टी खोले जाने की योजना बना रहे हैं। वे दुर्गा प्रसाईं जैसे कार्यकर्ताओं और छोटे दलों को शामिल कर ‘कट्टर राष्ट्रवादी’ पार्टी बनाने का इरादा रखते हैं। उन्होंने कहा, “हमारे मन में जो लक्ष्य और मूल्य आधारित एजेंडा है, वह राप्रपा में पूरा नहीं हो पा रहा है, इसलिए मैंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है।” उनका कहना है कि राप्रपा नेतृत्व अपनी एजेंडा पूरा करने में असमर्थ रहा है और पार्टी में विषाक्तता बढ़ रही है।

राणाले महाधिवेशन न कराए जाने और नेतृत्व परिवर्तन न होने को बड़ी चुनौतियां बताया। उन्होंने कहा, “पिछले उपचुनावों और राष्ट्रीय चुनाव में हमारे लगभग ९७ प्रतिशत उम्मीदवारों ने जमानत गंवा दी है।” राप्रपा के दस्तावेजों में राजतंत्र, हिंदू राष्ट्र और संघीयता को अस्वीकार करने की स्पष्टता होने के बावजूद, उन्होंने कहा, “मैं नई पार्टी बनाकर अपने मूल्य, मान्यताओं और एजेंडे को आगे बढ़ाने का अवसर तलाश रहा हूं।” राणाले राप्रपा छोड़कर १५ दिनों के अंदर नई पार्टी की घोषणा करने की भी जानकारी दी है।

‘दुर्गा प्रसाइँ और राप्रपाकी असंतुष्टों को समेट कर नई पार्टी बनाऊंगा’

समाचार सारांश

  • डा. धवल शमशेर राण ने कहा है कि वे राप्रपा में कभी वापस नहीं लौटेंगे।
  • उनका आरोप है कि नेतृत्व ने एजेंडा बेचा है।
  • वे कहते हैं – हिंदू राष्ट्र और राजा की स्तुति करके केवल वोट मांगे गए, अब राप्रपा से पार पाना संभव नहीं है।

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) के महामंत्री डा. धवल शमशेर राणा ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है।

राप्रपा नेतृत्व पर आरोप है कि उन्होंने हिंदू राष्ट्र और राजतंत्र के एजेंडे को सिर्फ सत्ता के स्वार्थ में इस्तेमाल किया, जरूरी समय पर महाधिवेशन नहीं किया और पार्टी में विषाक्त माहौल बना दिया गया। पूर्व सांसद और नेपालगंज के पूर्व मेयर राणा जल्द ही नई पार्टी बनाने की तैयारी में हैं।

दुर्गा प्रसाईं जैसे कार्यकर्ताओं और छोटे दलों को मिलाकर एक ‘कट्टर राष्ट्रवादी’ पार्टी बनाने की उनकी योजना है। प्रस्तुत है राप्रपा छोड़ने के कारण और आगामी राजनीतिक यात्रा पर डॉ. राणा के साथ विस्तृत बातचीत :

अब आपको राप्रपा का महामंत्री नहीं कहा जा सकता?

जिस दिन मैंने कहा था, उसी दिन से मैंने राप्रपा छोड़ दी है। इसलिए अब मुझे धवल शमशेर कहें।

‘नेता’ कहे जाने की आवश्यकता नहीं थी?

नेता कहने से लोग अच्छा महसूस नहीं करते। नेता खराब नाम अर्जित कर चुके हैं। मुझे धवल दाइ या धवल शमशेर कहें, जो भी ठीक लगे।

राप्रपा छोड़ने का कारण क्या है?

हमें जो लक्ष्य और मूल्यधाराएं थीं, वे राप्रपा में पूरी नहीं हो रही थीं, इसलिए मैंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया। हम सनातन धर्म आधारित हिंदू अधिराज्य, देश के कल्याण और भ्रष्टाचार समाप्ति के उद्देश्य से राजनीति करते थे, लेकिन यह पार्टी इसे पूरा नहीं कर सकती। जनता ने भी प्रमाणित कर दिया है कि अब राप्रपा से पार पाना संभव नहीं।

पिछली उपचुनावों और राष्ट्रीय चुनावों में हमारे लगभग ९७ प्रतिशत उम्मीदवारों की गारंटी जब्त हो गई। महाधिवेशन न करने और नेतृत्व परिवर्तन न होने की स्थिति ने बड़ी चुनौतियां पैदा कीं। ऐसी विषाक्त स्थिति में बने रहना उचित नहीं लगा, इसलिए नई पार्टी बनाने जा रहा हूं।

राप्रपा के दस्तावेज़ में राजतंत्र, हिंदू राष्ट्र और संघीयता से इन्कार स्पष्ट है, आप महामंत्री थे, फिर भी क्या हुआ?

हाँ, मैंने दस्तावेज़ बनाए हैं, सब कुछ उसमें है। लेकिन शब्दों और कर्मों में फर्क है। राप्रपा नेतृत्व अपना एजेंडा पूरा नहीं कर पा रहा। मैंने चार साल बदलाव के लिए संघर्ष किया, जो कठिन समय था। अब ऐसी दूषित स्थिति में समय बर्बाद नहीं करूंगा। नई पार्टी से हमारे मूल्यों और एजेंडे को आगे बढ़ाऊंगा।

चार साल पहले २०७८ के महाधिवेशन में क्या समस्या आई?

कमल थापा को अध्यक्ष पद से हटाने और प्रजातांत्रिक प्रणाली में पार्टी चलाने की कोशिश में मैंने उम्मीदवार बनने का विचार किया। बाद में राजेन्द्र लिङ्देन को आगे किया, लेकिन उन्होंने मेरे सुझावों को नजरअंदाज किया, जिससे टूट बढ़ी।

महाधिवेशन नहीं होगा तो निर्णय क्या रहा?

कार्यसमिति की बैठक में महाधिवेशन करवाने की पहल की, पर नेतृत्व ने अनदेखी की। बहाना बनाकर पार्टी का सफाया हो गया। यही देखकर पार्टी छोड़ने का फैसला लिया।

आप अध्यक्ष बनने की इच्छा रखते थे?

महाधिवेशन न होने की वजह से अध्यक्ष बनने का सपना पूरा नहीं हुआ। महाधिवेशन के बिना अध्यक्ष बनना संभव नहीं, इसलिए बाहर निकलने का निर्णय लिया।

राप्रपा अब एक सीट पर सिमित है, पार्टी टूटने पर क्या होगा?

एक ही सीट मिलने की स्थिति का विश्लेषण नेतृत्व को करना चाहिए। जनता नाराज है क्योंकि पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया।

नेताओं की कार्यशैली जिम्मेदार है या एजेंडा कमजोर पड़ गया?

हमारे काम और व्यवहार जनता की अपेक्षा के विपरीत रहे हैं। हिंदू राष्ट्र और राजा की पूजा करने को कहकर भी व्यवहार में वो नहीं दिखता।

१५ चैत के आसपास आंदोलन में समर्थन न मिलने की पीड़ा?

राजनीति में बहुत समय बीता है। पार्टी का समर्थन न मिलने पर व्यक्तिगत नुकसान हुआ। फिर भी पीड़ा सहकर यह फैसला लिया।

क्या राप्रपा ने बीमारी के बावजूद कार्रवाई की बात सच है?

हाँ, बीमार पड़ने पर भी पद से हटाया गया। मैं देशभर स्थानीय निकायों को सक्रिय कर रहा था, पर पद से हटाए जाने की कार्रवाई हुई।

राप्रपा छोड़कर नई पार्टी कब घोषणा करेंगे?

१५ दिन के भीतर व्यवस्था कर लूंगा। अभी मलमास चल रहा है, उसके बाद नई पार्टी की घोषणा होगी।

कौन-कौन शामिल होंगे?

बहुत से जिलों के कार्यकर्ता और मधेस प्रदेश के छोटे दल बातचीत में हैं। दुर्गा प्रसाईं भी लगभग तयशुदा हैं।

राप्रपा में वापस जाने की संभावना कितनी है?

मैं वापस राप्रपा में नहीं जाऊंगा। वहां कोई संभावना नहीं है।

यह नई पार्टी पुरानी से कैसे भिन्न होगी?

सिद्धांत समान होगा, लेकिन काम करने का तरीका अलग होगा। हम जनता को धोखा नहीं देंगे, सबको साथ लेकर चलेंगे और अनावश्यक कार्रवाई नहीं करेंगे।

नेतृत्व का मूल्यांकन कैसे करेंगे?

मैं भ्रष्टाचार से ऊपर वाला व्यक्ति हूं। १० साल नेपालगंज के मेयर रहते कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा। मैं कुर्सी पकड़कर नहीं बैठता।

सांसदीय नेता/कार्यकर्ता राजेन्द्र लिङ्देन के प्रति क्या कहेंगे, इसका डर नहीं?

ऐसा दिन आए तो मैं खुद पद छोड़ दूंगा। पद की लालसा नहीं है मुझे।

वीडियो/फोटो: शंकर गिरी

करेंट लगने से मछली पकड़ते समय पुरुष की मृत्यु

२१ जेठ, झापा। झापाको अर्जुनधारा क्षेत्रमा बिहीबार दिउँसो करेन्टको प्रयोग गरी माछा मार्ने क्रममा एक पुरुष की मृत्यु हो गई है। अर्जुनधारा नगरपालिका–११ के ४४ वर्षीय सागर नामक डम्बर हस्दा की मौत हुई है, इसकी पुष्टि पुलिस ने की है। जिला प्रहरी कार्यालय के प्रहरी निरीक्षक सुमन बानियाका के अनुसार, वह स्थानीय काली मंदिर के पास हिले नदी में करेन्ट का उपयोग कर मछली मार रहे थे। इसी दौरान करेन्ट लगने से वह बेहोश हो गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को तत्काल सूचित किया। पुलिस घटना स्थल पर पहुंची तो उनकी मृत्यु हो चुकी थी। –रासस

क्यानले भुटानका खेलाडीलाई ‘टाइम आउट’ अपिल गरेकोमा माफी माग्यो

नेपाल क्रिकेट संघ (क्यान) ले भुटानविरुद्धको खेलमा नेपाली खेलाडीहरूले गरेका ‘टाइमआउट’ अपिलको घटनाप्रति माफी मागेको छ। एसीसी प्रिमियर कपमा भुटानका ब्याटर ढिलो मैदान प्रवेश गरेको अवस्थामा नेपाली खेलाडीहरूले अम्पायरसमक्ष टाइमआउटको अपिल गरेका थिए। क्यानका सचिव पारस खड्काले जारी गरेको विज्ञप्तिमा उक्त घटना क्रिकेटको मूल्य र खेलभावनासँग मेल नखाने उल्लेख गरेका छन्। २१ जेठ, काठमाडौं।

क्यानले जारी गरेको विज्ञप्तिमा भनिएको छ कि उक्त घटना क्रिकेट मूल्य र खेलभावनाको अनुरूप छैन। ‘यो आउट क्रिकेटको नियम भित्र भए पनि खेलको भावना नियमभन्दा माथि हुन्छ र सधैं हाम्रो व्यवहारको केन्द्रमा रहनुपर्छ भन्ने हामी स्वीकार गर्छौं,’ क्यान सचिव पारस खड्काले विज्ञप्तिमा उल्लेख गरेका छन्।

क्यानले नेपालको विकासशील क्रिकेट राष्ट्र भएको कारण खेल भावना, पारस्परिक सम्मान र निष्पक्ष खेललाई उच्च प्राथमिकतामा राखेको बताउँदै उक्त घटनाले यी नै मान्यताहरूको उल्लंघन गरेको स्वीकार गरेको छ। विज्ञप्तिमा भनिएको छ, ‘यस घटनाले उत्पन्न गरेको निराशाप्रति हामी दुःख व्यक्त गर्छौं।’ क्यानले भुटान क्रिकेट, सम्बन्धित खेलाडी र सरोकारवालासँग क्षमायाचना गर्दै मैदानभित्र र बाहिर क्रिकेटको भावना र उच्च नैतिक मापदण्ड कायम राख्न प्रतिबद्धता व्यक्त गरेको छ। एसीसी प्रिमियर कप अन्तर्गत आज विहान नेपाल र भुटानबीच भएको खेलमा भुटानले जवाफी ब्याटिङ गर्दा इनिङको पहिलो बलमै विकेट गुमाएपछि वानडाउन ब्याटर आउन केही ढिलो भएको थियो। यस क्रममा नेपाली खेलाडीहरूले अम्पायरलाई प्रश्न गर्दै अपिल गरेका थिए। नियमअनुसार यो स्वीकृत हुनसक्ने भए पनि खेलभावनाको विपरीत हुने पक्षलाई क्यानले स्वीकार गरेको छ।

हिजबुल्लाह ने कहा- इज़राइल और लेबनान के बीच युद्धविराम स्वीकार्य नहीं है

हिजबुल्लाह के नेता नैम कासिम, 21 जेठ, काठमाडौं। लेबनान के सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह ने हाल ही में इज़राइल और लेबनान सरकार के बीच हुए युद्धविराम समझौते को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। अमेरिका के मध्यस्थता में संपन्न युद्धविराम समझौते की सभी शर्तों को नकारते हुए इसे स्वीकार न करने का स्पष्ट संदेश दिया गया है। हिजबुल्लाह के नेता नैम कासिम ने गुरुवार को जारी अपने बयान में दोनों देशों के बीच हुए युद्धविराम वार्ता को ‘बेकार’ और लेबनान के लिए ‘अपमानजनक’ बताया, साथ ही दावा किया कि लेबनान की बहुसंख्यक जनता भी इसे स्वीकार नहीं करेगी।

अमेरिका, इज़राइल और लेबनान ने बुधवार को संयुक्त रूप से एक वक्तव्य जारी कर युद्धविराम की घोषणा की थी। उस घोषणा में कहा गया था कि हिजबुल्लाह द्वारा गोलीबारी बंद करने की स्थिति में ही युद्धविराम लागू होगा। लेकिन, हिजबुल्लाह के नेता कासिम की इस प्रतिक्रिया ने युद्धविराम समझौते के बीच अस्थिरता पैदा कर दी है। उन्होंने कहा, ‘इस युद्धविराम के अनुसार हिजबुल्लाह को गोलीबारी रोकनी होगी और इज़राइली सीमा के निकट दक्षिणी क्षेत्र में अपने लड़ाकों को हटाना होगा। यह आत्मसमर्पण के बराबर है और इज़राइल के उद्देश्य को हासिल करने में मदद करेगा।’

नेपाली चिया निर्यात में भारत द्वारा लगाए गए ‘अदृश्य’ अवरोध: परीक्षण के नाम पर गोदामों में फंसे माल

भारत द्वारा नेपाली चिया आयात पर पुनः शतप्रतिशत परीक्षण नियम लागू किए जाने के बाद लगभग दो लाख किलो चिया सिलिगुड़ी और कोलकाता के गोदामों में फंसी हुई है। भारतीय पक्ष की जटिल परीक्षण प्रक्रिया के कारण पूर्वी सीमा नाका मेची भन्सार से दो सप्ताह से नेपाली चिया निर्यात रोक रखा है। नेपाली चिया उत्पादकों ने भारत स्थित नेपाली दूतावास और सरकार के माध्यम से दीर्घकालीन रूप से गैरभन्सार अवरोध हटाने हेतु कूटनीतिक पहल करने की मांग की है।

२१ जेठ, काठमांडू। नेपाली चिया निर्यात में भारत द्वारा लगातार लगाए जा रहे अवरोधों ने यहाँ के छोटे किसानों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। २१ दिन लंबी नाकाबंदी के बाद ही भारतीय बाजार में पहुँची नेपाली चिया अब भी सिलिगुड़ी, कोलकाता सहित अन्य व्यावसायिक केंद्रों के गोदामों में फंसी हुई है। भारत पहुंची लगभग २०० टन (दो लाख किलो) नेपाली चिया बिक्री के इंतजार में गोदामों में ही पड़ी है, ऐसा व्यापारियों ने बताया है।

भारत द्वारा पुनः नेपाली चिया पर गैरभन्सार अवरोध लगाए जाने से निर्यात प्रभावित हुआ है। इससे पहले १८ वैशाख से लागू इसी प्रकार का नियम होने से २१ दिनों तक चिया निर्यात पूरी तरह बंद रही। बाद में भारत के चिया बोर्ड ने भारतीय बाजार में बिकने वाली चिया के लिए नमूना परीक्षण करने और तीसरे देशों को जाने वाली चिया के लिए पूर्ण परीक्षण करने की सूचना जारी कर निकासी कुछ हद तक सुगम बनाई। इससे नेपाली किसानों को थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन २१ दिन बाद भारतीय टी बोर्ड ने मानक संशोधित कर आंतरिक बाजार और पुनः तीसरे देश को निर्यात की जाने वाली चिया के लिए अलग-अलग परीक्षण नियम लागू किए।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने आधिकारिक स्पष्टीकरण न दिए होने तक आंतरिक खपत के लिए जाने वाली चिया पर टी बोर्ड ने परीक्षण न करने का निर्देश दिया था। परंतु भन्सार कार्यालय और एफएसएसएआई ने जोखिम प्रबंधन प्रणाली के तहत रैंडम नमूना संकलन कर परीक्षण करने का प्रावधान बनाया। टी बोर्ड ने चिया परीक्षण परिणाम की प्रक्रिया भी तेज की थी। अब तक परीक्षण रिपोर्ट कम से कम १५ दिन में आती थी, जिसे ५ दिन के भीतर ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया। लेकिन वर्तमान में भारतीय पक्ष ने फिर से सभी चिया का १००% परीक्षण करने का कठोर नियम लागू किया है, जिससे दूसरी सीजन की चिया भेजने वाले व्यापारी और किसान प्रभावित हुए हैं।

पहाड़ से आई और भारतीय गोदामों में फंसी चिया के नमूना परीक्षण के लिए भेजे गए चिया के नतीजे पिछले एक हफ्ते से नहीं मिले हैं, ऐसा चिया व्यवसायियों ने बताया। नेपाल में वार्षिक २५ हजार टन (२.५ करोड़ किलो) चिया का उत्पादन होता है, जिसमें लगभग ९० प्रतिशत भारत को निर्यात होती है। विशेष रूप से पूर्वी नेपाल के इलाम, झापा, पाँचथर, धनकुटा और तेह्रथुम में उत्पादित अर्थोडॉक्स चिया भारतीय बाजार होते हुए विश्व बाजार में पहुँचती है।

मेची भन्सार से दो सप्ताह से निर्यात अवरुद्ध मेची भन्सार कार्यालय के सूचना अधिकारी ईश्वर कुमार हुमागाईं ने बताया कि लगभग दो सप्ताह से भारत की ओर चिया निर्यात नहीं हो रही है। “पहले बताए थे अवरोध हट गया है, लेकिन अभी तक चिया यहाँ से नहीं गई है,” उन्होंने कहा। उन्होंने बताया कि दो सप्ताह पहले परीक्षण के लिए भेजी गई ८ टन चिया की स्थिति अस्पष्ट है। पूर्वी नेपाल से उत्पादित चिया भारत, भूटान और बांग्लादेश तक भी जाती है, जिनके लिए मुख्य नाका मेची भन्सार ही है। चिया के इसी मार्ग पर रोक लगने से व्यवसायी परेशान हैं।

भारतीय चिया बोर्ड की रणनीति नेपाली चिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की उद्देश्य: उद्योगी श्रेष्ठ चिया उद्योगी उत्तम श्रेष्ठ के अनुसार भारतीय चिया बोर्ड की रणनीति नेपाली चिया पर पूर्ण रोक लगाने तथा बाजार तोड़ने की है। निर्यात खुले जैसे दिखने के बावजूद भारतीय पक्ष चिया को गोदामों तक पहुँचाकर विभिन्न कारणों से रोक रखता है।

तारागाउँ टी स्टेट और सिद्धेश्वर टी स्टेट के संचालक तथा चिया उत्पादक संघ के पूर्व अध्यक्ष श्रेष्ठ के अनुसार नेपाल और भारत के भन्सार से तो ट्रक पास होते हैं, लेकिन ये चियाएं विभिन्न भारतीय शहरों के गोदामों में फंसी हैं। “हमारी चिया सिलिगुड़ी और कोलकाता के गोदामों में फंसी हुई है,” उन्होंने कहा, “भन्सार से तो गुज़री है, पर नमूना परीक्षण के लिए सैंपलिंग की जा रही है।”

उनके अनुसार लगभग १.५ से २ लाख किलो नेपाली अर्थोडॉक्स चिया भारतीय गोदामों में फंसी हुई है। परीक्षण की प्रक्रिया जटिल और महंगी है, रिपोर्ट आने में २२ दिन तक लग जाता है। “एक परीक्षण शुल्क ११ हजार रुपये से ज्यादा है, पुनः परीक्षण के लिए १५ हजार रुपये देने होते हैं। इतना महंगा शुल्क देने के बाद भी परीक्षण पास होने की गारंटी नहीं,” उद्योगी श्रेष्ठ कहते हैं। भारत के अवरोधों से नेपाली चिया के बाजार और गुणवत्ता दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

पहली सीजन की चिया का मूल्य अच्छा होता था, लेकिन गोदाम में २२–२५ दिन फंसने से गुणवत्ता गिरती है और बाजार मूल्य कम हो जाता है, उन्होंने बताया। “पहली बार जाने पर चिया को अच्छा दाम मिलता था, लेकिन अब समय के कारण इसका असर पड़ रहा है। दूसरी सीजन के चिया का उत्पादन शुरू हो चुका है, पर पहली सीजन की चिया का फैसला नहीं हुआ,” उन्होंने जोड़ा।

सरकार और संबंधित निकायों की भूमिका पर उन्होंने सवाल उठाए। वाणिज्य मंत्रालय ने समस्या समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन व्यवहारिक तौर पर कोई सुधार नहीं हुआ। “मंत्रालय से बातचीत में दुख न हो और समस्या न आएं कहा गया था, उसी आधार पर चिया भेजी गई, लेकिन अब गोदाम में रुकी हुई है,” उन्होंने शिकायत की। नेपाल चिया तथा कॉफी विकास बोर्ड से भी कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ, उनका आरोप है। भारत के चिया बोर्ड सक्रिय है, जबकि नेपाल ने वैसा भूमिका नहीं निभाई है। परीक्षण के नाम पर नेपाली चिया को भारतीय बाजार में प्रवेश नहीं देने व साख गिराने की रणनीति के विरुद्ध कूटनीतिक रूप से मजबूत कदम उठाने की जरूरत है, उद्योगी श्रेष्ठ ने कहा।

भन्सार में नहीं गोदाम में शुरू हुई समस्या नेपाल चिया उत्पादक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिवकुमार गुप्ता ने कहा कि भारत ने कानूनी तौर पर भन्सार में रोक नहीं लगाई, लेकिन आयातक के गोदाम में नई जटिलताएं पैदा कर दीं। पहले भन्सार में रोक होती थी, लेकिन इस बार भन्सार पास होने के बाद भारत ने कड़ी कार्रवाई की है। “अभी भन्सार में समस्या नहीं है, लेकिन आयातक के गोदाम से नमूना परीक्षण कर पास कराने के बाद ही चिया बेची जा सकती है।”

उनके अनुसार, इस नए नियम ने भारतीय व्यापारियों को नेपाली चिया खरीदने से हिचकिचाने पर मजबूर कर दिया है। रिपोर्ट न आने तक सामान रोक रखा जाना और निवेश जोखिम के कारण व्यापारी खरीद में संकोच कर रहे हैं। गुप्ता के अनुसार यह ‘अप्रत्यक्ष’ रोकथाम की रणनीति है। “चिया बोर्ड ने नमूना रिपोर्ट न आने तक बेचने न देने का नियम बनाया है, इसलिए व्यापारी जोखिम उठाने से कतराते हैं। कानूनी तौर पर भन्सार में रोक नहीं लगाई जा सकी तो यह तरीका अपनाया गया है।”

चिया व्यवसायियों ने सरकार से कूटनीतिक प्रयास कर नेपाली चिया निर्यात को आसान बनाने की मांग की है। बार-बार भारत द्वारा निर्मित तकनीकी व प्रशासनिक अड़चनों से नेपाली चिया की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। इन अवरोधों को हटाने के लिए निजी क्षेत्र ने भारत के नेपाली दूतावास के माध्यम से कूटनीतिक पहल करने का अनुरोध किया है। यस पार्टी के सभापति रवि लामिछाने भारत भ्रमण पर रहते हुए व्यवसायियों ने चिया निर्यात में आ रही प्रशासनिक एवं तकनीकी समस्याओं को दूर करने की मांग दूतावास के जरिए की है।

म्यानचेस्टर सिटीबाट सर्वाधिक १९ खेलाडी विश्वकपमा, अन्य रोचक तथ्यहरू फिफा विश्वकप २०२६ संग सम्बन्धित

फिफाले सन् २०२६ को विश्वकपका लागि ४८ देशका १,२४८ खेलाडी समावेश गरेको आधिकारिक सूची सार्वजनिक गरेको छ। अर्जेन्टिनाका लियोनेल मेसी, पोर्चुगलका क्रिस्टियानो रोनाल्डो र मेक्सिकोका गुइलेर्मो ओचोआ छैटौं पटक विश्वकप टोलीमा छनोट भएका छन्। यस विश्वकपमा इंग्ल्यान्डका क्लबहरूबाट सबैभन्दा धेरै २०० खेलाडी र म्यानचेस्टर सिटीबाट सर्वाधिक १९ खेलाडीले प्रतिनिधित्व गर्दैछन्। २१ जेठ, काठमाडौं – आगामी जुन ११ देखि संयुक्त राज्य अमेरिका, मेक्सिको र क्यानडामा आयोजना हुन लागेको फिफा विश्वकप २०२६ को लागि सबै सहभागी राष्ट्रको अन्तिम टोली सार्वजनिक भइसकेको छ। फिफाले जुन २ मा ४८ टोलीहरूको आधिकारिक सूची सार्वजनिक गर्यो। प्रत्येक टोलीमा २६ खेलाडी छन् र यस विश्वकपमा कुल १,२४८ खेलाडी प्रतियोगितामा सहभागी हुँदैछन्।

विश्वकपमा सहभागी टोलीको संख्या ३२ बाट बढेर ४८ पुगेपछि खेलाडीहरूको संख्या पनि उल्लेख्य रूपमा बढेको छ। अन्तिम टोली सूची सार्वजनिक भएपछि विश्वकप खेल्न आउने टोलीका केही विशेषताहरू यस प्रकार छन्: इंग्ल्यान्डका क्लबहरूमा खेलिरहेका २०० खेलाडी विश्वकपका विभिन्न टिममा समावेश छन्। त्यस्तै जर्मनीका क्लबबाट १०९, फ्रान्स र स्पेनका क्लबबाट समान रूपमा ८६, इटलीबाट ७१, साउदी अरेबियाबाट ४९, टर्कीयाबाट ४५, अमेरिकाबाट ४२, नेदरल्यान्ड्सबाट ४६, ब्राजिल र पोर्चुगलबाट ३६-३६ खेलाडी रहेका छन्।

स्कटल्यान्डका गोलकिपर क्रेग गोर्डन विश्वकप टोलीमा समावेश सबैभन्दा वृद्ध खेलाडी हुन्। उनले आउटफिल्ड खेलाडीहरू मध्ये सबैभन्दा वृद्ध भएर विश्वकप खेल्ने अवसर पाउनेछन्। इजिप्टका गोलकिपर एसाम अल हाडारीले सन् २०१८ मा ४५ वर्षको उमेरमा विश्वकप खेलेका थिए। ४१ वर्षीय क्रिस्टियानो रोनाल्डो पनि विश्वकप खेल्ने चौथो सबैभन्दा वृद्ध खेलाडी बन्ने क्रममा छन्। २२ खेलाडीले पहिले पनि फिफा विश्वकप जितिसकेका छन् र उनीहरू सन् २०२६ को विश्वकपमा प्रतिस्पर्धा गर्ने टोलीमा छन्।

म्यानचेस्टर सिटीबाट सर्वाधिक १९ खेलाडीलाई विश्वकपका लागि छनोट गरिएको छ। यी खेलाडीहरू अल्जेरिया, बेल्जियम, क्रोएशिया, इजिप्ट, इंग्ल्यान्ड, फ्रान्स, घाना, नेदरल्यान्ड्स, नर्वे, पोर्चुगल, स्पेन र उज्बेकिस्तानका राष्ट्रिय टिमहरूमा छनोट भएका छन्। मेक्सिकोका १७ वर्षीय गिब्लर्टो मोरा यस विश्वकपमा समावेश सबैभन्दा कान्छा खेलाडी हुन्। अर्जेन्टिनाका लियोनेल मेसीले विश्वकपमा हालसम्म सर्वाधिक १३ गोल गर्दै आएका छन् र आगामी विश्वकपमा बढी गोल गर्ने लक्ष्यमा छन्।

म्यानचेस्टर सिटीबाट सर्वाधिक १९ खेलाडी समावेश, अन्य रोचक तथ्यहरू

समाचार सारांश

OK AI द्वारा सिर्जित, संपादकीय समीक्षा अधीन।

  • फिफाले सन् २०२६ को विश्वकपका लागि ४८ देशका १,२४८ खेलाडीहरू समावेश गरेको आधिकारिक सूची सार्वजनिक गरेको छ।
  • अर्जेन्टिनाका लियोनेल मेसी, पोर्चुगलका क्रिस्टियानो रोनाल्डो र मेक्सिकोका गुइलेर्मो ओचोआ छैटौं पटक विश्वकप टोलीमा चयन भएका छन्।
  • यस विश्वकपमा इंग्ल्यान्डका क्लबहरूबाट सबैभन्दा धेरै २०० खेलाडी र म्यानचेस्टर सिटीबाट सर्वाधिक १९ खेलाडीले प्रतिनिधित्व गर्दैछन्।

२१ जेठ, काठमाडौं – आगामी जुन ११ देखि संयुक्त राज्य अमेरिका, मेक्सिको र क्यानडामा आयोजना हुन लागेको फिफा विश्वकप २०२६ का लागि सबै सहभागी राष्ट्रहरूको अन्तिम टोली सार्वजनिक भइसकेको छ।

फिफाले जुन २ मा ४८ टोलीहरूको आधिकारिक सूची सार्वजनिक गर्‍यो। प्रत्येक टोलीमा २६ खेलाडी रहेका छन् र यस विश्वकपमा कुल १,२४८ खेलाडीहरू सहभागी हुँदैछन्।

विश्वकपमा सहभागी टोलीहरूको संख्या ३२ बाट बढेर ४८ पुगेपछि खेलाडीहरूको संख्यामा पनि उल्लेखनीय वृद्धि भएको छ।

अन्तिम टोली सूची सार्वजनिक भएपछिको विश्वकप खेल्न आउने टोलीका केही विशेष तथ्यहरू यसप्रकार छन्:

२००: इंग्ल्यान्डका क्लबहरूमा खेलिरहेका २०० खेलाडी विश्वकपका विभिन्न टोलीहरूमा समावेश छन्। त्यसैगरी जर्मनीका क्लबबाट १०९, फ्रान्स र स्पेनका क्लबबाट समान रूपमा ८६–८६, इटलीबाट ७१, साउदी अरेबिया बाट ४९, टर्कीबाट ४५, अमेरिकाबाट ४२, नेदरल्यान्ड्सबाट ४६, ब्राजिल र पोर्चुगलबाट ३६–३६ खेलाडी रहेका छन्।

४३: स्कटल्यान्डका गोलकिपर क्रेग गोर्डन विश्वकप टोलीमा समावेश सबैभन्दा वृद्ध खेलाडी हुन्। उनी आउटफिल्ड खेलाडीहरू मध्ये सबैभन्दा जेठो हुँदै विश्वकप खेलनेछन्। इजिप्टका गोलकिपर एसाम अल हादारीले २०१८ मा ४५ वर्षको उमेरमा विश्वकप खेलेका थिए। ४१ वर्षीय क्रिस्टियानो रोनाल्डो यस विश्वकपमा खेल्ने चौथो सबैभन्दा वृद्ध खेलाडी बन्ने क्रममा छन्।

२५: कतार र साउदी अरेबियाको टोलीमा घरेलु लिगका सबैभन्दा धेरै, २५–२५ खेलाडी छन्। कतारका लेफ्ट ब्याक हुमन अहमद स्पेनको क्लबमा छन् भने साउदीका साउद अब्दुल्हामिद फ्रान्समा खेल्छन्। केप भर्डे, डायआर कंगो, आइभरी कोस्ट, कुराकाओ, सेनेगल र उरुग्वेका टोलीहरूमा सबै विदेशी लिगका खेलाडी छन्।

२२: २२ खेलाडीले पहिले पनि फिफा विश्वकप जितिसकेका छन् र उनीहरू २०२६ को विश्वकपमा प्रतिस्पर्धा गर्ने टोलीमा छन्। २०२२ मा कतारमा विश्वकप जितेको अर्जेन्टिना टोलीबाट १७ खेलाडी, २०१४ को विश्वकप विजेता जर्मनीबाट मानुएल नोएर लगायत छन्। फ्रान्सलाई दोस्रो पटक च्याम्पियन बनाउने उसमान डेम्बेले, लुकास हर्नान्डेज, एन’गोलो कान्टे र केलियन एमबाप्पे पनि टोलीमा छनोट भएका छन्।

अर्जेन्टिनाका मुख्य प्रशिक्षक लियोनेल स्कालोनीले २०२२ विजेता टोलीका १७ जना खेलाडीहरूलाई थपेका छन्। तीमध्ये थियागो आल्माडा, जुलियन अल्भारेज, रोड्रिगो डे पाउल, एन्जो फर्नान्डेज, एलेक्सिस म्याक एलिस्टर, एमिलियानो मार्टिनेज, लाउटारो मार्टिनेज, लिसान्द्रो मार्टिनेज, लियोनेल मेसी, नाहुएल मोलिना, गोन्जालो मोन्टिएल, निकोलस ओटामेन्डी, एक्सेक्विएल पालासियोस, लिएन्ड्रो परेडेस, क्रिस्टियन रोमेरो, गेरोनिमो रुल्ली र निकोलस टाग्लियाफिको रहेका छन्।

१९: म्यानचेस्टर सिटीबाट सबैभन्दा धेरै १९ खेलाडी विश्वकपका लागि छनोट भएका छन्। यी खेलाडीहरू अल्जेरिया, बेल्जियम, क्रोएशिया, इजिप्ट, इंग्ल्याण्ड, फ्रान्स, घाना, नेदरल्यान्ड्स, नर्वे, पोर्चुगल, स्पेन र उज्बेकिस्तानका राष्ट्रिय टोलीमा छनोट भएका छन्।

त्यस्तै जर्मन क्लव बायर्न म्युनिकबाट १८ खेलाडी, आर्सनल र पिएसजीबाट समान १६, बार्सिलोनाबाट १५, अल हिलाल, एट्लेटिको मड्रिड, क्रिस्टल प्यालेस र म्यानचेस्टर यूनाइटेडबाट प्रत्येक १२ खेलाडी छनोट भएका छन्। बोरुसिया डर्टमन्ड, गालातासारे र लिभरपुलबाट ११–११ खेलाडी छन्।

१७: मेक्सिकोका १७ वर्षीय गिब्लर्टो मोरा यस विश्वकपमा समावेश सबैभन्दा कान्छा खेलाडी हुन्। उनको टोलीका गोलकिपर गुइलेर्मो ओचोआ छैटौं पटक विश्वकप खेल्दैछन्। मोराले यदि यो विश्वकपमा खेले भने उनी कन्काकाफ क्षेत्रबाट विश्वकप खेल्ने सबैभन्दा कान्छा खेलाडी बन्नेछन्।

१३: अर्जेन्टिनाका लियोनेल मेसीले विश्वकपमा अहिलेसम्म सबैभन्दा धेरै १३ गोल गरिसकेका छन् र आगामी विश्वकपमा अझ बढी गोल गर्ने लक्ष्यमा छन्। सबैभन्दा धेरै गोल गर्ने खेलाडी जर्मनीका मिरवस्लाव क्लोज हुन्, जसले १६ गोल गरेका थिए। मेसीसँगै केलियन एमबाप्पेले १२, ह्यारी केन, नेमार र क्रिस्टियानो रोनाल्डोले समान ८–८ गोल गरेका छन्।

६: लियोनल मेसी, गुइलेर्मो ओचोआ र क्रिस्टियानो रोनाल्डोले छैटौं पटक विश्वकप खेल्ने अवसर पाएका छन्। मेसी र रोनाल्डोले पहिले पाँच पटक विश्वकप खेलेका थिए भने ओचोआले तीन संस्करणमा मात्र भाग लिएका थिए।

२.०५: अस्ट्रेलियाका गोलकिपर फ्लोरिन विगेल विश्वकपमा सहभागी सबैभन्दा अग्ला खेलाडी हुन्। उनको उचाइ २.०५ मिटर छ। २०२२ मा नेदरल्यान्ड्सका गोलकिपर आन्द्रेस नोर्पर्ट २.०३ मिटर अग्ला थिए। सन् २०२६ को विश्वकपमा इंग्ल्यान्डका डिफेन्डर डान बर्न र कोलम्बियाका गोलकिपर अल्भारो मोन्टेरो दुवै २.०१ मिटर अग्ला छन्।

१.६०: पनामा टोलीका प्लेयर सेजार यानिस यस विश्वकपमा सबैभन्दा सानो शारीरिक कदका खेलाडी हुन्। उनको उचाइ १.६० मिटर छ। दोस्रो स्थानमा कुराकाओका आक्रमणकारी जेरेमी एन्टोनिस छन्, जसको उचाइ १.६४ मिटर छ।

गौतमबुद्ध विमानस्थल से नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भारतीय पक्ष से अनुरोध

समाचार सारांश

समीक्षा किए गए स्रोतों पर आधारित।

  • भारत के गोरखपुर में सम्पन्न ‘‘भारत–नेपाल आर्थिक सहयोग मंच–२०२६’’ में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
  • कार्यक्रम में गौतमबुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का पूर्ण संचालन और लुम्बिनी के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन संवर्धन में भारतीय निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी आवश्यक बताई गई।
  • नेपाल और भारत के उद्योगपतियों ने भैरहवा में विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) में भारतीय उद्योगों को आकर्षित करने के लिए नीतिगत और व्यावसायिक सहयोग की आवश्यकता जताई।

२१ जेठ, बुटवल। नेपाल और भारत के बीच आर्थिक, व्यापारिक और निवेश सहयोग को और प्रभावी बनाकर साझा समृद्धि का आधार तैयार करने के लिए दोनों देशों के सरकारी और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने जोर दिया है।

गौतमबुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पूर्ण संचालन, सीमा पार क्षेत्र के औद्योगिक विकास और लुम्बिनी के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन संवर्धन में भारत के निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।

गुरुवार को भारत के गोरखपुर में सम्पन्न ‘‘भारत–नेपाल आर्थिक सहयोग मंच–२०२६’’ में शामिल वक्ताओं ने कृषि, पर्यटन, ऊर्जा, बैंकिंग, आधारभूत संरचना, औद्योगिक निवेश और सीमा पार व्यापार को प्राथमिकता में रखकर द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाईयों पर ले जाने की बात कही।

कार्यक्रम में नेपाली निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने गौतमबुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए भारतीय एयरलाइंस कंपनियों और निजी क्षेत्र के सहयोग की आवश्यकता बताई।

हवाई अड्डे के संचालन से लुम्बिनी क्षेत्र के पर्यटन, व्यापार और निवेश संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान होने की उम्मीद व्यक्त की गई।

चर्चा के दौरान भैरहवा में स्थित विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) में भारतीय उद्योगों को आकर्षित करने हेतु नीतिगत और व्यावसायिक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने सीमा पार क्षेत्र के औद्योगिक संभावनाओं का उपयोग करते हुए संयुक्त निवेश और उत्पादन विस्तार पर बल दिया।

लुम्बिनी को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए भारतीय पर्यटन व्यवसायियों और निजी क्षेत्र को अधिक भूमिका निभानी चाहिए, इस बात पर भी वक्ताओं ने जोर दिया। बुद्ध के जन्मस्थान लुम्बिनी को भारतीय बौद्ध पर्यटकों और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के प्रमुख गंतव्य के रूप में संवर्धित करने हेतु संयुक्त अभियान चलाने का सुझाव दिया गया।

भारत में नेपाली दूतावास के सहसचिव तारानाथ अधिकारी ने कहा कि नेपाल और भारत के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए व्यापार, पर्यटन, निवेश और आधारभूत संरचना विकास में सहयोग बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी आर्थिक समृद्धि की मजबूत नींव बन सकती है।

भारत में नेपाली दूतावास के आर्थिक सलाहकार रवींद्रजंग थापा ने कहा कि नेपाल में निवेश, उद्योग, पर्यटन और व्यापार में अपार संभावनाएं हैं, और निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगी।

नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के उपाध्यक्ष कृष्णप्रसाद शर्मा ने बताया कि व्यापार की सुविधा, निवेश-मैत्री वातावरण का सृजन और सीमा पार क्षेत्र के आर्थिक विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नेपाल–भारत आर्थिक संबंधों को वास्तविक और परिणाममुखी बनाने में निजी क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है।

भारत-नेपाल आर्थिक सहयोग मंच के सचिव, उपाध्यक्ष और कार्यक्रम अध्यक्ष कमलेश जैन ने नेपाल-भारत आर्थिक सहयोग के अवसरों, व्यापारिक संबंधों और निजी क्षेत्र की भूमिका के बारे में जानकारी देते हुए दोनों देशों के साझेदारी को और अधिक परिणाममुखी बनाने की आवश्यकता बताई।

भारतीय उद्योगपति अनुकुल भटनागर ने कहा कि नेपाल और भारत के ऐतिहासिक संबंधों को आर्थिक विकास से जोड़ना चाहिए तथा व्यापार, उद्योग, निवेश और वित्तीय सहयोग के विस्तार के माध्यम से दोनों देश पारस्परिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

नेपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स लुम्बिनी प्रदेश के अध्यक्ष टंक पोखरेल ने कहा कि सीमा पार क्षेत्र के व्यापार, पर्यटन और उद्योग संवर्धन के लिए निजी क्षेत्र के बीच सहयोग बढ़ाना आवश्यक है।

नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ लुम्बिनी प्रदेश के अध्यक्ष ठाकुरकुमार श्रेष्ठ ने सीमा पार क्षेत्र के आर्थिक विकास, पर्यटन और औद्योगिक सहयोग के विस्तार पर जोर दिया।

कार्यक्रम में नेपाल और भारत के उद्योगपतियों, व्यवसायियों, बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधियों, वाणिज्य और उद्योग संघ के पदाधिकारियों तथा विशेषज्ञों के बीच गोलमेज़ चर्चा, अंतःक्रिया और अनुभवों के आदान-प्रदान का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों ने गौतमबुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन, लुम्बिनी पर्यटन संवर्धन, विशेष आर्थिक क्षेत्र में निवेश विस्तार, व्यापारिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण, आधारभूत संरचना विकास और निजी क्षेत्र के सहयोग के माध्यम से द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और प्रभावी बनाने का निष्कर्ष निकाला।

एक प्रसिद्ध गायिकालाई लगातार उत्पीड़न गरेको आरोपमा युवक पक्राउ

२१ जेठ, काठमाडौं । एक प्रसिद्ध गायिकालाई विभिन्न माध्यमबाट अनावश्यक पीडा र लगातार उत्पीड़न गरेको आरोपमा प्रहरीले एक युवकलाई पक्राउ गरेको छ। प्रहरीले जनाएको छ कि २२ वर्षीय अजय यादवलाई जिल्ला प्रहरी कार्यालय पर्साको समन्वयमा वीरगञ्जबाट पक्राउ गरिएको हो। यादव बारा जिल्लाको देवताल गाउँपालिका–२ का स्थायी बासिन्दा हुन्। उक्त गायिकाले काठमाडौंमा उनीविरुद्ध उजुरी दर्ता गराएकी थिइन्। उजुरीका आधारमा प्रारम्भिक अनुसन्धानमा यादवले लामो समयदेखि विभिन्न फोन नम्बरबाट ती गायिकालाई पटक–पटक फोन गरेर उत्पीड़न गरिरहेको देखिएको छ। प्रहरीले पक्राउ परिसकेको यादवलाई थप अनुसन्धान र आवश्यक कानुनी प्रक्रिया अघि बढाउन काठमाडौं ल्याउने जनाएको छ। घटनासम्बन्धी थप अनुसन्धान जारी रहेको प्रहरीले बताएको छ।